• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest कैसे कैसे परिवार

बॉलीवुड अभिनेत्री का घर:

सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं. दो दिन बाद उन्हें अपनी लग्ज़री गाड़ियों से ही वहाँ जाना था. शहर के बाहर उन्हें लेने के लिए क्लब से कोई मिलेगा और वे उसके साथ क्लब जाने वाले थे. क्लब में रुकने की व्यवस्था उन्होंने देख ली थी और वे उससे संतुष्ट थे. हालाँकि ये ५ सितारा जैसा नहीं था, परन्तु बहुत अच्छा अवश्य था. क्लब के मालिक ने उनसे मेनू पहले माँगा था ताकि कोई उनकी निजता भंग न करे. आवश्यकता पड़ने पर और भी वस्तुएं उपलब्ध की जा सकती थीं. पीने के लिए तीनों की प्रिय शराब का भी प्रबंध था. उनके ड्राइवर और मेकअपमैन के लिए अलग प्रबंध था और वो भी लगभग उसी स्तर का था. क्लब मालिक के अनुसार, उनके पास केवल दो ही प्रकार के कमरे थे. पहले में १० लोगों से अधिक रुक सकते थे, और दूसरे ४ लोगों के लिए उपयुक्त थे. अभिनेत्री और उसके पति को एक, और अन्य तीनों को अलग कमरे दिए गए थे. एक बड़ा कमरा रोका हुआ था, अगर अभिनेत्री किसी प्रकार का मनोरंजन चाहेगी तो ये कमरा प्रयोग किया जा सकता था.

मेकअपमैन से इस समय बातचीत चल रही थी और ये निश्चित किया जा रहा था कि शो की प्रासंगिकता क्या होगी. चारों ने विचार करके इजिप्ट और रोमन काल पर इसे आधारित करना उचित समझा. अभिनेत्री क्लिओपात्रा का अभिनय करेगी. अभिनेता को उसके पति मार्कस का अभिनय करना था. वहीँ उनके पुत्र को क्लिओपाट्रा के पुत्र का अभिनय करना था. चूँकि ये स्थापित था कि क्लिओपाट्रा का कई पुरुषों से सम्बन्ध थे, तो इस कथानक में वो सही बैठ रहे थे. इस बात पर निश्चय होने पर अब उनकी पोशाकों की व्यवस्था के लिए मेकअपमैन को कहा गया. उसने एक एजेंसी से जो बॉलीवुड के लिए यही कार्य करती थी, दो रानी, तीन राजा, ४ सेविकाओं और २० सेवकों की पोशाकें मंगवा लीं. कुछ अतिरिक्त पोशाकें इसीलिए ली गयी थीं कि वहां जाने पर कोई समस्या न आ जाये.

मेकअपमैन: “मैडम, क्या आपको अपने शो के लिए अश्वेत अफ़्रीकी भी चाहिए हैं?”

मैडम: “नहीं. इतने सब की आवश्यकता नहीं. वैसे भी आप गोरे को काला और काले को गोरा बनाने में निपुण हो. पर मैं इस शो मैं ऐसा कुछ भी नहीं चाहती.”

मेकअपमैन: “ओके, मैडम. मैं चलता हूँ. कल पोशाकें और मेकअप का पूरा सामान लेकर आ जाऊंगा.”

ये कहते हुए वो चला गया और सब अपने काम में व्यस्त हो गए.

************

स्मिता का घर

कुछ समय बाद स्मिता और मेहुल बैठक में अकेले थे.

स्मिता: “मेहुल, मेरे विचार से ये जो तुम्हारा सीधेपन का स्वांग है, उसे थोड़ा कम करो. अब अगर मेरे और सुजाता से मिलने के बाद भी तुम यही रूप रखोगे तो बाद में इसे बदलना असम्भव हो जायेगा. धीरे धीरे इस हटाकर अपने असली चरित्र में आ जाओ.”

मेहुल: “हाँ मॉम, आप सही सोच रही हो. फिर श्रेया भाभी भी तो हैं. मुझे आंटी ने बताया कि भाभी मुझे बहुत चाहती हैं और वो मुझे ट्रेन करने के लिए भी उत्सुक है. पर स्नेहा को ठीक करने के पहले मैं उन्हें कुछ नहीं बता सकता.”

इतने में ही श्रेया आ गई और मेहुल के साथ बैठ गई.

श्रेया: “भैया जी, आप कभी हमारे साथ बैठते ही नहीं हो.”

मेहुल: “हाँ भाभी, ये मेरी कमी है. पर अब से मैं आप सबके साथ अधिक समय बिताऊंगा.”

श्रेया: “तो क्या कोई गर्लफ्रेंड है जिसके चक्कर में हम सबको भूल गए.”

मेहुल: ‘है तो भाभी, पर ऐसी नहीं कि आपको भुला सके. ये पूर्ण रूप से मेरी ही गलती है. पर मम्मी और आंटीजी से मिलकर मुझे अपने परिवार के लिए अपना कर्तव्य याद आ गया. भाभी, एक बात बोलूँ ?

श्रेया: “हाँ हाँ.”

मेहुल: “क्या मैं महक के बाद स्नेहा के साथ चु चु चुदाई कर सकता हूँ. आपके पास बाद में?”

श्रेया: “ओह, बच्चू तो ये बात है. मुझे क्यों आपत्ति होगी. मैं जानती हूँ तू स्नेहा पर कितना लट्टू है. और इसमें बुरा लगने वाली बात भी नहीं है. मैं मम्मीजी को बता दूंगी कि स्नेहा को यहाँ भेज दें चार दिन बाद.”

मेहुल: “भाभी, प्लीज़, आंटीजी को मत कहिये, आप सीधे स्नेहा से ही बात करो और इसे हमारी सीक्रेट रहने दो. मैं आंटीजी से सीखी कला को आजमाना चाहता हूँ, और अगर उन्हें पता लगा तो मुझे बहुत अजीब लगेगा.”

श्रेया को मेहुल की बात का कोई औचित्य तो नहीं लगा पर उसने ये बात मान ली. फिर उसने अपने कमरे में जाकर स्नेहा को फोन किया और उसे चार दिन बाद आने के लिए कहा. उसे लग रहा था कि स्नेहा कुछ उल्टा सीधा बोलेगी, पर उसकी तुरंत स्वीकृति ने उसे अचंभित कर दिया. उसे लगा कि स्नेहा ने मेहुल के प्रति अपना विचार बदल लिया है. इस बात से खुश होकर उसने मेहुल और स्मिता को ये शुभ समाचार दे दिया.

************

सुजाता का घर

अविरल अभी भी गुस्से से तमतमाया हुआ था. सुजाता जब अंदर आयी तो उसने ये सोचकर कि कहीं वो सुजाता पर और न भड़क उठे, अपने शयनकक्ष से सटे अपने ऑफिस में चला गया. इसका उपयोग वो कम ही करता था, पर आज इसके लये समय उचित था. उसने दरवाजे को बंद किया और सोच में पड़ गया. फिर उसने कैमरे से निकले हुए कार्ड को निकला और बैग से अपने लैपटॉप को निकालकर ऑन किया. उसने कार्ड को लैपटॉप में लगाया और उसमे देखने लगा. पर ये क्या? उसमें तो कुछ भी नहीं था. कार्ड पूरा खाली था. ये कैसे हुआ? कहीं मेहुल ने इसे देख तो नहीं लिया था? अब उसकी घबराहट स्नेहा को लेकर और बढ़ गयी.

उसने लैपटॉप बंद किया और कमरे में लौट गया. सुजाता वहीँ सोफे पर बैठी उसकी राह देख रही थी.

सुजाता: “सुनिए, आप परेशान मत हो. मैं स्नेहा को समझाऊंगी.”

अविरल उसकी बात अनसुनी करते हुए: “कमरे में मेहुल और तुम्हारे सिवाय कोई और भी आया था?”

सुजाता: “हाँ, स्मिता आयी थी बाथरूम जाने के लिए.”

और इस समय अविरल की ऑंखें कमरे के उन स्थानों को देख रही थीं जहां कुछ छुपाया जा सकता है.

सुजाता: “कुछ हुआ क्या?”

अविरल: “नहीं. ठीक है. मैं स्नेहा को समझने का दायित्व तुम्हें देता हूँ. और तुमसे क्षमा मांगता हूँ अभी के व्यव्हार के लिए.”

सुजाता: “नहीं, अपने ठीक ही किया था. आपकी इस डाँट से स्नेहा को अब समझ आ गया होगा कि आप कितने गंभीर हो. आप बैठो, मैं आपकी ड्रिंक बनाती हूँ और फिर सिर दबा देती हूँ.”

अविरल ने हामी भरी और सुजाता दोनों के लिए ड्रिंक लेकर आ गयी. अविरल का सिर गोद में लेकर उसके सिर को हलके हाथों से दबाने लगी. बीच बीच में वो ड्रिंक का एक घूँट लेती और अविरल के मुंह से मुंह लगाकर उसे पिला देती.

अविरल: “कभी कभी मैं सोचता हूँ कि मैं कितना भाग्यशाली हूँ जो तुम्हारे जैसी पत्नी मिली.”

सुजाता: “आपको जो भी मिलती, आप उसे अपने रूप में ढाल लेते.” सुजाता अपने पति के बाल सहलाते हुए बोली. “मेरा सौभाग्य है जो मुझे आप मिले और अपना ये परिवार.”

कुछ समय में ही अविरल गोद में सिर रखे हुए ही सो गया. सुजाता भी ऊँघने लगी. तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया और फिर धीरे से खोलते हुए अंदर प्रवेश किया. ये स्नेहा थी. बहुत डरी और सहमी हुई. उसने देखा कि अविरल सो रहा है.

स्नेहा: “मॉम, मुझे आपसे कुछ बात करनी है.”

सुजाता: “हाँ इधर आकर बात करो. तुम्हारे पापा सो रहे हैं.”

स्नेहा: “मॉम, आप प्लीज़ पापा को बोलना, आय एम रिअली सॉरी। मैं अब कभी मेहुल का अनादर नहीं करुँगी. सच में.”

अविरल ये सब सुन पा रहा था और चुप रहा.

सुजाता: “तुम्हारे पापा तम्हारे लिए बहुत चिंतित हैं. मैंने उन्हें इतना परेशान केवल एक ही बार देखा है जब तुम बचपन में बीमार पड़ी थीं. चार दिन तक तुम्हें गोद में लिए रहे थे. नीचे उतारते ही तुम रोने जो लगती थीं. उनके मन में कुछ खटक रहा है. और अगर वो ऐसा कह रहे हैं तो तुम्हें उनकी बात पर बहुत ध्यान देना चाहिए. तुम चिंता मत करो, अभी उठेंगे तो मैं बता दूंगी कि तुम आयी थीं.”

अविरल: “मुझे पता है कि मेरी लाडो आयी है. ये आये और पापा को पता न चले?”

स्नेहा रो पड़ी: “पापा, मुझे प्लीज़ माफ़ कर दो.” और फफक फफक कर रोते हुए अविरल से लिपट गई. अविरल उठा और उसे अपने सीने से लगा लिया.

अविरल: “रो मत. मैं तुझसे कभी गुस्सा रह सकता हूँ भला ?” ये कहकर उसने स्नेहा को साथ में बैठा लिया.

स्नेहा के आँसू अभी भी नहीं रुक रहे थे. वो अविरल के गले से लगकर रोये जा रही थी.

स्नेहा: “पापा, मुझे आपसे दूर नहीं जाना है. मुझे अपने से अलग मत करो.”

अविरल का दिल भी रो रहा था उसके भी आँसू निकल रहे थे. उसने स्नेहा के बहते हुए आँसुओं को चूमते हुए कहा: “कभी नहीं. वैसे भी तेरी शादी इसी शहर में ही होने है, अपने समुदाय में ही, तो तू मुझसे कभी दूर हो ही नहीं सकेगी. पर गुड़िया, जब भी मेहुल मिले उससे मन से क्षमा माँगना। उसे बता देना कि तेरे ये विचार क्यों थे और क्यों तुझे लगता है कि तू गलत थी.”

स्नेहा: “जी पापा.” ये कहते हुए उसने अविरक के होंठ चूम लिए.

बाप बेटी इस भावनात्मक घड़ी में एक दूसरे के पास थे और दोनों की भावनाएं इस समय चरम पर थीं. सुजाता पास बैठी उनके इस मिलन को देख रही थी और प्रार्थना कर रही थी कि मेहुल स्नेहा से बदला न ले. उसने मेहुल से सुबह बात करने का प्रण किया, स्मिता के घर जाकर. वो पूरा प्रयास करेगी कि उसकी फूल जैसी बेटी को मेहुल क्षमा कर दे.

उधर अविरल और स्नेहा का चुम्बन प्रगाढ़ हो चला था. और कोई समय होता तो सुजाता की वासना उभर आती, पर संभवतः मेहुल ने उसकी इस भूख को समाप्त कर दिया था. और वो इस परिवर्तन से संतुष्ट थी. उसने ये भी निर्णय लिया कि केशव या कोई और जिसे भी उसके पास प्रशिक्षण हेतु भेजा जायेगा, उन्हें वो उनकी माँ के समान ही प्यार देगी। न जाने क्यों, इस निर्णय से उसकी आत्मा को एक शांति मिली. अविरल अब तक स्नेहा का टॉप निकालकर उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को प्यार से मसल रहा था. स्नेहा के हाथ भी अविरल के खड़े होते लंड को उसके गाउन में सहला रहे थे.

फिर स्नेहा उठी और उसने अपनी ब्रा और अन्य वस्त्र उतार दिए और अपने पिता के पांवों के बीच में बैठकर उसके लंड को अपने मुंह से चाटने लगी. अविरल ने अपने सिर को पीछे करते हुए ऊपर की ओर कर दिया और वो स्नेहा के इस कार्य का आनंद लेने लगा. सुजाता अभी भी उन दोनों को देखकर बहुत ही संतुष्टि अनुभव कर रही थी. अच्छा हुआ कि उसके कुछ किये बिना ही, सब कुछ सामान्य हो गया. वो उठी और अपने लिए एक ड्रिंक बनाकर सामने घटित हो रहे प्रसंग को देखने लगी. तभी कमरे का दरवाजा खुला और विवेक ने अंदर झाँका. उसने सोफे पर चल रहे प्रेमालाप को देखा और सुजाता की ओर देखते हुए थम्ब्स अप किया. सुजाता ने उसे संकेत देकर अंदर बुला लिया। विवेक अंदर आया और उसने दरवाजा बंद कर दिया.

इस सब से अनिभिज्ञ स्नेहा अपने पिता के लंड को चूस रही थी और अविरल अपने हाथ से उसके सिर को सहला रहा था. फिर अविरल ने उसे उठने के लिए कहा और उसे लेकर बिस्तर की ओर बढ़ गया. विवेक ने अपने लिए एक ड्रिंक बनाई और वो सोफे पर बैठकर सुजाता कि भांति अपने पिता और बहन के बीच चलते हुए संसर्ग को देखने लगा.

अविरल ने नेहा को लिटाकर उसकी चूत पर धावा बोल दिया और उसे पागलों के समान चाटने लगा. स्नेहा के रस से सराबोर उसके चेहरा चमक रहा था. वो अपनी जीभ से स्नेहा की चूत को अंदर से चाटने लगा.

“ओह, पापा.”

अविरल ने उसे अनसुना करके अपनी जीभ का हमला नहीं रोका. बल्कि उसने अब अपनी दो उँगलियाँ भी स्नेहा की चूत में डालकर उसे चोदने लगा. पर आज समय मिलन का था और इसीलिए अविरल ने उठकर अपने लंड को स्नेहा की चूत पर रखा और एक बार में आधा और दूसरे झटके में पूरा अंदर कर दिया. स्नेहा ख़ुशी से चीख पड़ी और फिर से रोने लगी.

स्नेहा: “मुझे जोर से चोदो, पापा. मैंने जो अब तक गलती की हैं, इसी चूत के नशे में की हैं. आज इसकी सारी अकड़ निकाल दो. पर मुझे अपने से अलग मत करना कभी भी. मैं मर जाऊंगी. इससे तो अच्छा आप मुझे चोद छोड़ कर ही मार डालो.”

अविरल उसका दर्द समझ रहा था. उसने अपनी गति को अच्छा तेज रखा हुआ था, ऐसे जैसे कि वो स्नेहा को सजा दे रहा हो. पर ये उसका गुस्सा था, मेहुल पर, सुजाता पर और स्नेहा पर. और कुछ अपने ऊपर भी. उसे लगा कि उसने स्नेहा को सुजाता के भरोसे छोड़कर ठीक नहीं किया था. पिछले साल से जब से सुजाता की चुदास बड़ी थी, तो उसने स्नेहा पर से ध्यान कम कर दिया था. वो स्नेहा के बहते हुए आंसुओं के लिए अपने आप को भी दोषी समझ रहा था.

उसने आगे झुकते हुए स्नेहा के चेहरे को चाट कर उसके नमकीन आंसुओं को पी लिया. फिर उसने स्नेहा के होंठ पर अपने होंठ लगाए और एक सशक्त चुम्बन का आरम्भ किया. इस चुम्बन के साथ ही उसने अपनी चुदाई की गति और बढ़ा दी. स्नेहा इसी प्यार की प्यासी थी और उसकी चूत ने उसकी भावनाओं की समझकर पानी छोड़ना शुरू ही किया था कि स्नेहा का शरीर अकड़ कर काँपने लगा और उसके झड़ने का क्रम शुरू हो गया. अविरल बिना रुके उसे चोदे जा रहा था, और स्नेहा बिना ठहराव झाड़ रही थी. फिर उसका शरीर ढीला पड़ गया और अविरल ने भी अपने शरीर में उत्कर्ष की भावना अनुभव की और वो भी चिंघाड़ते हुए स्नेहा की चूत में अपने लंड का रस बिखेरने लगा. उसका शरीर भी अकड़ा हुआ था और उसकी कमर बिना किसी लय के झटके ले रही थी.

फिर अविरल ने अपने लंड को बाहर निकाला और अपने होंठों को स्नेहा से अलग किया.

“थैंक यू, पापा.” स्नेहा उसके गले में बहन डालकर बोली.

“थैंक यू, गुड़िया.” ये कहकर अविरल ने सुजाता की ओर देखा तो सुजाता की ऑंखें चमक उठीं. वो उठी और उसने स्नेहा की चूत पर धावा बोल दिया और चाट चाट कर अविरल और स्नेहा के मिलेजुले रस को ग्रहण किया. फिर उसने उठकर स्नेहा को चूमा और कुछ रस उसे दान कर दिया.

“वी ऑल लव यू, बेबी. सब ठीक है.”

स्नेहा ने अपनी माँ को बाँहों में लेकर चूमते हुए उसका भी धन्यवाद किया.

विवेक: “लगता है कि अब सब ठीक हो गया है घर में. मुझे बहुत चिंता थी.”

अविरल ने अपने लंड को सुजाता के मुंह से लगाकर कहा: “ऐसी कोई समस्या नहीं जिसे चुदाई से दूर नहीं किया जा सके. क्यों ठीक है न ?”

इस बात पर सब हंसने लगे और घर का वातावरण सामान्य हो गया. कुछ ही देर में सब लोग शांति से सो रहे थे.

************

स्मिता का घर

नाश्ते के समय श्रेया बोली: “मम्मी का फोन आया था, कह रही थीं आने के लिए.”

स्मिता: “हाँ, मुझसे भी पूछा था. मैंने १० बजे के बाद आने के लिए कहा है.”

विक्रम: “क्या हुआ, आज उन्हें पूछ के आने की क्या आवश्यकता पड़ी. वो तो कभी भी आ सकती हैं.”

स्मिता: “मैंने भी यही पूछा था. तो बोली कि मैं और श्रेया कहीं बाहर न जा रहे हों. आप आज कितने बजे तक आएंगे?”

विक्रम: “आज कुछ विशेष काम तो है नहीं. तो समय से ही आ जाऊँगा. और अगर तुम कहो तो जल्दी आ जाऊं.”

स्मिता: “आप देख लेना, जब मन करे तब चले आना.”

विक्रम: “तुम इधर देख लो अगर तो मैं जाऊंगा ही नहीं.”

स्मिता: “चलिए, बड़े रोमांटिक मत बनिए. जब मन करे आ जाना.”

विक्रम: “जैसी आज्ञा, देवी.”

सब हंस पड़े और उनके प्यार को देखकर ईर्ष्या भी करने लगे. फिर विक्रम और मोहन महक को लेकर निकल गए. मेहुल अपने कमरे में चला गया. श्रेया और स्मिता ने सुजाता के आने का प्रबंध किया. सवा दस बजे सुजाता आ गयी और साथ में स्नेहा भी. सुजाता स्मिता के साथ बैठ गई और श्रेया स्नेहा को अपने कमरे में ले गई.

सुजाता स्मिता से: “मैं आपसे विनती करने आयी हूँ. आप तो जान गयी होगी मेहुल ने मेरे साथ क्या किया?”

स्मिता: “नहीं, उसने मुझे कुछ भी नहीं बताया.” स्मिता ने अभी तक वीडियो भी नहीं देखे थे तो उसे ये कहने में कोई झिझक नहीं हुई.

सुजाता: “मेरी बस यही विनती है, की वो स्नेहा को प्यार से चोदे, मेरी फूल सी बच्ची पर दया करे.”

स्मिता ने सुजाता का हाथ पकड़ा, “मैं नहीं जानती कि उसने क्या किया पर मैं उसे अवश्य समझाऊंगी कि वो स्नेहा को अपनी बहन के समान ही समझे. अब तुम मत घबराओ, वो मेरी बात नहीं टालेगा.”

सुजाता स्मिता के पैरों से लिपट गयी. उसने रट हुए स्वर में कहा, “प्लीज, स्मिता. भूलना नहीं. कल उसके पापा ने उसे बहुत डाँटा और घर से निकालने तक की चेतावनी दी है, वो कभी मेहुल का अपमान नहीं करेगी, जीवन भर.”

स्मिता: “उठ जाओ. मैंने कहा न, मेहुल मेरी बात नहीं टालेगा। अच्छा रुको मैं उसे यहीं बुलाकर समझती हूँ.”

स्मिता ने मेहुल को बुलाया और बैठकर कहा: “मेहुल, सुजाता की ये विनती है कि तुम स्नेहा पर दया दिखाना और उसे सुजाता के समान मत चोदना। और मैं भी यही चाहती हूँ.”

इससे पहले कि मेहुल कुछ कहता सुजाता उसके पांवों से लिपट गयी. “हमें क्षमा कर दो बेटा। कल उसके पापा ने उसे अपना व्यव्हार सुधारने या घर से निकल जाने के लिए कह दिया है. वो बहुत पचता रही है. उस पर दया करना बेटा, मैं तुमसे भीख मांग रही हूँ.”

मेहुल का दिल पसीज गया और फिर उसकी माँ की आज्ञा भी थी. उसने सुजाता को उठाया और उठकर उसे गले से लगा लिया.

“आंटीजी, मैं आपको वचन देता हूँ, कि स्नेहा को बिलकुल भी तकलीफ नहीं दूंगा. आप मेरी ओर से निश्चिंत रहिये. और किसी और को भी उसे परेशान नहीं करने दूंगा. चलिए मम्मी के कमरे में चलते हैं, वहां मैं आपको अपने प्यार का भी उदाहरण दे देता हूँ.”

इसके साथ ही वो तीनों स्मिता के कमरे की और बढ़े ही थे की श्रेया और स्नेहा आ गए. स्नेहा मेहुल के गले से लिपट गयी.

“मेहुल, प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो. मैंने तुम्हे कई बार अपमानित किया है. पर कल पापा ने मेरा घमंड ठिकाने लगा दिया. आगे से मैं तुम्हें कभी भी नीचा नहीं दिखाऊंगी.” ये कहते हुए स्नेहा भी उसके पांवो से लिपट गई. मेहुल का तो सिर ही भन्ना गया. इसका अर्थ यही था कि अविरल अंकल बहुत सुलझे हुए आदमी हैं. उसने स्नेहा को उठाया और उसे बाँहों में भर लिया.

“मैंने तुम्हें क्षमा कर दिया. अब तुम निश्चिन्त हो जाओ. मैं थोड़ी देर के लिए मम्मी और आंटीजी की कुछ दिखने के लिए मम्मी के कमरे में जा रहा हूँ. तुम भाभी के साथ रहो. मैं तुमसे कल बात करूँगा, मुझे अभी कुछ देर में बाहर जाना है. अब खुश होकर अपनी प्यारी वाली स्माइल दो.”

स्नेहा के रोते हुए चेहरे पर मुस्कराहट आ गई. मेहुल ने उसके होंठ चूमे और उसे गले से लगाकर भाभी के पास भेज दिया और स्वयं स्मिता और सुजाता के साथ स्मिता के कमरे में चला गया.

************
 
मेहुल का नया मित्र:

मेहुल दोपहर का खाना खाने के बाद बाहर चला गया. आज उसने कॉलेज को पूरा ही बंक मार दिया था. घर से निकलकर वो अपनी बाइक से एक कॉलोनी में चला गया और वहाँ बने एक घर में अपनी बाइक लगा दी. घर में इस समय एक कार और एक बाइक खड़ी थी. बाइक को देखते हुए वो घर के दरवाजे पर गया और चाबी से दरवाजा खोला. घर में जाने के बाद उसने अपने जूते निकालकर एक ओर लगे स्टेण्ड में लगा दिए और फिर किचन से पानी की ठंडी बोतल निकालकर आधी बोतल पानी पिया. उसे घर के शांत वातावरण में ऊपर के कमरे से कुछ हल्की मद्धम आवाज़ आ रही थी. वो मुस्कुराते हुए धीमे पांवों से ऊपर की ओर चल पड़ा. ऊपर तीन कमरे थे, जिसमे से एक का ही दरवाजा कुछ खुला लग रहा था और ये आवाज़ें भी वहीँ से आ रही थीं.

उसने अपनी टी-शर्ट उतारी और अपनी बेल्ट खोलकर फिर अपनी पैंट भी उतार दी. उसने ये सब वहीँ रखी एक कुर्सी पर रख दिया. फिर अपनी अंडरवियर भी उतारा और उसे भी कपड़ों पर फेंक दिया. अपने लंड को उसने अपने ही हाथों से सहलाया और फिर कमरे में प्रवेश कर गया. सामने के दृश्य ने उसे चकित कर दिया.

उसके प्रिंसिपल की माँ मरियम घुटनों पर नंगी बैठी हुई एक हृष्ट पुष्ट लड़के का लंड चूस रही थी. मेहुल ने देखा कि उस लड़के का भी लंड उसके बराबर ही होगा. पर मेहुल को जलन जैसी कोई भावना नहीं आयी. जब वो माँ और बेटी (प्रिंसिपल मैरी) को साथ चोद सकता था तो उसे इस लड़के से ईर्ष्या करने का कोई अर्थ नहीं था.

लड़का: “हे, डूड. आय एम सचिन.”

मेहुल: “हाई, आय एम मेहुल.”

तभी बाथरूम से फ़्लश चलने की आवाज़ आयी और फिर बाथरूम का दरवाजा खुला और प्रिंसिपल मैरी कमरे में आ गयीं. वो भी अपनी माँ के समान नंगी ही थी.

मैरी: “हैलो मेहुल, चलो अच्छा हुआ तुम भी समय से आ गए. ये मेरी दोस्त रमोना का बेटा सचिन हैं. और जैसा तुम देख रहे हो ये भी लौड़े के मामले में तुम्हारे जैसा ही है.”

इस बार सचिन ने मेहुल के लंड को देखा और सीटी बजाई।

मैरी: “मैं बहुत दिनों से रमोना से कह रही थी कि उसने अपने लड़के से कभी मिलाया नहीं. तो आज उसने भेज ही दिया, ठीक प्रकार से मिलाने से. अच्छी बात ये है कि हम दोनों को अब तुम्हारे लंड के लिए प्रतीक्षा नहीं करनी होगी. दोनों एक साथ चुद सकती हैं. और तुम्हें इसमें कोई परेशानी भी नहीं होनी चाहिए.”

ये कहकर मैरी मेहुल के आगे घुटनों के बल बैठ गयी और उसके लंड को मुंह में लेकर चाटने और चूसने लगी.

मरियम: “और हम दोनों की तुम डबल चुदाई भी कर सकोगे. क्यों है न सही?”

मेहुल का लौड़ा ये सुनकर एकदम टनटना गया. वहीँ सचिन का भी लंड अकड़ कर लोहे जैसा हो गया. मेहुल ने अभी तक कभी डबल चुदाई का आनंद नहीं लिया था, हालाँकि सचिन इसमें अनुभवी था. दोनों लंड अपने जोश में देखकर मैरी मैडम ने कहा, “अब टाइम वेस्ट करने का कोई मतलब नहीं है. मॉम, आपको किसके साथ चुदाई करनी है.”

मरियम: “मुझे तो ये नया लौड़ा ही चाहिए आज. मुझे बहुत दिन हो गए नए लंड से चुदे हुए. तुम तो फिर भी इसका मज़ा लेती रहती हो.”

ये सच भी था. कॉलेज के लड़के मैरी मैडम को तो चोदने के लिए तत्पर रहते थे, पर मरियम पर वो थोड़ा भी ध्यान नहीं देते थे. मरियम इस अपमान को अपनी बेटी के लिए सहन कर लेती थी. पर आज सचिन ने किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं की और सीधे उसके मम्मे दबाकर अपना आशय व्यक्त किया तो मरियम झूम उठी. सचिन ने मरियम और मेहुल ने मैरी मैडम को उठाया और बिस्तर पर घोड़ी के आसन में कर दिया. इस आसन में दोनों माँ बेटी एक दूसरे के चेहरे के सामने थीं. मरियम ने मैरी मैडम को चूम लिया और तब तक उनके दोनों घोड़ों ने उसने पीछे अपना स्थान ले लिया.

इधर माँ बेटी एक दूसरे को चूम रही थीं और उनके पीछे सचिन और मेहुल अपने लौड़े उसकी चूतों में उतार रहे थे. दोनों को बड़े और मोटे लौड़े लेना का बहुत अनुभव था और अपनी चूत को खुलते हुए और उसके अंदर जाते हुए लौड़े के आनंद से दोनों काँप रही थीं. और एक दूसरे को चूमे जा रही थीं.

सचिन: “मेहुल, इन्हें कैसी चुदाई पसंद है?”

मेहुल: “बड़े लौड़े पसंद करती हैं तो प्यार वाली चुदाई तो चाहती नहीं होंगी. जैसे मन हो वैसे चोदो।”

सचिन: “थैंक्स, भाई. और हाँ इसके बाद मुझे तुमसे कुछ और भी बात करनी है.”

ये कहते हुए सचिन ने अपने लंड से मरियम को ताबड़तोड़ गति से चोदना शुरू कर दिया. पर उस बुढ़िया को इसमें इतना मजा आया कि वो चिल्ला चिल्लाकर उसे और जोर से चोदने के लिए उत्साहित करने लगी. सचिन कब रुकने वाला था. उसने अपने दोनों पांव अच्छे से जमाये और दनादन धक्के लगाने शुरू कर दिए. बूढ़ी मरियम कि चूत इस उम्र में भी पानी छोड़ने लगी और सचिन के लंड के अंदर बाहर होने में छप छप की ध्वनि आने लगी.

सचिन: “ये तो बहुत गर्म औरत है, भाई. ऐसे पानी छोड़ रही है जैसे कि नहर.”

मेहुल अपनी प्रिंसिपल की चूत में अटका हुआ था और उसे भी उसी तेज गति से चोद रहा था और मैरी मेडम भी झड़े जा रही थीं.

मेहुल: “अरे अभी तुमने कुछ देखा ही नहीं. जब मैडम उनकी चूत चाटेंगी और तुम इनकी गांड मारोगे तब देखना इनका हाल. मैडम को कई लीटर पानी पिला देती हैं दादीजी.”

