• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest कैसे कैसे परिवार

अग्रिमा का कमरा:

अग्रिमा अपने कमरे में जाकर बाथरूम में घुस गयी और नहाकर तौलिया लपेटे हुए बाहर आयी और अपने भाइयों की प्रतीक्षा करने लगी. कुछ ही समय में असीम और कुमार भी आ गए. अग्रिमा अब सोच रही थी कि उसने जोश में अधिक ही मांग लिया. पर अब तीर चल चुका था और दोनों भी कमरे में भी आ चुके थे. अग्रिमा के चेहरे के भाव असीम ने पढ़ लिए.

असीम: “देख अगर तुझे लगता है कि कुछ नहीं करना है, तो कोई बात नहीं है. दिल करे तभी कुछ करना. नहीं तो बाद में दुखी हो जाएगी.”

अग्रिमा: “नहीं भाई, चुदवाने का तो मन पूरा है, पर आप दोनों को एक साथ झेलने का बूता अभी मेरा नहीं है.”

असीम: “हमने तो ये सोचा ही नहीं. अधिक से अधिक एक को चूसेगी और एक से चुदेगी। और वो भी प्यार से जैसे मॉम ने कहा है. तेरे भाई हैं दुश्मन नहीं.”

अग्रिमा: “तो फिर हमें समय नहीं गँवाना चाहिए.” कहते हुए अग्रिमा ने अपने तौलिये को ढ़ीला किया तो वो सरककर नीचे गिर गया और अग्रिमा का मनमोहक शरीर दोनों भाइयों के ऑंखें चौंधियाने लगा.

असीम और कुमार तुरंत ही अपने कपडे निकालकर नंगे हो गए. अग्रिमा ने उन्हें बिस्तर पर बैठने के लिए कहा और फिर उनके सामने बैठकर उनके लंड चूसने लगी.

असीम और कुमार ने उसे अपनी मन भर कर उनके लौडों को चूसने दिया फिर उसे उठाया।

“हमें भी कुछ चखने को दे दो अब तो.”

ये कहकर असीम बिस्तर पर लेटा और अग्रिमा को कुमार ने अपनी चूत असीम के मुंह पर रखने के लिए कहा. अग्रिमा उलटी होकर असीम में मुंह पर बैठी और असीम ने अपनी लपलपाती जीभ को उसकी कमसिन चूत की चाशनी चाटने के लिए अंदर धकेल दिया. अग्रिमा काँप उठी और वो अभी इस अनुभव का आनंद ही ले रही थी कि उसे अपनी गांड के ऊपर कुछ रेंगता हुआ अनुभव हुआ. उसने मुड़कर देखा तो कुमार अपनी जीभ से उसकी गांड कुरेद रहा था. आनंद विभोर होकर अग्रिमा ने एक गहरी साँस ली और अपने शरीर को अपने दोनों भाइयों को सौंप दिया.

असीम और कुमार इस विद्या में प्रवीण थे. उन्हें घर और बाहर दोनों से इन दोनों बिलों को कैसे आनंदित किया जाता है, की भरपूर शिक्षा दीक्षा प्राप्त थी. अग्रिमा को इसका आनंद एक साथ कम ही मिलता था क्योंकि वो जब भी इन्हें अपनी माँ और सलोनी की चुदाई करते देखती थी तो उसे एक भय सताता था कि खिन उसके साथ ऐसा किया तो क्या होगा. पर आज उसने अपने आप को समर्पित कर दिया था. और दोनों ने उसे विश्वास भी दिलाया था कि वो उसे उतने ही प्यार से चोदेगे जितने प्यार से उसे उसके पिता आशीष और दादा जीवन चोदते हैं.

अपने दोनों छेदों में चल रही जीभ का ही ये प्रभाव था कि अग्रिमा जल्दी ही अपने रस से असीम के चेहरे को भिगाने लगी. उसकी कसी तंग चूत अब अधिकाधिक रस छोड़ रही थी. उसका शरीर भी इस दोहरे प्रहार से अपने आप को प्रफुल्लित अनुभव कर रहा था. जब अग्रिमा दो तीन बार झड़ गयी तो असीम का चेहरा इतना भीग चुका था कि उसके लिए अब और रुकना असंभव था. उसने हाथ के संकेत से कुमार को कहा कि अब बस करो.

कुमार ने अग्रिमाा की गांड से अपना मुंह हटाया और उसके नितम्बों पर हल्की सी चपत लगाई. अग्रिमाा ने पाने आप को असीम के मुंह से उठाया.

“अब कुछ चुदाई हो जाये.”

अग्रिमाा ने सिर हिलाया.

“तो ऐसा है कि पहले असीम आपकी चुदाई करेंगे और तुमरे लंड को चूसोगी और फिर हम दोनों अपने स्थान बदलेंगे.”

“पर आप में से कोई भी मेरी गांड मारने का प्रयास नहीं करेगा.”

असीम हँसते हुए, “पता है, मॉम ने पहले ही तुम्हारी गांड से दूर रहने को कहा है. पर एक बात बताओ, क्यों नहीं तुम पापा से अपनी गांड मरवा ही लेतीं, जिससे हमारे लिए भी ये उपलब्ध हो जाये.”

“पहले भाग्या को चोद लो, फिर मेरी गांड में लंड डालने के बारे में सोचना.”

“अरे, बकरी की माँ कब तक खैर मनाएगी. उसे तो चुदना ही हमसे, बस दिन गईं रहे हैं.”

“तो इसके लिए भी गिनो. अब छोड़ो और जो मिल रहा है उसको ही चोद लो.”

कुमार बिस्तर पर लेटा और अग्रिमाा ने उसके लंड को अपने मुंह में लिया और बड़े प्यार से चूसने लगी. असीम ने उसके पीछे जाकर उसकी चूत में अपने लंड को धीरे से डाला और कुछ ही देर में पूरे लंड को अंदर कर दिया. फिर वो हल्के धक्कों के साथ उसकी चुदाई करने लगा. अग्रिमाा कुमार के लंड को चूसने में मस्त थी और उसे भी अपनी चूत की ये धीमी चुदाई बहुत मजा दे रही थी. उसे पता था कि अगर उसने गलती से भी थोड़ा तेज चोदने के लिए बोला तो उसके भाई लोग उसकी चूत की धज्जियाँ उड़ा देंगे.

असीम अपने आप को संभालते हुए उसे बड़े प्यार से चोदता रहा. उसने समय देखकर गति कुछ बढ़ाई पर इतनी नहीं कि अग्रिमाा को परेशानी हो. इस प्यार भरी चुदाई से अग्रिमाा झड़ने लगी और जब वो दो बार झड़ गयी तो उसके भाइयों ने अपने स्थान बदले. कुमार असीम से कुछ अधिक तीव्रता से चोद रहा था, पर अब तक अग्रिमाा की चूत असीम के लंड और अपने स्खलन से उसकी इस चुदाई को सरलता से सहन कर रही थी. उसका शरीर अब उसका साथ छोड़ रहा था. उसकी चूत भी अब बिना रुके रस बहा रही थी.

अंत में अग्रिमाा एक और बार झड़ी और वीर निढाल हो गयी. कुमार ने अपने लंड को बाहर निकाला और असीम और वो दोनों मुठ मारने लगे. उन्होंने अग्रिमाा को सीधा किया और उसे अपना मुंह खोलने के लिए कहा. जैसे ही रस की फुहार निकलीं तो अग्रिमाा के चेहरे पर और मुंह में कामरस की बौछार हो गयी. दोनों भाइयों ने अग्रिमाा को वीर्य का स्नान करने के बाद ही अपने लौडों को छोड़ा. अग्रिमाा के चेहरे पर सफ़ेद गाढ़ा चिपचिपा वीर्य बह रहा था. उसके चेहरे पर एक असीम संतुष्टि के भाव थे. उसने अपनी उँगलियों से वीर्य को एकत्रित किया और अपने मुंह में डाल लिया.

“सच में आज मुझे आप दोनों ने इतना आनंद दिया है कि इसकी मैं तुलना नहीं कर सकती. मैं व्यर्थ ही आपसे चुदवाने में संकोच कर रही थी. अब आप जब चाहो, तब मेरी इस प्रकार की चुदाई कर सकते हो.”

“जब तक तुम ऐसी चुदाई चाहोगी, ऐसी ही करेंगे. जिस दिन तुम्हारा मन बदला उस दिन भी हम तुम्हें पूरी संतुष्टि देंगे.”

