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अदिति वाचमैन ओम से बात करती है उस रात को अदिति को देर तक नींद नहीं आई। सोचती रही की उसने एक अंजान आदमी को खयालों में लाकर सेक्स किया, जिसकी वो सिर्फ आवाज पहचानती है। उसको इतना मजा कभी नहीं आया था सेक्स करते वक़्त जैसे इस रात को आया। करवटें बदलती रही रात भर और यह महसूस करती रही की जैसे उसने सच में उस आदित्य के साथ सेक्स किया था, विशाल के साथ नहीं। विशाल गहरी नींद में खर्राटे मार रहा था मगर अदिति
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सो नहीं पा रही थी। कभी खुद पे मुश्कुरा रही थी, तो कभी आदित्य के बातों को सोचकर हँस रही थी। बीच रात में उठकर किचेन में गई काफी बनाने और फिर से आदित्य की एस.एम.एस. को पढ़ी। उसका मन किया उसको फोन करने को मगर हिचकिचाई। फिर उसके नंबर को डायल किया। मगर मोबाइल स्विच-आफ था। अदिति फिर से गरम हो गई और उसको करने का मन किया और एक बार। कैसे भी करके सोने गई और सपनों में खुद को आदित्य से सेक्स करते हुए पाई। उसने सपने में देखा की वो छत पर खड़ी थी और आदित्य उड़कर सुपरमैन की तरह बाल्कनी पर आया और अदिति को बेड पर खींच के ले गया जब अदिति एक बहुत पतली सी नाइटी में थी। उसने अदिति के पूरे बदन को चाटा जबकी अदिति सिसकती रही और कराहती गई उसके गरम जिश्म के नीचे।
अदिति सुबह उठी तो शुकर है की अच्छा महसूस कर रही थी। रात वाली गरम बुखार दूर थी उससे, और जब विशाल आफिस के लिए निकल रहा था तो अदिति ने बड़े सेक्सी किस किए विशाल को उसके बाहों में कैद होकर। फिर दिन में अदिति अपने घर के कामों में बिजी हो गई और आदित्य को भूला ही दिया।
मगर आफिस में विशाल सोचने लगा- "किस तारह से अब अदिति सेक्स करने लगी और किया वो कभी अपने सपनों को पूरा कर भी पाएगा की नहीं? खास कर उन लोगों से उसको सेक्स करते देख सकेगा कभी जिनसे वो अदिति को सेक्स करते देखना चाहता है? विशाल चाहता था की अदिति को किसी गैर मर्द की बाहों में देखे, वो चाहता था की वो अदिति को किसी दूसरे मर्द की छाती को गरम होकर चाटते हुए देखे, वो देखना चाहता था की अदिति कैसे रिएक्ट करेगी जब कोई और मर्द उसके जिश्म को छुएगा। वो देखना चाहता था किया अदिति किसी दूसरे मर्द को वैसे ही किस करेगी जैसे उसको करती है? किया अदिति की वही कशिश और जुनून होगी जब वो किसी और मर्द की बाहों में होगी? विशाल देखना चाहता था की अदिति उसी तरह किसी दूसरे मर्द के जिश्म पर अपना हाथ फेरेगी जैसे उसके जिश्म पर फेरती है। विशाल अदिति के चेहरे में देखना चाहता था जिस वक़्त किसी और मर्द का लण्ड उसकी चूत में घुसेगा तो किया रिएक्सन होगी अदिति की? देखना चाहता था की अदिति की तड़प कैसी होगी अगर किसी और का लण्ड उसके अंदर जाएगा? अदिति का चेहरा उस वक्त कैसा होगा जब एक गैर मर्द उसको चोदेगा? विशाल देखना चाहता था किया अदिति वैसा करने से खुश होगी प्यार से करेगी या सिर्फ विशाल को खश करने के लिए वैसा करेगी अगर करना पड़े तो? किया करेगी, करना चाहेगी या झिझक होगी उसमें, किया उसको आर्गेज्म आएगा दूसरे से करते वक्त? या ऐसे ही करेगी सिर्फ नाम के लिए?
यह सब सोचते-सोचते विशाल का खड़ा हो गया और उसने डिसाइड किया अदिति को आदित्य बनकर एस.एम.एस. करे...”
