• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery Nakhara chadhti jawani da (नखरा चढती जवानी दा )

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
update 19

दोपहर के टाइम हरपाल घर आ जाता है। हरपाल के चेहरे पर बहुत खुशी नजर आ रही थी। सुखजीत ये देखकर थोड़ी हैरान हो जाती है, क्योंकी हरपाल आज दोपहर को ही घर आ गया था।

सुखजीत- सरदारजी आज आप दोपहर को कैसे?

हरपाल खुशी में बोला- “हाँ सुखजीत बात ही कुछ ऐसी है, की मैं आज अपने आपको रोक नहीं पाया.."

सुखजीत- ओहो... बात क्या है, जरा मुझे भी तो बताओ। आप अकेले-अकेले खुश हो रहे हो।

हरपाल- “मलकपुर वाले बड़े भाईजी के लड़के का रिश्ता पक्का हो गया है...”

सुखजीत हरपाल की बात सुनकर बहुत खुश हो जाती है और कहती है- “ये तो बहुत खुशी की बात है, कब हुआ वैसे रिश्ता?"

हरपाल- आज ही हुआ है, और अगले हफ्ते शादी भी फिक्स कर दी है। अब हमको कल तक वहां जाना है।

सुखजीत- सरदार जी ये क्या बात कर दी उन्होंने? अब इतनी जल्दी शादी की तैयारी कैसी होगी?

हरपाल- “आज का दिन है हमारे पास सारी तैयारी के लिए। वैसे भी तेरे पास इतने सूट हैं, कोई अच्छा सा डाल के शादी में चल...”

इतने में रीत लंच करने के बाद बाहर आती है और अपने पापा को सत श्री अकाल कहती है। हरपाल रीत को भी खुश खबरी देता है।

रीत भी ये बात सुनकर काफी खुश हो जाती है, और कहती है- “वाउ... हम कल गाँव में जाएगें, बहुत मजा आएगा सच में..."

हरपाल- “हाँ बड़े टाइम बाद आया है खुशी का टाइम हमारे घर में। रीत बेटा तू ऐसा कर, बाजार से सारा समान ले आ जल्दी से...”

हरपाल रीत को पैसे देता है, और रीत ने खुश होकर अपने पापा को थैक्स भी कह दिया। फिर वो भागकर अपने रूम में जाती है और वहां अच्छे से तैयार होने लगती है। फिर हरपाल सुखजीत को सोनू के बारे में पूछता है।

 
सुखजीत- “वो तो अपने दोस्त के साथ बाहर गया हुआ है.."

हरपाल- चल ठीक है, जब वो आएगा तो उसको बता दियो।

सुखजीत- ठीक है जी।

हरपाल- मैं शाम तक घर आ जाऊँगा, आफिस में थोड़ा काम है। मैं अभी खतम करके आता हूँ।

सुखजीत- ठीक है।

हरपाल वहां से अपने आफिस चला जाता है। इतने में शीला भी अपना थैला उठाकर सुखजीत के पास आती है।

सुखजीत- आए शीला तू कहां जा रही है?

शीला- मालेकिन जी मैं सब्जी मंडी जा रही हूँ। वो रात के लिए सब्जी बनानी है ना इसलिए।

सुखजीत- चल ठीक है जल्दी जा, जल्दी वापिस आ।

शीला भी घर से बाहर चली जाती है। अब घर में रीत और सुखजीत रह जाती है। रीत अपने रूम में तैयार हो रही होती है। और सुखजीत ड्राइंग रूम में जाने लगती है। अचानक उसे अपने सामने खड़ा प्यारेलाल मिलता है। सुखजीत उसे देखकर हैरान हो जाती है और बोलती है।

सुखजीत- ओहहहो... प्यारेलाल जी अब आप यहाँ क्या कर रहे हो?

प्यारेलाल- क्या करूँ भाभी अब आपके बिना रहा नहीं जाता मुझसे।

सुखजीत- प्यारेलाल जी आप अभी सुबह ही तो मुझसे मिलकर गये हो।

प्यारेलाल अपना लण्ड मसलते हुए बोला- “सुबह तो कब की निकल गई है। अब तो आपके बिना भाभी एक पल नहीं रहा जाता..” और प्यारेलाल ने सुखजीत की बाजू पकड़ ली और उसे अपनी ओर खींच लिया।

सुखजीत उसके सीने से लग जाती है, और फिर अपने आपको छुड़ाती हुई बोली- “प्यारेलाल जी कोई देख लेगा प्लीज़्ज़... ऐसा ना करो आप..."

