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Adultery Nakhara chadhti jawani da (नखरा चढती जवानी दा )

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कड़ी_30

अगली सुबह रीत की आँख 6:00 बजे उसके फोन पर आए एस.एम.एस. की आवाज के साथ खुलती है। वो देखती है की एक अंजान नम्बर से उसे एक मेसेज आया है। जिसमें लिखा था की गुड मार्निंग सोनयो।

रीत सोचती है की क्या पता किसका नंबर है। इसलिए वो कौन लिख कर रिप्लाइ करती है।

कुछ देर में रिप्लाइ आता है- “वो ही जो आपको बिना देखे नहीं रह सकता.."

रीत- ऐसे मेरा सुबह-सुबह दिमाग ना खराब करो, साफ-साफ बताओ कौन हो?

रिप्लाइ- मैं रणबीर का दोस्त मलिक हूँ।

मलिक का नाम पढ़ते ही रीत के चेहरे पर स्माइल आ जाती है और वो रिप्लाइ करती है- “अच्छा अच्छा सीधा सीधा नहीं बता सकते थे, इतना घुमाने की क्या जरूरत थी?"

मलिक- "मैं तो बस चेक कर रहा था, की तू गुस्से में ज्यादा अच्छी लगती है या वैसे ही इतनी सुंदर है..."

रीत- सुबह-सुबह कोई काम नहीं है क्या, जो मुझे मेसेज कर रहे हो?

मलिक- रीत जी अब तो सबसे पहला काम आप ही हो। क्या करें अब?

रीत- लगता है आपने कुछ ज्यादा ही पी ली है, तभी ऐसी बातें कर रहे हो।

मलिक- रीत जी वैसे पिलाई तो मुझे मेरे यार ने थी, पर कल चढ़ी आपको देखकर ही। वैसे सच में आप कल बहुत सुंदर लग रहे थे।

रीत- हाहाहाहा... बैंक्स पर मुझे देखकर कैसे चढ़ गई आपको, मैं कोई शराब थोड़ी हूँ।

मलिक- शराब से ज्यादा नशा है आप में।

रीत- हाँ हाँ बस करो अब।

मलिक- मिलने का दिल करता है आपसे।

रीत- अच्छा जी क्यों?

मलिक- बस दो बातें करनी है और दो बातें सुननी है।

रीत- हाँ, पर मैं ऐसे नहीं मिलती किसी को समझ में आई।

मलिक- अच्छा जी... फिर बताओ कैसे मिलते हो आप, मैं वैसे ही मिल लूँगा।

रीत- कभी भी नहीं।

 
रहे थे।

रीत- हाहाहाहा... बैंक्स पर मुझे देखकर कैसे चढ़ गई आपको, मैं कोई शराब थोड़ी हूँ।

मलिक- शराब से ज्यादा नशा है आप में।

रीत- हाँ हाँ बस करो अब।

मलिक- मिलने का दिल करता है आपसे।

रीत- अच्छा जी क्यों?

मलिक- बस दो बातें करनी है और दो बातें सुननी है।

रीत- हाँ, पर मैं ऐसे नहीं मिलती किसी को समझ में आई।

मलिक- अच्छा जी... फिर बताओ कैसे मिलते हो आप, मैं वैसे ही मिल लूँगा।

रीत- कभी भी नहीं।

मलिक- मिलकर तो रहँगा मैं, चाहे अब जो मर्जी हो जाए।

रीत- ठीक है, फिर देखते हैं। ‘

रीत मलिक को चलेंज देती है की वो आज जैसे मर्जी उससे मिलकर दिखाये। फिर रीत उठकर नहाने चली जाती

पर सुखजीत अभी भी आराम से सोई हुई थी। रात की चुदाई के बाद उसे बहुत अच्छी नींद आई थी। आज तो सुखजीत के चेहरे पर रौनक ही एक अलग थी। सुखजीत को लग रहा था की अभी उसकी जवानी बाकी है। क्योंकी अब वो उस हाथों में आ गई थी, जो हर बार उसकी तसल्ली करा देता था। सुखजीत आराम से लेटी हुई थी। तभी उसके रूम में चरणजीत आ जाती है, और सुखजीत को सोते हए देखकर बोली। ‘

चरणजीत- “लगता है बहनजी को रात को ज्यादा थकावट हो गई है। रात को थोड़ा कम नाच लेते.."

