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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
अदिति ने एक चुलबुली हँसी हँसी और कहा- “हम्म्म्म

... अब तुम शरारती हो रहे हो..."

विशाल जल्दी से बेड से कूद गया और अदिति को उसकी ब्लैक साड़ी और ब्लाउज़ देकर चला गया उसकी इंतेजार करने को लाउंज में।

कुछ देर बाद अदिति गई उसके पास, अपने नाखून को दाँतों में चबाते हुए पूछा- “अब क्या करूँ?”

विशाल- “ओफ्फो। प्ले को जिंदा रखो, मैं आनंद हूँ, मुझको काफी सर्व करने आओ, अपने पल्लू को गिराकर मुझे

क्लीवेज देखने दो, टाइम लगाओ पल्लू को ऊपर करने में। मुझे खूब देखने का मौका दो और मुझसे मुश्कुराते

ये पल्लू ठीक करो। मेरे आँखों में सेक्सी स्माइल के साथ देखो और मैं ठरकी नजरों से तुम्हारे क्लीवेज और ब्रा के स्ट्रैप्स को देलूँगा। तुम मुझको ललचाओ.."

अदिति ने एक शर्मीली मुश्कान के साथ पूछा- “और उस वक्त तुम कहाँ हो, मेरा मतलब है की विशाल कहाँ है उस वक़्त?"

विशाल और भी उत्तेजित हो गया यह सुनकर और जवाब दिया- “बस समझ लो की मैं यहाँ नहीं हूँ। ऐसा करो

की समझ लो वो किसी दूसरे दिन को आया है जब मैं घर पर नहीं हूँ। ओके?"

अदिति ने अपनी चुलबुली आवाज में कहा- “हीहीहीही... अच्छा ठीक है। मुझको अब दोबारा आने दो। धीरे-धीरे चलकर आऊँगी तुमको सर्व करने... इंतेजार करो अब.”

विशाल- “ओके मैं 10 तक गिनता हूँ, तब आक्सन स्टार्टस ओके? सब नचुरल महसूस होने दो जान, तुम

अदिति हो और मैं आनंद। विशाल को बिल्कुल भूल जाओ इस वक्त। बस सिर्फ आनंद है यहाँ, सब रियल महसूस करो और एंजाय करो। देखना कितना मजा आएगा हम दोनों को, तुम बस अदिति बनकर आनंद को जवाब करती जाओ। ओके गिनती शुरू- 1- 2- 3- 4- 5..."

अदिति लाल चेहरे के साथ ट्रे लेकर कारिडोर में धीरे-धीरे आ रही थी और जब विशाल की गिनती हुई, 9- 10 अदिति ने ट्रे को बीच वाली टेबल पर रखा और अपने पल्लू को गिरने दिया। वो झुकी हुई थी मेज की तरफ और उसकी ब्रा में दो गोल-गोल चूचियां ऐसे झाँक रही थीं जैसे अब छिटक कर बाहर निकल आएंगी, और उसकी ब्रा की एक स्ट्रैप सरकी हुई थी उसकी कंधे पर।

विशाल उसकी चूचियों को ठरकी नजरों से देखते हुए अपने हाथ को पैंट के ऊपर लण्ड के पास रखते हुए, गले

को साफ किया और कहा- “ऐसे ही ठहरो कुछ देर अदिति..."

मुश्कुराते हुए अदिति ने पूछा- “क्यों आनंदजी?”

विशाल की खुशी का इंतेहा नहीं थी, जब देखा की अदिति कितनी नचुरली जवाब कर रही थी, खेल में भाग लेते हुए, फिर कहा- “मैं तुम्हारे खूबसूरत जिश्म के इन छुपे हुए हिस्सों को देखने के लिए तड़प रहा था अदिति, और अब आज मेरी आँखों को खुश हो जाने दो जानेमन...”

उसी मुश्कान के साथ अदिति झुके हए जवाब देती है- “ऐसी बातें आपको अपने दोस्त की बीवी के साथ नहीं करनी चाहिए आनंदजी, आप बुरे हो.."

विशाल- “कैसे मैं अपने आपको सम्भालूं अदिति, जब तुम्हारी खूबसूरत चूचियां मेरे मुँह में आने को मचल रही हैं, मेरे और करीब आओ अदिति..” और विशाल खड़ा होकर अदिति को अपने पास खींच लिया सोफे पर।

तब अदिति उसकी बाहों में थी और विशाल की उंगलियां अदिति के ब्लाउज़ के बटन खोलने लगी थीं। और अदिति भुनभुनाते हुए चुलबुली आवाज में बोलती जा रही थी- “आनंदजी क्या कर रहे हो आप? यह ठीक नहीं है, विशाल कभी भी आ सकता है। मुझे जाने दो...”

