• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Fantasy बॉलीवुड की मस्त सेक्सी कहानियाँ



साक्षी एक पल को चुप रही फिर मेरी ठोड़ी पकड़ कर मेरे चेहरे को ऊपर उठाती हुई हल्का सा मुस्कुराते हुई बोली “मैं तुझे अच्छी लगती हूँ क्या….”

मैं एकदम से शर्मा गया मेरे गाल लाल हो गए और झेंप कर गर्दन फिर से नीचे झुका ली. मैं साक्षी के सामने बैठा हुआ था साक्षी ने हाफ पैंट के बाहर झांकती मेरी जांघो पर अपना हाथ रखा और उसे सहलाती हुई धीरे से अपने हाथ को आगे बढा कर मेरे पैंट के उभरे हुए भाग पर रख दिया. मैं शर्मा कर अपने आप में सिमटते हुए साक्षी के हाथ को हटाने की कोशिश करते हुए अपने दोनों जांघो को आपस में सटाने की कोशिश की ताकि साक्षी मेरे उभार को नहीं देख पाए. साक्षी ने मेरे जांघ पर दबाब डालते हुए उनका सीधा कर दिया और मेरे पैंट के उभार को पैंट के ऊपर से पकड़ लिया और बोली “रुक…आराम से बैठा रह…देखने दे….साले अभी शर्मा रहा है,… मैं सहम कर चुप चाप बैठ गया.

साक्षी मेरे लण्ड को छोर कर मेरे हाफ पैंट का बटन खोलने लगी. मेरे पैंट के बटन खोल कर कड़कती आवाज़ में बोली “चुत्तर…उठा तो…तेरा पैंट निकालू…”

मैंने हल्का विरोध किया “ओह साक्षी छोड़ दो…”

“ मार खायेगा क्या…जैसा कहती हु वैसा कर…” कहती हुई थोड़ा आगे खिसक कर मेरे पास आई और अपने पेटिकोट को खींच कर घुटनों से ऊपर करते हुए पहले के जैसे बैठ गई.

मैंने चुपचाप अपने चुत्तरों को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया. साक्षी ने सटाक से मेरे पैंट को खींच कर मेरी कमर और चुत्तरों के नीचे कर दिया, फिर मेरे पैरों से होकर मेरे पैंट को पूरा निकाल कर नीचे कारपेट पर फेंक दिया.

]

मैंने नीचे से पूरा नंगा हो गया था और मेरा ढीला लण्ड साक्षी की आँखों के सामने था. मैंने हाल ही में अपने लण्ड के ऊपर उगे के बालो को ट्रिम किया था इसलिए झांट बहुत कम थे. मेरे ढीले लण्ड को अपनी मुठ्ठी में भरते हुए साक्षी ने सुपाड़े की चमड़ी को थोड़ा सा नीचे खींचते हुए मेरे मरे हुए लण्ड पर जब हाथ चलाया तो मैं सनसनी से भर आह किया.

साक्षी ने मेरी इस आह पर कोई ध्यान नहीं दिया और अपने अंगूठे को सुपाड़े पर चलाती हुई सक-सक मेरे लण्ड की चमड़ी को ऊपर नीचे किया.

साक्षी के कोमल हाथो का स्पर्श पा कर मेरे लण्ड में जान वापस आ गई. मैं डरा हुआ था पर साक्षी जैसी खूबसूरत औरत की हथेली ने लौड़े को अपनी मुठ्ठी में दबोच कर मसलते हुए, चमड़ी को ऊपर नीचे करते हुए सुपाड़े को गुदगुदाया तो अपने आप मेरे लण्ड की तरफ खून की रफ्तार तेज हो गई. लौड़ा फुफकार उठा और अपनी पूरी औकात पर आ गया.

मेरे खड़े होते लण्ड को देख साक्षी का जोश दुगुना हो गया और दो-चार बार हाथ चला कर मेरे लण्ड को अपने बित्ते से नापती हुई बोली “बाप रे बाप….कैसा हल्लबी लण्ड है…ओह… हाय… तेरा तो सच में बहुत बड़ा है….मेरी इतनी उम्र हो गई….आज तक ऐसा नहीं देखा था…ओह…ये पूरा नौ इंच का लग रहा है…इतना बड़ा तो तेरे मौसा का भी नहीं….हाय….ये तो उनसे बहुत बड़ा लग रहा है…..और काफी शानदार है….उफ़….मैं तो….मैं तो……हाय…..ये तो गधे के लण्ड जितना बड़ा है…..उफ्फ्फ्फ़…..” बोलते हुए मेरे लण्ड को जोर से मरोड़ दिया और सुपाड़े को अपनी ऊँगली और अंगूठे के बीच कस कर दबा दिया.

[IMG]]

दर्द के मारे छटपटा कर जांघ सिकोडते हुए साक्षी का हाथ हटाने की कोशिश करते हुए पीछे खिसका तो तो मेरे लण्ड को पकड़ कर अपनी तरफ खींचती हुई बोली “हरामी….साले….मैं जब सो रही होती हु तो मेरी चूची दबाता है मेरी चुत में ऊँगली करता है….आग लगाता है….इतना मोटा लौड़ा ले कर….घूमता है…और बाएं गाल पर तड़ाक से एक झापड़ जड़ दिया.

मैं हतप्रभ सा हो गया. मेरी समझ में नहीं आ रहा था मैं क्या करू. साक्षी मुझ से क्या चाहती है, ये भी समझ में नहीं आ रहा था. एक तरफ तो वो मेरे लण्ड को सहलाते हुए मुठ मार रही थी और दूसरी तरफ गाली देते हुए बात कर रही थी और मार रही थी. मैं उदास और डरी हुई नज़रों से साक्षी को देख रहा था. साक्षी मेरे लण्ड की मुठ मारने में मशगूल थी. एक हाथ में लण्ड को पकड़े हुए दुसरे हाथ से मेरे अन्डकोषो को अपनी हथेली में लेकर सहलाती हुई बोली “….हाथ से करता है…. राजू….अपना शरीर बर्बाद मत कर…..तेरा शरीर बर्बाद हो जायेगा तो मैं तेरी माँ को क्या मुंह दिखाउंगी….” कहते हुए जब अपनी नजरों को ऊपर उठाया तो मेरे उदास चेहरे पर साक्षी की नज़र पड़ी. मुझे उदास देख लण्ड पर हाथ चलाती हुई दुसरे हाथ से मेरे गाल को चुटकी में पकड़ मसलते हुए बोली “उदास क्यों है….क्या तुझे अच्छा नहीं लग रहा है…..हाय राजू तेरा लण्ड बहुत बड़ा और मजेदार है…. तेरा हाथ से करने लायक नहीं है….ये किसी छेद घुसा कर किया कर…..”

[IMG]]

मैं साक्षी की ऐसी खुल्लम खुल्ला बातों को सुन कर एक दम से भोच्चक रह गया और उनका मुंह ताकता रहा.

साक्षी मेरे लण्ड की चमड़ी को पूरा नीचे उतार कर सुपाड़े की गोलाई के चारो तरफ ऊँगली फेरती हुई बोली “ऐसे क्या देख रहा है….तू अपना शरीर बर्बाद कर लेगा तो मैं तेरी माँ को क्या मुंह दिखाउंगी……मैंने सोच लिया है मुझे तेरी मदद करनी पड़ेगी……..तू घबरा मत….”

[IMG]]

साक्षी की बाते सुन कर मुझे ख़ुशी हुई मैं हकलाते हुए बोला “हाय साक्षी मुझे डर लगता है….आपसे….” इस पर साक्षी बोली “राजू मेरे बेटे…डर मत….मैंने तुझे….गाली दी इसकी चिंता मत कर…. मैं तेरा मजा ख़राब नहीं करना चाहती…ले……मेरा मुंह मत देख तू भी मजे कर……..” और मेरा एक हाथ पकड़ कर अपनी ब्लाउज में कसी चुचियों पर रखती हुई बोली “….तू इनको दबाना चाहता था ना….ले…दबा…तू….भी मजा कर….मैं जरा तेरे लण्ड…. की……कितना पानी भरा है इसके अंदर….”

मैंने डरते हुए साक्षी की चुचियों को अपनी हथेली में थाम लिया और हलके हलके दबाने लगा. अभी दो तीन बार ही दबाया था की साक्षी मेरे लण्ड को मरोड़ती हुई बोली “साले…कब मर्द बनेगा….ऐसे औरतो की तरह चूची दबाएगा तो…इतना तगड़ा लण्ड हाथ से ही हिलाता रह जायेगा….अरे मर्द की तरह दबा ना…डर मत….ब्लाउज खोल के दबाना चाहता है तो खोल दे….हाय कितना मजेदार हथियार है तेरा….देख….इतनी देर से मुठ मार रही हूँ मगर पानी नहीं फेंक रहा…..” [/SIZE]
 
मैंने मन ही मन सोचा की आराम से मुठ मारेगी तभी तो पानी फेंकेगा, यहाँ तो जैसे ही लौड़ा अपनी औकात पर आया था वैसे ही एक थप्पर मार कर उसको ढीला कर दिया. इतनी देर में ये समझ में आ गया की अगर मुझे साक्षी के साथ मजा करना है तो बर्दाश्त करना ही पड़ेगा, चूँकि साक्षी ने अब खुली छूट दे दी थी इसलिए अपने मजे के अनुसार दोनों चुचियों को दबाने लगा, ब्लाउज के बटन भी साथ ही साथ खोल दिए और नीले रंग की छोटी से ब्रा में कसी साक्षी की दोनों रसभरी चुचियों को दोनों हाथो में भर का दबाते हुए मजा लूटने लगा.

]

मजा बढ़ने के साथ लण्ड की औकात में भी बढोतरी होने लगी. सुपाड़ा गुलाबी से लाल हो गया था और नसों की रेखाएं लण्ड के ऊपर उभर आई थी. साक्षी पूरी कोशिश करके अपनी हथेली की मुट्ठी बना कर पुरे लण्ड को कसते हुए अपना हाथ चला रही थी.

फिर अचानक उन्होंने लण्ड को पकड़े हुए ही मुझे पीछे की तरफ धकेला, मेरी पीठ पलंग की पुश्त से जाकर टकराई मैं अभी संभल भी नहीं पाया था की साक्षी ने थोड़ा पीछे की तरफ खिसकते हुए जगह बनाते हुए अपने सर को नीचे झुका दिया और मेरे लाल आलू जैसे चमचमाते सुपाड़े को अपने होंठो के बीच कसते हुए जोर से चूसा.