सुखजीत चरणजीत की आवाज सुनकर उठ जाती है और अपने मन में ही उसे जवाब देती हुई बोली- “मुझे तो रात बिटू ने नचाया था, उसने ही ये थकावट करी है.."

फिर वो होश में आकर बोली- “बहनजी रात काम करके और नाचकर थोड़ी थकावट हो गई थी."

चरणजीत- चलो कोई बात नहीं, कल सगुन लेना है, तो आपके पास आज का टाइम है, अगर कुछ मार्केट से लेना है तो ले आओ।

सुखजीत- ठीक है बहनजी।

चरणजीत ये कहकर वहां से चली जाती है, और सुखजीत अब उठ जाती है। चरणजीत बाहर जाती है और उसको बाहर आँगन में मीता मिल जाता है। मीता ने सुबह ही भूखी खा ली थी, वो चरणजीत को देखकर बोला।

मीता- "मैंने कहा भाभी सत श्री अकाल..."

चरणजीत हँसते हुए बोली- “क्या बात है, आज सुबह ही नशा कर लिया..”

मीता- क्या करूँ भाभी शादी की खुशी ही है मुझे इतनी।

चरणजीत- “अच्छा जी, देख लियो कहीं खुशी-खुशी में कुछ उल्टा सीधा ना कर लियो तू..” और चरणजीत आज पहली बार मीते से डबल मीनिंग बातें करती है।

मीता चरणजीत की बात झट से समझ जाता है और फिर वो बोल- “भाभी उल्टा सीधा क्या होना, तू कौन सा मुझे कुछ करने देती है.."

चरणजीत हैरान होकर अपने मुँह पर हाथ रखकर बोली- “हाए ओये रब्बा... कैसी बातें कर रहा है तू, ओये तुझे कोई और नहीं मिला ऐसी बातें करने के लिए?”

मीता- भाभी कुँवारों की तो जात ही बुरी है। और वैसे गाँव में तुझसे सुंदर और है भी कौन?

चरणजीत ये बात सुनकर नजरें नीचे करके बोली- “मुझे जाने दे किचेन में मुझे बहुत काम है.."

चरणजीत मीता की साइड में से निकलकर किचेन में चली जाती है। सुबह का टाइम होता है, और किचेन में कोई नहीं होता। मीता चरणजीत के हिलते मोटे चूतरों को देखकर उसके पीछे ही लग जाता है। चरणजीत किचेन में जाती है और मीता पीछे से आकर उसे अपनी बाहों में भर लेता है।

मीते के हाथ चरणजीत के पेट पर होते है। चरणजीत एकदम हैरान रह जाती है, और वो पीछे मुड़कर देखने की कोशिश करती है। पर वो मुड़ नहीं पाती, क्योंकी मीते ने उसको कसकर पकड़ा हुआ था। चरणजीत समझ जाती है की और कोई नहीं मीता है। चरणजीत अपने आपको उससे छुड़ाते हुए बोली।

चरणजीत- “ओये कंजर ये क्या कर रहा है तू? छोड़ मुझे जल्दी, वर्ना मैं शोर मचा दूंगी.."

मीता पीछे से अपना लण्ड चरणजीत के चूतरों में दबाकर बोला- “क्या करूँ भाभी? जब तुझे गाण्ड मटकाते हुए चलती हो तो कसम से मुझसे रहा नहीं जाता। और मैंने सुना है तेरा पति सरदार तुझे हाथ तक नहीं लगाता..."

चरणजीत मीते के हाथ हटाने की कोशिश करते हुए बोली- “ओये कंजर छोड़ मुझे, और तुझे क्या पता मेरे और सरदार के बीच का, अगर वो आ गया ना तो तुझे यहीं पर गोली मार देगा..."

मीता लण्ड चरणजीत के चूतरों के बीच दबाते हुए बोला- “वो सरदार से क्या डरना, और उसने मुझे कल खुद कहा था की वो तुझे हाथ तक नहीं लगाता..."

चरणजीत ये सुनकर थोड़ी ढीली हो जाती है, क्योंकी मीता की ये बात 90% सच ही होती है- “मुझे छोड़ जालिम... कोई अपनी भाभी के साथ ये सब करता है भला। अगर किसी ने देख लिया तो वो क्या समझेगा छोड़ मुझे अब..."

