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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

ऐसे सोचते हुए अदिति के जिश्म में एक उत्तेजना पैदा हुई और एक पल के लिए अदिति कन्फ्यू ज्ड हो गई खुद से, खुद के मन से, खुद की चाहत और जिश्म की फरमाइश से। उसको समझ में नहीं आ रही थी की क्या हो रहा है उससे उस पल। उसकी भावनायें बदल रही थी, ख्वाहिश में बदलाव आ रही थी, या उसको उसी पल से लीना से जलन सी हो गई थी, या राकेश को अपने करीब लाना चाहती थी वो भी, या राकेश को साबित करना चाहती थी की अदिति लीना से बेहतर है। ऐसे ऐसे खयालात आ रहे थे अदिति के मन में।

वो खुद को नहीं समझ पा रही थी और राकेश के लण्ड को अपने इतने करीब देखकर भी वो अपनी नजरों को नहीं हट पा रही थी लण्ड से। घूर रही थी उस लण्ड को जो मुरझाया हुआ था, लटका हुआ था राकेश के हाथ में। अदिति सोच रही थी क्यों उस वक़्त उसको गुस्सा नहीं आ रहा था, क्यों राकेश के लण्ड को अपने इतने करीब पाकर भी वो चुप है? क्यों उसको नफरत नहीं हो रही थी उस पल को?

अदिति ने लण्ड को हाथ से छुआ, फिर नजर उठाकर राकेश को देखा, फिर लण्ड को गौर से देखा। फिर सोचा की क्यों वो यह सब करने को राजी हो गई? क्या सिर्फ इसलिए की राकेश उसके कमरे से निकल जाए जल्दी से या कोई और बात थी? अदिति ने यह सब विशाल से कहा।

जब अदिति ने लण्ड को हाथ से छुआ तो राकेश का चेहरा खिल उठा और वो अदिति को देखने लगा और अदिति की उंगलियां धीरे-धीरे लण्ड के ऊपर फिरने लगी हल्के से। उसकी छुवन से लण्ड में हरकत होने लगी। लण्ड थोड़ा-थोड़ा उठने लगा। अदिति देखती रही। लगता था एक छोटा सा सोया हुआ हैवान धीरे-धीरे बड़ा हो रहा है। अदिति के चेहरे पर मुश्कुराहट आ गई उसको बढ़ते हुए देखकर। जितना वो लण्ड को छू और दुलार रही थी उतना ही वो बड़ा होता जा रहा था उसके हाथ में।

अदिति मुश्कुराती गई और बार-बार सिर उठाकर राकेश को देख रही थी मुश्कुराते हए। राकेश भी अदिति के चेहरे में देखता जा रहा था और वो समझ गया की अब अदिति लाइन पर आ गई है। राकेश को पहले से यकीन था की अदिति सब करने के लिए तैयार हो जाएगी, क्योंकी उसने लीना को लण्ड चूसते हुए देख लिया है। राकेश ने सोचा एक शादीशुदा जवान औरत जिसने अपने पति की जवान बहन को उसके बड़े भाई के लण्ड को चूसते हए देखा हो, उसके मन में सेक्सुअल खयालात जबरदस्त जागा होगा, और मन में कशमकश और अजीब सेक्सुअल फीलिंग्स आई होंगी। किसी ना किसी तरह से उत्तेजित हुई होगी अदिति वो सब देखकर। राकेश को यकीन था इसीलिए वो अपना चान्स मार रहा था अदिति के साथ।

राकेश ने तो सोच लिया था के अदिति भी 18 साल की है बिल्कुल लीना की तरह, तो अगर लीना यह सब करना पसंद करती है तो अदिति भी किसी तरह से लीना की हम-उम्र होते हए उसके भी मन में ऐसे चीजों के लिए चाहत तो होगी जरूर। और राकेश ने सोचा बहन और छोटे भाई की पत्नी भी मिल जाए चोदने को तो मजा ही मजा हो जाएगा उसके लिए।

फिर राकेश ने सोच लिया था की शुरू में शायद अदिति थोड़ा बहत नफरत करेगी, थोड़ी आना-कानी करेगी मगर

आखीर में वो जरूर चुदवाएगी उससे। ऐसा पूरा यकीन हो गया था राकेश को जिस वक़्त अदिति ने दरवाजा खोला था, जब लीना उसको चूस रही थी तभी। राकेश को खुद पर पूरा यकीन था इसीलिए वो आगे बढ़ा। अदिति ने अपनी उंगलियों को फेरते हुए राकेश के लण्ड को पूरा फार्म दे दिया, बिल्कुल तनकर खड़ा हो गया लण्ड और अदिति के दांत नजर आ गए उसकी मश्कराहट की चमक से।

अदिति को उस तरह मुश्कुराते देखकर।

राकेश ने फुसफुसाते हुए कहा- “ओके अब इस पर अपनी जीभ फेरो और धीरे-धीरे अपने मुँह में लो इसको। सब धीरे-धीरे करो कोई जल्दी नहीं."

अदिति ने राकेश के चेहरे में देखा, फिर वापस लण्ड को देखा, अपने होंठों को दाँतों में दबाया, फिर से राकेश के चेहरे में देखा और बिल्कुल नार्मल आवाज में पूछा- “यह विशाल से ज्यादा बड़ा इसलिए है, क्योंकी आप बड़े हो उमर में?"

राकेश को बहुत मजा आया और जवाब दिया- “विशाल का इतना बड़ा नहीं है? तुमको बड़ा पसंद है?"

अदिति मुश्कुराई और अपने कंधे को ऊपर किया जवाब में, फिर झुक कर जीभ निकाली लण्ड के ऊपरी हिस्से पर फेरने के लिए।

राकेश ने तभी कहा- “बोलो ना अदिति, क्या तुमको लगता है एक ज्यादा बड़े लण्ड से तुमको ज्यादा मजा आएगा? क्या हर बार विशाल के करने से तुमको मजा आता है? मेरा मतलब है तृप्त होती हो हर बार? आर्गेज्म आता है या वो सिर्फ खुद को प्लीज करता है?"

उस वक़्त अदिति का सभी गुस्सा गायब हो गया था और उसको लग रहा था की वो कुछ मामूली चीज कर रही है जो सही था। मगर उसको राकेश को जवाब देने में थोड़ी शर्म आ रही थी। फिर भी उसने कहा- “किसी दूसरे दिन आपको इस सवाल का जवाब दूंगी..."

तब अदिति ने अपनी जीभ को राकेश के लण्ड के ऊपर फेरा, जिससे राकेश की आअ निकली। फिर राकेश की

आवाज निकली- “सस्स्स्स ... हाँ..."

अदिति ने सिर उठाकर उसके चेहरे में देखा और धीरे से मुंह खोलकर लण्ड के ऊपरी हिस्से को मुँह के अंदर ले लिया। राकेश अपने लण्ड को पुश करने की कोशिश कर रहा था मगर अदिति ने मुंह बंद कर लिया था, उसके लण्ड को अपने मुँह में कैद करके। उस हिस्से को अदिति चूसने लगी मजे के साथ और बार-बार आँखें उठाकर राकेश के चेहरे में उसको मजा और आराम लेते हुए देख रही थी। अदिति ने दोबारा मुँह खोला लण्ड को और भी अंदर लेने के लिए, और राकेश ने कमर हिलाकर पुश करना चाहा और अंदर। और ठीक जब अदिति मुँह बंद करने जा रही थी चूसने के लिए दूसरी बार, तो अचानक अदिति ने दरवाजे के तरफ देखा।

अदिति ने तकरीबन चिलाते हुए कहा- “ओह माई गोड... दरवाजा लाक नहीं है। क्या होगा अगर अचानक लीना दरवाजा खोलकर अंदर आई तो? दरवाजा लाक होना चाहिए। इसी तरह मैंने तुम दोनों को देख लिया आज, अगर तुम लोगों ने दरवाजा लाक किया होता तो मुझे कुछ पता नहीं चलता तुम दोनों के बारे में, जाओ दरवाजा लाक करके आओ..."

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राकेश ने धीरे से हँसते हुए कहा- “तुमको बल्की खुश होना चाहिए की हमने दरवाजा नहीं बंद किया था और तुमको लीना की ब्लोजोब देखने को मिला, और उसी की वजह से इस वक्त तुमसे मेरी यह अभी वाली मुलाकात हुई है ना हेहेहे?"

राकेश कमरे की दरवाजे के तरफ बढ़ा लाक करने के लिए, अपने लण्ड को हाथ में संभाले हुए और फिर अपने पैंट और अंडरवेर को निकाल फेंका उसने। उस वक़्त अदिति बेड पर बैठी थी और राकेश का पिछवाड़ा सहलाते हुए दरवाजे की तरफ जाते देखकर मुश्कुरा रही थी। जब राकेश दरवाजे को लाक करके वापस आने लगा अदिति के तरफ बढ़ते हुए उसने अपनी उंगली से अदिति को इशारा करते हुए अपना लण्ड दिखाया जिस पर प्री-कम की एक बूंद आ गई था। वो देखकर अदिति ने होंठ दाँत में दबाते हुए एक छोटी सी मुश्कान दी।

बेड के पास आकर राकेश ने एक पैर को उठाकर घुटने को बेड पर रखा और अदिति से उस प्री-कम को चाटने को कहा। अदिति ने सिर उठाकर राकेश के चेहरे में देखा मगर सिर को ना में हिलाया। पर राकेश ने एक हाथ

से अपने लण्ड को पकड़े रखा और दूसरे हाथ से अदिति का सिर थामकर उसको अपने लण्ड पर झुकाया और अदिति ने मुँह बंद कर लिया, तो प्री-कम उसके होंठ और गाल पर रगड़ा राकेश ने। अदिति थोड़ी नाराज हुई और तिरछी नजरों से राकेश को देखा।

राकेश का लण्ड फिर से मुरझाने लगा तब राकेश ने कहा- “ओके देखो फिर से यह मुरझाने लगा, अब इसको दोबारा खड़ा करो तुम..”

पर अब अदिति नखरे दिखाने लगी जानबूझ कर और तड़पाने लगी राकेश को। वो लण्ड को अब छू भी नहीं रही थी और राकेश नर्वस होने लागा।

राकेश ने कहा- “देखो वक़्त इंतेजार नहीं करता। अभी विशाल वापस आ जायेगा, जल्दी करो डार्लिंग..”

मगर अदिति बिस्तर पर खामोश बैठी रही। और दोनों को बाहर लाउंज में आवाजें सुनाई देने लगीं, सब टीवी स्विच आफ करके अपने-अपने कमरे में जाने लगे थे। लाउंज में से आते हुए आवाज को सुनकर साफ जाहिर हो गया दोनों को की टीवी आफ हो गई और सब जा रहे हैं।

अदिति ने फिकरमंद होते हुए कहा- “ओह माई गोड... अब लीना यहाँ आएगी मुझको गुड नाइट विश करने हर रात को वो आती है सोने से पहले, अब तुम जल्दी से छुप जाओ वो तुमको देख लेगी, जल्दी कपड़े पहनो और छुपो कहीं.”

राकेश ने कहा- “मगर दरवाजा तो लाक है अंदर से, उसको कुछ पता नहीं चलेगा। वो समझेगी की तुम सो गई हो। फिकर की कोई बात नहीं..."

अदिति जल्दी से बेड से उतरकर अपनी नाइटी के ऊपर वाला गाउन पहनते हुए कहा।

अदिति- “नहीं मैं दरवाजे को खोलने जा रही हूँ, वरना लीना सोचेगी की क्यों मैंने लाक किया है? जबकी विशाल अभी आने वाला है, और यह दरवाजा कभी भी लाक नहीं रहता रात भर विशाल के वापस आने पर भी। देखो अब तुम क्या करोगे मैं खोल रही हूँ..." और अदिति ने सच में दरवाजे को जाकर खोल दिया।

अंदर से वह लोग बाहर की आवाज को सुन पा रहे थे वो अपने कमरे के तरफ जाते हुए लीना से कुछ कह रहा था, और राकेश की डैड ने कहा- “विशाल नहीं आया है, सामने वाले दरवाजे को लाक मत करना और किचेन की लाइट ओन रहने देना, अदिति विशाल को डिनर सर्व करने जाएगी..”

