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पहला घर: अदिति और अजीत बजाज.
अध्याय १.३
भाग ३
************
गोकुल: “चिंता न कर मैं जल्दी ही लौट आऊंगा.”
दोनों एक दूसरे की बाँहों में खोये हुए कुछ देर में सो गए.
अब आगे..
एक नया दिन
अगला दिन सबके लिए एक नयी तरंग लाया था. शालिनी की गांड की खुजली मिटी या बढ़ी ये कहना अभी संभव नहीं था. परन्तु ये निश्चित था कि गौरव को उसकी गांड की यात्रा के अब अनगिनत अवसर मिलने थे. गौरव शालिनी के कमरे से बाहर आया तो सामने उसे अनन्या अपने कमरे में जाती हुई दिखी. अनन्या भी उसे देखकर ठहर गई.
दोनों भाई बहन एक दूसरे को देखते रहे फिर लगभग एक ही साथ पूछ पड़े, “कैसी रही रात?
गौतम: “अकल्पनीय, दादी में आज भी वही मादकता और भूख है जो उनकी जवानी में रही होगी. हालाँकि कल उन्होंने कुछ कोमल चुदाई की इच्छा की थी, पर मुझे लगता है कि आगे से ऐसा कम ही होगा. तुम्हारा कैसा रहा?”
अनन्या: “मॉम तो सो गयी थीं जल्दी ही, ये दवाइयाँ सच में उन्हें बहुत सुस्त बना रही हैं. पापा उन्हें कल डॉक्टर के पास ले जायेंगे. कह तो रही हैं कि अब वे अंदर से ठीक अनुभव कर रही हैं और आशा कर रही हैं कि डॉक्टर उन्हें चुदाई की आज्ञा दे देंगे. वैसे कल उन्होंने और पापा ने मुझे चूत चाटना भी सिखाया. और मुझे अच्छा भी लगा. मुझे लगता है कि ये भी अब हमारे सामान्य जीवन का अंग बन जायेगा. फिर पापा ने मुझे फिर उतने ही प्यार से चोदा। मेरा मन तो नहीं भरा पर ये समझना होगा कि वे मुझे धीरे धीरे आगे ले जाना चाहते हैं. अब मैं तुम्हारे जितनी अनुभवी तो हूँ नहीं.”
गौतम: “तुम अधिक भाग्यशाली हो जो कि हर गुर अपनों से ही सीखोगी। मुझे जिन्होंने सिखाया है, उसमे केवल वासना और व्यभिचार था. प्रेम का एक अंश भी नहीं था.”
अनन्या: “ये सच है. चलाओ नहा धोकर मिलते हैं.”
उधर अजीत और अदिति भी तैयार होकर बैठक में पहुँचते हैं. अदिति चाय बनती है और अजीत पेपर पढ़ते हुए टीवी चलकर अदिति के साथ चाय पीता है.
गोकुल का सामान लगा हुआ था. उसकी नौ बजे की बस थी और उसे जल्दी ही निकलना था. गोकुल और राधा तड़के सुबह ही उठकर एक बार और चुदाई कर चुके थे. गोकुल और राधा बंगले में गए और गोकुल को अजीत ने बुलाकर एक लिफाफा दिया.
अजीत: “इसमें मैंने दस हजार रूपये रखे हैं. अगर तुम्हें रहने का प्रबंध ठीक न लगे तो अपने मन का प्रबंध कर लेना. हालाँकि, मुझे नहीं लगता कि इसकी आवश्यकता पड़ेगी. ये पूरा तुम्हारा है, खर्चो या बचाओ, मुझे लौटना मत. अगर उन्हें तुम्हारा काम पसंद आया तो सम्भव है कि आगे भी बुलाएँ और इससे तुम्हारी कमाई बढ़ेगी. वो जो देंगे, यहाँ के वेतन के अतिरिक्त होगा. अब जाओ और अच्छे से रहना.”
गोकुल ने अजीत और अदिति के पाँव चुकार आशीर्वाद लिया और फिर राधा के साथ बाहर चला गया.
अजीत: “रुको दो मिनट, मैं गौतम को कहता हूँ, तुम्हें छोड़ आएगा.” ये कहकर अजीत ने गौतम को फोन लगाया.
गोकुल: “इसकी कोई आवश्यकता नहीं, बाबूजी.”
अजीत: “कोई बात नहीं. बस दो मिनट रुको, गौतम आ ही गया.”
गौतम आया और कार की चाभी लेकर राधा और गोकुल के साथ चला गया. आधे घंटे में वो राधा के साथ लौट आया. अदिति ने राधा के चेहरे पर आंसुओं की दाग देखे तो उसे पास बुलाकर अपने गले से लगा लिया.
“चिंता न कर, इनके अच्छे मित्र हैं, गोकुल को अपने जैसे ही रखेंगे. और तेरा ध्यान हम सब रखेंगे. १० ही तो दिन हैं, यूँ निकल जायेंगे. और जैसा माँ जी ने कहा है, तुझे अकेले नहीं रहना है, उनके साथ ही रहना है. समझी? अब दुखी मत हो और मुंह धोकर खुश हो जा कि गोकुल को इतने महत्वपूर्ण कार्य के लिए चुना गया है.”
राधा बाथरूम में गयी और फिर बाहर निकलकर किचन में चली गयी.
अदिति ने उसे देखा तो बोल पड़ी, “यहाँ क्या करने आयी है. माँ जी तेरी राह देख रही होंगी.”
