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Incest आग्याकारी माँ

शिप्रा की आवाज सुनकर सतीश एकदम से उठ कर बैठ जाता है,

सतीश- बड़ी जल्दी चाय बना ली तूने...

शिप्रा- तेरी तरह सुस्ती से काम नहि करती मैं...

सतीश- तू कुछ ज्यादा ही नहि बोलने लगी है...

शिप्रा- ज्यादा नहि सही बोल रही हु...

सतीश- रुक अभी बताता हूँ तुझे

ओर सतीश तुरंत बेड से उठने लगता है की तभी सोनाली उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लेती है- तुम लोग थोड़ी देर बिना लडे नहि रह सकते...

सतीश- इसी ने सुरुआत करी थी मे तो चुपचाप लेटा हुआ था...

सोनाली- तुझे मैंने पहले भी मना किया है की इसे मत छेड़ा कर फिर क्यों छेडती है तू इसे...

शिप्रा सब को चाय देती है और चुपचाप वहि बैठ कर चाय पिने लगती है...

ऐसे ही हलकी फुल्की बातों और छेड़छाड़ करते पता ही नहि चलता की कब ८ बज जाते है... शिप्रा किचेन मे खाना बनाने चलि जाती है और सोनाली सतीश के साथ बाहर आकर सोफ़े पर बैठ कर साँस बहु वाले टिपिकल शोज देखने लगती है सतीश बोर तो बहुत हो रहा था पर वो एक पल के लिए भी अपनी माँ से अलग नहि होना चाह रहा था.. और वो उसके कंधे पर सर रख कर बैठ जाता है....

सोनाली- क्या बात है आज बहुत प्यार आ रहा है अपनी माँ पर...

सतीश कुछ कहता नहि बस बैठा रहता है...

८:४५ तक शिप्रा खाना तैयार कर लेती है सब साथ मे खाना खाते है और फिर शिप्रा किचन. के काम निपटाने लगती है और सतीश और सोनाली, सोनाली के रूम मे जाकर टीवी देखने लगते है...

थोड़ि देर मे ही शिप्रा आ जाती है और सोनाली के बगल मे लेट कर वो भी टीवी देखने लगती है.... अब सीन ये था की सोनाली बिच मे थी और उसके लेफ्ट हैंड की तरफ सतीश लेटा हुआ था और राईट हैंड की तरफ शिप्रा लेटी हुई थि, थोड़ी देर तक टीवी देखने के बाद सोनाली चादर उठा कर सब के ऊपर दाल देती है अब एक चादर मे सोनाली सतीश और शिप्रा तीनो लोग थे... सोनाली और शिप्रा तो टीवी देखने मे व्यस्त थे पर सतीश का ध्यान तो अपनी माँ की तरफ था और वो सोच रहा था की कैसे वो अपनी माँ की बॉडी को टच करके उसका आनंद उठाये....

सतीश यहि सोचते सोचते सोनाली के कंधे पर अपना सर रख देता है और सोनाली के डीप ब्लाउज मे से झांक रही उसकी दूध की गहराई को देखने लगता है सोनाली उसके सर पर अपना हाथ रख कर उसे प्यार से थपथपाने लगती है जिससे सतीश का सर सरक कर उसके सीने पर आ जाता है... अब सतीश की आँखों के सामने सोनाली का क्लीवेज था, और सोनाली भी सतीश की गरम साँसों को अपने क्लीवेज पर महसूस. कर रहीथी.... अब सतीश अपना हाथ चादर के

अंदर से ही अपनी माँ की जाँघो पर रख देता है. पर ये सब करते समय उसकी फट बहुत रही थी ये सोच कर की पता नहि इस बात पर उसकी माँ क्या एक्शन लेगी... पर सोनाली कोई रियेक्ट नहि करती और चुपचाप टीवी देखति रहती है, अपनी माँ की तरफ से कोई रियेक्ट न पाकर उसकी हिम्मत बढ़ जाती है और वो अपने हाथ को अपनी माँ की जाँघ पर रख कर ऊपर की तरफ बढ़ाने लगता है... सोनाली उसकी इन हरकतो से गरम होने लगती है और उसकी तेज सांसो के साथ उसके दूध ऊपर निचे होने लगते है... सतीश सोनाली की ऊपर निचे होती चटियों से समझ जाता है की उसकी माँ अब गरम हो गई है और वो भी इस सबके मजे ले रही है... सतीश अब अपनी माँ की जांघों को सहलाते हुए अपने हाथ को ऊपर की तरफ बढाता है अब उसका हाथ अपनी माँ की चुत को छूने ही वाला था की सोनाली अपने हाथ से उसके हाथ को पकड़ लेती है, पर वो अपनी नजरे टीवी पर से नहीं हटाती है, सोनाली की चुत सतीश की हरकतों से गिली हो गई थी... और वो इससे आगे नहि बड़ना चाहती थी क्युकी उसे पता था की वो अपने पर कण्ट्रोल नहि कर पायेगी और वो शिप्रा के कारन उससे कुछ कह भी नहि पा रही थी... और सतीश भी ये बात समझ गया था और वैसे भी उसकी माँ के विरोध मे दम नहि था क्युकी उसने बहुत हलके से उसके हाथ को पकड़ा था सतीश एक झटका देकर अपने हाथ को झटका देकर चुरा लेता है और अपने हाथ को अपनी माँ की चुत और अपने जन्मस्थान पर साड़ी और पेटीकोट के ऊपर से ही रख देता है... सतीश का हाथ अपनी चुत पर पड़ते ही सोनाली की बॉडी मे करंट दौड जाता है उसकी समझ बंद हो जाती है और वो बड़ी मुस्किल से अपने मुह से निकलने वाली सिसकारी को रोकती है, उसकी चुत जोकि पहले से गिली थी एकदम से पानी छोड़ देती है... सोनाली की साँसे अब और भी तेज हो गई थी...

ईधर चादर के अंदर माँ बेटे ये सब कर कर रहे थे उधर शिप्रा टीवी देखने मे ही मस्त थी उसे तो ये भी नहि पता था की उसकी माँ और भाई अंदर ही अंदर क्या गुल खिला रहे है . . सतीश अब अपने हाथ को उसकी चुत पर से निचे तक फिरा देता है...

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ईधर चादर के अंदर माँ बेटे ये सब कर कर रहे थे उधर शिप्रा टीवी देखने मे ही मस्त थी उसे तो ये भी नहि पता था की उसकी माँ और भाई अंदर ही अंदर क्या गुल खिला रहे है . . सतीश अब अपने हाथ को उसकी चुत पर से निचे तक फिरा देता है...

सतीश अब अपने हाथ को उसकी चुत पर से निचे तक फिरा देता है... सोनाली फिर से अपना हाथ बड़ा कर सतीश के हाथ को पकड़ कर दबा कर उसे रुकने का इशारा करती है पर सतीश अब कहा रुकने वाला था वो बहुत एक्ससायटेड हो गया था और उसका लंड अब पेण्ट मे पूरा खड़ा हो गया था... सतीश सोनाली की चुत को भी तेजी मे रब करने लगता है.... और ऊपर अपनी माँ की ऊपर निचे होती छातियों को देख रहा था....

सोनाली का तो बुरा हाल हो गया था उसे लग रहा था की अब वो किसी भी समय झड जायेगी.... क्युकी अपनी बेटी के पास ही अपने बेटे से अपनी चुत सहलवाने से वो काफी गरम हो गई थी और ये उसके लिए बिलकुल नया अनुभव था उसका पति तो हमेशा अकेले मे ही उसके बदन से खेलता था पर उसका बेटा तो अपनी बहन के सामने ही अपनी माँ के शरीर से खेल रहा था....

थोड़ि देर मे ही सोनाली अपने चरम पर पहुच जाती है और वो सतीश का हाथ कस कर अपनी चुत पर दबा लेती है और उसकी चुत अपना सारा रस बहा देती है... सोनाली की आँखे मजे की अधिकता मे बंद हो जाती है और लाख रोक्ने के बावजूद उसके मुह से सिसकारी निकल ही जाती है....

सोनाली-आह्हः...उफ्फ्फ्....

उसके मुह से सिसकारी सुनकर शिप्रा का ध्यान टीवी पर से हटता है...

शिप्रा-क्या हुआ मोम...

सतीश भी अपना हाथ छुड़ा कर बैठ कर अन्जान बनते हुए अपने चेहरे पर चिंता का भाव लिये हुये...

सतीश- क्या हुआ मोम...

