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ऐसे सोचते हुए अदिति के जिश्म में एक उत्तेजना पैदा हुई और एक पल के लिए अदिति कन्फ्यू ज्ड हो गई खुद से, खुद के मन से, खुद की चाहत और जिश्म की फरमाइश से। उसको समझ में नहीं आ रही थी की क्या हो रहा है उससे उस पल। उसकी भावनायें बदल रही थी, ख्वाहिश में बदलाव आ रही थी, या उसको उसी पल से लीना से जलन सी हो गई थी, या राकेश को अपने करीब लाना चाहती थी वो भी, या राकेश को साबित करना चाहती थी की अदिति लीना से बेहतर है। ऐसे ऐसे खयालात आ रहे थे अदिति के मन में।
वो खुद को नहीं समझ पा रही थी और राकेश के लण्ड को अपने इतने करीब देखकर भी वो अपनी नजरों को नहीं हट पा रही थी लण्ड से। घूर रही थी उस लण्ड को जो मुरझाया हुआ था, लटका हुआ था राकेश के हाथ में। अदिति सोच रही थी क्यों उस वक़्त उसको गुस्सा नहीं आ रहा था, क्यों राकेश के लण्ड को अपने इतने करीब पाकर भी वो चुप है? क्यों उसको नफरत नहीं हो रही थी उस पल को?
अदिति ने लण्ड को हाथ से छुआ, फिर नजर उठाकर राकेश को देखा, फिर लण्ड को गौर से देखा। फिर सोचा की क्यों वो यह सब करने को राजी हो गई? क्या सिर्फ इसलिए की राकेश उसके कमरे से निकल जाए जल्दी से या कोई और बात थी? अदिति ने यह सब विशाल से कहा।
जब अदिति ने लण्ड को हाथ से छुआ तो राकेश का चेहरा खिल उठा और वो अदिति को देखने लगा और अदिति की उंगलियां धीरे-धीरे लण्ड के ऊपर फिरने लगी हल्के से। उसकी छुवन से लण्ड में हरकत होने लगी। लण्ड थोड़ा-थोड़ा उठने लगा। अदिति देखती रही। लगता था एक छोटा सा सोया हुआ हैवान धीरे-धीरे बड़ा हो रहा है। अदिति के चेहरे पर मुश्कुराहट आ गई उसको बढ़ते हुए देखकर। जितना वो लण्ड को छू और दुलार रही थी उतना ही वो बड़ा होता जा रहा था उसके हाथ में।
अदिति मुश्कुराती गई और बार-बार सिर उठाकर राकेश को देख रही थी मुश्कुराते हए। राकेश भी अदिति के चेहरे में देखता जा रहा था और वो समझ गया की अब अदिति लाइन पर आ गई है। राकेश को पहले से यकीन था की अदिति सब करने के लिए तैयार हो जाएगी, क्योंकी उसने लीना को लण्ड चूसते हुए देख लिया है। राकेश ने सोचा एक शादीशुदा जवान औरत जिसने अपने पति की जवान बहन को उसके बड़े भाई के लण्ड को चूसते हए देखा हो, उसके मन में सेक्सुअल खयालात जबरदस्त जागा होगा, और मन में कशमकश और अजीब सेक्सुअल फीलिंग्स आई होंगी। किसी ना किसी तरह से उत्तेजित हुई होगी अदिति वो सब देखकर। राकेश को यकीन था इसीलिए वो अपना चान्स मार रहा था अदिति के साथ।
राकेश ने तो सोच लिया था के अदिति भी 18 साल की है बिल्कुल लीना की तरह, तो अगर लीना यह सब करना पसंद करती है तो अदिति भी किसी तरह से लीना की हम-उम्र होते हए उसके भी मन में ऐसे चीजों के लिए चाहत तो होगी जरूर। और राकेश ने सोचा बहन और छोटे भाई की पत्नी भी मिल जाए चोदने को तो मजा ही मजा हो जाएगा उसके लिए।
फिर राकेश ने सोच लिया था की शुरू में शायद अदिति थोड़ा बहत नफरत करेगी, थोड़ी आना-कानी करेगी मगर
आखीर में वो जरूर चुदवाएगी उससे। ऐसा पूरा यकीन हो गया था राकेश को जिस वक़्त अदिति ने दरवाजा खोला था, जब लीना उसको चूस रही थी तभी। राकेश को खुद पर पूरा यकीन था इसीलिए वो आगे बढ़ा। अदिति ने अपनी उंगलियों को फेरते हुए राकेश के लण्ड को पूरा फार्म दे दिया, बिल्कुल तनकर खड़ा हो गया लण्ड और अदिति के दांत नजर आ गए उसकी मश्कराहट की चमक से।
अदिति को उस तरह मुश्कुराते देखकर।
राकेश ने फुसफुसाते हुए कहा- “ओके अब इस पर अपनी जीभ फेरो और धीरे-धीरे अपने मुँह में लो इसको। सब धीरे-धीरे करो कोई जल्दी नहीं."