[IMG]]

मुझे लगा जैसे मेरी जान सुपाड़े से निकल कर साक्षी के मुंह के अन्दर समा गई हो. गुदगुदी और मजे ने बेहाल कर दिया था. अपने नौजवान सुपाड़े को चमड़ी हटा कर पहले कभी पंखे के नीचे हवा लगाता था तो इतनी जबरदस्त सनसनी होती थी की मैं जल्दी से चमड़ी ऊपर कर लेता था. यहाँ साक्षी की गरम मुंह के अन्दर उनके कोमल होंठ और जीभ ने जब अपना कमाल सुपाड़े पर दिखाना शुरू किया तो मैं सनसनी से भर उठा. लगा की लण्ड पानी छोड़ देगा. घबरा कर साक्षी के मुंह को अपने लण्ड पर से हटाने के लिए चूची छोड़ कर उनके सर को पकड़ ऊपर उठाने की कोशिश की तो साक्षी मेरे हाथ को झटक लौड़े पर से मुंह हटाती हुई बोली “हाय राजू….तेरा लण्ड तो बहुत स्वादिष्ट है….खाने लायक है….तुझे मजा आएगा…….चूसने दे….देख हाथ से करने से ज्यादा मजा मिलेगा….”

[IMG]]

मैं घबराता हुआ बोला “पर…पर…साक्षी मेरा निकल जायेगा,,,,बहुत गुदगुदी होती है…..जब चूसती हो…..हाय. इस पर साक्षी खुश होती हुई बोली “कोई बात नहीं ….ऐसा होता है…..आज से पहले कभी तुने चुसवाया है…”

“हाय…नहीं साक्षी…कभी…नहीं….”

“ओह… हो…..मतलब किसी के साथ भी किसी तरह का मजा नहीं लिया है…..”

“हाय…नहीं साक्षी ….कभी किसी के साथ…..नहीं”

“कभी किसी औरत या लड़की को नंगा नहीं देखा है…..”

मैं साक्षी की इस बात पर शर्मा गया और हकलाते हुए बोला ” जी कभी नहीं…”

“हाय तभी तू इतना तरस रहा है….और छुप कर देखने की कोशिश कर रहा था….कोई बात नहीं राजू….मुझे भी तेरी माँ को मुंह दिखाना है….चिंता मत कर….पहले मैं ये तेरा चूस कर इसकी मलाई एक बार निकाल देती हूँ…फिर तुझे दिखा दूंगी…..”

मैं ज्यादा कुछ समझ नहीं पाया की क्या दिखा दूंगी. मेरा ध्यान तो मेरे तन्नाये हुए लौड़े पर ही अटका पड़ा था. मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुंका था और अब किसी भी तरह से लण्ड का पानी निकलना चाहता था.

मैंने अपने लण्ड को हाथ से पकड़ा तो साक्षी ने मेरा हाथ झटक दिया और अपनी चूची पर रखती हुई बोली “ले इसको पकड़” और मेरे लण्ड को अपनी मुठ्ठी में भर कर ऊपर नीचे करते हुए सुपाड़े को अपने मुंह में भर कर चूसने लगी. मैं सीसीयाते हुए दोनों हाथो में साक्षी की कठोर चुचियों को मसलते हुए अपनी गांड बिस्तर से उछालते हुए चुसाई का मजा लेने लगा.

मेरी समझ में नहीं आ रहा था की मैं क्या क्या करू. सनसनी के मारे मेरा बुरा हाल हो गया था. साक्षी मेरे सुपाड़े के चारो तरफ जीभ फ़िराते हुए मेरे लण्ड को लौलीपौप की तरह से चूस रही थी. कभी वो पुरे लण्ड पर जीभ फ़िराते हुए मेरे अंडकोष को अपनी हथेली में लेकर सहलाते हुए चूसती कभी मेरे लौड़े के सुपाड़े के अपने होंठो के बीच दबा कर इतनी जोर-जोर से चूसती की गोल सुपाड़ा पिचक का चपटा होने लगता था.

चूची छोड़ कर मैं साक्षी के सर को पकड़ गिरगिड़ाते हुए बोला “हाय मौसी मेरा….निकल जाएगा….ओह…सी सी…. मौसी अपना मुंह….हटा लो…ओह मौसी ….बहुत गुदगुदी हो रही है…प्लीज मौसी ….ओह मुंह हटा लो….देखो मेरा….पानी निकल रहा है…..” मेरे इतना कहते ही मेरे लण्ड ने एक तेज पिचकारी छोड़ी. साक्षी ने जल्दी से अपना मुंह हटाया मगर तब भी मेरे लण्ड की तेज धार के साथ निकली हुई वीर्य की पिचकारी का पहला धार तो उनके मुंह में ही गिरा बाकी धीरे-धीरे पुच-पुच करते हुए उनके पेटिकोट एवं हाथ पर गिरने लगा जिस से उन्होंने लण्ड पकड़ रखा था.

मैं डरते हुए साक्षी का मुंह का मुंह देखने लगा की कही वो इस बात के लिए नाराज़ तो नहीं हो गई की मैंने अपना पानी उनके मुंह में गिरा दिया है. मगर मैंने देखा की साक्षी अपने मुंह को चलाती हुई जीभ निकाल कर अपने होंठो के कोने पर लगे मेरे सफ़ेद रंग के गाढे वीर्य को चाट रही थी. मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखते हुई बोली “हाय राजू…बहुत अच्छा पानी निकला…. बहुत मजा आया…तेरा हथियार बहुत अलबेला है…. ….बहुत पानी छोड़ता है….मजा आया की नहीं…बोल…कैसा लगा अपनी मासी के मुंह में पानी छोड़ना….हाय…तेरा लण्ड जिस बूर में पानी छोड़ेगा वो तो…एक दम लबालब भर जायेगी….”. साक्षी मासी एकदम खुल्ल्लम खुल्ला बोल रही थी. साक्षी के ऐसे बोलने पर मैं झड़ने के बाद भी सनसनी से भर शरमाया तो साक्षी मेरे झड़े लण्ड को मुठ्ठी में कसती हुई बोली “अनचुदे लौड़े की सही पहचान यही है…की उसका औजार एक पानी निकालने के बाद कितनी जल्दी खड़ा होता…. ” कहते हुए मेरे लण्ड को अपनी हथेली में भर कर सहलाते हुए सुपाड़े पर ऊँगली चलाने लगी. मेरे बदन में फिर से सनसनाहट होने लगी. झड़ने के कारण मेरे पैर अभी भी काँप रहे थे. साक्षी मेरी ओर मुस्कुराते हुए देख रह थी और बोली “इस बार जब तेरा निकलेगा तो और ज्यादा टाइम लगाएगा….वैसे भी तेरा काफी देर में निकलता है…..साला बहुत दमदार लौड़ा है तेरा….”

[/SIZE]
 
मैं शरमाते हुए साक्षी की तरफ देखा और बोला “हाय….फिर से…मत करो…हाथ से…”.

इस पर साक्षी बोली “ठहर जा…पहले खड़ा कर लेने दे…हाय देख खड़ा हो रहा है लौड़ा….वाह….बहुत तेजी से खड़ा हो रहा है तेरा तो….”. कहते हुए साक्षी और जोर से अपने हाथो को चलाने लगी.

]

“हाय साक्षी हाथ से मत करो….फिर निकल जाएगा….” मैं अपने खड़े होते लण्ड को देखते हुए बोला.

इस पर साक्षी ने मेरे गाल पकड़ खींचते हुए कहा “साले हाथ से करने के लिए तो मैंने खुद रोका था…हाथ से मैं कभी नहीं करुँगी….मेरे भानजे राजा का शरीर मैं बर्बाद नहीं होने दूंगी….”

फिर मेरे लण्ड को छोड़ कर अपने हाथ को साइड से अपनी पेटिकोट के अन्दर ले जा कर जांघो के बीच पता नहीं क्या, शायद अपनी बूर को छुआ और फिर हाथ निकाल कर ऊँगली दिखाती हुई बोली “हाय देख… मेरी चूत कैसे पनिया गई….बड़ा मस्त लण्ड है तेरा…जो भी देखेगी उसकी पनिया जायेगी….एक दम घोड़े के जैसा है…अनचुदी लौंडिया की तो फाड़ देगा तू….मेरे जैसी चुदी चुतो के लायक लौड़ा है….कभी किसी औरत की नंगी नहीं देखी है….”.

[IMG]]

साक्षी के इस तरह से बिना किसी लाज शर्म के बोलने के कारण मेरे अन्दर भी हिम्मत आ रही थी और मैं भी अपने आप को साक्षी के साथ खोलना चाह रहा था. साक्षी के ये बोलने पर मैंने शर्माने का नाटक करते हुए कहा “हाय साक्षी किसी की नहीं…बस एक बार वो ग्वालिन बाहर मुनिसिप्लिटी के नल पर सुबह-सुबह नहा रही थी….तब….”

साक्षी इस चहकती हुई बोली “हाँ..तब क्या …तब…”.

मैं गर्दन नीचे करते हुए बोला “वो..वो…तो…साक्षी कपड़े पहन कर नहा रही थी…बैठ कर…पैर मोड़ कर…..तो उसकी साड़ी बीच में से हट…हट गई…पर…काला…काला दिख रहा था….जैसे बाल हो….”

साक्षी हँसने लगी और बोली “अरे…वो तो झांटे होंगी….उसकी चूत की….बस इतना सा देख कर ही तेरा काम हो गया….मतलब तुने आजतक असल में किसी की नहीं देखी है…”

मैं शरमाते हुए बोला “अब पता नहीं साक्षी….मुझे….लगा वही होगी…इसलिए…”

साक्षी इस पर मुस्कुराते हुए बोली “ओह हो…मेरा प्यारा छोटा …..बेचारा….फिर तुझे और कोई नहीं मिली देखने के लिए जो मेरे कमरे में घुस गया….”

मैं इस पर साक्षी का थोड़ा सा विरोध करते हुए बोला “नहीं साक्षी….ऐसी बात नहीं है….वो तो….तो मैं….मेरे ऑफिस में भी बहुत सारी लड़कियाँ है मगर…..मगर….मुझे नहीं पता….ऐसा क्यों है….मगर मुझे आप से ज्यादा सुन्दर…कोई नहीं…..कोई भी नहीं….लगती….मुझे वो लड़कियाँ अच्छी नहीं…लगती प्लीज़ साक्षी मुझे माफ़ कर दो… मैं…मैं…आगे से ऐसा…..नहीं…”

इस पर साक्षी हँसने लगी और मुझे रोकते हुए बोली “अरे…रे…इतना घबराने की जरुरत नहीं है….मैं तो तुमसे इसलिए नाराज़ थी की तुम अपना शरीर बर्बाद कर रहे थे….मेरे भानजे को मैं इतनी अच्छी लगती हूँ की उसे कोई और लड़की अच्छी नहीं लगती….ये मेरे लिए गर्व की बात है मैं बहुत खुश हूँ….मुझे तो लग रहा था की मेरी उम्र बहुत ज्यादा हो चूँकि है इसलिए…..पर….इक्कीस साल का मेरा नौजवान भांजा मुझे इतना पसंद करता है ये तो मुझे पता ही नहीं था…” कहते हुए आगे बढ़ कर मेरे होंठो पर एक जोरदार चुम्मा लिया और फिर दुबारा अपने होंठो को मेरे होंठो से सटा कर मेरे होंठो को अपने होंठो के दबोच कर अपना जीभ मेरे मुंह में ठेलते हुए चूसने लगी.