मगर तब तक विशाल उसकी एक चूची चूसने लगा था और एक हाथ से दूसरा चूची को मसल रहा था। जबकी अदिति की आँखें नशीली हो गई थीं, और सिर ऊपर करते हुए वो मदहोशी में डूबने लगी। धीरे-धीरे विशाल ने उसको सोफे पर लेटाया और उसके पेट से लेकर अपना जीभ फेरता गया उसकी नाभि तक, और विशाल की उस

आक्सन ने अदिति को अपने जिश्म को सीधा करवा दिया सोफे पर कराहते हुए सिसकियों के साथ।

 


अदिति ने कांपती आवाज में यह कहते हुए शिकायत किया- “आनंदजी किसी और की बीवी के साथ ऐसा करना ठीक नहीं है, मैं अपने पति को धोखा नहीं देना चाहती। रुकिये प्लीज... नहीं तो मैं अपने आपको बस में नहीं रख पाऊँगी। रुकिये ना आनंदजी..."

मगर तब विशाल उसकी नाभि के चारों तरफ गोल-गोल अपनी जीभ घमा रहा था, जिससे अदिति की जिश्म में एक आग लग गई और उसने विशाल के सिर के बालों को अपने मुट्ठी में लेकर जोर से खींचते हए- “सस्स्स... नहीं आनंदजीईई यह ठीक नहीं है...” कहा।

विशाल तब तक उसकी पेटीकोट उतार रहा था और उसकी जीभ चाटते हए नाभि से नीचे बढ़ रही थी। फिर उसकी जीभ चूत की तरफ गई जो तब पैंटी में थी। सब कुछ बहुत जल्दी हो रहा था, बहुत ही जल्दी। विशाल एक भूखे भेड़िये की तरह था उस वक्त। वो बहुत ही ज्यादा उतेजित हो गया था, क्योंकी अदिति उसको “आनंदजी” बुला रही थी और उसको लग रहा था की वो आनंद है और विशाल की पत्नी को चोदने जा रहा था। यह खयाल विशाल को बहुत ही गरम कर चुका था और अब तो वो रुकने वाला नहीं था।

विशाल ने जब अदिति की पैंटी उतार दी और उसकी चूत के पास अपना मुँह लाते हुए जब चूत की पंखुड़ियों को थोड़ा सा खोला तो देखा की अदिति बिल्कुल भीग चुकी थी, तो विशाल ने चाटा और उस नमकीन पानी को चाटा और अपनी जीभ को उस चूत की छेद में घुसाया। जिससे अदिति की एक ऐसी आवाज निकली की पूरा लाउंज में गूंज उठा। अदिति अपने आपको खोने लगी थी और उससे इंतेजार नहीं हो रहा था। अब वो जल्दी से जल्द

ना चाहने लगी, तो जल्दी से उसने अपने हाथ को विशाल के लण्ड तक लाया और उसके पैंट को खोलने लगी।

विशाल ने कहा- “हाँ अदिति। आनंदजी का लण्ड लो अपने मुँह में लो, उसको चखो, छातो, चूसो... जल्दी करो जानेमन मुझसे रहा नहीं जा रहा है अब। आनंदजी को और ज्यादा खुश करो...”

अदिति ने वक्त बिल्कुल बर्बाद नहीं किया, और तुरंत विशाल का लण्ड जो उसके मुँह में था। उसको उसने खूब चूमा, चाटा और चूसा हाथों में अच्छी तरह से लेकर। फिर अदिति ने विशाल के आंडों को अपनी उंगलियों में लिया, उसको भी चाटा और एक आंड को मुँह के अंदर लेकर चूसा। विशाल का सिर अदिति की जांघों के बीच में था और अदिति का सिर विशाल के जांघों के बीच। एक 69 पोज में दोनों ने सोफे पर, एक दूसरे को चाटते चूसते हुए लेटे थे। अचानक विशाल खड़ा होते हुए अदिति को गोद में उठाया और अपने मुँह को उसके मुँह पर करते हुए, जबकी अदिति ने नशीली हालत में अपनी जीभ को खुद विशाल के मुँह में डाला।

विशाल उसको बेडरूम के तरफ ले जाने लगा, और पूछा- “तुम्हारा बेडरूम किधर है? अदिति मुझको गाइड करो अब..” उस वक्त वो कारिडोर में अदिति को नंगी अपनी गोद में किस करते हुए लेकर जा रहा था और अदिति ने अपने उंगली से इशारा करते हुए बेडरूम दिखाया, और जब बेडरूम के पास आए तो अदिति ने ही बेडरूम का दरवाजा खोला। क्योंकी वो विशाल की गोद में थी।

अदिति बोली- “मैं आपको अपने बेडरूम में ले जा रही हूँ आनंदजी, वो भी जब मेरा पति घर पर नहीं है, मैं एक बुरी औरत हूँ। और आपकी गोद में नंगी हूँ आनंदजी और आप अपने दोस्त की बीवी को बिस्तर पर ले जा रहे हो आनंदजी ओह माई गोड...”

अदिति के ऐसे जवाब विशाल के तन में शोले भड़का रहे थे, जिस तरह से अदिति उसको आनंदजी कहकर बुला रही थी, इससे विशाल को बेहद मजा आ रहा था जैसे सच में अदिति आनंद के साथ थी और विशाल बिल्कुल ऐसा ही जवाब चाहता था अदिति से।

जैसे ही विशाल ने अदिति को बेड पर लेटाया, उसने अपने दोनों टाँगों को चियार दिया। बिना वक्त बर्बाद किए विशाल भी जल्दी से अदिति के ऊपर चढ़ गया, और तुरंत अपने लण्ड को उसकी गीली चूत में घुसेड़ दिया। और

अदिति ने एक लंबी सांस लेते हुए सिसकियों के साथ कराहते हुए आवाज निकली।

अदिति- “सस्स्स... आअहह... उफफ्फ... ओहह... हाँऽऽ आनंदजी आपने मेरे अंदर डाल ही दिया अपने लण्ड को, आपने अपने दोस्त की बीवी के अंदर डाल दियाऊहह... उफफ्फ... आअहह... इसस्स्स...”

