Update 25 विशाल कोशिश करता है नये रोल-प्ले की
अदिति फिर से उसको अपनी बंद मुट्ठी से मारते हुए अपने होंठों और नाक को ट्विस्ट करके अपनी बचपना आवाज में बोली- “नहीं मुझसे यह रोल-प्ले नहीं होगा, यह मत खेलो ना...”
विशाल बहुत उत्तेजित हो रहा था उन दिनों को सोचते हुए और अपने डैड को अदिति के साथ सोचते हुए गुर्राते हए कहा- “जान तमको भी पसंद आएगा मझे परा यकीन है. बस उन दिनों को लौट चलो और एक बार फिर उन लम्हों को जी लो। बिल्कुल वैसे जैसे आनंद को सोचकर खेलती थी वैसे ही डैड को सोचकर खेलना। चलो शुरू करते हैं, मैं उठ रहा हूँ बाहर जाकर दरवाजा खोलूँगा, तुम जाओ आईने के सामने अपने बालों को कंघी करो, बाद में बताऊँगा कैसे आगे बढ़ना है? ओके जाओ, मैं बाहर निकलता हूँ.”
अदिति कुछ नहीं कह पाई और विशाल एक पैंट बिना शर्ट के पहनकर बाहर गया फिर से अंदर आने को अपने डैड बनकर।
विशाल ने दरवाजा खोलते हुए कहा- “मैं चौंक जाऊँगा तुमको इस नाइटी में देखकर, और तुम अपने हाथों को अपनी चूचियों पर रखते हुए यह सोचोगी की मैं सारी कहकर दरवाजा बंद कर दूंगा, मगर मैं वो नहीं करूँगा बल्की अंदर आ जा ऊँगा, और तुम्हारी समझ में नहीं आएगा की तुम क्या करोगी? जब देखोगी की मैं तुम्हारी तरफ बढ़ रहा हूँ। ओके जान? दो मिनट के बाद दरवाजा खोलता हूँ तैयार रहो...”
कुछ देर बाहर ठहरते हए विशाल सोचने लगा की अदिति कैसे इस रोल-प्ले को निभाएगी? उसके अंदर क्या गुजरेगी? वो उसके डैड को कैसे सोचेगी? वो देखना चाहता था की अदिति उसको “पापा” बुलाएगी जैसे उसके डैड को बुलाती है और जिस तरह वो “आनंदजी” कहकर उस रोल-प्ले को निभाती थी, क्या वैसा ही करेगी अब भी या नहीं? आनंद का रोल-प्ले खेलने में अदिति बेहद खुश होती थी, और बहुत उत्तेजित हो जाती थी। क्या अपने ससुर के साथ वाला रोल प्ले करते वक्त भी वैसे ही खुश होगी। कुछ हिचकिचाहट दिखा रही थी अभी, मगर क्या पता खेल को खेलने दौरान वो इसमें रंग जाए और फिर विशाल को पता था की किस तरह अदिति को उस रंग में रंगा जाए।
अदिति आईने के सामने हाथ में एक कंघी लिए खड़ी थी और उसको ठंड महसूस हुई और जिश्म में एक अजीब सी लहर जो पहले नहीं हुई थी कभी, वो सोच रही थी की इस रोल-प्ले के दौरान उसपर क्या गुजरेगी? कैसा होगा, क्या करेगी? आनंद वाला रोल-प्ले खेलने में उसको बहुत मजा आया था। मगर अब जो विशाल खेलने को कह रहा है क्या यह कुछ ज्यादा था, या अदिति के लिए एक मामूली बात थी यह भी? वक्त आने पर पता चल जाएगा। वो अपने खुद के जिश्म को देख रही थी आईने में। और विशाल के दरवाजा खोलने का इंतेजार कर रही थी। सोच रही थी क्या जवाब देगी, कैसे रिएक्ट करेगी?