“आज आप दोनों यहीं सो जाओ. आज के लिए इतना ही, पर मैं अकेले नहीं सोना चाहती.”

“ठीक है, चलो अब मुंह धो लो, फिर सोते हैं.”

“नहीं, मुझे इसी प्रकार से सोना है.”

ये सुनकर कुमार ने बत्ती बंद की और दोनों भाई अग्रिमाा के अगल बगल लेट गए और कुछ ही देर मैं सब सो गए.

*******

अगले दिन:

आशीष सुबह जल्दी निकल गया. असीम और कुमार भी अग्रिमा के कमरे से अपने कमरे में आकर कुछ देर और सो रहे थे. नौ बजे सलोनी ने उन्हें जाकर जगाया और दोनों नाश्ते के लिए आ गए. नाश्ते के बाद सब अपने अपने काम में लग गए. असीम और कुमार दोपहर का खाना खाकर बाहर चले गए. अग्रिमा अपने कमरे में ही रही. शाम होने को थी. सुनीति के पास किसी का फोन आया. बात करने के बाद उसके चेहरे पर एक ख़ुशी छा गयी. छह बजे तक आशीष भी आ गए. और उनके पीछे पीछे असीम और कुमार भी.

सभी लोग बैठक में बैठे तो सुनीति ने कहा, “आज मधुजी का फोन आया था. उन्होंने बताया कि स्मिता ने असीम के लिए स्वीकृति दी है. अब हमारे पास एक सप्ताह का समय है अगर हम मना करना चाहें तो. पर एक बात है, कि जो भी निर्णय हम उन्हें बताएँगे, वो तथस्ट होगा. बदलने की अनुमति नहीं है.”

आशीष: “मेरे विचार से महक और असीम को एक दिन के लिए साथ घूमने के लिए भेजो. हाँ, उन्हें अपनी सीमा में रहना है. और अगर इसके बाद वो दोनों एक दूसरे को ठीक समझते हैं तो हमें भी स्वीकृति दे देनी चाहिए.”

सुनीति: “ये ठीक है, मैं एक बार मधुजी से इसके लिए पूछ लेती हूँ.” उसने फोन पर बात की और बताया कि इसमें कोई आपत्ति नहीं है. फिर उसने स्मिता से बात की और उसकी स्वीकृति के बाद कहा कि असीम और मख ही ये निश्चित करें कि उन्हें कब जाना है.

अब आशीष बोला: “मैं जिस अनुबंध के लिए गया था वो हमारी खेतों की उपज को सीधे रिसोर्ट को देने का है. मनोहर जी के ऐसे पाँच और रिसोर्ट हैं और हमें उन पाँचों को अपनी उपज देनी होगी.”

सुनीति: “पर इतनी कैसे पूरी पड़ेगी उनके लिए?”

आशीष: “पिताजी ने उनके चारोँ मित्रों के खेत, जिसमे तुम्हारे पिताजी के खेत भी हैं, एक ही मैनेजर के प्रबंध में दिए हैं. मेरे विचार से वे भी इस अनुबंध का अपरोक्ष रूप से भागीदार बन सकेंगे. हम उन सबसे उपज लेकर सीधे रिसोर्ट को देंगे. उन्हें और हमें सबको इसमें लाभ मिलेगा.”

सुनीति: “अपने पापाजी से बात की? या अपने ही आप सब तय कर लिया.”

आशीष: “आज करूंगा. अभी तो अपने ही आप तय किया है. मुझे इसमें सबका लाभ दिख रहा है.”

सुनीति (कुछ चिंता से): आप पापाजी से बात कर लीजिये, अभी.”

आशीष: :ओके, बेबी.”

आशीष ने फिर जीवन से बात की और उसे नए अनुबंध के बारे में बताया और उनके मित्रों की उपज खरीदने का भी प्रयोजन समझाया. जीवन ने कहा कि वो सबसे बात करेगा और कुछ ही देर में बताएगा. जीवन का एक घंटे बाद फोन आया और उसने कहा कि उसके मित्र इस अनुबंध से खुश हैं, परन्तु वो आशीष की कम्पनी को दो प्रतिशत फीस देने की जिद किये बैठे हैं. उनका कहना है कि अधिकतर कार्य और आशंका के लिए आशीष को ही उत्तरदायी मन जायेगा. इसीलिए, ये फीस उसे लेनी चाहिए. अंत में आशीष ने भी स्वीकार किया और सब ने इसे स्वीकृति दे दी.

जीवन का गाँव, कुछ दिन बाद:

आज जीवन और गिरी अपने शहर लौट रहे थे. बलवंत और गीता भी उनके साथ थे. बलवंत ने भी एक ड्राइवर बुला लिया था जो उसकी गाड़ी शहर छोड़कर लौटेगा. निकलते समय गिरी की आँखों में आंसू थे. वो सबसे गले मिल मिलकर रो रहा था. सभी उसके इस अश्रुपूर्ण आलिंगन का अपनी ओर से भी यथावत उत्तर दे रहे थे. स्त्रियों ने विशेषकर उसके आलिंगन का भरपूर साथ दिया. इन दस दिनों में उसकी सेक्स की ऊर्जा लौट आयी थी और इसके लिए वो इन सबका हमेशा के लिए आभारी था. इन दस दिनों में उसने हर स्त्री के हर अंग को भरपूर भोगा था. उनके पति भी उसे इसके लिए उत्साहित करते रहे थे. मुंह, चूत हो या गांड कोई भी छेद अछूता नहीं रहा था. वो इस समय को कभी नहीं भूल सकते थे.

गिरी: “आपको कभी भी लगे की ऐसी कोई भी समस्या है जिसमे मैं आपकी सहायता कर सकता हूँ तो मुझे अवश्य बताना. आप ने मुझे नया जीवनदान दिया है, और इसके लिए मैं आपका सदैव के लिए ऋणी रहूंगा.”

उन सबको घर आने का निमंत्रण देकर वो गाड़ी में बैठने लगा तो उसे पीछे से निर्मला ने अपनी बाँहों में ले लिया.

“भाईसाहब, आप भी जब चाहें हमारे घर आईये. वैसे भी हमारे गाँव में वैद्य की बड़ी कमी है.”

सब इस बात पर हँसते हुए एक दूसरे से विदा लिए और गाड़ियां शहर की ओर दौड़ पड़ीं.

********

अगली बार मिलेंगे अगले परिवार से
 
तीसरा घर: शीला और समर्थ सिंह

अध्याय ३.३

भाग १

*********

सुरेखा का घर:

संजना आज फिर शाम को अपनी मौसी के घर की ओर जा रही थी. मौसी ने उसे अपने घर की एक चाबी भी दे दी थी जिससे वो बिना रोक टोक उनके घर में जा सके. सुप्रिया के घर पहुंचकर संजना ने घर खोला और अंदर देखा तो मौसी घर पर नहीं थी. उसने वहीँ बैठकर उनके लौटने का निर्णय लिया. जब वो सोफे पर बैठी हुई थी तो उसे लगा कि मौसी के कमरे से कुछ आवाज़ आ रही है. पहले तो वो डर गयी फिर उसने सोचा कि हो सकता है मौसी घर में ही हों और सोकर उठी हों. उसने मौसी के कमरे में जाने का विचार किया. आखिर वैसे भी मौसी उसे अपने ही कमरे में ले जाकर ही उसकी चूत चाटती जो हैं. एक निश्छल मुस्कराहट के साथ उसने मौसी के कमरे का दरवाजा खोला.

इससे पहले कि वो कुछ कह पति सामने चल रहे व्यभिचार ने उसके मन को झकझोर दिया. मौसी इस समय बिस्तर पर पाँव फैलाकर कर लेटी हुई थीं और एक लड़का उनकी जोर जोर से चुदाई कर रहा था. उसे लगा कि वो उसका मौसेरा भाई नितिन है, पर कुछ ही क्षणों में इसकी पुष्टि भी हो गयी.

मौसी चुदवाती हुई चीख रही थी, “चोद मुझे नितिन, फाड़ दे मेरी चूत को. और जोर से चोद.”

पर जिस बात ने उसे विस्मय में डाला वो नितिन ने कहि, “मॉम, आज तुम्हारी अच्छी चुदाई तो कर रहा हूँ, पर कुछ अधिक ही रोमांचित लग रही हो, संजना आने वाली है क्या आज भी?”