सोनाली थोड़ी देर तक आँखें बंद करे लेती रहती है और अपनी साँसों को कण्ट्रोल करने लगती है... उसे तो यकीन ही नहि हो रहा था की वो आज इतनी जल्दी चरम पर कैसे पहुच गई और आज उसे काफी समय बाद उसकी चुत ने इतना रस बहाया था ....

शिप्रा बहुत टेंशन मे आ गयी थी वो समझ रही थी की उसकी माँ की तबियत ख़राब हो रही है वो सोनाली को हिलाते हुये- माँ क्या हुआ आपको, आप ठीक तो हो ना, आप कुछ बोलती क्यों नही...

सोनाली आँखे बंद करे ही- मे ठीक हु, जा एक गिलास पानी ले आ...

शिप्रा बेड से उठ कर चलि जाती है, उसके जाते ही

सतीश- माँ आप ठीक तो हो ना....

सोनाली अपनी आँखे खोलती है उस पर अभी भी खुमारी छायी हुई थि, सोनाली सतीश की तरफ देखति है और बेड से उठ कर बाथरूम की तरफ चलि जाती है....

सतीश सोनाली के देखने के तरीके से कुछ समझ नहि पाता की उसकी आँखों मे उसके लिए गुस्सा था या फिर प्यार..

सोनाली बाथरूम मे जाकर अपनी साड़ी और पेटीकोट उतार देती है, उसकी चुत ने इतना पानी बहाया था की पेटीकोट के साथ साथ साड़ी भी गिली हो गई थी...

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सोनाली अपनी चुत को देखति है तो उसके गाल लाल हो जाते है उसकी चुत के लब खुले हुये थे और सतीश की रगडन के कारन वो लाल हो गई थी.... सोनाली अपनी चुत को पानी से साफ़ करती है.... साड़ी तो पहनने के लायक रही नहि थी इसलिये वो अपना ब्लाउज भी उतार देती है और बाथरूम मे टँगी नाइटी पहन लेती है अब सोनाली के दिमाग से ख़ुमारी का नशा उतर गया था और अब उसे सतीश के साथ किये गए काम पर शर्म आ रही थी वो मन ही मन अपने आपको कोस रही थी की कैसे उसने अपने बेटे के साथ ये सब किया, और सतीश ग़लती तो उसकी भी है वो कैसे अपनी माँ के साथ ये सब कर सकता है, मे उसे कितना शरीफ समझती थी पर वो तो....

ओर सतीश की हरकतो को याद करके उसके होठो पर मुस्कान आ जाती है... पर थोड़ी ही देर मे उसके मन मे अन्तर्द्वन्द चल्ने लगता है जहा एक मन इस सबके पक्ष मे था वहि दूसरा मन इसका विरोध कर रहा था....

ये तुझे क्या हो गया है सोनाली तू कैसे अपने बेटे के साथ ये कर सकती है भला कभी कोई माँ अपने बेटे के साथ ऐसे सम्बन्ध बनाती है, तू अपने जिस्म की प्यास बुजाने के लिए इस हद तक गिर सकती है ये मैंने सोचा भी नहि था...

ओर अब सोनाली को ये सब बहुत गलत लग रहा था और साथ ही साथ उसे सतीश पर गुस्सा आ रहा था की कैसे वो अपनी माँ के साथ ऐसी गन्दी हरकत कर सकता है.... मुझे उससे बात करनी ही होगी इस बारे में...

सोनाली बाथरूम से बाहर आती है, वो देखति है की शिप्रा भी बेड पर बैठि है... वो शिप्रा के सामने शांत रहना ही उचित समझती है...और बेड पर आकर शिप्रा के बगल मे बैठ जाती है और पानी का गिलास लेकर अपने गले को तर करने लगती है....

शिप्रा- आप ठीक तो हो ना मोम....

सोनाली- हा मे ठीक हूँ बेटी,..

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शिप्रा थोड़ी देर वहि बैठि रहती है, और फिर गुड़ नाईट बोल कर निकल जाती है....

अब रूम मे केवल सतीश और सोनाली ही थे, दोनों ही एक दूसरे से बहुत कुछ कहना चाहते थे पर हिम्मत कोई नहि कर पा रहा था.....

सतीश बेड से उठता है और ड्रावर मे से दवाई निकल कर सोनाली को देता हुआ- माँ आप दवाई खा कर आराम करो मे भी सोने जाता हु...

सोनाली नोटिस करती है की सतीश उससे अब नजरे नहि मिला रहा था, शायद उसे अपनी माँ से नजरे मिलने मे अब शर्म आ रही थी....

सोनाली अपने मन मे- देखो तो इसको अब नजरे मिलाने मे शर्म आ रही है और वो सब करते हुए शर्म नहि आई इसे जरा सी...

सोनाली को अब सतीश का चेहरे देख कर हसि आ रही थी पर वो अपनी मुस्कान को छुपाते हुए उसके हाथ से दवाई लेकर खा लेती है....

सतीश- अब आप सो जाइये.. गुड़ नाईट

ओर इतना कह कर सतीश बाहर जाने लगता है...

सोनाली- सतीश

सतीश सोनाली की आवाज सुनकर पलटते हुये- हा माँ

सोनाली- अगर तुझे प्रॉब्लम न हो तो क्या तू आज मेरे पास सो सकता है,

सतीश को तो अपने कानो पर यकीन ही नहि होता की उसकी माँ उसे अपने पास सोने को कह रही है, उसका मन तो खुसी के मारे उछलने को कर रहा था पर वो अपने पर कण्ट्रोल करता हुआ- जैसा आप कहे...

सोनाली- ठीक है तो फिर नीचे वाली ड्रावर मे से टेबलेट की शीषी है उसमे से एक टेबलेट निकालकर मुझे देदे...

सतीश थोड़ा अस्मजस मे पड़ जाता है की उसकी माँ किस चीज की मेडिसिन लेती है...

सतीश-टेबलेट कैसी टेबलेट मोम....

सोनाली- वो बेटा मुझे रात को नींद नहि आती इस्लिये मुझे डॉक्टर ने स्लीपिंग पिल्स दी है ताकि मे रात को आराम से सो सकु...

सतीश अपने मन मे- ओह्ह तभी मे कहु की कल रात को मेरे इतना सब कुछ करने के बावजूद माँ की नींद कैसी नहि टुटी...

सतीश सोनाली को स्लीपिंग पिल्स की शीषी निकल कर दे देता है... सोनाली उसमे से २ टेबलेट निकल कर खा लेती है....

सतीश- माँ एक बार मे २ टेबलेट...

सोनाली पानी का गिलास रखते हुये- हा बेटा क्युकी मे नहि चाहती की मेरी नींद रात को किसी वजह से टूटे...

सतीश को तो ऐसा लग रहा था जैसे उसकी माँ ने उसे चोदने की परमिशन दे दी हो और वो उससे कह रही हो की मे नहि चाहती की जब तू मुझे चोदे तब मेरी नींद तूट जाए....

सतीश शीशी को ड्रावर मे वापस रखता है और लाइट्स ऑफ करके सोनाली के बगल मे आकर लेट जाता है... सोनाली टेबल लैंप ओन कर लेती है और लेट जाती है, एक चादर के अंदर मा और बेटे दोनों लेटे हुए थे....

सतीश का लंड तो अभी से आगे के बारे मे सोच कर खड़ा हुआ था और वो आँखे बंद करके अपनी माँ के सोने का इन्तजार कर रहा था...

सोनाली पर स्लीपिंग पिल्स का असर होने लगा था और वो धीरे धीरे नींद के आग़ोश मे जाने लगी थी...

ओर इधर सतीश बहुत उत्तेजित हुआ जारहा था उसे तो ये सब किसी सपने सा लग रहा थ, उसे एक पोर्न मूवी याद आ जाती है जिसमे एक बेटे को ये पता चल जाता है की उसकी माँ नींद की गोलियां खाकार सोती है और फिर उस रात उसकी माँ के सोने के बाद वो उसके रूम मे आता है और फिर अपनी सोती हुई माँ की जमकर चुदाई करता है...

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सतीश की आँखों के सामने वो सभी स्लीपिंग सेक्स वाली वीडियो आ जाती है जो उसने देखि थि, सतीश को स्लीप सेक्स बहुत पसंद था और किसी सोती हुई लड़की के साथ सेक्स करना उसकी फंतासी थि, जोकि आज पूरी होने वाली थी वो भी अपनी ही माँ के साथ्.... सतीश अपनी माँ के सोने का बड़ी बेसब्री से इन्तजार कर रहा था... उसको एक एक मिनट एक एक वर्ष के समान लग रहा था.... जैसे तइसे वो आधा घंटा कटता है...

