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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

कड़ी_28 आनंद ने आफिस से अदिति को काल किया

वो पहली बार था की अदिति ने पिछवाड़े में एक लण्ड लिया। दर्द हआ। हाँ बस कुछ देर के लिए फिर थोड़ी देर में सब भूल गई, और दोनों को गहरी नींद आई एक दूजे को बाहों में लिए हुए।

दूसरे दिन आफिस में आनंद ने एक दूसरे दारू पार्टी के लिए विशाल से बात किया, और उस लड़की के बारे में भी बात किया आनंद ने, जिसको फोन करवाया था विशाल ने। आनंद विशाल को मनाने का ट्राई मार रहा था। क्योंकी वो दोबारा अदिति के साथ होना चाहता था, और असल बात तो यह थी की विशाल भी यही चाहता था। तो तय हआ की लंच टाइम पर विशाल अदिति को फोन करके एक और छोटी सी पार्टी के लिए बात करेगा।

और लंच टाइम में विशाल ने अदिति से बात किया। आनंद के आने से पहले यह थी बातचीत

विशाल- “हाय सेक्सी। हाउ आर यू? मेरी हाट वाइफ क्या कर रही है? मुझको याद कर रही है या अपने ससुर

को? हाँ?”

अदिति- “हाँ... मैं बूढ़े पापा को ही सोच रही हूँ सुबह से, क्योंकी उसने कल रात मुझको बहुत थकाया.."

यह सुनते ही विशाल का खड़ा हो गया और बोला- “अच्छा... मैंने इसलिए फोन किया की आनंद आज आना चाहता है एक ड्रिंक पार्टी के लिए, तो मैं चाहता हूँ की तुम सेक्सी ड्रेस पहनो और उस दिन की तरह उसको बहकाओ जान ओके?"

अदिति- “फिर से? मगर सुनो मैं तुमसे कहने वाली थी की तुम्हारे पापा ने सच में काल किया था, कुछ देर पहले, वो मुझसे बात कर रहे थे."

विशाल- “रियली? उसने काल क्यों किया? सब ठीक है ना उधर?"

अदिति- “हाँ सब ठीक है, हम दोनों को वीकेंड को इन्विटेशन मिली है वहाँ जाने को। फ्राइडे शाम को आने को आमंत्रित किया पापा ने, रोपाई की सेरेमनी के लिए। उनके यहाँ जो हर साल होता है। लीना और दीपक ने भी बात की मुझसे और किसी कीमत पर नहीं मिस करने को कहा। बहुत मजा आएगा, सबने कहा जरूर आने को। मुझे याद है पिछले साल बड़ा मजा आया था, खूब एंजाय किए थे हम सबने...”

विशाल- “मगर जान फ्राइडे को कैसे हम वहाँ जा सकते हैं? सटर्डे को मुझे आफिस जो जाना है...”

अदिति- “क्यों एक दिन के लिए तुम वहीं से आफिस नहीं जा सकते हो क्या? मेरे लिए कर देना ना... मैं वहाँ तीन दिन बिताना चाहती हैं। हाँ बोलो प्लीज प्लीज...”

विशाल का शैतानी दिमाग काम करने लगा, उसने सोचा की वो सटर्डे को अदिति को उन सबके बीच अकेली छोड़कर आफिस चला जाएगा। उसका बाप, राकेश और दीपक घर पर होंगे सबके सब। और कहा- “अच्छा ठीक है देखते हैं कैसे मनेज करेंगे? अगर फ्राइडे को ही जाना चाहती हो तो जब मैं आफिस से वापस आऊँगा तो चलेंगे वहाँ। मगर आज शाम के लिए बोलो ठीक है ना? आनंद आ रहा है...”

अदिति ने दिमाग चलाते हुए थोड़ा हिचकिचाहट से कहा- “फिर से? अभी दो दिन पहले ही तो आए थे आनंदजी, क्यों इतनी जल्दी? क्यों ना गाँव से वापस आने के बाद इस प्रोग्राम को रखें, मैं वो पसंद करूँगी। तुम क्या कहते हो विशाल?"

जहाँ तक सेक्स वाली बात है विशाल अदिति को जल्दबाजी में नहीं कुछ करवाना चाहता था। तो वो मान गया जो अदिति कह रही थी उससे। विशाल ने सोचा अगर अदिति नहीं चाहती है की आनंद आए तो मजा नहीं आएगा, वो चाहता था की अदिति खुद खुशी से हाँ करती, आनंद के आने की खबर सुनकर। मगर अब नहीं कहा है तो विशाल उससे राजी था।

विशाल ने अदिति से कहा- “हाँ ठीक है। जब गाँव से वापस आएंगे तब आनंद को घर लाएंगे..”

बात-चीत खतम हुई तो विशाल सोचने लगा- “कल बेड पर कहा था के डैड अक्सर उसको फोन करते हैं, तो क्यों वो अक्सर फोन करते हैं? किया बातें करते हैं? अब फोन करके इन्वाइट किया, क्यों जब मैं होता हूँ तब डैड फोन नहीं करते और जब नहीं होता हूँ तब सिर्फ अदिति से बात करते है? क्या उन दोनों के बीच कुछ है?

अदिति डैड को बहत पसंद करती है यह जानता हैं। दोनों की अच्छी दोस्ती है,

मगर मुझको कभी दोनों को करीब देखने का ठीक मौका नहीं मिला, क्योंकी मैं तो हमेशा काम पर रहता था और उन दोनों को एक साथ बहुत टाइम मिलता था। मैं पागल हो जाऊँगा अगर यह सब सोचता रहा तो...”