[IMG]]

उसके होंठ चूसने के अंदाज से लगा जैसे मेरे कमसिन जवान होंठो का पूरा रस साक्षी चूस लेना चाहती हो. होंठ चूसते चूसते वो मेरे लण्ड को अपनी हथेली के बीच दबोच कर मसल रही थी. कुछ देर तक ऐसा करने के बाद जब साक्षी ने अपने होंठ अलग किये तो हम दोनों की सांसे फुल गई थी. मैं अपनी तेज बहकी हुई सांसो को काबू करता हुआ बोला “हाय साक्षी आप बहुत अच्छी हो….”

“अच्छा…बेटा मख्खन लगा रहा है….”

“नहीं साक्षी…आप सच में बहुत अच्छी हो….और बहुत सुन्दर हो….”

इस पर साक्षी हंसते हुए बोली “मैं सब मख्खनबाजी समझती हूँ मौसी को पटा कर नीचे लिटाने के चक्कर में…..है तू….”

मैं इस पर थोड़ा शर्माता हुआ बोला “हाय…नहीं साक्षी….आप….”

साक्षी ने गाल पर एक प्यार भरा चपत लगाते हुए कहा “हाँ…हाँ…बोल…..” मैं इस पर झिझकते हुए बोला ” वो साक्षी साक्षी…आप बोल रही थी की मैं….दि…दि…दिखा दूंगी….”.

साक्षी मुस्कुराते हुए बोली “दिखा दूंगी…क्या मतलब हुआ…क्या दिखा दूंगी….”

मैं हकलाता हुआ बोला ” वो….वो…साक्षी आपने खुद बोला था…की मैं….वो ग्वालिन वाली चीज़….”

“अरे ये ग्वालिन वाली चीज़ क्या होती है….ग्वालिन वाली चीज़ तो ग्वालिन के पास होगी…मेरे पास कहाँ से आएगी…खुल के बता ना राजू….मैं तुझे कोई डांट रही हूँ जो ऐसे घबरा रहा है…. क्या देखना है”

“साक्षी…वो…वो मुझे…चु….चु…”

“अच्छा तुझे चूची देखनी है….वो तो मैं तुझे दिखा दिया ना…यही तो है…ले देख…” कहते हुए अपनी ब्रा में कसी दोनों चुचियों के नीचे हाथ लगा उनको उठा कर उभारते हुए दिखाया.

[IMG]]

छोटी सी नीले रंग की ब्रा में कसी दोनों गोरी गदराई चूचियां और ज्यादा उभर कर नजरो के सामने आई तो लण्ड ने एक ठुनकी मारी, मगर दिल में करार नहीं आया. एक तो चूचियां ब्रा में कसी थी, नंगी नहीं थी दूसरा मैं चुत दिखाने की बात कर रहा था और साक्षी यहाँ चूची उभार कर दिखा रही थी. होंठो पर जीभ फेरते हुए बोला “हाय…नहीं…साक्षी आप समझ नहीं रही….वो वो दू…सरी वाली चीज़ चु…चु…चुत दिखाने….के लिए…”

“ओह हो…तो ये चक्कर है…. ये है ग्वालिन वाली चीज़…..साले ग्वालिन की नहीं देखने को मिली तो अपनी बड़ी मौसी की देखेगा….मैं सोच रही थी तुझे शरीर बर्बाद करने से नहीं रोकूंगी तो माँ को क्या बोलेगी….यहाँ तो उल्टा हो रहा है….देखो बहन…तुमने कैसा लाडला पैदा किया है….अपनी मौसी को बुर दिखने को बोल रहा है….हाय कैसा मादरचोद है मेरा भांजा….मेरी चुत देखने के चक्कर में है…उफ्फ्फ….मैं तो फंस गई हूँ…मुझे क्या पता था की मुठ मारने से रोकने की इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी….”

“साक्षी की ऐसे बोलने पर मेरा सारा जोश ठंडा पर गया. मैं सोच रहा था अब मामला फिट हो गया है और साक्षी ख़ुशी ख़ुशी सब कुछ दिखा देंगी. शायद उनको भी मजा आ रहा है, इसलिए कुछ और भी करने को मिल जायेगा मगर साक्षी के ऐसे अफ़सोस करने से लग रहा था जैसे कुछ भी देखने को नहीं मिलने वाला. मगर तभी साक्षी बोली “ठीक है मतलब तुझे चुत देखनी है….अभी बाथरूम से आती हूँ तो तुझे अपनी बुर दिखाती हूँ” कहती हुई बेड से नीचे उतर ब्लाउज के बटन बंद करने लगी.

मेरी कुछ समझ में नहीं आया की साक्षी अपना ब्लाउज क्यों बंद कर रही है मैं साक्षी के चेहरे की तरफ देखने लगा तो साक्षी आँख नचाते हुए बोली “चुत ही तो देखनी है…वो तो मैं पेटिकोट उठा कर दिखा दूंगी…” फिर तेजी से बाहर निकल बाथरूम चली गई. मैं सोच में पड़ गया मैं साक्षी को पूरा नंगा देखना चाहता था. मैं उनकी चूची और चुत दोनों देखना चाहता था और साथ में उनको चोदना भी चाहता था, पर वो तो बाद की बात थी पहले यहाँ साक्षी के नंगे बदन को देखने का जुगार लगाना बहुत जरुरी था. मैंने सोचा की मुझे कुछ हिम्मत से काम लेना होगा. साक्षी जब वापस रूम में आकर अपने पेटिकोट को घुटनों के ऊपर तक चढा कर बिस्तर पर बैठने लगी तो मैं बोला ” साक्षी….साक्षी…मैं….चू…चू…चूची भी देखना…चाहता हूँ”.

[IMG]]

साक्षी इस पर चौंकने का नाटक करती बोली “क्या मतलब…चूची भी देखनी है….चुत भी देखनी है….मतलब तू तो मुझे पूरा नंगा देखना चाहता है….हाय….बड़ा बेशर्म है….अपनी मौसी को नंगा देखना चाहता है….क्यों मैं ठीक समझी ना…तू अपनी साक्षी मौसी को नंगा देखना चाहता है…बोल, …ठीक है ना….”

मैं भी शरमाते हुए हिम्मत दिखाते बोला “हां साक्षी….मुझे आप बहुत अच्छी लगती हो….मैं….मैं आप को पूरा…नंगा देखना….चाहता…”

“बड़ा अच्छा हिसाब है तेरा….अच्छी लगती हो…..अच्छी लगने का मतलब तुझे नंगी हो कर दिखाऊ…कपड़ो में अच्छी नहीं लगती हूँ क्या….”

“हाय साक्षी मेरा वो मतलब नहीं था….वो तो आपने कहा था….फिर मैंने सोचा….सोचा….”

“हाय …तुने जो भी सोचा सही सोचा….मैं अपने भान्जे को दुखी नहीं देख सकती….मुझे ख़ुशी है की मेरा इक्कीस साल का नौजवान भांजा अपनी मौसी को इतना पसंद करता है की वो नंगा देखना चाहता है….हाय…मेरे रहते तुझे ग्वालिन जैसी औरतो की तरफ देखने की कोई जरुरत नहीं है….राजू मैं तुझे पूरा नंगा हो कर दिखाउंगी…..फिर तुम मुझे बताना की तुम अपनी साक्षी मौसी के साथ क्या-क्या करना चाहते हो….”.

[IMG]]

मेरी तो जैसे लाँटरी लग गई. चेहरे पर मुस्कान और आँखों में चमक वापस आ गई. साक्षी बिस्तर से उतर कर नीचे खड़ी हो गई और हंसते हुए बोली “पहले पेटिको़ट ऊपर उठाऊ या ब्लाउज खोलू…” मैंने मुस्कुराते हुए कहा “हाय साक्षी दोनों….खोलो….पेटिको़ट भी और ब्लाउज भी….”

“इस…॥स……स…।बेशर्म पूरा नंगा करेगा….चल तेरे लिए मैं कुछ भी कर दूंगी….अपने भान्जे के लिए कुछ भी…पहले ब्लाउज खोल लेती हूँ फिर पेटिको़ट खोलूंगी….चलेगा ना…” गर्दन हिला कर साक्षी ने पूछा तो मैंने भी सहमती में गर्दन हिलाते हुए अपने गालो को शर्म से लाल कर साक्षी को देखा. साक्षी ने चटाक-चटाक ब्लाउज के बटन खोले और फिर अपने ब्लाउज को खोल कर पीछे की तरफ घूम गई और मुझे अपनी ब्रा का हूकखोलने के लिए बोला [/SIZE]
 
मैंने कांपते हाथो से उनके ब्रा का हूक खोल दिया. साक्षी फिर सामने की तरफ घूम गई. साक्षी के घूमते ही मेरी आँखों के सामने साक्षी की मदमस्त, गदराई हुई मस्तानी कठोर चूचियां आ गई. मैं पहली बार अपनी साक्षी मौसी के इन गोरे गुब्बारों को पूरा नंगा देख रहा था. इतने पास से देखने पर गोरी चूचियां और उनकी ऊपर की नीली नसे, भूरापन लिए हुए गाढे गुलाबी रंग की उसकी निप्पले और उनके चारो तरफ का गुलाबी घेरा जिन पर छोटे-छोटे दाने जैसा उगा हुआ था सब नज़र आ रहा था. मैं एक दम कूद कर हाय करते हुए उछला तो साक्षी मुस्कुराती हुई बोली “अरे, रे इतना उतावला मत बन अब तो नंगा कर दिया है आराम से देखना….ले…देख…” कहती हुई मेरे पास आई.

]

मैं बिस्तर पर बैठा हुआ था और वो नीचे खड़ी थी इसलिए मेरा चेहरा उनके चुचियों के पास आराम से पहुँच रहा था. मैं चुचियों को ध्यान से से देखते हुए बोला “हाय…साक्षी पकड़े…”

“हाँ…हाँ….पकड़ ले जकड़…ले अब जब नंगा कर के दिखा रही हूँ तो…छूने क्यों नहीं दूंगी….ले आराम से पकड़ कर मजा कर……अपनी साक्षी मौसी की नंगी चुचियों से खेल….”

