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“उल्लू! गधे!” मैं अचानक नौकर पर चढ़ दौड़ा। “तुम जानते नहीं मुझे पेपर से पहले चाय की जरूरत होती है!”
“मैं जानता हूँ साहब, लेकिन मैंने सोचा कि शायद आज आपको चाय से पहले पेपर की जरूरत होगी।” नौकर का स्वर कुछ इस तरह चुभता हुआ और रहस्यमय था कि मैं चौंक पड़ा। एक दृष्टि से मैंने उसे गौर से देखा फिर हाथ बढ़ाकर अखबार ले लिया। लेकिन दूसरे ही क्षण मेरी आँखों के नीचे अंधेरा तैरने लगा। मेरा सिर घूम गया और अखबार मेरे हाथ से छूटकर फर्श पर गिर पड़ा। नौकर से अखबार लेते ही सबसे पहले मेरी दृष्टि उस हैडिंग पर पड़ी थी। वह कमला की हत्या से सम्बन्धित थी। हैडिंग के नीचे कमला की लाश की तस्वीर भी थी जिसे देखकर मेरे होश तक उड़ गये।
अब मुझे अहसास हो रहा था कि नौकर ने क्यों चाय से पहले मुझे मॉर्निंग पेपर का दूसरा स्पेशल बुलेटिन देने की कोशिश की थी। मगर इससे पहले कि मैं अपने होश-ओ-हवास पर काबू पाकर नौकर से कुछ कहता, वह स्वयं ही बोल पड़ा।
“मुझे रात ही शक हुए था साहब कि आपकी तबियत कुछ ठीक नहीं है।”
“क्या मतलब?” मैंने धड़कते हुए दिल से पूछा।
“घबराइए नहीं साहब!” नौकर ने दबी-दबी जुबान में कहा। “मुझे अच्छी प्रकार याद है कि रात अपने मुझसे क्या कहा था। इत्मीनान रखिए, यदि पुलिस वाले यहाँ तक पहुँच भी गये तो मैं यही बयान दूँगा कि कमला का और आपका कभी कोई सम्बन्ध नहीं रहा।”
मेरा मस्तिष्क बुरी तरह चकरा रहा था। कुछ समझ में नहीं आता था कि नौकर की बात का क्या उत्तर दूँ। कुछ क्षणों तक मैं खामोश खड़ा समय की नजाकत को महसूस करता रहा फिर नौकर को सम्बोधित करके बड़े स्पष्ट स्वर में बोला – “हो सकता है कि तुमने अखबार में छपने वाली खबरों से जो निर्णय निकाला हो वह ठीक ही हो। लेकिन क्या तुम बात का कोई सबूत दे सकोगे?”
“आप कैसी बातें करते हैं साहब?” नौकर ने जल्दी से कहा। “आपके खिलाफ सबूत पेश करके मैं भला नमक-हरामी कैसे कर सकता हूँ?”
“तुम कहना क्या चाहते हो?”
“ परेशान मत हो साहब! पहले तो पुलिस को अभी तक मिस कमला के हत्यारे के सम्बन्ध में कुछ भी नहीं मालूम और यदि भगवान न करे उन्हें मालूम हो भी गया तो आप उनकी जुबान पर दौलत की मोहर लगाकर उन्हें खामोश कर सकते हैं। बम्बई में सब चलता है सरकार।”
“ठीक है!” मैंने कुछ सोचकर नौकर को अपने विश्वास में लेते हुए दबी जुबान में कहा। “यदि तुमने वफादारी का प्रमाण दिया तो मैं तुमको खुश कर दूँगा।”
“मैं सदा आपका वफादार रहूँगा सरकार।” नौकर ने खुश होकर उत्तर दिया। फिर रहस्यमय स्वर में बोला। “ऐसी घटनाओं में पच्चीस-पचास हजार का भला क्या महत्व होता है?”
