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Fantasy मोहिनी

मोहिनी मुझे पहले ही परिस्थितियों से परिचित करा चुकी थी। कमरे में उपस्थित व्यक्तियों को प्रभावित करने के लिए मैं यूँ ही कुछ देर आँखें बंद किए रहा और बड़बड़ता रहा। फिर आँखें खोलकर बोला-

“मिस्टर हार्डी! मैं समझता हूँ कि लार्ड स्मिथ को कत्ल किया गया है और क़ातिल इस समय इसी छत के नीचे मौजूद है।”

रॉबर्ट मेरी बात सुनकर कुछ क्षण के लिए चौंका फिर तेजी से बोला-

“सोच लीजिए, आप हैरतअंगेज बात बोल रहे हैं मिस्टर अमित! क्या आप उन निशानों के बारे में बता सकते हैं जो विशेषज्ञों को घटनास्थल पर मिले हैं ?”

“मेरा अंतर मन पुकार रहा है कि लार्ड राल्फ स्मिथ को दूध मे ज़हर दिया गया है।” मैंने रॉबर्ट की बात नज़रअंदाज़ करते हुए हार्डी से कहा। “इस षड्यंत्र में मुझे एक मर्द और स्त्री का हाथ नज़र आ रहा है। रखे हुए गिलास पर मिलने वाले उँगलियों के चिह्नों का सवाल तो वह निश्चय ही मेरे साबित होंगे।”

हार्डी मुझे आश्चर्य से देखने लगा और मेरा उत्तर सुनकर एकदम गंभीर हो गया।

रॉबर्ट के होंठों पर उभरने वाली मुस्कराहट बड़ी गहरी और रहस्यमय थी।

हार्डी मुझे कठोर दृष्टि से देख रहा था। वह मुझसे बोला- “आपका बयान आपके अहितकारी साबित हो सकता है।”

“अगर मिस्टर हार्डी मेरे बयान का स्पष्टीकरण चाहते हैं तो विशेषज्ञ यहाँ उपस्थित हैं। वह इस समय भी पुष्टि कर सकते हैं।” मैंने लापरवाही से जवाब दिया।

रॉबर्ट ने उस समय हार्डी के कान में कुछ सरगोशी की जिसके बाद फिंगर प्रिंट सैक्सन को बुलाकर आवश्यक निर्देश दिए गए।

सारा इस सारी कार्रवाही को आश्चर्य से देख रही थी।

“मिस्टर अमित! अगर विशेषज्ञों ने आपके बयान की पुष्टि कर दी तो मुझे आपको हिरासत में लेना पड़ेगा।” हार्डी ने संदिग्ध स्वर में कहा।

“मुझे अफ़सोस होगा। मैं इसे लंदन के अनुभवी और योग्य ऑफ़िसर का भावुक फ़ैसला समझूँगा।” मैंने मुस्कराते हुए कहा। “सिर्फ़ दूध के गिलास पर मेरे उँगलियों के निशान का मिलना मुझे हत्यारा साबित नहीं करता।

“मिस सारा, पुअर सारा! अपने बयान में इस वास्तविकता को प्रकट कर चुकी हैं कि मिस्टर लार्ड की मौत से पहले आख़िरी बार मैंने मृतक से मुलाक़ात की थी।

“आप इस पहलू पर क्यों नहीं सोचते कि मुझे फँसाने के लिए वही गिलास इस्तेमाल किया गया होगा जो मैंने मृतक के साथ शर्बत पीते समय प्रयोग किया था।

वैसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद हत्या के समय का पता चल सकता है। फिर भी फिलहाल इस गहराई में जाने की आवश्यकता नहीं है। मैं कुछ बुनियादी ठोस बातें जनाब के सामने रख चुका हूँ।” मैंने बहुत शांति से कहा।

“मेरा अनुमान है कि आप इन गंभीर घटनाओं के बारे में खासे होशियार और अनुभवी व्यक्ति हैं मिस्टर अमित ठाकुर।

“आप हिन्दुस्तान में क्या करते हैं ?” हार्डी ने अचानक सवाल किया।

“लार्ड स्मिथ क्या करते थे ? जागीरदार लोग काम नहीं करते।” मैंने झल्लाकर कहा।

“कहीं यह प्रश्न अगर हिन्दुस्तान में किया जाता तो अपमान समझा जाता।”

“खूब!” हार्डी का जासूस साथी बोला।

“मेरा ख़्याल है आप हमारा समय नष्ट कर रहे हैं। इस घटना के बाद अगर आपके हाथ साफ़ नज़र आए तो मैं आपसे मिलना पसंद करूँगा।”

“मुझे ख़ुशी होगी।” मैंने ठंडे स्वर में कहा। “यह ग़लत है मेरे प्यारे दोस्त कि मैं समय नष्ट कर रहा हूँ। अपराधी प्रमाणों के साथ पहचाना जाए तो मेरी ज़िम्मेदारी समाप्त हो जाएगी और मैं आराम से यहाँ तफरीह कर सकूँगा इसलिए मैं कार्यवाही हर सूरत में पूर्ण चाहता हूँ।

“मिस्टर रॉबर्ट अगर मेरा परिचय न कराते तो शायद मैं अपनी जुबान बंद रखता। मगर अब यह ज़रूरी है कि मैं अपनी विद्या का प्रमाण प्रस्तुत करूँ जिस पर मुझे पूरा-पूरा विश्वास है और साथ ही अपना दामन भी बचाऊँगा।”

जासूस मेरा उत्तर सुन कर पहलू बदलने लगा।

कमरे में कुछ देर सन्नाटा छाया रहा फिर उस वक्त हार्डी की आँखें खुली की खुली रह गयी जब फिंगर प्रिंट सैक्सन ने अपनी रिपोर्ट लाकर दी।

उसने कर्कश स्वर में मुझे संबोधित किया-

“मिस्टर अमित! यह प्रमाणित हो चुका है कि दूध के गिलास पर मिलने वाले उँगलियों के निशान शत-प्रतिशत तुम्हारे उँगलियों के हैं। मैं तुरंत तुम्हें हिरासत में लेने पर मजबूर हूँ।”

“मिस्टर हार्डी! प्यारे श्रीमान, आप ज्यादती कर रहे हैं। और आप भूल रहे हैं कि मैंने इस षड्यंत्र में एक मर्द और एक औरत को सम्मिलित बताया था जो इस समय भी मकान के अंदर उपस्थित है।” मैंने भी कठोर रुख़ अपनाया।

“मिस्टर रॉबर्ट को मेरे बारे में बहुत सी बातें मालूम नहीं है। यही नादानी वास्तव में उसकी फाँस बन गयी। मैं हिप्नोटिज्म और पैरासायक्लाजी के अलावा आत्माओं का भी ज्ञान रखता हूँ। जिन्हें पश्चिम के दिमाग़ स्वीकार नहीं करते। किंतु आपने मुर्दा आदमियों की आत्मा से बातचीत की विद्या के बारे में अवश्य सुना होगा ?

“हमारे पूरब में यह माना जाता है कि आत्मा शरीर से अलग होकर हमारे वायुमंडल में भटकती रहती है।

“उनकी अपनी एक दुनिया होती है और उन्हें किसी भी समय अलग किया जा सकता है।

“मैं सामने की बात करता हूँ। रात गुज़र गयी है। आप लोगों को कष्ट हो रहा है। मुझे आज्ञा दीजिए कि मैं लार्ड स्मिथ की आत्मा से वास्तविकता जानने का प्रार्थना करूँ। मुझे कुछ देर का समय चाहिए।”

“यह किस तरह संभव है ?” जासूस ने चौंककर कहा।

“मुझे कोशिश की आज्ञा दी जाए। मैं सिर्फ़ पंद्रह मिनट लूँगा। लेकिन मुझे एक व्यक्ति की ज़रूरत है जो मेरा माध्यम बनकर लार्ड की आत्मा को अपने अंदर ग्रहण कर सके। मुझे एक गिलास और एक मेज़ की भी ज़रूरत है।

“यह प्रयोग आपके दिलचस्पी का केंद्र होगा। क्या यह बात दिलचस्प नहीं होगी कि लार्ड स्मिथ अपने कत्ल की घटना स्वयं बयान करें।” मैंने रहस्यमय स्वर में कहा।

“पंद्रह मिनट।” जासूस ने कुछ सोचकर कहा। मिस्टर अमित, आप कानून की पकड़ से बच नहीं सकते, खैर मैं आपका माध्यम बनने को तैयार हूँ।”

“खूब।” मैंने कहा और सबको मेज़ के चारों तरफ़ बिठा दिया। और फिर एक गिलास सामने रखकर उसे हरकत देने को कहा।

जिस तरह आम तौर पर लोग प्लेन चिट पर आत्माव्हान करते हैं, मैं नहीं जानता कि वे लोग आत्मा बुलाने में सफल हो जाते हैं या नहीं, पर यहाँ मेरा तात्पर्य कुछ और था। मैं मोहिनी को जासूस के सिर भेजकर अपने मतलब की बात कहलवाना चाहता था।

जब गिलास का घूमना रुक गया और मोहिनी जासूस के सिर पर चली गयी तो मैंने उसे संबोधित किया। स्पष्ट है आत्मा ने उत्तर दिया। लार्ड स्मिथ की आत्मा ने।

सारा पापा कहकर चीखने लगी।

हार्डी ने उसको संभाला। मैंने सबको ख़ामोश रहने का संकेत किया। मैंने वातावरण को प्रभावित करने के लिए रौशनियाँ कम से कम करा दी थीं। फिर मैंने भारी आवाज़ में जासूस को संबोधित किया-

“लार्ड स्मिथ की पवित्र आत्मा, मैं क्षमा चाहता हूँ कि मैंने तुझे बुलाया है। मेरे प्रश्नों का जवाब देने के लिए अपनी उपस्थिति दर्ज करो। क्या तू वही है जो मैं समझ रहा हूँ ?”

अचानक जासूस की जुबान खुल गयी।

“केवल कुछ क्षण...” मैंने ज़ोर देकर कहा। “ऐ पवित्र आत्मा! तेरा रास्ता स्वर्ग की तरफ़ है। बता तुझे लार्ड के शरीर से अलग करने में कौन-कौन सम्मिलित थे। तू आंतरिक हाल जानती है क्योंकि तू एक आत्मा है। मुझे सच-सच बता। अब तेरी शक्तियाँ असीमित हैं।”

“मुझे मेरे शरीर से एक मर्द और एक औरत ने जुदा किया है। अब मुझे जाने दो।”

जासूस के होंठों से मद्धिम आवाज़ उभर रही थी। कमरे में रहस्यमय सन्नाटा था। किसी के साँस लेने की भी आवाज़ नहीं आ रही थी।

“उस औरत का नाम क्या है और उसने क्यों इस साज़िश में हिस्सा लिया ?” मैंने पूरा विवरण पूछा।

“उस औरत का नाम लजमी है। उसने दूध में ज़हर दिया था क्योंकि उसे इस काम के बदले में भारी रक़म का लालच दिया गया था।”

“मुझे पूरा विवरण चाहिए, ऐ पवित्र आत्मा! इसके बिना तेरी वापसी असंभव है।” मैंने जासूस के होंठ और जबड़े को देखते हुए कर्कश आवाज़ में कहा।

“लजमी को दो सौ पौंड की रक़म दी गयी थी जो इस समय भी उसके सूटकेस में मौजूद है। प्रकट में वह एक शरीफ़ औरत है लेकिन दौलत के लालच ने उसे इस साज़िश में सम्मिलित होने पर विवश कर दिया।

“ज़हर देने के लिए वह गिलास इस्तेमाल किया गया था जिस पर अमित ठाकुर के उँगलियों के चिह्न मौजूद थे।

रॉबर्ट ने लाजमी को ज़हर उपलब्ध कराया था। ज़हर की बाकी मात्रा नीले रंग की शीशी में मौजूद है।”

रॉबर्ट इस रहस्योद्घाटन से बौखला गया। उसने तुरंत फरार होने की कोशिश की लेकिन दरवाज़ा बंद होने के कारण सफल नहीं हो सका। हार्डी और पुलिस के दूसरे स्टाफ ने उसे पल भर में बेबस कर दिया।
 
सारा ग़म और क्रोध में लरजने लगी। मैंने उन सबको ख़ामोश रहने का इशारा किया। फिर उस जासूस को संबोधित करते हुए कहा।

“रॉबर्ट ने इस षड्यंत्र का जाल क्यों बिछाया था ?”