अदिति ने राकेश के चेहरे में देखा, फिर वापस लण्ड को देखा, अपने होंठों को दाँतों में दबाया, फिर से राकेश के चेहरे में देखा और बिल्कुल नार्मल आवाज में पूछा- “यह विशाल से ज्यादा बड़ा इसलिए है, क्योंकी आप बड़े हो उमर में?"
राकेश को बहुत मजा आया और जवाब दिया- “विशाल का इतना बड़ा नहीं है? तुमको बड़ा पसंद है?"
अदिति मुश्कुराई और अपने कंधे को ऊपर किया जवाब में, फिर झुक कर जीभ निकाली लण्ड के ऊपरी हिस्से पर फेरने के लिए।
राकेश ने तभी कहा- “बोलो ना अदिति, क्या तुमको लगता है एक ज्यादा बड़े लण्ड से तुमको ज्यादा मजा आएगा? क्या हर बार विशाल के करने से तुमको मजा आता है? मेरा मतलब है तृप्त होती हो हर बार? आर्गेज्म आता है या वो सिर्फ खुद को प्लीज करता है?"
उस वक़्त अदिति का सभी गुस्सा गायब हो गया था और उसको लग रहा था की वो कुछ मामूली चीज कर रही है जो सही था। मगर उसको राकेश को जवाब देने में थोड़ी शर्म आ रही थी। फिर भी उसने कहा- “किसी दूसरे दिन आपको इस सवाल का जवाब दूंगी..."
तब अदिति ने अपनी जीभ को राकेश के लण्ड के ऊपर फेरा, जिससे राकेश की आअ निकली। फिर राकेश की
आवाज निकली- “सस्स्स्स ... हाँ..."
अदिति ने सिर उठाकर उसके चेहरे में देखा और धीरे से मुंह खोलकर लण्ड के ऊपरी हिस्से को मुँह के अंदर ले लिया। राकेश अपने लण्ड को पुश करने की कोशिश कर रहा था मगर अदिति ने मुंह बंद कर लिया था, उसके लण्ड को अपने मुँह में कैद करके। उस हिस्से को अदिति चूसने लगी मजे के साथ और बार-बार आँखें उठाकर राकेश के चेहरे में उसको मजा और आराम लेते हुए देख रही थी। अदिति ने दोबारा मुँह खोला लण्ड को और भी अंदर लेने के लिए, और राकेश ने कमर हिलाकर पुश करना चाहा और अंदर। और ठीक जब अदिति मुँह बंद करने जा रही थी चूसने के लिए दूसरी बार, तो अचानक अदिति ने दरवाजे के तरफ देखा।
अदिति ने तकरीबन चिलाते हुए कहा- “ओह माई गोड... दरवाजा लाक नहीं है। क्या होगा अगर अचानक लीना दरवाजा खोलकर अंदर आई तो? दरवाजा लाक होना चाहिए। इसी तरह मैंने तुम दोनों को देख लिया आज, अगर तुम लोगों ने दरवाजा लाक किया होता तो मुझे कुछ पता नहीं चलता तुम दोनों के बारे में, जाओ दरवाजा लाक करके आओ..."
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अदिति ने लण्ड को हाथ से छुआ, फिर नजर उठाकर राकेश को देखा, फिर लण्ड को गौर से देखा। फिर सोचा की क्यों वो यह सब करने को राजी हो गई? क्या सिर्फ इसलिए की राकेश उसके कमरे से निकल जाए जल्दी से या कोई और बात थी? अदिति ने यह सब विशाल से कहा।
जब अदिति ने लण्ड को हाथ से छुआ तो राकेश का चेहरा खिल उठा और वो अदिति को देखने लगा और अदिति की उंगलियां धीरे-धीरे लण्ड के ऊपर फिरने लगी हल्के से। उसकी छुवन से लण्ड में हरकत होने लगी। लण्ड थोड़ा-थोड़ा उठने लगा। अदिति देखती रही। लगता था एक छोटा सा सोया हुआ हैवान धीरे-धीरे बड़ा हो रहा है। अदिति के चेहरे पर मुश्कुराहट आ गई उसको बढ़ते हुए देखकर। जितना वो लण्ड को छू और दुलार रही थी उतना ही वो बड़ा होता जा रहा था उसके हाथ में।
अदिति मुश्कुराती गई और बार-बार सिर उठाकर राकेश को देख रही थी मुश्कुराते हए। राकेश भी अदिति के चेहरे में देखता जा रहा था और वो समझ गया की अब अदिति लाइन पर आ गई है। राकेश को पहले से यकीन था की अदिति सब करने के लिए तैयार हो जाएगी, क्योंकी उसने लीना को लण्ड चूसते हुए देख लिया है। राकेश ने सोचा एक शादीशुदा जवान औरत जिसने अपने पति की जवान बहन को उसके बड़े भाई के लण्ड को चूसते हए देखा हो, उसके मन में सेक्सुअल खयालात जबरदस्त जागा होगा, और मन में कशमकश और अजीब सेक्सुअल फीलिंग्स आई होंगी। किसी ना किसी तरह से उत्तेजित हुई होगी अदिति वो सब देखकर। राकेश को यकीन था इसीलिए वो अपना चान्स मार रहा था अदिति के साथ।
