अपडेट 17
शिप्रा- “हमं... मुह बंद रखने के लिए रिश्वत पर ऐसा नहि लगता की ये मामला आप कुछ सस्ते मे निपटा रहे हो”...
सतीश- “तो तू बोल मेरी माँ तुझे क्या चाहिये”...
शिप्रा- “अभी तो कॉफ़ी पिलाओँ बाकी बाद मे बताऊंगी”....
शिप्रा सोच रही थी की सतीश उसे डर की वजह से कॉफ़ी पीला रहा है जबकि सतीश चाहता था की सोनाली अपनी प्यास आराम से मिटवा ले और शिप्रा को इस बात का पता भी न चले ....
सतीश कैफ़े कॉफ़ी डे पहुँच कर बाइक स्टैंड पर लगाता है और फिर शिप्रा के साथ अंदर चला जाता है...
अंदर काफी कपल बैठे हुए थे पर सतीश और शिप्रा के एंटर होते ही सबकी नजरे उनपर ही टिक जाती है...
सतीश और शिप्रा के एंटर होते ही सबकी नजरे उनपर टिक जाती है, और टीके भी क्यों न वो दोनों एक खूबसुरत कपल लग रहे थे....
सतीश और शिप्रा जाकर अपनी जगह ग्रहण करते है”
सतीश- “कब से जानती है तू उस लड़के को?
शिप्रा जोकि अपने मोबाइल मे लगी हुई थी....
शिप्रा- “कोण से लड़के को?
सतीश- “प्रिंस को, कब से जानती है उसको?
शिप्रा अभी भी मोबाइल मे लगे हुये- “ह्म्म्म... हो गये ३-४ हफ्ते”...
सतीश-“और तुम मुझे अब बता रही हो”...
शिप्रा कोई जवाब नहि देती और मोबाइल मे लगी रहती है....
सतीश उसके हाथ से मोबाइल छीनते हुये- “मे तुझसे कुछ पूछ रहा हु??
शिप्रा मुह बनाते हुए थोड़े ग़ुस्से मे- “तो क्या मुझे तुम्हे अपनी हर बतानी पडेगी... जब मे तुमसे तुम्हारी प्राइवेट लाइफ के बारे मे नहि पूछती, तो तुम्हे क्यों जलन हो रही है, मेरी भी एक प्राइवेट लाइफ है, और मैं नहि चाहती की कोई मेरी प्राइवेट लाइफ मे इंटरफेर करे”....
शिप्रा ने ये बात इतने जोर से कही थी की सभी लोग उनकी तरफ देखने लगते है...
सतीश को तो यकीन ही नहि हो रहा था की उसकी छोटी बहन उससे इस तरह से बात कर सकती है...
थोड़ी देर तक टेबल पर शान्ति हो जाती ह, इतने मे ही उनकी कॉफ़ी भी आ जाती है...
शिप्रा भी अब अपनी ग़लती पर पछता रही थी....
सतीश- “सॉरी सतीश भूल गया था की तुम्हारी एक प्राइवेट लाइफ भी है”...
सतीश अपनी सीट से उठता है और रूपये टेबल पर रख कर बाहर की और निकल जाता है...
शिप्रा उसे जाते हुये देखति है और फिर ग़ुस्से मे बड़बड़ाते हुये वो भी उसके पीछे तेज कदमो से चलि जाती है....
शिप्रा बाहर निकल कर सतीश को आवाज देती है... पर सतीश बिना सुने अपनी बाइक निकालने के लिए चल देता है...
शिप्रा उसके पीछे चल देती है- “भइया.., भाईया मेरी बात तो सुनो, आई एम सॉरी” उसे जाते हुए देखति रहती है, सतीश थोड़ी आगे जाकर बाइक रोक देता है,
शिप्रा के चेहरे पर हलकी सी स्माइल आ जाती है, और वो भगति हुई सतीश के पास पहुंच कर बाइक पर बैठ जाती है...
शिप्रा- “आई ऍम सॉरी भाई... वो पता नहि अचानक मुझे क्या हुआ, आई डीड नोट वांट तो हार्ट यु”....
सतीश उसे कोई भी जवाब दिए बिना आगे बढ़ जाता है...
शिप्रा पूरे रस्ते उसे मनाती रहती है, पर सतीश उसकी बात का कोई जवाब नहि देता...
सतीश घर के बाहर बाइक को खड़ी करके डोर बेल्ल बजाता है, डोर सोनाली खोलती है, सतीश एक नजर सोनाली को देखता है वो काफी फ्रेश नजर आ रही थि, ऐसा लग रहा था जैसे की वो अभी अभी नहा कर आई हो....
पर तुरंत ही सतीश ग़ुस्से मे अपने कमरे की और चल देता है....
सोनाली उसे आवाज लगाती है पर वो सीधे अपने कमरे मे चला जाता है....
सोनाली अब शिप्रा की तरफ देखति है तो वो भी अपना सर झुकाए अपने कमरे की तरफ बढ़ रही थी....
सोनाली शिप्रा को आवाज देकर रोकती है और शिप्रा के सामने जाकर खड़ी हो जाती है- “ये सतीश को क्या हुआ और तू इतनी उदास क्यों है?
शिप्रा कोई जवाब नहि देती बस मुह लटकाये कड़ी रहती है....
सोनाली- “लगता है आज फिर तुम दोनों ने झगड़ा किया है, तुम लोग कब सुधरोगे, मुझे तो समझ नहि आता”....
शिप्रा चुपचाप अपने कमरे मे चल देती है,
सोनाली- “है भगवान् कब अकल आयेगी इन दोनों को”...
सतीश अपने कमरे मे ग़ुस्से से आग बबूला हो रहा था आज शिप्रा ने उस दो कोडी के लड़के के लिए उससे इतनी बदतमीज़ी से बात करी थी....