मरियम ने भी अब अपनी बात रखी. “ पर आज मैरी को चूत चाटने का अवसर नहीं दूंगी. आज एक लौड़ा चूत में और एक गांड में लूँगी।”

मेहुल ने छेड़ा: “तो मुंह का क्या होगा दादीजी?”

मरियम: “उसके लिए मैरी की चूत और गांड रहेगी. और फिर मैरी मेरी चूत और गांड से तुम्हारा रस पीयेगी. क्यों मैरी, ठीक कहा न मैंने.”

मैरी मैडम: “बिलकुल मॉम, और यही मेरे साथ भी होगा. आज सच में ऐसे दो लौडों से चुदवाकर आत्मा तृप्त हो जाएगी.”

दोनों माँ बेटी अब बुरी तरह से कांप रही थी और झड़े जा रही थीं. अंततः दोनों चीखते हुए धराशायी हो गयीं. पर सचिन और मेहुल ने उनको चोदना बंद नहीं किया. और कुछ देर में दोनों घोड़ों ने अपना माल उन प्यासी चूतों में अर्पित कर दिया और उनके ऊपर ही लेट गए. दो चार मिनट के बाद दोनों ने अपने लंड बाहर निकाले और वहीँ बैठ गए. लंड बाहर निकलते ही दोनों माँ बेटी जैसे जग उठीं. पहले दोनों ने अपने घोड़े के लौड़े को चाटकर उसे साफ करके चमका दिया और फिर एक दूसरे की चूतों पर टूट पड़ीं और एक एक बूँद पी कर अपनी प्यास बुझाई.

मैरी मैडम: “आह, मजा आ गया आज मॉम।”

मरियम: “बहुत मजा आया, मैरी. पर अभी असली मजा आना बाकी है.”

इतने में सचिन बोला: “आंटी, मुझे मेहुल से कुछ बात करनी थी अकेले में. क्या हम बाहर बैठक में बैठ सकते हैं?”

मैरी मैडम: “हाँ हाँ क्यों नहीं. हम दोनों को भी कुछ समय चाहिए.”

सचिन और मेहुल ने बिना अंडरवियर के ही अपने कपड़े पहने और बाहर बैठक में बैठ गए.

सचिन: “तुम मैडम को कबसे जानते हो?”

मेहुल: “यही कोई डेढ़ साल से.”

सचिन: “अगर मैं तुम्हे कुछ बताऊँ तो क्या तुम उसे गुप्त रख सकते हो?”

मेहुल: “अवश्य. मेरे दिल में वैसे भी कई बातें दबी हुई हैं.”

सचिन: “ठीक है. मैं एक क्लब में पार्ट टाइम काम करता हूँ. उस क्लब में अधेड़ उम्र की स्त्रियां सदस्य हैं और हम लड़के उनकी शारीरिक भूख को मिटाते हैं. और इसमें लड़कों का जो मापदंड है वो ये है कि आयु २६ से कम और लौड़ा १० इंच से बड़ा होना चाहिए. मेरे विचार से तुम उसमे काम कर सकते हो अगर तुम्हारी पृष्ठभूमि के आकलन में तुम उत्तीर्ण हो जाते हो.” इसके बाद सचिन ने उसे दिंची क्लब के बारे में बताया पर कोई नाम या स्थान नहीं बताया. मेहुल ने उसमे काम करने के लिए अपनी स्वीकृति दे दी.

सचिन: “ठीक है, मैं पार्थ सर और शोनाली मैडम से बात करूँगा. इसके आगे उनके ऊपर निर्भर है.”

नाम सुनकर मेहुल का माथा ठनका.

मेहुल: “क्या ये दोनों संभ्रांत नगर में रहते हैं.”

सचिन को तभी ये लग गया कि उसने नाम लेकर गलती कर दी है. पर तीर कमान से निकल चुका था.

सचिन: “हाँ, पर..”

मेहुल: “तुम मेरा विश्वास करो, ये बात मेरे आगे नहीं जाएगी. बिलकुल भी नहीं. और ये भी जान लो कि मैं भी संभ्रांत नगर में ही रहता हूँ.”

सचिन के चेहरे पर घबराहट दिख रही थी.

मेहुल: “ये जान लो कि उन दोनों को कभी ये नहीं पता लगेगा कि तुमने उनके बारे में मुझसे कुछ भी कहा है. अब ये बताओ कि अगर मैडम तुम्हारी मॉम को जानती हैं तो तुम यहाँ कैसे आ गए?”

सचिन को मेहुल पर अब विश्वास हो चला था. उसकी बातों में कोई छल नहीं दिख रहा था. उसने उसे सच बताने का निश्चय किया.

सचिन: “मेहुल, मैं अपनी माँ की चुदाई भी करता हूँ. उन्होंने ही मुझे दिंची क्लब में शामिल करवाया था. ये सुनकर हो सकता है कि तुम मुझसे घृणा करने लगो. पर मैं तुम्हे अपना दोस्त समझने लगा हूँ.”

मेहुल ने अपना हाथ बढाकर सचिन से हाथ मिलाया, “मेहुल दोस्तों को कभी धोखा नहीं देता. और घृणा तो तब करूंगा अगर मैं भी ऐसा नहीं कर रहा होता.” मेहुल के चेहरे पर मुस्कराहट थी.

सचिन: “यानि की, तुम भी…?”

मेहुल: “हाँ, और ये अभी कुछ ही दिन पहले शुरू हुआ है. अभी तक मैंने अपनी मॉम और अपनी भाभी की मॉम को ही चोदा है.”

सचिन: “यू लकी बास्टर्ड!”

मेहुल: “चलो, तुम मुझे दिंची में रोमियो का काम दिलाने का प्रयास करो. इन दोनों को ऐसे छोड़ना है कि ये दोनों और देखने वाले सबको आनंद आये.”

सचिन: “हमारे सिवाय कौन देखेगा.”

कुछ समय दोनों और बातें करते रहे जिसमे सचिन ने पटेल परिवार और सबीना के बारे में भी बताया. क्योंकि ये मेहुल की पहले डबल चुदाई थी तो सचिन ने उसे कुछ गुर दिए और किस तरह से ताल बैठानी है ये भी बताया. फिर दोनों उठकर शयनकक्ष की ओर चल पड़े. अंदर जाने के पहले मेहुल ने सचिन का हाथ पकड़ा.

मेहुल: “आओ, मैं तुम्हें कुछ दिखता हूँ.”

ये कहते हुए वो हॉल के एक दूसरे कमरे की ओर चल पड़ा. सचिन उसके पीछे हो गया. उस कमरे के बाहर जाकर उसने दरवाजे को खोलने के लिए घुंडी घुमाई और वो खुल गया. उसने चौथाई के लगभग दरवाजा खोला और सचिन को अंदर देखने के लिए आमंत्रित किया. अंदर एक अत्यंत वृद्ध पुरुष और एक अधेड़ पुरुष सोफे पर बैठे थे और टीवी देख रहे थे. टीवी पर जो दृश्य था उसे देखकर सचिन अचंभित हो गया. ये मैडम के शयन कक्ष का दृश्य था और इस समय मैडम और उनकी माँ दिखाई दे रही थीं.

वृद्ध: “क्या हुआ लौडों को, कहाँ चले गए?”

अधेड़: “पापाजी, धीरज रखो, अभी आते ही होंगे.”

वृद्ध: “गांड मारने में मेहुल तो सही है, इस नए लड़के को तो सही से आता होगा न? ऐसा न हो ये मेरी मरियम को गांड फाड़ दे.”

अधेड़: “ऐसा कुछ नहीं होगा, वैसे भी मम्मी की गांड इतनी खुली हुई है कि फाड़ना सम्भव ही नहीं है.”

दोनों हंसने लगे. और अपने हाथ में लिए हुए ग्लास से कुछ पीने लगे. मेहुल ने सचिन को पीछे करते हुए दरवाजा वापिस बंद किया और मैडम के कमरे की ओर चल पड़ा. उसने देखा कि सचिन के मन में कुछ सवाल हैं.

मेहुल: “मैडम और उनकी मम्मी के पति. अब केवल उन्हें चुदते देखकर ही मजा लेते हैं. मैडम के पति की किसी बीमारी के कारण सेक्स की क्षमता नहीं रही. पर वो मैडम को मजा लेने से नहीं रोकते. और इन्ही की पहरेदारी है जो आज तक मैडम की लड़की कुंवारी है, नहीं तो मैडम तो किसी न किसी से उसकी सील तुड़वा ही देतीं. और उनके बारे में मैडम से कभी कुछ न बोलना. उनके बारे में कोई अपशब्द उन्हें सहन नहीं होगा.” ये कहकर मेहुल ने मैडम के कमरे का दरवाजा खोला और दोनों अंदर प्रवेश कर गए.

अंदर का दृश्य तो उन्हें पता ही था, अभी टीवी पर देखकर जो आ रहे थे. पर सचिन की ऑंखें उन कैमरों को ढूँढ रही थी. मेहुल समझ गया और उसके कान में बोला, “कैमरे के चक्कर में मत रहना, अगली बार नहीं आ पाओगे फिर. इन्हें पता नहीं है कि मुझे पता है. इसीलिए सावधान रहना.” सचिन ने सिर हिलाकर समझने का संकेत दिया.

मरियम: “आ गए मेरे शेर, हो गयी बात तुम्हारी?”

सचिन: “जी आंटी, अब बताएं हमारे लिए क्या आदेश है?”

मैरी मैडम ने अपनी माँ की जांघों के बीच से अपना सिर निकाला, “पहले मॉम की डबलिंग करो. मैंने गांड भी तैयार कर दी है.”

मेहुल अचम्भे से, “पर पहले क्या केवल गांड नहीं मरवाएँगी?”

मैरी मैडम: “जब दो दो लौड़े उपलब्ध हैं तो एक से क्यों संतुष्ट होना, क्यों?”

मेहुल: “जी, आप सही कहती हैं. तो फिर हमारे लंड कौन तैयार करेगा?”

मैरी मैडम: “मॉम, आपको गांड किससे मरवानी है?”

मरियम: “सचिन. नए लंड का स्वाद लेना है.”

मैरी मैडम: “ठीक है तो फिर मैं इसके लंड को तैयार करती हूँ आप मेहुल को सम्भालो.”

ये कहते हुए दोनों एक एक लंड को अपने मुंह में लेकर चाटने लगीं. कुछ ही समय में जवान लौड़े अपने पूरे तनाव में आ गए. मरियम ने मेहुल को लेटने के लिए कहा और उसके ऊपर आकर दोनों ओर पांव करते हुए उसके लंड को अपनी चूत में डाल लिया. खुली चूत में लंड आसानी से घुस गया. कोई छह सात बार उसपर उठक बैठक करने के बाद मरियम आगे झुक गई. और सचिन को उसकी गांड का छेद दिखने लगा. मैडम मैरी ने उसमे बहुत मन से जैल लगाया था, और उसके लंड को जाने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए थी.

मैडम मैरी: “मॉम, गेट रेडी, तुम्हारी डबल चुदाई का समय आ गया.”

मरियम: “कितने दिनों के बाद ये सुख मिलगा. और सुनो तुम दोनों, अच्छे से चोदना, प्यार व्यार के लिए नहीं चुदवाती हूँ तुम सबसे. हड्डियां हिल जानी चाहिए आज तो. और चिंता न करना, मुझमें सब सहन करने की शक्ति है. अब पेलो मुझे.”

सचिन को अब किसी और आमंत्रण की आवश्यकता नहीं थी. उसने अपने लंड को मरियम की गांड पर रखऔर दबाते हुए लंड के टोपे को अंदर कर दिया. मरियम चिहुंक पड़ी, और अपने आप को आश्वस्त कर रही थी कि सब ठीक होगा कि सचिन ने एक लम्बे धक्के के साथ पूरा लौड़ा अंदर पेल दिया. मरियम की खुली गांड भी इस आक्रमण से दहल गई. उसे लगा जैसे उसकी गांड में आग लग गई हो.

लंड जब अच्छी तरह से गांड में जम गया तो मेहुल सचिन के सिखाये अनुसार अपने लंड से चूत की चुदाई करने लगा. दस धक्कों के बाद वो रुका और इस बार सचिन ने गांड की चुदाई की. दोनों ने ये क्रम सात आठ बार दोहराया और फिर इस ताल को बदल दिया. अब दोनों एक साथ लौड़े अंदर बाहर चलने लगे. पर अभी गति सामान्य ही रखी थी. मरियम ने ऐसा सुख पहले कभी अनुभव नहीं किया था. उसने पहले जब डबल चुदाई की भी थी तो लंड सामान्य नाम के ही थे. ऐसे मोटे और लम्बे लौडों के साथ उसका पहला अनुभव था. और वो इसका पूरा आनंद ले रही थी.

“फाड़ो मेरी चूत, फाड़ो मेरी गांड. चोदो मुझे, फक मी, फक मी , फक मिइइइइइइइइ.”

सचिन और मेहुल ने अब अपनी गति तेज कर दी और उस चुड़क्कड़ बूढी पर दोनों ओर से हमले तेज कर दिए. कुछ समय तक तो वो अपनी लय रख पाए फिर ये ले टूट गई और दोनों अपनी लय में मरियम को चोदने लगे. ये मरियम के लिए बहुत दर्दनाक हो गया क्योंकि उसका शरीर इस प्रकार के अत्याचार के लिए अभ्यस्त नहीं था. पर बुढ़िया थी दमदार और उसने हार न मानकर उन दोनों को उत्साहित करने के लिए चीखना बंद नहीं किया. मैडम मैरी भी अपनी प्रतिक्रिया में उन्हें उकसा रही थी.

“या बॉयज, फक द शिट आउट ऑफ़ हर. फक हर, फक हर गुड़. कम ऑन, फक हर फ़ास्ट, फक हर हार्ड.”

मेहुल और सचिन अब एक दूसरे को भूलकर मरियम की चूत और गांड का कीमा बनाने में जुट गए. मरियम जो आयु के कारण कम झड़ती थी, आज उस अवरोध को तोड़ते हुए रस की धार बहा रही थी. उसके शरीर में अब अकड़न होने लगी थी. बूढ़ा शरीर अब थकने लगा था. उसकी चूत ने रक्षा स्वरूप अंतिम अवसाद क्या और ये इतना तीव्र था कि मरियम चीखकर ढह गई. उधर मेहुल और सचिन भी अब और नहीं रुक सकते थे. पहले सचिन ने अपना गाढ़ा द्रव्य मरियम की गांड में छोड़ा तो मेहुल भी लगभग उसी समय अपने रस से मरियम की चूत सींचने लगा.

कुछ देर रुकने के बाद सचिन ने अपना लंड को फटी हुई गांड से बाहर निकाला और एक ओर बैठ गया. मैडम मैरी ने तुरंत उठकर उसके गंदे और गीले लंड को चाटकर चमका दिया. मरियम अब तक मेहुल के लंड से अपने आप को अलग कर चुकी थी. मेहुल उठा तो उसने बेसुध मरियम को देखा जिसके होंठों पर एक असीम आनंद और तृप्ति की मुस्कान थी. वो भी बैठ गया और मैडम मैरी ने सचिन के लंड पर अपना कर्तव्य निभाकर उसके लंड को भी चाटकर चमका दिया. सचिन और मेहुल वहीँ बैठे आसन में ही बिस्तर पर लेट गए.

“मॉम, लगता है तुमने इन दोनों की बैटरी पूरी डिस्चार्ज कर दी.” ये कहते हुए मैडम मैरी ने अपने आप को अपनी माँ की जांघों के बीच स्थापित किया और अपनी मुंह और जीभ से उनके दोनों छेदों से जीवन के अमूल्य रस को ग्रहण कर लिया. फिर उन्होंने उठकर अपनी माँ के होंठ चूमते हुए कुछ अमृत पान उन्हें भी कराया.

“जवान लड़के है, अभी फिर खड़े हो जायेंगे. और तेरी तो माँ चोद देंगे.”

“हाँ हाँ, जैसे अभी तक किसी और की चोद रहे थे.” मैडम मैरी ने भी हंसकर उत्तर दिया. इस बात पर सब लोग ठहाका मारकर खिलखिला उठे.

मेहुल: “मैडम, हम बियर लेकर आते है. बहुत प्यास लगी है.”

मैडम मैरी: “ओके. हमारे लिए भी ले आना.”

मेहुल और सचिन किचन में गए और बियर लेकर लौटने लगे.

मेहुल: “मैडम की गांड ज्यादा टाइट है, उसे ऐसे छोड़ेंगे तो छिल सकती है.”

सचिन: “नहीं. इतना जैल उन्होंने डाला है कि छिलेगी तो नहीं. पर देखते हैं उन्हें क्या पसंद है.”

कमरे में जाने के पहले सचिन ने उस दूसरे कमरे की ओर संकेत किया. मेहुल उसके साथ गया और दरवाजे से उन दोनों पुरुषों को देखने लगा. दोनों बैठे हुए कुछ पी रहे थे और टीवी पर अगले प्रकरण की प्रतीक्षा कर रहे थे. मेहुल और सचिन लौटकर मैडम के कमरे में चले गए. दोनों ने बियर बाँटी और बैठकर पीने लगे.

मैडम मैरी: “अगर तुम रमोना को बताओगे तो वो अवश्य मेहुल से चुदवाने के लिए कहेगी.”

सचिन: “मुझे नहीं लगता कि मेहुल को इसमें कोई आपत्ति होगी. मैडम, आपको कैसे चुदवाना पसंद है?”

मैडम मैरी: “पहले तो मैं मॉम के ही समान सोच रही थी पर मुझे लगता है कि आज थोड़ा सामान्य ही रहे तो ठीक है. इतने बड़े लौडों से एक साथ कभी चुदाई की नहीं है. और मॉम की बात अलग है, पर मुझे इतनी भयंकर चुदाई से डर लग रहा है.”

मेहुल: “आप चिंता न करें, आपको जैसी चाहिए, हम वैसी ही चुदाई करेंगे.”

बियर समाप्त करने के बाद फिर से दोनों के लंड चाटकर तैयार किये गए और इस बार सचिन लेते और मैडम मैरी ने उसकी सवारी गांठी. और गांड की सेवा का कार्य मेहुल ने संभाला.

और एक नया घमासान युद्ध उस कमरे में फिर से छिड़ गया.

क्रमशः
 
मिश्रण २.१

भाग A1

************

समुदाय का मिलन समारोह

आज की सुबह :

समुदाय के ये आयोजन शहर के बाहर एक रिसोर्ट में होते थे. कुल मिलकर लगभग सौ लोग होते थे और इसके लिए कोई भी और स्थान उपयुक्त नहीं था. रिसोर्ट के मालिक समुदाय के सदस्य थे और वे सारा आयोजन बहुत गोपनीय रखते थे. जिस समय ये आयोजन होता था रिसोर्ट में समुदाय के सिवाय कोई नहीं होता था. सभी को छुट्टी दे दी जाती थी. सारे सदस्यों के आने के पश्चात् रिसोर्ट को बंद कर दिया जाता था. पूरे रिसोर्ट में CCTV लगे थे और किसी एक परिवार को लॉटरी द्वारा इन्हें देखने के लिए चुना जाता था. परिवार के एक सदस्य को सदैव कण्ट्रोल रूम में कैमरों पर निगरानी रखनी होती थी.

समुदाय की सबसे वरिष्ठ सदस्या जो रिसोर्ट मालिक की माँ थीं, प्रबंधन समिति की मुखिया थीं. ये कहा जाता है कि इस समुदाय की नींव इन्होने अपने पति के साथ रखी थी. प्रबंधन समिति में केवल वही एकमात्र थीं जिनके पास वीटो था, अर्थात वे किसी भी निर्णय को नकार सकती थीं, हालाँकि अकेले निर्णय लेने का अधिकार उन्हें भी नहीं था. प्रबंधन समिति के अन्य चार सदस्यों में दो पुरुष और दो महिलाएं थीं. कोई भी सदस्य एक परिवार से नहीं था. प्रति वर्ष अन्य चार सदस्य नए चुने जाते थे और इसके लिए भी एक निर्धारित पद्दति बनाई हुई थी. ये समुदाय का १२वां वर्ष था और आज तक इसे छोड़कर कोई भी नहीं गया था. समुदाय में विवाह अंदर ही करने का प्रचलन था, हालाँकि अगर बाहर विवाह होता था तो परिवार को एक वर्ष के लिए निष्काषित किया जाता था जिससे वे नए वर या वधु को अपने रंग में ढाल सकें. अगर वे इसमें सफल होते थे तो एक वर्ष के बाद वे समुदाय में लौट सकते थे. और जैसा कि बताया गया है, आज तक किसी को ये समुदाय छोड़ना नहीं पड़ा था.

प्रबंधन समिति की चर्चा प्रारम्भ हो चुकी थी. आर्थिक स्थिति को जांचने के पश्चात समुदाय की सदस्यता शुल्क में २०% की बढ़ोत्तरी का निर्णय हुआ. ये शुल्क प्रति सदस्य होता था, और स्त्रियों को इसमें १०% की छूट दी जाती थी. इसके बाद उन प्रस्तावों पर विचार किया गया जिसमें सदस्य अपने पुत्र या पुत्री को अगले महीने सम्मिलित करने के इच्छुक थे. इस बार कुल तीन नए प्रस्ताव थे. तीनों परिवार के सदस्यों को बुलाया गया और उनसे इस बात की पुष्टि की गयी कि उनके घर का एक और सदस्य सम्मिलित हो रहा है. जब उनके प्रस्ताव स्वीकार हो गए तो उनसे नए आने वाले सदस्य का शुल्क ले लिया गया. उन्हें बधाई देकर, आगे के कार्यक्रम के लिए सभा चलती रही.

एक नए सदस्य परिवार का आज परिचय दिया जाना था. और इस समय तक प्रबंधन समिति के पांच सदस्यों और उस परिवार के प्रायोजक के सिवाय किसी को भी इनके बारे में कुछ भी नहीं पता था. यहाँ तक कि सदस्यों के परिवार भी इस नए परिवार के बारे में नहीं जानते थे. ये बताया गया कि परिवार के छह सदस्य रिसोर्ट में पहुँच चुके थे और वे अपने उद्घाटन के लिए उत्सुक थे.

अन्य कई और विषयों पर चर्चा करने के बाद सभा समाप्त हुई. बाहर देखा तो बहुत सारे समुदाय के लोग आ चुके थे और लॉन में खड़े होकर चाय या जूस पी रहे थे. समुदाय के आयोजनों में शराब पर कठोर पाबन्दी थी. आयोजन १२ बजे प्रारम्भ होता था और १.३० पर खाने का समय होता था. चूँकि अभी समय शेष था तो पांचों आगे बढ़कर अन्य सदस्यों से मिलने में व्यस्त हो गए. कुछ देर में ११.३० बजने को आये और सभी लोग सभागृह में चले गए.

पहले सभी लोगों ने जाकर समुदाय की पोषक पहनी, जो एक चोगा और जिसे केवल एक डोर से बंधा हुआ था. ये रेशम के धागे से बने हुए थे और पुरुषों के गाउन नीले और स्त्रियों के लाल रंग के थे. अन्य किसी भी प्रकार के वस्त्र या आभूषण की अनुमति नहीं थी. स्त्रियां नाक और कान के आभूषण पहन सकती थीं, और कोई भी आभूषण, घडी, मोबाइल इत्यादि अपने लॉकर में ही छोड़ना था. गाउन में कोई जेब नहीं थी. वस्त्र बदलने के पश्चात् सभी लोग सभागृह में प्रविष्ट हो गए.

सभागृह में प्रवेश करने के बाद सभी दरवाजे बंद कर दिए गए, और रिसोर्ट में लगे कैमरों से ये स्थापित किया गया कि समुदाय के सिवाय वहां कोई और नहीं है. जिस परिवार का दायित्व कैमरों की निगरानी का था उस परिवार के लड़के ने, जो उनमे सबसे छोटा था पहले मोर्चा संभाला. इसके बाद सभी लोग अपने परिवार के साथ ही बैठ गए. प्रबंधन समिति के सदस्य सामने बने स्टेज पर एक ओर जाकर बैठे. आज उस स्टेज के दो छोर पर दो पलंग लगे हुए थे जो नए परिवार के सदस्यों के लिए थे. इस कमरे के पलंग केवल छह इंच ऊंचे थे, यानि बहुत ही कम ऊंचाई के थे. समय के साथ समुदाय ने सामान्य पलंग बदल कर उन्हें छोटा कर दिया था.

समिति की मुखिया श्रीमती चड्ढा खड़ी हुईं और माइक पकड़ लिया. श्रीमती मधुलिका चड्ढा (मधु) इस समय ६५ वर्ष की आयु पर कर चुकी थीं पर उनके चेहरे की कांति और शरीर का स्वरूप आज भी लोगों को आकर्षित करता था. उनके पति, बेटा, बहू अपने बच्चों के साथ नियत स्थान पर बैठे थे.

मधु: “साथियों आज हम फिर अपने मासिक समारोह के लिए एकत्रित हुए है. आप सबका स्वागत है.”

सभी ने तालियां बजाकर उनका उत्तर दिया.

“मुझे इस घोषणा करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि हमारे समुदाय में एक और विवाह तय हुआ है. मैं चाहूंगी कि भावी पति और पत्नी सामने आएं और अपने इस सम्बन्ध के लिए आप सबका आशीर्वाद लें.” एक लड़का और एक लड़की निकल कर आये और स्टेज पर खड़े हो गए.

“जैसा कि हमारा प्रचलन है, हम सामाजिक विवाह को एक औपचारिकता मानते हैं. हम प्रबंधन समिति के सदस्य इन्हें आज ही विवाह सूत्र में बांध रहे हैं. इसके बाद सामाजिक विवाह अपने समय से होगा, पर हमारी दृष्टि में ये पति-पत्नी माने जायेंगे. इनके माता-पिता से भी यहाँ आने की विनती है.”

दोनों के माता पिता भी आकर अपनी संतान के साथ खड़े हो गए. इसके बाद समिति के अन्य चार सदस्य मधु जी के साथ खड़े हो गए. लड़की के पिता ने अपनी बेटी के शरीर के चोगे की डोर खींची और उसके चोगे को निकाल कर उसकी माँ को दे दिया. उधर लड़के की माँ ने उसका चोगा निकाला और उसके पिता को दे दिया. भावी वर वधू सबके सामने खड़े हो गए. लड़के की माँ ने फिर उसका चोगा लड़की की माँ को सौंप दिया. वहीँ लड़की के पिता ने उसका चोगा लड़के के पिता को दिया.

“समुदाय के इस प्रतीक के एक परिवार से दूसरे परिवार में देने से अब ये परिवार एक हो गए हैं. वधू की सभी खुशियों और इच्छाओं का उत्तरदायित्व अब वर के परिवार का है.”

वर-वधू ने अपने माता-पिता और फिर पांचों समिति के सदस्यों का आशीर्वाद लिया.

मधु जी: “अब इनका सामाजिक रूप से विवाह २ महीने बाद है. समाज के नियमों के अनुसार ये तब तक साथ नहीं रह सकते और जैसा कि हमारी परम्परा है, समुदाय अपने व्यय पर इन्हें एक सप्ताह के लिए बाहर भेज रहा है. अब आप इन दोनों परिवारों के एकीकरण के लिए इन्हें बधाई दें. वर और वधू आयोजन के समापन के पश्चात् आप सबको एक साथ विदा करेंगे.”

ये कहकर मधुजी ने कार्यक्रम के इस चरण का समापन किया.

मधुजी: “मेरे प्यारे साथियों, अब अगले चरण के लिए जैसा आप जानते हैं, आपको अपने परिवार को छोड़कर किसी अन्य के साथ बैठना है. इसके लिए हमारी पर्चियां बनी हुई हैं. पर्चियों पर स्त्रियों के नाम हैं, जैसा आप जानते हैं, अगर पर्ची आपके ही परिवार के सदस्य की होगी तो अंत में आप उसे बक्से में डालकर नई पर्ची निकाल सकते हैं. अगर ऐसा होगा तो आपको उस कोने में जाकर खड़ा होना होगा. हर स्त्री की पर्ची पर एक पलंग का नंबर है, पर्ची निकलने के बाद उन्हें अपने साथी के साथ उस निर्धारित पलंग पर जाना है. क्योंकि आज मिलन में पुरुष अधिक हैं तो उनके साथी का निर्णय बाद में एक लॉटरी से होगा. ”

इसके बाद उन्होंने एक लड़के को बुलाया और उसे पर्चियों से भरा एक कांच का बक्सा दिया. साथ में एक लड़की भी थी जो एक खाली कांच का बक्सा लिए हुए थी. इस बक्से में पढ़ने के पश्चात् स्त्रियों ने पर्ची लौटानी थी.

लड़के ने सबसे पहले समिति के पुरुष सदस्यों को अपनी पर्ची निकालने का आग्रह किया. पर्ची पर नाम देखकर वे अपनी साथी स्त्री के पास गए और निर्धारित स्थान पर बैठ गए. लड़के ने लगभग दस मिनट में सभी पर्चियां बाँट दीं. पर अभी भी ६ पुरुष शेष थे जिन्हें कोई साथी नहीं मिला था. और ४ पुरुष ऐसे थे जिन्हें उनके ही परिवार की सदस्य मिली थी. ये दस पुरुष एक ओर खड़े हो गए. चारों पर्चियां बक्से में लौटा दी गयीं और पहले उन ६ पुरुषों को निकालने के लिए दी गयीं. इस बार सबको सही साथी मिले और वे अपने साथी के साथ निर्धारित बेड पर बैठ गए. लड़की के हाथ के बक्से में अब सारी पर्चियाँ थीं और लड़के के हाथ का बक्सा अब खाली था.

कुल आठ पुरुष (बक्से वाले लड़के और निगरानी पर लगे को मिलाकर) बिना साथी के थे. लड़की ने सबसे पहले लड़के की और बक्सा बढ़ाया. यही प्रक्रिया उसने उपस्थित अन्य पांच पुरुषों के साथ भी की. छटवें पुरुष को लड़की ने अपनी पर्ची सौंप दी. फिर उसने निगरानी पर लगे लड़के के लिए एक पर्ची निकाली और उसकी घोषणा कर दी. इसके बाद उसने अपनी पर्ची को बक्से में डाला और अपने साथी के साथ अपन बेड पर चली गई. इस पूरे आयोजन में लगभग ३० मिनट निकल गए थे.

इस पूरी गतिविधि पर छह जोड़े ऑंखें गढ़ाकर देख रही थीं. ये वो परिवार था जिसे आज सम्मिलित किया जाना था. वो पूरे आयोजन के सञ्चालन से बहुत प्रभावित हुए थे. और अब समय था उनके स्टेज पर बुलाये जाने का. मधुजी, जो स्वयं एक पलंग पर बैठी हुई थीं खड़ी हो गयीं और प्रबंधन समिति के सदस्यों के साथ स्टेज पर लौट गयीं.

“अब आप सबको अपने साथी मिल चुके हैं. आशा है की आप सब लगे हुए बेड पर सुखद अनुभव कर रहे होंगे. मैं देख रही हूँ आज की उन सौभाग्यशाली महिलाओं को जिन्हें आज दो दो पुरुष साथियों का साथ प्राप्त हुआ है. मुझे विश्वास है कि इन सभी को आनंद आएगा. अब हम अपने अगले चरण के लिए अग्रसर होंगे. आज का दोपहर का खाना आधे घंटे देर से होगा, क्योंकि आज एक विवाह संपन्न करने और अब एक नए परिवार को परिचित करते हुए उन्हें समुदाय में सम्मिलित करने के कारण समय अधिक व्यतीत होगा. पर मुझे नहीं लगता कि किसी को खाने की इतनी तीव्र इच्छा होगी जब पकवान आपके साथ होगें.” इस बात पर सब खुल के हँसे और कुछ लोगों ने ताली भी बजाई।

“अब इस दूसरे चरण की समाप्ति के साथ हम आपको अपने से आज जुड़ने वाले एक नए परिवार से मिलवाते हैं. मैं समझती हूँ कि आपमें से कुछ उनके साथ के लिए उत्सुक होंगे.” ये कहते हुए मधुजी ने सभी परिवारजनों का बिना नाम लिए हुए परिचय कराया.