विशाल खुद को रोक नहीं सका और बहुत ही जल्दी होता गया, सिर्फ 7-8 बार धक्के देने के बाद ही अदिति झड़ने लगी, काँपते हुए जिश्म से और सिसकियों में हॉफते हुए विशाल को बाहों में जकड़कर चिल्लाई, और विशाल ने साथ-साथ एक शेर की तरह गुर्राते हुये यह आवाज निकाली- “आघघह... सस्स्स... ईस्स्स... वाओ यू अरे डेलीशियस हनी वाउ... विशाल एक बहत लकी आदमी है की उसके पास तुम्हारे जैसी हाट तीखी बीवी है अदिति वाह... मजा आ गया आज ओऊवअघ..”

और जल्द ही विशाल को अपने लण्ड को बाहर निकालना पड़ा। सारे वीर्य को अदिति के पेट से लाकर चूचियों तक भीगोते हए, फिर तुरंत वो लेट गया अदिति के नंगे जिश्म के ऊपर और एक वाइल्ड किस में खो गये दोनों। ये सब बहत ही जल्दी हआ और किसी ने नहीं सोचा था की इतनी जल्द सब कुछ हो जाएगा। दोनों देर तक एक दूसरे के जिश्म के ऊपर हाँफते रहे।

अदिति उसका कांधा और गला चूमते जा रही थी कुछ खयालों में सोचते हुए। क्या उसको भी वही महसूस हुआ जो विशाल ने महसूस किया? क्या अदिति ने यह महसूस किया की आनंद उसको चोद रहा था? क्यों इतनी जल्दी वो झड़ गई? उस आनंद को अदिति सोच रही थी जो कुछ देर पहले उसके घर आया था? किसको पता चलेगा की अदिति के दिमाग में क्या था करते वक़्त? क्या विशाल को पाता था?

* * * * * * * * * *
 
कड़ी 12 विशाल और अदिति दोनों दिमागी झंझावात में

दूसरा दिन दोनों के लिए मुश्किल था। सुबह उठी तो अदिति को शर्म आई की कैसे कल रात को उसने आनंदजी का नाम लेकर सेक्स किया विशाल के साथ, विशाल से नजरें चुरा रही थी, अदिति विशाल के चेहरे में नहीं देख पा रही थी।

विशाल तो बेहद खुश था कल रात वाले सेशन से, सिर्फ यह सोचकर की कैसे अदिति “आनंदजी” कहकर उसको जवाब दे रही थी, जिससे उसका खड़ा हो जाता था। उसका मन कर रहा था की काम पर जाने से पहले एक बार और करे अदिति के साथ उसी रोल-प्ले को कहलते हुए। मगर अदिति ने इनकार किया।

विशाल ने घर से निकालने से पहले हमेशा की तरह अदिति को बाहों में लेकर एक जबरदस्त किस किया। उसका लण्ड खड़ा हुआ था और उसने लण्ड को अदिति के नीचे वाले हिस्से पर दबाते हुए फिर से करने की रिक्वेस्ट किया, यह कहते हुये- “चलो ना बेड पर जल्दी से कर लूँगा। देखना कितनी जल्दी झड़ जाऊँगा। चलो

ना प्लीज...”

अदिति ने किस को जारी रखते हुये जवाब दिया, अपने जीभ को विशाल के मुँह में पिघलाते हुए। फिर जीभ को बाहर निकालकर विशाल के गले और गाल पर फिराते हुए अदिति ने कहा- “आज रात के लिए उसको रिजर्व रखो, ज्यादा मजा आएगा रात को..."

विशाल ने घर से निकलते वक्त चौखट तक आते ही दरवाजा बंद करते वक्त कहा- “कल रात तुम पटाखा थी जान... मैं चाहता हूँ हमेशा तुम वैसे ही मेरे साथ सेक्स के दौरान रहो। मुझे बेहद बेहद मजा आया था और मुझे पूरा यकीन है की तुमने भी उतना ही एंजाय किया कल रात को। है ना जान?”

अदिति ने शर्माते हुए उसको निकालने के लिए बाहर धकेला और शर्मीली मुश्कान के साथ सिर को हाँ में हिलाया। तब बाल्कनी से अदिति ने विशाल को गुडबाइ वेव किया, जब वो गेट के बाहर निकल रहा था ड्राइव करते हुए।

ओम वहीं था गेट के पास और जब विशाल चला गया तो ओम ने हाथ से अदिति को ऊपर देखते हुए वेव किया। अदिति ने उसको वेव नहीं किया सिर्फ मुश्कुराई उससे। वो तुरंत अंदर नहीं गई पर वहीं रुकी रही। थोड़ी

देर इधर-उधर दूसरी बाल्कनी पर देखते हुए। बेशक वो आदित्य को ढूँढ़ रही थी।

ओम उसको देखते हुए बड़बड़ाया- “कितनी हाट है यह वाली यार, एकदम पटाका है। देखो तो उसका जिश्म किस तरह मेरी नजरों के सामने है, और उसको जरूर पता होगा की मैं उसके जिश्म को ही देख रहा हूँ फिर भी वहीं रुकी हुई है। साला मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है सिर्फ इसको देखते ही.”

