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“मुझे कुछ देर आराम कर लेने दो राज। फिर इत्मीनान से बातें होंगी।” मोहिनी ने अपनी चमकीली आँखों से मुझे घूरते हुए कहा।
“यह असम्भव है।” मैं चीख पड़ा। “मुझे इस तरह की मानसिक यातनाओं में जकड़कर तुम आराम नहीं कर सकती।”
“राज!” मोहिनी के तेवर बदल गये। “मैं अपने आराम में किसी किस्म का दखल बर्दाश्त नहीं कर सकती। मुझे इस वक्त चैन की नींद की जरूरत है और तुम अपनी हद से आगे बढ़े जा रहे हो।”
“मेरा सुख-चैन बरबाद करके तुम्हें भी आराम करने का कोई हक नहीं पहुँचता।”
“राज! क्या तुम इस वक्त होश में नहीं हो?” मोहिनी ने मुझे बड़े कड़वे स्वर में सम्बोधित किया। इसके साथ ही वह उठकर बैठ गयी। उसके चेहरे पर मुझे किसी गहरे समुद्र का ऐसा ठहराव नज़र आ रहा था जिसकी तह के अन्दर हजारों रहस्य छिपे थे। उसकी आँखों में उभरने वाली सुर्खी भी किसी आने वाले तूफान का संकेत थी। मगर मैं उस समय अपने आपे में नहीं था। मैं मोहिनी के चेहरे पर क्रोध के लक्षणों को नजरंदाज करते हुए बोला –
“तुम्हें मुझसे यह वायदा करना पड़ेगा कि भविष्य में कभी भी डॉली को किसी मामले में तंग नहीं करोगी।”
“यह केवल एक ही सूरत में हो सकता है कि तुम डॉली को सख्ती से समझा दो कि वह मेरे और तुम्हारे बीच किसी तरह की रुकावट पैदा करने की मूर्खता न करे।”
“डॉली मेरी पत्नी है।” मैंने तिलमिलाकर कहा। “और उसका मुझ पर पूरा अधिकार है।”
“और मैं तुम्हारी आत्मा हूँ।” मोहिनी ने कहर ढाने वाली निगाहों से मुझे देखते हुए कहा। “तुम्हें इस बात को हमेशा याद रखना चाहिए कि अगर मैंने तुम्हें दौलतमंद न बनाया होता तो तुम कभी डॉली को हासिल नहीं कर सकते थे।”
“तुम चाहो तो अपनी दौलत वापिस ले सकती हो।” मैं झल्लाकर बोला। “मैं गरीब ही सही, मगर खुश रहना चाहता हूँ।”
“मुझे कोई ऐतराज नहीं। बशर्ते कि दौलत के साथ-साथ तुम मुझे मेरी डॉली को वापिस कर दो।”
“यह असम्भव है।” मैं पूरी शक्ति से चिल्लाया। “तुम डॉली को मुझसे कभी नहीं छीन सकती।”
“राज!” इस बार मोहिनी का स्वर बहुत जहरीला था। “शायद अभी तुम्हें कुछ और बताना होगा। तुम बार-बार माफी माँगते हो और फिर अपने वचन से फिर जानते हो। तुम यह क्यों भूल जाते हो कि किससे ऐसी बातें करते हो?”
