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चूतों की शृंखला:
संजना का मुंह आश्चर्य से खुला हुआ था और वो कुछ बोलना तो चाहती थी, पर उसकी बोलती ही बंद हो गई थी. अब सुप्रिया मौसी ने उसे ये तो बताया था कि उसकी माँ लेस्बियन सम्बन्ध में पहले लीन हो चुकी थीं, पर आज अपनी आँखों से देखने पर भी उसे विश्वास नहीं हो पा रहा था. अंततः उसे अपनी वाणी प्राप्त हो ही गई.
“मम्मी ! मौसी !” उसकी हल्की टूटती हुई पुकार ने अचानक सबका ध्यान उसकी ओर आकर्षित किया. सुरेखा के तो जैसे पांवों के नीचे से जमीन ही निकल गई. पर सुप्रिया की चतुर बुद्धि ने यहाँ भी स्थिति को समझ लिया.
“ओह, माई स्वीट स्वीट संजू. तुम बिल्कुल सही समय पर आयी हो.” सुप्रिया ने उठकर संजना की ओर बढ़ते हुए कहा. “जैसा कि तुम देख रही हो ये हमारा पारिवारिक भोग चल रहा है. और मुझे विश्वास है कि तुम्हारी मिठास के लिए सब आतुर होंगे. पर पहले आओ, मैं तुम्हें अपने नए सम्बन्धियों से अवगत करा दूँ.”
सुप्रिया ने सबका परिचय कराया और सबको संजना से परिचित करवाया. संजना इस बात से ज्यादा विस्मित थी कि सुरेखा ने अपने आप को छुपाने या उसे कुछ समझाने की कोई चेष्टा नहीं की.
“संजना को मैंने अभी कुछ ही दिन पहले चखा था. पहली बार.” ये कहते हुए सुप्रिया ने संजना के वस्त्र निकालने का क्रम प्रारम्भ किया. “सच कहूँ, तो मुझे सुरेखा की याद दिला दी मेरी इस गुड़िया ने. मैंने इससे ये वादा लिया था कि ये किसी भी आदमी से मेरी अनुमति के बिना संसर्ग नहीं करेगी.” अब तक संजना के ऊपर के वस्त्र निकल चुके थे. सुप्रिया ने उसके सामने बैठकर उसके निचले वस्त्र निकालने का उपक्रम शुरू किया. “पर मैंने ये वादा नहीं लिया था कि वो किसी स्त्री से संसर्ग नहीं करेगी.”
वस्त्रहीन संजना के हाथ पकड़कर उसने उसे सुरेखा के आगे खड़ा कर दिया.
“मैंने मौसी के रूप में जो मिठास चखी है, उसकी माँ होने के कारण क्यों न तुम भी उसका रसपान करो.”
ये कहकर उसने संजना को वहीँ छोड़ दिया. और अन्य तीनों की ओर बढ़ती हुई बोली, “हम अपना खेल चालू रखते है.”
**********
पार्थ और निखिल:
रूचि बड़े चाव से पार्थ का लंड चाट रही थी.
रूचि: “मुझे लम्बे मोटे लौड़े बहुत पसंद हैं, पर उनका उपलभ्ध होना एक समस्या है. और आज तो मेरे हाथ में ऐसे दो दो अस्त्र हैं. ऑफिस में अधिक कुछ नहीं कर पाएंगे, पर मैं तुम्हें अपने घर आमंत्रित करना चाहूंगी.”
पार्थ: “अब आप हमारी पार्टनर हो, आपकी ख़ुशी और संतुष्टि हमारी प्राथमिकता रहेगी. आप अगर एक दिन पहले बता दें तो हम दोनों उपस्थित हो जायेंगे. परन्तु अगर क्लब का कोई कार्य हुआ तो हमें क्षमा करियेगा.”
“हम्म्म, क्लब में तो अब मेरा भी निवेश है, मैं क्योंकर अपना नुकसान करुँगी. क्या तुम दो दिन बाद मेरे बंगले पर आ सकते हो.”
“हाँ, ये संभव है. पर आज भी आपको अपने कौशल का प्रमाण देना चाहते हैं. अपने एक घंटा हमें दिया है, चलिए इसका सदुपयोग करें.”
निखिल अब चूत के पाट खोलकर उसमे अपनी जीभ से खुदाई कर रहा था. उसे इस उम्र की स्त्रियों को क्या अच्छा लगता है, भली भांति पता था. आखिर उसकी पहली शिक्षिका भी रूचि की आयु की ही थी. और उसके दिए हुए पाठ्यक्रम में चूत की चुसाई को अतिरिक्त महत्त्व दिया गया था. निखिल ने रूचि की चूत और उसके आसपास के स्थान को अपने हाथ, होंठ, उँगलियों और दाँतों से हर संभव प्रकार से उत्तेजित किया हुआ था. रूचि अपनी कमर और गांड उछाल कर निखिल के इस आक्रमण को प्रोत्साहित कर रही थी.
रूचि के भग्नासे पर निखिल की थिरकती उँगलियाँ एक लहर के समान चल रही थी. उँगलियाँ चूत के अंदर जाकर स्थान बनातीं और उस रिक्त स्थान को निखिल की जीभ शीघ्र ही भर देती. सांप की जीभ के समान चंचल निखिल की जीभ रूचि के रोम रोम को प्रफुल्लित कर रही थी. उसका रस बह कर उनके गीले शरीरों को और भी भीगा रहा था. पर ये नहीं था कि रूचि केवल अपने सुख में लीन थी. उसने भी पार्थ के लंड पर इतना प्रेम बरसाया हुआ था कि वो अब लोहे के समान तन चुका था. जैसे ही रूचि ने हल्की चीख के साथ अपना पानी निखिल के मुंह में छोड़ा, पार्थ ने अपने लंड को रूचि के मुंह से निकाल लिया.
“रूचि मैडम, अब हमारी परीक्षा का अगला पेपर लिखना है. अगर आपको आपत्ति न हो तो मैं आपकी इस मखमली चूत को चोदना चाहता हूँ. और अगर आप निखिल को अपने इस सुन्दर और सेक्सी मुंह से कुछ देर चाटकर उसे भी मेरी तरह सुख देंगी तो अच्छा रहेगा.”
“ओह, श्योर. मैं भी अब चुदाई के लिए रेडी हूँ. पर हम यहाँ नहीं, बिस्तर पर खेलेंगे.”
रूचि उस कुर्सी से इठलाती हुई उठी और बिस्तर पर जाकर लेट गई.
पार्थ और निखिल उसके ये नखरे देखकर मुस्कुरा दिए और एक सहमति में संकेत किया.
पार्थ: “रूचि मैडम, आपको कैसी चुदाई पसंद है. हम आपकी वैसे ही सेवा करेंगे.” पार्थ जानता था कि रूचि जैसी आत्मविश्वासी महिला ये कभी नहीं स्वीकारेगी कि उसे कोई हरा सकता है.
रूचि: “जितना तुम दोनों के लौंड़ों में दम है, उतनी ताकत से चोदकर दिखाओ मुझे.” विनाश काले विपरीत बुद्धि.
पार्थ ने उसे KBC की तरह एक अवसर और दिया.
“मैडम आपको तकलीफ न हो जाये. आप एक बार और विचार कर लें.”
ये सुनकर रूचि के तन बदन में आग लग गई कि कल के छोकरे मुझे डराने चले हैं.
