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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

उधर विशाल सुनता जा रहा था अपनी बीवी की बातों को।

अदिति एक वक्त में दो मर्दो को खुश कर रही थी।

मगर राजन बहुत घबराने लगा था। उसके समझ में नहीं आ रहा था की अदिति क्यों अपने पति को सब कुछ सच-सच बता रही थी। और राजन ने खुद से कहा- “क्या वो बता देगी की मैंने अभी-अभी उसको चोदा? क्या बकवास कर रही है यह औरत भला?” राजन को इस मियां बीवी के रोल-प्ले के बारे में जिससे यह लोग अपनी रातों को और भी मसालेदार करते थे, इस बारे में पता नहीं था।

विशाल उस तरफ बड़ा उत्तेजित हुआ अदिति की बातों को सुनकर और एक पल के लिए सोचा की कहीं सच में किसी के साथ तो नहीं है अदिति आज? मगर अब तो उसको सब पता करने का तरीका था ओम के द्वारा,

ओम उसको बता देता अगर कोई उससे मिलने आया होता तो।

फिर उसने आराम से अदिति को बात जारी रखने को कहा। मगर यह कमाल देखो की ओम को तो पता नहीं

था की राजन अदिति के पास होगा। क्योंकी वो तो अंजली के यहाँ आया हुआ था। कमाल की बात है, विशाल की प्लानिंग यहाँ फेल हुई एक बार।

अदिति ने बहुत चंचलता से कामुकता से बयान किया विशाल को रिझते हुए अपने बातों से और राजन अपनी आँखें फाड़-फाड़ के और कान को हाथी के कान की तरह बड़े-बड़े खोलकर अदिति को सुन रहा था क्योंकी वो सब कुछ सच-सच बता रही थी विशाल को जो उस वक्त कर रही थी।

अदिति ने यूँ कहा- “जिस आदमी ने मेरा रस निकाला है, वो अभी इस वक्त मेरे सामने बैठा हुआ है और वो भी बिल्कुल नंगा है। मैं बेताब हूँ इस वक्त, काश तुम भी यहाँ होते इस वक्त। जल्दी आ जाओ जान..."

अदिति ने जिस तड़पती आवाज में वो सब कहा विशाल को, उससे विशाल को इतना मजा आया की उसको और ज्यादा बोलने को कहा।

राजन को कुछ समझ में नहीं रहा था और जाने की आज्ञा माँगा उसने तो, और चलता बना वो, दरवाजे तक जाकर अदिति को वेव किया और अदिति ने बाइ कहा राजन को। दर्शल राजन डर के मारे भाग गया, उसने सोचा की यह औरत पागल है सब कुछ अपने पति को बता रही है, उसकी रिपोर्ट कर रही है अपने पति से और शायद पति आकर उसको पीटेगा, इसलिए राजन चलता बना।।

विशाल ने फोन किया अदिति को यह बताने के लिए की वो आज रात को देर से वापस आएगा और अदिति उसको कामकता से आकर्षित करने लगी थी। असल बात यह थी की आज रात को विशाल ने ओम को अदिति के यहाँ भेजने का प्लान किया हुआ था। इसलिए लेट आने का बहाना बता रहा था। सालों से विशाल उसको किसी और से चुदवाते हुए देखना चाहता था और वो तो धोखा दे गई थी विशाल को। तो अब विशाल अपने मन की करने पे तुला हुआ था। अब विशाल यह देखना चाहता था की किसी नये आदमी के साथ जिसने कभी उससे नहीं किया हो उसके साथ अदिति कैसे रिएक्ट करती है?

विशाल सब कुछ कदम-बा-कदम देखना चाहता था। उसकी अदायें, कैसे एक अजनबी से मिलती है? कैसे उसकी

आँखों में देखती है? क्या करेगी जब एक गैर मर्द उसको छुएगा? कैसे उसको किस करेगी? कैसे अपने जिश्म को उस अजनबी को छूने देगी? सब आराम से विशाल देखना चाहता था अपनी आँखों से। विशाल देखना चाहता था एक नये आदमी के लण्ड को देखकर अदिति कैसे रिएक्ट करती है? एक लण्ड जिसको अदिति ने कभी सोचा

भी नहीं की उसको देख पाएगी उस लण्ड को अपने सामने देखकर क्या व्यवहार होती है अदिति की यह विशाल देखना चाहता था। विशाल के पास सैकड़ों प्लान्स थे अदिति के लिए। वो आनंद के साथ भी अदिति को देखना चाहता था। आनंद के साथ डिफरेन्स यह होगा की वो अदिति को पहले से मालूम होगी, उसमें विशाल मास्टर होगा और जैसे एक मूवी का डाइरेक्टर होगा और अदिति आक्ट्रेस होगी और वही करेगी जो विशाल करने को

कहेगा। यह सब दिमाग में प्लान किया हुआ था विशाल ने अदिति के लिए। उसको पूरा यकीन था की एक दिन यह सब कुछ हकीकत में लाने में कामयाब होगा अदिति के साथ।

फिलहाल ओम के साथ उसका प्लान था अदिति के लिए। आनंद से बाद में करेगा।

विशाल ने धीरे से अदिति से कहा- “जान यह आज रात की रोल-प्ले है क्या जो कह रही हो? क्यों मुझको सता रही हो दिन के बीच में, जब मैं काम पर हूँ। बिल्कुल खड़ा कर दिया लण्ड को मेरे? तड़पाओ मत जानेमन...” ।

अदिति यह सुनकर खिलखिलाकर हँसी और कहा- “मगर मैं सच में नंगी हूँ इस वक्त, और किसी ने अभी-अभी मेरे साथ खूब किया है। तुमको यकीन नहीं आ रहा की मैं नंगी हूँ? मैं बिल्कुल नंगी सोफे पर बैठी तुमसे बात कर रही हूँ अभी जान...”

विशाल को पता था की वो मजाक कर रही है और उसको यूँ ही उंगली कर रही है तो उसने यह जवाब दिया "ओके ओके... हाँ तुम बिल्कुल नंगी हो और मेरे किसी दोस्त के साथ हो इस वक्त, और वो तुमको खूब चोद रहा है। यही रोल-प्ले खेलना आज रात को। ओके?"

अदिति फिर से खिलखिलाई और दाँतों में होंठों को दबाते हुए कहा- “अच्छा तो कितने बजे वापस आओगे ठीक 9:00 बजे या बाद में? क्या आनंदजी भी ओवरटाइम करेगा तुम्हारे साथ?”

इस सवाल ने विशाल को चिहँका दिया। क्योंकी ना तो वो ओवरटाइम करने वाला था और ना आनंद उसके साथ होने वाला था। फिर विशाल यह सोचने लगा की क्या होगा अगर आनंद सच में उससे मिलने जाएगा तो? क्या होगा अगर अदिति आनंद को फोन करके बुलाएगी? क्योंकी रात 9:00 बजे तक तो अकेली होगी उसके हिसाब से। अब विशाल खुद अपने प्लान से कन्फ्यूज्ड होने लगा था। मगर उसको नहीं पता था की अदिति और आनंद को कम्यूनिकेट करने का जरिया वही था अब तक। तो उसने सोचा की नहीं वह दोनों एक दूसरे से कम्यूनिकेट नहीं कर पाएंगे। उसका प्लान था की वो ओम को अदिति से मिलने को भेजेगा और वो सब कुछ छुपकर देखेगा।

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कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
कड़ी_50 अदिति को देखने ओम गया

कड़ी 39 में विशाल ने ओम से प्लानिंग कर लिया था की उसको अदिति के पास भेजेगा। तब से अब तक विशाल प्लानिंग में लगा हुआ था इस मुलाकात को करवाने के लिए, ओम और अदिति की। और आज प्लान खड़ा हआ था। विशाल ने मामूल टाइम पर अपना काम खतम किया और ओम से एक रेस्टोरेंट में मीटिंग थी जहाँ थोड़ा पीते हुए आज रात के प्लान को तैयार करना था दोनों को। ओम तो दिन की शिफ्ट कर रहा था तो फ्री था उस वक्त, और विशाल से मिला रेस्टोरेंट में एकाध ड्रिंक के साथ प्लान पर काम करने के लिए। प्लान बन चुका था पर थोड़ा मजबूत करना बाकी था।

प्लान सिंपल था, ओम जाकर अदिति के फ्लैट के दरवाजे पर नाक करेगा और अदिति दरवाजा खोलेगी तो वो अंदर घुसेगा चाहे वो इनकार ही करे, ज्यादा डरने का नहीं था ओम को क्योंकी उसको भी पता था की अदिति उसको करने देगी, जिस तरह से वो ओम को ऊपर से अपनी जांघे वगैरा दिखाती है एट्सेटरा। और विशाल पिछली बार की तरह या तो बाल्कनी से अंदर घुसेगा क्योंकी उसने एक छोटी सी खिड़की को खुला हुआ छोड़ दिया था, या खुद अंदर घुसेगा अपनी चाभी से दरवाजा खोलकर, जब ओम अंदर घुस जाएगा तब।

पीते वक्त ओम बार-बार विशाल से पूछे जा रहा था- “मगर सर जी, क्या होगा अगर अदिति जी ने मुझको धक्का देकर निकाल दिया तो? आपको कैसे इतना यकीन है की वो मुझको अंदर आने देगी? अगर उसने मुझको अंदर घुसने से पहले ही दरवाजा बंद कर लिया तो सब प्लान चवपट हो जाएगा और आप मुझको दोष देंगे तब...”