सभी लोग अपने स्थान पर खड़े हो गए स्वागत के लिए.

“तो आइये मिलते हैं हमारे समुदाय के नए सदस्यों से: राणा परिवार”

सभी लोग तालियां बजाने लगे.

सबसे पहले घर के मुखिया श्री जीवन राणा.

जीवन ने प्रवेश किया.

उनके बाद उनके बेटे श्री आशीष राणा.

आशीष स्टेज पर आ गया.

आशीष की पत्नी श्रीमती सुनीति राणा।

सुनीति स्टेज पर आयी.

आशीष और सुनीति की पुत्री अग्रिमा.

अग्रिमा ने स्टेज पर कदम रखे.

आशीष और सुनीति का बड़ा पुत्र असीम.

असीम स्टेज पर आया.

और उनका छोटा पुत्र कुमार.

कुमार भी स्टेज पर आ गया.

सबने समुदाय के चोगे पहने हुए थे. और जैसा कि उन्हें समझाया गया था. सबसे पहले जीवन आगे बढ़ा और उसने अपने चोगे को उतार कर एक ओर पड़ी कुर्सी पर डाल दिया. उसके बाद वो सबकी ओर मुंह करके खड़ा हो गया. अब आशीष आगे बढ़ा और उसने भी अपने चोगे को निकाला और कुर्सी पर डाल दिया और अपने पिता के साथ खड़ा हो गया. सुनीति ने जैसे ही अपना चोगा उतारा तो कई सारी “आह” की आवाज़ें सुनाई दीं. सुनीति ने मुस्कुराते हुए अपने चोगे को कुर्सी पर रखते हुए आशीष के साथ का स्थान ले लिया. इसी प्रकार अग्रिम, असीम और कुमार ने भी किया और अब छह परिवारजन पूरे समुदाय के समक्ष नंगे खड़े हुए थे. औरतों की चूतें पसीजने लगीं थीं तो वहीँ पुरुषों के लौड़े खड़े हो चुके थे.

इसके बाद मधुजी ने आगे बढ़कर सभी को समुदाय की शपथ दिलाई.

मधुजी: “मैं आज आप सबकी ओर से अपने नए सदस्यों का स्वागत करती हूँ. अब जैसा कि हमारा नियम है, ये सभी हमारे समक्ष अपने पारिवारिक सम्भोग का प्रदर्शन करेंगे. मैं जीवन जी से पूछना चाहूंगी कि वो ये किस प्रकार से प्रस्तुत करेंगे. आप किसी भी भाषा में इसे समझा सकते हैं. अर्थात अगर आप सम्भोग के स्थान पर चुदाई शब्द का उपयोग करेंगे तो भी इसे सही माना जायेगा.”

जीवन: “आप सभी को मेरा नमस्कार. मैं अपने परिवार की ओर से आप सबका धन्यवाद करता हूँ जो अपने हमें अपने समुदाय में शामिल होने का अवसर दिया. हम सभी समुदाय के नियमों का पालन करेंगे और किसी भी प्रकार से आपको गलत सिद्ध नहीं होने देंगे. आज मैं और मेरा बेटा मेरी पोती अग्रिमा की चुदाई करेंगे और मेरे दोनों पोते मेरी बहू सुनीति की. मुझे आशा है कि आपको हमारा ये प्रदर्शन आपको आनंदित करेगा.”

ये कहते समय आशीष अग्रिमा को लेकर जीवन के साथ खड़ा हो गया और असीम और कुमार सुनीति के दोनों ओर खड़े हो गए.

पर इन सबसे अलग कुछ लोग सुखद आश्चर्य से उन्हें देख रहे थे. ये कोई और नहीं बल्कि शेट्टी परिवार के पांचों सदस्य थे जो राणा परिवार के पड़ोसी थे और उनके समधी परिवार के चार सदस्य, जो उन सबसे पहले मिले हुए थे.

मधुजी: “और अब हम अपने मिलन समारोह का तीसरा चरण आरम्भ करेंगे. कृपया आनंद लें. हमारे सुमदाय का लक्ष्य यही है. मैं जीवन जी के परिवार को आमंत्रित करूंगी कि वे अपने पारिवारिक प्रेम का प्रदर्शन प्रारम्भ करें.”

जीवन और आशीष अग्रिमा के साथ एक ओर पड़े पलंग की ओर चले गए और सुनीति असीम और कुमार के साथ दूसरी ओर।

मधुजी: “मैं आशा करूंगी कि सभी सदस्य इस प्रदर्शन पर ध्यान देंगे और अपनी भावनाओं पर अंकुश लगाएंगे और स्वयं सम्भोग में लिप्त नहीं होंगे. आप जानते हैं की इस परिवार के ऐसे प्रदर्शन का ये एकमात्र अवसर है और ये हमारे मिलान में कभी दोबारा इस प्रकार से नहीं मिलेंगे.”

सभी सदस्यों ने इस बात पर स्वीकृति की मुहर लगा दी. ये उनके संयम की भी परीक्षा थी. उनके अपने शारीरिक उत्सव में अभी देरी थी पर वे जानते थे कि ये समय और दृष्टान्त उन्हें दोबारा कभी भी देखने को प्राप्त नहीं होगा.

अब तक जीवन और आशीष अग्रिमा को अपनी बाँहों में लेकर चूम रहे थे. जहाँ जीवन उसके होंठों का स्वाद ले रहा था, वहीँ आशीष उसके पीछे से उसकी गर्दन और कानों में अपने होठों से मिश्री घोल रहा था. सुनीति को भी उसके दोनों पुत्र अपने बाहुपाश में बाँधे हुए थे पर उनकी होंठों का लक्ष्य सुनीति के तने हुए स्तन थे. दोनों ने एक एक स्तन को अपने होंठों में लिया हुआ था. वहीँ जहाँ असीम के हाथ सुनीति की चूत को छेड़ रहे थे, कुमार ने अपने हाथ को सुनीति के नितम्बों पर रखा हुआ था और संभवतः उसकी एक या दो उँगलियाँ उसकी गांड को छेड़ रही थीं.

सभी देख रहे थे कि सुनीति पलंग पर बैठी और अपने दोनों बेटों के लौड़े अपने मुंह में लेकर एक एक करके चाटने लगी फिर उसने एक एक करके उन्हें अपने मुंह में लेकर चेतना शुरू किया. दर्शक दीर्घा उस दोनों के लंड देखकर बहुत प्रभावित थी. औरतें अपनी चूतें मसल रही थीं और लड़के सुनीति के हिलते मम्मों में खोये हुए थे. आदमियों का ध्यान दूसरी ओर चल रहे समागम पर था जहाँ अब अग्रिमा भी पलंग पर बैठी अपने नाना और पिता के लौड़े चूस रही थी. जब उन्हें ये निश्चित हो गया की अब लंड अपने सबसे कड़े स्तर पर पहुँच गए हैं तो अग्रिमा पलंग पर लेट गयी. जीवन उसके आगे झुका और उसकी चूत में अपना मुंह डालकर उसे चूसने लगा. दर्शकों को दूरी के कारण अधिक कुछ दिख नहीं रहा था, परन्तु उन्हें इस प्रेमालाप की भावना अधिक प्रिय थी.

सुनीति भी अब लेटी हुई थी और उसकी चूत में कुमार ने अपना मुंह डाला हुआ था.

आशीष ने ऊपर होते हुए अपने लंड को अग्रिमा के मुंह में डाल दिया जिसे वो बहुत प्रेम से चूस रही थी. असीम ने अपने लंड को सुनीति के मुंह में डाला हुआ था और वो अपने हाथों से सुनीति के बड़े बड़े मम्मे दबा रहा था. हालाँकि दर्शक सूक्ष्मता से कुछ भी नहीं देख रहे थे परन्तु उन्हें ये अवश्य चकित कर रहा था कि इस परिवार को इतने लोगों के सामने अपने प्रदर्शन में कोई भी कठिनाई नहीं हो रही थी. कई लोग अपने पहले प्रदर्शन की याद करके अचंभित थे, क्योंकि उन्हें बहुत ही कठिनाई हुई थी.

अब चूँकि समय सीमित था, इसलिए जीवन ने उठकर अपने लंड को अग्रिम की चूत में लगाकर अंदर धकेल दिया. जैसे ही उसका लंड अंदर प्रवेश किया हॉल तालियों की ध्वनि से गूँज उठा. और ये तालियाँ रुक नहीं पायीं क्योंकि कुमार ने भी अपने लंड को सुनीति की योनि में डाल दिया था. कुछ समय पश्चात् तालियॉँ थम गयीं, परन्तु चुदाई अभी प्रारम्भ ही हुई थी.

जीवन और कुमार अपनी समुदाय की अन्य स्त्रियों को अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए अच्छी गति से लम्बी और गहरी चुदाई कर रहे थे. और सच ये था कि उनके इस कौशल पर समुदाय की अधिकतर स्त्रियां अपनी चूत से बहते हुए पानी को रोक नहीं पा रही थीं. परन्तु इसका अर्थ ये नहीं था कि पुरुष वर्ग किसी भी प्रकार की ईर्ष्या से उद्विग्न था. सभी यहाँ पर सम्भोग को प्रेम का पर्याय मानते थे और जहाँ शक्तिशाली चुदाई अच्छी लगती थी, वहीँ प्रेम का सम्भोग ही इस पूरे समुदाय की नींव थी.

कुछ समय के बाद जीवन और आशीष ने अपने स्थान परिवर्तित किये और अब आशीष अपनी बेटी की चुदाई में व्यस्त हो गया वहीँ अग्रिमा अपने नाना के लंड पर से अपनी चूत के रस को चाटने के बाद चूसने लगी. परिवार के सामंजस्य की ये अति थी की जहाँ एक ओर कुछ भी परिवर्तन होता कुछ ही समय में बिना किसी आग्रह के दूसरी ओर वही होता था. इसीलिए असीम अब अपनी मन सुनीति की चुदाई कर रहा था और कुमार सुनीति को उसकी ही चूत के रस से लथपथ लंड चूसने के लिए प्रस्तुत कर रहा था. सुनीति ने उसे अपने मुंह में लेने में एक क्षण की भी देरी नहीं की.

हॉल का वातावरण अत्यंत ही वासनामयी हो चूका था. सभी लोग बहुत कामंतुक हो चुके थे परन्तु सामने चल रहे दृश्य पर से वे आंख नहीं हटा पा रहे थे. कुछ स्त्रियों अपने साथी के लंड अपने हाथ में लेकर हिला अवश्य रही थीं पर उनका पूरा ध्यान सामने चल रही चुदाई पर ही था. चूँकि प्रदर्शनी के लिए मात्र २० मिनट ही नियुक्त थे, एक घंटी ने खिलाडियों को सूचित किया कि अब केवल ५ ही मिनट बचे हैं. परन्तु इस सूचना की आवश्यकता नहीं थी, सुनीति और अग्रिमा की आनंदकारी सिसकारियां हॉल में गूंज रही थीं. और चारों पुरुष भी अपने चार्म पर पहुँच चुके थे. कुछ ही क्षणों में प्रेम के लावे ने सुनीति और अग्रिमा की चूतों को भर दिया। दूसरे छोर पर भी कुमार और जीवन ने अपने रस से दोनों के मुंह भर दिए.

जीवन, आशीष, कुमार और असीम उठकर खड़े हुए और सबके सामने झुकते हुए तालियों का अभिनन्दन किया. अभी दर्शक ये सोच ही रहे थे कि प्रदर्शनी समाप्त हुई है, कि अग्रिमा उठी और उसने जाकर अपनी माँ के मुंह पर अपनी चूत रखते हुए 69 की मुद्रा में सुनीति की चूत में अपना मुंह डाल दिया. माँ बेटी ने एक दूसरे की चूतों से बाह रहे रस को चाटकर और चूसकर ग्रहण किया. हॉल में तालियां अब रुक नहीं रही थीं. जब अग्रिमा ने अपने चेहरे को ऊपर किया तो सभी उसके चेहरे पर चमक रहे कामरस को देख पा रहे थे.

इस बार अग्रिमा उठ गयी और उसने झुकते हुए अभिनन्दन किया और उसके पीछे पीछे सुनीति ने भी आकर यही कार्य सम्पन्न किया. इसके बाद सबने अपने चोगे पहने और एक ओर खड़े हो गए.

इसके बाद मधुजी ने घोषणा की, “इसके साथ ही वो सारे कार्यक्रम जो आवश्यक तो हैं पर जिनसे आप सबके मिलन समारोह में रुकावट आती है, समाप्त हुए.”

पूरा हॉल इस टिप्पणी पर हंसने लगा.

“अब हम भोजन के लिए एक घंटे का विराम लेंगे. भोजन सदैव के समान उसी स्थान पर है. मैं प्रबंधन समिति के सदस्यों से आग्रह करूंगी कि वे आगे आएं और हमारे नए परिवार को भोजन के लिए ले चलें.”

भोजन भी एक प्रकार का मिलन समारोह ही था. सभी एक दूसरे के साथ मिल रहे थे. सबसे अधिक उत्सुकता राणा परिवार से मिलने की थी और उनके पास बहुत लोग जमा थे. एक दूसरे से परिचय हो रहा था पर चूँकि फोन या और कुछ भी उपलब्ध नहीं था तो सभी समुदाय की प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका की प्रतीक्षा कर रहे थे, जो समारोह के अंत में मिलती है. इसका प्रकाशन गुप्त रखा जाता था, हालाँकि इसमें ऐसा कुछ भी नहीं होता था जो आपत्तिजनक हो.

पलक झपकते और भोजन समाप्त होने में एक घंटा निकल गया और सभी लौट कर अपने निर्धारित स्थानों पर लौट गए. राणा परिवार भी स्टेज पर अपने पहले वाले स्थान पर पहुँच कर अगले कार्यक्रम की प्रतीक्षा करने लगा. हॉल को लॉक करने के पश्चात् मधुजी ने फिर से माइक संभाला, पर इस बार उनके साथ उनका साथी भी था जो २० २२ वर्ष का लड़का था. घुंघराले बालों और लम्बे चौड़े व्यक्तित्व के उस लड़के की आभा बहुत आकर्षक थी. सुनीति के मुंह में पानी आ गया. परन्तु उसे अभी समुदाय के नियम ठीक से पता नहीं थे और इसीलिए उसने अपनी भावनाओं को संयत किया. और मधुजी की घोषणा सुनने लगी.

मधुजी: “दोस्तों, आज मुझे बहुत प्रसन्नता है कि हमारा ये समुदाय अब २५ सदस्यों को छू चुका है. मैं ये भी बड़े गर्व से कहती हूँ, कि हमारे समुदाय से इन बारह वर्षों में आज तक कोई बाहर नहीं गया है. हम सब परिवार में स्वेच्छिक और बिना सीमा या ईर्ष्या के संबंधों में विश्वास रखते हैं. ये भी प्रसन्नता का विषय है कि आज हमारे दसवें जोड़े का विवाह संपन्न हुआ है. अर्थ ये है कि हमारे बीच में २० परिवार हैं जो अब सम्बन्धी भी बन चुके है. इससे हमारा समुदाय और भी निकट आएगा और आशा है कि हम सब एक दूसरे को इसी प्रकार से प्रेम करते रहेंगे.”

ये कहते हुए मधुजी ने अपने साथ खड़े लड़के की ओर देखकर सर हिलाया और स्वयं माइक पर बोलती रहीं. लड़के ने उनके चोगे की डोर खोली और उसे उतारकर एक ओर रख दिया. लड़के न अपना भी चोगा निकाला और मधुजी के चोगे के साथ रख दिया. सभी स्त्रियां उस कामदेव जैसे मोहक लड़के के देखकर आहें भरने लगीं. लड़का जिसने नाम सिद्धार्थ था मधुजी के पीछे खड़ा होकर उनके स्तन दबा रहा था. उसके पीछे खड़े होने के कारण उसका पूरा शरीर सबको दिख नहीं रहा था, पर जो औरतें उसके साथ समागम कर चुकी थीं वो जानती थीं कि वो एक पारंगत प्रेमी है और उन्हें मधुजी से जलन हो रही थी कि उन्हें आज उसका सामंजस्य प्राप्त हुआ है.

मधुजी के लिए ये नया नहीं था, वे बिना रुके अपनी बात कहे जा रही थीं, और अब उनकी बातें समाजिक परिपेक्ष में अश्लील होने लगी थीं. “मुझे आशा है कि ये समय एक बार चूत चुदवाने और एक बार गांड मरवाने के लिए पर्याप्त होगा. और आप में से कोई भी इस आनंद से वंचित नहीं रहेगा. मैं उन सदस्य महिलाओं को बधाई देती हूँ जिन्हे आज दो पुरुषों का संसर्ग प्राप्त हुआ है. मुझे आशा है कि वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाएंगी और अपनी चूत और गांड दोनों में लौड़े लेकर अपनी शरीर और आत्मा की तृप्ति करेंगी. हमारा ये चरण सदैव के समान सवा घंटे का होगा और इसके बाद ३० मिनट का एक और विराम होगा. तो चलिए अब इस परस्पर प्रेम का आनंद उठायें.”

ये कहते हुए मधुजी ने माइक बंद किया और मुड़कर सिद्दार्थ के बाँहों में लेकर उसे चूम लिया. और ये चुम्बन चलता रहा और एक दूसरे को चूमते हुए वे अपने निर्धारित पलंग पर पहुँच गए. अन्य पलंगों पर भी यही गतिविधि चल रही थी. राणा परिवार जो ऊपर स्टेज पर बैठा था उसे सामने का पूरा सामूहिक चुदाई का दृश्य दिख रहा था. इस सबसे अलग एक महिला निकल कर उस कक्ष में गयी जहां पर निगरानी पर लगा हुआ लड़का CCTV देख रहा था. कमरा बंद करते हुए उसने अपना चोगा निकाला और फिर उस लड़के को अपनी बाँहों में लेकर उसके चोगे को भी अलग कर दिया और उसके लंड को चूसने में व्यस्त हो गयी.

मुख्य हॉल में अब जो दृश्य था वो वासना का तांडव ही था. हर पलंग पर जोड़े एक दूसरे को संतुष्ट करने का प्रयास कर रहे थे. मधुजी की चूत में इस समय उस लड़के का मुंह था और उनके चेहरे के भावों से वो उन्हें सुख देने में उत्तीर्ण होता हुआ प्रतीत हो रहा था. किसी पलंग पर चूत चाटी जा रही थी, तो कहीं पर लंड. कहीं गांड में मुंह डाले हुए आदमी अपनी साथिन को सुख दे रहा था तो कहीं स्त्रियां अपने पुरुष साथी के लंड चूस रही थीं. राणा परिवार ये सब देखते हुए स्वयं भी उत्तेजित हो रहा था. फिर जीवन ने अपना चोगा उतारा और सुनीति के सामने अपने लंड को हिलाया. परिवार के लिए ये संकेत पर्याप्त था. चंद पलों में ही सबके चोगे धूल चाट रहे थे. सुनीति के सामने चार लौड़े झूल रहे थे क्योंकि अग्रिमा तो सामने चल रही कामलीला से अपने आपको पृथक करने में असफल रही थी.

सुजाता के साथ उनकी ही आयु का एक पुरुष था जो उसकी चूत चाटने के बाद अब उसके मुंह में अपने लंड को पेल रहा था. सुजाता अपनी चूत अपने ही हाथों से मसल रही थी. विवेक को आज एक ५६ वर्ष की स्त्री का संसर्ग प्राप्त हुआ था जो उसके लंड पर जान न्योछावर कर रही थी. और उसने चूत से पहले अपनी गांड मरवाने की इच्छा की थी. विवेक को एक भले मानुस होने के कारण इसमें कोई आपत्ति नहीं थी. मोहन जिस स्त्री के साथ था उसकी आयु ४५ वर्ष के निकट थी और वो उन सौभाग्यशाली महिलाओं में थी जिन्हें दो पुरुष साथी लॉटरी में मिले थे. और वो मधुजी के सुझाव अनुसार इसका पूरा लाभ उठा रही थी. जहाँ उसने मोहन के लंड को अपने मुंह में लिया हुआ था वहीँ एक ५० वर्ष का पुरुष उसकी चूत और गांड चाटने में व्यस्त था. इस सज्जन से वो पहले भी कई बार चुद चुकी थी और वो चाटने और गांड मारने के ही इच्छार्थी थे. चूत पर वो कम ही ध्यान देते थे. इसी कारण आज वो अपने आप को दोनों ओर से चुदवाने की इच्छुक थी.

अग्रिमा के ध्यान को न बाँटते हुए सुनीति ने चारों को स्वयं ही संतुष्ट करने का निश्चय किया. उसने जीवन को लिटाते हुए उनके लंड को अपनी चूत में सरकाया और अच्छी सवारी गांठ ली. इस ताल में आने के बाद जब उसे लगा की लंड सही बैठ गया है वो आगे की और झुकी. असीम ऐसी ही स्थिति के लिए अपने आप को एयर किये हुए था और उसने कुमार से बाजी मारते हुए, अपने लंड को सुनीति की गांड में पेल दिया. सुनीति की आनंद भरी कराह निकल गयी. पर उसे सोचने के लिए अधिक समय नहीं मिला क्योंकि इस बार कुमार ने अपने पिता को हराते हुए अपनी माँ के मुंह में लंड पेल दिया. आशीष मन मसोस कर रह गया. पर सुनीति ने उसे पास बुलाया और वो कुमार और आशीष के लंड एक एक करके चूसने लगी. माँ, पत्नी और बहू का ये दायित्व वो बिना किसी कठिनाई के निभा रही थी. जीवन अब उसकी चूत पेल रहा था और असीम गांड. मुंह में दो दो लंड गोचर कर रहे थे. इससे अधिक किसी भी स्त्री को जीवन में और क्या चाहिए भला?

स्मिता के हाथ आज कुछ निराशा हाथ लगी थी. मधुजी के पति उसके साथी थे और ये विदित था कि वे अब इस मिलन में समय निकालने हेतु ही आते थे. वो चुदाई तो करने में सक्षम थे, परन्तु उनमे इतना बल नहीं था कि वे सुनीति या समुदाय की अन्य चुड़क्कड़ औरतों को संतोष कर पाते। इसकी कमी वे चूत और गांड चाटकर पूरी करने का प्रयास करते थे, पर जो औरत लौड़ा खाने के लिए आयी हो, उसे मुंह से वो सुख नहीं मिलता था. यही कारण था कि मधुजी के बिस्तर में उनका बेटा और बहू और उनके दो लड़के सोते थे. पलंग को इतना बड़ा बनवा लिया था कि सभी आसानी से उसमे समा जाते थे. सप्ताह में एक दो दिन मधुजी समुदाय के किसी लड़के या लड़की को बुला लेती थीं. उनके पति अब अलग कमरे में ही सोते थे. दोनों कमरों को कांच की दीवार से बाँटा था और वो जब तक इच्छा होती चुदाई देखते और सो जाते. उन्हें किसी भी प्रकार की कोई भी आपत्ति नहीं थी और वे अपने जीवन से संतुष्ट थे.

पर स्मिता के लिए ये दिन दुखदायक था. अन्य स्त्रियों का भी यही मत था परन्तु ये कहना नियमों के विरुद्ध था इसीलिए, कोई भी शिकायत नहीं करता था. स्मिता ने आज की रात किसी बहाने मेहुल के साथ बिताने का निश्चय किया. और इस निर्णय से उसकी आत्मा शांत हुई और वो अपनी चूत और गांड पर चलती हुई जीभ का आनंद लेने लगी. फिर उसने अगले आने वाले चरण के बारे में सोचा और एक नयी आशा से उसका मन भर गया.

हर पलंग पर एक नयी कथा लिखी जा रही थी. पर जो स्टेज पर चल रहा था उसका कोई सानी नहीं था.

जो भी स्टेज की ओर देख पा रहा था वो सुनीति की क्षमता से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पा रहा था. इस समय उसके शरीर में दो बड़े और मोटे लौड़े चूत और गांड की तीव्र और व्यग्र चुदाई कर रहे थे, पर वो इसके पश्चात् भी अपने सामने खड़े दो लौडों को अपने मुंह से समाप्ति की ओर लेकर रही थी.

पूरा हॉल इस समय सिसकारियों, आहों और चीखों से गुंजायमान था. मधुजी की चूत में एक बार रस गिराने के बाद सिद्दार्थ अब उनकी गांड की अच्छी गहरी चुदाई कर रहा था. मधुजी जो चुदाई की अग्रणी खिलाड़ी थीं उसका चीख चीख कर उत्साह बढ़ा रही थीं. अन्य सभी पलंग से भी अब इसी प्रकार की वासनामयी चीखों की ध्वनि आ रही थी.

जब इस चरण का समय समाप्त होना था उसके १० मिनट पहले एक घंटी बजी. जो लोग अपने चर्म पर थे उन्होंने अपने कार्य को शीध्र सम्पन्न किया. जो अभी भी दूर थे उन्होंने चुदाई में तीव्रता लाई और अंततः सभी समय समाप्ति पर कम से कम दो बार झड़ चुके थे. महिलाओं ने अपने साथी के लंड को मुंह में लेकर साफ किया और फिर सब अपने चोगे पहन कर बाहर जलपान के लिए निकल गए.

इस बार भी जीवन के परिवार से मिलने कई परिवार पहुंचे पर नवविवाहित जोड़े के दोनों परिवारों के पास भी लगभग उतनी ही भीड़ थी. और इसका एक विशेष कारण था. दूल्हे की माँ हर आने वाले पुरुष के हाथ पर कुछ लिख रही थी. वहीँ दुल्हन के पिता यही कार्य आने वाली स्त्रियों के हाथों पर कर रहे थे. आधा घंटा यूँ ही समाप्त हो गया और सभी लोग अंदर लौट गए.

क्रमशः
 
मिश्रण २.१

भाग B1

************

कामिनी का पूर्ण सदस्यता का इंटरव्यू समापन

कामिनी ने अपने मोबाइल को बंद किया और शून्य में निहारने लगी. दिंची क्लब से फोन आया था और उसकी सदस्यता के लिए उसके बाकी के साक्षात्कार के लिए उसे कल बुलाया था. शून्य में देखती वो उस दिन की यादों में खो गयी जब पार्थ ने उसे सम्पूर्ण स्त्री बनाया था. पर उसे ये भी याद था कि अभी उसकी सदस्यता के निर्धारित होने के लिए उसे अपनी गांड समर्पित करनी शेष थी. गांड की सील तुड़वाने के विचार से उसका शरीर कांप गया. उसने कभी अपनी गांड में ऊँगली भी नहीं डाली थी. और कल उसे पार्थ के उस विशाल लंड को उसके अंदर लेना था. वो डर और रोमांच से व्यथित हो उठी. अचानक उसे कुछ याद आया और वो अपने कमरे में गई. अपनी अलमारी खोलकर एक छुपे हुए छोटे से बक्से को निकाला। उसमे एक गांड का प्लग था. उसके ही साथ उसमे एक तेल की बंद शीशी भी रखी थी.

उसे याद आया कि जब वो उस दिन क्लब से जाने को हुई तो सोनम ने उसे ये बक्सा दिया था. उसके बाद वो उसे बाथरूम में ले गयी थी और अपने साथ लाये एक दूसरे बक्से में से तेल और प्लग निकालकर कामिनी को दिखाया कि उसका प्रयोग कैसे किया जाता है.

“जब भी आपको क्लब से इंटरव्यू समाप्त करने का आमंत्रण मिले, उसी समय से आप इस प्लग को अपनी गांड में डाल लेना. हाँ अगर बाथरूम जाओ, तो निकाल अवश्य देना. अगर एक दिन लगा कर रखोगी तो युम्हारी गांड अभ्यस्त हो जाएगी और थोड़ी खुल जाएगी. अन्यथा पार्थ सर का लंड तो अपने देखा ही है. आपको बहुत कठिनाई होगी. दर्द भी होगा.”

इसके बाद उसने बक्से में से दूसरी लाल रंग की शीशी निकाली। “जब आप क्लब में आ जाएँ तो आपके निर्धरित कक्ष में जाकर आपको इस शीशी से तेल निकालकर उसी प्रकार से प्लग को लगा लेना ही.”

“इस शीशी में क्या है?”

“इसमें दवाई है जिससे की आपकी गांड की मांस-पेशियाँ कुछ समय के लिए ढीली पड़ जाएँगी. इससे आपको बिलकुल भी दर्द नहीं होगा. पर क्यूंकि इसका असर केवल १ घंटे ये उससे कम ही रहता है, इसीलिए आप इसे यहाँ अपने कमरे में हो लगाना.”

कामिनी ने उस बक्से को संभाल के छुपाया हुआ था. और आज उसके प्रयोग का समय आ चूका था. कामिनी उस बक्से के साथ बाथरूम में चली गई.

प्लग को अपनी गांड में डालना कामिनी के लिए सरल नहीं था. उसकी अछूती गांड इस आक्रमण के लिए किसी भी प्रकार से नहीं मान रही थी. दिए गए जैल ने रास्ता तो सरल किया था पर गांड इसे मानने के लिए तैयार नहीं थी. आखिर विचलित कामिनी ने अंतिम शास्त्र का उपयोग किया और जो क्रीम उसे कल के लिए दी गयी थी, उसने उसे ही अपनी गांड में लगाया. और १० मिनट रुकने के बाद प्लग को दोबारा अंदर डालने का प्रयास किया. इस बार उसकी गांड ने कोई प्रतिकार नहीं किया और उस प्लग का मानो अंदर स्वागत किया. एक बार अच्छे से अंदर बैठने के बाद कामिनी ने बची क्रीम को देखा तो उसमे बहुत कम मात्रा थी. उसे विश्वास था कि इस समस्या का हल कल उसे क्लब में मिल जायेगा.

जब तक क्रीम का असर रहा कामिनी को कोई असुविधा नहीं हुई, पर कुछ समय में ही उसे एक अनजाने सुख की अनुभूति हुई. जब वो चलती तो उसकी गांड का प्लग एक घर्षण करता जिसके कारण उसे एक नए सुख की अनुभूति होती. और इसी कारण वो अपने घर में ही न जाने कितनी देर यूँ ही चलती रही. एक खुजली थी जो अब मिटने का नाम नहीं ले रही थी. उसे पता था इस खुजली का उपचार क्या था, और वो था उसकी गांड में पार्थ का लौड़ा. इस विचार मात्र से वो न जाने आज कितनी बार झड़ चुकी थी.

शाम को भोजन के बाद कामिनी ने अपने पति को बताया कि उसे क्लब बुलाया गया है. उसके पति ने उसे अपनी स्वीकृति दी. वो देख रहा था कि वहां जाने के बाद से कामिनी का उसके प्रति व्यव्हार पहले से अच्छा हो गया है और वो इससे संतुष्ट था. हालाँकि उसे ये नहीं भा रहा था कि कामिनी अन्य किसी से संसर्ग कर रही थी परन्तु उसे अपनी कमी पता थी और वो इस एक तथ्य के सिवाय कामिनी से पूर्ण रूप से संतुष्ट था. कामिनी का भी यही विचार था. वो अपने पति से अत्यंत प्रेम करती थी और उसे पता था कि उसके लिए ये निर्णय सरल नहीं था.

कामिनी: “क्या आप आज मेरी चुदाई करेंगे?”

पति: “प्रयास करता हूँ.”

कामिनी: :मैं चाहूंगी कि आज आप मेरी गांड में अपना लंड डालें. मैं नहीं चाहती कि इसमें जाने वाला पहला लंड आपके सिवाय किसी और का हो.”

ये कहते हुए कामिनी ने उसे एक नील रंग की गोली दी, उसके पति ने इस भावनात्मक भेंट को स्वीकार किया, और वो गोली खा ली.

पति: “तुम्हें दर्द तो नहीं होगा न?”

कामिनी: “उन्होंने मुझे कुछ जैल दिए हैं जिसके कारण मेरी गांड खुल गयी है. वैसे भी अगर आप करोगे तो मुझे इस दर्द में भी आनंद आएगा. पर थोड़ा धीरे करियेगा.”

