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“तुम बब्बन अली के सिर पर क्यों नहीं गयी ?”
“उससे कोई लाभ नहीं था। मुझे यहाँ आना था। मैं कब तक सिर पर रहती ?”
“लेकिन वह मेरे संबंध में पुलिस को हैरतअंगेज बातें बता रहा होगा।”
“मगर अब तुम वहाँ क्यों जाओगे ? लखनऊ तुमसे छूट गया।”
“और चचा भी छूट गए ? घर भी छूट गया ? वह क्या सोचते होंगे ?”
“तुम उन्हें कहीं भी बुला सकते हो। तुम्हारे पास कमी किस बात की है। यह बताओ कि तुम यहाँ कैसी ज़िंदगी व्यतीत कर रहे हो ?”
“बस वक्त काट रहा हूँ। वक्त काटते नहीं कटता था। तुम बहुत याद आती थी। तुमसे बात करने की आदत जो पड़ गयी थी।”
“मोहिनी के आने से मन बहुत बहल गया था। शाम तक उससे बातें करता रहा फिर जब कुलवंत की कुटिया में दाख़िल हुआ तो मोहिनी मेरे सिर से उतर गयी और भोजन के प्रबंध में रात भर के लिए चली गयी।
दूसरी सुबह मैंने इरादा कर लिया कि मैं कुलवंत की हिदायत पर लंदन रवाना हो जाऊँगा।
मोहिनी पौ फटते ही वापस आ गयी थी और सुर्ख नज़र आ रही थी। निश्चय ही उसने रात भर छक कर इंसानी खून पिया था। यही मोहिनी का भोजन था।
तरन्नुम ने बहुत ज़िद की कि वह मेरे साथ चलेगी लेकिन कुलवंत ने उसे रोक दिया।
तीसरे दिन मैं तरन्नुम को रोता हुआ और कुलवंत को सोगबार छोड़कर मैं बम्बई के लिए रवाना हो गया।
मैंने रात को सफ़र करना उचित समझा। मोहिनी मेरे सिर पर थी इसलिए मुझे कोई विशेष चिंता नहीं थी। मेरे पास कोई सामान नहीं था।
एक अर्से बाद मैं बम्बई आया था। यहाँ आकर मैं एक फाइव स्टार होटल में ठहरा।
मोहिनी की उपस्थिति में रुपये की कोई चिंता नहीं थी। बम्बई पहुँचकर चंद घंटों में ख़ासी रक़म प्राप्त हो गयी। पासपोर्ट और वीजा जरा कठिन था। किंतु मोहिनी ने यह काम भी आसान कर दिया। उसने होटल में ही एक पासपोर्ट एजेंट को मेरे पास भेज दिया।
मैं बम्बई में केवल रात के समय होटल से निकलता था। वह भी होटल की गाड़ी में।
होटल में मेरा नाम अमित दर्ज था। पासपोर्ट एजेंट ने भारी रक़म लेकर केवल दो दिन में मेरा काम कर दिया। मुझे भला रुपये की क्या चिंता थी। अब मोहिनी मेरे पास थी तो दौलत भी थी।
मुझे ख़्याल था कि बम्बई की पुलिस भी निश्चित ही मेरे संबंध में सतर्क होगी इसलिए मैंने हर संभव सावधानी बरती। मैंने दाढ़ी बढ़ा ली और अपने फोटो के लिए खासा हुलिया बदला।
बम्बई से मेरी हंगामाखेज ज़िंदगी का पुराना संबंध जुड़ा था। बाज़ पुलिस ऑफ़िसरों के लिए मेरा चेहरा और नाम क्या नहीं था। वहाँ एक जमाने में मेरा कारोबार, मेरा घर और बहुत कुछ मौजूद था।
मैं उन सड़कों से दूर रहा जहाँ किसी से मिलने की संभावना थी। मुझे हर ज़रूरत की चीज़ होटल में ही मिल जाती।
तीसरे दिन मैं रात की फ्लाइट से होटल रवाना हो गया। मैंने वह देश छोड़ दिया। वहाँ के लोगों ने मेरे साथ और वहाँ के लोगों के साथ मैंने बहुत कुछ अच्छा व्यवहार नहीं किया था।
जहाज़ में बैठकर मुझे कुछ चैन मिली। हिन्दुस्तानी यात्रियों की संख्या बहुत कम थी। जब मैंने अपनी सीट संभाली तो मोहिनी मेरे सिर पर मौजूद थी और बहुत अच्छे मूड में थी।
यह मेरा पहला हवाई सफ़र था। थोड़ी देर बाद जहाज़ अंधेरे में गुम हो गया और मेरी यादें मुझसे दूर होती गयीं। जब वक्त गुज़र जाता है और वातावरण बदल जाता है तो यादें भी दूर होने लगती हैं।
मोहिनी खामोशी से पायलट के सिर पर बैठ गयी। वह इधर-उधर फुदकती रही। कभी एयर होस्टेज के सिर पर तो कभी किसी यात्री के सिर पर बैठ जाती।