फिर ओम ने जैसे ही अपने पैंट में लण्ड को सीधा किया, तो अदिति उसको उसी वक्त देख रही थी और खूब अच्छी तरह से देखा की ओम ने क्या किया और हँसते हुए अपने अपार्टमेंट के अंदर वापस चली गई।

जबकी ओम ने खुद से कहा- “अदिति मेम मुझे लण्ड सीधा करते हुए देखकर हँसी? अरे मुझे अब इसको पाना चाहिए यार, यह तो हाथ आने वाली चीज लगती है। ट्राई मारूं किया इसपे?” ओम का लण्ड और भी ज्यादा जमकर खड़ा हो गया अदिति को सोचते हुए।

आफिस में विशाल काम नहीं कर पा रहा था, कल रात वाली सेशन को सोचते हए। उसके कानों में सिर्फ अदिति की आवाज गूंज रही थी इन शब्दों में- “आनंदजी मैं आपके दोस्त की पत्नी हैं, आप अपने दोस्त की पत्नी के साथ यह कर रहे हो, यह ठीक नहीं है आनंदजी...” अदिति की आवाज बहुत ही सुरीली थी।

अदिति की आवाज में सिर्फ इस लाइन को सुनकर किसी के भी लण्ड की नश टूट जाती। विशाल अदिति की आवाज को उन अल्फाजों को कहते हुए सुनता जा रहा था और इससे उसके काम में फरक पड़ रहा था।

उधर अदिति भी अपनी तरफ की करने वाली मजेदार हिस्सा याद कर रही थी की कैसे “आनंदजी” को सोचते हुए करने से ज्यादा मजा आया और कितनी जल्दी आर्गेज्म आ गई।

अदिति ने खुद से कहा- “क्यों और कैसे इतनी जल्दी कल रात को मुझे आर्गेज्म आ गया? क्या मैं यह समझ रही थी की सच में आनंदजी मेरे साथ कर रहा था? शायद मैं सच में उनको सोच रही थी, जब विशाल को उसके नाम से बुला रही थी। हे भगवान्... क्यों विशाल मुझसे ऐसे करवाता है? सच में मुझे वो आदमी मेरे बेड पर महसूस हो रहा था कल रात को। मगर क्यों और किसलिए मुझको इतनी जल्दी आर्गेज्म आ गई उसको सोचते हुए? और जब आदित्य को भी सोचकर किया था तब भी ऐसा ही हुआ था। तो क्यों जब किसी और को खयालों में सोचते हैं तो बेहतर तरीके से सेक्स होता हैं? मैं शादी के बाद कितनी रूखी सूखी थी इन मामलों में। मुझे तो कुछ पता भी नहीं चलता था और विशाल सिर्फ अपने लिए किया करता था तब। आर्गेज्म क्या होता है इसकी । मुझे कोई जानकारी ही नहीं थी तब। मगर अब बहुत मजा आता है और ज्यादा करने को मन करता है। क्या मैं बदल रही हूँ? क्या सभी औरतें ऐसी ही होती हैं शादी के बाद? पता नहीं कि मेरे साथ कोई प्राब्लम है या नहीं। क्या करना चाहिए मुझे?"

दोनों विशाल और अदिति दिन भर ऐसे ही सवालों में उलझे रहे।

विशाल तो यह भी सोचता रहा- “क्या अदिति ने सच में आनंद को महसूस किया कल रात को बेड पर? क्या उसको ऐसा लगा की आनंद का लण्ड घुस रहा था उसके अंदर? क्या इसीलिए इतनी जल्दी उसको आर्गेज्म आ गई थी? तो इसका मतलब है की जो सपना मैं सालों से देखता आ रहा हूँ वो सच हो सकता है अब। क्या अदिति आनंद के साथ सोना चाहेगी अगर मैं उसको कहूँगा तो? क्या मुझको उन दोनों को चोदते हुए देखने का अफसर प्राप्त होगा? मगर उसके बाद हम दोनों का रिश्ता कैसा राहेगा? मगर मैं यही तो चाहता हूँ ना? मगर क्या उसके बाद अदिति का रवैया मेरे प्ति बदल तो नहीं जाएगा? मैं वो तो नहीं चाहता। मैं तो चाहता हूँ की वो वैसी ही रहे किसी दूसरे के साथ करने के बाद भी। वो तो किसी और के साथ सिर्फ मुझे खुश करने के लिए करेगी। क्या वो मानेगी वैसा करना आनंद के साथ, अगर मैंने कहा तो? या कुछ ऐसा बंदोबस्त करूँ की वो किसी और से चुदवाए और मैं छुपकर देखू, और उसको पता भी नहीं चले की मैं देख रहा हूँ? क्या करूँ कैसे इसका प्रबंध करूँ?” यही सब सोचते हुए विशाल सिर को खुजने लगा।