राकेश के पास और कोई चारा नहीं था और झट से अपने कपड़े पहने उसने और छुपने की जगह ढूँढ़ने लगा। कपड़े पहनने के बाद उसने अदिति के चेहरे में देखते हुए धीरे से पूछा- “कहाँ छुपूं अब?”

अदिति ने फुसफुसाते हुए कहा- “पता नहीं.."
 
तभी अदिति ने दरवाजे से अपने कान लगाकर सुना और जल्दी से राकेश से कहा- “लीना टायलेट गई है, मैं दरवाजा खोलकर चेक करती हूँ। अगर कोई नहीं होगा तो तुम जल्दी से निकल जाना ओके?” फिर अदिति ने दरवाजे को थोड़ा सा खोलकर लाउंज के तरफ झाँका तो देखा की दीपक अपने कमरे का दरवाजा बंद कर रहा है

और लीना टायलेट की तरफ जा रही है। ससुर का कमरा आलरेडी बंद था, लाउंज का लाइट आफ थी और किचेन में लाइट ओन थी।

अदिति मुड़कर वापस राकेश को देखती है जो उस वक़्त कमरे के एक कोने में खड़ा अदिति के बोलने का इंतेजार कर रहा था और अदिति ने उससे कहा- “ओके जल्दी, जल्दी निकलो कोई नहीं है जल्दी करो फटाफट

आउट...”

राकेश को ना चाहते हुए भी मजबूरन निकलना पड़ा। वो दरवाजे के तरफ बढ़ा जहाँ अदिति ने दरवाजे का हैंडल पकड़ी हुई आधा दरवाजा को खोलकर खड़ी हुई थी बाहर झंकते हुए। राकेश वहाँ रुका, अदिति को किस किया

और कहा- “कोई बात नहीं जानेमन, फिर कभी तुमको पा लूँगा, बेहद नमकीन हो तुम...” और राकेश कमरे से निकलते हुए अदिति के गाल और होंठ को चाट।

अदिति ने एक लंबी साँस लेते हुए राकेश के थूक को अपने गाल और होंठों से साफ किया और खुद से कहा "अफफ्फ... आज तो बच गई मैं... पता नहीं क्या होता अगर लीना आजातौ तो... ओह गोड.."

अपने बिस्तर पर वापस जाकर अदिति सब बीते हुए लम्हों को सोचने लगी। उसके दिल की धड़कन तेज हो गई और पशीने छूट पड़े। फिर यह सोचते हुए की उसने थोड़ी देर पहले क्या कया वो हँस पड़ी। खुद वो यकीन नहीं कर पा रही थी की उसने राकेश के लण्ड को अपने मुँह में लिया था कुछ देर पहले। सोचने लगी किस तरह से उसने राकेश के मोटे, लंबे लण्ड को अपने नाजुक हाथों में थामा था और तुलना करने लगी विशाल के लण्ड को सोचकर। अदिति को याद आया की राकेश ने पूछा था क्या विशाल का लण्ड उतना मोटा नहीं है जितना उसका? तो खुद से अदिति ने बात करते हए कहा- "मैं उसको कैसे बता सकती थी अपने पति के औजार के बारे में?

हाँ सच में विशाल वाला उतना बड़ा नहीं है जितना राकेश का है। मगर सोच रही हैं क्या ज्यादा बड़े लण्ड से मुझको ज्यादा मजा आएगा? मुझे कैसे पता चलेगा? मुझको तो कोई अनुभव नहीं है किसी और लण्ड का? क्यों राकेश ने मुझसे वो सवाल किया क्यों? मुझे कैसे पता चलेगा की मुझको ज्यादा बड़ा वाला ज्यादा पसंद आएगा या नहीं? लीना राकेश का मोटा लण्ड अपने अंदर लेती है तो क्या उसको मुझसे ज्यादा मजा आता होगा जो मुझको विशाल से मिलता है? इसका पता कैसे लगाऊँ मैं? क्या लीना से पूछ? मगर लीना को कैसे पता चलेगा? उसने तो विशाल का लण्ड नहीं ट्राई किया। ओह्ह... नो? मगर क्या पता की लीना ने विशाल से भी किया हो?

क्या पता की मुझसे शादी करने से पहले विशाल ने भी लीना से सब सीखा हो? और क्या पता की वो भी दोनों भाइयों से करती है? क्या ऐसा हो सकता है? नहीं बिल्कुल नहीं मुझे पता होता अगर विशाल भी लीना के साथ करता तो? लीना बस आने ही वाली है यहाँ आज तो इनडाइरेक्टली उससे सवाल पूछंगी। आज लीना को कुछ तो बताना होगा, आने दो उसे...”

और कुछ देर बाद लीना ने दरवाजे को नाक किया और इससे पहले की अदिति जवाब देती लीना अंदर घुस चुकी थी। यह उसकी आदत थी किसी भी वक्त अदिति के कमरे में आ जाती थी। दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे

और प्यार था दोनों के बीच। लीना मुश्कुराते हुए अदिति के बेड तक आई और उसके पास बैठकर बोली।

लीना- “हम्म... मुझे पता था की आप नहीं सो रही हो, पर आपने मूवी क्यों नही देखा आखीर तक? क्यों चली आई? बहुत अच्छी मूवी थी भाभी। क्या हुआ आप विशाल भाई को मिस कर रही हो हाँ? बोलो बोलो..” लीना अदिति से छेड़खानी करने लगी हमेशा की तरह। दोनों हँस रहे थे।

फिर कुछ देर बाद अदिति ने लीना से पूछा- “लीना तुमने कभी किसी से प्यार किया है?"

लीना का चेहरा लाल हो गया और अपनी भाभी के चेहरे में देखते हुए कहा- “अचानक यह सवाल क्यों भाभी? क्या आपको पाता नहीं होता अगर मैं किसी को चाहती तो?” और यह कहकर लीना जोर से हँसने लगी अदिति की आँखों की गहराई में देखते हुए।

अदिति ने लीना के चेहरे पर देखते हुए यह पूछने की जुर्रत कर लिया- “ओके... तुम किसी को प्यार नहीं करती, मगर मैं तुमसे कुछ ऐसी बात पूछने जा रही हूँ जो तुमको अजीब लगेगा शायद। फिर भी क्योंकी हम अच्छे दोस्त हैं तो उम्मीद है की मुझसे शेर करोगी और कुछ छुपाओगी नहीं, और मैं वादा करती हूँ की बात सिर्फ हम दोनों के बीच ही रहेगी ओके?"

लीना थोड़ा हैरान हुई मगर प्यार से जवाब दिया- “हाँ भाभी, आपको सब ईमानदारी से सच-सच बताऊँगी आप पूछिए..."

अदिति ने एक लंबी साँस लेते हुए लीना की आँखों में देखते हुए पूछा- “क्या तुमने कभी सेक्स किया है? अभी तक कुँवारी हो या?”

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कड़ी_77 अदिति की लीना से पूछताछ

लीना का यह सुनकर चेहरा लाल हो गया, सिर को नीचे झुका लिया उसने। सिर उठाकर अपने भाभी के चेहरे में देखा फिर एक तरफ देखने के बाद एक गहरी साँस लिया जवाब देने से पहले।

लीना की अदिति से इतनी गहरी दोस्ती थी के हालांकी लाल पीली हो रही थी। लेकिन उसको बिल्कुल झिझक नहीं हुई उसको जवाब देने में। अपने चेहरे की टेन्शन को तोड़ते हुए बचकानी आवाज में लीना ने कहा “ओफफो... भाभी क्यों और कैसे आज यह सवाल आया आपके मन में? क्या मेरे जिश्म से पता चल रहा है की मैं कुँवारी नहीं हूँ क्या?”

अदिति ने मुश्कुराते हुए उससे कहा- “बहाना मत बनाओ, मुझे जवाब चाहिए अभी इसी वक़्त..."

लीना- “ओके बाबा, बताती हैं। मगर आप पहले प्रामिस करो की बात हमारे बीच सीक्रेट रहेगी तब बताऊँगी सब कुछ "

अदिति ने प्रामिस किया के किसी को नही बताएगी।

लीना ने कहा- “नहीं भाभी, मैं कुँवारी नहीं हूँ.” ।

अदिति को तो पहले से पता था मगर चकित होने का नाटक किया उसने और पूछा- “हे भगवान्... कुँवारी नहीं हो तुम? तो तुम मेरी दोस्त हो ना तो बताओ मुझे कौन है वो जिसके साथ सेक्सुअल रिलेशन्षिप रखती हो?"

अब लीना को झूठ तो बोलना था, क्योंकी राकेश का नाम तो नहीं ले सकती थी ना अपनी भाभी के सामने, लीना ने एक पाज लिया फिर फुसफुसाते हुए कहा- “मेरा एक बायफ्रेंड है भाभी, जब सिलाई के लिए जाती हूँ ना, तो हम छुप-छुपकर मिलते हैं..”

अदिति- “तुझ जैसी खूबसूरत लड़की की एक बायफ्रेंड होना सही है बिल्कुल। मगर तुम उसको घर क्यों नहीं लाती हो? हम तुम्हारा शादी करवा सकते हैं उसके साथ...”

लीना को फिर झूठ बोलना पड़ा- “नहीं भाभी एक प्राब्लम है, वो शादीशुदा है फिर भी हम एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं, तो हमको ऐसे ही छुप-छुपकर मिलना पड़ेगा और ऐसे ही अपना रिश्ता बरकरार रखना पड़ेगा अब...”

अदिति हैरान रह गई जिस तरह से लीना अपने बड़े भाई को बचा रही थी झूठ बोलते हुए। फिर अदिति ने यह भी सोचा के कहीं सच में कोई और तो नहीं है, जिससे लीना मिलती रहती है सिलाई के लिए जाते वक्त। पर अदिति ने डिसाइड किया की उससे और ज्यादा सवाल नहीं करना बेहतर होगा, और अदिति ने यह उम्मीद रखा की खुद-बा-खुद लीना अपने आप और कुछ बताएगी वक्त आने पर।

मगर उस रात को इस बारे में ज्यादा बात नहीं हुई। क्योंकी लीना ने कहा- “मुझको नींद आ रही है...” और अदिति को गुडबाइ किस करके अपने कमरे में चली गई सोने।

दिन गुजरते गये और अदिति ने कई बार लीना को राकेश के साथ देखा। राकेश जानबूझ कर अदिति को दिखा कर लीना को अपने कमरे में ले जाता था चोदने के लिये, और फिर अदिति को अकेली पाते ही हर बार राकेश उसको लपेटता था, रगड़ता था, चूचियां मसलता था और तंग किया करता था उसे।

अदिति अपने आपको उससे अच्छी तरह से बचाती रहती थी, नये-नये पैंतरे बनाती थी नेहा उससे दूर भागने की। फिर भी जब भी कोई मौका हाथ आता था तो राकेश अदिति को छोड़ता नहीं था। मगर चूमने चाटने के अलावा कुछ नहीं कर पाया था। हर वक्त अदिति उसके चंगुल से भाग निकलती थी।

वैसे एक रात को 11:30 बजे राकेश ने अदिति का कमरा खोला क्योंकी विशाल उस रात को लेट आने वाला था। अदिति अपनी पतली सी नाइटी में हमेशा की तरह बिना ब्रा के सो रही थी। वो चिहँक कर बेड से उत्तरी जब उसने राकेश के हाथ को अपने जिश्म पर फेरता हआ महसूस किया। और राकेश से बाहर जाने के लिए कहा।

राकेश ने शैतानी मुश्कुराहट से कहा- “चलो मेरे साथ, मैं तुमको कुछ दिखलाना चाहता हूँ..”

अदिति बोली- “नहीं मैं आपके साथ कहीं नहीं आने वाली, आप जाओ यहां से प्लीज.."