“इस षड्यंत्र के द्वारा रॉबर्ट अमित ठाकुर को रास्ते से हटा कर सारा से शादी करके तमाम जायदाद और दौलत पर कब्जा करना चाहता था।

“उसे अमित के बढ़ते हुए प्रभाव से यह ख़तरा हो गया था कि कहीं सारा उसके हाथ से निकल न जाए। इससे अधिक मुझसे मत मालूम करो। मैं दर्द की हालत में तड़प रहा हूँ। मुझे आज़ादी चाहिए।”

“आज्ञा है!” मैंने ठोस आवाज़ में कहा। दूसरे ही क्षण जासूस सिर झपटकर अपनी स्थिति में आ गया।

हार्डी मुझसे बुरी तरह प्रभावित नज़र आ रहा था। जासूस के उठने के बाद उसने सबसे पहले रॉबर्ट की ज़ेब की तलाशी ली। उसके कोट की ज़ेब में ज़हर की शीशी बरामद हो गयी। वह उसके कोट की अंदरूनी ज़ेब में मौजूद थी।

होटल से निकलकर मोहिनी इसलिए गयी थी कि रॉबर्ट को वही कोट पहनने पर मजबूर करे जिसमें ज़हर की शीशी मौजूद है। रॉबर्ट ने ज़हर की शीशी बरामद होने के बाद भी लार्ड के कत्ल को नहीं स्वीकारा।

लेकिन लजमी नामी नौकरानी के सूटकेस से दो सौ पौंड की रक़म बरामद हुई और लाजमी ने स्वीकार किया कि उसने रॉबर्ट की दी हुई रक़म के लालच में दूध में ज़हर मिलाया था।

रॉबर्ट का चेहरा जर्द पड़ गया।

सारा की हालत इस बीच पागलों की सी हो रही थी। वह बार-बार रॉबर्ट की तरफ़ खूँखार अंदाज़ में लपकती थी लेकिन मैंने उसे कठोरता से पकड़ रखा था।

पुलिस स्टाफ रॉबर्ट और लजमी के ठोस सबूत के साथ गिरफ़्तार करके ले जाने लगी तो हार्डी ने मुझसे कहा-

“मिस्टर अमित! आपसे दूसरी मुलाक़ात निश्चय ही मेरे लिए गर्व की बात होगी।”

सारा का पागलपन बढ़ता जा रहा था। वह दर्दनाक अंदाज़ में विलाप कर रही थी।

रॉबर्ट के क़ातिल साबित होने से सारा के जेहन पर बुरा प्रभाव पड़ा था। मेरे लिए उसे संभालना कठिन हो रहा था।

जब तक डॉक्टर नहीं आया सारा दीवारों से सिर टकराने की कोशिश करती रही। डॉक्टर ने उसे बेहोशी का इंजेक्शन दिया। आख़िर उसकी हालत संभलने लगी।

मुझे रात उसी के यहाँ गुजारनी पड़ी। यहाँ यह सवाल किया जाएगा कि इस घुमाव-फिराव वाली कार्यवाही की क्या आवश्यकता थी। मोहिनी को रॉबर्ट के सिर पर भेज कर जुर्म का इक़बाल करवाया जा सकता था। हाँ, यह बात आसान थी। मगर इसके लिए मोहिनी को अर्से तक रॉबर्ट के सिर पर रहना पड़ता। और मैं लंदन जैसे अजनबी शहर में मोहिनी के बिना नहीं रह सकता था। इसलिए मैंने पुलिस वालों, जासूसों और सारा के सामना ऐसी परिस्थिति पैदा कर दी कि मोहिनी को बार-बार भेजने की परेशानी न उठानी पड़े और मैं सभ्रांत व्यक्ति की हैसियत से पुलिस की नज़रों में आ जाऊँ।

इस घटना की जाँच-पड़ताल के संबंध में मैंने पुलिस से पहले ही वचन ले लिया था और मुझे उम्मीद थी कि अब वह मुझे बदनाम नहीं करेंगे। क्योंकि अगर वह इस बीच घटनाक्रम से मुझे निकाल भी देते तो भी प्रकाश की ठोस मजबूती से उन्हें मुकदमा अदालत में ले जाने में कोई परेशानी नहीं आती।

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लार्ड स्मिथ की मौत को लगभग बीस दिन हो गए थे। रॉबर्ट और लजमी मामला अदालत में पेश था लेकिन इस घटना ने लंदन में मेरा चैन सुकून गारत कर दिया।

वैसे मुझे अदालत में कभी पेश नहीं होना पड़ा।

मुझे अहसास था कि जो नौजवान किसी के कत्ल का इरादा करेगा उसका अतीत निश्चय ही जरायम पेशा हिमायती निश्चय ही मुझे परेशान करेंगे और यही हुआ।

मेरा अपहरण कराने और कत्ल कराने तक की कोशिश की गयी। कई छोटी-छोटी घटनाएँ घटी।

मोहिनी इस मारा-मारी और हंगामों से ख़ुश होती थी। यह सारी घटनाएँ अधिक दिलचस्प नहीं है। मैं उन्हें बयान करना निरर्थक समझता हूँ।

मेरी आप बीती खासी लम्बी हो गयी है। मैं घटनाएँ समेट रहा हूँ। कोई कहाँ तक मेरी आप बीती को याद करेगा। कहाँ तक मेरी दास्तान सुनेगा और मैं कहाँ तक सुनाऊँगा।

फिर भी दिल पर ऐसे ज़ख़्म हैं गुबार जेहन में हैं कि एक ज़ख़्म कुरेदता हूँ तो दूसरा उसके पहलू में हरा हो जाता है। एक बात खत्म करता हूँ तो दूसरी खुद ब खुद शुरू हो जाती है।

मुझे नहीं मालूम कि मेरी आप बीती सुनने वालों पर क्या प्रभाव पड़ा। फिर भी इस सच्चाई से किसी को इनकार नहीं होगा कि मैंने साधारण इंसानों से कहीं अधिक तजुर्बे किए हैं और सदमे उठाए हैं। ऐसी आश्चर्यजनक घटनाओं से मेरा वास्ता पड़ा है कि इंसानी मस्तिष्क उसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होता।

मेरे पास एक शक्ति थी और मैंने उसके जरिए इंसानों को अंदर से खंगाला, टटोला है। मौत, दरिंदगी, गरीबी, कमजोरी, अमीरी इंसान के साथ-साथ पैदा होती है। बहुत से लोग अपनी आप बीती या गुनाहों से पर्दा उठाने से कतराते हैं लेकिन मुझ पर जो गुजरी मैं बिना किसी हेर-फेर के बयान कर रहा हूँ।

लंदन में भी मेरे साथ अजीब-अजीब घटनाएँ घटीं। यूँ तो मेरी सारी ज़िंदगी घटनाओं का कूड़ेदान है, फिर भी मैं आगे बयान करता हूँ।

रॉबर्ट ने गुंडे मेरे पीछे लगवाए थे लेकिन जिसके पास मोहिनी जैसी अदृश्य शक्ति हो उसके गुंडे भला क्या बिगाड़ सकते हैं।

उधर रॉबर्ट के माँ-बाप अपने सुपुत्र को बरी कराने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे थे। ऐसे हालात में मेरा लंदन में रहना ज़रूरी था। अगर मैं फरार हो जाता तो ऊँची नस्ल के गोरे लोग हिन्दुस्तान तक मेरा पीछा नहीं छोड़ते।

जब रॉबर्ट के चरित्र की छानबीन की गयी तो कि उसकी आवारागर्दी की घटनाएँ भी प्रकाश में आ गयी। सारा धीरे-धीरे पिता का ग़म भूलने लगी। वह सुंदर लड़की अब अपने पिता की तमाम जायदाद की अकेली मालिकिन थी।

उसने मुझसे बहुत विनती की कि मैं उसके यहाँ रहूँ लेकिन अपनी इस कोशिश में वह नाकाम रही।

शुरू-शुरू में तो सारा का खूबसूरत पैकर देखकर मेरे दिल में कसक सी होती थी लेकिन अब लार्ड की अचानक मृत्यु के बाद सारा की हालत पर तरस आने लगा था। और वह थी कि मेरे नाम पर जीती थी। सारा के रिश्तेदारों और लार्ड के निकटतम दोस्तों ने उसके गिर्द घेराव डाल दिया था क्योंकि अब सारा बेसहारा लड़की थी।

सारा का दिल बहलाने और उसका ग़म मिटाने के लिए हर समय एक हजूम मौजूद रहता। यह हजूम देखकर मैं उससे किसी कदर दूर रहने की कोशिश करने लगा।

वह लोग मुझे नफ़रत भरी नज़र से देखते थे। सारा को मैं अक्सर यह बात समझाता कि जो लोग उसके पापा की मौत के बाद अचानक उसके शुभचिंतक बनकर उसके इर्द-गिर्द जमा हो गए हैं, उनसे उसे सावधान रहना चाहिए। शाम को मैं उसे छोड़ देता और शाम को ही वे लोग सारा के गिर्द ग़ोल बना लेते।

मैं उसके साथ रात-दिन नहीं रह सकता था इसलिए कि मैं लंदन में सिर्फ़ सारा की वजह से नहीं आया था। सारा तो रास्ते में मिल गयी थी।

शहर में गुंडों ने जब मुझे बहुत परेशान कर दिया तो मैं लंदन के एक देहाती क्षेत्र में चला गया।

यह जगह शहर से तीस मील दूर थी लेकिन सारा प्रतिदिन मुझसे मिलने आती थी। और घंटों मेरे पास मेरे पहलू में बैठी रहती। मेरी बाहों में सिमटी रहती।

मैं उसकी उदास आँखों में झाँकता रहता। उसने कई बार मुझे रक़म की पेशकश की, मगर मैंने मुस्कराकर टाल दिया।

उसे क्या मालूम था कि कुँवर राज ठाकुर हर शाम ज़िंदा होते थे। जिस तरह लंदन पर शाम ढलते शबाब आता था। दिन में यूरोप और एशिया में अंतर क्या है। अंतर केवल रात का है।

लंदन में रात बड़ी हसीन होती है। रात को लंदन के ऊँचे दर्जे के हसीनों में प्रविष्ट होने के बाद मेरे पास दौलत की कमी नहीं रहती थी। मैं दिन भर यही सोचता रहता था कि यह रक़म किस तरह ठिकाने लगाऊँ। रोज़ रात आ जाती और रक़म फिर भी बाकी रह जाती थी।

कुछ दिन लार्ड की मृत्यु के बाद सारा के साथ समय गुज़र गए। उसके बाद मैं लंदन घुमा और मैंने कल की चिंता न करके हर आज की रात लंदन की रंगिनियों में गुज़ार दी।

एक के बाद एक होटल, शबाब मस्ती की महफिलें, नाज़ुक जिस्मों की सरसराहटें, उनके बदन की सुगंधें।

लंदन में भला और क्या था।

मैं सब कुछ भूल गया।

दिन भर यह लोग काम करते थे और रात में मस्ती में डूब जाते थे। उन्हें ग़ुलाम बनाना और ऐश करना आता था। मैं जब वहाँ गया तो उन्हीं के जैसे हो गया था।

उन दिनों लंदन में ऐसे भी कुछ होटल या क्लब थे जहाँ काले लोगों के दाख़िल होने पर पाबंदी थी। यह गोरे धनवानों के आने-जाने की जगह थी।