विशाल ने यह एस.एम.एस. भेजा- “हाय जानेमन कल रात के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। मैंने बहुत एंजाय किया और बेहतरीन सेक्स था मेरी जान, बोलो कब हम यह सब सच में कर रहे हैं अब?” ।
अदिति उस एस.एम.एस. को पढ़कर नाराज हुई और जवाब यह लिखा उसने- “किया सच में चाहते हो तुम? वो सिर्फ एक फँटेसी थी, और वहीं तक रहने दो वर्ना कभी भी तुमको ना एस.एम.एस. ना बात करूँगी समझे तुम?"
अब अदिति का जवाब पढ़कर विशाल की समझ में नहीं आया की अब किया करे वो? किया विशाल को खुशी हुई की उसकी पत्नी ने दूसरे आदमी को नहीं चाहा? या विशाल नाखुश था की उसका सपना नहीं पूरा होगा अब?
आदित्य का मेसेज पढ़ने के बाद अदिति छत पर गई, और बाहर देखने लगी, नीचे यार्ड में, पार्किंग में और रास्ते पर जैसे किसी की तलाश कर रही हो अपनी नजरों से। फिर अदिति ने देखा की नीचे का सेक्योरिटी गार्ड उसको ऊपर देख रहा था। अदिति साड़ी में थी और बहुत खूबसूरत दिख रही थी हमेशा की तरह, और वो गार्ड उसको देख रहा था। वो सेक्योरिटी गार्ड एक नौजवान आदमी था, शादीशदा नहीं था और वो हमेशा लड़कियों और औरतों को देखता रहता था, और मौका मिलते ही फ्लर्ट करता था किसी से भी।
अब जब अदिति नीचे उसके तरफ देख रही थी तो गार्ड ने खुद से कहा- “वाह किया माल है, किया पटाखा लगती है, किया सेक्सी भाभी है, किया हाट दिखती है यार, वाह किया जिश्म है, किया फिगर है, पतली कमर, किया चूचियां हैं। यार काश वो उस मेटल-बार पर झुकती तो चूचियों का नजारा देखने को मिलता मुझे। आए हाए हाए सस्स्स... लण्ड खड़ा कर दिया इस भाभी ने तो यार। किया कमर है और किया गाण्ड है यार... वाह रे भगवान कैसे इतने मस्त-मस्त माल बनाता है तू.”
यह गार्ड ओम था। हाँ इसका नाम था ओम, यह अपार्टमेंट का सेक्योरिटी गार्ड, वाचमैन, गेटकीपर सब था अकेला।
जब अदिति ने उस गार्ड को उसकी तरफ ऊपर देखते हुए देखा तो सोचा की किया पता यही आदित्य हो। कैसे पता चलेगा? अदिति ने सोचा बहुत आसान है यह जानना की यह वही है या नहीं? सिर्फ उसको काल करना है और अगर अदिति ने उसको फोन उठाते देखा तो पता चल जाएगा। अदिति ने आदित्य का नंबर डायल किया।
उधर विशाल आफिस में मोबाइल नहीं उठा पाया क्योंकी वो मोबाइल साइलेंट पर था और उसको पता भी नहीं चला। इधर अदिति सोचने लगी की क्यों वो मोबाइल नहीं उठा रहा? वो सिर्फ गार्ड को आदित्य समझ रही थी उस वक़्त। और अदिति ने सोचा वो जानबूझ कर नहीं उठा रहा फोन, क्योंकी उसको पता है की मैं यहाँ से पहचान लूँगी उसको।
अदिति तसल्ली करना चाहती थी, तो अंदर जाकर तैयार हुई और माल जाने के बहाने नीचे उतरी अपने अपार्टमेंट से। सज-धज कर, एक हल्की सी नील्ली साड़ी में, टाइट ब्लाउज़, मेकप और पर्य्यम लगाकर, बाल खुले हए, सच में पटाका दिख रही थी। जैसे ही ओम ने अदिति को नीचे आते हुए देखा तो उसको सिर से पैर तक निहारने लगा। वाह क्या चाल थी अदिति की, हर कदम पर कमर का लचकना, और साड़ी के कपड़े को उसकी लिपटकर फिर हटना. और एकाध कदम तो ऐसी थी अदिति की कि उसकी जांघों का फार्म बिल्कुल दिखाई दिया। ओम ने अपने आँखों को अदिति की जांघों से धीरे-धीरे ऊपर उसकी कमर पर किया फिर उसकी ब्लाउज़ के नीचे वाले हिस्से को इस तरह से ओम ने देखा जैसे उसकी आँखें अब नीचे गिर जाएंगी। सिर्फ अदिति को उसकी तरफ चलते हुए देखकर ओम का लण्ड उसके पैंट में मौज मार रहा था।