राकेश उसके करीब गया जहाँ वो अपने सजने वाले आईने के पास पीठ किए खड़ी थी और कहा- “ओके अगर तुम लीना को एक बहुत अच्छी लड़की समझती हो और यह सोचती हो की सिर्फ मैं उसके साथ जिस्मानी तालुकात रखता हूँ तो चलकर देखो की किसके साथ और वो यह सब करती है?"

अदिति ने यह सुनकर जानना चाहा तो राकेश के पीछे नंगे पैर चलने लगी। दोनों अंधेरे कारिडोर में चलते जा रहे थे।

राकेश ने पीछे मुड़कर फुसफुसाते हुए अदिति से कहा- "बिल्कुल शोर मत करना, अगर कुछ कहना हो तो बिल्कुल धीरे से फुसफुसाते हुए कहना.."

अदिति की दिल की धड़कन तेज हो गई और साँसें जैसे थम गई। फिर भी राकेश के पीछे बढ़ती गई। यह सोचते हये की लीना के कमरे की तरफ जा रही थी। मगर वो हैरान हई राकेश को अपने पिता के बेडरूम के पास रुकते हुए देखकर। अदिति ने राकेश को किचेन से आती हुई लाइट में देखा, किचेन के लाइटें ओन थी क्योंकी विशाल वापस नहीं आए थे। राकेश ने फिर मुड़कर अदिति को देखते हुए अपने होंठों पर एक उंगली रखकर खामोश रहने के लिए इशारा किया। राकेश की एक सीक्रेट जगह थी जहाँ से अपने पिता के कमरे के अंदर झाँक सकता था। वहाँ रुक कर राकेश ने अंदर झाँका और फिर अदिति को झाँकने को कहा।

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अदिति दो कदम आगे बढ़ी और उसके चेहरे में देखते हुए फुसफुसाते हुए कहा- “क्या बात है? पहले मुझे बताओ फिर देवूगी...”

राकेश ने कहा- “अपनी लीना को आक्सन में देखो तो जानेमन...”

अदिति नेचकित होते हुए कहा- “क्या? तुम मजाक कर रहे हो ना? चाहते हो की मैं वहाँ आऊँ ताकी तुम मेरे ज्यादा करीब हो सको, है ना?"

राकेश मुश्कुराया फिर कहा- “ओके। देखो मैं एक मीटर की दूरी पर खड़ा रहता हूँ। तुम इस छेद से अंदर झाँक कर तो देखो क्या नजारा है?"

अदिति आगे बढ़ी और उस दीवार पर किये गये छेद से एक आँख बंद करके दूसरी आँख लगाकर अंदर अपने ससुर के कमरे में देखने लगी। अदिति को बहुत बड़ा झटका लगा यह देखकर की उसका ससुर लीना को चोद रहा था। लीना की दोनों टाँगें फैली हुई थी, और उसके पिता का मोटा लण्ड उसकी चूत के अंदर-बाहर हो रहा था, लीना की दोनों बाहें अपने पिता के कंधे पर जोर से जकड़े हए थी, और लीना सिसकारियां छोड़ रही थी अपने पिता के मुँह को चूमते हुए।

अदिति को चक्कर सा आने लगा, अपनी हथेली को दीवार से लगाए खड़ी थी और अचानक पीठ के बल जैसे गिरने जा रही थी तो जल्दी से राकेश ने उसको पीछे से थामा। अदिति जैसे ही राकेश की बाहों में गई तो एक कांपती आवाज में अदिति ने कहा- “मुझे चक्कर आ रहा है, पैर काप रहे हैं, नहीं चल पाऊँगी। मुझे अपने कमरे में वापस ले चलो प्लीज.."

राकेश को लगा की उसको जैकपाट मिल गया और खुशी से अदिति को अपनी बाहों में उठाया और बच्चे की तरह उसको अपनी गोद में उठाकर अदिति के बेडरूम की तरफ चलने लगा। अदिति ने अपनी बाहों को राकेश के गले में डाल दिया था, सपोर्ट के लिए और राकेश अदिति के गले पर उसकी खुशबू को सूंघ रहा था, और उसके बालों से भी खुशबू आ रही थी जो खुले हुए लटके लहरा रहे थे चलते वक्त।

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कड़ी_78 राकेश अदिति के बेडरूम में

जल्द ही अदिति बिस्तर के ऊपर थी। राकेश ने उसे एक बच्चे की तरह उठाकर बेड पर लेटाया, तकिये को उसके सिरहाने लगाकर।

अदिति एक लंबी साँस लेने के बाद फुसफुसाते हुए बोली- “यकीन नहीं आ रहा मुझे, कब से यह सब चल रहा है इस घर में भला?"

राकेश उसके बगल में बेड पर बैठा और उसका सिर सहलाते हुए जैसे उसको दिलाशा देते हुए कहा- “इतना फिकर करने की कोई बात नहीं मेरी जान, यह सब जिंदगी का एक हिस्सा है, जो होना था सो हआ है। अब हमको आगे बढ़ना चाहिए। सब कुछ बिल्कुल नेचुरल है जो भी हुआ है.."

अदिति ने राकेश के चेहरे में देखते हुए जवाब दिया- “आप इस सबको नेचुरल कहते हो? एक बाप अपनी बेटी को चोद रहा है और यह नेचुरल लगता है आपको? मुझे घिन आती है..."

राकेश ने मुश्कुराते हुए कहा- “बस एक बार आदत हो जाए तो देखना तुमको भी सब बिल्कुल नार्मल लगेगा, जैसे मुझे। मेरा यकीन करो यह नेचुरल है, नेचर का नियम है सब। औरत मर्द के लिए बनी है, मर्द औरत के लिए, फीमेल और मेल, तो क्यों फरक होना चाहिए की बेटी है, बहन है, माँ है या कोई भी? एक फीमेल और एक मेल साथ मिलते हैं प्यास बुझाने के लिए, जिश्म की आग को ठंड करना के लिए। बस यही तो बात है?"

अदिति- “बकवास। मुझको फुसलना बंद करो। मुझे पता है आप क्या चाहते हो मुझसे। इसीलिए ऐसा कह रहे हो आप, वरना आपको अच्छी तरह से पता है की मैं क्या कहना चाह रही हूँ..”

राकेश ने अपने दाँतों को दिखाया और अपने एक हाथ को अदिति के घुटनों से सहलाते हुए अदिति की जांघों के ऊपर हाथ ले गया उसकी पतली नाइटी के नीचे, तो अदिति ने अपने हाथों को उसके हाथ पर रखा उसको आगे बढ़ने से रोकते हुए। राकेश को लगा की सब गड़बड़ हो रहा है, उसने ऐसा कुछ नहीं चाहा था। उसने तो सोचा था की लीना को अपने बाप से चुदते हुए देखकर अदिति गरम हो जाएगी और खुद को राकेश के हवाले कर देगी। मगर यहाँ तो अदिति बहुत सीरियस हो गई थी और बहुत परेशान लग रही थी। राकेश ने किसी और तरीके से हालात को बदलने की कोशिश की।

राकेश ने टापिक बदलते हए कहा- "विशाल आज ज्यादा देर से आने वाला है क्या? इस टाइम को तो आ जाता है ना?"

अदिति ने जवाब में कहा- “वो आज अपने एक-दोस्त की सालगिरह की पार्टी में गया है और रात के दो बजे तक वापस आएगा कह गया है...” और यह बताने के बाद अदिति को खयाल आया की उससे गलती हो गई

राकेश को सब सच-सच बताकर की विशाल कितनी रात को वापस आने वाला था।

वो इतनी खोई हुई थी अपने ससुर को लीना के साथ देखकर की उसको पता ही नहीं चला की वो राकेश को क्या जवाब दे रही थी। मगर देर हो चुकी थी और राकेश को अब सच का पता चल चुका था की विशाल रात को दो बजे आएगा। उस सच को जानकर बेशक राकेश बहुत खुश हुआ, और वो अदिति की छाती को देख रहा था। उसकी चूचियां ऊपर-नीचे हो रहे थी, उसकी तेज दिल की धड़कनों के साथ।

अदिति ने राकेश की नजरों को अपने छाती पर देखते हुए आहे भरते हुए एक गहरी साँस लिया और उसके चेहरा का रंग बिल्कुल लाल हो गया। बेड पर बैठे हुए ही राकेश ने झुक कर अदिति के गाल पर किस करना चाहा मगर क्योंकी अदिति ने अपना चेहरा एक तरफ कर लिया जब देखा की वो उसको किस करने आ रहा है, तो राकेश के होंठ अदिति के कान के नीचे रगड़ाये और आखीर में उसने अदिति के गले के पी

अदिति ने तब तक करवट बदली और राकेश की तरफ अपनी पीठ कर लिया। क्योंकी वो नहीं चाहती थी की उसकी क्लीवेज राकेश के सामने वैसे एक्सपोज रहे। मगर अदिति शायद भूल गई थी की वो उस वक़्त अपनी नाइटी में है और उसकी पीठ क्लीवेज से बहुत ज्यादा एक्सपोज़्ड है, बहुत ज्यादा नंगी है पीछे। राकेश उसकी पीठ को निहारने लगा। उसकी नर्म, मुलायम सफेद और गुलाबी रंग की मिलावट से आकर्षित करते हुए पीठ तकरीबन उसकी कमर तक दिख रही थी, जिसको देखकर राकेश का लण्ड हिचकोले खाने लगा उसकी पैंट के अंदर। उसके जवान जिश्म की रंगत, उसके नर्म गोश्त से भरी हए कांख के साइड के हिस्से, उसकी नाइटी के स्ट्रैप्स उसकी पीठ को और भी ज्यादा सेक्सी दिखा रही थी। उसके जांघे जिस पर उस वक़्त नाइटी और उसकी पैंटी की डिजाइन भी नजर आ रही थी।

राकेश यह सब निहारते हुए, सहन नहीं कर पाया और उसने अपने होठों को हल्के से अदिति की पीठ पर फेरना शुरू किया। वो उसकी कमर से लेकर ऊपर की तरफ बढ़ते हुए अपने होंठ बढ़ा रहा था। अदिति के रोंगटे खड़े हो गये राकेश के होठों को अपनी पीठ पर उस तरह से फेरते हुए महसूस करके।

अदिति ने झट से गर्दन मोड़कर राकेश के चेहरे में देखते हुए गंभीररता से कहा- “प्लीज आप जाओ अब मुझे नींद आ रही है, और बहुत बेचैनी हो रही है मुझे। मुझे आराम करना है जाओ आप.'

राकेश ने अपनी हथेली को उसके पीठ पर सहलाते हुए कहा- “मैं ऐसे हसीन मौके को कैसे हाथ से जाने दे सकता हूँ जानेमन? मैं कितने दिनों से तुमको पाना चाहता हूँ, और आज एक बेहतरीन मौका है अरमान पूरा करने का,

तो हम दोनों को इस मौके का भरपूर फायदा उठना चाहिए। तुमको बेचैनी हो रही है कहा ना? बस अपने आपको मेरे हवाले कर दो और देखो कैसे पल भर में तुम्हारी बेचैनी को उड़ा देता हूँ और देखना कितनी हसीन रात गुजरेगी उसके बाद। मैं गारंटी देता हूँ की बहुत एंजाय करोगी..”

अदिति ने गुस्से में तकरीबन चिल्लाते हुए जैसे गुर्राय...- “आप निकलते हो या मैं चिल्लाऊँ? मैं अभी चिल्लाकर सबको इस कमरे में एकट्ठा करती हूँ, तमाशा बनना चाहते हो आप? निकलो वरना मैं सबको चिल्लाकर बुलाती हूँ अभी के अभी..”

राकेश की समझ में आ गया की अब उससे बहस करना बेकार है और गुस्से में कमरे से निकलने के लिए बेड से खड़ा हुआ और दाँत पीसते हुए कहा- “सती सावित्री बनने की कोशिश मत करो, आज नहीं तो कल तेरी चूत का रस जरूर पियूँगा कुतिया कहीं की..”

