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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

अदिति ने थोड़ा सा अपने सिर को उठाते हुए ओम की कमर पर अपने दोनों हाथों को रखकर उसको अपनी गहराई में और ज्यादा किया उसके लण्ड को अपनी अंदर महसूस करते हए। जबकी ओम भी अपने लण्ड को एक गरम जगह के अंदर महसूस करते हुए बहुत खुश होता जा रहा था, और खुद समझ नहीं पा रहा था की हँसे या चिल्लाए खुशी के मारे।

ओम ने अपने आँखों को बंद किया, सिर को ऊपर उठाया और और गुर्राते हुए जिंदगी में पहली बार अपने लण्ड को एक चूत के अंदर महसूस करते हुए उसकी आss निकल पड़ी। कितने सालों से इस दिन का इंतेजार था उसको और जब से अदिति को देखा था सैकड़ों बार इसी लण्ड को पोलिश कर चुका था अदिति की याद में।

आज उसी लण्ड को उसी अदिति के अंदर डालकर कितना मजा आ रहा था ओम को, वो बयान नहीं किया जा सकता। फिर ओम ने आँखें खोलकर अदिति को देखा तो पाया की अदिति उसी के चेहरे में देख रही थी, उसको मजा लेते हुए अप्रीशियेट कर रही थी। क्योंकी अदिति समझ रही थी की ओम की खुशी का इंतेहा नहीं थी उस वक्त।

अदिति ने जब देखा की ओम उसको देख रहा है तो आँखों के इशारे से अदिति ने पूछा- “क्या?"

ओम ने कहा- “अंदर गरम है, इतना गरम होता है अंदर क्या?"

अदिति ओम को जोर से गले लगाते हुए हँसी और कहा- “हाँ उल्लू, ऐसा ही होता है अंदर। क्योंकी मेरे जिश्म के भीतर है तो गरम नहीं होगा जिश्म के भीतर? तुम बस महसूस करते जाओ और एंजाय करो अपनी पहली चुदाई मेरे साथ ओम। मुऊआह..” अदिति ने ओम को और अपने करीब खींचकर उसको चूमने और चाटने लगी, उसके धक्के को धीरे-धीरे बढ़ते हुए महसूस करने लगी।

ओम अंदर-बाहर करने लगा अपने लण्ड को, और धीरे-धीरे उसके धक्के रफ़्तार पकड़ने लगे। ऊपर अदिति ओम के मुँह को खा रही थी। अदिति एक जंगली बिल्ली की तरह थोड़ी वाइल्ड होती जा रही थी ओम के बालों को अपने मुट्ठी में जकड़कर उसके चेहरे को नोच रही थी अपने दाँतों से, और खुद अपनी गाण्ड उछालने लगी थी

ओम के लण्ड को अपने अंदर महसूस करते हुए।

अदिति के बाहों ने ओम के कंधे से होकर जाकर लिया ओम को अपने छाती पर। उसकी चूचियां ओम के जिश्म से बिल्कुल चिपकी हुई, दोनों के जिश्म एक दूसरे के पशीने से और भी चिपक गये थे। लगता था दोनों एक शावर में हैं इस कदर से दोनों पशीना-पशीना हो चुके थे। एक हाथ से ओम ने उसकी एक चूची को दबाने की कोशिश किया। वो चूची जिसके लिए वो इतने महीनों तक तड़पा था, उसको यकीन नहीं हो रहा था की आज उसको अदिति की पूरी जिश्म उसको जैसे एक ट्रे पर मिल गई हो। दोनों जल्द ही हाँफने लगे, साँस उखड़ने लगी और इस बार अदिति पहले झड़ने वाली थी। अदिति तड़पी, उसकी जिश्म थरथराई, वो कराह उठी, उसके जिश्म में एक आग सी भड़की।

अदिति चिल्लाई- “आहह... सस्स्श ह... उफफ्फ.... हाँ हाँ बेबी कम इन.... आई आम कम्मिंग... ओस माई गोड... इट्स सो गुड... उम्म्म...” और अदिति ने ओम को इतना कसके अपनी बाहों में दबाया और इतनी जोर से उसके कंधे पर दाँत काटा की ओम चिल्ला उठा।

ओम- “दुख रहा है बस करो प्लीज..."

तब अदिति ने जहां-जहां दाँत काटा था वहाँ अपनी जीभ को फेरा। ओम ने महसूस किया की अब उसका लण्ड बहुत आसानी से अंदर-बाहर होने लगा था। क्योंकी अदिति ने अपने सारे रस छोड़ दिए थे, बिल्कुल गीली हो गई थी उसकी चूत, और ओम का लण्ड बहुत आसानी से अंदर-बाहर होने लगा था।

ओम ने फिर भी धक्के की रफ्तार कम नहीं किया और जल्द ही वो भी चिल्लाया- “आअग्गघ्गघह... इसस्स्स्स... मैं झड़ने वाला हूँ क्या करूँ? अंदर झड़ जाऊँ या बाहर निकालूं? जल्दी बोलो.”

ओम पूछ ही रहा था की अदिति ने खुद अपनी कमर को हिलाते हुए उसके लण्ड को अपने हाथ में लेकर हिलाने लगी अपने जीभ को उसके ऊपर फेरते हुए, एक बार फिर से उसके वीर्य को चखते हुए अपनी जीभ पर। अदिति उसके लण्ड के ऊपर बिल्कुल उस तरह अपने हाथ चला रही थी जैसे मूठ मारते वक़्त चलाते हैं। और ओम ने उसकी चूचियों और गले पर पिचकारी छोड़ा और कसमसाता गया। ओम ने अपने वीर्य को अदिति की छाती और गले पर बहते हुए देखा तो उसको गर्व महसूस हुआ और विजयी भी माना उसने अपने आपको, और भगवान का शुक्रिया अदा किया की आज विशाल की हेल्प से उसी की बीवी को चोदने में वो कामयाब हो गया।

विशाल ने दोनों के सभी कारनामें देखते हुए बड़े जबरदस्त मूठ मारा और झड़ भी गया। उसको बहुत ही मजा आया अदिति को चुदवाते हुए देखकर। जो सबसे ज्यादा पसंद आया विशाल को वो था अदिति को सब खुशी से करते हुए देखना। यही सबसे ज्यादा जरूरी था विशाल के लिए की अदिति आराम से और खुद अपनी खुशी से किसी और के साथ करते हुए खुद एंजाय करे, और विशाल ने वही देखा और बहुत खुश था वो सब देखकर और अब उसको यकीन हो गया की अदिति उसके अलावा किसी और से भी करते वक्त भी उतना ही मजा लेती है और एंजाय करती है। विशाल तब भी छुपे हुए उन दोनों को देख रहा था और अब उनकी बातें सुनना चाहता था।

अदिति लेट गई ओम को बाहों में लिए हुए और दोनों हाँफ रहे थे बड़े जोरों से और पशीना--पशीना हो चुके थे। जब अदिति साँस ले रही थी तो उसकी चूचियां ऊपर नीचे उठ बैठ रही थीं, ओम के सिर पर आराम से लेटे हए। अदिति खिकखिलाई और एक लंबी सास लेते हुए कहा- “तो इस अपार्टमेंट के वाचमैन ने आज अपनी वर्जिनिटी खो दिया आखीरकार."

ओम मुश्कुराया और कमरे के बाहर देखने की कोशिश किया, यह सोचते हए की विशाल कहीं से देख रहा होगा उन दोनों को। तब ओम ने अपने कंधे की उस जगह पर खुद हाथ फेरते हुए कहा- “बाप रे... खून निकाल दिया है तुमने तो। कितनी जोर से दाँत काटा था तुमने? जल भी रहा है। तुम एक औरत वैम्पायर तो नहीं?"