संजना को आश्चर्य्य हुआ कि नितिन को उसके और मौसी के बारे में पता था. पर उसने सोचा कि हो सकता है, बताया हो. वो दरवाजे पर खड़ी होकर आगे के बात सुनने लगी.

सुप्रिया: “हाँ, बहुत प्यारी बच्ची है. मन ही नहीं भरता है मेरा उसके अमृत से. सच में मैं भाग्यशाली हूँ जो मुझे उसका रस पीने को मिलता है. पर आज मैं उसे अपनी चूत से तेरे रस का भी स्वाद देना चाहती हूँ. अब जल्दी कर, वो आती ही होगी.”

संजना स्तब्ध थी. उसने कमरे को बंद किया और घर से निकल गयी. मौसी ऐसा क्यों कर रही हैं मेरे साथ? ये सोचते हुए उसने एक बार अपनी नानी के पास जाने का विचार किया. वो नानी से ये तो नहीं कह सकती थी, पर न जाने उसे अभी उनके पास जाना श्रेयस्कर लगा. उसकी माँ तो मौसी का ही पक्ष लेंगीं. क्या पता कि इसमें वो भी मिली हुई हों.

शीला के घर पहुँचने में संजना को अधिक देर नहीं लगी. और सदा की तरह वो घर में बिना घंटी बजाए घुस गयी. देखा तो टीवी चल रहा था, पर कोई देखने वाला नहीं था. वो अपनी नानी के कमरे में गयी तो उसका रहा सहा संयम भी टूट गया. यहाँ निखिल उसकी नानी की चुदाई कर रहा था. और उसे आश्चर्य हुआ कि नाना वहीँ पास में बैठे हुए थे. इसके पहले कि कोई उसे देखता वो वहां से भाग खड़ी हुई.

अब घर जाने के सिवाय कोई और चारा नहीं था. घर पहुंची तो उसने सीधे अपने कमरे की राह ली. पर उसके कमरे के पहले सजल का कमरा था और उसे लगा कि उसमे से भी भीं आवाजें आ रही हैं को सुप्रिया मौसी के कमरे में उसने सुनी थीं. उसने सोचा कि लगता है सजल ने कोई गर्लफ्रेंड ढूंढ ही ली है और आज मजा करने के लिए उसे साथ लाया है. उसने चोरी चोरी उसकी जासूसी करने के मन से धीरे से दरवाजा खोलकर झाँका. अब आज का अंतिम धक्का भी उसे घर में ही लगना था. सजल के साथ उसकी गर्लफ्रेंड नहीं थी, बल्कि उनकी मॉम थी जो इस समय सजल के लंड पर उछल रही थी. संजना ने धीरे से दरवाजा बंद किया और अपने कमरे में चली गयी.

वहां वो जाकर बिस्तर पर लेट गयी और आज की घटनाओं के बारे में चिंतन करने लगी. मौसी अपने बेटे से चुदवा रही थीं. दादी अपने पोते से. और तो और माँ ने उसकी चूत भी चाटी थी और आज वो भी अपने बेटे से चुद रही है. क्या ये सामान्य है? ऐसा संबंध कैसे बन सकता है. फिर उसने अपने पापा के बारे में सोचा. सजल ने उससे कहा था कि वो उसे कुछ बताना चाहता है. माँ की चूत से बाहर आएगा तो बताएगा. संजना ने मन में ही रोष से सोचा. फिर सोचा कि अगर सब चुदाई में व्यस्त हैं तो उसे क्यों छोड़ा हुआ है? अगर ये गलत नहीं है, तो उसे भी चुदने का अधिकार है.

कुछ देर इस विचार को और बल देने के पश्चात् वो साहस करके उठी और सजल के कमरे की ओर चल दी.

*******

सुप्रिया का घर:

नितिन अपने कमरे में जा चुका था और सुप्रिया अभी भी संजना की प्रतीक्षा कर रही थी, आधे घंटे रुकने के बाद उसने संजना को फन किया पर उसने फोन नहीं उठाया तो सुप्रिया ने समझ लिया कि आज संजना आने वाली नहीं है. उसने घर को अंदर से बंद किया जिससे कि कोई आ न सके और फिर नितिन के कमरे में चली गयी. नितिन अपने कंप्यूटर पर बैठा कुछ काम कर रहा था. उसने सुप्रिया को देखा।

नितिन: “क्या हुआ मॉम, संजना नहीं आयी क्या?”

सुप्रिया: “हाँ, फोन भी नहीं उठा रही है. आज नहीं ही आएगी लगता है. तो अगर अब तुम मेरी गांड की भी खुजली मिटा सको तो अच्छा होगा.”

सुप्रिया ने अपने शरीर पर डले एकमात्र गाउन को उतारकर एक ओर फेंककर नितिन को निमंत्रण दिया. नितिन ने अपने आप को कंप्यूटर से अलग किया और उठते हुए अपने शॉर्ट को उतारा और सुप्रिया को बहिन में ले लिया.

नितिन: “ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि आप कहें और मैं आपकी गांड की खुजली न मिटाऊं.”

माँ बेटा नंगे ही बिस्तर की ओर बढ़ चले..

********

शीला का घर:

निखिल ने शीला की चुदाई करने के बाद उनके बगल में लेटे हुए अपने दादा दादी से पूछा.

निखिल: “दादी, आपको दिंची क्लब कब जाना है?”

शीला: “तेरे डैड कह रहे हैं कि जिस दिन नए कैमरे लगाने वाले आएंगे उस दिन सही रहेगा.”

समर्थ ने बताया कि वे कब आ रहे हैं.

निखिल: “ठीक है, दादी मैं पार्थ से उस दिन के लिए आपका समय निर्धारित करता हूँ.” और फिर कुछ सोचकर, “आपके लिए एक नया आश्चर्य भी मिलना है, तो आप अपने आपको संभालिएगा.”

शीला के बहुत पूछने पर भी निखिल ने अपने पत्ते नहीं खोले. शीला ने समझ लिया तो उसने समर्थ से कहा कि क्यों न वे दोनों उसकी एक बार डबल चुदाई करें। समर्थ ऐसे प्रस्ताव को अस्वीकार करने वाला तो था नहीं. और कुछ ही देर में उसका लौड़ा शीला की गांड भेद रहा था जबकि निखिल उसकी चूत में लंड गढ़ाए हुआ था.

********

सुरेखा का घर:

सजल के कमरे में जाने से पहले संजना को कुछ सुझा तो वो लौटकर अपने कमरे में गयी. और अपना काम करके सजल के कमरे के सामने खड़ी हो गयी. उसने अपने मन को समझाया कि सब ठीक ही होगा, और फिर मन को दृढ किया और धीरे से दरवाजा खोला और अंदर कदम रखा. फिर उसने पलट के दरवाजा फिर से बंद किया. सोफे पर बैठ कर वो अपने भाई और माँ की चुदाई को देखती रही. आज पहली बार उसने अपनी माँ चुदती हुई देखी थी और हालाँकि वो जहां थी वहां से उसके चेहरे को तो नहीं देख पा रही थी पर उनकी सिसकारियां और कमर के तेज झटके उसे इस बात का आभास दे रहे थे कि वो भी उसके ही समान प्यासी थी. और उसका भाई तो बस लेटकर माँ को ही सब करने दे रहा था. उसे लगा कि हो न हो, ये भी नया खिलाडी ही है.

जब सुरेखा झड़ते हुए थक गयी तो उसने अपनी चूत में से लंड निकाला।

“तेरा नहीं हुआ न? मैं तो थक गयी हूँ. चूस कर निकाल देती हूँ तेरा.”

“ओके, मॉम.” सजल ने कहा.

सुरेखा पलट कर सजल के लंड को मुंह में लेकर चाटने लगी.

“मैं कुछ सहायता करूं, मॉम?” संजना ने सोफे पर ही बैठे हुए पूछा.

माँ बेटा चौंक गए. सुरेखा के चेहरे का रंग ही सफेद हो गया.

“तुम तुम कब आईं ? अंदर कैसे आईं ? तुम तो मौसी के घर जाने वाली थी न?” सुरेखा हकलाते हुए पूछ रही थी.