राधा के मन में तितलियाँ उड़ने लगीं. अब उसे पता तो था ही कल रात क्या हुआ था, सो वो उत्तेजित मन और पैरों से शालिनी के कमरे में चली गई. अब चूँकि घर में पूर्ण उन्मुक्त वातावरण बन ही चुका था तो शालिनी ने कोई कपड़ा नहीं डाला था और वो भी राधा की ही प्रतीक्षा कर रही थी. राधा के ध्यान के बिना भी उसे उपयुक्त प्रेम मिल रहा था, पर आज ये राधा को उस राह पर ले जाने के लिए आवश्यक था जिससे उसका लौटना असम्भव हो.
“बड़ी देर कर दी आने में आज, क्या कर रही थी?”
“माँ जी, इन्हें बस अड्डे तक छोड़ने गई थी. इसीलिए.”
“ये अच्छा किया. कुछ सुबह भी किया गोकुल के साथ या बेचारे को यूँ ही सूखा भेज दिया?”
राधा शर्मा गई.
“एक बाद चुदाई करके गए हैं.”
“ये ठीक किया, अब उसका तो उपवास आरम्भ हो गया. पर तेरी दावत होने वाली है हर रात।”
राधा फिर से शर्मायी पर उसका मन ख़ुशी से उछलने लगा.”
शालिनी ने अपने पांव फैलाये और उसे अपनी चूत दिखाकर बोली, “बड़ी देर से ये तेरी ही राह देख रही है. अब देर न कर, फिर मुझे भी नीचे जाना है.”
राधा ने शालिनी के पांवों के बीच अपना स्थान लिया और उसकी चूत में अपना मुंह डालकर चाटने में व्यस्त हो गयी.
“आज तेरे लिए मैंने अपनी गांड में कुछ बचाकर रखा है. उसका ही स्वाद ले ले.”
राधा जानती थी कि वो गौतम के रस के बारे में कह रही हैं. पर उसने अनिभिज्ञता दर्शाई और अपना मुंह शालिनी की गांड में डालकर चूसने लगी. गौतम के वीर्य का पान करके उसे एक विशिष्ट उत्तेजना हुई. गोकुल ने कभी उसकी गांड को छुआ भी नहीं था. पर उसे शालिनी की गांड में से निकले रस का स्वाद कुछ ऐसा भय कि उसने तय किया कि वो अपनी गांड में से भी इसका स्वाद लेगी.
“कैसा लग रहा है ये नया स्वाद?” शालिनी ने छेड़ते हुए पूछा.
“बहुत अच्छा लग रहा है माँ जी. क्या है ये?”
“मेरे पोते का रस. कल रात में गौतम ने मेरी गांड मारी थी और तेरे लिए मैंने उसका रस संभलकर रखा था. कैसा लगा?”
राधा कुछ नहीं बोली.
“मैं सोच रही थी कि तुझे भी ये रस पिलाऊँ, पर इस बार तेरी गांड से निकालकर। और ये तो कुछ बासी सा है, जब ताज़ा पीयेगी तो इसकी दीवानी हो जाएगी.” शालिनी बोलती रही.
“माँ जी, क्या आपने भी ये पिया है कभी? “
“बिलकुल, जब अजीत मेरी गांड मारता था तो मैं अपनी गांड से निकाल कर पीती थी. कुछ कठिनाई होती है, पर हो जाता है. अब जब तू करेगी तब जानेगी.”
राधा ने शालिनी की गांड को पूरा साफ कर दिया तो शालिनी ने उसे हटने को कहा.
“बाकी आज रात में करेंगे. तू आज से मेरे ही साथ सोयेगी. चल अब नीचे भी जाना है.”
ये कहते हुए शालिनी उठी और कपड़े डालकर राधा को लेकर किचन में चली गयी.
अदिति ने राधा को छेड़ते हुए पूछा, “चाय पीयेगी या मुंह का स्वाद नहीं बदलना चाहती. कैसा लगा तुझे नया स्वाद?”
राधा शरमाते हुए बोली: “अच्छा लगा, दीदी.”
अदिति: “मेरे बेटे का था, तुझे पता है न?”
राधा: “जी. माँ जी ने बताया.”
अदिति कुछ गंभीर होकर: “देख राधा, तू इस घर में हमारे परिवार जैसी है, ये तुझे अच्छे से पता है. बच्चे तुझे मौसी और तू मुझे दीदी कहती है. तुझे हम सबकी कसम कभी ये बात बाहर नहीं जाये.”
राधा: “दीदी, मैं सुगंध कहती हूँ, कभी ऐसा नहीं होगा. पर मुझे इनके (गोकुल) के बारे में भी कुछ सोचना होगा. उन्हें अगर कुछ शक हुआ तो मैं कुछ भी नहीं कर पाऊंगी.”
अदिति: “इसके बारे में भी इन्होने (अजीत) ने कुछ सोचा हुआ है. दो तीन दिन रुक, फिर बताती हूँ, वो कुछ तय कर लें उसके बाद.”
राधा: “जी दीदी. पर उन्हें कोई परेशानी न हो.”
अदिति: “कैसी बात करती है, तेरा पति ही तो मेरा भी कुछ हुआ न? चिंता छोड़. सबके जाने का समय हो रहा है. हम बाद में भी बातें कर सकती हैं.”
तीनों महिलाएं अपने काम में व्यस्त हो गयीं. जब नाश्ता लगा तो राधा गौतम से आंख नहीं मिला पा रही थी.
गौतम: “मौसी, मुझसे कोई गलती हो गयी क्या? मुझसे नाराज़ लग रही हो.”
राधा हड़बड़ा गई: “नहीं नहीं, ऐसा कुछ नहीं. बस इनके बारे में सोच रही थी. कैसे रहेंगे इतने दिन मेरे बिना.”