विशाल को यह सब परेशान कर रहा था। फिर भी यह सब सोचते हुए उसका लण्ड जबरदस्त खड़ा हुआ था।

आखीर में उसने सोचा की उसको सब कुछ मामूल तौर पर चलने देना चाहिए और सब्र से उस वक़्त का इंतेजार करे, जब कुछ हो या होने की संभावना हो।

उस तरफ अदिति ने सोचा- “मैं विशाल से ऐसे खेल को रोकने के लिए कहंगी। मगर फिर सोची की यह खेल ही तो उनके सेक्स लाइफ को और मसालेदार बना रहा है। तो उसने भी सोचा की जैसे चल रहा है चलने दें, और उसी तरीके से एंजाय करें जैसे विशाल चाहता है। वो सिर्फ इतना समझती थी की अपने पति की आज्ञा का पालन कर रही है और उसमें उसको भी ज्यादा खुशी मिल रही है, सेक्सुअल लाइफ में, तो सब वैसा ही चलने दें।

 
आफिस में लंच टाइम के वक़्त आनंद बिना बुलाए विशाल के आफिस में आया और उस लड़की से बात करना चाहा, जिसको पहले फोन किया था।

मगर कुछ बहुत अजीब हुआ उस वक्त। जिस वक्त विशाल ने अदिति को अनरजिस्टर्ड फोन से काल किया। ठीक उसी वक्त उधर ओम ने भी अदिति को फोन किया था। असल में उस वक्त अदिति भी आदित्य के फोन

का इंतेजार कर रही थी। मगर जब फोन बजी और लेने गई तो देखा की ओम का नाम है मोबाइल पर।

अदिति ने फोन लेकर जवाब दिया- “हाँ ओम, तुमको कैसे आज मुझे काल करना पड़ गया क्या हुआ?"

ओम- “हेलो मेडम, बस ऐसे ही आपसे बात करने को मन किया आज.."

अदिति- “अच्छा ऐसे ही? मगर क्यों?”

ओम- मेडम जी आपकी आवाज बेहद खूबसूरत है और मुझे आपको सुनने में बहुत अच्छा लगता है बात करते हुए...”

अदिति- “तुम मुझसे फ्लर्ट करना चाहते हो क्या ओम?” और अदिति ने खिलखिलाकर हँस दिया। उसको हँसते हुए सुनकर ओम का हौसला बढ़ा और कहा।

ओम- “और आपकी हँसी आपकी आवाज में बस शहद मिला देती है मेडम...”

अदिति- “बस बस, फेंकना छोड़ो और अपना काम करो

ओम- “वही तो कर रहा हूँ अदिति मेम, वाच कर रहा हूँ की कोई छो आपके घर में ना घुसे...” और ओम हँस पड़ा यह कहकर।

अदिति- “फिकर मत करो, अगर कोई चोर आया तो मैं तुमको ही बुलाऊँगी उसे पकड़ने को..”

ओम- “मेडम आप बाल्कनी पर आइए तो, मैं आपको देखना चाहता हूँ.”

अदिति फिर से जोर से हँसी और मन में कहा- “मुझको क्यों उसकी बातों को सुनना चाहिए?”

मगर ओम ने मिनतें की और पूछा- “अच्छा आप यह बताइए मुझको की आप इस वक़्त साड़ी में हो या चूड़ीदार

में?"

अदिति फिर हँस पड़ी और थोड़ी हैरान होकर कहा- “ओम मगर तुमको क्यों यह जानना चाहिए? तुमको नहीं लगता की तुम हद से आगे बढ़ रहे हो ऐसे सवाल करके मुझसे?” फिर अदिति ने अपने लाउंज के पर्दे को हटाकर नीचे ओम को देखा बिना ओम को पता लगे की वो उसको देख रही है। उसने देखा की ओम उसकी छत के तरफ देखते हुए बात कर रहा है मोबाइल पर।

अदिति ने सोचा- “तो वो मेरा इंतेजार कर रहा है छत पर?"

उधर आफिस में विशाल ने कई बार अदिति को फोन किया और उसको बहुत ताज्जुब हुआ की अदिति की फोन एंगेज्ड आ रही थी। वो इतनी देर तक किससे बातें कर रही होगी? विशाल ने सोचा।

आनंद ने विशाल से कहा- “हो सकता है की उसके पति ने उसको फोन लिया होगा और वो भी इस वक्त लंच टाइम में होगा..."

विशाल अब आनंद को नहीं बता सकता था कि उसका पति तो वही है।

ओम ने कहा- “बोलो ना मेडम क्या पहनी हो आप, इंतेजार मुझको। गेस करूं?”

अदिति- “ठीक है। तुम गेस करो मैं देखती हूँ की कितना सही हो सकते हो तुम। अगर तुमने सही गेस किया तो मैं छत पर आऊँगी..”

ओम- “हम्म... एक खूबसूरत साड़ी, एक टाइट ब्लाउज़ के साथ और मैं आपकी कमर को देख सकता हूँ..."