उन होटलों को देखकर न जाने क्यों यह जी चाहता था कि अंग्रेज़ों का पूरा शहर आग में झोंक दूँ। उनकी पूरी नस्ल तबाह कर दूँ। वैसे भी इन्होंने हमारे मुल्क पर क्या कम अत्याचार किए थे। यही वे लोग थे जिन्होंने हमें ग़ुलामी की जंजीरे पहनायी थीं।

मेरी यह भावना भड़कती गयी और इसी चिंगारी की तपिश ने मुझे लंदन के एक ऐसे क्लब में जाने के लिए उकसाया जिसमें हम काले दाख़िल नहीं हो सकते थे।

लंदन से पाँच मील दूर ब्रिटानिया के अमीरों का एक क्लब खासा प्रसिद्ध था। सुना था कि वहाँ सिर्फ़ बड़े लोग ही जा सकते हैं।

जब मुझे मोहिनी ने बताया कि सारा के मेहरबान दोस्तों ने उसे अपनी तरफ़ प्रभावित करने और उसकी दौलत पर कब्जा जमाने के लिए उसे उस क्लब में ले जाना शुरू कर दिया है तो मुझसे रहा नहीं गया।

सारा दुश्मनों के चंगुल में घिर गयी थी। मैं किस-किस से लड़ता।

एक रात मैंने फ़ैसला कर लिया कि मैं उस क्लब में जाऊँगा और उनके चेहरे देख लूँगा। मेरी यह इच्छा कतई फितरी थी। मोहिनी जिसके पास हो उसके दिल में ऐसी तूफानी इच्छाएँ ज़ोर से उभरती हैं।

उस रात मैं खूबसूरत महँगा सूट पहने गाड़ी किराए पर ली और मंज़िल की तरफ़ रवाना हो गया।

जब मेरी गाड़ी क्लब के गेट पर पहुँची तो दो कौड़ी के एक दरबान ने सख़्ती के साथ मुझे आगे जाने से मना कर दिया।

मैंने ज़ेब में हाथ लगाकर कुछ रक़म उसके हाथ में रख दी। वह गोरा हिन्दुस्तानी साबित हुआ। किसी कदर हिचकिचाहट के बाद उसने मुझे रास्ता दे दिया।

मेरी कार इमारत की खूबसूरत लान को पार करती हुई क्लब के अंदर दरवाज़े पर पहुँच गयी। अंदर दाख़िल होने के नियम सख़्त थे।

सबसे पहले मेरी कार का दरवाजा एक तंदुरुस्त अंग्रेज़ ने खोला। जब मैं कार से बाहर उतरा तो वह मुझे देखकर ठिठक गया।

उसने कठोर स्वर में मुझे क्लब में दाख़िल होने से मना कर दिया। मैंने उससे निवेदन किया कि मैं हिन्दुस्तान की एक रियासत का जागीरदार हूँ। ब्रिटेन के विशेष अधिकार प्राप्त है मुझे। मेरी गिनती उन कालों में नहीं होती जो एशिया, अफ्रीका या अमेरिका से आते हैं।

वह मुझसे बिल्कुल प्रभावित नहीं हुआ। उसे टिप देने की पेशकश भी नाकाम साबित हुई।

फिर मैंने कहा- “मुझे जाने दो। यह ताज ब्रिटानियों के एक पद की तौहीन है।”

उसने इस बात की भी परवाह न की। अच्छी-खासी झड़प होने लगी। कुछ मैं भी गरम हो गया।

मैंने मोहिनी को उसके सिर पर भेजने का संकेत नहीं किया। यह तू-तू, मैं-मैं देखकर क्लब के दूसरे कर्मचारी भी आ गए थे। फिर मैंने क्रोधित स्वर में कहा-

“सुनो, मैं यह कमीनी हरकत बर्दाश्त नहीं कर सकता। मुझे अंदर जाने की अनुमति मिलनी चाहिए।”

यह कहकर मैंने अपना पिस्तौल निकाल लिया। पिस्तौल देखते ही वे घबराकर पीछे हट गए और मैं लापरवाही के साथ क्लब में दाख़िल हो गया।

वहाँ हल्की-हल्की रोशनी थी। वहाँ चारों तरफ़ कहकहे, शराब की बदबू फैली हुई थी। अंदर की इमारत से एक शान टपकती थी। मैंने पिस्तौल ज़ेब में रखा और लंदन के रईस जादों के बीच बैठ गया



अधिकतर मेजें भरी हुई थी और विभिन्न जोड़े एक-दूसरे से बेपरवाह होकर अपनी-अपनी मस्ती में डूबे थे। बेड हाल के इर्द-गिर्द कमरे थे।

उन कमरों में दूसरी तफरीह का प्रबंध था। मुझे मालूम था कि वे क्लब में कोई हंगामा नहीं करेंगे लेकिन मेरा ख़्याल ग़लत निकला।
 
मेरे बैठते ही एक व्यक्ति मेरे क़रीब आया और क्लब के नियमादि के बारे में बताने लगा। मैंने कहा कि मेरा उद्देश्य केवर कुछ देर की सैर, तफरीह है। लंदन के अमीरों की ज़िंदगी क़रीब से देखना चाहता हूँ। बर्तानियों में मेहमान के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।

वह संतुष्ट होकर चला गया। मेरे हिन्दुस्तानी होने की वजह से क्लब के बहुत से सदस्यों ने अपना ध्यान मेरी तरफ़ आकर्षित कर लिया। कर्मचारी मेरे पास आकर खुशामद करते रहे और मैं ढिठाई से बैठा रहा।

सारा मुझे नज़र नहीं आ रही थी। उस अजनबी वातावरण में मैं किसी कदर परेशानी महसूस कर रहा था। क़ीमती फर्नीचर, झाड़-फानूस, खूबसूरत पर्दे। हर तरफ़ दौलत का प्रदर्शन हो रहा था।

आख़िर मुझे धमकी दी गयी कि पुलिस बुला ली जाएगी। मैंने मुस्कराकर कहा कि वह यह पैंतरा भी आज़मा लें।

मैं अकेला बैठा था। वहाँ लंदन की जानी-मानी हस्तियाँ जमा थीं। ऐसी हसीन लड़कियाँ जो सड़कों पर मुश्किल से देखने में आती हैं।

तन्हाई दूर करने के लिए ज़रूरी था कि कोई हंगामा किया जाए। किसी लड़की को बुलाया जाए।

मैंने मोहिनी को संकेत किया कि वह उस हाल में सबसे सुंदर लड़की को मेरे पास बुलाए। क्षण भर की देर थी कि मैंने देखा जिप्सी में लिपटी एक बहुत हसीन लड़की मेरे पास लड़खड़ाटी हुई आई। उसने मुझे अभिवादन किया और बैठने की अनुमति माँगी।

मैंने उसे कुर्सी पेश की।

मुझे उसके निकट देखकर क्लब के कर्मचारी कुछ संतुष्ट हो गए। मोहिनी तुरंत मेरे सिर पर आ गयी। वह लड़की भयभीत अंदाज़ में मुझे देखने लगी।

मैंने धीमे स्वर में कहा-

“मेरा नाम अमित ठाकुर है। मैं हिन्दुस्तान से यहाँ आया हूँ। आपसे मिलकर ख़ुशी हुई।”

“मुझे आरमा आर्थर कहते हैं। मुझे भी आपसे मिलकर ख़ुशी हुई। आप यहाँ कब तशरीफ लाए ?” उसके स्वर में शराफत थी।

“मुझे यहाँ आए हुए दो माह के लगभग हो गए।”

“हिन्दुस्तान, रहस्यमय हिन्दुस्तान! मुझे वह देखने की बड़ी इच्छा है। मैंने वहाँ के मंदिरों, ऋषि-मुनियों और इमारतों के बारे में बहुत कुछ सुना है। क्या वास्तव में हिन्दुस्तान इतना सुंदर है जितना समझा जाता है ?” उसने मासूमियत से पूछा।

“हिन्दुस्तान की सरजमीं हसीन है। लेकिन लोग यहाँ के हसीन हैं। यह बड़े धार्मिक और अतिथि सत्कार वाले हैं।”

इस अर्से में मेरे आर्डर पर मेरी मेज़ विभिन्न प्रकार के पेय पदार्थों और दूसरे सामानों से भर गयी थी।

मैंने बातों से उसे प्रभावित कर लिया था। उसे एक बहुमूल्य हार उपहार में दिया। यह हार मैं ऐहतियातन अपनी ज़ेब में रख लाया था। अब वार्तालाप शुरू हुआ जो मेरा हसीन लड़कियों से अक्सर होता था।

कोई एक घंटे की हसीन दिलफरेब बैठक के बाद भी वह सुंदरी मेरे पास से उठने को तैयार नहीं थी। इस बीच हाल भर गया था और आरमा के इर्द-गिर्द कुछ अमीरजादे चक्कर लगा रहे थे। मैंने अभी तक अपनी मोहिनी से कोई विशेष काम नहीं लिया था।

जब मैं आरमा से बातें करने में व्यस्त था तो मोहिनी ने मुझे संकेत दिया-

“सारा!”

मैंने पलटकर देखा। वास्तव में सारा अपने बदन पर अडॉलीना वस्त्र लिपटाए, बगली कमरे से एक चालीस साल के व्यक्ति के साथ आ रही थी। उसकी आँखें चढ़ी हुई थी।

सारा ने मुझे देखा और मोहिनी ने मुझे बताया कि यह व्यक्ति लार्ड स्मिथ के रिश्तेदारों में से एक है। और इस लड़की को हथिया लेना चाहता है। इसकी नज़रें सारा की दौलत पर है।

उसके हाथ सारा की कमर पर थे और उदास सारा खासी झुकी हुई थी। उसके पीछे दो-तीन अधेड़ उम्र के आदमी और नज़र आ रहे थे।

वह मुझसे कुछ दूर एक कुर्सी पर जम गए। मालूम हुआ कि अंदर जुए का कमरा है। जहाँ से वे सारा को खिलाकर हाल में ले आए थे। सारा कभी-कभी उनकी बात पर ज़ोर से कहकहा लगाती और वे बेतहाशा उसका साथ देते।
 
सारा को इन मुसटंडो के साथ देखकर मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरी कुलवंत, मेरी माला, मेरी डॉली और मेरी तरन्नुम गुंडों से घिर गयी हो।

मेरा खून खोलने लगा। सारा से एक अजीब लगाव दिल को महसूस होता था। दिन भर वह मेरे साथ थी। रात को मैंने उसे इस बदमस्ती के आलम में देखा तो मेरा जेहन एकदम से झुलसने लगा।

इधर आरमा मेरे चेहरे की उड़ती गत देख रही थी। मैं कोई योजना बना रहा था कि होटल के चार कर्मचारी मेरे पास आ खड़े हुए। उनमें से एक ने मुझे आरमा से छिपाकर पिस्तौल दिखाया।

मैं इस धमकी पर मुस्कुरा दिया। उन्होंने मुझे उठने का संकेत किया। मैं अपनी जगह बैठा रहा। वह मुझे कोई साधारण आदमी समझ रहे थे। कोई लुच्चा-लफंगा।

किसी वक्त भी कोई बड़ा हंगामा हो सकता था। जब मैं अपनी जगह पर बैठा रहा तो मुझे एक जानी-पहचानी सूरत अपनी तरफ़ आती दिखायी दी। वह जब मेरे निकट आया और मेरी सूरत देखी तो लपक कर हाथ बढ़ा दिया।

“हैल्लो अमित ठाकुर! अरे आप कहाँ रहते हैं ? मैं तो आपको तलाश कर रहा था।”

“जिम...जिम...! अहा...जासूस जिम। क्यों कैसे हो ? देखो भाई, यह लोग मुझे परेशान कर रहे हैं।”

यह वही जासूस था जिसे मैंने माध्यम बनाकर लार्ड स्मिथ की आत्मा बुलाने का काम लिया था। उसने आते ही उन लोगों को धमका दिया।

“यह अमित ठाकुर हैं। इनकी इज़्ज़त करो। तुम लोगों ने सिर्फ़ इन्हीं की वजह से मुझे बुलाया है। लोगों को पहचाना करो। इस क्लब में महत्वपूर्ण लोगों की सूची में मिस्टर अमित ठाकुर का भी नाम लिखो।”

“जिम ने उल्टा उन्हीं को बुरा-भला कहना शुरू कर दिया।

मेरे क़रीब से भीड़ छँट गयी। जिम लगावट की बातें लगा। मैंने आरमा का उससे परिचय कराया।

”लेकिन मुझे यक़ीन है कि आप यह नहीं जानती कि आप कितने दिलचस्प और महान व्यक्ति के साथ इस समय बैठी हैं।”

“मैं इनसे निरंतर प्रभावित हो रही हूँ।” आरमा ने मुस्कुरा कर कहा।

“यह बड़े छिपे रुस्तम हैं।” उसने आरमा से कहा फिर मुझसे संबोधित हुआ- “मिस्टर अमित ठाकुर, मैं इस क्लब में आपका स्वागत करता हूँ। मुझे अफ़सोस है कि आपके साथ ज्यादती हुई।

“इन लोगों ने मुझे फ़ोन करके बुलाया है। मगर चलिए अच्छा हुआ आपसे मुलाक़ात हो गयी। मिस आरमा, बताइए आपने अमित से कुछ पूछा ?”