आनंद आफिस में आया, तो विशाल ने उठकर टायलेट जाते हुए उससे कह दिया- “मैंने अदिति से बात कर लिया है और वो आनंद को गाँव से वापस आने के बाद रिसीव करना ज्यादा पसंद करेगी। क्योंकी हम लोग वीकेंड को गाँव जा रहे हैं..” विशाल ने सब समझा दिया आनंद को।

 
आनंद ने कहा- “ओके कोई बात नहीं...” और जब विशाल टायलेट चला गया तो आनंद गेस्ट चेयर पर बैठा रहा विशाल के आफिस में, और विशाल का मोबाइल देखा उसके डेस्क पर। आनंद ने मोबाइल लेकर लास्ट डायलड नंबर चेक किया देखने को की आखिरी काल किसे किया था। विशाल ने अदिति को ही किया था। और देखा के अदिति का नाम विशाल ने “वाइफ” सेवे किया हुआ है। उसका लास्ट डायलड नंबर था। आनंद ने अदिति का नंबर लेकर अपने मोबाइल में सेव कर लिया।

जब विशाल वापस आया तो आनंद ने कहा- “मैं बाहर चक्कर लगाने जा रहा हू, क्योंकी अब कुछ करना बाकी नहीं था..” आनंद पार्किंग में गया, अपनी कार के अंदर जाकर अदिति को फोन किया।

अदिति- “हेलो कौन हो आप?"

आनंद- “मैं हूँ डार्लिंग, आनंद। सिर्फ तुमको ही सोचे जा रहा हूँ जिस दिन से तुम्हारे साथ वह हसीन पल गुजारे हैं, मेरा खड़ा हो जाता है सिर्फ यह सोचते हुए की किस तरह हम दोनों ने चूमा चाटी किया थे। तुम एक बेहतरीन हाट और कामुक औरत हो अदिति जान और मैं तुमको बहुत ही चाहता हूँ.”

अदिति के रोंगटे खड़े हो गये आनंद की आवाज सुनकर, उसका गला सूख गया और अल्फ़ाज नहीं मिले उसे आनंद को जवाब देने के लिए। तो हकलाते हुए पूछा- “मेरा नंबर कहां से मिला आपको? विशाल वहाँ नहीं है? किया विशाल ने आपको मेरा नंबर दिया? उसको पता है की आप मुझसे बात कर रहे हो? है ना? सच बताइए आप मुझे.."

आनंद- “नहीं जानेमन, मैंने यह नंबर उसके मोबाइल से चुराया है, जब वो बाहर गया था। उसको बिल्कुल नहीं पता है की मैं तुमसे बात कर रहा हूँ। प्लीज... उसको मत बताना..."

अदिति- “सच बोल रहे हो आप? कैसे आपका यकीन करूँ?"

आनंद- “अरे मेरी जान मैं झूठ क्यों बोलूँगा? तुमसे बात करने के लिए मैं बहुत बेचैन था, उस रात को एक गलती किया तुम्हारा नंबर नहीं लेकर। उसी रात को ले लेना चाहिए था मुझे। कितना मन कर रहा था तुमसे बात करने को मुझे। जानती हो मन कर रहा था वापस आकर तुमको अपने बाहों में जकड़ लूँ। यू आर डेलीशियस, मैंने तुम्हारे जिश्म को चखा है, पूरे जिश्म को चखा है मैंने, क्या नमकीन हो आए हाए। उस सुबह को जब मैं कार लेने आया था पार्किंग से तुम्हारा डोरबेल कितना बजाया था, मगर तुमने दरवाजा खोला ही नहीं, घर पर नहीं थी क्या सवेरे-सवेरे?"

अदिति- “ओहह... उस दिन... सारी मैं गहरी नींद में थी, मुझे यह भी पता नहीं की उस सुबह को विशाल कब आफिस गया? मैं सो रही थी, क्योंकी उस रात को मैं बिल्कुल नहीं सोई थी, आपने मुझको बहुत परेशान किया था और विशाल बहुत नशे में था, और मुझको करीब साढ़े पाँच बजे नींद लगी थी...”

आनंद- "मुझको कितना मन कर रहा था उस दिन पता है ना तुम्हें? क्यों तुमने मुझे रोका था उस रात को जानेमन? विशाल पूरा नशे में था उसको कुछ भी पता नहीं चलता और हम खूब एंजाय कर सकते थे उसी रात को, क्यों तुमने मना किया था? तुम खुद तो वही चाहती थी ना?"

अदिति- “पता नहीं मेरी समझ में कुछ नहीं आया उस वक्त। मैं खुद को समझ नहीं पा रही थी उस रात को, आप बहुत ज्यादा जिद्दी थे और बहुत ही जल्द मेरे बहुत करीब आ गए थे। सब कुछ बहुत जल्दी हुआ था, और मैंने वैसा बिल्कुल नहीं सोचा था। लगता था सब कुछ बहुत जल्दी में हो रहा है और मुझे वैसे पसंद नहीं था। मगर मुझे बताइए की इस वक्त आप हो कहाँ, आफिस में ना? कोई सुन तो नहीं रहा है आपको? विशाल कहाँ है? थोड़ी देर पहले उसने मुझसे बात किया था अभी..."

आनंद- “मैं पार्किंग में अपनी कार के अंदर बैठा हुआ हूँ और कोई भी मुझको नहीं सुन सकता है, ना ही कोई मुझको देख सकता है। तुम फिकर मत करो डार्लिंग। तुमको अभी इसी वक़्त मिलने को मन कर रहा है। हाय स्वीटहार्ट कैसा रहेगा अगर मैं अभी इसी वक्त तुम्हारे घर आऊँ तो कैसा रहेगा? ग्रेट आइडिया, मैं एक हाफ डे लीव ले लेता हूँ और अभी के अभी तुमसे मिलने आता हूँ.."

अदिति- “नहीं नहीं। अभी नहीं प्लीज...”

आनंद- “नहीं क्यों? बहुत अच्छा मौका है, शाम 5:00 बजे तक साथ रहेंगे और खूब एंजाय करेंगे, विशाल शाम को 5:00 बजे आफिस से निकलेगा, उस वक्त तक हम दोनों खूब मस्ती करेंगे, बड़ा मजा आएगा। अब भी मेरी जीभ पर तुम्हारी चूत की लज्जत है जानेमन। तुम कितनी गीली हो गई थी... मतलब तुम मुझको अपने अंदर लेने के लिए बिल्कुल तैयार थी उस वक्त, मगर क्योंकी विशाल वहीं था तो तुमको हिचकिचाहट हो रही थी। मगर अब वो वहाँ नहीं होगा सिर्फ मैं और तुम साथ होंगे, मैं आ रहा हूँ जानेमन आ रहा हूँ मैं, आई आम सो हैपी..."