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सतीश अपनी माँ के सोने का बड़ी बेसब्री से इन्तजार कर रहा था.... उसको एक एक मिनट एक एक बर्ष के समान लग रहा था.... जैसे तइसे वो आधा घंटा कटता है...

आधा घंटा होते ही वो उठ कर सोनाली की तरफ करवट लेकर लेट जाता है.... और अपनी माँ को हिला कर और आवाज लगा कर चेक करता है की वो सो गई है की नहि, जब काफी देर तक आवाज देणे के बावजूद वो कोई रिस्पांस नहि देती तब सतीश को कन्फर्म होता है की उसकी माँ पर गोलियों का असर हो गया है और अब वो नहि जगने वाली...

सतीश बेड से उठ कर रूम का डोर अंदर से लॉक करता है और वापस बेड पर आकर अपनी माँ के ऊपर से चादर को.हटा देता है, अब उसकी आँखों के सामने उसकी माँ ब्लैक कलर की नाइटी मे पीठ के बल सो रही थि, नाइटी उसके घुटनो पर से सरक गई थि, और अब उसकी टांगे घुटनो तक उसके सामने थी.... टेबल की रौशनी मे उसकी सफ़ेद टाँगे देख कर सतीश की आँखे चौंधिया जाती है... सतीश आगे बढ़ कर उसकी नाइटी की रॉब खोल देता है और नाइटी को उसके ऊपर से खिसका कर साइड मे कर देता है.... अब उसकी माँ उसके सामने मादरजात नंगी थी....

]और उसका मख़मली सफ़ेद जिस्म सतीश की आँखों के सामने था सतीश तुरंत ही अपने कपडे उतार देता है और अपनी माँ के साइड मे आ जाता है और फिर अपनी माँ के जिस्म को ऊपर से निचे और निचे से ऊपर तक अपनी आँखे फाडे देखता है वो अपने माँ के जिस्म को अपनी आँखों मे बसाना चाहता है और फिर जब वो निचे से ऊपर उसके एक एक अंग अंग को देखता हुआ उसके रसीले गुलाबी होठो तक पहुचता है तो उससे कण्ट्रोल नहि होता और वो उसके ऊपर आकर उसके होठो को अपने होठो मे भर कर चुस्ने लगता है वो आज अपनी माँ के होठो का सारा रस पि जाना चाहता था.... थोड़ी देर तक होठो को चुस्ने के बाद वो उसकी गर्दन को चाटता हुआ निचे आता है और अब उसकी आँखों के सामने उसकी माँ की चूचियां थी जिन निप्पल्स से उसने बचपन मे दूध पिया था आज उन्ही को अपने मुह मे लेकर.चूस रहा था और साथ ही साथ चूचियों को मसल रहा था.... एक निप्पल को मुह से निकलता तो दूसरे को मुह मे भर लेता काफी देर तक चूचियों से खेलने के बाद वो अपनी जीभ से उसके जिस्म को चाटता हुआ निचे की और बढ़ता है... और उसकी नैवल पर पहुच कर उसमे अपनी जीभ डालकर उसको चाटता है और फिर निचे बड़कर सोनाली के पैरों को फैला देता है उसके सामने उसका जन्मस्थान था जहा से वो निकला वो जगह उसकी आँखों के सामने थी... वह आँखे फाडे अपनी माँ की चुत को देख रहा था, सोनाली की चुत एकदम क्लीन थी एक भी बाल नहि था उसकी चुत पर... एकदम फूली हुई चुत उसकी दोनों फाके खुली हुई थि, सतीश देखता है की उसकी चुत गिली थी यानी उसकी माँ नींद मे ये सब फील कर रही थी और उसकी चुत पानी बहा रही थी....

[IMG]]सतीश से कण्ट्रोल नहि होता और वो अपनी माँ की चुत मे अपना मुह दे देता है और उसकी चुत को अपने मुह मे भर कर अमृतपान करने लगता है, अब वो अपनी जीभ निकाल कर चुत को कुरेदने लगता है... कभी वो उसके चुत के डेन को अपने मुह मे लेकर चूसता और कभी उसकी चुत मे अपनी जीभ अंदर बाहर करता...

अब सतीश से और कण्ट्रोल नहि होता और वो उसकी टाँगो के बिच बैठ कर अपना लंड चुत पर टीका कर उसके पानी से अपने टोपे को गिला करता है और फिर चुत पर सेट करता है और हल्का सा पुश करता है पर उसका लंड चुत से फिसल जाता है... सतीश फिर लंड को सेट करके थोड़े जोर से पुश करता है उसका लंड का टोपा सोनाली की चुत के लबो को फैलाता हुआ अंदर घुस जाता है सतीश के मुह से एक सिसकि निकल जाती है... उसकी माँ की चुत उसकी सोच से ज्यादा टाइट थी.... सतीश जैसे ही अपने लंड को और पुश करने की कोशिश करता है उसका लंड उसकी माँ की चुत को फैलाता हुआ थोड़ा और अंदर चला जाता है, सोनाली की बॉडी मे हलचल होती है शायद उसे थोड़ा पैन फील हुआ था, अब सतीश का ३.५ इंच लंड सोनाली की चुत मे फसा हुआ था, सतीश को अपना लंड सोनाली की चुत मे काफी कसा हुआ फील हो रहा था उससे ऐसा लग रहा था की उसका लंड माँ की चुत की गर्मी को बर्दाश्त नहि कर पायेगा और अभी लीक हो जायेगा वो अपने ऊपर कण्ट्रोल करता है अब वो अपनी कमर को धक्का देकर अंदर करने की कोशिश करता है उसका लंड बहुत कसा हुआ थोड़ा सा अंदर जाता है पर सोनाली की बॉडी मे दर्द की वजह से हलचल होती है और इस बार तो उसके मुह से सिसकि भी निकल जाती है, सतीश समझ जाता है की उसकी माँ दर्द को फील कर रही है और उस से सोते टाइम सेक्स करना पॉसिबल नहि है क्युकी दर्द की वजह से वो बेहोषी से बाहर आ सकती थी और अगर वो नींद से उठ गई और उसने अपने आप को इस पोजीशन मे देख लिया तो मेरी तो शामत आ जायेगी....

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सतीश जितना अपनी माँ की चुत मे लंड कर पाया था उसी से काम चलाने की सोचता है और वो अपने लंड को टोपे तक बाहर निकाल कर वापस अंदर करके झटके लगाने लगता है और ये सब वो बड़े ही आराम से कर रहा था ताकि उसकी माँ को दर्द न हो....

सतीश अब धीरे धीरे धक्के मारता हुआ अपनी माँ की चुदाई कर रहा था और उसे इसमें बहुत मजा आ रहा था.... उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसका लंड किसी आग की भट्टी मे जा रहा हो और वो ज्यादा देर तक नहि टिक पाता, उसके लंड की नसे फुलने लगती है और उसे ऐसा लगता है जैसे की वो झड़ने वाला है और वो अपने लंड को अपनी माँ की चुत से बाहर निकालता है और अपना सारा माल उसकी चुत पर दाल देता है.... आज उसके लंड ने बहुत माल निकाला था और वो माल झड़ने के बाद अपनी माँ के बगल मे लेट जाता है और अपनी साँसों को कण्ट्रोल करने लगता है....

सतीश को बहुत कमजोरी फील हो रही थी.... और वो अपनी आंखे बंद कर के लैटा था की तभी

ह. दी(हरामी दिमाग)- कसम से यार आज तो मजा आ गया...

सतीश-ओह्ह तो तू आ ही गया मे सोच ही रहा था की तू आखिर ग़ायब कहा हो गया...

ह.दी- ग़ायब नहि हुआ था बस तू वही सब कर रहा था जो मे चाहता था इस्लिये मे नहि आया, जब तू अपने उस चूतिये दिमाग से काम लेगा तब तब मे तुझे दिशा दिखाने आऊंगा...

सतीश- मे जनता हूँ तू मुझे कौन सी दिशा दिखायेगा तेरी सारी दिशाएं चुत पर जाकर ही ख़तम होती है... और देख आज तूने मुझसे मेरी ही माँ चुदवा दि...

ह.दि- तो क्या हुआ मजा तो तुझे भी आया ना, क्या चुत थी साली की एकदम कसी हुई...

सतीश- हम्म मजा तो आया पर अगर पूरा लंड दाल कर चुदाई करता तो अलग ही मजा आता....