रात ख़ासी गुज़र गयी थी लेकिन सफ़र की यह रात लम्बी थी इसलिए कि लंदन और हिन्दुस्तान के समय में साढ़े पाँच घंटे का अंतर था।
जहाज़ बढ़ता रहा और रात लम्बी होती गयी।
जहाज के लगभग सभी यात्री ऊंघ रहे थे। अलबत्ता कुछ लोग बातों में मग्न थे। वहाँ केवल दो हसीनाएँ थीं। मैंने बाथरूम के बहाने जाकर-जाकर उन्हें अच्छी तरह देखा था। उनसे बात करने को जी चाहता था। उनके निकट एक नौजवान बैठा था। इस जहाज़ में तीन-तीन सीटें एक साथ थीं।
नौजवान को उठाने के लिए मुझे मोहिनी की सहायता लेनी पड़ी। वह उसके सिर पर गयी और नौजवान अपनी सीट से उठकर मेरे पास आया और मुझसे मेरे सीट पर बैठने की अनुमति माँगी। मैंने ख़ुशी से अनुमति दे दी और स्वयं आकर उसकी सीट पर बैठ आ गया।
थोड़ी देर बाद मोहिनी उसे बेतहाशा शराब के नशे में धुत्त छोड़कर मेरे पास आ गयी। इस अरसे से में मैंने अपने निकट बैठी हसीन लड़की से संबंध बना लिया था।
उसका नाम सारा था।
चुस्ट स्कर्ट में कसा हुआ उसका बदन अपने तमाम उभारों के साथ चमक रहा था। किंतु वह कुछ गंभीर प्रकृति की लड़की थी। अतः बात आगे बढ़ाने के लिए ख़ासी मुश्किल पेश आई।
बाद में मोहिनी ने मुझे बताया कि वह किसी अंग्रेज़ लार्ड की घमंडी बेटी है जो हिन्दुस्तान और पूर्वी देशों की सैर करके वापस अपने वतन जा रही है।
उसे प्रभावित करने के लिए मैंने मोहिनी से पूछकर उसके बाप का नाम बताया तो वह आश्चर्य में पड़ गयी।
मैंने अपना प्रभाव जमाने के लिए कहा- “मैं एक बहुत अच्छा पामिस्ट हूँ और दिल की बात बता देता हूँ। लंदन में सुना है बहुत माने हुए प्रोफ़ेसर हैं। उनसे मुलाक़ात करने और कुछ सीखने जा रहा हूँ।
यह चर्चा कुछ ऐसी होती है कि किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।
“उससे कोई लाभ नहीं था। मुझे यहाँ आना था। मैं कब तक सिर पर रहती ?”
“लेकिन वह मेरे संबंध में पुलिस को हैरतअंगेज बातें बता रहा होगा।”
“मगर अब तुम वहाँ क्यों जाओगे ? लखनऊ तुमसे छूट गया।”
“और चचा भी छूट गए ? घर भी छूट गया ? वह क्या सोचते होंगे ?”
“तुम उन्हें कहीं भी बुला सकते हो। तुम्हारे पास कमी किस बात की है। यह बताओ कि तुम यहाँ कैसी ज़िंदगी व्यतीत कर रहे हो ?”
“बस वक्त काट रहा हूँ। वक्त काटते नहीं कटता था। तुम बहुत याद आती थी। तुमसे बात करने की आदत जो पड़ गयी थी।”
“मोहिनी के आने से मन बहुत बहल गया था। शाम तक उससे बातें करता रहा फिर जब कुलवंत की कुटिया में दाख़िल हुआ तो मोहिनी मेरे सिर से उतर गयी और भोजन के प्रबंध में रात भर के लिए चली गयी।
दूसरी सुबह मैंने इरादा कर लिया कि मैं कुलवंत की हिदायत पर लंदन रवाना हो जाऊँगा।
मोहिनी पौ फटते ही वापस आ गयी थी और सुर्ख नज़र आ रही थी। निश्चय ही उसने रात भर छक कर इंसानी खून पिया था। यही मोहिनी का भोजन था।
तरन्नुम ने बहुत ज़िद की कि वह मेरे साथ चलेगी लेकिन कुलवंत ने उसे रोक दिया।
तीसरे दिन मैं तरन्नुम को रोता हुआ और कुलवंत को सोगबार छोड़कर मैं बम्बई के लिए रवाना हो गया।
मैंने रात को सफ़र करना उचित समझा। मोहिनी मेरे सिर पर थी इसलिए मुझे कोई विशेष चिंता नहीं थी। मेरे पास कोई सामान नहीं था।
एक अर्से बाद मैं बम्बई आया था। यहाँ आकर मैं एक फाइव स्टार होटल में ठहरा।
मोहिनी की उपस्थिति में रुपये की कोई चिंता नहीं थी। बम्बई पहुँचकर चंद घंटों में ख़ासी रक़म प्राप्त हो गयी। पासपोर्ट और वीजा जरा कठिन था। किंतु मोहिनी ने यह काम भी आसान कर दिया। उसने होटल में ही एक पासपोर्ट एजेंट को मेरे पास भेज दिया।
