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Horror भूत बंगला

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ठण्ड का मौसम चल रहा था पर दारु पिके दोनों में गर्मी आ गयी. दोनों समय काटने के लिए ऐसे ही एक दुसरे से इधर उधर की बातें करने लगे.

“एक बात कहनी थी सर जी.” मनोहर ने दारु की एक घूँट लेते हुए कहा.

“ह्म्म्म…..बोलो.” करण ने हां में सर हिलाया.

मनोहर थोडा हस्ते हुए और थोडा शरमाते हुए कहा, “सर जी वो मैं कल रात अपने घर जाना चाहता हूँ.”

“क्यों ?”

“वो सर जी अब आपने कहा है न की मुझे आपके साथ रहना है जब तक आप यह बंगला किसी खरीदने वाले को बेंच न दे, तो सर जी मैं म्हारी लुगाई को यहाँ लाना चाहता हु.”

“हम्म्म्म……..” करण ने हामी भरी.

“वो क्या है न सर जी बिना लुगाई के रात काटनी बड़ी मुश्किल हो जाती है, अब आप भी मर्द है तो आप तो जानते ही होंगे की अपने हाथ से मुट्ठ मारने में और औरत की चिकनी *** मारने में किना फर्क होता है.” दारु के नशे में मनोहर अपनी दिल की बात बोल रहा था, उसे यह अंदाज़ा ही नहीं था की अपने मालिक और उस से उम्र में छोटे लड़के से बात कर रहा है.

 
“वो क्या है न सर जी बिना लुगाई के रात काटनी बड़ी मुश्किल हो जाती है, अब आप भी मर्द है तो आप तो जानते ही होंगे की अपने हाथ से मुट्ठ मारने में और औरत की चिकनी *** मारने में किना फर्क होता है.” दारु के नशे में मनोहर अपनी दिल की बात बोल रहा था, उसे यह अंदाज़ा ही नहीं था की अपने मालिक और उस से उम्र में छोटे लड़के से बात कर रहा है.

“मैं समझ सकता हूं मनोहर, तुम अपनी बीवी को ला सकते हो यहाँ.” करण ने भी दारु का एक घुट गटकते हुए कहा.

“वैसे सर जी आप दिखने में काफी स्मार्ट है, थारे पीछे तो छोरिया लाइन लगाती होंगी.”

“हा हा हा….नहीं मनोहर ऐसी कोई बात नहीं है.”

“अरे सर जी कोई तो होगी जो आपके प्यार में पागल होगी.”

“हां कुछ लडकिया थी मेरे जीवन में पर उनमे अधिकतर गोरी अँगरेज़ थी.”

“अरे वाह तब तो आपको उन सब की लेने में बहुत मज़ा आता होगा. मेने ब्लू फिल्मो में देखा है बहुत उछल उछल के ******** है साली रंडिया.”

“हा हा हा…..लोल…” करण मनोहर की बातो पर हंसने लग गया.

“आप किसी गोरी मेम से शादी कर लेना फिर ज़िन्दगी भर ठोकना रांड को.”

“अरे नहीं मनोहर शादी तो मुझे किसी देसी लड़की से ही करनी है.”

“क्या सर जी, यहाँ के माल में वहा जैसा दम कहा, यहाँ की लौंडिया बस शर्म हया में ही रह जाती है और बेचारा मर्द अपना खड़ा *** लेके इधर उधर घूमता फिरता है. मेरी लुगाई न मेरा *** चूसती है न अपनी *** चुसवाती है, बोलती है उसे शर्म आती है यह सब करने में.”

“फिर भी बीवी तो देसी ही होनी चाहिए क्यूँकी वहा की लडकिया बहुत मतलबी है.”

“मतलबी ?” मनोहर ने पुछा.

“हा, मेरे पास जब पैसा था तो सारी लड़कियां मेरे आगे पीछे घूमती थी, मेरे साथ सब कुछ करने को तैयार थी, पर जैसे ही हमे बिज़नस में लोस होने लगा तो वो सब लड़कियां मुझे छोड़ के चली गयी, मुझे यकीन है यही अगर कोई हिन्दुस्तानी लड़की होती तो वो अपने पति का साथ हर मुश्किल में देती ………….. मेरे किस्मत में ही किसी अच्छी लड़की का प्यार नहीं लिखा है तो में क्या करू.”