* * * * * * * * * *

 
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कड़ी_29 आनंद आफिस से अदिति को मिलनर जा रहा है

अदिति अब फिकर करने लगी, उसकी समझ में नहीं आ रहा था था की किया करे? आनंद ने फोन काट दिया और चला गया, शायद सच में इधर ही आ रहा है अदिति ने सोचा। उसको खुद पता नहीं था अब तक की वो उसके साथ होना चाहती थी भी या नहीं? अदिति का मन किया की विशाल को वो फोन करके बता दे की आनंद ने फोन करके कहा है की वो यहाँ आ रहा है। फिर अदिति ने यह भी सोचा की क्या पता सब विशाल का बनाया हआ प्लान था और वही आनंद को भेज रहा था उससे मिलने को। तो अगर विशाल को नहीं बताया तब क्या सोचेगा वो? सोचने लगी की हो सकता है विशाल उसको ट्राई कर रहा है देखने को की वो उसको बताती है की नहीं? वो बहुत कन्फ्यू ज हो गई और समझ में नहीं रहा था की अब क्या करे वो?

दिल की तेज धड़कन के साथ अदिति छत पर गई और रास्ते पर देखने लगी। सोच रही थी क्या आनंदजी ने मजाक किया या सीरियस था? दिल ही दिल में उसने प्रार्थना किए की आनंदजी ने मजाक किया हो और वो नहीं आए। अदिति को ओम नजर आया गेट के पास मगर वो ऊपर नहीं देख रहा था।

अदिति ने उस वक्त एक ब्लैक टाप और शार्ट जीन्स पहना हुआ था। वो उसके घर के अंदर का पहनावा था और उसमें वो कंफर्टबल महसूस करती थी घर में।

आनंद ने विशाल को कुछ नहीं बताया और डाइरेक्टर से हाफ डे लीव माँगा जो मंजूर हो गई और वो निकल गया आफिस से। विशाल को कुछ पता नहीं चला क्योंकी दोनों सेपरेट डिपार्टमेंट में थे। मगर, अगर विशाल को आनंद की जरूरत पड़ी या उससे मिलने को जाए तब जरूर पता चल जाएगा, वरना उसको बिल्कुल खबर नहीं होगी के आनंद आफिस में नहीं था।

आनंद अदिति के गरम जिश्म को सोचते, उसकी गरम साँसों को महसूस करते, उसकी गाण्ड, कमर, क्लीवेज को सोचते हुए आनंद ने आक्सेलरेटर दबाया और जितनी जल्दी हो सका ड्राइव किया अदिति के अपार्टमेंट के तरफ बढ़ते हुए।

अदिति बेकरार थी। क्योंकी उसको सही पता नहीं था की आनंद सच में आ रहा है की नहीं? वो यहाँ से वहाँ, किचेन से लाउंज, लाउंज से छत पर चक्कर लगा रही थी। छत पर से बार-बार देख रही थी की कोई कार अंदर तो नहीं आई। बहुत बेचैन थी, और एकाध बार किस तरह से आनंद ने उसको चूमा चाटा था यह भी याद कर राही थी अदिति। अदिति ने फिर यह भी सोचा की किस तरह से जोश में आकर आनंद ने बैठते हुए अपने मुँह को उसकी ड्रेस के नीचे डाले हुए उसकी पैंटी को नीचे करके उसको वहाँ चूसा था। और अदिति ने भी याद किया की कैसे उस वक्त वो अपने आप में नहीं थी और उसको वो सब करने दे रही थी, उसके रोंगटे खड़े हो गये और काँप उठी यह सब सोचते हुए।

आनंद ने गेट के अंदर एंट्री लिया और ओम ने उसको रोकते हुए पूछा- “एस सर, कोई मदद चाहिए आपको?”

आनंद को गुस्सा आया और कहा- “वाट दि हेल... मैं अपने रिश्तेदार से मिलने जा रहा हूँ, तुमको कोई प्राब्लम

है?"

ओम ने समझाया- “देखिए साहब, यह एक फार्मेलिटी है, हमें हर उस आदमी के बारे में जानकारी रखना होता है, जो इस गेट के अंदर आते हैं। मैं आपकी कार का नंबर नोट कर लेता हूँ। आप बस बता दीजिए आपको किससे मिलने जाना है? मुझको फार्मली यह रिजिस्टर में नोट करना है...”

आनंद को और गुस्सा आया और कहा- “क्या बकवास है यह? दो दिन पहले तो मैं यहाँ आया था अपने दोस्त के साथ और कार को नीचे पार्किंग में रखा था, तब तो किसी ने मेरी कार का नंबर नहीं लिया था, तो अब यह सब क्या है?"

 
तब ओम ने कहा- “अगर आप इस अपार्टमेंट के किसी रहने वाले के साथ आये थे तो तब आपसे कोई सवाल नहीं किया जाता है। क्योंकी तब जिम्मेदारी उस रेसिडेंट की होती है। जो यहाँ का रहने वाला है। मगर अब क्योंकी आप अकेले हैं, तो रूल के मुताबिक चलना होगा। और उसी वक्त अदिति छत पर आई और देखा की ओम आनंद से बहस कर रहा है। थोड़ा बहत दोनों की बातें सनाई दे रही थी अदिति को।

अदिति को फिकर हुई की आनंद ओम को बता देता है की वो उससे मिलने को आ रहा है और ओम ने विशाल को बता दिया तो? तो जल्दी से अदिति ने ओम को फोन किया वहीं से। जैसे ही ओम ने फोन लिया तो अदिति ने कहा- “वो आदमी मेरा रिश्तेदार है उनको अंदर आने दो ओम...”

तब ओम ने आनंद ने सारी कहते हए कहा- “सारी सर, अदिति मेडम ने क्लियरेन्स दे दिया तो आप अंदर जा सकते हो अब। आप मुझे समझने की कोशिश कीजिए सर, मैं अपनी ड्यूटी कर रहा हूँ। अगर कोई ऐसे अंदर जाकर किसी का खून कर देगा तो कौन जिमेदार होगा तब? इसीलिए हमको सब रेकार्ड रखना होता है की कौन आता जाता है यहाँ पर। अदिति मेम ने कह दिया के आप उसके रिश्तेदार हो तो आपका स्वागत है सर और एंजाय युवरसेल्फ..”