“मैं जानता हूँ कि मैं किसी बला से ऐसी बातें नहीं करता मगर बर्दाश्त की भी एक हद होती है। तुमने मेरी जिन्दगी में मुझे सुख से अधिक दुख दिए हैं। मुझे यह सौदा मंजूर नहीं और मैं अपनी बर्बादी देख सकता हूँ लेकिन डॉली...।”
“राज!” मोहिनी ने गजबनाक लहजे में मेरी बात काटते हुए कहा। “मुझे इस बात पर मजबूर मत करो कि मैं तुम्हें सही रास्ते पर लाने के लिये फिर कोई तमाशा खड़ा करूँ। बेहतर है कि खामोश रहो और जैसा मैं कहती हूँ, करते जाओ। उसके बाद हर जिम्मेदारी मुझे पर छोड़ दो और ऐश की जिन्दगी बसर करो।”
मोहिनी का लहजा इस कदर खतरनाक था कि एक क्षण के लिये मैं गूँगा हो गया। लेकिन यह स्थिति अधिक देर तक नहीं रही। मोहिनी ने डॉली को पवित्रता को दागदार बनाने के लिये जो शर्मनाक ड्रामा स्टेज किया था, उसका एक-एक मंजर मेरे ज़हन में आँधियाँ चला गया था। मैं अपनी मौत गँवारा कर सकता था, बशर्ते कि डॉली फिर कभी ऐसी भयानक और शर्मनाक परिस्थितियों से दो-चार न हो। अतः मैंने तुरन्त ही एक फैसला कर लिया।
“मोहिनी, सुनो! मेरे ख्याल से यह फैसला कर ही दो कि तुम मुझे जान से मार डालो लेकिन मैं किसी कीमत पर भी तुम्हें भविष्य में डॉली के कामकाज में दखलअंदाजी की इजाजत नहीं दे सकता।”
“तुम और मुझे किसी बात से रोक सकोगे?” मोहिनी बेअख्तियार हँस दी। फिर दोबारा गंभीरता से बोली। “सुनो राज साहब! तुम्हारी हैसियत क्या है, यह तुम्हें मालूम है। तुम्हें मेरे हर हुक्म का पालन करना पड़ेगा। रहा डॉली का मामला, तो तुम्हारे लिये उचित यही है कि इस सिलसिले में तुम अपनी जुबान बन्द रखना। वरना एडवर्ड पार्क में जो कुछ हो चुका है, मुझे तुम्हें उससे भी अधिक घिनौने हालात में फँसाना पड़ सकता है।”
“यदि तुमने ऐसा किया तो मैं तुम्हारे गंदे दिमाग को किसी गंदे कीड़े की तरह मसल डालूँगा।”
क्रोध की अधिकता ने मेरे सोचने-समझने की शक्ति को बेकार कर दिया था। मैं बस अपने दिल का गुबार ही निकाल सकता था, जो मैं निकालता रहा। जो मन में आया कहता रहा। न जाने क्या-क्या बकता रहा।
मोहिनी आश्चर्यजनक नजरों से मेरे बदले हुए भावों को देख रही थी। जब तक मैं बोलता रहा, वह खामोश रही फिर जब मैं जब चुप हुआ तो उसने धीरे से कहा – “राज! मुझे तुमसे हमदर्दी है, मगर इसके बावजूद मैं तुम्हें होश में लाने के लिये मजबूर हूँ।”
मैं कोई जवाब देना चाहता था लेकिन सिर में अचानक होने वाली तेज चुभन ने मुझे तड़पा दिया। मोहिनी तेजी से उठकर खड़ी हो चुकी थी और अपने नुकीले पंजे मेरे सिर में चुभो रही थी, जिसकी चुभन हर पल बढ़ती गयी। मेरी आँखों के सामने अन्धेरा छाने लगा। स्टेयरिंग पर हाथ काँप रहे थे। मैंने चाहा कि गाड़ी रोक दूँ लेकिन कोई रहस्यमय शक्ति मुझे ड्राइविंग जारी रखने पर उकसा रही थी। सड़क पर ट्रैफिक की अच्छी खासी भीड़ थी।
