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मैंने मेरे हाथ को नीचे किया और उनके लिंग को पकड़कर योनि पर रखा। अंकल ने दो धक्का दिए और उनका आधा लिंग मेरी योनि के अंदर चला गया। तब मैंने मेरा हाथ ऊपर लेकर उनकी पीठ पर रख दिया। फिर और दो धक्के के बाद अंकल का पूरा लिंग मेरी योनि में चला गया उसके बाद अंकल ने थोड़ी देर रुक के हिलाना चालू किया।
मैं भी मेरी चूतड़ उठाकर उन्हें पूरा साथ देने लगी। अंकल के बूढ़े शरीर से मैं पूरा आनंद ले रही थी। हम दोनों की सांसों की आवाज से रूम पूँज रहा था।
अंकल अपने होंठों से मेरी गर्दन को चूमते हुये धीरे-धीरे उनकी रफ़्तार बढ़ा रहे थे। मैं भी उन्हें पूरा सहयोद दे रही थी। बीच-बीच में अंकल मेरे होंठों पर चुंबन दे रहे थे। उमर के हिसाब से मुझे अंकल का स्टेमिना अच्छा। लग रहा था।
धीरे-धीरे हम दोनों की सांसें भारी होने लगी, और साथ में हमारी स्पीड भी बढ़ने लगी। और थोड़ी देर बाद मैं और अंकल एक साथ ही झड़ गये।
झड़ते वक़्त अंकल के लिंग से थोड़ा सा ही वीर्य निकला तो अंकल ने मेरे ऊपर से उठते हुये कहा- “ये मेरी उमर का साइड इफेक्ट है...”
अंकल की बात सुनकर मैं मुश्कुराई और बोली- “हरामी बूढे...”
4:00 बजे तक अंकल मुझे बाहों में भरकर लेटे रहे, फिर मुझे पेशाब लगी तो मैं बाथरूम में गई और बाहर निकलकर पलंग पर जाकर सो गई।
7:00 बजे नीरव का फोन आया की चाय नाश्ता लेकर आऊँ?
मैंने मेरे लिए ना कहकर अंकल के लिए लाने को कहा। मैं उठाकर थोड़ा फ्रेश हुई तब तक नीरव आ गया, और उसने अंकल को चाय-नाश्ता दिया। तभी अंकल को उनके बेटे का फोन आया। उसने बताया की थोड़ी ही देर में उसका दोस्त आ जाएगा, अंकल और आंटी की खबर रखने के लिए। नीरव ने मुझे घर जाने को बोला और वो अंकल के बेटे का दोस्त आए तब तक रुकने वाला था।
मैंने अंकल को दोपहर को टिफिन के लिए पूछा तो उन्होंने ना कहा, और यहीं कैंटीन में खा लेंगे ऐसा कहा।
हास्पिटल से निकलते हुये मुझे अंकल ने हसरत भरी नजरों से देखा तो मैं उनके सामने नीरव से नजर चुराकर मादकता से मुश्कुराई। घर पहुँचते ही मैंने बाथ लिया। तब तक नीरव भी आ गया। मैंने हम दोनों के लिए चायनाश्ता बनाया।
चाय पीते हुये नीरव ने बताया- “जो भाई साहब आए हैं वो अच्छे लगते हैं। पर आंटी की तबीयत में कोई शुधार नहीं है...”
तभी मुझे नीरव का, जो कल अचानक चला गया था वो याद आया तो मैंने पूछा- “कल कौन सा काम जरूरी आ गया था जो इतना जल्दी चले गये थे?”
नीरव- “वो जीतू (उनका दोस्त है) की शाप को कल 9:00 बजे 4 लोगों ने आकर लूट लिया, उसका फोन आया था..." नीरव ने कहा।
नीरव के सामने देखते हुये मेरे जेहन में एक विचार आ गया- “उसके बाद कल रात मेरी भी असमत लुट गई, बुलाओ सबको उसकी तरह इकट्ठा करो सबको, कब तक मेरे रूप को नजरअंदाज करते रहोगे। आँखें खोलो और देखो मेरे चारों तरफ सारे मर्द मेरे बदन की प्यास में घूम रहे हैं..”