कामिनी के पति ने पहले भी वो गोली कई बार ली थी. समस्या ये नहीं थी कि वो चुदाई नहीं कर पता था, पर ये थी कि वो बहुत ही जल्दी झड़ जाता था और कामिनी प्यासी रह जाती थी.

पति: “तुम जानती हो कि मैं अधिक समय तक नहीं रुक पाता।”

कामिनी: “इसके बारे में मत सोचिए. बल्कि ये सोचिये कि आप अपनी पत्नी का अंतिम कुमारित्व भी भंग कर रहे हैं. जो भी हो, मैं किसी और को ये गांड आपके पहले भेंट नहीं करुँगी.”

कामिनी ये कहते हुए उठी और अपने पति के साथ शयनकक्ष में चली गयी जहाँ उसने अपने और अपने पति के वस्त्र उतारे और घोड़ी के आसन में अपने आपको प्रस्तुत किया.

“ये क्या है?” पति ने उसकी गांड में डले प्लग के बारे में पूछा.

“ये गांड को खोलने का खिलौना है. आप इसे धीरे धीरे बाहर निकाल दीजिये. और फिर अपने लंड से मेरी गांड का उद्घाटन कीजिये.”

पति ने यही किया और उसे ये देखकर अचम्भा हुआ कि अब कामिनी की कुंवारी गांड पूरी खुली हुई थी. उसने अपने लंड को साधा और बिना रुके उसकी गांड को भेद दिया. अपनी जवानी में पति ने बहुत औरतों को चोदा था परन्तु उस समय गांड मरना एक विकृति माना जाता था और उसकी किसी संगिनी ने उसे इस कृत्य के लिए स्वीकृति नहीं दी थी. और उसकी पहली पत्नी तो कारूँ के खजाने के समान अपनी गांड बचाकर रखी रही. पर आज कामिनी ने बिना संकोच के स्वयं ही उसे इस सुख से सक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया था. उसके लंड ने कामिनी की गांड को अबाधित भेद दिया. क्या आनंद था. इतनी कसावट और गर्माहट उसने पहले कभी अनुभव नहीं की थी.

कामिनी भी अब उस जैल के प्रभाव से निकल चुकी थी. हालाँकि उसकी मांस पेशियाँ अभी भी ढीली थीं, परन्तु उसकी संवेदना लौट चुकी थी. उसे अपनी पति के गांड में जाते हुए लंड का अनुभव एकदम नया लगा. और जब उसके पति अपने लंड से उसकी गांड मारने लगा तो उसकी आत्मा और शरीर एक नयी अनुभूति से झूम उठे. उसके पति के लंड से उसे एक नए ही संसार का दर्शन हो रहा था. इस समय उसके मन में उसके पति को अपने प्यार से विव्हल करना छह रही थी. वो उसे उत्साहित कर रही थी और ये प्रार्थना कर रही थी कि उसके पति को भी इसमें आनंद मिले और वो अधिक देर तक ठहर पाए.

पर चाहने और मिलने में अंतर होता है. जब कामिनी इस नए सुख में अपने आप को डुबा रही थी उसका पति अपने आपको झड़ने से रोकने का असफल प्रयत्न कर रहा था. और अंत में उसके शरीर ने उसे हरा दिया और उसने अपना पानी कामिनी को गांड में डाल दिया. कामिनी का दिल टूट गया, पर उसने इसे दर्शाया नहीं. उसने उठकर अपने पति के लंड को अपने मुंह से साफ किया जिसे उसका पति आश्चर्य से देखता रहा.

“आप तनिक भी विचलित न हों. मैंने आज अपना अंतिम कौमार्य आपको सौंप दिया है, जिसके लिए मुझे बहुत ख़ुशी है. आपका लंड चाहे जहां भी रहा हो, मेरे लिए ये सदैव मेरा प्रिय रहेगा. आज आपने मुझे पूर्ण कर दिया है. और मैं इसके लिए आपकी आभारी हूँ.”

उसका पति उसके इस अनुराग से बहुत ही प्रसन्न हो गया. फिर कामिनी ने अपने पति से कहा कि वो अपने वीर्य को अंदर रखते हुए उसकी गांड को वापिस उस प्लग से सील कर दे. इसके बाद दोनों पति पत्नी एक दूसरे को बाँहों में लेकर सो गए.

अगले दिन अपने पति के जाने के बाद कामिनी भी तैयार हो गयी. १० बजे के आसपास क्लब की कार आयी और कामिनी क्लब के लिए निकल गई. उसकी गांड और दिल में तितलियाँ मचल रही थीं. और उसे पार्थ से मिलने का रोमांच भी था. उसने कामिनी का दिल जीत लिया था. उसके पति के समान नहीं, परन्तु एक अन्य ही स्तर पर, जिसका वो वर्णन नहीं कर सकती थी. ११ बजने के कुछ पहले वे क्लब पहुँच गए. वहां पहुँच कर कामिनी ने रिसेप्शन पर बैठी मंजुला से बात की और उसे अपना बक्सा दिखाया और पूछा कि इसमें से सुन्न करने वाली क्रीम मिल सकती है क्या? मंजुला अंदर गई और लौट कर उसने कामिनी को एक दूसरा बक्सा दिया.

मंजुला: “अलग से इसमें से कुछ भी नहीं मिलता है, पूरा सैट ही मंगवाते हैं हम. आप ये नया साईट भी रख लीजिये.”

कामिनी ने खोला तो देखा तो जैल और क्रीम तो वहीँ थीं, पर इस बक्से में प्लग के स्थान पर एक मोटा और लम्बा नकली लंड था.

मंजुला: “ये भी आपके लिए ही है. आपकी सदस्य्ता के साथ एते हैं. पिछली बार ये समाप्त हो गए थे, इसीलिए नहीं दे पाए थे. इस नए स्टॉक के लंड पिछलों से लम्बे और मोटे हैं. आपको बहुत मजा आएगा.”

ये कहते हुए मंजुला ने कामिनी को उसके कक्ष की कुंजी सौंप दी और कामिनी धड़कते मन और फड़कती गांड को लेकर उस कमरे में चली गयी. अंदर जाकर उसने बाथरूम में कपड़े निकाले और फिर अपनी गांड से प्लग निकालकर क्रीम लगाई और फिर प्लग को दोबारा अंदर दाल दिया. कामिनी को इस बात से अब अचम्भा था कि कल से आज के बीच में उसकी गांड इतनी सरलता से इस प्लग को अंदर ले पा रही थी. और तो और उसके पति ने भी इस गांड का कल बिना किसी कठिनाई के उद्घाटन कर दिया था.

फिर वो बाथरूम में टंगा हुआ गाउन पहन कर बाहर कमरे में पार्थ के आने की राह देखने लगी.

क्रमशः
 
मिश्रण २.१

भाग २

पिछले भाग से आगे

A2 समुदाय का मिलन समारोह

मधुजी ने फिर से माइक संभाला।

“साथियों, मुझे आशा है कि अपने पिछले चरण की चुदाई में आनंद लिया होगा. मुझे तो सिद्दार्थ ने बहुत दबा कर चोदा है और मेरी गांड में अभी भी सुरसुरी हो रही है. जिन भी महिलाओं ने सिद्धार्थ का लौड़ा अपने गांड में नहीं लिया है, मैं उन्हें इस कमी को अति शीघ्र सुधारने का सुझाव देती हूँ.”

“अब जैसा आप सब जानते हैं, अगला चरण खुला चरण है. परन्तु क्योंकि आज हमने एक विवाह संपन्न किया है, इसीलिए दूल्हे की माँ लिपि जी ने एक अनुरोध किया है जिसे हमने स्वीकार किया है. जिन भी साथी पुरुषों के हाथों पर उन्होंने एक अंक लिखा है, वे सभी लिपि जी दूल्हे की माँ, माया जी दुल्हन की माँ और सबसे अंत में रेनू जो दुल्हन है को चोदने के लिए आमंत्रित हैं. मैं राणा परिवार से अनुरोध करुँगी कि वे स्टेज से नीचे आ जाएँ जिससे कि इन तीनों सुंदरियों को वहां आने का अवसर मिले.”

जीवन अपने परिवार के साथ नीचे उतर गया. मधुजी ने दो लड़कों को नीचे से एक पलंग उठाकर स्टेज पर लगाने के लिए कहा और ये कार्य तुरंत ही सम्पन्न हो गया. लिपि, माया और रेनू एक एक पलंग से सम्मुख खड़ी हो गयीं.

“अन्य कार्यक्रम सदैव के समान रहेगा और अब आप में से कोई भी किसी की भी चुदाई करने के लिए उन्मुक्त है. बस ये ध्यान रहे कि वो आपके अपने परिवार का सगा न हो. इस चरण का समय भी सवा घंटा है. और ये आज का आखिरी कार्यक्रम है. तो जिन्होंने लिपि जी से नंबर लिया है वो स्टेज पर जाएँ और अन्य सभी एक दूसरे के साथ मनमाना आनंद उठायें.”

ये कहकर उन्होंने माइक नीचे रखा और जीवन की ओर चल पड़ीं.

जीवन के सामने जाकर उन्होंने अपने चोगे को उतार फेंका और उनकी आँखों में आंखे डालकर पूछा, “जीवन साहब, क्या आपमें इस बुढ़िया की नसें ढीली करने का साहस है.”

जीवन मुस्कुराकर अपने चोगे को निकालते हुए बोला, “इसका निर्णय तो आप ही कर सकती हैं, परन्तु मैं प्रयास करने में पीछे नहीं रहूंगा.” ये कहते हुए उसने मधुजी को अपनी बाँहों में लेकर एक प्रगाढ़ चुंबन दिया.

परिवार के अन्य सदस्य ये देखकर कि वे भी अब अन्य लोगों से मिलन कर सकते हैं तितर बितर हो गए. असीम और कुमार दोनों मध्यम आयु की स्त्रियों को ढूंढ रहे थे, क्योंकि उनके आकलन में वही सबसे अधिक आतुरता से चुदवाती हैं. और उनकी ऑंखें स्मिता से मिलीं जो एक व्यक्ति से बात कर रही थी. स्मिता ने आँखों के माध्यम से उन्हें आमंत्रित किया और वे दोनों उसके समीप पहुँच गए. समीप पहुँच कर दोनों ने स्मिता का अभिवादन किया.

असीम: “हैलो आंटीजी, आपको यहाँ देखकर बहुत ख़ुशी हुई.”

स्मिता:”मुझे भी एक सुखद आश्चर्य हुआ. पर हम यहाँ समय व्यर्थ नहीं कर सकते, हम लोग एक दो दिन में मिलते हैं और आगे की बात वहीँ करेंगे. अभी तो मुझे तुम दोनों से वही उपचार चाहिए जो तुमने सुनीति को दिया था. ठीक है?”

ये कहकर स्मिता ने अपना चोगा निकाल फेंका और असीम और कुमार के लौडों को उनके चोगे के बाहर से ही दबा दिया. उसे इस बात से ख़ुशी मिली के ये दोनों मेहुल से बस कुछ ही कम थे. और इनके लंड से गांड मरवाने के बाद रात में मेहुल का लंड झेलना आसान हो जायेगा. असीम और कुमार को अपने चोगे हटाने में अधिक समय नहीं लगा. स्मिता उन दोनों के लंड एक एक हाथ में पकड़कर निकटतम खाली पलंग पर बैठ गयी और उन्हें चूसने लगी.

असीम के लंड को चूसते हुए उसने कहा, “हम्म्म इसमें तो अभी भी सुनीति की गांड की महक आ रही है.”

असीम कुछ झेंप गया, “मैंने उनकी गांड मारने के बाद लंड धोया नहीं. सॉरी आंटी।”

स्मिता: “कोई बात नहीं,मैं भी जल्दी ही सुनीति को अपनी गांड का स्वाद चखाऊँगी. ये बताओ तुममे से कौन गांड मारेगा?”

असीम बोल उठा: “कुमार. मैंने तो अभी ही मॉम की गांड मारी है. अब इसे अवसर मिलना चाहिए.”

स्मिता: “भाई हो तो ऐसा, कुमार?”

कुमार: “जी, आंटीजी. पर अब क्या हम आपकी चूत और गांड का स्वाद ले लें ?”

स्मिता: “वैसे तो मुझे इसमें आनंद आता.” फिर आसपास देखते हुए कि कोई सुने न, “पर मेरा साथी बस मेरी चूत और गांड की चाटता रहा था पीछे चरण में. तो इसीलिए, मैं तो अब असली चुदाई के लिए अधिक उत्सुक हूँ.”

ये कहकर उसने असीम को पलंग पर धक्का देते हुए लिटाया और उसके लंड पर चढ़कर सवारी कर ली. पूरे लंड को अच्छे से घुसा लेने के बाद उसने कुमार को संकेत दिया कि वो भी अब सवार हो जाये.

श्रेया और स्नेहा एक साथ अपने लिए किसी लंड को ढूंढ रही थीं. उनका ये हर मिलन का नियम सा था. उनकी ऑंखें दो लोगों पर जाकर रुकी। आशीष हर ओर चल रहे दुराचार को विस्मित आँखों से देख रहा था. और उसके कुछ ही दूर पर नव-विवाहिता रेनू के पिता भी किसी को ढूंढ रहे थे. स्नेहा ने श्रेया को कोहनी मारकर उन दोनों की ओर संकेत किया. श्रेया ने तुरंत स्नेहा को रेनू के पिता को पकड़ने के लिए कहा और स्वयं आशीष की ओर चल पड़ी. आशीष ने उसे आते देखा और उसकी आँखों का आश्चर्य और बढ़ गया.

“नमस्ते अंकल, आपको यहाँ देखकर बहुत ख़ुशी हुई. मैं चाहूंगी कि आपका स्वागत मैं और स्नेहा पूरी रीति के अनुसार करें.”

आशीष को कुछ सूझ नहीं रहा था. उसने श्रेया के बढे हाथ को थमा और श्रेया के पीछे एक पलंग पर जाकर ठहर गया.

“बस अब स्नेहा आ जाये तो स्वागत आरम्भ करेंगे.” ये कहते हुए उसने आशीष के चोगे को खोला और उसे नीचे डाल दिया. “लो, ये स्नेहा भी आ गयी.” स्नेहा रेनू के पिता के साथ आ रही थी.

“जैन अंकल, इनसे मिलिए, ये हैं हमारे पडोसी राणा अंकल” श्रेया ने दोनों पुरुषों का परिचय कराया.

“हेलो, अंकित जैन.” रेनू के पिता ने आशीष का हाथ मिलते हुए कहा. उसे इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी कि आशीष इस समय नंगा खड़ा था. हालाँकि आशीष को इस प्रकार से किसी से पहली बार मिलने में झिझक हो रही थी.

“हेलो, मैं आशीष राणा. मुझे भी आपसे मिलकर ख़ुशी हुई. वैसे इस ख़ुशी को ये दोनों प्यारी बहनें और भी बढ़ने वाली हैं. वैसे आप चाहें तो इनके बाद ऊपर स्टेज पर जा सकते हैं. मेरी पत्नी माया आपका स्वागत करेगी, और आपका बिना नंबर के भी नंबर लगा देगी.” अंकित अपने इस मजाक पर हंस पड़ा. पर अंकित यहाँ नहीं रुका. उसने आगे झुकते हुए एक षड्यंत्रकारी स्वर में पूछा, “या आप मेरी बेटी रेनू को चोदना अधिक पसंद करेंगे? अगर ऐसा है तो आपको उसकी सास की अनुमति लेनी होगी. परन्तु वहां भी कोई समस्या नहीं आएगी.”

“अंकित अंकल, आप व्यर्थ में हमारा समय क्यों नष्ट कर रहे हैं. आपके घर तो आज रात भर चुदाई पार्टी है. अभी हमारी ओर ध्यान दीजिये.” स्नेहा ने रुष्ट होकर कहा और अंकित का चोगा निकाल फेंका. श्रेया और स्नेहा ने फिर अपने चोगे भी उतारे और अपने संगमरमरी शरीरों का उन दोनों को प्रदर्शन किया. आशीष के लिए अब ठहरना असंभव था. उसने श्रेया को अपनी बाँहों में जकड कर उसे चूमते हुए बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूत में अपना मुंह डाल दिया. ये तो समुदाय के नियमों का ही प्रभाव था कि सभी स्त्रियां पिछले चरण के पश्चात अपनी चूत और गांड को अच्छे से साफ कर चुकी थीं नहीं तो पता नहीं उसके मुंह में किसका रस जाता. स्नेहा ने अंकित के लंड पर धावा बोला और उसे मुंह में लेकर चाटने में व्यस्त हो गई.

सुजाता बहुत उत्सुक हो रही थी. स्टेज पर काफी पुरुषों के चले जाने से वैसे भी हॉल में कमी हो चुकी थी. और कुछ भाग्यशाली स्त्रियों ने अपने साथी भी पा लिए थे. वो अपने चारों ओर चल रहे वासना के नंगे नाच को केवल देख ही पा रही थी क्योंकि उसे कोई नहीं मिला था. जो उपलब्ध थे उसके साथ से भूख शांत होने के स्थान पर और भड़कने की संभावना अधिक थी. समुदाय की स्त्रियों में कुछ महीनों से एक असहजता सी थी. कुछ पुरुष जो समुदाय की उत्पत्ति के समय पुरुषार्थ में उपयुक्त थे, समय के साथ उनकी ये शक्ति क्षीण हो चुकी थी. इस कारण ये सात पुरुष अपने साथी को संतुष्ट करने में असमर्थ थे. समस्या ये थी कि नियमानुसार किसी भी सदस्य को आने से रोका नहीं जा सकता था. और ये महानुभाव स्वयं रुकने के लिए उत्सुक नहीं थे.

इस बात की चर्चा पिछली प्रबंधन समिति में हुई थी और इस बात को गंभीरता से सोचा गया था. समुदाय के इस नियम को परिवर्तित करने के दूरगामी परिणाम होने के कारण इसे न बदलने का निर्णय हुआ था. परन्तु, एक सदस्य ने समुदाय में प्रवेश की आयु को २० वर्ष से घटाकर १९ वर्ष करने का सुझाव दिया था. गणना करने से ये सामने आया था कि इससे ९ लड़के और ४ लड़कियां प्रवेश के लिए योग्य घोषित की जा सकेंगी. परन्तु ये निर्णय केवल समिति नहीं ले सकती थी. इसी कारण आज समापन पर एक प्रश्नावली सभी अभिवाहकों को दी जा रही थी जिसमे इसमें उनकी सहमति और आपत्ति का लेखन करना था. इसे अगले सप्ताहांत तक समिति के किसी भी सदस्य को सौंपा जाना था जिससे कि समिति अगली चर्चा में इस पर निर्णय ले सके.

पर सुजाता को आज के लिए लौड़े की खोज थी. अंततः उसने स्टेज के नीचे प्रतीक्षा करने का निर्णय लिया. उसके विचार से ऊपर से उतरते किसी जवान लौंडे को वो पकड़कर अपनी प्यास बुझा लेगी. और अगर उसके भाग्य ने साथ दिया तो दो भी मिल सकते हैं. तभी उसके कंधे पर किसी ने हाथ रखा. पीछे मुड़ी तो महक थी और उसके साथ में सिद्दार्थ था (जिसने मधुजी की पहली चुदाई की थी).

“आंटीजी, चलिए, सिद्धार्थ और मैं आपके अकेलेपन को दूर कर देंगे. और अगर मधुजी का सुझाव मानेंगी तो आपकी गांड की खुजली इसका लौड़ा मिटा देगा.” महक उसके हाथ को थामकर सिद्धार्थ के साथ निकट खाली पलंग की ओर ले गयी. सुजाता ने पीछे मुड़कर स्टेज पर चल रहे चुदाई के खेल पर एक दृष्टि डाली और महक के साथ चल पड़ी.

स्टेज पर जिसे देखकर सुजाता मुड़ी थी वो अपने आप में एक वासना का नंगा नाच था. स्टेज पर कई पुरुष खड़े हुए अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे थे. इस समय स्टेज पर दोनों परिवार की बेटियां भी इस सामूहिक सम्भोग में सम्मिलित हो गयी थीं, परन्तु वे चुदाई में शामिल नहीं थीं. उनका कार्य अपने परिवार की चुदती हुई तीनों स्त्रियों की चूत और गांड को साफ सुथरा रखने का था. वे शांति से एक ओर खड़ी हुई थीं. अभी उनके कार्य स्थगित था. इस समय लिपि, माया और रेनू तीनों को तीन तीन आदमी चोद रहे थे. हर एक चूत, गांड और मुंह में लौड़े लेकर चुदवा रही थीं. ऐसा दृश्य समुदाय के इतिहास में पहली बार देखने मिल रहा था और हॉल में उपस्थित सभी लोग बीच बीच में उस ओर अवश्य देख रहे थे.

तीनों की आनंदकारी चीत्कारें हॉल में गूंज रही थीं. ये एक देखने वाली बात थी कि माया और लिपि की ओर लड़के आकर्षित थे जबकि अधेड़ पुरुष रेनू पर अधिक आसक्त थे. अब तक तीनों स्त्रियां न जाने कितने लौड़े निपटा चुकी थीं. और अब फिर रेनू की गांड में पानी छोड़ते हुए एक पुरुष खड़ा हुआ और अपने आधे मुरझाये लंड को झुलाते हुए स्टेज से उतर गया. रेनू की बड़ी बहन जिसका पति नीचे हॉल में किसी की चुदाई कर रहा था आगे बढ़ी और उसने रेनू की उछलती गांड में अपना मुंह डाला और उससे बहता हुआ वीर्य चाट कर साफ किया और अंदर भी सफाई कर दी. रेनू की गांड अगले लौड़े के लिए तैयार थी, परन्तु उसकी बहन ने किसी को भी आगे बढ़ने से रोक दिया. जब रेनू की चूत में अपना रस छोड़कर उसके नीचे का आदमी हटा तब उसकी बहन ने उसकी चूत को भी उसी प्रकार से साफ किया और फिर अगले दो पुरुषों को आमंत्रित किया.

दूसरी और माया की भी गांड में पानी छोड़कर एक लड़का खड़ा हुआ और स्टेज से उतर गया. इस बार दूल्हे की बहन ने सफाई की और फिर उसी प्रकार से चूत की बारी आने पर उसे भी साफ किया और दो और सदस्यों को आमंत्रित कर लिया. यही क्रम वहां पर बेरोकटोक चलता रहा.

स्मिता अब असीम और कुमार से एक साथ चुदवाकर आनंद विभोर हो रही थी. उसकी चूत और गांड में एक एक लंड था और उसे दोनों बहुत जोरदार और शक्ति के साथ चोद रहे थे. स्मिता के मन से आज की रात मेहुल के साथ बिताने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया क्योंकि उसकी वर्तमान की डबल चुदाई उसके तन और मन दोनों को तृप्त कर रही थी.

श्रेया और स्नेहा भी अपने हिस्से की चुदाई में व्यस्त थीं. आशीष और अंकित उनकी भी मस्त चुदाई कर रहे थे. उधर सुजाता की दर्द और आनंद की चीखें निकल नहीं पा रही थीं क्यूंकि महक ने उनके मुंह को अपनी चूत में दबाया हुआ था. सिद्धार्थ के मोटा लम्बा लौड़ा सुजाता की गांड का वही हाल कर रहा था जो मधुजी ने सुझाया था. सुजाता ये सोचकर कि पिछले दिनों में उसकी गांड में ऐसे मोटे तगड़े दो लंड गए हैं कि उसका जीवन सार्थक हो गया था. जीवन ने अपने वचन को पूरा करते हुए जब मधुजी की चूत की गांठें खोल दीं तो उन्होंने लगे हाथ गांड को भी ढीला करने का निश्चय किया.

स्टेज पर चल रहा लरिकर्म भी अब समाप्ति की ओर था और अंतिम टोली चुदाई कर रही थी. समय समाप्ति की घंटी ने सबको चौंका दिया. मधुजी जो इस समय सीधे लेती हुई थीं और जीवन उनकी गांड की कसावट को ढीला कर रहे थे किसी प्रकार दोबारा माइक को पकड़ीं.

गांड मरवाते हुए ये उनके जीवन की पहली घोषणा थी, “मेर्रे साथियोऊं आज की घघोषणा विशेष्ष है क्योंकिकी अभी भीई मेरीइ इ गांड में लंड है. परर्र मैं ईसीई अवस्था में आज के कार्यक्रम्म की समाप्ति कीईई घघ्घोषणा करररती हूँ. आअह”

अन्य जुड़े हुए जोड़े भी धीरे धीरे एक दूसरे से अलग हुए. कुछ समय तक लोग अपने स्थान पर ही बैठे रहे और फिर अपने चोगे पहनते हुए एक एक करके स्नानघर की ओर चल दिए. स्टेज पर दोनों बेटियों ने माया, लिपि और रेनू को सहारा देकर उठाया और उनके चोगे पहनकर उन्हें भी स्नानघर की ओर ले गयीं. स्नान करते हुए लोगों ने अपने परस्पर मिलने के कार्यक्रम तय किया और फिर अपने कपड़े पहनकर नयी प्रकाशित पत्रिका को लिया और बाहर लॉन में चले गए.

लॉन में रेनू और दूल्हे के पिता ने सभी को रात की चुदाई पार्टी का आमंत्रण दिया, परन्तु ऐसा प्रतीत हो रहा था कि कम ही सज्जन और सन्नारियां पहुचेंगी. दोनों समधियों ने विचार विमर्श करने के बाद दो सप्ताह बाद एक और पार्टी का आयोजन करने की घोषणा की क्योंकि नव-विवाहित जोड़ा कल कुछ दिनों के लिए हनीमून पर जा रहा था. इसके बाद कुछ और औपचारिकताओं के पश्चात् सब अपने घरों के लिए निकल पड़े.

B2 कामिनी का पूर्ण सदस्यता का इंटरव्यू समापन

कुछ ही समय बाद कमरे का दरवाजा खुला और पार्थ ने प्रवेश किया. कामिनी की दिल की धड़कन उसे देखकर रुक ही गयी. वो वहीँ जड़वत बैठी रही और पार्थ को अपने ओर बढ़ते हुए देखती रही. पार्थ उसके पास पंहुचा और उसकी ओर मुस्कुरा कर देखने लगा.

“हैलो कामिनी मैडम, आप कैसी हैं?”

“मैं ठीक हूँ. अच्छी हूँ. बहुत अच्छी.”

पार्थ ने अपना हाथ आगे किया और कामिनी ने उसे थामा और पार्थ ने उसे खींचते हुए खड़ा किया. उसके चेहरे पर झूलते हुए बालों की लट को हटाया और उसके होंठों को चूम लिया. कामिनी उसकी बाँहों में खो गयी. पार्थ ने भी उसे अपनी बाँहों में बाँधे रखा. कुछ पलों के बाद कामिनी उसकी बाँहों से अलग हुई. और इस बार उसने पार्थ के होंठों को चूमा और ये चुम्बन और भी गहरा होता गया. पार्थ ने भी उसका साथ दिया और उसके हाथ कामिनी की कमर पर कस गए. उसके स्तन पार्थ के मजबूत सीने में दब रहे थे.

“पार्थ तुमसे दूर रहकर मुझे तुम्हारी बहुत याद आयी.”

“पर अभी इतने दिन तो नहीं हुए.”

“पता नहीं, बस तुम्हारे बिना कुछ खाली खाली सा लग रहा था.”

“कोई बात नहीं, उस खाली स्थान को आज फिर भर देंगे. आप पीने के लिए क्या लेंगी?”

“जो भी तुम लोगे.” कामिनी सच में एक १८ वर्ष की प्रेमाकुल लड़की के समान व्यव्हार कर रही थी.

पार्थ बार से दो बियर ले आया और एक कामिनी को थमा दी. दोनों बियर पीने लगे.

पार्थ को कामिनी को कुछ समझाना था, और उसे लगा कि ये सही समय है.

“कामिनी जी. मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूँ. आप इसे किसी और संदर्भ में नहीं लेना.”

“ओके.”

“हमारा क्लब स्त्रियों को संतुष्टि करने के लिए है. हम किसी भी स्त्री सदस्य को प्रेम की दृष्टि से नहीं देख सकते. इसका मुख्य कारण ईर्ष्या है. आज अगर मैं आपसे प्रेम करने लगूँगा तो देर सवेर आपके मेरे अन्य सदस्य महिलाओं के साथ जाने पर ईर्ष्या होगी. दूसरा, अधिकतर महिलाएं जो अभी विवाहित हैं, जैसे कि आप, और हमारे क्लब की सदस्य हैं, वे अपने परिवार से आज भी उतना ही प्रेम करती हैं. अगर इस प्रकार से वो प्यार के चक्कर में पड़ीं तो न सिर्फ वो अपने परिवार बल्कि हमारे क्लब को भी नष्ट कर सकती है.”

“मैं ये नहीं कह रहा कि हम एक दूसरे से दूर रहें, ऐसा संभव भी नहीं है, परन्तु, आपको अन्य रोमियो के साथ भी इसी प्रकार के आनंद की अनुभूति होगी जो मेरे साथ हुई है. मेरे कहने का अर्थ सरल है. आप यहाँ आनंद लेने के लिए आइये, सम्बन्ध मत बनाइये, यही सबके लिए ठीक होगा.”

“और ऐसा नहीं है कि आप पहली महिला हैं जिनसे मैं ये कह रहा हूँ. अगर पहले दिन मुझे बाहर न जाना पड़ता तो मैं आपको ये बात उस दिन ही बता देता. और शोनाली जी ने ये बात हर रोमियो को भी समझाई है. आशा है आप मेरे कथन को सही मायने में लेंगी.”

कामिनी: “तुम सच कह रहे हो पार्थ. सच तो ये है कि यहाँ से जाने के एक दो दिन बाद से कल तक मैंने तुम्हारे बारे में सोचा ही नहीं था. तो अब वो करें जिसके लिए आज मैं यहाँ आयी हूँ, मेरे इंटरव्यू के लिए.”

“ये हुई न बात.”

“मैंने दी हुई क्रीम लगा ली है. और एक बात और..”

“क्या”

“कल रात मैंने अपने पति से अपनी गांड का उद्घाटन करवा लिया है. मैं नहीं चाहती थी कि मैं ऐसा कुछ भी करूँ जो मैंने उनके साथ नहीं किया है.”

“ये अपने सही किया, और अब आप समझ रही होंगी कि हमारे क्लब में प्रेम के झमेले में पड़ने का कोई अर्थ नहीं है क्योंकि आप अपने पति से ही प्यार करती हैं.”

“ये सच है.”

पार्थ मन ही मन ये सोच रहा था कि उस समय क्या होगा जब कामिनी दो पुरुषों से चुदवाने के लिए तत्पर होगी, या किसी और महिला के साथ लेस्बियन सम्भोग करेगी, क्योंकि क्लब में ये बहुत सामान्य घटनाएं थीं. पर अधिक विचार न करते हुए उसने जो मिल रहा था उसे भोगने का निश्चय किया. उसने बियर एक और रखी और कामिनी का हाथ पकड़ते हुए खड़ा कर दिया. कामिनी के ऊपर उसकी बातों का प्रभाव अवश्य पड़ा था क्योंकि इस बार उसने पार्थ के सीने से न लगकर उसके होंठों को चूम लिया. एक दूसरे को चूमते हुए पार्थ ने कामिनी के गाउन को उसके शरीर से अलग कर दिया. पर क्योंकि वो अभी भी पूरे कपडे पहने हुआ था तो कामिनी ने चुम्बन को तोड़ा और उसकी वस्त्र निकालने लगी.