“अबे सुन, तेरे जैसे लंड मैं तब से ले रही हूँ जब से मैं १९ साल की हुई थी. हाँ तुम्हारे उन सबकी तुलना में कुछ अधिक बड़े हैं, पर मैं भी कोई कच्ची कली नहीं हूँ. दिखाओ मुझे अपनी सबसे जोरदार चुदाई का नमूना. मैं भी तो जानूँ कि मैंने पैसा नाली में तो नहीं फेंके.”
अब पार्थ को क्रोध आ गया, पर उसने अपने आपको संयत किया और एक बड़ी ही सधे स्वर में बोला, “रूचि मैडम, अब आप जब ऐसे चैलेंज दे रही हैं, तो हम भी चाहेंगे कि ये चुदाई हम अपने तरीके से करें. हम जैसे चाहेंगे आपको मानना होगा. नहीं तो इस चुनौती का कोई अर्थ नहीं.”
रूचि अब अपने घमंड के घोड़े से चाहकर भी नहीं उतर सकती थी. हालाँकि उसे लगा कि वस्तुतः उसने गलत लोगों से पन्गा ले लिया है, पर पीछे होना उसकी शान के विपरीत था.
“मुझे स्वीकार है, अब समय मत बर्बाद करो, देखें तुम किस खेत की मूली हो.”
पार्थ और निखिल ने एक दूसरे को देखा और थम्ब्स अप किया कि मुर्गी ने दाना चुग लिया.
**********
संजना का मात्र प्रेम:
सुरेखा ने अपना हाथ बढाकर संजना को अपने पास खींचकर बैठा लिया.
“तुम मौसी के घर इस समय कैसे आ गयीं.”
“वो मौसी ने मुझे ये सब सिखाया है अभी कुछ दिनों में. मेरा मन कर रहा था तो मैंने सोचा कि मौसी अकेली होंगी तो हम दोनों….”
“अरे मेरी प्यारी गुड़िया रानी. तुझे पता है, हम दोनों कई वर्ष तक एक दूसरे के साथ रोज संसर्ग करते थे. जब नानी ने हमें अलग कमरा देने के लिए कहा, तब भी हम साथ ही रहीं. मौसी शादी के बाद अलग चली गयीं और हमारा ये सम्बन्ध भी समाप्त हो गया. मौसी के तलाक के बाद उन्होंने मुझे फिर साथ होने का निमंत्रण दिया था, परन्तु तब तक मेरी भी शादी हो गई थी. तो सब कुछ वहीँ समाप्त हो गया. पर कुछ दिन पहले, निखिल की शादी तय होने के लगभग एक सप्ताह पूर्व हम फिर से साथ आ गए.”
“और पापा, उनका क्या?”
सुरेखा ने अन्य लोगों की ओर संकेत किया और कहा कि ये बात हम घर पर करेंगे.
“पर अभी मैं भी तुम्हारा अमृत चखना चाहती हूँ.” ये कहते हुए सुरेखा ने अपने होंठ संजना के होठों से मिला दिए. कुछ ही क्षणों में माँ बेटी एक दूसरे में विलीन हो गए.
सुरेखा ने संजना को सोफे पर बैठने के लिया कहा और फिर उसके पांव फैलाकर अपना चेहरा उसकी कमसिन बुर में छुपा लिया.
“उफ्फ्फ ये सुगंध.” सुरेखा ने मन में सोचा. फिर उसने अपनी जीभ को संजना की योनि पर फिराया और वहां पर कामोत्तेजना से उत्पन्न नमी का चटकारा लिया. “उफ्फ्फ ये स्वाद. मैं कितनी भाग्यशाली हूँ जो मुझे इस कच्ची कली का रस प्राप्त हुआ है.” इस विचार के साथ उसने अपने पूरे मातृप्रेम के साथ उस कमसिन कुंवारी बुर पर अपनी जीभ का प्रहार तीव्र कर दिया. अपने हाथों से उस अमृतकलश के पट खोले और अपनी लपलपाती हुई जीभ से उसके अंदर प्रवेश किया. अंदर उस अमृतसुधा में उसकी जीभ एक एक किनारे को छूते हुए अपने लिए जीवनसुधा एकत्रित कर रही थी.
संजना जो इसके पहले सुप्रिया के संसर्ग से इस प्रणाली से अनिभिज्ञ तो न थी पर उसे अपनी माँ के प्रेम की थाह अब अनुभव हो रही थी. उसने अपनी माँ के बालों में प्यार से हाथ फिराने के साथ अपनी पतली बाली कमर को मटकाना शुरू किया. उसकी इस प्रतिक्रिया से उसकी जांघों के बीच छुपी उसकी माँ मन ही मन मुस्कुरा उठी. अब उसकी बेटी पूर्ण रूप से यौवन में पदापर्ण कर चुकी थी. और वो समय दूर नहीं था जब वो अपना कौमार्य किसी पुरुष को सौंप देगी. और तब इस झरने के पानी का स्वाद और सुगंध दोनों बदल जायेंगे. अगर उसका बस चलता और उसमे ऐसी शक्ति होती तो वो इस जल को एक ऐसी शीशी में बंद कर लेती जिसका वो जीवन भर स्वाद लेती.
संजना एक नयी नवेली खिलाड़िन थी. और उसे इस प्यार की चूमा चाटी ने स्वतः ही अपने चरम पर पहुंचा दिया. और उसने एक रुदन के साथ अपनी माँ की मुंह में अमृतवर्षा कर दी. वात्स्ल्य से भरपूर उसकी माँ ने एक बूँद का भी तिरिस्कार नहीं किया. जब संजना का झड़ना थम गया तो तब उसने अपना खिला और भीगा चेहरा अपनी बेटी की चूत से हटाया.
“सच में संजू. तेरा स्वाद अनुपम है. आज तू मेरे ही साथ सोना. हमें कई वर्षों की दूरी को समाप्त करना है.”
सुप्रिया ने ये सुना तो बहुत प्रसन्न हुई. उसने इस कली को फूल बनाने में एक अहम् योगदान जो किया था. कुछ देर में ही माँ बेटी ने सबसे विदा ली. अन्य सभी स्त्रियां भी अब अपने घर जाने को व्याकुल थीं. तो एक दूसरे को चूमकर सब अपने गंतव्य की ओर निकल गए.
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पार्थ और निखिल:
रूचि अपने आपको मानसिक रूप से तैयार कर रही थी. निखिल अपने लटकते हुए लंड को लेकर रूचि के मुंह के सामने आ गया और रूचि को अपना मुंह खोलने को कहा. रूचि ने अपने मुंह को खोलकर अपनी जीभ से निखिल के टोपे पर चमकते हुए मदन रस की बूंदों को चाट लिया और अपना सिर उठाकर निखिल की ओर देखा और मुस्कुराई. निखिल ने भी उसकी इस मुस्कराहट का उत्तर दिया. अब रूचि ने अपने मुंह में लंड को लिया और चूसने लगी. लंड की चौड़ाई अधिक होने के कारण उसे अपने मुंह को सामान्य से अधिक खोलना पड़ रहा था.
उसकी चूत पर भी एक भारी भरकम लंड दस्तक दे रहा था. वो लंड इस समय चूत की लम्बाई पर अपने टोपे से घिसाई कर रहा था. और उस चूत ने अपने ऊपर आने वाले संकट को समझते हुए और अपने लिए रास्ता सरल करते हुए ढेरों पानी को छिड़क दिया था. अचानक पार्थ के चेहरे पर एक पाशविक भाव आया, अगर रूचि इस समय उसे देखती तो संभवतः इस क्रीड़ा को तुरंत रोक देती. पर निखिल ने उसके मन को भटकाया हुआ था, और यही अपनी शक्ति से आश्वस्त रूचि के लिए हानिकारक सिद्ध हुआ.
