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शिप्रा की आवाज सुनकर सतीश एकदम से उठ कर बैठ जाता है,
सतीश- बड़ी जल्दी चाय बना ली तूने...
शिप्रा- तेरी तरह सुस्ती से काम नहि करती मैं...
सतीश- तू कुछ ज्यादा ही नहि बोलने लगी है...
शिप्रा- ज्यादा नहि सही बोल रही हु...
सतीश- रुक अभी बताता हूँ तुझे
ओर सतीश तुरंत बेड से उठने लगता है की तभी सोनाली उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लेती है- तुम लोग थोड़ी देर बिना लडे नहि रह सकते...
सतीश- इसी ने सुरुआत करी थी मे तो चुपचाप लेटा हुआ था...
सोनाली- तुझे मैंने पहले भी मना किया है की इसे मत छेड़ा कर फिर क्यों छेडती है तू इसे...
शिप्रा सब को चाय देती है और चुपचाप वहि बैठ कर चाय पिने लगती है...
ऐसे ही हलकी फुल्की बातों और छेड़छाड़ करते पता ही नहि चलता की कब ८ बज जाते है... शिप्रा किचेन मे खाना बनाने चलि जाती है और सोनाली सतीश के साथ बाहर आकर सोफ़े पर बैठ कर साँस बहु वाले टिपिकल शोज देखने लगती है सतीश बोर तो बहुत हो रहा था पर वो एक पल के लिए भी अपनी माँ से अलग नहि होना चाह रहा था.. और वो उसके कंधे पर सर रख कर बैठ जाता है....
सोनाली- क्या बात है आज बहुत प्यार आ रहा है अपनी माँ पर...
सतीश कुछ कहता नहि बस बैठा रहता है...
८:४५ तक शिप्रा खाना तैयार कर लेती है सब साथ मे खाना खाते है और फिर शिप्रा किचन. के काम निपटाने लगती है और सतीश और सोनाली, सोनाली के रूम मे जाकर टीवी देखने लगते है...
थोड़ि देर मे ही शिप्रा आ जाती है और सोनाली के बगल मे लेट कर वो भी टीवी देखने लगती है.... अब सीन ये था की सोनाली बिच मे थी और उसके लेफ्ट हैंड की तरफ सतीश लेटा हुआ था और राईट हैंड की तरफ शिप्रा लेटी हुई थि, थोड़ी देर तक टीवी देखने के बाद सोनाली चादर उठा कर सब के ऊपर दाल देती है अब एक चादर मे सोनाली सतीश और शिप्रा तीनो लोग थे... सोनाली और शिप्रा तो टीवी देखने मे व्यस्त थे पर सतीश का ध्यान तो अपनी माँ की तरफ था और वो सोच रहा था की कैसे वो अपनी माँ की बॉडी को टच करके उसका आनंद उठाये....
सतीश यहि सोचते सोचते सोनाली के कंधे पर अपना सर रख देता है और सोनाली के डीप ब्लाउज मे से झांक रही उसकी दूध की गहराई को देखने लगता है सोनाली उसके सर पर अपना हाथ रख कर उसे प्यार से थपथपाने लगती है जिससे सतीश का सर सरक कर उसके सीने पर आ जाता है... अब सतीश की आँखों के सामने सोनाली का क्लीवेज था, और सोनाली भी सतीश की गरम साँसों को अपने क्लीवेज पर महसूस. कर रहीथी.... अब सतीश अपना हाथ चादर के
अंदर से ही अपनी माँ की जाँघो पर रख देता है. पर ये सब करते समय उसकी फट बहुत रही थी ये सोच कर की पता नहि इस बात पर उसकी माँ क्या एक्शन लेगी... पर सोनाली कोई रियेक्ट नहि करती और चुपचाप टीवी देखति रहती है, अपनी माँ की तरफ से कोई रियेक्ट न पाकर उसकी हिम्मत बढ़ जाती है और वो अपने हाथ को अपनी माँ की जाँघ पर रख कर ऊपर की तरफ बढ़ाने लगता है... सोनाली उसकी इन हरकतो से गरम होने लगती है और उसकी