कुछ ही क्षणों में पार्थ भी कामिनी के समान ही नंगा हो चूका था. उसने कामिनी के नितम्बों को पकड़कर अपनी ओर खींचा और बिना दर्शाये हुए कामिनी की गांड पर हाथ फिराया. उसने गांड से उभरे हुए प्लग को अपने हाथों से छुआ और उसे संतुष्टि हुई कि कामिनी ने उनके निर्देशों का अक्षरतः पालन किया है. दोबारा चुम्बन में संलग्न होते हुए वो धीरे से कामिनी को बिस्तर की ओर ले चला. बिस्तर के पास पहुँच कर उसने कामिनी को बिस्तर पर लिटाया और उसकी चूत में अपना मुंह डालकर उसे चाटने लगा. कामिनी पहले ही उत्तेजित थी और पार्थ के इस उपक्रम ने उसे स्वतः ही स्खलित कर दिया. पार्थ ने उसके रस को पीते हुए उसकी गांड को ऊपर उठाया. और उसके नितम्बों को मसलने लगा.

इसके बाद पार्थ खड़ा हो गया और अपने भव्य लंड को कामिनी के चेहरे के सामने ले गया. कामिनी ने निसंकोच उसे अपने मुंह में लिया और उसे चाटने और चूसने लगी. जब लंड अच्छी तरह से कड़क हो गया तो पार्थ ने उसे मुंह से निकाल लिया. फिर उसने साइड टेबल से जैल की एक ट्यूब निकाली और बिस्तर पर रख ली.

पार्थ: “पहले मैं आपकी चूत की चुदाई करूंगा. और इसके बाद आपकी गांड की.”

कामिनी ने स्वीकृति में अपना सिर हिलाया. और पार्थ ने अपने लंड को कामिनी की चूत पर लगा दिया. वैसे तो वो दूसरी बार किसी भी सदस्या की तीव्र चुदाई करता था, पर उसे पता था कि कामिनी को उस स्तर पर पहुँचने में अभी और कुछ दिन या महीने लग सकते हैं. उसने मन में क्लब के रोमियो को ये निर्देश देने का निर्णय लिया कि वे उसकी आज्ञा के बिना कामिनी की ताबड़तोड़ और तेज चुदाई नहीं करेंगे। ये विचार करते हुए पार्थ प्रेम पूर्वक अपने लंड को कामिनी की कसी चूत में उतारने लगा. उसे कामिनी को अपने पूरे लंड से भरने में कोई ५ मिनट से अधिक लगे. कामिनी ने भी कोई अधीरता नहीं दिखाई और जब पूरा लंड घुस गया तब एक गहरी साँस छोड़कर अपने धैर्य का परिचय दिया.

संभवतः उस क्रीम ने कामिनी की इन्द्रियों को उपयुक्त रूप से शिथिल कर दिया था. पार्थ ये भी जनता था की क्रीम का असर अब तक समाप्त होने लगा होगा और कामिनी को अपनी गांड में संवेदना लौटती हुई अनुभव होगी. वो चाहता था कि कामिनी इस संसर्ग में आनंद प्राप्त करे और आगे के लिए इस प्रकार के सम्भोग के लिए लालायित रहे. क्लब की अधिकतर सदस्याएं जिनकी गांड का उद्घाटन क्लब में ही हुआ था (पार्थ के द्वारा) अब गांड मरवाने के लिए तत्पर रहती थीं. उसके क्लब के रोमियो इसीलिए भी खुश रहते थे कि उन्हें हर गांड में अपने लंड को डालने का सौभाग्य प्राप्त था.

पार्थ को अपना लंड इस समय किसी जलती हुई भट्टी में डला हुआ प्रतीत हो रहा था. उसने कामिनी की गांड को अपने लंड पर कसते हुए अनुभव किया तो वो समझ गया कि क्रीम का असर अब क्षणिक ही है. और इसी विचार के साथ उसने कामिनी की गांड में अपने लंड को हल्के हल्के चलना शुरू किया जिससे कि प्रभाव समापत होने तक कामिनी की गांड थोड़ी खुल जाये और वो इस चुदाई का भरपूर आनंद ले पाए. इस समय उसका पूरा ध्यान कामिनी के आनंद और संतुष्टि पर था. अब तक उसने इतनी अक्षत गांडे को खोला था कि वो इस विद्या का पारखी हो चुका था. इस क्रीम और प्लग के कारण उसे पहली बाधा को दूर करने में बहुत सफलता मिली थी. और जब एक बार उसका लंड अंदर बैठ जाता था तो महिलाओं का रहा सहा विरोध भी समाप्त हो जाता था.

कामिनी को अब अपनी गांड में कुछ मोटी सी वस्तु का अनुभव होने लगा था. ये तो वो भी जानती थी कि पार्थ का लंड अंदर है, पर उसने उसे अंदर प्रवेश करते हुए अनुभव ही नहीं किया था. अब उसे भी प्लग और क्रीम का तात्पर्य समझ आया. संवेदना लौटने पर उसे अपनी गांड में तीव्र जलन हुई. उसने अपनी गांड को उस जलन को दूर करने के लिए कसने का प्रयास किया तो पाया की एक विशाल मांसपिंड उसे इस कार्य में असमर्थ कर रहा है. पार्थ इन सब से अवगत था और उसने अपने लंड की गति कुछ तेज की जिससे कि कामिनी की जलन कम हो सक। कामिनी ने इस नए आगंतुक की अपनी गांड में चल रही यात्रा पर ध्यान दिया और उसकी घटती हुई जलन ने उसे कुछ सांत्वना दी. पार्थ के लंड ने अपनी गति को उतना ही रखा, वो कामिनी की प्रतिक्रिया देख रहा था. अभी तेजी का समय नहीं आया था. ये समय कामिनी को जलन और दर्द से बाहर निकालकर सुख और आनंद की ओर ले जाने का था.

कामिनी को अब अपनी गांड में चलते हुए लंड का पूरा अनुभव हो रहा था. उसकी संवेदनशीलता भी अब लौट चुकी थी और उसे एक अलग ही अनुभूति हो रही थी जो जीवन में उसे कभी नहीं हुई थी. अचानक उसे अपनी गांड में खुजली सी होने लगी. पर मोटे लौड़े के अंदर फंसे होने के कारण वो कुछ भी करने में असमर्थ थी.

पार्थ: “क्या आपकी गांड में खुजली हो रही है?”

कामिनी:” हाँ, पर तुम्हे कैसे पता?”

पार्थ: “अनुभव. आपकी पहली कोरी गांड नहीं है जिसे इस क्रीम लगाने के बाद मैंने मारा हो. मैं जानता हूँ कि अब आप मेरे लंड को अपनी गांड में चलता हुआ अनुभव कर रही हैं. क्या आप अब इस खुजली को दूर करना चाहेंगी?”

कामिनी: “हाँ, पर कैसे?”

पार्थ: “उसकी चिंता आप छोड़िये, मैं हूँ न.”

ये कहते हुए पार्थ ने अपने धक्कों की गति बढ़ा दी और लगभग पूरे लौड़े को बाहर निकालकर कामिनी की गांड में लम्बे और शक्तिशाली धक्कों की बौछार कर दी.”

कामिनी ने ऐसा सुख अभी सपने में भी सोचा नहीं था. शनेः शनैः उसकी गांड में चल रही खुजली ने एक नयी अनुभूति को स्थान दे दिया. और वो आनंद की अधिकता से अचेत सी हो गयी. उसे ये भी पता नहीं लगा कि वो इतना जोर से चिल्ला रही थी की अगर कमरा बंद या साउंड प्रूफ न होता तो सारा क्लब उसकी इस आनंदकारी चीत्कारों को सुन लेता. पार्थ ने अपने पहले के विचार बदल लिए थे. उसे अब ये ज्ञात हो गया कि कामिनी अब ऐसी और चुदाई के लिए लालायित रहेगी और इसका पहला भोग उसे ही लगाने मिला था. वो पूरी शक्ति और सामर्थ्य से इस कसी गांड में अपने लंड से आक्रमण कर रहा था, और कामिनी न जाने किस शक्ति के वशीभूत उसे और अधिक तेज और गहराई से चोदने के लिए प्रेरित कर रही थी.

अचानक ही कामिनी ने एक गगनभेदी चीख के साथ अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया. वो झड़ रही थी और उसके काँपते थरथराते शरीर का अब अपने ऊपर कोई वश नहीं था. ये कामोत्तेजना का चरम था, जिसे पाने की लालसा में मनुष्य अपना जीवन बिता देता है. आज उसने एक ऐसा शीर्ष देखा था जिसे अब वो रोज ढूंढने और पाने की राह पर चलने वाली थी. पार्थ भी अब अपने अंत पर आ चुका था. उसने कामिनी की गांड को अपने लंड के द्वारा खुलते और बाद होते देखा और फिर एक चिंघाड़ के साथ अपना जीवन द्रव्य कामिनी की गांड की भेंट चढ़ा दिया. अपनी गांड में गिरते हुए हुए इस पानी से कामिनी की गांड को एक शांति मिली और कामिनी को एक असीम तृप्ति.

न चाहते हुए भी कामिनी अब उस राह पर निकल पड़ी जहाँ अब उसे हर दिन ऐसी ही चुदाई की लालसा रहेगी. पार्थ भी अब ये समझ गया था कि आज उसने एक ऐसी आग लगाई है जो कभी न बुझने वाली प्यास को जन्म दे चुकी है. आज कामिनी उसके वश में थी. और वो क्लब की एक और चुड़क्कड़ सदस्या बन चुकी थी जो लंड के लिए किसी भी स्तर तक जा सकती थी. पार्थ ने इसे जांचने हेतु अपने लंड को कामिनी की गांड से निकालकर उसके होंठों से स्पर्श किया. कामिनी बिना झिझक उसके लंड को चाटने लगी और पार्थ को एक वासनामयी दृष्टि से देखकर लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. पार्थ संतुष्ट था कि उसके स्तबल में एक और घोड़ी जुड़ गयी है जो उसपर सदा के लिए समर्पित है.

अपने लंड को साफ करवाने के बाद पार्थ ने अपने लंड को बाहर निकाला और बाथरूम में जाकर एक छोटा सा स्नान किया. बाहर निकलने पर उसने कामिनी को बाथरूम के लिए प्रतीक्षा में पाया और कामिनी ने भी अंदर जाकर स्नान किया. बाहर आकर वो सोफे पर वैसे ही नंगी बैठ गयी.

कामिनी: “जीवन में मैंने बहुत कुछ अनुभव खो दिए. पर पिछली बार और आज तुमने मुझे उन सुखों से मिलाया जिनकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. और अब मुझे लगता है कि मुझे वे सारे सुख लेने चाहिए. मैं सेक्स के हर आयाम और हर विकृति का अनुभव करना चाहती हूँ. मुझे आशा है कि इस क्लब में मेरी ये यात्रा जारी रहेगी.”

पार्थ ने उठकर उसके होंठ चूमे और टेबल पर रखे हुए फॉर्म पर कामिनी की सदस्यता को स्वीकृति देखा हस्ताक्षर किया. फिर उसने एक बार कामिनी को अपनी बाँहों में लेकर चूमा और उसे भविष्य के लिए शुभकामनायें देकर बाहर चला गया. कामिनी कुछ देर बैठी हुई अपने आगे के जीवन के बारे में विचार करती रही, फिर उसने भी कपड़े पहने और एक नए भविष्य के लिए उस कमरे से बाहर निकल गयी.

आगे भाग तीन में
 
मिश्रण २.१

भाग ३

************

C1 दिंची क्लब में सिमरन का परितोष

दिंची क्लब के मसाज कक्ष में आज कुछ अलग ही वातावरण था. वैसे यहाँ पर आठ मसाज टेबल लगी रहती थीं, पर आज उन्हें हटा दिया गया था. कमरे में वैसे भी अलग प्रकार के टाइल्स लगे थे जिससे कोई फिसले नहीं और उनके ऊपर रबर के एक इंच मोटी चटाई थी. ये कई भागों में थी जिससे की इसे सरलता से साफ किया जा सके. आज इन चटाइयों के ऊपर एक बड़ा गद्दा था जो कि सामान्य से कोई दो गुना था. और इस पर कृत्रिम चमड़े चढ़ा हुआ था.

सुगन्धित तेल की पिचकारी वाली दसियों शीशियां कमरे में रखी हुई थीं. ये वैसे भी सामान्य मसाज के लिए उपयोग में लाई जाती थीं. ये सिमरन के पारितोष के लिए किया गया और सिमरन को इसके बारे में बताया नहीं गया था. कमरे में क्लब के सभी रोमियो उपस्थित थे पार्थ और निखिल को छोड़कर. उन्हें कोई अलग कार्य था और सिमरन को इसके बारे में आने पर बताया जाना था. ११ बजने को आये थे. इतने में ही एक चमचमाती कार ने क्लब में प्रवेश किया और उसमे से सिमरन उतरी. उसने बहुत सुंदर मेकअप किया हुआ था और इस समय वो अपनी आयु से १० वर्ष कम की प्रतीत हो रही थी. कार के रुकते ही रिसेप्शनिस्ट ने एक घंटी बजाई और दो रोमियो मसाज कक्ष से बाहर आये. जब सिमरन रिसेप्शन पर पहुंची तो मंजुला ने उसका स्वागत किया और उसे बताया कि आज पार्थ और निखिल किसी अन्य कार्य में व्यस्त होने के कारण नहीं आ पाए, पर वो उसे बाद में एक निजी सेवा के लिए वचन देकर गए हैं.

इसके बाद मंजुला ने बताया कि सिमरन के लिए पार्थ ने विशेष प्रबंध किया है और उसे उन दोनों रोमियो के साथ जाने का आग्रह किया. दोनों रोमियो ने एक एक ओर से सिमरन की कमर में हाथ डाला और उसे मसाज कक्ष में ले गए. अंदर का दृश्य देखकर सिमरन रोमांचित हो गयी. इसका अर्थ ये है कि आज तेल से नहाते हुए उसकी चुदाई होनी थी. हालाँकि ये बहुत ही कठिन होता है, क्योंकि फिसलन के कारण सही पकड़ नहीं मिलती, पर उसे विश्वास था कि रोमियो इसमें सक्षम होंगे. उसने अपने महंगे वस्त्रों को एक बार देखा. इतने में एक रोमियो ने उसे स्नान करने और कुछ हैंगर पर कपड़ों को ठीक प्रकार से अलमारी में रखने के लिए कहा.

सिमरन जैसे ही स्नान के लिए बाथरूम में गयी, वहां उपस्थित दो रोमियो ने उसके वस्त्र उतारने में सहायता की और उन्हें बहुत अच्छे से हैंगर में लटका दिया. इसके बाद उन्होंने सिमरन का हाथ पकड़ा और उसे शॉवर में ले गए. पानी को आवश्यकतानुसार गर्म करने के बाद उन्होंने सिमरन को पानी के नीचे लाया. सिमरन ने अपने हाथ से तरल साबुन को उठाना चाहा तो एक हाथ ने उसे रोक दिया.

“आज आपको कुछ भी नहीं करना है, मैडम. आप सिर्फ स्नान का आनंद उठायें, हम दोनों पूर्णतः आपकी सेवा में हैं.”

ये कहते हुए उन्होंने चार बलिष्ठ हाथों से सिमरन के अंग प्रत्यंग पर तरल साबुन लगाया और उसे अच्छे से स्नान कराया. जैसा कि उन्हें आदेश था, उन्होंने चूत और गांड को भी अंदर से भली भांति साफ किया। स्नान के बाद दोनों रोमियो ने उसे स्वयं को तौलिये से पोंछा और फिर उसके कपड़ों के हेंगर के साथ तीनों बाहर आ गए. सिमरन ने तौलिया लपेटा हुआ था परन्तु दोनों रोमियो नग्न ही थे. कमरे में दो अन्य रोमियो ने अब सिमरन का हाथ थामा। सिमरन को ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वो कोई रानी थी और हर कदम पर उसे सेवक सहायता के लिए उपलब्ध थे.

बिछे हुए गद्दे के पास जाकर उन्होंने सिमरन के तौलिये को हटाया और उसे उलटा लेटने के लिए कहा. लेटने के बाद दो रोमियो ने उसकी स्थिति ठीक की, उसके दोनों पैर फैलाये और हाथों को भी मालिश की मुद्रा में रख दिया. उसके बाद उसे अपनी पीठ पर कुछ गुनगुना तरल पदार्थ गिरने का आभास हुआ. और वातावरण में एक मादक सुगंध फ़ैल गयी. फिर यही तरलता उसे अपने हाथों और पैरों में भी अनुभव हुई. और फिर चार हाथ उसके ऊपरी शरीर और चार हाथ उसके निचले शरीर की मालिश करने लगे. इस मालिक ने सिमरन के पोर पोर को आनंदित कर दिया. उसके शरीर का तनाव जैसे हर क्षण कम हो रहा था.

अभी तक ये पूरी मालिश बिना किसी कामुक परिभाषा के चल रही थी. कुछ २० मिनट तक सिमरन की इस ओर की मालिश पूरी हो गयी तो उसे पलटने के लिया कहा गया. पलटने के बाद इस बार उन आठों हाथों उसकी सामने के शरीर की मालिश करने में जुट गए. परन्तु इस बार कुछ अंतर आया जब मालिश समाप्त होने को थी. जब सिमरन इस मालिश के आनंद में अपने आपको भूले हुई थी, उसे अपने स्तनों पर तेल की धार गिरने का आभास हुआ और लगभग उसी समय उसने अपनी चूत पर भी यही अनुभव किया. वो अपनी तंद्रा से जग ही रही थी की दो दो हथेलियों ने उसके एक एक मम्मे को अपनी हथेलियों में लिया और एक अन्यन्त ही कामुक मालिश शुरू की, या यूँ समझो कि उन्हें मसलना शुरू किया.

उसी समय उसने अपनी निचली पीठ के नीचे एक तकिया समान वस्तु को सरकते हुए अनुभव किया. इससे उसकी कमर उठ गई. इसके बाद उसने एक हाथ को अपने नितम्बों के नीचे जाकर गांड को खुजलाते हुए पाया. अब उसकी रही सही तंद्रा भी भंग हो चुकी थी. उसे ज्ञात हो गया कि जिस चुदाई के लिए उसे आमंत्रित किया गया था वो बस अब आरम्भ ही होने वाली है.

उसके वक्ष पर चलते हुए हाथ उसकी चूचियों की गोलाई पर चल रहे थे, पहले एक ओर और फिर कुछ देर बाद दूसरी ओर। रुक रुक कर वे सुकि घुंडियों को भी मसल देते. आरम्भ में घुंडी को बहुत प्यार से मसल रहे थे, पर समय चलते ये कुछ कठोर सी हो चली थी. नीचे की ओर भी उसकी जांघों और नितम्बों की भी अब कठोर मालिश हो रही थी. और इसका ये प्रभाव था कि सिमरन अब कामवासना में डूब चुकी थी. उसने अपनी चूत में कोई नुकीली सी वस्तु को जाते हुए अनुभव किया. इससे पहले कि वो कुछ भी समझ पाती उस वस्तु से एक तरल पदार्थ उसकी चूत में पिचकारी के रूप में प्रविष्ट. हुआ. वो जान गयी कि ये तेल था जिसे अब उसकी चूत में भर दिया गया था.

इसके बाद उसने अपनी चूत में उँगलियों को अंदर जाते अनुभव किया. चूत तेल से इतनी चिकनी हो चुकी थी की उँगलियों को अंदर जाने में कोई कठिनाई नहीं हुई. धीरे धीरे उस रोमियो ने अपनी दो, फिर तीन और फिर चारों उँगलियों को सिमरन की चूत में धकेल दिया और उसकी चुदाई आरम्भ कर दी. साथ खड़े रोमियो में से किसी ने तेल की एक पूरी शीशी खोली और सिमरन के पेट पर उड़ेल दी. तुरंत ही दो और हाथ उसके शरीर पर लगे और उसके पेट की मालिश करने लगे. जिस रोमियो की उँगलियाँ सिमरन की चूत में थीं उसने अपने अंगूठे से भग्नाशे को मसलते हुए चूत की चुदाई अबाधित रखी. उसके बाद उस रोमियो ने अपने हाथ को सिमरन की चूत में से निकाला।

“मैडम असली चुदाई के लिए अब बिलकुल तैयार हैं. और मैं अब इनकी पार्टी का शुभारम्भ कर रहा हूँ.”

तेल से लथपथ होने के कारण आज मौखिक सहवास की संभावना नहीं थी. और इसीलिए सिमरन को आज बस अपने दो ही छिद्रों में सारे उपस्थित लौडों को लेना था. रोमियो की बात सुनकर उसने अपने आपको आगे आने वाले नैसर्गिक सुख की कल्पना में खो दिया. और इसी क्षण में रोमियो ने अपने लंड को उसकी चूत पर रखा और बड़ी ही सरलता से एक ही झटके में घुस गया. तेल की एक धार सिमरन की चूत से निकली और उसने पूरे लौड़े को ग्रस लिया.

सिमरन ने प्यार और वासना भरी आँखों से अपनी चुदाई कर रहे रोमियो की ओर देखा. उसकी मालिश कर रहे तीनों रोमियो खड़े हुए और उनका स्थान तीन अन्य रोमियो ने ले लिए. चुदाई करने वाले रोमियो ने पूरी शक्ति के साथ सिमरन को कुछ पाँच मिनट चोदा और जब उसे लगने लगा कि वो झड़ सकता है, तो उसने अपने लंड को निकाला और एक ओर खड़ा हो गया. सिमरन की चूत के रिक्त स्थान में बिना समय नष्ट किये हुए एक दूसरे रोमियो ने अपना लंड पेल दिया. मालिश वाली टोली में फिर बदलाव हुआ और ५ मिनट के बाद फिर उस रोमियो ने अपने लंड को निकाला और अगले रोमियो के लिए सिमरन की चूत को उपलब्ध करा दिया. अब ये कर्म इसी प्रकार से चलने लगा. एक रोमियो ५ मिनट चोदता, मालिश वाली टोली बदलती और फिर यही क्रम दोहराता.

सिमरन को इतने सारे लंड एक साथ कभी भी प्राप्त नहीं हुए थे. वो अपनी ऊंचाइयों को छूती ही थी कि लंड बदल जाता. और बदलने में जो समय लगता उसमें वो लौट कर अपने शीर्ष से नीचे उतर जाती. उसकी चूत रह रह कर पानी छोड़ देती पर उसे झड़े नहीं दिया जा रहा था. और हर टोली जब मालिश के लिए अगली को स्थान देती तो अगली टोली उसके पूरे शरीर पर तेल की शीशियाँ उड़ेल देती. कमरे में तेल की नदी सी बह रही थी. सिमरन और हर रोमियो इस समय तेल में नहाया हुआ था और उनके शरीर अब फिसल रहे थे. परन्तु रोमियो अपनी चुदाई में कोई कमी नहीं कर रहे थे.

कोई ४० मिनट के बाद जब आठ रोमियो चूत को चोद चुके थे, किसी रोमियो ने ध्यान दिलाया.

“अरे सब चूत ही चोदते रहोगे क्या? मैडम को और भी मजा दे दो.”

ये कहते हुए उसने एक मोटा सा तकिया सिमरन के सिर की ओर रखा और उसे पलटने के लिए कहा. सिमरन फिसलती हुई किसी प्रकार से पलट गयी और उसने उस तकिये का सहारा ले लिया. पर अब तक फिसलन बहुत बढ़ चुकी थी. इसे देखकर एक रोमियो उस तकिये के सामने बैठ गया और उसे अच्छे से पकड़ लिया. सिमरन ने अपनी गांड ऊपर की ओर उठाई और तभी उसे अपनी गांड में एक नुकीली वस्तु के प्रवेश का आभास हुआ. ये तेल की शीशी थी जिसे उसकी गांड में पूरा खाली कर दिया गया. सिमरन को इस स्थिति में कठिनाई हो रही थी क्योंकि उसके घुटने बार बार फिसल रहे थे. ये देखकर एक रोमियो उसके नीचे ९० अंश के कोण पर लेट गया और उसने उसके दोनों घुटनों को अपने हाथों से थाम लिया. अब सिमरन आगे और पीछे दोनों और से मजबूत पकड़ में थी.

सिमरन जब इस स्थिति में तालेबंद हो गयी तो एक रोमियो उसके पीछे गया और उसने अपना लंड सिमरन की गांड में एक ही झटके में पेल दिया. ये तो गांड में भरे तेल का प्रभाव था कि सिमरन को इस आक्रमण से कोई अधिक असहजता नहीं हुई. और फिर से तेल की धार उन दोनों के ऊपर छोड़ दी गयी. परन्तु इस बार ऊपर की मालिश करने की कोई संभावना नहीं थी. परन्तु एक रोमियो सिमरन की गर्दन के पास मालिश करने लगा. क्योंकि सिमरन के सामने पहले ही एक रोमियो था तो एक ओर से मालिश करने में कठिनाई हो रही थी. कुछ देर प्रयास के बाद उसने ये कार्य छोड़ दिया. हर पॉँच मिनट में रोमियो अपना स्थान बदलते रहे. और सिमरन की गांड की अवस्था ऐसी हो गयी थी कि न तो उसे न ही गांड मारने वाले रोमियो को कोई आनंद आ रहा था. जब हर उस रोमियो ने जिसे चूत में अवसर नहीं मिला था गांड मार ली तो एक रोमियो ने, जो संभवतः मुखिया था, कुछ और सुझाया.

“मैडम, मजा आ रहा है, न?”

“बहुत मजा आया. ऐसी चुदाई पहले कभी नहीं हुई मेरी.”

“तो फिर अब आपकी डबलिंग की जाये?”

सिमरन समझ गई कि तात्पर्य क्या हैं और सहर्ष हामी भर दी.

“पर यहाँ पर करना अब संभव नहीं है. सोफे पर करना होगा.”

ये सुनकर दो रोमियो उठे और एक सिंगल सोफे उठा कर ले आये और गद्दे के बीचों बीच रख दिया. एक रोमियो ने झाड़ू लेकर सोफे के सामने के तेल को साफ कर दिया.

मुखिया ने नियम बताया. “जो भी गांड मार चूका है, वो केवल चूत ही चोदेगा। और जिन्होंने गांड नहीं मारी अब उन्हें अवसर दिया जायेगा. जो जिस क्रम में पिछली बार था वही क्रम अब भी रखा जायेगा.”

ये कहकर वो सोफे पर बैठ गया क्योंकि पहले गांड मारने वाला वो स्वयं था. सिमरन का हाथ पकड़ते हुए, जिससे वो फिसल न पड़े, दो रोमियो उसे सोफे पर ले गए और उसने मुखिया के दोनों और पैर करके उसके लंड पर अपनी चूत रखी और गप्प से लंड को अंदर ले लिया. अब जिस रोमियो ने पहले चूत मारी थी उसने अपने लंड को सिमरन की गांड पर रखा और एक ही धक्के में अंदर पेल दिया. इस बार सिमरन की चीख निकल ही गयी. पर अब वो ऐसे दो शक्तिशाली युवकों के बीच में सैंडविच बन चुकी थी कि बाहर आना संभव ही नहीं था.

इसी के साथ दोनों ओर से उसके छेदों में प्रबल प्रहार आरम्भ हो गए. सिमरन की चीखें में कुछ ही समय में पीड़ा के स्थान पर आनंद का वास हो गया. इस बार उसकी चूत न रुकते हुए झड़ने लगी. सिमरन की चीखें और झड़ने का एक अनवरत क्रम अब आरम्भ हो चुका था. पिछली बार के समान इस बार भी हर ५ मिनट में सवार बदल जाते। हर रोमियो अपनी बारी की समाप्ति पर स्नान के लिए चला जाता था. और फिर सिमरन के मुंह के आगे अपना स्थान ले लेता. इस प्रकार से अब सिमरन के तीनों छिद्रों के लगातार एक साथ चुदाई चल रही थी. और सिमरन की घुटी हुई आनंदकारी चीखें अब धीमी पड़ने लगी थीं. उसका मुंह अब सूखने लगा था. पर जब तक सबका नंबर पूरा नहीं होता तब तक उसकी मुक्ति नहीं थी. और सत्य तो ये था कि वो मुक्ति चाहती भी नहीं थी.

परन्तु अब समाप्ति का समय आ चुका था. आश्रय ये था कि एक भी रोमियो अब तक झड़ा नहीं था. कुछ कुछ देर में रुकने के कारण सबके टट्टे अभी भी मालामाल थे. जब अंतिम जोड़ी की बारी आयी तो वे समय से बंधे नहीं थे और इस बार वे सिमरन को तीनों और से बड़ी ही निर्दयता से चोद रहे थे. सिमरन को अपनी गांड में कुछ भरने का आभास हुआ और ये गांड मारने वाले रोमियो का वीर्य था. सिमरन की गांड को इस बड़ी हुई तरलता से कुछ ठंडक मिली. और इसका प्रभाव उसकी चूत पर भी हुआ जो संभवतः अंतिम बार झड़ गयी. उसकी झड़ती हुई चूत में ही चोदने वाले रोमियो ने अपने रस का भी समावेश कर दिया. दोनों लौड़े अभी भी उसकी चूत और गांड मारने में लगे थे. उसके इस दोनों छेदों से अब कामरस उसके धक्कों के साथ बाहर बह रहा था.

गांड मारने वाले रोमियो ने अपने लंड को बाहर खींचा और फिर सिमरन की फटी गांड से बाहर बहते हुए रस को देखते हुए स्नान के लिए चला गया. सिमरन को अब उठाया गया और उसके नीचे वाला रोमियो भी स्नान के लिए चल पड़ा. उनके लौटने पर उन्होंने पाया कि सिमरन को गद्दे पर लिटा दिया गया था और उसके चारों और रोमियो अपने लंड को मुठ मार रहे थे. स्थान की कमी के कारण कुछ अभी भी अलग खड़े हुए थे पर वो भी मुठ लगाने में व्यस्त थे. एक एक करके सभी रोमियो के लौंड़ों पानी की पिचकारियां छोड़ने लगे. उनका मुख्य लक्ष्य सिमरन का मुंह या स्तन थे और इसीलिए थोड़ी धक्का मुक्की भी हो रही थी, पर ये मित्रता पूर्ण थी, सिमरन के चेहरे पर कुछ ही देर में गाढ़े सफेद चिपचिपे तरल वीर्य की परत सी बन गयी.

जब सभी रोमियो झड़ चुके तो उन्होंने सिमरन को इसका परिचय दिया. सिमरन ने अपने चेहरे पर से बहते हुए कामरस को अपने हाथों और उँगलियों से जितना सम्भव हो पाया अपने मुंह में डाल कर पी लिया. वक्ष पर और चेहरे पर बचे हुए वीर्य को अपनी त्वचा पर मल लिया. और शांत होकर उसी स्थान पर लेटी रही. रोमियो भी उसके चारों ओर शांति से खड़े रहे. कुछ १० मिनट के बाद सिमरन ने अपने दोनों हाथ ऊपर किये. दो रोमियो ने उसके हाथों को पकड़ा और उसे खड़ा कर दिया. सिमरन ने सबको उसकी इतनी अच्छी सेवा और चुदाई करने के लिए धन्यवाद दिया और रोमियो की सहायता से बाथरूम में चली गयी. इस बार उसने अकेले ही स्नान करने की इच्छा की, तो उसे छोड़कर रोमियो बाहर निकल गए.

सभी रोमियो अब अपने आपको तौलियों से पोंछ रहे थे. और फिर उन्होंने अलमारी से अपने कपड़े निकालकर पहन लिए. कमरे को सफाई करने वालों के लिए उसी प्रकार से छोड़ दिया गया. सिमरन स्नान करके बाहर आयी और उसने भी अपने वस्त्र पहने. इसके बाद उसने सबको एक बार फिर से धन्यवाद किया और डगमगाते हुए क़दमों से कमरे के बाहर चली गयी. खाना आ चुका था और सबने बहुत ही सामान्य रूप से बैठकर भोजन किया और उसके बाद सभी अपने अपने घरों या अन्य स्थानों के लिए निकल गए.

गाड़ी में बैठकर सिमरन ने पार्थ को फोन पर धन्यवाद किया और फिर अपने घर निकल गयी.

............................
 