अजीत: “मेरा अच्छा मित्र है जहां भेजा है और उसे कह भी दिया है कि मेरे परिवार का ही सदस्य है गोकुल. निश्चिन्त रह, वो मुझसे भी अधिक ध्यान रखेगा उसका.”
राधा ने सिर हिलाकर स्वीकृति दी और अपने काम में लग गयी.
अजीत ने गौतम और अनन्या को सम्बोधित करते हुए कहा: “देखो, मौसी का ध्यान रखना. उसे अकेलापन नहीं लगना चाहिए बिलकुल भी.”
दोनों बच्चों ने उन्हें विश्वास दिलाया और नाश्ता करके वे तीनों अपने अपने गंतव्य की ओर निकल गए.
शालिनी और अदिति के बीच आँखों से कुछ संकेत हुआ और वे मुस्कुराकर बैठक में चली गयीं.
बैठने के बाद शालिनी ने अदिति से पूछा, “क्या सोचा है अजीत ने?”
अदिति: “माँ जी, मुझे अभी बताया नहीं कुछ. पर ये जो काम दिलाया है, इसमें गोकुल को हर महीने १० दिन के लिए जाना होगा. पैसा भी उसे अच्छा मिलेगा. पर इससे अधिक कुछ भी नहीं बताया.”
शालिनी: “इसकी आज चुदाई तो हो ही जानी है. और फिर इसे लंड के बिना रहा नहीं जायेगा. गोकुल इसे पूरा संतुष्ट नहीं कर पाता है. पर मैं सोच रही थी कि क्यों न हम भी इसकी चूत का स्वाद लें?”
अदिति: “मुझे कोई आपत्ति नहीं. आज रात आप शुभारम्भ करो फिर मैं भी बाद में किसी दिन चख लूंगी।”
फिर दिनचर्या और अन्य बातों में समय निकल गया. दोपहर को अपने नियत कार्यक्रम के अनुसार अदिति और शालिनी ने एक दूसरे की चूत और गांड चाटी और कुछ देर के लिए सो गयीं. ५ बजे से परिवार के सदस्य लौटने लगे. और ७ बजे तक समय निकल गया जब अजीत लौटा. अजीत नहाने के बाद आया और उसके हाथ में अदिति ने ड्रिंक दी. शालिनी को भी एक ड्रिंक थमा दी गयी. बाहर की बातों में समय व्यतीत हो गया. अदिति ने बताया की समर्थ और जॉय के बच्चों का सम्बन्ध पक्का हो गया है और सगाई अगले महीने है. ये बात सुनकर सब अनन्या के विषय में सोचने लगे पर अजीत ने कहा कि अभी उसके विवाह की आयु नहीं है. अगर कोई विशेष ही बात हो जाये तो अलग, अन्यथा अगले वर्ष ही वो इस विषय में कुछ सोचेगा.
आठ बजे खाना खाने के समय राधा की ऑंखें अजीत से हट नहीं रही बार उसे अजीत का तना खड़ा हुआ मूसल जैसा लंड याद आ रहा था. अगर उसने गलत नहीं सोचा था तो आज की रात उसकी खुदाई होनी थी. शालिनी ये सब देखकर मन ही मन मुस्कुरा रही थी. खाने के बाद शालिनी ने राधा से कहा कि वो अपने कुछ कपड़े लेकर नौ बजे उसके कमरे में आ जाये. बार बार कपड़ों के लिए घर जाने की आवश्यकता नहीं होगी. उधर अदिति ने अनन्या को आज अपने ही कमरे में सोने को कहा क्योंकि उन्हें सुबह ही डॉक्टर के पास जाना था. चूँकि उनके डॉक्टर को कहीं जाना था तो उसने उन्हें सुबह जल्दी बुलाया था सात बजे तक. अनन्या मन मसोस कर अपने कमरे में चली गयी. शालिनी ने गौतम को बुलाया और उसे कुछ समझाया और उसे भी उसके कमरे में भेज दिया.
नौ बजने में देर नहीं लगी और राधा अपने हाथ में एक छोटा सा बैग लेकर शालिनी के कमरे में जा पहुंची
शालिनी ने उसे देखा तो बाँहों में ले लिया.
फिर पूछा, “ बड़ी अच्छी खुशबु आ रही है, नहा कर आयी है?”
राधा ने शर्माकर हामी भरी.
“ये अच्छा किया. अब आ जा. तेरे नए जीवन की नयी रात है. और अब जो तू मेरे साथ ही रहेगी कुछ दिन तो हम सखियों जैसे ही रहेंगी.”
राधा ने फिर केवल हामी ही भरी. उसका मन तेज गति से धड़क रहा था और वो देख रही थी कि अभी तक अजीत नहीं आये थे. तभी शालिनी ने उसका चेहरा ऊपर किया और उसके होंठ चूम लिए.
“जिसकी राह देख रही है, वो भी आएगा. पर कुछ ठहर कर. तब तक हम अपना खेल खेलते हैं. अब तू भी कपड़े उतार दे, देखूं तो सही कैसी लगती है नंगी होने के बाद.”
अब चूँकि राधा कभी शालिनी के सामने निर्वस्त्र नहीं हुई थी तो थोड़ी झिझकी.
शालिनी ने उसे समझाया, “जिस खेल जो खेलने वाली है, उसमे शर्म और झिझक का कोई स्थान नहीं होता. अगर इसका सुख लेना है, तो अपने आपको बिलकुल निर्लज्ज बनाकर खेल, नहीं तो न मन संतुष्ट होगा न ही तन.”