अदिति ने सारी कहा और उसको खामोश किया एक प्यार भरे किस से। फिर दराज से निकालकर कुछ मरहम लगाया ओम के कंधे पर। जब अदिति नंगी बेड से उतरकर चलकर दराज तक गई तो ओम उसकी नंगी बाडी की फाइन फिगर को देखते हुए सोचा की एक परी उसके सामने चल रही है जो अभी-अभी आसमान से नंगी उतरी है।

विशाल उस वक्त ओम की आँखों में अदिति के लिए चाहत और सेक्स की चाह देख रहा था।

री थी ओम को बताने की कि उसके जांघों के बीच अंदर की तरफ ओम ने कितने लाल-लाल निशान बनाये हैं चूस-चूस कर, फिर अपनी चूचियां की बगल और कांखों पर भी दिखाया ओम को कि कितने लाल धब्बे हो गये हैं उसके चूसने से उन जगहों पर।

अचानक अदिति बेड से कूदी और चिल्लाई- "इट्स टाइम टु गो, जाओ यहाँ से विशाल आता जोगा 10:00 बजने को हैं, जाओ जाओ जाओ ओम...”

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कड़ी_54 ओम और विशाल बात करते हैं

जब ओम और विशाल दोनों के काम पूरे हए तो अंडरग्राउंड पार्किंग में दोनों विशाल की कार में बैठकर कुछ बातें किए। इससे पहले की विशाल कुछ पूछता।

ओम ने कहा- “सर जी, वो मुझको छत से देखेगी। उसने कहा था की इस वक्त वो छत पर होगी.."

इन बातों को विशाल ने नहीं सुना था क्योंकी तब तक वो निकल चुका था वहाँ से जब अदिति ने ओम को जाने के लिए कहा। तो विशाल ने ओम से अदिति को फोन करके यह कहने को कहा की उसको इस वक्त छत पर नहीं आना चाहिए, वरना जो वाचमैन अभी है वो सब कुछ समझ जाएगा और उसको पता चल जाएगा की मैं तुमसे मिलने आया था। ओम ने वही किया और फिर दोनों ने बातें किया।

ओम ने शुरू किया बहुत खुशी से पूछते हुए- “तो बोलो साब कितना पसंद आया आपको सब कुछ, आशा है की आपने खूब एंजाय किया होगा..."

विशाल ने मुश्कुराते हुए जवाब किया ओम को- “बहुत खुशी हुई मुझे ओम। मैं बयान नहीं कर सकता की मुझे कितनी खुशी हुई अदिति की उस हालत को देखकर तुम्हारे साथ। वो एक निम्फो है, है ना ओम?"

ओम ने विशाल के आँखों में देखते हुए हाँ कहा और यह सवाल भी पूछा- “मगर सर जी, मुझे एक बात समझ में नहीं आई, आप उसके पति हो तो कैसे और क्यों आप उसके साथ किसी और को बिस्तर पर देख सकते हो? यह मेरी समझ में बिल्कुल नहीं आई। अगर मैं उसका पति होता तो मुझे तो जलन होती सिर्फ अगर उसकी तरफ कोई देखता भी तो, तो यह मेरे दिमाग में बिल्कुल नहीं घुस रहा की आप क्यों उसे किसी और के साथ करने देते हो?"

विशाल ने फिर से मुश्कुराते हुए कहा- “तुम यह नहीं समझोगे ओम। वो कुछ ऐसी बात हैं की मुझको बेहद मजा आता है, और हमारी रातों की सेक्स लाइफ को और मजदार बनाता है। जरा सोचो आज रात को मैं उसके साथ करते वक्त वही सब सोचकर करूँगा जो कुछ मैंने अभी-अभी देखा तुम दोनों के बीच, और वो भी तुमको सोचेगी जिस वक्त मैं उसको चोदूंगा। कुछ ऐसा है की तुम दोबारा उसको चोदोगे आज रात को, मैं, मैं नहीं रहूँगा बल्की ओम बन जाऊँगा, आज रात को उसके साथ बिस्तर पर."

ओम ने सिर झटकाते हुए कहा- “मैं फिर भी कुछ नहीं समझ पा रहा हूँ.”

विशाल ने समझाया- “देखो, अब कुछ ऐसा समझो की अदिति तुम्हारी पत्नी है, और वो उतना ही हाट और सेक्सी है, और तुम हर रात को जब उससे सेक्स करते हो तो किसी और मर्द को सोचकर करते हो, उससे रोल प्ले करवाते हो की कोई और मर्द उसके साथ कर रहा है। फिर एक दिन तुमने मुझको उसके साथ बिस्तर पर देख लिया उसको चोदते हुए, और तुम वहीं छुपकर सब देखने लगे। तुम देख रहे हो की वो किस तरह से मेरे लण्ड को चूस रही है, और पूरे सेशन को दिल से एंजाय करती है मेरे साथ। और तुम एक वायियूर की तरह सब देखने में मजा लेने लगे, और अपने लण्ड को सहलाते हुए सब एंजाय किए। कुछ महसूस हो रहा है? कुछ महसूस हुआ?”

जवाब देने से पहले ओम ने बहुत सोचा फिर कहा- “ओह माई गोड... मेरे खयाल से तो मैं नहीं एंजाय करूँगा। बल्की कमरे के अंदर घुसकर उसको पीलूंगा..."

विशाल यह सुनकर जोर-जोर से हँसने लगा और कहा- “ठीक है तो फिर भूल जाओ, इस बात-चीत को। हम तब

करेंगे जब तुम्हारी शादी हो जाएगी ओके?"

ओम ने हाँ में सिर हिलाया। मगर ओम को और कुछ पूछना था तो कहा- “आपने पिछली बार मुझसे रजिस्टर लेकर चेक किया था की कितने लोग मिलने आए थे अदिति जी से? तो क्या वह सब भी इसी काम के लिए आए थे क्या? अदिति दूसरों को भी अपने पास आने देती है क्या जी?"

विशाल ओम को अपने डैड और भाइयों के बारे में नहीं बताना चाहता था तो कहा- “ओह्ह... वो बात नहीं है, वो बस ऐसे ही मिलने को आए थे रिश्तेदार हैं वह लोग..."
 
विशाल ने ओम से फिर कहा- “तुम कभी भी तैयार रहो, जब मैं तुमको अदिति से मिलने के लिए भेजूं तो। और

उसको वादा करने को कहा की मेरे बोले बिना कभी भी नहीं जाओगा अदिति के पास...”

ओम ने कहा- “मैं आपके जाने बिना कभी नहीं जाऊँगा अदिति के पास..”

मगर अपने दिल में ओम ने कहा- “मैं क्या पागल हूँ जो अदिति ने मुझे मौका दिया तो तुमको बताऊँगा? खुद अकेले ऐश करने तो जरूर जाऊँगा अब मैं। तुम्हारे आर्डर का अब क्यों इंतेजार करूँगा? जैसे मौका मिलेगा अदिति को चोदने का तो अकेले खूब चोदने जाऊँगा अब मैं तो, तुमने मुझको रास्ता दिखा दिया और दरवाजा खोल दिया है मेरे लिए। साहब अब तो तुम्हारी गैर हाजिरी में ही चोदूंगा तेरी बीवी को विशाल साहब... हेहेहेहे.."