मीता सलवार के ऊपर ही धक्के मारते हुए बोला- “आहह... भाभी तू वो चीज नहीं है, जिसे हाथ में लेकर छोड़ दिया जाए। आए हाए भाभी तेरी चूचियां कितनी मस्त हैं..” और हाथ चूचियों पर लेजाकर कमीज के ऊपर से मसल देता है।

चरणजीत चूचियां मसलते ही गरम हो जाती है, और वो थोड़ी शांत हो जाती है। फिर वो बोली- “ओये मीते अब छोड़ दे मुझे, किचेन में ये सब करना अच्छा नहीं लगता..."

मीता चूचियों को मसलकर बोला- "भाभी आज तू पहली बार मेरे हाथों में आई है। आज मुझे रोक मत... मुझे अपने मन की करने दे...”

 
कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
मलिक- मिलकर तो रहँगा मैं, चाहे अब जो मर्जी हो जाए।

रीत- ठीक है, फिर देखते हैं। ‘

रीत मलिक को चलेंज देती है की वो आज जैसे मर्जी उससे मिलकर दिखाये। फिर रीत उठकर नहाने चली जाती

पर सुखजीत अभी भी आराम से सोई हुई थी। रात की चुदाई के बाद उसे बहुत अच्छी नींद आई थी। आज तो सुखजीत के चेहरे पर रौनक ही एक अलग थी। सुखजीत को लग रहा था की अभी उसकी जवानी बाकी है। क्योंकी अब वो उस हाथों में आ गई थी, जो हर बार उसकी तसल्ली करा देता था। सुखजीत आराम से लेटी हुई थी। तभी उसके रूम में चरणजीत आ जाती है, और सुखजीत को सोते हए देखकर बोली। ‘

चरणजीत- “लगता है बहनजी को रात को ज्यादा थकावट हो गई है। रात को थोड़ा कम नाच लेते.."

सुखजीत चरणजीत की आवाज सुनकर उठ जाती है और अपने मन में ही उसे जवाब देती हुई बोली- “मुझे तो रात बिटू ने नचाया था, उसने ही ये थकावट करी है.."

फिर वो होश में आकर बोली- “बहनजी रात काम करके और नाचकर थोड़ी थकावट हो गई थी."

चरणजीत- चलो कोई बात नहीं, कल सगुन लेना है, तो आपके पास आज का टाइम है, अगर कुछ मार्केट से लेना है तो ले आओ।

सुखजीत- ठीक है बहनजी।

चरणजीत ये कहकर वहां से चली जाती है, और सुखजीत अब उठ जाती है। चरणजीत बाहर जाती है और उसको बाहर आँगन में मीता मिल जाता है। मीता ने सुबह ही भूखी खा ली थी, वो चरणजीत को देखकर बोला।

मीता- "मैंने कहा भाभी सत श्री अकाल..."

चरणजीत हँसते हुए बोली- “क्या बात है, आज सुबह ही नशा कर लिया..”

मीता- क्या करूँ भाभी शादी की खुशी ही है मुझे इतनी।

चरणजीत- “अच्छा जी, देख लियो कहीं खुशी-खुशी में कुछ उल्टा सीधा ना कर लियो तू..” और चरणजीत आज पहली बार मीते से डबल मीनिंग बातें करती है।

मीता चरणजीत की बात झट से समझ जाता है और फिर वो बोल- “भाभी उल्टा सीधा क्या होना, तू कौन सा मुझे कुछ करने देती है.."

चरणजीत हैरान होकर अपने मुँह पर हाथ रखकर बोली- “हाए ओये रब्बा... कैसी बातें कर रहा है तू, ओये तुझे कोई और नहीं मिला ऐसी बातें करने के लिए?”

मीता- भाभी कुँवारों की तो जात ही बुरी है। और वैसे गाँव में तुझसे सुंदर और है भी कौन?

चरणजीत ये बात सुनकर नजरें नीचे करके बोली- “मुझे जाने दे किचेन में मुझे बहुत काम है.."

चरणजीत मीता की साइड में से निकलकर किचेन में चली जाती है। सुबह का टाइम होता है, और किचेन में कोई नहीं होता। मीता चरणजीत के हिलते मोटे चूतरों को देखकर उसके पीछे ही लग जाता है। चरणजीत किचेन में जाती है और मीता पीछे से आकर उसे अपनी बाहों में भर लेता है।

मीते के हाथ चरणजीत के पेट पर होते है। चरणजीत एकदम हैरान रह जाती है, और वो पीछे मुड़कर देखने की कोशिश करती है। पर वो मुड़ नहीं पाती, क्योंकी मीते ने उसको कसकर पकड़ा हुआ था। चरणजीत समझ जाती है की और कोई नहीं मीता है। चरणजीत अपने आपको उससे छुड़ाते हुए बोली।

चरणजीत- “ओये कंजर ये क्या कर रहा है तू? छोड़ मुझे जल्दी, वर्ना मैं शोर मचा दूंगी.."
 
