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Incest कैसे कैसे परिवार

नया दिन नया प्रारम्भ:

सुबह ६ बजे सब जाग चुके थे. गौतम ने शालिनी को एक बार बहुत प्यार से चोदा और फिर कपड़े पहनकर अपने कमरे में चल दिया. उसे ये रात जीवन पर्यन्त याद रहने वाली थी. उधर अदिति ने भी अनन्या की चूत को चूसकर एक बार स्खलित किया और फिर अजीत ने उसे पूरे प्यार के साथ एक बार फिर चोदा। फिर अनन्या अपने कपडे पहनकर अपने कमरे की ओर चल दी. दोनों भाई बहन अपने कमरे में पहुँचने के पहले एक दूसरे से भिड़ गए. और दोनों को ये समझने में देर नहीं लगी कि वे अपने कमरे में क्यों नहीं थे.

गौतम: "अनन्या, तुम्हें मेरी बधाई."

अनन्या की ऑंखें फ़ैल गयीं.

अनन्या: "दादा आप?"

गौतम: "मैं दादी के साथ था. अब घर में सब कुछ बदल गया है. चलो तैयार होकर मिलते हैं."

अनन्या ने सिर हिलाया और दोनों अपने अपने कमरे में चले गए.

जब सब लौट कर बैठक में आये तो घर में एक अलग ही वातावरण का अनुभव किया. अनन्या अजीत की ओर ऑंखें चुराकर देख रही थी. और गौतम शालिनी को ताक रहा था. अजीत और अदिति ने इस बदले हुए समीकरण को समझ लिया और सब कुछ वापिस पहले जैसा करने का प्रयत्न करने लगे. शालिनी ने इसे समझ लिया. घर में अब कोई असहजता नहीं होनी चाहिए थी.

शालिनी: “अदिति, राधा कहाँ है.”

अदिति: “अपना काम करने के बाद अपने कमरे में गई है. अब बारह बजे ही लौटेगी. कुछ काम है क्या?”

शालिनी ने कोई उत्तर नहीं दिया, उसके मन में एक विचार आया था और वो उठी और किचन और घर के दरवाजे अंदर से लॉक कर दिए.

शालिनी: “नहीं, कोई काम नहीं है, पर हम सब जो बातें अब करने वाले हैं उसका सुनना उचित नहीं होगा.”

ये कहते हुए वो गौतम की बगल में बैठ गयी.

शालिनी: “हम सबने कल एक नए जीवन का आरम्भ किया है. सच ये भी है कि आज जो हमारे बीच में कुछ असहजता है, मानो सब एक दूसरे से डरे हुए हैं. पर मेरे विचार में ये सही नहीं है.”

सब चौंक गए.

शालिनी: “हमने पारिवारिक प्रेम को बढ़ावा ही दिया है. जीवन में उन्माद और रोमांच होना चाहिए. अब मेरे विचार से गौतम और अनन्या ही एक दूसरे से अंतरंग नहीं हुए हैं. पर इसमें अधिक समय नहीं लगेगा. जब हम एक दूसरे से इतने अच्छे से परिचित हो चुके हैं तो शर्म किस बात की है? वर्षों पहले जब मैंने अजीत को अपने बिस्तर में बुलाया था, न मुझे तब इस बात की कोई ग्लानि हुई थी और न ही मुझे कल अपने प्यारे पोते गौतम से चुदवाने के बाद हुई है.” ये कहकर शालिनी ने गौतम के होठों पर अपने होंठ रखे और उसे एक प्रगाढ़ चुम्बन दिया.

“जब हम सब एक दूसरे से हर प्रकार से प्रेम कर सकते हैं, तो अपने आप को क्यों रोकना. मैं शेष जीवन इस प्यार और सहवास के बिना नहीं बिताना चाहती.” शालिनी ने अजीत को पास बुलाया और उसे भी एक चुम्बन दिया. “क्या तुम सबको मेरे इस व्यहवार में किसी भी प्रकार से प्रेम के सिवाय कुछ और दिखा?”

सबने न में सिर हिलाया.

“और इसीलिए, अब मैं चाहूंगी कि हम जब भी चाहें, जहां भी चाहें और जिसके साथ भी चाहें, चुदाई कर सकें. राधा इसमें बाधक बन सकती है और हमें इसका उपाय ढूँढना ही होगा. पर उसे जब तक कोई समाधान नहीं मिलता किसी भी प्रकार से कोई शक नहीं होना चाहिए. ठीक है?”

सबने इस बार हाँ में सर हिलाया.

“तो घर की सबसे बड़ी होने के नाते मैं इस उन्मुक्त जीवन शैली का शुभारम्भ करती हूँ.” ये कहते हुए शालिनी खड़ी हुई और अपने कपड़े उतारने लगी. पल भर में ही वो सबके सामने नंगी खड़ी थी. और उसके चेहरे पर किसी प्रकार की शर्म नहीं थी. बल्कि आँखों में एक नयी चमक थी.

“दादी, आप कितनी सुन्दर हो!” अनन्या के मुंह से निकल पड़ा.

“क्यों न हो, दादी जो है मेरी.” अब तक गौतम सम्भल चुका था और उसने शालिनी के नितम्ब पकड़कर उन्हें दबाते हुए अधिकार भरे शब्दों में कहा.

अजीत भी कहाँ पीछे रह सकता था. “ये मत भूलो कि ये मेरी माँ है.” शालिनी के पीछे से उसके स्तन दबाते हुए उसने भी अपना अधिकार जमाया.

“उँह” शालिनी ने अपने स्तन दबते हुए एक दबी हुई आह भरी.

अजीत: “और ये मत भूलो कि इस चूत और गांड में गौतम से पहले मेरा लंड गया था.”

गौतम: “पर डैड, मैंने अभी तक दादी की गांड नहीं मारी है. इसीलिए इस में आप इकलौते ही हैं.”

अजीत: “क्यों माँ, अपने पोते को आधा ही सुख दिया क्या?”

शालिनी: “मेरी बूढी हड्डियां चटका दीं इसने रात में. मेरी तो हिम्मत ही नहीं हुई आगे कुछ करने की. पर आज की रात गांड भी मरवा लूंगी अपने पोते से.”

अनन्या: “दादी वो सब ठीक है. पर मैं पापा और आपकी चुदाई देखना चाहती हूँ. क्योंकि इस पूरे नए समीकरण का आरम्भ वहीँ से हुआ था.”

गौतम ने भी अनन्या के स्वर में स्वर जोड़ा.

अदिति: “अब लगता है कि आप दोनों को बच्चों की बात माननी ही पड़ेगी.”

अदिति: “अनन्या, बिटिया इधर आ और अपने पापा के लंड को थोड़ा अच्छे से कसकर खड़ा कर. फिर हम उधर बैठकर इस खेल को देखेंगे.”

अनन्या को इससे अधिक निमंत्रण की आवश्यकता नहीं थी. वो तपाक से उठी और अजीत के सामने खड़ी हो गयी. फिर उसने अजीत की पैंट खोली और उसे नीचे सरका दिया.

अजीत: “रुक थोड़ा.”

ये कहकर अजीत ने पूरी पैंट निकाली और फिर अपनी टी-शर्ट और अंडरवियर भी उतार फेंका. अब वो भी अपनी माँ के समान नंगा खड़ा था.

अनन्या घुटनो के बल बैठी और लंड मुंह में लेने ही लगी थी कि अदिति बोल उठी, “कपड़े पहनकर चूसेगी? इन्हें निकाल ही दे तो अच्छा है. तेरे भाई को भी तो तेरी सुंदरता का दर्शन करने दे.”

अनन्या ने गौतम की ओर देखा और कुछ शर्माई फिर उसे अपनी माँ की कल रात की बात याद आ गयी और उसने तुरंत अपनी शर्म छोड़ी और गौतम की आँखों में देखते हुए कपड़े निकालने लगी. गौतम उसके शनैः शनैः अनावृत होते संगमरमरी शरीर को ललचाई आँखों से देख रहा था.

अदिति: “हम्म्म, ये ठीक है. पर तू क्यों बैठा टुकुर टुकुर देख रहा है. तेरी दादी की चूत तेरे सामने है. अपने पापा के लिए उसे भी अच्छे से तैयार कर दे. पर मेरे विचार से हमें शयनकक्ष में चलना चाहिए.”

गौतम ने अनन्या के ऊपर से हटाकर शालिनी की ओर देखा. “चलो, मेरी नयी गर्लफ्रेंड।”

ये कहते हुए गौतम ने शालिनी को थामा और अदिति के कमरे को ओर बढ़ चला. पीछे पीछे अनन्या और अजीत भी आ गए. अदिति ने बैठक से बिखरे पड़े कपड़े समेटे और वो भी कमरे में आ गयी और कमरा लॉक कर दिया. अनन्या ने समय व्यर्थ नहीं किया था, पर अब वो बिस्तर पर बैठी हुई अजीत के लंड को चूस रही थी. गौतम को कुछ समय लगा क्योंकि उसने भी अपने कपड़े उतारे थे. और अदिति की ऑंखें उसके लंड पर पड़ीं और उसे अपने बेटे पर गर्व हो उठा. शालिनी तो पहले से ही उत्तेजित थी, सो वो बिस्तर पर टाँगे फैलाये लेटी थी और अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी. गौतम ने उसकी उँगलियों को हटाया और अपने मुंह को उसकी चूत पर मलने लगा.

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ये सब इस बात से अनिभिज्ञ थे की राधा अभी तक घर में ही थी. वो किसी काम से ऊपर छत पर गयी थी, परन्तु सब ये माने हुए थे कि वो अपने घर गयी है. राधा जब नीचे उतरी तो वो सीढ़ी पर ही रुक गयी थी, और उनकी बातें सुन रही थी. उसकी शंका सही सिद्ध हुई. बाप बेटे शालिनी को चोद रहे थे. हालाँकि गौरव ने कल रात ही पहली बार चोदा था शालिनी को. जब अजीत के लंड को चूसने के लिए अदिति ने कहा तो राधा अपने आप को रोक नहीं पायी और छुपकर झाँका. अजीत के लंड को देखकर उसका मन मचल गया. उसके पति के लंड से दुगना रहा होगा अजीत. उसकी चूत पनिया गयी.

जैसे ही सब कमरे में गए और दरवाजे को लॉक किये, राधा दबे पांव अपने घर की ओर चली गयी. वो ये भूल गयी कि शालिनी ने दरवाजा अंदर से बंद किया था राधा को अंदर न आने देने के लिए. उसने तो इसे सामान्य दिनों के समान ही समझा और क्योंकि कई बार दरवाजा खुला भी रहता था तो इस पर ध्यान नहीं दिया. अपने कमरे में जाकर वो बिस्तर पर लेट गयी और जो घर में चल रहा था उसकी कल्पना में लीन हो गयी. जब उससे सहन नहीं हुआ तो उसने अपने कपड़े उतारे और किचन से एक बैंगन लेकर अपनी चूत में डालकर उसे शांत करने लगी. उसकी आँखों के सामने अजीत का मोटा लम्बा लंड घूम रहा था. वो किसी प्रकार उससे चुदवाने की कल्पना करने लगी. पर उसके पति को इसका आभास नहीं होना चाहिए था.

क्रमशः

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दूसरा घर: सुनीति और आशीष राणा

अध्याय २.२

जीवन का गाँव

कोई एक महीने पहले:

जीवन राणा इस आयु में भी वही रोब रखते थे जो ४० साल पहले था. इनके लम्बे और बलिष्ठ शरीर को जैसे उम्र ने छुआ तक नहीं था. उनकी पत्नी की मृत्यु को अब कोई दस वर्ष हो चुके थे. आज भी उसकी याद में उनकी ऑंखें भर आती थीं. परन्तु जीवन का यही नियम है कि किसी के जाने के बाद भी ये नहीं रुकता. आज भी वो अपने गांव और खेतों से उतना ही प्यार करते थे जितना पहले. साल में दो बार १० दिनों के लिए वो हरियाणा के अपने गाँव अवश्य जाते थे. अपने पुराने मित्रों के साथ मिलने बैठने का आनंद ही कुछ और था. उस गाँव से जुडी उनकी यादें ताजा करके उनके मन को एक शांति मिलती थी.

इस बार भी उन्हें आए हुए दो दिन हो चुके थे. अपने मित्र और सम्बन्धी बलवंत के घर पर उनके चार मित्रगण जमा थे. वो जब भी आते थे तो पास के शहर से एक मंहगी शराब की दो पेटियाँ साथ लाते थे. उनके मित्र भी इस समय की बहुत उत्सुकता से प्रतीक्षा करते थे. सब मित्र अहाते में बैठे बातें कर रहे थे. बलवंत की पत्नी गीता उन्हें खाने का सामान परोस रही थी. अंदर अन्य मित्रों की पत्नियाँ बनाने में जुटी थीं. सब एक दूसरे के परिवारों से बहुत खुले हुए थे, बचपन के साथी जो थे. उन सबकी पत्नियां भी एक दूसरे की अंतरंग सहेलियाँ थीं. जीवन की पत्नी की मृत्यु का शोक सबको समान रूप से ही लगा था.

“भाई साहब, आपका समय कैसे काट पाता है हम सब के बिना. सच कहें तो आपकी बहुत याद आती है.” गीता ने जीवन की प्लेट में चिकन के पकवान परोसते हुए पूछा.

“सच भाभी, मन नहीं लगता. तभी तो चला आता हूँ. अब सोचता हूँ कि छह महीने में नहीं हर तीन महीने में आ जाया करूँ। और आप दोनों भी आया करो तो मन लगा रहेगा.”

“मैनें तो इन्हे कई बार कहा कि चलते हैं, सुनीति की हमें भी बहुत याद आती है.”

कुछ देर बाद सभी मित्र अपने घर चले गए. बलवंत और जीवन वहीँ बैठे रहे. फिर गीता भी आ गई.

बलवंत: “तुम लोगी?”

गीता के हाँ कहने पर बलवंत ने उसके लिए भी एक पेग बनाया और उसमे थोड़ा कोका कोला मिला दिया किससे अगर कोई देखे तो पता न लगे कि गीता क्या पी रही है.

गीता: “आप सुनीति को क्यों नहीं लेकर आते?”

जीवन: “उसने काम बहुत फैला लिया है. अब आना कठिन है. उसने ये कहा है कि मैं आप दोनों को साथ ले कर लौटूँ। मैं भी यही चाहता हूँ.”

बलवंत: “खेती कौन संभालेगा?”

जीवन: “मेरा जो मैनेजर मेरे खेत देखता है, वहीँ देखेगा. उसे हम इसके लिए दोगुने पैसे देंगे. और मैं नहीं समझता की वो मन करेगा. फिर एक महीने बाद जैसा समझो वैसा ही करना.”

बलवंत: “इस बारे में विचार किया जा सकता है. क्यों गीता.?”

गीता: “आप जो कहेंगे मुझे सब स्वीकार है.”

बलवंत: “इस बार तुम सलोनी को भी लेकर आये हो?”

जीवन: “हाँ, तुम तो जानते हो कि मेरा एक दिन भी चुदाई के बिना रहना कितना मुश्किल है. अब पिछली बार भाभी की तबियत ठीक नहीं थी, तो सोचा कि इस बार अपने प्रबंध के साथ आऊं.”

गीता: “पूछ तो लेते एक बार, अब मैं पूरी ठीक हूँ.”

जीवन: “ठीक है, तो बलवंत का स्वाद बदल जायेगा.”

गीता: “इनकी इतनी चिंता न करें भाई साहब. इनके स्वाद बदलने वाली तीन तो अभी ही अपने घरों को गई है.”

बलवंत हँसते हुए: “बोल तो ऐसे रही है जैसे मुझे ही सब मजे मिलते है. तू भी उन तीनों के पतियों के साथ मजा लेती है.”

जीवन ठहाका लगते हुए: “एक दूसरे की पोल न खोलो, चलो अंदर चलें यहाँ किसी ने सुन लिया तो बेकार बदनामी होगी.”

गीता ने सलोनी को बुलाया और दोनों सारा सामान अंदर ले गयीं. बलवंत और जीवन बैठक में सोफे हुए थे. गीता जाकर साथ बैठ गई. जीवन ने सलोनी को भी बुलाकर साथ बैठा लिया. बलवंत और गीता सलोनी का स्थान जानते थे और उन्हें इसमें कोई भी आपत्ति नहीं थी. कल तो सलोनी अपने घर अपने माता पिता से मिलने रुकी थी. उनको उसने ५० हजार रूपये दिए जो कि सुनीति ने उसे दिए थे. वो मना करते रहे, पर सलोनी कहाँ मानने वाली थी.

बातों में फिर एक बार सेक्स पर चर्चा होने लगी.

जीवन: “भाभी, वैसे गांव के जीवन का आनंद अलग है. शहर में भीड़ भाड़ और दौड़ भाग के बीच समय यूँ भी बीत जाता है. आशीष ने बहुत परिश्रम किया है. आज जब सब कुछ अच्छे से संभल गया है, तो उसने अपन समय घर और परिवार में अधिक बिताने का निश्चय किया है. अब तीनों बच्चे ही लगभग सँभालते हैं. ये बात अलग है कि उसकी अनुमति बिना लिए वो कोई बड़ा निर्णय नहीं लेते.”

गीता: “हाँ भाई साहब. हम लोग तो यहीं खुश हैं. हम पांचों का जो समूह था उसमे से भाभी के जाने के बाद अब वो रस नहीं रह गया.”

जीवन: “हाँ, रसीली तो बहुत थी वो. न जाने क्यों इतनी जल्दी चली गई. और भाभी, रस तुममें भी बहुत है.”

गीता: “अरे कहाँ, अब इन बूढी हड्डियों में वो बात नहीं रह गई.”

जीवन: “अरे भाभी, जब हम अभी बूढ़े नहीं हुए तो तुम कैसे हो गयीं?” ये कहकर जीवन उठा और गीता के बगल में जाकर बैठ गया.

उसके मम्मे दबाते हुए कहा, “बलवंत तो कहता है कि तेरी जैसी कोई हो ही नहीं सकती. और बाकी तीन भी यही सोचते है.”

गीता उससे लिपट गई, “क्यों चले गए यहाँ से, हम सब इतने खुश थे.”

जीवन: “निर्मला के जाने के बाद कुछ अच्छा ही नहीं लगता था. हर दृश्य में वही दिखती थी. आशीष और सुनीति इसीलिए ही मुझे अपने साथ ले गए क्योंकि मुझे वो कमी खाये जा रही थी.”

बलवंत के संकेत पर सलोनी उठकर उसकी गोद में जा बैठी. और अपनी बाहें बलवंत के गले में डाल दीं। बलवंत ने उसके होंठ चूमते हुए उसके शरीर पर अपने हाथों से सहलाते हुए उसके ब्लाउज के बटन खोल दिए. कुछ ही क्षणों में सलोनी ऊपर ने नंगी हो चुकी थी. फिर वो उठी और बिना हिचक के अपनी साड़ी और पेटीकोट उतारकर नंगी हो गई. फिर दोबारा बलवंत की गोद में जा बैठी.

जीवन गीता के मम्मे दबाते हुए बोला: “उधर देखो भाभी, सलोनी अपनी जवानी दिखा रही है तुम्हारे पतिदेव को. आपका क्या मन है?”

गीता: “अब उसके जैसा तो मेरा शरीर रहा नहीं. फिर भी आपके लिए मैं भी कपडे निकाल ही देती हूँ.”

गीता खड़ी होकर अपने कपडे निकलने लगी तो साथ में जीवन ने भी खड़े होकर अपने कपडे उतार दिए. उसका कसरती शरीर चमक रहा था. और उसके पांवों के बीच में उसका आधा तना लंड झूल रहा था.

गीता: “मुझे कभी कभी इसकी कमी बहुत सताती है.”

जीवन: “क्यों बहलाती हो भाभी, बलवंत के सामने तो ये उन्नीस ही होगा.”

गीता: “बात वो नहीं है, बस कभी कभी याद आती है जब निर्मला और मैं मिलकर आप दोनों से चुदवाती थी.”

जीवन की ऑंखें नम हो गयीं. गीता ने ये देखा तो उसके सीने से लग गई.

गीता: “ मुझे क्षमा करो भाईसाहब.”

जीवन: “नहीं भाभी, आप सही कह रही हो. उसकी बात कुछ और ही थी.” फिर उसने गीता की ठुड्डी पकड़कर सिर उठाकर उसके होंठ चूम लिए. “जैसे आपकी बात अलग है.”

उधर बलवंत भी अपने कपडे उतार कर सलोनी को जमीन पर लिटा कर उसकी चूत की पूरी श्रध्दा से चूस रहा था. सलोनी कसमसा रही थी और अपनी गांड उठा उठाकर बलवंत को प्रोत्साहित कर रही थी. बलवंत ने उसके पांव इतने फैलाये हुए थे की चूत पूरी तरह से खुलकर उसके सामने थी. और वो उसके रोम रोम को कभी चाटता, कभी सहलाता और कभी हल्के से काट रहा था. सलोनी अपना वश खो चुकी थी. पर उसे पता था कि आज की रात उसकी और गीता दीदी की धुआंधार कुटाई होनी है. दोनों की चूत और गांड इतनी बार मारी जाएगी कि सुबह चलना भी कठिन होगा. इन दोनों की चुदाई कई बार इतनी दुर्दांत हो जाती थी कि मन कांप उठता था. पर उसमे जो आनंद आता था उसका वर्णन भी असंभव था.

सलोनी ये सब सोचते हुए अपनी चूत में चल रही उंगली और जीभ से आनंदातिरेक सिसकारियां ले रही थी. फिर बलवंत ने उसके पांव उठाकर ऊपर तक मोड़ दिए. इस आसन में सलोनी की चूत और गांड दोनों ही ऊपर आ गए. बलवंत ने अपनी जीभ को गांड के छेद से चूत के भगनासे तक चलाना शुरू किया. सलोनी की तो अब जैसे जान ही निकल गई. बलवंत उसकी गांड के छेद पर जीभ से खेलता, फिर अपनी जीभ के ऊपर ले जाता और फिर भगनासे को जीभ से चाटकर अपने होठों से दबा देता. और फिर यही क्रम दोहराता. सलोनी की चूत और गांड दोनों में कुनमुनाहट होने लगी. चूत ने अपना रस बहाना शुरू किया तो बलवंत ने उस रस के सहारे अपने क्रम को और गतिशील कर दिया.

सलोनी हल्की चीख के साथ सिसकती हुई बोल पड़ी: “भाई साहब, मेरा पानी छूटने वाला है.”

पर बलवंत ने अपने आक्रमण में कमी करने के स्थान पर और भी तेजी कर दी. और सलोनी का बांध टूट गया. उसने लम्बी पिचकारियों के साथ अपन ढेर सारा पानी बलवंत के मुंह और चेहरे पर उड़ेल दिया. पर बलवंत रुका नहीं. और जब सलोनी पूरी झड़ नहीं गई, तब तक उसने अपना खेल बंद नहीं किया. जब सलोनी निढाल हो गई, तब बलवंत ने अपना चेहरा उठाया जो इस समय पूरी तरह से भीगा हुआ था.

“जीवन, इसकी चूत तो बहुत मीठी है, यार.”

“मेरे घर की हर चूत मीठी है, तेरी बेटी की चूत मिला कर.” जीवन अपने लंड को गीता के मुंह में अंदर बाहर करते हुए हंस कर बोला.

“ये सब हमारी पत्नियों की कृपा है, जिन्होंने ऐसी संतानें जो दी हैं.” बलवंत भी हंसकर बोला।

गीता पूरी आत्मीयता से जीवन के लंड को चूस रही थी. अब वो पहले वाला समय तो था नहीं कि जब चाहते तब अपने किसी भी मित्र के घर चले जाते और चूत, लंड या गांड चूस लेते। जीवन का लंड तो अब साल में कोई १५-१६ दिन ही उसके हिस्से में आ पता था. और इसका वो पूरा लाभ उठाना चाहती थी. जीवन भी अपनी भाभी रूपी समधन से लंड चुसवाने के लिए लालायित रहता था. तभी वो चाहता था कि ये दोनों साथ चलें और आनंद लें. जीवन ने गीता का सिर पीछे से पकड़कर उसके मुंह को लंड से चोदने की प्रक्रिया प्रारम्भ की. गीता को उसकी ये सब लीलाएं पता थीं और वो बलवंत के लंड को भी गले तक निगल लेती थी. और अब भी जीवन का लंड उसके गले को छू कर अंदर बाहर हो रहा था.

“भाभी, अब मुझे आपकी चूत चोदनी है.”

गीता: “क्यों भाईसाहब, मेरा रस नहीं पीना?”

जीवन: “नहीं भाभी, अभी रुका नहीं जा रहा, बहुत दिन हो गए इस चूत का भोग किये हुए. और अभी तो मैं कई दिन हूँ यहाँ.’

गीता वहीं जमीन पर लेट गई और अपने पांव फैला दिए.

जीवन: “नहीं भाभी, यहाँ नहीं, बिस्तर पर ही चलो. अब घुटने थक जाते हैं.”

ये सुनकर गीता उठी और वैसे ही नंगी अपनी गांड मटकाते हुए शयनकक्ष की ओर चल पड़ी. जीवन उसके पीछे हो गया. फिर उसने पीछे मुड़कर बलवंत को देखा.

जीवन: “तुम भी अंदर ही आ जाओ”

बलवंत ने सिर हिलाकर ठीक है कहा और सलोनी को लेकर शयनकक्ष की ओर चल दिया. चलते समय उनके हाथ सलोनी की गांड पर था और उसने चुहल करने के लिए एक उंगली उसकी गांड में पेल दी. सलोनी चलते हुए ठिठक गयी.

सलोनी: “भाईसाहब, आपके लक्ष्य गलत छेद पर है.”

बलवंत: “नहीं, लक्ष्य भी सही है और लक्ष्य भेदने के लिए बाण भी उत्सुक है. पर अभी समय है वहाँ अतिक्रमण में. पहले तुम्हारी चूत का भोग लगाना चाहूंगा.”

सलोनी: “फिर ठीक है. चूत की खुजली बहुत अधिक बढ़ गई है, पर अब अपने गांड में भी आग लगा दी.”

बलवंत: “कहे तो मैं और जीवन तेरी चूत और गांड की आग एक साथ बुझा दें?”

अब सलोनी इस खेल के लिए नयी तो थी नहीं. उसे पता था कि उसके दोनों छेदों की पिलाई होनी ही है. जैसे की गीता दीदी की होगी. उसका शरीर उत्तेजना से सिहर उठा.

गीता: “ अभी नहीं भाईसाहब, उसका जब समय आएगा तब देखेंगे.”

वो जानती थी कि जीवन को इस तरह की चुदाई कितनी पसंद है. और अब वो भी इसकी अभ्यस्त हो चुकी थी और उसे भी इसमें आनंद आता था. कमरे में पहुंचे तो देखा की गीता पहले से ही बिस्तर पर टाँगें फैलाये पड़ी थी और जीवन अपने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रखकर खड़े थे.

जीवन: “आ जा बलवंत. तेरे ही लिए रुका हूँ. साथ में जुगलबंदी करेंगे. देखें इनमे से कौन पहले हार मानती है. और जीतने वाली को हम दोनों कुछ विशेष देंगे.”

ये सुनते ही गीता और सलोनी दोनों के शरीर में सिहरन सी दौड़ गई. आज हारने में ही भलाई लग रही थी. पर जीवन की बात अभी समाप्त नहीं हुई थी.

“और हारने वाली को सजा.”

अब गीता और सलोनी को काटो तो खून नहीं. इधर गिरीं तो कुंआ उधर गिरीं तो खाई. अब बलवंत ने सलोनी को बिस्तर पर लिटा दिया गीता के साथ और अपने लंड को सलोनी की चूत पर लगाया और जीवन को संकेत दिया शुरू करने का.

एक साथ दो मोटे लम्बे कड़क लंड दो चूतों के अंदर एक ही झटके में समा गए. अब गीता की तो चूत कई सावन देख चुकी थी पर गीता की आंखे तिरछा गयीं. ये खेल बलवंत और जीवन का पुराना शौक था और जब वो जुगलबंदी करते थे तो उनका एक एक धक्का और गति एक समान होती थी. गीता तो इस खेल में कई बार खिलौना बन चुकी थी पर सलोनी के लिए ये उतना पुराना नहीं था. पर इससे कुछ अंतर नहीं पड़ना था. चूत तो उसकी अलग से ही चुदनी थी.

जीवन और बलवंत जुगलबंदी में गीता और सलोनी की चूतों में अपने लंड पेल रहे थे. बिस्तर के स्प्रिंग चूं चूं की ध्वनि से चरमरा रहे थे. उनके चोदने की तीव्रता इतनी अधिक थी कि अगर पलंग मजबूत लकड़ी का न होता तो संभवतः अब तक टूट गया होता. उनके नीचे अपनी चूत का भोसड़ा बनवाती हुई गीता और सलोनी इस भीषण चुदाई में पीड़ा और आनंद दोनों अनुभव कर रही थीं. गीता को तो ऐसी ही चुदाई पसंद थी, अगर चोदने वाला बलवंत न हो तो. बलवंत से उसे प्यार से चुदना अधिक पसंद था. पर दूसरों से उसे ऐसी ही चुदाई की इच्छा रहती थी. विशेषकर जीवन से जिसके लंड और पाशविक चुदाई की तो वो दीवानी थी. उधर बलवंत भी गीता के अलावा दूसरी औरतों को इसी निर्ममता से चोदता था.

सलोनी की चूत तो इस समय अगर नदी के समान बह रही थी तो गीता की समुद्र की तरह. दोनों इस समय चरमोत्कर्ष की ऊंचाई पर थीं और उनकी आँखों में चाँद तारे जगमगा रहे थे. शारीरिक संवेदना अब पूर्ण रूप से उनकी योनि पर केंद्रित थी.

गीता: “अब और नहीं, बस अब झड़ जाओ. मेरी चूत अब और नहीं झेल पायेगी. मुझ पर दया करो.”

गीता की विनती भरे स्वर सुनकर सलोनी ने भी विनती दोहराई.

बलवंत और जीवन ने एक दूसरे को देखा और सिर हिलाकर अपने धक्के और तेज कर दिए. बस कुछ ही पल निकले होंगे कि उन दोनों ने अपने गाढ़े सफ़ेद रस से दोनों चूतों को भर दिया. फिर दोनों मित्र परिवारजन हटकर अपने साथी की बगल में लेट कर लम्बी साँसों के साथ विश्राम करने लगे.

“आज कुछ अधिक ही जोश में थे भाई साहब.” गीता ने पूछा.

जीवन: “नहीं भाभी, बस आपके साथ इतने समय बाद जो किया, तो मन की इच्छा पूरी करनी थी. मैं फिर कहता हूँ, आप लोग मेरे साथ चलो.”

बलवंत: “जीवन, अभी चलना कठिन होगा. मैं सब काम एक बार संभाल दूँ फिर अगले महीने हम दोनों आ जायेंगे. अभी चलने से हमेशा मन में कुछ न कुछ कुरेदता रहेगा. अगले महीने आएंगे तो आराम से २ महीने तक रह पाएंगे. तुम मेरी बात समझ तो रहे हो न?”

जीवन ने कुछ देर सोचा फिर बोला, “तुम्हारी बात ठीक है. अगले महीने आओ फिर.”

गीता: “ये ठीक है, मैं भी सुनीति और बच्चों से कितने दिनों बाद मिलूंगी.”