ह.दी- मे तो आज ही पूरा लंड दाल कर उसे चुदवा देता पर साले तूने मेरी न सुन कर उस बगुला भगत की बात सुन ली और थोड़े से काम चला लिया....

सतीश- अबे पर माँ जाग जाती तो....

ह.दी- तो क्या??? कहती की बेटा पूरा लंड दाल कर चुदाई कर थोड़े मे मजा नहि आ रहा....

सतीश- भोसडी के गांड फाड़ देती मेरी....

ह.दी- अबे हाँ गांड को तो मे भूल ही गया क्या मस्त गांड है साली की एकदम गोल गोल... साले मेरी बात मान इससे पहले की वो तेरी गांड फाडे तू ही उसकी गांड मे अपना लंड दाल के उसकी गांड फाड़ दे.... हेहहे...

सतीश- भोसडी के हमेशा लंड से सोचियो कभी दिमाग का यूज़ भी कर लिया कर.... और हाँ अब मुझे डिस्टर्ब मत कर जा सोने दे मुझे...

ह.दी- भलाई का तो जमाना ही नहि है साले एक तो मे इतना मस्त आईडिया दे रहा हु, ऊपर से तू मुझे ही सुना रहा है लवडू कहि का... जा रहा हूँ मे पर एक बार सोच ले इतना मस्त मौका नहि मिलेगा देख कितना मस्त माल तेरे पास लेटा है तेरे पास और इसकी गांड तो तू देख ही चुका है हाय क्या जालिम गांड है मुर्दे का भी खड़ा हो जाए अगर वो देख ले तो... हहाहा.. पर वो देखेगा कैसे...हेहेह... पर तू तो देख ही सकता है चूतिये की दुम्...

ओर इसी के साथ( हरामी दीमाग) चला जाता है पर सतीश के मन मे उथल पुथल मचा जाता है और जो सतीश अभी कमजोरी फील कर रहा था अब उसका लंड अपनी माँ की गांड के बारे मे सोच कर फुल्ली खड़ा होकर झटके खा रहा था...

सतीश उठ कर बैठ जाता है और अपनी माँ की तरफ देखता है उसकी माँ उसी कंडीशन मे थी... सतीश अपनी माँ को अपने हाथो से पलट कर उनकी करवट बदल देता है और उन्हें पेट् के बल लेता देता है...

कब उसकी माँ की चौडी गोल गांड उसकी आँखों के सामने थी सतीश गांड को अपने हाथ मे लेकर मसलने लगता है और पागलो की तरह उसकी पूरी गांड पर किश करने लगता है और उसे अपनी जीभ से चटने लगता है... अब सतीश अपनी माँ की गांड के दोनों पाटो को फैला देता है अब सोनाली की गांड का छेद उसके सामने खुल कर आ गया था सतीश अपनी नाक अपनी माँ के गांड के पास लेजा कर उसकी खुसबू को अपने अंदर खिंच लेता है... अपनी माँ की गांड की खुसबू से वो मदहोश होने लगता है... क्या खुसबू है गांड की आह्ह्ह्ह...

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ओर सतीश एक दो बार उसकी खुसबू को अपने अंदर खिंचता है और फिर अपनी जीभ से उसके छेद को लीक करने लगता है... और फिर उसे चाट चाट कर उसे पूरा गिला कर देता है... बहुत देर तक अपनी माँ की गुद्वार से खेलने के बाद वो अपना लंड उसकी गांड की पाटो मे फसा कर धक्के लगाने लगता है.... आह्हः माँ क्या गांड है तुम्हारी मन तो कर रहा है की अपना लंड आपकी गांड मे दाल कर.खुब कस कर आपकी गांड मारु.... और वो गस्से लगाने लगता है..

उसे बहुत मजा आ रहा था और दस मिनट तक गस्से लगाने के बाद वो अपना पानी अपनी माँ की गांड पर निकाल देता है और फिर अपने लंड को उसकी नाइटी से साफ़ करके अपने कपडे पहनता है और सोनाली को सीधा लीटा कर उसकी नाइटी को सही करता है और उसे बाँध देता है... और बेड पर लेट कर दोनों के ऊपर चादर लेकर लेट जाता है...

सतीश अपने सोये हुए लंड को थप थपाते हुए चिंता न कर जल्द ही तुझे माँ की चुत और गांड मे घुसाउंगा बस थोड़ा सब्र कर ले क्युकी सब्रा का फल मीठा होता है....

ओर थोड़ी ही देर मे सतीश भी थकान के कारन सपनो की हसीन वादियों मे खो जाता है....

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अगले दिन जब सोनाली बेड से उठती है तो वह देखति है की सतीश उसके ऊपर हाथ और पैर डाले सोये हुए था सतीश का हाथ सोनाली की छातियों पर और उसकी टाँगे सोनाली की नंगी टाँगो पर थी क्युकी उसकी नाइटी उसकी टाँगो से खिसक गई थि, सोनाली को कल सतीश के साथ की गई हरकतो का ध्यान आता है और उसकी चुत गिली होने लगती है... सोनाली सोचने लगती है की कल कैसे उसके बेटे ने उसकी चुत मसलि थी और चुत मसल कर ही मुझे झड़वा दिया था...

सोनाली के होंठो पर स्माइल आ जाती है और फिर वो अपनी सोच से बाहर निकल कर उसके हाथ को अपने ऊपर से हटा कर बैठ जाती है, सोनाली सतीश की तरफ देखति है वो आराम से सो रहा था सोते हुए वो बहुत मासूम लग रहा था, सोनाली को सतीश पर बहुत प्यार आता है वो उसके बालो मे प्यार से हाथ फिराती है और फिर उसे अपने पैर मे कुछ चुभता हुआ मेहसुस होता है सोनाली समझ जाती है की उसके पैर मे सतीश का लंड चुभ रहा है, सोनाली उसके पैर को अपने ऊपर से हटा देती है और उसे सीधा लीटा देती है इस सब मे सतीश के ऊपर से चादर हट जाती है और शार्ट मे तम्बू बनाये उसका लंड अब सोनाली की आँखों के सामने था...

सोनाली जोकि उसके लंड को पहले भी बिना कपड़ो के देख चुकी थी शार्ट मे बने तम्बू से नजरे नहि हटा पाती और उसकी चुत से पानी निकलने लगता है...

सोनाली- हाय कितना अच्छा है मेरे बेटे का.... कितना मजा आएगा जब ये चुत मे जायेगा कसम से फाड़ के रख देगा...

ओर सोनाली अपने उपर कण्ट्रोल नहि कर पाती और अपना एक हाथ उसके लंड पर रख देती है और उसकी लम्बाई का अनुमान लगाने लगती है उसके लंड पर अपना हाथ फिराके... सोनाली की चुत पानी छोड़ने लगी थी और वो बहुत गरम होने लगी थी सोनाली अपना एक हाथ सतीश के लंड पर फिराते हुये एक हाथ अपनी चुत पर रख कर उसे मसलने लगती है और फिर वो झुक कर सतीश के लंड के टोपे पर एक किस करती है और फिर अपनी जीभ निकाल कर उसके लंड के टोपे पर फिराती है... वो और जोश के साथ अपनी चुत को मसल रही थी और तभी उसकी चुत पानी छोड़ देती है और वो झड जाती है...

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इस सबके साथ ही वो अपनी चुत के पानी को नाइटी से साफ़ करती है और वाश रूम की तरफ चल देती है... उसे अपने ऊपर यकीन नहि हो रहा था की वो अपने बेटे के साथ ये सब कैसे कर सकती है... मैंने अपने पति के अलावा कभी किसी दूसरे के बारे मे कभी नहि सोचा, काफी लोग मुझे चोदने की ट्राय करते रहे पर मैंने कभी किसी को लिफ्ट नहि दी और आज तक अपने पतिव्रता धरम का पालन किया पर आज अपने बेटे के साथ ही ये सब कर रही थि, आखिर ये सब मुझे हो क्या रहा है मे क्यों अपने ही बेटे की तरफ अट्रॅक्ट हो रही हु... ये गलत है मुझे अपने बेटे के साथ ये सब नहि करना चहिये, जमाना क्या सोचेगा की एक माँ ने अपनी जिस्म की आग बुजाने के लिए अपने ही बेटे के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बना लिये...