“रूचि मैडम!” पार्थ ने पुकारा. रूचि ने अपने मुंह में लंड रखते हुए उसकी और वासनामय आँखों से देखा. पर ये पुकार रूचि के लिए नहीं थी, निखिल के लिए थी. रूचि की ऑंखें एक क्षण के लिए पार्थ से मिलीं और उसकी शरीर भय से सिहर उठा. पर अब बहुत देर हो चुकी थी.
निखिल ने अचानक ही उसका सिर पकड़ा और अपने पूरे लंड को उसके मुंह में धकेल दिया. रूचि की ऑंखें फ़ैल गयीं और आंसुओं से लथपथ होने लगीं. पर उसके अहंकार पर असली आक्रमण पार्थ ने किया जब उसने एक ही लम्बे और शक्तिशाली धक्के में अपना लगभग तीन चौथाई लौड़ा उसकी चूत में गाढ़ दिया. रूचि छटपटाने लगी. उसके आँसू थम नहीं रहे थे. पर इन दोनों शक्तिशाली युवा चुदाई मशीनों के समक्ष उसका प्रतिरोध नगण्य था. पार्थ ने अपने लंड को लगभग पूरा बाहर खींचा और अगले ही धक्के में अपने पूरे मूसल को रूचि की ओखली में जड़ दिया. निखिल ने अपने लंड को बाहर निकाला जिससे रूचि का दम न घुट जाये. रूचि के आँसू अविरल बह रहे थे. पर अब वो सांस ले सकती थी. उसने दया भरी दृष्टि से पार्थ की ओर देखा पर उसे समझ आ गया कि उन आँखों में दया नहीं एक पैशाचिक चमक थी.
उसने अपने आप को अब भाग्य के भरोसे छोड़ दिया.
पार्थ ने अपनी निर्दयता का परिचय देते हुए रूचि को अपने लंड की पूरी लम्बाई से ताबड़तोड़ गति से चोदना प्रारम्भ किया. रूचि निखिल के लंड को इन झटकों के कारण सही प्रकार से चूस भी नहीं पा रही थी. निखिल ने पार्थ को थोड़ी सहजता के लिए कहा तो पार्थ ने अपनी गति कुछ कम कर दी, केवल इतनी कि रूचि निखिल के लंड का भी आनंद ले पाए.
इस घनघोर चुदाई ने रूचि के पोर पोर को खोल दिया था. उसकी चूत अपनी खाल बचने के लिए पानी के धार छोड़ रही थी. रूचि ने जीवन में ऐसी चुदाई कभी नहीं करवाई थी. पर ये भी था कि उसके साथी उससे डरते भी थे और इसीलिए उसे बहुत सहजता से ही चोदते थे. पर आज रूचि ने इन्हे ललकार कर उस सुख को पाया था जो उसे आज तक प्राप्त नहीं हुआ था. उसकी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी. इस कारण अब पार्थ का मूसल भी अब बड़ी सरलता से उसमे परेड कर रहा था. जब पार्थ को लगा कि उसका पानी छूट न जाये तो उसने अपने लंड को बाहर खींचा और निखिल को बागडोर सँभालने का न्योता दिया.
निखिल ने अपने लंड को रूचि के मुंह से निकले और रूचि की खुली चूत के गीलेपन को देखकर एक तौलिये से उसकी चूत को पोछकर कुछ सुखा दिया. उसके बाद उसने पार्थ के ही समान एक लम्बे झटके से अपने लंड को अंदर पेल दिया. अब चूँकि रूचि की चूत में पार्थ का आवागमन हो चूका था तो निखिल के पूरे लंड को भी वो एक ही धक्के में डकार गई. पार्थ ने रूचि को उसके रस से सना अपना लंड चूसने के लिए दिया जिसे रूचि ने बड़ी अधीरता से अपने मुंह में ले लिया। और इस बार निखिल ने अपने जोरदार धक्कों से रूचि की ईमारत हिला दी. पर उसने गति इतनी ही रखी कि पार्थ अपने लंड को रूचि से चुसवा पाए.
पर पार्थ ने ऐसा कोई दया का कार्य नहीं किया वो रूचि के मुंह को चूत समझ कर चोदने लगा. पर अब रूचि भी इस खेल का आनंद उठा रही थी. आज उसने अनुभव किया था कि जिनसे वो अब तक चुदवाती आयी थी वो पहली कक्षा के विद्यार्धी थे और जो आज उसे चोद रहे हैं वो उनसे बहुत आगे. उसके मन में क्लब के अन्य रोमियो से भी चुदने की इच्छा बल पकड़ने लगी. इन सबके बीच उसकी चूत का झड़ना अबाधित था. न जाने कितने वर्षों की प्यास थी जो उसकी चूत के आँसू मिटा रहे थे. पर अंत में उसके शरीर ने हाथ डाल ही दिए. एक फौहारे के साथ उसकी चूत ने एक लम्बी पिचकारी सी मारी और वो ठंडी होकर ढीली पड़ गई.
पार्थ और निखिल का भी अब समय पूरा हो चुका था, पर वो रूचि को अपने प्यार के रस से नहलाना चाहते थे जिससे उसे ये दिन सदैव याद रहे. निखिल अपने लंड को चूत ने निकालकर रूचि के चेहरे के पास आ गया और अपने हाथों से मुठ मारने लगा. उधर पार्थ ने मुंह को तब तक चोदा जब तक कि पक्का न हो गया कि वो झड़ने वाला है. इसके बाद उसने भी अपने लंड को निकाल लिया. दोनों मित्रों ने एक साथ अपने लौंड़ों से रूचि के चेहरे पर गाढ़ा सफ़ेद पानी सींचना शुरू किया. जब चेहरा भर गया तो उसके स्तनों पर भी छिड़क दिया. अंत में पार्थ ने अपने लंड को रूचि के मुंह में डालकर साफ करने के लिए कहा. उसके बाद निखिल ने भी अपने लंड की सफाई करवाई.
इसके बाद दोनों मित्र खड़े होकर अपने संपन्न कार्य का आकलन करने लगे. उनके वीर्य से भीगी सुन्दर रूचि अब उन्हें और भी रुचिकर लग रही थी. इस समय वो एक अति संपन्न और बड़ी व्यवसाई न होकर एक सस्ती वेश्या प्रतीत हो रही थी. रूचि ने कुछ समय बाद अपनी आंख खोलकर उन दोनों को उसे इस स्थिति में देखते हुए पाया.
“क्या देख रहे हो? ऐसा माल पहले नहीं भोगा होगा.”
पार्थ और निखिल ने उत्तर देना आवश्यक नहीं समझा, क्योंकि ये धंधे की बात थी पर हामी में सर हिला दिया.
“तुम चुदाई बहुत अच्छी करते हो. मेरा घर के लिए निमंत्रण अभी भी है. और इस बार... “ रूचि ने अपनी ऊँगली से एक थक्के वीर्य को लिया और अपनी गांड में उस ऊँगली से डाला. ‘’... इस छेद का भी स्वाद दूंगी.”
अब ऐसा प्रलोभन हो और कोई न करे ऐसा हो ही नहीं सकता.
“चलो अब नहा कर साफ हो जाओ. अपनी एक घंटे की छुट्टी समाप्ति पर है. तीनों साथ ही नहा लेते हैं.”