प्यारेलाल ने सुखजीत को कसकर अपनी बाहों में भर लिया, और कहा- “भाभी तेरे घर की हालत खराब रहती है। की किस टाइम घर में कोई है या नहीं। अभी घर में कोई भी नहीं है, इसलिए मुझे फुटू बनाने की कोशिश मत कर..” कहकर प्यारेलाल ने और जोर से सुखजीत को अपनी बाहों में भर लिया, और अपने हाथों से उसके दोनों चूतरों को जोर-जोर से मसलने लगा।

सुखजीत अपने चूतरों से प्यारेलाल के हाथ को हटते हुए बोली- “प्यारेलाल आहह... स्स्सीईई प्लीज़्ज़... मत करो.... हाय मैं मर गई...”

 
प्यारेलाल ने सुखजीत को कसकर अपनी बाहों में भर लिया, और कहा- “भाभी तेरे घर की हालत खराब रहती है। की किस टाइम घर में कोई है या नहीं। अभी घर में कोई भी नहीं है, इसलिए मुझे फुटू बनाने की कोशिश मत कर..” कहकर प्यारेलाल ने और जोर से सुखजीत को अपनी बाहों में भर लिया, और अपने हाथों से उसके दोनों चूतरों को जोर-जोर से मसलने लगा।

सुखजीत अपने चूतरों से प्यारेलाल के हाथ को हटते हुए बोली- “प्यारेलाल आहह... स्स्सीईई प्लीज़्ज़... मत करो.... हाय मैं मर गई...”

प्यारेलाल ने सुखजीत को अपनी बाहों में ही घुमा लिया और सुखजीत की कमर अपनी ओर कर ली। फिर प्यारेलाल ने सुखजीत की चुन्नी नीचे जमीन पर गिरा दी। सुखजीत की कसे हुए चूचियां पकड़कर वो जोर-जोर से मसलने लगा और बोला- "आए हाए भाभी... तुझे नहीं पता तेरे अंदर कितनी गर्मी है। सच में साली तू बहुत ही कमाल की चीज है...”

प्यारेलाल जोर-जोर से सुखजीत की चूचियों को सूट के ऊपर से ही जोर-जोर से मसल रहा था। सुखजीत की आँखें मस्ती में बंद हो रही थीं। अब सुखजीत प्यारेलाल के हाथों का मजा लेने लगी थी। सुखजीत बहुत ही ना के बराबर कोशिश कर रही थी, प्यारेलाल के होंठों को अपनी चूचियों से हटाने की।

सुखजीत मस्त होकर बोली- “तूने मुझे पागल कर देना है एक दिन..."

पर प्यारेलाल हटने के मूड में नहीं था। उसने अपनी पैंट की जिप खोली और अपना लण्ड बाहर निकालकर सुखजीत के चूतरों पर रगड़ने लगा। प्यारेलाल का लण्ड सूट के बाहर से ही सुखजीत के चूतरों की बीच की लाइन में फँसा हुआ था, और जोर-जोर से अपने चूतर हिलाकर अपना लण्ड सुखजीत के चूतरों में अंदर-बाहर कर रहा था।

सुखजीत को भी साफ-साफ अपने चूतरों के बीच में लण्ड महसूस हो रहा था। अब वो पागल हो गई थी। फिर प्यारेलाल ने अपना एक हाथ आगे सुखजीत की कमीज के अंदर डाल दिया। अब अपने हाथों से सुखजीत के गोरे चिकने पेट पर अपने हाथ चला रहा था।

सुखजीत की सांसें तेज होने लगी थी। फिर प्यारेलाल ने अपना हाथ अंदर ही उसकी चूचियों पर ले आया। प्यारेलाल ने सुखजीत की ब्रा में से उसकी दोनों चूचियां बाहर निकल ली, और अपने हाथों से सुखजीत की नंगी चूचियां पकड़कर जोर-जोर से मसलने लगा। प्यारेलाल ने आज पहली बार इतनी सेक्सी पंजाबन की इतनी सेक्सी चूचियां अपने हाथों में लिए थे।

सुखजीत की चूत लगातार अपना पानी बाहर निकाल रही थी। सुखजीत की पैंटी पूरी भीग चुकी थी।

* * * * * * * * * *

 
Update _20

प्यारेलाल ने अपना एक हाथ नीचे किया और सुखजीत की सलवार का नाड़ा खोल दिया। सुखजीत ने अपनी सलवार हाथों में पकड़ ली और उसको नीचे जाने से रोकने लगी। सुखजीत को बहुत शर्म आ रही थी, और साथ ही उसे डर भी लग रहा था की कहीं रीत ना आ जाए।

सुखजीत ने मस्ती में कहा- “प्यारेलाल अभी सलवार नहीं खोलनी ऊपर-ऊपर से कर ले जो करना है..."