आनंद ओम को मोटी-मोटी आँखों से देखते हुए पार्किंग में कार ले गया, और सोचा की क्यों उसको ओम ने कहा “एंजाय युवरसेल्फ? क्या उसको पता है की मैं अदिति को चोदने जा रहा हूँ? अदिति इसके लिए मशहूर है क्या यहाँ? क्या मुझसे पहले कोई और अदिति को मिलने आया है, और उसने फोन करके उनको अंदर आने की इजाजत दिया है? समझ में नहीं आ रहा मुझे.."

ओम ने ऊपर सिर उठाकर अदिति को देखा मुश्कुराते हुए और उसने अपना थंब्स प उठाया। अदिति भी उससे मुश्कुराई और वापस चली गई अपने कमरे में।

अब सोचना ओम की बारी था, उसने खुद से कहा- “यह आदमी कौन है? अदिति जी अकेली हैं इस वक़्त और, उसका पति काम पर है तो यह आदमी कौन है अदिति को अकेले मिलने वाला? अदिति इतनी सेक्सी ड्रेस में है, उसकी पेट, कमर, नाभि, जांघे सब दिख रही हैं और इस आदमी के साथ में होगी वैसे? मर्द ठरकी दिख रहा है, क्या चुदाई का प्रोग्राम तो नहीं इन दोनों का? मुझे चेक करना पड़ेगा अब। और अगर वैसी बात है तब तो अदिति मेम को मुझे भी चान्स देना ही पड़ेगा अब, वरना मैं एक खतरा बन सकता हूँ उसके लिए, उसके पति को बता कर हेहेहे... अदिति जी अब तो आप पकड़ी गई और मेरे को अब देना ही पड़ेगा आपको हाहाहा...”

अदिति अपने चौखट के पास खड़ी लिफ्ट के खुलने का इंतेजार कर रही थी। आनंद बाहर निकला लिफ्ट से और अदिति के अपार्टमेंट के तरफ चलकर गया। मगर अदिति ने दरवाजे को बंद रखा और इंतेजार करने लगी। वो सब सुन रही थी की आनंद के कदमों की आहट आकर उसके दरवाजे के पास रुकी। उसका दिल धक-धक करने लगा।

आनंद ने बेल बजाया और धीरे से कहा- “मैं आ गया हूँ अब खोलो..."

अदिति दरवाजे से चिपकी खड़ी थी, तेज दिल की धड़कनों के साथ, उसका गला सूख गया और अपने ही थूक को निगलते हए हाँफ रही थी बिना जवाब दिए।

आनंद ने दोबारा बेल का बटन दबाया और कहा- “प्लीज़्ज... अदिति, दरवाजा खोलो?”

 
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आनंद ने बेल बजाया और धीरे से कहा- “मैं आ गया हूँ अब खोलो..."

अदिति दरवाजे से चिपकी खड़ी थी, तेज दिल की धड़कनों के साथ, उसका गला सूख गया और अपने ही थूक को निगलते हए हाँफ रही थी बिना जवाब दिए।

आनंद ने दोबारा बेल का बटन दबाया और कहा- “प्लीज़्ज... अदिति, दरवाजा खोलो?”

अदिति ने कांपती आवाज में कहा- “नहीं, नहीं खोलूँगी। आप वापस चले जाइए, वाचमैन को सब पता चल जाएगा। वो विशाल से कह देगा की आप यहाँ आए थे, आप जाइए प्लीज..."

अदिति खुद से पूछ रही थी की क्यों उसको जवाब दे रही है। उसने सोचा की उसको बिल्कुल खामोश रहना चाहिए था उस रोज सुबह की तरह, जब आनंद खुद वापस चला गया था। अदिति को खुद पता नहीं था की वो सही कर रही थी या गलत?

और आनंद ने दरवाजे से अपना मुँह सटाते हुए कहा- “देखो मेरी जान हंगामा मत खड़ा करो, लोग सोचेंगे की क्यों यह अजनबी तुम्हारे दरवाजे पर इतनी देर से खड़ा है, और यह औरत नहीं खोल रही है। लोगों की अटेन्शन अट्रैक्ट होगी ऐसे, तो इन सबसे बचने के लिए दरवाजा खोलो मेरी जान। मैं तुमको अपने बाहों में लेने के लिए तड़प रहा हूँ दिलवर..”

अदिति ने सोचा- “वो सही कह रहा है। बाकी के लोगों को पता चल जाएगा, अगर ज्यादा देर तक वो दरवाजे के पास खड़ा रहा तो...” तो उसके पास और कोई चारा नहीं था इसलिए दरवाजा खोल दिया।

आनंद तुरंत उसपर टूट पड़ा। दरवाजे को बंद करते हए जोर से अदिति को बाहों में जकड़ा और चारों तरफ चूमने चाटने लगा, उसके गले और गाल को चाटते हुए, अपने लण्ड को पैंट के अंदर से ही अदिति की जांघों पर रगड़ते हुए हाँफते जा रहा था। अदिति कितने कदम पीछे घर के अंदर चलती गई उसके गिरफ़्त से छूटने की कोशिश में। वो लाख कोशिश कर रही थी, अपने गाल और गले को आनंद के होंठों से बचाने की। मगर कुछ नहीं कर पाई, काँपने लगी और अजीब लगने लगा अदिति को।

***** **** *

कड़ी_30 अकेली अदिति के साथ घर में आनंद

सोफे तक आते ही अदिति गिरने वाली थी। जिस तरह से आनंद उसको जकड़े हुए पुश करते जा रहा था, उसके पैर सोफे से टकरायेई और वो उसपर बैठ गई, आनंद उसके ऊपर था। तब आनंद ने एक बड़ी मुश्कराहट के साथ उसके जिश्म को देखा और उसके कपड़ों को। कितना कुछ दिख रहा था उसके जिश्म में। उसकी छोटी शार्ट जीन, उसकी टाप जिसमें उसकी पूरी की पूरी कमर, नाभि दिख रही थी। यह सब आनंद को और भी आकर्षित करने लगा और उसका लण्ड पैंट के अंदर फूलने लगा। आनंद के सोचा अब वो जन्नत में आ गया है।

अदिति ने सिर उठाते हुए उसके चेहरे में देखा और कांपती आवाज में कहा- “नहीं नहीं, यह ठीक नहीं है। आपको वापस जाना चाहिए आनंदजी.” कहकर अदिति ने अपनी नजरें हटा लिया उसके चेहरे से एक तरफ देखते हुए।

उसकी गरम जिश्म को देखते हुए ही आनंद ने कहा- “देखो जानेमन, वक्त आ गया हैं हमें एंजाय करने के लिए, तुम खुद यही चाहती हो, तुम्हारे जिश्म को इसकी जरूरत है। खुद से झूठ मत बोलो मेरी जान, क्यों अपने आपको रोक रही हो तुम?”

