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Adultery Chudasi (चुदासी )

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मुझे बहुत बुरा लग रहा था इस तरह फिर से अब्दुल से एकांत में मिलने से, मुझे अब्दुल से ज्यादा अपने आप पर ही भरोसा नहीं था। मैं फिर से बहक जाऊँगी यही डर लग रहा था मुझे।।

मेरे पापा के उतरते ही अब्दुल ने मेरी जांघ पर उसका हाथ रख दिया और मैंने एक भी पल गवांए बिना उसका हाथ वहां से हटा दिया।

अब्दुल- “बहुत नखरे बढ़ गये हैं, तेरे. अब्दुल का चेहरा गुस्से से तिलमिला उठा था।

मैं- “प्लीज़... अब्दुल गाड़ी रोको, मैं यहां से आटो में चली जाऊँगी..”

अब्दुल- “मुझे प्यासा छोड़कर जाना है, तेरे को?”

मैं- “मैं वो सब अब नहीं करती, मुझे जाने दो...”

अब्दुल- “वोही पुरानी वाली होटेल ले लूं."

मैं- “मैंने कहा ना अब्दुल, पुरानी बात को भूल जाओ, वो मेरी गलती थी, मैं उसे दोहराना नहीं चाहती...”

अब्दुल- “दोहरा तो चुके हैं हम। तू प्यार से देती है तो ठीक है, नहीं तो?” अब्दुल अपने असली रंग में आ चुका था। उसने फिर से मेरी जांघ पर हाथ रख दिया था और अंगूठे को पीछे की तरफ खींचकर मेरी चूत से साड़ी के ऊपर से छेड़छाड़ करने लगा।

मैं- “मुझे जाने दो अब्दुल..” मैंने अपनी आँखें बंद करते हुये कहा।

जिसे देखकर अब्दुल ने उसका हाथ मेरे पेट पर रख दिया और उसे सहलाने लगा- “साली, तू हमेशा ना कहती है,

लेकिन तू जानती नहीं की तू कितनी गरम है, हाथ लगते ही पिघल जाती है...”

उसकी बात सुनकर मेरी आँखें भर आई की इंसान को उसका पास्ट कभी नहीं छोड़ता, हम जो गलती करते हैं, वो गलतियां हमें जिंदगी भर सताती रहती हैं।

अब्दुल पहले मेरे पेट को फिर साड़ी समेत मेरी चूत को सहलाने लगा। मैं आँखें बंद करके उसे अपनी मनमानी करने दे रही थी। वो समझ रहा था की मैं मजा ले रही हैं। लेकिन मैं उससे छुटकारा पाने की तरकीब सोच रही थी। नीरव को बुलाने को सोचा लेकिन अब्दुल से डर लगा की कहीं वो उसे अपना दुश्मन ना बना दे। समझ में नहीं आ रहा था की क्या करूं? मेरा घर छोड़कर कार बहुत आगे हाइवे पर निकल चुकी थी, होटेल नजदीक ही था। एक ही रास्ता दिमाग में आ रहा था की कार किसी भी तरह यहां रोककर निकल जाऊँ।

मैं- “अया...” मैंने अपने मुँह से मादक सिसकारी निकाली।

जो सुनकर अब्दुल पागल हो गया- “आ गई ना लाइन पर...”

मैं- “हाँ अब्दुल, मुझसे अब रहा नहीं जा रहा, यहीं पर गाड़ी रोक दो...”

मेरी बात सुनकर अब्दुल ने कार रोक दी, सड़कें सुनसान थी और कार पर शीशे ब्लैक कलर के लगाए हुये थे, जिससे बाहर से अंदर का कुछ दिखाई देने वाला नहीं था

अब्दुल- “देख यहां मजा लेने के बाद होटेल तो जरूर जाएंगे...” अब्दुल ने मुझे बाहों में लेते हुये कहा।

मैंने भी उसे अपनी बाहों में ले लिया और पीछे की तरफ कोई ऐसी चीज ढूँढ़ने लगी जो मैं अब्दुल के सिर पर मारकर यहां से भाग सकें, लेकिन ऐसा कुछ नहीं मिला।

अब्दुल- “सीट से नीचे आ जा, मेरा लण्ड बाहर है, चूस उसे...” अब्दुल ने मुझे उससे अलग करते हुये कहा।
 
कोई रास्ता नहीं था, मुझे अपनी करनी का फल भुगतना ही था। मैं थोड़ी नीचे सरकी और अब्दुल का लण्ड हाथों में लिया और मेरा ध्यान बाजू में पड़े पर्स पर गया जिसमें मेरा एच.आई.वी. का नेगेटिव रिपोर्ट था और मेरे दिमाग में एक आइडिया आया।

अब्दुल..” मैंने उसके लण्ड को सहलाते हुये कहा- “मैं भी तुम्हारी बाहों में आना चाहती थी, लेकिन मुझे मालूम नहीं है की एच.आई.वी. पाजिटिव होने के बाद इंसान कहां तक सेक्स कर सकता है। मैंने सुना है की किस तो कर सकते हैं, लेकिन आगे का मालूम नहीं..."

अब्दुल- “क्या? यहां एच.आई.वी. पाजिटिव कौन है?” अब्दुल ने पूछा।

मैंने अपनी आँखों में झूठमूठ के आँसू लाकर कहा- “मैं... मैं एच.आई.वी. पाजिटिव हूँ...”