पर प्यारेलाल ने उसकी बात का जवाब नहीं दिया, और उसके हाथों से सलवार छुड़वा दी और फिर सुखजीत की सलवार नीचे उसके पैरों में आकर गिर गई। प्यारेलाल ने सुखजीत का कमीज किनारे से पकड़कर ऊपर उठा दिया। उसने नीचे देखा की सुखजीत के चूतरों पर अब सिर्फ एक ब्लैक कलर की पैंटी ही है। उसके गोरे-गोरे मोटे चूतड़ देखकर प्यारेलाल के लण्ड की नसें फूलने लगीं।

सुखजीत के बस से अब सब कुछ बाहर हो रहा था, अब वो अंदर की गर्मी से मरने वाली हो रही थी।

प्यारेलाल ने उसको आगे झुकने को कहते हुए बोला- “आहह... भाभी थोड़ी घोड़ी बन जा प्लीज़्ज़... आज तो लण्ड तेरी चूत में डालने का बहुत मन कर रहा है...”

सुखजीत ने वैसा ही किया और अपने दोनों हाथ सोफे पर रखकर वो प्यारेलाल के आगे घोड़ी बन गई। सुखजीत के घोड़ी बनने से प्यारेलाल के आगे उसकी गाण्ड एकदम फुटबाल की तरह गोल हो गई थी। प्यारेलाल ने झट से सुखजीत की पैंटी को पकड़ा और एक ही झटके में पैंटी को उसकी सलवार के पास पहुंचा दिया।

सुखजीत जैसी मस्त पंजाबन को इस हालत में देखकर किसी भी साधु का भी दिमाग खराब हो सकता था। तो प्यारेलाल तो एक सिंपल सा बंदा था, उसका तो सब कुछ खराब होने लगा।

प्यारेलाल ने सुखजीत के दोनों चूतरों को अपने हाथों में अच्छे से पकड़कर अच्छे से मसल दिया। फिर उसने सुखजीत के चूतरों पर किस भी कर ली। आखीरकार, वो अपना लण्ड पूरा बाहर निकालकर हिलाने लगा।

प्यारेलाल का लण्ड एकदम काला और करीब 8” इंच लंबा और 3” इंच मोटा है। फिर प्यारेलाल अपने लण्ड को पकड़कर सुखजीत के चूतरों पर रगड़ने लगा। सुखजीत को जैसे ही अपने नंगे चूतरों पर प्यारेलाल का लण्ड महसूस हुआ, तभी वो एकदम कांप सी उठी। प्यारेलाल अपने लण्ड को देखकर मन में सोच रहा था की अब मेरा काला लण्ड दूध जैसी गोरी पंजाबन की चूत में जाने वाला है, अब उससे और सबर नहीं होता। उसने अपना लण्ड सुखजीत की चूत पर सेट किया और एक जोरदार धक्का मारकर अपना लण्ड सुखजीत की चूत में डाल दिया।

सुखजीत की चूत में लण्ड अंदर जाते ही सुखजीत के मुंह से आह्ह... की आवाज निकली।

प्यारेलाल ने अपना लण्ड बाहर निकालकर एक और धक्का मारने की सोची, तभी उसे सीढ़ियों से आवाज सुनाई दी। रीत अपने रूम से तैयार होकर नीचे मार्केट जाने के लिए आ रही थी।

जैसे ही ये आवाज सुखजीत के कानों में आती है। तभी सुखजीत एकदम से उठाकर सीधी खड़ी हो जाती है। और फिर सुखजीत प्यारेलाल को पीछे की ओर धक्का दे देती है। जिससे प्यारेलाल का लण्ड सुखजीत की चूत में से एक झटके से निकल जाता है। सुखजीत ने एकदम अपनी सलवार और पैंटी ऊपर करी और अपना नाड़ा बाँध लिया। प्यारेलाल भी अपने लण्ड को अंदर डालकर अपनी पैंट की जिप लगा लेता है और वो बाहर जाने लगता है। अब तक रीत सीढ़ियों से उतर चुकी थी।

रीत की नजर ड्राइंग रूम से निकल रहे प्यारेलाल पर पड़ती है। प्यारेलाल के जाने के बाद रीत की नजर सुखजीत पर पड़ती है, जो ड्राइंग रूम में अपनी चूचियों सेट करती हुई बाहर निकल रही थी। ये देखकर रीत को शक हो जाता है।

सुखजीत अपने सामने रीत को खड़ा देख अपनी कमीज को सेट करना बंद कर देती है और बड़े प्यारे से रीत को कहती है- “बेटा हो गई तैयार मार्केट जाने के लिए?"

रीत सोचकर बोली- “हाँ जी मम्मी हो गई.."