संजना उनके पास पहुंचकर बोली, “गयी तो थी, पर मौसी व्यस्त थीं.” फिर उसने सुरेखा की आँखों में झाँका और आगे बोला, “क्या है न मॉम, गयी तो नितिन दादा मौसी को चुदाई कर रहे थे. तो मैं उनके खेल में विघ्न न डालकर वहां से निकल गयी.”

संजना अब सजल के लंड पर अपना हाथ रखते हुए बोली. “अच्छा मोटा लंड है न मॉम भाई का?”

सुरेखा ने हाँ में सर हिलाया.

“वैसे मॉम, मैं यहां सीधे नहीं आयी. पहले नानी के घर गयी थी. पर वहां नानी भी व्यस्त थीं.” सुरेखा की आँखों में देखकर वो बताती गयी, “निखिल दादा उनकी चुदाई कर रहे थे. और मॉम, नाना वहीं बैठे देख रहे थे.”

अब सुरेखा से रहा नहीं गया.

“अब जब तू सब जान ही चुकी है तो पहले इसके लंड को चूस लेते हैं हम दोनों, फिर मैं तुम्हे पूरी बात बताती हूँ.”

ये कहकर माँ बेटी सजल के लंड पर टूट पड़े.

संजना को लंड चूसने का अनुभव तो था नहीं, इसीलिए उसने अपनी माँ का अनुशरण करने में ही भलाई समझी. वो ये सोचते हुए मुस्कुरा उठी कि चूत चाटने काज्ञान मौसी दे रही हैं तो लंड चूसने का माँ. अब नानी क्या सिखाएंगी, ये देखना होगा. सुरेखा के सिद्ध और संजना के अटपटे लंड चूसने से सजल का अधिक देर ठहर पाना सम्भव नहीं था. और वो संजना द्वारा बताई हुए नए विस्फोटक सच्चाई के बारे में भी उत्सुक था.

सजल ने बताया कि वो अब झड़ने ही वाला है. तो सुरेखा ने उसे उसके मुंह में ही झड़ने के लिया कहा.

सजल का फौहारा सुरेखा के मुंह में ही छूटा.

सुरेखा से संजना ने कहा: “मॉम, मुझे भी चखाओ न.”

सुरेखा ने रस अपने मुंह से संजना के मुंह में डाला और दोनों एक दूसरे को चूमते हुए सजल के रस को एक दूसरे के मुंह में डालते हुए जितना जिसके मुंह था पी लिया. सजल का लंड अभी भी मुरझाया नहीं था.

सुरेखा: “कैसा लगा तुझे ये स्वाद.”

संजना: “मुझे तो कोई स्वाद नहीं आया, पर सम्भव है कि अभ्यास से इसका भी चस्का लग जाये.”

सुरेखा: “मेरा तो मनपसंद व्यंजन है. कुछ दिन रुक फिर देख.”

सजल अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए बोला, “मैं भी यहीं हूँ.”

संजना ने उसके लंड को चूमकर उससे कहा, “थैंक यू, भैया.”

सजल: “जब मन चाहे आ जाया कर, और मॉम अब तुम्हें भी जब मन चाहे आ जाया करो.”

सुरेखा: “आज मेरे कमरे में चलते हैं.” फिर संजना की ओर देखकर, “तुम दोनों को हमारे परिवार के बारे में बताने का भी समय आ ही गया है.”

तीनों उठे और नंगे ही सुरेखा के कमरे की ओर चल दिए.

*******

सुरेखा ने अपनी बात आरम्भ की:

“कुछ दिनों पहले मैं नानी के घर गयी थी, ऑफिस से सीधे. ये उस दिन की बात है जब तुम्हारे पापा बाहर गए थे. उस दिन पहली बार मुझे तुम्हारे ननिहाल के सच्चे संबंधों के बारे में पता चला. उस दिन तुम्हारी सुप्रिया मौसी, निखिल और नितिन दोनों नाना नानी के घर पर थे. और उस दिन मैंने उन्हें एक दूसरे के साथ चुदाई करते हुए देखा.” सुरेखा ने गहरी साँस ली और आगे बताया, “तुम्हारे पापा ने मेरे साथ किसी भी प्रकार का सेक्स संबंध बंद कर दिया था, कोई एक साल पहले ही. तो मैं भी वो सब देखकर कामांध सी हो गयी. उस दिन पहली बार तुम्हारे नाना ने मेरी चुदाई की. उन्होंने उस दिन मुझे जो सुख दिया वो मेरे लिए अकल्पनीय था. हाँ सजल के साथ मुझे उससे अधिक आनंद आता है, पर मैं अपनी बात से भटक रही हूँ.”

“उस दिन के बाद जैसे मेरे जीवन का दर्शन ही बदल गया. नानी, सुप्रिया, नितिन, निखिल. सब मेरे साथ चुदाई के खेल में जुड़ गए. कुछ बार तो मैंने उनमे से दो से भी एक साथ चुदाई की है. पर कुछ कमी थी. वो कमी मुझे सुप्रिया को अपने बेटों से चुदवाती हुई देखकर होती थी. तो मैंने सजल से छुड़ाने का निश्चय तो कर ही लिया था. समस्या ये थी कि ये होगा कैसे. और नियति ने वो अवसर मेरी झोली में स्वयं ही डाल दिया. संजना, हमें अभी चुदाई करते हुए कुछ ही दिन हुए हैं.”

संजना के मन में जो बहुत दिन से था वो पूछ ही बैठी, “मॉम, पापा के साथ क्या समस्या थी, क्या वो पहले से ऐसे थे या एकदम से ही उन्होंने आपको छोड़ दिया था.”

सुरेखा कुछ देर इस प्रश् पर विचार करती रही. फिर कुछ गंभीर चिंतन के साथ बोली, “जब तुमने यूँ पूछा है तो मुझे अब ये आभास हो रहा है कि ये एकाएक ही हुआ था. वे अपने विदेशी दौरे पर जाने के पहले ठीक थे, पर आने के बाद......” सुरेखा सोच में डूबी रही.

फिर अचानक बोल उठी, “हमने तुम्हारे पापा के साथ ठीक नहीं किया।”

इसके बाद उसने उठकर वो चित्र निकाले जिसमे नागेश के समलैंगिक चित्र थे.

सुरेखा: “मुझे लगता है कि वे किसी की चाल में फंस गए और उन्होंने मुझे किसी प्रकार की बीमारी न हो, मुझसे दूरी बना ली. मुझे उनके पास जाकर सच्चाई जाननी होगी. और जिस प्रकार से तुम्हारे नाना ने उन्हें अलग किया, उसके लिए क्षमा भी मांगनी होगी. उनका वापिस लौटना तो सम्भव नहीं है, पर उनके सिर के ऊपर ये जो कलंक है, उसे तो हटाना ही होगा. और नाना इसमें अवश्य साथ देंगे. उन्होंने जो किया आक्रोश में किया था, पर तुम्हारे इस प्रश्न ने कई और प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं.”

सजल और संजना ये सब सुनकर सन्न थे. सजल बोला, “मॉम आप कुछ पियोगी.”

सुरेखा ने बताया तो संजना ने भी बियर के लिए कहा. सुरेखा ने अपना फोन निकला और समय न देखते हुए नागेश को फोन मिलाया. उसने नागेश से कहा कि वो उससे मिलने के लिए आना चाहती है. नागेश ने उसे अपने नए शहर में उसका पता दे दिया. फिर उसने सजल से पूछा कि क्या वो कल उसे नागेश के पास गाड़ी से ले जा सकता है?

सजल ने सहमति दी तो संजना भी जाने के लिए तैयार हो गयी. उन्होंने कल सुबह जाने का निर्णय लिया क्योंकि नागेश की कल छुट्टी थी.

तीनों अलग अलग विचारों के दलदल में फंसे एक दूसरे की बाँहों में सो गए.

*******

अगले दिन सुबह तीनों निकल गए. रास्ते में बातचीत चलती रही फिर कुछ देर में बातें चुदाई के बारे में होने लगीं.

सुरेखा: “संजना की चूत की सील तो नानाजी ने ही तोड़नी है. ये बात तो निश्चित है, पर मैंने ये निश्चित किया है कि मेरी और संजना की गांड की सील सजल ही तोड़ेगा.”

सजल इस कथन से सकपका गया और गाड़ी थोड़ी सी हिली.

सजल: “क्या मॉम, आपकी भी गांड अभी तक सीलबंद है?”