मैं बम्बई में केवल रात के समय होटल से निकलता था। वह भी होटल की गाड़ी में।
होटल में मेरा नाम अमित दर्ज था। पासपोर्ट एजेंट ने भारी रक़म लेकर केवल दो दिन में मेरा काम कर दिया। मुझे भला रुपये की क्या चिंता थी। अब मोहिनी मेरे पास थी तो दौलत भी थी।
मुझे ख़्याल था कि बम्बई की पुलिस भी निश्चित ही मेरे संबंध में सतर्क होगी इसलिए मैंने हर संभव सावधानी बरती। मैंने दाढ़ी बढ़ा ली और अपने फोटो के लिए खासा हुलिया बदला।
बम्बई से मेरी हंगामाखेज ज़िंदगी का पुराना संबंध जुड़ा था। बाज़ पुलिस ऑफ़िसरों के लिए मेरा चेहरा और नाम क्या नहीं था। वहाँ एक जमाने में मेरा कारोबार, मेरा घर और बहुत कुछ मौजूद था।
मैं उन सड़कों से दूर रहा जहाँ किसी से मिलने की संभावना थी। मुझे हर ज़रूरत की चीज़ होटल में ही मिल जाती।
तीसरे दिन मैं रात की फ्लाइट से होटल रवाना हो गया। मैंने वह देश छोड़ दिया। वहाँ के लोगों ने मेरे साथ और वहाँ के लोगों के साथ मैंने बहुत कुछ अच्छा व्यवहार नहीं किया था।
जहाज़ में बैठकर मुझे कुछ चैन मिली। हिन्दुस्तानी यात्रियों की संख्या बहुत कम थी। जब मैंने अपनी सीट संभाली तो मोहिनी मेरे सिर पर मौजूद थी और बहुत अच्छे मूड में थी।
यह मेरा पहला हवाई सफ़र था। थोड़ी देर बाद जहाज़ अंधेरे में गुम हो गया और मेरी यादें मुझसे दूर होती गयीं। जब वक्त गुज़र जाता है और वातावरण बदल जाता है तो यादें भी दूर होने लगती हैं।
मोहिनी खामोशी से पायलट के सिर पर बैठ गयी। वह इधर-उधर फुदकती रही। कभी एयर होस्टेज के सिर पर तो कभी किसी यात्री के सिर पर बैठ जाती।
रात ख़ासी गुज़र गयी थी लेकिन सफ़र की यह रात लम्बी थी इसलिए कि लंदन और हिन्दुस्तान के समय में साढ़े पाँच घंटे का अंतर था।
जहाज़ बढ़ता रहा और रात लम्बी होती गयी।
जहाज के लगभग सभी यात्री ऊंघ रहे थे। अलबत्ता कुछ लोग बातों में मग्न थे। वहाँ केवल दो हसीनाएँ थीं। मैंने बाथरूम के बहाने जाकर-जाकर उन्हें अच्छी तरह देखा था। उनसे बात करने को जी चाहता था। उनके निकट एक नौजवान बैठा था। इस जहाज़ में तीन-तीन सीटें एक साथ थीं।
नौजवान को उठाने के लिए मुझे मोहिनी की सहायता लेनी पड़ी। वह उसके सिर पर गयी और नौजवान अपनी सीट से उठकर मेरे पास आया और मुझसे मेरे सीट पर बैठने की अनुमति माँगी। मैंने ख़ुशी से अनुमति दे दी और स्वयं आकर उसकी सीट पर बैठ आ गया।
थोड़ी देर बाद मोहिनी उसे बेतहाशा शराब के नशे में धुत्त छोड़कर मेरे पास आ गयी। इस अरसे से में मैंने अपने निकट बैठी हसीन लड़की से संबंध बना लिया था।
उसका नाम सारा था।
चुस्ट स्कर्ट में कसा हुआ उसका बदन अपने तमाम उभारों के साथ चमक रहा था। किंतु वह कुछ गंभीर प्रकृति की लड़की थी। अतः बात आगे बढ़ाने के लिए ख़ासी मुश्किल पेश आई।
बाद में मोहिनी ने मुझे बताया कि वह किसी अंग्रेज़ लार्ड की घमंडी बेटी है जो हिन्दुस्तान और पूर्वी देशों की सैर करके वापस अपने वतन जा रही है।
उसे प्रभावित करने के लिए मैंने मोहिनी से पूछकर उसके बाप का नाम बताया तो वह आश्चर्य में पड़ गयी।
मैंने अपना प्रभाव जमाने के लिए कहा- “मैं एक बहुत अच्छा पामिस्ट हूँ और दिल की बात बता देता हूँ। लंदन में सुना है बहुत माने हुए प्रोफ़ेसर हैं। उनसे मुलाक़ात करने और कुछ सीखने जा रहा हूँ।
यह चर्चा कुछ ऐसी होती है कि किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।