सुखजीत- “ठीक है बेटा, फिर आप हो आओ मार्केट..” कहकर सुखजीत चली जाती है।

रीत सुखजीत को अपने आगे चल रही देखती है, की सुखजीत के चूतरों में उसकी कमीज बुरी तरह से फँसी हुई थी। ये देखकर रीत का शक अब और भी पक्का हो जाता है। फिर रीत ज्योति को फोन करती है।

ज्योति- हेलो मेरी जान क्या हाल है तेरे?

रीत- मैं ठीक हूँ, तू ये बता तू फ्री है अभी?

ज्योति- हाँ क्यों कोई काम है?

रीत- हाँ यार मैंने मार्केट जाना है तेरे साथ थोड़ी शापिंग करनी थी।

ज्योति- ठीक है चल पड़ती हूँ, पहले ये बता तूने आंटी पर नजर रखी या नहीं?

रीत- हाँ रखी है, यार आज तो मुझे शक भी हो गया है।

ज्योति- शक... हाए ऐसा क्या कर दिया तेरी मम्मी ने?

रीत- वो मैं तुझे मिलकर बताऊँगी।

ज्योति- “चल ठीक है, जल्दी आ जा प्लीज़्ज़..."

रीत- मैं 10 मिनट में आती हूँ बस।

फिर रीत अपनी अक्टिवा निकालती है और ज्योति के घर की तरफ चल पड़ती है। रास्ते में सब लोग रीत के मोटे-मोटे चूतड़ों देखते हैं, जो रास्ते में उसकी चूचियों की तरह हिल रहे थे। करीब 10 मिनट में ही रीत ज्योति के घर पहुँच जाती है। ज्योति टाप और मिनी शार्टस डालकर रीत के सामने खड़ी होती है।

क्या मजा आता है, लोगों को अपना नंगा जिश्म दिखाने में?"

रीत ज्योति को देखती ही बोली- "हाए रब्बा... पता दिखाने में?"

 
ज्योति अपनी सेक्सी गाण्ड अक्टिवा की सीट पर रखती है और रीत को कहती है- “मेरी जान जब तुझे पता चलेगा ना, तो तू भी नंगी होकर अपने घर से बाहर निकला करेगी.” कहते-कहते ज्योति धीरे-धीरे अपने हाथ रीत के चूतड़ों पर फेरने लगती है।

रीत के जिश्म में इससे करेंट चलने लगता है और वो कहती है- “आहह... स्स्सीई... मैंने कितनी बार तुझे कहा है, की ये सब मेरे साथ तू ना किया कर..."

ज्योति- चल ठीक है, अच्छा ये बता मम्मी का तूने कोई नया सीन देखा या नहीं आज?

रीत अक्टिवा चलते हुए स्टार्ट करती है और दोनों मार्केट की और निकल जाती हैं।

रीत- हाँ यार, अभी घर से निकलने से पहले, जब मैं तैयार होकर नीचे आई तो मैंने देखा की प्यारेलाल अंकल ड्राइंग रूम से बाहर निकल रहे थे, और उनके साथ ही मम्मी भी अपनी कमीज ठीक करते हुए बाहर जा रही थी।

ज्योति- हाँ पक्का आज कुछ ना कुछ हुआ है, उन दोनों के बीच। अच्छा ये बता तेरी मम्मी अपनी कमीज कहां से सेट कर रही थी।

रीत- ऊपर से।

ज्योति- ऊपर कहां जरा खुलकर बता?

रीत- यार वो अपनी चूचियों पर सेट कर रही थी।

ज्योति- हाँ पक्का आज प्यारेलाल ने तेरी मम्मी की चूचियां मसली होंगी।

रीत ये सुनकर गरम होना शुरू हो जाती है, क्योंकी जो कुछ भी ज्योति उसे कह रही थी। वो सब एक फिल्म बनकर उसके दिमाग में चलने लगा था।

ज्योति- अच्छा तूने और क्या देखा?

रीत- जब मम्मी चल रही थी, तो मैंने देखा की मम्मी की कमीज बुरी तरह से उनके चूतरों में फँसी हुई थी।

ज्योति- “आहह... हाँ पक्का आज प्यारेलाल ने अपनी उंगलियां तेरी मम्मी की चूत में डाली होंगी..”

रीत- हाँ यार, अब क्या कह सकते है?

ज्योति- कहीं आज प्यारेलाल ने काम ही तो नहीं कर दिया तेरी मम्मी का?

रीत- नहीं यार, ऐसा नहीं हो सकता।

ज्योति- एक बात तो है की तेरी मम्मी भी पूरी जुगाड़ ही है।

रीत- क्यों जुगाड़ लगती है तुझे मेरी मम्मी?