अदिति ने तब उसको उतरे हुए चेहरे से देखा और कहा- “मगर मुझे ऐसे पसंद नहीं है, मैं बिल्कुल खुश नहीं हूँ इस तरह से करना, मुझे ठीक नहीं लग रहा। आप वापस जाइए प्लीज आनंदजी...”

फिर आनंद बैठ गया। वहीं सोफे पर उसके पास और उसकी जांघों पर हाथ फेरते हुए।

अदिति ने तब उसके हाथों को हटाने की कोशिश करते हुए कहा- “देखिए आनंदजी चलो हम दोस्त बन जाते हैं, लेट्स बी फ्रेंडस, ओके?"

आनंद जोर से हँसा और अदिति के जिश्म को निहारते हुए कहा- “देखो डार्लिंग मुझसे अब यह मत कहना की तम वो नहीं करना चाहती, जिसके लिए मैं यहाँ आया है। अपने आपको देखो जानेमन, देखो कैसा ड्रेस पहना है तुमने? जबकी तुमको मालूम हो गया था की मैं आ रहा हूँ तो बदन ढकने के लिए कुछ और तो पहन सकती थी तुम। तुमको अच्छी तरह से पता है की तुम्हारी जांघे, पेट, कमर, नाभि, कांखें सब दिख रही हैं, और एक मर्द जो तुम्हारे जिश्म को चाहता है, वो आ रहा है, तो तुमने इसी ड्रेस में रहना पसंद किया मुझको और भी रिझाने के लिए। है की नहीं जानेमन? तुमको खुद के जिश्म को दिखाना पसंद है, फिर भी मुझको दूर रहने को कह रही हो। मुझे तो लगता है यह तुम्हारे रिझाने का तरीका है। नहीं नहीं कहते हुए रिसीव करना पसंद है तुमको शायद। तुमको शायद वैसे ज्यादा मजा आता है की तुम ना कहो और मैं करता जाऊँ। बोलो क्या थोड़ा सा रफ पसंद करती हो क्या, जरा वायलेंट टाइप पसंद है तुम्हें? कुछ रेप की तरह वैसा अच्छा लगता है तुम्हें क्या? तुम चाहती हो की नो नो कहती जाओ और मैं जबरदस्ती लेता जाऊँ तुमको हम्म... बोलो स्वीटहार्ट बोलो मेरी जान।

हम्म...”
 
अदिति को बहुत हैरानी हुई वो सब सुनकर जो आनंद ने कहा और धीमी आवाज में बोली- “नहीं बिल्कुल नहीं। मुझे वायलेन्स बिल्कुल पसंद नहीं आनंदजी। आई हेट दैट, आपने मुझको चकित कर दिया अपनी इन बातों से आनंदजी...”

आनंद ने अदिति को बाहों में उठाते हुए कहा- “चलो तुम्हारे बेडरूम में चलते हैं डार्लिंग। वहाँ ज्यादा आराम मिलेगा हमको..”

मगर अदिति ने प्रतिरोध किया, कुछ इस तरह से अपने पूरे जिश्म को झगझोरते हुए की आनंद को उसे छोड़ना पड़ा। तब अदिति चलकर छत के दरवाजे तक गई और कहा- “नहीं आनंदजी सिर्फ बातें करते हैं, हमको बातें करना जरूरी है..”

आनंद को लगा की बहुत मुश्किल टाइम गुजरेगा इसके साथ और सोचा की शायद वही कुछ जल्दी कर रहा है अदिति को मजबूर करके। सो उसने सोचा की चलो अदिति की बातों को सुन लेते हैं। तो कहा- “चलो ठीक है, आओ, बैठो इधर बात करते हैं..” और आनंद सोफे पर बैठ गया।

तब अदिति धीरे-धीरे उसके पास आई, और अपने हाथों को अपनी चूचियों पर रखे हुए सोफे पर आनंद के पास बैठी। आनंद ने फिर अपने बाजू को अदिति के कंधों पर रखा जैसे उसकी रक्षा कर रहा है। और एक स्माइल से कहा- “तुम बिल्कुल एक छोटी लड़की की तरह बिहेव कर रही हो, और मुझको बेहद पसंद है। ऐसी लग रही हो की एक कम उमर वाली लड़की हो, जिसने कभी सेक्स भी नहीं किया है हाहाहाहा..."

अदिति ने अपने दाँतों में अपने नीचे वाले होंठ को दबाते हुए पूछा- “सच-सच बताओ क्या विशाल ने आपको यहाँ नहीं भेजा? क्या उसको सब पता नहीं की आप इस वक्त यहाँ आए हुए हो?"

आनंद- “आफ-कोर्स उसको कुछ भी नहीं पता, क्यों फिर से यह पूछ रही हो? क्या उसको मालूम होना चाहिए था की मैं यहाँ आया हूँ? हाँ?”

अदिति सोच रही थी की शायद विशाल ने ही आनंद को भेजा होगा और अगर नहीं तो दोनों मिलकर विशाल को चीट कर रहे हैं। और यह पति को चीट करने वाले आइडिया ने अदिति के दिमाग में कुछ ऐसा असर किया के वो फिर से अपनी रोल-प्ले की दनियां में चली गई, जैसे विशाल के साथ रात को खेलती है, और जब जब “आनंदजी” कहकर उसको बुला रही थी तो एक टीस सी उठ रही थी अदिति के अंदर, और तब भी रोल-प्ले की दुनियां में महसूस कर रही थी खुद को। उसके जिश्म में एक लहर पैदा हो रही थी। खुद को समझ नहीं पा रही थी के क्या चाहती है उस वक्त? लगता था की उसका दिल चाहता था की हाँ चलो मजा करते हैं। मगर उसका दिमाग इनकार कर रहा था। अदिति डिसाइड नहीं कर पा रही थी कि क्या करें और क्या नहीं।

आनंद अदिति के दिमाग के अंदर पढ़ने की कोशिश कर रहा था, और उसको भी लगा की वो कन्फ्यू ज्ड सी है तो उसको रिझाने का सोचा आनंद ने। उसने बड़े प्यार से अदिति के गाल पर किस किया जो अदिति ने करने दिया। तब आनंद ने उसकी जाँघ पर हाथ रखकर हल्के से फेरते हुए पूछा- “क्या ऐसे दुलारना अपने जिश्म पर अच्छा नहीं लगता तुम्हें?”