मिश्रण २.१

भाग ४

रूचि आहूजा का घर

शो के अगले दिन रूचि ने पार्थ और निखिल को अपने घर आने का निमंत्रण दिया. पर उसने ये भी कहा कि वो अपने साथ दो या तीन और रोमियो भी ले आये. पार्थ ने कोई प्रश्न पूछना उचित नहीं समझा और निखिल को बताया. निखिल ने सुझाव दिया कि अगर पार्थ को कोई आपत्ति न हो तो नितिन को क्यों न ले लें? पार्थ ने स्वीकृति दी और शोनाली से अगले दिन के लिए क्लब के सबसे प्रतिष्ठित तीन रोमियो को सम्पर्क करके उन्हें आमंत्रित करने के लिए कहा.

शोनाली ने एक घंटे बाद पुष्टि की कि तीन रोमियो शुभम, गौरव और कालिया कल के लिए उपलब्ध रहेंगे. कालिया का असली नाम स्टीफन था परन्तु सब उसे प्यार से कालिया ही पुकारते थे. वो यूनिवर्सिटी में एक अफ्रीकी देश का छात्र था और नाम के अनुसार अश्वेत था. परन्तु उसका लंड क्लब के सबसे भारी और मोटे लौडों में गिना जाता था. पार्थ ने रूचि को सूचित कर दिया। रूचि ने उन्हें सुबह ११ बजे आने की आज्ञा दी और बताया कि वो खाने की व्यवस्था कर लेगी और उनमे से सभी अपने आप को ४ बजे तक उपलब्ध रखें. इस संवाद के बाद सभी अपने अन्य कार्यों में व्यस्त हो गए.

अगले दिन निश्चित समय पर पार्थ निखिल और नितिन के साथ रूचि के भाव बंगले पर पहुँच गया. रूचि ने उनका स्वागत किया और उन्हें बैठक में बिठाकर रस पिलाया. कुछ ही देर में शुभम, गौरव और कालिया भी आ गए. उन्हें भी रूचि ने बैठकर रस पिलाया. इसके बाद रूचि उन्हें एक शयनकक्ष में ले गयी.

रूचि: “अपने कपडे उतारकर तुम सब इस कमरे में रख दो. और फिर बाथरूम में जाकर नहाओ, पर अपने आपको पोछना मत.” पार्थ और निखिल ने सिर हिलाया. “बाथरूम के दो दरवाजे हैं, नहाने के बाद दूसरे दरवाजे से मेरे कमरे में आ जाना. और पानी और समय व्यर्थ न करने के लिए तुम सब एक ही साथ नहा लो. वैसे भी ये स्नान सफाई के लिए नहीं है. पार्थ तुम इन्हें बताओ, मैं अपने कमरे में एक एक भेंट के साथ तुम्हें १५ मिनट में मिलती हूँ. इसके पहले आने का प्रयास मत करना क्योंकि मुझे भी स्नान करना है.”

ये कहते हुए रूचि उन्हें कमरे में छोड़कर चली गयी. पार्थ ने रूचि के बारे में सभी को समझाया और बताया की वो उनके लिए कितनी महत्वपूर्ण है. तब तक सभी ने अपने कपड़े उतारकर एक और संभाल कर रख दिए थे. पार्थ ने घडी देखि और कहा कि अभी ४ मिनट और रुकेंगे और फिर स्नान के लिए जायेंगे. इसके बाद सभी ने स्नान किया और ये सुनुश्चित किया कि उनके शरीर से पानी टपकता रहे. फिर उन्होंने दूसरा दरवा खोला और एक एक करके रूचि के शयन कक्ष में प्रवेश किया. और सामने के दृश्य को देखकर वे ठगे से रह गए.

बिस्तर पर दो औरतें एक दूसरे की चूत में मुंह डाले हुए थीं. चेहरा छुपा होने के कारण ये बताना संभव नहीं था कि ये कौन थीं. पर अनुमान से एक तो अवश्य ही रूचि मैडम थीं. पर दूसरी कौन थी?

बाथरूम का दरवाजे के खुलने की ध्वनि से ऊपर वाली स्त्री ने अपना चेहरा ऊपर उठाया.

“आ गए तुम लोग?” ये रूचि मैडम ही थीं. और ये कहते हुए वे नीचे लेटी स्त्री के ऊपर से हटीं और बिस्तर पर बैठ गयीं. उनके नंगे लुभावने शरीर पर सबकी ऑंखें गढ़ गयीं.

“आ गए तुम लोग?” बिस्तर पर लेटी हुई स्त्री ने भी वही प्रश्न दोहराया तो उनका ध्यान वहां गया. और वो सब उस स्त्री को सामंजस्य से देखने लगे. ये भी रूचि मैडम ही थीं. छहों लड़के कभी बैठी हुई रूचि को देखते तो कभी लेटी हुई को. लेटी हुई स्त्री अब बैठ गयी. उन दोनों को एक साथ बैठा देखकर सभी चकित थे. बिलकुल एक रूप, कैसे कोई इन्हें अलग करता होगा?

“मैं रूचि हूँ, और ये शुचि है.” एक ने कहा.

“नहीं नहीं, मैं रूचि हूँ, और ये शुचि है.” दूसरी ने बात काटकर कहा.

फिर दोनों एक साथ एक स्वर में बोलीं, “मैं रूचि हूँ, और ये शुचि है.”

लड़के पागल हो गए. पार्थ ने बात को संभाला.

“हैलो रूचि मैडम, और शुचि मैडम. हम आप दोनों को रूचि मानने के लिए बाध्य हैं. पर अगर आप अवसर दें तो मैं रूचि मैडम को पहचानने का एक प्रयत्न करना चाहूँगा।”

“ओके”

“मैडम मेरा नाम निखिल है.”

उनमे से एक बोल पड़ी, “हैलो निखिल.” जबकि दूसरी शांत रही और पार्थ को गुस्से से देखने लगी.

पार्थ आगे बढ़ा और उसने गुस्सा हुई स्त्री के सामने बैठकर कहा, “रूचि मैडम. आप सच में बहुत सुन्दर हैं. और शुचि मैडम बिलकुल आप जैसी ही हैं.”

रूचि खिलखिला पड़ी.

“अच्छा है, बहुत अच्छा. तुम वैसे हमें अलग नहीं कर सकते थे पर तुमने अपनी बुद्धि से ये सिद्ध किया.”

“जी, क्योंकि आप ही मेरा नाम जानती हैं, शुचि मैडम नहीं. इसीलिए इतना कठिन नहीं था.”

तभी उस कमरे के दूसरी ओर का एक द्वार खुला और उसमे से से एक पानी से भीगी हुई एक अधेड़ महिला ने नंगे ही कमरे में प्रवेश किया.

“क्या हुआ, क्या कोई बता पाया?”

रूचि-शुचि दोनों एक साथ एक स्वर में बोलीं, “हाँ, मॉम पार्थ ने पहचान लिया.”

अब छहों लड़के उस नंगी भीगी औरत को देख रहे थे जिसे देखकर ये पता लगता था की दोनों बहनों की सुंदरता कहाँ से आयी है.

वो औरत आगे बढ़कर बोली, “हैलो बॉयज़, आय ऍम राशि, इनकी मॉम.”

छहों हकलाते हुए बोले, “हैलो, मैडम.”

राशि ने खड़े छहों लड़कों की ओर देखा और उसकी ऑंखें कालिया और उसके लंड पर टिक गयीं. वो आगे बढ़ी और उसने कालिया के लंड को हाथ में लेकर तोला।

“क्या लौड़ा है इसका, रूचि. आज तो मजा ही आ जायेगा.” फिर उसने दूसरे लौडों पर एक दृष्टि डाली और नितिन के लंड को पकड़ा. “ये भी एकदम मस्त लौड़ा है. कहाँ से पकड़ा है तुमने इन घोड़ों को?”

रूचि को अपनी माँ की दूसरों के सामने अनावश्यक गपशप करने की आदत पता थी, इसीलिए उसने असली बात छुपाकर बोला, “मेरी एक सहेली ने इनके बारे में बताया था तो मैंने सोचा कि एक बार हम भी प्रयोग करें.”

“बहुत सही सोचा तुमने, बहुत सही.” ये कहकर उसने नितिन और कालिया के लौडों को पकड़ा और बिस्तर पर जाकर बैठ गयी और पहले कालिया के लंड को चूसने लगी. कुछ देर में उसने अपना ध्यान नितिन की ओर किया. फिर वो एक एक करके दोनों लंड चूसने में व्यस्त हो गयी. अब ये नहीं था कि अन्य सब व्यस्त नहीं थे. पार्थ रूचि की चूत में अपने सिर घुसाए बैठा था. निखिल ने अपने लंड को शुचि के मुंह में लगाया तो शुचि बड़ी प्रसन्नता से उसे मुंह में लेकर चाटने लगी. शुभम का लंड रूचि के हिस्से में आया और वो उसे उतने ही तन्मयता से चूस रही थी जैसे कोई आम चूसता है. गौरव ने शुचि की चूत का लक्ष्य बनाकर उसके अंदर अपना मुंह गाढ़ दिया.

शुचि ने रूचि का उनकी माँ को दिया हुआ उत्तर सुन लिया था और उसे इसका कारण भी समझ आ गया था. अन्यथा रूचि ने उसे सच बात बता दी थी. और इसीलिए वो अब किसी भी प्रकार से इस भेद को खोल नहीं सकती थी. पर उसे जो कहना था वो कहे बिना भी नहीं रह सकती थी.

शुचि: “तुम्हारी सहेली सच में बहुत पारखी है जिसने ऐसे बांके घोड़े अपने अस्तबल में पाले हुए हैं. सालों के लौड़े तो तगड़े हैं ही, पर उन्हें चूत चाटने का भी अच्छा ज्ञान है. मेरी ओर से उसे मेरा धन्यवाद अवश्य करना.”

राशि: “सच में राशि, अगर ये सब चुदाई भी अच्छी करने में सक्षम हुए तो मेरा आशीर्वाद रहेगा तुम्हारी सहेली पर.”

रूचि अपनी इस प्रशंसा से फूली नहीं समा रही थी. पर वो चुप रहने को विवश थी. और इसका बहाना था उसके मुंह में शुभम का लंड जो उसके गले तक जाकर उसकी सफाई कर रहा था. राशि ने कालिया को अपनी चूत चाटने का कार्य दिया और नितिन के लंड पर अपना मुंह साफ करती रही.

जब मुंह के द्वारा लौडों को एकदम सही कड़ा कर दिया तो सबने अपने स्थान बदले. कालिया के लंड को राशि निगल गयी तो नितिन उसकी चूत पर केंद्रित हो गया. पार्थ के लंड को रूचि ने शुचि के मुंह के हवाले लिया क्योंकि वो इसका आनंद ले चुकी थी. शुभम के हिस्से में रूचि की चूत आ गयी. गौरव के लंड को रूचि ने अपने मुंह में लिया और निखिल शुचि की चूत में घुस गया. जवान लड़कों के लौडों को कड़क होने में अधिक समय नहीं लगा.

पार्थ: “मेरे विचार से हमें समय नहीं व्यर्थ करना चाहिए.”

ये सुनकर निखिल, शुभम और नितिन ने अपने हिस्से की चूतों पर लंड लगाए और बड़ी ही तत्परता से दो तीन ही धक्कों में किले में सेंध लगा दी. रूचि इस चुदाई का अनुभव कर चुकी थी फिर भी उसे अपनी चूत की ऐसी भराई से क्षणिक असुविधा सी लगी. पर शुचि की ऑंखें बाहर आ गयीं. अगर उसके मुंह को पार्थ अपने लंड से बंद नहीं किया होता तो वो अवश्य ही चीख पड़ती. पर इस हमले से उसका मुंह अनावश्यक रूप से खुल गया और पार्थ का लंड उसके गले में जाकर फंस गया. उसकी गुं गुं की ध्वनि से पार्थ समझ गया और उसने तुरंत अपने लंड को बाहर निकाल लिया.

शुचि थोड़ा खांसी और फिर संयत होकर बोली. “क्या लंड है साले का चूत में एक मिलीमीटर भी जगह नहीं छोड़ी इसने.”

राशि जो इस समय आनंद के भंवर में थी उसकी बात से एकमत होकर बोली, “सही में. बड़े तगड़े लौड़े लायी है रूचि। मेरी भी चूत पूरी भरी भरी सी लग रही है.”

और ये तब था जब लंड केवल अंदर ही गए थे और चुदाई आरम्भ भी नहीं हुई थी. पर तीनों महिलाओं को ये आभास हो गया था कि वस्तुतः उन्हें अपने जीवन की सबसे संतुष्टि प्रदान करने वाली चुदाई का अनुभव होना निश्चित था.

और ये सुख कुछ समय का नहीं बल्कि आज के दिन कई बार प्राप्त होना निश्चित था. निखिल, शुभम और नितिन ने अपने लंड अब धीमी गति से अंदर बाहर करने लगे थे. इतना आकर्षक और उत्तम अंश की महिलाओं को वो मन भर कर भोगना चाहते थे. उनके नीचे से आनंदकारी सिसकारियाँ निकालती हुई वे उच्च परिवार की धनाढ़्य महिलाएं अब उनसे चुदने के लिए उत्सुक थीं, परन्तु वे अपनी गति और शैली से ही उन्हें चोदने वाले थे. और उन्हें इस प्रकार का अच्छा अनुभव था कि ऐसी महिलाएं चुदते समय कितनी निर्लज्ज हो जाती हैं.

अपनी गति को बढ़ाते हुए वो उन्हें कुछ समय तक यूँ ही चोदते रहे पर ये भी आभास हुआ कि इस आसान में न तो वे स्त्रियां मौखिक सुख को सुचारु रूप से प्राप्त कर पा रही हैं, न ही उनकी चुदाई गहरी और भरपूर हो पा रही है. इस बात को समझते हुए पार्थ ने घोड़ी के आसन का सुझाव दिया जिसमें लंड चूसने में सरलता होती और चूत में भी लौड़े अधिक गहराई तक प्रवेश कर पाते। सुझाव मानने में किसी ने भी आनाकानी नहीं की और पलक झपकते ही इस नई मुद्रा में चुदाई का आरम्भ हो गया. इस बार महिलाओं को अपनी चूत पहले से भी अधिक भरी हुई लगी. और लड़कों में भी एक विजय की भावना आयी.

इस बार लंड चलने की गति पहले से अधिक थी और अधिक दूर तक मार करने वाली मिसाइलों के समान वे भी अधिकतम सीमा तक सामने के लक्ष्य को भेद रहे थे. लौड़े मुंह में भरे होने के कारण अधिक ध्वनि तो नहीं हो रही थी पर मांसल नितम्बो पर शक्तिशाली जांघों की थाप से कमरा गूंज रहा था. कालिया, गौरव और पार्थ ने कुछ समय के लिए अपने लंड मुंह से निकाले जिससे कि राशि, रूचि और शुचि को साँस लेने में कुछ सरलता हो. और उस समय ये विदित हुआ कि वे तीनों अपनी चुदाई में कितनी आनंदित थीं. शुचि के मुंह से लंड निकलते ही उसने चिल्लाना आरम्भ कर दिया और उसकी माँ और बहन भी उसके स्वर में स्वर मिलाने लगीं.

शुचि: “ओह, माँ मर गयी रे. क्या लौड़ा है रे. इतना जोरदार चोदता है. मेरी तो चूत की सालों की प्यास मिट जाएगी आज.”

राशि: “सच में मजा आ गया आज तो. क्या लौड़े ले कर आयी है रूचि तू. आज तो मैं इन्हें गांड मरवाये बिना नहीं छोडूंगी. बड़े दिन हो गए गांड में अच्छे तगड़े लंड को गए हुए. पर अब थोड़ा जोर से चोदो, मेरी चूत को फिर से खोल दो, फाड़ डालो इसे आज.”

रूचि: “अरे माँ, हर महीने तो जाती हो बम्बई, इसे खुलवाने के लिए, फिर कैसे बंद हो जाती है?”

राशि:”तू चुप कर, उनके लंड और इनमें बहुत अंतर है. इनसे चुदवाने के बाद अब बम्बई कौन जायेगा? जोर से चोद मुझे. क्या नाम है बेटा तेरा?”

“नितिन”

“है नितिन बेटा जरा जोर से चोद. मेरे कसबल निकाल दे आज तू और कालिया मिलकर.”

‘अवश्य आंटीजी. आज की चुदाई आप जीवन भर नहीं भूलेंगी.”

ये कहते हुए नितिन ने अपनी गति बढ़ा दी और कालिया ने ये जानकर कि अब ये चीखना चिल्लाना आरम्भ करेगी अपना लौड़ा वापिस राशि के मुंह में घुसा दिया.

रूचि: “हाँ नितिन, अच्छे से चोद इन्हें, बेचारी बहुत प्यासी रहती हैं. उम्म्फ.”

रूचि की बात अधूरी ही रह गयी क्योंकि गौरव ने अपना लंड वापिस उसके मुंह में डाल दिया और शुभम ने अपने लंड से उसकी चूत में लम्बे धक्के लगाने आरम्भ कर दिए. शुचि तो कुछ और बोल भी नहीं पायी थी की पार्थ के लंड ने उसके गले को बंद कर दिया और निखिल अपनी असली रूप दिखाकर उसकी चूत में शक्तिशाली धक्के लगाने में व्यस्त हो गया.

तीनों चूतें इस समय पानी छोड़ रही थीं और छप छप की ध्वनि कमरे में फैली हुई थी. जैसे ही नितिन, शुभम और निखिल को लगा कि वो झड़ चुकी हैं, तुरंत ही स्थान परिवर्तन किये गए. नितिन ने अपने लंड को राशि के मुंह में, शुभम ने रूचि और निखिल ने शुचि के मुंह में पेल दिए. अपनी चूत के रस से भीगे हुए लौडों को तीनों स्त्रियां निसंकोच मन लगाकर चाटने और चूसने लगीं. नीचे की ओर कालिया के लंड ने राशि की खुली चूत को और खोलते हुए अपने लंड को एक ही बार में अंदर उतार दिया. यही गौरव और पार्थ ने रूचि और शुचि के साथ भी किया. झड़ती हुई तीनों महिलाएं एक बार फिर से आनंद की नौका में सवार होकर कामवासना की नदी में यात्रा करने लगीं.

अब तक लड़कों ने अच्छी गति पकड़ ली थी और अपने पूरे सामर्थ्य के चुदाई कर रहे थे. सबसे पहले झड़कर निढाल पड़ने वाली शुचि थी. जिसके कांपते शरीर ने ये जता दिया कि अब वो और झड़ने के लायक नहीं थी. उसके निढाल पड़ते शरीर ने पार्थ को अपने लंड को उसके मुंह से निकालने के लिए विवश कर दिया. पर निखिल भाग्यशाली रहा क्योंकि वो अभी भी उसकी चुदाई कर रहा था और कोई ४-५ मिनट के बाद उसने अपना लावा शुचि की चूत में उड़ेल दिया. पार्थ अभी भी झडा नहीं था पर उसे इसमें कोई आपत्ति नहीं थी.

शुभम ने उसी समय रूचि के मुंह में अपना रस छोड़ दिया जिसे रूचि ने बिना किसी संकोच के प्रेम पूर्वक ग्रहण किया. और बोनस के रूप में गौरव ने उसकी चूत को भी अपने रस से लबालब कर दिया. पार्थ, निखिलं गौरव और शुभम हटकर अलग हो गए और टेबल पर पड़े पानी के लम्बे घूँट लिए. वे बिस्तर पर पड़ी दोनों जुड़वाँ बहनों के नंगे शरीर देखकर अभी भी आसक्त थे. और उनकी माँ की चुदाई के अंतिम चरण पर भी आंख लगाए थे. कालिया के काले मोटे और लम्बे भयावह से लंड को वो सब राशि के कुछ ढले हुए पर गोरे शरीर के अंदर आते और जाते देख रहे थे. कालिया की चुदाई की गति इतनी तीव्र थी की उसका लंड बाहर बीएस क्षण भर को ही दिख पता था. नितिन से अब और ठहरा नहीं गया. उसकी ऑंखें भी उन दोनों बहनों के लुभावने शरीर को देखकर चौधिया रही थीं. और वो उनके ऊपर चढ़ने के विचार से ही अपना रस राशि के मुंह में छोड़ने लगा. राशि ने उसे आनंदपूर्वक पी लिया.

कालिया की अधिकतम गतिसीमा अब पर हो चुकी थी. राशि का शरीर अब कांप रहा था और उसके मुंह से अस्फुट शब्दों की बरसात हो रही थी. पता नहीं चल रहा था कि वो चीख रही थीं की कुछ माँग रही थी. पर कालिया के झटके कहते शरीर ने उसके मस्तिष्क को साफ कर दिया.

“भर दे मेरी चूत कालिया. आज चुदाई हुई है सही में. मजा आ गया आज तो.”

अब तक शुचि संभाल चुकी थी और वो बैठी अपनी माँ की इस भीषण चुदाई के अंतिम पड़ाव पर ऑंखें गढ़ाए बैठी थी. उसने रूचि की ओर देखा तो वो भी वहीँ देख रही थी. शुचि ने रूचि की चूत से बहते रस पर दृष्टि डाली तो वो अपने आप को रोक न पायी और रूचि की चूत में मुंह लगाकर जितना संभव हुआ उतना रस चूस लिया. उसने देखा कि पार्थ अपने लंड को मुठिया रहा था और झड़ने के निकट था. उसने पार्थ को पर बुलाया और अपने मुंह से उसे चूसने लगी. पार्थ भी मुंह में जाते ही अपना संयम खो बैठा और शुचि के मुंह में पानी छोड़ बैठा.

रूचि अब बैठ गयी और उसने कालिया के अजगर को अपनी माँ की फटी हुई चूत के बिल से बाहर आते देखा. लंड बाहर निकलते ही ढेर सारा पानी राशि की चूत से बाहर बहने लगा. रूचि में जाने कहाँ से एक तत्परता आयी और उसने अपने मुंह को राशि की चूत पर भिड़ा दिया और सडप कर उसे चूसने लगी. राशि का शरीर अभी भी उत्तेजना से कांप रहा था और रूचि की इस क्रिया ने उसे फिर से एक और ऊंचाई पर लेकर नीचे धकेल दिया. ढेर सारा रस छोड़कर वो झड़ते हुए निढाल सी पड़ गयी. रूचि ने अपनी माँ को बड़े प्यार से देखा और फिर शुचि ने उसे छूकर अपनी ओर आकर्षित किया. रूचि ने उसे देखा तो शुचि ने अपनी चूत की ओर संकेत किया. रूचि समझ गयी और एक और चूत के पानी को पीने में व्यस्त हो गयी.

छहों लड़के पानी पीने के बाद कुछ दूर पड़े सोफों पर बैठ गए और सुस्ताने लगे.

“फ्रिज में से बियर ले आओ सबके लिए. तब तक हम थोड़ा बाथरूम से आती हैं. ” रूचि ने आग्रह किया.

पार्थ और शुभम उठे और किचन से आठ बोतल बियर की ले आये। रूचि, शुचि और राशि कुछ ही देर में बाथरूम से खिलखिलाते हुए निकले और अपनी बियर लेकर सबके साथ बैठ गए.

अभी शेष है
 
पहला घर: अदिति और अजीत बजाज.

अध्याय १.३

भाग १

************

नए दिन का आरम्भ

जब सब लौट कर बैठक में आये तो घर में एक अलग ही वातावरण का अनुभव किया. अनन्या अजीत की ओर ऑंखें चुराकर देख रही थी. और गौतम शालिनी को ताक रहा था. अजीत और अदिति ने इस बदले हुए समीकरण को समझ लिया और सब कुछ वापिस पहले जैसा करने का प्रयत्न करने लगे. शालिनी ने इसे समझ लिया. घर में अब कोई असहजता नहीं होनी चाहिए थी.

शालिनी: “अदिति, राधा कहाँ है.”

अदिति: “अपना काम करने के बाद अपने कमरे में गई है. अब बारह बजे ही लौटेगी. कुछ काम है क्या?”

शालिनी ने कोई उत्तर नहीं दिया, उसके मन में एक विचार आया था और वो उठी और किचन और घर के दरवाजे अंदर से लॉक कर दिए.

शालिनी: “नहीं, कोई काम नहीं है, पर हम सब जो बातें अब करने वाले हैं उसका सुनना उचित नहीं होगा.”

ये कहते हुए वो गौतम की बगल में बैठ गयी.

शालिनी: “कल हम सब ने एक नए जीवन का आरम्भ क्या है. सच ये भी है कि आज जो हमारे बीच में कुछ असहजता है, मानो सब एक दूसरे से डरे हुए हैं. पर मेरे विचार में ये सही नहीं है.”

सब चौंक गए.

शालिनी: “हमने पारिवारिक प्रेम को बढ़ावा ही दिया है. और अपने जीवन में एक नया उन्माद और रोमांच होना चाहिए. अब मेरे विचार से गौतम और अनन्या ही एक दूसरे से अंतरंग नहीं हुए हैं. पर इसमें अधिक समय नहीं लगेगा. जब हम एक दूसरे से इतने अच्छे से परिचित हो चुके हैं तो शर्म किस बात की है? वर्षों पहले जब मैंने अजीत को अपने बिस्तर में बुलाया था, न मुझे तब इस बात की कोई ग्लानि हुई थी और न ही मुझे कल अपने प्यारे पोते गौतम से चुदवाने के बाद हुई है.” ये कहकर शालिनी ने गौतम के होतीं पर अपने होंठ रखे और उसे एक प्रगाढ़ चुम्बन दिया.

“जब हम सब एक दूसरे से हर प्रकार से प्रेम कर सकते हैं, तो अपने आप को क्यों रोकना. मैं शेष जीवन इस प्यार और सहवास के बिना नहीं बिताना चाहती.” शालिनी ने अजीत को पास बुलाया और उसे भी एक चुम्बन दिया. “क्या तुम सबको मेरे इस व्यहवार में किसी भी प्रकार से प्रेम के सिवाय कुछ और दिखा?”

सबने न में सिर हिलाया.

“और इसीलिए, अब मैं चाहूंगी कि हम जब भी चाहें जहां भी चाहें और जिसके साथ भी चाहें चुदाई कर सकें. राधा इसमें बाधक बन सकती है और हमें इसका उपाय ढूँढना ही होगा. पर उसे जब तक कोई समाधान नहीं मिलता किसी भी प्रकार से कोई शक नहीं होना चाहिए. ठीक है?”

सबने इस बार हाँ में सर हिलाया.

“तो घर की सबसे बड़ी होने के नाते मैं इस उन्मुक्त जीवन शैली का शुभारम्भ करती हूँ.” ये कहते हुए शालिनी खड़ी हुई और अपने कपड़े उतारने लगी. पल भर में ही वो सबके सामने नंगी खड़ी थी. और उसके चेहरे पर किसी प्रकार की शर्म नहीं थी. बल्कि आँखों में एक नयी चमक थी.

“दादी, आप कितनी सुन्दर हो!” अनन्या के मुंह से निकल पड़ा.

“क्यों न हो, दादी जो है मेरी.” अब तक गौतम सम्भल चुका था और उसने शालिनी के नितम्ब पकड़कर उन्हें दबाते हुए अधिकार भरे शब्दों में कहा.

अजीत भी कहाँ पीछे रह सकता था. “ये मत भूलो कि ये मेरी माँ है.” शालिनी के पीछे से उसके स्तन दबाते हुए उसने भी अपना अधिकार जमाया.

“उँह” शालिनी ने अपने स्तन दबते हुए एक दबी हुई आह भरी.

अजीत: “और ये मत भूलो कि इस चूत और गांड में गौतम से पहले मेरा लंड गया था.”

गौतम: “पर डैड, मैंने अभी तक दादी की गांड नहीं मारी है. इसीलिए इस में आप इकलौते ही हैं.”

अजीत: “क्यों माँ, अपने पोते को आधा ही सुख दिया क्या?”

शालिनी: “मेरी बूढी हड्डियां चटका दीं इसने रात में. मेरी तो हिम्मत ही नहीं हुई आगे कुछ करने की. पर आज की रात गांड भी मरवा लूंगी अपने पोते से.”

अनन्या: “दादी वो सब ठीक है. पर मैं पापा और आपकी चुदाई देखना चाहती हूँ. क्योंकि इस पूरे नए समीकरण का आरम्भ वहीँ से हुआ था.

गौतम ने भी अनन्या के स्वर में स्वर जोड़ा.

अदिति: “अब लगता है कि आप दोनों को बच्चों की बात माननी ही पड़ेगी.”

अदिति: “अनन्या, बिटिया इधर आ और अपने पापा के लंड को थोड़ा अच्छे से कसकर खड़ा कर. फिर हम उधर बैठकर इस खेल को देखेंगे.”

अनन्या को इससे अधिक निमंत्रण की आवश्यकता नहीं थी. वो तपाक से उठी और अजीत के सामने खड़ी हो गयी. फिर उसने अजीत की पैंट खोली और उसे नीचे सरका दिया.

अजीत: “रुक थोड़ा.” ये कहकर अजीत ने पूरी पैंट निकली और फिर अपनी टी-शर्ट और अंडरवियर भी उतार फेंका. अब वो भी अपनी माँ के समान नंगा खड़ा था.

अनन्या घुटनो के बल बैठी और लंड मुंह में लेने ही लगी थी कि अदिति बोल उठी, “कपड़े पहनकर चूसेगी? इन्हें निकाल ही दे तो अच्छा है. तेरे भाई को भी तो तेरी सुंदरता का दर्शन करना चाहिए.”

अनन्या ने गौतम की ओर देखा और कुछ शर्माई फिर उसे अपनी माँ की कल रात की बात याद आ गयी और उसने तुरंत अपनी शर्म छोड़ी और गौतम की आँखों में देखते हुए कपड़े निकालने लगी. गौतम उसके शनैः शनैः अनावृत होते संगमरमरी शरीर को ललचाई आँखों से देख रहा था.

अदिति: “हम्म्म, ये ठीक है. पर तू क्यों बैठा टुकुर टुकुर देख रहा है. तेरी दादी की चूत तेरे सामने है. अपने पापा के लिए उसे भी अच्छे से तैयार कर दे. पर मेरे विचार से हमें शयनकक्ष में चलना चाहिए.”

गौतम ने अनन्या के ऊपर से हटाकर शालिनी की ओर देखा. “चलो, मेरी नयी गर्लफ्रेंड।”

ये कहते हुए गौतम ने शालिनी को थामा और अदिति के कमरे को ओर बढ़ चला. पीछे पीछे अनन्या और अजीत भी आ गए. अदिति ने बैठक से बिखरे पड़े कपड़े समेटे और वो भी कमरे में आ गयी और कमरा लॉक कर दिया. अनन्या ने समय व्यर्थ नहीं किया था, पर अब वो बिस्तर पर बैठी हुई अजीत के लंड को चूस रही थी. गौतम को कुछ समय लगा क्योंकि उसने भी अपने कपड़े उतारे थे. और अदिति की ऑंखें उसके लंड पर पड़ीं और उसे अपने बेटे पर गर्व हो उठा. शालिनी तो पहले से ही उत्तेजित थी, सो वो बिस्तर पर टाँगे फैलाये लेटी थी और अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी. गौतम ने उसकी उँगलियों को हटाया और अपने मुंह को उसकी चूत पर मलने लगा.

*****

ये सब इस बात से अनिभिज्ञ थे की राधा अभी तक घर में ही थी. वो किसी काम से ऊपर छत पर गयी थी, परन्तु सब ये माने हुए थे कि वो अपने घर गयी है. राधा जब नीचे उतरी तो वो सीधी पर ही रुक गयी थी, और उनकी बातें सुन रही थी. उसका शक सही सिद्ध हुआ था. बाप बेटे शालिनी को चोद रहे थे. हालाँकि गौरव ने कल रात ही पहली बार चोदा था शालिनी को. जब अजीत के लंड को चूसने के लिए अदिति ने कहा तो राधा अपने आप को रोक नहीं पायी और छुपकर झाँका. अजीत के लंड को देखकर उसका मन मचल गया. उसके पति के लंड से दुगना रहा होगा अजीत. उसकी चूत पनिया गयी.