“किस बारे में ?” आरमा ने सादगी से पूछा।

“अरे यह दिल का हाल बता देते हैं। न जाने किस-किस विद्या के विशेषज्ञ हैं। लंदन में ऐसे लोग आए हैं और उनका फ़ायदा न उठाया जाए, यह सितम है।” जिम ने चहककर कहा।

मैं खामोशी से सुनता और मुस्कराता रहा। मेरी नज़रें सारा पर थीं। वह अब साज़ की धुन पर नृत्य कर रही थी।

हाल में साज़ के संगीत से एक खलबली सी मची हुई थी।

जिम मेरे बारे में आरमा से हैरतअंगेज बातें करता रहा। मोहिनी ख़ामोश बैठी शायद किसी आज्ञा की प्रतीक्षा में थी।

सारा के साथ नृत्य करने वाले को देखकर मेरे दिल में आग सी लग गयी। मैंने मोहिनी को उसके ऊपर छोड़ दिया। अचानक वह होटल में अभद्रता प्रकट करने लगा। उस हाल में बैठी औरतों को नोचना-खसोटना और बोतलें यहाँ-वहाँ फेंकना शुरू कर दिया। वह कहकहे लगा रहा था। नृत्य करते जोड़े भाग कर इधर-उधर सिमटने लगे।

सारा ने उसे थामने की बहुत कोशिश की लेकिन वह किसी पागल कुत्ते की तरह बेकाबू हो गया। उसने जाम तोड़ दिए। उसने औरतों के गिरेबानों में हाथ डाल-डालकर उनकी ब्रा फाड़नी शुरू कर दी।

चंद मिनटों में हाल में चीख-पुकार मच गयी। शराब फर्श पर बहने लगी और गिलास दूर दीवारों से टकराने लगे।

बेतरतीबी हंगामा और अफरा-तफरी देखकर लोग भागने लगे। न जाने उस व्यक्ति में इतनी शक्ति कहाँ से आ गयी थी कि वह काबू में नहीं आ रहा था।

क्लब के कर्मचारी भयभीत होकर इधर-उधर फिर रहे थे। आरमा का भी मारे भय के बुरा हाल था। मैं दूर बैठा इस दृश्य का मज़ा ले रहा था। अंग्रेज़ों के इस प्रसिद्ध क्लब में पहली बार ऐसा हंगामा हुआ था।

आख़िर बड़ी मुश्किल से कुछ लोगों ने उसे पकड़ा और क्लब के बाहर ले गए।
 
लंदन के अमीरों में वह एक विशेष हैसियत रखता था। लेकिन अब मिनटों में गारत हो चुका था। उसे क्लब से बाहर निकाले जाने के बाद मोहिनी मेरे पास आ गयी।

जिम मेरे पास से उठकर उस व्यक्ति को क़ाबू करने चला गया था। अब वह भी वापस आ गया था।

वातावरण को सामान्य बनाने में कुछ समय लगा किंतु अब भी चारों तरह अफरा-तफरी और दहशत फैली हुई थी। मैं अपनी जगह से हिला तक नहीं। जब जिम ने निवेदन किया तो मैं उठा। आरमा उस बीच निरंतर पीती रही थी।

उसने मेरी कमर में हाथ डाल दिया। हम एक दूसरे कमरे में आ गए। यह जुए का कमरा था। वहाँ हाल की अपेक्षा ख़ासा शोर था। जिम मुझे खिलाने और उकसाने की फ़िक्र में था।

आख़िर वह कहने लगा।

“अमित ठाकुर! क्या ख़्याल है ? यह खेल कैसा रहेगा ? आप तो निश्चय ही जीतेंगे।” उसने जुए की मेज़ की तरफ़ इशारा किया।

“मिस आरमा के नाम पर आज इनका भाग्य देखेंगे।” मैंने राजसी शान से कहा। “देखें यह कहाँ तक खेलती हैं ?”

“मेरी किस्मत हमेशा ख़राब रहती है।” वह झल्लाकर बोली।

“आज आप मेरे साथ हैं। आपकी जीत की कामना के लिए दुआएँ करता रहूँगा।” मैंने शोखी से कहा।

“मैं हार जाऊँगी। आपको निराशा होगी।”

“मैं आपको संभाल लूँगा।”

“अमित ठाकुर कोई जादू करेंगे। मुझे विश्वास है।” जिम बीच में बोल पड़ा।

“क्या यहाँ अब यह भी बता दूँ कि आरमा ने किस तरह झिझकते-झिझकते पासा फेंका। उसके कयामतखेज शबाब की तरह उस रात उसकी क़ीमत भी शबाब पर थी। वह निरंतर जीतती रही। जिम सकते में रह गया और मुझे घूरकर देखने लगा।

आरमा के पास दौलत का अंबार लगते गया। आरमा को निंरतर जीतते देखकर यह खबर हाल में पहुँच गयी। एक छोटे से हजूम के साथ सारा भी आई। उसके इर्द-गिर्द दो वार्ड भी मौजूद थे। वे इस वक्त समीक्षक बने हुए थे।

वहाँ का हाल देखकर सारा एक क्षण के लिए दंग रह गयी और कुछ नाराज़ सी हो गयी। फिर वह दोनों अमीरों को छोड़कर मेरे पास आ गयी। आरमा ने उसे गौर से देखा। वह दोनों एक-दूसरे से परिचित थीं।

मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं था कि मैंने सारा से बेरुखी क्यों बरती। शायद उस रात आरमा मुझ पर छा चुकी थी और शायद सारा को वहाँ देखकर मैं अपनी नाराज़गी प्रकट करना चाहता था।

सारा मेरे पास आई तो दहशत सी होने लगी। आरमा पर मेरी मेहरबानियाँ बढ़ गईं। मैं मोहिनी के जरिए चुन-चुनकर उसके सामने ऐसे आदमियों को लाया जिनकी जेबें भरी हुई थी।

सबसे पहले तो सारा के दोनों साथियों को मोहिनी ने बुरी तरह लूटा फिर क्लब में मौजूद कोई ऐसा व्यक्ति नहीं रहा जिसने उस रात बाज़ी न लगाई हो और आरमा के सामने हारा न हो।

यह खबर सुनकर धीरे-धीरे हर व्यक्ति ने बाज़ी लगाई। सिर्फ़ मैं और सारा बचे रहें। आख़िर उन्होंने मुझसे निवेदन किया कि मैं भी खेलूँ।

मैं आरमा का दिल तोड़ना नहीं चाहता था अतः मैं जानबूझकर हार गया। थोड़ी ही देर में अपनी खूबसूरत लच्छेदार बातों से वहाँ एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गया।

यह बात सिर्फ़ सारा और जासूस के दिमाग़ में थी कि आरमा क्यों जीत रही है।

आख़िर जब रात गए मैं वहाँ से रुखसत हुआ तो आरमा ने अपनी सारी रक़म क्लब में सुरक्षित जमा करवा दी। जिम ने अगले दिन मुझसे मिलने का वादा ले लिया।

सारा को विदा करके मैं दोबारा आरमा के पास आ गया। क्लब खाली हो चुका था। क्लब के कर्मचारी मुझसे अपने व्यवहार के लिए क्षमा माँगने लगे।

लंदन में दिन और अच्छी रातें गुजारने का सामान पैदा हो गया। यह क्लब उत्तर श्रेणी की सुंदरियों और मालदार लोगों का मनोरंजन केंद्र था। यहाँ का वातावरण और प्रबंध बहुत उत्तम थे।

मुझे विश्वास था कि यहाँ का वातावरण मुझे आनंद देगा और मुझे इधर-उधर मारे-मारे नहीं फिरना पड़ेगा। सब कुछ यहीं मिल जाया करेगा।
 
लंदन में इससे बेहतर और कौन सी जगह होगी। यहाँ मेरी पहली रात बहुत ही शानदार रात थी। मैं रात को क्लब से निकलने के बाद होटल में आया।

आरमा मुझे अपने शानदार जागीर पर ले गयी। लंदन के उस क्लब में कोई ग़रीब अंग्रेज़ प्रविष्ट होने का साहस नहीं कर सकता था।

आरमा के खूबसूरत शयनकक्ष, एक सुंदर लड़की के खूबसूरत शयनकक्ष में मुझे नशा सा हो गया। इस मामले में मोहिनी की सहायता नहीं लेनी पड़ी। वह सोती रही।

आरमा नशे में थी और बहुत उन्मादी थी। उसके शयनकक्ष में एक पूर्वी आदमी था, तन्हाई थी। उसने मेरा लिबास बदलवाकर मेरे गले में बाहें डाल दी। मैं स्वयं को दुनिया का भाग्यशाली व्यक्ति महसूस करने लगा। उसकी मदहोशी का अंदाज़ ही कुछ और था। वह रात मेरे खूबसूरत रातों में से एक थी।

मैं पूरी रात नहीं सोया।

सुबह आरमा से पीछा छुड़ाना कठिन हो गया। मुझे मालूम था कि सारा के आने से पहले मुझे होटल पहुँच जाना चाहिए। आरमा साथ चलने पर आमादा थी।

रात को दोबारा क्लब आने का वादा करके मैंने जान छुड़ाई। होटल पहुँचकर लिबास तब्दील किया। सारा समय से पहले आ गयी। उसी समय मैंने सारा को उन अंदेशों से सावधान किया जो मेरे दिल में उभर रहे थे।

सारा स्वयं बहुत उदास और परेशान थी। उसने बताया कि उसके मना करने के बावजूद लोग उसे महफिलों और हंगामों में जाने के लिए मजबूर कर देते हैं।

फिर उसने एक ऐसी बात कह दी कि मैं दंग रह गया। मैंने सारा के विषय में कभी इतनी गंभीरता से नहीं सोचा था। सारा ने मुझसे कहा कि मैं उसे हमेशा के लिए हिन्दुस्तान ले चलूँ।

वह अपनी जागीर और तमाम कारोबार का सौदा करके हमेशा के लिए मेरे साथ जाना चाहती थी।

मैं पशोपेश में पड़ गया।

बात उस हद तक पहुँच चुकी थी कि मैं सारा से साफ़ इनकार नहीं कर सकता था इसलिए कि मैंने उसे किसी और तरह सोचना शुरू कर दिया था। मेरे दिल से वह तमाम ग़लतफहमियाँ दूर हो गयी थी जो रात में उसे क्लब में दूसरे लोगों के साथ देखने से पैदा हो गयी थी।

वह पवित्र लड़की थी। एक बहुत बड़ी पेशकश कर रही थी, किसके लिए ? कुँवर राज ठाकुर के लिए। मुझे स्वयं से शर्मींदगी होने लगी और उस लड़की पर तरस खाने लगा।

उस दिन मैं देर तक होटल में ही रहा। दोपहर को कार्यक्रम के अनुसार नौजवान जासूस जिम आ गया। हम तीनों रहस्यमय विषय पर बहस करने लगे।

जिम ने मुझसे पूछा कि क्या रात आरमा की जीत में मेरी किसी दैवी शक्ति का दखल था। मैंने उत्तर दिया- “यूँ ही एक कोशिश ज़रूर की थी।”

सारा के सामने जिम कुछ कहने से झिझक रहा था। आख़िर सारा से क्षमा माँगकर वह मुझे होटल के रेस्टोरेंट में ले गया। वहाँ उसने मेरी हैसियत के संबंध में अपने विचार प्रकट करने शुरू कर दिए। जासूस जिम कोई बात कहना चाहता था मगर शब्द उसके होंठों पर आते-आते रुक जाते थे।

आख़िर मैंने उससे पूछा- “तुम कुछ कहना चाहते हो ?”