नीरव- “क्या सोच रही हो, चाय ठंडी हो जाएगी...” नीरव ने मेरी विचारधारा को रोकते हुये कहा।
मैं भी मेरी चूतड़ उठाकर उन्हें पूरा साथ देने लगी। अंकल के बूढ़े शरीर से मैं पूरा आनंद ले रही थी। हम दोनों की सांसों की आवाज से रूम पूँज रहा था।
अंकल अपने होंठों से मेरी गर्दन को चूमते हुये धीरे-धीरे उनकी रफ़्तार बढ़ा रहे थे। मैं भी उन्हें पूरा सहयोद दे रही थी। बीच-बीच में अंकल मेरे होंठों पर चुंबन दे रहे थे। उमर के हिसाब से मुझे अंकल का स्टेमिना अच्छा। लग रहा था।
धीरे-धीरे हम दोनों की सांसें भारी होने लगी, और साथ में हमारी स्पीड भी बढ़ने लगी। और थोड़ी देर बाद मैं और अंकल एक साथ ही झड़ गये।
झड़ते वक़्त अंकल के लिंग से थोड़ा सा ही वीर्य निकला तो अंकल ने मेरे ऊपर से उठते हुये कहा- “ये मेरी उमर का साइड इफेक्ट है...”
अंकल की बात सुनकर मैं मुश्कुराई और बोली- “हरामी बूढे...”
4:00 बजे तक अंकल मुझे बाहों में भरकर लेटे रहे, फिर मुझे पेशाब लगी तो मैं बाथरूम में गई और बाहर निकलकर पलंग पर जाकर सो गई।
7:00 बजे नीरव का फोन आया की चाय नाश्ता लेकर आऊँ?
मैंने मेरे लिए ना कहकर अंकल के लिए लाने को कहा। मैं उठाकर थोड़ा फ्रेश हुई तब तक नीरव आ गया, और उसने अंकल को चाय-नाश्ता दिया। तभी अंकल को उनके बेटे का फोन आया। उसने बताया की थोड़ी ही देर में उसका दोस्त आ जाएगा, अंकल और आंटी की खबर रखने के लिए। नीरव ने मुझे घर जाने को बोला और वो अंकल के बेटे का दोस्त आए तब तक रुकने वाला था।
मैंने अंकल को दोपहर को टिफिन के लिए पूछा तो उन्होंने ना कहा, और यहीं कैंटीन में खा लेंगे ऐसा कहा।
हास्पिटल से निकलते हुये मुझे अंकल ने हसरत भरी नजरों से देखा तो मैं उनके सामने नीरव से नजर चुराकर मादकता से मुश्कुराई। घर पहुँचते ही मैंने बाथ लिया। तब तक नीरव भी आ गया। मैंने हम दोनों के लिए चायनाश्ता बनाया।
चाय पीते हुये नीरव ने बताया- “जो भाई साहब आए हैं वो अच्छे लगते हैं। पर आंटी की तबीयत में कोई शुधार नहीं है...”
तभी मुझे नीरव का, जो कल अचानक चला गया था वो याद आया तो मैंने पूछा- “कल कौन सा काम जरूरी आ गया था जो इतना जल्दी चले गये थे?”
नीरव- “वो जीतू (उनका दोस्त है) की शाप को कल 9:00 बजे 4 लोगों ने आकर लूट लिया, उसका फोन आया था..." नीरव ने कहा।
नीरव के सामने देखते हुये मेरे जेहन में एक विचार आ गया- “उसके बाद कल रात मेरी भी असमत लुट गई, बुलाओ सबको उसकी तरह इकट्ठा करो सबको, कब तक मेरे रूप को नजरअंदाज करते रहोगे। आँखें खोलो और देखो मेरे चारों तरफ सारे मर्द मेरे बदन की प्यास में घूम रहे हैं..”
नीरव- “क्या सोच रही हो, चाय ठंडी हो जाएगी...” नीरव ने मेरी विचारधारा को रोकते हुये कहा।