जीवन हंस पड़ा, “जिन्हें तुम बच्चा कह रही हो वो तुम्हारी चूत और गांड की धज्जियाँ उड़ा देने वाले हैं.”

गीता: “क्या कह रहे हैं भाईसाहब!”

जीवन: “सच कह रहा हूँ. तो लाओ भाभी अब मैं तुम्हारी गांड का भी भोग लगा लूँ।”

बलवंत: “बिल्कुल, मेरा तो लंड सलोनी की गांड के बारे में सोचते ही फिर खड़ा हो गया है. क्यों सलोनी क्या कहती हो.”

सलोनी: “जब कमरे में आते हुए आपने मेरी गांड में उंगली की थी तब से ये खुजला रही है आपके लंड से खुजली मिटाने के लिए.”

ये कहते हुए चारों अगले चरण के लिए अग्रसर हो गए.

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सुनीति के घर

अगले दिन सुबह:

सुनीति और अग्रिमा किचन में थे और खाना बना रहे थे. सुनीति को तो इसमें कोई कठिनाई नहीं थी पर अग्रिमा के हाथ पांव फूले हुए थे. उधर लगातार उसके मित्रों के फोन आये जा रहे थे. शर्म और घमंड में ये बता नहीं पा रही थी कि वो घर में अपनी माँ का काम में हाथ बंटा रही है. कुछ ही देर में शंकर भी आ जाता है, सब्जी और अन्य वस्तुओं के साथ. उसे अग्रिमा को किचन में काम करते देख बहुत अचरज हुआ.

शंकर: “अरे अग्रिमा बिटिया, तुम! चलो अब रहने दो मैं आ गया हूँ.”

अग्रिमा: “थैंक यू , मौसाजी.”

सुनीति: “ ए मैडम, मौसा के आने से तुम जा सकती हो, ये किसने कहा?”

अग्रिमा: “मम्मी, मम्मी, मम्मी, प्लीज प्लीज. मेरे सब फ्रेंड्स मेरा वेट कर रहे हैं. मुझे जाने दो न प्लीज.” अग्रिमा के ये शब्द सुनकर सुनीति हंसने लगी. उसका मन भी लाड़ से भर गया.

सुनीति: “ठीक है जा. और मौसा के लिए कुछ उपहार लाना.”

अग्रिमा: “ओके, मॉम. जो उपहार मौसाजी को पसंद है, वो मैं रात में दे दूंगी. और आप इन्हे अभी दे देना मेरी ओर से.”

सुनीति: “चल, शैतान. अब जा, मुझे काम करना है.”

अग्रिमा: “हाँ जी. इस काम के बाद भी तो काम करना है.” उसने अपने बाएं हाथ के अंगूठे और ऊँगली से गोला बनाकर उसमे दाएं हाथ की ऊँगली चलते हुए चुदाई का संकेत दिया और भाग गयी.

सुनीति भी हँसते हुए अपने किचन के काम में लग गयी और शंकर सामान लगाने लगा. और फिर सुनीति का हाथ बँटाने लगा.

सुनीति: “बात हुई सलोनी से? ठीक से है.”

शंकर: “हाँ दीदी, सुबह हुई थी. सब अच्छा है. अपने घर भी गई थी. आपने जो पैसे दिए थे अपने घर वालों को दे दिए.”

सुनीति: “और कुछ?”

शंकर: “आपके बाबूजी और माँ जी के यहाँ आने की बात हो रही है. अगले महीने आएंगे कह रही थी. दादाजी ने मना लिया उन्हें।”

सुनीति: “सच. और ये बात मुझे अब बता रहे हो. ओह माँ. ये तो बड़ी ख़ुशी का समाचार है.”

ये कहते हुए सुनीति ने शंकर को बाँहों में भरकर चूम लिया.

थोड़े ही समय में नाश्ता और खाना दोनों बन गए. शंकर से नाश्ता टेबल पर लगा दिया और घर के सदस्यों की प्रतीक्षा करने लगे. आधे घंटे में आशीष, असीम और कुमार आ गए और सब बैठकर नाश्ता करने लगे. आशीष ने देखा की सुनीति बहुत खिली हुई है.

आशीष: “क्या बात है, बहुत खुश लग रही हो.”

सुनीति: “बाबूजी ने पापा मम्मी को यहाँ आने के लिए मना लिया है. अगले महीने आएंगे.”

आशीष: “ये तो सच में बहुत ख़ुशी की बात है.”

कुमार: “मम्मी, नानी क्या अभी भी उतनी ही सुन्दर हैं?

सुनीति: “हाँ. और तेरे जैसे चार को संभाल सकती हैं इस उम्र में भी.”

असीम: “ठीक है माँ. हम दोनों संभाल लेंगे उन्हें.” कहते हुए दोनों भाइयों ने अपने एक एक हाथ जोड़कर ताली बजाई (हाई ५ किया).

आशीष सुनीति से: “ये साले नहीं सुधरेंगे। जहाँ चूत की बात हो, उछलने लगते हैं.”

असीम: “अरे पापा, आप भी मन मन में खुश हो रहे हो. है न.”

बस यूँ ही चुहल में नाश्ता समाप्त करने के बाद सब अपने काम के लिए निकल पड़े. अब शंकर और सुनीति घर में अकेले ही थे. सामान समेटकर, किचन की सफाई करने के बाद शंकर ने अपने लिए एक और चाय बनाई. शंकर चाय लेकर बैठक में गया जहाँ सुनीति फोन पर गीता से बात कर रही थी.

सुनीति: “.. अगर अभी आने को बोल रहे थे तो आ ही जाते.”

गीता:””

सुनीति: “बात तो पापा की भी सही है, चलो अब जितना जल्दी हो सके आ जाओ. बहुत याद आती है, सच में.”

गीता:””

सुनीति: “अरे रे रे रे. पापा और बाबूजी जब भी मिलते हैं हमेशा ऐसा ही करते हैं. चलो ऐसा करो तुम मालिश करवा लो नाऊन को बुलाकर. सलोनी की भी करा देना. और आराम करो. बाद में फिर बात करेंगे.”

शंकर: “क्या हुआ दीदी, सब कुशल मंगल है न?”

सुनीति चाय की चुस्की लेते हुए : “हाँ सब ठीक है. पापा और बाबूजी जब साथ होते हैं तो कई बार बहुत बेदर्दी से चोदते है. मम्मी वही कह रही थीं. दोनों ने रात भर मम्मी और सलोनी के सारे बदन को तोड़ डाला. मम्मी की उम्र भी वैसी नहीं कि ऐसी पहलवानी करें. पर सलोनी ठीक है, मम्मी ने बताया.”

शंकर अपनी चाय पीते हुए: “सलोनी तो और खिल गई होगी. जब असीम और कुमार के पास से आती है तब उसकी चाल भी बदली होती है और चेहरे की चमक भी. और ये दोनों भी बहुत बेरहमी से चोदते है, आप तो जानती ही हो.”

सुनीति की चाय समाप्त हो चुकी थी, उसने प्याला एक ओर रखा.

सुनीति: “हाँ जानती हूँ. कल तो मैंने दोनों मुश्टण्डों के लंड अपनी चूत में एक साथ लिए थे. सोचकर फिर पनियाने लगी है.” सुनीति ने अपने नाईट गाउन को घुटनों के ऊपर उठाकर अपनी चूत पर हाथ फिराते हुए कल की चुदाई को याद किया.

“मैं कुछ सहायता करूँ, दीदी” शंकर ने अपना प्याला एक और रखकर पूछा. उसे समझ आ चुका था की ये वृत्तांत किस ओर अग्रसर है.

“इसमें पूछने जैसी कोई बात ही नहीं है.”

शंकर ने सुनीति के पांवों के बीच में बैठकर जांघों को अलग करते हुए चूत का अवलोकन किया.

“हम्म्म, लगता है कल तगड़ी चुदाई हुई है, दीदी. बहुत सूजी हुई लग रही है ये तो.”

“सूजेगी नहीं क्या. दो दो लंड एक साथ पेले थे इसमें.”

शंकर ने चूत की फांकों पर अपनी जीभ फिराई। और फिर धीरे धीरे चाटने शुरू किया. सुनीति ने सोफे पर अपना सिर पीछे करते हुए अपने पांव और फैलाये और अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया. शंकर ने अपना कार्यक्रम चालू रखते हुए अब सुनीति की गांड से चूत तक चाटना शुरू किया. सुनीति के शरीर में एक झुरझुरी से उठी. और उसने अपने आसन को बदल कर अपनी गांड उठाकर शंकर के कार्य को सरल कर दिया. शंकर ने भी अपनी चाटने की प्रक्रिया को थोड़ा और तेज किया और अब वो अपनी जीभ से गांड और चूत की फांकों को कुरेद रहा था. पहले वो गांड के भूरे सितारे पर अपनी जीभ से चाटता और फिर चूत और गांड के बीच की लकीर को चाटते हुए चूत पर पहुँचता जहाँ वो पंखुडियों को चाटकर, जीभ से चूत के अंदर थोड़ी सी चटाई करता और भग्नासे के दाने को होंठों से दबाकर मसलता. और यही क्रिया वो फिर से दोहराता.

अब सुनीति भी पूरी गर्मी में आ चुकी थी. उसकी चूत के पट खुल चुके थे और अब उसे कुछ बड़ी और कठोर वास्तु की अभिलाषा थी जो उसकी चूत को ठीक से भर सके.

“शंकर, अब तू मुझे चोद दे, बहुत बेचैन हो रही है ये.”

ये सुनकर शंकर ने अपने कपडे उतारे, उसका लंड इस घर के अन्य लोगों की तरह विशालकाय तो नहीं था पर छोटा भी नहीं था. उसने अपने लंड को सुनीति की चूत पर रखा और एक ही बार में पूरा अंदर धकेल दिया.

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जीवन का गाँव

पिछली रात:

जीवन: “सलोनी, जाकर जरा रसोई से तेल लेकर आओ.”

सलोनी काँपते पाँवों से रसोई में गई और दो कटोरियों में सरसों का तेल ले आई. उसने एक एक कटोरी बिस्तर के दोनों ओर रख दी. बलवंत उसे बड़ी ललचाई हुई आँखों से देख रहा था. जब तेल रखकर वो मुड़ी तो बलवंत ने उसे खींच कर अपनी गोदी में बिठा लिया. उसके मम्मों को दबाते हुए उसके चेहरे और होठों को चूमने लगा. इस प्रक्रिया से सलोनी का शरीर भी उसका साथ देने लगा और उसने भी अपने आप को बलवंत के शरीर से लपेट लिया.

जीवन: “बलवंत, इसकी गांड बहुत प्यार और कोमलता से मारना। इसको गांड मरवाने में मज़ा बहुत आता है, पर थोड़ी तंग गली है, तेरी मोटर ज्यादा तेज मत चलाना नहीं तो दोनों को मजा नहीं आएगा. एक बार खुल जाये फिर जैसे चाहो वैसे चला सकते हो अपनी गाड़ी.”

बलवंत: “इतनी मुलायम गांड को मैं कैसे दर्द दे सकता हूँ. सलोनी, चलो घोड़ी बन जाओ, पहले तेरी इस गांड को प्यार तो कर लूँ .”

सलोनी ने घोड़ी का आसान ग्रहण किया और बलवंत ने उसके पीछे आकर उसकी गांड को चाटते हुए उसकी चूत में एक उँगली डाल दी और उसे चोदने लगा. सलोनी की रोमांच से आह निकल गई. उधर जीवन ने भी गीता से उसी आसान में आने को कहा और गीता की गांड को चाट कर ढीला और गीला करने लगा.

जब बलवंत को लगा कि सलोनी की गांड अपेक्षित रूप से गीली हो चुकी है तो उसने तेल उठाया और अपने एक हाथ से गांड को फैला दिया. इससे गांड का भूरा छेद थोड़ा खुल गया. फिर बलवंत ने कटोरी से तेल की एक पतली धार के द्वारा सलोनी की गांड में तेल भरने का काम शुरू किया. ठन्डे तेल के प्रवेश से सलोनी की गांड कुलबुलाने लगी और उसे शरीर में सिहरन सी दौड़ गई. पर बलवंत इस खेल का अनुभवी खिलाडी था. उसने कटोरी एक ओर रखी फिर दोनों हाथों से सलोनी के नितम्ब जोड़े और गांड को सील करते हुए दोनों नितम्बों को एक दूसरे से विपरीत दिशा में हिलने लगा. इससे तेल गांड की गहराईओं में चला गया. फिर उसने अपनी एक ऊँगली गांड में डालकर उसे अंदर अच्छे से चलते हुए तेल को गांड की अंदरूनी त्वचा पर अच्छे से मला. तीन चार बार उसने तेल डालते हुए ये क्रिया दोहराई.

इसके बाद रुकते हुए उसने अपनी पारखी आँखों से अवलोकन किया और पाया कि अब सलोनी की गांड चुदने की स्थिति में आ गई है. फिर उसने तेल से अपने लंड की अच्छी मालिश की और इतना तेल लगा लिया जैसे नहा दिया हो. अब उसने अपने लंड को सलोनी की गांड पर रखा.

बिस्तर में दूसरी ओर भी गीता की गांड के साथ लगभग यही कर्म हुआ था. पर गीता की गांड पर इतना समय नहीं लगना था तेल से चिपड़ने में इसीलिए जीवन ने अपनी जीभ और उँगलियों से अधिक समय श्रम किया. और जब तक सलोनी की गांड पर बलवंत ने लंड रखा, जीवन ने भी उसी समय गीता की गांड पर अपने लंड को बैठाया. पर इस बार जुगलबंदी नहीं थी. और इसीलिए बलवंत बड़े संतोषी गति से सलोनी की गांड में अपना लंड उतारने लगा. अभी उसके सुपाड़े ने अंदर प्रवेश पाया ही था कि जीवन ने तीन चार धक्कों में ही अपना लंड गीता की वृद्ध गुदा में पेल दिया.

बलवंत: “सलोनी, ठीक तो है न तू?” जब लंड पूरा गांड में अच्छे से बैठ गया तब उसने पूछा.

सलोनी: “बिल्कुल भाई साहब. और सुनिए, मैं पहली बार गांड में नहीं ले रही हूँ, आप अपने ढंग से मारिये. मुझे गांड मरवाने में मजा तो बहुत आता है, पर बेरहम तरीके से नहीं.”

बलवंत ये सुनकर खुश हो गया. उसने अपने अपने लंड को आगे पीछे करते हुए मिनट भर में ही सलोनी की गांड को अपने पूरे लंड से पैक कर दिया. अब सलोनी को ऐसा लग रहा था कि ये चला तो गया पर अब चलेगा कैसे? पर इसके लिए उसे अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी. तेल से सनी गांड में लंड आसानी के साथ चलने लगा. उसकी तंग गली में इस घर्षण से एक अजीब सी अनुभूति होने लगी. जब लंड बाहर होता तो जिस स्थान को छोड़ता वहां सलोनी को खुजली सी लगती, जिसे तत्क्षण बलवंत का लौड़ा वापिस घुसते हुए मिटा देता.

पर जीवन के ऊपर ऐसा कोई अंकुश नहीं था, और गीता भी गांड मरवाने में महारथ प्राप्त किये हुए थी. उसने बलवंत और उनके मित्र मंडल के अन्य चार मित्रों के लंड अपनी गांड से निकाले थे. और उसे जीवन का ये वहशियाना चुदाई का ढंग बहुत रास आता था. सिर्फ जीवन ही उसके गांड के पेंच ढीले करता था, अन्य सभी उसे एक गुड़िया या बुढ़िया के रूप में ही चोदते थे. पर जीवन में ऐसी कोई दया नहीं थी. यही कारण था कि वो उसके आने की राह देखती थी. और इस समय जीवन उसके इस लम्बे अंतराल का एक एक पल वसूल रहा था. उसके लंड के लम्बे और भयावह धक्के किसी और स्त्री की आत्मा कँपा देते. पर गीता इस समय कामान्धता के स्वर्ग में विचरण कर रही थी.

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अग्रिमा का खेल:

अब ये तो हो नहीं सकता कि सारा परिवार रंगरेलियों में लिप्त हो और अग्रिमा इससे दूर रहे. उसने ये तो सच ही कहा था कि उसके मित्र उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे, पर वो कौन थे ये उसने नहीं बताया.

अग्रिमा अपनी सहेली मोना और तीन पुरुष मित्रों के साथ इस समय एक घर की बैठक में थे. ये घर उनमे से किसी का भी नहीं था और मोना ही उन्हें यहाँ लेकर आयी थी. तीनों लड़के उनके ही साथ के थे. जब ये तय हुआ कि सेक्स किया जाये तो मोना ने तीनों लड़कों को कपडे उतार कर एक कमरे में जाने के लिए कहा.

“तुम लोग कपडे निकालकर उस बेडरूम में चलो, मैं और अग्रिमा बस ५ मिनट में आते हैं.” मोना ने कहा.

लड़कों को तो जैसे मिठाई मिल गई हो, उन्होंने तुरंत अपने कपड़े आनन फानन निकाले और जल्दी से कमरे में घुस गए. पर वहां का दृश्य देखकर वो ठिठक गए.

“हैलो बॉयज़! क्या मुझे ढूंढ रहे हो?” बिस्तर पर बैठी हुई एक अति सुन्दर अधेड़ स्त्री ने लुभावनी और आमंत्रण भरे स्वर में पूछा.

एक लड़का, “हमें मोना ने यहाँ आने को कहा और बोली कि वो भी आ रही है.”

स्त्री: “वो आएगी, पर जो पाने के लिए तुम तीनों आतुर हो वो मोना से नहीं, मुझसे मिलेगा.” उसने तीनों लड़कों की आँखों में ऑंखें मिलकर बताया. “क्या है न कि मोना लेस्बियन है, उसे लड़कों में कोई रूचि नहीं है. और मुझे तुम्हारी आयु के लड़कों में बहुत रूचि है. मेरा अर्थ समझ रहे हो न? उसने एक हाथ से अपने मम्मे और एक से अपनी चूत के पाटों को हटाकर सहलाते हुए बोला। “

लड़कों ने एक दूसरे की ओर देखा, और जैसा कि इस उम्र में होता है उनका निर्णय उनके खड़े होकर सलाम करते हुए लौंड़ों ने लिया, क्योंकि मिलती हुई चूत को ठुकराना बेवकूफी होती है.

“हम्म्म, लगता है तुम सबके लंड इसके लिए हाँ कह रहे हैं.” स्त्री ने मुस्कुराकर कहा. “क्या है न, मैं अपने किसी भी छेद से पक्षपात नहीं करती हूँ. इसीलिए ये सब तुम लोगों के लिए है.” उसने अश्चार्यजनक अंदाज़ में अपने दोनों पांव ऊपर उठाये और अपनी चूत और फिर गांड में ऊँगली डालकर अपना आशय साफ कर दिया. तीनों लड़कों की बांछे खिल गयीं. लड़कियाँ चुदवा तो लेती थीं पर मुंह में लेने में बहुत नखरे करती थीं. और गांड! उसे तो भूल ही जाओ. कोई बिरली ही होती थी जो उसे छूने भी देती थी.

“तो क्या कहते हो? खेलोगे या जा रहे हो?”

तीनों ने एक स्वर में उत्तर दिया: “खेलेंगे!”

लगभग तभी मोना और अग्रिमा ने भी निर्वस्त्र उस कक्ष में प्रवेश किया. और कुछ ही समय में सब अपने अपने खेल में व्यस्त हो गए. इस समय अग्रिमा अपनी अंतरंग सखी मोना के बिस्तर में थी. मोना और वो दोनों इस समय नंगी अवस्था में एक दूसरे की चूत चाट रहे थे. दोनों की घुटी सिसकियाँ कमरे में गूंज रही थी. कमरे में थप थप की ध्वनि में इनकी सिसकियाँ दब जा रही थीं. और ये थप थप मोना के ही पास चल रहे एक द्वन्द युद्द के कारण आ रही थीं जहाँ मोना की ताईजी इस समय तीन लड़कों से एक साथ चुदवा रही थी.

मोना की ताईजी उसे नए नए लड़के फंसा कर उसकी शरीर की भूख शांत करने के लिए प्रयोग में लाती थी. मोना को लड़कों में कोई भी रूचि नहीं थी क्योंकि वो पूर्ण रूप से समलैंगी थी. और इसी कारण वो लड़कों को चूत का प्रलोभन देकर लाती थी. उसकी ताई को जवान लड़कों का चस्का तब लगा था जब वो कॉलेज प्रोफ़ेसर थीं. परन्तु उनकी इस बात का पता लगने पर उन्हें हटा दिया गया था. पर उनकी आग आज भी वैसे ही प्रज्ज्वलित थी. और उन्होंने मोना को अपने इस शौक को पूरा करने में उपयोग किया. लड़कों को ये नहीं पता होता था कि वो चूत उसकी ताई की है. और तो और इसके लिए मोना को उसकी ताई पैसा भी देती थी जो उसकी माँ उसे नहीं देती थी. लड़कों को भी पैसा मिलता था अगर वो ताईजी की भूख को शांत कर पाते थे. और वापिस लौटने का न्योता भी. इस कारण वो ये रहस्य सदैव गुप्त ही रखते थे. और मोना नए नए शिकार लाने में कोई समस्या नहीं होती थी.

जहाँ तक अग्रिमा की बात थी तो उसे घर में ही इतने लंड मिले हुए थे कि बाहर देखने जी कोई आवश्यकता ही नहीं थी. पर उसे मोना की साथ सम्बन्ध में कोई परेशानी नहीं थी. एक तो ये कि मोना इस कला में निपुण थी और दूसरा ये कि उसे ऐसे वातावरण में इस प्रकार के सेक्स में आनंद आता था जब उसे पता होता था कि हर लड़का उसे लालच भरी आँखों से देख तो सकता था पर इससे अधिक और कुछ पाना उसके लिए संभव नहीं था. उस समय भी मोना की जीभ एक साँप की जीभ की भांति उसकी चूत में उथल पुथल मचा रही थी. और यही सुख अग्रिमा भी मोना को दे रही थी.

मोना की ताईजी के मुंह में एक लंड था तो एक उसकी चूत में. और तीसरा उसकी गांड के परखच्चे उड़ा रहा था. ये लंड सामान्य आकार के ही थे और ताईजी को एक अच्छी ताल में चोद रहे थे. उनके मोटे और लम्बे लौडों की भूख मिटाने के लिए उन्होंने अन्यत्र आयोजन किया हुआ था. परन्तु उनके शरीर की आग इतनी धधकती थी कि उन्हें बीच बीच में दूसरे लौंड़ों से भी अपनी भूख मिटानी पड़ती थी.

अग्रिमा की इस वातावरण से इतना उत्तेजना बढ़ती थी और यहाँ भी उसे मोना की उँगलियाँ, होंठ और जीभ एक स्तर तक संतुष्ट कर देते थे.

(१. यह प्रकरण आगे की कहानी में एक अहम् भूमिका निभाएगा, परन्तु यहाँ इसका उपयोग बस इतना ही है.

२. अनाम ताईजी से या तो आप मिल चुके हैं या जल्द ही दोबारा मिलेंगे.)

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सुनीति के घर

शंकर जानता था की इस समय की चुदाई में सुनीति को एक तेज और जल्दी वाली चुदाई की कामना होती है. और वही वो उसे प्रदान कर रहा था. सुनीति ने केवल अपना गाउन ऊपर किया हुआ था और शंकर ने भी केवल अपनी पैंट ही निकाली थी. और शीघ्र ही सुनीति और शंकर दोनों ही झड़ गए. सुनीति उठकर बाथरूम में नहाने चली गई और शंकर अपने आउट हाउस में. दोनों का ये एक प्रकार से नित्यकर्म था. सुनीति को दिन में न कितनी बार चुदाई की भूख लगती थी. ये तो घर में इतने पुरुष थे जो उसकी इस आग को बुझा पाते थे अन्यथा न जाने क्या न कर बैठती.

अपने कमरे में नहा धोकर वो थोड़ी देर के लिए टीवी देखने लगा की तभी भाग्या का फोन आ गया. उसने बताया कि सूरज तीन दिन के लिए किसी काम से बाहर जा रहा है तो उसने अपनी सास से घर आने की अनुमति ले ली है. उसने ये भी कहा कि वो शाम के पहले आ जाएगी और किसी से बताये नहीं क्योंकि वो अपने ही कमरे में रहना चाहेगी. बात समाप्त होने के बाद शंकर टीवी देखते हुए कुछ देर के लिए सो गया और फिर उठकर मुख्य घर में शेष कार्य संपन्न करने के लिए आ गया.

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जीवन का गाँव

रात अभी बाकी है

“मारो मेरी गांड, फाड़ दे इसे. तेरे जैसा लौड़ा पाकर ये धन्य हो गई. जोर से कर हरामी. बुढ्ढा हो गया क्या तू? अपने नातियों से मरवानी है ये गांड, उसके लिए तो खोल दे.” गीता भावावेश में चिल्ला रही थी. ये तो अच्छा हुआ कि वो शयनकक्ष में थे नहीं तो मोहल्ले वाले खिड़की से झांक रहे होते.

सलोनी के मुंह से इस स्थिति में भी हंसी निकल गई. उसकी गांड में बलवंत लम्बे धक्के लगा रहा था, पर जहाँ उनकी लम्बाई पूरी थी उनमें वो तीव्रता नहीं थी. एक लय से वो गांड में अपने लंड को चला रहा था. हालाँकि सलोनी इससे तेज गति भी झेल सकती थी और वस्तुतः उसमें आनंदित भी होती, परन्तु उसने अधिक वीरता न दिखाने में ही अपनी भलाई समझी.

सलोनी की हंसी सुनकर धक्कों से उखड़ी साँस के बीच गीता चिढ़ कर बोली,”तू . . क्यों . . हंस .. रही .. है… माँ .. की…. लौड़ी?”

सलोनी: “माँ जी, आप जो बाबूजी को कह रही हो न नातियों से गांड मरवाने की बात, सच कहूँ तो आप वैसा न ही करना अगर खैरियत चाहती हो. उनके नीचे आकर अगर आपने उन्हें अगर ऐसे ललकारा तो समझ लेना कि आपको बाथरूम जाने लायक भी नहीं छोड़ेंगे. सच कहूँ तो बाबूजी उनके आगे आपको दया की मूर्ति लगेंगे.”

गीता की गांड ये सुनकर फट गई, पर उसे इसका रोमांच भी आया. उसकी गांड, चूत और पूरे शरीर में उस समय के बारे में सोचकर एक सिहरन दौड़ गई. अब ऐसा नहीं था कि बलवंत और जीवन उसकी गांड दबा के नहीं मारते थे. पर ये भी सच था की उनकी उम्र के कारण वो झड़ने के बाद ठहर जाते थे. पर जवान लौंडे रुकने वाले नहीं थे, और न ही जल्दी झड़ने वाले थे. यही सोचकर गीता ने निश्चय किया कि समय आने पर वो उस आग में अवश्य घी डालेगी. और इस सोच के साथ उसकी चूत ने ढेर सारा छोड़ दिया. गांड भी अब उत्तेजना से लप्लपाने लगी.

जीवन ने भी ये स्पंदन अनुभव किया. उसे भी अब लग रहा था कि वो शीघ्र ही झड़ेगा. और इसीलिए वो लंड को गांड के पूरा बाहर लेकर छेद को खुलते बंद देखकर फिर लौड़ा पेलने लगा. पर अभी गति पर अंकुश लगा लिया था. कभी छोटे तो कभी लम्बे धक्कों के साथ ही उसका ज्वालामुखी फूट गया और उसने गीता की गांड मलाई से भर दी. लंड बाहर निकाल कर गीता की चौड़ाये हुए गांड के छेद को संतुष्ट भाव से देखते हुए वो उठकर एक ओर बैठ गया.

बलवंत भी अब कुछ ही देर और रुक पाया और फिर उसने भी अपनी मलाई से सलोनी की गांड को भर दिया. सलोनी को इस चुदाई से बहुत सुख मिला था. उसे गांड मरवाना बहुत पसंद था, और बलवंत ने जिस विधि से उसकी ली थी, उसमें प्यार और व्यभिचार का अनोखा संगम था. बड़ा लंड होने के बाद भी जिस आसानी से बलवंत ने उसकी गहराइयाँ नापी थीं वो सचमुच इस कला की चरम सीमा थी.

जीवन और बलवंत उठकर बाथरूम चले गए और धोकर नंगे ही बाहर बैठक में चले गए. गीता और सलोनी ने भी अपनी सूजी हुई गांड उठायीं और बाथरूम की और बढ़ी. जहाँ सलोनी साधारण गति से चल रही थी, गीता की चाल में एक लचक थी जिसका कारण संभवतः गांड की हालत थी. सलोनी ने उन्हें दया भरी आँखों से देखा और उनको सहारा देते हुए अंदर ले गई और सफाई करवाई.

“ये हरामी थोड़ा भी जोश दिलाओ तो जानवर ही बन जाता है.” गीता बोली.

सलोनी: “तो क्यों करतीं है ऐसा.”

गीता: “उसके बिना मजा भी नहीं आता. ये समझ कि गांड के कीड़े साफ कर दिए. और जो दर्द की टीस है, वही तो इस खेल का असली सुख है.”

सलोनी ने भी सफाई की और दोनों नंगी ही बाहर बैठक में चली गयीं.

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सुनीति के घर

४ बजे दोपहर को भाग्या आ गयी और सीधे अपने घर में चली गई. इस समय शंकर घर में अकेला ही था. भाग्या जाकर उसके गले लग गई.

शंकर: “ क्या हुआ बेटी, सब कुशल मंगल तो है?”

भाग्या: “सब ठीक है. आप दोनों की बहुत याद आयी तो चली आयी.”

परन्तु शंकर समझ गया कि भाग्या कुछ छुपा रही है.

शंकर: “सच कह बिटिया, अभी तुझे गए हुए चार दिन भी नहीं हुए हैं.”

भाग्या: “जब ये चले जाते हैं तो देवर बहुत तंग करता है. मुझे डर है कि कहीं मेरी इज्जत न लूट ले किसी दिन.”

शंकर: “सूरज को बताया?”

भाग्या: “सीधे तो नहीं. वो मानेंगे नहीं कि ऐसा कुछ है.”

शंकर: “जा, तू आराम कर, मैं कुछ सोचकर बताता हूँ. अब चिंता मत कर.”

भाग्या इधर उधर देखते हुए : “माँ कहाँ है? इस समय तो घर पर ही रहती है.”

शंकर: “बाबूजी के साथ उनके गांव गई है. अगले हफ्ते लौटेगी.”

भाग्या: “ तब तो बेचारी की हालत ख़राब कर देंगे। आपने जाने क्यों दिया?”

शंकर : “पहली बात, कि मना करना ठीक नहीं था. और दूसरी कि सलोनी भी जाना चाहती थी. तेरे नाना नानी को भी बहुत दिन हो गए हैं किसी से मिले हुए.”

भाग्या: “बात तो ठीक है. पर यहाँ आप अकेले पड़ गए.”

शंकर: “अब तू जो आ गयी है. सब ठीक रहेगा. थोड़ा आराम कर ले फिर चाय बनता हूँ. मेरा काम पर जाने का समय हो जायेगा तब तक.”

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जीवन का गाँव

रात अभी भी बाकी है

बैठक में बैठे हुए सब बातें कर रहे थे.