पर तभी उसके दिमाग मे दूसरा ख्याल आता है की अगर मे अपने बेटे के साथ कर भी लुंगी तो इसमें बुराई ही क्या है, कही बाहर जाकर मुह काला करने से अच्छा है की मे घर की चार दीवारी मे अपने बेटे के साथ ही जिस्मानी सम्बन्ध बना लु... बाहर जाकर करने से बदनामी का डर भी रहेगा, जबकी घर मे करने से बदनामी की चिंता भी नहि और रही बात ज़माने की तो ये बात हम माँ बेटे के बिच ही रहेगी तो उन्हें कुछ कहने का मौका भी नहि मिलेंगा... और वैसे भी मैंने नेट पर न जाने कितनी माँ और बेटे के सेक्स की कहानी पडी है और जब कहानी एक्सिस्ट करती है तो ये सम्बन्ध भी एक्सिस्ट करता होगा, न जाने कितनी ही औरते अपने ही बेटे के साथ चुदाई करती होगी पर किसी को पता भी नहि चलता, तो अगर मे भी अपने बेटे के साथ सेक्स कर लु तो इसमें बुराई ही क्या है...

सोनाली इन्ही सब सोचो मे खोई हुई फ्रेश होकर शावर लेने लगती है और इन सोचो मे खोई होने के कारन ही वो गेट को लॉक करना भूल गई थी...

जबकी उधर दूसरी तरफ सतीश को बहुत तेज पेशाब आ रही थी और वो बेड से उठ कर वाशरूम की तरफ भागता है और जैसे ही गेट खोलता है उसकी आँखे जोकि अभी भी नींद मे होने की वजह से पूरी तरह नहि खुली थि, चौडी होकर पूरी खुल जाती है उसके सामने उसकी माँ पूरी नंगी होकर शावर ले रही थी और दूसरी तरफ गेट खुलने की आवाज से सोनाली भी पीछे पलट जाती है और उसकी आँखे भी आस्चर्य से फटी की फटी रह जाति है.... उसके सामने उसका बेटा खड़ा था और दोनों ही इस कदर शॉकेड थे की न तो सोनाली को अपने नंगे बदन को ढकने का ख्याल था और न ही सतीश को दरवाजे से हट्ने का ख्याल था... और अब तो सतीश का पेशाब भी अटक गया था और उसका लंड शार्ट मे झटके खा रहा था उसकी आँखे अपनी माँ के जिस्म को देखने मे ही व्यस्त थी... सोनाली का सेक्सी बदन पानी से भिग कर और भी सेक्सी हो गया था...

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सोनाली का पानी मे भिगा बदन देख कर सतीश का गला सूखने लगा था और अनायास ही उसका हाथ लंड पर चला गया उधर वो शार्ट मे से ही अपने लंड को सहलाने लगा, सोनाली की नजर भी सतीश के लंड पर ही टीकी हुई थी और जब वो देखति है की सतीश उसे देख कर अपना लंड सेहला रहा है तो उसके गाल शर्म से लाल हो जाते है और वो होश मे आते हुये....

सोनाली- सतीश तुम यहाँ क्या कर रहे हो? जाओ बाहर जाओ मे अभी नहा कर आती हु...

सतीश भी होश मे आता है और दरवाजा बंद करके बाहर चला जाता है, पर उसे एक बात का सुकुन था की उसकी माँ उस पर गुस्सा नहि थी....

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सतीश बाहर बेड पर बैठ जाता है और अभी की घटना के बारे मे सोचने लगता है, उसकी आँखों के आगे बार बार उसकी माँ का नंगा भिगा हुआ जिस्म आ रहा था... तभी वाशरूम के गेट खुलने की आवाज से उसका ध्यान टुटता है और वो अपनी नजर उठा कर उस और देखता है उसकी माँ सिर्फ एक टॉवल लपेटे ही वाशरूम से बाहर आई थी जोकि उसके निप्पल से थोड़ी ऊपर ही बांधी हुई थी और निचे उसकी गांड तक ही थी वो उसकी पूरी नंगी जाँघे उसमे से दिखाइ दे रे रही थि, सोनाली सतीश को देखते हुए मिरर की तरफ चल देती है और फिर मिरर के सामने खड़े होकर अपने बाल सँभालने लगती है.... और सतीश को तो जैसे होश ही नहि था वो तो घूर घूर कर अपनी माँ को ही देखे जा रहा था... और सोनाली भी मिरर मे से उसे अपनी तरफ घुरता हुआ देख रही थी और उसे अपनी तरफ ऐसे घुरता देख कर उसके चेहरे पर एक विजयी मुस्कान आ जाती है... उसे बहुत अच्छा लगता है की उसका बेटा उसको ऐसे खा जाने वाली नजरो से देख रहा है....

सोनाली ने अपने बेटे के साथ सम्बन्ध बनाने की तरफ अपना पहला कदम बड़ा दिया था.... उसके बेटे की हरकतो ने और उसके लंड ने उसे इतना मजबूर कर दिया था की अब वो सारी शर्म हया भूल कर अपने जिस्म को अपने बेटे के सामने एक्सपोसे कर रही थी.....

सोनाली कंघी करते हुए बस सतीश को ही देखे जा रही थी... और सतीश उसके तो होश ही उड़ गए थे उसने बिलकुल भी अपनी माँ से ये एक्सपेक्ट नहि किया था की वो ये जानने के बावजूद की उसका बेटा उसका रूम मे इस तरह से बाहर आ जाएगी...

सोनाली अपने चेहरे पर स्माइल लाते हुये- ऐसे घूर घूर कर क्या देख रहा है सतीश..?

सतीश सोनाली के इस अनएक्सपेक्टेड क्वेश्चन से हडबडा जाता है, पर अपने को सँभालते हुए वो बेड से उठ कर उसके तरफ बढ़ता है और उसे पीछे से हग कर लेता है और उसके कान के पास अपना मुह ले जाकर उसके कान सरगोशी करते हुये....

सतीश- मे इस स्वर्ग से आई अप्सरा को देख रहा हु....

सोनाली अपने चूतडों पर सतीश के खड़े लंड को महसूश कर रही थि, पर वो उसे हटाने की कोई कोशिश नहि करति...

सोनाली एक सेक्सी सी स्माइल देते हुये- अच्छा तो तुझे मे अप्सरा दिखाइ देती हु...

सतीश- सच कह रहा हूँ माँ आज तुम इतनी सेक्सी लग रही हो की तुम पर से नजरे ही नहि हट रहि.....

सोनाली मुस्कुराते हुये- धत तुझे शर्म नहि आती अपनी माँ को सेक्सी कहते हुये...

सतीश- तो इसमें गलत ही क्या है आज तो आप इतनी सेक्सी लग रही हो की आप के सामने सभी बॉलीवुड एक्ट्रेस पानी भरती नजर आयेंगी....

सोनाली अपनी तारीफ सुनकर फूले नहि समां रही थी...

सतीश भी अपनी माँ को फ्रैंक होता देख कर अपने लंड को उनकी चूतडो पर और दबा देता है....

सतीश की इस हरकत से सोनाली के मुह से आह निकल जाती है और उसकी आँखे मजे मे बंद हो जाती है...

सतीश- क्या हुआ माँ??

सोनाली- वो मुझे पीछे कुछ चुभ रहा है...

सतीश- कहा चुभ रहा है माँ और क्या चुभ रहा है....

सोनाली- वोह मेरे पिछे..

सतीश- हा आपके पीछे कहा??

सोनाली हिम्मत करके - वो पीछे हिप्स मे कुछ चुभ रहा है...

सतीश अपने लंड को उसकी गांड पर रगडते हुये

सतीश- क्या चुभ रहा है मोम...

सोनाली- ओ...

सतीश- हा क्या बोलो माँ??

ओर सतीश अपने मुह मे सोनाली के कान को भरकर चुसते हुये...

सोनाली पर मधहोशी छाने लगती है और उसकी चुत गिली होने लगती है...

सोनाली- वो मेरे हिप्स पे...

सतीश- क्या आपके हिप्स पर...

सोनाली- वो तेरा पेनिस मेरे हिप्स पर चुभ रहा है...

सतीश- ओह्ह तो ऐसा बोलो ना, आपने भी जरा सी बात बोलने मे इतना टाइम लगा दिया....

ओर सतीश सोनाली से अलग हो जाता है सोनाली पलट कर उसके शार्ट की तरफ देखति है जिसमे टेंट बना हुआ था...

सोनाली अपने मुह पर हाथ रखते हुए ऐसे रियेक्ट करती है जैसे पहली बार उसका लंड देख रही हो- हाय... ए... ये क्या है?

सतीश- क्या है मतलब? पेनिस है....

सोनाली- पर ये इतना बड़ा कैसे?