अदिति वाचमैन ओम से बात करती है उस रात को अदिति को देर तक नींद नहीं आई। सोचती रही की उसने एक अंजान आदमी को खयालों में लाकर सेक्स किया, जिसकी वो सिर्फ आवाज पहचानती है। उसको इतना मजा कभी नहीं आया था सेक्स करते वक़्त जैसे इस रात को आया। करवटें बदलती रही रात भर और यह महसूस करती रही की जैसे उसने सच में उस आदित्य के साथ सेक्स किया था, विशाल के साथ नहीं। विशाल गहरी नींद में खर्राटे मार रहा था मगर अदिति
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सो नहीं पा रही थी। कभी खुद पे मुश्कुरा रही थी, तो कभी आदित्य के बातों को सोचकर हँस रही थी। बीच रात में उठकर किचेन में गई काफी बनाने और फिर से आदित्य की एस.एम.एस. को पढ़ी। उसका मन किया उसको फोन करने को मगर हिचकिचाई। फिर उसके नंबर को डायल किया। मगर मोबाइल स्विच-आफ था। अदिति फिर से गरम हो गई और उसको करने का मन किया और एक बार। कैसे भी करके सोने गई और सपनों में खुद को आदित्य से सेक्स करते हुए पाई। उसने सपने में देखा की वो छत पर खड़ी थी और आदित्य उड़कर सुपरमैन की तरह बाल्कनी पर आया और अदिति को बेड पर खींच के ले गया जब अदिति एक बहुत पतली सी नाइटी में थी। उसने अदिति के पूरे बदन को चाटा जबकी अदिति सिसकती रही और कराहती गई उसके गरम जिश्म के नीचे।
अदिति सुबह उठी तो शुकर है की अच्छा महसूस कर रही थी। रात वाली गरम बुखार दूर थी उससे, और जब विशाल आफिस के लिए निकल रहा था तो अदिति ने बड़े सेक्सी किस किए विशाल को उसके बाहों में कैद होकर। फिर दिन में अदिति अपने घर के कामों में बिजी हो गई और आदित्य को भूला ही दिया।
मगर आफिस में विशाल सोचने लगा- "किस तारह से अब अदिति सेक्स करने लगी और किया वो कभी अपने सपनों को पूरा कर भी पाएगा की नहीं? खास कर उन लोगों से उसको सेक्स करते देख सकेगा कभी जिनसे वो अदिति को सेक्स करते देखना चाहता है? विशाल चाहता था की अदिति को किसी गैर मर्द की बाहों में देखे, वो चाहता था की वो अदिति को किसी दूसरे मर्द की छाती को गरम होकर चाटते हुए देखे, वो देखना चाहता था की अदिति कैसे रिएक्ट करेगी जब कोई और मर्द उसके जिश्म को छुएगा। वो देखना चाहता था किया अदिति किसी दूसरे मर्द को वैसे ही किस करेगी जैसे उसको करती है? किया अदिति की वही कशिश और जुनून होगी जब वो किसी और मर्द की बाहों में होगी? विशाल देखना चाहता था की अदिति उसी तरह किसी दूसरे मर्द के जिश्म पर अपना हाथ फेरेगी जैसे उसके जिश्म पर फेरती है। विशाल अदिति के चेहरे में देखना चाहता था जिस वक़्त किसी और मर्द का लण्ड उसकी चूत में घुसेगा तो किया रिएक्सन होगी अदिति की? देखना चाहता था की अदिति की तड़प कैसी होगी अगर किसी और का लण्ड उसके अंदर जाएगा? अदिति का चेहरा उस वक्त कैसा होगा जब एक गैर मर्द उसको चोदेगा? विशाल देखना चाहता था किया अदिति वैसा करने से खुश होगी प्यार से करेगी या सिर्फ विशाल को खश करने के लिए वैसा करेगी अगर करना पड़े तो? किया करेगी, करना चाहेगी या झिझक होगी उसमें, किया उसको आर्गेज्म आएगा दूसरे से करते वक्त? या ऐसे ही करेगी सिर्फ नाम के लिए?
यह सब सोचते-सोचते विशाल का खड़ा हो गया और उसने डिसाइड किया अदिति को आदित्य बनकर एस.एम.एस. करे...”