जीवन: “वैसे तुम्हारे अगले महीने आने की योजना सही है. मैं कल सुबह अपने मैनेजर को बुला लूंगा और उसे काम समझा देना. उसकी मासिक आय को मैं संभाल लूंगा. मुझे नहीं लगता कि वो मना करेगा.”

गीता: “मेरी सुनीति से बात हुई, वो भी बहुत खुश हुई ये जानकर कि हम लोग आ रहे हैं.” फिर कुछ सोचते हुए, “भाईसाहब, आपको अगर कोई परेशानी न हो तो मैं कुछ कहूँ?”

जीवन: “क्यों नहीं भाभी, इसमें पूछने जैसी कोई बात ही नहीं.”

गीता: “मैं सोच रही थी कि सलोनी के माता पिता को भी ले चलें. वो भी कुछ दिन रह लेंगे अपने बच्चों के साथ. हफ्ते १० दिन में फिर लौट आएंगे.”

सलोनी की ऑंखें नम हो गयीं, पर वो कुछ बोली नहीं.

जीवन: “बिल्कुल ले कर आना. मैं बड़ी गाड़ी भेज दूंगा। पर ये ध्यान रहे कि हमारे संबंधों के बारे में उन्हें कोई भी शक न हो. और जब तक वो रहें तब तक इन तीनों को अपने खेलों से दूर ही रहना होगा. ठीक है न सलोनी.”

सलोनी: “बाबूजी, आप सचमुच देवता हैं. मैं कल ही माँ से बात करूँगी। “

गीता: “वो तुम मुझपर छोड़ दो, मुझे विश्वास है कि वो मेरी बात नहीं टालेंगे.”

कुछ देर और यूँ ही बातें करने के बाद सलोनी ने सोने जाने की अनुमति मांगी और जाकर अपने कमरे में लेट कर सो गई.

“तो भाभी, अब हम दोनों के बीच में तुम अकेली ही बची हो.”

“तो क्या हुआ, मैं अभी भी तुम दोनों को धूल चटा सकती हूँ. चलो मैदान में.”

और इसी के साथ सब लौट कर शयन कक्ष में आ गए और अपने कपडे उतारकर नंगे हो गए.

गीता बिस्तर पर बैठकर सामने खड़े दोनों विशालकाय लौंड़ों को चूस रही थी. एक बार एक और दूसरी बार दूसरा. पहले को मुंह से निकालकर वो उसे अपने हाथों से रगड़ देती और दूसरे को चूसती. इस प्रकार उसने लगभग ५-७ मिनट दोनों को अच्छे से चूस और चाटकर तान दिया. अब दोनों ही लंड उसके शरीर के दो छेदों में प्रविष्ट होने के लिए उत्सुक थे.

जीवन: “तुझे क्या चाहिए, बलवंत ?”

बलवंत अनकहे प्रश्न को समझ गया.

बलवंत: “तुमने तो इस बुढ़िया की गांड मार ही ली है एक बार, अब मुझे मारने दे.”

जीवन: “बिल्कुल ठीक.”

उसने गीता को खड़ा किया और उसका एक गहरा चुम्बन लिया.

जीवन: “भाभी, अब तुम्हारा सर्वप्रिय खेल खेलें?”

गीता: “अरे भाई साहब, जब से आप आये हो मैं इसी समय की राह देख रही थी. अब लेट जाओ जिससे मैं अपनी चूत में आपके लौड़े को डाल सकूँ। फिर सुनीति के बाबूजी मेरी गांड में अपना लंड डाल देंगे.”

जीवन बिस्तर पर लेट गया जहाँ उसका लंड छत को ताक रहा था. गीता ने उसके ऊपर दोनों पांव फैलाकर बैठते हुए उसका लंड अपनी चूत में ले लिया. और पूरा अंदर जाने के बाद आगे की ओर झुक गई. जीवन ने उसकी पीठ पर अपने हाथों से शिकंजा बनाया और उसे अपनी ओर खिंच लिया. गीता के स्तन जीवन के मजबूत सीने से जाकर जुड़ गए. बलवंत ने कटोरी में बचा तेल अपने लंड पर मला और थोड़ा तेल गीता की गांड पर डालकर उसे भी चिकना कर दिया.

बलवंत: “इस बुढ़िया के आज सारे पेंच ढीले करने हैं, जीवन. बहुत फुदकती है ये लंड के लिए.”

ये कहते हुए बलवंत ने अपना सुपाड़ा अंदर डाला और सुपाड़ा फिट होते ही एक तगड़ा धक्का मारा. धक्का इतना तीव्र था कि उसका पूरा लौड़ा एक ही बार में गीता की गांड में पूरा जड़ तक घुस गया. इतना खेली खिलाई होने के बावजूद गीता की चीख निकल गई. बलवंत हमेशा बहुत प्यार से गांड मरता था, पर आज उसने ऐसी दरिंदगी दिखाई कि गीता की आँखों के आगे तारे नाचने लगे. उसकी चीख से बगल के कमरे में सो रही सलोनी की आंख खुल गई. परन्तु उसे समझ आ गया कि क्या चल रहा है और वो मुस्कुराते हुए दोबारा सो गई.

अब जब दोनों लंड गीता की चूत और गांड में पूरे धंसे हुए थे तो गीता को एक अलग ही अनुभव हो रहा था. यही वो अनुभव था जिसके लिए उसका शरीर इतने समय से व्याकुल था. दोनों छेदों के बीच की पतली झिल्ली इस समय दो ओर से दबी हुई थी और उस समय की प्रतीक्षा कर रही थी जब उसकी दोनों ओर से घिसाई होगी.

बलवंत: “जीवन कैसे चलना है?”

जीवन: “उल्टा सीधा.”

बलवंत समझ गया कि इसका क्या अर्थ है. उल्टा अर्थात जब एक लंड अंदर जायेगा तब दूसरा बाहर आएगा. सीधा अर्थात दोनों एक साथ अंदर बाहर होंगे. और इन दोनों के जोड़ का अर्थ ये कि कुछ बार उल्टा चलेगा और फिर सीधा. उनके इतने वर्ष के अनुभव में ये मिश्रण चुदने वाली महिला को अत्यधिक सुख देता था, क्योंकि उसका शरीर लगातार एक उधेड़बुन में रहता था कि आक्रमण किस प्रकार का होगा. जीवन और बलवंत ५ धक्कों से इस विविधता का आरम्भ करते थे और हर परिवर्तन में उसे दो धक्कों से बढ़ा देते थे. अर्थात ५ उल्टे , ७ सीधे, ९ उलटे ११ सीधे. इसको पांच बार दोहरा कर फिर ५-७-९-११ शुरू हो जाता था.

गीता इस मेल में कई बार चुद चुकी थी और अथाह आनंद अनुभव कर चुकी थी. और इन दोनों के सिवाय कोई और नहीं था जो इस लय को इतनी सटीकता से निभा सकता. आज वो फिर उसी सुख के लिए अपने को तैयार कर रही थी.

और इसी के साथ जीवन और बलवंत ने अपना समागम प्रारम्भ किया. जीवन का लंड चूत में घुसता तो बलवंत का लंड गांड से बाहर निकलता. निश्चित गणना के पश्चात्, दोनों के लंड एक साथ अंदर जाते और बाहर निकलते. यही क्रम एक बढ़ते हुए क्रम में चलता फिर अचानक निचले क्रम को पकड़ लेता. गीता इस समय कामोत्कर्ष की चरम सीमा पार कर चुकी थी. उसकी चूत से बहती हुई धार उसकी जांघों और बिस्तर को भिगा रही थी. पर न उसका मन अभी भरा था न ही उसका शरीर हार मान रहा था.

दूसरी ओर जीवन और बलवंत भी अपने लौंड़ों को गीता की चूत और गांड के बीच की पतली झिल्ली अनुभव कर रहे थे. और ये कहना गलत नहीं होगा कि ये घर्षण उनके आनंद में चार चाँद लगा रहा था. गीता का मस्तिष्क इस विविधता का गणित समझने में सक्षम नहीं था. वो तो केवल उस केंद्र से उठती हुई आनंद की अनंत संवेदनाओं से ही अपने आप को प्रफुल्लित कर रहा था.

जीवन ने तभी बलवंत से कहा: “भाई, अब बस सीधे.” और इसी के साथ दोनों लौड़े अपने अपने गंतव्य में एक साथ अंदर और बाहर होने लगे. इसका अर्थ ये भी था कि जीवन का अब रस निकलने वाला ही था. जब इस क्रम के १० -१५ धक्के हो चुके तो जीवन ने कहा.

“भाभी, कहाँ छोड़ना है?”

“हम्प्फ हम्प्फ मेरे हम्प्फ मुंह में हम्प्फ हम्प्फ हम्प्फ।”

ये सुनकर दोनों ने अपनी गति सामन्य की और फिर धीमी करते हुए पहले बलवंत ने अपने लौड़े को गीता की गांड से निकाला और हट गया. गीता ने भी रूककर अपने आपको बहुत संभाल कर जीवन के लंड से अलग किया और बिस्तर के किनारे बैठ गयी. जीवन भी उठा और उठकर गीता के सामने फिर खड़ा हो गया. अब दोबारा से गीता ने दोनों के लंड चाटते हुए चूसना शुरू कर दिया. पर अब दोनों अपने लक्ष्य पर पहुँच चुके थे. पहले जीवन ने अपने गाढ़े सफ़ेद रस से गीता का मुंह भर दिया. गीता ने एक बूँद भी बेकार नहीं जाने दी. और जब तक उसने उसका सेवन पूरा करके बलवंत के लंड को मुंह में डाला तो बलवंत ने भी उसके मुंह को मलाई से भर दिया.

अंततः, सब अपने अपने लक्ष्य को पाकर संतुष्ट थे. कुछ मिनट यूँ ही सुख की अनिभूति करने के बाद गीता बोल उठी.

गीता: “यहाँ सोना संभव नहीं, पूरा बिस्तर गीला है, चलिए दूसरे शयनकक्ष में सोते हैं.”

तीनों यूँ ही नंगे दूसरे कमरे में सोने के लिए चले गए.

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अग्रिमा का खेल:

अग्रिमा २ बजे तक अपने घर पहुँच गयी. मोना और उसने एक दूसरे को कई बार संतुष्ट किया था. फिर जब तीनों लड़के चले गए तो मोना की अतृप्य ताई ने भी दोनों की चूत चूसकर उन्हें एक बार और तृप्त किया. आने के पहले ताईजी ने मोना को ५००० रुपये भी दिए. तीनों लड़कों को भी उन्होंने २-२००० दिए थे. ये इस बात की भी गारंटी थे कि वे बात फैलाएंगे नहीं. और उन्हें अगले सप्ताह इसी दिन फिर आमंत्रित किया था.

अग्रिमा घर आकर स्नान करके अपने कमरे में जाकर सो गई. आज न वो कॉलेज गई न काम पर.

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सुनीति के घर

शाम हो चुकी थी. अब आज क्या होगा ये बताना इस समय संभव नहीं. पर आज कुछ न कुछ तो होगा ही.

क्रमशः
 
तीसरा घर: शीला और समर्थ सिंह

अध्याय ३.२

शीला का घर:

दिंची क्लब के आयोजन के लगभग एक सप्ताह बाद, सांय काल में समर्थ और शीला अपने घर की बैठक में बैठे हुए थे. उनका ६५” का OLED टीवी इस समय चल रहा था और दोनों उसपर चल रहे कार्यक्रम को देख रहे थे. ये कार्यक्रम उनके ही घर के एक कमरे से प्रसारित हो रहा था. और जैसा कि आप जानते हैं कि समर्थ के घर का हर कमरा वीडियो कैमरों से सज्जित था. और इस कार्यक्रम के कलाकार भी उनके ही परिवारजन थे.

टीवी पर इस समय उनकी छोटी बेटी का फिल्मांकन हो रहा था. सुरेखा की चूत में नितिन ने अपना लौड़ा डाला हुआ था और उसका मुंह निखिल के लंड से भरा हुआ था. सुप्रिया पीठ के बल लेटी हुई थी और उसका चेहरा बहुत ही समीप से दिख रहा था. दोनों भाई उसे बड़े प्यार से चोद रहे थे और सुरेखा भी इसका आनंद ले रही थी. सुप्रिया आज ऑफिस अपने ही घर चली गई थी. परन्तु सुरेखा आ गयी थी दोपहर में ही. और निखिल और नितिन के आने के पश्चात् सुरेखा उनके साथ एक शयनकक्ष में चली गई थी.

शीला: “सुरेखा ने किसी प्यासी मछली के समान हमारी जीवन शैली को अपना लिया है. अब उसे भी चुदवाने में बहुत आनंद आता है. बेचारी न जाने कितने दिनों से प्यार की भूखी थी.”

समर्थ: “मुझे तुम्हें कुछ बताना है.” उसका स्वर गंभीर था.

शीला: “ऐसा क्या है जो बताने के पहले पूछ रहे हो. सब ठीक तो है.”

समर्थ खड़ा होते हुए: “नहीं, सब ठीक नहीं है.” ये कहकर वो अपने घर में बने ऑफिस में गया और एक लिफाफा ले कर आया और शीला के हाथ में दिया.

समर्थ: “मैंने अपनी सिक्युरिटी कंपनी के द्वारा नागेश की जासूसी करवाई, पिछले दस दिनों में. अभी भी चल रही है.”

शीला ने लिफाफा खोला तो हतप्रभ रह गई. इसमें नागेश अपने विदेश दौरे पर अन्य लोगों के साथ सम्भोग में सलग्न था. पर आश्चर्य की बात ये थी कि वो स्त्रियों नहीं बल्कि दूसरे आदमियों के साथ लिप्त था. कहीं वो लंड चूस रहा था तो कहीं गांड मरवा रहा था.

समर्थ: “मैंने अपने वकील से सुरेखा की ओर से तलाक का नोटिस बनवा दिया है. जब वो वापिस आएगा तब उसे वो सौंप दिया आएगा. इन चित्रों के साथ. मुझे नहीं लगता कि वो कोई आपत्ति करेगा. उसे शहर छोड़ने के लिए मैंने कुछ राशि का प्रबंध किया है. उसकी कंपनी के MD से भी बात की है, वो उसे दूसरे शहर स्थानांतरित कर देंगे. मैंने उन्हें कारण नहीं बताया पर उन्होंने मेरी विनती स्वीकार कर ली है.”

शीला: “पर सुरेखा?”

समर्थ: “तुम्हें उससे बात करनी है. मेरा कुछ कहना अभी सही नहीं होगा. मुझे नहीं लगता कि सुरेखा वैसे भी उसके साथ रहना चाहती है, और ये देखकर तो बिल्कुल ही नहीं. मुझे एक बात की संतुष्टि है.”

शीला: “क्या?

समर्थ: “अब चूँकि इन दोनों में कई महीनों से शारीरिक सम्बन्ध नहीं हैं, तो सुप्रिया किसी भी प्रकार के सेक्स रोग से बच गई.”

शीला: “मैं आज ही रात को सुरेखा से बात करती हूँ.”

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सुप्रिया का घर:

सुप्रिया अपने घर आज एक अलग ही आशय से गई थी. उसने आज अपनी भांजी संजना को अपने घर कुछ बात करने के लिए आमंत्रित किया था. संजना, मौसी के घर निर्धारित समय पर पहुँच गई. सुप्रिया मौसी को वो बहुत पसंद करती थी. उनका स्वभाव और उनकी सुंदरता ने उसे सदा प्रभावित किया था. पर आज अकेले बुलाये जाने का उसे रहस्य नहीं समझ में आया.

सुप्रिया ने उसे घर में अंदर बुलाया और दोनों बैठकर पहले तो संजना की पढाई के बारे में बातें करते रहे. संजना की बातों से उसके बिज़नेस में रूचि तो समझ में आ गई. फिर सुप्रिया ने अपनी बात उस ओर मोड़ी जिसके लिए संजना को बुलाया था.

सुप्रिया: “आजकल सुरेखा का मूड कैसा है. मैंने देखा था कि कुछ दिन पहले तक वो बहुत उखड़ी हुई रहती थी.”

संजना: “पता है मौसी, अब तो लगता है की मम्मी बिल्कुल बदल गयी हैं. जहाँ हम दोनों को बात बात पर डाँट देती थीं, अब तो बहुत प्यार और संयम से समझाती हैं. जो भी हुआ है, उनके लिए बहुत अच्छा है.”

सुप्रिया: “हम्म्म्म, मेरे विचार से मुझे पता है क्या हुआ है.”

संजना: “क्या मौसी?”

सुप्रिया: “मैं वो भी बता दूँगी। और तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड वगैरह है या नहीं?”

संजना: “नहीं मौसी, दोस्त तो बहुत हैं, पर बॉयफ्रेंड लायक कोई नहीं. और वो दोस्त भी हैं या नहीं मुझे पता नहीं. हमेशा ऐसे देखते हैं जैसे मुझे नंगा कर रहे हैं.” कहते हुए संजना ने अपने मुंह पर हाथ रख दिया अपितु कोई गलत बात निकल गई हो मुंह से.”

सुप्रिया: “इसमें शर्माने वाली कोई बात नहीं, संजना. इस आयु में लड़कों को हर लड़की में एक ही आकर्षण होता है. और आजकल ऐसा भी नहीं कि लड़कियां इससे दूर भागती हैं. तुम्हारी कुछ सहेलियां तो अवश्य इसका लाभ उठाती ही होंगी.”

संजना: “जी मौसी, कुछ ने तो ४-४ बॉयफ्रेंड रखे हुए हैं.”

सुप्रिया: “इसमें कोई गलत नहीं है. ये जवानी दोबारा तो आनी नहीं, तो जितना हो सके उसका मज़ा लेना चाहिए.”

संजना ने आश्चर्य से मौसी को देखा.

संजना: “मौसी, आपको ये गलत नहीं लगता?”

सुप्रिया: “किंचित भी नहीं. जब मैं तुम्हारी उम्र की थी तो मेरे तो ६ बॉयफ्रेंड थे.” और फिर थोड़ा आगे झुककर संजना के पास आकर कुछ षड्यंत्रकारी स्वर में, “और इतनी ही गर्लफ्रेंड भी थीं.”

संजना स्तब्ध रह गई.

संजना, “मौसी, गर्लफ्रेंड यानि?”

सुप्रिया ने अपने हाथ को संजना की जांघ पर हल्के हल्के चलते हुए उत्तर दिया, “हम्म्म्म! जो तुम समझ रही हो वो सच है. और पता है मेरी सबसे अच्छी गर्लफ्रेंड का नाम क्या था?”

संजना: “नहीं.”

सुप्रिया ने फुसफुसाकर बोला, “सुरेखा. सुरेखा था नाम उसका.”

संजना को काटो तो खून नहीं.

संजना: “मम्मी!”

सुप्रिया ने सिर हिलाकर मुस्कुराकर हामी भरी.

संजना: “आप तो बहनें हैं फिर कैसे.”

सुप्रिया: “क्योंकि सबसे बड़ा सुख शारीरिक होता है. और हम साथ ही सोती थीं, तो कोई समस्या ही नहीं थी.”

संजना सोच में डूब गई. उसे कभी सपने में भी ये विचार नहीं आया था की उसकी माँ लेस्बियन सम्बन्ध में कभी रही होगी. और तो और वो भी उसकी मौसी के साथ. तभी उसे दूर से किसी के बोलने की आवाज़ आयी. शायद मौसी उससे कुछ कह रही थीं. उसने उनकी बात पर ध्यान दिया.

सुप्रिया: “कहाँ खो गयीं, मेरी बात सुनी?”

संजना: “नहीं मौसी, सॉरी मैं कुछ सोच रही थी.”

सुप्रिया ने संजना की जांघ पर हाथ चलते हुए उसकी चूत के ऊपर रोक दिया. संजना उनकी ओर एकटक देख रही थी.

सुप्रिया: “मैंने कहा कि मैं चाहती हूँ की हम दोनों भी वैसे ही प्यार करें.” ये कहकर वो रुक गई और संजना की प्रतिक्रिया देखने लगी. संजना ने उत्तर नहीं दिया पर सुप्रिया के हाथ को हटाया भी नहीं.

फिर संजना हकलाते हुए बोली, “पर मम्मी को पता लगा तो.....”

सुप्रिया ने अपने हाथ से संजना को चूत पर दबाव बनाकर कहा, “ कौन बताएगा? और सच कहूँ तो वो स्वयं तुम्हारी इस मिठास को चखना चाहेगी.” ये कहते हुए सुप्रिया ने संजना के होंठ चूम लिए.

कुछ ही क्षणों में ये चुम्बन प्रगाढ़ हो गया. संजना की प्रतिक्रिया को स्वीकारात्मक समझते हुए सुप्रिया खड़ी हो गई और अपना हाथ संजना की ओर बढ़ाया.

सुप्रिया, “बेबी, ये सही स्थान नहीं है. मेरे कमरे में चलते हैं.”

संजना वशीभूत सी होकर सुप्रिया के साथ उसके कमरे में जा पहुंची. सुप्रिया ने दरवाजा बंद किया और अपने कपडे निकालने लगी और पालक झपकते ही वो संजना के सामने पूरी नंगी खड़ी थी.

फिर वो संजना की ओर बढ़ी और उसका चेहरा हाथ में लेकर प्यार से बोली, “शर्मा मत मेरी गुड़िया, तुमने कभी किसी स्त्री के साथ कुछ भी नहीं किया न?”

संजना ने न में सिर हिलाया.

सुप्रिया: “तुम्हें आज से मैं वो सब सिखाऊँगी जो तुम्हें सीखना चाहिए.” कहते हुए सुप्रिया ने संजना के वस्त्र उतारने शुरू किये. पर जब सुप्रिया का हाथ उसकी पैंटी पर पड़ा तो संजना ने उसका हाथ पकड़ लिया.

संजना: “मौसी, ये गलत नहीं है न?”

सुप्रिया: “बिल्कुल भी नहीं.” ये कहकर उसने संजना को बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी पैंटी भी अलग कर दी. संजना की एकदम मलाईदार बुर अब उसके सामने थी. और उसे देखकर ये भी समझ आ गया की संजना एक अछूती कली है. उसने अपने भाग्य को धन्य माना जो उसे ऐसी बुर को भोगने का पहला अवसर मिला था.

उसने दोनों पंखुड़ियों को थोड़ा सा खोला और अपनी जीभ से बुर पर चमक रही नमी को चाट लिया.

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शीला का घर:

निखिल कुछ देर में नंगे ही बैठक में आया, उसके चेहरे पर पसीना चमक रहा था और एक संतुष्टि का भाव भी.

निखिल: “मौसी बहुत कमाल की हैं. मेरे लंड का पानी पूरा निचोड़कर पी गयीं.”

शीला: “क्या हुआ, तूने उसे चोदा नहीं.”

निखिल: “अपने छोटे भाई के लिए छोड़ दिया. आज उसी को सेवा करने दो उनकी.” ये कहकर उसने बार से अपने लिए एक पेग बनाया और टीवी पर चल रहे कार्यक्रम को देखने लगा.

निखिल: “नाना, जो कैमरे आपने लगाए हैं उनसे पिक्चर इतनी साफ आती है कि ऐसा लगता है कि हम वहीं हैं.”

समर्थ: “हाँ, बहुत उच्च कोटि के कैमरे लगाए हैं. पर अब मैं कुछ और करने के बारे में विचार कर रहा हूँ.”

निखिल: “इससे अधिक क्या करेंगे नानाजी?”

समर्थ: “3D, ये सबसे नए कैमरे हैं, और ये टीवी भी 3D पिक्चर दिखा सकता है. जो अभी कमी लग रही है वो भी नहीं रहेगी.”

निखिल: “वाओ, पर सारे घर में लगाने में बहुत खर्चा नहीं आएगा?”

समर्थ: “हाँ, २८ लाख का बजट दिया है. अगले हफ्ते में उन्हें लगाने के लिए उनका दल आएगा.”

निखिल: “ओके, मैं तो अभी से उसके द्वारा बने वीडियो के बारे में सोच रहा हूँ.”

समर्थ और शीला हंसने लगे.

निखिल: “नानी, पार्थ का फोन आया था. आपका दिंची क्लब का प्रवेश की प्रक्रिया पूरी करने हेतु उसने आपसे कोई दिन चुनने के लिए कहा है.”

शीला समर्थ से, “आप क्या कहते हो, कब जाऊँ?”

समर्थ: “ऐसा करो जिस दिन ये लोग कैमरे लगाने आ रहे हैं उसी दिन चली जाओ. उस दिन मेरे सिवाय यहाँ किसी की आवश्यकता नहीं है.”

शीला: “निखिल, जैसा नानाजी ने कहा है, वही आगे बता दे.”

निखिल: “जी नानी.”

शीला टीवी की ओर संकेत करते हुए: “और इन दोनों को बोल, अब बस करें खाना भी खाना है.”

निखिल ये सुनकर उठकर उस कमरे में चला गया.

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सुप्रिया का घर:

सुप्रिया के शयनकक्ष के बिस्तर पर संजना कसमसा रही थी. उसके दोनों पाँव पूरी तरह से फैले हुए थे और उसकी मौसी उसकी चूत में अपना चेहरा घुसाए हुए थी. सुप्रिया जैसी अनुभवी चूत चाटने वाली स्त्री के सामने संजना ने हाथ डाल दिए थे. उसने कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा थे कि इस प्रकार के सेक्स में इतना सुख है. और अब उसने ठान लिया था कि सेक्स के हर आयाम का वो सुख लेगी. परन्तु अभी उसे अपनी चूत में जो संवेदना हो रही थी उसके सामने उसकी आगे की किसी भी प्रकार की सोच पर पर्दा डल गया था.

सुप्रिया को भी इस अनछुई बुर के स्वाद ने विह्वल किया हुआ था. ऐसा स्वाद, ऐसी मिठास, ऐसी खुशबू उसे अपनी जवानी के दिनों की याद दिला रही थी. उसने ये निश्चय किया कि जब तक उसका मन इस रस से भर नहीं जाता, वो इसे अपने लिए बचा के रखेगी. हालाँकि उसे ये पता था कि एक बार ये सुख पाने के पश्चात् संजना जल्दी ही इसके आगे बढ़ना चाहेगी. और तो और उन्होंने अभी ये भी निश्चित नहीं किया था कि संजना का उद्घाटन कौन करेगा। इस पंक्ति में समर्थ अवश्य सबसे आगे थे, पर वो इस शुभ कार्य को किसी और को भी सौंप सकते थे.

संजना की अनचुदी बुर इस समय अश्रुधार बहा रही थी जिसके स्वाद से सुप्रिया अपने जीवन को धन्य मान रही थी.

“मौसी, मुझे अब बहुत अजीब लग रहा है, मौसी, ये क्या हो रहा है?”

मौसी तो अपने भोग में लीन थी, उसने कोई उत्तर नहीं दिया. वो जानती थी कि कुछ प्रश्न अपना उत्तर स्वयं ही ढूंढ लेते हैं. और यही हो भी रहा था.

“मौसी, मेरा सूसू निकल जायेगा मौसी. मुझे बहुत अजीब लग रहा हैं वहां. मौसी ..... मौ......सीईईईई....मम्मीईईई उउउह आऊवोह मौसी मेरी सूसू निकल गई मौसी आपके मुंह में. ये क्या हो गया!”

संजना के पूरा झड़ने के बाद सुप्रिया ने अपना कामरस से ओतप्रोत चेहरा उठाकर उसकी ओर देखा.

“कैसा लगा मेरी लाडो?”

“बहुत मजा आया मौसी, पर अपने मेरा सूसू क्यों पिया.”

सुप्रिया ने उसकी चूत पर एक बार फिर जीभ चलते हुए कहा, “पहली बात तो ये है कि ये तुम्हारी सूसू नहीं थी. जब हम औरतें सेक्स के समय चरम पर पहुँचती है, तब उनका शरीर ये रस छोड़ता है. इसे कामरस भी कहते हैं. और जो तुमने आज अनुभव किया है, उसके लिए इस संसार की हर स्त्री व्याकुल रहती है. अब ये समझ लो कि तुमने आनंद के उस द्वार को देख लिया है जिसके लिए हर मनुष्य क्या नहीं करता.”

“मौसी, हम ये फिर कर सकते हैं.” संजना ने उत्सुकता से पूछा.

“बिल्कुल, आज तुम मेरे ही साथ रुक जो रही हो. मैंने सुरेखा से अनुमति ले ली थी.”

“और भैया लोग, वो भी तो आते होंगे?”

“नहीं आज नाना नानी ने उसे किसी विशेष अभियान में लगाया हुआ है. वो दोनों वहीं रहेंगे. आज हम दोनों अकेले ही हैं. चल अब खाने की तयारी करते हैं.”

ये कहते हुए सुप्रिया ने कपडे डाले और कमरे के दरवाजे पर रुक गई. संजना भी शीघ्र कपड़े पहन कर आ गई और दोनों किचन में चले गए. जाते जाते सुप्रिया ने एक sms किया, “ मिशन सफल”

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सुरेखा का घर:

सजल आज अपने घर जल्दी पहुँच गया था. सुरेखा ने उसे पहले ही बता दिया था की वो नाना नानी के घर जा रही है. और बाद में संजना का फोन आया कि वो भी मौसी के घर जा रही है. सजल को ऐसा अवसर कम ही मिलता था जब ये दोनों घर से इतनी देर एक साथ बाहर हों. उसने घर में जाकर फटाफट अपने कपडे बदले और बाथरूम में घुस गया जहाँ पर वाशिंग मशीन लगी थी. खंगालकर उसने सुरेखा की एक पैंटी ढूंढ निकली और तुरंत अपने कमरे में घुसकर दरवाज़ा बंद कर लिया. फिर टीवी पर उसने एक इन्सेस्ट (पारिवारिक सम्भोग) की वीडियो लगाई जो उसने नेट से डाउनलोड की थी. और ये सब करके वो अपने बिस्तर पर बैठकर मस्ती से मूवी देखते हुए मुठ मारने लगा.

जब उसका एक बार झड़ गया तो उसने थोड़ी सफाई की और फिर दोबारा अपने लंड को खड़ा करने के लिए हिलाने लगा. कुछ ही देर में वो फिर तैयार था और उसने एक बार फिर अपनी माँ की पैंटी में मुठ मारकर अपना वीर्य छोड़ दिया. इस समय वो इतना आराम से था कि उसकी झपकी लग गई और वो सो गया.

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शीला का घर:

कमरे में पहुंचा तो देखा कि नितिन का वीर्य उसकी मौसी की चूत से बह रहा था जिसे अपनी उँगलियों में समेटकर खाने का प्रयास कर रही थी. उसके बाद सुरेखा फिर से नितिन का लंड चूसने लगी जैसे फिर चुदवाने की इच्छा हो. दोनों भाई एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा दिए.

निखिल: “क्या हुआ मौसी?”

सुरेखा: “मुझे और चुदवाने का मन है, तुम जाओ.”

निखिल: “अरे मौसी, सारी रात पड़ी है. नानी बुला रही हैं. चलिए.”

नितिन और सुरेखा उसी अवस्था में बैठक की ओर बढ़ गए.

सुरेखा: “मम्मी, आपने बुलाया?”

शीला ने सुरेखा की चूत से बहता हुआ वीर्य देखा तो उसे हंसी आ गई.

शीला: “ये ठीक है कि सालों से तेरी अच्छी चुदाई नहीं हुई, पर ये भी नहीं कि तू सब कुछ भूल जाये. चलो, खाने का समय है, खाने के बाद मुझे तुझसे कुछ आवश्यक बात भी करनी है.”