अदिति को कुतिया नाम सुनकर बहुत गुस्सा आया और अपने बिस्तर से एक शेरनी की तरह राकेश पर झपटी। तब तक राकेश दरवाजे तक पहुँच रहा था, अदिति ने राकेश के बाजू को पकड़ा और गुस्से में उसको बहुत जोर से दाँत काटा, अपने सभी दाँतों को बहुत ही जोर से अदिति गड़ाती गई राकेश के बाजू के ऊपर कंधे के पास। राकेश के मुँह से आss निकली मगर अदिति नहीं रुक रही थी वो दाँत गड़ाती जा रही थी गुस्से में। वैसा करने से अदिति को झुकना पड़ा था जिससे उसकी दोनों चूचियां लटकी दिखाई दे रही थीं उसकी नाइटी के अंदर, कंधे से एक स्ट्रैप सरक चुकी थी तो एक चूची जैसे नाइटी के बाहर निकलने वाली हो।

राकेश उस दर्द को नहीं महसूस कर रहा था जो अदिति के दाँतों से उसके शरीर पर हो रहा था, बल्की वो उस वक़्त अदिति की चूचियों को निहारे जा रहा था, 18 साल की जवान चूचियां, सख़्त भी और मुलायम भी। अब क्योंकी अदिति ने राकेश का हाथ अपने दोनों हाथों से पकड़ा हुआ था, तो राकेश ने अपने दूसरा हाथ से सीधे

अदिति की चूचियों को मसललना शुरू किया। उस पल अदिति गुस्से से लाल थी और खयाल भी नहीं कर पाई की राकेश उसके साथ क्या कर रहा है।

यह सब बस कुछ पल में हुवाआ, बस चंद सेकेंड में। और जब अदिति ने अपनी जीभ पर खून के कतरे महसूस किए तो वो अचानक रुक गई दाँत काटना, और राकेश के बाजू को देखने लगी जहाँ उसने दाँत काटा था।

अदिति को यकीन नहीं आ रहा था कझ उसने राकेश के शरीर पर अपने दाँतों से छेद कर दिया। उस जगह पर अदिति के सारे दाँतों के निशान थे और 4 छेद थे, जिसमें से खून बूंद-बूंद करके निकल रहा था।

अदिति डर गई वो देखकर, सिर उठाकर राकेश के चेहरे में देखा और सहम सी गई, उसके रोंगटे खड़े हो गये। उसने जिंदगी में पहले किसी को ऐसे नहीं काटा था। यह जिंदगी में पहली बार थी। अदिति का चेहरा फीका पड़

गया और फिर तब उसने खयाल किया की राकेश का एक हाथ उसकी चूचियां मसल रहा था। तब जल्दी से अदिति ने अपने दोनों हाथों को राकेश के हाथों पर रखा, अपने छाती के ऊपर।

अदिति ने हॉफते हुए कहा- “मैं कोई कुतिया नहीं हूँ, फिर कभी मुझे ऐसा मत कहना, मैं लीना नहीं हूँ.."

राकेश ने अपने घायल बाजू को अदिति के कंधों पर करते हुए उसको अपने छाती पर चिपकाया और अदिति की चूचियां राकेश की छाती पर कुचल रही थीं उस दौरान। क्योंकी तब राकेश खुद अपने बाजू से निकले खून को चूस रहा था खून के बहाव रोकने के लिए।

राकेश ने अदिति के मुंह को एक हाथ से दबाकर खोला और अपनी जीभ पर लगे खन को अदिति की जीभ पर लगाया और उसको वैसे ही किस किया। अदिति किस नहीं कर रही थी, मगर जिस तरह से राकेश ने उसको जकड़ा और दूसरे हाथ से उसके मुँह को खोला, मजबूरन उसको किस करनी पड़ी। और हाँ अदिति को खून की नमकीन लज्जत महसूस हुई अपनी जीभ पर। अदिति हॉफती जा रही थी और उसने देखा की उसकी नाइटी और कंधे पर खून लगा हुवा था राकेश के घायल बाजू से, किस और प्रतिरोध करते वक़्त। राकेश तब तक अदिति को बिस्तर की तरफ खींच रहा था। अदिति खुद खिंची जा रही थी उस पल को, जैसे राकेश ने उसपर कोई जादू टोना किया हो। राकेश को घायल करने के खयाल ने अदिति को कमजोर कर दिया।

अदिति ने एक नर्म पतली सी आवाज में कहा- “दुख रहा है? ज्यादा दर्द हो रहा है क्या? ठहरो मैं रूई और आंटिसेपटिक लाती हूँ, इंतेजार करो..."

अदिति तेजी से एक दराज तक गई और रूई और आंटिसेपटिक की एक शीशी लेकर आई। राकेश बेड पर बैठा हुआ था। और तब तक अदिति का गुस्सा ठंड हो गया था, वो फिर से नार्मल हो गई थी बिल्कुल। उस वक्त वो कितना खयाल रख रही थी राकेश का। उसके पास बैठी वो, रूई को आंटिसेपटिक से भिगोया और दाँत काटे हए हिसे पर धीरे-धीरे लगाया। राकेश को जलन महसूस हुई तो धीरे से चिल्लाया, तो जल्दी से अदिति उसपर फूंक मारने लगी।

राकेश उसको देख रहा था की किस तरह से केयरिंग थी वो उस वक्त। जब अदिति वो सब कर रही तो राकेश ने अपने दूसरे हाथ को अदिति के कंधे के ऊपर करके उसको अपने सीने से लगा लिया था, उसके सीने पर अपना सिर रखे हुए अदिति उसके घायल हाथ पर दवा लगा रही थी। उसकी चूचियां आधा राकेश की छाती पर दबी हुई थी और आधा राकेश के रिब्स पर। मतलब अदिति जिस दौरान राकेश के घायल हाथ का खयाल कर रही थी उस पल वो राकेश की बाहों में थी।

जब अदिति ने दवा लगा दिया तो रूई को उसी जगह दबाए रखा और खुद को राकेश की बाहों में ही रहने दिया नीचे जमीन पर ताकते हुए। तब राकेश ने उसके बाल को एक हल्के से फूंक से उड़ाया जो अदिति के चेहरे पर

थे। अदिति ने तब अपने होंठों को दाँतों में दबाया, फिर राकेश ने अपनी जीभ को अदिति के कान के नीचे फेरा और अदिति सिमट गई, काँप गई। उस पल लग रहा था जैसे अदिति एक जंगली जाअंवर थी जिसको राकेश ने अभी-अभी काबू में किया था। और अब राकेश उस जानवर का मास्टर बन गया था, लगता था जो उससे कहा जाएगा वही करेगी अब वो।

* * * * *
 
राकेश अदिति के कमरे में उसके बगल में ही रहा कुछ देर तक अदिति वहीं रही बिना हिले-डुले, और उसने राकेश का हाथ महसूस किया जो खुद के कंधों पर था पर अब पेट पर फेरते हुए धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ रहा था। इतना कुछ गुजरने के बाद अदिति के पास ना तो हिम्मत थी ना जोर की उसको कुछ कर सके इस बार। अदिति खुद को अपराधी महसूस कर रही थी की उसने राकेश के बाजू पर इतना बड़ा जख्म दे दिया। अपनी जंदगी में अदिति कभी भी इतना जंगली नहीं हुई थी किसी के भी साथ। वो खुद से बहुत हैरान थी और अपने आपको कोस रही थी, अफसोस कर रही थी, के उसने ऐसी हैवानी हरकत के लिए, राकेश का खून बहाकर। जब राकेश का हाथ अदिति की चूचियों तक पहुँचा, तो उसने अपने चेहरे पर लाली के साथ राकेश के चेहरे में देखा।

अदिति ने धीमी आवाज में कहा- “अब विशाल का आने का वक्त हो गया है...” उसकी दिल की धड़कन तेज हो रही थी और वो गहरी सांसें ले रही थी।

राकेश ने बिना जवाब दिए अपने हाथ को चलाता रहा और ऊपर तक, हालांकी अदिति ने अपने मुट्ठी में उसका हाथ पकड़ा हुआ था। जब राकेश ने अपने हाथ में अदिति की नरम चूची को महसूस किया, तो वो बहुत उत्तेजित हो गया और अदिति को किस करना चाहा उसकी चेहरे को, अपने मुँह के पास लाते हुए।

मगर अदिति ने अपना चेहरा एक तरफ करते हुए फिर से कहा- “अफफ्फ... विशाल आने वाला है अब कहा ना?"

राकेश का मुँह तब तक उसकी चूचियों तक आ गया था और उसने अपने होंठों को उसकी मुलायम चूचियों पर हल्के से दबाया ही था की अदिति काँपते हुए, उठ खड़ी हुई। उसकी दिल की धड़कन, और उसकी तेज सांसें

सुनाई दे रही थीं राकेश को। राकेश भी खड़ा हो गया अदिति के साथ और उसका जिश्म अदिति के जिश्म से चिपका हुआ था उस वक़्त। तो राकेश ने अदिति को बाहों में कसके जकड़ा और किस करने जा रहा था।

अदिति ने बड़बड़ाते हए धीमी आवाज में कहा- “नहीं, यह बिल्कल ठीक नहीं है..."

अदिति उस वक्त छोटी-छोटी सांसें जल्दी-जल्दी ले रही थी वो कहते हुए, तो उस वजह से उसकी चूचियां ऊपर नीचे हिल रही थीं जिसने राकेश को बहुत खुश किया क्योंकी उसकी नजरें उस वक्त वहीं पर टिकी थीं। मगर उस वक़्त राकेश अदिति के ठीक सामने नहीं बल्की बगल में खड़ा था, तो या तो अदिति को वो पीछे से पकड़ सकता था, या तो उसको अपनी तरफ मोड़ता। तो उसने सोचा की अदिति को पीछे से पकड़े ताकी वो अपने

खडा हये लण्ड को अदिति के गाण्ड पर दबाकर रगड सके। राकेश ने जल्दी से अपनी बाहों को पीछे से अदिति के पेट पर दबाते हुए उसकी पीठ को अपने छाती पर किया और अपने लण्ड को अदिति की गाण्ड पर दबाया

और रगड़ना शुरू किया धीरे-धीरे।

अदिति कुछ नहीं कर पाई और उसकी बाहों में जैसे कैद हो गई थी, और उसके लण्ड को अपने चूतड़ों के बीच ओ-बीच रगड़ते हुए महसूस किया। अब इतनी खूबसूरत जवान औरत को एक महीन नाइटी में बिना ब्रा के अपनी बाहों में लेकर उसके जिश्म को महसूस करते हए क्या राकेश ऐसे मौके को जाने दे सकता था भला? और ऊपर से जबकी अब अदिति बिल्कुल प्रतिरोध नहीं कर रही थी। जैसे अब ऊँट पहाड़ के नीचे आई हुई थी।

राकेश ने झुके हुए खड़े पोजीशन में ही अपने लण्ड को दबाते हुए धक्के देता गया उसकी गाण्ड के बीच-ओ-बीच, जैसे चोद रहा हो, उसकी नर्म गाण्ड को महसूस करते हुए। उधर अदिति भी थोड़ा सा झुक कर उसको जैसे पोजीशन दे दी अपनी रगड़ को जारी रखने के लिए। तब राकेश ने पीछे से अपने हाथ को अदिति के आगे लाते हुए उसकी नाइटी को उठाया, उसकी मुलायम जांघों को अपने हाथ में महसूस करते हुए। अदिति का जिश्म थरथराया और उसने मुड़कर राकेश को बिना एक्सप्रेशन के देखा। राकेश ने भी अदिति के चेहरे में देखते हुए उसकी दोनों जांघों को अपने हाथ में महसूस करते हए, अपने हाथों को ऊपर करता गया उसकी पैंटी तक हाथ फेरते हुए। इस दौरान दोनों एक दूसरे के चेहरे में देख रहे थे।

अदिति गहरी साँस लेती जा रही थी और उसकी क्लीवेज पहले से ज्यादा ऊपर-नीचे होती दिख रही थी। अदिति बिना हिले राकेश की आँखों में देखे जा रही थी और उसने राकेश का हाथ अपने पैंटी पर महसूस किया वैसे ही

झुके हुए पोजीशन में।

अदिति काँप उठी और एक सिसकी के साथ गहरी सांस लेकर धीमी आवाज में कहा- “नहीं, ये नहीं। विशाल आते ही होंगे अभी..."