तेज सांसो के साथ उसके दूध ऊपर निचे होने लगते है... सतीश सोनाली की ऊपर निचे होती चटियों से समझ जाता है की उसकी माँ अब गरम हो गई है और वो भी इस सबके मजे ले रही है... सतीश अब अपनी माँ की जांघों को सहलाते हुए अपने हाथ को ऊपर की तरफ बढाता है अब उसका हाथ अपनी माँ की चुत को छूने ही वाला था की सोनाली अपने हाथ से उसके हाथ को पकड़ लेती है, पर वो अपनी नजरे टीवी पर से नहीं हटाती है, सोनाली की चुत सतीश की हरकतों से गिली हो गई थी... और वो इससे आगे नहि बड़ना चाहती थी क्युकी उसे पता था की वो अपने पर कण्ट्रोल नहि कर पायेगी और वो शिप्रा के कारन उससे कुछ कह भी नहि पा रही थी... और सतीश भी ये बात समझ गया था और वैसे भी उसकी माँ के विरोध मे दम नहि था क्युकी उसने बहुत हलके से उसके हाथ को पकड़ा था सतीश एक झटका देकर अपने हाथ को झटका देकर चुरा लेता है और अपने हाथ को अपनी माँ की चुत और अपने जन्मस्थान पर साड़ी और पेटीकोट के ऊपर से ही रख देता है... सतीश का हाथ अपनी चुत पर पड़ते ही सोनाली की बॉडी मे करंट दौड जाता है उसकी समझ बंद हो जाती है और वो बड़ी मुस्किल से अपने मुह से निकलने वाली सिसकारी को रोकती है, उसकी चुत जोकि पहले से गिली थी एकदम से पानी छोड़ देती है... सोनाली की साँसे अब और भी तेज हो गई थी...
ईधर चादर के अंदर माँ बेटे ये सब कर कर रहे थे उधर शिप्रा टीवी देखने मे ही मस्त थी उसे तो ये भी नहि पता था की उसकी माँ और भाई अंदर ही अंदर क्या गुल खिला रहे है . . सतीश अब अपने हाथ को उसकी चुत पर से निचे तक फिरा देता है...
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सतीश- बड़ी जल्दी चाय बना ली तूने...
शिप्रा- तेरी तरह सुस्ती से काम नहि करती मैं...
सतीश- तू कुछ ज्यादा ही नहि बोलने लगी है...
शिप्रा- ज्यादा नहि सही बोल रही हु...
सतीश- रुक अभी बताता हूँ तुझे
ओर सतीश तुरंत बेड से उठने लगता है की तभी सोनाली उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लेती है- तुम लोग थोड़ी देर बिना लडे नहि रह सकते...
सतीश- इसी ने सुरुआत करी थी मे तो चुपचाप लेटा हुआ था...
सोनाली- तुझे मैंने पहले भी मना किया है की इसे मत छेड़ा कर फिर क्यों छेडती है तू इसे...
शिप्रा सब को चाय देती है और चुपचाप वहि बैठ कर चाय पिने लगती है...
ऐसे ही हलकी फुल्की बातों और छेड़छाड़ करते पता ही नहि चलता की कब ८ बज जाते है... शिप्रा किचेन मे खाना बनाने चलि जाती है और सोनाली सतीश के साथ बाहर आकर सोफ़े पर बैठ कर साँस बहु वाले टिपिकल शोज देखने लगती है सतीश बोर तो बहुत हो रहा था पर वो एक पल के लिए भी अपनी माँ से अलग नहि होना चाह रहा था.. और वो उसके कंधे पर सर रख कर बैठ जाता है....
सोनाली- क्या बात है आज बहुत प्यार आ रहा है अपनी माँ पर...
सतीश कुछ कहता नहि बस बैठा रहता है...
८:४५ तक शिप्रा खाना तैयार कर लेती है सब साथ मे खाना खाते है और फिर शिप्रा किचन. के काम निपटाने लगती है और सतीश और सोनाली, सोनाली के रूम मे जाकर टीवी देखने लगते है...
