कड़ी_27
मीता बड़े ध्यान से चरणजीत को देख रहा था, और सबसे चोरी-चोरी अपनी धोती में अपना हाथ डालकर अपना लण्ड मसल रहा था। इतने में रिश्तेदार हरपाल और बलविंदर को खींचकर नाचने के लिए लेकर जाते हैं, और उसके साथ बिटू और मीता भी साथ में घुस जाते हैं।
अब वहां काफी ज्यादा भीड़ हो जाती है। डी.जे. के आगे सुखजीत पहले से ही अपनी गाण्ड मटका-मटकाकर नाच रही थी। जब वो वहां बिटू को देखती है, तो उसको और ज्यादा जोश आ जाता है। बिटू हरपाल के पीछे नाच रहा था, और सुखजीत हरपाल के सामने नाच रही थी। पर सुखजीत के ठुमके और उसकी आँखों के इशारे सिर्फ बिटू के लिए थे।
इतने पिंकी भी नाचते हुए हरपाल के पास आ जाती है। हरपाल का सारा ध्यान पिंकी की तरफ चला जाता है,
और फिर वो दोनों साइड में चले जाते हैं।
अब सुखजीत बिटू के सामने आ जाती है। सुखजीत अपनी सेक्सी नजरों से देखते हुए, बिटू के सामने अपनी गाण्ड को हिलाती है। फिर वो बिटू की तरफ अपनी गाण्ड कर देती है, और वो भीड़ का फायदा उठाकर जानबूझ कर नाचते हुए पीछे जाती है, और अपने दोनों चूतर बिटू के लण्ड पर मारती है।
सुखजीत के चूतर जैसे ही बिटू के लण्ड पर लगते हैं, तभी बिटू का लण्ड खड़ा हो जाता है। बिटू से अब और बर्दाश्त नहीं हुआ, और वो नाचते हुए सुखजीत के एकदम पास चला जाता है, और मोका देखकर अपना एक हाथ उसके पल्ले के अंदर डालकर उसके चूतरों को मसल देता है। डान्स करते-करते ही सुखजीत की आँखें बंद हो जाती हैं।
दूसरी तरफ मीता चरणजीत के आगे-पीछे नाच रहा था। मीता मोके का फायदा उठाकर बार-बार चरणजीत के चूतरों पर हाथ लगा रहा था। पर चरणजीत डान्स में इतनी मस्त थी, की उसे इस बात का पता तक नहीं चला।
हरपाल को शराब का पूरा नशा हो गया था, और वो पिंकी के साथ डान्स कर रहा था। नशे में हरपाल को पिंकी बहुत ही सेक्सी लग रही थी। नाचते हुए पिंकी की दोनों चूचियां जोर-जोर से हिल रही थीं। जिस पर हरपाल की नजर बार-बार जा रही थी। हरपाल सोच रहा था, की ये वो ही चूचियां हैं, जो मेरे छाती पर लगी थीं, जब ये मुझसे मिली थी। हरपाल के मन में पिंकी के लिए गलत बातें आ रही थी।
उधर बिटू सुखजीत को नाचते हुए अपने हाथ उसके जिश्म पर फेरकर उसे गरम कर देता है। फिर बिटू
सुखजीत के कान में कुछ बोलता है- “भाभी यहाँ से नजरें बचाकर सीधा मेरे घर आ जा, बाकी का गिधा वहीं पर करेगे..” कहकर बिटू वहां से चला जाता है।
सुखजीत अब पूरी गरम हो चुकी थी, उसकी चूत अब सिर्फ और सिर्फ लण्ड माँग रही थी। वो इधर-उधर देखती है, तो सारे डान्स करने में मस्त होते हैं। फिर सुखजीत सबसे नजरें बचाकर वहां से बाहर आ जाती है। सुखजीत गेट से बाहर जाने लगती है।
तभी एक औरत जो उसे जानती थी वो उसे मिल जाती है और कहती है- “क्या हुआ बहन कहां जा रहे हो?"
सुखजीत- “ओह्ह... बहनजी बाथरूम आया है, जोर से बस वो ही करने जा रही हूँ..."
औरत- "ठीक है बहनजी..” कहकर फिर वो चली जाती है, और सुखजीत गेट से बाहर आ जाती है। पूरी गली शादी वाले घर में आई हुई थी, इसलिए सारा रास्ता एकदम सुनसान हो रखा था।
बिटू का घर पास में ही था। बिटू सुखजीत को देखकर काफी खुश हो जाता है, और उसे घर के अंदर आने का इशारा करता है। बिटू के घर में कोई नहीं होता, क्योंकी सारी लेडीस संगीत में गये हुए थे। सुखजीत दबे पैरों से घर के अंदर चली जाती है। सुखजीत के अंदर आते ही बिटू अंदर से कुण्डी लगा देता है। और वो वहीं दीवार से सुखजीत को लगाकर उसके होंठों को चूसने लगता है।
सुखजीत भी पूरी गरम होती है, इसलिए वो भी बिटू का पूरा साथ दे रही थी। बिटू सुखजीत के होंठों को चूसते हुए, सुखजीत की चुन्नी को खींचकर नीचे जमीन पर गिरा देता है। फिर बिटू सुखजीत की चूचियों को मसलने लगता है और साथ ही बोलता है- "भाभी आज तो तू मेरे ऊपर दारू के नशे की तरह चढ़ी हई है। कसम से आज तो मैं तेरी चीखें निकाल दूँगा
सुखजीत बोली- "आए हाए मेरे जालिम आशिक... अभी तक पिछली बार के जख्म नहीं भरे हैं, धीरे-धीरे करियो आहह..."
बिटू चूचियों को जोर से मसलकर बोला- “भाभी तू वो नहीं है, जिसकी आराम से मारने में मजा है। तू तो वो
बला है, जिसकी जितनी कसकर मारो उतना ही मजा आता है..."
सुखजीत- “आहह...आहह...”
बिटू अपने हाथ सुखजीत की चूचियों से हटाकर उसके दोनों चूतरों पर लगा देता है। और उसके दोनों चूतरों को
जोर-जोर से मसलने लगता है।
सुखजीत- “आहह... आहह... भाईजी आराम से करो..."