ज्योति- क्योंकी उनका सामान ही इतना भारी है। तू ही देख तेरी मम्मी के इतनी बड़ी-बड़ी और मोटी-मोटी चूचियां, और नीचे बड़ी और मोटी गाण्ड, ऊपर से उनपर बेगाना हाथ चला हुआ है।

रीत- फिर तो तेरी मम्मी पर भी बेगाना हाथ चला हुआ है, क्योंकी वो भी तो पूरा जुगाड़ ही है।

ज्योति- “मेरी मम्मी तो है ही बहुत बड़ा जुगाड़। कल मैंने देखा उन्हें वो पापा के दोस्त के साथ किसिंग कर रही थी। हाए मैं क्या बताऊँ मुझे कितना मजा आ रहा था। वो दोनों अपनी आँखें बंद करके एक दूसरे के होंठ सारी दुनियां को भुलाकर चूस रहे थे.."

रीत- हाए फिर तूने देखकर क्या किया?

ज्योति- मैंने तो वहीं अपनी जीन्स की जिप खोली और अपनी दो उंगलियां अपनी चूत में डालकर जोर-जोर से अपनी चूत में उंगलियां करके मजे लेने लगी।

रीत- “स्स्सीईई आह्ह...”

फिर वो दोनों मार्केट में आ जाती है। वो दोनों एक कोस्मेटिक की शाप पर जाती हैं। उस दुकान में काफी भीड़ होती है। वो दोनों भीड़ में ही घुस जाती है। भीड़ में ज्योति के दिमाग में एक आइडिया आता है। वो जोर से एक थप्पड़ रीत के चूतरों पर मारती है। फिर अपनी एक उंगली रीत के चूतरों के बीच में डाल देती है।

रीत पहले से ही गरम होती है, ऊपर से जब ज्योति उसके साथ ये हरकत करती है। इससे वो पूरी हिल जाती है। फिर रीत पीछे मुड़कर अपनी आँखें निकालकर ज्योति को देखते हुए कहती है- “ज्योति बाहर निकाल.."

लेकिन ज्योति कहां मानने वाली थी, वो एक बार फिर अपनी उंगली अंदर डाल देती है। इस बार रीत की आँखें बंद हो जाती है और साथ ही उसके मुंह से सिसकारियां निकल जाती हैं। फिर ज्योति उंगली बाहर निकालकर दूसरे चूतर पर अपना हाथ फेरने लगती है।

रीत को भी अब मजा आने लगता है। पर दुकान में इतने सारे लोगों के बीच खड़ी होने की वजह से उसे डर भी लग रहा होता है। फिर रीत ज्योति के हाथ को हटने की कोशिश करती है। पर ज्योति पूरी शरारत के मूड में थी। वो अपनी हरकत से बाज नहीं आती। वो बार-बार रीत के चूतरों से पंगे लेती रहती है। फिर रीत अचानक आगे चली जाती है और वो ज्योति को चिढ़ाने लगती है। ये देखकर ज्योति भी हँसने लगती है, फिर रीत दुकान से सामान लेती है। सामान लेने के बाद वो दोनों घर की तरफ चली जाती हैं।

ज्योति रीत से पूछती है- "रीत क्या बात है, तू इतना सामान क्यों ले रही है? कोई बायफ्रेंड बन गया है क्या?"

रीत- नहीं पागल, चाचाजी के लड़के की शादी है। हम सब कल अपने गाँव जा रहे हैं एक हफ्ते के लिए।

ज्योति- अच्छा चल ठीक है, पर फिर भी अपनी मम्मी पर तू अपनी पूरी नजर रखियो समझी। देखियो कहीं गाँव में कोई तेरी मम्मी को पकड़ ले ना और खेत में लेजाकर उन्हें कोई चोद दे।

रीत- चुप कर तू ऐसा कुछ नहीं होगा।

ज्योति- एक बात बताऊँ... तेरी मम्मी के बारे में बातें करके मुझे बहुत मजा आता है।

रीत- हाँ यार मुझे भी बहुत मजा आता है, पता नहीं क्यों?

ज्योति- क्योंकी तेरी मम्मी पूरी जुगाड़ है एक नंबर की।

रीत- "बस कर ज्योति अब प्लीज़्ज़..”

ज्योति- हाए मैं क्यों बस करूँ।

रीत- क्योंकी ऐसा तू करेगी तो जरूर मैं अक्टिवा मार दूंगी किसी में।

ज्योति- “चल ठीक है, पर तू नजर रखियो अपनी मम्मी पर...” इतने में ज्योति का घर आ जाता है, और रीत उसे उसके घर छोड़कर अपने घर की ओर निकल जाती है।

* * * * * * * * * *

 
कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
कड़ी_21

रीत ज्योति की सेक्सी बातें सुनकर पहले ही गर्म हुई होती है, और जैसे ही रीत घर जाती है तो उसके सामने सुखजीत खड़ी होती है।

सुखजीत रीत को देखकर बोली- “बेटा आ गई शापिंग करके?"

