S
StoryPublisher
Guest
मैं सोच में पड़ गयी, मेरे पीठ पीछे अशोक क्या कर रहा हैं. मेरा एक हाथ पेटीकोट को पकड़े था और दूसरा मेरे ब्लाउज को. मेरा एक अकेला हाथ दोनों मम्मो को मुश्किल से ढक पा रहा था, उसने मेरे ब्लाउज में थोड़ी सी ऊँगलीया घुसा साबुन लगाना शुरू कर दिया, मैं उस पर हल्का गुस्सा करते हुए उसको मना करती रही.
मैं एक मम्मा ढकती तो वो दूसरे के तरफ साबुन लगाने लगता. उसके हौंसले बढ़ते रहे और जल्द ही अपना एक पूरा हाथ का पंजा मेरे ब्लाउज में घुसा मेरा एक मम्मा पकड़ लिया और साबुन मलने लगा.
उसकी इस हरकत पर, जिस हाथ से मैंने पेटीकोट पकड़ रखा था उससे मैंने उसको एक घुसा मार हल्का धक्का मारा. इस झटके से मेरा नाड़ा खुला पेटीकोट नीचे गिर गया और मैं पैंटी में आ गयी. मैं एक बार फिर शर्म से पानी पानी हो गयी.
वो मझ पर हंसने लगा कि मैं खुद अपने कपड़े खोल रही हूँ.
नितिन: “अब रहने भी दो, क्यों इतना शरमा रही हो? पूल में में भी तो बिकिनी पहन कर नहाते ही हैं.”
मैंने अपने दोनों हाथो से अपने ब्लाउज को पकडे रखने पर ध्यान दिया. उसने मेरे ब्लाउज को मेरे एक कंधे से निकाल उस कंधे पर साबुन लगाने लगा.
नितिन: “अब हाथ हटाओ, सिर्फ सीने पर साबुन लगाना बाकि हैं.”
मैं: “देखो, तुम अब अपनी लिमिट पार कर रहे हो. मुझे ये सब अच्छा नहीं लग रहा हैं.”
वो मेरे करीब आ मेरे सीने पर साबुन लगाने का प्रयास करने लगा. मैंने अपने दोनों हाथो से उसको धक्का देना चाहा पर उसने मेरे हाथ पकड़ लिए और थोड़ी छीना झपटी में मेरे ब्लाउज के आगे के बाकी हुक भी खुल गए और मेरे मम्मे पुरे दिखने लगे. नितिन ने मेरे दोनों हाथ पकड़ मुझे मेरे मम्मे ढकने नहीं दिए और चिढ़ाने लगा.
नितिन : “ओ, शेम शेम.”
मेरी एक बार तो हंसी छूट गयी पर अपनी हालत देख तुरंत सुधार किया.
मैं: “मेरे हाथ छोडो, और तुरंत बाहर जाओ.”
नितिन: “अच्छा जाता हूँ, पहले तुम्हारे साबुन तो लगा लू, नयी जगह दिख रही हैं जहा साबुन नहीं लगा हैं.”
मैं: “लग गया मेरे साबुन, और नहीं लगवाना, जाओ.”
नितिन: “ठीक हैं तो नहला देता हूँ.”
उसने अब मेरे हाथ छोड़े और मैंने अपना ब्लाउज फिर अपने मम्मो के ऊपर कर दिया और हाथ से ढक दिया.
फिर उसने मेरे ऊपर पानी डालना शुरू कर दिया और मैं अपना सीना दबाये नीचे बैठ गयी.
नितिन: “और नहाना हैं या हो गया?”
मैं: “अब तुम बाहर जाओ, मेरा हो गया.”
नितिन बाथरूम से बाहर गया और मैंने चैन की सांस ली कि कुछ अनहोनी से पहले ही मैं बच गयी.
मैंने टॉवल उठाया अपने बदन को पोंछ गीले कपड़े निकाल दिए. बाथरूम के अंदर पहनने के कोई कपड़े थे नहीं तो मेरे मम्मो से लेकर जांघो तक मैं टॉवल लपेट कर ही बाहर आयी.