मैंने अपने दोनों हाथ बढा कर दोनों चुचियों को आराम से दोनों हाथो में थाम लिया. नंगी चुचियों के पहले स्पर्श ने ही मेरे होश उड़ा. उफ्फ्फ साक्षी की चूचियां कितनी गठीली और गुदाज थी, इसका अंदाजा मुझे इन मस्तानी चुचियों को हाथ में पकड़ कर ही हुआ. मेरा लण्ड फरफराने लगा. दोनों चुचियों को दोनों हथेली में कस हलके दबाब के साथ मसलते हुए चुटकी में निप्पल को पकड़ हलके से दबाया जैसे किशमिश के दाने को दबाते है. साक्षी के मुंह से एक हलकी सी आह निकल गई. मैंने घबरा कर चूची छोड़ी तो साक्षी ने मेरा हाथ पकड़ फिर से अपनी चुचियों पर रखते हुए दबाया तो मैं समझ गया की साक्षी को मेरा दबाना अच्छा लग रहा है और मैं जैसे चाहू इनकी चुचियों के साथ खेल सकता हूँ.

[IMG]]

गर्दन उचका कर चुचियों के पास मुंह लगा कर एक हाथ से चूची को पकड़ दबाते हुए दूसरी चूची को जैसे ही अपने होंठो से छुआ मुझे लगा जैसे साक्षी गनगना गई उनका बदन सिहर गया. मेरे सर के पीछे हाथ लगा बालों में हाथ फेरते हुए मेरे सर को अपनी चुचियों पर जोर से दबाया. मैंने भी अपने होंठो को खोलते हुए उनकी चुचियों के निप्पल सहित जितना हो सकता था उतना उनकी चुचियों को अपने मुंह में भर लिया और चूसते हुए अपनी जीभ को निप्पल के चारो तरफ घुमाते हुए चुमलाया तो साक्षी सिसयाते हुए बोली “आह….आ…हा….सी…सी….ये क्या कर रहा है…उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़…..मार डाला….साले मैं तो तुझे अनारी समझती थी….मगर….तू….तो खिलाड़ी निकला रे…..हाय…चूची चूसना जानता है…..मैं सोच रही थी सब तेरे को सिखाना पड़ेगा….हाय…चूस बेटा…सीईई….ऐसे ही निप्पल को मुंह में लेकर चूस और चूची दबा….हाय रस निकाल बहुत दिन हो गए…..”

[IMG]]

अब तो मैं जैसे भूखा शेर बन गया और साक्षी की चुचियों को मुंह में भर ऐसे चूसने लगा जैसे सही में उसमे से रस निकल कर खा जाऊंगा. कभी बाई चूची को कभी दाहिनी चूची को मुंह में भर भर कर लेते हुए निप्पलों को अपने होंठो के बीच दबा दबा कर चूसते हुए रबर की तरह खींच रहा था. चुचियों के निप्पल के चारो तरफ के घेरे में जीभ चलाते हुए जब दुसरे हाथ से साक्षी की चूची को पकड़ कर दबाते हुए निप्पल को चुटकी में पकड़ कर खींचा तो मस्ती में लहराते हुए साक्षी लड़खड़ाती आवाज़ में बोली “हाय राजू….सीईई…ई…उफ्फ्फ्फ्फ्फ….चूस ले…..पूरा रस चूस…..मजा आ रहा है….तेरी साक्षी को बहुत मजा आ रहा है बेटा…..हाय तू तो चूची को क्रिकेट की गेंद समझ कर दबा रहा है….मेरे निप्पल क्या मुंह में ले चूस….तू बहुत अच्छा चूसता है….हाय मजा आ गया बेटा….पर क्या तू चूची ही चूसता रहेगा…..बूर नहीं देखेगा अपनी साक्षी मौसी की चुत नहीं देखनी है तुझे…..हाय उस समय से मरा जा रहा था और अभी….जब चूची मिल गई तो उसी में खो गया है….हाय चल बहुत दूध पी लिया…..अब बाद में पीना” मेरा मन अभी भरा नहीं था इसलिए मैं अभी भी चूची पर मुंह मारे जा रहा था. इस पर साक्षी ने मेरे सर के बालों को पकड़ कर पीछे की तरफ खींचते हुए अपनी चूची से मेरा मुंह अलग किया और बोली “साले….हरामी….चूची…छोड़….कितना दूध पिएगा….हाय अब तुझे अपनी नीचे की सहेली का रस पिलाती हु….चल हट माधरचोद…..”

[IMG]]

गाली देने से मुझे अब कोई फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि मैं समझ गया था की ये तो साक्षी का शगल है और शायद मार भी सकती है अगर मैं इसके मन मुताबिक ना करू तो. पर दुधारू गाये की लथार तो सहनी ही पड़ती है. इसकी चिंता मुझे अब नहीं थी. साक्षी लगता था अब गरम हो चूँकि थी और चुदवाना चाहती थी. मैं पीछे हट गया और साक्षी के पेट पर चुम्मा ले कर बोला “हाय साक्षी बूर का रस पिलाओगी…हाय जल्दी से खोलो ना…”

साक्षी पेटिको़ट के नाड़े को झटके के साथ खोलती हुई बोली “हा राजा मेरे प्यारे बेटा….अब तो तुझे पिलाना ही पड़ेगा…ठहर जा अभी तुझे पिलाती अपनी चुत पूरा खोल कर उसकी चटनी चटाऊंगी फिर…देखना तुझे कैसा मजा आता है….” पेटिको़ट सरसराते हुए नीचे गिरता चला गया पैंटी तो पहनी नहीं थी इसलिए पेटिको़ट के नीचे गिरते ही साक्षी पूरी नंगी हो गई.

[IMG]]

मेरी नजर उनके दोनों जन्घो के बीच के तिकोने पर गई. दोनों चिकनी मोटी मोटी रानो के बीच में साक्षी की बूर का तिकोना नज़र आ रहा था. चुत पर हलकी झांटे उग आई थी. मगर इसे झांटो का जंगल नहीं कह सकते थे. ये तो चुत की खूबसूरती को और बढा रहा था. उसके बीच साक्षी की गोरी गुलाबी चुत की मोटी फांके झांक रही थी. दोनों जांघ थोड़ा अलग थे फिर भी चुत की फांके आपस में सटी हुई थी और जैसा की मैंने बाथरूम में पीछे से देखा था एक वैसा तो नहीं मगर फिर भी एक लकीर सी बना रही थी दोनों फांके. साक्षी की कमर को पकड़ सर को झुकाते हुए चुत के पास ले जाकर देखने की कोशिश की तो साक्षी अपने आप को छुड़ाते हुए बोली “हाय…बेटा ऐसे नहीं….ऐसे ठीक से नहीं देख पाओगे….दोनों जांघ फैला कर अभी दिखाती हूँ…फिर आराम से बैठ कर मेरी बूर को देखना और फिर तुझे उसके अन्दर का माल खिलाउगीं…घबरा मत बेटा…मैं तुझे अपनी चुत पूरा खोल कर दिखाउंगी और…।उसकी चटनी भी चटाउगीं…चल छोड़ कहते हुए पीछे मुड़ी.
 
पीछे मुड़ते ही साक्षी गुदाज चुत्तर और गांड मेरी आँखों के सामने नज़र आ गए. साक्षी चल रही थी और उसके दोनों चुत्तर थिरकते हुए हिल रहे थे और आपस में चिपके हुए हिलते हुए ऐसे लग रहे थे जैसे बात कर रहे हो और मेरे लण्ड को पुकार रहे हो. लौड़ा दुबारा अपनी पूरी औकात पर आ चूका था और फनफना रहा था.

]

साक्षी ड्रेसिंग टेबल के पास रखे गद्देदार सोफे वाली कुर्सी पर बैठ गई और हाथो के इशारे से मुझे अपने पास बुलाया और बोली “हाय…बेटा…आ जा तुझे मजे करवाती हूँ….अपने मालपुए का स्वाद चखाती हूँ….देख बेटा मैं इस कुर्सी के दोनों हत्थों पर अपनी दोनों टांगो को रख कर जांघ टिका कर फैलाऊंगी ना तो मेरी चूत पूरी उभर कर सामने आ जायेगी और फिर तुम उसके दोनों फांको को अपने हाथ से फैला कर अन्दर का माल चाटना….इस तरह से तुम्हारी जीभ पूरा बूर के अन्दर घुस जायेगी….ठीक है बेटा…आ जा….जल्दी कर….अभी एक पानी तेरे मुंह में गिरा देती हूँ फिर तुझे पूरा मजा दूंगी….”

मैं जल्दी से बिस्तर छोड़ साक्षी की कुर्सी के पास गया और जमीं पर बैठ गया.

[IMG]]

साक्षी ने अपने दोनों पैरो को सोफे के हत्थों के ऊपर चढा कर अपनी दोनों जांघो को फैला दिया. रानो के फैलते ही साक्षी की चूत उभर कर मेरी आँखों के सामने आ गई. उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़….क्या खूबसूरत चूत थी. गोरी गुलाबी….काले काले झांटो के जंगल के बीच में से झांकती ऐसी लग रही थी जैसे बादलो के पीछे से चाँद मुस्कुरा रहा है. एक दम पावरोटी के जैसी फूली हुई चूत थी. दोनों पैर कुर्सी के हत्थों के ऊपर चढा कर फैला देने के बाद भी चूत के दोनों होंठ अलग नहीं हुए थे. चूत पर ऊपर के हिस्से में झांटे थी मगर नीचे गुलाबी कचौरी जैसे होंठो के आस पास एक दम बाल नहीं थे. मैं जमीन पर बैठ कर साक्षी के दोनों रानो पर दोनों हाथ रख कर गर्दन झुका कर एक दम ध्यान से साक्षी की चूत को देखने लगा. चूत के सबसे ऊपर में किसी तोते के लाल चोंच की तरह बाहर की तरफ निकली हुई साक्षी के चूत का भागनाशा था.

[IMG]]

कचौरी के जैसी चूत के दोनों फांको पर अपना हाथ लगा कर दोनों फांको को हल्का सा फैलाती हुई साक्षी बोली “राजू….ध्यान से देख ले….अच्छी तरह से अपनी साक्षी मौसी की बूर को देख बेटा….चूत फैला के देखेगा तो तुझे….पानी जैसा नज़र आएगा….उसको चाट का अच्छी तरह से खाना….चूत की असली चटनी वही है….”

साक्षी के चूत के दोनों होंठ फ़ैल और सिकुड रहे थे. मैंने अपनी गर्दन को झुका दिया और जीभ निकल कर सबसे पहले चूत के आस पास वाले भागो को चाटने लगा. रानो के जोर और जांघो को भी चाटा. जांघो को हल्का हल्का काटा भी फिर जल्दी से साक्षी की चूत पर अपने होंठो को रख कर एक चुम्मा लिया और जीभ निकाल कर पूरी दरार पर एक बार चलाया.