तीनों जल्दी से नहाये और कमरे से बाहर निकले. रूचि ने रिमोट से कमरे को लॉक किया. फिर इंटरकॉम उठाया.
“आधे घंटे और रुकना फिर अगले अपॉइंटमेंट वाले को भेजना. और घर जाने के पहले मेरे कमरे की सफाई कर देना और कपड़े बदलकर जाते हुए लॉन्ड्री में देती जाना.”
फिर उसने पार्थ को देखा, “ मुझे तुम्हारे साथ बिज़नेस करना रास आएगा. पहली बार मैं कोई बिज़नेस आनंद के लिए करूंगी.”
पार्थ: “रूचि मैडम. आप क्यों नहीं उस अभिनेत्री के शो को देखने आतीं? और कुछ बातें और....”
रूचि: “सोचकर बताती हूँ. और क्या बात है?”
पार्थ: “आप क्यों नहीं हमारी चयन समिति में शामिल हो जातीं? पार्टनर होने के कारण हर दूसरे नए रोमियो का इंटरव्यू आपको लेना होगा। और इंटरव्यू का तात्पर्य होता है प्रार्थी की चुदाई की तकनीक और क्षमता का आकलन.”
रूचि: “ओह, तो तुम मुझे रिश्वत दे रहे हो. मैं इस बारे में भी सोचकर ही बताऊंगी. पर प्रस्ताव अच्छा है. और क्या बात है.”
पार्थ: “कल क्लब में एक विशेष आयोजन है, ११ बजे से. हमें शुशी होगी अगर आप आ सकें तो. एक तो आप क्लब की व्यवस्था देख लेंगी. और कल सभी रोमियो उपस्थित होंगे और आप उनकी क्षमता को देख सकती है. इससे आपको अपने लिए सेवादार चुनने में मदद होगी.”
रूचि: “हम्म्म तब तो कल छुट्टी ही लेनी होगी. मैं प्रयास करुँगी आने का. अरे प्रयास नहीं, मैं अवश्य आऊंगी. पर किसी से अभी मिलूंगी नहीं. वो सब बाद में. क्लब की व्यवस्था इत्यादि भी मैं किसी और दिन देखूँगी. पर अब प्लीज मुझे क्षमा करो, मुझे अब दूसरे कार्य भी संपन्न करने है. तुम दोनों का धन्यवाद, मुझे इतना सुख देने के लिए.”
पार्थ ने अपना ब्रीफ़केस खोलकर चेक किया और देखा कि चैक ठीक से रखा है. तभी रूचि ने रिमोट उठाया और पार्थ को अपने पीछे दरवाजा खुलने की आहत सुनाई दी.
“थैंक यू, रूचि मैडम.” कहते हुए पार्थ और निखिल वहां से निकल गए.
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शोनाली का घर:
शाम हो चुकी थी. सारे पंछी लौट कर घर पहुँच चुके थे.
बैठक में बैठे सब भोजन के पहले की ड्रिंक ले रहे थे.
पार्थ ने सबको नयी पार्टनर और फाइनेंस के बारे में बताया. जॉय को बहुत गर्व हुआ कि पार्थ ने रूचि जैसी शक्तिशाली स्त्री को अपना पार्टनर बनाया है. इसके बाद उनके क्लब की सफलता निश्चित थी.
जॉय ने जैसन के साथ हुई नयी संधि के बारे में बताया और शोनाली से पूछा कि वो कब जाना चाहेगी. शोनाली ने उसे सोचकर बताने के लिया कहा.
सुमति ने शादी की तैयारी से समर्थ और शीला के संतुष्ट होने का शुभ समाचार दिया. सब इस बात से बहुत प्रसन्न हो गए.
शोनाली ने फिर सागरिका और पारुल के साथ सुप्रिया के घर का प्रकरण बताया और सुरेखा और उसकी बेटी के अद्वितीय सौंदर्य की भरपूर प्रशंसा की. ये सुनकर सबके मन ललचा गए और उनके मुंह में पानी आ गया.
फिर सबने भोजन किया और कुछ समय के लिए टीवी पर कुछ कार्यक्रम देखे.
“हम्म्म्म, तो सभी लोग किसी न किसी खेल में व्यस्त रहे आज, मुझे छोड़कर.” जॉय ने हँसते हुए कहा.
“ओह, पापा ! अगर दिन सूना गया है तो क्या हुआ. हम आपकी रात रंगीन करेंगे.” सागरिका और पारुल ने एक स्वर में कहा.
दोनों ने उठकर जॉय का हाथ लिया और लगभग घसीटते हुए उसे अपने कमरे में ले जाने लगीं. अचानक पारुल ने पीछे मुड़कर देखा.
“बुआ, आप भी आ ही जाओ. आपको डबल प्रसाद खिलाएंगी हम दोनों बहनें.”
सुमति तपाक से उठी और अपने होंठों पर जीभ फिरते हुए उन तीनों के पीछे चल पड़ी.
“मामी, अब आप किसके बिस्तर पर चुदना चाहोगी? अपने या मेरे?”
शोनाली बिना कुछ बोले पार्थ का हाथ पकड़कर अपने कमरे में चली गई.
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बॉलीवुड अभिनेत्री का शयनकक्ष:
वो सुन्दर अभिनेत्री इस समय एक मोटे लंड पर उठक बैठक कर रही थी. लंड की पूरी चौड़ी के कारण उसकी चूत पूरी फैली हुई थी और इसमें उसे बहुत आनंद आ रहा था.
“सच में हरजीत, तेरा अपना पारिश्रमिक लेने का ये तरीका मुझे बेहद पसंद है. मैं तो चाहूंगी कि तुम ऐसे ही मेरे लिए शो का आयोजन करते रहो.”
“मैडम, जब तक आप अपनी इस चूत का लालच मेरे लिए रखेंगी, तब तक मैं आपको काम की कमी नहीं होने दूंगा.”
ये वही हरजीत था जो विशेष शो इन दोनों के लिए आयोजित करता था और इस उद्योग के गुप्त नियमों के आधार पर उसे एक रात का सहवास प्राप्त था. पर आज अभिनेत्री के मन में कुछ और भी इच्छा थी. उसने सोफे पर नंगे बैठे अपने पति की ओर देखा तो उसका लंड इस समय पूरे जोश में था. अभिनेत्री का मन उसके प्रति प्रेम से भावुक हो उठा.
“जानू , क्यों नहीं तुम अपने लंड को मेरी गांड में डाल लेते. मुझे विश्वास है कि हरजीत को इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी.”
हरजीत: “यस, बॉस. आई एम ओके विथ देट”
विवाह से पहले अभिनेत्री ने बहुतेरे लोगों से गांड मरवाई थी. आखिर इस उद्योग में सबका गांड मारना ही सबका उद्देश्य होता है. पर शादी के बाद उसने अपनी गांड केवल अपने पति के लंड के लिए सुरक्षित कर दी थी. हालाँकि इसके कारण उसके हाथ से कुछ फ़िल्में छूट गयीं, पर उसने अपने वचन को नहीं तोड़ा.
प्रौढ़ अभिनेता ने साइड टेबल से वेसलीन निकली और अपनी सुन्दर पत्नी के पीछे आ गया. और कुछ ही समय में वो अतिसुन्दर फिल्मों में चरित्रवान दिखने वाली अभिनेत्री दो लौंड़ों से चुद रही थी. और आने वाले अपने गैंग-बैंग की कल्पना कर रही थी.