मेरी बात सुनकर अब्दुल को करेंट लगा हो वैसे उछल पड़ा और मुझे दूर करके जल्दी से अपनी सलवार को ठीक करने लगा।

मैं- “क्या हुवा?” मैं मन ही मन बहुत खुश हो गई, मेरा तीर निशाने पर लग चुका था।

अब्दुल- “तू अब बताती है मुझे..” अब्दुल का मुँह फीका पड़ चुका था, उसे शायद टेन्शन हो गई थी कि उसका क्या होगा?”

मैं- “मुझे भी थोड़े दिन पहले ही मालूम हुवा...”

“कौन से डाक्टर को दिखाया था?”

मैं- “क्यों?”

अब्दुल- “मैं भी उसे दिखा दूं ना...” अब्दुल का चेहरा देखने लायक था, उसे अपनी मौत दिखाई देने लगी थी।

मैं- “मैंने राजकोट दिखाया था, होटेल नहीं जाना अब?” मैंने उसे कार को वापस मोड़ते हुये देखा तो पूछा।

अब्दुल- “तेरे साथ नहीं, किसी के साथ अब नहीं जाऊँगा होटेल, मार देती आज तू मुझे, जिंदा बाम्ब है तू... जिसके लण्ड पे फुटेगी मर जाएगा बेचारा...” उसके बाद पूरे रास्ते में अब्दुल कुछ नहीं बोला।।

कार से उतरते हुये मैंने उससे बिनती की- “मेरे मम्मी-पापा को मत बताना की मुझे एच.आई.वी. है.."

अब्दुल ने मेरी रोती सूरत देखकर मुझे टेन्शन नहीं करने को कहा।
 
कार से उतरते हुये मैंने उससे बिनती की- “मेरे मम्मी-पापा को मत बताना की मुझे एच.आई.वी. है.."

अब्दुल ने मेरी रोती सूरत देखकर मुझे टेन्शन नहीं करने को कहा।

रात के नौ बज चुके थे, मुझे आज नीरव का बेसब्री से इंतेजार था। वो जैसे ही घर में आए मैं उसे बाहों में भींच लेना चाहती थी। तभी बेल बजी, मैं किचन से दौड़ती हुई बाहर आई नीरव के आने की खुशी में। लेकिन दरवाजा खोलते ही मेरा जोश ठंडा पड़ गया। सामने नीरव ही था लेकिन साथ में मेरे मम्मी-पापा भी थे, उनके हाथ में एक बच्चा भी था।

नीरव- “तेरे मम्मी-पापा हमारे साथ रहने आ गये हैं, उन्हें आने को नहीं कहोगी?” नीरव ने कहा।

मैं दरवाजे से हट गई। फिर मैंने बच्चे की तरफ उंगली करके पूछा- “ये?”

नीरव- “ये हमारा बच्चा है...” नीरव ने मम्मी के हाथ से बच्चे को लेकर मुझे देते हुये कहा।

मैं- “हमारा?”

नीरव- “हाँ हमारा। गोद लिया है, तुम्हें सरप्राइज देना था इसलिए नहीं बताया, दो दिन से बात चल रही थी...”

मम्मी ने कहा- “हाँ बेटा... जमाई बाबू बच्चे को लेकर हमारे पास आए और कहा की आप भी हमारे साथ चलो। बहुत ना कहा, सामान पैक नहीं है ये भी कहा, लेकिन नहीं माने। एक ही बात करते रहे की आपकी बेटी आज माँ बनने वाली है, आज से आप हमारे साथ ही रहेंगे...”

कितना प्यार करता है नीरव मुझे, इंसान है की देवता? मैं बच्चे को सीने से लगाकर फूट-फूट के रोने लगी।

आज की रात हमारी सुहागरात थी। काम खतम होते ही जैसे ही मैं रूम में गई।

नीरव ने मुझे बाहों में जकड़ लिया और चुंबनों से नहलाने लगा- “आई लव यू, निशु मेरी जान...” बड़बड़ाते हुये मेरे कपड़े निकालने लगा।

मैं भी उसे पागलों की तरह चूम रही थी। कुछ ही पलों में हम दोनों नग्न हो चुके थे। नीरव ने मुझे उठाकर बेड पर लेटा दिया और मेरी दो टांगों के बीच आ गया। तीन-चार बार नीरव ने उसके लण्ड से मेरी चूत के बाहरी भाग को सहलाया और फिर एक झटका मारा और उसका पूरा लण्ड अंदर। फिर वो थोड़ा ऊपर उठा और फिर धीरे से एक धक्का लगाया। धीरे-धीरे वो उसके लण्ड को अंदर-बाहर करने लगा। पाँच-छे बार वो ऊपर-नीचे हुवा होगा और मैं झड़ गई- “ओह्ह... गोड... ये कैसे हो सकता है? मैं नीरव के पहले कैसे झड़ गई?”

तभी मुझे नीरव से डाक्टर की कही बात याद आई की हम जिससे प्यार ज्यादा करते हैं, और जिसका आकर्षण हमें बहुत ज्यादा होता है उससे सेक्स करते वक़्त हम जल्दी झड़ जाते हैं। नीरव की रफ्तार बढ़ती ही जा रही है, मैं फिर से मस्त होने लगी थी, मेरे मुँह से मादक-मादक सिसकारियां निकल रही थी। कुछ ही पलों में मैं फिर से झड़ गई और इस बार नीरव भी मेरे साथ झड़ गया था।

झड़ते ही मैंने नीरव को अपनी बाहों में भींच लिया- “आई लव यू नीरव...”

THE ENDS
 
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