“हाँ!” वह सर्द आवाज़ में भर्राकर बोला। “मगर हिम्मत नहीं हो रही है। संभव है तुम मुझ पर संदेह करो।”

“नहीं, नहीं! कहो, क्या तुम्हें मेरी किसी सहायता की ज़रूरत है ? मैं तैयार हूँ।”

“अमित ठाकुर! तुम अदृश्य शक्तियों के स्वामी हो। मुझे सचमुच तुम्हारी शक्ति की ज़रूरत है।”

“यकीकन तुम मुझसे झूठ नहीं बोल सकते हो। कहो, क्या बात है।”

“अमित ठाकुर, बात बड़ी विचित्र है। मैंने तुम जैसा व्यक्ति पहले कभी नहीं देखा। मेरा ख़्याल है कि तुम अपने पिछले वर्षों में असाधारण घटनाओं से दो-चार रहे होगे। इसलिए तुम्हारा अनुभव सही है। तुम बहुत गहरे व्यक्ति हो।

मैंने अपनी आँखों से तुम्हारे हैरतअंगेज कारनामे देखे हैं। तुम असाधारण व्यक्ति हो। कल रात लंदन के अमीरों के क्लब में तुम्हारा बेधड़क चला जाना और पिस्तौल दिखाकर कर्मचारियों को भयभीत करना। एक नई लड़की से एकदम इश्क़ करना और रात उसके साथ बिताना। सारा जैसी मालदार और हसीन लड़की को इस तरह प्रभावित करना कि वह तुम्हारे साथ ही रहना चाहे। दूसरे अलावा रॉबर्ट के केस में तुम्हारा आत्मा को बुलाना। तुम्हारे कारनामे। तुम निश्चय ही इस दुनिया के आदमी मालूम नहीं होते।”

जिम रहस्यमय गंभीर स्वर में मेरे व्यक्तित्व का वर्णन कर रहा था।

मुझे आश्चर्य था कि इस व्यक्ति ने मेरे बारे में इतनी जानकारी प्राप्त कर रखी है।

“मैं एक ज्योतिष आदमी हूँ। मेरे साथ अन्याय मत करो जिम कि कोई व्यक्ति मुझे जिन-भूत समझने लगे।” मैंने हँसकर कहा।

“नहीं, नहीं, अमित ठाकुर! मैं हैरान हूँ कि तुम क्या-क्या हो।” उसने ज़ोर देकर कहा।

“तुम कुछ कह रहे थे।” मैंने विषय की बुनियाद पकड़नी चाही।

“मैं यह कहना चाहता हूँ कि तुम यह विशेषताएँ किसी बड़े काम के लिए कर सकते हो जो इंसानों का दुःख दूर करे। कोई ऐसा कारनामा जो इंसानों के लिए कारोबार हो। कोई ऐसा काम जो किसी बड़े पवित्र उद्देश्य के लिए किया जाए।”

“मैं समझा नहीं!” मैंने छत को घूरते हुए कहा।

“मैं चाहता हूँ कि तुम इंसानियत के लाभ के लिए इंसानियत के दुश्मनों के ख़िलाफ़ जंग करो। एक व्यक्ति भी बहुत कुछ कर सकता है। विशेष कर तुम जैसा आदमी।” उसने सरगोशी के अंदाज़ में कहा।

“तुम साफ़-साफ़ कहो।”

“अमित ठाकुर।” जिम ने इधर-उधर देखते हुए कहा। “यह बात ऐसी नहीं है जो सरेआम कही जा सके। यूँ तो तुम जानते ही हो दुनिया पर एटमी जंग का ख़तरा मंडरा रहा है। दो महाशक्तियों के खेमों की गोद में छोटे-बड़े देश बैठते जा रहे हैं और यह लोग अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए छोटे देशों को अपना ग़ुलाम बनाने का सपना देख रहे हैं। उन्हें लड़वाकर अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं।”

“जिम, मेरे दोस्त! मुझे सियासत में कभी कोई दिलचस्पी नहीं रही। मुझे अफ़सोस है कि इस बड़े मसले पर मैं कुछ नहीं कर सकता। फिर भी तुम चाहते क्या हो ?”

फिर जिम मेरे कानों में फुसफुसाकर बातें करने लगा।

वह मेरे जरिए किसी देश के ख़िलाफ़ जासूसी करवाना चाहता था। उसने कुछ काग़ज़ातों का हवाला दिया जो मुझे पार करने थे। मैं आश्चर्य से उसकी बातें सुनता रहा। यह खेल बड़ा ख़तरनाक था लेकिन दिलचस्पी से खाली भी न था।

फिर भी मैं जिम को टाल गया।

अगले दिन फ़ोन की घंटी बजी तो मैंने समझा जिम का फ़ोन होगा। परंतु वह जिम का फ़ोन न था। तुर्की के उस जादूगर का था जिसकी शान मैंने मिट्टी में मिला दी थी।

वह मुझसे मिलना चाहता था। उसका कहना था कि उसका उस्ताद जादूगर सुलेमान तुर्की से आया है जो स्टेज पर मुझे बुलाना चाहता है।

उसने मुझसे स्टेज पर आने की बहुत प्रार्थना की परंतु मैं उसे टाल गया।

रात होते ही मैं लंदन के उसी क्लब की ओर चल पड़ा जहाँ मैं रंगरेलियाँ मनाना चाहता था।

मैं एक सुनसान सड़क पर शेष रास्ता तय कर रहा था कि अचानक मोहिनी के पंजों की तेज चुभन महसूस करके चौंक पड़ा। ऐसा तभी होता था जब मोहिनी किसी ख़तरे का संकेत करती थी। मोहिनी एकदम खड़ी होकर दर शून्य में देख रही थी। उसका चेहरा क्रोध में तमतमाया हुआ था। और मुझे पूरी शक्ति से कार के ब्रेक लगाने पड़ गए क्योंकि सामने रुकावट खड़ी थी। सड़क पर ड्रमों की एक कतार जमा थी।

मैंने कार का दरवाज़ा खोलकर बाहर कदम रखा ही था कि मोहिनी ने मुझे सचेत किया परंतु तब तक वक्त निकल चुका था।

वह पाँच आदमी थे जिन्होंने मुझे दबोच लिया और उनके रिवॉल्वर मेरे पसलियों पर चुभने लगे। उन्होंने मुझे इसी स्थिति में वापस कार की पिछली सीट पर धकेला।

उनमें से एक ड्राइविंग सीट पर जम गया और बाकी मेरे इर्द-गिर्द। एक मेरी कमर पर रिवॉल्वर की नाल जमाए बैठ गया।

मैंने मोहिनी की तरफ़ देखा जो बड़ी बेचैनी से मेरे सिर पर चहलकदमी कर रही थी। क्रोध के कारण मोहिनी का चेहरा सुर्ख हो गया था।

कार वापस मुड़ी और फिर एक दूसरे मार्ग पर चल पड़ी।

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उन्होंने तेजी से मुझे गाड़ी में डाला और गाड़ी मोड़ ली। वह पाँच आदमी थे। तीन आगे और दो पीछे बैठ गए। उनके हाथों में पिस्तौल थी। चेहरे-मोहरे से वे अपराधी मालूम होते थे। यह काम इतनी शीघ्रता से हुआ कि मैं कुछ समझ न सका। मैंने दिल ही दिल में मोहिनी को पुकारा। मोहिनी सख़्त बेचैन हो रही थी।

वह कहने लगी- “राज! तुम कठिनाई से घिर चुके हो। मैं अगर ड्राइवर के सिर पर जाकर रास्ता बदलवाती हूँ तो शेष चार कभी भी कुछ भी कर सकते हैं क्योंकि उन्हें यही हुक्म मिला है।”

“यह लोग कौन है ?” मैंने घबराकर पूछा।

यह उस व्यक्ति एडवर्ड के आदमी है जो कल तुम्हें सारा के साथ नज़र आया था। उसे छोड़कर जब सारा तुम्हारे पास आई थी तो उसने उसी वक्त तुम्हें ठिकाने लगाने का निर्णय कर लिया था।

“वह समझता है कि तुम सारा की प्राप्ति की राह में उसके लिए रुकावट बन गए हो।” मोहिनी ने भर्रायी हुई आवाज़ में कहा।

“ओह्ह, यह सारा जान का जंजाल बन गयी! अब यह मुझे कहाँ ले जा रहे हैं और तुमने क्या सोचा है ?” मैंने परेशानी में पूछा।

“यह तुम्हें किसी वीराने में ले जाकर खत्म कर देना चाहते हैं। इन सबके हाथों में पिस्तौल है और यह बड़े लीडर लोग हैं।”

“तो क्या तुम इसी तरह बैठी रहोगी ?” मैंने झुंझलाकर कहा।

“मैं केवल एक समय में एक व्यक्ति के सिर पर जा सकती हूँ लेकिन पहले शेष लोगों के बारे में संतुष्ट हो जाना चाहती हूँ कि यह तुम्हारा कुछ अहित तो नहीं करेंगे।”

“लेकिन मुझे वीराने में ले जाने के बाद तो उनका काम और भी आसान हो जाएगा। तुम कोई गलती तो नहीं कर रही हो ? देखो, आबादी बहुत दूर होती जा रही है।”

“मुझे सोचने दो। तुम तो मेरे हाथ-पैर फुलाए दे रहे हो।”

मैं उनके दरम्यान फँसा बैठा था। उनकी आँखें मेरी तरफ़ लगी हुई थीं। मैंने भयभीत अंदाज़ में उनसे पूछा- “आप मुझे कहाँ ले जा रहे हैं ?”

“लारो!” एक व्यक्ति ने कहकहा लगाकर अपने साथी को संबोधित किया।”लारो, इसे बताओ कि हम कहाँ जा रहे हैं ?” इस बात पर सबने कहकहा लगाया।

फिर मैंने उनसे कोई बात नहीं की। कुछ समय के बाद उनमें से एक बोला-

“कुछ और पूछना चाहते हो ?”