अदिति उस घर में नई नवेली दुल्हन थी उस वक़्त, और विशाल के अलावा किसी मर्द ने उसको कभी नहीं छुवा था। राकेश पहला गैरमर्द था जो उसको उस तरह से उसके जिश्म के उन हिस्सों पर खद उसके बेडरूम में, अपने ससर के घर में उसको उस तरह से छ रहा था। सोचने की बात है की उस वक्त अदिति को कैसा महसूस हो रहा होगा। वो सेक्स एंजाय करती थी। हाँ मगर अपने पति के साथ, कभी किसी और के साथ यह सब नहीं किया था उसने। अदिति उस वक्त अपने जेठ से अपने जिश्म के उन हिस्सों को छूते हुए महसूस कर रही थी

और बिल्कुल खामोश थी। मगर उसके पशीने छूट रहे थे और कुछ धीमी आवाज में भुनभुना रही थी।

राकेश के होंठ तब तक उसके गाल पर फिरते हये महसूस किया अदिति ने, और नीचे राकेश अपने लण्ड को उसी तरह रगड़ता जा रहा था ऊपर अदिति के गर्दन के पीछे, और उसके कान के पीछे जीभ फेरते हए।

अदिति उसके लण्ड को पैंट के अंदर से अपनी गाण्ड के बीच में महसूस कर रही थी। मगर कुछ भी नहीं कर पा रही थी, वो राकेश की मजबूत बाहों में कैद थी। अदिति को पता था की उसका जेठ उसको चोदना चाहता है। उसको यह भी पता था की कुछ देर में क्या होने वाला है। मगर वो जैसे कन्फ्यू ज्ड थी की क्या करने दे राकेश

को और क्या करने से मना करे?

राकेश ने अदिति को किस करना चाहा। मगर तब अदिति का चेहरा दीवार की तरफ था। जिस पर राकेश ने उसको दबाया हुआ था। उसकी दोनों कलाई उस दीवार पर सपोर्ट की तरह लगी हुई थी और वो झुकी हुई थी राकेश के लण्ड को अपनी गाण्ड पर महस

राकेश के हाथ ने तब तक अपना काम कुछ इस तरह से कर दिया था नीचे की अदिति की पैंटी ठीक चूत पर एक तरफ खिसकी हुई थी, और राकेश की उंगलियां उसकी चूत की पंखुड़ियों को सहला रही थी। राकेश की उंगलियों को अपनी चूत पर महसूस करके अदिति को शर्म आई, क्योंकी वो गीली हो चुकी थी तब तक। उसको लज्जा महसूस हो रही थी यह सोचकर की अब राकेश को पता चल जाएगा की वो गीली हो चुकी है उसके छूने से। अदिति गहरी साँसें ले रही थी, जिससे उसकी चूचियां ऊपर-नीचे आती-जाती दिखाई दिए राकेश को अदिति के कंधों के ऊपर से।

अदिति ने राकेश की उंगलियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश में अपने हाथ को उसके हाथ पर रखा, तो राकेश ने गुर्राती हुई आवाज में कहा- “ओफफो अब क्या डार्लिंग... मेरी उंगलियों को वहाँ सहलाने दो, देखना तुमको भी कितना अच्छा महसूस होगा.”

मगर सिसकते हुए अदिति ने फिर कहा- “हम्म... मगर विशाल अभी आता होगा, आपको वापस जाना चाहिए अब, जाओ प्लीज अभी के लिए."

राकेश ने थोड़ा जबरदस्ती से अपने मजबूत हाथ से अदिति के हाथ को एक तरफ करते हुए, अपनी बीच वाली उंगली को अदिति की चूत पर रखा और गोल-गोल घुमाते हुए उस उंगली को हल्के से अंदर डाला।

अदिति ने एक सिसकती आवाज में अपी गर्दन को ऊपर किया, छत को देखते हुए और राकेश की उंगली को अपने भीगी चूत पर महसूस किया। काँपते हुए, थरथराते हुए, सिसकते हुए अदिति ने खुद से इनकार करना रोक दिया और राकेश की उंगलियों को जिस वक्त अपनी चूत की अंदर जाते हुए महसूस किया तो अदिति अपने पंजों के नोक पर खड़ी हो गई अपने जिश्म को ऐंठते हुए काँपती टाँगों के साथ।

राकेश के लार टपक पड़ी और फिर उसने अदिति का मुँह अपने मुँह में लेना चाहा, अपने उंगली को उसकी चूत के अंदर-बाहर करते हुए, और लण्ड को जोर-जोर से दबाते हुए उसकी गाण्ड पर रगड़ते हुए अदिति की गर्दन को एक हाथ से अपनी तरफ खींचा तो अदिति ने खुद अपना मुंह खोल दिया, अपने जेठ की जीभ को अपने मुँह में लेने के लिए। यह देखकर राकेश को बहत खुशी हई और खुशी से उसने अपनी जीभ अपने छोटे भाई की पत्नी के मुँह में डाला, जिसको अदिति ने अपने मुँह में लिया और चूसने लगी, उसके रस को अपने मुँह में लेते हुए। फिर राकेश धीरे-धीरे अदिति की पैंटी को नीचे करने लगा और अदिति ने कोई भी प्रतिरोध नहीं दिखाई।

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राकेश आगे बढ़ता रहा राकेश का दिल झूम उठा जब उसने देखा की अदिति की तरफ से कोई प्रतिरोध नहीं है, तो राकेश धीरे-धीरे अदिति की पैंटी उतारे जा रहा था उसकी जांघों पर अपना हाथ फेरते हुए। अब क्योंकी साथ-साथ वो अदिति को किस भी किए जा रहा था तो, वो अदिति की पैंटी ज्यादा नीचे नहीं कर पा रहा था। पूरी तरह से बाहर निकालने के लिए उसको इंतेजार करना था, किस खतम करना था, तब उसकी पैंटी को बाहर निकाल पाता।

मगर उसने बिल्कुल ही नहीं उम्मीद किया था की अदिति खुद अपनी टाँग ऊपर उठाएगी उसके काम को आसान करने के लिए।

हाँ अदिति ने अपने टाँगों को ऊपर किया ताकी राकेश को उसकी पैंटी को पूरा निकालने में आसानी हो। तब राकेश ने धीरे-धीरे उसकी पैंटी को नीचे किया किस को बरकरार रखते हुए, पैंटी घुटनों से होकर उसकी टखने से होते नीचे जमीन पर गई। किस बहुत ही कामुक थी और अब राकेश से रहा नहीं जा रहा था। उसका हाथ नीचे

अदिति की जांघों को टटोलते हुए उसकी चूत तक गया।

थोड़ा अपनी ताकत इश्तेमाल

झट से राकेश ने अब अदिति को अपनी तरफ मोड़ा तो अब अदिति और राकेश आमने सामने हो गये, अदिति की पीठ तब दीवार की तरफ हुई। अदिति को राकेश के चेहरे में देखने से लज्जा आ रही थी, तो उसने अपनी आँखें मूंद लिया और सिर ऊपर उठाकर छत की तरफ कर दिया। अदिति को पता था की अब किया होने वाला है, बल्की वो उम्मीद कर रही थी या चाहती थी की वो अब हो।

राकेश अदिति के सामने अपने घुटनों पर हो गया और अदिति की नाइटी को ऊपर उठाते हुए उसकी मुलायम जांघों को चाटते हए ऊपर अदिति की गीली चूत तक गया। अदिति की साँसें तेज हो रही थी, उसकी छाती के अंदर उसका दिल जैसे एक शोर मचा रहा था जो राकेश को भी सुनाई दे रहा था। और जैसे ही राकेश का मुँह ने उसकी चूत को छुआ तो अदिति ने कसके राकेश के सिर के बालों को अपनी मुट्ठी में जोर से जकड़ा, और

अदिति की साँसें सिसकती हुई आवाज में निकली।

राकेश ने अपनी जीभ अदिति की चूत की पंखुड़ियों के बीच फेरते हुए दबी हुए आवाज में कहा- “उम्म्... कितना तड़पा हूँ मैं इसके लिए, कितनी बार इसको मिस किया मैंने, आज मेरी रात है जानेमन हम्म्म्म ..” और राकेश ने

बिना वक्त गँवाए अदिति की उस नर्म, गीली गोश्त के टुकड़े को जी भर के चाटा और चूसा, और अपनी आधे जीभ को अदिति के चूत के अंदर ह्सा।

जिससे अदिति की सिसकती आवाज ने कमरे की खामोशी को तोड़ा और अदिति राकेश के बालों को जैसे उखाड़ रही थी, तड़पते और कराहते हुए। अदिति की आवाज कुछ ऐसी सुनाई दे रही थी सिसकियों के साथ- “हाँ...

ओह्ह... हाँ हम्म... इसस्स्स... उफफ्फ.."

राकेश को लगा जैसे उसकी जीभ पर नमकीन लज्जत की दही अदिति की चूत की फैक्टरी निकल रही थी और वो जी भर के खा रहा था। अपने दोनों हाथों को अदिति के पेट पर दबाए हए उसकी नाभि पर गोल-गोल फेरते हुए, राकेश ने कुछ देर उसके नीचे का रस निचोड़ा, अदिति के चेहरे में उसकी तड़प और सिसकियों को देखते

और मजा लेते हए। उसने अदिति का सिर ऊपर की तरफ उठाते हुए देखा, बंद आँखें और तड़प से जिश्म को काँपते हुए पाया अपने भाई की जवान पत्नी का। फिर राकेश ने अपने हाथ को और ज्यादा ऊपर करते हुए अदिति की नाइटी को बाहर निकाल फेंका। अब अदिति बिल्कुल नंगी हो गई अपने जेठ के सामने खुद अपने बेडरूम में।

राकेश ने अदिति को फिर अपनी गोद में एक बच्चे की तरह उठाया और बेड पर लेटा दिया, और खुद अपने कपड़े उतारने लगा। अदिति बेड पर लेटी हुई राकेश को कपड़े निकालते हुए देख रही थी और फुसफुसाते हुए कहा- “क्या होगा अगर विशाल अचानक आ गया तो?"

राकेश ने अपना अंडरवेर निकालते हुए कहा- “उसकी गाड़ी जब गैरेज में दाखिल होगी तो हमको सुनाई देगी, और मुझको पूरा टाइम मिलेगा यहाँ से निकलने के लिये, जब तक वो यहाँ नहीं आ जाता। मगर फिकर मत करो, वो अभी नहीं आने वाला, मैं इतना तो बदडकिश्मत नहीं हो सकता की हर बार तुमको मिस कर जाऊँ मेरी जान। आज मैं तुमको पाकर रहूँगा। आज इस लण्ड को तुम्हारे अंदर घुसाऊँगा, अंदर-बाहर करूँगा और तुमको बहुत मजा आएगा मुझे पूरा यकीन है, और तुम कल और ज्यादा माँगोगी मेरी प्यारी छोटी वाली भाभी..”

अदिति हाँफती जा रही थी और उसकी चूचियां ऊपर-नीचे उठक-बैठक कर रही थीं। जिसको देखकर राकेश बहुत उत्तेजित हो गया, तो राकेश बेड पर चढ़ा और अदिति की कांख के नीचे से पकड़कर उसको उठाकर थोड़ा और बेड के ऊपर किया और अदिति की दोनों टाँगों को फैला दिया। अदिति अब उसको सब करने दे रही थी।

अदिति ने अपने आपको उसके हवाले कर दिया था उस वक्त। समर्पण कर दिया था अपना जिश्म अपने जेठ

वक्त। समर्पण कर दिया था अपना जिश्म अपने जेठ

को।

मगर अदिति बोली- “मैं आज तक कभी भी किसी गैर मर्द के साथ नहीं गई, किसी गैर मर्द ने मुझको कभी नंगी नहीं देखा विशाल के अलावा। आप पहले आदमी हो और मुझे बहुत ही अजीब महसूस हो रहा है। प्लीज... मुझसे नर्मी से पेश आना..."