क्रमशः
संजना का मुंह आश्चर्य से खुला हुआ था और वो कुछ बोलना तो चाहती थी, पर उसकी बोलती ही बंद हो गई थी. अब सुप्रिया मौसी ने उसे ये तो बताया था कि उसकी माँ लेस्बियन सम्बन्ध में पहले लीन हो चुकी थीं, पर आज अपनी आँखों से देखने पर भी उसे विश्वास नहीं हो पा रहा था. अंततः उसे अपनी वाणी प्राप्त हो ही गई.
“मम्मी ! मौसी !” उसकी हल्की टूटती हुई पुकार ने अचानक सबका ध्यान उसकी ओर आकर्षित किया. सुरेखा के तो जैसे पांवों के नीचे से जमीन ही निकल गई. पर सुप्रिया की चतुर बुद्धि ने यहाँ भी स्थिति को समझ लिया.
“ओह, माई स्वीट स्वीट संजू. तुम बिल्कुल सही समय पर आयी हो.” सुप्रिया ने उठकर संजना की ओर बढ़ते हुए कहा. “जैसा कि तुम देख रही हो ये हमारा पारिवारिक भोग चल रहा है. और मुझे विश्वास है कि तुम्हारी मिठास के लिए सब आतुर होंगे. पर पहले आओ, मैं तुम्हें अपने नए सम्बन्धियों से अवगत करा दूँ.”
सुप्रिया ने सबका परिचय कराया और सबको संजना से परिचित करवाया. संजना इस बात से ज्यादा विस्मित थी कि सुरेखा ने अपने आप को छुपाने या उसे कुछ समझाने की कोई चेष्टा नहीं की.
“संजना को मैंने अभी कुछ ही दिन पहले चखा था. पहली बार.” ये कहते हुए सुप्रिया ने संजना के वस्त्र निकालने का क्रम प्रारम्भ किया. “सच कहूँ, तो मुझे सुरेखा की याद दिला दी मेरी इस गुड़िया ने. मैंने इससे ये वादा लिया था कि ये किसी भी आदमी से मेरी अनुमति के बिना संसर्ग नहीं करेगी.” अब तक संजना के ऊपर के वस्त्र निकल चुके थे. सुप्रिया ने उसके सामने बैठकर उसके निचले वस्त्र निकालने का उपक्रम शुरू किया. “पर मैंने ये वादा नहीं लिया था कि वो किसी स्त्री से संसर्ग नहीं करेगी.”
वस्त्रहीन संजना के हाथ पकड़कर उसने उसे सुरेखा के आगे खड़ा कर दिया.
“मैंने मौसी के रूप में जो मिठास चखी है, उसकी माँ होने के कारण क्यों न तुम भी उसका रसपान करो.”
ये कहकर उसने संजना को वहीँ छोड़ दिया. और अन्य तीनों की ओर बढ़ती हुई बोली, “हम अपना खेल चालू रखते है.”
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पार्थ और निखिल:
रूचि बड़े चाव से पार्थ का लंड चाट रही थी.
रूचि: “मुझे लम्बे मोटे लौड़े बहुत पसंद हैं, पर उनका उपलभ्ध होना एक समस्या है. और आज तो मेरे हाथ में ऐसे दो दो अस्त्र हैं. ऑफिस में अधिक कुछ नहीं कर पाएंगे, पर मैं तुम्हें अपने घर आमंत्रित करना चाहूंगी.”
पार्थ: “अब आप हमारी पार्टनर हो, आपकी ख़ुशी और संतुष्टि हमारी प्राथमिकता रहेगी. आप अगर एक दिन पहले बता दें तो हम दोनों उपस्थित हो जायेंगे. परन्तु अगर क्लब का कोई कार्य हुआ तो हमें क्षमा करियेगा.”
“हम्म्म, क्लब में तो अब मेरा भी निवेश है, मैं क्योंकर अपना नुकसान करुँगी. क्या तुम दो दिन बाद मेरे बंगले पर आ सकते हो.”
“हाँ, ये संभव है. पर आज भी आपको अपने कौशल का प्रमाण देना चाहते हैं. अपने एक घंटा हमें दिया है, चलिए इसका सदुपयोग करें.”
निखिल अब चूत के पाट खोलकर उसमे अपनी जीभ से खुदाई कर रहा था. उसे इस उम्र की स्त्रियों को क्या अच्छा लगता है, भली भांति पता था. आखिर उसकी पहली शिक्षिका भी रूचि की आयु की ही थी. और उसके दिए हुए पाठ्यक्रम में चूत की चुसाई को अतिरिक्त महत्त्व दिया गया था. निखिल ने रूचि की चूत और उसके आसपास के स्थान को अपने हाथ, होंठ, उँगलियों और दाँतों से हर संभव प्रकार से उत्तेजित किया हुआ था. रूचि अपनी कमर और गांड उछाल कर निखिल के इस आक्रमण को प्रोत्साहित कर रही थी.
रूचि के भग्नासे पर निखिल की थिरकती उँगलियाँ एक लहर के समान चल रही थी. उँगलियाँ चूत के अंदर जाकर स्थान बनातीं और उस रिक्त स्थान को निखिल की जीभ शीघ्र ही भर देती. सांप की जीभ के समान चंचल निखिल की जीभ रूचि के रोम रोम को प्रफुल्लित कर रही थी. उसका रस बह कर उनके गीले शरीरों को और भी भीगा रहा था. पर ये नहीं था कि रूचि केवल अपने सुख में लीन थी. उसने भी पार्थ के लंड पर इतना प्रेम बरसाया हुआ था कि वो अब लोहे के समान तन चुका था. जैसे ही रूचि ने हल्की चीख के साथ अपना पानी निखिल के मुंह में छोड़ा, पार्थ ने अपने लंड को रूचि के मुंह से निकाल लिया.
“रूचि मैडम, अब हमारी परीक्षा का अगला पेपर लिखना है. अगर आपको आपत्ति न हो तो मैं आपकी इस मखमली चूत को चोदना चाहता हूँ. और अगर आप निखिल को अपने इस सुन्दर और सेक्सी मुंह से कुछ देर चाटकर उसे भी मेरी तरह सुख देंगी तो अच्छा रहेगा.”
“ओह, श्योर. मैं भी अब चुदाई के लिए रेडी हूँ. पर हम यहाँ नहीं, बिस्तर पर खेलेंगे.”
रूचि उस कुर्सी से इठलाती हुई उठी और बिस्तर पर जाकर लेट गई.
पार्थ और निखिल उसके ये नखरे देखकर मुस्कुरा दिए और एक सहमति में संकेत किया.
पार्थ: “रूचि मैडम, आपको कैसी चुदाई पसंद है. हम आपकी वैसे ही सेवा करेंगे.” पार्थ जानता था कि रूचि जैसी आत्मविश्वासी महिला ये कभी नहीं स्वीकारेगी कि उसे कोई हरा सकता है.
रूचि: “जितना तुम दोनों के लौंड़ों में दम है, उतनी ताकत से चोदकर दिखाओ मुझे.” विनाश काले विपरीत बुद्धि.
पार्थ ने उसे KBC की तरह एक अवसर और दिया.
“मैडम आपको तकलीफ न हो जाये. आप एक बार और विचार कर लें.”
ये सुनकर रूचि के तन बदन में आग लग गई कि कल के छोकरे मुझे डराने चले हैं.