विशाल ने उसको बड़े आराम से समझाया- “देखो ओम वो मेरी पत्नी है और कोई उसको मुझसे बेहतर नहीं जानता। मैं अदिति को उतना जानता हूँ जितना खुद को। हाँ शुरू में तुमको धक्का दे सकती है, पुश कर सकती है, बेशक शुरू में थोड़ी नखरे करेगी, अब यह तो नहीं कहेगी की हाँ ओम आओ मुझको चोदो? तो थोड़ा बहुत तुमको फ्लर्ट वगैरा करना होगा। थोड़ा आशिक मिजाज पैदा करो अपने आप में, थोड़ा हीरो के माफिक स्टाइल वगैरा मारना। उसको खुश करना, रिझाना, तुमको यह सब करना नहीं आता क्या? जरूर आता होगा। बस समझ लो के उसपे लाइन मार रहे हो,

डायलाग्स वगैरा मारना यार। यह भी सीखना पड़ेगा क्या तुमको ओम? मुझको इतना पता है की जितना ज्यादा टाइम उसके साथ बिताओगे उतनी आसानी से वो तुम्हारे करीब आएगी और आखीर में करने देगी। मैं शर्त लगा सकता हूँ।

ओम सिर खुजाते हुए विशाल को देखे जा रहा था बियर पीते हुए।

विशाल ने फिर कहा- “अदिति को वो सब बातें बोलना जो मैंने तुमको इतने दिनों से सिखाया हुआ है। उसके जिश्म की तारीफ करना, उसकी कामुकता के बारे में उसको बोलना, हाँ तुमने कहा था एक बार तुम उसकी जांघे देख रहे थे नीचे से? हाँ? और वो जानबूझ कर अपनी टाँगें उठाकर तुमको अपनी पैंटी दिखा रही थी, है ना? तो अब वक्त आ गया है की तुम उसकी पैंटी को हाथ लगाओ। है ना ओम? अब वक्त आ गया है की तुम उसको सूंघो और चखो। किस बात का इंतेजार है तुमको ओम आगे बढ़ो अब तुम। जाओ मैंने तुमको बिल्कुल छूट दे दिया मेरी बीवी को जाकर चोदो तुम ओम...”

ओम को थोड़ा सा नशा होने लगा था और उन सभी बातों को याद कर रहा था जो उसने अदिति से किया था अपने फ्लर्टस के दौरान उसके साथ। ओम ने सोचा- “हाँ, किस तरह अदिति ने मेरी बात को मानते हए अपनी जाँघ को ऊपर उठाकर मेटल बार पर रखा था ताकी मैं नीचे से उसकी जांघों के बीच देख सकू। उसकी उन गोश्त से भरी जांघों को ओम सोचने लगा, उसकी जबरदस्त कमर, उसकि खूबसूरत मुँह में पानी भर देने वाली चूचियां, उसकी खूबसूरती, उसकी जिश्म की मजेदार खुशबू, ओम को यह सब कुछ पता था अदिति के बारे में और उसके जिश्म में एक लहर पैदा हुई यह सब सोचने के बाद। और सोच रहा था की क्या आज मेरा सपना हकीकत में बदलने वाला है? कितने बार अदिति को सोचते हुए ओम ने मूठ मारी है, अनगिनत बार।

जबसे अदिति को जाना है किसी और को कभी खयालों में नहीं लाया है मूठ मारते वक्त। सिर्फ अदिति और अदिति ही रही है उसके मन में, उसकी आइडल बन गई थी अदिति, उसकी सपनों की रानी थी, उसकी देवी थी वो तो। पूजने लायक थी अदिति उसके लिए। मगर क्या ओम उसको तकलीफ दे सकता था? नहीं बिल्कुल नहीं। बहुत प्यार से और संभाल के करना होगा जो कुछ भी करना होगा अदिति के साथ। ओम के लिए अदिति एक बहत नाजुक और कोमल चीज थी, संभालकर इश्तेमाल करने के लिया।

फिर तकरीबन 7:30 बजे दोनों अपार्टमेंट पहुँचे जहाँ ओम निकलकर गेट के पास से ऊपर छत पर देखने गया की अदिति तो नहीं दिख रही? क्योंकी अदिति को नहीं पता होना चाहिए की विशाल वापस आ गया है। ओम कार से निकलकर गेट के पास देखा और जल्दी से विशाल को कार अंदर करने को कहा। विशाल कार को अंडरग्राउंड पार्किंग में ले गया।
 
ओम ने अपने नाइट ड्यूटी वाले दोस्त से कहा- “मैं एक जबरदस्त जवान औरत को चोदने को जा रहा हूँ...”

उस दोस्त के मुँह में पानी आ गया और ओम से बिनती किया- “मुझको उस औरत का नाम बताओ, ताकी जब मुझको मौका मिलेगा तो मैं भी जाऊँगा मजा करने के लिये उसके साथ...”

मगर ओम ने उसको बोला- “वो टाप सीक्रेट बात है। वी.आई.पी. औरत है तुम्हारे बस की बात नहीं...” कहकर थोड़ा फेंकने लगा था ओम। मगर क्या पता बाद में उस दूसरे वाचमैन की भी बारी आ जाये? फिर ओम गया अंडरग्राउंड पार्किंग में विशाल से मिलने।

प्लान के मुताबिक, ओम गया अदिति का दरवाजा नाक करने। उसी कारिडोर से विशाल चलकर छत की तरफ गया दूसरे दरवाजे से जो बाहर से ले जाता है उसकी छत पर, और निकालने से पहले झाँक कर देखा की अदिति ओम के लिए दरवाजा खोलती है की नहीं?

तीसरी नाक के बाद अदिति दरवाजा खोलने आई और बिल्कुल चिहँक गई ओम को सामने देखकर। अदिति एक बहुत ही सेक्सी ड्रेस में थी। और सेक्स की देवी दिख रही थी। विशाल छत के दरवाजे के पीछे से देख रहा था, वो दरवाजा बिल्डिंग के बाहर की तरफ खुलता था, जहाँ से अपने छत तक जाने का रास्ता था। विशाल को खुद नहीं पता था की आज रात को अदिति उस ड्रेस में होगी।

अदिति ऐसी दिख रही थी उस ड्रेस में, उसकी क्लीवेज, ब्रा की स्ट्रैप्स, उसके खुले बाल, कुछ देर ओम बिना कुछ कहे उसके जिश्म को निहारता रहा।

विशाल उस तरफ से देख रहा था की किस तरह ओम उसकी बीवी को भूखी नजरों से देख रहा था। जो ड्रेस

अदिति ने पहनी थी बिल्कुल एक नाइट-ड्रेस थी जो विशाल की मनपसंद थी और उसको अदिति खास विशाल के लिए पहनती थी, अक्सर उसको खुश करने के लिए। अब क्योंकी ओम सिर्फ उसकी क्लीवेज को देख रहा था बिना कुछ बोले।

अदिति ने उसके नजरों को देखा और ऊपर आसमान की तरफ देखते हुए बोली- “इस वक्त तुम यहाँ क्या कर रहे हो ओम? जाओ यहाँ से...”

मगर झट से ओम ने अदिति को हल्के से धक्का देते हुए अंदर घुस गया। विशाल ने उसको वैसा करने को कहा था। कहीं अगर अदिति ने इनकार किया तो? तो जब ओम अंदर घुस गया तो अदिति ने हँसते हुए दरवाजा बंद किया और ओम के पीछे अंदर आई तो देखा जनाब काउच पर बैठ चुके थे जैसे अपने खुद के घर में हों।

अदिति उसके सामने बैठी और उसके चेहरे में गौर से देखते हुए कहा- “तुमने पी रखी है, है ना? बदबू आ रही है शराब की। अब बताओ क्यों आए हो इस वक्त? मेरा पति कभी भी आ सकता है अभी। बल्की आता ही होगा...”