मीता पीछे से अपना लण्ड चरणजीत के चूतरों में दबाकर बोला- “क्या करूँ भाभी? जब तुझे गाण्ड मटकाते हुए चलती हो तो कसम से मुझसे रहा नहीं जाता। और मैंने सुना है तेरा पति सरदार तुझे हाथ तक नहीं लगाता..."

चरणजीत मीते के हाथ हटाने की कोशिश करते हुए बोली- “ओये कंजर छोड़ मुझे, और तुझे क्या पता मेरे और सरदार के बीच का, अगर वो आ गया ना तो तुझे यहीं पर गोली मार देगा..."

मीता लण्ड चरणजीत के चूतरों के बीच दबाते हुए बोला- “वो सरदार से क्या डरना, और उसने मुझे कल खुद कहा था की वो तुझे हाथ तक नहीं लगाता..."

चरणजीत ये सुनकर थोड़ी ढीली हो जाती है, क्योंकी मीता की ये बात 90% सच ही होती है- “मुझे छोड़ जालिम... कोई अपनी भाभी के साथ ये सब करता है भला। अगर किसी ने देख लिया तो वो क्या समझेगा छोड़ मुझे अब..."

मीता सलवार के ऊपर ही धक्के मारते हुए बोला- “आहह... भाभी तू वो चीज नहीं है, जिसे हाथ में लेकर छोड़ दिया जाए। आए हाए भाभी तेरी चूचियां कितनी मस्त हैं..” और हाथ चूचियों पर लेजाकर कमीज के ऊपर से मसल देता है।

चरणजीत चूचियां मसलते ही गरम हो जाती है, और वो थोड़ी शांत हो जाती है। फिर वो बोली- “ओये मीते अब छोड़ दे मुझे, किचेन में ये सब करना अच्छा नहीं लगता..."

मीता चूचियों को मसलकर बोला- "भाभी आज तू पहली बार मेरे हाथों में आई है। आज मुझे रोक मत... मुझे अपने मन की करने दे...”

चरणजीत- “हाए ओये मीते ऐसा नहीं करते, अच्छे घरों की औरतों के साथ...”

मीता एक और धक्का मारते हुए बोला- "हाँ भाभी तू अच्छे घर की है, तभी तो कल जोर-जोर से अपनी गाण्ड मटका-मटकाकर लोगों के सामने नाच रही थी तू..."

चरणजीत- नहीं ओये ऐसे नहीं बोलते।

मीता चूचियों को मसलटे हुए बोला- “आहह... आह्ह... भाभी...”

चरणजीत अब गरम होनी शुरू हो जाती है। पर इतने में किचेन की तरफ किसी के आने की आवाज आती है। और चरणजीत एकदम धक्के देकर मीता को अपने से अलग कर लेती है, और वो किचेन से निकलकर चली जाती है। मीता भी धोती के अंदर हाथ डालकर लण्ड को सेट करता है और फिर वो इधर-उधर देखकर वहां से निकल जाता है।

*****

*****

* * * * * * * * * *
 
कड़ी_31

मीता बाहर जाता है, और बाहर उसे बिटू मिलता है। वो बिटू को जो उसके साथ अभी-अभी हुआ वो सब कुछ उसे बता देता है।

बिटू उसकी ये बात सुनकर बोला- “मीते यार, तूने सुबह-सुबह ये बात सुनाकर खुश कर दिया है। भाई अब तू गाँव की सबसे सुंदर औरत को चोदकर अपने सारे शौक पूरेकरियो..."

मीता- हाए भाई सच में मजा आ गया, चरणजीत के जिश्म पर हाथ फेरकर बिटू स्वाद लेता हुआ बोला- “अच्छा चूचियां कैसी हैं चरणजीत की?"

मीता- “भाई एक नंबर चूचियां है चरणजीत की। ऐसा लगता है की साले सरदार ने अभी तक उसकी चूचियों के साथ कुछ किया ही ना हो। साली चूचियां एकदम जवान एकदम टाइट पड़ी हैं। कसम से मजा ही आ गया, आज तो उसकी चूचियां मसलकर.."