“अबे सुन, तेरे जैसे लंड मैं तब से ले रही हूँ जब से मैं १९ साल की हुई थी. हाँ तुम्हारे उन सबकी तुलना में कुछ अधिक बड़े हैं, पर मैं भी कोई कच्ची कली नहीं हूँ. दिखाओ मुझे अपनी सबसे जोरदार चुदाई का नमूना. मैं भी तो जानूँ कि मैंने पैसा नाली में तो नहीं फेंके.”
अब पार्थ को क्रोध आ गया, पर उसने अपने आपको संयत किया और एक बड़ी ही सधे स्वर में बोला, “रूचि मैडम, अब आप जब ऐसे चैलेंज दे रही हैं, तो हम भी चाहेंगे कि ये चुदाई हम अपने तरीके से करें. हम जैसे चाहेंगे आपको मानना होगा. नहीं तो इस चुनौती का कोई अर्थ नहीं.”
रूचि अब अपने घमंड के घोड़े से चाहकर भी नहीं उतर सकती थी. हालाँकि उसे लगा कि वस्तुतः उसने गलत लोगों से पन्गा ले लिया है, पर पीछे होना उसकी शान के विपरीत था.
“मुझे स्वीकार है, अब समय मत बर्बाद करो, देखें तुम किस खेत की मूली हो.”
पार्थ और निखिल ने एक दूसरे को देखा और थम्ब्स अप किया कि मुर्गी ने दाना चुग लिया.
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संजना का मात्र प्रेम:
सुरेखा ने अपना हाथ बढाकर संजना को अपने पास खींचकर बैठा लिया.
“तुम मौसी के घर इस समय कैसे आ गयीं.”
“वो मौसी ने मुझे ये सब सिखाया है अभी कुछ दिनों में. मेरा मन कर रहा था तो मैंने सोचा कि मौसी अकेली होंगी तो हम दोनों….”
“अरे मेरी प्यारी गुड़िया रानी. तुझे पता है, हम दोनों कई वर्ष तक एक दूसरे के साथ रोज संसर्ग करते थे. जब नानी ने हमें अलग कमरा देने के लिए कहा, तब भी हम साथ ही रहीं. मौसी शादी के बाद अलग चली गयीं और हमारा ये सम्बन्ध भी समाप्त हो गया. मौसी के तलाक के बाद उन्होंने मुझे फिर साथ होने का निमंत्रण दिया था, परन्तु तब तक मेरी भी शादी हो गई थी. तो सब कुछ वहीँ समाप्त हो गया. पर कुछ दिन पहले, निखिल की शादी तय होने के लगभग एक सप्ताह पूर्व हम फिर से साथ आ गए.”
“और पापा, उनका क्या?”
सुरेखा ने अन्य लोगों की ओर संकेत किया और कहा कि ये बात हम घर पर करेंगे.
“पर अभी मैं भी तुम्हारा अमृत चखना चाहती हूँ.” ये कहते हुए सुरेखा ने अपने होंठ संजना के होठों से मिला दिए. कुछ ही क्षणों में माँ बेटी एक दूसरे में विलीन हो गए.
सुरेखा ने संजना को सोफे पर बैठने के लिया कहा और फिर उसके पांव फैलाकर अपना चेहरा उसकी कमसिन बुर में छुपा लिया.
“उफ्फ्फ ये सुगंध.” सुरेखा ने मन में सोचा. फिर उसने अपनी जीभ को संजना की योनि पर फिराया और वहां पर कामोत्तेजना से उत्पन्न नमी का चटकारा लिया. “उफ्फ्फ ये स्वाद. मैं कितनी भाग्यशाली हूँ जो मुझे इस कच्ची कली का रस प्राप्त हुआ है.” इस विचार के साथ उसने अपने पूरे मातृप्रेम के साथ उस कमसिन कुंवारी बुर पर अपनी जीभ का प्रहार तीव्र कर दिया. अपने हाथों से उस अमृतकलश के पट खोले और अपनी लपलपाती हुई जीभ से उसके अंदर प्रवेश किया. अंदर उस अमृतसुधा में उसकी जीभ एक एक किनारे को छूते हुए अपने लिए जीवनसुधा एकत्रित कर रही थी.
संजना जो इसके पहले सुप्रिया के संसर्ग से इस प्रणाली से अनिभिज्ञ तो न थी पर उसे अपनी माँ के प्रेम की थाह अब अनुभव हो रही थी. उसने अपनी माँ के बालों में प्यार से हाथ फिराने के साथ अपनी पतली बाली कमर को मटकाना शुरू किया. उसकी इस प्रतिक्रिया से उसकी जांघों के बीच छुपी उसकी माँ मन ही मन मुस्कुरा उठी. अब उसकी बेटी पूर्ण रूप से यौवन में पदापर्ण कर चुकी थी. और वो समय दूर नहीं था जब वो अपना कौमार्य किसी पुरुष को सौंप देगी. और तब इस झरने के पानी का स्वाद और सुगंध दोनों बदल जायेंगे. अगर उसका बस चलता और उसमे ऐसी शक्ति होती तो वो इस जल को एक ऐसी शीशी में बंद कर लेती जिसका वो जीवन भर स्वाद लेती.
संजना एक नयी नवेली खिलाड़िन थी. और उसे इस प्यार की चूमा चाटी ने स्वतः ही अपने चरम पर पहुंचा दिया. और उसने एक रुदन के साथ अपनी माँ की मुंह में अमृतवर्षा कर दी. वात्स्ल्य से भरपूर उसकी माँ ने एक बूँद का भी तिरिस्कार नहीं किया. जब संजना का झड़ना थम गया तो तब उसने अपना खिला और भीगा चेहरा अपनी बेटी की चूत से हटाया.
“सच में संजू. तेरा स्वाद अनुपम है. आज तू मेरे ही साथ सोना. हमें कई वर्षों की दूरी को समाप्त करना है.”
सुप्रिया ने ये सुना तो बहुत प्रसन्न हुई. उसने इस कली को फूल बनाने में एक अहम् योगदान जो किया था. कुछ देर में ही माँ बेटी ने सबसे विदा ली. अन्य सभी स्त्रियां भी अब अपने घर जाने को व्याकुल थीं. तो एक दूसरे को चूमकर सब अपने गंतव्य की ओर निकल गए.
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पार्थ और निखिल:
रूचि अपने आपको मानसिक रूप से तैयार कर रही थी. निखिल अपने लटकते हुए लंड को लेकर रूचि के मुंह के सामने आ गया और रूचि को अपना मुंह खोलने को कहा. रूचि ने अपने मुंह को खोलकर अपनी जीभ से निखिल के टोपे पर चमकते हुए मदन रस की बूंदों को चाट लिया और अपना सिर उठाकर निखिल की ओर देखा और मुस्कुराई. निखिल ने भी उसकी इस मुस्कराहट का उत्तर दिया. अब रूचि ने अपने मुंह में लंड को लिया और चूसने लगी. लंड की चौड़ाई अधिक होने के कारण उसे अपने मुंह को सामान्य से अधिक खोलना पड़ रहा था.
उसकी चूत पर भी एक भारी भरकम लंड दस्तक दे रहा था. वो लंड इस समय चूत की लम्बाई पर अपने टोपे से घिसाई कर रहा था. और उस चूत ने अपने ऊपर आने वाले संकट को समझते हुए और अपने लिए रास्ता सरल करते हुए ढेरों पानी को छिड़क दिया था. अचानक पार्थ के चेहरे पर एक पाशविक भाव आया, अगर रूचि इस समय उसे देखती तो संभवतः इस क्रीड़ा को तुरंत रोक देती. पर निखिल ने उसके मन को भटकाया हुआ था, और यही अपनी शक्ति से आश्वस्त रूचि के लिए हानिकारक सिद्ध हुआ.