राधा भी समझ तो चुकी ही थी, सो वो कुछ ही देर में नंगी हो गयी. शालिनी ने उसे भरपूर दृष्टि से निहारा और उसने जो देखा वो सच में सुंदर था. हाँ राधा का रंग अवश्य थोड़ा सांवला था पर उसमे जो आकर्षण था वो कई गोरी स्त्रियों में भी नहीं होता. और तो और उसका शरीर बेहद सुडौल और भरा हुआ था. अंग प्रत्यंग बिलकुल सांचे में ढाले गए हों जैसे.
शालिनी: “अरे राधा, तू तो सच में बहुत सुन्दर है. क्यों छुपाती है अपनी ये सुंदरता?” ये कहते हुए शालिनी ने अपने भी वस्त्र उतारे और राधा को खींच कर उसके होंठ चूमने लगी. राधा के शरीर में मानो आग सी लग गयी. शालिनी उसे यूँ ही चूमते हुए बिस्तर पर ले गयी और उसे लिटा दिया.
शालिनी: “ हर दिन तू मेरी चूत चाटती है न, आज मुझे तेरा स्वाद लेने दे.”
ये कहते हुए उसने राधा के पांव फिलाये और अपना मुंह राधा की चूत में डाल दिया. राधा चिहुंक पड़ी. उसकी चूत में कभी किसी ने मुंह नहीं लगाया था. गोकुल हर बार उसे इसके लिए मना कर देता था. पर आज उसे इसका भी अनुभव होना निश्चित था. उसने अपना शरीर ढीला किया और अपने आपको शालिनी के वश में छोड़ दिया.
शालिनी की अनुभवी जीभ और मुंह के पराक्रम से राधा अधिक देर अपने आप को न रोक सकीय. कल रात ही से वो एक उत्तजेना में थी जिसे शालिनी के स्पर्श ने एक बांध के समान तोड़ दिया था. शालिनी ने बिना रुके राधा के रस का सेवन किया. उसे इस बात का कोई क्लेश नहीं था कि राधा उनकी नौकरानी थी. उसे उन्होंने सदैव ही अपने परिवार का ही जो समझा था. जब राधा का ज्वर उतरा तो वो एकदम से निढाल हो गयी.
“माँ जी. ऐसा तो मेरे साथ कभी नहीं हुआ.”
“क्यों गोकुल के साथ ऐसे नहीं झड़ती है क्या?”
“नहीं माँ जी. मजा तो बहुत आता है, पर ऐसा कभी नहीं हुआ.”
“अभी तूने जीवन में कुछ देखा नहीं है मेरी बन्नो. असली सुख तो तुझे अब मिलने वाला है. अब मैं तेरे मुंह पर बैठूंगी और तू मेरी चूत चाटना। ”
ये कहते हुए शालिनी उठी और राधा के मुंह पर अपनी चूत लगा दी. इस कार्य में अभ्यस्त राधा चूत केंद्र तक चाटने लगी. तभी उसे ऐसा लगा जैसे कोई दरवाजा खुला और बंद हुआ. पर ये तो बाथरूम की ओर से ध्वनि आयी थी. राधा ने इसे अपनी कल्पना समझा और शालिनी की चूत में मुंह गढ़ाए रही. फिर उसे अपने दोनों पांव किसी के द्वारा फ़ैलाने का आभास हुआ. और फिर एक मुंह उसकी चूत पर लगा और उसे चूसने लगा. राधा समझ गयी की अजीत आ चुके हैं और आज उसकी भरपूर चुदाई होगी.
उसकी पानी छोड़ती हुई चूत भी इस बात का संकेत दे रही थी कि उसकी प्रतीक्षा समापन पर है. शालिनी ने राधा से कहा कि जब तक वो न कहे अपने ऑंखें बंद ही रखे, नहीं तो कार्यक्रम बंद कर दिया जायेगा. ये बताते हुए वो राधा के मुंह से हट गयी और बंद आँखों से राधा ने अनुभव किया कि उसकी चूत पर से मुंह हटा और फिर दोबारा लगा. ये मुंह मुलायम था अर्थात अजीत ने शालिनी को स्थान दे दिया था. फिर उसने अपने सिर के पास कुछ हलचल का आभास किया. और उसके मुंह से कुछ छुआ. उसकी सांसों ने ये भान कर लिया कि ये किसी का लंड ही है क्योंकि उसके नथुनों में उसकी गंध घर कर गयी. पर डर के मारे उसने ऑंखें बंद ही रखी पर उसकी साँसे अब तीव्र गति से चलने लगीं और मन उसी गति से धड़कने लगा.
उसे शालिनी की पुकार कहीं दूर से आती हुई सुनाई दी, “ आँख खोल ले बन्नो और अपने आज के दूल्हे का स्वागत कर.”
राधा ने धीरे से अपनी आंखे खोलीं और अपने आँखों के सामने एक मोटे बड़े लम्बे लंड को झूलता हुआ पाया. उसने अपनी आँखें ऊपर उठाकर अजीत की ओर देखा तो वो हतप्रभ रह गयी. ये अजीत नहीं, बल्कि गौतम था. और कल उसने दूर से जो लंड देखा था अगर वो बड़ा था तो पास से देखने पर ये लंड तो भयावह लग रहा था. उसकी साँस रुक सी गयीं, क्या ये लंड मेरी चूत में जायेगा? वो ये सोच ही रही थी कि उसे किसी ने बुलाया.
“मौसी, क्या इसको प्यार नहीं करोगी?” ये गौतम था और उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट थी.
“ गौतम बेटा तुम? मैं तो समझी थी कि ..’”
“पापा होंगे. वो भी आएंगे मौसी, पर आज नहीं. दादी ने आज आपको खुश करने का कार्य मुझे सौंपा है. और इसके लिए आपको मेरे लंड को प्यार से तैयार करना होगा.”