अदिति ने होंठ को दाँत में दबाते हुए उसको छेड़ा- “नहीं तुम हार गये। ओके और एक ट्राई करो..."

ओम- “तो फिर आप एक टू-पीस में होगी, एक स्कर्ट और एक टी-शर्ट या एक ब्लाउज़ जिस पर सामने बटन लगे हों..”

अदिति चौंक गई और पूछा- “तुमको कैसे पता चला? और तुम मेरे कपड़ों के बारे में कैसे जानते हो? तुम मुझपर नजर रख रहे हो? कब तुमने मुझको इसमें देखा, तुम कब ऊपर आए थे?"

ओम- “नहीं मेडम... मैंने अंदाजन कहा, मुझे पता भी नहीं की किस रंग के हैं कपड़े। अब तो आप छत पर आ जाओ, मैंने ठीक गेस किया ना...”

अदिति तब छत पर गई फोन को कान से लगाए, और ओम से मुश्कुराई नीचे गेट के पास देखते हए। अदिति उसको देखते हुए बोली- “यह लो, मैं छत पर आ गई अब खुश? अब तुम अपना काम करो, नाटी बाय मैं वापस जा रही हूँ.."

मगर ओम ने रिक्वेस्ट किया- “नहीं रुको, रुको ना अदिति जी। मुझे आपको जरा देखने तो दो ना प्लीज... वाउ

आपकी स्कर्ट बिल्कुल वैसी है जैसा मैंने सोचा था, आपके घुटनों तक। अदिति जी आप नीचे आ सकती हो ताकी मैं नजदीक से देख सकूँ?”

अदिति- “नहीं बिल्कुल नहीं। तुम अपना कम करो मैं वापस जा रही हूँ नाटी बाय.."

ओम ने बिनती की- “नहीं अदिति जी, रुको ना प्लीज... एक काम करो जाने से पहले प्लीज रुकिये ना..."

अदिति- “अब क्या है ओम?"

ओम- “प्लीज... आप अपने एक पैर को छत की रेलिंग पर रखिए ना..."

नीचे से ओम अदिति की जांघों के बीच देख सकता, अगर अदिति ने एक पैर को उस मेटल-बार पर रखा तो, इसीलिए उसने यह माँग की।

और यह जानते हुए की ओम क्या देखना चाहता है अदिति ने अपने एक पैर को वहीं रखा जहाँ ओम ने कहा था, और अपने होंठ को दाँतों में दबाते हुए ओम को चिढ़ाते हुए जल्दी से वापस चली गई हँसते हुए। यह सिर्फ 5-6 सेकेंड में हुआ, बहुत ही जल्दी।

ओम बेहद खुश हआ और अपने लण्ड को फिर से पैंट में सीधा किया, और अदिति ने उसको नाक को मोड़ते हुए नकल किया और काल खतम करके चली गई वापस अपने अपार्टमेंट में।

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कड़ी 13 अदिति को ओम ने दोबारा काल किया

अदिति ओम की बातों को सोचते हुए सोच विचार करने लगी की उसमें ऐसा क्या है की अब दूसरे मर्द उसमें दिलचस्पी लेने लगे हैं। उसको हँसी आ रही सोचकर जो ओम ने उसको करने के लिए कहा, और सोच रही थी

थी क्या इतने दूर से उसको उसकी जांघे नजर आई होंगी क्या। फिर अदिति आईने के सामने गई, और अपनी स्कर्ट को ऊपर उठाकर खुद अपनी जांघों को निहारने लगी, और थोड़ा सा सहलाया, तो उसकी जिश्म के रोंयें-रोंयें खड़े हो गये। क्योंकी पता नहीं क्यों उसको आनंद का चेहरा सामने दिखाई दिया और महसूस किया की वो आनंद का हाथ था, जो उसकी खूबसूरत बेदाग गदराई जांघों पर फेर रहा था।

अदिति ने खुद से बात की- “यह मुझे क्या हो रहा है? आनंदजी क्यों मेरे खयालों में आए? क्या यह कल रात वाली सेशन का असर है? क्या मैं उस रोल-प्ले में कुछ ज्यादा ही डूब गई थी? या कुछ ज्यादा ही बहक गई थी रोल-प्ले करते हए?” अदिति ने काफी देर तक अपने जिश्म को आईने में निहारा, यहाँ तक की अपने ब्लाउज़ को उठाकर ब्रा में संभाली हुई अपनी चूचियों को भी देखा और अपनी उंगली को स्ट्रैप के अंदर डालकर थोड़ा बहुत अपनी छाती को मसला भी।

आईने के सामने खड़े हुए ही अदिति ने सोचा- “और क्या आनंदजी ने अपनी पत्नी के साथ करते हुए मुझको भी सोचा होगा क्या? मुझको गुडबाइ किस करते वक़्त उन्होंने अपनी उंगलियों को मेरी कमर पर फेरा था, उम्मीद है की विशाल के नोटिस नहीं किया होगा। नहीं तो अगर उसने देखा होता तो उसके बारे में बात करता, तो उसने नहीं देखा होगा। मगर मैंने इस बात को क्यों विशाल को नहीं बताया? मुझको विशाल से कहना चाहिए था की उसके दोस्त ने मेरी कमर पर अपने उंगलियों को फेरा था। क्यों मैं छुप रही? ओह माई गोड... मैं खुद को अब नहीं समझ पा रही हूँ कि मेरे दिमाग में क्या चल रहा है आजकल।