अदिति की जांघों के बीच जाते हुए राकेश मुश्कुराया उसकी बातों को सुनकर, और कहा- “फिकर मत करो मेरी जान। बेशक मैं तुम जैसी नई नवेली दुल्हन के साथ नर्मी से पेश आऊँगा, तुम तो सबसे प्यारी बहू हो जो अभी कुछ हफ्ते पहले शादी करके इस घर में आई हो, तो यह तो बस एक नई सुहागरात की तरह है तुम्हारे लिए। मैं बिल्कुल ही नर्मी बरतूंगा। बिल्कुल ही प्यार से करूँगा। आओ जानेमन मुझे अब अपने अंदर लो। घुसाने दो अंदर,

अपने जेठ का लण्ड अपने अंदर लो और देखो एक ज्यादा बड़ा लण्ड अंदर लेने से तुमको कैसा महसूस होता है। क्या तुमको पता है की कितना मजा है घर के एक दूसरे लण्ड को अपने अंदर लेने में? मुझको यकीन है की तुमको बेहद मजा आएगा..."

इतना कहकर राकेश अपने छोटे भाई की पत्नी के ऊपर चढ़ गया और एक हाथ से अपने लण्ड को उसकी चूत में ठूसा। अदिति उसको धैर्यपूर्वक देख रही थी, जब वो ये सब कर रहा था, और जैसे ही लण्ड उसके अंदर दाखिल हुआ, अदिति कसमासाई और एक गहरी साँस लेते हुए बेड पर अपने जिश्म को टेढ़ा करते हुवे, सिसकती

आवाज में एक लंबी वाली “इसस्ससश्” किया।

राकेश को लगा की वो जन्नत में आ गया, जिस वक्त उसका लण्ड अपनी छोटी भाभी के अंदर घुसा तो, उस वक़्त वो अदिति के चेहरे में देखते हुए पेल रहा था, और उसकी चूचियों को निहार रहा था जो कड़क थी और छत की तरफ देख रही थीं। राकेश ने धीरे-धीरे अपने लण्ड को अंदर-बाहर किया। जबकी अदिति सिसकती जा रही थी अपने बदन को ऐंठते हए। अदिति के गले से प्यारी सी पतली सी आवाज निकल रही थी तड़पते हुए।

राकेश ने उसको चोदते हुए कहा- “सस्शससश... शोर मत करो। तुम्हारी आवाज वहाँ पहुँच सकती है, डैड और लीना वहाँ हैं, भूल गई क्या?”

अदिति बेकाबू हो रही थी अपने जेठ का लण्ड अपने अंदर लेते हुए। वो लीना वाला दृश्य जब वो राकेश को चूस रही थी, और अब लीना का अपने पिता के साथ वाला दृश्य अदिति की आँखों के सामने मंडरा रहा था। राकेश का लण्ड अब खुद अपने अंदर आते-जाते हुए महसूस करते हुए अदिति काँप उठी थी। अदिति को खुद यकीन नहीं आ रहा था की वो राकेश के धक्कों को पसंद करने लगी थी, और एंजाय भी कर रही थी।

अदिति एक नागिन की तरह बेड पर रेंगते हुए अपनी बाहों को राकेश के कंधे के ऊपर करते हुये उसके होंठों को तलाशने लगी, अपना मुँह खोले हुए। राकेश समझ गया और उसकी चूत में धक्का देते हुए अदिति की जीभ को अपने मुँह में ले लिया और एक दूसरे की जीभ को चूसते हुए राकेश ने अपनी कमर ज्यादा जोरों से हिलाते हुए धक्कों को और बढ़ाया।

अदिति ने अपनी दोनों टाँगों को राकेश की गाण्ड पर क्रास करते हये अपने अंदर उसके लण्ड के तेज धक्कों को महसूस करती गई, और फिर अदिति, राकेश की गर्दन और कंधे पर अपने दाँतों से काटती गई उन हिस्सों को चूसते हुए, जिससे लाल धब्बे बन गये राकेश के जिश्म पर। फिर अदिति झड़ने लगी, उसकी आर्गेज्म होने लगी

और सिसकती आवाज में कराहते हुए अदिति की तड़पती आवाज निकली- “आअहह... ओहह... अहह... मुझे और चोदो इसस्स्स्स ... और करो और और आहह... इसस्स."

राकेश ने रफ़्तार बढ़ाते हुए अदिति के चेहरे में देखते और हाँफते हुए कहा- “इस्स्सह... आवाज नीचे करो, वह लोग सुन लेंगे..."

अपने कमरे में राकेश के पिता ने अदिति की आवाज सुनी और लीना से पूछा- “क्या विशाल वापस आ गया?"

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कड़ी_81 राकेश के पिता जानना चाहते थे

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लीना ने भी अदिति की तड़पती आवाज सुनी और जानना चाही, मगर अपने पापा से कहा- “मगर मैंने विशाल की गाड़ी को अंदर आते नहीं सुना पापा..” इन दोनों ने अभी-अभी चुदाई खतम किया थे और लीना अपनी कपड़े पहन रही थी, और बाप ने एक शार्ट और टी-शर्ट पहना हुआ था।

राकेश का पिता कमरे से बाहर निकला चेक करने के लिए। उसने देखने के बाद वापस आकर लीना से कहा “विशाल की कार गैरेज में नहीं है।.."

लीना ने कहा- “हो सकता है भाभी ने कोई बड़ा सपना देखा हो। अच्छा अब मैं वापस अपने कमरे में जा रही हूँ पापा..” और वो चली गई।

उसके पापा को पूरा यकीन था की उसने अदिति को सिसकारियां लेते हुए सुना था। बिल्कुल ठीक, जैसे चुदाई के वक़्त एक औरत लेती है मजा आने पर। तो उसने तुरंत राकेश को सोचा और उसको उसके कमरे में देखने गया तो देखा की वो वहाँ नहीं है। तब बाप ने सोचा- “क्या राकेश अदिति के कमरे में है? क्या वो अदिति, अपने छोटी भाई की बीवी को चोदने भी लगा इतनी जल्दी, अभी-अभी तो उसकी शादी हुई है, वो तो नई नवेली दुल्हन है इस घर की। इतनी जल्दी राकेश ने उसको पटा लिया और चोदने भी लगा? अदिति इतनी शुसील, घरेलू कमसिन दिखती है तो क्या वो इतने ही दिनों में मान गई? पट गई राकेश से? मुझे पता लगाना है की राकेश कहाँ है? और क्यों मैंने अदिति को जैसे आर्गेज्म में सुना?”

वो धीरे से चलकर अदिति के कमरे तक गया और उसके रूम के दरवाजे के पास अपना कान लगाकर सुनने लगा।

तब तक अदिति के कमरे के अंदर राकेश झड़ रहा था तड़पते हुए, और उसकी आवाज तड़प में कुछ ऐसे सुनाई दी बाप को- “आघघ हुघघ...” राकेश हाँफ रहा था।

जबकी अदिति कराहती जा रही थी सिसकते हुए, मगर धीमी आवाज में ऐसे- “हम्म्म... इस्स्स... आआह्ह.."

मगर अदिति की हॉफते हुए साँसें उसके ससुर को सुनाई दी, जिसने अपने लण्ड को अपने शार्ट में हाथ से पकड़ा। अब उसको पक्का यकीन हो गया की राकेश अदिति को चोद रहा था अंदर।

उसने खुद से पूछा- “कमाल है, कब और कैसे राकेश ने अदिति को फँसा लिया भला? अदिति तो इतनी प्यारी, चुपचाप, खामोश, मीठी टाइप की लड़की है, कोई भी कभी सोच भी नहीं सकता की इतनी आसानी से वो किसी और मर्द के साथ चुदवा सकती है तो राकेश ने यह कैसे क्या? मगर अब तो मुझे भी इसे पाना होगा, अगर ये राकेश को दे रही है तब तो मेरे लिए ज्यादा आसान होगा उसको चोदना। साला इतने दिनों से मैं अदिति की मुश्कुराहट, उसकी मीठी आवाज, उसकी गोल-गोल चूचियों से और उसकी अदाओं से, उसकी चाल से, उसकी सफेद क्लीवेज से जब भी झाँकने का मौका मिला प्रभावित हुआ हूँ। साला लीना को चोदते वक्त कई बार मैंने

अदिति को खयालों में चोदा है। अब तो सच में कर सकता हूँ इसके साथ। वाह... किया किश्मत है, बेटी भी और बहू भी हाहाहाहा। मगर कैसे शुरुवात करूँ हाँ?”

बूढ़े ने राकेश को अपना पैंट पहनते हुए सुना अंदर और भुनभुनाते हुए अदिति से कहते हुए सुना- “वाउ... तुम कमाल की हो जानेमन, बहुत ही मजा आया मुझे, अब तो हर रोज तुमको लेना पड़ेगा हाँ... अब हर रोज ऐश करेंगे, ओके बेबी?"

बाप ने बाहर से अपने कान को और ज्यादा दरवाजे से सटाकर सुनने की कोशिश की कि उसकी बहू का क्या जवाब होगा। और उसने अदिति की चंचल चुलबुली आवाज में यह सुना उसको कहते हुए।

अदिति- “नही, हर रोज नहीं, हर रोज मौका नहीं मिलेगा, और मैं नहीं चाहती की हम दोनों को कोई रंगे हाथ पकड़े, जैसे मैंने तुमको लीना के साथ देखा तुम्हारे लिंग को चूसते हुए..”

राकेश के बाप को झटका लगा यह सुनकर की अदिति ने राकेश को लीना के साथ देख लिया चुसवाते हए। तो उसने सोचा की- “तो ये बात है, इसीलिए राकेश ने अदिति को पाया, क्योंकी अदिति ने बहन को भाई को चूसते हए पकड़ा। तभी से बात चली होगी। इस तरह से राकेश ने इसको भी फुसलाया होगा। मुझे सब सही-सही पता

लगाना होगा अब..." और वो वहाँ से वापस अपने कमरे में गया, जहाँ से वो राकेश को अदिति के कमरे से बाहर निकलते हुए देख सके।

उधर उस तरफ अदिति के कमरे में राकेश अपने कपड़े पहनकर अदिति के पास बेड पर गया, जहाँ अदिति बिल्कुल नंगी लेटी हुई राकेश को कपड़े पहनते देख रही थी।

राकेश- “बाइ जानेमन, अब जाना होगा मुझे, वरना विशाल टपक पड़ा तो हमारा यह खेल यहीं हमेशा के लिए खतम हो जाएगा..” और राकेश को बहुत हैरानी हुई जब अदिति ने उसके कंधों पर अपनी बाहों को रखकर उसको कामुकता से किस किया, उसके जीभ का रस निचोड़ते हुए। तो राकेश समझ गया की अदिति को सब करके बहुत मजा आया, और आइन्दा अब उसको दोबारा चोद में कोई दिक्कत नहीं होगी।

बाप अपने कमरे के एक कोने से राकेश के निकलने का इंतेजार कर रहा था, और हाँ उसने राकेश को अदिति के कमरे से बाहर निकलते देखा भी। राकेश बहुत ही खुश दिख रहा था। बाप ने अपने लण्ड को अपनी मुट्ठी में जोर से पकड़ा जो हलचल मचा रहा था, उसका मन किया की वो तुरंत अदिति के कमरे में जाए। उसी वक्त उसको अदिति को चोदने का मन कर रहा था। हालांकी अभी-अभी उसने लीना को चोदा था, पर अदिति में और बात थी तो लण्ड बिल्कल तैयार था। मगर उसको पता था की विशाल के आने का वक्त करीब था तो बढा अपने बेड पर लेटकर अदिति को खयालों में लिए सोचता रहा।

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विशाल आया तो सीधे अपने कमरे में गया, जहाँ अदिति उसका इंतेजार कर रही थी, मगर वो कुसूरवार महसूस कर रही थी और साथ-साथ उसको एक बहुत खुशी भी महसूस होने लगी थी, जो हुआ उसके बारे में सोचकर। अदिति ने विशाल से बिल्कुल नार्मल बिहेव किया, जैसे की कुछ हुआ ही नहीं, मगर फिर भी अपराधी महसूस कर रही थी विशाल की आँखों में देखते हुए सोचकर की अभी-अभी उसने उसके बड़े भाई के साथ उसको धोखा दिया है।

विशाल उस रात को अदिति से हमबिस्तर नहीं हुआ, क्योंकी वो बहुत थका हुवा था। अदिति ने सोच रखा था की वो विशाल को करने नहीं देगी। क्योंकी वो नहीं चाहती थी की उसको अपने बड़े भाई का खाया हुआ जूठन दे। तो अदिति को चैन आया जब विशाल ने कहा- “मैं डाइरेक्ट सोने जा रहा हूं, एक क्विक शावर के बाद..”