“कदाचित यह मेरे अंतिम क्षण हैं।” मैंने निराश स्वर में कहा।

“तुम बुद्धिमान व्यक्ति हो। इस अंतिम समय में कोई आख़िरी इच्छा हो तो बताओ ? पूरी कर दी जाएगी।”

“मैं सोचकर बताऊँगा। इसवक्त तो मेरा मस्तिष्क निष्क्रिय है। मैं सोच रहा हूँ कि आख़िर मैंने क्या ग़लती की थी जो तुम लोग मुझे मारने के लिए ले जा रहे हो।” मैंने अटक-अटक कर कहा।

“हमें नहीं मालूम। हमें तो सिर्फ़ इतना मालूम है कि तुम्हें आज जहन्नुम पहुँचा देना है। मगर, मगर।” वह कुछ सोचकर बोला। “तुम इतने अधिक ख़तरनाक आदमी तो दिखायी नहीं देते।”

“मैं बहुत मासूम और निर्दोष व्यक्ति हूँ। शायद तुम लोगों को धोखा हो गया है।” मैंने निवेदन किया।

गाड़ी एक वृक्ष के साए में खड़ी हो गयी। उन्होंने मुझे धक्के देकर बाहर निकाला और मेरी गाड़ी वहीं छोड़कर एक दूसरी गाड़ी में बैठ गए। यह एक वैगन थी इसमें एक ड्राइवर पहले से बैठा था। अब वह छः हो गए थे। मैंने मोहिनी को देखा।

“त...तुम क्या सोच रही हो ?” मैंने दिल ही दिल में उससे पूछा।

“इन्हें चलने दो, यही बेहतर है।” मोहिनी ने जवाब दिया।

“तुम्हारी जरा सी भूल से खबर है क्या हो सकता है ?” मैंने कहा।

“मुझसे अधिक बातें न करो। ख़ामोश बैठे रहो।” मोहिनी ने किसी तरह आदेशात्मक स्वर में कहा। मुझे उसका यह व्यवहार बुरा लगा मगर मैं ख़ामोश हो गया।

वैगन पूरी रफ्तार से दौड़ रही थी। फिर इस सफ़र को कोई बीस मिनट हुए होंगे कि वृक्षों की आड़ में गाड़ी रोक दी गयी। हर तरफ़ गहरा अंधेरा छाया हुआ था। हाथ को हाथ सुझाई नहीं दे रहे थे।

वे मुझे गाड़ी से उतारकर धक्के देते हुए एक तरफ़ को बढ़ रहे थे। ऊँचे वृक्षों ने स्थान बहुत भयानक बना दिया था।

मैं खामोशी से उनके आगे-आगे चल रहा था। वे सब मेरे पीछे थे। सिर्फ़ एक व्यक्ति मेरे बाजू में था। मोहिनी बुरी तरह पहलू बदल रही थी और बेहद बेचैन नज़र आ रही थी।

आख़िर हम एक ऐसे मकान तक पहुँच गए जो ब्रिटेन की पुरातन धर्मस्थल की शैली में बना हुआ था जो बाहर से गिरजाघर की तरह नज़र आता था।

मकान में कोई खिड़की रोशन नहीं थी।उस सन्नाटे में उनके भारी जूतों की आवाजें दिल दहलाए दे रही थी।

एक व्यक्ति ने मकान के बड़े दरवाज़े पर ज़ोरदार ठोकर मारी। दरवाज़ा खुल गया। उन्होंने मुझे अंदर धकेल दिया और फिर दरवाज़ा बंद कर दिया। ठीक दरवाज़े पर मोहिनी मेरे सिर से उतर गयी।

यह एक उजाड़ और वीरान मकान था। ऐसा मालूम होता था जैसे यह मकान अर्से से यूँ ही वीरान पड़ा हो।
 
यह एक उजाड़ और वीरान मकान था। ऐसा मालूम होता था जैसे यह मकान अर्से से यूँ ही वीरान पड़ा हो।

हम लोगों को कदम-कदम पर ठोकर खानी पड़ी थी। वे मुझे एक जीने की तरफ़ ले गए। हम सीढ़ियों पर चढ़ रहे थे कि पीछे एक व्यक्ति के ज़ोर से गिरने की आवाज़ आई।

“क्या हुआ ?” उनमें से एक चीखा जो मेरे बराबर में खड़ा था।

“मुझे चोट लग गयी है।” वह कराहा और दर्द से बिलबिलाने लगा। दो आदमी मेरे पास रह गए और शेष दो निचली सीढ़ियों पर उतर गए। मुझे रोक लिया गया। मुझे मोहिनी की मुश्किल का अहसास था। मेरे साथ जो आदमी खड़े थे उनके पिस्तौल तने हुए थे। जब उन्होंने अपने साथी की चीखें सुनी तो अंधेरे में नीचे की तरफ़ देखा।

“क्या हो गया ?” मेरे पास वाला व्यक्ति दहाड़ा था।

“शायद उसका सिर फट गया है।” नीचे से आवाज़ आई।

मैं समझ चुका था कि मोहिनी अपना काम शुरू कर चुकी है।

फिर मकान में सरगोशियाँ गूँजने लगीं। एक और कर्णभेदी चीख नीचे से उभरी। उसी क्षण मोहिनी मेरे सिर पर आई और मुझे सेकेंडों में एक निर्देश देकर चली गयी।

नीचे वह व्यक्ति तड़पने लगा। अपने साथी की दहशतनाक चीख सुनकर मेरे बराबर खड़े हुए दोनों आदमी नीचे अपने जख्मी साथी की तरफ आकर्षित हो गए।

यह दूसरा अवसर था। पहला अवसर मुझसे जाया हो चुका था लेकिन मैंने दूसरा अवसर हाथ से नहीं जाने दिया। उनके नीचे की तरफ़ ध्यान देने की देर थी कि मैंने बर्करफ्तारी के साथ और अपने जिस्म की पूरी शक्ति से उन्हें नीचे की तरफ़ धकेल दिया।

उसी वक्त पिस्तौल चलने की आवाज़ आई लेकिन मैं उस वक्त तक ऊपर की सीढ़ी पर पहुँचकर बालकनी की आड़ में हो गया था। मैंने अपने पतलून के अंदरूनी हिस्से से रिवॉल्वर निकाला और अभी नीचे की तरफ़ फायर करने ही वाला था कि नीचे से फायरिंग की आवाज़ तेज हो गयी और साथ ही चीखों की भी।

मैं समझ गया था कि मोहिनी अपना काम कर चुकी है। मैंने इत्मिनान से रिवॉल्वर दोबारा अपनी ज़ेब में रख लिया। थोड़ी देर में वहाँ पहले जैसा सन्नाटा छा चुका था और मोहिनी मेरे सिर पर हाँफती हुई आ चुकी थी। मैंने देखा कि उसका चेहरा तमतमाया हुआ था और आँखों से वहशत बरस रही थी।

“वे सब खत्म हो गए हैं।” मोहिनी ने थके हुए स्वर में कहा।

“मगर यह सब कुछ इतनी जल्दी कैसे हो गया ?” मैंने हैरान होकर पूछा।

“बस मुझे तेजी के साथ सिर बदलने पड़े थे।” उसने मसखराना जवाब दिया और फिर कहने लगी- “मैदान साफ़ है, तुम यहाँ से फ़ौरन चले जाओ। मैं कुछ देर बाद तुम्हारे सिर पर आ जाऊँगी।”

मैंने अहसानमंद नज़रों से उसकी तरफ़ देखा। वह इस अर्से में पहली बार मुस्कुराई और मेरे सिर से ग़ायब हो गयी।

नीचे सीढ़ियों पर उतरते वक्त मुझे पता चला कि वहाँ चारों तरफ खून ही खून पड़ा हुआ है। छः इंसानी लाशें यहाँ-वहाँ बिखरी पड़ी थी। मैं अपने जूते खून से बचाता हुआ फ़ौरन बाहर आ गया। वेगन में सवार होने के कुछ ही देर बाद मैं अपनी गाड़ी तक पहुँच गया। मैंने वेगन वहीं छोड़ी और वहाँ से अपनी उँगलियों के निशान साफ़ कर दिए।

मैं काफ़ी संतुष्ट था और मैं एक भयानक दृश्य देखने के बाद अपनी गाड़ी में सवार फिर उस खुशनुमा वातावरण की तरफ़ बढ़ने लगा जो क्लब में मेरा इंतज़ार कर रहा था।

इस बार मुझे किसी ने नहीं रोका। रिसैप्शन में खड़े एक खूबसूरत लकदक सूट पहने नौजवान ने मेरा गर्मजोशी के साथ स्वागत किया और मैं शान के साथ हॉल में दाख़िल हो गया।

सुगंध और संगीत की लहरियों ने मुझे तरोताजा कर दिया। मैं किसी मेज़ पर तुरंत नहीं बैठा बल्कि बाथरूम की तरफ़ बढ़ता रहा।

अचानक मेरी नज़र एडवर्ड पर पड़ी। मुझे देखते ही उसके हाथ से जाम गिर गया। मैंने मुस्कराकर'हैल्लो' कहा।

लार्ड स्मिथ की शवयात्रा में मेरी उससे मुलाक़ात हुई थी। उसका चेहरा पीला पड़ चुका था। सारा आज उसके साथ नहीं थी। उससे हाथ मिलाने के बाद मैं खामोशी से कोने की एक मेज़ पर आकर बैठ गया।

हाथ मिलाते समय एडवर्ड का हाथ काँप रहा था और मैं अब तक मन ही मन उसके हाथों की कपकपाहट पर हँस रहा था।

मेरे बैठने की देर थी कि क्लब के एक कर्मचारी ने मेज़ पर आला दर्जे से पेय सजा दिए। आज मोहिनी नहीं थी इसलिए मैं ख़ामोश तामाशाई की तरह हसरत से हॉल में किस करते हुए जोड़ों को देख रहा था।

नज़र एक जगह ठहरती नहीं थी। किस-किस को देखिए। किस किससे जी लगाइए।

मैं सोचने लगा कि अगर इस क्लब की तमाम सुंदरियों से संबंध रखा गया तो मुझे लंदन में कई माह और गुजारने पड़ेंगे। मैं रातों और औरतों की गिनती करने लगा।

अभी हॉल पूरी तरह भरा हुआ था। आरमा भी नज़र नहीं आ रही थी। मोहिनी की अनुपस्थिति में मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मैं बेबस और कमज़ोर हो गया हूँ। मैं मोहिनी के बारे में सोच रहा था और थोड़ी देर पहले पेश आने वाले भयानक घटनाक्रम पर मनन कर रहा था।

अचानक जासूस जिम एक निहायत खूबसूरत लड़की के साथ हॉल में प्रविष्ट हुआ। उसकी निगाहें मुझे तलाश रही थी। आज चूँकि मैंने शेरवानी नहीं पहनी थी इसलिए उसकी नज़र मुझ पर तुरंत पड़ी। उसके साथ बेहद हसीन लड़की देखकर मेरे सीने में उथल-पुथल सी होने लगी।

मैंने आगे बढ़कर जिम का स्वागत किया। जिम ने मुझे आँख से इशारा किया और रहस्यमय स्वर में कहने लगा-

“अमित ठाकुर, यह है मेरी दोस्त मिस जीन मरान्डा। इनसे मिलो। सुबह तुमसे मुलाक़ात के बाद मैंने इनसे तुम्हारे बारे में बातचीत की थी।

मैं समझ गया कि यह कौन लड़की हो सकती है। उसका बदन इतना गुदाज व सलोना था कि मुझे अपनी निगाहें हटा लेनी पड़ी। हालाँकि इसके लिए मुझे बहुत ज़ोर लगाना पड़ा।

पहली ही मुलाक़ात में उस पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए था। मैंने गर्मजोशी से उसे अपनी मेज़ पर बैठने का संकेत किया। वह दिलचस्प और आश्चर्य का भाव लिए हुई नजरों से मुझे देखकर बैठ गयी।

जिम ने मुझसे कहा- “अमित ठाकुर, आज तुम मेरे निवेदन पर जीन के सामने अपनी असाधारण शक्तियों का प्रदर्शन करोगे। जीन के बारे में कुछ बताओ।”

मैंने कनखियों से जीन के गुलाबी चेहरे का जायजा लिया। वह अपने बारे में जानने के लिए बेकरार, बेबस नज़र आ रही थी। मोहिनी होती तो जीन पर कुछ प्रभाव डाल देता जो यकीकन धमाके साबित होते लेकिन मोहिनी के वापसी का कोई ठिकाना नहीं था। मुझे मोहिनी का इंतज़ार करना था।

मैंने कुछ देर का वक्त माँगा और जीन की सेवा में शैम्पेन का जाम बनाकर पेश किया। मैं जीन से हिन्दुस्तान के रहस्यमय वातावरण और चमत्कारित व्यक्तियों के बारे में वार्तालाप करने लगा।

इतने में आरमा गहरे सुर्ख लिबास में वहाँ आ धमकी और आते ही बेतकल्लुफी से मेज़ के पास पड़ी कुर्सी पर बैठ गयी।