सुरेखा: “ऐसा भी नहीं है, पर तुम्हारे पापा को गांड मारने में कोई रूचि नहीं थी. तो उन्होंने गिनकर इतने वर्षों में बहुत हुआ तो दस ही बार मारी होगी. और वो भी विवाह के पहले पाँच सात सालों में. तब से अछूती ही है, तो एक प्रकार से सीलबंद ही कह सकते हैं.”

संजना: “पर मॉम, हम तीनों में से किसी को भी गांड मारने या मरवाने का अनुभव नहीं है. तो कहीं कोई समस्या न हो.”

सुरेखा: “इसके लिए तुम्हारे नाना नानी का वर्षों का वीडियो संग्रह सहायता करेगा. मैं नाना से कुछ उचित वीडियो ले लूंगी।”

संजना: “नाना के पास इन सबका संग्रह है?”

सुरेखा: “उनके पास पिछले कोई पच्चीस वर्षों से अधिक के वीडियो हैं. हाँ पहले के उतने साफ नहीं हैं, पर हर तकनीकी बढ़ोत्तरी के साथ नाना ने उन्हें भी उन्नत किया है.”

सजल: “संजना की सील कब तुड़वा रही हो?’

सुरेखा: “सुप्रिया मौसी अभी इसकी अक्षत बुर के रस से मन भर ले, उसके बाद. वैसे, आज लौटने के बाद तुम्हें भी इस रस का स्वाद लेना चाहिए. एक बार चुदने के बाद चाशनी की मिठास कम हो जाएगी. पर संजना को भी चुदाई का आनंद लेने से अधिक समय नहीं रोक सकते.”

*******
 
समय के साथ वे नागेश के घर पहुँच गए. सुरेखा ने सजल और संजना को उन्हें एक घंटे का समय देने के लिए कहा. सजल संजना को लेकर शहर देखने निकल गया. सुरेखा ने घर की घंटी बजायी और नागेश ने दरवाजा खोला.

नागेश: “आओ, तुम पहले से भी अधिक सुंदर लग रही हो.”

सुरेखा ने नागेश को देखा तो वो पहले से कमजोर और हारा हुआ लग रहा था.

सुरेखा: “लगता है तुम्हारी देखभाल करने वाला कोई नहीं है. अपने साथ ऐसा मत करो.”

नागेश: “क्या लोगी?”

सुरेखा: “कॉफी।”

नागेश: “हमेशा!”

और दोनों हंस पड़े.

कॉफी लेकर नागेश आया और फिर सुरेखा के सामने बैठ गया.

सुरेखा: “नागेश, संजना ने कल मुझसे कुछ पूछा तो मुझे लगा कि मुझे तुमसे जानना चाहिए कि ऐसा क्या हुआ जिसके कारण तुममुझसे दूर हो गए.”

नागेश ने गहरी साँस ली, “अब इस बात को छुपाने का कोई औचित्य नहीं है. जब मैं एक साल पहले थाईलैंड गया था तो हम सब एक बार में गए. मेरे साथ मेरा बॉस और वहीँ के कुछ लोग थे. वहां से बॉस ने सबको अपने होटल में आमंत्रित किया. और बहिन से मेरे जीवन का अंत आरम्भ हुआ.”

बॉस के कमरे में हमने फिर से पीना शुरू किया पर पहली ड्रिंक समाप्त होने के पहले ही मैं बेसुध हो गया. अगले दिन जब मेरी आंख खुली तो मैं अचम्भित था. मैं वहीं बॉस के कमरे में था और नंगा था. मेरी बगल में हमारे कल रात में साथ ग्राहक का एक आदमी नंगा लेता था. मुझे अपने मुंह में कुछ अजीब सा स्वाद आ रहा था और गांड में जलन भी थी. मैंने इसे पिछली रात के खाने का प्रभाव समझा पर जब मैं बाथरूम गया तो मुझे आभास हुआ कि मेरे साथ बलात्कार हुआ था. मैं जब क्रोध से कमरे से निकला तो बॉस खड़ा था. उसने मुझे कुछ चित्र दिए जो कल रात की कहानी दर्शा रहे थे.

बॉस ने मुझे दो विकल्प दिए, या तो मैं उनके बताये हुए रास्ते पर चलूँ, या वो ये सब तुम्हें दे देगा और मेरा जीवन नष्ट कर देगा. मैं तुमसे दूर नहीं होना चाहता था तो मैंने पहले विकल्प को स्वीकार कर लिया. और इसके बाद मेरा थाईलैंड के लिए लगभग हर महीने जाना आरम्भ हो गया. ग्राहक मेरी कम्पनी को अच्छा व्यापर दे रहा था, पर मेरी इच्छाशक्ति समाप्त हो रही थी. मैं न चाहते हुए भी तुमसे दूर हुआ, क्योंकि अगर मुझे कोई बीमारी हो गया हो, तो मैं तुम्हें उसकी भेंट नहीं देना चाहता था.”

“पर सब कुछ नष्ट हो ही गया. तुम्हें इस बारे में पता चल ही गया और मुझे तुम तीनों से दूर यहां आना पड़ा.”

सुरेखा: “अगर एक बार भी तुमने ये बताया होता तो पापा से मैं किसी भी प्रकार तुम्हें इस दलदल से निकलवा लेती. नागेश, मैं तुमसे क्षमा मांगना चाहती हूँ कि तलाक में हमने तुम्हें इस प्रकार से लज्जित किया. और मैं अपने तलाक की गलतियों को सुधारना भी चाहती हूँ. मुझे वचन दो कि मैं जो भी करुँगी, तुम उसमे बढ़ा नहीं डालोगे. और तुम्हारे बॉस और कम्पनी को भी इसकी हानि भरनी होगी.”

नागेश ने सिर हिलाया, “कोई लाभ नहीं सुरेखा, मैं उस कम्पनी को छोड़ चुका हूँ और अब दूसरी में काम कर रहा हूँ. मैं नहीं चाहता की ये दंश मुझे यहाँ भी लज्जित करे.”

सुरेखा: “हम कोई न कोई रास्ता ढूंढेंगे. नागेश, मैं सच में तुमसे बहुत प्यार करती थी. और ये भी सच है कि अब हमारा साथ रहना सम्भव नहीं. अगर सम्भव हो तो अपने ही शहर में लौटकर आने का प्रयास करो इस नयी कम्पनी में. बच्चे भी तुमसे दूर नहीं रहेंगे.”

नागेश: “मैं प्रयास करूंगा. और ये होने की अच्छी संभावना भी है. वैसे संजना और सजल कैसे हैं?”

सुरेखा: “दोनों ठीक हैं, अभी आते ही होंगे. उन्हें भी तुम्हारी कमी अनुभव होती है.”

नागेश: “सुरेखा, तुमसे बात करने से मेरे मन पर से एक भर उतर गया है. हम साथ न रह पाएं, पर हम अच्छे मित्र तो बने ही रह सकते हैं.”

सुरेखा उठकर नागेश को गले से लगाकर बोली, “मुझे तुम्हारी मित्रता की कमी सबसे अधिक खली इस पूरे वर्ष. पर अब और नहीं.”

तब तक संजना और सजल भी आ गए. परिवार का अश्रुपूर्ण मिलन हुआ. दो घंटे के बाद वो वहाँ से निकल पड़े. सुरेखा ने वचन लिया कि वो नागेश की पुराने बॉस और उसकी कम्पनी को नष्ट कर देगी. सुरेखा जैसी शांत और सौम्य स्त्री के मन के ये उद्गार अगर उनको पता होता जो उसके आक्रोश का शिकार होने वाले थे तो वो अपने जीवन की भीख मांगते हुए उसके पाँव पकड़ लेते. नागेश ने अपना स्थानांतरण के प्रयास को बताया तो सजल और संजना बल्लियों उछाल मारने लगे. निकलने के पहले परिवार बिखरा ही सही पर एक बार फिर से साथ था.

सुरेखा ने सजल से सीधे नानाजी के घर चलने के लिए कहा. वहां पहुँचने के बाद सुरेखा ने समर्थ को पूरा वृत्तांत बताया. समर्थ आग बबूला हो गया. उसने सुरेखा से उसके बदले के लिए पूरा साथ देने का वचन दिया. इसके बाद सुरेखा सजल और संजना के साथ अपने घर के लिए निकल गयी.