उधर विशाल सोचता रहा के किससे इतनी देर तक अदिति बातें कर रही है फोन पर? और यह भी सोच रहा था

की किस तरह कल रात को अदिति गरम जवाब दे रही थी करते वक्त, और सिर्फ सोचने पर ही हर वक्त उसका खड़ा हो जाता था। अपने दिमाग को काफी देर तक चलाता रहा की किस तरह से अदिति को और ज्यादा उतेजित कर सकता है की अदिति एक दिन किसी और मर्द के साथ जाने को तैयार हो जाए।

उस शाम को जब विशाल वापस घर आ रहा था तो अदिति बाल्कनी में इंतेजार कर रही थी और ओम उसको नीचे से देख रहा था। अदिति भी कुछ नाक, होंठ, मोड़ वोर कर ओम से नखरे वाले स्माइल कर रही थी। ओम ने अदिति को इशारे से फोन लेने को कहा, क्योंकी वो उसको फोन करना चाहता था। फिर इशारे से ही अदिति ने उसको समझाया की उसका पति का लौटने का वक्त है, मगर ओम ने जिद किया और अदिति की अंदर से सेल फोन बजने लगी तो जल्दी से अदिति अंदर गई जवाब करने उसको।

अदिति- “मैंने कहा ना मेरा पति आने वाला है तुम नहीं समझते हो क्या?”

ओम- “मेडमजी प्लीज आप छत पर आओ मैं आपको देखते हुए बात करना चाहता हूँ.”

अदिति सेल फोन के साथ छत पर गई और ओम की तरफ देखते हए सेल पर जवाब किया- “अब क्या है?"

ओम- “एक बार फिर से वैसा करो जो दिन में किया था प्लीज... अदिति जी...”

अदिति- “तुम मुझको अपनी गर्लफ्रेंड समझते हो क्या” हम्म... तुम निराश हो जाओगे, मैं तुमसे सिर्फ इसलिए बात करती हूँ क्योंकी तुम यहाँ काम करते हो, और हर रोज एक दूसरे को हम देखते हैं, वरना मैं किसी भी अजनबी से बात नहीं करती समझे तुम?"

ओम- “ओहह... मेडमजी ऐसा तो मत कहो, मैं अजनबी थोड़ा ही हूँ, हम तो एक दूसरे को जानते हैं और हम तो दोस्तों से भी बढ़कर हैं। है ना?"

अदिति- “हाँ मगर तुम क्यों और कैसे मुझसे इतने निजी बातें करने लगे हो? मैं क्या तुमको एक एसी लड़की लगती हूँ, जो किसी की बाहों में आ जाये? हाँ? मैं बिल्कुल उस किशम की लड़की नहीं हूँ। और यह बताओ क्या तुम इसी तरह इस बिल्डिंग की सभी औरतों से बात करते हो?"

ओम- “नहीं नहीं अदिति जी, बिल्कुल नहीं। ऐसी बातें हर किसी के साथ कैसे कर सकता हूँ भला, सब आपकी तरह खूबसूरत और हाट थोड़े ही हैं यहाँ? और सब औरतें आपकी तरह जवान नहीं हैं यहाँ। इस बिल्डिंग में तो ज्यादा आंटियां हैं, सिर्फ 3 या 4 जवान हैं आप जैसे। और मेडमजी बाकी के जवान ओरतें तो काम करने जाती हैं, सिर्फ एक आप हो जो घर पर रहती हो। जवान और ब्यूटिफुल हाउसवाइफ हो आप। बाकी की जवान बीवियां जो काम करने जाती हैं, उनके पति हैं यहां। मगर उनके बायफ्रेंड उनको वापस काम से यहाँ छोड़ने आते हैं शाम को, मैं सब देखता हूँ मेडमजी.”

 
यह सुनकर अदिति के दिल में एक टीस सी उठी। टीस इस तरह की सेक्सुअल, उतेजित होने वाली टीस। उसके खयाल में यह बात आई की पति के होते हुए बाहर बायफ्रेंड के साथ होना। अदिति ने तुरंत सोचा की अगर विशाल को पता चला तो एक और नया रोल-प्ले खेलेगा रात को बायफ्रेंड वाला। लग रहा था की अदिति अब विशाल के रंगों में ढल गई है, क्योंकी अब विशाल की तरह सोचने भी लग गई है। रोल-प्ले करना हर रात को, अब इसका असर होने लगा था अदिति पर शायद, और उसको सेक्स के बारे में सोचना हर बात पर, विशाल के लिए पाजिटिव काम कर रहा था अदिति के दिमाग पर। मगर इसका विशाल को पता नहीं था, बहुत खुश होता