जीभ छुलाते ही साक्षी सिसया उठी और बोली “सीईई….बहुत अच्छा बेटा…तुम्हे आता है…मुझे लग रहा था की सिखाना पड़ेगा मगर तू तो बहुत होशियार है….हाय….बूर चाटना आता है…. ऐसे ही….राजू तुने शुरुआत बहुत अच्छी की है….अब पूरी चूत पर अपनी जीभ फिराते हुए…॥मेरी बूर की टीट को पहले अपने होंठो के बीच दबा कर चूस…देख मैं बताना भूल गई थी….चूत के सबसे ऊपर में जो लाल-लाल निकला हुआ है ना….उसी को होंठो के बीच दबा के चूसेगा….तब मेरी चूत में रस निकलने लगेगा….फिर तू आराम से चाट कर चूसना….सीईईई…..राजू मैं जैसा बताती हूँ वैसा ही कर….”

[IMG]]

मैं तो पहले से ही जानता था की टीट या भागनाशा क्या होती है. मुझे बताने की जरुरत तो नहीं थी पर साक्षी ने ये अच्छा किया था की मुझे बता दिया था की कहाँ से शुरुआत करनी है. मैंने अपने होंठो को खोलते हुए टीट को मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया. टीट को होंठो के बीच दबा कर अपनी दांतों से हलके हलके काटते हुए मैं उस पर अपने होंठ रगर रहा था. टीट और उसके आस पास ढेर सारा थूक लग गया था और एक पल के लिए जब मैंने वह से अपना मुंह हटाया तो देखा की मेरी चुसाई के कारण टीट चमकने लगी है. एक बार और जोर से टीट को पूरा मुंह में भर कर चुम्मा लेने के बाद मैंने अपनी जीभ को करा करके पूरी चूत की दरार में ऊपर से नीचे तक चलाया और फिर चूत के एक फांक को अपने दाहिने हाथ की उँगलियों से पकड़ कर हल्का सा फैलाया. चूत की गुलाबी छेद मेरी आँखों के सामने थी. जीभ को टेढा कर चूत के मोटे फांक को अपने होंठो के बीच दबा कर चूसने लगा. फिर दूसरी फांक को अपने मुंह में भर कर चूसा उसके बाद दोनों फांक को आपस में सटा कर पूरी चूत को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा. चूत से रिस रिस कर पानी निकल रहा था और मेरे मुंह में आ रहा था. चूत का नमकीन पानी शुरू में तो उतना अच्छा नहीं लगा पर कुछ देर के बाद मुझे कोई फर्क नहीं पर रहा था और मैं दुगुने जोश के साथ पूरी चूत को मुंह में भर कर चाट रहा था.

[IMG]]

साक्षी को भी मजा आ रहा था और वही कुर्सी पर बैठे-बैठे अपने चुतड़ों को ऊपर

उछालते हुए वो जोश में आ कर मेरे सर को अपने दोनों हाथो से अपनी चूत पर दबाते हुए बोली “हाय राजू….बहुत अच्छा कर रहा है

[IMG]]

उछलते हुए वो जोश में आ कर मेरे सर को अपने दोनों हाथो से अपनी चूत पर दबाते हुए बोली “हाय राजू….बहुत अच्छा कर रहा है….राजा…..हाय……सीईई….बड़ा मजा आ रहा है….हाय मेरी चूत के कीड़े….मेरे सैयां…..ऊऊऊउ…सीईईइ…..खाली ऊपर-ऊपर से चूस रहा है…. बहनचोद….जीभ अन्दर घुसा कर चाट ना…..बूर में जीभ पेल दे और अन्दर बाहर कर के जीभ से मेरी चूत चोदते हुए अच्छी तरह से चाट….अपनी साक्षी मौसी की चूत अच्छी तरह से चाट मेरे राजा….मादरचोद ….ले ले…..ऊऊऊऊ……इस्स्स्स्स्स…घुसा चूत में जीभ….मथ….दे…….” मौसी साक्षी बहुत जोश में आ चुकी थी और लग रहा था की उनको काफी मजा आ रहा है. उनके इतना बोलने पर मैंने दोनों हाथो की उँगलियों से दोनों फान्को को अलग कर के अपनी जीभ को कड़ा करके चूत में पेल दिया. जीभ को चूत के अन्दर बाहर करते हुए लिबलिबाने लगा और बीच बीच में बूर से चूते रस को जीभ टेढा करके चूसने लगा.

[IMG]]

साक्षी की दोनों जांघे हिल रही थी और मैं दोनों जांघो को कस कर हाथ से पकड़ कर चूत में जीभ पेल रहा था. जांघो को मसलते हुए बीच बीच में जीभ को आराम देने के लिए मैं जीभ निकल कर जांघो और उसके आस-पास चुम्मा लेने लगता था. मेरे ऐसा करने पर साक्षी जोर से गुर्राती और फिर से मेरे बालों को पकड़ कर अपनी चूत के ऊपर मेरा मुंह लगा देती थी. साक्षी मेरी चुसी से बहुत खुश थी और चिल्लाती हुई बोल रही थी “हाय….राजा…जीभ बाहर मत निकालो….हाय बहुत मजा आ रहा है…ऐसे ही…. बूर के अन्दर जीभ डाल के मेरी चूत मथते रहो….हाय चोद….दे मादरचोद ….अपनी जीभ से अपनी साक्षी मौसी की बूर चोद दे….हाय सैयां….बहुत दिनों के बाद ऐसा मजा आया है….इतने दिनों से तड़पती घूम रही थी….हाय हाय….अपनी साक्षी मौसी की बूर को चाटो….मेरे राजा….मेरे बालम…. तुझे बहुत अच्छा इनाम दूंगी…. [IMG]]

भोसड़ीवाले…..तेरा लौड़ा अपनी चूत में लुंगी….आजतक तुने किसी की चोदी नहीं है ना….तुझे चोदने का मौका दूंगी….अपनी चूत तेरे से मरवाऊगीं….मेरे भानजे…..मेरे सोना मोना….मन लगा कर साक्षी की चूत चाट….मेरा पानी निकलेगा….तेरे मुंह में….हाय जल्दी जल्दी चाट….पूरा जीभ अन्दर डाल कर सीईई…..”.

[IMG]]
 
साक्षी पानी छोड़ने वाली है ये जान कर मैंने अपनी पूरी जीभ चूत के अन्दर पेल दी और अंगूठे को टीट के उ़पर रख कर रगड़ते हुए जोर जोर से जीभ अन्दर बाहर करने लगा. साक्षी अब और तेजी के साथ गांड उछाल रही थी और मैं लप लप करते हुए जीभ को अन्दर बाहर कर रहा था. कुत्ते की तरह से साक्षी की बूर चाटते हुए टीट को रगड़ते हुए कभी कभी साक्षी की चूत पर दांत भी गढ़ा देता था, मगर इन सब चीजों का साक्षी के ऊपर कोई असर नहीं पर रहा था और वो मस्ती में अब गांड को हवा में लहराते हुए सिसया रही थी “हाय मेरा निकल रहा है….हाय बेटा…निकल रहा है मेरा पानी….पूरा जीभ घुसा दे….साले…..बहुत अच्छा….ऊऊऊऊऊ…..सीईईईईईइ….मजा आ गया राजा…मेरे चूत चाटू सैयां….मेरी चूत पानी छोड़ रही है………..इस्स्स्स्स्स्स्स्स……मजा आ गया….बहनचोद….पी ले अपनी साक्षी मौसी के बूर का पानी….हाय चूस ले अपनी साक्षी मौसी की जवानी का रस…..ऊऊऊऊ…….गांडू……” साक्षी अपनी गांड को हवा में लहराते हुए झड़ने लगी और उनकी चूत से पानी बहता हुआ मेरी जीभ को गीला करने लगा.

]

मैंने अपना मुंह साक्षी की चूत पर से हटा दिया और अपनी जीभ और होंठो पर लगे चूत के पानी को चाटते हुए साक्षी को देखा. वो अपनी आँखों को बंद किये शांत पड़ी हुई थी और अपनी गर्दन को कुर्सी के पुश्त पर टिका कर ऊपर की ओर किये हुए थी. उनकी दोनों जांघे वैसे ही फैली हुई थी. पूरी चूत मेरी चुसाई के कारण लाल हो गई थी और मेरे थूक और लार के कारण चमक रही थी. साक्षी आंखे बंद किये गहरी सांसे ले रही थी और उनके माथे और छाती पर पसीने की छोटी-छोटी बुँदे चमक रही थी. मैं वही जमीन पर बैठा रहा और साक्षी की चूत को गौर से देखने लगा. साक्षी को सुस्त पड़े देख मुझे और कुछ नहीं सूझा तो मैं उनके जांघो को चाटने लगा.

[IMG]]

चूँकि साक्षी ने अपने दोनों पैरों को मोड़ कर जांघो को कुर्सी के पुश्त से टिका कर रखा हुआ था इसलिए वो एक तरह से पैर मोड़ कर अधलेटी सी अवस्था में बैठी हुई थी और साक्षी की गांड मेरा मतलब है चूतड़ आधी कुर्सी पर और आधी बाहर की तरफ लटकी हुई थी. ऐसे बैठने के कारण उनके गांड की भूरी छेद मेरी आँखों से सामने थी. छोटी सी भूरे रंग की सिकुड़ी हुई छेद किसी फूल की तरह लग रही थी और मेरे लिए अपना सपना पूरा करने का इस से अच्छा अवसर नहीं था. मैं हलके से अपनी एक ऊँगली को साक्षी की चूत के मुंह के पास ले गया और चूत के पानी में अपनी ऊँगली गीली कर के चुतड़ों के दरार में ले गया.

दो तीन बार ऐसे ही करके पूरी गांड की खाई को गीला कर दिया फिर अपनी ऊँगली को पूरी खाई में चलाने लगा. धीरे धीरे ऊँगली को गांड की छेद पर लगा कर हलके-हलके केवल छेद की मालिश करने लगा. कुछ देर बाद मैंने थोड़ा सा जोर लगाया और अपनी ऊँगली के एक पोर को गांड की छोटी सी छेद में घुसाने की कोशिश की. ज्यादा तो नहीं मगर बस थोड़ी सी ऊँगली घुस गई मैंने फिर ज्यादा जोर नहीं लगाया और उतना ही घुसा कर अन्दर बाहर करते हुए गांड की छेद का मालिश करने लगा. बड़ा मजा आ रहा था. मेरे दिल की तम्मना पूरी हो गई.

