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पिंकी- क्या हुआ चाचाजी अब आप कहां खो गये हो?
हरपाल का ध्यान टूट जाता है और बोलता है- “सत श्री अकाल बेटा जी, कसम से आप तो पहचान में ही नहीं
आए। बड़े हो गये हो ना इसलिए..."
पिंकी- चाचाजी आप बहुत खराब हो, इतने टाइम बाद मिले और आपने पहचाना भी नहीं। देखना पापा चाचाजी तो शहर में जाकर शहरी हो गये हैं..” पिंकी ये बात सुनते ही सब हँसने लगे।
पिंकी को देखकर सुखजीत चरणजीत को बोली- “बहनजी बेटी तो आपकी भी पूरी जवान और सुंदर निकली है."
चरणजीत स्माइल पास कर देती है। फिर पिंकी रीत को मिलती है और कहती है- “हेलो रीत क्या हाल हैं तेरे?
रीत- ठीक है पिंकी तू सुना अपनी, आज बहुत टाइम बाद मिले हैं हम दोनों।
पिंकी- हाँ रीत तू बहुत सुंदर हो गई है शहर जाकर।
रीत शर्माते हुए बोली- तू कौन सा कम है मुझसे पिंकी।
पिंकी- आ जा तुझे मैं गाँव घुमाकर लाती हूँ।
चरणजीत- ओहह... बेटा अभी रीत सफर से आई है, वो थक गई होगी। उसे थोड़ी देर आराम तो करने दे।
रीत- नहीं बड़ी मम्मी मैं जरा भी नहीं थकी, बल्कि यहाँ आकर तो मेरे अंदर एक उर्जा आ गई घूमने के लिए।
चरणजीत रीत की ये बात सुनकर हँसने लगती है और पिंकी बोली- “चल चलते है यार..."
फिर रीत और पिंकी दोनों बाहर चली जाती हैं। बाकी सब अंदर जान लगते हैं, घर के अंदर बहुत रौनक लगी हुई थी। गाँव के सारे लोग आए हुए बातें कर रहे थे, और नौकर काम करने में लगे हुए थे। जब सुखजीत अंदर जा रही थी, तो सबकी आँखें सुखजीत पर ही जमी हुई थी। क्योंकी सुखजीत शहर से एक बहुत सेक्सी पंजाबन थी।
उसका रंग रूप और सूट डालने का स्टाइल गाँव की औरतों से एकदम अलग था।
उधर बिटू अपने दोस्तों के साथ बैठकर मजे में चाय पे रहा था। उसकी आँखें सुखजीत की आँखों से मिल जाती हैं। सुखजीत उसको देखकर स्माइल करने वाली होती है, पर अपनी स्माइल को अपने दांतों में ही दबाकर वो आगे निकल जाती है। सुखजीत फिर अपने स्टाइल में अपने दोनों चूतर मस्त तरीके से मटकाकर एक बार पीछे बिटू को देखती है, और फिर वो उसे एक सेक्सी स्माइल करके आगे निकल जाती है।
बिटू के साथ उसका एक दोस्त बैठा हुआ था, जिसका नाम मीता, गाँव के बंदों में से एक था, जो 50 साल का कुँवारा था। उसकी गंदी नजर गाँव की हर औरत पर होती है। उसे शराब और अफीम का बहुत शौक था। उसने गाँव की काफी औरतों को चोद भी दिया था, और आजकल वो चरणजीत के पीछे पड़ा हुआ था।
मीता- भाई ये शहर से आई पंजाबन तो मलाई जैसी है।
बिटू- ओये मीते ये मलाई भी तेरे भाई ने खाई हुई है।
मीता- हाए आए सही बता कैसे खाई तूने ये मलाई?
बिटू- मैंने ये मलाई इसके घर जाकर ही खाई थी।
मीता- “बिटू भाई तू सच में कमाल है, इतनी कमाल की पुंजबान को भी तूने छोड़ी नहीं है। वैसे मेरा भी कोई जुगाड़ कर ना प्लीज़्ज़..”
बिटू- मेरे भाई तू फिकर ना कर, मैं अपना भी जुगाड़ करूँगा और तेरा भी। तू बस थोड़ा सा इंतेजार कर।
मीता- “यार तू सच में कमाल का बंदा है...” फिर वो दोनों हँसने लगते हैं।
दूसरी तरफ रीत और पिंकी दोनों मस्त पटोले गाँव में घूम रहे थे। सुखजीत जैसे रीत भी गाँव के सारे लड़कों की आँखों में आ गई। कुछ तो रीत पहले से ही इतनी सुंदर थी और ऊपर से उसने जीन्स टाप डाल ली थी, जिसमें उसकी चूचियां और दोनों चूतर अच्छे से हिल रहे थे जब वो चल रही थी। अब तक पूरे गाँव के लड़कों को पता चल गया था, की शहर से रीत नाम की मस्त शहरी पंजाबन गाँव में आई है। अब सारे लड़के एक से बढ़कर एक हिकमत रीत को पटाने के लिए लगाने लगे।
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हरपाल का ध्यान टूट जाता है और बोलता है- “सत श्री अकाल बेटा जी, कसम से आप तो पहचान में ही नहीं
आए। बड़े हो गये हो ना इसलिए..."