अध्याय १.३
भाग ३
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गोकुल: “चिंता न कर मैं जल्दी ही लौट आऊंगा.”
दोनों एक दूसरे की बाँहों में खोये हुए कुछ देर में सो गए.
अब आगे..
एक नया दिन
अगला दिन सबके लिए एक नयी तरंग लाया था. शालिनी की गांड की खुजली मिटी या बढ़ी ये कहना अभी संभव नहीं था. परन्तु ये निश्चित था कि गौरव को उसकी गांड की यात्रा के अब अनगिनत अवसर मिलने थे. गौरव शालिनी के कमरे से बाहर आया तो सामने उसे अनन्या अपने कमरे में जाती हुई दिखी. अनन्या भी उसे देखकर ठहर गई.
दोनों भाई बहन एक दूसरे को देखते रहे फिर लगभग एक ही साथ पूछ पड़े, “कैसी रही रात?
गौतम: “अकल्पनीय, दादी में आज भी वही मादकता और भूख है जो उनकी जवानी में रही होगी. हालाँकि कल उन्होंने कुछ कोमल चुदाई की इच्छा की थी, पर मुझे लगता है कि आगे से ऐसा कम ही होगा. तुम्हारा कैसा रहा?”
अनन्या: “मॉम तो सो गयी थीं जल्दी ही, ये दवाइयाँ सच में उन्हें बहुत सुस्त बना रही हैं. पापा उन्हें कल डॉक्टर के पास ले जायेंगे. कह तो रही हैं कि अब वे अंदर से ठीक अनुभव कर रही हैं और आशा कर रही हैं कि डॉक्टर उन्हें चुदाई की आज्ञा दे देंगे. वैसे कल उन्होंने और पापा ने मुझे चूत चाटना भी सिखाया. और मुझे अच्छा भी लगा. मुझे लगता है कि ये भी अब हमारे सामान्य जीवन का अंग बन जायेगा. फिर पापा ने मुझे फिर उतने ही प्यार से चोदा। मेरा मन तो नहीं भरा पर ये समझना होगा कि वे मुझे धीरे धीरे आगे ले जाना चाहते हैं. अब मैं तुम्हारे जितनी अनुभवी तो हूँ नहीं.”
गौतम: “तुम अधिक भाग्यशाली हो जो कि हर गुर अपनों से ही सीखोगी। मुझे जिन्होंने सिखाया है, उसमे केवल वासना और व्यभिचार था. प्रेम का एक अंश भी नहीं था.”
अनन्या: “ये सच है. चलाओ नहा धोकर मिलते हैं.”
उधर अजीत और अदिति भी तैयार होकर बैठक में पहुँचते हैं. अदिति चाय बनती है और अजीत पेपर पढ़ते हुए टीवी चलकर अदिति के साथ चाय पीता है.
गोकुल का सामान लगा हुआ था. उसकी नौ बजे की बस थी और उसे जल्दी ही निकलना था. गोकुल और राधा तड़के सुबह ही उठकर एक बार और चुदाई कर चुके थे. गोकुल और राधा बंगले में गए और गोकुल को अजीत ने बुलाकर एक लिफाफा दिया.
अजीत: “इसमें मैंने दस हजार रूपये रखे हैं. अगर तुम्हें रहने का प्रबंध ठीक न लगे तो अपने मन का प्रबंध कर लेना. हालाँकि, मुझे नहीं लगता कि इसकी आवश्यकता पड़ेगी. ये पूरा तुम्हारा है, खर्चो या बचाओ, मुझे लौटना मत. अगर उन्हें तुम्हारा काम पसंद आया तो सम्भव है कि आगे भी बुलाएँ और इससे तुम्हारी कमाई बढ़ेगी. वो जो देंगे, यहाँ के वेतन के अतिरिक्त होगा. अब जाओ और अच्छे से रहना.”
गोकुल ने अजीत और अदिति के पाँव चुकार आशीर्वाद लिया और फिर राधा के साथ बाहर चला गया.
अजीत: “रुको दो मिनट, मैं गौतम को कहता हूँ, तुम्हें छोड़ आएगा.” ये कहकर अजीत ने गौतम को फोन लगाया.
गोकुल: “इसकी कोई आवश्यकता नहीं, बाबूजी.”
अजीत: “कोई बात नहीं. बस दो मिनट रुको, गौतम आ ही गया.”
गौतम आया और कार की चाभी लेकर राधा और गोकुल के साथ चला गया. आधे घंटे में वो राधा के साथ लौट आया. अदिति ने राधा के चेहरे पर आंसुओं की दाग देखे तो उसे पास बुलाकर अपने गले से लगा लिया.
“चिंता न कर, इनके अच्छे मित्र हैं, गोकुल को अपने जैसे ही रखेंगे. और तेरा ध्यान हम सब रखेंगे. १० ही तो दिन हैं, यूँ निकल जायेंगे. और जैसा माँ जी ने कहा है, तुझे अकेले नहीं रहना है, उनके साथ ही रहना है. समझी? अब दुखी मत हो और मुंह धोकर खुश हो जा कि गोकुल को इतने महत्वपूर्ण कार्य के लिए चुना गया है.”
राधा बाथरूम में गयी और फिर बाहर निकलकर किचन में चली गयी.
अदिति ने उसे देखा तो बोल पड़ी, “यहाँ क्या करने आयी है. माँ जी तेरी राह देख रही होंगी.”