विशाल ने यह एस.एम.एस. भेजा- “हाय जानेमन कल रात के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। मैंने बहुत एंजाय किया और बेहतरीन सेक्स था मेरी जान, बोलो कब हम यह सब सच में कर रहे हैं अब?” ।
अदिति उस एस.एम.एस. को पढ़कर नाराज हुई और जवाब यह लिखा उसने- “किया सच में चाहते हो तुम? वो सिर्फ एक फँटेसी थी, और वहीं तक रहने दो वर्ना कभी भी तुमको ना एस.एम.एस. ना बात करूँगी समझे तुम?"
अब अदिति का जवाब पढ़कर विशाल की समझ में नहीं आया की अब किया करे वो? किया विशाल को खुशी हुई की उसकी पत्नी ने दूसरे आदमी को नहीं चाहा? या विशाल नाखुश था की उसका सपना नहीं पूरा होगा अब?
आदित्य का मेसेज पढ़ने के बाद अदिति छत पर गई, और बाहर देखने लगी, नीचे यार्ड में, पार्किंग में और रास्ते पर जैसे किसी की तलाश कर रही हो अपनी नजरों से। फिर अदिति ने देखा की नीचे का सेक्योरिटी गार्ड उसको ऊपर देख रहा था। अदिति साड़ी में थी और बहुत खूबसूरत दिख रही थी हमेशा की तरह, और वो गार्ड उसको देख रहा था। वो सेक्योरिटी गार्ड एक नौजवान आदमी था, शादीशदा नहीं था और वो हमेशा लड़कियों और औरतों को देखता रहता था, और मौका मिलते ही फ्लर्ट करता था किसी से भी।
अब जब अदिति नीचे उसके तरफ देख रही थी तो गार्ड ने खुद से कहा- “वाह किया माल है, किया पटाखा लगती है, किया सेक्सी भाभी है, किया हाट दिखती है यार, वाह किया जिश्म है, किया फिगर है, पतली कमर, किया चूचियां हैं। यार काश वो उस मेटल-बार पर झुकती तो चूचियों का नजारा देखने को मिलता मुझे। आए हाए हाए सस्स्स... लण्ड खड़ा कर दिया इस भाभी ने तो यार। किया कमर है और किया गाण्ड है यार... वाह रे भगवान कैसे इतने मस्त-मस्त माल बनाता है तू.”
यह गार्ड ओम था। हाँ इसका नाम था ओम, यह अपार्टमेंट का सेक्योरिटी गार्ड, वाचमैन, गेटकीपर सब था अकेला।
जब अदिति ने उस गार्ड को उसकी तरफ ऊपर देखते हुए देखा तो सोचा की किया पता यही आदित्य हो। कैसे पता चलेगा? अदिति ने सोचा बहुत आसान है यह जानना की यह वही है या नहीं? सिर्फ उसको काल करना है और अगर अदिति ने उसको फोन उठाते देखा तो पता चल जाएगा। अदिति ने आदित्य का नंबर डायल किया।
उधर विशाल आफिस में मोबाइल नहीं उठा पाया क्योंकी वो मोबाइल साइलेंट पर था और उसको पता भी नहीं चला। इधर अदिति सोचने लगी की क्यों वो मोबाइल नहीं उठा रहा? वो सिर्फ गार्ड को आदित्य समझ रही थी उस वक़्त। और अदिति ने सोचा वो जानबूझ कर नहीं उठा रहा फोन, क्योंकी उसको पता है की मैं यहाँ से पहचान लूँगी उसको।
अदिति तसल्ली करना चाहती थी, तो अंदर जाकर तैयार हुई और माल जाने के बहाने नीचे उतरी अपने अपार्टमेंट से। सज-धज कर, एक हल्की सी नील्ली साड़ी में, टाइट ब्लाउज़, मेकप और पर्य्यम लगाकर, बाल खुले हए, सच में पटाका दिख रही थी। जैसे ही ओम ने अदिति को नीचे आते हुए देखा तो उसको सिर से पैर तक निहारने लगा। वाह क्या चाल थी अदिति की, हर कदम पर कमर का लचकना, और साड़ी के कपड़े को उसकी लिपटकर फिर हटना. और एकाध कदम तो ऐसी थी अदिति की कि उसकी जांघों का फार्म बिल्कुल दिखाई दिया। ओम ने अपने आँखों को अदिति की जांघों से धीरे-धीरे ऊपर उसकी कमर पर किया फिर उसकी ब्लाउज़ के नीचे वाले हिस्से को इस तरह से ओम ने देखा जैसे उसकी आँखें अब नीचे गिर जाएंगी। सिर्फ अदिति को उसकी तरफ चलते हुए देखकर ओम का लण्ड उसके पैंट में मौज मार रहा था।