अचानक विशाल ने दरवाजा खोलकर उसको घूरतेट हुए देखा। अदिति ने उसको देखा, और अपने हाथों को अपनी छाती पर करते हए उसके चेहरे में लाली आ गई, जैसे के वो सच में किसी और को देख रही थी विशाल को नहाली
विशाल ने कहा- “बेटा मुझे नींद नहीं आ रही है, तो सोचा तुमसे दो बात कर लूँ। मगर लगता है की मैंने तुमको डिस्टर्ब किया क्या?"
अदिति चुलबुलाती हुई हँसी, क्योंकी विशाल ने उसको “बेटा” कहकर बुलाया था, बिल्कुल जैसे उसके डैड अदिति को बुलाते था।
विशाल ने थोड़ा नापसंद करते हुए कहा- “ओफफो... क्यों हँसी तुम? खेल को मत बिगाड़ो यार। क्या तुम ऐसे ही हँसती, अगर डैड तुम्हारे सामने खड़े होते, तुमको इस स्थिति में देखते हुए?"
अदिति ने और ज्यादा जोर से हँसते हुए कहा- “मुझे नहीं पता था की तुम मुझको “बेटा” कहकर बुलाओगे बिल्कुल जैसे पापा बुलाते थे। तुमने यह नहीं कहा था शुरू करने से पहले, कितना फन्नी लगता है तुम्हारे मुँह से मुझे “बेटा” बुलाते हुए सुनना, तुमको एक बूढ़े का रूप देता है..” और अदिति ने एक शैतानी स्माइल दिया विशाल को चुलबुलाते हुए।
विशाल फिर से कमरे से निकला यह कहते की मैं दोबारा वही लाइन बोलूंगा और अदिति वो जवाब दे जो उसको इस मौके के लिए सही लगे। तो विशाल ने वही किया, फिर से दरवाजा खोलकर अंदर आया, वही लाइन रिपीट किया।
अदिति ने वैसे ही हाथ से अपने छाती को ढकते हुए अपनी हँसी को कंट्रोल करते हुए जवाब दिया- “मगर पापा अभी सोने का वक्त हो गया है ना?"
विशाल उसकी तरफ बढ़ने लगा जबकी अदिति एक-दो कदम पीछे हो गई। मगर और पीछे जाने की जगह नहीं थी तो वो आईने से टकराई और रुक गई, विशाल के चेहरे में देखते हुए। विशाल उसके पास आया और हल्के से अपने हाथ को उसकी कंधे पर रखते हुए कहा।
विशाल- “बेटा मुझको बहुत कम तुमको इस ड्रेस में देखने का मौका मिला है, कमाल की दिख रही हो वाह... मेरा बेटा सच में बहुत खुशनसीब है री.."
बिना कुछ बोले अदिति ने अपना सिर नीचे झुका लिया, कंघी को टेबल पर रखते हुए उसका दिल जोरों से धड़कने लगा, जैसे के सचमुच उसका ससुर उसके सामने खड़ा उसके मुलायम नंगे कंधे को छू रहा था।
तब विशाल ने उसके कंधे से उसके पूरे बाजू पर हाथ फेरते हुए उसकी उंगलियों में अपने उंगलियों को डाला और अदिति को अपने जिश्म की तरफ हल्के से खींचा। उस वक़्त अदिति की समझ में नहीं आया की क्या करना चाहिए तो खामोश रही। और विशाल ने अपने हाथ को उसकी कंधे के ऊपर फिर से रखकर धीरे-धीरे हाथ को उसकी चूचियों की तरफ ले गया, और जब अदिति ने जवाब नहीं दिया तो बचानी से विशाल ने कहा- “तो तुम डैड को अपनी चूचियों को ऐसे छूने दोगी?”
अदिति अपने सिर को झुकाए हुए ही बोली- “मुझे बिल्कुल नहीं पता की क्या कहूँ या करूँ?"