सतीश- आपको देख कर ही ये इतना बड़ा हो गया है मोम...

सोनाली बनावटी गुस्सा दिखाते हुये- तुम्हे शर्म नहि आती ये कहते हुए की तुम्हारा पेनिस मुझे देख कर यानि की अपनी माँ को देख कर ही तुम्हारा पेनिस खड़ा है...

सतीश सोनाली की तरफ बढ़ता है और उसकी कमर को पकड़ कर उसे अपनी तरफ खिंच कर उसे अपने से सटाते हुये...

सतीश-अगर आपको इस तरह कोई बुढ्ढा भी देख ले न तो उसका भी खड़ा हो जायेगा मे तो फिर भी जवान हु.... और वैसे भी इसे क्या पता की सामने जो अप्सरा खड़ी है वो मेरी माँ है या कोई और.... ये तो जब भी कोई सेक्सी माल देखता है तब खड़ा हो जाता है पर आज जब आपको देखा है तब पता चला की असली माल तो मेरे ही घर मे था और मे बाहर ढूंढ रहा था....

सोनाली जोकि उसके आँखों मे झाँक कर देख रही थी- अच्छा तो मे तुझे माल नजर आती हु...

सतीश अपने हाथ सोनाली के चूतडो पर रख कर उसकी चुत को अपने लंड पर दबाता है और अपने होठो को उसके होंठो के पास ले जाता है...

सतीश- आप कोई ऐसा वैसा माल नहि हो बल्कि एकदम काँचा माल हो, जिसे देख कर उसका अपना बेटा ही उसका दीवाना हो गया है और वो भी अबसे नहि बल्कि तबसे जबसे मैंने आपको मस्टरबैट करते देखा है....

सोनाली सतीश की बात सुनकर चौक जाती है और उसकी आँखे आस्चर्य से बड़ी हो जाती है वो सतीश की आँखों मे देखते हुये- तुमने मुझे मस्टरबैट करते देखा पर क़ब्....

सतीश उसे सारी बात बता देता है की कैसे उसने पहले दिन अपनी माँ को मैस्टरबेट करते देखा और फिर बसंती के साथ भी उसे देखा....

पर सतीश उसे ये नहि बताया की वो दो रात को उसके जिस्म के साथ खेल चुका है बल्कि कल रात तो उसने अपना पेनिस उसकी चुत मे भी दाल दिया था...

सोनाली उसकी बात सुनकर शर्म से अपनी नजरे झुका लेती है और एक सेक्सी सी स्माइल के साथ- तू बहुत शैतान हो गया है तुझे शर्म नहि आई अपनी मम्मी को मस्टरबैट करते देख कर...

सतीश सोनाली की चिन पकड़ कर उसके चेहरे को ऊपर उठता है सोनाली शर्म से अपनी आँखे बंद करे हुए थी....

सतीश उसको ऐसे देख कर अपने पर कण्ट्रोल नहि कर पाता और अपने प्यासे होंठ उसके तपते होंठो पर रख देता है और उसे किस करने लगता है....

सतीश के किस करने से सोनाली चौक कर अपनी आँखे खोलती है और उसकी आँखे खुल कर बड़ी हो गई थी... उसे यकीन ही नहि हो रहा था की उसका बेटा उसे किस कर रहा है पर वो इस बात को अपने दिमाग से निकालकर किस मे खो जाती है और वो भी सतीश के किस का रिस्पांस देणे लगी थी....

 
सतीश जब ये देखता है तो अपनी जीभ को सोनाली के मुह मे दाल देता है सोनाली को सतीश के मुह से हलकी बद्बू सी आ रही थी पर सोनाली भी अपने होठ खोल कर उसकी जीभ का स्वागत करती है और उसे अपने मुह मे लेकर चुस्ने लगती है.... सतीश अपने हाथ उसके चूतडो पर लेजाता है और उन्हें मसलने लगता है....

सोनाली ने नहि सोचा था की वो इतनी जल्दी हथियार दाल देगी अपने बेटे के सामने पर वो अपने बेटे की हरक़तों के आगे मजबूर हो जाती है, उसके बेटे ने तो जैसे उसपर कोई जादु कर दिया था, गुलाम बन गई थी वो तो अपने ही बेटे की...

सोनाली अब अपनी जीभ सतीश के मुह मे दाल देती है और सतीश उसे ऐसे चुस्ने लगता है जैसे की उसपर अमृत लगा हो... और वो उसे पूरा निचोड लेना चाहता था... साथ ही साथ वो अपने माँ के चूतडों को मसल रहा था.... अब वो अपना एक हाथ सोनाली की चुत पर रख कर उसे अपनी मुट्ठि मे भर लेता है.... सोनाली के मुह से एक सिसकि निकलती है और सतीश के मुह मे ही दम तोड़ देती है...

सतीश अब अपने हाथ से सोनाली की चुत रगड़ने लगा था और उसके हाथ सोनाली की चुत के पानी से भिग गए थे... सोनाली भी अब अपना कण्ट्रोल खोती जा रही थी वो सतीश को रोकना तो चाह रही थी पर अब वो सतीश की हरक़तों मे इतनी खो गई थी की अब वो सब कुछ भूल कर बस इस पल के मजे ले रही थी... सतीश अब अपने एक हाथ जोकि उसकी माँ की गांड पर था को ऊपर उसके स्तनो पर रख देता है और फिर वो अपनी माँ के जिस्म से उसकी टॉवल को अलग कर देता है... टॉवल खुल कर उन दोनों के पैरों मे गिर जाती है... सतीश अब अपनी माँ की नंगी चूचियों को अपने हाथ मे लेकर मसलने लगता है... और उसका दूसरा हाथ सोनाली की चुत से खेल रहा था...

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५ मिनट तक किस करने के बाद दोनों अलग होते है और अपनी साँसे कण्ट्रोल करने लगते है... सतीश अब सोनाली को अपनी गोद मे उठा लेता है और उसे बेड पर लीटा देता है, सोनाली जोकि अपनी आँखे बंद करे हुए गहरी साँसे ले रही थी बेड पर लेटते ही अपनी आँखे खोल कर सतीश की आँखों मे देखति है... सोनाली की आँखे सुर्ख लाल हो गई थी... सोनाली सतीश के गले मे अपनी बाँहें दाल कर उसे अपने ऊपर खिंच लेती है और उसके होंठो को अपने होठो मे भर कर चुस्ने लगती है और उसकी चुचिया सतीश के सीने मे गड रहे थी, सोनाली के निप्पल तन कर सतीश के सीने मे छेद करने को आतुर थे... थोड़ी देर तक किस करने के बाद सतीश किस तोड़ कर उसके गले पर किस करते हुए निचे उसके चूचियों तक आ जाता है और सोनाली की चूचियों को अपने हाथ मे भर लेता है.... सोनाली के बड़े सुडोल गोल स्तन ठीक से उसके हाथ मे नहि आ रहे थे पर सतीश जितना अपने हाथ मे ले सकता था लेकर स्तनो को मसलने लगता है...

सोनाली- आआह्ह्ह्ह थोड़ा जोर से बेटा.... मसल दे इन्हें, बहोत परेशान कर.रखा था इन्होंने....उफफफ्

सतीश अब जोर से उसके स्तन मसलने लगता है....

सोनाली- हम्म्म ऐसे ही आअह्ह्ह्हह... चुस ले बेटा पिले अपनी माँ का सारा दूध....

सतीश सोनाली की राईट स्तन को अपने मुह मे भर कर चुस्ने लगता है....

सोनाली भी धीरे धीरे सिसकियाँ लेते हुए अपना सर इधर उधर पटक रही थी.... अब वो अपना हाथ सतीश के सर पर रख कर उसे अपने स्तन पर दबाने लगती है.... सतीश भी जितना अपने मुह मे ले सकता था लेकर चुस्ने लगता है....

सोनाली- हम्म्म्म ऐसे ही चुस ले, खाजा इसे.... आह्ह्ह्ह बहोत समय से तड़प रही थी बेटा....

सतीश उसके राईट स्तन को छोड़ कर उसके लेफ्ट स्तन को मुह मे ले लेता है और राईट स्तन को अपने हाथ मे ले लेता है, राईट चूचि सतीश के थूक से गिली हो गई थी और सतीश अपने थूक को पूरी चूचि पर मसलने लगता है....