विशाल ने पूछा- “तो तुम अब खुश हो ना की मैंने तुमको उस औरत से करने का अवसर दिया, जिसे तुम कितने दिनों से चोदना चाहते थे? कितना मजा आया तुम्हें? कितना मजा और खुशी मिली तुमको जब उसने तेरे वीर्य को अपने मुँह में लिया? क्या तुमने सपने में भी कभी यह सोचा था की उसके मुँह में पिचकारी छोड़ोगे अपना? यह तुम्हारी अपनी बीवी भी शायद नहीं करेगी कभी..”

ओम- “हाँ साहब बेहद बेहद मजा आया। मैंने बिल्कुल ही नहीं सोचा था वो वैसा करेगी, बिल्कुल नया अनुभव था वो वाह... मैंने खुद नहीं सोचा था की घुसाने से पहले ही मैं झड़ जाऊँगा। मुझे बहुत अजीब लगा था जब उसके मुँह में झड़ा मैं। मैंने सोचा था वो नाराज हो जाएगी। क्या वो आपके साथ भी वैसा करती है सर जी?"

विशाल- “नहीं, मुझे कभी वो मौका नहीं दिया उसने। मैं कभी भी उसके मुँह में नहीं झड़ा हूँ। हाँ मगर उसने

अनगिनत बार मेरे वीर्य को चाटा है और झड़ने के बाद मुझको चूसा है, मगर वैसे कभी नहीं किया जो आज तेरे साथ किया उसने। अब क्या कहोगे?"

ओम- “बस कमाल था साहब। शायद इसलिए की मैं कुँवारा था इसलिए उसको मेरे लण्ड से प्यार हुआ। नया था ना हेहेहेहे."

विशाल- “बिल्कुल सही। मैंने भी बिल्कुल यही सोचा, और यही हुआ था बिल्कुल...” और कुछ देर और दोनों ने बात किया और अलग हो गए।

विशाल लिफ्ट से ऊपर गया। थक गया था वो। जब उसने बेल बजाया तो अदिति ने बिल्कुल देर नहीं किया दरवाजा खोलने में। अदिति नहाकर निकली थी और उसके बाल भीगे हुए थे, बूंदें टपक रही थीं, और एक बहुत सेक्सी नाइटी में थी अदिति। बहुत ही हाट और सेक्सी दिख रही थी और लगता था की एक और लण्ड खाने के लिए बिल्कुल तैयार थी उसी वक्त।

विशाल ने उसके कंधे पर उस नाइटी के स्ट्रैप्स को देखा तो तुरंत अदिति ने अपने बालों से अपने कंधे को ढंक दिया क्योंकी जहाँ विशाल देख रहा था वहाँ ओम ने चूसा था और लाल निशान थे। बहुत हँसमुख दिख रही थी

और बिल्कल रिलैक्स थी अदिति जैसे कुछ हआ ही नहीं था।

तब विशाल ने उसकी जांघों को देखा जहाँ नाइटी खतम होती है। क्योंकी विशाल को पता था की ओम ने उसको वहाँ भी चूसकर लाल किया हआ था। तब अदिति ने विशाल की बाहों को पकड़ा और अपने सिर को उसके कंधे पर रखकर उसको अंदर रेस्ट करने के लिए कहा।

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कड़ी_55 लौटकर विशाल अदिति के साथ

विशाल हैरान था की कैसे अदिति इतनी नार्मल थी ओम के साथ, उसको धोखा देने के बाद भी। अदिति बिल्कुल ऐसे बिहेव कर रही थी जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। वो बिल्कुल इतनी नार्मल थी जैसे की सिर्फ विशाल की वापसी का इंतेजार ही कर रही थी। विशाल ने सोचा था की अदिति की नजरों में उसको थोड़ा बहुत पछतावा या कसूर दिखेगा, मगर वैसा कुछ भी नहीं था। विशाल ने सोचा की इसका मतलब यह हुआ की कभी भी, कोई भी उसके साथ आकर वक़्त गुजारकर चले भी जाते होंगे और विशाल के लौटने पर वो बिल्कुल ऐसी ही नार्मल दिखती होगी हमेशा।

विशाल ने खुद से कहा- “इसका मतलब यह हुआ की मुझको कभी भी बिल्कुल पता नहीं चलेगा, अगर मेरी गैर

मौजूदगी में कोई आकर चला भी जाए तो। मैं इसको किसी और से चुदते हुए देखना चाहता था और यह तो खुद अपनी खुशी के लिए चुदवा लेती है। अब कब से अदिति ने यह शुरू किया और कितनों के साथ सो चुकी है, इसका कैसे पता लगाऊँगा मैं?"

विशाल अपने दिमाग पर जोर देते हुए उन दिनों में वापस लौटा, जिन दिनों वो अपने पापा के घर रह रहा था

और नई-नई अदिति से उसकी शादी हुई थी। उन दिनों अदिति को घर छोड़कर काम पर जाया करता था और अदिति अकेली रहती थी उसके बाप और भाइयों के साथ।

विशाल सोचने लगा- “क्या अदिति उन लोगों को खुश किया करती थी तभी से? क्या ऐसा हो सकता है? क्या वहीं से सब शुरू हुवा था? पहली बार कैसे हुआ होगा? किससे हुआ होगा? क्यों उस वक्त अदिति ने मुझको कुछ भी नहीं बताया? अगर उस वक्त भी मेरे घर वापस आने पर उसने ऐसे ही नार्मल बिहेव किया होगा तो मुझको तो शक भी नहीं हुआ होगा बिल्कुल तब भी। उन दिनों कभी एक दिन भी अदिति डिस्टर्ड नहीं नजर आई थी, तो क्या पता की तब भी ऐसी ही नार्मल होने की आक्टिंग करी होगी? हे भगवान्... अब मैं क्या-क्या सोचने लगा बकवास.."

एक घंटे बाद विशाल ने अपना शावर लिया और दोनों टीवी देखते हुए डिनर कर रहे थे। अदिति बहुत प्यार से विशाल को सर्व कर रही थी, अपना प्यार विशाल पर निछावर करते हए। मगर विशाल का दिमाग अब भी उसको

ओम के साथ देख रहा था।

विशाल खुद से भुनभुनाया- “यह इतनी नार्मल कैसे हो सकती है? इसके लिए सब कुछ इतना आसान है? कैसे?

क्यों?”

अदिति ने बड़ी खुशी से चुलबुलाती आवाज में मुश्कुराते हुए पूछा- “हम्म... तुमने कुछ कहा ना? क्या कहा अभी

तुमने?”

विशाल ने एक तरफ देखते हुए आफिस के काम के बारे में सोचने का बहाना किया।

अदिति चलकर उसके पास गई और विशाल की गोद में बैठकर उसके बालों में अपने उंगलियों की कंघी करते हुए कहा- “मेरे प्यारे पति जी, जब मैं आपके साथ हूँ तो आफिस के बारे में सोचना बिल्कुल बंद ओके? मैं क्या आफिस से बेहतर नहीं हूँ? इसको अटेन्शन दो मेरी जान..” कहकर अदिति ने अपने कंधे से एक स्ट्रैप हटाया जहां ओम ने निशान नहीं किए थे और उस हिस्से को विशाल के होंठों पर रगड़ा।

अदिति ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी तो उसके निपल उस कपड़े के मेटीरियल पर नजर आ रहे थे नुकीले दिखाई दे रहे थे तने हुए। फिर अदिति ने अपनी चूची को विशाल के गाल पर दबाते हुए अपने सिर को ऊपर किया, विशाल के लण्ड को अपने चूतड़ों पर महसूस करते हुए।
 
कुछ पल के बाद दोनों अपने बिस्तर पर आ गये। विशाल अपनी पीठ पर लेता हआ था और अदिति उसके जिश्म पर एक कैटवाक जैसे चल रही थी। उसके बाल विशाल की छाती पर फेरते हुए उसके चेहरे पर जा रहे थे। जल्दी से अदिति ने विशाल की शर्ट और पैंट निकाल दिए और उसके पेट और छाती को चाटने लगी। भूखी दिख रही थी।

विशाल ने सोचा- “अभी कुछ देर पहले ओम से दो बार चुदवाया इसने फिर भी और चाह रही है। कमाल है यह

अदिति.."