राधा के मन में तितलियाँ उड़ने लगीं. अब उसे पता तो था ही कल रात क्या हुआ था, सो वो उत्तेजित मन और पैरों से शालिनी के कमरे में चली गई. अब चूँकि घर में पूर्ण उन्मुक्त वातावरण बन ही चुका था तो शालिनी ने कोई कपड़ा नहीं डाला था और वो भी राधा की ही प्रतीक्षा कर रही थी. राधा के ध्यान के बिना भी उसे उपयुक्त प्रेम मिल रहा था, पर आज ये राधा को उस राह पर ले जाने के लिए आवश्यक था जिससे उसका लौटना असम्भव हो.
“बड़ी देर कर दी आने में आज, क्या कर रही थी?”
“माँ जी, इन्हें बस अड्डे तक छोड़ने गई थी. इसीलिए.”
“ये अच्छा किया. कुछ सुबह भी किया गोकुल के साथ या बेचारे को यूँ ही सूखा भेज दिया?”
राधा शर्मा गई.
“एक बाद चुदाई करके गए हैं.”
“ये ठीक किया, अब उसका तो उपवास आरम्भ हो गया. पर तेरी दावत होने वाली है हर रात।”
राधा फिर से शर्मायी पर उसका मन ख़ुशी से उछलने लगा.”
शालिनी ने अपने पांव फैलाये और उसे अपनी चूत दिखाकर बोली, “बड़ी देर से ये तेरी ही राह देख रही है. अब देर न कर, फिर मुझे भी नीचे जाना है.”
राधा ने शालिनी के पांवों के बीच अपना स्थान लिया और उसकी चूत में अपना मुंह डालकर चाटने में व्यस्त हो गयी.
“आज तेरे लिए मैंने अपनी गांड में कुछ बचाकर रखा है. उसका ही स्वाद ले ले.”
राधा जानती थी कि वो गौतम के रस के बारे में कह रही हैं. पर उसने अनिभिज्ञता दर्शाई और अपना मुंह शालिनी की गांड में डालकर चूसने लगी. गौतम के वीर्य का पान करके उसे एक विशिष्ट उत्तेजना हुई. गोकुल ने कभी उसकी गांड को छुआ भी नहीं था. पर उसे शालिनी की गांड में से निकले रस का स्वाद कुछ ऐसा भय कि उसने तय किया कि वो अपनी गांड में से भी इसका स्वाद लेगी.
“कैसा लग रहा है ये नया स्वाद?” शालिनी ने छेड़ते हुए पूछा.
“बहुत अच्छा लग रहा है माँ जी. क्या है ये?”
“मेरे पोते का रस. कल रात में गौतम ने मेरी गांड मारी थी और तेरे लिए मैंने उसका रस संभलकर रखा था. कैसा लगा?”
राधा कुछ नहीं बोली.
“मैं सोच रही थी कि तुझे भी ये रस पिलाऊँ, पर इस बार तेरी गांड से निकालकर। और ये तो कुछ बासी सा है, जब ताज़ा पीयेगी तो इसकी दीवानी हो जाएगी.” शालिनी बोलती रही.
“माँ जी, क्या आपने भी ये पिया है कभी? “
“बिलकुल, जब अजीत मेरी गांड मारता था तो मैं अपनी गांड से निकाल कर पीती थी. कुछ कठिनाई होती है, पर हो जाता है. अब जब तू करेगी तब जानेगी.”
राधा ने शालिनी की गांड को पूरा साफ कर दिया तो शालिनी ने उसे हटने को कहा.
“बाकी आज रात में करेंगे. तू आज से मेरे ही साथ सोयेगी. चल अब नीचे भी जाना है.”
ये कहते हुए शालिनी उठी और कपड़े डालकर राधा को लेकर किचन में चली गयी.
अदिति ने राधा को छेड़ते हुए पूछा, “चाय पीयेगी या मुंह का स्वाद नहीं बदलना चाहती. कैसा लगा तुझे नया स्वाद?”
राधा शरमाते हुए बोली: “अच्छा लगा, दीदी.”
अदिति: “मेरे बेटे का था, तुझे पता है न?”
राधा: “जी. माँ जी ने बताया.”
अदिति कुछ गंभीर होकर: “देख राधा, तू इस घर में हमारे परिवार जैसी है, ये तुझे अच्छे से पता है. बच्चे तुझे मौसी और तू मुझे दीदी कहती है. तुझे हम सबकी कसम कभी ये बात बाहर नहीं जाये.”
राधा: “दीदी, मैं सुगंध कहती हूँ, कभी ऐसा नहीं होगा. पर मुझे इनके (गोकुल) के बारे में भी कुछ सोचना होगा. उन्हें अगर कुछ शक हुआ तो मैं कुछ भी नहीं कर पाऊंगी.”
अदिति: “इसके बारे में भी इन्होने (अजीत) ने कुछ सोचा हुआ है. दो तीन दिन रुक, फिर बताती हूँ, वो कुछ तय कर लें उसके बाद.”
राधा: “जी दीदी. पर उन्हें कोई परेशानी न हो.”
अदिति: “कैसी बात करती है, तेरा पति ही तो मेरा भी कुछ हुआ न? चिंता छोड़. सबके जाने का समय हो रहा है. हम बाद में भी बातें कर सकती हैं.”
तीनों महिलाएं अपने काम में व्यस्त हो गयीं. जब नाश्ता लगा तो राधा गौतम से आंख नहीं मिला पा रही थी.
गौतम: “मौसी, मुझसे कोई गलती हो गयी क्या? मुझसे नाराज़ लग रही हो.”
राधा हड़बड़ा गई: “नहीं नहीं, ऐसा कुछ नहीं. बस इनके बारे में सोच रही थी. कैसे रहेंगे इतने दिन मेरे बिना.”