“ऐसा नहीं कहिये सर जी आपको आपके रूप के अनुसार कोई अप्सरा ज़रूर मीलेगी.”

“खैर यह सब छोडो यह बताओ की इस बंगले का इतिहास क्या है.”

“सर जी मुझे तो ज्यादा नहीं पता पर यह ज़रूर जानता हु की यह बहुत पुराना बंगला है. यह उस ज़माने का है जब अंग्रेजो का राज था हिन्दुस्तान में.

किसी राजपूत ने बनवाया था इसे.”

“ह्म्म्म ….. लग ही रहा है की किसी राजपुताना ज़माने का है यह, पर यह अभी तक इतना आलिशान कैसे है जब की इसे तो अभी तक खँडहर हो जाना चाहिए था.”

“इसकी भी बड़ी अनोखी कहानी है सर जी , जब आपके पिताजी बीस साल पहले यह बंगला खरीदने यहाँ आये थे तो यह खँडहर ही था. उन्होंने बहुत पैसा लगा के इसकी मरम्मत करनी चाही पर…….”

“पर क्या मनोहर ?”

“पर न जाने कौन सी ताक़त थी इस बंगले में. जितना भी मजदूर इसकी मरम्मत करके जाते अगली सुबह वो फिर वैसी ही खँडहर मिलती.”

“मेरी कुछ समझ में नहीं आया मनोहर.”

“सर जी ऐसा लगता था की कोई नहीं चाहता था की बंगले के साथ छेड़ छाड़ करे, इसे ऐसे ही वक़्त के हाल पे छोड़ दे.

 
जो मजदूर आपके पिताजी द्वारा यहाँ रात में काम पे लगाये गए थे उनका कहना था की इस बंगले में से किसी औरत के भयानक चीखे सुने देती है.”

“भयानक चीखे ……???”

“हा सर जी भयानक चीखे. उन सारे मजदूरों ने यहाँ काम करने से मना कर दिया यह कहकर की यहाँ भूत प्रेतों का साया है.

आपके पिताजी हताश हो गए, उन्हें यह सब भूत प्रेतों पे विश्वास नहीं था, उन्हें तो लगता था की यह मजदूर सब कामचोरी के वजेह से काम नहीं कर रहे है.”

“फिर यह बंगला आज के जैसा नया कैसे बना मनोहर ?”

“सर जी आपके पिताजी यह मान ने को तैयार ही नहीं थे की यहाँ कोई परलौकिक शक्ति का वास है. यहाँ पे एक बहुत पहुचे हुए ऋषि मुनि थे.

उस ज़माने में पूरे जोधपुर में उनका नाम था. उन साधू महाराज ने आपके पिताजी को समझाने की कोशिश की पर आपके पिताजी फिर भी नहीं माने.”

“ह्म्म्म ……. यह कहानी तो किसी रोमांचक फिल्म की कहानी जैसे लग रही है ……. फिर क्या हुआ ?.” करण ने जिज्ञासा वश पुछा.

“फिर क्या होना था सर जी, आपके पिताजी नहीं माने और वो साउथ चले गए और वहा से बहुत से मजदूर साथ ले आये इस बंगले की मरम्मत के लिए. पर इस दौरान उन साधू बाबा ने एक अनुष्ठान या कह लीजये एक यज्ञ किया और एक कलश में पवित्र गंगा का पानी बंगले के अन्दर रख दिया. कुछ दिनों बाद आपके पिताजी लौट आये और नए मजदूरों को काम पे लगा दिया.”

“फिर क्या हुआ ?”

“बस फिर क्या, बंगले का मरम्मत शांतिपूर्वक हो गया, आपके पिताजी को लगा की यह नए मजदूरों का कमाल है जो बिना कामचोरी काम करके बंगले की मरम्मत कर दी, पर लोग कहते है की यह कमाल तो उन साधू बाबा का है जिन्होंने कुछ समय के लिए भूत प्रेतों को शांत कर दिया था.”

“हम्म्म्म ……. इंटेरेस्टिंग स्टोरी, अगर उन बाबा ने सचमुच यहाँ के भूत प्रेतों को शांत कर दिया था तो लोग आज भी क्यों डरते है इस बंगले से ?” करण ने मनोहर से सवाल पुछा.