अचानक मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे चौड़ी सड़क पर दौड़ने वाली मोटरें मेरी कार की धीमी गति का परिहास उड़ा रही थीं। मैंने किसी अनजानी भावना के हवाले होकर मूर्खता कर दी। न चाहते हुए भी अपनी गाड़ी की गति तेज और तेज कर दी।
और फिर वही हुआ जिसका अंदेशा था। मैं स्टेयरिंग से अपना नियंत्रण खो बैठा और सामने से आती एक कार से टकरा गया। फिजा में एक जोर के धमाके की आवाज बुलंद हुई और फिर मेरा दिलो-दिमाग अंधेरे में डूबता चला गया।
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“राज!” मोहिनी के तेवर बदल गये। “मैं अपने आराम में किसी किस्म का दखल बर्दाश्त नहीं कर सकती। मुझे इस वक्त चैन की नींद की जरूरत है और तुम अपनी हद से आगे बढ़े जा रहे हो।”
“मेरा सुख-चैन बरबाद करके तुम्हें भी आराम करने का कोई हक नहीं पहुँचता।”
“राज! क्या तुम इस वक्त होश में नहीं हो?” मोहिनी ने मुझे बड़े कड़वे स्वर में सम्बोधित किया। इसके साथ ही वह उठकर बैठ गयी। उसके चेहरे पर मुझे किसी गहरे समुद्र का ऐसा ठहराव नज़र आ रहा था जिसकी तह के अन्दर हजारों रहस्य छिपे थे। उसकी आँखों में उभरने वाली सुर्खी भी किसी आने वाले तूफान का संकेत थी। मगर मैं उस समय अपने आपे में नहीं था। मैं मोहिनी के चेहरे पर क्रोध के लक्षणों को नजरंदाज करते हुए बोला –
“तुम्हें मुझसे यह वायदा करना पड़ेगा कि भविष्य में कभी भी डॉली को किसी मामले में तंग नहीं करोगी।”
“यह केवल एक ही सूरत में हो सकता है कि तुम डॉली को सख्ती से समझा दो कि वह मेरे और तुम्हारे बीच किसी तरह की रुकावट पैदा करने की मूर्खता न करे।”
“डॉली मेरी पत्नी है।” मैंने तिलमिलाकर कहा। “और उसका मुझ पर पूरा अधिकार है।”
“और मैं तुम्हारी आत्मा हूँ।” मोहिनी ने कहर ढाने वाली निगाहों से मुझे देखते हुए कहा। “तुम्हें इस बात को हमेशा याद रखना चाहिए कि अगर मैंने तुम्हें दौलतमंद न बनाया होता तो तुम कभी डॉली को हासिल नहीं कर सकते थे।”
“तुम चाहो तो अपनी दौलत वापिस ले सकती हो।” मैं झल्लाकर बोला। “मैं गरीब ही सही, मगर खुश रहना चाहता हूँ।”
“मुझे कोई ऐतराज नहीं। बशर्ते कि दौलत के साथ-साथ तुम मुझे मेरी डॉली को वापिस कर दो।”
“यह असम्भव है।” मैं पूरी शक्ति से चिल्लाया। “तुम डॉली को मुझसे कभी नहीं छीन सकती।”
“राज!” इस बार मोहिनी का स्वर बहुत जहरीला था। “शायद अभी तुम्हें कुछ और बताना होगा। तुम बार-बार माफी माँगते हो और फिर अपने वचन से फिर जानते हो। तुम यह क्यों भूल जाते हो कि किससे ऐसी बातें करते हो?”