अदिति ने विशाल की अंडरवेर को चाटा जिसके अंदर विशाल का लण्ड उठ रहा था। और अदिति ने बिल्कुल देर नहीं किया उसके लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने में। विशाल ने सोचा किस तरह कुछ देर पहले वो ओम को ऐसे ही चूस रही थी। और ओम को सोचते ही विशाल का लण्ड जमकर खड़ा हो गया और उसने अपने लण्ड को अदिति के मुँह में ज्यादा दबाकर ठूँसा। अदिति ने फिर विशाल की आँखों में देखा और लण्ड को अपने दोनों हाथों से पकड़कर आधा से ज्यादा मुँह में लिए हुए और विशाल से थोड़ी सी मुश्कुराई चूसते हुए।

विशाल ने कहा- “मुझे बेहद खुशी होगी अगर तुम मुझको अपने गले की गहराई में झड़ने देती आज रात को, मुझे यह करने दोगी जानम? यह खुशी तुमने मुझे कभी भी नहीं दिया है आज तक..."

अदिति लण्ड को मुँह में लिए चूसे जा रहा थी, सिर को नीचे ऊपर करते हुए और सुन रही थी की विशाल क्या कह रहा था। फिर रुकी, जितना रस मुँह में थी सब घोंट गई और कहा- “हम्म... आज क्यों तुमको वैसा चाहिए बोलो? खैर, तुमने आज तक कभी वैसी फरमाइश नहीं किया थे तो मैंने कभी नहीं किया। चलो आज ट्राई करती हूँ, और उम्मीद है की झड़ जाओगे मेरे मुँह के अंदर और ज्यादा देर नहीं करोगे, मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं.."

अदिति लगातार चूसती ही गई और विशाल ने कमर को ऊपर उठाते हुए और ठूँसा अपने लण्ड को उसके गले की गहराई में। यहाँ तक की अदिति के गले के अंदर उसने अपने लण्ड को महसूस किया, उसकी टान्सिल को छूते हुए, जिससे उसको बड़ा ही मजा आया, और जल्द ही झड़ने की बंदोबस्त होने लगा। उसी वक्त विशाल अदिति की गीली चूत पर अपने हाथ को रगड़े जा रहा था और अदिति भी अपनी गाण्ड हिलाते हुए विशाल के हाथों के रगड़ से लुत्फ उठाती जा रही थी। अदिति जैसे एक आग में जलती जा रही थी और जबरदस्त चूसते हए और विशाल के लण्ड को अपने गले के गहराई में लेते हुए।

वो सब करते हुये वक्त दोनों बिल्कुल नंगे हो गये और अदिति कभी अपने घुटनों पर थी, विशाल के लण्ड को मुँह में लिए हये, तो कभी विशाल अपने घुटनों पर होता था अपने लण्ड को अदिति के मुँह में बरकरार रखे हए कोई 75 प्रतिशत लण्ड अदिति के मुँह में ही समाया हुआ था, बाहर नहीं निकाला था विशाल ने बिल्कुल। विशाल अदिति के मुंह में चोद रहा था। एक बार अदिति की साँस उखड़ गई जब उसने लण्ड को बाहर निकाला।

अदिति ने लण्ड को हाथ में लिए

इम ले रहे हो झड़ने में..."

तुरंत विशाल ने अपने लण्ड को दोबारा अदिति के मुँह में ठूँसा, उसकी शिकायत को अनसुनी करते हुए और थोड़ा बहुत वाय्लेंट जैसा हो गया उस वक्त।फिर अदिति के बाल को पकड़कर अपने लण्ड को उसके मुँह में अंदर-बाहर करने लगा सख्ती से। अदिति के गले में साफ दिख रहा था किस तरह से विशाल का लण्ड आता जाता रहा, क्योंकी जब-जब विशाल का लण्ड अदिति के गले के अंदर घुस रहा था, अदिति के गला ज्यादा मोटा हो रहा था, जो बाहर से दिख रहा था की उसके गले में कुछ घुस रहा है।
 
विशाल की नजरें अदिति के जांघों पर थी जहाँ ओम ने निशान किए थे चूसने से। मगर विशाल ने अनदेखा किया, जबकी अदिति उन जगहों को लाख छुपाने की कोशिश कर रही थी। उसकी चूचियों पर भी लाल निशान थे, मगर उसके बारे में अदिति ने सोच लिया था की अगर विशाल पूछेगा तो वो कहेगी की वो विशाल का ही चूसा हुआ निशान था। मगर विशाल ने कुछ पूछा ही नहीं। क्योंकी उसको तो पहले से ही पता था। फिर विशाल अदिति की गाण्ड पर हल्के-हल्के चपत मारने लगा जो लाल होता जा रहा था हर चपत से।

हर वक़्त चपत लगने से अदिति आँखें उठाकर तड़पते हुए विशाल के चेहरे में देख रही थी। क्योंकी विशाल ने ऐसा पहले कभी नहीं किया था उसके साथ। और विशाल अपने दिमाग में जैसे अदिति को सजा दे रहा था। क्योंकी उसने उसको धोखा दिया था ओम से चुदवाकर और वह चपत थप्पड़ बनने लगे, क्योंकी वो ज्यादा जोर से मारता गया उसकी सेक्सी गाण्ड के ऊपर। अपने लण्ड को और गहराई में ठूसते हुए अदिति के बालों को एक हाथ में थामे जैसे घोड़े की लगाम पकड़ा हो और एक हाथ से उसकी गाण्ड पर मारे जा रहा था उसको सजा देते हए। और झड़ने में देर लगा रहा था, क्योंकी ओम के साथ उसको देखते वक़्त तो उसने मूठ मारा था कुछ देर पहले।

विशाल ने हालांकी देर लगाया फिर भी 25 मिनट के बाद पशीने से तर, अदिति की तड़पती, हॉफती हालात में विशाल गुर्राया- “आअगघग... सस्स्स्स... हाँ बेबी आई आम कम्मिंग नाउ डीप इन योर थ्रोट... प्लीज स्वैलो इट

बेबी डू मी दिस फेवर, स्वैलो आल। सक आल, गेट आल इँड डीप इन योर थ्रोट स्वीटहार्ट."

अपने जबड़े को दबाते हुए दाँतों को पीसते विशाल ने कहा- “सबके सब अंदर लो, एक बूंद भी बाहर नहीं गिरना चाहिए, मैं चाहता हूँ के तुम सब पी जाओ, गले के अंदर उतरना चाहिए सबके सब और यह भी लो...”