आरमा के आते ही कुछ अन्य युवतियाँ भी वहाँ एकत्रित होने लगीं और हमें एक बड़ी मेज़ पर जाना पड़ा।

वहाँ तमाम लड़कियाँ मुझे हैरतअंगेज नज़रों से देख रही थीं जैसे मैं कोई अजूबा हूँ।

मुझे खुद पर बड़ी कोफ्त हुई कि मैं लंदन में इतने दिनों तक बेकार ही फिरता रहा और साधारण से होटलों, क्लबों, छोटी-मोटी महफिलों में अपना समय नष्ट करता रहा।

इन दो दिनों में किस कदर परिवर्तन आए थे। इस वक्त मैं राजा इन्द्र बना बैठा था और आरमा अपनी सहेलियों को रात की जीत के बारे में ख़ुश होकर विस्तारपूर्वक बता रही थी। आरमा की बात सुनकर जीन का प्रभावित होना स्वाभाविक था।

मैं केवल उसका चेहरा देख रहा था। वह गंभीरता से शैंपेन की छोटी-छोटी घूँट ले रही थी और आरमा की बातें बड़े ध्यान से सुन रही थी। आज मैंने आरमा की बजाय किसी और सुंदरी से संपर्क बढ़ाने का इरादा कर रखा था।

जब से जीन नज़र आई थी मेरे हवास क़ाबू से बाहर होने लगे थे। जिम से उसका कोई विशेष संबंध मालूम होता था। आज की रात निरर्थक नज़र होती आ रही थी। क्योंकि मोहिनी ग़ायब थी और उसकी जल्दी आने की आशा नहीं थी। इधर जिम और आरमा का अनुरोध था कि मैं जुएखाने की तरफ़ चलूँ और आज जीत का किस्सा आजमाऊँ। मैंने उन्हें बातों में उलझाए रखा।

जब हॉल में संगीत का शोर बढ़ गया और नृत्य तेज हो गया तो मैंने तबियत ख़राब होने का बहाना किया और जिम से आज्ञा चाहने लगा।

चलते-चलते मैंने जिम और जीन को दूसरी शाम अपने होटल में आने की दावत दी।

मेरा ख़्याल था अब मुझे तुर्की जादूगर और उसके उस्ताद से एक मुक़ाबला करना ही पड़ेगा वरना जीन को प्राप्त करना जरा मुश्किल होगा।

मोहिनी को किसी लड़की पर बिठाकर प्राप्त करने में वह आनन्द नहीं था जो स्वयं प्राप्त करने में महसूस होता था।

मैं दरवाज़े पर पहुँचा ही था कि आरमा ने मुझे पकड़ लिया और विनय करके मेरे साथ मेरी गाड़ी में बैठ गयी। न चाहते हुए भी मुझे उसे अपने होटल लाना पड़ा और यह आशा छोड़नी पड़ी कि मैं लंदन के अमीरों के क्लब से हर रोज़ एक नई लड़की से संपर्क बना सकूँगा।

आरमा रात भर मेरे साथ खेलती रही लेकिन सारी रात जीन का चेहरा मेरी कल्पना में घूमता रहा था।

रात गए मोहिनी मेरे सिर पर आ गयी। उसका चेहरा सुर्ख हो रहा था और वह बुरी तरह ख़ुश और मस्त नज़र आ रही थी।

वह चंचलता से बोली- “राज, तुम रात भर जागो और मैं सोती हूँ।”

और मैं वास्तव में जागता रहा। सुबह पौ फटने के समय थकान से मेरी आँख बंद होने लगी। आरमा भी निढाल हो गयी थी। मुझे याद नहीं कि क्या समय होगा जब नींद ने मुझपर क़ाबू पाया।

मुझे सिर्फ़ इतना याद है कि मैंने सपने में कल्पना को देखा। वह मेरे सिरहाने बैठी मुझे गौर से ताक रही थी।

मैं उसे अचानक सपने में देखकर आश्चर्य में पड़ गया। उसके बाल खुले हुए थे और चेहरे पर वही चमक थी और वह किसी देवी की तरह नज़र आ रही थी।

उसके खूबसूरत होंठ हिले और वह इतना कहकर ग़ायब हो गयी- “राज! काले बादल छँट गए। अब आकाश साफ है और दो मास बीत चुके हैं।”

फिर मेरी आँख खुल गयी। मैंने अपने सिर की तरफ़ देखा। मोहिनी बेसुध पड़ी सो रही थी। आरमा मेरे सीने में सिर छिपाए लम्बी-लम्बी साँसें ले रही थी। मैंने उसके नंगे बदन पर चादर डाल दी।

सुबह ही सुबह सारा आ धमकी। उस वक्त आरमा विदा नहीं हुई थी। वह मेरे बिस्तर पर अस्त-व्यस्त हालत में बेसुध पड़ी थी।

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सपने में कल्पना का आना निरर्थक नहीं था। मैं इस स्वप्न से पहले ही परेशान था कि सुबह ही सुबह आरमा की उपस्थिति में सारा को देखकर सन्नाटा छा गया। लंदन प्रवास के दौरान खूबसूरत सारा से जो एक विशेष संबंध बन गया था इसका तकाजा यह था कि वह मेरे कमरे में आरमा की उपस्थिति से अनभिज्ञ रहे।

यद्यपि अब इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी। मुझे शीघ्र ही हिन्दुस्तान जाना चाहिए था। यहाँ आए हुए काफ़ी दिन गुज़र चुके थे। उधर हरि आनन्द पर काली द्वारा उसकी रक्षा करने के वचन की अवधि समाप्त हो चुकी थी। अब उस कमीने को खून के आँसू रुलाना था।

जिस समय से मैंने कल्पना को सपने में देखा था मुझे यह सारा रंगीन वातावरण नीरस लगने लगा था। इस कामनियों के शहर में मेरा दिल उचाट हो चुका था।

लंदन के दिलकश फिजाओं के जलवों में खोकर मैं अपने सबसे बड़े दुश्मन हरि आनन्द को किसी हद भूल चुका था। सीने पर एक बोझ सा फिर महसूस होने लगा। हरि आनन्द के लगाए हुए तमाम ज़ख़्म ताज़ा होने लगे।

सारा को देखते ही मैंने चौंककर पूछा- “क्या बात है सारा, तुम सुबह-सुबह कैसे आ गयी ? सब कुशल तो है ?”

“अमित ठाकुर!” सारा मेरे सीने से लग गयी। “अमित मुझे रात भर नींद नहीं आती है। अब वह घर मुझे काटने को दौड़ता है। या तो तुम मुझे यहाँ बुला लो या खुद मेरे घर चलो।”

मैं एक क्षण में सारी बात समझ गया। जब से सारा के बाप का कत्ल हुआ था वह इसी तरह नर्वस नज़र आती थी। मैंने उसकी ठोढ़ी ऊपर उठाकर कहा-

“अरे नहीं सारा! तुम इतनी डरपोक कब से हो गयी ? तुम्हारे पास नौकरों की एक बहुत बड़ी फ़ौज़ मौजूद है और मैं अभी तो लंदन में हूँ। मेरे रहते तुम्हें डर कैसा ? कौन तुम पर उँगली उठा सकता है ?”

“अमित, मुझे न जाने क्या हो गया है ? जब से पापा गए हैं कुछ अजीब सी हालत हो गयी है। खुद से भी डर लगने लगा है।” वह लगभग रोते हुए बोली।

“बस, बस इसका एक ही हल है।” मैंने मुस्कराकर कहा। “अब तुम्हारी शादी हो जानी चाहिए।”

मेरी बात पर उसने चौंककर देखा और मुझे तुरंत ही ख़्याल आया कि मैंने एक बेअवसर की बात कह दी है जो मेरे छिछले रवैये को प्रकट करती है।

“मेरा मतलब है।” मैंने ठहरकर कहा। “अब तुम्हारा कोई उचित प्रबंध करना ही पड़ेगा। आओ मेरे साथ डाइनिंग हाल में बैठते हैं।”

लेकिन बौखलाहट में मुझे यह भी ध्यान नहीं रहा कि मैं नाइट गाउन पहनें हुए था और मैंने स्नान भी नहीं किया था। वह किसी भी क्षण अंदर जा सकती थी या आरमा किसी भी वक्त बाहर आ सकती थी। मैं अजीब पशोपेश में पड़ गया।

मैं यह नहीं समझ पा रहा था कि जब मुझे हिन्दुस्तान वापस जाना ही है तो मैं यह सावधानी क्यों बरत रहा हूँ। इसका सिर्फ़ यही जवाब हो सकता था कि मैंने सारा को किसी रूप में स्वीकार किया था और व्यवहार किया था। उससे मेरे बहुत से भावनात्मक संबंध जुड़ गए थे।

मैं उसे तसल्ली देने के लिए ऊँट-पटांग बातें कर रहा था। विवश होकर मैंने जोर-ज़ोर से अपने सिर पर हाथ फेरकर मोहिनी को जगाया। उसने एक भरपूर अंगड़ाई ली और आँखें मलकर मेरी तरफ़ देखा, तो मैंने दिल ही दिल में सारा के अचानक आगमन से पैदा होने वाली परिस्थिति के बारे में उसे अवगत कराया।

ऐसे अवसर पर वह शरारत करने लगी। अतः बजाय इसके कि वह मेरी मदद करती अठखेलियाँ करने लगी और अपनी आदत के अनुसार व्यंग्य बाण कसने लगी।

आख़िर मेरी प्रार्थना पर मेरे सिर से फुदक कर उतर गयी। फिर अचानक सारा ने उसी कमरे में निढाल होकर खुद को सोफे पर गिरा दिया और आँखें मूंद ली। मैं उसकी तरफ़ से संतुष्ट होकर अंदर गया। आरमा को जगाना आवश्यक था। लिबास बदलकर मैं बाहर आया और सारा को कमरे से बाहर ले गया। जब हम डाइनिंग हाल में बैठ गए तो मोहिनी ने मेरे सिर पर आकर बताया कि अब वह आरमा के सिर पर जा रही है।

नाश्ते के दौरान मैंने सुबह के समाचार पत्र मँगाए। एक सरसरी दृष्टि से यह इत्मीनान हो गया कि पिछली रात छः आदमियों के सनसनीखेज कत्ल की वारदात अख़बारों में नहीं छपी थी।

एडवर्ड ने मुझे ठिकाने लगाने के लिए एक वीरान जगह इसीलिए चुनी थी। यह छः कत्ल सारा के कारण हुए थे लेकिन उसे कुछ पता नहीं था।

उस वक्त उसके आँखों में आँसू तैर रहे थे। ऐसे कक्ष में कॉफी का कसैला घूँट उतारते हुए मैंने यह बात भी कह डाली कि मैं शीघ्र ही हिन्दुस्तान वापस जा रहा हूँ।

यह सूचना सुनकर डाइनिंग हाल में ही उसके गाल आँसुओं से भीग गए। जब उसने रो-रोकर मुझसे कुछ दिन और ठहरने की विनती की और जब मैंने अपनी वापसी की आवश्यकता पर ज़ोर दिया तो उसने मेरे साथ चलने की मिन्नत की। दोनों सूरतें नामुमकिन थीं।

हिन्दुस्तान में मुझे किन मुसीबतों से निपटना था यह बात मैं सारा को नहीं बता सकता था। मैं सारा को दोबारा आने की दिलासा देता रहा। इस अर्से में वह मुझसे इस हद तक निकट आ चुकी थी कि उसे समझाना मुश्किल नज़र आ रहा था। यहाँ तक कि उसे होटल से भी वापस भेजना असंभव नज़र आ रहा था।

यह भावनाएँ जो उसके दिल की तनहाइयों में आग लगाती रही होंगी, अब रंग ला रही थी।

थोड़ी देर में मोहिनी अपना काम समाप्त करके मेरे सिर पर लौट आई। अब मुझे अपने कमरे में जाने का रास्ता भी साफ़ मिला।