नौकर मुझसे क्या कहना चाहता था, यह महसूस करते ही मैं क्रोध से तिलमिला गया। समय का फेर था कि मैं खामोशी से उसके छुपे शब्दों को स्वीकार कर लेने का वचन दे देता, परन्तु जिस अंदाज में उसने मुझसे सौदेबाजी करनी चाही उससे मेरा बदन शोला बन गया। इसलिए मैं समय की नजाकत भूलकर नौकर पर गरज पड़ा।
“नमक हराम, कमीने! दफा हो जा इसी समय। मैं तुझे एक फूटी कौड़ी भी नहीं दूँगा।”
“जैसी आपकी मर्जी साहब।” उसने आँखें बदलकर उत्तर दिया। उसकी नज़रों में मेरे लिये खुला चैलेंज मौजूद था।
कन्धे उचका कर वह जाने के लिये घुमा तो मेरा क्रोध और बढ़ गया। मैं बोला –
“हरामजादे, इस बात को अच्छी तरह याद रखना कि यदि तूने मेरे विरुद्ध कोई बयान देने की चेष्टा की तो पच्चीस-पचास हजार की जगह मैं लाख, दो लाख भी खर्च कर दूँगा। लेकिन तुझे जरूर जेल में सड़वा दूँगा।” नौकर मेरी बात का कोई उत्तर दिए बिना तेज-तेज कदम उठाता बाहर चला गया।
समय और हालत ने जिस तेजी से अपना रूप बदला था, उसने मुझे झकझोककर रख दिया। नौकर के जाने के बाद कुछ क्षणों तक मैं चुपचाप खड़ा अपना निचला होंठ दबाता रहा। फिर मैंने पेपर उठाया और उसको पढ़ने लगा। पेपर में कमला की रहस्यमय हत्या को आवश्यकता से अधिक उछालने की चेष्टा की गयी थी। प्रकाशित होने वाली रिपोर्ट के अनुसार पुलिस बड़ी सरगर्मी के साथ हत्यारे की खोज में थी।
कमला की हत्या के सिलसिले में पेपर से संवाददाता ने यही विचार प्रकट किया था कि उसे किसी अय्याश किस्म के हत्यारे ने पहले से तय किसी प्रोग्राम के अनुसार मारा है। पुलिस ने इस सम्बन्ध में अपनी ओर से कोई राय स्पष्ट नहीं की थी। मामला चूँकि रात का था इसलिए यह खबर पहले पृष्ठ पर छपी थी।
पेपर को पढ़ने के बाद मैं परेशानी की हालत में हाथ पीठ पर बाँधे बेडरूम में टहल रहा था कि अचानक मुझे मोहिनी का ध्यान आ गया। जो मेरी इन सभी परेशानियों का कारण बनी थी। मोहिनी का ध्यान आते ही मैंने महसूस किया कि वह मेरे सिर पर मौजूद है। दोबारा वह कब और किस समय मेरे सिर पर आ धमकी थी। मुझे इसका कोई इल्म न था। लेकिन उस समय मैं महसूस कर रहा था कि वह मेरे सिर पर बड़े आराम से पाँव पसारे सो रही है। मैंने उसके होंठो पर एक चैन कि मुस्कराहट महसूस की। मैं पहले ही कह चुका हूँ कि मोहिनी को ढील महसूस हो जाने वाली एक रहस्यमय चीज थी। मस्तिष्क ने उसकी एक सूरत बना ली थी। कभी वह भयानक और खौफनाक नज़र आती थी, कभी वह नाजुक बदन हसीन सुन्दरी के रूप में। हाँ, यह बात तो निश्चित थी कि वह कोई बहुत खूबसूरत लड़की थी। कदाचित कमला का खून पी लेने के उपरांत आश्चर्यजनक अस्तित्व को भरपूर शक्ति प्राप्त हो चुकी थी। मैंने कल्पनावस्था में मोहिनी को सोते हुए पाया तो मैं आग बबूला हो गया।
“मैं जानता हूँ साहब, लेकिन मैंने सोचा कि शायद आज आपको चाय से पहले पेपर की जरूरत होगी।” नौकर का स्वर कुछ इस तरह चुभता हुआ और रहस्यमय था कि मैं चौंक पड़ा। एक दृष्टि से मैंने उसे गौर से देखा फिर हाथ बढ़ाकर अखबार ले लिया। लेकिन दूसरे ही क्षण मेरी आँखों के नीचे अंधेरा तैरने लगा। मेरा सिर घूम गया और अखबार मेरे हाथ से छूटकर फर्श पर गिर पड़ा। नौकर से अखबार लेते ही सबसे पहले मेरी दृष्टि उस हैडिंग पर पड़ी थी। वह कमला की हत्या से सम्बन्धित थी। हैडिंग के नीचे कमला की लाश की तस्वीर भी थी जिसे देखकर मेरे होश तक उड़ गये।
अब मुझे अहसास हो रहा था कि नौकर ने क्यों चाय से पहले मुझे मॉर्निंग पेपर का दूसरा स्पेशल बुलेटिन देने की कोशिश की थी। मगर इससे पहले कि मैं अपने होश-ओ-हवास पर काबू पाकर नौकर से कुछ कहता, वह स्वयं ही बोल पड़ा।
“मुझे रात ही शक हुए था साहब कि आपकी तबियत कुछ ठीक नहीं है।”
“क्या मतलब?” मैंने धड़कते हुए दिल से पूछा।
“घबराइए नहीं साहब!” नौकर ने दबी-दबी जुबान में कहा। “मुझे अच्छी प्रकार याद है कि रात अपने मुझसे क्या कहा था। इत्मीनान रखिए, यदि पुलिस वाले यहाँ तक पहुँच भी गये तो मैं यही बयान दूँगा कि कमला का और आपका कभी कोई सम्बन्ध नहीं रहा।”
मेरा मस्तिष्क बुरी तरह चकरा रहा था। कुछ समझ में नहीं आता था कि नौकर की बात का क्या उत्तर दूँ। कुछ क्षणों तक मैं खामोश खड़ा समय की नजाकत को महसूस करता रहा फिर नौकर को सम्बोधित करके बड़े स्पष्ट स्वर में बोला – “हो सकता है कि तुमने अखबार में छपने वाली खबरों से जो निर्णय निकाला हो वह ठीक ही हो। लेकिन क्या तुम बात का कोई सबूत दे सकोगे?”