अजीत: “मेरा अच्छा मित्र है जहां भेजा है और उसे कह भी दिया है कि मेरे परिवार का ही सदस्य है गोकुल. निश्चिन्त रह, वो मुझसे भी अधिक ध्यान रखेगा उसका.”
राधा ने सिर हिलाकर स्वीकृति दी और अपने काम में लग गयी.
अजीत ने गौतम और अनन्या को सम्बोधित करते हुए कहा: “देखो, मौसी का ध्यान रखना. उसे अकेलापन नहीं लगना चाहिए बिलकुल भी.”
दोनों बच्चों ने उन्हें विश्वास दिलाया और नाश्ता करके वे तीनों अपने अपने गंतव्य की ओर निकल गए.
शालिनी और अदिति के बीच आँखों से कुछ संकेत हुआ और वे मुस्कुराकर बैठक में चली गयीं.
बैठने के बाद शालिनी ने अदिति से पूछा, “क्या सोचा है अजीत ने?”
अदिति: “माँ जी, मुझे अभी बताया नहीं कुछ. पर ये जो काम दिलाया है, इसमें गोकुल को हर महीने १० दिन के लिए जाना होगा. पैसा भी उसे अच्छा मिलेगा. पर इससे अधिक कुछ भी नहीं बताया.”
शालिनी: “इसकी आज चुदाई तो हो ही जानी है. और फिर इसे लंड के बिना रहा नहीं जायेगा. गोकुल इसे पूरा संतुष्ट नहीं कर पाता है. पर मैं सोच रही थी कि क्यों न हम भी इसकी चूत का स्वाद लें?”
अदिति: “मुझे कोई आपत्ति नहीं. आज रात आप शुभारम्भ करो फिर मैं भी बाद में किसी दिन चख लूंगी।”
फिर दिनचर्या और अन्य बातों में समय निकल गया. दोपहर को अपने नियत कार्यक्रम के अनुसार अदिति और शालिनी ने एक दूसरे की चूत और गांड चाटी और कुछ देर के लिए सो गयीं. ५ बजे से परिवार के सदस्य लौटने लगे. और ७ बजे तक समय निकल गया जब अजीत लौटा. अजीत नहाने के बाद आया और उसके हाथ में अदिति ने ड्रिंक दी. शालिनी को भी एक ड्रिंक थमा दी गयी. बाहर की बातों में समय व्यतीत हो गया. अदिति ने बताया की समर्थ और जॉय के बच्चों का सम्बन्ध पक्का हो गया है और सगाई अगले महीने है. ये बात सुनकर सब अनन्या के विषय में सोचने लगे पर अजीत ने कहा कि अभी उसके विवाह की आयु नहीं है. अगर कोई विशेष ही बात हो जाये तो अलग, अन्यथा अगले वर्ष ही वो इस विषय में कुछ सोचेगा.
आठ बजे खाना खाने के समय राधा की ऑंखें अजीत से हट नहीं रही बार उसे अजीत का तना खड़ा हुआ मूसल जैसा लंड याद आ रहा था. अगर उसने गलत नहीं सोचा था तो आज की रात उसकी खुदाई होनी थी. शालिनी ये सब देखकर मन ही मन मुस्कुरा रही थी. खाने के बाद शालिनी ने राधा से कहा कि वो अपने कुछ कपड़े लेकर नौ बजे उसके कमरे में आ जाये. बार बार कपड़ों के लिए घर जाने की आवश्यकता नहीं होगी. उधर अदिति ने अनन्या को आज अपने ही कमरे में सोने को कहा क्योंकि उन्हें सुबह ही डॉक्टर के पास जाना था. चूँकि उनके डॉक्टर को कहीं जाना था तो उसने उन्हें सुबह जल्दी बुलाया था सात बजे तक. अनन्या मन मसोस कर अपने कमरे में चली गयी. शालिनी ने गौतम को बुलाया और उसे कुछ समझाया और उसे भी उसके कमरे में भेज दिया.
नौ बजने में देर नहीं लगी और राधा अपने हाथ में एक छोटा सा बैग लेकर शालिनी के कमरे में जा पहुंची
शालिनी ने उसे देखा तो बाँहों में ले लिया.
फिर पूछा, “ बड़ी अच्छी खुशबु आ रही है, नहा कर आयी है?”
राधा ने शर्माकर हामी भरी.
“ये अच्छा किया. अब आ जा. तेरे नए जीवन की नयी रात है. और अब जो तू मेरे साथ ही रहेगी कुछ दिन तो हम सखियों जैसे ही रहेंगी.”
राधा ने फिर केवल हामी ही भरी. उसका मन तेज गति से धड़क रहा था और वो देख रही थी कि अभी तक अजीत नहीं आये थे. तभी शालिनी ने उसका चेहरा ऊपर किया और उसके होंठ चूम लिए.
“जिसकी राह देख रही है, वो भी आएगा. पर कुछ ठहर कर. तब तक हम अपना खेल खेलते हैं. अब तू भी कपड़े उतार दे, देखूं तो सही कैसी लगती है नंगी होने के बाद.”
अब चूँकि राधा कभी शालिनी के सामने निर्वस्त्र नहीं हुई थी तो थोड़ी झिझकी.
शालिनी ने उसे समझाया, “जिस खेल जो खेलने वाली है, उसमे शर्म और झिझक का कोई स्थान नहीं होता. अगर इसका सुख लेना है, तो अपने आपको बिलकुल निर्लज्ज बनाकर खेल, नहीं तो न मन संतुष्ट होगा न ही तन.”