ओम मुश्करा रहा था और मुँह मोड़ते हुए कहा- “मुझे पता है की वो आज यहाँ नहीं हैं, इसीलिए आज मैं आया हूँ, अब मुझसे इंतेजार नहीं होता अदिति जी, मैं आपके साथ कुछ हसीन लम्हें गुजारना चाहता हूँ..”

अदिति ने अपने होंठ दाँतों में दबाते हुए पूछा- “तुमको कैसे पता की आज वो घर पर नहीं है?"

ओम- “यह तो सिंपल है जी, आने से पहले मैंने चेक किया है हेहेहेहे... अदिति जी आप कमाल की दिख रही हो, बिल्कुल जैसे मैं आपको देखना चाहता था। वाउ... मुझसे अब रहा नहीं जाता ओह माई गोड...”

ओम ने फिर देरी नहीं किया यह कहने में- “वक्त को जाया नहीं करना चाहिए अदिति जी, चलो आपके बेडरूम में चलते हैं सीधा...” और ओम अदिति के बेडरूम की तरफ बढ़ने लगा।

अदिति हँसते हुए उसके पीछे-पीछे गई अपने बेडरूम की तरफ और इस तरह से अदिति बैठी अपने बेड पर ओम के सामने। या कुछ ऐसे ऐसे पोज करके अदिति बैठी की ओम का जमकर खड़ा हो गया और बाहर से विशाल देख रहा था।

दोनों मर्द अंदर और बाहर पागल होने लगे अदिति को बेड पर ऐसे देखते हुए।

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कड़ी_51

अदिति अपने बेडरूम में ओम के साथ।

विशाल देख रहा है छत पर से विशाल बेकरार देखते हुए उम्मीद कर रहा था की आज उसका अधूरा सपना थोड़ा बहुत पूरा होगा, अदिति को ओम से चुदवाते हुए देखकर। वो खासकर यह देखना चाहता था की अदिति की एक्सप्रेशन्स कैसे होंगे जब ओम के साथ ऐसे रिश्ते में बँधेगी तो? विशाल जानना और देखना चाहता था की क्या अदिति बिल्कुल वैसे बिहेव करेगी जैसे उसके साथ करती है, चुदवाने के वक्त या ओम के साथ ज्यादा गरम होगी, ज्यादा चंचल और खुश दिखेगी या सामान्य जैसे रहेगी।

विशाल अदिति की मुश्कान और सेक्स के दौरान उसकी सभी आदतों से वाकिफ था, उसको पता था अदिति कैसे बहकाती है, और एक मर्द के जिश्म का कौन सा हिस्सा पसंद करती है। तो अब देखना चाहता था की अदिति ओम के जिश्म पर भी उन्हीं हिस्सों को पसंद करेगी और वैसे ही नजदीकियां रखेगी या अब अलग तरीके से आगे बढ़ेगी ओम के साथ? आनंद के साथ थोड़ा बहुत देख चुका था विशाल अदिति को, मगर पूरी तरह से नहीं। मगर अब विशाल बास था बिल्कुल एक मूवी डाइरेक्टर की तरह और उसको उम्मीद थी की ओम बिल्कुल सब कुछ वैसे ही करेगा जैसे-जैसे विशाल ने उसको करने को कहा हुआ है। तो छत पर से बेताबी से विशाल इंतेजार कर रहा था सब कुछ देखने की लिए।

अदिति खिलखिला रही थी ओम को देखते हुए और उसको छेड़ते हुए सवाल किया- “मुझे यह बताओ की तुमने क्यों यहाँ आने से पहले शराब पिया? और तुम्हारा साथी जो नाइट शिफ्ट कर रहा है उससे तुमने क्या कहा? उम्मीद है की तुमने उसको मेरा नाम नहीं बताया होगा, वरना मैं तुमको मार डालूंगी। समझे?"

ओम बेडरूम में तब तक खड़ा था। जबकी अदिति कभी बेड पर बैठ रही थी, फिर लेट रही थी, फिर बैठ रही थी जैसे की ओम को पोज दे रही थी अपनी जांघों और क्लीवेज को ओम को दिखाते हुए उस नाइटी जैसी ड्रेस में और ओम उसके सामने आने वाले जिश्म के हिस्सों को निहार रहा था। असल बात यह थी की अदिति ओम को आकर्षित नहीं कर रही थी। बल्की कुछ इस तरह से बैठना या लेटना चाहती थी जिससे उसके जिश्म की गुप्त अंग ओम को नहीं दिखें। पोजीशन ढूँढ़ रही थी ठीक से बैठने के लिये। मगर जो ड्रेस उसने पहन रखी थी उसने तो धोखा दिया अदिति को बस।

ओम तो उसके जिश्म को ही मद भरे नैनों से देखे जा रहा था, उसकी चिकनी जांघे, जो उस काली ड्रेस में और भी निखार रही थीं, उसकी क्लीवेज जो खुद अच्छी तरह से ओम को आकर्षित किए जा रही थी। ओम का मन किया की अचानक से उसकी छाती के पास जाकर चूचियों को चूसना शुरू कर दे।

मगर जो विशाल ने करने को कहा है उसमें वैसे नहीं करना था। विशाल ने उसको सब कुछ जो कहा है वैसे ही स्टेप बाइ स्टेप करना था ओम को। विशाल ने बहुत इंपार्टेन्स दिया है उसके हर आक्सन को बिना मिस किए फालो करने को।

ओम ने शुरू किया- “तो अदिति जी। नहीं मैं आपको सिर्फ अदिति बुलाऊँगा बेहतर लगता है इसमें 'जी' लगाने से। हाँ तो मैं कह रहा था की आपको याद है किस तरह से मैंने आपको देखना शुरू किया था, जब आप अपने पति को देखने आती थी छत पर? याद है कैसे मैंने आपको अपनी टांग ऊपर उठाने को कहा था ताकी आपकी जांघों को देख सकूँ? उसी वक्त मैं यहाँ आपके इस बेडरूम में आना चाहता था, जब आपके पति नहीं होते था दिन में। इस मौके के लिए मैं बड़ी बेसब्री से इंतेजार कर रहा था अदिति..."

अदिति- “अच्छा? और तुमको क्यों लगता है की मैं तुमको खुश करूँगी?"

ओम- “कम ओन अदिति। अगर मुझको तुमको खुश नहीं करनी होती तो तुमने अपनी जाँघ थोड़ी ही दिखाए होते मुझे? बार-बार मेरे सामने थोड़ी ही आती तुम छत पर, अगर मुझमें इंटेरेस्ट नहीं होती तो? हाँ? देखो अब भोली बनने की कोशिश मत करना प्लीज... मुझे मालूम है की तुमको मैं पसंद हूँ, तो चलो देर ना करते हुए काम शुरू करते हैं ओके?”

मुश्कुराते हुए अदिति ने बेड पर देखते हुए कहा- “कौन सा काम? मुझे तुमसे कोई काम नहीं करना है..”