“आप कैसी बातें करते हैं साहब?” नौकर ने जल्दी से कहा। “आपके खिलाफ सबूत पेश करके मैं भला नमक-हरामी कैसे कर सकता हूँ?”
“तुम कहना क्या चाहते हो?”
“ परेशान मत हो साहब! पहले तो पुलिस को अभी तक मिस कमला के हत्यारे के सम्बन्ध में कुछ भी नहीं मालूम और यदि भगवान न करे उन्हें मालूम हो भी गया तो आप उनकी जुबान पर दौलत की मोहर लगाकर उन्हें खामोश कर सकते हैं। बम्बई में सब चलता है सरकार।”
“ठीक है!” मैंने कुछ सोचकर नौकर को अपने विश्वास में लेते हुए दबी जुबान में कहा। “यदि तुमने वफादारी का प्रमाण दिया तो मैं तुमको खुश कर दूँगा।”
“मैं सदा आपका वफादार रहूँगा सरकार।” नौकर ने खुश होकर उत्तर दिया। फिर रहस्यमय स्वर में बोला। “ऐसी घटनाओं में पच्चीस-पचास हजार का भला क्या महत्व होता है?”
नौकर मुझसे क्या कहना चाहता था, यह महसूस करते ही मैं क्रोध से तिलमिला गया। समय का फेर था कि मैं खामोशी से उसके छुपे शब्दों को स्वीकार कर लेने का वचन दे देता, परन्तु जिस अंदाज में उसने मुझसे सौदेबाजी करनी चाही उससे मेरा बदन शोला बन गया। इसलिए मैं समय की नजाकत भूलकर नौकर पर गरज पड़ा।
“नमक हराम, कमीने! दफा हो जा इसी समय। मैं तुझे एक फूटी कौड़ी भी नहीं दूँगा।”
“जैसी आपकी मर्जी साहब।” उसने आँखें बदलकर उत्तर दिया। उसकी नज़रों में मेरे लिये खुला चैलेंज मौजूद था।
कन्धे उचका कर वह जाने के लिये घुमा तो मेरा क्रोध और बढ़ गया। मैं बोला –
“हरामजादे, इस बात को अच्छी तरह याद रखना कि यदि तूने मेरे विरुद्ध कोई बयान देने की चेष्टा की तो पच्चीस-पचास हजार की जगह मैं लाख, दो लाख भी खर्च कर दूँगा। लेकिन तुझे जरूर जेल में सड़वा दूँगा।” नौकर मेरी बात का कोई उत्तर दिए बिना तेज-तेज कदम उठाता बाहर चला गया।
समय और हालत ने जिस तेजी से अपना रूप बदला था, उसने मुझे झकझोककर रख दिया। नौकर के जाने के बाद कुछ क्षणों तक मैं चुपचाप खड़ा अपना निचला होंठ दबाता रहा। फिर मैंने पेपर उठाया और उसको पढ़ने लगा। पेपर में कमला की रहस्यमय हत्या को आवश्यकता से अधिक उछालने की चेष्टा की गयी थी। प्रकाशित होने वाली रिपोर्ट के अनुसार पुलिस बड़ी सरगर्मी के साथ हत्यारे की खोज में थी।
कमला की हत्या के सिलसिले में पेपर से संवाददाता ने यही विचार प्रकट किया था कि उसे किसी अय्याश किस्म के हत्यारे ने पहले से तय किसी प्रोग्राम के अनुसार मारा है। पुलिस ने इस सम्बन्ध में अपनी ओर से कोई राय स्पष्ट नहीं की थी। मामला चूँकि रात का था इसलिए यह खबर पहले पृष्ठ पर छपी थी।
पेपर को पढ़ने के बाद मैं परेशानी की हालत में हाथ पीठ पर बाँधे बेडरूम में टहल रहा था कि अचानक मुझे मोहिनी का ध्यान आ गया। जो मेरी इन सभी परेशानियों का कारण बनी थी। मोहिनी का ध्यान आते ही मैंने महसूस किया कि वह मेरे सिर पर मौजूद है। दोबारा वह कब और किस समय मेरे सिर पर आ धमकी थी। मुझे इसका कोई इल्म न था। लेकिन उस समय मैं महसूस कर रहा था कि वह मेरे सिर पर बड़े आराम से पाँव पसारे सो रही है। मैंने उसके होंठो पर एक चैन कि मुस्कराहट महसूस की। मैं पहले ही कह चुका हूँ कि मोहिनी को ढील महसूस हो जाने वाली एक रहस्यमय चीज थी। मस्तिष्क ने उसकी एक सूरत बना ली थी। कभी वह भयानक और खौफनाक नज़र आती थी, कभी वह नाजुक बदन हसीन सुन्दरी के रूप में। हाँ, यह बात तो निश्चित थी कि वह कोई बहुत खूबसूरत लड़की थी। कदाचित कमला का खून पी लेने के उपरांत आश्चर्यजनक अस्तित्व को भरपूर शक्ति प्राप्त हो चुकी थी। मैंने कल्पनावस्था में मोहिनी को सोते हुए पाया तो मैं आग बबूला हो गया।