अगली सुबह को, क्योंकी अदिति का ससुर सबसे पहले जागा था, तो वो टेरेस पर एक सिगरेट पी रहा था जब अदिति किचेन में गई। बूढ़े ने अदिति को कारिडोर से किचेन तक जाते हुए देखा और सोचा- “तुमने कल रात को दो लण्ड खाए, वो भी दो भाइयों के, अब बाप वाला लण्ड भी तुमको को चखना चाहिए मेरी जान, और क्या पता किसी रात को हम तीनों का एक के बाद एक लोगी?" ।

फिर राकेश का बाप किचेन की तरफ जाने लगा जहाँ अदिति ने ब्रश करने के बाद चाय सर्व करने वाली ही थी।

और हर रोज पहला आदमी जिसको अदिति चाय सर्व करती थी वो ससुर को ही था, और वो एक कप लेकर उसी की तरफ आ रही थी जब ससुर किचेन की तरफ बढ़ रहे थे। उसने अदिति के हाथ से चाय लिया और बैठकर एक सिप लेकर अपनी बहू के जिश्म को निहारने लगा।

उस वक़्त अदिति सिंक में कुछ बर्तनों को धो रही थी। ससुर उठा और अदिति के करीब जाकर सिंक में कप रखते वक़्त अपने नीचे के हिस्से को अदिति के पिछवाड़े पर हल्के से दबाया। अदिति काँप उठी और एक तरफ होते हए उनके चेहरे में डरी हई नजरों से देखा।

ससुर के चेहरे पर एक शैतानी मुश्कुराहट थी और उसने अदिति के कान में धीरे से कहा- “कल रात को तुमने अपने जेठ के साथ खूब मजा किया ना?” और यह कहकर अपने लण्ड को ज्यादा जोर से अदिति के नीचे वाले हिस्से पर और दबाया।

अदिति का चेहरा बिल्कुल लाल हो गया, वो काँप उठी और उसके पास कोई जवाब ही नहीं था उस वक्त।

वैसे तो इस घर में आने के बाद पहले ही दिन से अपने ससुर के साथ अदिति के बहुत अच्छे तालुकात रहे हैं। मगर जब अदिति ने उनको लीना के साथ देखा तब एक घिन और नफरत सी होने लगी थी उसको उनसे। मगर कल रात को राकेश के साथ उस अजीब खुशी को महसूस करने के बाद ससुर के लिए जो नफरत थी वो गायब हो गई थी। क्योंकी राकेश से सेक्स करने के बाद अदिति समझ गई थी की किसी और से सेक्स करने का क्या मजा होता है। लेकिन इस वक्त क्योंकी अदिति ने बिल्कल ही नहीं उम्मीद किया था की ससर उसके साथ वैसा बिहेव करेगा तो उसको इस वक्त बहुत अनकंफर्टेबल महसूस कर रही थी उनसे।

अदिति हर सुबह की तरह अपनी नाइटी में थी, मगर ऊपर गाउन था। ससुर अपने हथियार को अदिति उस मुलायम कपड़े पर फिसलते हुए महसूस कर रही थी। अदिति की समझ में नहीं आ रहा था की उसके ससुर को कल रात के बारे में कैसे पता चला?

अदिति ने मन में सोचा- “क्या राकेश ने उनको कल रात को जाकर सब बता दिया? क्या दोनों बाप बेटे ने मिलकर प्लान किया हुआ था? दोनों लीना की लेते हैं तो क्या दोनों ने मिलकर मुझको पाने की साजिश की हैं?"

इधर बूढ़े ने अदिति को बाहों में भर लिया था, जबकी अदिति उनके चुंगल से निकलने की कोशिश कर रही थी, ससुर ने अदिति के चेहरे को चूमना चाहा, पर क्योंकी अदिति निकलने के लिए मचल रही थी उनकी बाहों से तो ससुर के होंठ उसके गर्दन पर रगड़े।

अदिति ने दबी हुए आवाज में कहा- “यह आप क्या कर रहे हो पिताजी? छोड़िये मुझे.."

ससुर ने अदिति को फिर भी थामे हुए कहा- “तुमको प्यार कर रहा हूँ बेबी, चलो कम से कम एक बड़ा वाला किस तो करने दो, एक सेक्सी वाला गरमा गरम..."

अदिति उनके मोटा लण्ड को अपनी जांघों पर महसूस कर रही थी और कहा- “सब अभी कमरे से बाहर आने ही वाले हैं छोड़िये मुझे आप..”

फिर भी अदिति को किस करने को ट्राई करते हुए ससुर ने कहा- “चलो ठीक है छोड़ता हूँ, मगर एक 10 सेकेंड

के लिए मुझको एक अच्छी वाली किस करो तो छोड़ता हूँ। मगर उन लोगों के जाने के बाद बाकी के घंटों के लिये तुम मेरी हुई ओके?"

अदिति तब भी उनकी बाहों से निकालने की कोशिश में कहा- “अगर वह लोग चले भी गये तो लीना यहीं रहेगी, क्या बोल रहे हो आप?"

बूढ़े ने अपने लण्ड को उसकी जांघों पर और ज्यादा दबाते हए कहा- “लीना कोई 11:00 बजे तक सोकर उठती है तो हमारे पास 4 घंटे से ज्यादा होगा साथ रहने के लिए, अकेले सिर्फ मैं और तुम। ओके चलो अपने लरजते होंठों का रस चखने दो मुझे अब.”

अदिति ने सोचा की अगर वो ना मानी तो बूढा उसको बिल्कुल छोड़ने वाला नहीं है फिर भी उसने पूछा- “मुझे बताइए पिताजी की आपको मेरे और राकेश के बारे में कैसे पता चला?"

ससुर ने जवाब दिया- “बाइ चान्स बेबी, मैं बस वाशरूम जा रहा था तो मैंने तुम्हारी सिसकती और थर्राई हुई आवाज सुनी, जब मेरे बड़े बेटे का लण्ड तेरे अंदर आना-जाना कर रहा था, शायद उस वक्त तुम अपनी आर्गेज्म को पहुँच रही थी। मुझको ट्राई करके देखो दिलवर, बहुत बेहतर आर्गेज्म मिलेगा मुझसे, पूरा यकीन है मुझे। एक चान्स दो और देखो। अब तो समझ गई हो की अपने पति के अलावा दूसरे लण्ड का मजा क्या होता है तो एक

और ट्राई करके, देखो बहुत ज्यादा एंजाय करोगी..."

अदिति ने बहुत हिम्मत जुटाकर उनसे यह कहा- “ठीक है, जैसे आप अपनी बेटी लीना के साथ करते हो?"

ससुर को बिल्कुल भी झटका नहीं लगा और कहा- “मैं सोच रहा था की तुमको जरूर सब पता चल सबके बारे में, तो हाँ चलो जैसे अपनी बेटी के साथ करता हूँ तो बहू के साथ भी क्यों नहीं मेरी जान?" '

फिर ससुर ने अदिति का मुँह अपने मुँह में लिया और एक भूखे जानवर की तरह उसको किस किया, काफी जंगली किस था। ससुर ने 10 सेकेंड कहा था मगर तकरीबन 4 मिनट तक अदिति का मुँह उसके मुँह में रहा

और अदिति की बाहें खुद ससुर के कंधों पर अपने आप चली गई और अदिति ने अपनी जीभ को ससुर के मुँह में पिघलने दिया।

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कड़ी_82 अदिति के ससुर ने चालू रखा

विशाल ने इतना सुनने के बाद हमेशा की तरह अदिति से कहा- “मैं अब छत पर एक सिगरेट पीने जा रहा हूँ.."

अब छत पर आने के बाद क्या विशाल यह सब सुनकर परेशानी महसूस किया था? नहीं बिल्कुल नहीं। क्योंकी वो तो हमेशा से यही चाहता था ना। वो हमेशा से अपनी पत्नी को दूसरे मर्दो के साथ ही तो देखना पसंद करता था, कैसे छप-छुपकर आनंद को अदिति के साथ देखता था? किस तरह से अदिति को तैयार करता था जब आनंद मिलने को आता था? सब याद होगा आप सबको उम्मीद है। उसका लण्ड जमकर खड़ा हुआ था पैंट के अंदर जब अदिति ने बताया की कैसे उससे इसके बड़े भाई ने सेक्स किया पहली बार।

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और अब यह जानकार की उसका बाप भी उसको चोदना चाहता है, यह सब विशाल को बहुत उत्तेजित कर रहा था। और उसको जल्दी से सिगरेट पीकर अंदर जाकर सुनना जारी रखना था की उसके पिता ने कैसे अदिति को चोदा। हालांकी वो इन सबको अदिति के साथ देख चुका था। अब वो चाहता था की अदिति उसको सब शुरू से डिटेल में बताए, और वही अदिति कर रही थी।

विशाल ने ये भी सोचा की उन दिनों वो आफिस मैं बैठे सही सोच रहा था की कहीं उसकी नई नवे पत्नी कहीं घर में राकेश और उसके पिता के साथ मजा तो नहीं कर रही है। उसके मन में ऐसे ही खयालात आते थे उन दिनों, जब अदिति घर में उन लोगों के साथ होती थी अपने घर में जाने से पहले। उसका कितना मन था उन दिनों अदिति को उन लोगों के साथ देखने का। यही एक अफसोस हो रहा था विशाल को की उस वक्त वो कुछ भी नहीं देख पाया। मगर उसको बहुत खुशी थी की अदिति उसको अब सब कुछ डिटेल में बता रही थी, और अब वो दोबारा उन दिनों को अदिति के साथ जी रहा था जैसे।

सिगरेट पीने के बाद वो जल्दी से वापस गया अंदर अदिति के पास, जो उसके चेहरे में देखने की कोशिश कर रही थी की उसको तकलीफ तो नहीं हुई यह सब सुनकर? अदिति सोच रही थी की विशाल को कैसा महसूस हो रहा होगा इन सब चीजों के बारे में सुनकर? वो ये भी सोच रही थी की क्या उसको जारी रखना चाहिए बताना या अब झूठ बोलकर यहीं रोक दे की बस इतना ही हुआ था?

मगर विशाल तो उसके पास उत्सुकता के साथ बैठा और बड़ी खुशी से कहा- “ओके अब जारी रखो, तब क्या हुआ? पापा ने क्या किया? कैसे लिया उसने तुमको पहली बार? तो मैं और राकेश घर से निकल गये और तुम पापा के साथ अकेली थी, और लीना सो रही थी, तो क्या किया उसने? तुम तैयार थी या परेशानी महसूस कर रही थी? सब डिटेल में बताओ अब पहले की तरह..."