सुरेखा ने हाथ मुंह धोकर एक गाउन पहन लिया और खाने के लिए बैठ गई. तभी उसे ध्यान आया कि आज सजल घर में अकेला है क्यूंकि संजना भी सुप्रिया के घर पर है.

खाना समाप्त करने के बाद शीला सुरेखा को समर्थ के घर में बने ऑफिस में ले गई और दरवाजा बंद कर लिया.

सुरेखा: “क्या हुआ, मम्मी.”

शीला: “सुरेखा, विषय थोड़ा गंभीर है. पहले ये बता कि तेरे और नागेश के सेक्स सम्बन्ध कितने दिन पहले हुए थे.”

सुरेखा: “मम्मी, बात क्या है?”

शीला: “जो पूछा है उसका उत्तर दो, उलटे सवाल मत करो.” शीला का स्वर कठोर था.

सुरझा: “साल से अधिक हो गया. ठीक से याद नहीं पर साल से तो अधिक हो ही गया है.”

शीला ने कहा: “जो मैं अब बताने जा रही हूँ, तुम्हें इससे धक्का लगेगा, पर बताना भी आवश्यक है.” ये कहकर शीला ने वो लिफाफा सुरेखा की ओर बढ़ा दिया.

चित्र देखकर सुरेखा के चेहरे का रंग ही उड़ गया. वो रोने लगी. कुछ समय जब वो रो चुकी तब शीला ने उसे गले से लगाकर ढाढस बंधाया.

“तेरे पापा ने तलाक के पेपर बना लिए हैं. बाहर जाकर उस पर हस्ताक्षर कर देना. पापा ने नागेश का स्थानांतरण दूसरे शहर करवा दिया है. नागेश अगर कुछ न नुकुर करेगा तो ये चित्र हम बहुत जगह भेजेंगे. मेरे विचार से अब तुम उससे अपने आप को मुक्त मानो। ”

सुरेखा ने कुछ नहीं कहा और उठकर बाहर चली गई.

“पापा, पेपर कहाँ हैं?”

समर्थ उसके दुःख को समझ रहा था.

“सॉरी, बेटी.” फिर उसने उठकर अपने ऑफिस से पेपर्स ले आये और सुरेखा ने निश्चित स्थानों पर हस्ताक्षर कर दिए.

सुरेखा: “पापा, मैं घर जा रही हूँ. पता नहीं सजल ने कुछ खाया या नहीं.”

समर्थ: “निखिल, जाकर मौसी को छोड़कर आ.”

सुरेखा: “मैं चली जाऊंगी।”

समर्थ: “बिल्कुल भी नहीं. या तो यहीं रुको नहीं तो निखिल छोड़कर आएगा.”

सुरेखा: “ठीक है.”

ये कहकर वो अपने कपड़े बदलने चली गई और कोई १० मिनट में वापिस लौट आयी. समर्थ और शीला ने उसे गले लगाया.

“तू चिंता मत करना, हम अभी ज़िंदा हैं.”

“मुझे बस इस बात का दुःख है कि मुझे जानने में इतने साल लग गए. पर अब मैं मुक्त हुई.”

निखिल सुरेखा को लेकर निकल गया और उसे छोड़कर वापिस लौट आया.

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सुरेखा का घर:

सुरेखा ने अपने घर के अंदर जाकर देखा तो पूरे घर की बत्तियां जल रही थीं. उसने किचन में जाकर देखा तो पाया कि खाने के लिए कुछ भी नहीं था. उसे सजल की चिंता हुई. फिर वो अपने कमरे की और बढ़ी कि कपडे बदल कर खाने के लिए कुछ बना देगी. अचानक उसके पैर ठिठक गए. सजल के कमरे से कुछ आवाजें आ रही थीं जैसे कोई चुदाई कर रहा हो. उसने देखा कि दरवाजा तो बंद था पर लॉक नहीं था. उसने धीरे से खोलकर अंदर झाँका तो उसके होश उड़ गए. सजल सोया हुआ था पर उसका लंड उसके अंडरवियर से बाहर था और उसके ऊपर सुरेखा की पैंटी थी. उसने धीमे क़दमों से कमरे में प्रवेश किया और टीवी पर चल रहे दृश्य को देखा.

उसे ये समझने में अधिक समय नहीं लगा कि सजल एक इन्सेस्ट मूवी देख रहा था जिसमें संभवतः एक लड़का अपनी माँ की चुदाई कर रहा था. टीवी को देखा तो उसमें एक USB लगी हुई थी.उसने कमरे से बाहर जाकर दरवाजा बंद किया और अपने कमरे में जाकर एक पतली झीनी नाइटी पहन ली. उसके मन में सुप्रिया के विचार आ रहे थे. अगर घर में ही लंड उपलब्ध है तो उसका उपयोग करना चाहिए. कपड़े बदलकर उसने सजल का दरवाजा खटखटाते हुए उसे खाने के लिए आने के लिए कहा.

अपनी माँ की आवाज़ से सजल की आंख खुल गई. उसने देखा कि कमरा बंद है, पर मम्मी ने पुकारा था. उसने तुरंत टीवी बंद किया, अपना अंडरवियर ठीक किया, सुरेखा के पैंटी को तकिये के नीचे रखकर बाथरूम में जाकर मुंह धोया और कमरे से बाहर निकला. उसने किचन में कुछ आवाज सुनी तो समझ गया कि मम्मी कुछ बना रही है. धड़कते मन से वो किचन की ओर चल पड़ा.

किचन में पहुंचा तो देखा की सुरेखा कुछ बना रही है. पर उसने जो पहना था उसे देखकर सजल के लंड में फिर तनाव आ गया और उसके शार्ट में एक टेंट बन गया. इससे पहले कि वो कुछ समझता या करता सुरेखा उसकी ओर मुड़ी और उसकी भी ऑंखें सजल के टेंट पर पड़ीं.

“मैं आयी तो देखा तुम सो रहे थे.” सुरेखा ने सजल के शक को और बढ़ाते हुए कहा. अब सजल को ये नहीं समझ आया कि उसकी माँ ने क्या और कितना देखा है.

“मेरी आंख लग गई थी, थक कर. आप कब आयीं? आपने तो कहा था आज नाना के हर ही रहोगे.”

“अब बिस्तर पर लेट तुम ऐसा क्या कर रहे थे जो थक गए थे? कोई मूवी भी लगी थी तुम्हारे टीवी पर, कौन सी थी. चलो खाने के बाद साथ देखेंगे.” सुरेखा को सजल को छेड़ने में कुछ अधिक ही आनंद आ रहा था.

“पता नहीं, टीवी पर कोई चल रही होगी. मैं तो टीवी चलकर सो गया था.”

“चलो, कभी और सही. लो अब खाना खा लो, बस हल्का सा ये बना दिया है. वैसे भी थके होने पर कम ही खाना चाहिए.”

सजल ने प्लेट ली और डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाने लगा. सुरेखा उठकर किसी कमरे में गई और कुछ ही मिनट में लौट आई. अभी सुरेखा का मन नहीं भरा था सजल को सताने से.

“अरे, ये बताओ, तुमने मेरी पैंटी देखी है क्या वो नीली वाली? मैं वाशिंग मशीन में कपडे धोने डाल रही थी तो देखा वो नहीं है.”

सजल के गले में खाना अटक गया और उसे जोर का ठसका लगा. सुरेखा ने जल्दी से उठकर उसे पानी दिया और उसकी पीठ ठोकी. सजल की जब साँस सँभली तो उसने थोड़ा और पानी पिया.

“मुझे कैसे पता होगा आपकी पैंटी का? हो सकता है संजना ने ले ली हो गलती से.”

“हाँ, हो तो सकता है.”

सजल ने किसी तरह खाना खाया और प्लेट किचन में रखी और गुड नाइट कहकर अपने कमरे की ओर दौड़ गया. सुरेखा के चेहरे पर इस समय एक कुटिल मुस्कान नाच रही थी. सजल ने अपना कमरा लॉक किया और जल्दी से टीवी से USB निकला जिसमे मूवी थी. फिर उसने अपनी तकिया के नीचे से पैंटी निकालने के लिए हाथ बढ़ाया तो वहाँ कुछ नहीं था. वो परेशान हो गया. उसे याद था कि उसने पैंटी को तकिया के नीचे ही रखा था. उसे लगा कि शायद उसने वाशिंग मशीन में डाल दी हो. यही सोचकर उसने दरवाजा खोला तो हक्का बक्का रह गया.

दरवाजे पर उसकी माँ खड़ी थी और वो अपने हाथ में एक नीले रंग की पैंटी घुमा रही थीं.

“कुछ ढूंढ रहे थे क्या?”

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सुप्रिया का घर:

सुप्रिया ने खाने के बाद फिर एक बार संजना का रस चूसा और पिया. उसके मन को आत्मतृप्ति मिली.

सुप्रिया: “संजना, मुझे एक वचन दो.”

संजना: “क्या मौसी?”

सुप्रिया: “यही कि तुम अभी किसी भी आदमी से नहीं चुदवाओगी। मैं इस कली का रस जी भर कर पीना चाहती हूँ. और भी कुछ लोग हैं जो इस कुंवारी चूत का रस पीना चाहेंगे. क्या है न आजकल अनछुई कली मिलना असंभव है. क्या वचन देती हो. हाँ, ये अवश्य है कि तुम्हें हम अधिक दिनों तक नहीं रोकेंगे, और संभव हुआ तो तुम्हारी चूत का उद्घाटन भी एक विशिष्ट व्यक्ति से ही करवाएंगे, जिससे कि तुम्हें जीवन भर के लिए एक मधुर स्मृति मिल जाये.”

संजना: “मौसी, सच कहूँ तो मैं यही सोच रही थी. पर मैं आपको वचन देती हूँ की आपके बताये बिना मैं किसी भी पुरुष से नहीं चुदवाऊँगी।”

सुप्रिया: “अब तुम्हें ऐसा नहीं लगता कि तुम्हें भी जानना चाहिए कि मुझे तुम्हारे रस में ऐसा क्या स्वाद आया कि मैं न्योछावर हो गई.”

संजना: “हाँ, पर मैं क्या करूँ ?”

सुप्रिया ने अपने पाँवों को फैला कर अपनी चूत की पंखुड़ियों को सहलाते हुए कहा, “वही जो मैं अब तक कर रही थी. मेरी चूत को चूस और चाटकर अब तुम मुझे सुख दो और जानो कि क्या जादू है इसके रस में.”

संजना: “पर मुझे तो कुछ आता ही नहीं.”

सुप्रिया: “तुम शुरू तो करो, कुछ मैं बताती रहूंगी, और कुछ तुम स्वयं ही सीख लोगी.”

संजना ने अपना चेहरा सुप्रिया की जांघों के बीच में डाला और सेक्स के ज्ञान का दूसरा अध्याय पढ़ना शुरू किया.

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शीला का घर:

निखिल जब वापिस पहुंचा तो देखा कि नाना और नानी दोनों गायब हैं. नितिन बड़े टीवी पर कोई शो देख रहा था.

निखिल: “नानी कहाँ हैं?”

नितिन: “सोने चली गयीं.”

निखिल: “तो हम भी चलते हैं.”

नितिन: “नहीं, आज मना किया है आने को. दोनों अकेले ही रहेंगे.”

निखिल: “यार पता होता तो मैं मौसी के ही घर रुक जाता.”

शीला और समर्थ अपने कमरे में लेटे हुए थे और आने वाली शादी के बारे में बात कर रहे थे.

समर्थ: “सोच रहा हूँ, कल सुमति को बुला लेते हैं. कल हमारे सिवाय कोई और तो रहेगा नहीं, उसे बुला कर देखते हैं, कि शादी में क्या आयोजन ठीक रहेगा. शोनाली और जॉय से सीधे पूछना अच्छा नहीं लगेगा.”

शीला: “ठीक है, कल बुला लूंगी। “

समर्थ: “क्या हुआ आज बच्चों को मना कर दिया आने के लिए.”

शीला: “रोज रोज की चुदाई से एक दो दिन छुट्टी भी चाहिए होती है. और हम दोनों को इस तरह लेटकर बातें किये हुए कितना समय हो गया.”

समर्थ: “सच है.”

शीला: “सुप्रिया ने संजना का भोग लगा लिया आज.”

समर्थ: “अच्छा है. चलो अब सो ही जाते हैं.”

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सुरेखा का घर:

सजल को काटो तो खून नहीं. अपनी माँ के हाथ में अपने वीर्य से सनी पैंटी देखकर उसके होश उड़ गए.

“अंदर चलो.” सुरेखा ने कठोर शब्दों में कहा.

सजल डरता हुआ कमरे में अंदर आ गया.

“बैठो” ये कहकर सुरेखा ने दरवाजा लॉक कर दिया.

उसके बाद वो टीवी को देखने लगी. उसने देख लिया की उसमें में USB नहीं लगी है.

“USB कहाँ है?”

“कौ क कौ कौन सी USB”

“मैंने पूछा की USB कहाँ है, तो मुझे पता होगा कि कौन सी. अब बताओ कहाँ है.?”

सजल ने अपने पैंट से USB निकल कर दे दी.

सुरेखा ने उसे टीवी में लगाकर टीवी चालू किया. सजल एकदम से सुरेखा के पांवों में लोट गया.

“मम्मी, नहीं. मुझे क्षमा कर दो. प्लीज. मत देखो.”

“तो तुम्हें अपनी मम्मी की पैंटी अच्छी लगती हैं?”

सजल पांव पकडे लेटा रहा.

“बोलो?”

सजल ने सिर हिलाकर झुका लिया.

“और तुम ये माँ बेटे की चुदाई की फिल्म देखते हो और मेरी पैंटी को गन्दा करते हो?” सुरेखा को इस खेल में बहुत आनंद आ रहा था.

“मुझसे गलती हो गई. अब ऐसा नहीं करूंगा.”

अब तक सुरेखा अपने शरीर से वो झीनी नाइटी उतार चुकी थी और केवल एक लाल रंग की पैंटी में खड़ी थी. सजल उसके पांवो में पड़ा हुआ था.

“हम्म्म, तो तुम्हें क्या दंड मिलना चाहिए?”

सजल अपना सर नीचे ही किये हुए बोला , “बस मुझे माफ़ कर दो, जो दंड देना है दो, पर माफ़ कर दो.”

“ठीक है, मेरी ओर देखो.” ये कहते हुए सुरेखा ने अपने दोनों पांव फैला दिए.

सजल ने ऊपर देखा तो उसकी आंखे फट गयीं. उसके ऊपर उसकी माँ दोनों पांव फैलाये केवल एक पैंटी में खड़ी थी. उसे उस पैंटी में कुछ गीलापन भी दिख रहा था. और उसके ऊपर माँ के दो पहाड़ जैसे मम्मे अपने पूरे सौंदर्य में तने हुए थे.

“तुम्हें मेरी पैंटी पसंद है न?आकर इसे चूसो. ख़बरदार जो उतारने की कोशिश की.” ये कहते हुए सुरेखा बिस्तर के किनारे पैर फैलाकर बैठ गई.

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सुप्रिया का घर:

संजना अपनी बुद्धि अनुसार सुप्रिया कि चूत चाटने का प्रयास कर रही थी. अब एक नौसखिये और अनुभवी में अंतर तो होता ही है. वो ये ध्यान करते हुए कि मौसी ने क्या किया था उसका ही अनुशरण कर रही थी. पर समस्या ये थी कि वो अपने आनंद में इतनी व्याप्त थी कि उसे ठीक से कुछ याद ही नहीं था. परन्तु, वो जितना संभव हो उतने प्यार से अपने काम में लगी थी.

सुप्रिया यही सोच रही थी कि इस कच्ची कली को तो अपने आप सीखने में अभी बहुत समय लगेगा. उसने इसी कारण संजना को युक्तियाँ सुझाईं. संजना भी अब इस काम में आनंद पा रही थी. सुप्रिया ने अपनी चूत के कपाट खोलकर संजना को बताया कि किस प्रकार से उसे अपनी जीभ से भीतर का विश्लेषण करना है. अब संजना थी तो नयी पर जैसे ही उसने अपनी जीभ अंदर सरकाई मानो उसे ज्ञान प्राप्त हो गया. उसने हर छिद्र, हर बिंदु को अपनी जीभ से टटोलना जब प्रारम्भ किया तो सुप्रिया के शरीर में आनंद की लहर दौड़ गई.

“हाँ, यूँ ही, बहुत अच्छा लग रहा है. उउउह व्वाआह संन्न ज न्नन्ना।”

संजना ने जब ये सुना तो उसे बहुत प्रसन्नता हुई की उसके उपक्रम से मौसी इतनी खुश है. उसने अपने प्रयास को और बढ़ा दिया.”

अचानक ही सुप्रिया का शरीर अकड़ गया, और संजना को अपनी जीभ पर कुछ खारे से पानी का अनुभव हुआ.

“उउउह व्वाआह संन्न ज न्नन्ना, मैं गईईई “

और संजना का पूरा मुंह सुप्रिया के रस से भर गया. सुप्रिया ने उसका सिर पकड़कर अपनी चूत में दबा लिया था इसीलिए संजना हट न पायी और उसे पूरा पानी पीना पड़ गया. पर उसे इसका स्वाद बुरा बिल्कुल भी नहीं लगा. जब सुप्रिया पूरी झड़ गई तो उसने बड़े प्यार से संजना के सिर पर हाथ फिराया और थपकी देकर संतोष व्यक्त किया.

संजना ने अपना चेहरा उठाकर सुप्रिया को देखा.

“तू तो बहुत जल्दी सीख गई मेरी गुड़िया रानी. आ मौसी को एक पप्पी दे.”

संजना सुप्रिया के पास लेट गयी और दोनों एक दूसरे को चूमते हुए प्यार करते रहे. और कुछ देर यूँ ही प्यार करते हुए दोनों एक दूसरे से नंगी ही लिपटी हुईं नींद की गोद में चली गयीं.

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सुरेखा का घर:

घुटनों के बल चलकर सजल सुरेखा के पाँवों के बीच में आ गया. फिर उसने पैंटी पर अपनी नाक रगड़ते हुए एक गहरी साँस ली. सुरेखा की चूत की भीनी सुगंध उसके नथुनों में भर गई और उसे जैसे एक नशा सा हो गया. उसने ३-४ बार यही क्रिया दोहराई, जब तक उसके फेफड़े सुरेखा की मादक गंध से भर नहीं गए. फिर उसने अपना मुंह पैंटी पर लगाया जो इस समय गीली हो चुकी थी. एक बार अपना मुंह उस पर लगाकर उसने लम्बा घूंट सा लिया जिससे की उसके मुंह में सुरेखा का अविरल बहता रस चला गया. उस रस को पीते ही सजल का नियंत्रण समाप्त हो गया. वो किसी भूखे मनुष्य की तरह जोर जोर से चूस कर मानो अपना मन और पेट दोनों ही भर लेने का प्रयास कर रहा हो.

सुरेखा इस समय आनंद के सागर में हिलोरें ले रही थी. सुप्रिया न जाने कब से इसका आनंद ले रही है. अब उसका क्रम है, और उसने जीवन में खोये हुए सुख के हर क्षण को वापिस पाने का निर्णय लिया. उसने प्रेम से अपनी जांघों के बीच अपने बेटे को देखा. उसने एक हाथ बढाकर उसके सिर को सहलाया. उसने अब तक कठोरता दिखाई थी, परन्तु वो नहीं चाहती थी कि उसका बेटा दब्बू बन जाये. उसने खेल समाप्त करने का निर्णय किया.

“तुम चाहो तो पैंटी उतार सकते हो.” ये कहते हुए सुरेखा ने अपनी गांड उठा ली. सजल ने इसे शुभ संकेत मानकर धीरे से पैंटी को सरकाकर उतार दिया. अब उसकी माँ की सुन्दर गुलाबी चूत उसकी आँखों के समक्ष थी. इस दृश्य की चाह में उसने न जाने कितनी रातों को मुठ मारी थी.

“मैं छू कर देखूं?”

“बिल्कुल “

सजल ने अपने हाथ को बढ़ाते हुए सुरेखा की चूत के कपाल छुए. फिर उसे प्यार से सहलाने लगा. ऐसा करने से सुरेखा की चूत पर कामरस के मोती चमकने लगे. सजल ने अपना मुंह आगे किया और उस सुगन्धित जीवन रस को जीभ से चाट लिया. सुरेखा का शरीर काँप उठा. तो यही वो संवेदना थी जो सुप्रिया अनुभव करती होगी. उसका लाड़ला बेटा ही आज उस स्थान का अवलोकन कर रहा था जहाँ से उसने जन्म लिया था. सुरेखा से अब और संयम नहीं हुआ. उसने सजल का सिर पकड़कर अपनी चूत पर जोर से दबा लिया. सजल की तो साँस ही रुक गयी. सुरेखा ने उसके सिर को छोड़ा और खड़ा होने के लिए कहा.

सुरेखा: “अगर तुम्हें मेरी पैंटी ही चाहिए थी तो अलग बात है, पर अगर तुम्हें और कुछ भी इच्छा है, तो मैं उसे पूरी करने के लिए तत्पर हूँ. ये मैं तुम्हें इसीलिए कह रही हूँ क्योंकि तुम्हारे पापा से मुझे डेढ़ साल से छुआ भी नहीं है. और मैं चुदास से विह्वल हूँ. क्या तुम मुझे प्यार करोगे? बुझाओगे मेरी प्यास?”

सजल को मानो कुबेर का खजाना मिल गया. उसने स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि आज के दिन ये चमत्कार लेकर आएगा. उसने सिर उठाकर अपनी माँ को एक प्रेमी की दृष्टि से देखा तो उसे अद्वितीय सौंदर्य की साक्षात् अप्सरा के दर्शन हुए. इस आयु में उसकी माँ का यौवन खिला हुआ था. अगर लड़कियों में सुंदरता होती है, तो उसकी माँ में एक अनूठा आकर्षण था.

सजल: “मम्मी, मेरा वश चले तो मैं संसार का आपको हर सुख देना चाहूंगा जो आपको मिलना चाहिए. आपके तन और मन दोनों को मैं अपने प्यार से ओतप्रोत कर दूंगा. आप जो भी इच्छा रखती हैं, मैं उसे अवश्य पूरा करूँगा. परन्तु, मुझे अभी कुछ आता नहीं है, बस फ़िल्में देखकर जो ज्ञान अर्जित किया है मेरा अनुभव वहीँ तक सीमित है. आप अगर इसमें मेरी शिक्षिका बनेंगी तो मैं अवश्य अच्छा शिष्य भी बनूँगा.”

सुरेखा की ऑंखें भीग गयीं. अपने पति के तिरिस्कार से व्यथित उसके मन में जीवन की एक नयी उमंग जग गयी. वो उठकर सोफे पर जा बैठी और उसने सजल को अपने पास बैठने का संकेत किया. सजल के पास बैठते ही उसने उसके सीने पर अपना सिर रख दिया और सुबकने लगी. सजल को समझ नहीं आया कि वो क्या करे. बड़े से बड़े अनुभवी पुरुष भी स्त्री के रोने का अर्थ नहीं समझे तो ये तो एक प्रकार से नादान था.

“मम्मी, रो क्यों रही हो.”

“मैंने सोचा भी नहीं था कि मुझे कभी दोबारा प्यार मिलेगा.” ये कहते हुए उसे इस बात की ग्लानि थी.

इस बात की कि उसने अपने शरीर को अपने पिता और भांजों को समर्पित किया, न कि उससे अथाह प्रेम करने वाले पुत्र को. पर उसने एक बात का निश्चय किया। आज तक उसकी गांड कोरी थी, और ये वो अपने बेटे को भेंट में देगी, समय आने पर. और तब तक वो इसमें किसी भी और पुरुष का प्रवेश वर्जित ही रखेगी. उसने एक मुस्कराहट से सोचा कि उसके पिता और भांजों में जो शर्त लगी है उसके इस कुंवारी गांड को लेकर, वो तीनों ही हार जायेंगे. ये सोचकर वो ठहठहा कर हंस पड़ी. अब सजल को फिर समझ नहीं आया की रोते रोते उसकी माँ हंसने क्यों लगी. पर उसने मूर्ख सिद्ध होने के स्थान पर चुप रहने ही श्रेयस्कर समझा.

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शीला का घर:

हालाँकि समर्थ सो चुके थे, पर शीला को नींद नहीं आ रही थी. उसका मन अपने परिवार के बारे में सोच रहा था. समर्थ ने उसे कभी भी किसी सुख से वंचित नहीं रखा. उसने समर्थ के सिर पर प्यार से हाथ चलाते हुए समर्थ के शांत चेहरे को देखकर ईश्वर का धन्यवाद किया जिसने उन्हें न केवल साथ ही रखा अपितु एक जैसी सोच भी दी. कुछ देर में उसने जब अपना हाथ हटाया तो एक हाथ ने उसकी कलाई पकड़ ली. समर्थ उसकी ओर देखकर मुस्कुरा रहे थे.

शीला: “आप सोये नहीं?”

समर्थ: “सो गया था, पर किसी खटके ने जगा दिया. देखा कि तुम सिर सहला रही हो तो सोने का स्वांग करता रहा. क्या हुआ? नींद नहीं आ रही?”

शीला: “नहीं, कुछ हुआ नहीं. बस प्रार्थना कर रही थी कि सब कुछ ऐसे ही अच्छे से चलता रहे. अब निखिल की भी शादी हो जाएगी. परिवार बढ़ने लगा है. हमें कभी बेटे की कमी नहीं लगी, पर अगर एक बेटा भी होता तो वंश आगे चलता.”

समर्थ: “सच कहूँ तो केवल बेटों से वंश चलने का मुझे बहुत औचित्य नहीं लगता. हमारी दोनों बेटियाँ हमारा ही वंश हैं, और उनके बेटे हमारा ही नाम आगे ले जायेंगे.”

शीला: “बात तो आप ठीक ही कह रहे हैं.”

समर्थ: “अब अगर तुम्हें बेटा किसी और कारण से चाहिए था तो अलग बात है. नातियों के लंड के लिए तुम्हें ३८ साल जो रुकना पड़ा था.”

शीला: “हटो, मुझसे मत बोलो.”

समर्थ: “ठीक है नहीं बोलता. पर तुम्हें नींद का इंजेक्शन लगा देता हूँ.” ये कहते हुए समर्थ ने शीला पर चढ़ाई कर दी.

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सुरेखा का घर:

सुरेखा: “सजल, मेरे लिए एक ड्रिंक बनाकर लाएगा? मुझे तुझसे कुछ और भी बात करनी है. अपने लिए चाहिए तो बियर ले ले.”

सजल को आश्चर्य हुआ क्योंकि सुरेखा कभी कभार ही ड्रिंक लेती थी.

सजल: “मम्मी, सब ठीक तो है.”

सुरेखा: “लेकर आ, तुझसे कुछ बात करनी है. सुन, बोतल साथ ही ले आना.” ये कहकर वो उठी और अपने कमरे की ओर बढ़ गई.

जब तक सजल उसकी ड्रिंक और कुछ नमकीन और अपने लिए बियर लाया तब तक सुरेखा ने वो नाइटी दोबारा ओढ़ ली थी. उसने अपनी ड्रिंक के दो घूंट लिए.

सुरेखा: “मैं नागेश को तलाक दे रही हूँ.”

सजल भौचक्का रह गया. आज उसके लिए दिन कुछ अलग ही भूचाल ला रहा था. सुरेखा ने कुछ न बोलकर उसके हाथ में एक लिफाफा दे दिया.

“देख अपने बाप की करतूत.” सुरेखा के शब्दों में घृणा का पुट था.

सजल ने लिफाफे के अंदर के देखा और कुछ ही चित्र देखकर उसके हाथों से लिफाफा छूटकर नीचे जा गिरा. अब पीने की बारी सजल की थी, सो उसने एक बार में ही बियर के चार पांच घूंट लिए. उसका सिर घूम रहा था.

“ये देखकर तो संजना पागल हो जाएगी, वो तो पापा को जैसे पूजती है.”

“मैं जानती हूँ, और इसीलिए मुझे इसमें तुम्हारी सहायता चाहिए. अच्छा होगा कि संजना को तुम इस बात को धीरे से बताओ. मैं नहीं चाहती कि इस कारण हम दोनों के बीच कोई मन मुटाव हो.”

सजल ने समझते हुए कहा, “ओके, मॉम. आई विल हैंडल इट। “

“अपने कपड़े उतारो “ सुरेखा ने कहा.

सजल ने अपने कपड़े उतार दिए पर अंडरवियर पहने रखा.

“ये भी निकालो. मुझे देखना है कि तुम कितने बड़े हो गए हो.”

सजल ने थोड़ा हिचकते हुए उसे भी उतार दिया और नंगा अपनी माँ के सामने खड़ा हो गया.

“बहुत अच्छा है, बहुत बड़ा और सुन्दर है, न जाने तुम्हारा ये लंड कैसे इतना बड़ा है, तुम्हारे पापा का तो इतना बड़ा था नहीं.” फिर कुछ सोचकर, “लगता है मेरे परिवार पर पड़ा है.”

सजल फिर चौंक गया.

“आपको कैसे पता?”

“मुझे और भी बहुत कुछ पता है, पर वो इस समय की चर्चा का विषय नहीं है. इधर आओ, आगे.”

सजल सुरेखा के आगे जाकर खड़ा ही गया. सुरेखा ने उसके लंड को अपने हाथ में लेकर तौला और धीरे धीरे सहलाने लगी. अब सजल उत्तेजित तो पहले ही था, आनन फानन में उसके लंड ने अपना पूरा रूप धारण कर लिया.

“हम्म, बहुत सुन्दर है.” ये कहकर सुरेखा ने अपना चेहरा आगे किया और अपनी नाक लगा कर सूंघा. “और बहुत सुगन्धित भी. स्वाद कैसा होगा?”

फिर कुछ देर यूँ ही उसे सहलाते हुए बोली, "ये जानने का तो केवल एक ही उपाय है.”

ये कहकर उसने सजल का लंड अपने मुंह में भर लिया. और फिर उसने चूसना शुरू किया. सजल तो मानो स्वर्ग में पहुँच गया. उसने कई बार इस प्रकार के सपने देखे थे, पर आज वो पूरे हो रहे थे.

सुरेखा पूरी तन्मयता से सजल के बढ़ते हुए लंड को चूस रही थी. वो उसको चाटती , फिर कुछ देर चूसती और फिर चाट लेती. साथ ही साथ उसने एक हाथ से सजल के अंडकोष भी सहलाने का काम किया हुआ था. सजल के पाँव काँप रहे थे. उसके लंड ने झटके लेने शुरू किये तो सुरेखा समझ गई कि अब सजल का पानी छूटने वाला है. पर उसने रुकने का नाम नहीं लिया. और फिर वही हुआ -- सजल ने उसके मुंह में ही अपना पानी छोड़ दिया. आज उसने पहली बार अपने हाथ के अलावा किसी दूसरे माध्यम से अपना पानी निकाला था. और वो भी अपनी ही माँ के मुंह में.

सुरेखा ने सजल के लंड का पानी पीकर उसके लंड को चाटकर साफ किया. और सोफे पर पीछे टिक कर बैठ गई. उसकी आँखों में एक संतुष्टि की चमक थी. उधर सजल भी खड़ा न रह सका और वहीँ सुरेखा के पास ही बैठ गया.