विशाल बेचैन होते हुए बोला- “ओफफो... जान बस ऐसा समझो के वो सच में इस वक्त तुम्हारे सामने है और वही करो जो तुम करती या कहती, अगर वो इस वक्त तुम्हारे बेडरूम में तुम्हारे साथ ऐसा करते क्यों खेल को बिगाड़ रही हो यार?”
अदिति ने चेहरे में लाली भरे कहा- “क्या करती मैं, अगर सच में ऐसा होता तो? कैसे रिएक्ट करती, मैं रिएक्ट करना भूल जाती, कुछ आवाज ही नहीं निकलती मेरी और शायद मैं बेहोश हो जाती...”
विशाल ने अपने माथे को पीटते हुए कहा- “ओके सीन को चेंज करते हैं। तुम सो जाओ, सोई हुई गहरी नींद में हो और डैड तुम्हारे कमरे में आते हैं और तुम्हारे जिश्म पर अपना हाथ फेरते हैं, जब नींद में हो तुम। तुम आँख बंद किए हुए यह समझ रही हो की मैं हूँ, इसलिए करने देती हो। जब तक वो तुम्हारी पैंटी को किस करके उतारता है। यह ठीक रहेगा?”
अदिति को आराम महसूस हुआ और कहा- “हाँ यह बेहतर है, मुझको जवाब नहीं करना पड़ेगा, मैं नींद में हूँ, हाँ इसी को खेलो अब..."
तब अदिति बेड पर गई, कमरे की लाइट ओन करे हए, चादर अपने ऊपर किया और अपनी जाँघ को कवर नहीं किया और क्लीवेज को भी दिखने दिया और कहा- “लो तुम मुझको इस हालत में देखोगे अंदर आते हुए और उत्तेजित हो जाओगे इस हालत में मेरे जिश्म को देखकर, और मुझको छुओगे, मगर मैं नींद में ही रहूंगी और जब मेरी चूत में लण्ड घुसाओगे, तब जवाब करूँगी ओके?”
विशाल ने बहुत खुश होते हुए कहा- “वाउ बेबी ग्रेट... अब मैं फिर से बाहर जाता हूँ और अंदर दाखिल होते ही
तुमको इस स्थिति में देखकर पागल हो जाऊँगा, शाबाश मेरी जान मुउआह्ह... यह हुई ना बात। अब तुमको ऐसे देखकर मेरा खड़ा हो जाएगा और खुद को नहीं रोक पाऊँगा। तुमको चादर हटाकर और देलूँगा, दुलार करूँगा, तुम नींद में ही अंगड़ाइयां ले सकती हो और इसस्स्स... वगैरा कर सकती ही ओके?"
अदिति- “ओके फिकर मत करो मुझे अब पता है कब जवाब करना है और क्या कहना है? जाओ और वापस आओ अब। तुम चाहते हो की तुम्हारे डैड को मैं “पापा” ही बुलाऊँ जैसे बुलाती हूँ ना... तो वैसे ही बूलाऊँगी तुमको खुश करने के लिए। अब वापस आओ अब इंट्रेस्टिंग लग रहा है मुझे भी..” और वो चुलबुलाई फिर से यह सब कहकर।
विशाल बाहर निकलकर एक मिनट के बाद फिर अंदर आया। वो एक बहुत गरम और मजेदार सीन था देखने को, की एक ससुर अपनी बहू के कमरे में रात को आता है और बहू को सोते हुए पाता है, आधा जिश्म नजर आते हुए, सेक्सी जांघे, क्लीवेज, बहू की नर्म मुलायम चमड़ी कामुकता दिखाते करते हुए, उसकी नंगी पीठ, बाजू, कांखें, उसका गला, नर्म मुलायम चूचियां, उसके थोड़ा बाल बेड से नीचे लटके हुए। ऐसा नजारा था जब विशाल अंदर आया अदिति का ससुर बनकर उस वक्त।
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