विशाल जोरों से उसकी गाण्ड पर कोई 10 बार लगातार मारता गया उस दौरान झड़ते हुए। दबाकर जोर से अपने लण्ड को अदिति के गले के अंदर अपना सारा पानी छोड़ा विशाल ने। अदिति की साँस फल गई और मँह खोला साँस लेने के लिए फिर घोंटती गई अपने पति का सारा पानी। विशाल के चेहरे में अजीब तरह से देखते हए जैसे कुछ घबरा सी गई थी उस वक्त विशाल के उस रूप को देखकर। अदिति को महसूस हुआ की विशाल कुछ वाय्लेंट हो रहा था और सोचा की कहीं विशाल ने कोई दवाई तो नहीं लिया है आज करने से पहले? क्योंकी वो कभी भी सेक्स करते वक्त वैसा वाग्लेंट नहीं होता था। आज पहली बार था।

अदिति ने विशाल को तड़पती नजरों से देखा जैसे बिनती कर रही हो, तब विशाल ने अपने लण्ड को हाथ में लेते हुए उसके मुँह से बाहर खींचा और अदिति के होंठों पर जोरों से दबाकर रगड़ा, उसको किसी भी बूंद को बाहर नहीं गिराने का आदेश देते हुए।

जब अदिति सब घुट गई तो विशाल ने एक शैतानी मुश्कुराहट से अदिति को देखा। अदिति को खाँसी आ गई

और उसकी आँखों से आँसू निकल आए। वो रो नहीं रही थी, मगर साँस फूलने से और खाँसने से वैसा हुआ।

फिर भी विशाल ने कहा- “जान अब मेरे लण्ड के ऊपरी हिस्से को चाटकर साफ कर दो, काम पूरा हो जाएगा बिल्कुल। जो बाकी बूंद बच गये हैं लण्ड के ऊपर सब चाट लो साफ हो जाएगा...”

अदिति ने वही किया विशाल की आँखों की गहराई में देखते हुए और सोचते हये की उसके पति में कुछ बदलाव आया है शायद। विशाल के नर्म होते हुए लण्ड को अदिति ने फिर चूसा और चाटकर साफ किया। और विशाल अपने आपको विजयी महसूस करते हुए अपनी पीठ पर आराम से लेट गया खुश होकर। अदिति हाँफ रही थी

और सोचने लगी की आज क्यों विशाल ने वैसा बिहेव किया?

अदिति बेड से उतरी यह कहते की पेशाब करने जा रही है और उसकी मोबाइल बजने लगी। झट से अदिति ने मोबाइल को छुपाते हुए विशाल से कहा- “मेरी माँ का काल है..” और मोबाइल लेकर टायलेट गई।

उस तरफ फोन पर आनंद था, जिसने कहा- “हाय डार्लिंग क्या आज रात को मैं तुम्हारे साथ बिस्तर पर हूँ?"

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कड़ी 56

अदिति से मजा करने के बाद हर रोज ओम काम पर आता तो अदिति को फोन करके बताता की वो आ गया है और अदिति छत पर आती हर रोज उसको हाय हेलो करने के लिए। और किसी-किसी दिन दोनों फ्लाइंग किसेस भेजते एक दूसरे को, चारों तरफ देखने के बाद जब कोई नजर नहीं आता तब। फोन पर बात करते वक्त ओम अदिति से कह देता था की वो उसको किस ड्रेस में देखना पसंद करेगा और अक्सर छोटी-छोटी ड्रेस पहनने को कहता था अदिति को और छत पर आकर अपनी टांग को छत की रेलिंग पर ऊपर करने को कहता रहता था, और अदिति उसको खुश किया करती थी अपनी जांघे के बीच ओम को दिखाकर।

किसी दिन तो जानबूझ कर ओम को चिढ़ाने के लिए अदिति पैंटी नहीं पहनती थी और नीचे से ओम को

अदिति की चूत दिखती था। अदिति इसलिए उसको वैसे छेड़ती थी, क्योंकी उसको पता था की जब ओम ड्यूटी पर रहता था तो ऊपर नहीं आ सकता उससे मिलने को। ओम इसलिए दिन में नहीं जा सकता था अदिति से मिलने क्योंकी जिस सेक्योरिटी कंपनी के लिए वो काम करता था वहाँ से दिन में कई बार इनस्पेक्टर्स आते रहते थे चेक करने सभी सेक्योरिटी गार्ड्स को, और अगर इनस्पेक्टर्स के आने पर ओम गुमटी के आस-पास नहीं दिखाई देता तो उसको नौकरी से हाथ धोना पड़ता। इसीलिए उसको मजबरन वहीं रहना पड़ता था।

मगर फोन पर अक्सर दोनों सेक्स चैट किया करते थे। वैसे चैट के दौरान अदिति खुद गीली हो जाया करती थी

और ओम को मूठ मारना पड़ता था अक्सर। ओम अक्सर अदिति से कहता की उसको चोदने को मन कर रहा है। फिर अदिति भी वही कहती। मगर दोनों मजबूर थे क्योंकी दिन में नामुमकिन था और रात को विशाल घर पर होते थे। ओम ने सोचा अदिति को चोदने के लिए उसको छुट्टी लेना पड़ेगा किसी दिन। या किसी और वाचमैन को उसे रीप्लेस करने को कहना पड़ेगा थोड़े वक्त के लिए। उस वाचमैन से फरमाइश करनी पड़ेगी जो रातों को गार्ड करते हैं। ऐसा ओम ने सोचा कई बार। अब वापस देखें तो याद होगा की एक रात अदिति बाहर आई थी बीच रात में तो एक बूढा वाचमैन उसको सहारा देकर ऊपर ले गया था।

* * * * * * * * * *

फ्लै शबैक कड़ी 21 से

"वाचमैन अदिति को थामकर लिफ्ट की तरफ चलने लागा। लिफ्ट के अंदर उस आदमी का हाथ अदिति के कंधों पर था और अदिति ने अपना सिर उसकी छाती पर रख दिया आराम के लिए, जैसे वो सच में बिल्कल नशे में थी। उसकी छाती उस आदमी की छाती पर दबी हुई थी और आदमी को कुछ होने लगा इतनी खूबसूरत जवान औरत को बीच रात में अकेले अपने बाहों में पाकर। वाचमैन ने उसकी क्लीवेज को देखा और खुद को संभालना मुश्किल था उस वक़्त फिर भी आदमी ने कंट्रोल किया और कहा- “तो आपके पति के पास बिल्कुल सिगरेट्स नहीं है?"

अदिति ने अपने आँखों को और ज्यादा नशीली बनाकर उसको जवाब दिया- “नहीं वो सिगरेट नहीं पीता, एक दोस्त आया था और वो चला गया और मैं सिगरेट पीना चाहती हूँ अभी। मेरा पति सो रहा है मगर मुझको नींद नहीं आ रही है...”

आदमी ने सोचा- "इसका पति सो रहा है और यह इतनी जवान और खूबसूरत औरत इतनी रात गये बाहर है, ऐसे ही अच्छी औरतें रंडी बन जाती हैं, जब पति उनका खयाल नहीं रखते। मैं खुद इसको अभी के अभी चोद सकता हूँ। चलो ट्राई मारता हूँ। घर के अंदर तक छोड़ने जाता हूँ और पति सोया होगा नशे में तो पटक के चोद दूँगा इस हसीन कन्या को..." * * * * * * * * * *

फ्लैशबैक समाप्त

हुआ यह था उस रात को की, अदिति को उस हालत में देखकर वो बूढा वाचमैन, जिसका नाम ज्ञानपत है वो एकदम गरम हो गया था अदिति को वैसे अपने करीब पाकर। ज्ञानपत ने तो सोचा था की अगर अदिति का पति उस वक़्त नशे में सोया होगा तो वो अदिति को घर के अंदर घुसकर चोदेगा। मगर वो राकेश आ गया था जिस वजह से ज्ञानपत को वापस जाना पड़ारा था। मगर उस रात को अपने गुमटी में वापस जाने के बाद ज्ञानपत का एकदम से खड़ा हो गया था और उसने अदिति के जिश्म को सोचते हुए मूठ मारा था गुमटी में ही। अदिति ज्ञानपत की बेटी से भी ज्यादा जवान थी और उसने कभी जिंदगी में नहीं सोचा था की एक दिन इतनी जवान लड़की उसको इतना उत्तेजित कर देगी।