“अब क्या बताऊ सर जी, बड़े दुर्भाग्य की बात है की जब आपके पिताजी ने यह बंगला एक परिवार को बेचा, तब उस परिवार को यह नहीं पता था की जिस बंगले में वो रह रहे है उसकी शान्ति की वजह वो बाबा द्वारा रखा हुआ कलश था.”

“क्या किया उन लोगो ने ?”

“सर जी उन लोगो को लगा की यह कलश फालतू है और उन लोगो ने वो कलश उठा के बाहर फ़ेंक दिया.”

“ओह माय गोड ……फिर क्या हुआ ?” करण ने हैरानी से पुछा.

“लोग कहते है की उनके परिवार का कोई सदस्य नहीं बचा, सब तड़प तड़प के भयानक मौत मारे गए. जब से उन्होंने वो कलश बाहर फेंका था तब से भूत प्रेतों की घटनाये फिर से चालू हो गयी, उस औरत की चींखे फिर से सुने देने लगी थी.”

 
थोड़ी देर वातावरण में शान्ति रही. करण के शरीर में डर की तेज़ लहर दौड़ गयी.

“तुम्हे इतना सब कुछ कैसे पता है ?”

“क्या बात करते है सर जी मुझे क्या इस गाँव का हर एक एक बच्चा आपको यही कहानी सुनाएगा.”

“वाह मज़ा आ गया सुन के, मनोहर क्या तुम्हे विश्वास है इस कहानी पर ?” करण ने मनोहर से पुछा.

“अब पता नहीं सर जी इस कहानी में कितनी सच्चाई है, पर मुझे तो इसमें विश्वास है. ज़रूर कोई परलौकिक शक्ति रही है जो शुरू से किसी को भी इस बंगले में टिकने नहीं देती, वो नहीं चाहती कोई उसकी शान्ति में दखल दे.”

“हम्म्म्म ……. फिर क्या तुम्हे डर नहीं लगता इस बंगले से.”

“डर तो लगता है सर जी पर क्या करू अगर नौकरी करनी है तो डर को मिटाना पड़ेगा, और फिर ज्यादा से ज्यादा होगा क्या, येही न की मेरी मौत हो जाएगी, मैं मौत से नहीं डरता सर जी, मैं राजपूत हु और फिर हमारी सेना को भी तो बोर्डर पे जान का खतरा होता है फिर भी वो डटे रहते है.” मनोहर ने छाती तान के कहा.

“हा भाई हा …. मैं मान गया तुम बहुत बहादुर हो, पर तुमने मुझे बंगले का पूरा इतिहास नहीं बताया.”

“पूरा इतिहास ?” मनोहर ने पुछा.

“हां तुमने तो बस बीस साल पहले की घटना बताई, जब मेरे डैड ने इस बंगले को खरीदा था पर मुझे तो यह बंगला करीब सौ साल पुराना लगता है. यह तो तुमने बताया ही नहीं की कौन था असली मालिक इस बंगले का, किसने बनाया था इसे सबसे पहले.”

“सर जी मैं तो बस उतना ही जानता हूँ जितना मैं बचपन से लोगो के मुह से सुनता आया हूँ, अब इस बंगले का पूरा इतिहास तो बस भगवान् ही बता सकता है.”

रात बहुत हो गयी थी, करण ने जब मनोहर को जम्हाई लेते हुए देखा तब, “ठीक है मनोहर तुम जा के सो जाओ अब कल सुबह मिलते है …. गुड नाईट”

मनोहर तो वही सो गया. करण ये कहानी सोच कर बंगले पे एक पूरी नज़र डाली, “क्या है इस बंगले का असली इतिहास, किसने बनवाया इसे, कौन रहता था यहाँ, क्या हुआ उसके साथ जो लोग इस बंगले को श्रापित मानते है, और अगर सच में यहाँ किसी की रूह है तो वो किसकी है.”

करण सोचता हुआ अपने कमरे में आ गया. सामने एक आलिशान किंग साइज़ बेड था. वो लेट गया, थकान और शराब पीने की वजह से उसे तुरंत नींद आ गयी ...

 
चैप्टर 6: स्वप्न

पर करण की किस्मत में शायद चैन की नींद नसीब नहीं थी.

“नह्ह्हीईईईईई … ” चीख मार के वो उठ गया.