“रूचि मैडम!” पार्थ ने पुकारा. रूचि ने अपने मुंह में लंड रखते हुए उसकी और वासनामय आँखों से देखा. पर ये पुकार रूचि के लिए नहीं थी, निखिल के लिए थी. रूचि की ऑंखें एक क्षण के लिए पार्थ से मिलीं और उसकी शरीर भय से सिहर उठा. पर अब बहुत देर हो चुकी थी.
निखिल ने अचानक ही उसका सिर पकड़ा और अपने पूरे लंड को उसके मुंह में धकेल दिया. रूचि की ऑंखें फ़ैल गयीं और आंसुओं से लथपथ होने लगीं. पर उसके अहंकार पर असली आक्रमण पार्थ ने किया जब उसने एक ही लम्बे और शक्तिशाली धक्के में अपना लगभग तीन चौथाई लौड़ा उसकी चूत में गाढ़ दिया. रूचि छटपटाने लगी. उसके आँसू थम नहीं रहे थे. पर इन दोनों शक्तिशाली युवा चुदाई मशीनों के समक्ष उसका प्रतिरोध नगण्य था. पार्थ ने अपने लंड को लगभग पूरा बाहर खींचा और अगले ही धक्के में अपने पूरे मूसल को रूचि की ओखली में जड़ दिया. निखिल ने अपने लंड को बाहर निकाला जिससे रूचि का दम न घुट जाये. रूचि के आँसू अविरल बह रहे थे. पर अब वो सांस ले सकती थी. उसने दया भरी दृष्टि से पार्थ की ओर देखा पर उसे समझ आ गया कि उन आँखों में दया नहीं एक पैशाचिक चमक थी.
उसने अपने आप को अब भाग्य के भरोसे छोड़ दिया.
पार्थ ने अपनी निर्दयता का परिचय देते हुए रूचि को अपने लंड की पूरी लम्बाई से ताबड़तोड़ गति से चोदना प्रारम्भ किया. रूचि निखिल के लंड को इन झटकों के कारण सही प्रकार से चूस भी नहीं पा रही थी. निखिल ने पार्थ को थोड़ी सहजता के लिए कहा तो पार्थ ने अपनी गति कुछ कम कर दी, केवल इतनी कि रूचि निखिल के लंड का भी आनंद ले पाए.
इस घनघोर चुदाई ने रूचि के पोर पोर को खोल दिया था. उसकी चूत अपनी खाल बचने के लिए पानी के धार छोड़ रही थी. रूचि ने जीवन में ऐसी चुदाई कभी नहीं करवाई थी. पर ये भी था कि उसके साथी उससे डरते भी थे और इसीलिए उसे बहुत सहजता से ही चोदते थे. पर आज रूचि ने इन्हे ललकार कर उस सुख को पाया था जो उसे आज तक प्राप्त नहीं हुआ था. उसकी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी. इस कारण अब पार्थ का मूसल भी अब बड़ी सरलता से उसमे परेड कर रहा था. जब पार्थ को लगा कि उसका पानी छूट न जाये तो उसने अपने लंड को बाहर खींचा और निखिल को बागडोर सँभालने का न्योता दिया.
निखिल ने अपने लंड को रूचि के मुंह से निकले और रूचि की खुली चूत के गीलेपन को देखकर एक तौलिये से उसकी चूत को पोछकर कुछ सुखा दिया. उसके बाद उसने पार्थ के ही समान एक लम्बे झटके से अपने लंड को अंदर पेल दिया. अब चूँकि रूचि की चूत में पार्थ का आवागमन हो चूका था तो निखिल के पूरे लंड को भी वो एक ही धक्के में डकार गई. पार्थ ने रूचि को उसके रस से सना अपना लंड चूसने के लिए दिया जिसे रूचि ने बड़ी अधीरता से अपने मुंह में ले लिया। और इस बार निखिल ने अपने जोरदार धक्कों से रूचि की ईमारत हिला दी. पर उसने गति इतनी ही रखी कि पार्थ अपने लंड को रूचि से चुसवा पाए.
पर पार्थ ने ऐसा कोई दया का कार्य नहीं किया वो रूचि के मुंह को चूत समझ कर चोदने लगा. पर अब रूचि भी इस खेल का आनंद उठा रही थी. आज उसने अनुभव किया था कि जिनसे वो अब तक चुदवाती आयी थी वो पहली कक्षा के विद्यार्धी थे और जो आज उसे चोद रहे हैं वो उनसे बहुत आगे. उसके मन में क्लब के अन्य रोमियो से भी चुदने की इच्छा बल पकड़ने लगी. इन सबके बीच उसकी चूत का झड़ना अबाधित था. न जाने कितने वर्षों की प्यास थी जो उसकी चूत के आँसू मिटा रहे थे. पर अंत में उसके शरीर ने हाथ डाल ही दिए. एक फौहारे के साथ उसकी चूत ने एक लम्बी पिचकारी सी मारी और वो ठंडी होकर ढीली पड़ गई.
पार्थ और निखिल का भी अब समय पूरा हो चुका था, पर वो रूचि को अपने प्यार के रस से नहलाना चाहते थे जिससे उसे ये दिन सदैव याद रहे. निखिल अपने लंड को चूत ने निकालकर रूचि के चेहरे के पास आ गया और अपने हाथों से मुठ मारने लगा. उधर पार्थ ने मुंह को तब तक चोदा जब तक कि पक्का न हो गया कि वो झड़ने वाला है. इसके बाद उसने भी अपने लंड को निकाल लिया. दोनों मित्रों ने एक साथ अपने लौंड़ों से रूचि के चेहरे पर गाढ़ा सफ़ेद पानी सींचना शुरू किया. जब चेहरा भर गया तो उसके स्तनों पर भी छिड़क दिया. अंत में पार्थ ने अपने लंड को रूचि के मुंह में डालकर साफ करने के लिए कहा. उसके बाद निखिल ने भी अपने लंड की सफाई करवाई.
इसके बाद दोनों मित्र खड़े होकर अपने संपन्न कार्य का आकलन करने लगे. उनके वीर्य से भीगी सुन्दर रूचि अब उन्हें और भी रुचिकर लग रही थी. इस समय वो एक अति संपन्न और बड़ी व्यवसाई न होकर एक सस्ती वेश्या प्रतीत हो रही थी. रूचि ने कुछ समय बाद अपनी आंख खोलकर उन दोनों को उसे इस स्थिति में देखते हुए पाया.
“क्या देख रहे हो? ऐसा माल पहले नहीं भोगा होगा.”
पार्थ और निखिल ने उत्तर देना आवश्यक नहीं समझा, क्योंकि ये धंधे की बात थी पर हामी में सर हिला दिया.
“तुम चुदाई बहुत अच्छी करते हो. मेरा घर के लिए निमंत्रण अभी भी है. और इस बार... “ रूचि ने अपनी ऊँगली से एक थक्के वीर्य को लिया और अपनी गांड में उस ऊँगली से डाला. ‘’... इस छेद का भी स्वाद दूंगी.”
अब ऐसा प्रलोभन हो और कोई न करे ऐसा हो ही नहीं सकता.
“चलो अब नहा कर साफ हो जाओ. अपनी एक घंटे की छुट्टी समाप्ति पर है. तीनों साथ ही नहा लेते हैं.”