“थैंक यू, मॉम.”

“माई प्लेज़र.”

दोनों माँ बेटे बैठकर उनके सम्बन्ध के नए समीकरण के बारे में चिंतन करते हुए अपने ड्रिंक्स की चुस्कियाँ ले रहे थे.

सुरेखा: “तुम्हें नहीं लगता कि जो मैंने अभी किया उसका आभार तुम्हे भी प्रकट करना चाहिए.”

सजल: “मैं अपनी बियर पी लूँ उसके बाद. पर एक बात बताऊँ. ये मेरा सालों का सपना था, जो आज आपने पूरा किया है. मैं इसे कभी भी भूलूंगा नहीं.”

सुरेखा: “ऐसे प्रकरण भूलने के लिए नहीं होते. मैं भी तुम्हारा पहला स्वाद जीवन भर नहीं भूलूंगी.”

सजल की बियर जैसे ही ख़त्म हुई उसने सुरेखा के पांवों के बीच में अपना स्थान ग्रहण कर लिया.

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शीला का घर:

अगले दिन सुबह

सुबह समर्थ की नींद देर से खुली थी. देखा तो शीला उठ चुकी थी. बाथरूम से नित्य कर्म के बाद वो बाहर निकले तो देखा कि शीला किचन में भी नहीं है. तभी उन्होंने निखिल को नितिन के कमरे में जाते हुए देखा. वो भी सधे क़दमों से पीछे हो लिए. घर में कमरे बंद करने की आदत किसी को थी नहीं, तो वो बाहर जाकर अंदर का दृश्य देखने लगे.

शीला इस समय नितिन के ऊपर नंगी ही उछलकूद कर रही थी. नितिन भी नंगा ही था. नितिन ने निखिल को अंदर आते देख लिया था पर उसने चुप्पी साधी हुई थी और अपने कमर उछाल कर अपनी नानी की चूत में अपने लंड को पेल रहा था. निखिल ने भी अपना अंडरवियर उतारा और अपने लंड को थोड़ा हाथ से मसला. नितिन ने उसे आंख से संकेत किया तो उसने साथ पड़ी टेबल पर से वेसलीन उठाई और अपने लौड़े पर अधिक मात्रा में लगा ली. उसने फिर नितिन की ओर देखा. नितिन ने शीला की कमर को पकड़कर उसे अपने ऊपर झुका लिया और नीचे से लम्बे धक्के मरने लगा. इसके कारण शीला को अपने पीठ पीछे होती गतिविधि पर ध्यान नहीं गया.

निखिल ने अपने लौड़े को शीला की गांड के छेद पर रखा और एक करारा धक्का मारा, “गुड मॉर्निंग, नानी.” उसका लंड शीला की मुलायम गांड को चीरता हुआ जड़ तक घुस गया. शीला के साथ ये इतना अकस्मात हुआ था कि उसे सोचने समझने का समय ही नहीं मिला. और जब होश आया तो बहुत देर हो चुकी थी. अब उसकी चूत और गांड दोनों में ही मोटे लम्बे लौड़े पिले हुए थे. पर शीला जैसी चुड़क्कड़ बहुत जल्दी ही संभल गई.

“ऐसे भी कोई गुड मॉर्निंग करता है? पर अच्छा लगा तेरा ये ढंग गुड मॉर्निंग का. अब दोनों अच्छे से चोदो मुझे, कल रात तुम्हारा कुछ हुआ नहीं तो लग जाओ काम पर.”

नितिन और निखिल ने अपनी लय से नानी की लेनी शुरू कर दी. नितिन ने नाना की ओर देखा जो इस पुरे वृत्तांत को देख रहे थे. नितिन ने नानी की ओर संकेत करके अपने मुंह से चूसने का इशारा किया. देखकर समर्थ ने भी अपना पजामा उतारा और अपने लंड को सहलाते हुए शीला के सामने खड़े हो गए.

“सुना है आज तुम सबको गुड मॉर्निंग कर रही हो.”

“अब अपने सुना है तो सही ही होगा. आइये, आपकी भी सेवा कर दूँ.” ये कहकर शीला ने समर्थ के लंड में लेकर उस पर धावा बोल दिया.

कुछ ही देर में तीनों ने अपने पानी को निर्धारित छेदों में छोड़ दिया, और फिर अलग हो गए. शीला बिस्तर पर लेट कर अपने छेदों से रस निकाल कर चेहरे पर मल रही थी.

“दिन प्रारम्भ करने का इससे अच्छा तरीका कोई हो नहीं सकता.” शीला ने कहा. “चलो अब नाश्ते की तैयारी भी करनी है.”

“नानी आप खाना बनाने के लिए किसी को क्यों नहीं रख लेतीं?”

“और अपनी स्वंत्रता खो दूँ? झाड़ू पोंछे बर्तन वाली ही बहुत हैं ताक झांक के लिए.” ये कहकर शीला बाथरूम में घुसी और सफाई करने के बाद किचन में चली गई.

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सुप्रिया का घर:

अगले दिन सुबह

संजना जब सुबह उठी तो उसे एक सुखद अनुभूति का आभास हुआ. उसकी चूत में कुछ मीठा मीठा सा स्पंदन हो रहा था. उसने अपना हाथ नीचे किया तो वो किसी के बालों में उलझ गया.

“गुड मॉर्निंग, प्रेटी गर्ल.”

“मौसी! सुबह सुबह! वहां गन्दा होगा!”

“गन्दा तो हमेशा ही रहता है मेरी लाड़ो, इसीलिए तो साफ कर रही हूँ.” ये कहकर सुप्रिया ने संजना के पांव फैलाये और अपने नाश्ते के पहले के बुर के मधु का रसास्वादन करने में जुट गई.

संजना ने भी इसमें मौसी का साथ दिया और उनका सिर जोर से अपनी बुर पर दबा लिया. अब इतनी सुबह तो वैसे भी दबाव रहता है, तो संजना की बुर से एक तीव्र धारा छूटकर सुप्रिया के मुंह में समा गई. संजना जो इस खेल की नयी खिलाडी थी, उसे ये पता नहीं चला कि ये उसका पानी था या मूत्र. पर उसने सुप्रिया मौसी को देखा जो अब अपना चेहरा उठाकर उसे प्यार भरी दृष्टि से देख रही थीं तो उसने यही समझा कि वो अवश्य ही झड़ी है. पर सुप्रिया के अगले व्यक्तव्य ने उसके होश उड़ा दिए.

“तेरा हर रस बहुत मीठा है. मुझे अगर सुबह ये मिल जाता है तो जैसे एक अलग ही शक्ति आ जाती है.”

“मौसी, ये क्या था? मेरी सूसू तो नहीं पी ली आपने?”

“नहीं तो सुबह सवेरे तेरी चूत पीने का फायदा ही क्या होता?”

“आप… सूसू भी पीती हो?”

“सबकी नहीं. बस तेरी मम्मी की पीती थी और एक और स्त्री है उसकी जब तब अभी भी पी लेती हूँ. और कभी भी किसी की भी नहीं.”

संजना ये सुनकर सन्न रह गई. सुप्रिया उठकर बाथरूम में चली गई और संजना भी उठी और कपड़े पहनने लगी. वो रात रुकने के लिए कुछ भी नहीं लायी थी, अपना टूथ ब्रश भी नहीं. जब सुप्रिया बाहर निकली तो उसने घर जाने की अनुमति मांगी और अपनी कार से घर की ओर चल पड़ी.

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सुरेखा का घर:

पिछली रात

सजल अब अपने आत्मविश्वास को वापिस पा चुका था. अब उसे विश्वास था कि सुरेखा उससे खिन्न नहीं है.

सुरेखा के पांवों के बीच बैठकर सजल ने उसके दोनों पांव फैला दिए. नाइटी को ऊपर करते हुए उसने सामने खुली हुई बहुमूल्य निधि की ओर देख रहा था. पिछली बार के व्यवधान को याद करते हुए उसने अपने हाथ को हल्की ओस की बूंदों से भीगी चूत की पंखुड़ियों को छुआ. सुरेखा सिहर उठी. अपनी उँगलियों से उन्हें सहलाते हुए सजल अपने घुटनों के बल बैठ गया. फिर उसने अपनी ऊँगली हटाई और अपनी जीभ से उस सतह को चाटने लगा. सुरेखा आनंद से विभूत हो गई. उसने सजल के सिर को जोर से पकड़ कर अपनी चूत में दबा दिया. पर इस बार सजल चौकन्ना था. उसने अपने हाथ से सुरेखा के हाथ को हटा दिया.

“मम्मी, दम घुटता है.”

“ओह! सॉरी बेटा।”

अब सजल को इसके आगे क्या करना है इसका कोई प्रत्यक्ष अनुभव तो था नहीं. वही था जो उसने ब्लू फिल्मों में देखा था. और उनकी ही सीख को मानते हुए उसने सुरेखा की चूत को ऊपर से नीचे तक पूरी तन्मयता से चाटना शुरू किया. अपने मन में उन फिल्मों को रिवाइंड करते हुए उसने अपनी एक ऊँगली अंदर डाली और आगे पीछे करने लगा. सुरेखा की चूत पानी बहाने लगी और ऊँगली की यात्रा सरल हो गई. कुछ ही पलों में सजल की दो उँगलियाँ सुरेखा की थाह नाप रही थीं. और इस सबके साथ सजल ने अपनी जीभ का अभियान चालू ही रखा था. सुरेखा की सिसकियों और कराहों से सजल को ये तो समझ आ ही चुका था कि वो सही राह पर है. उसने अपने परिश्रम को और तेज कर दिया.

और अचानक सुरेखा का बांध टूट गया और उसकी चूत ने एक लम्बी धार में अपना पानी छोड़ दिया. सजल का चेहरा पूरा भीग गया. पर उसने हटने का प्रयास भी नहीं किया, बल्कि अपने काम में एकजुट होकर लगा रहा. पूरा झड़ जाने के बाद सुरेखा सोफे पर ही लम्बी साँसें लेते हुए ढेर हो गई. उसने प्यार से सजल के सिर पर हाथ फेर दिया. सजल उठा और सोफे पर ही उसके साथ बैठ गया.

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मुंबई का एक बंगला:

पिछली रात

(कहानी का ये हिस्सा भविष्य के एक प्रकरण से सम्बंधित है, हालाँकि ये मुख्य कथा का अंश नहीं है.)

देश के महानगर मुंबई के एक आलीशान बंगले के एक कमरे में तीन लोग थे. सोफे पर एक अधेड़ उम्र का आदमी नंगा बैठा हुआ था. उसका सिर झुका हुआ था. उसके सामने लगे बिस्तर पर एक अध्यधिक सुन्दर नंगी स्त्री एक १९-२० वर्ष के लड़के के लंड पर उछल रही थी. साथ ही साथ वो उस आदमी को उलाहना भी दे रही थी.

“देख गांडू, इसे कहते हैं चुदाई, इसे कहते हैं लौड़ा.”

लड़का भी कुछ पीछे नहीं था, हालाँकि उसे हिंदी काम ही आती थी.

“हे, डैड! नो हार्ड फीलिंग्स मैन. आपने इससे शादी करके बहुत अच्छा किया मैन। क्या मस्त आईटम है मेरा नया मॉम। सो बैड कि आपका अब खड़ा नहीं होता. ये चूत बिलकुल सोना है मैन एकदम सोना. यू नो व्हाट आई मीन.”

“उसे छोड़, तू मेरा ध्यान रख, मादरचोद. अंदर डाल और अच्छे से. आह, हाँ ऐसे ही. और जोर से.”

अचानक उस लड़के ने उस स्त्री की कमर पकड़ कर एक कुलाटी मारी और उसे नीचे करते हुए उसके ऊपर चढ़ गया. अब उसने द्रुत गति से चुदाई शुरू कर दी. वो स्त्री इस तेज चुदाई से और भी अधिक उत्तेजित हो गई.

लड़का उसके मम्मों को जानवर की तरह नोच रहा था. उनपर लाल निशान पड़ चुके थे, पर न उस स्त्री को, न ही लड़के को अपने कर्मकांड में कुछ कमी करने की आवश्यकता लगी.

इस भयंकर जंगली चुदाई के अंत में लड़के ने अपना वीर्य उस स्त्री की कोख में भर दिया. और उसे चूमते हुए उससे लिप्त रहा. कुछ देर तक दोनों यूँ ही चूमा चाटी में लगे रहे. इस बीच लड़के ने अपना लंड बाहर नहीं निकाला बल्कि अंदर ही चलाता रहा. अंत में वो अलग हुआ और वैसे ही नंगा अपने पिता के समक्ष खड़ा हो गया.

“थैंक्स, डैड. दिस वास अनादर ग्रेट फक. हे मॉम थैंक यू टू।” कहकर उसने अपने कपडे समेटे और कमरे से नंगा ही अपने कमरे में चला गया जहाँ कोई उसकी प्रतीक्षा कर रहा था.

“इधर आओ और अपना काम करो.” स्त्री ने उस आदमी को आदेश दिया.

वो उठा और अपना मुंह उस स्त्री की चूत में लगाकर चाटने लगा. कुछ ही क्षणों में उसने उसे पूरा साफ कर दिया. फिर उठकर वापिस सोफे पर बैठ गया. इस समय उसका लंड खड़ा हो चुका था.

“तुम खुश हो?” स्त्री ने उस आदमी के पास आकर पूछा. ये कहकर उसने उसके लंड को अपने मुंह में ले लिया. उस आदमी का लंड अब अपनी पत्नी को दूसरों से चुदते हुए देखने से ही खड़ा होता था. शादी के समय ऐसा नहीं था, पर २ सालों बाद अब उसका लंड केवल इसी परिस्थिति के खड़ा होता था. उस स्त्री को लंड चूसने का पुरुस्कार जल्दी ही मिल गया जब उस आदमी ने अपना वीर्य उसके मुंह में छोड़ दिया.

“हरजीत का फोन आया था. उसे @#$ शहर में एक शो के लिए पूछताझ आयी है. कोई अति विशिष्ट क्लब है वहां का. चुने हुए लोग ही होंगे वहाँ। सुना है उस क्लब के लड़कों के लंड कम से कम दस इंच के हैं. प्राइवेट शो है, और ये शादी शुदा औरतों का क्लब है. बात बाहर जाने का खतरा नहीं है. उन्होंने माँ बेटा और मेरे गैंग बैंग के लिए अनुरोध किया है. पैसा अच्छा दे रहे हैं. तुम कहो तो स्वीकार कर लें.”

उस आदमी ने कुछ देर सोचा फिर बोला, “ठीक है बहुत दिनों से तुम्हें इतने बड़े लौंड़ों से चुदते नहीं देखा है. अगर बात बाहर नहीं निकले तो स्वीकार कर सकती हो.”

“हाँ मुझे भी ऐसे गैंग बैंग किये हुए बहुत दिन हो गए हैं. और तुम्हें भी इतने लौंड़ों का पानी पिए हुए भी एक लम्बा समय हो चूका है. वैसे वहां और औरतों की भी चुदाई होगी, तुम्हें उनकी चूतें भी साफ करने का अवसर मिलेगा.”

“कब जाना होगा.”

“अगले महीने. अब आओ अपनी बीवी को चोदो, ये सोचकर तुम्हारा लंड फिर खड़ा हो गया है.”

ये कहते हुए वो बॉलीवुड अभिनेत्री जाकर बिस्तर पर लेट गई. उसका अभिनेता पति जो अपनी पत्नी से लगभग २० साल बड़ा था, उसके ऊपर चढ़ गया और उसे चोदने में व्यस्त हो गया.

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सुरेखा का घर:

पिछली रात

थोड़ी देर दोनों माँ बेटे शांत ही बैठे रहे. सजल कुछ सोच रहा था.

सजल: “मैं ये नहीं सोच पा रहा कि संजना को पापा के बारे में बताएँगे कैसे?”

सुरेखा: “इसी कारण मैं चाहती हूँ कि तुम ये करो. सोचकर देखो. कल ही बताने की जल्दी मत करो. पर थोड़ी पृष्ठभूमि बना लो, फिर बताना.”

सजल: “ये भी सही है. पर पापा ऐसा कर सकते हैं विश्वास नहीं होता.”

सुरेखा: “मुझे नहीं लगता कि ये अधिक पुरानी बात है. और दूसरे क्या तुम ये विश्वास कर सकते थे कि हम दोनों यहाँ इस स्थिति में होंगे?”

सजल ने कुछ उत्तर नहीं दिया. उसे समझ आ गया था कि माँ क्या कहना चाह रही थी. उसने उठकर अपने लिए एक बियर लाई और सुरेखा का भी एक और पेग बना दिया. धीरे पीने के कारण वो नशे में नहीं थे बल्कि एक हल्की सी खुमारी थी.

सजल: “अब आगे क्या करना है, क्या चुदाई करें?”

सजल का आत्मविश्वास अब लौट चुका था.

“मैं भी यही सोच रही थी.” ये कहकर सुरेखा ने अपनी ड्रिंक ख़त्म की और गाउन उतारते हुए बिस्तर की और बढ़ गई. सजल को कुछ समय लगा अपनी बियर पीने में, फिर वो भी बिस्तर पर पहुँच गया. सुरेखा ने रिमोट उठाया और USB की फिल्म चालू कर दी. इस बार सजल ने कुछ नहीं कहा, बस जाकर सुरेखा के बगल में बैठ गया.

“कब से देख रहे हो ऐसी फ़िल्में?”

“अभी एक दो ही देखी है.”

“हम्म्म”

तभी वहां परस्पर मौखिक सहवास का दृश्य आ जाता है. सुरेखा सजल की और देखकर, “ये करते हैं थोड़ा”

ये कहकर वो सजल को लिटा देती है और अपनी चूत को सजल के मुंह पर रखते हुए सजल का लंड अपने मुंह में ले लेती है. दोनों इस स्थिति में कोई ४-५ मिनट रहते है. जब सुरेखा को लगता है कि उसकी चूत और सजल का लंड पर्याप्त मात्रा में गीले हो चुके हैं तो उसने अपना शरीर ऊपर से हटा लिया, और लेटते हुए अपने पैर चौड़े कर लिए. सजल ने उनके बीच में अब अपना स्थान और अपने लंड को चूत पर रखते एक प्यार भरा धक्का दिया. लंड गप्प की ध्वनि के साथ सुरेखा की चूत में प्रवेश कर गया.

“अब धक्के मार, डरना नहीं और न ही रुकना जब तक तेरा हो न जाये.”

हालाँकि सजल का किसी चूत में ये पहला प्रवेश था, पर जैसे खाना मुंह में ही जाता है, उसी प्रकार सजल ने भी एक स्वाभाविक और प्राकृतिक लय में अपने लंड को अंदर से बाहर चलाना शुरू कर दिया. सुरेखा भी ये देख रही थी कि सजल की अपनी बुद्धि और क्षमता कितनी है. वो उसे पूरा सहयोग और प्रोत्साहन तो दे रही थी पर किसी भी प्रकार का सञ्चालन या निर्देशन नहीं कर रही थी. उसे ये भी भांपना था कि सजल को आगे कितनी और किस प्रकार की ट्रेनिंग आवश्यक होगी.

अब जैसा कि किसी के भी साथ पहली बार होता ही, सजल को अपने आपको रोकने में असमर्थता हुई. और वो अचानक ही सुरेखा की चूत में ही झड़ गया. इस हादसे से वो बहुत ही व्याकुल हो गया. उसका चेहरा झुक गया और उसे लगा कि वो अपनी माँ को संतुष्ट करने में असफल रहा था. सुरेखा ने उसकी इस भावना को ताड़ लिया और वो सजल को अपनी बाँहों में लेकर चूमने लगी.

सुरेखा: "अगर तुम्हें लग रहा है की जल्दी झड़ने के कारण तुम फेल हो गए और मैं संतुष्ट नहीं हुई, तो तुम्हारी ये सोच गलत है. पहली बात तो ये, कि शुरू शुरू में कई बार ये होना संभव होता है. वो इसीलिए कि तुम्हें अपने शरीर की लय और क्षमता का अंदाजा नहीं है. ये सब ताल बनने में समय लगता है. अपने झड़ने को कैसे रोकना और खींचना संभव है ये भी तुम्हें नहीं पता. जानते हो मैंने तुम्हे इस बार कुछ भी क्यों नहीं कहा?”

सजल ने नकारात्मक भाव में सिर हिलाया.

“इसीलिए, कि ये तुम्हारी पहली चुदाई थी, जो तुम्हें अपने ही तरीके से करनी थी. अब मान लो मेरे स्थान पर तुम्हारी नई पत्नी होती तो क्या तुम्हें तब भी ऐसा ही लगता?”

“नहीं, पर मॉम मूवी में तो वो….”

“बेटा, वो फिल्म है, उसमें दस बार में एक सीन होता है. उनके और अपने बीच में अंतर समझो. अब तुम चिंता करना छोड़ो. मैं तुम्हे सिखाऊंगी और संभव हुआ तो एक और शिक्षिका भी है मेरी पहचान की, जो तुम्हें इस कला में महारथी बना देगी. अब हंसो.”

सजल हंसने लगा और उसके मन से एक बोझ उतर गया.

“चलो अब तुम्हारी पहली चुदाई के लिए चियर्स करते हैं.”

सुरेखा ने अपनी नयी ड्रिंक बनाई और सजल ने एक और बियर ली. कुछ देर सामान्य बातें करने के बाद दोनों एक दूसरे की बाँहों में ही सो गए.

क्रमशः
 
चौथा घर: मिशेल और रिचर्ड डिसूज़ा

अध्याय ४.२

क्लबहाउस का एक कमरा:

जैसन के चारों बिज़नेस पार्टनर्स बोरिस, रिकी, मार्टिन और डॉन के रुकने का प्रबंध रिचर्ड ने जैसन के कहने पर क्लब हाउस के कमरों में ही कर दिया था. इस समय बोरिस के कमरे में चारों मित्र एक गोले में खड़े हुए थे. उनके बलिष्ठ काले शरीरों पर कोई कपड़ा नहीं था. उनके शरीर जो उनकी लम्बाई के अनुरूप ही चौड़े थे. चारों ६’२” से अधिक लम्बे थे और अपने देश के राष्ट्र स्तर के बॉलीवाल के खिलाडी रह चुके थे. उनके शरीर की विशालता यहीं समाप्त नहीं होती थी. उनके पुरुषात्मक गर्व का मुख्य कारण उनकी जांघों के बीच लटकते माँस के पिंड थे जिनकी लम्बाई ११” से अधिक थी. बेहद काले और तने हुए ये लंड चौड़ाई ने किसी कलाई से भी अधिक चौड़े थे.

उनके इस प्रकार से गोले में खड़े होने का कारण था दो सुन्दर स्त्रियां जो इस समय उनके लौंड़ों को एक एक करके घूमते हुए चूस और चाट रही थीं. ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि ये कार्य किसी भी साधारण स्त्री के बस का रोग नहीं था. कोई भी औरत उनका पूरा लंड अपने मुंह में लेने की सक्षम नहीं थी. इसके लिए एक विशेष प्रतिभा की आवश्यकता थी, जो इसमें से एक स्त्री में अवश्य थी. हालाँकि दूसरी स्त्री अभी उस राह पर थी. दोनों औरतें भी इस समय नंगी ही थीं और घुटने पर चलते हुए एक लंड से दूसरे की ओर चल रही थीं. पहली की उम्र दूसरे से लगभग दोगुनी थी, यही कारण था कि वो अपेक्षाकृत अधिक गहराई तक किसी भी लंड को ले पा रही थी.

दोनों अपने परिवार को ये बोले हुए थीं कि उन्हें कुछ शॉपिंग करनी थी. हालाँकि सच इस कमरे में दिखाई दे रहा था.

“या, तुम बहुत अच्छा लंड चूसती हो. जैसन ने तुम्हारे बारे में बिल्कुल सही बताया था.”मार्टिन ने उस मध्यम आयु की स्त्री से कहा.

“ये लड़की भी कुछ काम नहीं, मैन. शी सक्स वैल टू.” रिकी ने उत्तर दिया.

“दोनों बहुत अच्छा चूसती हैं. नो डाउट।” बोरिस ने भी टिप्पणी की.

“मॉम, क्या ये अब चुदाई के लिए रेडी हैं?” लड़की ने उस बड़ी स्त्री से पूछा जो उसकी माँ थी.

“आई थिंक दे आर, ऐलिस. अब देखें कि ये चोदते कैसा हैं.”

“नॉट सो फ़ास्ट, लेडीस, हमें अपनी चूत का स्वाद तो दो पहले.” डॉन जो अब तक चुप था बोल पड़ा.

इस बात पर चारों आदमियों ने सहारा देकर उन्हें उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया. ये दोनों कोई और नहीं जैसन की पत्नी ईव और बेटी ऐलिस थीं. उन्होंने घर न जाकर पहले अपनी चूत की सिकाई करवाना अधिक महत्वपूर्ण समझा था. इन चारों पर ईव का मन बहुत दिन से आया हुआ था. समय न गंवाकर उसने आज ही अपनी इच्छा पूरी करने का निश्चय किया था. ऐलिस उसके बहाने को भांप गई थी, क्योंकि उन दोनों ने अपनी पैकिंग साथ की थी. पूछने पर ईव ने उसे भी आमंत्रित कर लिया था. इसमें कोई अचरज नहीं था क्योंकि कई बार ईव ने भी उसे अपने मित्रों के बीच निमंत्रित किया था.

सामने लेटी गोरी चिट्टी नंगी महिलाओं के आसपास खड़े चारों काले आदमी किसी पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म का दृश्य लग रहे थे.

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मिशेल का घर:

जैसन ने थोड़ा सकुचाते हुए रिचर्ड से हाथ मिलाया।

“अगर थके न हो तो, एक ड्रिंक हो जाये.” रिचर्ड ने पूछा.

“ठीक है.”

जीजा साले बैठक में अपनी ड्रिंक लेकर बैठ गए.

रिचर्ड: “मुझे तुम्हारे और मिशेल के पूर्व संबंधों के बारे में पहले से पता है. और अब तुम ये भी समझ गए होंगे कि हमारे घर में हम सब एक दूसरे के साथ चुदाई करते हैं. मेरा और मिशेल का ये समझौता भी है कि हम बाहर भी किसी से सेक्स कर सकते हैं, कुछ नियमों को मानकर.”

जैसन: “अच्छा.”

रिचर्ड: “तुम तो जानते हो साउथ अफ्रीका में उन्मुक्त सेक्स का चलन है. इसी कारण हम दोनों ने एक दूसरे को कभी रोका नहीं. परन्तु, ये बात बाहर भी किसी को पता न हो, इसीलिए हम इस शहर में कुछ नहीं करते. अब जब तुम यहाँ हो तो आसानी हो जाएगी. हालाँकि तुम्हारा मुकाबला मेरे और डेविड के समय से भी होगा. तुम्हारे घर में कैसा वातावरण है?”

जैसन: “मैं जैसे आपकी बात सुन रहा था तो मुझे लग रहा था कि आप मेरे ही शब्द बोल रहे हैं. हमारी भी एकदम हूबहू यही जीवन शैली है. ईव और मैं एक क्लब के सदस्य भी हैं जहाँ हम अदला बदली करके एक दूसरे की पत्नियों को चोदते हैं. ये हमारे लिए और भी सटीक बैठता है क्योंकि मुझे अफ़्रीकी औरतें बहुत भाती हैं, और ईव को मर्द.”

“हाँ, मिशेल बता रही थी कि उसे लम्बे,कड़क और तगड़े लंड बहुत पसंद हैं. इसीलिए उसने तुमसे शादी भी की थी क्यूंकि तुम इस विभाग में वरदान प्राप्त है.”

“मार्क और ऐलिस भी इसमें भाग लेते हैं?”

“हाँ आपके आने के बाद एक और शयनकक्ष बनवाया है जिसमे हम चारों एक साथ चुदाई कर पाते हैं. इसका उपयोग हम हफ्ते में १-२ दिन कर ही लेते हैं.”

“आइडिया बहुत अच्छा है, हमने तो पहले ही ऐसा एक क्रीड़ांगन बनवा लिया था, नीचे बेसमेंट में. आओ, तुम्हें दिखाता हूँ.”

ये कहकर रिचर्ड खड़ा हो गया और जैसन को लेकर बेसमेंट में चला गया.

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क्लबहाउस:

डॉन जिसने ये आइडिया दिया था सबसे पहले ऐलिस के ऊपर झपटा और उसकी चूत पर अपना मुंह लगा कर चूसने लगा. उसने ऐलिस के भगनासे पर विशेष ध्यान दिया और यही कारण था कि ऐलिस बहुत ही जल्दी बेकाबू हो गई. पर बोरिस को ये ठीक नहीं लगा, और उसने बिस्तर पर बैठकर अपने लंड को ऐलिस के मुंह में डाल दिया. रिकी ने ईव की चूत की ओर ध्यान दिया तो मार्टिन ने अपना लौड़ा उसके मुंह में पेल दिया. अब माँ बेटी एक ही बिस्तर पर अपनी चूत चटवा भी रही थीं और लंड चूस भी रही थी.

जब डॉन और रिकी का मन भर गया तो उन्होंने अपने लौंड़ों को अपने सामने परोसी हुई चूत के मुहाने रखा. अपने लौंड़ों को उन्होंने बड़े ही संयम के साथ अंदर किया और लगभग आधे लंड को धीमी गति से अंदर कर दिया. असली चुदाई तो अब होनी थी. चारों आदमियों की ऑंखें मिली और एक मूक समझौता हुआ. और इसके साथ ही बोरिस और मार्टिन ने अपने लौंड़ों को ऐलिस और ईव के मुंह में जड़ तक डाल दिया. और साथ ही साथ डॉन और रिकी ने अपने लंड एक झटके में पूरे अंदर पेल दिए. ऐलिस और ईव झटपटा रही थीं पर उन शक्तिशाली खिलाडियों के आगे उनका विरोध व्यर्थ था.

जब डॉन और रिकी ने अपना लक्ष्य पा लिया तो बोरिस और मार्टिन ने भी अपने लंड बाहर करते हुए दोनों स्त्रियों को साँस लेने का अवसर दिया, पर लंड मुंह में ही रखे जिससे वो कुछ चीख पुकार न कर पाएं।

“तुम्हें अफ़्रीकी लौंड़ों से चुदवाने का मन था न, अब देखो हम कैसे तुम्हारी चूत की धज्जियाँ उड़ाते हैं.” बोरिस ने शैतानी अंदाज में कहा.

डॉन और रिकी अपने पाशविक रूप में दोनों की चूत ऐसे पेल रहे थे मानो चीर देना चाहते थे. दोनों स्त्रियों की चीखें दबी हुई थीं क्यूंकि उनके मुंह अभी भी बंद थे. कुछ समय की चुदाई के पश्चात् ईव की चूत पानी छोड़ने लगी, पर ऐलिस अभी भी अपने आपको संयत नहीं कर पायी थी. रिकी के कहने पर मार्टिन ने अपना लंड ईव के मुंह से निकाल लिया.

“साले हरामजादों! ऐसे कोई चुदाई करता है क्या? मेरी जान ही निकाल दी. अब मेरी बेटी पर दया करो. उसे छोड़ दो.”