जाते हुए उन्होंने ये नहीं देखा कि समर्थ ने अपने फोन से किसी से बात करना आरम्भ किया था. और अगर सुरेखा उसकी बात सुनती तो उसके रोंगटे खड़े हो जाते.

*******

शीला का घर:

समर्थ को आज अपने किये पर बहुत ग्लानि हो रही थी. उसने फोन पर बात समाप्त की तो देखा कि शीला सामने मूक खड़ी उसे देख रही है.

शीला: “हमने नागेश के साथ बहुत गलत किया. है न? बिना उसे अपनी बात बताये हुए, उसे ही दोषी मान लिया. और उसने सुरेखा और बच्चों के लिए अपने दंड को भी स्वीकार कर लिया.”

समर्थ चुप रहे. वो शीला को देखते रहे. शीला ने उन्हें इतना व्यथित कभी नहीं देखा था.

“और हमने उसके परिवार को अलग किया और उसकी पत्नी को भी अपने व्यभिचार में सम्मिलित कर लिया.” समर्थ इतने धीमे स्वर में बोले कि शीला को ही बस सुनाई दिया.

“उसके लिए शर्मिंदा मत हो. देखा नहीं अब सुरेखा कितनी खिली हुई रहती है? वैसे भी अब नागेश और सुरेखा का साथ रहना असम्भव ही था. पर उसका खोया सम्मान आपको अवश्य लौटने का प्रयास करना होगा. अपने भी जिससे बात की, वो मेरे और आपके सिवाय कभी किसी को भी विदित नहीं होगी.”

“मुझे उससे क्षमा मांगनी होगी.”

“क्यों नहीं, हम सब प्रार्थी होंगे. पर अभी उसे अपने परिवार से दोबारा मिलने का जो अवसर मिला है, उसमे अभी बाधा न बनिए.”

समर्थ ने हामी में सिर हिलाया. शीला ने आगे बढ़कर उसका हाथ अपने हाथ में लिया.

“मुझे कुछ चाहिए आपसे.” शीला के स्वर में वासना का पुट था. समर्थ ने उसे अपनी गोद में खींच लिया. और उसके होंठ चूमने लगा.

“सुनिए, अब हमें अपनी जीवन शैली बदलना सम्भव नहीं है. जहाँ तक मुझे पता चला है, सुरेखा भी अब सजल से चुदवाने लगी है और संजना भी सुप्रिया और सुरेखा दोनों के साथ सहवास कर चुकी है. तो आपके लिए अब एक कुंवारी चूत बस कुछ ही समय में प्रस्तुत होगी. तब तक के लिए उस बुढ़िया से काम चला लो.”

“अगर तुम बुढ़िया हो तो फिर जवानी किसे कहते हैं” ये कहकर समर्थ ने शीला को वहीं नंगा किया और अपनी पैंट को उतारकर उसे अपने लंड पर बैठाया और उसकी चुदाई में व्यस्त हो गया. पर उसकी आँखों के सामने संजना का भोला चेहरा और कमसिन शरीर नाच रहा था.

********

सुरेखा का घर:

घर पहुँचने के पहले सुरेखा ने सजल को गाड़ी दवा की दुकान पर रोकने के लिए कहा. वहाँ उतरकर सुरेखा ने कुछ लिया और गाड़ी में लौट आयी.

“मॉम आप ठीक तो हो न?”

“बिलकुल, बस कुछ आवश्यक दवा लेनी थी.”

घर पहुँचने के बाद सुरेखा ने सजल और संजना को नहा कर आने के लिए कहा और सजल से खाने के लिए कुछ मंगाने के लिए भी. नहा कर सब बैठक में बैठ गए और टीवी देखते हुए खाने की प्रतीक्षा करने लगे.

“मॉम, नाना के वीडियो संग्रह में से कुछ लेकर आओ न कल.”

सुरेखा ने कहा कि ठीक है और टीवी देखने लगी पर उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी जिसे सजल और संजना समझ नहीं पा रहे थे.

खाना आ गया और खाने के बाद सुरेखा ने दोनों को दस मिनट के बाद उसके ही कमरे में आने का निमंत्रण दिया.

“मॉम, मुझे लगता है कि अब हमें आप के ही साथ सोना चाहिए, हर दिन.”

सुरेखा ने इसे स्वीकार कर लिया और दोनों के चेहरे खिल उठे.

दस मिनट के बाद धड़कते हुए मन से सजल और संजना ने कमरे में प्रवेश किया. सुरेखा बिस्तर पर नंगी ही लेटी थी. और टीवी चल रहा था. दोनों का ध्यान अपनी माँ के आकर्षक नंगे शरीर पर ही था और उन्होंने टीवी पर ध्यान नहीं दिया.”

“अगर तुम दोनों को आगे से मेरे साथ सोना है, तो इसी प्रकार से आना होगा जैसे मैं हूँ.”

दोनों ने सिर हिलाया.

“तो जाओ और सही रूप में आओ.”

दोनों पलटे तो उन्हें टीवी पर कोई पुरानी फिल्म दिखी जिसे रोका हुआ था. दोनों जल्दी से अपने कमरों में गए और कपड़े निकालकर लौट आये.

“तो तुम्हें ये जानना था कि क्या मुझे कोई परेशानी है जिसके लिए मैं दवा की दुकान पर रुकी थी?”

सजल और संजना के चेहरे पर चिंता के भाव उभर आये.

फिर सुरेखा ने एक ट्यूब दिखाई और कहा, “मैं ये लेने के लिए उतरी थी.” उसके हाथ में जैल की ट्यूब थी.

“पर क्यों?” दोनों भाई बहन एक साथ बोल पड़े.

“इतने दिन से जो मेरी गांड में लंड नहीं गया है तो इसके बिना लेना सम्भव नहीं है.”

सजल को जब इसका भवार्थ समझ आया तो उसका लंड फड़क गया.

“पर अपने कहा था कि मुझे आप नानाजी के वीडियो से सिखाकर गांड मरवाएँगी.”

“बिलकुल, तो तुम्हें क्या लगता है, टीवी पर क्या चल रहा है?”

इस बार भाई बहन ने टीवी की ओर देखा तो वो अभी भी वहीँ था जहाँ वो छोड़कर गए थे.

“आ जाओ मेरे बच्चों, हम कुछ वीडियो देखते हैं.”

सजल और संजना सुरेखा के दोनों ओर जाकर बैठ गए. सुरेखा उठी और उसने अपने तकिये पर पड़े रिमोट से वीडियो को आरम्भ कर दिया.

*******

सुप्रिया का घर:

सुप्रिया घुटनों के बल अपने दोनों बेटों के लौड़े चूस रही थी.

सुप्रिया: “निखिल, तेरे लंड से तेरी नानी की गांड की महक आ रही है.”

निखिल: “हाँ, मॉम. नाना और मैंने उन्हें एक साथ चोदा था. पर घर आने की जल्दी में मैंने इसे साफ नहीं किया.”

सुप्रिया: “क्यों, नानी ने साफ नहीं किया?”

निखिल: “नहीं, कहने लगीं वो व्यस्त हैं, नाना का लंड चूसने में, उनका मन नहीं भरा था.”

सुप्रिया: “उनका मन कब भरता है चुदाई से?”

निखिल: “आपका भरता है क्या कभी?”

सुप्रिया: “जैसे लंड मुझे मिले हैं, बावली ही होगी जिसका मन भरेगा.”

निखिल: “सजल का नंबर कब लगा रही हो?”

सुप्रिया: “अब अधिक समय नहीं लगेगा. सुरेखा ने उसे सीखना आरम्भ कर दिया है. कुछ ही दिनों में वो भी मेरे बिस्तर में होगा.”

नितिन: “और संजना? उसकी चूत कब मिलेगी? बहुत दिनों से कोई जवान चूत नहीं चोदी।”

सुप्रिया: “क्यों नहीं तू अपनी होने वाली भाभी को बुला लेता एक दिन. ऐसा लग रहा है जैसे हम उन्हें भूल ही गए हों.”

नितिन: “ये सही है, कल ही बुलाते है. क्यों भाई, आपको बुरा तो नहीं लगेगा अगर मैं आपकी पत्नी को चोद लूँ?” उसने निखिल को छेड़ा.

निखिल: “जब मैं तेरी माँ चोद सकता हूँ तो तू भी मेरी पत्नी को तो चोद ही सकता है.”

इस बात पर सबकी हंसी छूट गयी.