रीत- “हाँ जी मम्मीजी..."

ये कहकर रीत की नजर सुखजीत की चूचियों पर जाती है। रीत को सुबह से पता था, की आज उसकी मम्मी ने ब्रा नहीं डाली है। पर क्यों नहीं डाली ये उसे अभी तक समझ में नहीं आ रहा था। रीत गरम तो पहले से ही थी, इसलिए अब उसके दिमाग पर हवस भी चढ़ गई थी।

रीत फिर अपने हवस से भरे दिमाग में सोचने लगी- “आज कहीं मम्मी ने प्यारेलाल से अपनी चचियां मसलवाने के लिए तो ब्रा नहीं डाली..."

सुखजीत ने रीत को खयालों के खोए देखकर फिर बोला- “क्या बात है बेटा, आज सुबह से तू कुछ सोच रही है?"

रीत- “कुछ नहीं मम्मी, अच्छा अब मैं अपने रूम में जा रही हूँ। मुझे स्टडी भी करनी है, डिस्टर्ब मत करना.."

सुखजीत- ओके बेटा कोई तुझे डिस्टर्ब नहीं करेगा। इतनी देर तेरा लिया हुआ सामान देख लेती हूँ।

रीत जल्दी से अपने रूम में जाती है और अपने रूम का दरवाजा लाक करके सीधे बाथरूम में चली जाती है। बाथरूम के मिरर में रीत अपने आपको देखती है। उसके दोनों गाल लाल हो रखे थे. वो अपने लाल हए गाल को देखकर शर्मा जाती है। फिर वो अपनी सलवार का नाड़ा खोलती है। जैसे ही सलवार का नाड़ा खुलता है, रीत की रेशमी सलवार फिसलकर उसके पैरों में आ

उसकी टांगों में रहने के बाद उसकी सलवार फिसलकर उसके पैरों में आ गई।

रीत अपनी पैंटी के ऊपर से ही अपनी चूत पर हाथ फेरने लगती है। वो मस्त होकर एक लंबी सांस लेती है, और अपनी आँखें बंद कर लेती है। रीत चूत वाली जगह से अपनी उंगली साइड में से अंदर डालती है। फिर वो अपनी चूत का पानी निकालती है, उसकी चूत बुरी तरह से अपना पानी निकाल रही थी।

रीत अपनी चूत को इस हालत में देखकर अपने दिमाग में सोचती है- “स्स्सीईई... हाए रब्बा...

आज मेरी चूत इतनी गीली कैसे हो गई? मैं जैसे ही मम्मी के बारे में बातें करना शुरू करती है, तभी मेरी चूत अपना पानी निकालना शुरू कर देती है। हाए पानी निकले भी क्यों ना, मम्मी हैं ही मेरी इतनी सेक्सी और आज सुबह से उन्होंने ब्रा भी नहीं डाली..”

अपने आपसे ये सब बातें करने से रीत और ज्यादा गर्म हो जाती है। रीत ने अपनी कमीज और ब्रा निकालकर बाथरूम के दरवाजे पर टांग कर पूरी नंगी हो जाती है। फिर वो बाथरूम से ही पूरी नंगी बाहर आ जाती है, और बेड पर आकर लेट जाती है। रीत के जिश्म से पूरी गरमी निकल रही थी। उसके दिमाग में उसकी मम्मी और प्यारेलाल वाला सीन चल रहा था।

रीत ये सब अपने दिमाग में याद करके सोचती है- “हाए आज कैसे अंकल ने मम्मी की चूचियां चूसी होगी?"

फिर रीत अपनी चूचियों पर हाथ फेरने लगती है, और फिर अपनी चूचियों को जोर-जोर से मसलने लगती है। फिर रीत सोचती है- “कैसे प्यारेलाल अंकल ने मेरी मम्मी की चूत को अपने हाथों से मसला होगा?"

रीत अपनी पैंटी को थोड़ा और नीचे कर देती है, और अपनी टाँगें खोलकर अपनी चूत के ऊपर अपने हाथ चलाने लगती है। रीत की आँखें अब मदहोश हो चुकी थीं। ये देखकर ऐसा लग रहा था, अब रीत को सेक्स का नशा चढ़ गया हो। रीत अपनी चूत पर हाथ फेरते हुए अपनी पैंटी को देखकर सोचती है।

रीत मन में- "स्स्सीईई... आह्ह... हाए ये कपड़ा भी मेरे जिश्म पर क्यों है, कोई उतारो इसे...” कहकर रीत अपनी पैंटी को भी अपने जिश्म से उतारकर उसे अलग कर देती है।