ओम तब तक बेड पर बैठ गया उसके पास और अपनी हथेली को ऊपर उठाया उसकी जाँघ पर रखने के लिए तो अदिति ने देखते हुए की उसका हाथ उसकी जांघों पर पड़ने वाला है, वो बेड के ऊपर की तरफ खिसक गई अपने पैर हटाते हुए।

विशाल ने एक मौका देखकर छत के दरवाजे से धीरे से घर के अंदर घुस गया। क्योंकी उसको पता था की उसका बेडरूम का दरवाजा कभी बंद नहीं रहता है, तो विशाल एक बड़ी सी फूलदान के पीछे बैठ गया जहाँ से उसका कमरा साफ दिखाई देता था, और उनके बातों को आसानी से सुन सकता था। यह फूलदान सब विशाल ने पहले से तैयार करके रखा हुआ था और सब चेक कर लिया था की कहाँ से क्या-क्या दिखेगा उसको। अब वो और अदिति दोनों एनर्जी सेव करते थे। यह विशाल का सिखाया हुआ था अदिति को हमेशा से की बिना वजह किसी भी कमरे की लाइट कभी भी ओन नहीं रहनी चाहिए, और जब लाउंज में नहीं हों तो लाउंज की लाइट आफ होनी चाहिए बेकार में किसी भी कमरे या किचेन या रूम की लाइट ओन नहीं रहती थी बेकार में।

अब दोनों को आदत हो गई थी जैसे एक कमरे से दूसरे में शिफ्ट होते थे आटोमेटिकली हाथ स्विच पर चले जाते थे आफ करने के लिए जब एक जगह से निकलते थे। इसीलिए जब अदिति लाउंज से ओम के पीछे अपने बेडरूम में गई थी तो लाउंज की लाइट को आफ कर दिया था बेडरूम में जाने से पहले। मतलब यह था की जिस जगह फूलदान के पास विशाल छुपा था वहाँ अंधेरा था, तो उसको देखना नामुमकिन था बेडरूम से। मगर क्योंकी बेडरूम में रोशनी थी तो विशाल उस जगह से बेडरूम में सब साफ देख सकता था।

जैसे के विशाल ने ओम को सिखाया था, उसने अदिति से फ्लर्ट करना शुरू किया मुश्कुराते हुए और उसके और करीब जाने लगा धीरे-धीरे। और जो भी शब्द विशाल ने कहा था अदिति से कहने को उन्हीं अल्फाजों को ओम ने अदिति को कहा। सब रिहर्सल करवाया था विशाल ने ओम से कई दिनों तक।

ओम को सब याद था के कब क्या कहना था अदिति को। तो ओम ने शुरू किया अदिति के थोड़ा करीब जाते हुए- “मैं आज तक किसी लड़की के साथ नहीं गया हूँ अदिति, तुम जानती हो मैं कुँवारा हूँ, और आप मेरा पहला इश्क हो पता है?"
 
अदिति ने ओम के चेहरे में उदासी और सदमे के मिक्स्ड एहसास से देखा और पूछा- “अच्छा... सच? तुम कभी किसी लड़की के करीब नहीं गये? कोई भी गर्लफ्रेंड नहीं रही तुम्हारा अब तक? क्या यह सच है या मजाक कर रहे हो तुम? मैंने तो सोचा था की तुम बड़े मजनू टाइप के हो और इस अपार्टमेंट की कई लड़कियों और औरतों के साथ मजा कर चुके हो। मैं तुम्हारे बारे में ऐसा सोचती थी हमेशा से...”

ओम- “बिल्कुल नहीं मेडम... ऊवूप्स सारी अदिति, बिल्कुल नहीं। जहाँ तक लड़कियों का सवाल है तो मैं बहुत बदनसीब रहा हूँ इस मामले में। जब भी किसी के करीब जाने की कोशिश किया नाकामयाब रहा हैं हमेशा से। मगर आपसे बड़ी उम्मीद है की आप मुझको नहीं ठकराओगे। हम्म... नहीं ना?” और ओम ने बहत उदास चेहरे से अदिति के आँखों में झाँका। यह सब विशाल का सिखाया हुआ था। अब तक ओम सब सही किए जा रहा था।

अदिति को बहुत अफसोस हुआ ओम की बातों को सुनकर, उसका मन किया की तुरंत ओम को खुश करे। मगर एक हिचकिचाहट सी थी उसके अंदर। अदिति खुद को नहीं समझ पा रही थी उस वक़्त।

अदिति ने ओम से कहा- “हम्म... तो तुम कुँवारे हो, तुमको औरत के बारे में कुछ भी नहीं पता है? तो मुझको कैसे कुछ करोगे जब कुछ पता ही नहीं तुमको? नादान हो, नासमझ हो तो तुम्हारे खयाल से मुझको तुम कुछ दे सकोगे क्या? हाँ ओम?"

ओम- “वो तो अपने आप आ जाएगा अदिति, आखिर एक मर्द हूँ ना? मेरे खयाल से सब अपने आप होगा नेचुरली होगा मेरे इन्स्टिंक्ट्स मुझसे सब सही करवाएगा..."

अदिति- “हम्म... तो तुम बहुत हाथ से काम चलाते हो क्यों? बोलो बोलो शर्माओ मत। हीहीहीही..” मतलब मूठ मारते हो।

ओम को शर्म आ गई और अपने सिर को झुका लिया उसने। जैसे की उसकी चोरी पकड़ी गई हो। अदिति को अच्छा लगा क्योंकी जब ओम ने सिर झुका लिया तो अदिति की जीत थी और ओम की हार तो अदिति ने सोचा अब वो ओम को डामिनेट करेगी।

अदिति ने सवाल किया- “जब मूठ मारते हो तो किसको सोचते हो? फिल्मी हेरोयिनों को? हाँ... तुम्हारी फँटसीस क्या हैं? बताओ मुझे मैं जानना चाहती हूँ..” कहकर अदिति ने अपनी दोनों जांघों को एक साथ जोर से दबाया जैसे उसके रोंगटे खड़े हो रहे थे।

ओम ने सिर झुकाए हुए अदिति की जाँघ पर हाथ रखने की कोशिश करते हुए कहा- “जब मैं टीनेजर था तब फिल्मी हेरोयिनों को सोचा करता था, मगर जबसे आपको देखा है सिर्फ आपको दिमाग में लाता हूँ यह करते

वक्त..."

अदिति का चेहरे लाल हो गया फिर भी बहुत कान्फिडेन्स से कहा- “अच्छा? मुझको सोचते हो, तब तो मेरे लिए गर्व की बात होनी चाहिए, पता नहीं और कितने लोग मुझे और मेरे जिश्म को सोचकर मूठ मारते होंगे। तुम भी। अच्छा मुझे बताओ पहली बार जब तुमने मुझको सोचकर मूठ मारा था तो कैसे सोचा था मुझे? सब मुझको डीटेल्स में बताओ...”

यह विशाल के प्लान के मुताबिक बिल्कुल नहीं था। किसी ने भी नहीं सोचा था की अदिति ऐसे सवाल करेगी ओम से? मगर इतना जरूर बताया था विशाल ने ओम को की अगर अदिति कोई ऐसा सवाल करे जो प्लान में नहीं है तो अपने दिमाग का इश्तेमाल करके ऐसा जवाब देना अदिति को जिससे अदिति को खुशी हो। और अदिति ओम के जवाब का इंतेजार कर रही थी उसके चेहरे में देखते हुए।

ओम ने कहा- “हाँ तो जब पहली बार आपको देखकर मैंने मूठ मारा। वो जिस दिन आप पहली बार इस अपार्टमेंट में आई थी उसी दिन को था। आप अपने पति के साथ दिन में आई थी इस बिल्डिंग और अपार्टमेंट को चेक करने के लिए, और मुझसे आपने बात किया था की यहाँ के लोग कैसे हैं? अच्छे हैं या नहीं? आप एक पीली साड़ी में थी और मैं आपकी कमर को बार-बार देख रहा था। आपका क्लीवेज थोड़ा बहुत दिख रहा था और मैं आपकी चूचियों को देख रहा था।

क्योंकी आपकी धड़कनों के साथ उसका जो उठना बैठना था वो बहुत साफ नजर आ रहा था, और मुझको बहुत अच्छा लगा था उस दिन आपको देकरकर। उस दिन जब आप चली गई तो मैं तुरंत बाथरूम गया था मूठ मारने आपको सोचते हुए। और मैं दुआ करता रहा की आप इस जगह को पसंद कर लें और यहीं रहने को आ जायें। फिर अगले 3-4 दिन मैं आपको उस पीली साड़ी में सोचते हुए मूठ मारता रहा। फिर जब आप यहाँ रहने के लिए आ गई तो मेरी खुशी की इंतेहा ना थी। इस बिल्डिंग की आप पहली औरत थी जिसने मेरे लण्ड को खड़ा किया था। इस बिल्डिंग की किसी भी औरत ने वो काम नहीं किया था मेरे ऊपर। तो फिर मैंने आप पर नजर रखना शुरू किया उसी दिन से। और जिस दिन आपसे टांग ऊपर उठाने को कहा उस दिन तो कई बार मैंने मूठ मारी थी, आपकी जांघों के बीच देखकर पागल हो गया था। मैं उस वक्त आपको यहाँ मिलने को आने वाला था अगर कोई और होता गेट पर रहने के लिए तो उसी वक़्त आता मैं आपके पास। उस रोज मैंने सिर्फ आपकी जांघ नहीं आपकी सफेद पैंटी भी देखी थी। वा। ओह माई गोड.”