उसने तकरीबन अदिति की पूरी चूचियां देख लिया था। क्योंकी अदिति ने ब्रा नहीं पहनी थी और नाइटी में थी। उसकी इतनी खूबसूरत गोल-गोल गोरी-गोरी चूचियों को अपने इतने करीब पाकर, अपने सीना पर कुचलते हुए देखकर और अदिति के जिश्म की खुशबू अपने जेहन में समाकर उसने खूब मूठ मारा था। अदिति उस रात को नशे की हालत में होने का ढोंग कर रही थी और इतनी हाट और सेक्सी दिख रही थी की ज्ञानपत को सिर्फ उसको चोदने का मन कर रहा था।

उस रात के बाद ज्ञानपत ने कई और रातों को अदिति के कमरे के पास जाकर चक्कर लगाया था, मगर कुछ नहीं कर पाया। ज्ञानपत हमेशा नाइट शिफ्ट करता था, क्योंकी दिन में उसका छोटा सा पार्ट टाइम जाब और था करने को। अब इसलिए की अदिति से आकर्षित हो गया था तो उस दिन के बाद ज्ञानपत दिन में भी चक्कर लगाने आ जाया करता था अपार्टमेंट के कांपाउंड में और दिन के वाचमैन से घंटों भर गपशप करता रहता था। तो वैसे ही हर बार वो आता तो ओम से मुलाकात होती और ज्ञानपत बस यह साबित करता की वो उस तरफ से गुजर रहा था तो एक चक्कर मारने चला आता है।
 
एक दिन जब ज्ञानपत आया । में उससे मिलने तो ओम ने ज्ञानपत से एक घंटे के लिए उसको रीप्लेस करने की फरमाइश किया और ज्ञानपत राजी हो गया उसकी हेल्प करने के लिए। फिर भी ज्ञानपत ने ऐसे ही पूछा की कौन सा जरूरी काम करन है एक घंटे में और खुद ज्ञानपत ने मजाक मजाक में कहा।

ज्ञानपत- "तुम किसी चंचल हसीन लड़की को चोदने तो नहीं जा रहे हो? एक बात बताऊँन, इस अपार्टमेंट में एक बहुत ही सेक्सी और हाट लड़की है, उसको चोदने को बड़ा मन है मुझे। उसका नाम अदिति है, एक रात को वो बिल्कुल नशे में, नाइटी में यहाँ नीचे आई थी और मैं उसकी मदद करके ऊपर वापस ले गया था, उसके पूरी जिश्म को दबाते मसलते हुए। मैं उसके कमरे के अंदर घुसने जा रहा था, मगर एक नालयक उस वक्त बाहर आ गया था और मुझे वापस आना पड़ गया उस रात को। वरना मैं चोद देता उस हसीन कुड़ी को। उसको चोदने को बड़ा ही मन है मुझे.."

ओम को यह सब सुनकर बहुत मजा आया और उसने पूछा- “चाचा आप भी उसको चाहते हो। वा रे वा... मुझे बताओ कब हुआ था यह सब जो आपने अभी बताया, कितने दिन हए उस बात को?"

ज्ञानपत- “बेटा वो बहुत ही हाट और सेक्सी है यार, और मेरे अंदर उसने जवानी भर दिया है, मुझे लगता है की वो मझे चोदने देगी, अगर मैं उससे मिलने गया तो.."

ओम- “बिल्कुल चोदने देगी वो आपको चाचा बिल्कुल करने देगी.."

ज्ञानपत- “सच? क्या तुम उसके साथ गये हो क्या?"

ओम- “अरे चाचा इसीलिए आपको रीप्लेस करने को बोल रहा था मैं, उसी से मिलने जाना था मुझे अभी चाचा। मगर अब मैंने इरादा बदल दिया है अब आप जाओगे अदिति को चोदने..."

ज्ञानपत- “मुझपे बड़ा उपकार करोगे अगर मुझको यह मौका दे दिया तुमने बेटा। मैं उसका दीवाना हो गया हूँ उस रात के बाद, वो इस वक़्त अकेली होगी ना?"

ओम- “हाँ चाचा हूँ अकेली है, आप जाओ और डोरबेल रिंग करो, जैसे ही वो दरवाजा खोले आप झिझक अंदर घुस जाओ जल्दी से। और उसको खूब चोदना चाचा। जाओ चाचा जाओ और वापस आकर मुझको बताना की कैसा रहा। अब जल्दी जाओ चाचा...”

ज्ञानपत- “सच? तुम उसको चोद चुके हो? बताओ उसको क्या पसंद है? रफ सेक्स पसंद है उसको या वो छुईमुई है? मुझे लगता है मैं जरा रफ करूँगा उससे। एक माडर्न हाई सोसाइटी की पत्नी को चोदने का मेरा पहला अवसर है ये, और मुझको सब भड़ास निकालना है की मैं रात को जागता हूँ उसको आराम की नींद देने के लिए, आज सब बदला निकालूँगा उनसे। मैं जागता हूँ तब वह आराम से सोते हैं, चोदकर इसका बदला लूँगा आज मैं."

ओम ने ज्ञानपत के कान में फुसफुसाते हए कहा- “चाचा मैंने अपना कँवारापन खोया उसी अदिति से। मेरे साथ तो वो बहुत नरम थी मगर आपके जी में जैसे आए वैसा करो, वो जरूर पसंद करेगी। मुझे यकीन है। बस प्रामिस करो की वापस आने के बाद आप मुझको सब बताओगे..."

ज्ञानपत- “ठीक है, तो चलता हूँ। उसको सोचकर बहुत मूठ मारा है मैंने अपने इन बूढ़े दिनों में, तुमने यह सब बताकर मुझे बहुत हौसला दिया है बेटा। उम्मीद है की तुमने कुछ भी झूठ नहीं कहा है, और मुझको किसी किश्म की प्राब्लम नहीं होगी..."

ओम- “अरे, मैं भला झूठ क्यों बोलूँगा चाचा? मैंने सब कुछ सच बताया आपको गोड प्रामिस, 100 प्रतिशत सच बात बताया आपको मैंने। बस आप मुझको इतना जरूर बताना की किस रात को वो आपसे यहाँ मिलने को आई थी। क्यों उस रात को मैं वाच नहीं कर रहा था उसको। अंडरग्राउंड पार्किंग में लेजाकर चोद देता उस रात को..."

ज्ञानपत- “वापस आकर तुमको सब बताता हूँ। अभी अपनी किश्मत जाकर आजमाने दो मुझे। थोड़ी देर बाद मिलता हूँ बेटा थैक्स वेरी मच...”