अदिति ने सिर झुका दिया तो आनंद ने उस मौके का फायदा उठाते हुए उसके गले के पीछे वाले हिस्से पर अपनी जीभ फेरा, उसकी बालों को हटते हए। उस आक्सन से अदिति के रोंगटे खड़े हो गये और उसने आनंद की कलाई जोर से पकड़ा। जब आनंद ने अदिति के मुलायम हाथ को अपने कलाई पर महसूस किया तो उसको अच्छा लगा और उसने धीरे से अपने होंठों को अदिति के गले से मूव करते हुए उसके होंठ तक ले गया। अपनी जीभ से अदिति के गालों को भिगोते हुए। और अदिति ने तुरंत अपना चेहरा एक तरफ कर लिया किस को अवाय्ड करते हुए।

नीचे ओम सोच रहा था की- “वो आदमी ऊपर अदिति के कमरे में क्या कर रहा होगा?” तो जाकर देखने को डिसाइड किया ओम ने। एक लड़के को गेट के पास खड़ा करके ओम लिफ्ट लेकर ऊपर गया। ओम बहत बेताब था, क्योंकी जिस लिबास में उसने अदिति को देखा था और एक आदमी उसके साथ जब पति घर पर नहीं था।

सिर्फ यह सोचकर ओम आकर्षित हुए जा रहा था। उसको यकीन था की चुदाई चल रही होगी और इसके जरिये वो अदिति को पाना चाहता था।

आनंद ने अदिति के कान के पास चाटते हुए कान में फुसफुसाते हुए बात किया- “बोलो जानेमन तुमने खुद कहा था की मुझे खुद बुलाओगी जब मौका आएगा तो यह मौका मुझको बेहतरीन लग रहा है आज। पिछली बार तुमने कहा था की विशाल यहाँ मौजूद था, इसलिए तुम नहीं चाहती थी। मगर आज तो हम दोनों के अलावा कोई नहीं है, तो दोनों अपने आपको बहुत खुश कर सकते हैं, अब तो बेड पर चलो भी मेरी जान."

तब तक ओम अदिति के दरवाजे के पास आ गया था और उसने दरवाजे से कान लगाया यह सोचते हुए की कुछ बात तो सुन पाएगा कम से कम, और कान लगाते हुए ओम ने यह सुना।

अदिति ने आनंद को जवाब दिया- “बेड पर क्यों आनंदजी, हम यहाँ सोफे पर ही ठीक हैं, अच्छा है यहीं पर..."

ओम ने खुद से कहा- “क्या? बेड, बिस्तर पर? वो आदमी अदिति को बेड पर ले जाना चाहता है और अदिति ने कहा सोफे पर ही ठीक है। वाउ... यह आदमी सच में मजा करने ही आया है अदिति के साथ अरे वाह। और मैं झक मार रहा हूँ इतने दिन से। इसीलिए अदिति अधनंगी है आज उसको रिसीव करने के लिए, और मस्त चुदाई के लिए उसके साथ। वाह वाह... मेरी बारी कब आएगी ओह गोड?"

आनंद खड़े होकर अदिति को अपनी बाहों में उठाने की कोशिश में लग गया, और अदिति अपने आपको रोकते हुए भी, आनंद को, खुद को एक छोटे बच्चे की तरह अपने गोद में उठाने दिया।

मगर अदिति यह बोलती गई- “हम्म्म्म .. आनंदजी आप इतने जिद्दी क्यों हो? हे भगवा... मैं क्या करूँ? हम्म्म्म ..” और यह कहते हुए अदिति ने अपनी बंद मुट्ठी से आनंद के पीठ पर मारने लगी।

तब तक आनंद ने उसको उसके कमरे के तरफ लेकर बढ़ने लगा, चलते हुए। ओम सुन रहा था और समझ गया के दोनों अदिति के बेडरूम में जा रहे हैं। उसका खड़ा हो गया और अपने हाथ को लण्ड पर रखकर चारों तरफ देखा की कोई उसको देख तो नहीं रहा।

आनंद ने अदिति को बेड पर लेटाया और अपना शर्ट उतारने लगा। अदिति बेड पर बैठ गई और नजरें नीचे किए हए फर्श को देख रही थी। उसको अजीब लग रहा था और अचानक बेड से उतर गई और कहा- “नहीं नहीं आनंदजी यह ठीक नहीं है। मुझे माफ करना प्लीज... मैं जा रही हूँ.” ।

आनंद बिना शर्ट के था तब तक, और अदिति कमरे से बाहर निकलने ही वाली थी। पर आनंद ने उसको पकड़ लिया और बेड पर धक्का दिया। अदिति अपनी पीठ के बल बेड पर गिरी और अपनी टाँगों को ऊपर उठाते हुए आनंद को पुश करने की कोशिश करने लगी। मगर आनंद ने एक हाथ से अदिति को बेड पर दबाया और दूसरे हाथ से अपने पैंट की जिप खोलने लगा, और अपने अंडरवेर को नीचे किया, लण्ड को बाहर निकाला और अदिति की जांघों पर रगड़ने लगा उसके ऊपर चढ़कर।

दिति ने तकरीबन चिल्लाते हुए कहा- “नहीं आनंदजी नहीं रुकिये... मैं आपको खुद बताऊँगी जब तैयार हो जाऊँगी आपके लिए। अभी नहीं रुकिये आप आनंदजी..."