बिटू- “हाँ, बलविंदर के बस का कुछ नहीं है। साला इतनी कमाल की गरम वाइफ होने के बाद नवनीत जैसी

गश्ती की लेने के लिए तड़पता फिरता है बहनचोद... चूतिया एक नंबर का..."

मीता- अच्छा है भाई, बहनचोद बलविंदर उसे हाथ नहीं लगायेगा, तो उसकी वाइफ चरणजीत अपने आप मुझसे हाथ लगवाएगी।

बिटू- हाँ हाँ एकदम सही कहा तूने भाई।

मीता- "चल यार खेतों में एक चक्कर मारकर आते हैं..." फिर वो दोनों खेतों की तरफ चले जाते हैं।

उसके बाद हरपाल आ जाता है, और वो सामने से आ रही पिंकी को देख रहा होता है।

पिंकी अभी-अभी सोकर उठी होती है। उसके बाल खुले होते हैं, और उसने क्रीम कलर का सूट डाला हुआ था, उसने चुन्जी नहीं लेई हुई थी। कमीज के बड़े से गले में पिंकी की बड़ी-बड़ी चूचियां बाहर से ही महसूस हो रही थीं। हरपाल की नजर पिंकी की खड़ी चूचियों पर होती है।

पिंकी हरपाल को देखती है और मुश्कुराते हुए बोलती है- “सत श्री अकाल चाचाजी...”

हरपाल मुश्कुराते हुए जवाब देता है- “गुड मार्निंग... कैसे हो बेटा जी..."

पिंकी चिढ़ते हुये- “आहह... देखो तो सही इन बड़े अंग्रेज को, शहर में क्या रहने लगे, अपने आपको पता नहीं क्या समझते हैं अब ये?"

हरपाल अब पिंकी को चिढ़ाते हुए बोला- "हाँ हाँ शहरी-शहरी ही होते हैं, और पेन्दु पेन्दु होते हैं..” और हरपाल ये कहकर पिंकी को आँख मार देता है।

पिंकी- “हेलो चाचाजी, हमको आप पेन्दु मत समझो, आई नो इंग्लीश वेरी वेल ओके.."

हरपाल- ओके जी।
 
फिर पिंकी नाटक करते हुए रुचाब के साथ वहां से चली जाती है। जाते हुए हरपाल उसके हिलाते हुए चूतर देखता है, जो किसी औरत के चूतर जैसे लग रहे थे। हरपाल अपना लण्ड मसलते हुए वहां से चला जाता है। हरपाल गेस्टरूम में जाता है, जहाँ सुखजीत और रीत होती है।

हरपाल रात को दारू पीन की वजह से रूम में नहीं आया था, इसलिए अब वो आ आया था। हरपाल रूम में होता है, रीत बाथरूम में नहा रही होती है। और सुखजीत चरणजीत के जाने के बाद एक बार और सो जाती है। हरपाल के दिमाग में आता है, की रीत नहाकर वहां से चली गई है।

हरपाल रूम में होता है, और सुखजीत नींद में ही हरपाल को देखती है और बोलती है- “कहाँ थे आप सारी रात?"

रीत अपने जिश्म को साबुन लगा रही थी, जिससे बाथरूम से कोई आवाज नहीं आती। रीत ने सुखजीत की आवाज सुनी तो वो सोचने लगी की इस टाइम रूम में कौन आया है?

फिर हरपाल ने जवाब दिया- “यार वो रात को खाते पीते में पता ही नहीं चला की नींद कब आई...”

रीत को हरपाल की आवाज से पता चल जाता है की ये उसके पापा हैं।

सुखजीत का मन कुछ करने का होता है और वो ठरकी आवाज में बोली- “खाते पीते में आपको मेरा ध्यान नहीं रहता?"

रीत अपनी मम्मी के मुँह से ऐसे शब्द सुनकर हैरान रह जाती है।

हरपाल ने भी पिंकी के हिलाते चूतर देखे हुए थे, इसलिए उसका मूड भी बना हुआ था। इसलिए वो सुखजीत के पास जाता है, और उसकी चादर को उतारकर उसके होंठों को चूसने लगता है। सुखजीत की तो दुआ कबूल हो गई थी। सुखजीत ने पूरे जोश के साथ हरपाल का साथ दिया, और अपनी दोनों बाहें हरपाल के गले में डाल ली।

हरपाल सुखजीत को बहुत दिनों के बाद हाथ लगा रहा था। सुखजीत भी बिटू के नीचे एक बार आ चुकी थी। पर सुखजीत को अपने पति के साथ एक अलग ही मजा आता था। सुखजीत पूरे स्वाद के साथ अपनी एक टांग उठाकर हरपाल के ऊपर रखकर उसे कसकर अपनी बाहों में भर लेती है, और अपने हाथ हरपाल के जिश्म पर फेरने लगती है। और वो सोचती है की अंदर आखिर क्या हो

रीत बाथरूम में अपने मम्मी डैडी के किसिंग की आवाज रहा है?