तभि दोनों एकदूसरे मे ही खोये हुए थे की तभी डोर पर नॉक होती है... गेट बजने से सोनाली होश मे आती है और सतीश को अपने ऊपर से धक्का देकर अपनी अल्मारी से मैक्सी निकाल कर पहन लेती है.... इस समय सतीश को शिप्रा पर बहोत गुस्सा आ रहा था अच्छा ख़ासा आज उसे अपनी माँ को चोदने का मौका मिला था पर उसने सब पर पाणी फेर दिया था.... सतीश बेड पर लेट कर अपने ऊपर चादर दाल कर सोने की एक्टिंग करने लगता है.... सोनाली डोर खोलती है...

शिप्रा- गुड़ मॉर्निंग मोम..

सोनाली झूटी स्माइल लाते हुये- गुड़ मॉर्निंग बेटा...

शिप्रा- हाउ आर यु फीलिंग नाउ माँ?

सोनाली- फिलिंग बेटर नाउ बेटा... आज तू इतनी जल्दी कैसे उठ गयी...

शिप्रा- वो मैंने सोचा की आपके लिए नाश्ता मे ही तैयार कर दु.... और मे चाय बनने को रख कर आपको उठाने आ गयी... पर आप तो नहा कर तैयार भी हो गयी..

सोनाली- तू तैयार होले, नाश्ता मे बना लेती हु...

शिप्रा- नहि माँ मे कर लुंगी आप आराम करलो...

सोनाली- मे ठीक हूँ अब और तू जाकर तैयार होजा, नाश्ता मे तैयार करती हु...

शिप्रा- ओके... आप कहती हो तो मे जाती हु...

शिप्रा चलि जाती है और सोनाली अपने बेटे के साथ हुए काण्ड के बारे मे सोचते हुए किचन की तरफ बढ़ जाती है.... सतीश उठ कर मुतने चला जाता है और फिर सोनाली के रूम से निकल कर किचन की तरफ बढ़ देता है क्युकी उसे पता था की उसकी माँ किचन मे ही है.... सोनाली किचन मे नाश्ते की तयारी कर रही थी.... सतीश जाकर उसे पीछे से अपनी बाँहों मे भर लेता है....

सोनाली एकदम चौक जाती है और फिर अपने को सँभालते हुये- ये क्या कर रहा है तु...

सतीश उसके गर्दन पर अपने होठ रख कर किस करते हुये- प्यार कर रहा हूँ अपनी सेक्सी माँ से...

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सोनाली- बहोत शैतान हो गया है तु... शर्म नहि आती अपनी माँ को सेक्सी कहते हुये...

सतीश उसके उरोजों पर अपने हाथ रख कर उन्हें सहलाते हुये- अरे माँ इसमें शर्म कैसी, वैसे भी जिसकी आप जैस सेक्सी और हॉट माँ हो उसे शरम नहि करम करना चहिये...

सोनाली- आह्ह्ह्ह... शिप्रा आ जायेगी अभी मत कर बेटा....

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सतीश अपने लंड को उसकी गांड पर टीका कर गस्से मरते हुये- ओह्ह माँ अब कण्ट्रोल नहि होता, देख कैसे मेरा मुन्ना तुम्हारी मुनिया मे घूसने को बेताब हो रहा है....

सोनाली सीधी हो जाती है और अब सतीश का लंड उसकी मुनिया से रगड रहा था, सोनाली सतीश की आँखों मे देखते हुए उसके लंड को शार्ट के ऊपर से पकडते हुये- तो समझा अपने मुन्ने को की वो थोड़ा सबर करे और वैसे भी सबर का फल मीठा होता है....

सतीश अपने लंड पर अपनी माँ के हाथ रखने से एक सिसकि लेता है....

सतीश- आह्हः माँ सबर ही तो नहि होता अब, तुझे पता नहि कैसे ईसने इतने समय तक सबर किया है इस पल के लिए और अब तुझे पास पाकर इससे सबर नहि होता...

सोनाली- तो अब तक कैसे काम चलाया था तूने, अपनी गर्लफ्रेंड को चोद कर...

ओर इतना कह कर सोनाली उसके शार्ट मे अपना हाथ दाल कर उसकर लंड को पकड़ कर मुठियाने लगती है, सतीश पूरी मस्ती मे था अब...

सतीश- माँ मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहि है....

सोनाली- चल झूटा तूने क्या मुझे बेवक़ूफ़ समझ रखा है, इतना गबरू जवान है और स्मार्ट भी है और ऊपर से सबसे बड़ी ख़ासियत की इतना तगड़ा हथियार है तेरा... ऐसा हो ही नहि सकता की तेरी कोई गर्लफ्रेंड न हो...

सतीश सिसकते हुये- आहSSS ओहSS सच कह रहा हूँ माँ मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहि है...

सोनाली- पर क्यों तुझे पसंद नहि आई कोई क्या?

ये सब बाते करते हुए सोनाली अपना हाथ उसके शार्ट मे दाल कर उसके लंड को मुठिया रही थी....

सतीश- हा माँ कोई पसंद ही नहि आई...

सोनाली- कैसी लड़की चाहिए तुझी, तू मुझे बता मे ढूँढ़ती हूँ तेरे लिये...

सतीश- बिलकुल आपके जैसी गर्लफ्रेंड चाहिए मुझे बल्कि मे आपको ही पसंद करता हूँ माँ वो भी बहोत समय से शायद मेरा लंड भी तुझे देख कर ही खड़ा होना सिखा है...

सोनाली- धत्त पागल कहि का शर्म नहि आती तुझे ऐसी बात करते हुये...

सतीश- जो सच है मैंने आपको बता दिया अब आप जो चाहे सोचो..

सोनाली- तो अब तक इसको कैसे सम्भाले, ईसने तो बहोत तंग किया होगा तुझी...

सतीश- तंग तो बहोत किया माँ पर क्या करू कोई लड़की मिली ही नहि आप जैसी जिसकी चुत मे में अपना दाल कर इसे शांत कर सकू....

सोनाली को उसकी गन्दी लैंग्वेज से कोई आपत्ति नहि हो रही थी बल्कि वो अपने बेटे के मुह से चुत और लंड जैसे शब्द सुनकर गरम हो रही थी.... और अब और कसकर उसके लंड को मुठियाने लगी थी और ऊपर सतीश उसके स्तन अपने हाथो मे लेकर मसल रहा रहा था...

और दूसरा हाथ सोनाली की पेन्टी में डालकर उनकी चुत को रगड़ने लगा उनकी चुत में उंगली डालकर आगे पीछे करने लगा

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सोनाली- मेरी जैसी कोई लड़की मिल ही नहि सकती क्युकी मेरी जैसी केवल औरते होती है....

सतीश- पर मुझे तो कोई औरत भी नहि मिली आप जैसी वरना उसके ऊपर ही चढ़ जाता.... और वैसे भी मेरे मुन्ने को सबसे पहले तेरी ही मुनिया का रस चखना था...

सोनाली- तो कैसे शांत करता था अपने मुन्ने को जब ये परेशान करता था....

सतीश- वो मे आपके बारे मे सोच कर ही मुट्ठि मारकर शांत करता था इसे...

सोनाली- हाय मेरे होते हुए मेरे बेटे को अपने हाथ से काम चलाना पड़ रहा था, तू पहले आ जाता न इसे लेकर मैं मना थोड़े ही करती अपने बेटे को.... पर तू परेशान न हो अब कभी तुझे अपने हाथ का यूज़ नही करना पड़ेगा तू मेरे पास ले आना इसे जब भी ये परेशान करे....

सतीश- हु अब लेकर आया हूँ तब तो कोई ख़याल कर नहि रही हो इसका और कह रही हो की आपके पास ले आऊ जब ये परेशान करे, अब लाया तो हूँ आपके पास करो इसका इलाज...

ओर इतना कहकर सतीश कपड़ो के ऊपर से ही उसकी तनी हुई निप्पल्स को लेकर जोर से मसल देता है.... और सोनाली के मुह से चीख निकल जाती है...

सोनाली- एआइइइइइ... थोड़ा आराम से कर बेटा मे कही भागे नहि जा रही हु...

सतीश- माँ क्यों तडपा रही हो ईसे, इसका हाथ से करोगी तो एक घंटा लग जायेगा पर झडेगा नहि...

जबकी सच ये था की सोनाली के लंड मुठियाने से सतीश बहोत उत्तेजिय हो गया था और उसे ऐसा लग रहा था की वो किसी भी पल झड जायेगा.... सतीश बहोत मुस्किल से अपने आप को झड़ने से रोक रहा था...

सोनाली- पर बेटा अभी घर मे शिप्रा है... तू थोड़ा सा कण्ट्रोल करले...