राकेश ने तो सोच लिया था के अदिति भी 18 साल की है बिल्कुल लीना की तरह, तो अगर लीना यह सब करना पसंद करती है तो अदिति भी किसी तरह से लीना की हम-उम्र होते हए उसके भी मन में ऐसे चीजों के लिए चाहत तो होगी जरूर। और राकेश ने सोचा बहन और छोटे भाई की पत्नी भी मिल जाए चोदने को तो मजा ही मजा हो जाएगा उसके लिए।
फिर राकेश ने सोच लिया था की शुरू में शायद अदिति थोड़ा बहत नफरत करेगी, थोड़ी आना-कानी करेगी मगर
आखीर में वो जरूर चुदवाएगी उससे। ऐसा पूरा यकीन हो गया था राकेश को जिस वक़्त अदिति ने दरवाजा खोला था, जब लीना उसको चूस रही थी तभी। राकेश को खुद पर पूरा यकीन था इसीलिए वो आगे बढ़ा। अदिति ने अपनी उंगलियों को फेरते हुए राकेश के लण्ड को पूरा फार्म दे दिया, बिल्कुल तनकर खड़ा हो गया लण्ड और अदिति के दांत नजर आ गए उसकी मश्कराहट की चमक से।
अदिति को उस तरह मुश्कुराते देखकर।
राकेश ने फुसफुसाते हुए कहा- “ओके अब इस पर अपनी जीभ फेरो और धीरे-धीरे अपने मुँह में लो इसको। सब धीरे-धीरे करो कोई जल्दी नहीं."
अदिति ने राकेश के चेहरे में देखा, फिर वापस लण्ड को देखा, अपने होंठों को दाँतों में दबाया, फिर से राकेश के चेहरे में देखा और बिल्कुल नार्मल आवाज में पूछा- “यह विशाल से ज्यादा बड़ा इसलिए है, क्योंकी आप बड़े हो उमर में?"
राकेश को बहुत मजा आया और जवाब दिया- “विशाल का इतना बड़ा नहीं है? तुमको बड़ा पसंद है?"
अदिति मुश्कुराई और अपने कंधे को ऊपर किया जवाब में, फिर झुक कर जीभ निकाली लण्ड के ऊपरी हिस्से पर फेरने के लिए।
राकेश ने तभी कहा- “बोलो ना अदिति, क्या तुमको लगता है एक ज्यादा बड़े लण्ड से तुमको ज्यादा मजा आएगा? क्या हर बार विशाल के करने से तुमको मजा आता है? मेरा मतलब है तृप्त होती हो हर बार? आर्गेज्म आता है या वो सिर्फ खुद को प्लीज करता है?"
उस वक़्त अदिति का सभी गुस्सा गायब हो गया था और उसको लग रहा था की वो कुछ मामूली चीज कर रही है जो सही था। मगर उसको राकेश को जवाब देने में थोड़ी शर्म आ रही थी। फिर भी उसने कहा- “किसी दूसरे दिन आपको इस सवाल का जवाब दूंगी..."
तब अदिति ने अपनी जीभ को राकेश के लण्ड के ऊपर फेरा, जिससे राकेश की आअ निकली। फिर राकेश की
आवाज निकली- “सस्स्स्स ... हाँ..."
अदिति ने सिर उठाकर उसके चेहरे में देखा और धीरे से मुंह खोलकर लण्ड के ऊपरी हिस्से को मुँह के अंदर ले लिया। राकेश अपने लण्ड को पुश करने की कोशिश कर रहा था मगर अदिति ने मुंह बंद कर लिया था, उसके लण्ड को अपने मुँह में कैद करके। उस हिस्से को अदिति चूसने लगी मजे के साथ और बार-बार आँखें उठाकर राकेश के चेहरे में उसको मजा और आराम लेते हुए देख रही थी। अदिति ने दोबारा मुँह खोला लण्ड को और भी अंदर लेने के लिए, और राकेश ने कमर हिलाकर पुश करना चाहा और अंदर। और ठीक जब अदिति मुँह बंद करने जा रही थी चूसने के लिए दूसरी बार, तो अचानक अदिति ने दरवाजे के तरफ देखा।
अदिति ने तकरीबन चिलाते हुए कहा- “ओह माई गोड... दरवाजा लाक नहीं है। क्या होगा अगर अचानक लीना दरवाजा खोलकर अंदर आई तो? दरवाजा लाक होना चाहिए। इसी तरह मैंने तुम दोनों को देख लिया आज, अगर तुम लोगों ने दरवाजा लाक किया होता तो मुझे कुछ पता नहीं चलता तुम दोनों के बारे में, जाओ दरवाजा लाक करके आओ..."
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