और जो वहाँ हुआ था तब वो यह था

तकरीबन 9:00 बजे दोनों विशाल और राकेश घर से निकले अपने काम पर जाने को। राकेश ने कई बार अदिति को छूने की कोशिश की, कभी उसकी गाण्ड पर अपना हाथ फेरा, तो कभी उसकी बाहों पर या कमर पर। और उसके पिता ने नजरें चुराते हुए सब देखा। सिर्फ विशाल को कुछ नहीं पता था। हर बार जब राकेश अदिति को छू रहा था तो अदिति मुड़कर अपने ससुर के चेहरे में देखती थी और वो एक शैतानी मुश्कुराहट से उसको देख रहे थे। ये सब तब हुवा था जब अदिति दोनों को चाय और टोस्ट सर्व कर रही थी घर से निकलने से पहले।

निकलने से पहले विशाल ने अदिति को कमर से पकड़ते हुए धीरे से उनके कानों में कहा- “कल रात को मैं थका हुआ था तो हमने कुछ नहीं किया। मगर आज रात को डबल करेगे ओके डार्लिंग?"

अदिति ने स्माइल करते हुए विशाल के सीने पर मारा, अपने ससुर और राकेश को देखते हुए जो कार के अंदर बैठ चुके थे उस वक्त। और जब कार गेट के बाहर निकल गइ तो अदिति ने अपने ससुर के चेहरे में देखा और वो चलकर अदिति के तरफ ही आ रहे थे। वहीं चौखट पर ही बूढ़े ने अदिति को बाहों में जकड़ा और दोनों एक दूसरे को दो आशिक की तरह पुरजोशी से किस करने लगे। अदिति ने ढील दे रखी थी, बिल्कुल समर्पण कर दिया खुद को। क्योंकी उसको पता था भागना बेकार होगा क्योंकी ससुर को सब पता चल गया था।

और फिर जब से राकेश से सेक्स किया अदिति ने, उसको पता चला की कितनी अजीब सी कशिश और मजा है अपने पति के अलावा किसी और के साथ करने में? तो सोचा ससुर के साथ क्यों नहीं? वो भी तो कोई और ही हैं। वही प्यारी सी, मासूम, इनोसेंट पत्नी जिसने कभी सोचा भी नहीं था की कोई गैर मर्द उसको कभी छुयेगा भी, अचानक अब घर के दूसरे मर्दो के साथ सेक्स का तजुर्बा करने लगी और पसंद भी करने लगी है।

अदिति का ससुर उसको किस करते हए अपने हाथों से उसकी गाण्ड टटोलते हए, मसलते हए किस को बरकरार रखते हुए अदिति की मुलायम नाइटी को सिल्की ड्रेस को छूते हुए उसकी कंधे और कांख को सूंघा। अदिति की जिश्म की खुशबू बहुत पसंद आ रही थी उसको। अदिति की अपनी जिंदगी में यह पहली बार था जब वो किसी अधेड़ आदमी से किस कर रही थी, और उसको अच्छा और मजेदार लग रहा था। बूढे का तजुर्बेकार मुँह अपनी बहू के मुँह के अंदर घुमा कर रहा था।

अदिति का पूरा बदन ससुर के जिश्म से चिपके हुये उसने महसूस किया की ससुर के हाथ उसकी चूचियों को मसलने लगे, और उसकी नाइटी के ऊपर वाले गाउन के निकालना चाहते थे, तो अदिति ने ढील दिया उसको उतारने के लिये, किस को बरकरार रखते हुए ही। फिर तुरंत वो गाउन नीचे जमीन पर आ गया और तब अदिति अपनी पतली, महीन सी नाइटी में थी, जिसके कंधे पर पतली सी स्ट्रैप थी और ब्रा तो नहीं पहनी थी उसने, तो उसकी चूचियां ससुर की छाती पर दबी हुई थीं। ऊपर से वो उसे मसलने की कोशिश में लगा हुआ था किस के दौरान। बूढ़ा अदिति को उस पतली सी नाइटी में अपनी बाहों में पाकर बहुत उत्तेजित हुवा, वो इतनी

सेक्सी लग रही थी की उसको बस खा जाने को मन कर रहा था।
 
अदिति किस करते हुए ही बड़बड़ाई- “हूँ.. मुझे गाउन को उठाना चाहिए नहीं तो लीना को दिख जाएगा अगर वो उठ गई तो, मुझको उठाकर अंदर रूम में ले चलिए.."

किस को रोका गया और अदिति अपने ससुर के सामने चलते हुए अपने रूम की तरफ बढ़ने लगी जो उसके पीछे गाउन को हाथ में लिए फालो कर रहा था। अदिति कुछ इस तरह से गाण्ड मटकाते हुए चली जा रही थी

जैसे वो ससुर को और बहकाने लगी थी। उसकी महीन नाइटी के अंदर उसकी सफेद पैंटी साफ दिख रही थी और वो चल रही थी तो गाण्ड के साथ पैंटी भी जैसे चल रही थी। पीछे से देर

ने लण्ड को संभाल रहे थे। लग रहा था अब अदिति खेल को लीड कर रही थी, ससुर नहीं। अदिति लीडर थी और ससुर फालो किए जा रहा था। दृश्य कुछ ऐसा ही लग रहा था उस वक्त।

अपने बेडरूम में दाखिल होते ही अदिति को लगा जैसे कुछ लम्हा पहले ही उसका जेठ उसको उसी बेड पर चोद रहा था, जहाँ जहाँ अब ससुर आया है उसी बिस्तर पर चोदने उसे। अदिति उस अजीब से मजे को याद कर रही थी, जो उसे राकेश से चुदाई के वक्त मिला था और सोच रही थी की एक बार फिर वही मजा हासिल होगा उसको, राकेश के पिता के साथ। और उस खास मजे को याद करते हुए अदिति बेड पर बैठी थी अपने ससुर की आँखों में देखते हुए विशाल को बिल्कुल भुलाकर ऐसे वक्त में। अब अदिति को बहुत मन था एक और लण्ड खाने का, जैसे की राकेश ने एक बढ़िया शुरुवात कर दिया था उसको चोदकर। अब वो और ज्यादा चाहने लगी थी। जैसे उसके जेठ ने उसके लिए एक नया रास्ता दिखा दिया था, उसको मजे वाला।

बिस्तर पर बैठे हुए ससुर की आँखों में देखते हुये अदिति ने सोचा- "इसकी अपनी बेटी इसका लण्ड खाती है, उसको बहुत मजा आता होगा और यह जरूर बहुत अच्छा होगा बेड पर, तो क्यों मैं नहीं चलूँ इसका लण्ड अब?

और अभी कुछ घंटों पहले इसके बड़े बेटे ने मुझे चोदा, तो बड़े भाई की जूठन मैंने विशाल को नहीं देना चाहा। पर अब उसके बाप को उसका जूठन तो दे ही सकती हूँ, इसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं है..” अपनी जीभ को होंठों पर फेरते हुए अदिति अपने ससुर को देखे जा रही थी जैसे उसको बुलावा दे रही थी उसके चेहरे में देखते हुए,

और इंतेजार कर रही थी की कब ससुर उसको अपने आगोश में लें।

अदिति की जीभ को अपने होंठों पर फेरते हुए देखकर बूढ़े ने उसको एक आमंत्रण समझा, और अपने घुटनों पर आ गया बेड के सामने, और अदिति के टाँगों के बीच अपने सिर को कर दिया। अदिति ने अपने ससुर का सिर अपनी जांघों के बीच महसूस करके, अपनी जांघों को और भी फैला दिया ससुर की आसानी के लिए। वो थी हमारी नई नवेली दुल्हन जो कुछ हफ्ते पहले इस घर में बियाह कर लाई गई थी, अपने-अपने ससुर के साथ अपने ही बेडरूम में अपने बिस्तर पर जिस पर कुछ घंटों पहले उसके जेठ ने भी उसको चोदा था। अदिति ने अपनी जिंदगी में कभी भी ऐसा नहीं सोचा था।

बिना वक्त बरबाद किए ससुर ने अपनी जवान बहू की पैंटी उतारी, और उसकी जीभ ने अदिति की गीली चूत को चाटना शुरू कर दिया। हाँ अदिति गीली हो चुकी थी किस करते वक़्त ही चौखट पर, और यह सोचक की अब वो अपने ससुर से चुदने वाली है, वो बहुत उतजीत हो चुकी थी, तो गीली तो होगी ही ना?

मगर एक नटखट मुश्कान के साथ अदिति ने खुद से कहा- “कुछ देर पहले तुम्हारे बेटे ने इस चूत को गंदी किया है मुझे चोदकर, अब इसको तुम साफ करो अपनी जीभ से बूढ़े..” और फिर अदिति तड़पते हुए अपनी गर्दन को बेड पर पीछे के तरफ करते हुए जिश्म को ऐंठने लगी, अपने ससुर की जीभ अपनी चूत पर फिरते हुये महसूस करते हुए। और उस दौरान ससुर अपने कपड़े उतारते हुए बेड के ऊपर आ गया और अदिति को थोड़ा ऊपर की तरफ करते हुए उसके ऊपर चढ़ गया।

ससुर इतना उत्तेजित हो गया था अपनी जवान बहू को चोदने के लिए। और यह देखकर की अदिति ने खुद को इतनी आसानी से समर्पण कर दिया है, उसको बिल्कुल देर नहीं लगा काम को तमाम करने में। बहुत तेज और जल्दी की चुदाई थी यह वाली। अदिति को ससुर का लण्ड दिखा ही नहीं की वो उसके चूत की गहराई नापने लगा था। बूढ़ा जोर-जोर से कमर को हिलाते हुए धक्के पे धक्का देने लगा था, एक जंगली जानवर की तरह।

अदिति तड़पते हुए बिस्तर की चादर को अपनी मुट्ठी में लिए हाँफती जा रही थी। और जल्द ही अदिति ने गर्दन ऊपर करके अपने ससुर का मुँह अपने मुँह में लेना चाहा। ससुर समझ गया और धक्का देते हुए ही थोड़ा सा झुक कर अपनी बहू के मुँह में अपनी जीभ डाला, जिसको अदिति जमकर चूसने लगी तेज साँसें लेते हुए। ज्यादा उमर के कारण बूढ़े का हाँफना ज्यादा तेज था और अदिति को जैसे उसके फेफड़ों की अंदर की घुरघुराती आवाज सुनाई दे रही थी।

मगर जल्द ही ससुर ने अपना मोटा लण्ड बाहर निकाला, अपने वीर्य या पिचकारी की तरह अदिति के पेट और चूचियों पर छोड़ते हुए। तब बूढ़ा थोड़ा ऊपर गया अपने लण्ड को हाथ में थामे और अदिति को अपनी जीभ से उसको साफ करने की माँग किया। अदिति ने खुशी से अपने ससुर के लण्ड को मुँह में ले लिया, उनके आखिरी कतरे वीर्य को चूसने के लिए। चूसते वक्त वो ससुर को हाँफते हुए देख रही थी और फिर लण्ड को बाहर करके उसके ऊपरी हिस्से पर अपनी जीभ से चाटा ससुर को मुश्कुराते हुए देखकर, जिससे ससुर को बहुत मजा आया।

अदिति ने मुश्कुराते हुए कहा- “यह हो गया आपका, अब खुश पिताजी? उम्मीद है की आपने खूब एंजाय किया होगा अपनी बहू के साथ."

ससुर बहुत खुश दिख रहा था और हाँफते हुए मुश्कुराकर बोला- “अपना दीवाना बना दिया तुमने तो मुझे अब। बहुत मजा आया तुमको चोदकर, और कितना मजेदार किस करती हो तुम वाह। पूरा मजा दिया तुमने मुझे मेरी जान..."

अदिति ने भी खिलखिलाते हुए कहा- “आप तो झूठ बोल रहे हो पिताजी। अगर मेरा दीवाना बन गये हो आप तो अपनी बेटी लीना के साथ क्या हो? उसके भी तो दीवाने हो आप, पता नहीं कब से, किस उमर की थी लीना तब मुझे क्या पता? उसके भी दीवाने हो आप पिताजी... हाँ बोलिए..."

ससुर ने कहा- “नहीं तुमसे ज्यादा प्यार करने लगा हूँ, क्योंकी तुम घर में नई जो आई हो, और अब लीना को पता लगने में देर नहीं होगी की उसकी कांपिटेशन आ गई है घर में अब तो, हाहाहाहा... जब दोनों मैं और राकेश तुमको ले रहे हैं तो लीना को पता चल ही जाएगा देख लेना..."

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