ईव की बात सुनकर मार्टिन ने अपने लंड को ऐलिस के मुंह से निकाल लिया. ऐलिस गहरी सांसे भरते हुए अपने हाल पर रोने लगी. डॉन ने अपने धक्कों की तेजी को काम कर दिया और कुछ ही देर में ऐलिस की चूत भी पानी छोड़ने लगी. बस कुछ देर की ही बात रही कि ईव और ऐलिस दोनों झड़ गयीं. ऐलिस के शक्ति अब समाप्त हो चुकी थी. उसे अपनी माँ की बात मानने का खेद था. उसने इस प्रकार से कभी चुदाई नहीं की थी और हालाँकि वो झड़ तो गयी थी पर ये उसके तरीके की चुदाई नहीं थी. उसने इन चारों दरिंदों से दूर ही रहने का प्रण किया। पर ईव पर ऐसा कोई अंकुश नहीं था. उसे इस प्रकार की चुदाई में आनंद आता था, हालाँकि जो षड्यंत्र इन्होनें रचा था उसे वो बिल्कुल भी न भाया था.

अब उसे ये सोचना था कि बोरिस और मार्टिन का क्या करे जिन्हें अभी तक चूत का स्वाद नहीं मिला था. अगर उसे पता होता कि उनके मन में क्या योजना चल रही है, तो वो उसी समय उनसे दूर चली जाती. और यही उसकी भूल थी.

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मिशेल का घर:

नीचे पहुंचकर जैसन की ऑंखें चौंधिया गयीं। बेसमेंट इतना बड़ा था, जितना कि ऊपर का पूरा घर. उसके अंदर एक आधुनिक जिम था, एक छोटा तरन ताल, एक बार जिसमें अभी कोई बोतल नहीं थी. एक किचन जिसमें फ्रिज और डीप फ्रिज थे. एक प्रोजेक्टर था.

एक कांच से बना हुआ कमरा था जो कि काफी बड़ा था. अंदर दो बड़े टीवी थे और बड़े बड़े सोफे लगे हुए थे. ये सोफे कम और बिस्तर अधिक लग रहे थे. इतना विहंगम दृश्य देखकर जैसन सम्मोहित ही गया.

“ब्रो, दिस इस अमेजिंग. यहाँ पार्टी भी करते हो क्या?”

“हाँ घर की पार्टियां यहीं होती हैं. हालाँकि यदा कदा बाहर के लोग भी पार्टी में इधर आते हैं पर उस समय हम कुछ बदलाव कर देते हैं.”

“ईव तो इसे देखकर पागल ही हो जाएगी. अरे ये कहाँ रह गई, दो घंटे होने को आये, अभी तक न जाने कहाँ है. ऐलिस भी साथ में ही है. मार्क का भी कुछ पता नहीं.” उसने फोन निकाला तो सिग्नल नहीं था.

“ऊपर चलकर कॉल करता हूँ.”

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क्लबहाउस:

डॉन ने अपना लंड ईव के चेहरे के सामने झुलाया, “कम ऑन, बेबी. अपनी बेटी की चूत का टेस्ट करो.”

ईव ने उसके लंड को मुंह ने लिया और चूसने लगी. उधर रिकी ने अपने लंड को ऐलिस से साफ करने को कहा. ईव और ऐलिस इस खेल से अनिभिज्ञ नहीं थीं और उन्होंने कई बार एक दूसरे की चूत से निकले लौंड़ों को चाटकर साफ किया था. इसी कारण दोनों अपने काम में जुट गयीं.

अब मार्टिन और बोरिस कुछ बेचैन हो रहे थे. दोनों ने अभी तक चुदाई नहीं की थी और ऐसा प्रतीत हो रहा था की ऐलिस अब खेल में हिस्सा नहीं लेगी. दोनों ने एक दूसरे की ओर देखकर पूछा कि पहले कौन? बोरिस जो उनकी टीम का मुखिया था, उसने मार्टिन के कानों में कुछ कहा. सुनकर मार्टिन खुश हो गया. वो बिस्तर पर जाकर लेट गया और ईव से कहा कि वो अब चाहे तो उसपर चढ़कर चुदवा सकती है. अब ईव जैसी चुदक्कड़ को दूसरे निमंत्रण की आवश्यकता नहीं थी. उसने डॉन के लंड को मुंह से निकाला और उसे एक चुम्बन देकर उससे हटकर अपने दोनों पांव फैलाकर मार्टिन के खड़े तमतमाए हुए लंड के ऊपर खड़ी हो गयी.

ऐलिस अपनी माँ के इस नए कदम का दूर से अवलोकन कर रही थी. रिकी ने अपना लंड उसके मुंह से निकाल लिया और उसके साथ ही सोफे पर बैठकर सामने होते घटनाक्रम पर ध्यान देने लगा. ईव ने एक मंथर गति से अपनी चूत को मार्टिन के लंड के ऊपर रखा और बैठती चली गयी. लगभग आधा लंड लेने के बाद उसने ऊपर नीचे होने का कार्यक्रम शुरू किया. और इसी प्रक्रिया से उसने काफी लंड अपनी चूत में बैठा लिया. मार्टिन को समझ आ गया कि वो हिचक रही है. उसने ईव के चेहरे को नीचे करते हुए उसे चूमना शुरू किया। ईव भी इस चुंबन में उसका साथ देने लगी. मार्टिन ने ईव की कमर में हाथ डाला और एक करारा धक्का ऊपर की ओर मारा. मार्टिन का विशाल लंड ईव की चरमराती चूत में पूरा जाकर बैठ गया. पर मार्टिन यहाँ रुका नहीं उसने ईव की कमर को कसकर पकडे रखा जिससे कि वो छिटकने का प्रयास न करे. कुछ देर यूँ ही रुकने से ईव भी कुछ संयत हो गयी.

“हैविंग फन, बेबी?” रिकी ने उसके सामने खड़े होते हुए कहा. “तुमने मेरा लंड को अकेला छोड़ दिया. चलो अब मुंह खोलो और जो शुरू किया था उसे पूरा करो.”

ईव ने अपने मुंह को चौड़ा खोलते हुए उस भारी काले लौड़े को मुंह में ले लिया. नीचे से मार्टिन ने उसकी चूत में अपना लंड पेलना शुरू किया. अब ईव के सुन्दर गोरे शरीर में दो काले लंड घुसे हुए थे: एक मुंह में तो एक उसकी चूत में. ईव इस समय बहुत आनंदित थी. उसने यहाँ आने के अपने निर्णय को सही समझा. चलो इनसे छोड़ने के बाद २-३ दिन अगर लंड नहीं भी मिले तो चल जायेगा.

बोरिस बाथरूम चला गया और लौटते हुए डॉन की ओर देखकर कुछ संकेत दिया. डॉन ने सिर हिलाया ऐलिस से उसके लंड को चूसने के लिए कहा. ऐलिस ने वहीँ झुककर उसके लंड को अपने मुंह में भर लिया. पर इससे उसकी दृष्टि सामने के बिस्तर से हट गई. बोरिस यही चाहता था कि ऐलिस अपनी माँ को सावधान न कर पाए. उसने बाथरूम से लायी हुई एक ट्यूब से कोई जैल निकाला और अपने लंड पर अच्छे से रगड़ लिया. उसका आशय समझकर रिकी ने अपना लंड ईव के मुंह से निकाल लिया और मार्टिन ने उसकी कमर को पकड़कर ईव को आगे झुका लिया. उसके होंठों का रस पीते हुए उसने अपने लंड का धावा रोक दिया. ईव को अपने पीछे कुछ हलचल का भान हुआ, मानो कि बिस्तर पर कोई और चढ़ा हो. उसे समझ आ गया कि आगे क्या होने वाला है. वो हटने का प्रयास करने लगी, पर मार्टिन जैसे शक्तिशाली पुरुष के समक्ष उसकी एक न चली.

ऐलिस ने बिस्तर पर हो रही उस गुत्थम गुत्था की ध्वनि सुनी तो उसने अपना मुंह डॉन के लंड से हटाकर उस ओर देखा. वहां जो होने वाला था उसे देखकर ऐलिस की गांड फटकर हाथ में आ गयी. उसकी माँ की चूत में पहले से ही एक मोटा काला लंड घुसा हुआ था. और दूसरा लंड लेकर बोरिस उसके पीछे था और जैल लगा रहा था. बोरिस के लंड का आकार देखकर ऐलिस डर से कांप उठी. कहाँ डालना चाहता है ये? मम्मी की गांड में पेल दिया तो वो चलने फिरने लायक भी नहीं रहेगी.

ऐलिस ने विनती की, “मत करो, प्लीज. हम लोग कुछ ही दिन के लिए तो आये हैं. उनका चलना फिरना बंद हो गया तो क्या इंजॉय करेंगे?अपनी बुआ को क्या बोलेंगे? अभी हम उनके घर भी नहीं गए हैं. प्लीज मत करो.”

बोरिस रुक गया. उसे भी लगा कि जबरदस्ती करने से उनका व्यापारिक सम्बन्ध पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. वो पीछे हट गया.

“ओके, आई थिंक यू आर राइट. नो प्रॉब्लम.” बोरिस ने ऐलिस को कहा. फिर उसने मार्टिन से कहा,”मार्टिन, इन्हे जैसे इंजॉय करना है करने के बाद इन्हें घर जाने दो.”

कुछ देर यूँ ही चुदाई चली पर अब लय टूट चुकी थी और किसी को भी आनंद नहीं आ रहा था. ये समझते हुए ईव लंड के ऊपर से उतर गई और बाथरूम में सफाई के लिए चली गई. कुछ देर में वो तैयार होकर आ गई और ऐलिस बाथरूम में गई और वो भी तैयार होकर निकली.

बोरिस: “आई ऍम सॉरी, ईव. हमसे गलती हुई. प्लीज हमें माफ़ करना.”

ईव: “शायद हम सबने एक दूसरे की आवश्यकताओं को नहीं समझा, इसीलिए ऐसा हुआ. कोई बात नहीं, हम फिर मिलेंगे. और इस बार मैं समय लेकर आऊंगी. डोंट वरी।” ये कहकर ईव ने एक हल्का सा चुम्बन दिया ही था कि उसका फोन बज उठा.

“हाई जैसन, हम लोग १० मिनट में पहुँच रहे हैं. मैं आकर बताती हूँ.”

ईव और ऐलिस बाहर निकले और घर की ओर पैदल ही चल पड़े.

उन्हें जाते देखकर मार्टिन ने बोरिस से पूछा: “ये क्या तुमने सही किया?”

बोरिस: “बिल्कुल, बिज़नेस में लंड से नहीं दिमाग से काम लिया जाता है. वो फिर आएगी और जो हम करने वाले थे वो भी होगा. पर अब वो इस विश्वास से आएगी की हम उसकी भावनाओं को समझते हैं.”

मार्टिन: “आई थिंक यु आर राइट.”

**********

यूनिवर्सिटी:

जैसन और ईव का बेटा मार्क इस समय यूनिवर्सिटी के एडमिशन के प्रमुख के समक्ष था. उसने आने से पहले यहाँ से पढाई करने का आवेदन किया था. क्यूंकि उसके नंबर अच्छे थे और उसने विदेशी छात्र के रूप में आवेदन किया था, इसीलिए प्रवेश मिलना एक औपचारिकता ही थी. वैसे भी उनके देश से कई छात्र भारत पढ़ने के लिए आते हैं हर वर्ष.

इस समय शैली भी मार्क के साथ ही थी. मार्क ने उसे साथ आने का निमंत्रण दिया था जो शैली ने स्वीकार किया था.

एडमिशन प्रमुख: “मार्क, तुम्हारा आवेदन स्वीकृत हो चूका है. तुम चाहो तो फ़ीस आदि जमा कर सकते हो. हॉस्टल की भी व्यवस्था है, अगर चाहो तो. हमारा अगला वर्ष ३० दिन में ही प्रारम्भ हो रहा है. स्टूडेंट वीसा के लिए तुम्हें मेरा ऑफिस आवश्यक पत्र कल शाम तक दे देगा, और अगर चाहो तो वीसा में भी सहायता करेगा. मुझे नहीं लगता की तुम्हें किसी भी प्रकार की दुविधा होगी. शैली तुम कल चाहो तो मार्क को कैंपस का टूर करवा सकती हो. उसके लिए मैं एक अनुमति पत्र तुम्हें दे रहा हूँ हो जो ५ दिन के लिए वैध है.”

ये कहकर उन्होंने एक पत्र शैली को दे दिया. शैली ने उसे पढ़ा और अपने पर्स में रख लिया. इसके बाद दोनों ने अनुमति ली और आगे के कार्य के लिए कल आने का निश्चय किया.

“मार्क, कहो तो कैफ़े में बैठकर कॉफी पीते हैं फिर घर चलेंगे. वैसे भी तुम्हें तीन घंटे हो चुके हैं. जैसन अंकल मस्ट बी वरीड.”

”या, आई टोल्ड हिम फॉर २ हावर्स ओनली. पर अभी ३ घंटे से अधिक हो गया है.” फोन मानो इसी के लिए रुका था, और अब बज उठा.

“हल्लो डैड, ..... यूनिवर्सिटी… डन हियर. कॉफी पीकर घर आ रहे हैं. यस, शैली इस विद मी. विल बी होम सून.”

“ओके, कॉफी और फिर घर. लेट अस गो! ”

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मिशेल का घर:

जैसन: सब आ रहे हैं. मार्क यूनिवर्सिटी में है, शैली के साथ. ईव और ऐलिस बस आते होंगे.

तभी घर की घंटी बजी और मिशेल ने दरवाजा खोलो.

“ईव! ऐलिस!! ओह माई गॉड. यू लुक सो ब्यूटीफुल.” मिशेल उन दोनों से गले मिलकर उनके गलों पर चुम्बन लेते हुए ख़ुशी से चीख पड़ी.

“ओह, बुआ, यू लुक सो फ्रेश एंड यंग. आप क्या खाते हो मुझे भी वो रेसिपी चाहिए. प्लीज बुआ.”

रिचर्ड अब तक पास आ चुका था, “ये फ्रेश जूस पीती है, और वो भी स्त्रोत से.” रिचर्ड ने उत्तर दिया.

“हेलो ईव. वेलकम होम. बहुत देर कर दी आने में.” फिर ऐलिस की ओर मुड़कर, “हे बेबी डॉल, तुम तो बहुत सुन्दर हो गई हो. लोगों से बचाकर रखना होगा तुम्हें.”

“लोगों से तो मैं इसे बचा लूंगी, डियर. पर तुमसे इसे कौन बचा पायेगा?” मिशेल ने अठखेली की.

सब हंस पड़े.

“अंकल रिचर्ड, डोंट वरी, मैं आपसे बचने की कोई ट्राई नहीं करूंगी. यू नो व्हाट आई मीन.”

“लो अभी घर में आयी नहीं और मेरे हस्बैंड को स्टील करने लगी, यू नॉटी गर्ल. चलो सब अंदर चलो.”

सब लोग अंदर बैठक में आ गए. जैसन भी खड़ा हो कर उन्हें मिला. तभी डेविड स्विमिंग पुल से अंदर आया. और जैसी उसकी आदत थी, केवल स्विमिंग अंडरवियर पहने हुए और एक तौलिये से अपने बाल पोंछते हुए.

“डेविड, कम से कम टॉवल तो लपेट लेते. देखो ईव और ऐलिस भी पहुँच गए.” मिशेल ने डांटने के स्वर में कहा.

“अरे मॉम, इट इस OK. मेरी लवली मामी आयी है. हेलो मामी।” ये कहते हुए वो ईव से चिपक गया. ईव उसके शक्तिशाली शरीर से चिपक गई. उसने अंडरवियर से उभरते हुए लंड को भी अनुभव किया.”

ईव: “तुम तो बड़े हो गए डेविड. कितनी गर्लफ्रेंड हैं.”

डेविड: “आपके जैसी एक भी नहीं.”

ईव: “नॉटी नॉटी, अपनी मामी को कोई ऐसे बोलता है?”

डेविड अब तक ऐलिस का ध्यान कर रहा था, “हे कज़न, यू लुक रेविशिंग,ब्यूटीफुल.” डेविड उसके भी गले लगते हुए बोल पड़ा.

“तुम भी बहुत हैंडसम हो गए हो डेविड.”

“चलो, तुम बैठो, मैं चेंज करके आया.”

कुछ ही समय में मार्क और शैली भी पहुंच गए और उन्हें बताया कि प्रवेश हो गया है. कुछ देर सबने बैठ कर बातें करीं और तब तक खाना तैयार हो गया. बातें करते हुए सबने खाना खाया. रिचर्ड ने ये बता दिया कि मार्क को हॉस्टल में रहने की कोई आवश्यकता नहीं, वो यहीं रहेगा घर में. डेविड और मार्क कमरा शेयर कर सकते हैं या मार्क अलग कमरा भी ले सकता है. परन्तु अगर कोई अतिथि आता है, तो उन्हें कमरा शेयर करना होगा. मार्क ने कहा कि उसे कोई आपत्ति नहीं है. अभी के लिए मार्क डेविड के साथ और ऐलिस शैली के साथ रहेगी. जैसन और ईव को अलग कमरा दिया गया था.

खाने के बाद सब अपने कमरों में जाने लगे क्योंकि वार्ड परिवार थका हुआ था.

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ईव का कमरा:

कमरे में जाने के बाद कमरा लॉक करते ही जैसन ईव पर झपट पड़ा.

“क्या बेबी, तुम कहाँ चली गयी थीं?”

“बोरिस और उसके दोस्तों के रहने का प्रबंध देखने के लिए. ये काम जो तुम्हें करना चाहिए था.” ईव ने उसे उलाहना देकर कहा.

“वेल, मैं जाने ही वाला था कि रिचर्ड आ गया और फिर समय का पता ही नहीं चला. पर फिर भी इतनी देर क्यों लगी?”

“क्योंकि मैं उनके काले लौडों का स्वाद ले रही थी.” फिर थोड़ा ठहर कर, “ऐलिस के साथ.”

“मुझे अगर बता कर जाती तो अच्छा होता. पर ऐलिस को इसमें शामिल मत करो.”

“वो नहीं हुई थी.” ईव ने झूठ कहा. “मैं भी जितना चाहती थी उतना नहीं हुई. देखते हैं अगर अवसर मिला तो एक दो चक्कर लगा लूंगी वहां का.”

“बी केयरफुल, यहाँ इतने घर नहीं कि तुम्हारी गतिविधि चुप सके. और मिशेल पर इसका सामाजिक रूप से प्रतिकूल असर हो सकता है.”

ईव अब चिढ़ने सी लगी थी. एक तो उसकी चुदाई पूरी नहीं हुई, फिर बोरिस ने उल्टा काम करके सारा मजा किरकिरा कर दिया. और अब उसका पति उसे उपदेश दे रहा था.

“ठीक है, देखूंगी क्या करना है.”

जैसन ने उसका मूड भांप लिया और चुप हो गया. दोनों लेट गए पर किन्ही कारणों से नींद दोनों की आँखों से दूर थी. ईव की चुदने की इच्छा थी पर जैसन से इस प्रकार बात करने के बाद वो झुकना नहीं चाहती थी. जैसन ईव का मूड ठीक करना चाहता था. वो यहाँ कुछ ही दिनों के लिए थे और वो इस समय को भलीभांति बिताना चाहता था. यूँ ही रात के लगभग ११ बज गए. अचानक उसे कुछ ध्यान आया जिससे शायद ईव का मूड ठीक हो सके.

“बेबी, रिचर्ड ने बहुत सुन्दर क्रीड़ांगन बनाया है नीचे बेसमेंट में. बोलो, चलोगी देखने?”

ईव समझ गई कि जैसन उसे प्रसन्न करने का प्रयास कर रहा है. वैसे भी जो हुआ उसमे जैसन की कोई गलती नहीं थी. उसने हामी भरी और अपना नाइट गाउन पहन लिया. रिचर्ड ने भी अपना गाउन पहना और उसे लेकर बेसमेंट की और चल पड़ा.

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बेसमेंट की सैर:

बेसमेंट के प्रवेश ( सीढ़ियां नीचे थीं) पर पहुंचकर अपनी फोन की टॉर्च जलाई क्योंकि पता नहीं था कि लाइट का स्विच कहाँ है. जब वो नीचे की ओर पहुँचने लगे तो उन्हें पानी की आवाज़ आई. शायद कोई स्विमिंग कर रहा था. जैसन ने ईव को चुप रहने संकेत किया. एक दो सीढियाँ और उतरने पर उन्हें नीचे रौशनी दिखाई दी. जैसन का दिल धड़कने लगा. ईव ने जैसन का हाथ पकड़ लिया. जैसे ही वो आखिरी सीढ़ियों पर पहुंचे तो सामने का दृश्य देखकर हतप्रभ रह गए. डेविड स्विमिंग पूल के किनारे बैठा हुआ था, एक औरत अपना चेहरा उसकी जांघों के बीच में छुपाये हुए थी. डेविड की पीठ सीढ़ियों की ओर होने से उस औरत का चेहरा नहीं दिख रहा था.

पर कुछ ही समय में ये रहस्य भी सुलझ गया. पूल के एक ओर रिचर्ड बैठा हुआ एक गिलास से कुछ पी रहा था. शायद व्हिस्की. उसका शरीर इस समय नंगा था और उसकी गोद में भी एक औरत का सिर छुपा था. पर चूँकि उसके बैठने का कोण ऐसा था कि उस स्त्री के चेहरे को आधा देख पा रहे थे. वो कोई और नहीं शैली थी, जो अपने पिता के लंड को बड़े ही प्यार से चाट और चूस रही थी. इसका अर्थ यही था कि पूल के अंदर मिशेल थी और वो अपने बेटे का लंड चूस रही थी.

“हमें चलना चाहिए.” ईव ने जैसन से फुसफुसाकर कहा. जैसे ही दोनों मुड़े तो फोन की टोर्च रिचर्ड की आँखों में पड़ी. उसने जान लिया कि ये अवश्य ही जैसन है. पर उसके साथ कौन था. ईव ही होगी. कुछ ही सेकंड में रिचर्ड ने निर्णय लिया.

“जैसन!” उसने पुकारा.

“यस” जैसन के मुंह से स्वाभाविक रूप से उत्तर निकल गया.

“कम बैक हियर.”

जैसन ने ईव ओर देखा तो उसने अपने कंधे उचका दिए. जैसन ने ईव का हाथ लिया सीढ़ियों से उतर कर क्रीड़ांगन में आ गया. अब तक अन्य तीन भी अपनी गतिविधियां रोक कर घटनाक्रम को देख रहे थे.

“कम जैसन एंड ईव. ज्वाइन अस.” ये कहकर रिचर्ड खड़ा हो गया. “डेविड, गेट देम ए ड्रिंक.”

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मार्क :

मार्क की प्यास के कारण नींद खुल गई. उसने उठकर देखा तो डेविड अपने बिस्तर पर नहीं था. ये सोचकर कि बाथरूम में होगा, मार्क ने पानी पिया पर जब समय कुछ अधिक हो गया भी बाथरूम जाने की आवश्यकता लगी तो उसने बाहर के बाथरूम में जाने का निर्णय किया. बाहर बाथरूम से निकल कर उसने सोचा कि अब उठ ही गया हूँ तो अगर बियर हो तो पी लेता हूँ. ये सोचकर वो बार के फ्रीज़ में ढूंढने लगा. एक बियर का कैन खोलकर पी ही रहा था की उसे अपने माँ बाप नीचे आते हुए दिखे. उसे उनकी गतिविधि कुछ असामान्य लगी. थोड़ी आड़ में हो गया. पर उन्होंने उसकी ओर देखा भी नहीं, बल्कि घर के दूर कोने में गए और लुप्त हो गए.

मार्क ने अपनी बियर समाप्त की और इस रहस्य से पर्दा हटाने का निश्चय किया. वो धीमे पांवों से उस ओर गया तो उसे नीचे जाती हुई सीढ़ियाँ दिखाई दीं. पर जैसन और ईव नहीं दिखे. वो सोच में पड़ गया कि क्या करे. अधिक देर होने पर डेविड आ सकता था. उसने सोचा कि एक बार देखकर लौट जाता हूँ. अँधेरे में अनजाने रास्ते पर जाते हुए वो संभल कर चल रहा था. जब वो नीचे तक पहुंचा तो उसे लोगों के बातें सुनाई देने लगीं. अब वो असमंजस में था कि आगे बढ़े या लौट जाये. जिज्ञासावश उसने एक बार झाँककर लौटने का निर्णय लिया. वो आखिरी सीढ़ी पर आकर गया और ये समझ गया कि जल्दी लौटने की आवश्यकता नहीं थी. डेविड यहीं था.

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मुंबई बॉलीवुड अभिनेत्री का बंगला:

अभिनेता का बेटा अभी ही अपनी माँ को चोदकर गया था. और प्रौढ़ अभिनेता अपनी पत्नी की चूत से उसका माल चाट कर साफ कर रहा था. उसकी पत्नी उसके बालों को बड़े प्यार से सहला रही थी.

अभिनेत्री: “जानू, हरजीत ने कॉल किया था शाम को. हमारा शो अगले ही हफ्ते है. मैंने ओके दिया है. ये बताओ कि बॉबी से तुम बात करोगे या मैं करूँ।”

अभिनेता: “कुछ जल्दी नहीं है?”

अभिनेत्री: “क्या अंतर पड़ेगा? अपने शौक भी पूरे हो जायेंगे और अच्छा पैसा भी मिलेगा. और उन्होंने हमें मास्क पहनने के लिए कहा है. और एक अच्छे मेकअप वाला भी रहेगा.”

अभिनेता: “बॉबी से तुम ही बात कर लो. पर उसे उसके शो के बाद वहाँ से हटवा देना. मैं नहीं चाहता कि वो मुझे इतनी चूतों से वीर्य साफ करते हुए देखे.”

अभिनेत्री: “ठीक है, मैं हरजीत को बता दूंगी. अब आओ और अपनी बीवी की गांड मारो, तुम्हारा लंड अच्छे से खड़ा है शो के बारे में सोचकर.”

अभिनेता तुरंत अपनी पत्नी को घोड़ी बनाकर उसकी गांड में लंड पेलकर उसकी गांड के पाइप की सफाई शुरू कर देता है.

उधर बॉबी (घर का नाम) अपने कमरे में पहुँचता है तो हमेशा की तरह एक सुन्दर लड़की बिस्तर पर नंगी लेटी हुई उसकी प्रतीक्षा कर रही थी. बॉबी ने कमरे का दरवाजा बंद किया हाथ में उठाये हुए कपड़े एक ओर फेंक दिए.

“कर आये मॉम की चुदाई?”

बॉबी: “पता नहीं डैड ने शादी क्यों की जब खड़ा ही नहीं होता था.”

लड़की: “तुम जानते हो ये सच नहीं है. उनका लंड तुमसे बड़ा और मोटा है. उनकी क्या प्रॉब्लम है पता नहीं. पर दूसरों से नई मम्मी को चुदते देखने के बाद, अब उनका सामान्य रूप से खड़ा ही नहीं होता. अभी वो नई मम्मी को जम के चोद रहे होंगे.”

बॉबी ने कुछ नहीं कहा, बस उस लड़की की चिकनी चूत में अपना चेहरा डाल दिया.

“बिग ब्रदर, तुम बहुत अच्छी चूत पीते हो. पर जल्दी करो और अपने लंड से मेरी चुदाई करो.”

कुछ ही देर में उस कमरे में चुदाई का संगीत बजने लगता है.

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बेसमेंट में खेल:

डेविड ने मामा मामी के लिए ड्रिंक बनाई. अब तक मिशेल पूल से बाहर आ चुकी थी और उसके नंगा शरीर पर पानी की बूंदें झिलमिला रही थीं. उसने सधे क़दमों से ईव के सामने खड़े होकर उसका हाथ अपने हाथ में लिया और फिर उसके होंठ चूम लिए.

“ईव, स्वीटहार्ट, तुम्हें नहीं लगता कि तुम कपड़े कुछ अधिक पहने हो. आश्चर्य मत करो, जैसन ने तुम्हारी जीवनशैली के बारे में रिचर्ड को बताया है. और जैसा तुम देख सकती हो हमारी भी कुछ अलग नहीं है. तो कम एंड ज्वाइन अस इन द फन.” ये कहकर मिशेल ने ईव के गाउन की डोर खोल दी और उसे ईव के कन्धों से सरका कर गिरा दिया.

डेविड ने एक सीटी बजाई। “वाओ, ईव आंटी, यु आर सो हॉट!” ये कहते हुए उसने अपने तने हुए लौड़े को हाथ में लेकर हिलाया.

शैली ने भी पास आते हुए ईव के होंठ चूमे और उसकी सुंदरता की प्रशंसा की. फिर वो जैसन की ओर मुड़ी. “हे, यू आल. सबने मेरे हैंडसम अंकल को तो अकेले ही छोड़ दिया. वरी नॉट अंकल, आई विल टेक केयर ऑफ़ यू।” ये कहकर पंजों के बल ऊपर होकर उसने जैसन के होंठ चूम लिए और उसके लंड को अपने हाथ में लेकर सहला दिया.

“मेरे विचार से हमें इस मिलन के लिए एक ड्रिंक और लेना चाहिए. चलो सब अंदर चलते है. डेविड और शैली सबके लिए ड्रिंक्स लाओ अंदर. पर जैसन तुम अपना गाउन तो उतारो। अंदर कपड़े अलाऊ नहीं हैं.” ये कहकर सब अंदर की ओर चल दिए. जैसन ने भी अपना गाउन उतार फेंका और उनके पीछे हो लिया.

मार्क ने भी इस खेल में भागीदार होने का प्रण किया. शैली और डेविड सबके लिए ड्रिंक्स बना रहे थे. मार्क ने जल्दी से अपना शार्ट उतारा और उनके पीछे खड़ा हो गया.

मार्क: “मैं कुछ सहायता करूँ?”

डेविड: “नहीं, सब रेडी है.” उसने उत्तर दिया पर उसे एकदम एक झटका लगा जब उसने ये समझा कि इस समय कोई और साथ नहीं होना चाहिए. डेविड और शैली दोनों ने पलट कर देखा तो मार्क को नंगा खड़ा पाया.

मार्क: “मैंने सोचा शायद मेरी सहायता चाहिए होगी, इसीलिए पार्टी में आ गया.”

अब डेविड और शैली को कुछ सूझ नहीं रहा था.

“रिलैक्स गाइज़, हम भी अपने घर में ये खेल खेलते हैं. पर तुम्हारा सेटिंग बहुत बढ़िया है. सो, सहायता चाहिए?”

शैली ने अपनी ऑंखें झुककर मार्क के लंड को देखा. फिर उसने लंड को हाथ में लिया.

शैली: “सहायता के लिए कभी न नहीं करना चाहिए. है न डेविड.”

डेविड: “ओह, आई ऍम फ़ाईन विद इट.”

शैली: “तो चलो ड्रिंक्स ले कर जाने में हाथ बंटाओ.”

मार्क: “पर मेरी ड्रिंक.”

शैली: “ओह, या, ओके. बना लो और चलो हमारे साथ. हमारे पीछे चुप कर चलना. सरप्राइज़ देंगे.”

सबकी ड्रिंक्स लेकर मार्क उन दोनों के पीछे छुपते हुए कमरे में चला आया. जैसन और रिचर्ड को शैली ने ड्रिंक्स दे दीं। फिर ईव और मिशेल की ओर बढ़े, पर डेविड और शैली उन्हें छोड़कर आगे चले गए और मार्क उनके सामने खड़ा हो गया.

“ड्रिंक्स फॉर द लेडीज़।” उसने मुस्कुराकर कहा.