सुप्रिया: “ओके, अब औरों की बातें बंद करो और चल कर अपनी माँ की चुदाई करो. और कल सागरिका को भी बुला ही लो.”

निखिल बिस्तर पर लेटा और सुप्रिया उसके लंड पर स्वर हो गयी. नितिन ने पीछे जाकर अपने लंड को उसकी गांड में पेल दिया और दोनों भाई अपनी माँ की तेजी से चुदाई करने लगे.

********

सुरेखा का घर:

वीडियो बहुत पुराना प्रतीत होता था. रंग धूमिल थे और चित्र उतने साफ नहीं थे. पर पात्र अवश्य पहचाने जा रहे थे. सुरेखा अपने माँ बाप को पहचान रही थी, हालाँकि सजल और संजना अनुमान से ही उन्हें पहचान रहे थे. नीचे लिखी तिथि से ये तो पता लग गया कि ये कोई बीस वर्ष पहले का था. वीडियो में एक और व्यक्ति भी था पर उसकी केवल टाँगे ही दिख रही थीं और वो किसी स्त्री की थी.

वीडियो में शीला: “चलिए आपका लंड अब अच्छे से खड़ा हो गया है. अब चलिए और अपनी बेटी की गांड का भी उद्घाटन कर ही दीजिये.”

वीडियो में समर्थ: “पहले उसकी गांड को भी तो तैयार कर दो भाग्यवान! नहीं तो उसे बहुत पीड़ा होगी.”

अब ये भी समझ आ चूका था कि ये सुप्रिया की गांड की सील तोड़ने वाला वीडियो था.

वीडियो में सुप्रिया: “पापा, मुझे दर्द से डर नहीं लगता आप डालो अपना लंड मेरी गांड में.”

समर्थ ने शीला को संकेत किया तो शीला जाकर सुप्रिया की गांड के पीछे गयी और उसे चाटने में व्यस्त हो गयी.

सुरेखा ने अपने बच्चों को समझाया: “गांड को अगर पर्याप्त रूप से तैयार नहीं किया जाता तो मारने और मरवाने वाले दोनों को कठिनाई होती है. और गांड चाटना भी एक कला है. अगर इसमें तुम्हे उचित शिक्षा मिल जाये तो हर स्त्री जिससे भी तुम संसर्ग करोगे तुम्हे दासी बन सकती है.”

सजल: “ क्या आप मुझे सिखाऊंगी?”

सुरेखा: “बिलकुल, पर तुम्हे इसका असली ज्ञान तुम्हारी मौसी और तुम्हारे भाई देंगे। मौसी वैसे भी तुमसे मिलने के लिए आतुर हैं.”

वीडियो में शीला सुप्रिया की गांड को मलाई समझ कर चाट रही थी पर चूँकि पुराना वीडियो था अधिक दिख नहीं पा रहा था. शीला ने सुप्रिया की गांड को खोला और ऐसा लगा जैसे उसने अपनी जीभ अंदर डाली हो.”

वीडियो में सुप्रिया की सिसकियाँ सुनाई दे रही थीं, “ओह, मम्मी, मेरी गांड खा ही जाओगी क्या. ये क्या चल रहा है उसके अंदर.”

वीडियो में समर्थ: “तुम्हारी माँ तुम्हारी गांड को अंदर से भी चाट रही है, अपनी जीभ से.”

वीडियो में सुप्रिया: “ओह, पापा. जब मम्मी की जीभ इतना मजा दे रही है तो आपके लंड से कितना आनंद आएगा.”

समर्थ ने शीला से कहा, “अब देर मत करो. तेल डालो अंदर और मेरे लंड पर भी लगा दो.”

शीला ने उठकर बिस्तर के पास रखी एक कटोरी उठाई और सुप्रिया की गांड में कुछ डाला. फिर वही तेल लेकर उसने समर्थ के लंड को भी चिकना कर दिया.

“लीजिये, अब खोल दीजिये अपनी लाड़ली की गांड.”

“यस, पापा. मेरी गांड खोल दो.”

समर्थ ने अपने लंड को सुप्रिया की गांड पर रखा और धीमी गति से अंदर डालने लगा. वीडियो चलता रहा और समर्थ का लंड सुप्रिया की गहराई में खोता हुआ दिखता रहा.

यहाँ सुरेखा ने सजल के लंड को हाथ में ले रखा था. सजल का एक हाथ उसके मम्मे निचोड़ रहा था. संजना स्तब्ध सी वीडियो पर चल रहे दृश्य को देख रही थी, जब उसे अपनी चूत पर अपनी माँ के हाथ लगने का आभास हुआ. उसके स्वाभाविक रूप में अपने पॉँव फैलाये और अब सुरेखा एक हाथ से सजल के लंड और दूसरे से संजना की चूत को सहला रही थी. संजना ने अपने शरीर को थोड़ा मोड़ा और अपना एक हाथ सुरेखा की तपती अतृप्त चूत पर रख दिया.

वीडियो में अब समर्थ का पूरा लंड सुप्रिया की गांड में समाया हुआ था, पर कुछ हो नहीं रहा था. सुप्रिया की घुटी घुटी चीखें अवश्य सुनाई दे रही थीं. पर और कुछ भी नहीं चल रहा था. ऐसा लगता था जैसे वीडियो को किसी ने रोक दिया हो. संजना ने रिमोट से आगे बढ़ाने का विचार ही किया था कि टीवी से आवाज़ आयी.

वीडियो में शीला: “अगर रुके रहेंगे तो इसकी गांड सिकुड़ जाएगी और दोनों को दर्द होगा. अब चलिए और चुदाई करिये।”

वीडियो में समर्थ के कूल्हे हिलते हुए दिखे और वो बहुत ही हल्की गति से चल रहे थे.

सुरेखा ने सजल को समझाया, “जब गांड नयी हो या कई दिन से चूड़ी न हो, जैसे कि मेरी, तब गांड बहुत सावधानी और हल्के धक्कों से मारनी चाहिए, जब तक अच्छे से न खुल जाये. उसके बाद गति को बढ़ाना चाहिए. अन्यथा लंड और गांड दोनों को छिलने की संभावना रहती है.”

सजल हर दृश्य और पाठ को मन में कंठस्त कर रहा था. उसे इस समय मौसी की गांड के स्थान पर अपनी माँ सुरेखा की गांड दिख रही थी और वो समर्थ में स्वयं को देख रहा था.

वीडियो में समर्थ के धक्कों की गति बढ़ रही थी और बहुत समय तक गांड की चुदाई चलती रही. वीडियो के अंत तक समर्थ की तीव्र गति को भी सुप्रिया भली भांति श पा रही थी और उसकी आनंद भरी चीखें टीवी के माध्यम से कमरे में गूंज रही थीं. समर्थ ने अचानक धक्के बंद किये और अपने लंड को सुप्रिया की गांड में डालकर हिलने लगा. सुरेखा और सजल समझ गए कि समर्थ ने अपना वीर्य सुप्रिया की गांड में छोड़ दिया था. संजना अभी इस बारे में कुछ जानती नहीं थी, पर उसके चेहरे के भाव उसकी विस्मयता प्रदर्शित कर रहे थे.

वीडियो में समर्थ ने अपने लंड को बाहर निकाला और शीला ने उसे अपने मुंह से चाटकर साफ किया.

संजना: “छी, नानी मौसी की गांड से निकला लंड चाट रही हैं.”

सुरेखा: “एक बार जब चुदने में अनुभवी हो जाओगी तो तुम भी चाटोगी।”

संजना: “आप भी…”

सुरेखा: “आज देखना.”

वीडियो में अब खेल समाप्त हो चुका था और अब टीवी पर कुछ भी नहीं चल रहा था. सुरेखा ने टीवी और वीडियो बंद किये और पहले संजना और फिर सजल को चूमा.

सुरेखा: “तो अब अपना वीडियो बनायें?”

सजल तो कब से लालयित था बस उसे इस कर्म की सही राह ही पता न थी. उसे लग तो रहा था कि वो नानाजी के बताये रास्ते पर चलकर अपनी माँ की गांड सफलता से मार पायेगा और उसकी माँ को वो संतुष्टि दे पायेगा जिसके लिए वो न जाने कब से व्यथित है.

सजल ने चौंक कर पूछा, “वीडियो?”