[IMG]]

बाथरूम में नहाते समय जब साक्षी को देखा था तभी से सोच रहा था की एक बार इस गांड की दरार में ऊँगली चलाऊंगा और इसकी छेद में ऊँगली डाल कर देखूंगा कैसा लगता है इस सिकुड़ी हुई भूरे रंग की छेद में ऊँगली पेलने पर. मस्त राम की किताबों में तो लिखा होता है की लण्ड भी घुसेड़ा जाता है. पर गांड की सिकुड़ी हुई छेद इतनी टाइट लग रही थी की मुझे विश्वास नहीं हो रहा था की लण्ड उसके अन्दर घुसेगा. खैर दो तीन मिनट तक ऐसे ही मैं करता रहा. साक्षी की बूर से पानी बाहर की निकल कर धीरे धीरे रिस रहा था. मैंने दो तीन बार अपना मुंह लगा कर बाहर निकलते रस को भी चाट लिया और गांड में धीरे धीरे ऊँगली करता रहा.

तभी साक्षी ने मुझे पीछे धकेला “हट…मादरचोद ….क्या कर रहा है….गांड मारेगा क्या….फिर अपने पैर से मेरी छाती को पीछे धकेलती हुई उठ कर खड़ी हो गई. मैं हड़बड़ाता हुआ पीछे की तरफ गिरा फिर जल्दी से उठ कर खड़ा हो गया. मेरा लण्ड पूरा खड़ा हो कर नब्बे डिग्री का कोण बनाते हुए लप-लप कर रहा था मगर साक्षी के इस अचानक हमले ने फिर एक झटका दिया. मैं डर कर दो कदम पीछे हुआ. साक्षी नंगी ही बाहर निकल गई लगता था फिर से बाथरूम गई थी. मैं वही खड़ा सोचने लगा की अब क्या होगा. थोड़ी देर बाद साक्षी फिर से अन्दर आई और बिस्तर पर बैठ गई और मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा फिर मेरे लपलपाते लण्ड को देखा और अंगढ़ाई लेती हुई बोली “हाय राजू बहुत मजा आया….अच्छा चूसता है…तू….

“मुझे लग रहा था की तू अनाड़ी होगा मगर तुने तो अपने बहनोई को भी मात कर दिया….उस साले को चूसना नहीं आता था…खैर उसका क्या…उस भोसड़ीवाले को तो चोदना भी नहीं आता था….तुने चाट कर अच्छा मजा दिया… इधर आ,……आ ना…वहां क्यों खड़ा है बेटा…..आ यहाँ बिस्तर पर बैठ….”

साक्षी के इस तरह बोलने पर मुझे शांति मिली की चलो नाराज़ नहीं है और मैं बिस्तर पर आ कर बैठ गया. साक्षी मेरे लण्ड की तरफ देखती बोली “हूँ….खड़ा हो गया है….इधर आ तो पास में….देखू….”
 
]

मैं खिसक कर पास में गया तो मेरे लण्ड को मुठ्ठी में कसती हुई सक-सक ऊपर नीचे किया. लाल-लाल सुपाड़े पर से चमड़ी खिसका. उस पर ऊँगली चलाती हुई बोली “अब कभी हाथ से मत करना…..समझा अगर मैंने पकड़ लिया तो तेरी खैर नहीं…..मारते मारते गांड फुला दूंगी….समझा….”

[IMG]]

मैं साक्षी के इस धमकी को सुन नासमझ बनने का नाटक करता हुआ बोला “तो फिर कैसे करू….मेरी तो शादी भी नहीं हुई है….” फिर गर्दन झुका कर शरमाने का नाटक किया.

साक्षी ने मेरी ठोडी पकड़ गर्दन को ऊपर उठाते हुए कहा “जानता तो तू सब कुछ है…..फिर कोई लड़की क्यों नहीं पटाता अभी तो तेरी शादी में टाइम है…..अपने लिए कोई छेद खोज ले….”

मैं बुरा सा मुंह बनाता हुआ बोला “हुह…मुझे कोई अच्छी नहीं लगती…सब बस ऐसे ही है…..”

साक्षी इस पर थोड़ा सा खुंदक खाती हुई बोली “अजीब लड़का है…बहनचोद…तुझे अपनी मौसी के अलावा और कोई अच्छी नहीं लगती क्या…..”.

[IMG]]

मैं इस पर शर्माता हुआ बोला “…मुझे सबसे ज्यादा आप अच्छी लगती हो……मैं…..”

“आये…।हाय…ऐसा तो लड़का ही नहीं देखा…। मौसी को चोदने के चक्कर में….भोसड़ीवाले को सबसे ज्यादा बहन अच्छी लगती है…. मैं नहीं मिली तो……मुठ मारता रह जायेगा…॥” साक्षी ने आँख नाचते हुए भौं उचका कर प्रश्न किया.

मैंने मुस्कुराते हुए गाल लाल करते हुए गर्दन हिला कर हाँ किया.

मेरी इस बात पर रीझती हुई साक्षी ने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और अपनी छाती से लगाती हुई बोली “हाय रे मेरा सोना….मेरे प्यारे बेटा…. तुझे साक्षी सबसे अच्छी लगती है….तुझे मेरी चूत चाहिए….मिलेगी मेरे प्यारे बेटा मिलेगी….मेरे राजा….आज रात भर अपने हलब्बी लण्ड से अपनी साक्षी मौसी की बूर का बाजा बजाना……अपने भानजे राजा का लण्ड अपनी चूत में लेकर मैं सोऊगीं……हाय राजा…॥अपने मुसल से अपनी साक्षी मौसी की ओखली को रात भर खूब कूटना…..अब मैं तुझे तरसने नहीं दूंगी….तुझे कही बाहर जाने की जरुरत नहीं है…..चल आ जा…..आज की रात तुझे जन्नत की सैर करा दू…..” फिर साक्षी ने मुझे धकेल कर नीचे लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे होंठो को चूसती हुई अपनी गठीली चुचियों को मेरी छाती पर रगड़ते हुए मेरे बालों में अपना हाथ फेरते हुए चूमने लगी.

[IMG]]

मैं भी साक्षी के होंठो को अपने मुंह में भरने का प्रयास करते हुए अपनी जीभ को उनके मुंह में घुसा कर घुमा रहा था. मेरा लण्ड साक्षी की दोनों जांघो के बीच में फस कर उसकी चूत के साथ रगड़ खा रहा था.

[IMG]]

साक्षी भी अपना गांड नाचते हुए मेरे लण्ड पर अपनी चूत को रगड़ रही थी और कभी मेरे होंठो को चूम रही थी कभी मेरे गालो को काट रही थी. कुछ देर तक ऐसे ही करने के बाद मेरे होंठो को छोड़ का उठ कर मेरी कमर पर बैठ गई. और फिर आगे की ओर सरकते हुए मेरी छाती पर आकर अपनी गांड को हवा में उठा लिया और अपनी हलके झांटो वाली गुलाबी खुश्बुदार चूत को मेरे होंठो से सटाती हुई बोली “जरा चाट के गीला कर… बड़ा तगड़ा लण्ड है तेरा…सुखा लुंगी तो…..साली फट जायेगी मेरी तो…..”

[IMG]]

एक बार मुझे साक्षी की चूत का स्वाद मिल चूका था, इसके बाद मैं कभी भी उनकी गुदाज कचौरी जैसी चूत को चाटने से इंकार नहीं कर सकता था, मेरे लिए तो साक्षी की बूर रस का खजाना थी. तुंरत अपने जीभ को निकाल दोनों चुतड़ों पर हाथ जमा कर लप लप करता हुआ चूत चाटने लगा. इस अवस्था में साक्षी को चुतड़ों को मसलने का भी मौका मिल रहा था और मैं दोनों हाथो की मुठ्ठी में चूतड़ के मांस को पकड़ते हुए मसल रहा था और चूत की लकीर में जीभ चलाते हुए अपनी थूक से बूर के छेद को गीला कर रहा था. वैसे साक्षी की बूर भी ढेर सारा रस छोड़ रही थी. जीभ डालते ही इस बात का अंदाज हो गया की पूरी चूत पसीज रही है, इसलिए साक्षी की ये बात की वो चटवा का गीला करवा रही थी हजम तो नहीं हुई, मगर मेरा क्या बिगर रहा था मुझे तो जितनी बार कहती उतनी बार चाट देता.

[IMG]]

कुछ ही देर साक्षी की चूत और उसकी झांटे भी मेरी थूक से गीली हो गई. साक्षी दुबारा से गरम भी हो गई और पीछे खिसकते हुए वो एक बार फिर से मेरी कमर पर आ कर बैठ गई और अपने हाथ से मेरे तनतनाये हुए लण्ड को अपनी मुठ्ठी में कस हिलाते हुए अपने चुतड़ों को हवा में उठा लिया और लण्ड को चूत के होंठो से सटा कर सुपाड़े को रगड़ने लगी. सुपाड़े को चूत के फांको पर रगड़ते चूत के रिसते पानी से लण्ड की मुंडी को गीला कर रगड़ती रही. मैं बेताबी से दम साधे इस बात का इन्तेज़ार कर रहा था की कब साक्षी अपनी चूत में मेरा लौड़ा लेती है.

मैं नीचे से धीरे-धीरे गांड उछाल रहा था और कोशिश कर रहा था की मेरा सुपाड़ा उनके बूर में घुस जाये. मुझे गांड उछालते देख साक्षी मेरे लण्ड के ऊपर मेरे पेट पर बैठ गई और चूत की पूरी लम्बाई को लौड़े की औकात पर चलाते हुए रगड़ने लगी तो मैं सिस्याते हुए बोला “साक्षी प्लीज़….ओह….सीईई अब नहीं रहा जा रहा है….जल्दी से अन्दर कर दो ना…..उफ्फ्फ्फ्फ्फ……ओह साक्षी….बहुत अच्छा लग रहा है….और तुम्हारी चु…चु….चु….चूत मेरे लण्ड पर बहुत गर्म लग रही है….ओह साक्षी…जल्दी करो ना….क्या तुम्हारा मन नहीं कर रहा है…..”