तीनों जल्दी से नहाये और कमरे से बाहर निकले. रूचि ने रिमोट से कमरे को लॉक किया. फिर इंटरकॉम उठाया.
“आधे घंटे और रुकना फिर अगले अपॉइंटमेंट वाले को भेजना. और घर जाने के पहले मेरे कमरे की सफाई कर देना और कपड़े बदलकर जाते हुए लॉन्ड्री में देती जाना.”
फिर उसने पार्थ को देखा, “ मुझे तुम्हारे साथ बिज़नेस करना रास आएगा. पहली बार मैं कोई बिज़नेस आनंद के लिए करूंगी.”
पार्थ: “रूचि मैडम. आप क्यों नहीं उस अभिनेत्री के शो को देखने आतीं? और कुछ बातें और....”
रूचि: “सोचकर बताती हूँ. और क्या बात है?”
पार्थ: “आप क्यों नहीं हमारी चयन समिति में शामिल हो जातीं? पार्टनर होने के कारण हर दूसरे नए रोमियो का इंटरव्यू आपको लेना होगा। और इंटरव्यू का तात्पर्य होता है प्रार्थी की चुदाई की तकनीक और क्षमता का आकलन.”
रूचि: “ओह, तो तुम मुझे रिश्वत दे रहे हो. मैं इस बारे में भी सोचकर ही बताऊंगी. पर प्रस्ताव अच्छा है. और क्या बात है.”
पार्थ: “कल क्लब में एक विशेष आयोजन है, ११ बजे से. हमें शुशी होगी अगर आप आ सकें तो. एक तो आप क्लब की व्यवस्था देख लेंगी. और कल सभी रोमियो उपस्थित होंगे और आप उनकी क्षमता को देख सकती है. इससे आपको अपने लिए सेवादार चुनने में मदद होगी.”
रूचि: “हम्म्म तब तो कल छुट्टी ही लेनी होगी. मैं प्रयास करुँगी आने का. अरे प्रयास नहीं, मैं अवश्य आऊंगी. पर किसी से अभी मिलूंगी नहीं. वो सब बाद में. क्लब की व्यवस्था इत्यादि भी मैं किसी और दिन देखूँगी. पर अब प्लीज मुझे क्षमा करो, मुझे अब दूसरे कार्य भी संपन्न करने है. तुम दोनों का धन्यवाद, मुझे इतना सुख देने के लिए.”
पार्थ ने अपना ब्रीफ़केस खोलकर चेक किया और देखा कि चैक ठीक से रखा है. तभी रूचि ने रिमोट उठाया और पार्थ को अपने पीछे दरवाजा खुलने की आहत सुनाई दी.
“थैंक यू, रूचि मैडम.” कहते हुए पार्थ और निखिल वहां से निकल गए.
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शोनाली का घर:
शाम हो चुकी थी. सारे पंछी लौट कर घर पहुँच चुके थे.
बैठक में बैठे सब भोजन के पहले की ड्रिंक ले रहे थे.
पार्थ ने सबको नयी पार्टनर और फाइनेंस के बारे में बताया. जॉय को बहुत गर्व हुआ कि पार्थ ने रूचि जैसी शक्तिशाली स्त्री को अपना पार्टनर बनाया है. इसके बाद उनके क्लब की सफलता निश्चित थी.
जॉय ने जैसन के साथ हुई नयी संधि के बारे में बताया और शोनाली से पूछा कि वो कब जाना चाहेगी. शोनाली ने उसे सोचकर बताने के लिया कहा.
सुमति ने शादी की तैयारी से समर्थ और शीला के संतुष्ट होने का शुभ समाचार दिया. सब इस बात से बहुत प्रसन्न हो गए.
शोनाली ने फिर सागरिका और पारुल के साथ सुप्रिया के घर का प्रकरण बताया और सुरेखा और उसकी बेटी के अद्वितीय सौंदर्य की भरपूर प्रशंसा की. ये सुनकर सबके मन ललचा गए और उनके मुंह में पानी आ गया.
फिर सबने भोजन किया और कुछ समय के लिए टीवी पर कुछ कार्यक्रम देखे.
“हम्म्म्म, तो सभी लोग किसी न किसी खेल में व्यस्त रहे आज, मुझे छोड़कर.” जॉय ने हँसते हुए कहा.
“ओह, पापा ! अगर दिन सूना गया है तो क्या हुआ. हम आपकी रात रंगीन करेंगे.” सागरिका और पारुल ने एक स्वर में कहा.
दोनों ने उठकर जॉय का हाथ लिया और लगभग घसीटते हुए उसे अपने कमरे में ले जाने लगीं. अचानक पारुल ने पीछे मुड़कर देखा.
“बुआ, आप भी आ ही जाओ. आपको डबल प्रसाद खिलाएंगी हम दोनों बहनें.”
सुमति तपाक से उठी और अपने होंठों पर जीभ फिरते हुए उन तीनों के पीछे चल पड़ी.
“मामी, अब आप किसके बिस्तर पर चुदना चाहोगी? अपने या मेरे?”
शोनाली बिना कुछ बोले पार्थ का हाथ पकड़कर अपने कमरे में चली गई.
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बॉलीवुड अभिनेत्री का शयनकक्ष:
वो सुन्दर अभिनेत्री इस समय एक मोटे लंड पर उठक बैठक कर रही थी. लंड की पूरी चौड़ी के कारण उसकी चूत पूरी फैली हुई थी और इसमें उसे बहुत आनंद आ रहा था.
“सच में हरजीत, तेरा अपना पारिश्रमिक लेने का ये तरीका मुझे बेहद पसंद है. मैं तो चाहूंगी कि तुम ऐसे ही मेरे लिए शो का आयोजन करते रहो.”
“मैडम, जब तक आप अपनी इस चूत का लालच मेरे लिए रखेंगी, तब तक मैं आपको काम की कमी नहीं होने दूंगा.”
ये वही हरजीत था जो विशेष शो इन दोनों के लिए आयोजित करता था और इस उद्योग के गुप्त नियमों के आधार पर उसे एक रात का सहवास प्राप्त था. पर आज अभिनेत्री के मन में कुछ और भी इच्छा थी. उसने सोफे पर नंगे बैठे अपने पति की ओर देखा तो उसका लंड इस समय पूरे जोश में था. अभिनेत्री का मन उसके प्रति प्रेम से भावुक हो उठा.
“जानू , क्यों नहीं तुम अपने लंड को मेरी गांड में डाल लेते. मुझे विश्वास है कि हरजीत को इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी.”
हरजीत: “यस, बॉस. आई एम ओके विथ देट”
विवाह से पहले अभिनेत्री ने बहुतेरे लोगों से गांड मरवाई थी. आखिर इस उद्योग में सबका गांड मारना ही सबका उद्देश्य होता है. पर शादी के बाद उसने अपनी गांड केवल अपने पति के लंड के लिए सुरक्षित कर दी थी. हालाँकि इसके कारण उसके हाथ से कुछ फ़िल्में छूट गयीं, पर उसने अपने वचन को नहीं तोड़ा.
प्रौढ़ अभिनेता ने साइड टेबल से वेसलीन निकली और अपनी सुन्दर पत्नी के पीछे आ गया. और कुछ ही समय में वो अतिसुन्दर फिल्मों में चरित्रवान दिखने वाली अभिनेत्री दो लौंड़ों से चुद रही थी. और आने वाले अपने गैंग-बैंग की कल्पना कर रही थी.
क्रमशः