राधा भी समझ तो चुकी ही थी, सो वो कुछ ही देर में नंगी हो गयी. शालिनी ने उसे भरपूर दृष्टि से निहारा और उसने जो देखा वो सच में सुंदर था. हाँ राधा का रंग अवश्य थोड़ा सांवला था पर उसमे जो आकर्षण था वो कई गोरी स्त्रियों में भी नहीं होता. और तो और उसका शरीर बेहद सुडौल और भरा हुआ था. अंग प्रत्यंग बिलकुल सांचे में ढाले गए हों जैसे.
शालिनी: “अरे राधा, तू तो सच में बहुत सुन्दर है. क्यों छुपाती है अपनी ये सुंदरता?” ये कहते हुए शालिनी ने अपने भी वस्त्र उतारे और राधा को खींच कर उसके होंठ चूमने लगी. राधा के शरीर में मानो आग सी लग गयी. शालिनी उसे यूँ ही चूमते हुए बिस्तर पर ले गयी और उसे लिटा दिया.
शालिनी: “ हर दिन तू मेरी चूत चाटती है न, आज मुझे तेरा स्वाद लेने दे.”
ये कहते हुए उसने राधा के पांव फिलाये और अपना मुंह राधा की चूत में डाल दिया. राधा चिहुंक पड़ी. उसकी चूत में कभी किसी ने मुंह नहीं लगाया था. गोकुल हर बार उसे इसके लिए मना कर देता था. पर आज उसे इसका भी अनुभव होना निश्चित था. उसने अपना शरीर ढीला किया और अपने आपको शालिनी के वश में छोड़ दिया.
शालिनी की अनुभवी जीभ और मुंह के पराक्रम से राधा अधिक देर अपने आप को न रोक सकीय. कल रात ही से वो एक उत्तजेना में थी जिसे शालिनी के स्पर्श ने एक बांध के समान तोड़ दिया था. शालिनी ने बिना रुके राधा के रस का सेवन किया. उसे इस बात का कोई क्लेश नहीं था कि राधा उनकी नौकरानी थी. उसे उन्होंने सदैव ही अपने परिवार का ही जो समझा था. जब राधा का ज्वर उतरा तो वो एकदम से निढाल हो गयी.
“माँ जी. ऐसा तो मेरे साथ कभी नहीं हुआ.”
“क्यों गोकुल के साथ ऐसे नहीं झड़ती है क्या?”
“नहीं माँ जी. मजा तो बहुत आता है, पर ऐसा कभी नहीं हुआ.”
“अभी तूने जीवन में कुछ देखा नहीं है मेरी बन्नो. असली सुख तो तुझे अब मिलने वाला है. अब मैं तेरे मुंह पर बैठूंगी और तू मेरी चूत चाटना। ”
ये कहते हुए शालिनी उठी और राधा के मुंह पर अपनी चूत लगा दी. इस कार्य में अभ्यस्त राधा चूत केंद्र तक चाटने लगी. तभी उसे ऐसा लगा जैसे कोई दरवाजा खुला और बंद हुआ. पर ये तो बाथरूम की ओर से ध्वनि आयी थी. राधा ने इसे अपनी कल्पना समझा और शालिनी की चूत में मुंह गढ़ाए रही. फिर उसे अपने दोनों पांव किसी के द्वारा फ़ैलाने का आभास हुआ. और फिर एक मुंह उसकी चूत पर लगा और उसे चूसने लगा. राधा समझ गयी की अजीत आ चुके हैं और आज उसकी भरपूर चुदाई होगी.
उसकी पानी छोड़ती हुई चूत भी इस बात का संकेत दे रही थी कि उसकी प्रतीक्षा समापन पर है. शालिनी ने राधा से कहा कि जब तक वो न कहे अपने ऑंखें बंद ही रखे, नहीं तो कार्यक्रम बंद कर दिया जायेगा. ये बताते हुए वो राधा के मुंह से हट गयी और बंद आँखों से राधा ने अनुभव किया कि उसकी चूत पर से मुंह हटा और फिर दोबारा लगा. ये मुंह मुलायम था अर्थात अजीत ने शालिनी को स्थान दे दिया था. फिर उसने अपने सिर के पास कुछ हलचल का आभास किया. और उसके मुंह से कुछ छुआ. उसकी सांसों ने ये भान कर लिया कि ये किसी का लंड ही है क्योंकि उसके नथुनों में उसकी गंध घर कर गयी. पर डर के मारे उसने ऑंखें बंद ही रखी पर उसकी साँसे अब तीव्र गति से चलने लगीं और मन उसी गति से धड़कने लगा.
उसे शालिनी की पुकार कहीं दूर से आती हुई सुनाई दी, “ आँख खोल ले बन्नो और अपने आज के दूल्हे का स्वागत कर.”
राधा ने धीरे से अपनी आंखे खोलीं और अपने आँखों के सामने एक मोटे बड़े लम्बे लंड को झूलता हुआ पाया. उसने अपनी आँखें ऊपर उठाकर अजीत की ओर देखा तो वो हतप्रभ रह गयी. ये अजीत नहीं, बल्कि गौतम था. और कल उसने दूर से जो लंड देखा था अगर वो बड़ा था तो पास से देखने पर ये लंड तो भयावह लग रहा था. उसकी साँस रुक सी गयीं, क्या ये लंड मेरी चूत में जायेगा? वो ये सोच ही रही थी कि उसे किसी ने बुलाया.
“मौसी, क्या इसको प्यार नहीं करोगी?” ये गौतम था और उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट थी.
“ गौतम बेटा तुम? मैं तो समझी थी कि ..’”
“पापा होंगे. वो भी आएंगे मौसी, पर आज नहीं. दादी ने आज आपको खुश करने का कार्य मुझे सौंपा है. और इसके लिए आपको मेरे लंड को प्यार से तैयार करना होगा.”