अपनी गांड नचाते हुए लण्ड पर चूत रगड़ते हुए साक्षी बोली “हाय…बेटा जब इतना इन्तेजार किया है तो थोड़ा और इन्तेजार कर लो….देखते रहो….मैं कैसे करती हूँ….मैं कैसे तुम्हे जन्नत की सैर कराती हूँ….मजा नहीं आये तो अपना लौड़ा मेरी गांड में घुसेड़ देना…..मादरचोद ….अभी देखो मैं तुम्हारा लण्ड कैसे अपनी बूर में लेती हूँ…..लण्ड सारा पानी अपनी चूत से पी लुंगी…घबराओ मत…..राजू अपनी साक्षी मौसी पर भरोसा रखो….ये तुम्हारी पहली चुदाई है….इसलिए मैं खुद से चढ़ कर करवा रही हूँ….ताकि तुम्हे सिखने का मौका मिल जाये….देखो…मैं अभी लेती हूँ……” फिर अपनी गांड को लण्ड की लम्बाई के बराबर ऊपर उठा कर एक हाथ से लण्ड पकड़ सुपाड़े को बूर की दोनों फांको के बीच लगा दुसरे हाथ से अपनी चूत के एक फांक को पकड़ कर फैला कर लण्ड के सुपाड़े को उसके बीच फिट कर ऊपर से नीचे की तरफ कमर का जोर लगाया. चूत और लण्ड दोनों गीले थे. मेरे लण्ड का सुपाड़ा वो पहले ही चूत के पानी से गीला कर चुकी थी इसलिए सट से मेरा पहाड़ी आलू जैसा लाल सुपाड़ा अन्दर दाखिल हुआ. तो उसकी चमड़ी उलट गई.

मैं आह करके सिस्याया तो साक्षी बोली “बस हो गया बेटा…हो गया….एक तो तेरा लण्ड इंतना मोटा है…..मेरी चूत एक दम टाइट है….घुसाने में….ये ले बस दो तीन और….उईईईइ माँ…..सीईईईई….बहनचोद का….इतना मोटा…..हाय…य य य…..उफ्फ्फ्फ्फ़….” करते हुए गप गप दो तीन धक्का अपनी गांड उचकाते चूतड़ उछालते हुए लगा दिए. पहले धक्के में केवल सुपाड़ा अन्दर गया था दुसरे में मेरा आधा लण्ड साक्षी की चूत में घुस गया था, जिसके कारण वो उईईई माँ करके चिल्लाई थी मगर जब उन्होंने तीसरा धक्का मारा था तो सच में उनकी गांड भी फट गई होगी ऐसा मेरा सोचना है. क्योंकि उनकी चूत एकदम टाइट मेरे लण्ड के चारो तरफ कस गई थी और खुद मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था और लग रहा जैसे लण्ड को किसी गरम भट्टी में घुसा दिया हो. मगर साक्षी अपने होंठो को अपने दांतों तले दबाये हुए कच-कच कर गांड तक जोर लगाते हुए धक्का मारती जा रही थी.

[IMG]]

तीन चार और धक्के मार कर उन्होंने मेरा पूरा नौ इंच का लण्ड अपनी चूत के अन्दर धांस लिया और मेरे छाती के दोनों तरफ हाथ रख कर धक्का लगाती हुई चिल्लाई “उफ्फ्फ्फ्फ़….बहन के लौड़े….कैसा मुस्टंडा लौड़ा पाल रखा है….ईई….हाय….गांड फट गई मेरी तो…..हाय पहले जानती की….ऐसा बूर फारु लण्ड है तो….सीईईईइ…..बेटा आज तुने….अपनी साक्षी मौसी की फाड़ दी….ओह सीईईई….लण्ड है की लोहे का राँड….उईईइ माँ…..गई मेरी चूत आज के बाद….साला किसी के काम की नहीं रहेगी….है….हाय बहुत दिन संभाल के रखा था….फट गई….रे मेरी तो हाय मरी….” इस तरह से बोलते हुए वो ऊपर से धक्का भी मारती जा रही थी और मेरा लण्ड अपनी चूत में लेती भी जा रही थी.

[IMG]]

तभी अपने होंठो को मेरे होंठो पर रखती हुई जोर जोर से चूमती हुई बोली “हाय….मादरचोद ….आराम से नीचे लेट कर बूर का मजा ले रहा है….भोसड़ी….के….मेरी चूत में गरम लोहे का राँड घुसा कर गांड उचका रहा है….उफ्फ्फ्फ्फ्फ…बेटा अपनी साक्षी मौसी कुछ आराम दो….हाय मेरी दोनों लटकती हुई चूचियां तुम्हे नहीं दिख रही है क्या…उफ्फ्फ्फ्फ़…उनको अपने हाथो से दबाते हुए मसलो और….मुंह में ले कर चूसो बेटा….इस तरह से मेरी चूत पसीजने लगेगी और उसमे और ज्यादा रस बनेगा…फिर तुम्हारा लौड़ा आसानी से अन्दर बाहर होगा….हाय राजू ऐसा करो मेरे राजा….तभी तो साक्षी को मजा आएगा और….वो तुम्हे जन्नत की सैर कराएगी….सीईई…”

[IMG]]
 
साक्षी के ऐसा बोलने पर मैंने दोनों हाथो से साक्षी की दोनों लटकती हुई चुचियों को अपनी मुठ्ठी में कैद करने की कोशिश करते हुए दबाने लगा और अपने गर्दन को थोड़ा नीचे की तरफ झुकाते हुए एक चूची को मुंह में भरने की कोशिश की. हो तो नहीं पाया मगर फिर भी निप्पल मुंह में आ गया उसी को दांत से पकड़ कर खींचते हुए चूसने लगा.

साक्षी अपनी गांड अब नहीं चला रही थी वो पूरा लण्ड घुसा कर वैसे ही मेरे ऊपर लेटी हुई अपनी चूची दबवा और निप्पल चुसवा रही थी. उनके माथे पर पसीने की बुँदे छलछला आई थी. मैंने चूची का निप्पल को साक्षी के चेहरे को अपने दोनों हाथो से पकड़ कर उनका माथा चूमने लगा और जीभ निकाल का उनके माथे के पसीने को चाटते हुए उनकी आँखों को चुमते हुए नाक पर जीभ फिराते हुए चाटा साक्षी अपनी गांड अब नहीं चला रही थी वो पूरा लण्ड घुसा कर वैसे ही मेरे ऊपर लेटी हुई अपनी चूची दबवा और निप्पल चुसवा रही थी.

उनके माथे पर पसीने की बुँदे छलछला आई थी. मैंने चूची का निप्पल को साक्षी के चेहरे को अपने दोनों हाथो से पकड़ कर उनका माथा चूमने लगा और जीभ निकाल कर उनके माथे के पसीने को चाटते हुए उनकी आँखों को चुमते हुए नाक और उसके नीचे होंठो के ऊपर जो पसीने की छोटी छोटी बुँदे जमा हो गई थी उसके नमकीन पानी को पर जीभ फिराते हुए चाटा और फिर होंठो को अपने होंठो से दबोच कर चूसने लगा.

साक्षी भी इस काम में मेरा पूरा सहयोग कर रही थी और अपने जीभ को मेरे मुंह में पेल कर घुमा रही थी. कुछ देर में मुझे लगा की मेरे लण्ड पर साक्षी की चूत का कसाव थोड़ा ढीला पड़ गया है. लगा जैसे एक बार फिर से साक्षी की चूत से पानी रिसने लगा है. साक्षी भी अपनी गांड उचकाने लगी थी और चूतड़ उछालने लगी थी. ये इस बात का सिग्नल था का साक्षी की चूत में अब मेरा लण्ड एडजस्ट कर चूका है.

धीरे-धीरे उनके कमर हिलाने की गति में तेजी आने लगी. थप-थप आवाज़ करते हुए उनकी जान्घे मेरी जांघो से टकराने लगी और मेरा लण्ड सटासट अन्दर बाहर होने लगा. मुझे लग रहा था जैसे चूत दीवारें मेरे लण्ड को जकड़े हुए मेरे लण्ड की चमड़ी को सुपाड़े से पूरा नीचे उतार कर रगड़ती हुई अपने अन्दर ले रही है. मेरा लण्ड शायद उनकी चूत की अंतिम छोड़ तक पहुच जाता था. साक्षी पूरा लण्ड सुपाड़े तक बाहर खींच कर निकाल लेती फिर अन्दर ले लेती थी. साक्षी की चूत वाकई में बहुत टाइट लग रही थी. मुझे अनुभव तो नहीं था मगर फिर भी गजब का आनंद आ रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे किसी बोत्तल में मेरा लौड़ा एक कॉर्क के जैसे फंसा हुआ अन्दर बाहर हो रहा है. साक्षी को अब बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था ये बात उनके मुंह से फूटने वाली सिस्कारियां बता रही थी. वो सीसियते हुए बोल रही थी “आआआ…….सीईईईइ…..बेटा बहुत अच्छा लौड़ा है तेरा…..हाय एक दम टाइट जा रहा है…….सीईईइ हाय मेरी….चूत…..ओह हो….ऊउउऊ….बहुत अच्छा से जा रहा है…हाय….गरम लोहे के रोड जैसा है….हाय….कितना तगड़ा लौड़ा है….. हाय राजू मेरे प्यारे…तुमको मजा आ रहा है….हाय अपनी साक्षी मौसी की टाइट चूत को चोदने में…हाय बेटा बता ना….कैसा लग रहा है मेरे राजा….क्या तुम्हे अपनी साक्षी मौसी की बूर की फांको के बीच लौड़ा डाल कर चोदने में मजा आ रहा है…..हाय मेरे चोदु….अपनी मौसी को चोदने में कैसा लग रहा है….बता ना….अपनी मौसी को….साले मजा आ रहा…सीईईई….ऊऊऊऊ….” साक्षी गांड को हवा में लहराते हुए जोर जोर से मेरे लण्ड पर पटक रही थी.

साक्षी की चूत में ज्यादा से ज्यादा लौड़ा अन्दर डालने के इरादे से मैं भी नीचे से गांड उचका-उचका कर धक्का मार रहा था. कच कच बूर में लण्ड पेलते हुए मैं भी सिसयाते हुए बोला “ओह सीईईइ….साक्षी….आज तक तरसता….ओह बहुत मजा…..ओह आई……ईईईइ….मजा आ रहा है साक्षी….उफ्फ्फ्फ्फ़…बहुत गरम है आपकी चूत….ओह बहुत कसी हुई….है…बाप रे….मेरे लण्ड को छिल….देगी आपकी चूत….उफ्फ्फ्फ्फ़….एक दम गद्देदार है….” चूत है साक्षी आपकी…हाय टाइट है….हाय साक्षी आपकी चूत में मेरा पूरा लण्ड जा रहा है….सीईईइ…..मैंने कभी सोचा नहीं था की मैं आपकी चूत में अपना लौड़ा पेल पाउँगा….हाय….. उफ्फ्फ्फ्फ़… कितनी गरम है….. मेरी सुन्दर…प्यारी साक्षी….ओह बहुत मजा आ रहा है….ओह आप….ऐसे ही चोदती रहो…ओह….सीईईई….हाय सच मुझे आपने जन्नत दिखा दिया….सीईईई… चोद दो अपने भान्जे को….”