अदिति हँस रही थी ओम को सुनते हुए और दाँतों में अपने होंठ दबाते हुए एक शैतानी मुश्कान से अदिति ने कहा- “इतनी दूर से तुमने मेरे पैंटी को देख लिया था? कमाल है मुझे खुद याद नहीं उस दिन को मैंने कौन सी वाली पहनी हुई थी। अच्छा अब मुझे यह बताओ की मेरे जिश्म का कौन सा हिस्सा तुमको ज्यादा आकर्षित करता है? मतलब किस हिस्से को तुम ज्यादा देखना पसंद करते हो? कौन सा हिस्सा तुमको ज्यादा पसंद है मेरे जिश्म में?”

बिना झिझक के ओम ने अदिति की जांघों पर हाथ रखते हुए कहा- “यह, यह वो अंग हैं आपके जिश्म में जिसे मैं सबसे ज्यादा चाहता हूँ, यह मेरी जान का दुश्मन है। जब भी आप स्कर्ट में होती हो तो मैं दीवाना हो जाता हूँ, इनको खाने को मन करता है, इसके अलावा आप तो हर अंग से बेहतरीन हो, आपकी आवाज बहुत पसंद है मुझे, आपकी मुश्कान जान लेवा है, जिस अदा से आप बातें करती हो, जिस तरह से नजदीकियां बढ़ाती हो, जिस तरीके से आप चलती हो, सब कमाल के होते हैं। आप में सब कुछ बहुत खास होती है जो किसी भी मर्द को दीवाना कर देती है...”

विशाल सब कुछ देख और सुन रहा था, उसका लण्ड खड़ा हो गया था, हाथ से अपने लण्ड को दबाते हुए सब

सुनता जा रहा था।

विशाल ने खुद से कहा- “यह साला ओम तो मुझसे भी बड़ा वाला निकला। इसको तो यह सब नहीं कहा था मैंने कहने के लिए, यह तो एक नंबर का फ्लर्ट निकला साला...”

और अब ओम से और रहा ना गया। अदिति की छोटी ड्रेस के अंदर अपने हाथ को ओम ने और अंदर करना चाहा, और धीरे से ओम ने अपने होंठ को अदिति की जाँघ पर रख और चूमने लगा उसकी चिकनी जांघों को। अदिति ओम को मना नहीं कर पाई और अपने जिश्म को सीधा करते हुए लेट गई बेड पर। जबकी ओम चूमता गया उसकी जांघों को और विशाल का जिश्म खुशी से काँप उठा सब देखते हुए।

* * * * * * * * * *
 
कड़ी_52 अदिति और ओम हैविंग ग्रेट टाइम

ओम से रहा नहीं गया, कैसे कोई रह सकता है जब एक जवान, खूबसूरत, हाट और सेक्सी औरत सामने बेड पर ऐसे बैठी या लेटी हो तो? जरा उसकी जांघों के अंदर देखिए, जांघों के बीच वाह... इतनी उभरे हुए जांघे हाए रे सस्स्स्स्स्स्श ह।

ओम की नजरें उसकी जांघों से हटती नहीं थे और उसका हाथ जांघों पर बढ़ता चला जा रहा था ऊपर की तरफ, धीरे-धीरे उसकी नर्म, मुलायम चमड़ी को महसूस करते हए अपने हथेली से। अब अदिति ओम के सामने और करीब थी बेड पर तरह-तरह के पोज लेते हुए कभी बैठकर तो कभी लेटकर ।

कभी ओम उसकी जांघों के अंदर वाले हिस्से को देखता, कभी उसके कंधे को तो कभी उसकी ब्रा की स्ट्रैप्स को फिर उसकी क्लीवेज को। मगर ओम ज्यादा उसकी जांघों को पसंद करता था और कभी-कभी तो अंदर उसकी पैंटी को झाँकने की भी कोशिश कर लेता था, जब अदिति पोजीशन चेंज करती थी तब। और अदिति छपा भी नहीं रही थी। बल्की लगता था की जानबूझ कर वैसे बैठ या लेट रही थी, ओम को सब दिखाने के लिए, और कई बार ओम को उसकी सफेद पैंटी दिख भी गई। उस वक़्त अदिति को पता था की ओम क्या देख रहा है और उसने माइंड नहीं किया उसको अपनी नजरों से नंगी करने दिया खुद को अदिति ने।

अदिति की स्किन इतनी चिकनी और साफ थी की कोई भी उसको चाटना, चूसना चाहता, और चूसकर लाल लाल निशान कर देता उसकी स्किन पर। अदिति की शैतानी और शरारातों ने ओम को और भी हौसला दिया आगे बढ़ने के लिए, तो उसका हाथ और भी अंदर बढ़ता गया अदिति की छोटी सी नाइटड्रेस के नीचे। जब तक उसके हाथ ने अदिति की पैंटी को महसूस किया, ठीक उसकी उभरी हुए चूत के ऊपर और वो नर्म उभरे हुए मुलायम हिस्से को अपनी उंगलियों से छूकर ओम खुद सिहर गया।

जिंदगी में यह ओम का पहली बार था की उस जगह पर अपनी उंगली रखा था। उसके लण्ड से प्री-कम निकल

गया। ओम ने अपने थूक को निगलते हुए अदिति के चेहरे में देखा और खुद अपने जिश्म में एक थरथरी महसूस किया ओम ने। वो काँप रहा था, उसके हाथ थरथराने लगे। तब तक अदिति अपनी पीठ पर लेट गई थी। अदिति गहरी साँसें ले रही थी जिससे उसकी चूचियां ऊपर-नीचे हो रही थीं और ओम की तबीयत खुश हो रही थी वो देखते हुए।

विशाल अपने कोने में से अपनी पत्नी की रिएक्सन को अच्छी तरह से ध्यान से देख रहा था, बड़ी दिलचस्पी से। यही सब चेक करना चाहता था वो और आज बहुत आराम से सब देख रहा था, अदिति की नखरे, उसकी शरारत किसी गैर मर्द के साथ, उसकी नजदीकियां, उसकी अप्रोच। सब गौर से विशाल देखे जा रहा था।

विशाल खुश और उत्तेजित था यह देखकर की किस तरह अदिति बिस्तर पर लेट गई थी आराम से ओम के सामने और उस ड्रेस में। विशाल ने सोचा उस लम्हे को अदिति के दिमाग में क्या चल रहा होगा? क्या अदिति सभी रोल-प्ले को सोच रही थी जो हर रात को विशाल के साथ खेलती थी? क्या वो यह महसूस कर रही थी की वो उन रोल-प्ले में से किसी एक आदमी के साथ है? क्या वो विशाल को सोच भी रही थी या उस वक्त सिर्फ ओम के साथ दिमाग लड़ा रही थी? इन सब सवालों ने विशाल के मन में धूम मचा दिया था, उस वक़्त अदिति के चेहरे में देखते हुए।

ओम को लगा उसका सपना अब पूरा हो रहा है। उसको लगा की वो सपना देख रहा है। खुद सोचने लगा क्या वो सच में अदिति के साथ है? ये उसको सिर्फ महसूस कर रहा है जैसे हमेशा करता है उसको सोचकर मूठ मारते वक़्त?

जब ओम की उंगली ने अदिति की चूत को छुआ पैंटी के ऊपर से तो अदिति सिहर गई और उसने अपनी मुट्ठी में चादर को थामकर खींचा और ओम की आँखों में एक शैतानी मुश्कुराहट से देखा अपनी जीभ को दाँतों में में दबाते हए। ओम ने भी अदिति को देखा और अपने होठों को उसकी चिकनी जांघों पर फेरते हुए ऊपर की तरफ बढ़ने लगा।

अदिति ने एक पैर को ऊपर उठा लिया जिससे उसकी पैंटी अब साफ नजर आने लगी ओम को तुरंत। ओम ने सिर उठाकर अदिति को देखा यह सोचते हुए की क्या अदिति पैर उठाकर उसके लिए आसान कर रही है या खुद जोश में आ गई है। ओम का हौसला बुलंद हुआ और वो आराम से आगे बढ़ता गया। तब ओम ने अपनी जीभ फेरना शुरू किया अदिति के जांघों पर, और जीभ से फेरते हुए ही ऊपर की तरफ बढ़ा धीरे-धीरे ऊपर, थोड़ा और ऊपर और पैंटी के करीब आता गया।

तब अदिति ने सिसकियां लेते हुए कहा- “हम्म्म्म... हाँ ओम जारी रखो। सस्स्स... मगर मुझको डर है की कहीं विशाल वक्त से पहले वापस ना आ जाये...”