हरपाल सुखजीत के चूतड़ों को पकड़कर बोला- “क्या बात है, बहुत आग लगी हुई है?"

सुखजीत जोश में बोली- आग तो इतनी लगी हुई है, की लावा पिघल जाए मेरी आग से।

अपने मम्मी डैडी के मुँह से ऐसी बातें स्नूते ही रीत पागल हो जाती है, और एकदम गर्मी पकड़ लेती है। उसके हाथ साबुन लगे चूचियों पर अपने आप घूमने लगते हैं। उसका मन तो दरवाजा खोलकर अपने मम्मी पापा को लाइव देखने का कर रहा था। पर वो दरवाजा खोलती तो आवाज आ जाती।

इतने में हरपाल सुखजीत की कमीज के पल्ले के अंदर हाथ डालकर उसका नाड़ा खोल देता है, और सुखजीत की पैंटी और सलवार एक साथ खींचकर उतार देता है। हरपाल सुखजीत के गोरे चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए उसे मसल देता है। जिससे सुखजीत की चूत अपना पानी निकल देती है।

हरपाल- “आज तो ये झील पानी से भरी हुई है."

सुखजीत भी हरपाल के चूतरों को पकड़कर अपनी चूत की तरफ दबाकर बोली- “आये हाए सरदारजी मेरी झील में तो पानी कभी खतम हआ ही नहीं, बस आप ही इस झील में कभी इबकी मारने नहीं आए..."

रीत अपने मम्मी डैडी की ऐसी बातें सुनकर पागल हो जाती है, और अपनी चूत में उंगलियां मारने लगती है।

उधर हरपाल भी अपनी पैंट में से अब अपना लण्ड बाहर निकालकर, सुखजीत की चूत में डाल देता है, और सुखजीत की चुदाई शुरू कर देता है। सुखजीत को अब मजा आ रहा था, हरपाल के लण्ड से। पर सुखजीत उस टाइम बिटू के बारे में सोचती है। क्योंकी बिटू का लण्ड उसकी बच्चेदानी तक आकर लगता था। पर हरपाल से ज्यादा मजा सुखजीत को आ रहा था, वो हरपाल की कमर को पकड़कर अपनी चूत में उसका पूरा लण्ड ले रही थी, और साथ ही साथ हरपाल के होंठों को भी चूस रही थी। सुखजीत हरपाल को अपनी टांगों के बीच में दबाकर अपनी चूत मरवा रही थी।

उधर रीत अंदर साबुन वाले चिकने पानी से अपनी चूत में उंगलियां मार रही थी। साथ-साथ अपने ठरकी मम्मी डैडी की बातें सुन रही थी।

15 मिनट की चुदाई के बाद सुखजीत की चूत हरपाल के लण्ड के पानी को पी जाती है। थोड़ी देर बाद हरपाल उठकर चला जाता है, और सुखजीत लंबी लेट जाती है। रीत भी अपनी चूत में साबुन वाले पानी से भीगी हुई उंगलियां डालकर धीरे-धीरे अपनी चूत का पानी-पानी निकाल देती है।

* * * * * * * * * *
 
कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
कड़ी_32

चुदाई करने के बाद सुखजीत को भूख लगती है। सुखजीत रूम से बाहर किचेन की ओर चली जाती है। जहाँ चरणजीत खड़ी होती है।

इतने में रीत भी बाथरूम से बाहर निकालकर रूम से बाहर आ जाती है।

चरणजीत भी सुबह के बारे सोच रही थी, जो उसके साथ हुआ था। सुखजीत किचेन में आती है और चरणजीत को मुश्कुराते हुए बोलती है।

सुखजीत- “सत श्री अकाल बहनजी.."

चरणजीत नकली सी मुश्कान के साथ बोली- “सत श्री अकाल बहनजी। लगता है ताकट कुछ ज्यादा ही हो गई थी आपको..."