अदिति शावर से निकली हुई थी एक तौलिया में थी सिर्फ। अपने मेकप डेस्क के सामने बैठी हेयर ड्रायर से बाल सुखा रही थी। सामने आईने में उसका नंगा कंधा, जांघे, क्लीवेज सब साफ नजर आ रहे थे। अदिति खुद अपने जिश्म को आईने में देखते हुए मुश्कुरा रही थी, शायद किसी मर्द के बारे में सोचते हुए। हेयर ड्रायर को बंद किया अदिति ने और अपनी उंगलियों को कंधे से फेरते हुए अपनी खुद की चूचियां की तरफ बढ़ाई उसने आईने में देखते हुए। तभी डोरबेल बजी।

अदिति सोचने लगी- "जैसे है, उसी तरह दरवाजा खोले? या एक गाउन अपने जिश्म पर डालकर खोले?" सोचने लग गई। मगर जैसे थी वैसे ही चली गई दरवाजा खोलकर देखने के कौन था। वो सिर्फ एक तौलिया में थी।

ज्ञानपत ने अदिति को नीचे से ऊपर तक खुले मुँह से देखा। अदिति ने अपनी छाती पर एक हाथ दबाया हुआ था तौलिया को संभालने के लिए, और एक हाथ से दरवाजे की हैंडल पकड़ी थी, बहुत हैरानी से बूढ़े के चेहरे में देखते हए। तौलिया ने बस उसकी जांघों को थोड़ा सा ही ढंका हुआ था मतलब सारी जांघे दिख रही थीं। जिससे ज्ञानपत की खुशी की इंतेहा नहीं थी। दोनों एक दूसरे को बिना कुछ कहे देखते रहे कुछ देर तक और ज्ञानपत ने चुप्पी तोड़ी यह कहते।

ज्ञानपत- “हम्म्म्मा ईरर क्या एम्म... एम्म्म... मैं क्या.. क्या मुझको एक ग्लास पानी मिल सकता है प्लीज? मुझे एक गोली खानी है, मुझे पहचानती हो ना? मैं सेक्योरिटी गार्ड हूँ, यहाँ का रात का वाचमैन...”

अदिति ने एक कदम पीछे किया उसको अंदर आने के लिए यह कहकर- “जी, जी हाँ मैं आपको जानती हूँ अंकल जी...”

घर के अंदर जाने के बाद अदिति किचेन की तरफ गई पानी लाने के लिए, और ज्ञानपत लाउंज में खड़े इधर उधर देख रहा था, एक रुमाल से अपने माथा पोंछते हुए।

*****

*****

* * * * * * * * * *
 
कड़ी_57 ज्ञानपत अदिति के साथ

रसोई में जाते ही अदिति उस रात को सोचने लगी जिस रात को वो बाहर गई थी ओम को ढूँढ़ने के लिए। मगर इस बूढ़े से जा मिली थी गुमटी में नीचे। अदिति को याद है की नशे में होने का बहाना किया था उस रात को

और यह वाचमैन उसको ऊपर तक छोड़ने आया था। उस वक़्त अदिति को वाचमैन के इरादे के बारे में पता तो नहीं था मगर थोड़ा सा शक जरूर था। अब अदिति सोचने लगी की पहले जाकर कपड़े पहने या उसको पानी देने के बाद जाकर चेंज करें, क्योंकी वो सिर्फ एक तौलिया लपेटी हुई थी जिश्म पर उस वक्त तो। और अदिति ने यह भी याद किया की किस तरह से उस रात को ऊपर आते वक्त किस-किस जगह पर उस वाचमैन ने उसके जिश्म को छुवा था, कितना चिपका था उसके साथ?

उस तरफ ज्ञानपत का बिल्कुल खड़ा हो गया था और अदिति को अपनी बाहों में जकड़ने को सोच रहा था जब वो पानी देने आएगी तो। ज्ञानपत अपने सामने के काउच पर अदिति को पटक के चोदने को सोचने लगा उस वक़्त। क्योंकी जहाँ वो खड़ा था लाउंज में, उसके सामने ही सोफा था और चारों तरफ सब ठीक से ध्यान से देखने लगा था। मगर उसके प्लान ने काम नहीं किया, क्योंकी अदिति ने उसके हाथ में पानी का ग्लास देने की बजाए मेज पर रख दिया यह कहते।

अदिति- “ये रहा पानी अंकलजी मैं चेंज करके अभी आई...” और अदिति अपने कमरे में चली गई ड्रेस होने।

ज्ञानपत निराश हुआ और अदिति के कमरे में झाँकने की कोशिश किया, जो बंद नहीं किया था अदिति ने। अदिति ने अपना ड्रेस लिया और दरवाजे के पीछे चली गई पहनने के लिए। ज्ञानपत झाँकने की बहुत कोशिश किया मगर असफल रहा। ज्ञानपत सीधे उसके कमरे में घसना चाहता था। मगर फिर सोचा की वो डर जाएगी

और मामला बिगड़ जाएगा, तो वहीं बैठकर इंतेजार करना पसंद किया यह सोचते हुये।

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ज्ञानपत मन में- “चलो देखते हैं क्या पहनकर आती है? क्या पता और भी सेक्सी दिखे जिस ड्रेस में आएगी..."

और ज्ञानपत ने सोचा की उसके ड्रेस के मुताबिक वो उसकी तारीफ करने से शुरू करेगा और उस तरह से उसके करीब होगा। उसको उम्मीद थी की जो कोई ड्रेस में अदिति आएगी जरूर सेक्सी और हाट दिखेगी। और बस थोड़ी देर में अदिति कमरे से बाहर आई। और ऐसे ड्रेस थी और ज्ञानपत के सामने इस तरह से बैठी।

कुछ पल के लिए ज्ञानपत की बोलती बंद हो गई अदिति को वैसे देखकर। एक शब्द नहीं बोल पाया, सोच रहा था क्या अदिति उसको निहारने की कोशिश रही थी, या उसकी आदत थी वैसे ड्रेस पहनने की? ज्ञानपत की नजरें अदिति की जांघों पर थीं, वहाँ से उसकी नजरें ऊपर अदिति के कंधे पर गई उसके ब्रा स्ट्रैप्स देखते हुए, फिर अदिति की मुश्कान को देखा ज्ञानपत ने और उसकी समझ में नहीं आया की क्या कहें। अपने थूक को निगलते हुए गला साफ किया और बात करने की कोशिश किया उसने।

मगर इससे पहले की वो कुछ कहता अदिति ने सोफे पर पोजीशन चेंज किया और अलग पोज ज्ञानपत के सामने आया।

ज्ञानपत ने अदिति की कांख को देखा फिर उसके खुले बाल, और ब्रा स्ट्रैप अदिति की गोरी जिश्म पर कसके बँधे हुए, और अदिति की बाहों पर कुछ लोव बाइट्स भी दिख रहे थे, जो चूसने की वजह से हुए नजर आ रहे थे। अदिति अपने बलों को संवार रही थी।

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ज्ञानपत ने फिर उसकी जांघों के बीच देखा, उसकी नर्म, मुलायम सेक्सी जांघों को अदिति एक अंजान आदमी के सामने ऐसे दिखा रही थी, यह सोचकर ज्ञानपत और भी गरम हो गया। उसका जिश्म काँप उठा अदिति को वैसे देखते हुए। उसका मन किया की तुरंत उसी वक्त अदिति को कच्चा चबा जाने को।

अदिति उस सोफे से चलकर ज्ञानपत के सामने से गजरकर लाउंज के उस हिस्से में गई जहाँ बार काउंटर था, और उस बार काउंटर वाली सीट पर बैठी जहाँ विशाल बैठकर अपने ड्रिंक्स बनाते हैं। ऐसे बैठी थी अदिति और यह सब नजर आ रहे थे ज्ञानपत को, अब वो कैसे खुद को संभाल सकता था भला?

अदिति अपनी सामान्य मुश्कुराहट से जिस तरह से सबसे मुश्कुराते हुए बात करती है और बिहेव करती है बिल्कुल वैसे ही नार्मल थी। जिससे ज्ञानपत को उसके करीब जाने और बात करने का हौसला बढ़ा। पर क्या अदिति उसको रिझा रही थी? क्या अदिति उम्मीद कर रही थी की ज्ञानपत उसके साथ करने के लिए ही आया हुआ है? या अदिति की नार्मल बिहेवियर थी यह? यह सब ज्ञानपत को सोचने पर मजबूर कर रहा था।

ज्ञानपत फिर भी आगे बढ़ा और अदिति के करीब खड़े होकर कहा- “याद है उस रात को जब तुम मेरे पास आई थी? उस रात को मैं तुमको यहाँ अंदर तक लाना चाहता था, मगर वो लड़का अचानक आ गया था इसलिए मुझे वापस जाना पड़ा था..."