थोड़ि देर मे ही शिप्रा आ जाती है और सोनाली के बगल मे लेट कर वो भी टीवी देखने लगती है.... अब सीन ये था की सोनाली बिच मे थी और उसके लेफ्ट हैंड की तरफ सतीश लेटा हुआ था और राईट हैंड की तरफ शिप्रा लेटी हुई थि, थोड़ी देर तक टीवी देखने के बाद सोनाली चादर उठा कर सब के ऊपर दाल देती है अब एक चादर मे सोनाली सतीश और शिप्रा तीनो लोग थे... सोनाली और शिप्रा तो टीवी देखने मे व्यस्त थे पर सतीश का ध्यान तो अपनी माँ की तरफ था और वो सोच रहा था की कैसे वो अपनी माँ की बॉडी को टच करके उसका आनंद उठाये....
सतीश यहि सोचते सोचते सोनाली के कंधे पर अपना सर रख देता है और सोनाली के डीप ब्लाउज मे से झांक रही उसकी दूध की गहराई को देखने लगता है सोनाली उसके सर पर अपना हाथ रख कर उसे प्यार से थपथपाने लगती है जिससे सतीश का सर सरक कर उसके सीने पर आ जाता है... अब सतीश की आँखों के सामने सोनाली का क्लीवेज था, और सोनाली भी सतीश की गरम साँसों को अपने क्लीवेज पर महसूस. कर रहीथी.... अब सतीश अपना हाथ चादर के
अंदर से ही अपनी माँ की जाँघो पर रख देता है. पर ये सब करते समय उसकी फट बहुत रही थी ये सोच कर की पता नहि इस बात पर उसकी माँ क्या एक्शन लेगी... पर सोनाली कोई रियेक्ट नहि करती और चुपचाप टीवी देखति रहती है, अपनी माँ की तरफ से कोई रियेक्ट न पाकर उसकी हिम्मत बढ़ जाती है और वो अपने हाथ को अपनी माँ की जाँघ पर रख कर ऊपर की तरफ बढ़ाने लगता है... सोनाली उसकी इन हरकतो से गरम होने लगती है और उसकी तेज सांसो के साथ उसके दूध ऊपर निचे होने लगते है... सतीश सोनाली की ऊपर निचे होती चटियों से समझ जाता है की उसकी माँ अब गरम हो गई है और वो भी इस सबके मजे ले रही है... सतीश अब अपनी माँ की जांघों को सहलाते हुए अपने हाथ को ऊपर की तरफ बढाता है अब उसका हाथ अपनी माँ की चुत को छूने ही वाला था की सोनाली अपने हाथ से उसके हाथ को पकड़ लेती है, पर वो अपनी नजरे टीवी पर से नहीं हटाती है, सोनाली की चुत सतीश की हरकतों से गिली हो गई थी... और वो इससे आगे नहि बड़ना चाहती थी क्युकी उसे पता था की वो अपने पर कण्ट्रोल नहि कर पायेगी और वो शिप्रा के कारन उससे कुछ कह भी नहि पा रही थी... और सतीश भी ये बात समझ गया था और वैसे भी उसकी माँ के विरोध मे दम नहि था क्युकी उसने बहुत हलके से उसके हाथ को पकड़ा था सतीश एक झटका देकर अपने हाथ को झटका देकर चुरा लेता है और अपने हाथ को अपनी माँ की चुत और अपने जन्मस्थान पर साड़ी और पेटीकोट के ऊपर से ही रख देता है... सतीश का हाथ अपनी चुत पर पड़ते ही सोनाली की बॉडी मे करंट दौड जाता है उसकी समझ बंद हो जाती है और वो बड़ी मुस्किल से अपने मुह से निकलने वाली सिसकारी को रोकती है, उसकी चुत जोकि पहले से गिली थी एकदम से पानी छोड़ देती है... सोनाली की साँसे अब और भी तेज हो गई थी...
ईधर चादर के अंदर माँ बेटे ये सब कर कर रहे थे उधर शिप्रा टीवी देखने मे ही मस्त थी उसे तो ये भी नहि पता था की उसकी माँ और भाई अंदर ही अंदर क्या गुल खिला रहे है . . सतीश अब अपने हाथ को उसकी चुत पर से निचे तक फिरा देता है...
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