सुखजीत जवाब देते हुए सोचती है- “हाँ थकावट तो होगी ही तसल्ली जो करी थी। बिटू साले ने मुझे पूरी तरह से रगड़ दिया था...”

फिर सुखजीत बोलती है- “क्या बात कर रहे हो आप बहनजी, मैं तो सारी रात गिधा डान्स में आपके साथ ठुमके लगा रही थी..."

चरणजीत- “अच्छा... बहनजी गेट के बाहर जाते हुए, मैंने आपको देखा था...” दर्शल चरणजीत ने सुखजीत को गेट से बाहर जाते हुए देख लिया था। पर जब सुखजीत इस बात से साफ-साफ मना कर गई, तो चरणजीत का शक और पक्का हो गया।

सुखजीत कुछ सोचने लगी और बात को बदलते हुए बोली- “वो बाहर रीत के पापा खड़े थे, वो मुझे बुला रहे थे। उनको कोई बात करनी थी मुझसे..."

चरणजीत- “अच्छा जी... मेरे देवर ने बाहर बुलाया था मेरी देवरानी को। ऐसी कौन सी खास बात थी। जरा मुझे भी तो पता चले?"

सुखजीत शर्माने की आक्टिंग करके बोली- “बहनजी अब आप भी ना... बस प्लीज़्ज़..."

चरणजीत टरकी अंदाज में बोली- "बाहर बुलाकर पकड़ तो नहीं लिया कहीं मेरे देवर ने मेरी देवरानी को?"

सुखजीत भी टरकी अंदाज में बोली- “क्या करूँ बहनजी? उनको मुझे पकड़े बिना नींद नहीं आती उन्हें..."

चरणजीत- ओये होये... पकड़े बिना नींद नहीं आती, उनको या आपको?

सुखजीत- हाए बस करो बहनजी अब। बहुत मजाक करते हो आप सच में।

दूसरी तरफ रीत जैसे ही बाहर आती है, तो उसे आगे पिंकी मिलती है। रीत ने ब्लैक कलर की अफगानी सलवार और पिंक कलर का टाप डाला हुआ था। जिसमें उसकी चूचियां और चूतर अपनी पूरी ओरिजिनल शेप में नजर आ रहे थे।

पिंकी रीत को देखकर बोली- “यार रीत कहां थी तू? मैं तुझे कब से ढूँढ़ रही हूँ..”

रीत- यार मैं नहाने के लिए चली गई थी।

पिंकी- चल चलते हैं, जल्दी आ।

रीत- पर कहां?

पिंकी रीत की तरफ देखकर आँख मारकर इशारा करके बोली- “वहीं खेतों की तरफ..."

रीत समझ जाती है की पिंकी कुछ ना कुछ करने के चक्कर में है। पर सुबह से रीत की चूत लगातार पानी निकाल रही थी, जबसे उसने अपने मम्मी डैडी की सेक्स की आवाजें सुनी थी। फिर वो दोनों एक साथ खेतों की तरफ चल देती हैं। पिंकी उस दिन की तरह रीत को कमाद के खेत के पास ले जाती है।

पिंकी- “रीत यार तू हाँ रुक, मैं रणबीर को मिलकर आई..” और पिंकी खेत के अंदर चली जाती है।

पर रीत से भी कहां सबर होना था। उसकी चूत से में तो पहले से ही आग मची हुई थी। इसलिए रीत भी पिंकी के पीछे-पीछे उन दोनों के देखने के लिए छुप गई।

पिंकी रणबीर के पास गई और बोली- “सारी जान, मैं थोड़ा लाते हो गई.."

रणबीर अपनी बुलेट बाइक पर बैठा होता है। वो पिंकी का हाथ पकड़कर उसे अपनी ओर खींचकर कहता है "जान तुझे पता है ना... मुझसे इतना इंतेजार नहीं होता."

पिंकी- बाबू ने आवाज मार ली थी, उन्हें कुछ काम था।
 
रणबीर अपना हाथ पिंकी के चूतरों पर ले गया और उसके चूतरों को मसलता हआ बोला- "अपने बाप का काम

करती रहियो बस, तू अपने यार का काम ना करियो बस..."

चूतर मसलते ही, पिंकी की आधी आँखें बंद हो गई और वो बोली- “आहह... जान तेरा ही काम करने के लिए आई हूँ मैं यहाँ..."