तब तक ओम के होंठ उसकी पैंटी तक आ गये थे और ओम गुर्राया- “फिकर मत करो वो अभी नहीं आएगा। हमारे पास पूरा वक्त है सेक्स की देवी जी...” और ओम ने उसकी पैंटी को चाटा जो पहले से भीगी हुई थी। हाँ ओम की छुवन से अदिति गीली हो चुकी थी।

जहाँ से विशाल देख रहा था बिल्कुल आसानी से साफ उसको अदिति की गीली पैंटी दिख रही थी और जैसे की ओम को सिखाया गया था, उसने अपने सिर को कुछ इस तरह पोजीशन में किया ताकी विशाल को उस जगह से ठीक से दिख सके। एकाध बार ओम देखने की कोशिश कर रहा था की विशाल देख रहा है या नहीं? मगर उसको कुछ नहीं दिखा। क्योंकी उसको नहीं पता था की किधर से विशाल उसको देख रहा होगा? मगर उसको मालूम था की विशाल सब देख और सुन रहा है।

ओम ने अदिति की पैंटी को चूसा, चूत पर से ही और उससे अदिति के जिश्म में एक थरथरी सी हुई और वो काँप उठी, तड़पी और सिसकियों के साथ गहरी साँस लिया। फिर अचानक अदिति ने ओम के सिर को अपनी जांघों के बीच हाथ में जोर से दबाया।

ऐसा लग रहा था की ओम की गर्दन अदिति की उभरी हुए जांघों के बीच कैद हो गई है। तब ओम ने अपने हाथ को अदिति की चूचियों पर किया ड्रेस के ऊपर से ही और इतने जोरों से दबाया की अदिति तड़प उठी। उसकी तड़प को सुनकर ओम और जोरों से चूचियों को दबाता और मसलता गया की अदिति भी और ज्यादा तड़पती आवाज में करहाने लगी।

नीचे ओम ने अदिति की पैंटी को अपने दाँतों से नीचे खींचने लगा। तब अदिति समझ गई की उसे ओम को

अब रास्ता देना चाहिए तो उसने अपनी जांघों को ढीला किया। तब ओम का सिर आजाद हुआ उसकी जांघों की कैद से। और तब ओम ने धीरे से, बहुत आराम से उसकी पैंटी को नीचे करते हुए निकाला और खुद अदिति ने एक टांग को ऊपर उठाकर पैंटी को बाहर निकालने दिया। मगर तब भी ओम का मुँह अदिति की चूत पर था सिर्फ उसका हाथ पैंटी निकाल रहा था। उसका मुँह उसकी चूत को चूस रहा था।

अदिति की आवाज निकली- “उफफ्फ... उई माँ इसस्स्स...” अदिति की चूत का रस जांघों के नीचे बह गया था जिसको ओम ने चाटते हुए साफ किया।

उसकी ड्रेस को ओम ने ऊपर उसकी कमर तक उठा दिया, तो कमर से नीचे पूरी नंगी थी और उसकी गदराए चूतड़, कमर, जांघे सब ओम का खुराक बना हुआ था, फिर ओम की आसानी के लिए अदिति ने दोनों टाँगों को दोनों तरफ फैला दिया। क्योंकी ओम का हाथ अदिति की चूचियां के ऊपर था तो अदिति उसका हाथ अपने मुँह तक लाई और उसकी उंगली को चूसने लगी, और उसके चूत पर ओम का थूक और अदिति की चूत का रस काकटेल बना रहे थे। ओम की उंगली चूसते हुए अदिति ने लार छोड़ते हुए अपने गले को भिगा लिया था। ओम समझ गया की अदिति की गर्मी ऊँचे तापमान पर थी।
 
उधर विशाल अपनी पत्नी को उस हालत में देखते हुए धीरे-धीरे साँसें ले रहा था, देख रहा था कैसे ओम उसकी पत्नी की चूत को खा रहा था, और सोच रहा था की किस तरह उसकी पत्नी ओम को वो सब कुछ इतने आसानी से करने दे रही थी। खुद अपने लण्ड को हाथ में पकड़े विशाल देखता गया।

धीरे-धीरे अदिति के पेट से होते हुए ओम ऊपर आ गया था अदिति के छाती की तरफ, उसकी नाभि और पेट के नीचे वाले हिस्से को चाटते चूसते हुए लाल-लाल निशान बनाते हुए चारों ओर। अदिति की पूरी ड्रेस निकाल दिया था ओम ने और खुद अपने कपड़े उतार फेंके थे उसने तब तक। दोनों अब एक दूसरे की बाहों में नंगे थे बेड पर। अदिति की छाती ओम की छाती पर बिल्कुल सटी हुई थी। दोनों एक दूसरे के मुंह को नोच रहे थे। कभी वो अदिति के ऊपर था तो कभी अदिति ओम के ऊपर थी। दोनों बिस्तर के ऊपर लोट रहे थे उसको रौंदते हुए।

मगर किस इतना पैशनेट और डिमांडिंग था के किसी को होश-ओ-हवास नहीं था उस वक्त की क्या हो रहा है

आस-पास। एक दूसरे के मुँह में मुँह लिए एक दूसरे का रस पी रहे थे। साँसें उखड़ रही थीं लंबी किस की वजह से। फिर अचानक दोनों ने किस को रोकते हुए एक साथ लंबी साँसें ली दोनों ने। उस वक्त अदिति ओम के ऊपर था, उसके बाल ओम के चेहरे के ऊपर थे।

अदिति ने सिर को एक झटका दिया बालों को पीछे करने के लिए, फिर एक नटखट मुश्कुराहट के साथ, एक होंठ को दाँत से दबाए उसने ओम के चेहरे में देखा, और एक लंबी साँस लेकर पूछा।

अदिति- “तो ओम वाचमैन ने आखीरकार मुझको मेरे बेड पर नंगी कर ही दिया साँ... तुमको अपने आप पर बहुत गर्व हो रहा होगा ना ओम? तुम कामयाब हो गये बोलो?"

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उस समय अदिति क्योंकी ओम के ऊपर थी तो ओम का लण्ड अदिति की चूत से दबा हुआ था, कुचला हुआ था उस वक्त। ओम उसको रगड़ना चाहता था उसकी चूत पर। ओम की बाहें अदिति के पीठ के ऊपर थी और उसकी उंगलियां अदिति की नंगी पीठ पर फिर रही थीं। जबकी अदिति की बाहें ओम के गले का हार बनी हई थीं। कुछ ब्लैक और सफेद जैसा नजारा था, जिस तरह से दोनों के जिश्म के रंग की मिलावट दिख रही थझ। अदिति बिल्कुल गोरी और ओम का सांवला जिश्म।

ओम ने खुशी से जवाब दिया- “मुझे पता था की एक दिन आपके साथ यह करूँगा मैं। पक्का यकीन था मुझे इसका। जिस दिन से आपको देखा था, तब से मैंने कहा था की मैं अपना कँवारापन आपके साथ ही मिटाऊँगा..."

बात करते वक़्त ओम हाँफ रहा था और अदिति भी वैसे ही हाँफते हुए बोल रही थी। और कही- “हम्म... तो चलो तुम्हारे उस कुँवारे लण्ड को देखू तो, पहचान लूँगी की सच में कभी किसी लड़की ने उसको छुआ है, या तुम झूठ बोल रहे हो। अभी पता चल जाएगा मुझे, देखती हूँ तुम कितना सच बोल रहे हो? अगर सच में कुँवारा लण्ड है तब तो मैं उसको बड़े खुशी से चूसूंगी ओम। नीचे चलती हूँ अब..”