मगर आनंद उस वक्त कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था, वो जबरदस्ती अदिति की शार्ट को निकालने की कोशिश में लगा हुआ था, अपने लण्ड को उसके ऊपर दबाते हुए उसकी जीन्स के ऊपर ही तब तक अपने लण्ड को रगड़ते जा रहा था।

बाहर ओम सब सुन रहा था।

एक किश्म की लड़ाई चल रही थी आनंद और अदिति के बीच, स्ट्रगल हो रही थी, और अदिति ने अपने आपको पेट के बल बेड पर कर लिया और अपने चेहरे को दोनों हाथों में छुपा लिया। ताकी आनंद उसको किस भी नहीं कर सके। मगर उसका जिश्म तो आनंद के सामने था उस वक़्त। आनंद को ऐसा लगा की अदिति उसको अपनी गाण्ड दे रही थी। क्योंकी वो पेट के बल लेट गई थी। और उस जीस में क्या मस्त उसकी गाण्ड दिख रही थी उस वक्त। तब आनंद ने उसकी जीन को नीचे खींचा, जीन्स थोड़ी नीचे गई तो ऊपर वाली गाण्ड दिखी आनंद को, और आनंद ने जल्दी से अपने लण्ड को उन दो छोटे गोश्त के पहाड़ों के बीच में रगड़ा, फिर एक हाथ से उसकी जीन्स को और थोड़ा नीचे करता गया, और अब लण्ड पूरी तरह से उसकी गाण्ड के बीच में था ऊपर ही। मगर अदिति की गाण्ड के दोनों हिस्से के बीच में रगड़ने से आनंद को बड़ा मजा आ रहा था। दोनों तरफ इतने गड्डे थे और बीच में उसका लण्ड कुछ इस तरह रगड़ रहा था की जो फीलिंग्स आ रहा थी आनंद को अपने दोस्त की बीवी की गाण्ड पर से जीन्स उतारकर लण्ड रगड़ते हुए वो बयान से बाहर था।

आनंद इतना उत्तेजित था की उसको लगा की अब झड़ने वाला है। अदिति हाथ में चेहरे छुपाए लेटी हुई थी, आनंद के लण्ड को अपनी चूतड़ों पर रगड़ते हुए महसूस करते। आनंद इतने जोश में था की उसको लगा की वो झड़ने वाला है। अब तो अपने लण्ड को कसके हाथ में पकड़ा और अदिति के मुँह के तरफ ले गया।
 
आनंद ने कहा- “अपना मुँह खोलो। अदिति प्लीज... अपना मुँह खोलो ना मेरी जान, देखो खतम ही होने वाला है। मुझे मजा आ गया इतना ही काफी था। मुँह तो खोलो प्लीज मेरी जान। मुँह में तो ले लो.. अपने अंदर तो नहीं लिया तुमने... अब तो ले लो जानेमन इतना मत तड़पाओ प्लीज.” और वो जोरों से हाँफ रहा था साँस को लेने के लिए जैसे तड़प रहा था।

अदिति ने उसके चेहरे में हैरानी से देखा और तरस आया उसको आनंद की हालत देखते हुए। तब आनंद ने अपने लण्ड को अदिति के चेहरे पर रगड़कर, उसके गाल और होंठों पर दबाया लण्ड को। अदिति उस वक़्त आँखें ऊपर उठाते हुए आनंद के चेहरे में देख रही थी, उसकी बेपनाह तड़प को। उस वक्त आनंद एक भिखारी से कम नहीं दिख रहा था, चूत का भिखारी। और क्योंकी अदिति ने मुँह नहीं खोला, तो आनंद को पिचकारी को छोड़ना पड़ा अदिति के मुंह के ऊपर, होंठ, नाक, गाल, गला और उसकी टाप के अंदर भी बहता गया आनंद का पानी।

जिस वक्त आनंद ने प्रेशर छोड़ा अदिति के चेहरे पर, अदिति ने आँखें बंद कर लिया क्योंकी वो सब देख रही थी और तजुर्बा है तो उसको पता था की आनंद झड़ने ही वाला है। और जब अदिति ने आँखें खोली तो देखा की

आनंद का लण्ड उसके मुंह के बिल्कुल पास है। और आनंद अब भी बिनती कर रहा था उससे की वो उसको अपने मुँह में लें।

मगर अदिति ने नहीं लिया यह कहते हुये- “सारी मैंने आपसे कहा की, जब मैं तैयार हो जाऊँगी तो खुद आपको बताऊँगी। मगर आप जिद्दी हो और समझते ही नहीं हो, तो माफ करना मैं आपको यह खुशी अभी नहीं दे सकती। वेरी सारी."

मगर आनंद काफी खुश था। जो थोड़ी सी खुशी और मजा हासिल हुआ उसको पहली बार के लिए। फिर उसने अदिति से कहा- “जानम, जितना मिला आज उससे ही बहुत खुश हो गया मैं। पहली बार के लिए बुरा नहीं था, तुम्हारी गाण्ड भी कमाल की है मेरी जान... वा... काश मैं तुम्हारी जीन्स को पूरी तरह बाहर निकाल पाता, तुम्हारी इस सेक्सी गाण्ड का मजा और ज्यादा ले सकता था। हम्म... आई एंजाय्ड इट बेबी, पूरा नहीं मगर मजा तो आया मुझे। बहुत जल्दी हो गया, और अचानक हुआ। क्या करता मैं तुम्हारे लिए कितने दिनों से तड़प जो रहा था। मुझसे रहा नहीं गया...”

आखीरकार, अदिति उसके लण्ड को नर्म होते देखकर मुश्कुराई और कहा- “अब जाओ अपने आपको वाश करो और जल्दी निकल जाना। लास्ट मिनट को जाने के लिए इंतेजार मत करना। 3:30 तक यहाँ से चले जाना...”