अब रीत पूरी नंगी कर बेड पर मचल रही थी। रीत इतनी गर्मी हो जाती है की वो अपनी चूत में उंगलियां डालकर अपनी दोनों टाँगें उठा लेती है। अब रीत जोर-जोर से उंगलियां करती हुई, जोर-जोर से अपनी चूत को जोर-जोर से मसलकर अपनी चूत को लाल कर देती है। वो ये सब करते हुए सोच रही थी, की प्यारेलाल उसकी मम्मी को चोद रहा है, और साथ में उसकी चूत में लण्ड डालकर जोर-जोर से चोद रहा था उसको।

 


रीत ये सोचते-सोचते स्पीड और तेज कर देती है। एकदम अचानक वो अपने हाथ पैर कस लेती है, और उसके मुँह से जोर से सिसकारियां निकलती हैं- “आह्ह... सीईई."

रीत फिर अपनी मम्मी के बारे में सोचते हुए अपनी चूत का पानी निकाल देती है। पानी निकालने के बाद रीत बेड पर नंगी होकर लंबी लेट जाती है। उसकी सांस बहुत तेज चल रही थी। रीत को ऐसे ही लंबी लेते-लेते कब नींद आ जाती है, ये उसको पता भी नहीं चलता।

रात को हरपाल और सोन भी घर आ जाते हैं।

शीला रीत को खाना खाने बुलाने के लिए उनके रूम के बाहर आकर दरवाजे पर नाक नाक करती हुई बोली “मालेकिन जी खाना तैयार हो गया है, खा लीजिए..."

रीत की ये सुनकर आँख खुल जाती है, और उसे तभी याद आता है की वो नंगी ही सो गई थी। रीत जल्दी से खड़ी होती है और अपना टाप और लोवर डालती है और शीला को कहती है- "आती हूँ बस एक मिनट..."

फिर रीत नीचे आ जाती है, सब वहां डाइनिंग टेबल पर बैठकर डिनर करते हैं और बातें करते हैं।

हरपाल- हाँ जी सारी तैयारी हो गई है बेटा?

रीत- “हाँ पापाजी हो गई..” और रीत सोनू की तरफ देखकर बोली- “तेरी हो गई?"

सोनू ये सुनते ही अपना सड़ा हुआ सा मुँह बनाकर नीचे देखने लगता है।

रीत- इसे क्या हो गया अब?

हरपाल- ये हमारे साथ नहीं जा रहा है, इसलिए गुस्सा हुआ बैठा है।

सुखजीत- पेपर आने वाले हैं इसके, इसलिए ये घर बैठकर ही स्टडी करेगा आराम से।

रीत सोनू की तरफ देखकर उसे चिढ़ाते हुए बोली- "बड़ा मजा आएगा सच में गाँव में जाने में..."

सोनू- “चुप हो जा बंदरिया। डैडी इसे चुप करा लो, कहीं इसकी सारी हँसी मैं यहीं पर निकाल दूँ.."

रीत हँसने लगती जाती है, और फिर वो डिनर करने लगती है। थोड़ी देर में डिनर करने के बाद सब सोने के लिए चले जाते हैं।

अगली सुबह सुखजीत हरपाल और रीत 8:00 बजे घर से गाँव की ओर निकल जाते हैं। पीछे घर में शीला और सोनू ही रह जाते हैं। उनके जाने के बाद ही सोनू शीला को देखता है, और उसका हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचता है।

शीला सीधा सोनू के सीने पर आकर लगती है। शीला समझ जाती है, की अब सोनू उसकी ठुकाई करने के मूड में है। पर फिर भी शीला नाटक करते हुए बोली- “नहीं साहब जी नहीं, ये आप क्या कर रहे हो?”

सोनू शीला को अपनी बाहों में भरकर बोला- “कह तो ऐसी रही है, जैसे कभी मुझसे चुदी ही नहीं हो?” और शीला की चुन्नी उतारकर नीचे फेंक देता और फिर वो उसके कुर्ते के ऊपर से उसकी चूचियां मसलने लगता है।

शीला मचलते हुए सोनू से बोली- “अया साहब जी मैं तो इसलिए कह रही हूँ, क्योंकी अभी तक आपने मुझे पैसे नहीं दिए...”