रणबीर ये सुनते ही पिंकी के गले से उसकी ली हुई चुन्नी निकालकर साइड में फेंक देता है, और अपने होंठ

उसके होंठों पर रखकर उसके होंठों को जोर-जोर से चूसने लगता है। पिंकी भी पूरी मस्त होकर रणबीर का साथ दे रही थी। वहां रीत भी ये सब देख रही थी, और अब वो भी धीरे-धीरे गरम हो रही थी।

इतने में रीत को किसी ने पीछे से आकर अपनी बाहों में भर लिया, रीत एकदम डर गई। जब उसने पीछे नजरें घुमाई तो देखा पीछे मलिक खड़ा था। मलिक ने रीत को ऐसा पकड़ा हुआ था, की उसका लण्ड रीत के चूतरों पर लगा हुआ था।

मलिक मुश्कुराता हुआ बोला- “देखा फिर मिल ही गये ना हम?"

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रीत सुनकर शर्मा जाती है- “हट गंदे, छोड़ मुझे.."

मलिक- "अच्छा... अब पिंकी और रणबीर को तू घर-घूर कर देख रही थी, वो गंदा नहीं है बोल अब?"

रीत ये सुनकर पानी-पानी हो जाती है, और अपनी आँखें झुका कर मुश्कुराने लगती है। फिर मलिक रीत का मुँह अपनी तरफ करता है और रीत के गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रखा देता है। रीत का पूरा जिश्म एक बार काँप जाता है, क्योंकी आज पहली बार किसी ने उसे किस किया था। रीत जैसे हैरान हो रही थी, की ये आज उसके साथ ये क्या हो गया? रीत का दिमाग काम करना बंद कर देता है। पर मलिक पूरी मदहोशी के साथ रीत की कमर को पकड़कर उसके होंठों को चूस रहा था। रीत एकदम मलिक को धक्का देकर उससे अलग होती है, लंबी लंबी सांसें लेते हुए अपनी आँखें नीचे कर लेती है।

फिर मलिक ने रीत की ठोड़ी से उसका मुँह ऊपर किया और बोला- “रीत आई लोव यू। जिस दिन मैंने तुझे देखा

था। उसी दिन मुझे तुझसे प्यार हो गया था..."

रीत ये सुनकर फिर से शर्मा जाती है। रीत के गाल अब लाल होने लगते है। फिर रीत धीरे से बोलती है- "आई लव यू टू मलिक..."

इतने में ही साइड से पिंकी की आवाज आती है- “आअहह... आह्ह.. रणबीर प्लीज़्ज... आराम से करो, मेरी कमीज फट जाएगी..."

जब रीत और मलिक उन दोनों की तरफ देखते हैं, तो वो दोनों हैरान हो जाते हैं। पिंकी सिर्फ सलवार में बुलेट की सीट पर लंबी लेटी हुई थी। और रणबीर उसकी चूचियां चूस रहा था। मलिक भी फिर से रीत को अपनी और खींचता है और उसके होंठों को चूसने लगता है। मलिक पीछे से रीत के मोटे-मोटे गोल-गोल चूतरों पर अपना हाथ रखता है, और धीरे-धीरे रीत के चूतरों को मसलना शुरू कर देता है। रीत के मुँह से स्स्सीयी आह्ह... की

आवाज आती है, और वो रणबीर को कसकर पकड़ लेती है। किसिंग करते-करते मलिक रीत का टाप उसके पेट के ऊपर से उठा देता है।

रीत का गोरा नंगा चिकना पेट अब मलिक के सामने था। रीत अपने हाथ से अपना टाप फिर से नीचे कर लेती है, और अपने दोनों होंठ मलिक के होंठों में से बाहर निकालकर बोली- “हाई आह्ह... मलिक प्लीज़्ज़... ऊपर ऊपर से करो जो करना है... और कुछ नहीं करना प्लीज़्ज़..."

मलिक समझ जाता है की माल नया-नया है, इतनी आसानी से इसने हाँ नहीं करनी। आखीरकार, इसके अंदर अपनी जवानी का पूरा नखरा भरा हुआ है। फिर मलिक वापिस रीत के होंठों को चूसने लगता है, और उसके दोनों गोल-गोल चूतरों पर हाथ फेरने लगता है। रीत भी अपनी माँ सुखजीत की तरह चूतर मसलते ही गरम हो जाती है, वो दोनों एक दूसरे के साथ लिपट जाते हैं।
 
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