“मुझे माफ़ करदो मैं तुम्हे नहीं बचा सका ………….” कहकर करण फूट फूटकर रोने लगा. आंसू उसके आँखों से रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे.

बाहर लिविंग हॉल में मनोहर सो रहा था, जो करण की चीख सुनकर जाग गया.

“हे भगवान म्हारे सर जी को क्या हो गया.”

वो दौडके करण के कमरे में पंहुचा और हैरान रह गया यह देख कर की सामने आधी रात को करण फूट फूट के रो रहा है. एक पल के लिए तो मनोहर को कुछ समझ नहीं आया की आखिर हो क्या रहा है.

उसने हिम्मत कर के आखिर पुछा, “क..क…क्या हुआ सर जी, थारे आँखों में आंसू..?.”

करण कुछ नहीं बोला बस रोये जा रहा था. मनोहर को बड़ा अजीब लगा उसने करण के कंधो पर हाथ रख कर जोर से हिलाया.

करण जैसे नींद से जागते हुए बोला, “उम्म्म……..यह क्या हो रहा है ?”.

“सर जी अभी आप अभी रो रहे थे, थारी आँखों में लबा लब आंसू थे.” मनोहर करण के पास बैठ गया और उसके कंधो पे प्यार से हाथ रख दिया.

“मुझे कुछ याद नहीं ……बस वोही सपना देखा जो अक्सर मुझे रातो में आता है.” करण ने अपनी आँखों को छुआ तो उसे अपनी आँखों में आंसू महसूस हुए.

“अरे हां, मेरी आँखों में तो सच मुच आंसू है ……पर मैं तो सो रहा था.” करण हैरत में पड़ गया.

“वाह सर जी मैंने आज तक नीद में चलने वाले देखे थे, पर आज से पहले कभी नींद में रोने वाला नहीं देखा.” मनोहर ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा.

“उफ्फ्फ …..तुम नहीं समझोगे मनोहर एक डरावना सपना है जो मुझे अक्सर रातो में आता है.”

“लो जी ……हम तो आपको बड़े मर्द समझते थे, पर आप तो एक डरावने सपने से डर गए.”मनोहर जोर से हंसने लगा.

“क्या बताऊ मनोहर यह सपना देख के महसूस होता है की कुछ …कुछ अधूरा है मेरे जीवन में, लगता है कुछ बहुत कीमती, अनमोल चीज़ छीन गयी हो मुझसे और मुझे उस चीज़ को खोने का ग्लानी भाव होता….

करण अपना सर पकड़ के बैठ गया.

“ठीक है मनोहर तुम जाके सो जाओ, रात बहुत हो गयी है.” करण बिस्तर पे लेट ते हुए कहा और उसकी बात सुनकर मनोहर चुप चाप सोने चला गया.

 
करण अपना सर पकड़ के बैठ गया.

“ठीक है मनोहर तुम जाके सो जाओ, रात बहुत हो गयी है.” करण बिस्तर पे लेट ते हुए कहा और उसकी बात सुनकर मनोहर चुप चाप सोने चला गया.

“आज तो हद हो गयी, इतने सालो से मुझे सिर्फ सपना ही आता था पर आज तो में नींद में ही रोने लगा …..हे भगवान यह क्या हो रहा है.” करण को सोचते सोचते नींद आ गयी.

अब उसकी नींद सीधे अगली सुबह शुक्रवार को अलार्म के बजने से खुली. वो उठ कर बहार आया तो मनोहर पहले ही उठ गया था. उसने कई गाँव वालो को बुलाया था बंगले की साफ़ सफाई के लिए.

करण को आज अपने इंडिया के लीगल एडवाईजर से मिलना था और बंगले के नए लैंड पपेर्स तैयार करवाने थे, की इन केस अगर कोई ग्राहक मिल गया तो वो उसे झट से बंगला बेच देगा.

“यह लो सर जी चाय और नाश्ता ….”

“शुक्रिया मनोहर.”

“वैसे कल रात क्या हुआ था सर जी जो आप रोने लगे थे.”

“अरे छोडो मनोहर मैं उसके बारे में नहीं बात करना चाहता.”

“कोई बात नहीं सर जी, वैसे आपको याद तो है न की आज मुझे जाना है तो आज रात मैं आपके साथ नहीं रह पाउँगा.”

“मुझे पता है मनोहर, तुम बेफिक्र होके जा सकते हो.”

 

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