नितिन की इन हरकतों की वजह से मेरे हाथ पैर अभी भी कांप रहे थे, और मेरे शरीर पर मैं उसके स्पर्श महसूस कर पा रही थी, ख़ास तौर से जब उसने मेरे मम्मो पर साबुन मला था.
मैं जैसे ही टॉवेल लपेट बाहर आयी सामने थोड़ी दूर नितिन खड़ा हो कुछ खा रहा था. हम दोनों की नज़रे मिली और वो मुस्कराने लगा.
नितिन: “अरे तुमने तो आज होली खेली ही नहीं, देखो कोई रंग ही नहीं लगा.”
वो मेरी तरफ बढ़ता उससे पहले ही मैं चीखते हुए बैडरूम की तरफ भागी और वो मेरे पीछे. मैं बैडरूम का दरवाजा पूरा बंद करती उसके पहले ही वो दरवाजे पर आ गया और बंद नहीं करने दिया.
मैं: “कपड़े पहनने दो, फिर रंग लगा देना, अभी दरवाजा बंद करने दो. जाओ.”
नितिन: “पिछली होली पर भी यही बोलकर कमरे में बंद हो गयी थी. कपड़े बदलने हैं तो मेरे सामने बदलो और फिर होली खेलो.”
वो दरवाजे पर धक्का लगाते हुए अंदर आ गया. मैं मुड़ी और अंदर भागी और उसने पीछे से आकर मुझे पकड़ लिया और बिस्तर पर धक्का दे उल्टा लेटा दिया और खुद पीछे से मेरे ऊपर चढ़ कर लेट गया. मैं अपने टॉवल को कस कर पकड़े लेटी रही.
वो मेरे बालो को हटा मेरे कानो के पीछे और गर्दन और कंधे पर चूमने लगा. मेरे शरीर में मीठी सी गुदगुदी होने लगी और मैं सब सहती रही. इतनी देर की मस्तियो से उसने कही ना कही मुझे कमजोर कर दिया था.
कई बार हम नितिन के साथ पिकनिक पर भी गए हैं और उसके साथ मेरा मजाक मस्ती काफी चलता था पर इतना ज्यादा होगा ये नहीं सोचा था. हर साल होली पर रंग लगाते वक़्त ऐसी मस्ती करता था पर आज वो अकेला था तो उसने हद कर दी थी, मेरे कपड़े तक खोल दिए थे और अंदर हाथ डाल दिया था.
मैं एक मम्मा ढकती तो वो दूसरे के तरफ साबुन लगाने लगता. उसके हौंसले बढ़ते रहे और जल्द ही अपना एक पूरा हाथ का पंजा मेरे ब्लाउज में घुसा मेरा एक मम्मा पकड़ लिया और साबुन मलने लगा.
उसकी इस हरकत पर, जिस हाथ से मैंने पेटीकोट पकड़ रखा था उससे मैंने उसको एक घुसा मार हल्का धक्का मारा. इस झटके से मेरा नाड़ा खुला पेटीकोट नीचे गिर गया और मैं पैंटी में आ गयी. मैं एक बार फिर शर्म से पानी पानी हो गयी.
वो मझ पर हंसने लगा कि मैं खुद अपने कपड़े खोल रही हूँ.
नितिन: “अब रहने भी दो, क्यों इतना शरमा रही हो? पूल में में भी तो बिकिनी पहन कर नहाते ही हैं.”
मैंने अपने दोनों हाथो से अपने ब्लाउज को पकडे रखने पर ध्यान दिया. उसने मेरे ब्लाउज को मेरे एक कंधे से निकाल उस कंधे पर साबुन लगाने लगा.
नितिन: “अब हाथ हटाओ, सिर्फ सीने पर साबुन लगाना बाकि हैं.”
मैं: “देखो, तुम अब अपनी लिमिट पार कर रहे हो. मुझे ये सब अच्छा नहीं लग रहा हैं.”
वो मेरे करीब आ मेरे सीने पर साबुन लगाने का प्रयास करने लगा. मैंने अपने दोनों हाथो से उसको धक्का देना चाहा पर उसने मेरे हाथ पकड़ लिए और थोड़ी छीना झपटी में मेरे ब्लाउज के आगे के बाकी हुक भी खुल गए और मेरे मम्मे पुरे दिखने लगे. नितिन ने मेरे दोनों हाथ पकड़ मुझे मेरे मम्मे ढकने नहीं दिए और चिढ़ाने लगा.