जैसन और रिचर्ड ने मार्क को देख तो लिया था पर सब कुछ इतना तेजी से घटित हुआ कि उन्हें कुछ भी करने का अवसर नहीं मिला. और यही स्थिति मिशेल और ईव की भी थी. पर मिशेल जल्द ही संभल गयी.

“ओह, यू स्वीट बॉय. थैंक यू.”

अब चूँकि सब पर्दे हट चुके थे तो सब आराम से अपनी ड्रिंक्स पीने लगे. पर रिचर्ड ने इस पूरे पात्रों के बीच एक कमी का अनुभव किया.

रिचर्ड: “अब अगर सब यहाँ आ ही चुके हैं तो क्यों ऐलिस को अलग रखा जाये. जैसन तुम्हे ठीक लगे तो मार्क ऐलिस को भी ले आए.”

जैसन: “बात तो ठीक ही है. मार्क, प्लीज ऐलिस को भी ले आओ।”

मार्क तुरंत ही ऐलिस के कमरे की ओर दौड़ पड़ा.

मिशेल हंस पड़ी, “पुअर बॉय, अपने कपड़े भी नहीं पहने जल्दी में.”

सभी लोग हंस पड़े.

मार्क इसीलिए जल्दी में था क्योंकि वो चाहता था कि मिशेल के साथ पहले सेक्स वही करे. जब मार्क ऐलिस और शैली के कमरे के बाहर पहुंचा तो रुक कर अपनी साँस संयत करने लगा. वो ऐलिस को वैसे ही जगाने वाला था जैसे घर में जगाता था. उसने धीरे से दरवाजा खोला और अंदर झाँका. ऐलिस शांति से सोई थी. उसका गाउन उसकी जांघों तक चढ़ा था. रात को सोते समय वो पैंटी नहीं पहनती थी.

मार्क ने ऐलिस के पाँव फैलाये और उसकी गुलाबी चूत में अपना मुंह लगा दिया और चाटने लगा.

ऐलिस कुनमुनाई, “मुझे सोने दे, ब्रो।”

मार्क: “उठो तो सही, एक बहुत बढ़िया सरप्राइस है.”

ऐलिस धीरे से आंख होली, “क्या है?”

मार्क: “यहाँ नहीं, तुम्हें मेरे साथ चलना होगा.”

ऐलिस धीरे से उठी और ऑंखें मिचमिचाते हुए मार्क को देखने लगी. उसे नंगा देखकर उसने शैली के बिस्तर की ओर देखा.

“तुम नंगे क्यों आ गए मेरे रूम में? और ये शैली कहाँ है?”

“सब बताता हूँ, तुम जल्दी से फ्रेश हो जाओ और मेरे साथ चलो.” मार्क अधीर हो रहा था. उसे चिंता थी कि मिशेल पर कोई और बाजी न मार ले, विशेष रूप से डेविड। ऐलिस न नुकुर करते हुए अंततः बाथरूम में घुस ही गयी और आश्चर्यजक रूप से केवल ५ मिनट में ही बाहर निकल आयी. उसने एक गाउन पहना हुआ था और उसके नीचे पजामा था.

“चलो, दिखाओ क्या सरप्राइज़ है.”

मार्क ने सामने पड़ा एक स्कार्फ उठाया और ऐलिस का हाथ थमा और उसे लेकर बाहर चल पड़ा. जब वो बेसमेंट के प्रवेश पर पहुंचा तो उसने ऐलिस को रोका.

मार्क: “सरप्राइज़ के लिए मुझे तुम्हारी आंख पर ये पट्टी बांधनी पड़ेगी. और फिर इन सीढ़ियों से मेरे साथ नीचे चलना होगा. मैं तुम्हारा हाथ पकड़े रहूँगा। सो, डोंट वरी। और मैं बाद में तुम्हारा गाउन भी उतारूंगा, तो चिल्लाना मत. ओके?“

“ओके”

अब ऐलिस भी कुछ रोमांचित हो रही थी. ऐसा खेल उन्होंने कभी नहीं खेला था. उसने मार्क को अपनी आंख पर पट्टी बांधने दी. उसका हाथ पकड़कर वो सीढियाँ उतर गया और फिर ऐलिस को बताते हुए की सीढ़ी ख़त्म हो चुकी है उसे लेकर हॉल की ओर बढ़ा. ऐलिस को पानी की कुछ ध्वनि सुनाई दी.

“ओह! तो इनडोर स्विमिंग पूल है! ये मुझे नंगे स्विम करने के लिए उठाकर लाया है. वैरी नाइस.” ये सोचते हुए ऐलिस मुस्कुरा उठी.

हॉल के बाहर पहुँच कर मार्क ने ऐलिस का गाउन उतार दिया. अंदर से सबने उन्हें आते हुए देख ही लिया था और ऐलिस की आँखों पर पड़ी पट्टी भी. सब चुप हो गए. अगर सुई भी गिरती तो उसकी आवाज़ आती। और मौन को तोड़ते हुए मार्क ने दरवाज़ा खोला और ऐलिस को लेकर अंदर आ गया.

ईव और जैसन उठे और ऐलिस के सामने खड़े हो गए. मार्क ने ऐलिस की आँखों की पट्टी खोल दी. आंखे खुलते ही ऐलिस ने उन्हें मिचमिचाया और दृष्टि सामान्य होने पर अपने माँ बाप को सामने खड़ा पाया. उन्हें नंगे देखकर उसे कोई अचरज नहीं हुआ. वो जैसन के गले लग गयी. और जैसन ने उसकी गर्दन चूम ली और घूम गया. जब ऐलिस ने आंख खोली तो दृश्य बदला हुआ था. चार जोड़ी आंखे उसे ताक रही थीं. ये उसकी बुआ का परिवार था. और वो सब भी वार्ड परिवार के समान नंगे थे.

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मुंबई बॉलीवुड अभिनेत्री का बंगला:

भाई बहन की चुदाई का एक चक्र हो चुका था. दोनों लेट कर बात कर रहे थे.

“यू नो, ये नई मम्मी जो शो करती हैं, मुझे वो ठीक नहीं लगता. हालाँकि मेकअप से हमारे चेहरे बदल जाते हैं, पर फिर भी कई लोग होते हैं जिन्हें हमारी असलियत पता होती है.”

“पर तुम जानते हो कि हमारी फ़िल्मी इंडस्ट्री में कोई किसी की पोल नहीं खोलता. हमाम में सब नंगे जो हैं. मुझे विश्वास है कि पापा और उसे भी कई राज पता होंगे.”

“ये तो है. तो तुम्हारा गांड मरवाने का क्या प्लान है?”

“नहीं, गांड तो मेरा पति ही लेगा. कुछ तो सीलबंद मिलना चाहिए न उसे भी.”

“कोई है अभी तक जो उस स्तर पर पहुंचा हो?”

“नहीं, अधिकतर तो एक दो बार चोदने के बाद ही कुकड़ू कूँ बोल देते है. और दो के साथ तो शादी हो नहीं सकती.”

दोनों इस बात पर हंसने लगे.

“तुम्हारा क्या प्लान है, शादी के लिए?”

“कोई नहीं. जब तक बॉलीवुड की रिटायर्ड हीरोइनें चुदवाने के लिए हैं, क्यों बेकार के चक्कर में पड़ना.”

“हम्म्म, चलो तुम्हारे साथ पड़ी ये हीरोइन तो अभी ही तैयार है. चलो एक बार और चोदो न, फिर कल से तीन दिन मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ बाहर जा रही हूँ.” ये कहकर लड़की ने अपने पांव फैलाये और लड़का उनके बीच में जाकर चुदाई में व्यस्त हो गया.

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बेसमेंट में खेल:

इस सब के बीच में सबसे उत्तेजित मार्क ही था. बार बार उसकी ऑंखें मिशेल को देखतीं और ये ताड़ने की चेष्टा करतीं कि वो किसे अपना साथी बनाएगी. इसीलिए उसका ध्यान डेविड पर भी था. इस सब में उसने ईव की ओर कोई ध्यान नहीं दिया. सारा आश्चर्य अब समाप्त हो चुका था और दोनों परिवार ये समझ चुके थे कि जीवन शैली एक सी है. और इसका भरपूर लाभ उठाना चाहिए. इसका उत्तरदायित्व उठाया मिशेल ने.

मिशेल: “वैल, अब जब यहाँ आ गए हैं और इस हॉल का प्रयोजन समझ भी चुके हैं, तो हमें अपने खेल को आगे बढ़ाना चाहिए. रात अधिक हो चुकी है, इसीलिए मैं सबके साथी तय कर रही हूँ. शैली तुम जैसन के पास जाओ. और ऐलिस तुम रिचर्ड के पास.” मिशेल ने मार्क की ओर देखते हुए,” डेविड, तुम…. ईव के पास, और मार्क अब जब मुझे इतनी देर से ललचाई आँखों से देख रहे हो, तो तुम मेरे पास आओ, बच्चे.”

सब मिशेल की इस बात पर हंस पड़े.

ईव: “ये इसीलिए तो ऐलिस को लाने के लिए भागा था कि तुम इसके हाथ से न निकल जाओ, मिशेल. है न मार्क?”

मार्क झेंप गया: “मॉम!”

ईव: “इट इस ओके, सन. योर आंटी इस वन हॉट मामा।” कहते हुए उसने मिशेल को आंख मारी.

मिशेल: “ऐ, मैडम. मेरे बॉयफ्रेंड को कोई कुछ नहीं बोलेगा.”

ईव: “ओह, सो स्वीट. ए डेविड फिर तुम मेरे बॉयफ्रेंड हो, ओके.”

डेविड: “आज रात के लिए तो पक्का. कल का बाद में देखेंगे.” ये कहकर वो हंसने लगा. अन्य सभी उसकी इस हंसी सम्मिलित हो गए.

ईव ने डेविड का हाथ अपने हाथ में लिया और एक बिस्तरनुमा सोफे पर बैठकर उसे चूमने में व्यस्त हो गई. अब डेविड भी कहाँ पीछे रहने वालों में था. उसने भी ईव के मम्मों को हाथ में लेकर मसलना शुरू कर दिया.

ईव उसके कान के पास अपना मुंह लेकर बोली, “थोड़ा ईसी, उखाड़ने वाले हो क्या? मैं यहीं हूँ, अभी और भी दिन हैं. आज थोड़ा प्यार दिखा दे अपनी मामी को.”

डेविड को अपनी गलती समझ आ गयी. उसने अपने हाथ हल्के कर दिए. फिर वो धीरे धीरे नीचे की ओर होते हुए ईव की चूत के समक्ष आकर रुक गया. ईव ने उसका आशय समझ गई और उसने अपने पैर फैलाकर डेविड को अपनी तिजोरी की चाभी दे दी. डेविड उसे सूंघते हुए हल्के हलके अपनी जीभ के स्पर्श से चाटने लगा. वो उसके भगनासे को भी अपनी जीभ से झटके देता. ईव को डेविड का ये ढंग बहुत अच्छा लगा.

मार्क को इस बात की अनंत ख़ुशी थी कि उसके हाथ मिशेल लगी है. मिशेल उसकी भावनाओं को समझ रही थी और उसने मार्क के हाथों को अपने स्तनों पर रखा और उसका चुंबन लिया. फिर उसने मार्क के भारी लंड को हाथ में लेकर सहलाया और लंड को हाथ में लेकर एक अन्य सोफे पर जाकर बैठा दिया. मार्क के सामने झुककर उसने मार्क के लंड के टोपे को अपनी जीभ चाटकर उसकी वीर्य की पहली बूंदो को पी लिया. फिर उसके लंड को मुंह लेकर चूसने लगी. उसकी गति इतनी धीमी थी कि मार्क को एक ऐसा लग रहा था मानो रेशम के कपड़े से सहला रहा हो.

क्रमशः मिशेल ने अपनी गति को बढ़ाया और अब वो मार्क के लंड को अपने मुंह के अंदर तक ले जा रही थी. कुछ देर वो उसे अंदर रखती, फिर चूसती और फिर बाहर निकल कर बड़ी तन्मयता से चाट कर उसका भरपूर स्वाद लेती. मार्क की माँ भी लंड चूसने में प्रवीण थी, पर मिशेल का ढंग उससे बिल्कुल ही अलग था और मार्क को अब समझ में आ रहा था कि स्वाद और अनुभव की भिन्नता किसे कहते हैं.

जैसन भी इस समय शैली की चूत में मुंह छुपाये था और उसका रसास्वादन कर रहा था. उसका स्वाद और सुगंध उसके लंड को एक अलग ही कड़ेपन की ओर ले जा रही थी. जैसन की जीभ शैली की तंग चूत की दीवारों से सटकर उसे अंदर तक स्पर्श कर रही थी. शैली इस अद्भुत अनुभव की अनुभूति से चरमोत्कर्ष की ओर अग्रसित हो रही थी. उसके ही साथ में लेटी ऐलिस का भी यही हाल था. रिचर्ड उसकी चूत के रोम रोम को पुलकित कर रहा था. दोनों कन्यायें इस दो अनुभवी पुरुषों की मौखिक कला के सामने अपने आप को बेबस पा रही थीं.

वो मिशेल ही थी जिसने अगला कदम आगे बढ़ाते हुए, अपने आप को सोफे पर फैलाया और मार्क को संकेत दिया कि वो भी उसकी चूत का रस पिए.

उधर ईव डेविड के आगे हाथ डालने ही वाली थी. उसकी चूत जो दोपहर की अधूरी चुदाई के कारण प्यासी थी, अपने ज्वालामुखी को मुक्त करने को आतुर थी. और जब डेविड ने उसके भगनासे को अपने दातों में पकड़कर हल्के से चबाया, तो वो बांध टूट गया. उसका शरीर छटपटाते हुए झटके लेने लगा. डेविड को अपने मुंह को अपने लक्ष्य पर लगाकर रखने में बहुत परिश्रम करना पड़ा. पर उसे शीघ्र ही इसका पारुतोष भी मिला जब ईव की चूत से गर्मागर्म कामरस ने अपनी धारा उसके मुंह के अंदर छोड़ दी. प्यासे राही के सामान डेविड ने निःसंकोच वो अमृत पी लिया और ईव के शांत होने पर अपना चेहरा उठाकर एक अत्यंत सुखद मुस्कराहट से ईव को देखा. ईव ने उठकर उसका मुंह चूम लिया.

“यू आर गुड इन लिकिंग पूसी. पर देखें चुदाई कैसी करते हो.” ये कहते हुए ईव ने उसके लंड को कुछ क्षणों के लिए चूसा और अपनी चूत को सहलाते हुए लेट गई और अपनी चूत की फांकें फैला लीं. “नाउ फक मी।”

अब ये कल्पना करना कि अन्य दो कन्यायें व्यस्त नहीं होंगी ही गलत है. दोनों अपने साथियों के मुंह में पानी छोड़ चुकी थीं और अब उनके लंड को चुदाई के लिए तैयार कर रही थी. दोनों अपने थूक और मुंह से उन्हें अच्छे से गीला करते हुए कड़क कर दे रही थीं. और ये देखकर उन्हें संतुष्टि हुई कि दोनों हथियार उनकी चूत की कुटाई करने के लिए सक्षम और उत्तेजित थे.

पहले निशाना जैसन ले लगाया. शैली की चूत पर लंड लगाकर एक सही मात्रा का धक्का लगाया की सुपाड़े सहित ३-४ इंच लंड उस मखमली गुफा में धंस गया. शैली ने आनंद की चीख मारी। अभी उसकी चीख से लोग अभ्यस्त ही हुए थे कि उसके साथ के बिस्तर से एक उतनी ही आनंदित चीख और सुनाई दी. इस बार रिचर्ड ने अपने लंड को ऐलिस की चूत में पेल दिया था.

अब लड़कों की तो मानो इज्जत पर बन आयी हो. चूँकि ईव पहले ही पांव चौड़ाये हुए थी, तो डेविड ने पलक झलकते ही अपने लंड को लक्ष्य पर साधा और एक ही बार में पूरा अंदर पेल दिया. इस बार वो सुखद चीख ईव ने निकाली। मार्क अपने आपको पीछे कैसे रखता, उसने अपने लंड को मिशेल के मुंह से बाहर खींचा और मिशेल को सही आसन में लिटाते हुए पूरी शक्ति से लंड को मिशेल की चूत में गाढ़ दिया. स्वाभाविक था कि मिशेल भी चीखी और इसके साथ ये चार सुरों का सरगम बज उठा.

एक लय में चार चूतें चुद रही थीं. जहाँ जैसन और रिचर्ड प्यार से चुदाई कर रहे थे, वहीँ मार्क और डेविड मानो लट्ठ गाड़ने के लिए चोद रहे थे. इन दोनों के पास होने से दोनों में एक अनकही प्रतियोगिता चल रही थी जिसका आनंद उनकी साथी स्त्रियां पूर्ण रूप से उठा रही थीं. पर दिन भर की थकान के कारण ये खेल अब अधिक लम्बा चलना सम्भव नहीं था.

जैसन जो शैली के ऊपर चढ़कर उसे छोड़ रहा था अब झड़ने ही वाला था और उसने ये शैली को बता भी दिया. शैली ने इसके उत्तर में यही कहा कि वो चाहेगी कि जैसन उसे अपना पानी पिलाये. ये सुनकर जैसन ने ५-६ धक्कों के बाद अपना लंड बाहर निकला और शैली के मुंह से लगा दिया. शैली ने उसे चूसकर अपने चरम तक पंहुचा दिया और जब जैसन का बांध टूटा तो उसने उसके पानी को पी कर अपनी प्यास बुझाई.

मार्क का भी यही हाल था. उसने भी मिशेल को बताया कि वो अन्त पर है, तो मिशेल ने भी उसका रस पीने की इच्छा जताई। मार्क ने कुछ ही देर में उसके चेहरे पर अपना गाढ़ा पानी छोड़ दिया. मिशेल ने उसे अपनी उँगलियों से अपने मुंह में डाला और जो बच गया उसे चेहरे पर ही मल दिया.

अगली बारी रिचर्ड की निकली और अन्य की तरह ऐलिस ने भी लंड की प्रोटीन ड्रिंक ही पसंद की. और रिसाहरद ने उसकी ये इच्छा पूरी करने में कोई कमी नहीं की. और डेविड ने ईव की चूत का बंद बजा दिया था. पर फिर भी उसकी शक्ति अब समाप्त हो चुकी थी. उसने बिना कोई घोषणा किये हुए, जैसे ही झड़ने को हुआ, ईव के चेहरे को उसने अपने वीर्य से पोत दिया. ईव ने अपने हाथों से उसे अपने चेहरे पर मलते हुए उँगलियाँ चाटकर अपनी अधूरी प्यास बुझा ली.

अब सब थक तो चुके ही थे. रिचर्ड ने ये सुझाव दिया कि सब यूँ ही सो जाएँ और जिसका जब मन करे सो अपने कमरे में चला जाये.

रिचर्ड: “आज हम लोगों के बीच एक नया सम्बन्ध बना है. मुझे लगता है कि कल की सुबह हमारे लिए नए और अनदेखे रोमांच लाएगी. हम आठ अनगिनत विधियों से चुदाई कर सकते हैं. कल सुबह से हम उन सब पर अपना प्रयोग प्रारम्भ करेंगे.”

सबने सहमति जताई और अपने साथी की बाँहों में नींद में चले गए.

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पास के घर में:

“मामी, आज आज जाकर सारी व्यवस्था देख लीजियेगा. कल हमने सिमरन को जो सारे रोमियो के साथ एक दिन दिया था, तो उसकी पूरा आयोजन आपको ही देखना है.”

“ठीक है. मैं २ घंटे बाद चली जाऊंगी. अब मेरी गांड मार और अपनी माँ के लिए सुबह का नाश्ता बनाकर उसे बुला ला.”

क्रमश:
 
पाँचवा घर: शोनाली और जॉय चटर्जी

अध्याय ५.२

शोनाली का घर:

आज चटर्जी परिवार में बहुत अधिक हलचल थी. सभी बहुत व्यस्त थे और जल्दी में भी. शोनाली को दिंची क्लब जाना था, कल के आयोजन की तैयारी हेतु. सुमति को शीला ने घर बुलाया था, संभवतः शादी के बारे में कुछ बात करने के लिए. सागरिका और पारुल को सुप्रिया ने शॉपिंग के लिए आमंत्रित किया था. इस बार उसकी छोटी बहन सुरेखा भी साथ रहने वाली थी. सागरिका सुरेखा से पहली बार मिल रही थी. सुरेखा की बेटी संजना के आने की भी सम्भावना थी.

पार्थ को कुछ आर्थिक निर्णय लेने थे. अगले सप्ताह उन्होंने एक बॉलीवुड अभिनेत्री का एक शो रखा था. उसे ये देखना था कि उनकी फीस कैसे दी जाएगी. हालाँकि उन्होंने सभी सदस्यों की राय ली थी और उन्होंने इस शो की लिए अलग से धनराशि के लिए सहमति दी थी. पर ये राशि पूरी फीस से कम थी और आज उसे अग्रिम राशि भेजनी भी थी. उसने शाम को मामा से सलाह लेने पर विचार किया.

जॉय की आज रिचर्ड और उसके साले जैसन के साथ गोष्ठी थी. उनकी कम्पनी कई दिनों से निर्यात के नए अवसर ढूंढ रही थी. रिचर्ड ने कुछ दिनों पहले उसे बताया था कि उसका साला जैसन भारत अपने वयवसाय के लिए आ रहा है. जॉय ने उन्हें अपने ऑफिस में चर्चा के लिए आमंत्रित किया था और आज सुबह १० बजे उन्हें आना था.

अब चूँकि सभी जाने की जल्दी में थे तो हड़बड़ी और अफरा तफरी का वातावरण था. ९ बजे से एक एक करके सब निकलने लगे. जॉय और शोनाली सबसे पहले गए. जॉय को अपनी कम्पनी के सहयोगियों के साथ कार्यनीति पर चर्चा करनी थी. शोनाली को पहुँचने में समय लगना था और उसे दो और लोगों को साथ ले जाना था.

सुमति और पार्थ १० बजे के आसपास निकले. सुमति को तो साथ के घर ही जाना था, परन्तु पार्थ को आज बहुत चक्कर लगाने थे. उसने कुछ सोचकर निखिल को अपने साथ ले जाने का निर्णय लिया. दो संपन्न परिवारों के वंश के कारण उन्हें वस्तुतः इस अल्पायु ऋण मिलने में सरलता होती.

सबसे अंत में पारुल और सागरिका निकले, उनका पूरे दिन केवल एक ही काम था - अपने पिता के धन को व्यय करना.

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शोनाली:

शोनाली ने अपने साथ सोनम और सचिन को लिया और क्लब की ओर गाड़ी दौड़ा दी. रास्ते में सबने क्या क्या आयोजित करना है इसके बारे में चर्चा की. अब चूँकि ये क्लब के पूर्णतया अंदरूनी आयोजन था, अधिक समय नहीं लगना था. परन्तु पार्थ और शोनाली सदैव हर बिंदु पर ध्यान रखते थे और किसी प्रकार की कमी उन्हें पसंद नहीं थे. मुख्य समस्या दोपहर के भोजन को लेकर थी. क्योंकि ये सिमरन का पुरुस्कार समारोह था तो उसके द्वारा केटरिंग नहीं की जा सकती थी.

अंत में ये निश्चय हुआ कि खाने का आयोजन किया तो सिमरन के ही साथ जाये पर अलग स्थान पर और दो महिला सदस्य उसे लाने और परोसने में सहायता करें. सोनम ने इसके लिए अपना सहयोग देने का आश्वासन दिया. सचिन ने कहा कि वो अपनी माँ रमोना से पूछ सकता है, परन्तु फिर हसंते हुए बोला कि अगर उसे पता चलेगा कि ऐसा भी कुछ संभव है, तो वो भरसक प्रयत्न करेगी इसी प्रकार का पुरुस्कार जीतने के लिए. इस बात पर सब हंस पड़े.

कुछ ही देर में क्लब पहुंचे जहाँ इस सप्ताह की रिसेप्शनिस्ट मंजुला ने उनका स्वागत किया. सोनम ने मंजुला से बात की और उसे कल के आयोजन में सोनम की सहायता के लिए प्रतिबद्ध कर लिया. उसके बाद शोनाली ने सिमरन से बात करके अपनी राय रखी. सिमरन ने उसे मान लिया और कहा कि वो आज ही सारा प्रयोजन कर लेगी. उसने एक बार शोनाली को धन्यवाद दिया कि उन्होंने अपनी बात को पूरा करने का साहस दिखाया. इस बात पर शोनाली ने चुटकी ली कि साहस तो सिमरन का है जो ऐसे खेल के लिए मान गई.

अब उन्हें दो महिलाओं को सफाई के लिए भी नियुक्त करना था. अब अगर १६ रोमियो एक अकेली महिला की चुदाई करने वाले थे तो उस महिला के गुप्तांगों को अधिक गीला और चौड़ा होने से भी रोकना होगा. इसके लिए क्लब की दो सदस्यों का चयन करना था जिन्हें चूत और गांड चाटकर कामरस पीने में आनंद आता हो. इसके लिए जब चर्चा हुई तो मंजुला ने वर्षा रेड्डी और एंजेला मैथ्यू के नाम सुझाये.

वर्षा एक राजनीतिज्ञ थी और नारी सशक्तिकरण के लिए बहुत प्रसिद्द थी. उसका बाहरी आडम्बर वाले चेहरे से पुरुषों के प्रति केवल अपशब्द ही सुनाई देते थे. पर बंद कमरे में उसका रूप अलग था जिससे क्लब के सदस्य भली भांति परिचित थे. एंजेला एक प्रकार से अस्थायी सदस्य थी. वो पुलिस के एक अति उच्च अधिकारी की पत्नी थी. परन्तु क्योंकि उनका स्थानांतरण कभी भी हो जाता था इसीलिए उसे “जब तक शहर में हैं” की श्रेणी में सदस्य्ता दी गई थी. उसका वीर्यप्रेम अद्भुत था. मंजुला ने इन दोनों महिलाओं से फोन पर बात की और उन्हें कल के कार्यक्रम के बारे में और इसमें उनकी भूमिका के सम्बन्ध में सहमति मांगी. जैसा अपेक्षित था दोनों ने इसके लिए अत्यंत प्रसन्नता से हामी भर दी.

अब जब सब कुछ सेट था तो सबने अंदर जाकर कुछ देर और मंत्रणा की और फिर वापिस शहर की ओर निकल पड़े.

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सुमति:

सुमति जब शीला के घर पहुंची तो केवल समर्थ और शीला ही घर पर थे. शीला ने उसका बड़े प्रेम से स्वागत किया. अंदर जाने के बाद शीला ने सबके लिए जूस लाया और सब बैठ गए. अधिकतर चर्चा विवाह की तैयारी से सम्बंधित थी. शीला ने सुमति को कुछ संकेत दिए जो वो चाहती थी कि ध्यान में रखे जाएँ. दहेज़ की कोई भी बात नहीं थी और समर्थ और शीला ने इसके लिए कठोर शब्दों में मना कर दिया. हालाँकि ये बात निश्चित हुई कि दोनों परिवार मिलकर नवविवाहितों को एक घर खरीद कर देंगे. इसके लिए सुप्रिया की भी सहमति थी, परन्तु निखिल इससे किसी भी प्रकार से सहमत नहीं था. अंत में इसे निवेश समझकर निखिल ने स्वीकार कर लिया था. जिस घर के बारे में बात थी वो एक विशाल अपार्टमेंट था जो सुप्रिया के घर से अधिक दूर नहीं था.

इसके अतिरिक्त शीला ने ये भी बता दिया कि पूरा खर्चे का वहां दोनों परिवार मिलकर करेंगे.

शीला: “सुमति, हमारा जो भी कुछ है, इन बच्चों का ही है. अगर आज सुप्रिया की बेटी होती तो भी हम यही करते. इसीलिए, इसमें किसी प्रकार का संकोच करने की आवश्यकता नहीं है. हम इस विवाह को आर्थिक सम्बन्ध नहीं अपितु पारिवारिक सम्बन्ध बना रहे हैं.”

सुमति ने उनके विचार जॉय और शोनाली के समक्ष रखने का वादा किया. सुमति ने अपने साथ रखी डायरी में सब लिख लिया.

शीला: “आओ अब मैं तुम्हें अपने घर का टूर करवाती हूँ.”

ये कहते हुए उसने सुमति का हाथ पकड़कर उसे घर के अंदर ले गई.

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पार्थ और निखिल:

पार्थ और निखिल निर्धारित समय से अपने गंतव्य पर पहुंच गए. इस समय वो रूचि आहूजा के समक्ष बैठे थे. रूचि नगर की सबसे बड़ी फाइनेंसर थी. हर महीने वो लगभग १० से १५ करोड़ की फाइनेंसिंग करती थी. वो ४५ वर्ष की एक परिपक्व विधवा थी. उसके पति का निधन कोई ३ वर्ष पहले एक दुर्घटना में हो गया था. दबी हुई आवाज़ में लोग इसमें रूचि का हाथ होने का आकलन करते थे, परन्तु कभी किसी ने इस पर कोई शक नहीं जताया. अपने पति की अथाह संपत्ति को पाने के बाद रूचि ने अपने इस व्यापार का और विस्तार कर लिया था. कुछ लोगों का कहना था की वो बॉलीवुड और कन्नड़ फिल्म जगत में भी फाइनैंस करती थी.

रूचि ने कुर्सी में पीछे झुकते हुए दोनों की ओर देखा, “तो आपको ५० लाख रूपये चाहिए, २ सप्ताह के लिए. आप जानते हो कि मेरी ब्याज दर क्या है?”

पार्थ: “जी मैडम, हमें पता है और हम उसे स्वीकार करते हैं.”

रूचि: “मैंने तुम्हारे बिज़नेस के बारे में पता लगाया है. जो तथ्य तुम दुनिया से छुपा सकते हो, वो मुझसे छुपा नहीं है. काफी नया तरीका है तुम्हारा. आई ऍम इम्प्रेस्ड.”

पार्थ: “थैंक यू मैडम”

रूचि: “मुझे तुमसे एक दूसरी डील करनी है. मैं चाहती हूँ कि मैं तुम्हारे इस क्लब में पार्टनर बनूँ. मैं २६% हिस्सा लेने के लिए इच्छुक हूँ.”

पार्थ का दिमाग घूम गया. उसने ये स्थिति के बारे में तो विचार भी नहीं किया था.

पार्थ: “मुझे अपने पार्टनर से पूछना पड़ेगा.”

रूचि: “पूछना भी चाहिए. मैंने तुम्हारे पूरे बिज़नेस का आकलन किया है और जमीन और अन्य सभी संसाधनों का कुल मूल्य ६ करोड़ के लगभग है. पर जैसा तुम समझते हो, इसकी बाजार कीमत लगभग ९ से १० करोड़ हो सकती है. मैं इस बिज़नेस में २.५ करोड़ लगाने की इच्छा रखती हूँ. तुम्हारी बैलेंस शीट ये दिखाती है कि अभी ये उपक्रम ४० लाख के नुकसान में है. बैंक के ऋण की दर भी अधिक है. मेरे इस निवेश से तुम्हारा नुकसान समाप्त हो जायेगा और जो आगे के तुम्हारे विस्तार के जो लक्ष्य है, उसे भी जल्दी पूरा कर पाओगे.”

पार्थ सोच में पड़ गया. “मैडम क्या मुझे सोचने के लिए एक दिन का समय मिल सकता है?”