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कड़ी_31 आनंद चला गया लेकिन ओम सब जानता था

कहने की जरूरत नहीं की आनंद और देर तक रुकना चाहता था अदिति के साथ में। अगर अदिति ने जिद किया के वो वापस जाए। आनंद ने अदिति बहुत चाटा और चूमा, उसकी बेड को तहस नहस कर दिया।

अदिति के बाद उसके सब कपड़ों को रौंद दिया। आनंद ने जाने से पहले उसको बेड पर लेकर इतना छीना झपटी किया। यह सब आनंद ने जानबूझ कर अदिति के और करीब जाने के लिए किया, खूब एंजाय किया उसके साथ बेड पर। कभी वो नाराज होती थी तो कभी बहुत हँसती थी। काफी हद तक कामयाब भी हुआ आनंद क्योंकी आखीर में अदिति ने उससे बिल्कुल नार्मल तरह से बात की, जैसे किसी भी जाने पहचाने लोगों से करती है। एक दूसरे से दोनों ने छेड़छाड़ भी किया। कोई और दो घंटे तक आनंद ने अदिति के साथ गुजारा बेड पर, तब वहाँ से गया।

ओम बाहर से ही इन दोनों की तकरीबन सारे बातों को और इनकी छेड़खानी को खूब अच्छी तरह से सुना। ओम बिल्कुल समझ गया की आनंद अदिति को चोदने को आया था और उसको चोदाड़ा भी। ओम ने सुना की दोनों लाउंज में वापस अ गए हैं और गुडबाइ कह रहे हैं। एक दूसरे को बाहों में लेकर किस कर रहे हैं, किस बाहर आराम से कोई भी सुन सकता था। असल में दोनों उस वक्त लाउंज में थे और आनंद ने अदिति को बाहों में ही लिया हुआ था, और अदिति ने भी आनंद को बाहों में लिए हुए थी। जैसे के दोनों पूरा आशिक हों।

आनंद ने अदिति को बिल्कुल एक अशिक की तरह किस किया निकालने से पहले और अदिति ने उसके किस का बराबर जवाब दिया। उस वक्त बिल्कुल आशिक लग रहे थे दोनों। आनंद ने अदिति की चूचियां भी दबाई, जैसे भोंपु दबाते हैं- पेंक पेंक करने वाला भोंपू।

आनंद ने निकलते वक़्त धीरे से अदिति के कान में कहा- “मेरा बहुत मन कर रहा है इसको तेरे अंदर गहराई में डालकर तेरी गर्मी को महसूस करने को जानम..."

अदिति ने होंठ को दाँत से दबाए हुए उसको दोनों हाथों से ठेलते हुए कहा- “मैंने आपको कह दिया है की जब तैयार हँगी तो खूब आपको बताऊँगी ना। फिलहाल जो आज मिला उसी में खुश हो जाओ आप। सब्र करो और उस दिन का इंतेजार करो, मैं नहीं कह रही की वो दिन नहीं आएगा, जरूर आएगा मगर पता नहीं कब? मैं आपको बताऊँगी अपने आप ही.."

दरवाजे के पास पहुँचते हुए आनंद ने कहा- “अब मैं तुमको अक्सर फोन करूँगा तुम्हारा नंबर जो है अब..."

अदिति बोली- “जब विशाल घर पर होगा तब ना एस.एम.एस. ना काल करना, और हाँ कल शाम को हम अपने ससुराल जा रहे हैं और रविवार रात को वापस आएंगे, तो इस वीकेंड को काल मत करना विशाल के घर वाले मेरे साथ होंगे..”

तब ओम ने उनके कदमों को दरवाजे के पास आते हुए सुना, तो जल्दी से वापस चला गया गेट वाले गुमटी में नीचे।

आनंद बाहर चला गया और अदिति छत पर निकली उसको जाते हए देखने को। नीचे से जब ओम ने अदिति को अपनी शार्ट और सेक्सी टाप में देखा तो उसकी घूरने लगा, और वेव किया अदिति को। अदिति ने उसको वेव बैक किया तो ओम ने अदिति को काल किया तुरंत। अदिति की मोबाइल उसके हाथ में ही थी तो उसने काल लिया तो ओम ने पूछा- “आपकी विजिटर वापस जा रही है अदिति जी?"

अदिति ने जवाब दिया- “हाँ अब तक वो नीचे पहुँच गया होगा..”

ओम- “तो आपने खूब एंजाय किया भाभीजी?"

अदिति- “एंजाय...” से तुम्हारा क्या मतलब है यू नाटी बाय? बिहेव करो जरा..

"

ओम- “ओके तो मैं आपके विजिटर से अभी पूछता हूँ की उसने एंजाय किया की नहीं.”

अदिति- “चुप करो तुम, मैं नहीं चाहती हूँ की तुम उससे कोई बात करो, वो मेरा एक रिश्तेदार है समझे तुम?”

ओम- “अच्छा रिश्तेदार है? तब तो बहुत किश्मतवाला रिश्तेदार है कहूँगा..”

अदिति- “क्या मतलब है तुम्हारा ओम?”

ओम- "बाद में बताऊँगा भाभीजी... लगता है की मुझे भी आपका रिश्तेदार बनना ही पड़ेगा अब तो। ताकी मुझे आपसे आकर मिलने का ऐसा मौका मिल सके...” कहकर ओम ने काल खतम कर दिया।

अदिति को शक हआ की शायद ओम को पता चल गया की उसके और आनंद के बीच कुछ हुआ है, और कुछ परेशान हुई अदिति। आनंद कार ड्राइव करते हुए गेट तक आया तो ऊपर छत के तरफ देखा की अदिति उसको वेव कर रही है। तो आनंद ने भी वेव किया और एक फ्लाइंग किस भेजा जो ओम ने खूब देखा। तब अदिति ने ओम और आनंद दोनों को देखते हए जोर से हँस पड़ी। तब, जब आनंद गेट के बाहर निकल के चला गया, तब ओम ने भी अदिति को एक फ्लाइंग किस भेजा, तो अदिति हँसी और ओम को तरजनी उंगली से धमकी देते हए अंदर वापस चली गई।

ओम टायलेट गया और जो कुछ उसने अदिति और आनंद के बीच होते हुए सुना उसको सोच-सोचकर मूठ मारा उसने। उसने मन में सोचा की मैं अदिति की टाप निकालकर, और उसकी सेक्सी जांघों को चूम चाटकर, उसकी जीन्स को नीचे करके उसकी गोरी, उभरी जांघों को चसकर वहाँ लाल निशान किया। यह सब सोचते हए खब मूठ मारा ओम ने, और महसूस किया की एह सब अदिति के साथ कर रहा है। यह पहली बार था की ओम अदिति को सोचकर मूठ मार रहा था।
 
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