यह सब सुनकर विशाल को कोई ताज्जुब नहीं हुवा। क्योंकी उसको पता था की अदिति कितनी डिमांडिंग है सेक्स के दौरान। हाँ, मगर विशाल ने नहीं सोचा था की एक गैर के साथ भी अदिति बिल्कुल वैसे ही बात करेगी जैसे की किसी अपने से कर रही हो।

अदिति ओम के पेट के नीचे गई, जबकी ओम पीठ पर सीधा लेटा रहा। जब अदिति की उंगलियों ने उसके लण्ड को छुआ तो ओम के पूरे जिश्म में एक कंपकंपी सी हुई, थरथराहट, एक लहर दौड़ी उसकी पीठ में, माथे पर पशीने कीबूंद दिखाई दी और उसके होंठ थर्रा उठे। लण्ड बिल्कुल खड़ा हुआ ऊपर छत की तरफ देख रहा था। अदिति ने हल्के से, प्यार से, आराम से उसको अपनी मुट्ठी में लिया और सहलाया फिर ओम के चेहरे में देखा की उसने आँखें बंद कर ली हैं।

अदिति ने बहुत प्यार और नर्मी से उसके लण्ड को चूमा, और बहुत नाजुक तरीके से अपनी नर्म हथेली में उसको लिया और धीरे से अपनी जीभ को साँप के जीभ के जैसे निकालकर लण्ड के ऊपरी हिस्से पर फेरा, और फिर से ओम के चेहरे में देखा की वो तब भी आँखें बंद किए और जबड़े को कसे हुए हैं। उसकी मुट्ठी भी बंद थी जैसे मुक्का मारने वाला हो। ओम का पेट जैसे उबल रहा था उस वक्त थोड़ा ऊपर तो थोड़ा नीचे हो रहा था, पैर थरथरा रहे थे। लगता था वो जोर से चिल्लालाएगा या उठकर भागेगा। जैसे ओम का जिश्म किसी इंतेहाँ से गुजर राहा था उस वक़्त।

फिर जब अदिति ने अपनी जीभ ओम के लण्ड की छेद पर फेरी तो नमकीन लज्जत चखी अदिति ने जो ओम के प्री-कम की थी। फिर से अदिति ने ओम के चेहरे में देखा तब भी उसकी आँखें बंद थीं पर अदिति का जीभ का मजा महसूस कर रहा था अपने लण्ड के ऊपर। और जैसे एक अँधा टटोल कर किसी चीज को पहचानने की कोशिश करता है वैसे ही आँख को मुंदे हुए ही ओम ने अदिति के हाथ को टटोलते हुए अपने एक हाथ में लिया और अपनी पाँचो उंगलियों को उसकी उंगलियों में जोर से जकड़ा और अपने सीने पर रखा यह सब आँख बंद किए हुए किया ओम ने।
 
अदिति ने अपने एक हाथ को ओम के हाथ में रहने दिया और धीरे से अपना मुँह खोलकर लण्ड को मुँह के अंदर ले लिया। जैसे ही अदिति के मुँह में ओम का लण्ड गुस्सा और ओम ने महसूस किया उस अजीब गरम एहसास को अपने लण्ड के ऊपर तो काँप उठा। अपने तलवे पर थोड़ा जोर लगाया की कमर चूतड़ समेत ऊपर उठ गया, जिससे अदिति का सिर भी ऊपर उठा। ओम को खुशी भी हो रही थी और जिश्म में जो मजा और सुख मिल रहा था वो बयान के बाहर था।

मगर इसलिए की यह ओम का पहली बार था वो खुद अपनी भावनाओं को नहीं संभाल पा रहा था। उसको रोना भी आ रहा था और खुशी भी हो रही थी, उसकी समझ में नहीं आ रहा था की वो रोए या हँसे। उसके होंठ थरथरा गए। दोनों होंठ हिल रहे थे। अगर उस वक्त बात करना चाहता तो नहीं कर पाता होंठ के हिलने की वजह से। टाँगें भी काँपने लगी, और उसका मन कर रहा था की अदिति से चिल्लाकर रुकने को कहे। सहन नहीं हो रहा था अब उससे।

अदिति समझ गई की वो पहली फीमेल थी जो ओम के लण्ड को चख रही थी। अदिति ने बहत नर्मी और आराम से उसको चूसा, ओम को सभी खुशियां देते हुए। और खुद अदिति को बहुत खुशी और गर्व महसूस हुई की उसको एक कुँवारा लण्ड मिला चूसने को आज। अदिति ने उस लण्ड को खूब जी भर के निहारा, उसको प्यार किया, उसको सीने से लगाया, अपने चूचियों पर रगड़ा, उसकी लंबाई को नीचे से ऊपर तक जीभ से चाटा। और पता नहीं क्या-क्या किया अदिति ने।

अदिति अपने मुँह को इस तरह चला रही थी लण्ड के ऊपर, बिल्कुल जैसे मूठ मारते वक्त हाथ चलाते हैं। चूसते हुए अपने सिर को ऊपर-नीचे किए जा रही थी, अदिति ने अपने मुँह को जोर से दबाया लण्ड पर ताकी ओम को मजा आए और टाइट महसूस हो। अपनी उंगलियों से ओम के नीचे का अंडा सहलाते हुए चूसे जा रही थी ओम को। और फिर उसके एक आंडे को अदिति ने मुँह में लिया जिससे ओम की आवाज निकली “आगघ्गह...” और फिर अदिति चूसती गई ओम के लण्ड को आराम से अपने हाथ और उंगलियों को उसके पेट और गाण्ड पर फेरते हुए।

ओम से नहीं सहा जा रहा था। जिंदगी में पहली बार एक औरत ने उसके लण्ड को मुँह में लिया था और इतना कुछ किए जा रही थी। ओम चिल्ला उठा जोर से- “बस, बस, रुको अब। मैं झड़ने वाला हूँ स्टाप...”

मगर अदिति नहीं रुकी। उसने चूसना जारी रखा। ओम का लण्ड अब भी अदिति के मुँह के अंदर ही था, अदिति ने उसके लण्ड को अपने मुँह में कैद कर लिया, अपनी आँखों को ऊपर उठाकर ओम के चेहरे में देखते हुए। वो चिल्लाया, तड़पा और आँखें खोला, अदिति के चेहरे में देखा, दोनों की नजरें मिली और ओम समझ गया की अदिति चाहती है की वो उसके मुँह के अंदर झड़े। और ओम ने अपने सारे वीर्य को अदिति के मुँह के अंदर ही झड़ने दिया। जबकी अदिति हौले-हौले अपना हाथ उसके लण्ड के बाकी हिस्से पर फेरती गई, जब तक ओम ने अपना सभी पानी नहीं छोड़ दिया उसके मुँह के अंदर।

ओम ने खुद को कुसूरवार महसूस किया और अदिति के चेहरे में देखते हुए कहा- “आई आम सारी अदिति जी, यह मेरा पहली बार है और मैं नहीं संभाल सका, बहुत मजेदार था सब। जो हुआ मस्त हुआ आपने कमाल के सब किए मगर मैं आपको नहीं खुश कर पाया."

अदिति ने उसका आखिरी बूंद गिरने दिया अपने मुँह में तब लण्ड को बाहर निकालकर सब वीर्य को बाहर थूक कर अपने दोनों हाथों में लिया, और ओम को दिखाया की कितना वीर्य छोड़ा उसने उसके मुँह के अंदर। फिर एक टिश्यू पेपर से अदिति ने सब साफ किया और ओम ने अदिति के मुँह को अपने मुँह में लिया और उसकी जीभ चूसने लगा, और खुद अपने वीर्य को महसूस किया अदिति के मुँह में उसने। और फिर से दोनों एक लंबे किस में खो गये, दोनों के जिश्म एक दूसरे से जकड़े।

जब किस खतम हुई तो ओम ने कहा- “आप फिकर मत कीजिए, थोड़ी देर में करूँगा, मुझे आपके अंदर डालना है इसको अभी। और मैं आपको झड़ते हुए देखना चाहता हूँ..”

विशाल भी झड़ने ही वाला था मूठ मारते हुए सब देखकर। अपनी पत्नी के मुँह में किसी और के वीर्य को देखकर क्या महसूस किया विशाल ने? यह वही जाने। पर उसने खुद से यह कहा- “पता नहीं की अदिति ने दीपक और राकेश के साथ भी ऐसा किया था? इसका पता लगाना पड़ेगा...”

ओम तब अदिति का दूध पी रहा था एक नन्हे मुन्ने बच्चे की तरह। अगर सच में दूध होता तो बच्चे का हिस्सा मार लिया होता अब तक उसने।

अदिति ने एक अंगराई ली और पूछा- “सच में कर पाओगे और एक बार। हाँ.. तुम्हारा लण्ड तो हार्ड ओन है, कैसे नरम नहीं हुआ झड़ने के बाद भी?”