रूचि: “ये डील तुम्हारे इस ऑफिस में रहने तक ही है. यहाँ से निकलने के बाद ये प्रस्ताव समाप्त हो जायेगा. हाँ मैं जो ऋण लेने आये हो, वो मैं अवश्य दूँगी.”

पार्थ गहरी सोच में था. उसने निखिल की ओर देखा. अब चूँकि निखिल बचपन से बिज़नेस के बारे में सुनता आ रहा था उसने इस प्रस्ताव का सही मूल्य समझ लिया.

निखिल: “मैडम, अगर हम स्वीकार करेंगे, तो इस निवेश के अतिरिक्त और भी जो व्यय हैं, उन्हें कैसे करेंगे?”

रूचि: “इस राशि से तुम्हारे व्यय कम होंगे. नुकसान पूरा होने के पश्चात् तुम्हारे पास २.१ करोड़ बचेंगे. बैंक का लोन इस समय (एक पेपर पढ़ते हुए) ९० लाख बकाया है, जिसका वार्षिक ऋण ११ लाख के आसपास है. अगर ये ऋण चूका दो तो भी तुम्हारे पास 1.२ करोड़ बचेंगे और हर वर्ष ११ लाख भी बचेंगे. क्लब जिस प्रकार से चल रहा है, वैसे ही चलेगा, पर हर तीन महीने में मेरी टीम ऑडिट करेगी. कुल आय का २६% मेरा होगा.”

निखिल ने धीरे से पार्थ का हाथ दबाकर उसे स्वीकृति देने के लिए संकेत दिया.

पार्थ: “मुझे स्वीकार है.”

रूचि: “पर मेरी कुछ और भी शर्तें हैं.”

पार्थ: “कैसी शर्त.”

रूचि खिलखिला पड़ी. “घबरा मत बच्चे. तुम्हारे क्लब के रोमियो मैं जब भी इच्छा करुँगी, मेरी सेवा में उपस्थित होंगे. क्लब में तो मैं आऊंगी नहीं, तो उन्हें मेरे घर पर ही आकर मुझे संतुष्ट करना होगा. कब कितने रोमियो आएंगे ये मेरी इच्छा पर निर्भर होगा.”

पार्थ: “अन्य दिनों में तो इसमें कोई कठिनाई नहीं है, परन्तु जब क्लब के विशेष समारोह होते हैं उन दो दिनों ये संभव नहीं हो पायेगा.”

रूचि मुस्कुराते हुए: “कोई चिंता नहीं. मैं इतना तो अपने आप को बहला ही सकती हूँ. तो बताओ, क्या ये डील पक्की की जाये?”

पार्थ ने हामी भरी तो रूचि ने एक अग्रीमेंट अपने दराज से निकाला।

“इसे ध्यान से पढ़ लो. और इस पर अपने हस्ताक्षर कर दो. मैं बिज़नेस में धोखा नहीं करती यही मेरी सफलता का रहस्य है.” फिर निखिल की ओर सीखकर, “तुम चाहो तो समर्थ से विचार विमर्श कर सकते हो.”

उसने रिमोट से एक दरवाजा खोला जिसमे एक सभा कक्ष था. “वहां बैठकर तुम लोग अपना निर्णय करो, मैं एक घंटे में तुम्हें मिलूंगी. पर इस कमरे से बाहर जाने की तुम्हे अनुमति नहीं है. आवश्यक होने पर बाथरूम उस कक्ष से ही संलग्न है.”

पार्थ और निखिल उस कमरे में गए और रूचि ने उसे लॉक कर दिया. निखिल ने अपने नाना को फोन लगाया और सारी स्थिति समझाई। फिर उनके मांगने पर एग्रीमेंट को व्हाट्स ऐप से उन्हें भेज दिया. लगभग ४० मिनट में समर्थ का फोन आया. उसने अपने वकील से सलाह ली थी और उसने इसे सही पाया था. समर्थ ने पार्थ को हस्ताक्षर करने की सलाह दी. अब समय भी पूरा हो चला था. कुछ ही मिनटों में क्लिक की ध्वनि से सभाकक्ष का द्वार खुल गया. पार्थ और निखिल बाहर आये.

“क्या कहा समर्थ ने?”

“उन्हें ये अग्रीमेंट उचित लगा है.”

“जैसा मैंने कहा, मैं धंधे में धोखा नहीं करती.”

पार्थ और रूचि ने एग्रीमेंट पर साइन किया, फिर निखिल और रूचि की सेक्रेटरी ने गवाहों के स्थान पर साइन किये. सेक्रेटरी ने दो प्रतियां बनायीं और उसमें से एक पार्थ को सौंप दी. फिर वो कमरा बंद करके अपने स्थान पर चली गई. रूचि ने अपनी चेक बुक निकाली और २.५ करोड़ का चेक काटकर पार्थ को सौंप दिया.

पार्थ और निखिल दोनों बोल पड़े: “थैंक यू, रूचि मैडम.”

रूचि मुस्कुराई. “ये तो हुई धंधे की बात. अब इतने बड़े निर्णय के लिए कुछ मनोरंजन भी होना चाहिए, क्यों?”

पार्थ और निखिल ने बिना कुछ सोचे सिर हाँ में हिलाया.

“वेरी गुड़.” ये कहकर रूचि ने अपने रिमोट से एक बटन दबाया और उसके पीछे की दीवार दो पाटों में बँट गई.

उस दीवार के पीछे एक सुसज्जित शयन कक्ष था.

रूचि ने इंटरकॉम से अपनी सेक्रेटरी को कॉल किया: “एक घंटे तक मैं व्यस्त हूँ. नो कॉल्स, नो विज़िटर्स। ओके?”

रूचि अपनी कुर्सी से उठकर अंदर जाते हुए बोली,” ओके, बॉयज़, फॉलो मी.”

**********

सास बहू और शॉपिंग:

सागरिका और पारुल सुप्रिया के ऑफिस पहुंचे. सुप्रिया ने अपने ऑफिस में आमंत्रित किया और सुरेखा को भी बुला लिया. सागरिका और पारुल ने सुप्रिया और सुरेखा के पांव छूकर आशीर्वाद लिया। सुरेखा दोनों बहनों के सौंदर्य पर मुग्ध हो गई. चारों महिलाएं ऑफिस से निकलीं. उन्होंने अपनी सेक्रेटरी को कहा कि अगर कोई आवश्यक काम पड़े तो मोबाइल पर कॉल करे, अन्यथा वो लोग आज वापिस नहीं आएंगे.

सुप्रिया: “शोनाली का फोन आया था. वो भी ३ बजे के पहले हमारे पास पहुँच जाएगी. कह रही थी कि तुम्हें क्रेडिट कार्ड दिया है शॉपिंग के लिए. तो चलकर कुछ शॉपिंग भी करेंगे और कुछ मस्ती भी.”

सागरिका और पारुल दोनों बहुत खुश हुए. ऐसी सास सबको मिले जो मित्र अधिक थी. सब एक मॉल में गए और लगभग दो घंटे खूब घूमे, शॉपिंग की, खाया पिया और अच्छा समय बिताया. जब तीन बजने को हुए तो सुप्रिया ने कहा कि अब घर चलते हैं वहीँ गपशप करेंगे. सब गाड़ी में बैठकर सुप्रिया के घर चल पड़े. बीच ही में शोनाली की कॉल आ गई. सुप्रिया ने उसे भी घर पर ही पहुँचने का आमंत्रण दिया. घर पहुंचकर सबने अपने शॉपिंग के बैग डाइनिंग टेबल पर लगा दिए. सुरेखा अपने सैंडल उतारकर अपने पांव दबाने लगी. सागरिका तुरंत उसके सामने नीचे बैठी और उसके पाँवों की मालिश करने लगी. सुरेखा की आनंद और आराम से ऑंखें बंद हो गयीं.

तभी पारुल ने सुप्रिया से कहा, “आप भी बैठो, मैं आपके पैरों की मालिश करती हूँ. सुप्रिया को उस पर बहुत प्यार आ गया. उसने पारुल के गाल चूमे और सोफे पर बैठ गई. पारुल सुप्रिया के पाँवों की मालिश करने लगी. कुछ क्षणों के लिए सुप्रिया और सुरेखा की आंख लग गई. उन्हें सोता छोड़कर, पारुल और सागरिका किचन में गए और सबके लिए चाय का प्रबंध करने लगे. साथ ही उन्होंने कुछ हल्का सा अल्पाहार भी बना लिया. जब तक ये सब हुआ तब तक सुरेखा और सुप्रिया की आंख भी खुल गई. दोनों एक दूसरे को देखकर खिलखिलाने लगीं.

इतने में चाय नाश्ता आ गया और जैसे इसी समय की प्रतीक्षा हो रही हो, घर की घंटी बजी और शोनाली ने घर में प्रवेश किया. उसने डाइनिंग टेबल पर लगे शॉपिंग बैग देखे तो आश्चर्य में पड़ गई.

सुप्रिया: “ये सब इनके नहीं हैं. मेरे और सुरेखा के भी हैं.” ये कहते हुए उसने शोनाली को गले लगाकर उसके गाल चूमे. “आओ सुरेखा से मिलो.”

शोनाली सुरेखा के गले लगी और दोनों हाथ पकड़कर एक ओर बैठकर बातें करने लगीं. दोनों लड़कियों ने सबको चाय नाश्ता दिया। इस सब में ४ बजने को आ गए थे.

सुप्रिया ने कहा कि वो बियर पीने के मूड में है, क्या कोई उसका साथ देगा. सुरेखा ने हाँ की और फिर शोनाली ने भी अपनी सहमति दे दी. सुप्रिया उठने लगी तो सागरिका ने उसे रोका, “आप बता दो, मैं लेकर आती हूँ.” सुप्रिया ने उसे बताया तो सागरिका पारुल के साथ बियर लेने चली गई. सुप्रिया की ऑंखें छलक गयीं. आज तक किसी ने उसके काम में हाथ नहीं बंटाया था. उसने शोनाली को फिर से गले लगा लिया.

शोनाली: “दीदी, आप अब भावुक मत हो. मेरी बेटी सब संभाल लेगी. अब आपका आराम करने का समय आ चुका है.”

ये कहते हुए शोनाली ने सुप्रिया के होंठ चूम लिए. सुप्रिया के तन बदन में जैसे आग लग गई. उसने उस चुम्बन का उत्तर एक और चुम्बन से दिया. कुछ ही क्षणों में सुप्रिया और शोनाली के शरीर गुत्थमगुत्था हो गए. सुरेखा ये सब देख रही थी और उसके शरीर में भी भूख जाग गयी. सागरिका ने ये सब देखा तो उसने पारुल को संकेत किया और दोनों बहनें सुरेखा की ओर अग्रसर हुईं और उसे अपने बाहुपाश में ले लिया. सागरिका सुरेखा के होंठ चूम रही थी तो पारुल ने उसकी गर्दन और कानों पर अपनी जीभ का जादू चलाया.

शोनाली ने सुप्रिया के वस्त्र निकलते हुए उसे नंगा कर दिया और उसके मम्मे चूसने लगी. पारुल ने जब ये देखा तो उसने सुप्रिया के सामने बैठकर उसके पांव फैलाये और अपनी जीभ से उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया. सुप्रिया इस दोहरे आघात से बेबस हो गई और उसने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया. पारुल ने उसके पांवों को और फैलाकर अपने आक्रमण में तेजी कर दी. अब वो सुप्रिया की चूत के अंदर तक अपनी जीभ घुसा कर उसे चोद रही थी. इसके साथ उसने अपने बाएं हाथ के अंगूठे और ऊँगली से भगनासे को मसलते हुए दाएं हाथ की एक ऊँगली सुप्रिया की गांड के छेद पर हल्के से सहलाने लगी. शोनाली हर मिनट एक स्तन को चूसती फिर दूसरे को, फिर सुप्रिया के होंठ चूसती. सुप्रिया आनंद की लहरों में बह रही थी.

उधर सागरिका ने सुरेखा को निर्वस्त्र कर दिया था. पर चटर्जी परिवार की तीनों महिलाएं अभी भी अपने पूरे वस्त्र पहने थीं. सागरिका ने सुरेखा को बड़े प्रेम से सोफे पर बैठाया, फिर उसके पांव चौड़े करते हुए उसकी चूत में अपना चेहरा छुपा लिया. शोनाली अचानक खड़ी हो गई और उसने अपने कपड़े आनन फानन में उतार फेंके. उसने सुप्रिया का एक प्रगाढ़ चुम्बन लिया और फिर स्वयं पारुल के पीछे से उसकी गांड को चाटने लगी. उसकी जीभ पारुल की मखमली गांड से उसकी चूत के बीच की यात्रा करने लगी.

सुप्रिया ने उन्हें रुकने का संकेत दिया और वो जमीन पर लेट गई, फिर उसने सागरिका को अपनी और खींचा और उसकी चूत पर अपना मुंह लगा दिया. अब शोनाली की बारी थी. उसने सबको एक गोलाकार क्रम में आने का सुझाव दिया और देखते ही देखते एक नए व्यूह की रचना हो गई. पारुल सुरेखा की चूत चाट रही थी. सुप्रिया पारुल की, शोनाली सुप्रिया की सागरिका शोनाली की और सुरेखा ने सागरिका की चूत में अपना चेहरा गढाया हुआ था.

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पांचों इस बात से अनिभिज्ञ थे कि उन्हें इस अवस्था में अचंभित आँखों से एक लड़की देख रही थी. और वो कोई और नहीं, संजना थी !

**********

जॉय का दिन:

जॉय ने अपने ऑफिस पहुँच कर अपने अतिथियों के आगमन का आयोजन किया. १० बजे रिचर्ड और जैसन पहुँच गए. सभी मिलकर सभाकक्ष में चले गए. जॉय के बॉस ने आकर सबका स्वागत किया और उन्हें दोपहर के भोज के लिए आमंत्रित किया और आगे की चर्चा के लिए छोड़कर अपने काम पर चले गए.

चर्चा में ये तय किया गया कि जॉय की कंपनी के उत्पादों को जैसन की कंपनी अपने देश में बेचेगी. इसके ऊपर जो कमीशन है, वो भी तय किया गया. इसी के साथ जैसन भी अपनी कंपनी के कुछ उत्पादों को भारत में बेचने के लिए उत्सुक था. इसके लिए रिचर्ड की कंपनी जॉय की कंपनी के साथ अनुबंध करेगी और उसका सहयोग करेगी. चर्चा बहुत सफल रही और तीनों पक्षों ने एक दूसरे के साथ काम करने के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किये. इसके बाद जॉय के बॉस के साथ सभी एक पांच सितारा होटल में भोजन हेतु गए और उन्हें चर्चा और अनुबंध से अवगत कराया. बॉस ने सबको बधाई दी. इसके बाद बॉस अपने काम पर चले गए परन्तु ये तीनों वहीँ कुछ देर और बैठे.

जैसन के मन में कुछ चल रहा था, उसे जॉय के हाव भाव से ये प्रतीत हो रहा था कि वो एक खिलाड़ी प्रवत्ति का पुरुष है. एक तो जॉय की सेक्रेटरी के साथ कुछ अधिक खुला बर्ताव और कुछ जॉय की हर आती जाती स्त्री या लड़की का पीछे करती हुई ऑंखें उसे ये विश्वास दिला रही थीं कि ये रंगीन आदमी है. जब जॉय ने बाथरूम जाने की अनुमति ली तब उसकी अनुपस्थिति में जैसन ने अपनी राय रिचर्ड को बताई. रिचर्ड ने उसकी बात को स्वीकारा और कहा कि उसे जॉय और उसकी पत्नी के बारे में कुछ उड़ती हुई बातें सुनाई दी हैं. जैसन के पूछने पर रिचर्ड ने थोड़ा कुछ बताया कि तब तक जॉय लौट आया.

अब जैसन ने बात आगे बढ़ाई , “हम चाहेंगे कि अगर संभव हो सके तो हम दोनों, आप और आपकी पत्नी को अपने घर आमंत्रित करना चाहते हैं. दिन आप तय कर लें, समय शाम ७ बजे का रखें.”

जॉय ने अपने फोन में अपने कैलेंडर को देखकर शुक्रवार अथवा शनिवार का दिन उचित बताया. “परन्तु मुझे शोनाली से भी पूछना पड़ेगा. अगर वो सहमत होगी तो ये दिन ठीक रहेगा.”

रिचर्ड और जैसन ने इस बात को स्वीकार किया और जॉय ने रात में उन्हें अवगत कराने के लिए कहा. इसके बाद सब लोग उठे. जॉय अपने ऑफिस चला गया और रिचर्ड और जैसन अपने घर. शाम को उन्हें अपने अन्य पार्टनर्स के साथ दूसरी पार्टी से मिलने जाना था.

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सुमति:

शीला अपने घर का पूरा भ्रमण करवाने के बाद सुमति को वापिस बैठक में ले गई.

शीला: “इन्होने पूरे घर को वीडियो कैमरों से लैस किया हुआ है. हाँ बाथरूम छोड़ दिए है.”

समर्थ हंसने लगा.

शीला: “और हमारे घर में एक लाइब्रेरी है, जिसकी चाबी केवल इनके ही पास है. बस वही एक स्थान है जो तुमने नहीं देखा.”

समर्थ: “शीला, चाबी ले लो. सुमति तो अब अपने ही घर की सदस्य है. जाओ इसे दिखा लाओ. अगर इच्छा होगी तो मैं भी आ जाऊंगा.”

शीला चाबी लेकर सुमति को बेसमेंट में ले गई. कमरे में प्रवेश करते ही सुमति चकित रह गई. कमरे की एक दीवार पर दर्जनों टीवी लगे हुए थे. उनके सामने सोफे लगे हुए थे और अन्य दीवारें अलमारियों के प्रकार थीं. शीला ने एक अलमारी खोलकर सुमति को दिखाई.

“इन्होनें पिछले कुछ सालों के वीडियो संभाल कर रखे हैं. पहले सीडी में थे, फिर डीवीडी बनाये. और पिछले साल सबको इन्होने हार्ड डिस्क में स्थानांतरित कर दिया.”

“ये किस चीज़ के वीडियो हैं, माँ जी?” हालाँकि सुमति कुछ कुछ समझ चुकी थी पर पूछना ही ठीक समझा.

“चुदाई के, हमारे घर के अंदर के. संभवतः चुदाई का ऐसा कोई प्रकरण नहीं जिसे रिकॉर्ड करके सहेजा न गया हो. इन्हें कभी कभार पुराने वृत्तांत देखने का मन करता है. आओ मैं तुम्हें कुछ पुराने प्रकरण दिखती हूँ.”

ये कहकर शीला ने एक डिस्क निकाली।

“हम्म्म, ये कोई ७ साल पहले की है. देखें क्या है इसमें?” ये कहकर शीला ने एक मशीन में वो डिस्क लगाई और उसके साथ में लगा टीवी चालू कर दिया.

वीडियो की क्वालिटी इतनी अच्छी तो नहीं थी पर कुछ ही समय में सब पात्र समझ आ गए. नीचे लेती हुई सुप्रिया के मुंह के ऊपर शीला की चूत थी और सुप्रिया उसे चूस रही थी. और शीला की पीछे से समर्थ अपना तगड़ा लंड उसकी गांड में डालकर कर जोरदार चुदाई कर रहे थे.

“ओह, लगता है, शुरू में इन्होनें वीडियो चालू नहीं किया था.”

सुमति बोली, “माँ जी, मुझे वो दिखाओ न जिसमे आपके दोनों नाती हों.”

“तब तो दो साल पहले वाले देखने होंगे. रुको, मैं निकालती हूँ.” ये कहकर शीला ने उस समय की एक डिस्क निकाली और बदलकर लगा दी. पुरानी डिस्क उसने यथास्थान लौटा दी.

जब वीडियो चला तो कुछ समय तो अलग अलग दृश्य आते रहे. अचानक शीला ने एक स्थान पर रोक कर फॉरवर्ड करना बंद कर दिया. ये शीला और समर्थ का शयनकक्ष था. और इस समय उसमें शीला और समर्थ अकेले थे.

सुमति ने प्रश्न भरी आँखों से शीला को देखा, तो शीला मुस्कराने लगी.

“जैसे कोई लड़की अपनी पहली चुदाई नहीं भूलती, वैसे ही मैं वो दिन नहीं भूल सकती जब मेरे तीनों सबसे प्यारे पुरुषों ने मुझे एक साथ चोदा था. ये देखकर मुझे वो दिन दोबारा याद आ जायेगा.”

और तत्क्षण कमरे में नंगी सुप्रिया ने प्रवेश किया. उसकी चूत से बहता हुआ रस साफ दिखाई दे रहा था.

“मम्मी, ये सम्भालो अपने नाती. मुझे चोद चोद कर अधमरा कर दिया इन दोनों ने. पर इनके लौड़े हैं कि झुकते ही नहीं.”

उसके पीछे नितिन और निखिल ने नंगे ही प्रवेश किया.

और उसी समय उस कमरे में समर्थ भी आ गए.

“कौन सी वीडियो देख रहे हो?”

“जब आप तीनों ने मुझे पहली बार एक साथ चोदा था.”

“अच्छा।” ये कहकर समर्थ ने अपनी पैंट उतारी और सोफे पर बैठ गए.

“मुझे सुमति की याद आ रही थी. ये लंड बहुत अच्छा चूसती है.”

शीला समझ गई की अब वीडियो देखना संभव नहीं होगा. पर उसने बंद नहीं किया और आगे बढ़कर सुमति के कपडे निकालने शुरू कर दिए. समर्थ भी अब अपने ऊपर के कपड़े निकाल चुके थे. शीला उनके सामने झुकी और उनके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. अब शीला ने अपने कपड़े उतारे और एक ओर की अलमारी से कोई १० इंच लम्बा एक नकली लंड निकला. उसने उस लंड को सुमति की चूत पर घिसना चालू कर दिया. सुमति की चूत पनिया गई और शीला ने पूरा लंड धीरे धीरे अंदर पेल दिया.

कुछ ही समय में शीला के हाथ तेजी से चल रहे थे. सुमति की चूत नदी के समान बह रही थी और उसका मुंह समर्थ के लंड पर उसी गति से चल रहा था जितनी शीला के हाथ. समर्थ ने सुमति के सिर पर हाथ फेरा और उसे रोक दिया.

“तेरी गांड मारने का बहुत मन है. पर यहाँ नहीं, चल कमरे में चलते हैं.” सुमति अपने कपड़े उठाने लगी तो शीला बोली, “अरे समय मत ख़राब करो. ये बाद में ले लेना.”

कमरा बंद करके तीनों नंगे ही शीला के शयनकक्ष में चले गए. कमरे में शीला लेट गई और सुमति को संकेत किया तो सुमति ने उलटे होकर शीला की चूत में अपना मुंह डाल दिया. अपने सामने सुमति की चूत को थोड़ा सा चाटने के पश्चात् शीला ने डिल्डो दोबारा उसकी चूत में डाल दिया और धीमी गति से उसकी चुदाई करने लगी. समर्थ ने साइड टेबल से वेसलीन निकाला और अपने लंड पर मल लिया. फिर उसने सुमति की गांड को खोलते हुए उसमे अच्छी खासी मात्रा ट्यूब से भर दी. अब जैसे ही समर्थ ने अपने लंड को सुमति की गांड पर लगाया, शीला ने पूरा का पूरा डिल्डो अंदर डाल कर पकड़ लिया और सुमति की चूत पर अपनी जीभ चलाने लगी.

समर्थ ने अपने लंड का दबाव बनाया और सुमति की गांड ने फैलकर उसका स्वागत किया. जब सुपाड़ा अंदर चला गया तो समर्थ ने दबाव बढ़ाते हुए ४ इंच लंड और अंदर डाल दिया. सुमति की चूत में फंसा डिल्डो अब तंग होने लगा था. उसने अपनी सांस रोकी हुई थी, वो जानती थी कि अब समर्थ पूरे लंड को पेलने वाला है. शीला ने सुमति का सिर पकड़कर अपनी चूत में घुसा लिया और उसी क्षण समर्थ ने एक तगड़े झटके के साथ पूरा लंड सुमति की गांड में पेल दिया. अगर शीला ने डिल्डो को पकड़ा न होता तो वो अवश्य ही बाहर निकल जाता. पर शीला के अनुभव ने इस परिस्थिति को पहले ही समझ लिया था. शीला एक हाथ से डिल्डो को दबाये हुए थी और एक से सुमति की सिर को. सुमति की गूँ गूँ की ध्वनि शीला की जांघों के बीच ही दबकर रह गई थी.

समर्थ ने अब अपने पसंदीदा कृत्य अपना ध्यान केंद्रित किया.

समर्थ: “वाह, क्या टाइट गांड है इसकी. सच में इसे चोदकर बहुत मजा आता है.”

शीला: “आप तो गांड के रसिया हो. ऐसी कोई गांड है जिसे आपको चोदने में मजा नहीं आता हो?”

समर्थ हंस पड़ा और अपने धक्कों से सुमति की गांड का कीमा बनाने में जुटा रहा. सुमति भी अब संभल गई थी और उसने शीला की चूत पर ध्यान केंद्रित किया और जो जादू उसने सुप्रिया को दिखाया था वही शीला पर भी किया. शीला अद्भुत अनुभूति से जल्द ही सुमति के मुंह में अपना रस बिखेरने लगी. समर्थ के हर धक्के के साथ सुमति की जीभ शीला की चूत के और भीतर तक चली जाती. सुमति उसे घुमाती और समर्थ के लंड बाहर निकलते हुए उसकी जीभ शीला के अंदरूनी हिस्से को चाटते हुए बाहर आती और फिर धक्के के साथ वापिस अंदर चली जाती.

शीला ने भी अब अपने हाथ के डिल्डो को सुमति की चूत में अंदर बाहर करना शुरू किया. अब सुमति के दोनों छेदों में चुदाई हो रही थी. उसकी चूत में एक अजीब सी खुजली होने लगी. गांड की खुजली तो समर्थ का लंड मिटा रहा था, पर चूत का नकली लंड उसे वो सुख नहीं दे पा रहा था. शीला को वस्तुतः ये समझ में आया. उसने समर्थ को हटने को कहा और फिर लेटने को. जब समर्थ लेट गए तो सुमति को अपनी गांड उसके लंड पर रखने के लिए शीला ने आदेश दिया. सुमति ने समर्थ के लंड पर गांड के छेद को टिकाया और पूरे लंड को अंदर ले लिया. अब शीला ने डिल्डो को दोबारा से सुमति की चूत में डाल दिया और अपने हाथों से तेज गति से चुदाई प्रारम्भ कर दी. समर्थ ने भी अपनी पूर्व गति को पाया और अब सुमति की दुगनी चुदाई होने लगी.

पर चाहे मनुष्य कितना भी हृष्ट-पुष्ट क्यों न हो, पर आयु फिर भी अपना अंकुश रखती है. समर्थ भी अब अधिक देर नहीं टिक सकते थे. पर उन्हें ये भी पता था कि झड़ना तो सुमति की गांड के अंदर ही है. यही हुआ समर्थ के लंड का उबलता हुआ लावा सुमति की फटी गांड को सींचते हुए उसे ठंडा कर रहा था. अपना पूरा माल अंदर छोड़कर जैसे ही लंड बाहर निकाला शीला ने डिल्डो को चूत से निकालकर गांड में डालकर उसे सील कर दिया. फिर उसने समर्थ के लंड को बहुत प्रेम के साथ चाटकर साफ किया और चमक उठने के बाद उसे चूम लिया.

फिर उसने सुमति की गांड से डिल्डो निकाला और अपने मुंह से उसे चाटकर साफ किया और समर्थ के रस को अपने मुंह में भर लिया. फिर वो उठी और सुमति के मुंह से मुंह लगाकर उसने आधा रस सुमति को समर्पित कर दिया. सुमति को ये प्रसाद अत्यंत ही रुचिकर लगा और शीला और वो बहुत समय तक एक दूसरे लिपटी हुई एक दूसरे को चुम्बनों से भिगोती रहीं।

अंत में सुमति ने घर जाने की अनुमति मांगी. सब अपने कपड़े लेने के लिए वीडियो कक्ष में गए. समर्थ ने जो डिस्क लगी थी उसे निकाल कर सुमति को दिया।

समर्थ: “आज तक कभी इनमें से कुछ भी बाहर नहीं गया है. मैं आज पहली बार एक अपवाद कर रहा हूँ. इसे संभाल कर रखना और किसी अन्य को बिल्कुल भी न देना. और मेरा अर्थ है किसी को भी. और जल्दी ही इसे वापिस लेकर देना.”

सुमति: “अगर मैं किसी के साथ देखना चाहूँ तो?”

समर्थ: “अपने कमरे में, अपने सामने. मुझे विश्वास है तुम मेरी अवहेलना नहीं करोगी.”

सुमति: “कभी नहीं.”

ये कहकर सुमति ने डिस्क अपने पर्स में राखी, दोनों के गले लगी और पांव छूकर अपने घर चली गई.

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पार्थ और निखिल:

निखिल और पार्थ दोनों मेमनों के सामान रूचि के पीछे चल दिए.

रूचि ने उस कक्ष के बाथरूम में जाते हुए बोली: “मुझे खुली भाषा में बात करने की आदत है. मैं नहा कर आयूंगी और तुम दोनों को भी नहाना होगा. नहाने के बाद शरीर मत पोंछना, मुझे भीगे हुए शरीर अच्छे लगते है, विशेषकर चुदाई के समय. तो अपने कपडे उतारो, यूँ गई और यूँ आई.”

पार्थ और निखिल ने अभी कपड़े निकाले ही थे कि रूचि बाथरूम से बाहर आ गई. उसका सुन्दर तराशा हुआ भीगा शरीर कमरे के उजाले में चमक रहा था. दोनों उसे आँखें फाड़े देख रहे थे. रूचि के चेहरे पर एक रहस्यमई मुस्कान थी. वो जानती थी कि वो बहुत सुन्दर है और बहुत भूखी भी.

“जाओ, मेरे सूखने के पहले वापिस आओ। “ ये कहकर वो एक लम्बे शीशे के आगे खड़े होकर अपने शरीर को देखकर मुग्ध हो रही थी. उसने अपनी चूत पर हाथ फिराया, बिलकुल चिकनी और मुलायम. दो साल पहले उसने वहां लेसर से बाल निकलवाए थे. अपनी फांकों को खोलकर उसने अंदर के गुलाबी छेद को एक ऊँगली से छुआ और उसे अपने होठों पर लेकर चखा। इतने में ही पार्थ और निखिल बाहर आ गए. दोनों के शरीर से पानी टपक रहा था.

“हम्म, बिल्कुल जैसा मुझे पसंद है. अब एक को मेरी चूत को चाटने का काम करना है. कौन करेगा?”

दोनों कुछ नहीं बोले. रूचि ने नाटकीय रूप से अपना हाथ गोल गोल घुमाया और निखिल की ओर ऊँगली करते हुए कहा: “तुम”

और फिर पार्थ की और देखकर बोली: “मैं तुम्हारे लंड का स्वाद लेना चाहूंगी.”

ये कहते हुए वो एक लम्बी लॉउन्ज कुर्सी पर पांव फैलाकर अधलेटी मुद्रा में बैठ गई. निखिल ने नीचे बैठकर उसकी चिकनी चूत का अवलोकन किया. पार्थ ने अपने लंड को रूचि के मुंह से लगाया.

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