अदिति ने मुश्कुराते हुए उसके चेहरे में देखकर कहा- “जी मुझे पता है...”

ज्ञानपत- “तुमको पता था की मैं अंदर आना चाहता था उस रात को?”

अदिति- “हाँ मुझे उसी वक्त पता था..” कहकर अदिति ने सिर नीचे झुका लिया होंठ को दाँतों में दबाये।

ज्ञानपत को समझ में आ गया की यह हाथ में आ गई है और वो खामखा परेशान हो रहा था। उसने सोचा की ओम ने सही कहा था की ये चोदने को मिल जाएगी आराम से। ज्ञानपत ने सोचा कैसे इतनी खूबसूरत जवान माडर्न लड़की इतनी आसानी से हाथ आ गई? उसको यकीन नहीं आ रहा था। ज्ञानपत ने सोचा शायद इस वक़्त

अदिति गरम है और ज्ञानपत खुद खुशकिश्मत है की इस वक्त आ गया यहाँ। तो देर ना करते हुए ज्ञानपत सीधे टापिक पर गया और कहा।
 
ज्ञानपत- “तो क्या तुमको पता है की मैं क्यों अंदर आना चाहता था उस रात को? तुमने कहा था की तुम्हारा पति नशे में सो रहा है और तुम नशे में थी तो मैं क्यों तुम्हारे साथ अंदर आना चाहता था?”

अदिति ने उठकर दो कदम चलकर सोफे की तरफ बढ़ते हुए कहा- “जी मुझे पता है की आप क्यों अंदर आना चाहते थे, जबकी आपको पता था की मेरा पति नशे में सोया हुआ है...”

ज्ञानपत ने अपने लण्ड को पैंट के भीतर ठीक किया और अदिति के करीब गया, अपनी नाक को अदिति के गले से हल्के से रगड़ा उसको सूंघते हुए और कहा- “वाह... किया खुशबूदार जिश्म है तुम्हारा, उस रात को । लगभग यही खुशबू आई थी तुम्हारे बदन से, तुम्हारे जिश्म की महक बहुत आकर्षित करती है मेरी जान...”

अदिति मुश्कराई, एक तरफ देखा और अपने नीचे वाले होंठ को दाँत से दबाया और कहा- “तो आज आप उसी नीयत से आए हैं जिसलिए उस रात को आना चाहते थे? पानी माँगना बस एक बहाना था, है ना?"

तब तक ज्ञानपत अदिति के जिश्म से सट चुका था और उसने वक्त बर्बाद नहीं किया और झट से अदिति को अपनी बाहों में भर लिया, उसको अपने छाती से दबाए हुए अपने मुँह में अदिति के मुँह को लेना चाह रहा था।

मगर अदिति ने अपने चेहरे को एक तरफ कर लिया और ज्ञानपत के चेहरे पर अपना हाथ करते हए उसने कहा- “इतनी जल्दी क्या है? ऐसी जल्दी मुझे नहीं पसंद है, रिलैक्स करो आप। जल्दी की कोई जरूरत नहीं, मैं बिल्कुल फ्री हूँ और वक्त पूरा है हमारे पास, आप काम पर तो नहीं हो इस वक्त ना? सो आराम से..."

अदिति उसकी बाहों से निकली और चलकर उसके सामने एक सोफे पर बैठी, अपनी जांघों को अलग करते हुए और इस बार ज्ञानपत को उसकी सफेद पैंटी दिख गई। अदिति बिल्कुल आराम से बैठी और ज्ञानपत के चेहरे में देखते हुए पूछा।

अदिति- “उस रात को यह सोचकर की मेरा पति नशे में धुत्त है, आप मुझको पाना चाहते थे और मेरे साथ वक़्त गुजारना चाहते थे आप, हाँ?"

ज्ञानपत ने सिर्फ हाँ में सिर हिलाया फिर कहा- “हाँ मैंने बिल्कुल वैसा ही सोचा था, तुमने कहा था की बर्थ-डे मनाया था और नशे में सो रहा है तो मेरा वही इरादा था की तुम अकेली हो और उस हालत में तो मैं भी थोड़ा मजा कर लेता...”

अदिति मुश्कुराई, चलकर उसकी तरफ गई। उसके पास आकर उसके कालर पकड़ा और अपनी तरफ उसको खींचकर कहा- “उस रात को मुझे वही जरूरत थी, और मुझे यही उम्मीद थी की आप अंदर मेरी प्यास बुझाने आओगे.”

ज्ञानपत के रोंगटे खड़े हो गये यह सुनकर और इस बार उसने तुरंत अदिति को जकड़ा और अपना मुँह अदिति के मुँह की तरफ किया तो इस बार अदिति ने मुँह खोल दिया और अपनी जीभ को ज्ञानपत के मुँह में घुलते हए महसूस किया। ज्ञानपत का हाथ अदिति की गाण्ड को मसल रहा था और उसकी पैंट के अंदर से ही उसका लण्ड उसकी ड्रेस के ऊपर से ही उसकी चूत के ऊपर रगड़ रहा था किस करते वक्त। ज्ञानपत ने किसी तरह से उसकी छोटी ड्रेस को ऊपर उठाया और उसकी पैंटी के ऊपर ही अपने लण्ड को रगड़ता गया।

अदिति की उंगलियां उसकी शर्ट की बटन खोलने लगीं एक-एक करके हौले-हौले। अपनी हथेली को ज्ञानपत की छाती पर किया अदिति ने और उसकी छाती के भूरे बालों के बीच हथेली फेरने लगी। अदिति ने ज्ञानपत के गले को चूमा और जल्द ही उसकी शर्ट फर्श पर पाई गई। दोनों के मुँह एक दूसरे से चिपके हए थे, जबकी दोनों के हाथ एक दूसरे के कपड़े उतारने में लग गये। उस वक्त दोनों खड़े थे। क्योंकी अदिति सब आराम से करना चाहती थी, तो ज्ञानपत को अब जल्दी नहीं था। ज्ञानपत अदिति के गले को भी चूमता चाटता जा रहा था, और उसको अदिति की ब्रा की स्ट्रैप बहुत पसंद थी और अपनी जीभ को उस स्ट्रैप के बीच डालकर चाट रहा था। धीरे-धीरे ज्ञानपत कुछ जंगली होने लगा। सख्ती करने लगा अदिति के साथ।

ज्ञानपत ने जोर से अदिति की पैंटी को खींचा और एक गुर्राती आवाज में कहा- “साली तू एक बूढ़े से चुदवाना चाहती है, और शायद यह सोच रही है की मैं नहीं चोद पाऊँगा तुझे, हाँ। साली रंडी तुमको जबरदस्त चोदूंगा देखना अभी कैसे तू तड़पती है मेरे नीचे, ठहर जरा। तेरा पति तुझे शायद जमकर नहीं चोदता है, इसीलिए तुझे

औरों की जरूरत पड़ जाती है। गरम चुदाई चाहिए तुझे रुक अभी मजा चखाता हूँ तुझे मैं..."

अदिति डर सी गई उसकी बातों को सुनकर और गिड़गिड़ाई- “प्लीज... आप ऐसे शब्द मत इश्तेमाल कीजिए मुझे गलियां नहीं पसंद। आप सभ्य होकर कीजिए ना.”
 
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