ओम ने कहा- “अदिति आप बहुत हाट और सेक्सी हो कि बिना आपसे करे नरम हो जाऊँ कुछ तो बचा के रखा हूँ अंदर मैंने आपके लिए। आप फिकर मत करो आपको इतना पूजा है की कुछ भी हो जाए जरूर करूँगा और आपको खुश भी करूँगा अभी के अभी। बल्की इस बार ज्यादा लंबा चलेगा क्योंकी अभी-अभी झड़ा हूँ। गरम खून है अदिति जी हो जाएगा और एक बात... तीन बार लगातार मूठ मारता हूँ आपको सोचकर तो अभी क्यों नहीं कर सकूँगा भला? फिर ओम ने अदिति को लेटाया बेड पर और उसकी चूचियां चूसने लगा, उसके जिश्म पर अपने हाथ फेरते हुए। इस बार अदिति ने आँखें बंद कर लिया ओम को महसूस करने के लिए।

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कड़ी_53 अदिति और ओम स्टिल एंजायिंग ।

ओम अदिति की चूचियों को चूसे जा रहा था बिल्कुल जैसे एक बच्चा अपनी माँ का दूध पीता है, और क्योंकी अदिति को आर्गेज्म नहीं आई थी तब तक वो बहुत ही एंजाय कर रही थी ओम की छुवन को अपने जिश्म पर उस वक्त। साथ-साथ ओम के हाथ अदिति की जांघों के बीच से होते हुए उसके अंदर की नर्म मुलायम उभरे हुए हिस्सों को महसूस कर रहा था अपनी उंगलियों से। ओम अदिति को चूस रहा था, चाट रहा था, थूक से अदिति के गाल से लेकर उसके गले पर चारों तरफ भिगा दिया थे ओम ने, और उसकी नाभि, और पेट के नीचे का हिस्सा चाटता गया, और उसकी चूत की कुछ दिन पहले के काटे गये छोटे-छोटे बाल पर अपनी जीभ फेरता गया। जिससे अदिति अपने जिश्म को साँप की तरह ऐंठने लगी बिस्तर पर।

ओम का मुँह अदिति की चूत पर जैसे ही पहुँचा, अदिति ने उसका सिर अपने हाथों में दबा लिया। फिर अपनी उंगलियों को ओम के सिर के बालों में फेरा। जिससे ओम को बहुत आराम मिला और अच्छा महसूस हुआ और आगे बढ़ने का हौसला मिला।

उधर विशाल अदिति को बड़ी दिलचस्पी से देखे जा रहा था अपने लण्ड को हाथ में पकड़े, जो उस वक़्त नरम हो चुका था। वो बहुत खुश था की उसको उसी तरह अदिति को देखने का मौका मिल रहा था जैसे उसने चाहा था। विशाल को यह भी लगा या पता चला की उस वक्त अदिति उसके बारे में बिल्कुल नहीं सोच रही होगी। बल्की उस वक़्त सिर्फ और सिर्फ जो उसके हाथ में है उसी का अदिति भरपूर आनंद उठा रही थी और एंजाय किए जा रही थी। विशाल को इतना मन था देखने को की क्या अदिति किसी और आदमी के साथ एंजाय करेगी की नहीं? और यह था आज का वक़्त जब विशाल सब देख रहा था की सच में अदिति कितनी एंजाय कर रही थी किस गैरमर्द के साथ।

हाँ असल में सचमुच अदिति किसी दूसरे मर्द के साथ बहुत ही खुश थी इस वक्त। अब हो सकता है की ओम को इतनी ज्यादा अटेन्शन दे रही थी क्योंकी ओम कुँवारा था। विशाल ने सोचा तो किया किसी और मर्द के साथ भी अदिति ऐसा ही बिहेव करेगी?

ओम का फिर से खड़ा होने लगा, जब अदिति का हाथ उसके बालों से हटकर पीठ से होते हुए उसके लण्ड तक पहँचा। नरम और मुलायम अदिति की उंगलियों ने उससे ऐसे खेला जिससे ओम खुशी से कराह उठा। तब तक ओम की जीभ फिर से अदिति की चूत की पंखुड़ियों को चूसने मसलने लगी थी और उस हरकत से अदिति बिल्कुल भीग गई, और बेड पर अदिति ऐंठती जा रही थी, कभी अपने चूतड़ों को ओम के सामने करते हुए, तो कभी अपनी गाण्ड को ओम के मुँह के सामने करते हुए।

मतलब अदिति बेड पर उलट पुलट रही थी और उसकी गाण्ड ओम को दे रही थी चूमने चाटने के लिए और फिर कभी पीठ के ऊपर उलट जाती थी की ओम उसकी चूत का रस पिए। अदिति बेचैन थी और जिस किसी हिस्से को ओम चूम या चाट रहा था अदिति को मजा आ रहा था। धीरे-धीरे एक बार फिर अदिति उठ बैठी और ओम के लण्ड को दोबारा मुँह में ले लिया बिना फरमाइश किए ही।

तुरंत बाद ही ओम ने भी अदिति के चेहरे को अपने हाथों में लेते हुए उसके मुंह को अपने मुँह में ले लिया और उसकी जीभ को चूसते हुए उस शहद को पिया। अदिति ने बहुत प्यार और नर्मी से ओम के दोनों गालों पर अपने हाथ फेरते हुए उस किस का जवाब किया अपनी चूचियों को ओम की छाती पर रगड़ते हए। अदिति उस वक़्त सिचुयेशन को डामिनेट कर रही थी, बिल्कुल एक डामिनेटिंग पार्टनर दिख रही थी उस वक्त। पूरी सिचुयेशन को वही कंट्रोल कर रही थी, और बिना तजुर्बे के ओम ने अदिति को कंट्रोल लेने दिया, जैसे की अदिति को ओबे करते जा रहा था।

अदिति ने ओम के गाल चाटते, एक हाथ से उसके लण्ड को सहलाते हुए ओम के कान में फुसफुसाया- “तुमने कभी इसको एक लड़की के अंदर नहीं डाला है बेबी? हम्म्म्म... आज पहली बार किसी छेद में घुसने वाला है... हाँ बोलो मुझे हम्म..”

ओम थोड़ा बहुत काँपते हुए और वापस फुसफुसाते हुए ही जवाब दिया- “हाँ जी... आज पहली बार अंदर घुसेगा, मुझे पता नहीं कैसा महसूस होता है और अब अंदर डालना चाहता हूँ अदिति जी। डालूं क्या अब?”

अदिति ने बड़े प्यार से ओम के चेहरे में देखते हुए और एक शैतानी मुश्कराहट के साथ कहा- “हाँ बेबी, हाँ मैं कब से इंतेजार कर रही हूँ इसको अपने अंदर लेने के लिए..."

कहकर दोनों टाँगों को फैलाते हुए अदिति अपनी पीठ पर लेट गई और ओम को अपने अंदर लेने के लिए तैयार हो गई, और नजरों के इशारे से ओम को अंदर घुसाने का इशारा किया।

अदिति को वैसे देखकर ओम का जमकर खड़ा हो गया और अपने लण्ड को हाथ में लेकर ओम ने जोर से हिलाया, पहले अपने जबड़े को कसके दबाते हुए। फिर ओम ने बिल्कुल वक़्त जाया नहीं होने दिया और अदिति की फैलाये हुई जांघों के बीच पोजीशन लिया और अपने लण्ड को हाथ में थामे हुए सबसे पहले उसको अदिति के घुटने पर फेरा, फिर हल्के से जाँघ पर दबाया तब धीरे-धीरे लण्ड को अदिति की चूत तक ले गया।

अदिति तब तक ओम को देख रही थी सीधे उसकी आँखों में वो सब करते हए। अदिति को भी बड़ा मन था ओम की खुशी और मजा देखने और महसूस करने को के जिंदगी में पहली बार एक चूत के अंदर अपने लण्ड को घुसयेगा वो। अदिति ओम के मन को पढ़ने की कोशिश कर रही थी उसकी नजरों की गहराईयों में देखते हुए, और कभी उसको अपनी हथेली से सहलाते हुए ओम को हौसला देती जा रही थी।

आखीरकार, ओम ने अपने लण्ड को अदिति की चूत के द्वार पर छुवाया, अंदर नहीं डाला रुक गया, अदिति के चेहरे में देखा। अदिति समझ गई की यह उसका पहली बार था इसलिए शायद हिचकिचाहट हो रही है उसको। तो अदिति ने खुद अपने हाथों में उसके लण्ड को लिया और अपने अंदर किया, फिर अपनी चूतड़ों को ऊपर उठाते हए खुद अपनी कमर को पुश करते हए ओम के लण्ड को अपने अंदर समाने दिया। जैसे ही लण्ड पूरा उसके अंदर घुस गया तो अदिति ने एक लंबी सांस बाहर छोड़ी और ओम ने खुद को जन्नत में महसूस किया अपने चेहरे को तोड़ मरोड़ के एक फन्नी कैरेक्टर की तरह मुँह बनाते हुए उसने “सस्स्स्स.... आह्ह... उघघह...” किया।
 
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