वो अगर उसको पता चलता की अदिति क्या-क्या सोचने लगी है अब।

विशाल वापस आ रहा था काम से और सोचा की एक बार और अदिति को दूरबीन से देखे। और विशाल को हेरानी हुई यह देखकर की अदिति बाल्कनी में मोबाइल पर किसी से बातें कर रही थी। विशाल सोचने लगा की अदिति किससे बात कर रही थी मोबाइल पर, वो भी छत पर बाहर खड़ी होकर? लंच टाइम में भी किसी से बात कर रही थी और अब भी। विशाल बहुत हैरान हुआ। वो आनंद को सोचने लगा की कहीं आनंद तो नहीं बात कर रहा अदिति से? उसने सोचा क्या पता आनंद को नंबर मिल गया हो उस अनरजिस्टर्ड सिम से। क्योंकी दो बार उसने अदिति से बात किया था उस फोन से। सिर्फ यह सोचकर की अदिति आनंद के साथ सेक्सुअल बातें कर रहा है, विशाल का खड़ा हो गया और एक बार बस ऐसा सोचने से।

विशाल ने देखना जारी रखा दूरबीन से और नोटिस किया के अदिति बात करते वक्त नीचे की तरफ देख रही थी जैसे कोई गेट के पास से उससे बातें कर रहा था। और सोचा- “क्या आनंद उससे पहले यहाँ पहुँच गया क्या? या आनंद ने अदिति को अपना फोन नंबर दिया था और मुझे पता नहीं? यह हो सकता है क्या? हाँ हाँ कुछ भी हो सकता है। अगर एक बीवी अपने पति से कुछ छुपाना चाहे तो छुपा सकती है.."

विशाल ने सोचा की आज रात को यही रोल-प्ले खेलेगा अदिति के साथ की आनंद ने उसको फोन नंबर दिया है

और सेक्स चैट करेगा अदिति के साथ। विशाल देखना चाहता था की अदिति कौन से शब्दों का इश्तेमाल करेगी उस चैट में? क्या वैसे ही गरमा गरम जवाब देगी, जैसे कल रात को दिया था?

जिस जगह पर विशाल था वहाँ से सिर्फ अपार्टमेंट का ऊपर वाला हिस्सा देख सकता था, और तकरीबन सभी बाल्कनियों को, मगर नीचे का हिस्सा नहीं दिखता था उसे, जहाँ गेट और पार्किंग हैं। उसने सोचा की अदिति से काल के बारे में नहीं पूछेगा। देखना चाहता था की अदिति अपने आप बताती है उसे या नहीं?

अदिति ने ओम को एक जवाब देते हुए कहा- “और तुम चाहते हो की मैं तुम्हारा यकीन करूँ की तुम उन जवान औरतों से फ्लर्ट नहीं करते हो जिनके बायफ्रेंड हैं बाहर? उन लोगों पटाना बहुत अाससन है ना ओम?”

ओम- “ओह्ह... नहीं मेडमजी। मैं तो उन लोगों से बात भी नहीं करता, वह लोग अपने आपको बहुत बड़ा समझते हैं, और मुझको नीच समझते हैं। मैं एक मामूली वाचमैन जो ठहरा यहाँ का, मुझको वह लोग अपना नौकर समझते हैं, वो मेरा मालिक समझते हैं अपने आपको। मगर आप वैसी नहीं हो, आप बहुत अच्छी लगती हो। इसीलिए आपसे बातें करना पसंद करता हूँ मैं.."

अदिति- “हम्म... तो तुम मेरे अच्छी होने का गलत फायदा उठा रहे हो, मुझसे हर तरह की बातें करके?"

ओम- “नहीं मेडमजी, आप मुझे गलत मत समझिये प्लीज..."

अदिति- “तुम्हारी उमर क्या है ओम? जवान लगते हो, तुमको शादी कर लेनी चाहिए और अपनी पत्नी होनी चाहिए, तब खुश रहोगे, मजा करोगे और दूसरों के बीवियों के साथ फ्लर्ट नहीं करनी पड़ेगी तुमको...” यह कहकर अदिति खिलखिलाकर हँस पड़ी।

ओम- “ओह्ह... मेडमजी मुझे आपकी हँसी बेहद पसंद है, कितना अच्छा लगता है आपको ऐसे हँसते हुए सुनना, वाह क्या बात है जी। हमेशा हँसते रहना मेडम आपको बहुत सजता है ऐसे हँसना। आपकी पर्सनालिटी को आपका ऐसे हँसना चार चाँद लगा देता है। मैं 23 साल का हूँ मेडमजी और मुझको मेरे सपनों की रानी नहीं मिल रही है शादी करने को। आपकी कोई बहन है क्या मेडमजी? आप पर्फेक्ट टाइप की वाइफ हो जो मुझे चाहिए। क्यों मैं आपसे आपकी शादी होने से पहले नहीं मिला मेडमजी, मेरा बैडलक अदिति जी...”

अदिति जोर से हँसी, जब ओम ने पूछा की उसकी कोई बहन नहीं है।

विशाल को ये देखकर ज्यादा ताज्जुब हआ। वो सिर्फ विशाल के साथ वैसे हँसती है, विशाल को लगा था की वो किसी बहत करीबी वाले के साथ बात कर रही थी। किसी गैर के साथ तो वो वैसे बात नहीं कर सकती। विशाल पागल होने लगा और ड्राइव करने लगा घर जाने को, और देखने के लिए की अदिति किससे बात कर रही है।

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कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
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