“मैं जानता हूँ कि मैं किसी बला से ऐसी बातें नहीं करता मगर बर्दाश्त की भी एक हद होती है। तुमने मेरी जिन्दगी में मुझे सुख से अधिक दुख दिए हैं। मुझे यह सौदा मंजूर नहीं और मैं अपनी बर्बादी देख सकता हूँ लेकिन डॉली...।”
“राज!” मोहिनी ने गजबनाक लहजे में मेरी बात काटते हुए कहा। “मुझे इस बात पर मजबूर मत करो कि मैं तुम्हें सही रास्ते पर लाने के लिये फिर कोई तमाशा खड़ा करूँ। बेहतर है कि खामोश रहो और जैसा मैं कहती हूँ, करते जाओ। उसके बाद हर जिम्मेदारी मुझे पर छोड़ दो और ऐश की जिन्दगी बसर करो।”
मोहिनी का लहजा इस कदर खतरनाक था कि एक क्षण के लिये मैं गूँगा हो गया। लेकिन यह स्थिति अधिक देर तक नहीं रही। मोहिनी ने डॉली को पवित्रता को दागदार बनाने के लिये जो शर्मनाक ड्रामा स्टेज किया था, उसका एक-एक मंजर मेरे ज़हन में आँधियाँ चला गया था। मैं अपनी मौत गँवारा कर सकता था, बशर्ते कि डॉली फिर कभी ऐसी भयानक और शर्मनाक परिस्थितियों से दो-चार न हो। अतः मैंने तुरन्त ही एक फैसला कर लिया।
“मोहिनी, सुनो! मेरे ख्याल से यह फैसला कर ही दो कि तुम मुझे जान से मार डालो लेकिन मैं किसी कीमत पर भी तुम्हें भविष्य में डॉली के कामकाज में दखलअंदाजी की इजाजत नहीं दे सकता।”
“तुम और मुझे किसी बात से रोक सकोगे?” मोहिनी बेअख्तियार हँस दी। फिर दोबारा गंभीरता से बोली। “सुनो राज साहब! तुम्हारी हैसियत क्या है, यह तुम्हें मालूम है। तुम्हें मेरे हर हुक्म का पालन करना पड़ेगा। रहा डॉली का मामला, तो तुम्हारे लिये उचित यही है कि इस सिलसिले में तुम अपनी जुबान बन्द रखना। वरना एडवर्ड पार्क में जो कुछ हो चुका है, मुझे तुम्हें उससे भी अधिक घिनौने हालात में फँसाना पड़ सकता है।”
“यदि तुमने ऐसा किया तो मैं तुम्हारे गंदे दिमाग को किसी गंदे कीड़े की तरह मसल डालूँगा।”
क्रोध की अधिकता ने मेरे सोचने-समझने की शक्ति को बेकार कर दिया था। मैं बस अपने दिल का गुबार ही निकाल सकता था, जो मैं निकालता रहा। जो मन में आया कहता रहा। न जाने क्या-क्या बकता रहा।
मोहिनी आश्चर्यजनक नजरों से मेरे बदले हुए भावों को देख रही थी। जब तक मैं बोलता रहा, वह खामोश रही फिर जब मैं जब चुप हुआ तो उसने धीरे से कहा – “राज! मुझे तुमसे हमदर्दी है, मगर इसके बावजूद मैं तुम्हें होश में लाने के लिये मजबूर हूँ।”
मैं कोई जवाब देना चाहता था लेकिन सिर में अचानक होने वाली तेज चुभन ने मुझे तड़पा दिया। मोहिनी तेजी से उठकर खड़ी हो चुकी थी और अपने नुकीले पंजे मेरे सिर में चुभो रही थी, जिसकी चुभन हर पल बढ़ती गयी। मेरी आँखों के सामने अन्धेरा छाने लगा। स्टेयरिंग पर हाथ काँप रहे थे। मैंने चाहा कि गाड़ी रोक दूँ लेकिन कोई रहस्यमय शक्ति मुझे ड्राइविंग जारी रखने पर उकसा रही थी। सड़क पर ट्रैफिक की अच्छी खासी भीड़ थी।
अचानक मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे चौड़ी सड़क पर दौड़ने वाली मोटरें मेरी कार की धीमी गति का परिहास उड़ा रही थीं। मैंने किसी अनजानी भावना के हवाले होकर मूर्खता कर दी। न चाहते हुए भी अपनी गाड़ी की गति तेज और तेज कर दी।
और फिर वही हुआ जिसका अंदेशा था। मैं स्टेयरिंग से अपना नियंत्रण खो बैठा और सामने से आती एक कार से टकरा गया। फिजा में एक जोर के धमाके की आवाज बुलंद हुई और फिर मेरा दिलो-दिमाग अंधेरे में डूबता चला गया।
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