मैं सारा को लिए हुए अंदर आ गया। आरमा को मोहिनी ने रवाना कर दिया था। कमरे में आते ही सारा ने बाकायदा रोना शुरू कर दिया। जब मैंने हवाई जहाज़ में सीट रिजर्व कराने के लिए फोन किया तो उसकी हिचकियाँ बँध गयी। इस दुर्भाग्य से अगले दो-तीन रोज़ की सीटें पहले से बुक थीं। इस लिए मुझे एक हफ़्ते बाद की बुकिंग करनी पड़ी।

लंदन में मेरे आने का प्रमुख उद्देश्य अपने टूटे हुए हाथ को सही कराना था। यह काम फिर कभी फ़ुर्सत में किया जा सकता था और न भी होता तो परवाह किस की थी। यूँ भी मेरे सामने अभी एक हफ्ता था। मैंने इस अवधि में पूरा लंदन खंगालने का फ़ैसला कर लिया।

मेरे जेहन में यह ख्याल भी आया कि सारा के शरीर को भी प्राप्त कर लिया जाए फिर कौन किससे मिलता है। मुझे खूब अहसास था कि सारा जैसी लड़की के इतने पास होते हुए भी दूर होने के बाद यह कमी सारी ज़िंदगी एक काँटा बनकर चुभती रहेगी।

लेकिन मैं अपने इस ख़्याल को कार्यरूप न ला सका। वैसे तो सिर्फ़ संकेत की देर थी लेकिन संकेत करने के लिए बड़ी हिम्मत की ज़रूरत थी।

वह दिन भर मेरे साथ ही रही। हम लंदन के विभिन्न भागों में निरुद्देश्य घूमते रहे फिर शाम के क़रीब होटल में आ गए। मैं सोने के लिए लेट गया। वह भी मेरे क़रीब लेट गयी और मुझसे बातें करती रही। मैं शीघ्र ही सो गया।

जब उठा तो उसकी आँख खुली हुई थी और वह छत की तरफ़ तक रही थी। वह आज मुझसे किसी भी तौर पर जुदा नहीं होना चाहती थी।

शाम को मैंने जिम से मुलाक़ात का वक्त तय कर रखा था। कल रात जीन को उसके साथ देखकर मेरे दिल में एक हलचल सी मच गयी थी। जिम से जीन का कोई विशेष संबंध मालूम होता था मगर उसे पहली ही नज़र देखने के बाद मैंने अपने दिल में कुछ और ठान ली थी।
 
जीन की कल्पना से मेरा दिल उबलने लगा। अगर रात मोहिनी मेरे साथ होती तो शायद मैं उसे अपनी तरफ़ आकर्षित करने में सफल हो जाता। और मैंने तय किया था कि तुर्की जादूगर की दावत पर आज मैं जीन के सामने कुछ करिश्में दिखाऊँगा। वह लोग अब आने ही वाले थे और सारा अभी तक मौजूद थी।

जब सूरज डूब गया। लंदन में सूरज अस्त होने का ज़िक्र करना कुछ विचित्र सा होता है। यूं कहना चाहिए कि जब रात का समय आया तो लंदन जवान हो गया। और जीन क़यामत ढाती जिम के साथ मेरे कमरे में आ गयी।

मैंने उन दोनों का स्वागत किया। सारा को सारी उम्र साथ रखने की भावनाएँ दिल में पैदा होती थीं जबकि जीन को तुरंत ही हड़प लेने का ख़्याल आता था। सारा में नज़ाकत और हुस्न था और जीन के हुस्न में आग थी।

हुस्न होते हैं, कौन, कब और किस समय दिल पर तीर चला दे, इसका पता नहीं होता। वह दोनों सामने थीं इसलिए बार-बार दोनों तरफ़ दृष्टि उठाई थी और अगर मैं हुस्न के मुक़ाबले का जज होता तो सारा की प्रशंसा करते मेरी जुबान न थकती और मेरा कलम कभी नहीं थकता।

वहाँ दिन में कई बार समाचार पत्र प्रकाशित होते हैं परंतु अभी तक किसी भी समाचार पत्र ने रात वाली वारदात का समाचार नहीं छापा था। मुझे इस समाचार की प्रतीक्षा थी और इस बात का भय था कि एडवर्ड अभी बचा हुआ है। वह अब कोई ख़तरनाक कदम उठाने से नहीं चूकेगा।

जिम और जीन के आने के बाद हम लोग जल्दी ही तुर्की जादूगर की दावत पर रवाना हो गए।

तुर्की जादूगर का नाम स्पार्टा था। उस दिन भरे मजमे में उसका जो अपमान हुआ था उसे वह भूला नहीं था। लंदन में यह खबर छिपी न रह सकी। बहुत दिनों तक उसका शो भी नहीं हुआ था। अपनी बिगड़ी हुई साख बनाने के लिए उसने तुर्की से अपने उस्ताद को भी बुला लिया था।

जीन के बदन से सुगंध फूट रही थी। सारा और वह कार की पिछली सीट पर बैठी थी। जब हाल में प्रविष्ट हुए तो स्पार्टा का मुँह खुला रह गया।

उसने हमें वी.आई.पी. की सीट पर बिठाया और उसके बाद अपने उस्ताद सुलेमान से भी मिलवाया। वह चमकदार आँखों वाला एक बूढ़ा आदमी था। हम दोनों आँखों ही आँखों में एक-दूसरे को तौलने और परखने लगे और वह मुझे देख खिलखिलाकर हँस पड़ा।

जीन जो मेरे पहलू में बैठी थी। आँख चिढ़ाकर बोलने लगी- “अमित ठाकुर, आपने रात कुछ नहीं बताया।”

“आज मैं आपको बहुत सी बातें बताऊँगा।” मैंने रहस्यपूर्ण मुस्कराहट के साथ कहा।

“सुना है क्लब की सारी युवतियाँ आपसे प्रभावित हैं।”

“यूं ही निरर्थक प्रभावित हो गयी हैं। मगर आपके बारे में मुझे अवश्य कुछ पता है।” मैंने उसे कनखियों से देखकर कहा।

“जैसे क्या-क्या ? बताइए न ?” वह मचलकर बोली।

“यही कि आप बेहद हसीन, बहुत हसीन और बेइन्तहा हसीन हैं।”

“ओह!” वह खिलखला पड़ी। “मैं तो डर गयी थी।”

मैं उससे बतियाता रहा। आख़िर खेल शुरू होने की घोषणा हुई। हाल पहले की तरह भरा हुआ नहीं था। जब मैं जीन से बातें करता, मोहिनी मुझे टहोके देती। आज वह बहुत चंचल मूड में थी। क्योंकि रात उसने अपनी गिजा से छक कर पेट भरा था। छः छः इंसानों का खून चखा था। उसके गालों पर खून की सी सुर्खी थी और वह बहुत अच्छी लग रही थी।

स्टेज पर एक तुर्की नर्तकी बरामद हुई और उसने अपने भड़कीले नृत्य से खेल का शुभारंभ किया।

उसका सारा बदन थिरक रहा था। उसका नाम तमारा था। तमारा में वह सभी विशेषताएँ थी जो किसी भी पुरुष को अपनी जाल में फँसा सकती थी।

फिर स्पार्टा स्टेज पर आ गया। उसने दर्शकों को अपने प्रोग्राम के बारे में बताया फिर अपने उस्ताद का परिचय दिया तो उस्ताद स्टेज पर आ गया। उस्ताद के तारीफ़ में स्पार्टा ने जमीन-आसमान के क्लाबे मिला दिए। मैंने उस अवसर पर मोहिनी से पूछा-

“यह व्यक्ति कुछ जानता है ?”

“यह व्यक्ति तुम पर भारी पड़ सकता है। इसे अपनी कला में कमाल हासिल है ?” मोहिनी ने पहली बार गंभीरता धारण की।

“क्या मतलब ? क्या जीन के सामने तौहीन कराओगी ? इसे यहाँ लाने का क्या मतलब है ?”

“क्या जीन तुम्हें बहुत पसंद आई है राज ?” मोहिनी ने इठलाकर कहा।

“इसके बिना लंदन का सफ़र अधूरा रहेगा।”

“मगर वह जिम की अमानत है। अमानत में खयानत करना जुर्म है।”

“मेरी जान! यह लंदन है और हमारे यहाँ रुकने के दिन ही कितने रह गए हैं।”

कोई एक घंटा तक स्पार्टा छोटे-मोटे खेल दिखाता रहा। उसने कई ऐसे हैरतअंगेज प्रदर्शन किए कि जीन और जिम स्तब्ध होकर रह गए। अलबत्ता सारा निश्चित सी नज़र आ रही थी। जब जीन ने एक खेल पर ज़ोर से तालियाँ बजाई तो सारा ने चिढ़कर उससे कहा-

“जीन! यह तो कुछ भी नहीं है। अमित ठाकुर के सामने तो यह बच्चों का खेल है।”

“सच ?” जीन ने एक बार में कई बार पलकें झपकाई। “वास्तव में ?”

स्पार्टा अपने कला का जादू जगा चुका तो उसने बड़े गर्व अपने उस्ताद को आवाज़ दी। बूढ़ा झुकी कमर और अपने विशेष लिबास में स्टेज पर प्रकट हुआ। दर्शकों पर सन्नाटा छा गया।

“मैं क्या करूँ ?” उसने आते ही दर्शकों से पूछा फिर स्वयं ही कहने लगा। “कुछ न कुछ करना चाहिए।”

इस बात पर हाल में चमगोइयाँ होने लगी। दर्शक बूढ़े सुलेमान से बहुत प्रभावित नज़र आ रहे थे। एकाएक उसे खुजली होने लगी और उसने अपना गाउन झिझोड़ना शुरू कर दिया। गाउन हल्के कपड़े का बुना हुआ था। कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि उसमें इतनी सारी चीज़ें छिपी होंगी।

पहले उसने विश्वास दिया था कि उसके पास कुछ नहीं है। फिर पागलों की तरह उसने अपनी एक ज़ेब में हाथ डाला और जब हाथ बाहर आया तो उसमें ख़रगोश था। ऊपर की एक ज़ेब में साँप, अंदर की ज़ेब कबूतर, ऊपर की दूसरी ज़ेब में बिल्ली का एक छोटा बच्चा।

सारा हॉल तालियों से गूँज रहा था। उसने दोनों हाथ ऊँचे किए। दर्शकों को ख़ामोश किया और दोबारा अपना गाउन उछालने लगा। उसके ज़ेब में से एक के बाद एक कई जानवर बरामद हुए। कहीं से कोई चूहा, कहीं से कोई बिल्ली, कहीं से नेवला। जीन के अलावा अब सारा भी यह अनोखा करतब देखकर आश्चर्य में पड़ गयी थी।

सुलेमान ने अब सबको दोबारा अपनी जेबों में रख लिया और गाउन उतार दिया। फिर चुटकी बजाकर एक बड़ा गहरा टब मँगवाया जिसमें आग भड़क रही थी।

किसी झिझक के बिना उसने अपना गाउन आग में डाल दिया। दर्शकों की 'सी' निकल गयी। एक सन्नाटा छाया हुआ था जब गाउन जलकर राख हो गया, तो वह सिर पकड़कर बैठ गया। फिर उसने अचानक उठकर स्पार्टा को आवाज़ दी।

“स्पार्टा, स्पार्टा! मेरे लिए पानी लाओ।”

स्पार्टा भागा हुआ आया। उसने अपने उस्ताद के संकेत पर टब में पानी डाल दिया। आग बुझ गयी।

सुलेमान सिर पर हाथ रखकर आश्चर्य प्रकट करता हुआ टब के पास पहुँचा मगर फिर टब में झाँककर उलझने लगा। उसने उसमें हाथ डालकर तमाम जानवर सही सलामत निकालने शुरू कर दिए। हाल में एक शोर छा गया। लोग सुलेमान को उच्च स्वर में वाह, वाह करने लगे और अपनी सीटों से खड़े हो गए।
 
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