जैसे ही सब कमरे में गए और दरवाजे को लॉक किये, राधा दबे पांव अपने घर की ओर चली गयी. वो ये भूल गयी कि शालिनी ने दरवाजा अंदर से बंद किया था राधा को अंदर न आने देने के लिए. उसने तो इसे सामान्य दिनों के समान ही समझा और क्योंकि कई बार दरवाजा खुला भी रहता था तो इस पर ध्यान नहीं दिया. अपने कमरे में जाकर वो बिस्तर पर लेट गयी और जो घर में चल रहा था उसकी कल्पना में लीन हो गयी. जब उससे सहन नहीं हुआ तो उसने अपने कपड़े उतारे और किचन से एक बैंगन लेकर अपनी चूत में डालकर उसे शांत करने लगी. उसकी आँखों के सामने अजीत का मोटा लम्बा लंड घूम रहा था. वो किसी प्रकार उससे चुदवाने की कल्पना करने लगी. पर उसके पति को इसका आभास नहीं होना चाहिए था.

*****

अदिति एक ओर सोफे पर बैठ गयी. वो अपने सेक्स से वंचित दो और सप्ताह के बारे में सोच रही थी. इतने समय तक वो कभी चुदे बिना नहीं रही थी. पर ये दिन भी कट जायेंगे. और तो और इस बार उसे भी अपने बेटे के लंड का अनुभव होगा. उसकी सास तो वर्षों से ये सुख ले रही थी. अदिति ने स्वप्निल आँखों से सामने चल रहे कुकर्म पर दृष्टि डाली. अनन्या जिस प्रेम से अजीत के लंड को चाटने, चूमने और चूसने में व्यस्त थी उससे उसका अजीत की ओर प्रेम का आभास हो रहा था. अजीत भी अनन्या के बाल सहलाकर उसे प्रोत्साहित कर रहा था. इस कली को फूल बने अभी २४ घंटे भी नहीं हुए थे. और उसके लंड चूसने में कला कम और प्रेम अधिक दिख रहा था. अदिति ने इस कमी को पूरा करने की प्रतिज्ञा की.

फिर उसकी दृष्टि शालिनी की चूत में मुंह डाले अपने बेटे की ओर पड़ी. इस पूरे कार्यकलाप से गौतम का लंड भी अब तन चुका था. वो तो अदिति के बैठने का स्थान और कोण ऐसा था कि वो उस खड़े लंड को अच्छे से देख पा रही थी.

“इससे तो चुदना ही है. बस मैं ठीक हो जाऊं।” अदिति ने विचार किया.

अजीत ने कहा कि अब वो समुचित रूप से चुदाई के लिए तैयार है. अदिति ने एक बार और चाटकर लंड को प्रेम से देखा और फिर अपनी दादी की ओर मुड़ी जो अपनी कमर उछाल उछाल कर गौतम की योग्य जीभ के सञ्चालन से झड़ने की निकट थी. अजीत ने गौतम के सिर पर हाथ लगाया और गौतम ने अपने पिता को खड़ा देखा और समझ गया की अब खिलाडी से दर्शक बनने का समय आ चुका है. वो अपने स्थान से उठा और अदिति की ओर बढ़ गया. अनन्या उसके लगभग साथ ही गयी और भाई बहन अपनी माँ को दोनों ओर बैठ गए.

अजीत आगे बढ़ा और शालिनी के होंठ चूमने लगा. दोनों जैसे एक दूसरे में समा जाने का प्रयास कर रहे थे. फिर अजीत ने चुम्बन तोड़ा और शालिनी के मम्मों पर अपना ध्यान केंद्रित किया. वो एक स्तन को चूसता तो दूसरे को दबाता. बदल बदल कर न जाने वो कितनी ही देर तक यही करता रहा. शालिनी कुनमुना रही थी और अपने कूल्हे हिला रही थी.

“दोनों एक दूसरे के साथ कितने सुन्दर लग रहे हैं न मॉम?” अनन्या बोल उठी.

अदिति जो इस संसर्ग को पहले भी देख चुकी थी आज भी इसकी अलौकिकता से प्रभावित हुए न रह सकी. उसका हाथ बेध्यानी से गौतम के लंड को सहलाने लगा. फिर वो गौतम के लंड को हाथ में लेकर उसकी मुठ मारने लगी. सामने के दृश्य में खोई हुई अदिति को इस बात का आभास नहीं था कि वो क्या कर रही थी.

“हाँ, मॉम, थोड़ा तेज करो.” गौतम की गुहार सुनकर उसने आश्चर्य से उसे देखा फिर अपने हाथ में गौतम के तने लंड को देखा तो जैसे वो नींद से जाग गयी.

“तुझे अच्छा लग रहा है?” अदिति ने मुस्कुराकर पूछा.

“इसमें पूछने की क्या बात है. बहुत अच्छा लग रहा है. मैं भी बस अब आपके ठीक होने की राह देख रहा हूँ.”

“तुझे कैसे पता कि मुझे कुछ हुआ है?”

गौतम को अपनी गलती का आभास हो गया. उसने तो ये उन वीडियो के द्वारा जाना था. उसने तुरंत बात को संभाला.

“कल दादी ने बताया था कि अभी आपको सेक्स से मना किया हुआ है.”

“तेरी दादी के पेट में कोई बात नहीं पचती. हाँ, अभी लगभग दो सप्ताह और हैं. उसके बाद ही डॉक्टर बताएँगे कि मैं सेक्स कर सकती हूँ या नहीं. मैं भी अब बहुत बेचैन हो रही हूँ. ठीक होने के बाद तेरे पापा के बाद तेरा ही नंबर लगने वाला है.”

“क्यों मॉम, पहले क्यों नहीं? पापा के पास तो दादी और अनन्या भी हैं.”

“नहीं. वो मेरे पति हैं. पहला भोग उन्हें ही चढ़ेगा. पर मुझे नहीं लगता कि अनन्या तुझे इतने दिन मना करेगी. क्यों अनन्या?”

“मॉम, मुझे तो अच्छा ही लगेगा। मेरा अपने कौमार्य के लिए पापा का चयन था पर मुझे तो गौतम भी उतना ही प्यारा है. और उसके लंड को देखकर तो लगता है कि वो भी मस्त चुदाई करेगा.”

अनन्या की भाषा सुनकर अदिति और गौतम के मुंह खुले रह गए. अनन्या खिलखिलाने लगी.

“क्या मॉम, अपने ही तो बोला था न कि चुदाई में संकोच नहीं करना चाहिए. और मुझे तो अब इस तरह की भाषा में बड़ा मजा आ रहा है.”

अदिति: “ये लड़की तो एक ही दिन में विशेषज्ञ बन गयी.” इस बात पर तीनों हंस पड़े और सामने चल रहे सहवास को देखने लगे.

अजीत अब अपने दोनों हाथों से अपनी माँ के मम्मे निचोड़ रहा था और उसका मुंह शालिनी की चूत में घुसा हुआ था. और जिस प्रकार से वो उसे चाट रहा था उसे देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वो रसमलाई खा रहा हो. उसने अपने हाथ मम्मों से हटाए और शालिनी की चूत की पंखुड़ियों को फैलाकर अपनी जीभ अंदर डाल दी. शालिनी की कसमसाहट अब बहुत बढ़ चुकी थी. उससे अब ये दूरी सहन नहीं हो रही थी, पर वो ये जानती थी कि जब तक उसका बेटा उसके रस को पी नहीं लेगा उसे चोदने का कोई प्रश्न ही नहीं था. उसकी चूत अब इस रहस्य से भली भाँति परिचित थी और वो अब तेजी से अजीत के मुंह में पानी बहा रही थी.

फिर शालिनी का बांध टूट ही गया. उसकी आनंदभरी चीख कमरे के अन्यथा शांत वातावरण को चीरती हुई दीवारों को हिला गयी. तीनों दर्शक मूक बने इस उत्सर्ग को देख रहे थे. उन्होंने जीवन में ऐसा उन्माद कभी नहीं देखा था. चीखती शालिनी के नितम्ब और शरीर बिना किसी लय के मानो झूम रहा था. उसके छटपटाते शरीर को देखकर किसी मिर्गी के रोगी का ध्यान आ रहा था. उसकी चूत अविरल गति से अजीत के मुंह और चेहरे को जलमग्न कर रही थी. पर अजीत था की हटने का नाम भी नहीं ले रहा था. वो इस पावन जल की एक एक बूँद को अमृत के समान ग्रहण कर रहा था. शालिनी धीरे धीरे शांत हो गयी और उसका शरीर भी शिथिल पड़ गया. अजीत ने उसकी चूत को पूरा सूखने के पश्चात् ही अपना भीगा हुआ चेहरा ऊपर किया.

शालिनी उसे देखकर मुस्कुरा उठी.

“जानता है? तेरा बेटा भी तुझसे कम नहीं है, इस कला में. पर आज तो तूने सच में सारे आयाम ही तोड़ दिए.”

शालिनी में फिर अदिति की ओर देखकर बोली, “ अदिति, पर एक ही बात का मुझे खेद है कि इसने ये सब तुमसे नहीं कहीं और सीखा है. मुझे इस बात का गर्व भी है कि अजीत को ये सब सीखने वाली मैं थी.”

अदिति: “माँ जी, अब समय बदल गया है. आजकल के बच्चे समय से पहले ही सब कुछ करने लगते हैं. मुझे तो अनन्या पर गर्व है कि उसने अपना कौमार्य कल तक सुरक्षित रखा था.” फिर उसने गौतम के लंड की मुठ मारते हुए उससे ही पूछा, “कहाँ से सीखा तूने ये सब जो दादी कह रही हैं. अगर सच में तू इतना अनुभवी है तो तेरी आयु की लड़की तो नहीं सीखा सकती. कौन है तेरी शिक्षिका?”

गौतम थोड़ा असहज हो गया. अजीत ने बात संभाली, “गौतम, हम सब अब किसी भी प्रकार की बातें गुप्त नहीं रखेंगे. हमें तुम्हारे इस ज्ञान से कोई आपत्ति नहीं है. न ही हम ये कहेंगे कि तुम बाहर अपने सम्बन्ध समाप्त करो. हाँ, परन्तु ध्यान अवश्य रहे कि किसी प्रकार का रोग या समस्या घर न लाना.”

गौतम को समझ नहीं आया. इस बार अदिति ने उसे समझाया, “तेरे पापा का कहना है कि ऐसा कुछ मत करना कि कोई लड़की माँ बन जाये और हमें उसे मजबूरी में बहू बनाना पड़े.”

गौतम सोचने लगा कि कितना बताये. उसने देखा कि सब उसकी ही ओर देख रहे हैं. अदिति का भी हाथ अब ठहरा हुआ था.

“मेरी दो प्रोफ़ेसर हैं, पहले तो उन्होंने ही मुझे इस सब में पारंगत किया, पर बाद में मेरे कुछ दोस्तों की मम्मियाँ भी मुझ पर आसक्त हो गयीं. ये समझो कोई पांच स्त्रियों ने सिखाया.”

सब उसके इस कथन से प्रभावित हो गए. पर गौतम अब सब बता देना चाहता था.

“फिर मेरे एक दोस्त की बहन भी है, अनन्या भी उसे जानती है. कोई दो महीने पहले से मैं उसे भी चोद रहा हूँ. पर मैं उसके साथ कंडोम प्रयोग में लाता हूँ, क्योंकि वो भी अभी किसी प्रकार के स्थायी सम्बन्ध में रूचि नहीं रखती.” गौतम रुका और फिर बोलने लगा, “तो कुल मिलकर छह अन्य स्त्रियों को मैंने चोदा है, दादी को छोड़कर.”

अनन्या उस लड़की का नाम जानने को उत्सुक थी, पर वो इसके लिए प्रतीक्षा कर सकती थी.

अजीत: “ ये कुछ सीमा तक अच्छा भी है कि तुम्हें पांच स्त्रियों से सीखने का अवसर मिला. मेरे विचार से ये तीनों इस ज्ञान और अनुभव का भरपूर उपयोग करने वाली हैं. पर अब मुझे तुम सबकी इच्छा पूरी करनी है जो मुझे तुम्हारी दादी की चुदाई करते देखने के लिए उत्सुक थे.”

अनन्या ने ताली बजाकर अपनी सहमति दिखाई और अजीत खड़ा होकर अपने लंड को शालिनी के मुंह से लगते हुए बोला, “थोड़ा इसे अपनी चूत में जाने के लायक बना दो.”

शालिनी तुरंत उठकर उसके लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी और कुछ ही क्षणों में उसे लोहे के समान कड़ा कर दिया. अजीत ने अपने लंड को शालिनी की प्यासी चूत पर लगाया और एक ही बार में पूरा पेल दिया.

शालिनी के मुंह से एक हल्की से आह निकली, पर अनन्या की आह उससे अधिक तेज थी. अब कल तक की कुंवारी कली जिसकी चूत में इंच इंच करके लंड जाने में भी दर्द हुआ हो ऐसी एक बार की ठुकाई से तो आश्चर्यचकित होना ही थी. अदिति भी तेजी से गौतम के लौड़े पर हाथ चलने लगी. अजीत बस कुछ ही क्षण के लिए रुका और फिर वो अपनी माँ को एक सही और सधी गति से छोड़ने लगा. शालिनी भी गांड उछाल कर उसका साथ से रही थी.

“ये दोनों सच में चुदाई करते हुए कितने सुंदर लग रहे हैं न, मॉम। “ अनन्या ने प्रतिक्रिया दी.

“हाँ, और मुझे उन्हें साथ देखने का कई बार सुअवसर मिला है. अधिक तो नहीं पर इतना अवश्य समझती हूँ कि इनके प्रेम का कोई सानी नहीं है. और मुझे इसमें कोई आपत्ति भी नहीं है, क्योंकि इनका और मेरा प्यार एक मजबूत नींव पर रखा है.”

“वैसे मॉम, आपकी सच में प्रशंसा करनी चाहिए, कि आपको जलन नहीं होती.”

“होनी भी नहीं चाहिए. कल जब गौतम ने दादी की चुदाई की तो इनको थोड़ी भी ईर्ष्या नहीं हुई. और जब गौतम कुछ दिन बाद मुझे छोड़ेगा तब भी ये किसी भी प्रकार से दुखी या चिंतित नहीं होंगे.”

अजीत ने अपनी गति अब काफी तेज कर दी थी और शालिनी भी उसका पूरा साथ दे रही थी. दोनों हाँफते हुए एक दूसरे में समाने की चेष्टा कर रहे थे.

“माँ, आज तो बड़ी उछलकर चुदवा रही हो, पहले तो जल्दी रुक जाती थीं.” अजीत ठहरते हुए स्वर में बोला।

“सब मेरे पोते का किया धरा है, कल इसने ऐसी चुदाई की थी की मेरी सारे जोड़ खोल दिए. बूढ़ी हड्डियों में नयी शक्ति आ गयी इसकी चुदाई से.”

अजीत ये सुनकर और भी तेज चुदाई करने लगा. वो शालिनी को दर्शना चाहता था कि वो गौतम से कुछ कम नहीं है. शालिनी उसका जोर जोर चिल्ला कर उत्साह बढ़ा रही थी. दोनों के मिलन में एक ऐसा सौहार्द्य था जैसे वे दो शरीर नहीं बल्कि एक ही हों. पर शालिनी इस आयु में कितना और भुगत पाती। उसकी चूत हाथ डालने के लिए तैयार हुई और शालिनी की चिल्लाहट में एक नयापन आ गया. उसकी चीखें अब ठहर कर आ रही थीं और शरीर भी अब थरथरा रहा था. काँपते हुए शरीर ने अंततः सुख के शिखर पर अपने आपको समर्पित कर दिया और उसकी चूत ने अपनी धार खोल दी.

अजीत का लंड अब छप छप की आवाज से मानो एक नदी में चप्पू चला रहा था. पर इतनी चिकनाई और अपनी गति से वो भी हार ही गया और उसने अपना गाढ़ा सफ़ेद वीर्य से शालिनी की चूत को भर दिया. उसके बाद वो अपनी माँ पर ढह गया और कुछ देर दोनों माँ बेटे एक दूसरे को चूमते रहे. इस पूरे समय अजीत अपने लंड को शालिनी की चूत में हल्के से चलता रहा. फिर जब वो बिलकुल सिकुड़ गया तो उसने चुम्बन तोड़ा और शालिनी के शरीर पर से उठ गया. अनन्या खड़ी होकर ताली पीटने लगी.

अदिति: “अनन्या, अब तुम्हारा ये नया पाठ है. जाकर अपने पापा के लंड को चाटकर साफ करो. मैं तुम्हारी दादी की चूत साफ करती हूँ.”

ये कहते हुए अदिति ने अनन्या को उठाया और दोनों अपने अपने लक्ष्य की ओर चल दिए. गौतम जिसका लंड खड़ा था उसकी ओर किसी ने देखा भी नहीं और वो बेचारा मन मसोस कर ही रह गया.

*****
 
कुछ देर बाद सब उठे और साफ सफाई के बाद बैठक में लौट आये. अदिति चाय बनाने के लिए किचन में चली गई. शालिनी भी उसके पीछे गई और किचन के दरवाजे का लॉक खोला. पर ये क्या? ये तो पहले से ही खुला था. अब शालिनी को काटो तो खून नहीं. इसका मतलब कि राधा घर में थी! क्या देखा उसने? इस चिंता में डूबी वो बैठक में जाकर बैठ गयी. अदिति को कुछ पता नहीं था, न ही उसको शालिनी ने कुछ बताया ही. वो इस नयी समस्या को सुलझाने का रास्ता ढूंढ रही थी. वो अभी कुछ कह नहीं सकती थी. राधा के आने और उसके व्यवहार से ज्ञात होगा कि उसने क्या देखा. अगर वे सब कमरे में जा चुके थे तो उसे कुछ भी नहीं दिखा होगा.

पर शालिनी को इस बात पर शक था. उसे अपनी इस गलती पर बहुत ही शर्म आयी. क्योंकि राधा हमेशा बता कर जाती थी. आज उसने कुछ नहीं बोला था, अर्थात वो घर में ही थी. जो भी हो, उसे ही इस बात को संभालना होगा. गौतम भी उसे चोदने के लिए उतावला है, तो हो सकता है कि लंड की रिश्वत से उसका मुंह बंद हो जाये. शालिनी को अपनी इस बात पर हंसी आ गयी. “हाँ, मैं गौतम के लंड से उसका मुंह बंद करवा दूंगी.” उसने मन में सोचा.

“क्यों हंस रही हो दादी?” गौतम ने पूछा.

“कुछ अच्छी बात ध्यान में आयी है, जिससे तेरा भी मन खुश हो जायेगा। पर बताउंगी कल, पहले निश्चिंत हो जाऊं.”

“ओह दादी. कुछ हिंट दे दो?”

“नहीं. या आज रात जब तू मेरी गांड मारने आएगा.”

“ओह हो, मैं तो भूल ही गया. मेरी तो आज लॉटरी जो लगी है.

इतने में अदिति चाय ले आयी और सब चाय पीने में व्यस्त हो गए. हर व्यक्ति एक अलग सोच में था. पर एक विचार सब के मन में था. कि हम सब अब अधिक निकट आ चुके हैं.

कुछ ही देर में राधा भी आ गयी. शालिनी उसे कनखियों से ताक रही थी. पर उसे देखकर लगता नहीं था कि उसने कुछ देखा था.

“हम्म्म, कैसे उगलवाऊं इससे.”

जब राधा चाय के कप लेकर किचन में गई और उन्हें धोने लगी तो शालिनी भी किचन में चली गई.

“अरे आज तू बोल कर नहीं गई कि जा रही है. कब गई थी?”

राधा सकपका गई.

“माँ जी, बैठक में कोई दिखा नहीं तो मैं बिना बोले ही चली गई आज. मैंने सोचा सब नहा धो रहे होंगे.”

“और कब गई थी? शालिनी इतनी सरलता से उसे छोड़ने वाली नहीं थी.

राधा ने समय बताया. उस समय तो हम सब कमरे में थे. हो सकता है इसने कुछ न देखा हो.

“मैं कमरे में जा रही हूँ. आज कुछ देर हो गई. काम समाप्त करके आ जाना.” ये कहकर शालिनी अपने कमरे में चली गई.

राधा ने लम्बी साँस ली. फिर उसके मन में ये विचार आया कि आज तो साहेब के लंड का स्वाद मिलेगा माँ जी की चूत से. यही सोचते हुए वो उत्साह से अपने काम को जल्दी समाप्त करने में व्यस्त हो गई.

*****

राधा जब काम समाप्त करके शालिनी के कमरे में आयी तो शालिनी सोफे पर ही बैठी हुई थी.

“क्या हुआ माँ जी, आज मालिश नहीं करवानी क्या?”

“नहीं, आज बस तू अपना दूसरा काम कर.”

“जैसा आप कहो. कपड़े तो उतार लीजिये.”

शालिनी ने कपड़े उतार कर एक ओर रखे, वहीँ राधा ने भी अपने कपड़े निकले और एक ओर रख दिए. शालिनी वहीँ सोफे पर ही बैठकर अपने पांव फैला ली. ताजी ताजी चुदाई के कारण उसकी चूत कुछ फूली हुई थी और लालिमा लिए हुई थी. राधा को ये समझते देर नहीं लगी कि इनकी अच्छी चुदाई हुई है, पर वो कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं थी. तभी शालिनी की चूत में से कुछ सफेद सा द्रव्य बाहर निकला. इससे पहले कि शालिनी कुछ भी कर पाती राधा ने जीभ बढाकर उसकी चूत पर से उस रस को चाट लिया. और ये तय हो गया की ये वीर्य ही है.

राधा ने अपना मुंह शालिनी की चूत में डाल दिया और एक भूखी भिखारिन के समान उसे सड़प सड़प कर चाटने और चूसने लगी. अजीत का रस उसके इस पराक्रम से उसके मुंह में बहे जा रहा था. शालिनी को लगा कि उसने सफाई न करके बहुत बड़ी गलती कर दी थी. पर अब तीर कमान से निकल चुका था. शालिनी ने राधा का सिर पकड़ कर उसे अपनी चूत पर दबा लिया. राधा पूरी तन्मयता से उनकी चूत पिए जा रही थी. अब वो समय था जब शालिनी उससे सच्चाई उगलवा सकती थी.

“कहाँ थी तू जाने के पहले?”

चूत पर से मुंह हटाकर राधा बोली, “माँ जी छत पर टहल रही थी.”

“गोकुल के क्या हाल हैं, आजकल दिखता ही नहीं?”

“बाबूजी ने काम पर लगाया हुआ है.”

“अच्छे से चुदाई करता है तेरी?”

इस बार राधा सोचने लगी. उसे अपनी आँखों के सामने अजीत का मोटा लम्बा लंड झूलते हुए दिखने लगा.

“जी माँ जी. बहुत अच्छे से.”

“हम्म्म, लगता है तेरी गर्मी नहीं निकाल पाता है वो. तेरी जैसी जवान औरत को कैसे संभालता होगा?”

गोकुल राधा से आयु में कोई ७-८ साल अधिक था. शालिनी ने इसी बात का लाभ उठाया. और राधा उसके बिछाये इस जाल में आ फंसी.

“माँ जी, जितनी निकाल पाता उतनी बहुत है. अब और कौन करेगा ये?” कहते ही राधा को अपनी गलती का आभास हो गया.

“मेरी चूत का स्वाद कैसा लग रहा है?”

“हमेशा के समान मीठा और कसैला।” पर अब राधा समझ चुकी थी कि उसे सच्चाई बतानी ही होगी. “माँ जी, मुझे क्षमा करना. मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी.”

“हुंह, क्या कर बैठी अब?”

“माँ जी, मैंने छत से नीचे आकर बैठक में चल रहे खेल को देख लिया था. पर कसम से माँ जी, में किसी को नहीं कहूँगी, इनको भी नहीं.”

“ठीक है, तू तो मेरी बेटी के समान है, मैं जानती हूँ तू मुझसे विश्वासघात नहीं करेगी. सुन, मैं अजीत से कहकर गोकुल को ५-६ दिन के लिए बाहर भिजवाती हूँ. तू रात को मेरे ही कमरे में रहना कल से. फिर देखेंगे कि तेरी इस जवानी की आग को कैसे बुझाएं. पर ये तय है, कि अगर ये बात बाहर निकली तो चाहे मैं फांसी चढ़ जाऊं, पर तुझे नहीं छोडूंगी. मैं किसी को अपना घर तोड़ने नहीं दूंगी.”

शालिनी की शब्दों के तरीके ने राधा को चेता दिया कि वो अत्यधिक गंभीर हैं.

“माँ जी, आप जानती हो. मैं झूठी कसम नहीं कहती. ये बात मेरे मुंह से मरते दम तक नहीं निकलेगी.”

“ठीक है, चल आज के लिए इतना ही रहने दे. मैं अजीत से कहती हूँ गोकुल को बाहर भेजने के लिए. और तू चिंता न कर, तेरा भी ये राज कभी इस घर से बाहर नहीं जायेगा.”

राधा माँ जी को प्रणाम करके अपने काम के लिए निकल गयी. शालिनी ने भी कपडे पहने और अजीत से बात करने के लिए चल पड़ी.

*****

शालिनी तेजी के साथ अजीत के पास पहुंची और उसे बोला कि कुछ आवश्यक बात करनी है इसीलिए वो उसके कमरे में चले. अजीत को साथ लेकर वो कमरे में गयी और दरवाजा बंद कर लिया.

“क्या हुआ माँ, ऐसी क्या बात है जो अदिति के सामने नहीं हो सकती थी.”

“वो कहीं घबरा न जाये, बात ये है कि जब आज हम सब बैठक में थे तो राधा ने सब कुछ देख लिया है.”

“ओह, शिट! अब क्या होगा.”

“पहली बात ये है कि उसने चुप रहने का वचन दिया है. और मुझे नहीं लगता कि वो कहीं कुछ कहेगी. गोकुल से भी नहीं.”

“चलो, ये समस्या तो दूर हो गयी.”

“हाँ, और उसकी बातों से ये भी पता चल गया कि गोकुल उसे पूरी संतुष्टि नहीं दे पाता है.”

“ओके.”

“मैं चाहती हूँ, की गोकुल को कल से ५-६ दिन या अधिक के लिए किसी काम से बाहर भेज दो. इसके बाद हम राधा को ठीक से समझा देंगे.”

“पर आप तो कह रही हैं कि वो समझ चुकी है.”

“हाँ, पर कल वो पलट न जाये किसी कारण इसका भी हमें कोई सही न कोई प्रयोजन करना होगा.”

“ऐसा हम क्या कर सकते हैं?”

“तुमने सुना नहीं, गोकुल उसे संतुष्ट नहीं कर पाता है.”

“ओह, तो आप चाहती हो की मैं उसकी चुदाई करूँ ?”

“सही समझे. पर कल रात से मैंने उसे मेरे कमरे में ही सोने के लिए कहा है. और कल तो गौतम उसकी चुदाई करेगा. वो भी बहुत उत्सुक है उसकी चूत के लिए.”

“जवान लड़का है, तो चूत के लिए तो तत्पर ही रहेगा. ठीक है, तो मेरी जब भी आवश्यकता हो मुझे बता देना.”

“ठीक है. अभी तुम पहले गोकुल को भेजने का प्रबंध करो.”

अजीत चला गया और फिर उसने अपने दूसरे शहर के एक मित्र से बात की जो उसे कई दिन से किसी विश्वासपात्र आदमी के लिए कह रहा था, हालाँकि काम कुछ ही दिन का था पर गोपनीयता आवश्यक थी. समय निर्धारित करने के बाद उसने ऑफिस फोन किया और गोकुल को घर आने की आज्ञा दी. गोकुल के आने पर अजीत ने उसे अपने मित्र के कार्य के बारे में समझाया और ये भी बताया की ये किसी को भी न कहे. न घर में, न बाहर. अजीत ने कहा कि ये नियम वो स्वयं भी मान रहा है. इसके बाद उसे जाने की तैयारी करने के लिए कहा.

गोकुल अपने कमरे पर गया और उसने राधा को बताया कि उसे कल से सप्ताह भर के लिए बाहर जाना है. राधा जानती तो थी, पर उसके मन में फिर भी एक टीस सी उठी कि वो अपने पति को धोखा देने वाली है. पर वो ये भी जानती थी कि उन्हें इतने आराम की नौकरी और सुविधाएँ कोई और नहीं देगा. और न ही कोई इतना वेतन ही देगा. तो इसके लिए वो जो भी होगा, वहां करेगी. पति पत्नी एक दूसरे की बाँहों में कुछ देर तक बंधे रहे फिर बिस्तर पर चुदाई में व्यस्त हो गए. आज न जाने क्यों राधा को गोकुल की चुदाई बहुत सुखदाई लगी. चुदाई के बाद दोनों सो गए और फिर एक घंटे के बाद उठे. राधा अपने काम पर बंगले में चली गयी और गोकुल अपना सामान बांधने लगा.

*****

शाम के सात बजने को थे. अजीत दोपहर में ऑफिस गया था और कुछ देर पहले ही लौटा था. अदिति ने उसे मुंह हाथ धोने और कपड़े बदलने के बाद उसकी ड्रिंक दी. शालिनी ने भी अदिति से उसके लिए एक ड्रिंक बनाने को कहा. अदिति उसे भी ड्रिंक बना कर लाई और फिर उनके साथ बैठ गयी.

अनन्या और गौतम अभी लौटे नहीं थे. पर आने ही वाले थे. राधा किचन में काम कर रही थी, उसे आज जल्दी जाना था. वो ये समय गोकुल के साथ बिताना चाहती थी क्योंकि वो बाहर जा रहा था. उसके रहते किसी भी प्रकार का प्रेमालाप नहीं हो सकता था. पर सांकेतिक वार्तालाप तो संभव था.

“क्या हुआ माँ जी, आपका ड्रिंक लेने का मन कैसे हो गया आज?”

“मन तो हर दिन करता है, पर लेती नहीं थी बच्चों के कारण. पर अब जब बच्चे बड़े हो गए हैं तो अब अपने आप को रोकने का कोई अर्थ नहीं है.”

सभी बच्चों के बड़े होने का अर्थ समझ गए और उससे सहमति जताई. गौतम और अनन्या भी लौट आये और अपने कमरे में जाकर कपड़े बदलकर लौटे. राधा ने भी आकर बताया कि उसने खाना बना दिया है और वो शेष कार्य कल कर देगी. अदिति ने उसे जाने के लिए कहा. अब कवल परिवार वाले ही थे अकेले।

शालिनी ने अदिति को सीमित बात बताने का निश्चय किया. उसने अजीत की ओर देखा और फिर अदिति से बोली, “मुझे तुमसे कुछ बात करनी है, थोड़ा किचन में चलो.”

शालिनी ने किचन में जाकर ये बात न बता कर कि राधा ने उन्हें देख लिया है, उसे बताया कि गौतम राधा की चुदाई करना चाहता था तो उसने राधा को मना लिया है और इसीलिए गोकुल को बाहर भेजा है.

अदिति: ‘अगर उसे बाहर भेजा है तो अवश्य ही आप उसे अजीत से भी चुदवाने का संकल्प ले चुकी हैं. है न?”

शालिनी: “मुझे तो राधा की बात से उसकी इच्छा केवल अजीत के ही लिए लगी थी. इसीलिए मैं कल रात गौतम से चुदवा दूंगी. इससे हो सकता है कि अजीत से उसका मन कम हो जाये. पर ये सोच, इतनी भरोसे की कोई और मिलेगी नहीं. तो उसकी आग मुझाने में ही हमारी भलाई है. और गौतम गर्म लड़का है, आसानी से हम सबको चोद सकता है. हाँ उसकी बाहर की चुदाई पर कुछ अंकुश अवश्य लग जायेगा.”

“ठीक है, माँ जी. अपने सोचा है तो सही ही होगा. पर ये बात अलग से बताने की क्या आन पड़ी थी.”