पिंकी- चाचाजी आप बहुत खराब हो, इतने टाइम बाद मिले और आपने पहचाना भी नहीं। देखना पापा चाचाजी तो शहर में जाकर शहरी हो गये हैं..” पिंकी ये बात सुनते ही सब हँसने लगे।
पिंकी को देखकर सुखजीत चरणजीत को बोली- “बहनजी बेटी तो आपकी भी पूरी जवान और सुंदर निकली है."
चरणजीत स्माइल पास कर देती है। फिर पिंकी रीत को मिलती है और कहती है- “हेलो रीत क्या हाल हैं तेरे?
रीत- ठीक है पिंकी तू सुना अपनी, आज बहुत टाइम बाद मिले हैं हम दोनों।
पिंकी- हाँ रीत तू बहुत सुंदर हो गई है शहर जाकर।
रीत शर्माते हुए बोली- तू कौन सा कम है मुझसे पिंकी।
पिंकी- आ जा तुझे मैं गाँव घुमाकर लाती हूँ।
चरणजीत- ओहह... बेटा अभी रीत सफर से आई है, वो थक गई होगी। उसे थोड़ी देर आराम तो करने दे।
रीत- नहीं बड़ी मम्मी मैं जरा भी नहीं थकी, बल्कि यहाँ आकर तो मेरे अंदर एक उर्जा आ गई घूमने के लिए।
चरणजीत रीत की ये बात सुनकर हँसने लगती है और पिंकी बोली- “चल चलते है यार..."
फिर रीत और पिंकी दोनों बाहर चली जाती हैं। बाकी सब अंदर जान लगते हैं, घर के अंदर बहुत रौनक लगी हुई थी। गाँव के सारे लोग आए हुए बातें कर रहे थे, और नौकर काम करने में लगे हुए थे। जब सुखजीत अंदर जा रही थी, तो सबकी आँखें सुखजीत पर ही जमी हुई थी। क्योंकी सुखजीत शहर से एक बहुत सेक्सी पंजाबन थी।
उसका रंग रूप और सूट डालने का स्टाइल गाँव की औरतों से एकदम अलग था।
उधर बिटू अपने दोस्तों के साथ बैठकर मजे में चाय पे रहा था। उसकी आँखें सुखजीत की आँखों से मिल जाती हैं। सुखजीत उसको देखकर स्माइल करने वाली होती है, पर अपनी स्माइल को अपने दांतों में ही दबाकर वो आगे निकल जाती है। सुखजीत फिर अपने स्टाइल में अपने दोनों चूतर मस्त तरीके से मटकाकर एक बार पीछे बिटू को देखती है, और फिर वो उसे एक सेक्सी स्माइल करके आगे निकल जाती है।
बिटू के साथ उसका एक दोस्त बैठा हुआ था, जिसका नाम मीता, गाँव के बंदों में से एक था, जो 50 साल का कुँवारा था। उसकी गंदी नजर गाँव की हर औरत पर होती है। उसे शराब और अफीम का बहुत शौक था। उसने गाँव की काफी औरतों को चोद भी दिया था, और आजकल वो चरणजीत के पीछे पड़ा हुआ था।
मीता- भाई ये शहर से आई पंजाबन तो मलाई जैसी है।
बिटू- ओये मीते ये मलाई भी तेरे भाई ने खाई हुई है।
मीता- हाए आए सही बता कैसे खाई तूने ये मलाई?
बिटू- मैंने ये मलाई इसके घर जाकर ही खाई थी।
मीता- “बिटू भाई तू सच में कमाल है, इतनी कमाल की पुंजबान को भी तूने छोड़ी नहीं है। वैसे मेरा भी कोई जुगाड़ कर ना प्लीज़्ज़..”
बिटू- मेरे भाई तू फिकर ना कर, मैं अपना भी जुगाड़ करूँगा और तेरा भी। तू बस थोड़ा सा इंतेजार कर।
मीता- “यार तू सच में कमाल का बंदा है...” फिर वो दोनों हँसने लगते हैं।
दूसरी तरफ रीत और पिंकी दोनों मस्त पटोले गाँव में घूम रहे थे। सुखजीत जैसे रीत भी गाँव के सारे लड़कों की आँखों में आ गई। कुछ तो रीत पहले से ही इतनी सुंदर थी और ऊपर से उसने जीन्स टाप डाल ली थी, जिसमें उसकी चूचियां और दोनों चूतर अच्छे से हिल रहे थे जब वो चल रही थी। अब तक पूरे गाँव के लड़कों को पता चल गया था, की शहर से रीत नाम की मस्त शहरी पंजाबन गाँव में आई है। अब सारे लड़के एक से बढ़कर एक हिकमत रीत को पटाने के लिए लगाने लगे।
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