नितिन : “ओ, शेम शेम.”
मेरी एक बार तो हंसी छूट गयी पर अपनी हालत देख तुरंत सुधार किया.
मैं: “मेरे हाथ छोडो, और तुरंत बाहर जाओ.”
नितिन: “अच्छा जाता हूँ, पहले तुम्हारे साबुन तो लगा लू, नयी जगह दिख रही हैं जहा साबुन नहीं लगा हैं.”
मैं: “लग गया मेरे साबुन, और नहीं लगवाना, जाओ.”
नितिन: “ठीक हैं तो नहला देता हूँ.”
उसने अब मेरे हाथ छोड़े और मैंने अपना ब्लाउज फिर अपने मम्मो के ऊपर कर दिया और हाथ से ढक दिया.
फिर उसने मेरे ऊपर पानी डालना शुरू कर दिया और मैं अपना सीना दबाये नीचे बैठ गयी.
नितिन: “और नहाना हैं या हो गया?”
मैं: “अब तुम बाहर जाओ, मेरा हो गया.”
नितिन बाथरूम से बाहर गया और मैंने चैन की सांस ली कि कुछ अनहोनी से पहले ही मैं बच गयी.
मैंने टॉवल उठाया अपने बदन को पोंछ गीले कपड़े निकाल दिए. बाथरूम के अंदर पहनने के कोई कपड़े थे नहीं तो मेरे मम्मो से लेकर जांघो तक मैं टॉवल लपेट कर ही बाहर आयी.
नितिन की इन हरकतों की वजह से मेरे हाथ पैर अभी भी कांप रहे थे, और मेरे शरीर पर मैं उसके स्पर्श महसूस कर पा रही थी, ख़ास तौर से जब उसने मेरे मम्मो पर साबुन मला था.
मैं जैसे ही टॉवेल लपेट बाहर आयी सामने थोड़ी दूर नितिन खड़ा हो कुछ खा रहा था. हम दोनों की नज़रे मिली और वो मुस्कराने लगा.
नितिन: “अरे तुमने तो आज होली खेली ही नहीं, देखो कोई रंग ही नहीं लगा.”
वो मेरी तरफ बढ़ता उससे पहले ही मैं चीखते हुए बैडरूम की तरफ भागी और वो मेरे पीछे. मैं बैडरूम का दरवाजा पूरा बंद करती उसके पहले ही वो दरवाजे पर आ गया और बंद नहीं करने दिया.
मैं: “कपड़े पहनने दो, फिर रंग लगा देना, अभी दरवाजा बंद करने दो. जाओ.”
नितिन: “पिछली होली पर भी यही बोलकर कमरे में बंद हो गयी थी. कपड़े बदलने हैं तो मेरे सामने बदलो और फिर होली खेलो.”
वो दरवाजे पर धक्का लगाते हुए अंदर आ गया. मैं मुड़ी और अंदर भागी और उसने पीछे से आकर मुझे पकड़ लिया और बिस्तर पर धक्का दे उल्टा लेटा दिया और खुद पीछे से मेरे ऊपर चढ़ कर लेट गया. मैं अपने टॉवल को कस कर पकड़े लेटी रही.
वो मेरे बालो को हटा मेरे कानो के पीछे और गर्दन और कंधे पर चूमने लगा. मेरे शरीर में मीठी सी गुदगुदी होने लगी और मैं सब सहती रही. इतनी देर की मस्तियो से उसने कही ना कही मुझे कमजोर कर दिया था.
कई बार हम नितिन के साथ पिकनिक पर भी गए हैं और उसके साथ मेरा मजाक मस्ती काफी चलता था पर इतना ज्यादा होगा ये नहीं सोचा था. हर साल होली पर रंग लगाते वक़्त ऐसी मस्ती करता था पर आज वो अकेला था तो उसने हद कर दी थी, मेरे कपड़े तक खोल दिए थे और अंदर हाथ डाल दिया था.