मैं सिसिया रहा था और साक्षी ऊपर से लगातार धक्के पर धक्का लगाए जा रही थी. अब चूत से फच फच की आवाज़ भी आने लगी थी और मेरा लण्ड सटा-सट बूर के अन्दर जा रहा था. पुरे सुपाड़े तक बाहर निकाल कर फिर अन्दर घुस जा रहा था. मैंने गर्दन उठा कर देखा की चूत के पानी में मेरा चमकता हुआ लौड़ा लप से बाहर निकलता और बूर के दीवारों को कुचलता हुआ अन्दर घुस जाता. साक्षी की गांड हवा लहराती हुई थिरक रही थी और वो अब अपनी चुतड़ों को नचाती हुई नीचे की तरफ लाती थी और लण्ड पर जोर से पटक देती थी फिर पेट अन्दर खींच कर चूत को कसती हुई लण्ड के सुपाड़े तक बाहर निकाल कर फिर से गांड नचाती नीचे की तरफ धक्का लगाती थी.

बीच बीच में मेरे होंठो और गालो को चूमती और गालो को दांत से काट लेती थी. मैं भी साक्षी के दोनों चुतड़ों को दोनों हाथ की हथेली से मसलते हुए चुदाई का मजा लूट रहा था.
 
साक्षी गांड नचाती धक्का मारती बोली “राजू….मजा आ रहा है….हाय….बोल ना….साक्षी को चोदने में कैसा लग रहा है बेटा….हाय बहनचोद….बहुत मजा दे रहा है तेरा लौड़ा…..मेरी चूत में एकदम टाइट जा रहा है….सीईईइ….मादरचोद ….इतनी दूर तक आज तक…..मेरी चूत में लौड़ा नहीं गया….हाय…खूब मजा दे रहा है…. बड़ा बूर फारु लौड़ा है रे…तेरा….हाय मेरे राजा….तू भी नीचे से गांड उछाल ना….हाय….अपनी साक्षी मौसी की मदद कर….सीईईईइ…..मेरे सैयां…..जोर लगा के धक्का मार…हाय बहनचोद….चोद दे अपनी साक्षी मौसी को….चोद दे….साले…चोद, चोद….के मेरी चूत से पसीना निकाल दे…भोसड़ीवाले…. ओह आई……ईईईइ…” साक्षी एकदम पसीने से लथपथ हो रही थी और धक्का मारे जा रही थी.

]

लौड़ा गचा-गच उसकी चूत के अन्दर बाहर हो रहा था और अनाप शनाप बकते हुए दाँत पिसते हुए पूरा गांड तक का जोर लगा कर धक्का लगाये जा रही थी. कमरे में फच-फच…गच-गच…थप-थप की आवाज़ गूँज रही थी. साक्षी के पसीने की मादक गंध का अहसास भी मुझे हो रहा था. तभी हांफते हुए साक्षी मेरे बदन पर पसर गई. “हाय…थका दिया तुने तो…..मेरी तो एक बार निकल भी गई…

साले तेरा एक बार भी नहीं निकला…।हाय…।अब साले मुझे नीचे लिटा कर चोद…जैसे मैंने चोदा था वैसे ही….पूरा लौड़ा डाल कर….मेरी चूत ले….ओह….” कहते हुए मेरे ऊपर से नीचे उतर गई. मेरा लण्ड सटाक से पुच्च की आवाज़ करते हुए बाहर निकल गया. साक्षी अपनी दोनों टांगो को उठा कर बिस्तर पर लेट गई और जांघो को फैला दिया.

[IMG]]

चुदाई के कारण उनकी चूत गुलाबी से लाल हो गई थी. साक्षी ने अपनी जांघो के बीच आने का इशारा किया. मेरा लपलपाता हुआ खड़ा लण्ड साक्षी की चूत के पानी में गीला हो कर चमचमा रहा था. मैं दोनों जांघो के बीच पंहुचा तो मुझे रोकते हुए साक्षी ने पास में परे अपने पेटिकोट के कपड़े से मेरा लण्ड पोछ दिया और उसी से अपनी चूत भी पोछ ली फिर मुझे डालने का इशारा किया. ये बात मुझे बाद में समझ में आई की उन्होंने ऐसा क्यों किया. उस समय तो मैं जल्दी से जल्दी उनकी चूत के अन्दर घुस जाना चाहता था. दोनों जांघो के बीच बैठ कर मैंने अपना लौड़ा चूत के गुलाबी छेद पर लगा कर कमर का जोर लगाया. सट से मेरा सुपाड़ा अन्दर घुसा. बूर एक दम गरम थी. तमतमाए लौड़े को एक और जोर दार झटका दे कर पूरा पूरा चूत में उतारता चला गया.

[IMG]]

लण्ड सुखा था चूत भी सूखी थी. सुपाड़े की चमड़ी फिर से उलट गई और मुंह से आह निकल गई मगर मजा आ गया. चूत जो अभी दो मिनट पहले थोरी ढीली लग रही थी फिर से किसी बोतल के जैसे टाइट लगने लगी. एक ही झटके से लण्ड पेलने पर साक्षी कोकियाने लगी थी. मगर मैंने इस बात कोई ध्यान नहीं दिया और तरातर लौड़े को ऊपर खींचते हुए सटासट चार-पॉँच धक्के लगा दिए.

साक्षी चिल्लाते हुए बोली “मादरचोद …साले दिखाई नहीं देता की चूत को पोछ के सुखा दिया था…भोसड़ी के सुखा लौड़ा डाल कर दुखा दिया…॥तेरी मौसी को चोदु….हरामी…. साले…अभी भी….चोदना नहीं आया…ऊपर चढ़ के सिखाया था….फिर साले तुने….”

मैं रुक कर साक्षी का मुंह देखने लगा तो फिर बोली “अब मुंह क्या देख रहा है….मार ना….धक्का….जोर लगा के मार…हाय मेरे राजा…मजा आ गया…इसलिए तो पोछ दिया था….हाय देख क्या टाइट जा रहा है…इस्स्स्स्स….” मैं समझ गया अब फुल स्पीड में चालू हो जाना चाहिए. फिर क्या था मैंने गांड उछाल उछाल कर कमर नचा कर जब धक्का मरना शुरू किया तो साक्षी की चीखे निकालनी शुरू हो गई. चूत फच फच कर पानी फेंकने लगी. गांड हवा में लहरा कर लण्ड लीलने लगी

[IMG]]

“ हाय पेल दे…॥बेटा ऐसे ही बेदर्दी से….. चोद अपनी मौसी साक्षी की चूत को….ओह माँ….कैसा बेदर्दी बेटा है….हाय कैसे चोद रहा है….अपनी साक्षी मौसी को….हाय माँ देखो….मैंने मुठ मारने से मना किया तो साले ने मुझे चोद डाला……चोदा इसके लिए कोई बात नहीं….मगर कमीने को ऐसे बेदर्दी से चोदने में पता नहीं क्या मजा मिल रहा है उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़…….मर गई….हाय बड़ा मजा आ रहा है…..सीईईईई…..मेरे चोदु सैयां…मेरे बालम….हाय मेरे चोदु बेटा…..बहन के लौड़े…चोद दे अपनी चुदक्कड़ मौसी को…सीईईईई….”

[IMG]]

मैं लगातार धक्के पर धक्का लगता जा रहा था. मेरा जोश भी अपनी चरम सीमा पर पहुँच चूका था और मैं अपनी गांड तक का जोर लगा कर कमर नचाते हुए धक्का मार रहा था. साक्षी की चूची को मुठ्ठी में दबोच दबाते हुए गच गच धक्का मारते हुए मैं भी जोश में सिसिया हुए बोला ” ओह मेरी प्यारी साक्षी ओह….सीईईईइ….कितनी मस्त हो तुम….हाय…सीईईई तुम नहीं होती तो…मैं ऐसे ही मुठ मारता…हो सीईई…साक्षी बहुत मजा आ रहा है…हाय सच में साक्षी आपकी गद्देदार चूत में लौड़ा डाल कर ऐसा लग रहा है जैसे…..जन्नत….हाय…पुच्च..पुच्च ओह साक्षी मजा आ गया….ओह साक्षी तुम गाली भी देती हो तो मजा आता है….हाय…मैं नहीं जानता था की मेरी साक्षी इतनी बड़ी चुदक्कड़ है….हाय मेरी चुदैल साक्षी ….सीईईईई हमेशा अपने भान्जे को ऐसे ही मजा देती रहना….ऊऊऊऊउ….साक्षी मेरी जान….हाय….मेरा लण्ड हमेशा तुम्हारे लिया खड़ा रहता था….हाय आज….मन की मुराद…..सीईईई….” मेरा जोश अब अपने चरम सीमा पर पहुँच चूका था और मुझे लग रहा था की मेरा पानी निकल जायेगा

[IMG]]

साक्षी भी अब बेतहाशा अंट-शंट बक रही थी और गांड उचकाते हुए दांत पिसते बोली ” “हाय साले….चोदने दे रही हूँ तभी खूबसूरत लग रही हूँ….मादरचोद मुझे सब पता है…..चुदैल बोलता है….साले चुदक्कड़ नहीं होती…मुठ मारता रह जाता…..हाय जोर….अक्क्क्क्क…..जोर से मारता रह मादरचोद …. मेरा अब निकलेगा…हाय बेटा मैं झड़ने वाली हूँ….सीईईईई….और जोर से पेल….चोद चोद….चोद चोद…. राजू….बहनचोद….बहन के लौड़े…..” कहते हुए मुझे छिपकिली की तरह से चिपक गई. उनकी चूत से छलछला कर पानी बहने लगा और मेरे लण्ड को भिगोने लगा. तीन-चार तगड़े धक्के मारने के बाद मेरा लण्ड भी झड़ने लगा और वीर्य का एक तेज फौव्वारा साक्षी की चूत में गिरने लगा. साक्षी ने मुझे अपने बदन से कस कर चिपका लिया और आंखे बंद करके अपनी दोनों टांगो को मेरे चुतड़ों पर लपेट मुझे बाँध लिया. जिन्दगी में पहली बार किसी चूत के अन्दर लण्ड को झारा था. वाकई मजा आ गया था. ओह साक्षी ओह साक्षी करते हुए मैंने भी उनको अपनी बाँहों में भर लिया था. हम दोनों इतनी तगड़ी चुदाई के बाद एक दम थक चुके थे मगर हमारे गांड अभी भी फुदक रहे थे. गांड फुद्काती हुई साक्षी अपनी चूत का रस निकल रही थी और मैं गांड फुद्काते हुए लौड़े को बूर की जड़ तक ठेल कर अपना पानी उनकी चूत में झार रहा था. सच में ऐसा मजा मुझे आज के पहले कभी नहीं मिला था. अपनी खूबसूरत मौसी को चोदने की दिली तम्मन्ना पूरी होने के कारण पुरे बदन में एक अजीब सी शान्ती महसूस हो रही थी.
 
Back
Top