सोनू शीला की दोनों चूचियां कस के मसलकर बोलता है- “साली आज मैं तेरी पूरी पेमेंट करूँगा, तू फिकर ना कर..” कहते ही सोनू शीला के सारे कपड़े निकालकर उसे पूरी नंगी कर देता है, और उसे सोफे पर लंबा लेटा देता है। सोनू आज वाइल्ड सेक्स करने के मूड में होता है।

सोनू अपनी पैंट खोलता है, और अपना लण्ड निकालकर सीधा शीला की चूत में डाल देता है। सोनू शीला को काफी देर तक चोदता है, उसके बाद शीला नहाने के लिए चली जाती है, और सोन आराम से सोफे पर ही लेट जाता है।

* * * * * * * * * *
 
बहुत बहुत धन्यवाद आप सब का
 
कड़ी_22

दूसरी तरफ हरपाल, रीत और सुखजीत गाँव में पहुँच जाते हैं। गाँव में आते ही हरपाल की पुरानी यादें ताजी हो जाती हैं। हरपाल अपने बचपन की मस्तियां याद करता है। हरपाल दिल से बहुत खुश होता है, और साथ ही रीत भी बहुत खुश होती है। क्योंकी जब वो आखिरी बार गाँव आई थी, तब वो सिर्फ 4 साल की बच्ची थी।

उधर सुखजीत की तो खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था, क्योंकी बिटू भी इसी गाँव में रहता था। बिटू वो ही है, जो हरपाल का बहुत अच्छा दोस्त है। और बिटू ने ही उस रात सुखजीत की चूत की आग शांत करी थी घर पर।

हरपाल अपने बड़े भाई बलविंदर के घर पहुँच जाता है। घर बहुत अच्छे से किसी महल की तरह से सजाया हुआ था। घर बहुत ही बड़ा था, जैसे किसी हवेली में 20 कमरे होते हैं। वैसे ही इस घर में थे। हरपाल सुखजीत और रीत तीनों कार में से उतर जाते हैं, और वो तीनों फिर घर के अंदर चले जाते हैं।

अंदर वो देखते है, की पूरे जोर-शोर से तैयारी चल रही थी। अंदर बलविंदर और उसकी वाइफ चरणजीत खड़ी होती हैं। चरणजीत की उमर 48 साल थी, पर पूरे गाँव में उसके चर्चे थे। जैसे ही बलविंदर हरपाल को देखता है,

वो एकदम खश हो जाता है। फिर बलविंदर हरपाल के गले लग कर बोला।

बलविंदर- वेलकम मोस्ट वेलकम छोट भाई।

हरपाल- बधाई हो बड़े भाई।

बलविंदर- तुझे भी भाई।

सुखजीत भी चरणजीत को गले मिलती है और उसे बधाई देती है। फिर बलविंदर की नजर रीत पर पड़ती है।

और रीत बलविंदर को सत श्री अकाल कहती है। रीत को देखकर बलविंदर हैरान रह जाता है और हरपाल को बोलता है।

बलविंदर- भाई ये रीत ही है ना, कितनी बड़ी हो गई है। अब तो ये पहचान में ही नहीं आती।

रीत हँसने लगती है और मस्ती करते हुए बोलती है- “पहचान में कैसे आऊँगी ताया जी, जब पिछली बार आई थी। तब मैं सिर्फ 4 साल की थी.:

रीत को देखकर चरणजीत भी सुखजीत को कहती है- “सुखजीत, तेरी बेटी तो बहुत जवान और सुंदर निकली है। इसे कहीं मेरी नजर ना लग जाए बस..."

इतने में एक ऊंची लंबी जवान, 26 साल की मस्त पंजाबन हरपाल की तरफ भागकर उस तरफ आती है। हरपाल की नजर उसपर पड़ती है। उसकी मोटी-मोटी चूचियां उसकी कमीज से बाहर उछलकर दर्शन दे रही थीं, और उसके मोटे-मोटे चूतड़ बार-बार कमीज का पल्ला हटाकर अपने दर्शन करवा रहे थे।

हरपाल तो उसे ही देखता रह जाता है। वो मस्त जवान लड़की भागकर हरपाल की तरफ आती है और वो आते ही हरपाल के गले लगती है और हँसते हुए बोलती है- “सत श्री अकाल चाचाजी.."

उसकी मोटी-मोटी चूचियां हरपाल की छाती से चिपक जाती हैं, और हरपाल के नीचे हलचल मचनी शुरू हो जाती है। वो लड़की हरपाल से अलग हो जाती है और हरपाल से बोलती है- “क्या बात है चाचाजी आपने मुझे पहचाना नहीं?"

उस लड़की के मुँह से चाचा सुनकर हरपाल समझ जाता है, की ये पिंकी है बलविंदर की लड़की उसकी अपनी भतीजी। पिंकी दिखने में बहुत सुंदर थी, पर उसका रंग थोड़ा सा सांवला था। पर वो ऊँची लंबी और मस्त जिश्म वाली मस्त पंजाबन थी, उसकी चर्चा पूरे गाँव में थी। अभी-अभी उसने +2 क्लास के एग्जाम दिए हुए थे, इसलिए वो अभी फ्री होती है। पिंकी हरपाल को देखती है और उसका ध्यान हटाते हुए बोलती है।

 
Back
Top