सतीश- वहि तो नहि होता मोम.....

सोनाली- प्लीज् बेटा अभी तू बाहर जा, शिप्रा किसी भी वक़्त आती होगी....

सतीश- ठीक है पर मे खाली हाथ नहि जाऊंगा....

सोनाली- मतलब...

सतीश सोनाली के होंठ पर अपना अँगूठा फिराते हुये...

सतीश- मतलब की कम से कम इन गुलाब की पंखुडियों का रस तो पीला दो...

सोनाली उसकी बात सुनकर मुस्कुराती है और फिर उसके सर पर हाथ रख कर उसके बालों को पकड़ कर अपनी तरफ खिंचति है और उसके होंठो को अपने होंठो मे भरकर चुस्ने लगती है....

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दोनो काफी टाइम तक एक दूसरे के होंठ चुसते रह्ते हैं फिर उनको सीडियों से शिप्रा के उतरने की आवाज आती है और वो दोनों अलग हो जाते है, सतीश तुरंत ही फ्रिज मे से पाणी की बोतल निकालता है और अपने लंड को एडजस्ट करते हुए किचन से बाहर निकल जाता है और सोफ़े पर बैठ कर टीवी ऑन कर लेता है...

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शिप्रा- तू अभी तक तैयार नहि है, कॉलेज नहि जाना क्य...

सतीश- नहि मैं कॉलेज नहि जा रहा हूँ आज....

शिप्रा भी किचन मे जाकर माँ का हाथ बटाने लगती है और यहाँ मे अपने लंड को शांत करने मे लगा था...

तोड़ि देर मे में उठ कर अपने कमरे मे चल देता हूँ और फिर नाहा कर निचे आ जाता हु, इतनी देर में लंड भी शांत हो गया था...

निचे माँ और शिप्रा मेरा ही वेट कर रही थि, मे जाकर माँ की राईट साइड पर पड़ी कुरसी पर बैठ जाता हु, शिप्रा माँ के सामने बैठि थी और माँ मेरे लेफ्ट में....

मेरे जाते ही सब नाश्ता करने लगते है, मे नाश्ता करते हुए अपना लेफ्ट हैंड माँ की चुत पर कपडे के ऊपर से ही रख कर मसल देता हु... माँ एक दम से चिहुँक उठती है...

सोनाली : आअह्ह्ह्हह....

शिप्रा - क्या हुआ मोम...

मै भी अन्जान बनते हुये- क्या हुआ मोम...?

सोनाली : कुछ नहि वो चाय गरम थी और मैंने जल्दवाजी मे पिली जिससे जीभ जल गई...

सतीश- क्या माँ थोड़ा आराम से पियो ऐसी भी क्या जल्दबाजी है...

मों मेरी तरफ ग़ुस्से से आँखे तरेर कर देखति है... और मे उन्हें एक कमिनि स्माइल देता हु... माँ अपने लेफ्ट हैंड मेरे हैंड पर रख कर उसे अपनी चुत से हटाने की कोशिश करती है... पर मे हाथ नहि हटता और उनकी चुत पास रगडने लगता हु.... अब माँ भी कोशिश बंद करके मजा लेने लगती है...

सब लोग नाश्ता ख़त्म करते है माँ बर्तन उठा कर किचन मे रखने चल देती है और शिप्रा कॉलेज के लिए निकल जाती है...

माँ किचन से बैडरूम की तरफ चलि जाती है और मैं डोर लॉक करके उनके बैडरूम मे चला जाता हु, माँ की साड़ी बेड पर पड़ी थी जोकि उन्होंने पहननेके लिए निकाली थी और वो अपनी मैक्सी उतार रही थि, अब वो मेरे सामने केवल ब्रा और पेन्टी मे थी...

अब कपड़ो के नाम पर पीछे कमर पर उनकी ब्रा की स्ट्राप थी और निचे उनकी पेन्टी जोकि बहोत छोटी थी और उनके विशाल चूतडों को छुपाने मे असमर्थ थी... मे पीछे से जाकर उन्हें अपनी बाँहों मे भर लेता हूँ और अपने हाथ उनके बॉब्स पर लेजाकर उन्हें अपने हाथो मे भर कर मसलने लगता हूँ और निचे से उनके चूतडो पर अपना लंड टीका कर धीरे धीरे घस्से मारने लगता ह....

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मों एकदम हुए इस हमले से कसमसा जाती है पर शायद उन्हें इस हमले की उम्मीद थी इस्लिये बिना उसे अपने से डोर किये वो अपनी गांड को पीछे उसके लंड पर रगड़ने लगती है.....

सोनाली : आअह्ह्ह्ह क्या करता है सतीश, कपडे तो पेहन लेने दे......

मै उनकी गर्दन पर किस करते हुये- क्या माँ मे आपके कपडे उतारने की सोच रहा हूँ और आप कपडे पेहनने की बात कर रही हो....

ओर मे उनके दूध को और तेजी से अपने हाथो से मसल देता हु....

सोनाली- आआह्ह्ह्...तु बहोत शैतान हो गया है सतीश... आह ओह थोड़ा आराम से बेटा दर्द होता है....

मै- क्यों माँ आपको अच्छा नहि लग रहा क्या... अगर अच्छा नहि लग रहा तो मे रहने देता हु.....

ओर सतीश अपने हाथ उसके स्तनो से हटाने लगता है तभी सोनाली उसके हाथ अपने हाथो से पकड़ कर अपने स्तनो पर रख देती है और अपने हाथो से उसके हाथ को अपने स्तन को मसलवाने लगती है....

सोनाली- मारूंगी तुझे अब अगर तूने हाथ हटाया तो.... एक तो आग भडकाता है और फिर उसे बिना बुजाये ही जाने की बात कर रहा है.... आअह्ह्ह्ह जोर से दबा बेटा जितनी जोर से चाहे दबा उफ्फ्फफ्फ्फ्.... बहोत परेशान कर रखा इन निगोडीयों ने मुझे.... आज मसल मसल कर इनकी सारी अकड निकाल दे....

पहले मे उनकी पीछे से गर्दन को चुमते हुए उनकी पर किस करते हुए निचे बड़ना लगता हु.... और फिर उनकी गांड पर पहुच कर पेन्टी के ऊपर से ही उनके चूतडो पर किस करता हु.... और फिर उन्हें अपने हाथो मे भरकर मसलने लगता हु....

थोड़ि देर तक मसलने के बाद मे उनकी पेन्टी मे अपनी ऊँगली दाल कर उसे निचे खिंच देता हूँ माँ पैर उठा कर पेन्टी निकलवाने मे मेरी मदद करती है...

मै उनकी पेन्टी को उनके शरीर से अलग कर देता हूँ और फिर मे उनकी पेन्टी को.देखता हूँ वो चुत वाली जगह से काफी गीली थी... मे समझ जाता हूँ की माँ की चुत पानी बहा रही है और फिर मे उनकी पेन्टी को अपनी नाक के पास ले जाकर सूंघता हु... एक मादक सी मदहोश कर देणे वाली खुश्बु मेरे दिमाग मे चढ़ जाती है.... माँ अपना सर पीछे किये मुझे ये सब करते देख रही थी और उनके चेहरे पर एक सेक्सी सी स्माइल थी....

मै- आह्ह माँ क्या खुश्बु है तेरे रस की....

ओर फिर मे अपनी जीभ निकाल कर पेन्टी पर से उनका सारा रस चाटने लगता है... माँ क्या स्वाद है तेरे इस रस मे आह्ह्ह्ह...

मों मेरे हाथ से पेन्टी छिन कर एक तरफ फेक देती है और अपनी गांड मटकाते हुए बेड की तरफ बढ़ जाती है... मे तो बस उनके थिरकते हुए चूतडो को ही देखते रह जाता हु....

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माँ बेड पर जाकर बैठ जाती है और फिर अपने पेर फ़ैलाते हुये- अगर तुझे इतना ही पसंद आया अपनी माँ का रस तो ले खोल दी तेरी माँ ने अपनी टाँगे आजा और पिजा अपनी माँ का सारा रस, सूँघ ले, चाट ले, खा जा ईसे... जो तेरा दिल करे वो कर अपनी माँ के साथ्.... आज से मे तेरी रंडी माँ बन गई हु.... तू जो कहेगा जैसे कहेगा मे करुँगी पर तू इसकी प्यास बुजा दे... बहोत आग लगी है बेटा इसमे.... आजा बुजा दे इसकी प्यास और बना ले अपनी माँ को अपनी रंडी.....

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