“मैं ये बात दोनों बच्चों से नहीं करना चाहती और न ही उन्हें कल रात से पहले कुछ भी भनक पड़नी चाहिए.”

“ओके.”

ये कहकर दोनों बैठक में आ गयीं.

*****

जब दोनों वापिस सोफे पर बैठीं तो अनन्या चहकते हुए बोली, “मॉम, मैं आज भी आपके साथ सो जाऊं?”

सभी उसकी इस बात पर हंसने लगे.

अदिति हँसते हुए, “अब तुझे मैं कैसे मना करूँ पर ये बता कि मुझे क्या मिलेगा.”

अनन्या सोच में पड़ गयी फिर बड़ी धीमे स्वर में बोली, “मैं आपकी चूत चाटूँगी. पर आपको मुझे सीखना पड़ेगा.”

अदिति: “हाँ हाँ क्यों नहीं, तुझे तो मैं सिखाऊंगी और फिर दादी तेरी परीक्षा लेंगी कि क्या और कितना सीखा.”

शालिनी: “हाँ ये सही है. तो चलो अब खाना खा लिया जाये नहीं तो ठंडा हो जायेगा.”

अजीत: “कुछ देर और रुको, मैं एक ड्रिंक और लूंगा.”

अदिति उठी और अजीत के गिलास को ले जाने लगी. फिर वो शालिनी के सामने रुकी और पूछा क्या वो भी लेना चाहेगी? शालिनी ने अपना गिलास उसे देते हुए हामी भर दी. अदिति जाने लगी और उसके पीछे गौतम भी चला गया.

गौतम: “मॉम, क्या मुझे भी एक ड्रिंक मिल सकती है. मैं दोस्तों के साथ पीटा हूँ कभी कभी.”

अदिति सोच में पड़ गई, फिर सोचा कि अगर ये चोद सकता हैं तो पीने से रोकना व्यर्थ है. उसने गौतम को एक ग्लास लाने के लिए कहा और ड्रिंक बनाने में लग गई. गौतम ग्लास लाया तो उसके लिए भी अदिति ने ड्रिंक बनाई.

फिर धीरे से बोली, “ये वाला यहीं पी ले, और फिर दूसरा वहां ले चलेंगे.”

गौतम खुश हो गया और दो ही घूँट में अपनी ड्रिंक समाप्त की और अदिति ने उसे नयी ड्रिंक बनाकर दी और फिर दोनों बैठक में चले गए. गौतम के हाथ में ग्लास देखकर सब चौंक गए. फिर अजीत ने अपनी ड्रिंक ली और गौतम को चियर्स कहकर उसके घूँट लेने लगा.

“आपको बुरा तो नहीं लगा कि मैंने गौतम को ड्रिंक दे दी?” अदिति ने अजीत से पूछा.

“मुझे पता है कि ये कभी कभार पीता है. और अब जब हम सब हर चीज़ खुल क्र कर रहे हैं तो ये भी ठीक ही है. कम से कम ये सीमा में रहेगा.”

“थैंक यू, पापा.”

“फिर मैं? “ अनन्या ने पूछा.

“जब तेरा मन करेगा तब पी लेना. पर अभी तो तुझे इसका अनुभव नहीं है तो जितना हो सके इससे दूर ही रह.”

“ओके, पापा. मैं समझ सकती हूँ.”

ड्रिंक के बाद सब खाने के लिए गए और फिर बर्तन रखने के बाद नए प्रबंध के अनुसार अपने कमरों में चले गए. अनन्या अदिति के साथ उसके कमरे में और गौतम शालिनी के साथ उसके कमरे में.

शेष भाग दो में
 
पहला घर: अदिति और अजीत बजाज.

अध्याय १.३

भाग २

************

ड्रिंक के बाद सब खाने के लिए गए और फिर बर्तन रखने के बाद नए प्रबंध के अनुसार अपने कमरों में चले गए. अनन्या अदिति के साथ उसके कमरे में और गौतम शालिनी के साथ उसके कमरे में.

अब आगे..

शालिनी का कमरा

शालिनी गौतम को लेकर अपने कमरे में पहुंची और कमरा लॉक कर दिया. फिर उसने गौतम की ओर देखा और बोली, “मैं बाथरूम से आती हूँ. तब तक चाहे तो दो ड्रिंक बना ले, मेरी उस अलमारी के अंदर रखी है बोतल.”

गौतम: “वाओ, दादी. आप तो बड़ी कलाकार निकलीं.”

शालिनी बाथरूम में गयी और गौतम ने दादी की बताई अलमारी खोली और बोतल ढूंढ निकाली। फिर उसने दो ड्रिंक बनाये और दादी के लिए रुक गया. फिर कुछ सोचकर अपने कपड़े भी उतार दिए और नंगा अपने लंड को सहलाते हुए बैठ गया. शालिनी बाथरूम से निकली तो वो भी निर्वस्त्र ही थी. गौतम को देखकर वो मुस्कुराई.

शालिनी: “हम दोनों के मन एक जैसा सोचने लगे हैं अब तो.” ये कहते हुए वो भड़काती हुई चाल में गौतम के पास आयी और उसकी गोद में बैठ गयी. गौतम के चेहरे को पास लेकर उसने उसे चूमा और फिर उठकर अपनी ड्रिंक ली और उसके सामने बैठ गयी. नंगी दादी निर्लज्जता ने अपने पांव फैलाकर गौतम को अपनी चूत के दर्शन करा रही थी.

“बड़ी औरतें चोदी हैं तूने तो, फिर मेरी जैसी बुढ़िया पर क्यों मरता है?”

“क्योंकि आप मेरी दादी हो, और मेरे लिए आप उन सबसे अधिक सुंदर हो. और आपसे मेरा मन का भी सम्बन्ध है, जबकि उनके साथ केवल शरीर की भूख. और सच कहूँ तो मैंने किसी को नहीं फँसाया, बल्कि उन्होंने ही मुझे फँसाया था और बाद में मुझे इसमें बहुत मजा आने लगा तो रुकने का कोई प्रश्न ही नहीं उठा.”

“ये बात सच है, ये एक ऐसी भूख है जो मिटाने से और बढ़ती है. तेरे दादाजी और मैं एक दूसरे को संतुष्ट करते थे. पर मुझे फिर भी अजीत से अपनी प्यास बुझानी पड़ी. पर ये तय है, अगर अजीत न होता तो मैं किसी और के पास तो किंचित भी नहीं जाती. घर में बात रही तो सब ठीक ठाक चलता रहा.”

“दादाजी को कभी शक नहीं हुआ?”

“मुझे लगता है कि उन्हें पता चल गया था. हालाँकि उन्होंने कभी ये दर्शाया नहीं, पर उनका व्यव्हार अजीत के प्रति बदल गया था. पर तब तक उनकी बीमारी भी बढ़ गयी थी. वो हमेशा अजीत को एक बात कहते थे कि मेरे जाने के बाद शालिनी का पूरा ध्यान रखना, इसे किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं होने देना. इसीलिए मैंने उनके अंतिम दिनों में अजीत का साथ छोड़ दिया था. मैं नहीं चाहती थी कि वे किसी प्रकार के दुःख के साथ जाएँ। “

“बहुत अच्छे आदमी थे न दादी? हम दोनों को तो इतना प्यार करते थे कि हम हमेशा आप लोगों के पास आने को उत्सुक रहते थे.”

दादी के चेहरे पर एक दुःख की छाया सी आयी, जैसे उन्हें कुछ याद सा आया हो. उनकी ऑंखें भीग गयीं.

“क्या हुआ दादी?”

“मुझे अभी उनकी एक बात याद आयी. मुझे लगता है कि उन्हें पक्का पता चल गया था अजीत और मेरे बारे में?”

“कैसे?”

“जाने के कोई एक महीने पहले जब तुम और अनन्या वहाँ हुए थे, तो उन्होंने मुझसे कहा था.

“देखना शालू, तेरा जितना ध्यान अजीत रखता है न, उससे भी अधिक ध्यान तेरा ये पोता गौतम रखेगा. तुझे हर प्रकार का सुख देगा ये. और जब ऐसा हो तो मेरी ये बात याद करना.”

दादी उठी और जाकर दादाजी के चित्र के सामने खड़ी हो गयीं. उन्हें ये आभास भी नहीं हुआ कि वे इस समय निर्वस्त्र हैं.

“आप सच कहते थे. कल तो मैं आपकी बात भूल गयी थी, पर आज मुझे याद आ गयी है. और मैं आपकी स्मृति में इसे भी उतना ही सुख दूंगी जितना ये मुझे देगा.” ये कहकर हाथ जोड़कर वो लौट आयीं, उनकी ऑंखें अभी भी भीगी हुई थीं.

गौतम चुप रहा, उसने कुछ भी कहना उचित नहीं समझा. फिर शालिनी ने अपनी ड्रिंक एक घूँट में समाप्त की और गौतम की गोद में आकर बैठ गयी.

शालिनी के गौतम के होंठों पर अपने होंठ रखे और उसे चूमने लगी. गौतम के हाथ उसकी नंगी पीठ पर रेंगने लगे और फिर उसने उन्हें थोड़ा नीचे शालिनी के नितम्बों पर रखा और उन्हें दबाने लगा.

शालिनी: “मेरी गांड में लंड गए हुए कई दिन हो चुके हैं. तेरा बाप कई बार गांड मारने के लिए कहता है, पर न जाने क्यों मेरा ही मन नहीं किया. हाँ राधा से मैं गांड चटवाती हूँ और वो बहुत स्वाद लेकर चाटती भी है. पर आज तेरे लंड ने इसका बहुत दिनों का उपवास तोडना है, तो बहुत जल्दी मत करना. कल तूने मेरी हड्डियां हिला दी थीं.”

गौतम: “नहीं दादी, मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूँगा. मैं तो कहता हूँ कि आप ऊपर से अपनी गांड में लंड जिससे आप गति और गहराई दोनों पर नियंत्रण रख पाओ. फिर आप जैसे चाहोगी, वैसे ही करेंगे.”

“मेरा प्यारा बच्चा. पहले आकर मेरी चूत और गांड चाटकर थोड़ा मुझे भी तैयार कर दे, फिर मारना मेरी गांड. और फिर चूत , फिर गांड, फिर…”

गौतम हंस कर: “दादी, क्या आज रात भर छोड़ने का मन है? फिर कल क्या करोगी ?”

शालिनी: “कल क्या पता क्या होगा, आज की रात तो मेरी हर इच्छा पूरी करने की है. चल अब उठ.”

शालिनी गौतम के साथ बिस्तर पर गई और घुटनों और कहनी के बल घोड़ी के आसन में आ गयी. उसने अपने कूल्हे कुछ इस प्रकार से ऊँचे उठाये कि उसकी चूत और गांड दोनों ही सामने उभर कर आ गयीं. गौतम ने अपना स्थान लिया और शालिनी की चूत पर पानी उँगलियाँ चलाने लगा. फिर उसने एक ऊँगली अपने मुंह में डालकर उसे गीला किया और शालिनी की चूत में डाल दी. शालिनी की चूत की गर्मी और गीलेपन का उसे तुरंत ही आभास हो गया. वो हल्के से ऊँगली चने लगा और फिर उसे निकल कर अपना मुंह उसपर लगा दिया और बहते हुए स्त्राव को चाटने का प्रयास करने लगा.

चाटते हुए उसे अपनी जीभ को शालिनी की चूत में डाला और उसे अंदर घूमने लगा. शालिनी आनंद के सागर में बह रही थी. उसका शरीर इसके लिए कितनी देर से प्रतीक्षा कर रहा था, ये उसे भी नहीं पता था. गौतम की जीभ उसके अंदरूनी गीलेपन को सहेजने में लगी थी. जब उसे लगा कि उसने इस छेद पर पर्याप्त ध्यान दे लिया है तो उसने अपने चेहरे को ऊपर उठाया और शालिनी के नितम्ब चाटने लगा. वो एक गोलाई में चाट रहा था और उस गोलाई का केंद्र शालिनी की गांड का लुप्लप करता हुआ भूरा छेद था. और ये छेद ऐसे खुल बंद हो रहा था मानो जैसे साँस ले रहा हो.

गौतम कुछ ही समय में अपने केंद्र पर पहुँच गया और उसने शालिनी की गांड के सिलवट पड़े भूरे क्षेत्र को चाटकर उसे गीला कर दिया. फिर हल्के हल्के प्रहारों से वो जीभ से उस छेद पर प्रहार करते हुए उसे खोने का पर्यटन करने लगा. पर वो गुफा का द्वार इतने सरलता से कहने वाला नहीं लग रहा था. अंततः गौतम को अपने दोनों हाथों का भी प्रयोग करना पड़ा और उसे फ़ैलाने के बाद उसे उसके अंदर प्रवेश का रास्ता दिखाई दे ही गया. उसकी जीभ एक सर्प की भांति उस गुफा में प्रवेश कर गई. और शालिनी का पूरा शरीर एक नयी संवेदना से सिहर उठा.

*****

अदिति का कमरा

अदिति, अजीत और अनन्या अपने शयनकक्ष में पहुंचे तो अदिति वहीँ अपने कपड़े निकालने लगी.

अनन्या: “मॉम, पर आपको डॉक्टर ने मना किया है.”

अदिति: “पर क्या तुम अपनी बात इतनी जल्दी भूल गयीं? तुमने मेरी चूत चाटने का वचन दिया था.”

अनन्या: “ओह, हाँ. पर आपको मुझे बताना होगा.”

अदिति: “तेरे पापा को देखना कि वे क्या क्या करते हैं और उसी का अनुशरण करना. इनके जैसा शिक्षक तुझे कभी नहीं मिलेगा.”

अनन्या: “ओके, मॉम.”

अदिति: “अब कपड़े उतार ले, नहीं तो तेरे पापा कैसे चोद पाएंगे तुझे.”

अनन्या ने तुरंत ही अपने कपड़े उतार फेंके. अजीत उसके आईटी उतावलेपन पर हंसने लगा. वो भी अब तक नंगा हो चुका था.

अजीत: “इसे देखकर मुझे तुम्हारी जवानी याद आ गयी, अदिति. याद है हम कमरे में अंदर भी नहीं आ पाते थे और तुम नंगी हो जाया करती थीं.”

अदिति: “याद क्यों नहीं होगा. आज भी तो वही करती हूँ, हाँ पर अब पहले बाथरूम में जाकर मुंह हाथ धोती हूँ. जैसे मैं अब जा रही हूँ.”

अदिति के आने के बाद पहले अजीत और फिर अनन्या भी बाथरूम से होकर आये. जब अनन्या बाहर आयी तो देखा कि अदिति बिस्तर के एक कोने के त्रिकोण पर लेती हुई है और उसके पांव दोनों ओर फैले हुए हैं. अजीत ने अनन्या का हाथ लिया और उसे एक ओर बैठाया और स्वयं दूसरी ओर बैठ गया.

“अब जैसा मैं करूँगा, वैसा ही तुम्हे भी करना है.” अजीत ने उसे समझाया. अनन्या को इस विचित्र आसन का अर्थ तब समझ में आया. इस प्रकार से बाप बेटी एक एक करके बिना हटे हुए अदिति की सेवा कर सकते थे. अजीत ने अदिति की चूत के ऊपर अपनी उँगलियाँ चलाईं और फिर कुछ तेजी से उसे सहला कर छोड़ दिया. अनन्या देख रही थी. जब उसने कुछ भी नहीं किया तो अजीत ने उसे टोका. अनन्या जैसे सोते से जगी और उसने भी उसी प्रकार से अदिति की चूत पर ऊँगली चलकर तेजी से सहला कर छोड़ दिया.

“ऐसा करने से चूत को आभास हो जाता है कि उसकी सेवा होने वाली है और वो भी अपने आपको इसके लिए तैयार करती है. देखो.” ये कहते हुए अजीत ने अदिति की चूत की फाँको को फैलाया तो अनन्या को उसपर कुछ नमी सी दिखी।

इसके बाद अजीत ने अदिति के भग्नाशे पर ऊँगली चलाई और फिर अंत में उसे पकड़ कर हल्के से मसल दिया. फिर उसने अनन्या की ओर देखा तो अनन्या ने वही चरण दोहराये. भग्नाशे के छेड़ने से अदिति एकदम से उत्तेजित हो गयी. इस बार अजीत ने फिर अनन्या को चूत का निरीक्षण कराया. ये समझने में अनन्या को देर नहीं लगी कि अब चूत में नमी की मात्रा बढ़ गयी थी और वो अंदर से भीगी हुई प्रतीत हो रही थी.

“भग्नाशा, जिसे अंग्रेजी में क्लिट कहते हैं, किसी भी स्त्री की उत्तेजना भीषण रूप से बढ़ा देती है. कई स्त्रियां तो केवल इसके मसलने से ही स्खलित हो जाती हैं. ये समझो कि अगर इससे खेलने में निपुण हो गयीं तो तुम किसी भी स्त्री को अपने वश में कर लोगी. अब जो हमने उँगलियों के माध्यम से किया वही तुम्हें अपनी जीभ के द्वारा करना है. पर ये समझो कि जीभ अत्यंत मुलायम होती है तो तेजी से सहलाने के लिए ये काम नहीं आएगी. अब चाटो। ”

जैसे ही अनन्या आगे झुकी तो अदिति की चूत की मादक सुगंध उसके नथुनों में भर गयी. उसने गहरी साँस लेकर उस का आनंद लिया और फिर अपनी जीभ अदिति की चूत पर चलाने लगी. अदिति सिहर उठी. हालाँकि अनन्या ने नया कुछ भी नहीं किया था, परन्तु बस इस भाव से कि उसकी बेटी ने आज पहली बार उसका स्वाद लिया है, अदिति आनंदित हो गयी.

अनन्या आरम्भ में तो बहुत हल्के हल्के चूत को चाटती रही फिर उसे उसका स्वाद और सुगंध इतनी भाई कि वो मन लगाकर कर उसमे रम गई. उसके चाटने से न केवल अदिति को आनंद आ रहा था पर साथ में बैठ कर अजीत भी उसकी अपनी माँ की चूत के प्रति निष्ठा को देख रहा था.

“अदिति, अपनी बेटी को तुम्हारा स्वाद बहुत भा रहा है लगता है. ये तो बिना कुछ और बताये ही देखो कितने प्यार से तुम्हे चाट रही है.”

“सच में, अगर बिना अनुभव के ये इतनी अच्छी है तो कुछ ही दिनों में तो पारंगत हो जाएगी. इसकी दादी बहुत गर्व करेंगी.”

अपनी प्रशंसा सुनकर अनन्या फूली न समायी और अपने प्रयास में और भी तेजी ले आयी. फिर उसे अपनी माँ के भग्नाशे का ध्यान आया और वो उस पर भी जीभ चलाने लगी. फिर न जाने उसे क्या मन में आया उसने उस उभरे हुए फुदकते भग्नाशे को अपने होठों में लिया और उसे होठों से ही मसलने लगी.

अदिति उछल गयी, “उई माँ.” और उसने एक बड़ी धार अनन्या में मुंह पर छोड़ दी. अब अनन्या इस से परिचित नहीं थी तो वो समझी कि अदिति ने पेशाब कर दिया है. पर जैसे ही उसने अपना मुंह हटाया उसने पाया कि उसके पापा उस धार में मुंह लगा चुके हैं. उसे इस बात पर बड़ा अचरज हुआ.

“पापा! वो मम्मी का सूसू था.”

“नहीं, ये मम्मी का रस था जो उसके झड़ने का प्रमाण है. तुमने इतने कम समय में ही इसका रस निकाल दिया. तुम सच में बहुत भी प्रतिभावान हो.”

अब तक अदिति का झड़ना रुक चुका था. उसने अपनी संतुष्टि जताते हुए अनन्या को शाबाशी दी और फिर उठकर बैठ गई.

अदिति: “मेरा तो आज के लिए हो ही गया. अब बस मैं ठीक हो जाऊं तो इसके आगे कुछ होगा.”

अजीत: “वैसे तुम्हें अब कैसा लग रहा है.”

अदिति: “अब मुझे कोई समस्या नहीं है. मैं तो चाहूंगी कि हम डॉक्टर से इसी सप्ताह मिल लें तो ठीक रहेगा. निरीक्षण भी हो जायेगा और आगे के लिए भी पता लग जायेगा. कुछ नहीं तो दवाइयाँ तो बदलेंगी. इन दवाइयों से मुझे बहुत सुस्ती रहती है.”

अजीत: “ठीक है, मैं कल ही उनसे बात करके समय लेता हूँ. परसों जा सकेंगे मेरे विचार से.”

अदिति: “जैसा भी है. अब तुम दोनों खेलो, मुझे तो थकान होने लगी है. ये दवाइयां तो बदल ही दें तो अच्छा होगा.”

ये कहते हुए अदिति बिस्तर की एक ओर लेट गयी और कुछ ही क्षणों में उसकी आंख लग गयी. अजीत अपनी पत्नी की ओर देखता हुआ उसकी स्थिति पर चिंतित सा था.

अनन्या: “पापा, आप डॉक्टर से समय लीजिये. मम्मी मेरे विचार से अब ठीक हैं, अब उनके चलने और झुकने में मुझे कोई समस्या नहीं दिख रही है. और आप भी चिंता मत करो. वो अब ठीक हैं. आप तो बस उनकी चुदाई करने का सही समय देखो. बहुत तरस गयी हैं.”

अजीत: “ठीक तो हो जाये. मैं इसे दिन रात इतना चोदुँगा कि इसकी सारी कमी पूरी क्र दूंगा इतने दिनों की.”

अनन्या: “ये मत भूलिए कि अब आपके पास गौतम भी होगा आपके बोझ बाँटने के लिए.” कहकर अनन्या हंस पड़ी.

अजीत भी हँसते हुए बोला, “हाँ जैसे तू अपनी माँ का बोझ बाँट रही है.” ये कहते हुए उसने अनन्या को चूमा और उसे बिस्तर पर लिटाकर उसकी चूत में अपना मुंह डाल दिया.

*****

शालिनी का कमरा

जिस तन्मयता से गौतम शालिनी की गांड चाट रहा था उसे देख कर ये प्रतीत होता था जैसे वो कोई छप्पन भोग कर रहा हो. उसकी जीभ जहाँ तक सम्भव था शालिनी की गांड में प्रवेश करके उसका रोम रोम को भिगा रही थी. शालिनी भी इस सुख से दुहरी हो रही थी. हालाँकि राधा हर दिन उसे ये सुख देती थी, पर जिस प्रेम और भक्ति से गौतम उसकी गांड को चाट रहा था वो उसमे नहीं थी. जब गौतम को लगा की दादी की गांड अब पूर्ण रूप से उसके लंड के लिए इच्छुक हो गयी है तो वो खड़ा होकर अपने बलशाली लंड को शालिनी के मुंह के पास ले आया.

“दादी, अब थोड़ा इसे भी अपनी गांड में जाने के लिए थोड़ा तैयार कर दो.”

शालिनी ने आव देखा न ताव और तपाक से लंड को मुंह में लिया और चाट चाट कर थूक से रज दिया. गौतम ने अपने थूक से लिपटे हुए लौड़े को दादी के मुंह से निकाला और इस बार उन्हें घोड़ी के आसन में दोबारा लिटा दिया. शालिनी आंख और साँस बंद करके अपनी गांड में अपने पोते के मोटे लौड़े की प्रतीक्षा करने लगी. और उसे अधिक समय रुकना भी नहीं पड़ा. उसे अपनी गांड के छेद पर एक दबाव का आभास हुआ और फिर उसे लगा जैसे उसकी गांड चौड़ी होने लगी है. गौतम ये जानकर कि उसकी गांड बहुत दिन से बंद है और फिर वो गांड उसकी प्यारी दादी की है, एक कछुए की गति से उसमे लंड डाल रहा था.

पक्क की एक हल्की सी ध्वनि के साथ ही गौतम का सुपाड़ा शालिनी की गांड में प्रवेश कर गया. गौतम रुककर इस नए संवेदन का आनंद लेने लगा. चूत और गांड दोनों में बहुत अंतर होता है. जहां चूत अपना रस छोड़कर राह को सरल करने का प्रयास करती है, गांड के पास अपनी रक्षा का ऐसा कोई भी अस्त्र नहीं होता. और इसीलिए भी गांड मारने में बहुत महारथ की आवश्यकता होती है. अनावश्यक जल्दी या तीव्रता दोनों को चोटिल कर सकती है. पर यहाँ गौतम का अन्य स्त्रियों से सीखे हुए गुर काम में आये. उसने मन ही मन अपनी उस प्रोफ़ेसर का धन्यवाद किया जिसने उसे इस राह का सफल यात्री बनाया था.

कुछ पल उस तंग, गर्म और मुलायम कैद का आनंद लेने के बाद उसने पाया कि उसकी दादी सामान्य ही थी तो उसने अपने लंड को धीमी गति से अंदर डालने लगा. शालिनी उसकी इस बाजीगरी पर अचरज में थी. उसे गौतम से इतने धैर्य की आशा नहीं थी. जब लंड ने ४-५ इंच की दूरी तय कर ली तो शालिनी से रहा नहीं गया.

शालिनी: “बेटा, ये ठीक है कि मेरी गांड कई दिन से मारी नहीं गयी है. पर ये ऐसी कोरी भी नहीं कि इतना संभाल के मारे। कुछ तो जोर दिखा. तूने तो कल मेरी हड्डियां चटखा दी थीं, तो आज क्यों ऐसी सुस्ती दिखा रहा है. प्यार से मार पर इतने भी प्यार से नहीं कि मैं यूँ ही मर जाऊं.”

गौतम ये सुनकर कुछ आश्वस्त हुआ और उसने दबाव बढ़ाया और कुछ ही पलों में उसका पूरा लौड़ा उसकी दादी की गांड की गहराई नाप चुका था. अपने लंड के चारों ओर से गर्म करती हुई दादी की गांड की मांस पेशियाँ उसे एक अन्य ही सुख प्रदान कर रही थीं.

“दादी, पूरा लंड खा लिया आपकी गांड ने.”

“तो फिर चोद, प्यार से चोद, पर रुकना मत.”

गौतम अपने लंड को शालिनी की गांड में एक पिस्टन की भांति चलाने लगा. कुछ देर के बाद गांड की पेशियाँ भी ढीली पड़ गयीं और उसकी राह पहले से सरल हो गयी. इस कारण उसने अपनी गति बढ़ा दी. शालिनी को आनंद की अनुभूति हो रही थी जो उसे कई दिनों से अनुभव नहीं हुई थी. पर वो जानती थी कि अब गौतम का लौड़ा उसकी गांड का नियमित यात्री हो जायेगा. उसके मन में ये विचार भी कौंधा कि कल राधा को उसकी गांड से भी नया स्वाद मिलने वाला है.

गौतम को भी अपनी दादी की गांड मारने में बहुत अधिक मजा आ रहा था. अब गांड तो वो पहले भी मार चुका था, पर आज के इस सहवास का आनंद कुछ और था. कुछ दिन पहले वो अपने आप की इस परिस्थिति में देखने का स्वप्न भी नहीं देख सकता था. उसने कभी सोचा भी न था कि एक दिन ऐसा आएगा जब वो न सिर्फ अपनी दादी को चोद पायेगा बल्कि उसकी गांड भी मार लेगा. यही कुछ भावनाएं थीं जिसने उसका मन भटका दिया और उसने अनअपेक्षित रूप से अपनी गति बढ़ा दी. शालिनी ने भी अब अपनी गांड में चल रहे मूसल की कुटाई की बढ़ती हुई चोटों अनुभव किया. पर वो अपने पोते के प्रेम से इतनी विव्हल थी कि उसने कोई आपत्ति नहीं की. बल्कि उल्टा वो उसे प्रोटाहित करते हुए और तेजी से गांड मारने का आव्हान करने लगी.

दादी की इन सीत्कारों से गौतम का ध्यान चल रहे कुकर्म की ओर लौट आया और उसने पाया कि दादी तो उसे और तेज चुदाई के लिए पुकार रही है. गौतम समझ गया कि दादी का असली रूप अब निखार कर सामने आया है और उसे भी थोड़ी ताबड़तोड़ गांड तोडू चुदाई की इच्छा है. फिर क्या था गौतम ने अपने दोनों पांव जोर से जमाये और लम्बे गहरे धक्कों से शालिनी की गांड में लंड पेलने लगा. उसका लंड अब ऐसी तेजी से अंदर बाहर हो रहा था जिसे देख पाना भी असंभव था. शालिनी को भी अपनी गांड में ऐसे चल रहे अपने पोते के लंड से इतना आनंद आ रहा था जिसका वो वर्णन करने में असमर्थ थी.

पर शालिनी की चूत भी गौतम के लंड के प्रहार अनुभव कर रही थी. गांड और चूत के बीच की पतली झिल्ली इस दुविधा में थी कि चुदाई हो किसकी रही है. और जब शालिनी आनंद में झूमने लगी तो उसकी चूत भी अपनी ख़ुशी दिखने के लिए रस छोड़ने लगी. अगर गौतम के धक्के थोड़े भी धीमे होते तो शालिनी अपनी चूत को सहलाने का प्रयास करती. पर इन धक्कों की शक्ति के कारण वो अपना आसन छोड़ने की स्थिति में नहीं थी. पर गौतम की ट्रेनिंग फिर काम में आयी और उसने पैंतरा बदला और बिना गांड में लंड की गति कम किये हुए अपने एक हाथ से शालिनी के भग्नाशे को मसलने लगा.

अब शालिनी से सहन नहीं हुआ और उसकी छूट झरने के समान बहते हुए झड़ने लगी. और जब उसका झड़ना रुका तो शालिनी भी ध्वस्त हो चुकी थी. गौतम भी अब अपने चरम के निकट था तो उसने एक असमान्य सी गति और वहशियाना सी शक्ति के साथ शालिनी की गांड पेलने लगा. और जब शालिनी ढहने लगी तभी गौतम भी झड़ने लगा और दादी की गांड सींचने लगा. अपनी गांड में गिरते हुए रस के आभास से शालिनी कुछ क्षणों के लिए फिर से जाग्रत हुई. पर आयु की सीमा ने उसे फिर शिथिल कर दिया. अपना पूरा रस दादी की गांड में डालने के बाद कुछ देर तक गौतम यूँ ही लंड चलाता रहा और फिर धीमे से बाहर निकालकर शालिनी की बगल में लेट गया.

“सच में बेटा, जिसने भी तुझे सिखाया, उसकी में सदा ऋणी रहूंगी. क्या दमदार चुदाई करता है रे तू. अब ये समझ ले कि मेरी गांड का रखवाला है तू. मेरी गांड मारने का इकलौता लाइसेंस तुझे है. पर थोड़ी देर मुझे अब आराम करने दे फिर मेरी चूत की भी कुछ सेवा कर देना. ”

“आप जैसा कहो, दादी.” कहकर गौतम ने उन्हें बाँहों में भर लिया.

राधा के घर:

गोकुल अपने सामर्थ्य के अनुसार राधा की चुदाई में लगा हुआ था. आज न जाने क्यों राधा को भी इसमें बहुत मजा आ रहा था. उसे ये आभास ही नहीं था कि वो कल गोकुल के जाने की राह देख रही थी. और तो और वो इस समय गोकुल से चुदवा तो रही थी पर उसकी आँखों के आगे अजीत का तगड़ा लंड झूल रहा था. कल रात शायद दादी उसे अजीत को समर्पित करने वाली हैं. इस विचार से राधा एक बार और झड़ गयी. कुछ देर में गोकुल भी अपने रस को उसकी चूत में छोड़कर शांत हो गया. पास में लेते हुए दोनों बात करने लगे.

गोकुल: “क्या हुआ रानी, आज तो तुम्हारा तीन चार बार हो गया.”

राधा बात छुपाते हुए बोली” “आप जा जो रहे हो इतने दिन के लिए. बस इन यादों के ही सहारे निकालने होंगे ये दिन.”

गोकुल: “चिंता न कर मैं जल्दी ही लौट आऊंगा.”

दोनों एक दूसरे की बाँहों में खोये हुए कुछ देर में सो गए.

अभी शेष है...
 
Back
Top