सुरेखा: “बिलकुल, हमें नाना नानी मौसी को तुम्हारे इस पराक्रम को दिखाना तो पड़ेगा ही, और आगे चलकर न जाने किसे इस ज्ञान की आवश्यकता पड़े.” ये कहकर सुरेखा ने एक ओर लगे वीडियो कैमरे की ओर संकेत किया. “जाकर अब उसकी रिकॉर्डिंग चालू कर दो.”

संजना: “और मैं क्या करूं, मॉम ?”

सुरेखा कुछ सोचकर, “क्यों न आज तुम ही ये वीडियो बनाओ. इससे तुम अलग अलग कोण से फिल्म बना पाओगी. करोगी?”

संजना: “बिलकुल, ये मेरे द्वारा बनाई हुई पहली फिल्म होगी.” ये कहकर संजना ने कैमरा अपने हाथ में लिया और उसे ध्वनि, प्रकाश और अन्य आवश्यक बिनदों के लिए समायोजित किया और सोफे पर बैठ कर रिकॉर्डिंग आरम्भ कर दी.

संजना: “आज आप देखेंगे मेरी प्यारी मॉम की गांड की चुदाई मेरे प्यारे भाई सजल के द्वारा. लाइट, कैमरा, एक्शन!”

सुरेखा ने किसी अभ्यस्त अभिनेत्री के समान सजल को चूमा और फिर अपनी गांड कैमरे की ओर करते हुए घोड़ी के आसन में आ गयी.

सुरेखा : “ओह, सजल, मम्मी की गांड में कुछ घुस गया है. मेरे प्यारे बेटे क्या तुम उसे निकाल दोगे ?”

सजल: “बिलकुल, मॉम. पर मेरे हाथ गंदे हैं. मैं ऐसा करता हूँ अपने मुंह से निकालता हूँ?”

सुरेखा: “उह्ह्ह ये तो और भी अच्छा रहेगा.” कहते हुए सुरेखा ने अपनी गांड हिलाई.

सजल उसकी गांड में अपना मुंह डालकर अपने नाना के समान उसकी गांड चाटने लगा. यहाँ से उपयुक्त दृश्य न दिखने के कारण संजना उनके पास चली गयी और सजल को सुरेखा की गांड के छेद को चाटते हुए फिल्माने लगी. सजल ने जितना भी सीखा था वो आज के लिए पर्याप्त था. सुरेखा की गांड उसके इस प्रेम का स्वागत कर रही थी.

संजना ने निर्देशक की भूमिका निभाते हुए कहा, “और अब सजल मॉम की गांड में अपनी जीभ डालकर मॉम की गांड से उस वास्तु को निकलने का प्रयास करेंगे.”

सजल ने ये सुनकर सुरेखा की गांड को फैलाया और उससे निकलती हुई भीनी खुशबु की अपने नथुनों में समाहित कर लिया. फिर खुले हुए संकरे छेद में अपनी जीभ डालने का प्रयास किया. कुछ क्षण के प्रतिरोध के पश्चात् गांड का छल्ला खुला और जीभ अंदर प्रविष्ट हो गयी. सुरेखा की कामांध सिसकारी ने सजल को और आगे जाने ले लिए प्रेरित किया.

उसके अथक प्रयासों के परिणाम से गांड ने खुलकर उसे राह दे दी और उसकी जीभ और अंदर चली गयी. अब सजल ने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया और जीभ को सुरेखा की गांड में अंदर बाहर और गोलाई में घूमने लगा. सुरेखा आनंद से दूभर हो गयी. अब उसके मुंह से आनंद की सिसकारियां निकल रही थीं. और वो सजल को अपने शब्दों से भी उत्साहित कर रही थी. वो इस सुख से न जाने कब से वंचित थी. और आज उसका बेटा ही उसे इस सुख से दोबारा परिचित कराने वाला था ये भी सुरेखा को एक ऊंचाई पर ले जा रहा था.

उसकी चूत को कैसे इस बात का आभास हुआ यो तो बताना सम्भव नहीं, पर ये अवश्य था कि कमऱे में उसका विसर्जन एक मादक गंध फैला रहा था. और फिर, सुरेखा झड़ गयी. पहली बार उसने गांड में जीभ के माध्यम से अपना उतसर्ग प्राप्त किया था और इसकी अनुभूति अद्भुत थी. सजल ने भी ये समझा कि उसकी माँ झड़ गयी है तो उसने अपनी जीभ को बाहर निकाला। संजना ने किसी अनुभवी निर्देशक के समान कैमरे से इस दृश्य को फिल्माया और उसमे सुरेखा की अब खुली हुई गांड का रोम रोम अंकित हो गया. सजल ने सुरेखा की गांड को एक बार चूमा और फिर कैमरे की ओर देखते हुए जीभ घुमाकर अपने मुंह में डाल ली, जैसे उसने किसी व्यंजन का भोग लगाया हो.

संजना ने अपनी निर्देशिका की भूमिका को निभाते हुए अगले चरण की घोषणा की.

“अब मेरी प्यारी मम्मा, सजल के लंड को अपने मुंह से खड़ा करेंगी और मैं उनकी प्यारी बेटी उनकी गांड को मेरे भाई के लंड के लिए तैयार करुँगी.” ये कहकर संजना ने कैमरा ऐसे स्थान पर रखा जहाँ से गतिविधियाँ साफ दिखें और जब तक उसने ट्यूब अपने हाथ में ली सजल का मुंह सुरेखा के मुंह में यात्रा कर रहा था. संजना ने ये ध्यान रखते हुए कि कैमरे में सही दृश्य अंकित हो, सुरेखा की गांड को फैलाया और उसमे ट्यूब से ढेर सारा जैल अंदर डाल दिया.

“मेरी मम्मा की गांड में वर्शन से कोई लंड नहीं गया है, इसीलिए उनकी गांड को चिकना करना नितांत आवश्यक है.” ये कहते हुए उसने अपनी उँगलियों से सुरेखा की गांड के अंदर जैल को भली भांति फैला दिया. सजल का लंड भी अब बुरी तरह तना हुआ था और अपने लक्ष्य को भेदने के लिए उत्सुक था. सजल ने अपने लंड को निकाला तो संजना ने भी अपनी उँगलियों को सुरेखा की गांड से निकालकर ट्यूब लेकर सजल के लंड पर लगते हुए उसे भी आक्रमण हेतु तैयार कर दिया. इसे बाद उसने कैमरा संभाला और पास आकर इस कामुक मिलन को फिल्माने लगी.

सजल ने अपने लंड को सुरेखा की गांड के छेद पर रखा तो सुरेखा सिहर उठी.

“बेटा, ध्यान रखना. लगभग कुंवारी गांड है. इसे फाड़ न देना.”

“मॉम, आप चिंता न करो. इतने प्यार से करूँगा कि आपको पता भी नहीं लगेगा.” उस बेचारे को क्या पता था कि गांड में पहली बार लंड दर्द देता ही है.

उसने अपने नाना के वीडियो का अनुशरण करते हुए हल्के दबाव से अपने लंड को अंदर डालना आरम्भ किया. कुछ प्रतिरोध के बाद गांड एकाएक खुली और उसका सुपाड़ा अंदर चला गया. सजल के जीवन के ये नया अनुभव था. अगर चूत की गर्मी से तुलना की जाये तो गांड भट्टी होती है. पर उसने बिना रुके अपने दबाव को बनाये रखा. सुरेखा को भी गांड में एक नए आगंतुक की प्रविष्टि से कुछ असहजता सी हो रही थी. सुपाड़ा अंदर जाते ही उसे लगा कि उसकी गांड आज फट कर ही रहेगी. पर उसे ये पड़ाव पार करना ही था. उसने गहरी साँस लेकर अपने आप को संयत किया और अंदर बढ़ते हुए लौड़े के आभास से अपने आपको अवगत कराया. पीड़ा और सुख, दोनों का एक अद्भुत समावेश था. इसकी तुलना या विवरण करना उसके आनंदित मन मस्तिष्क के लिए इस समय सम्भव न था.

आगे बढ़ते हुए सजल ने कुछ समय में अपने पूरे लंड को सुरेखा की गांड में डाल ही दिया.

निर्देशिका के स्वर ने उसका ध्यान तोड़ा।

“और इसी के साथ मम्मा की गांड में भैया का पूरा लंड जा चुका है.” ये कहकर उसने निकटतम कोण से सजल के लंड को सुरेखा की गांड में पूरा जड़ा होने का दृश्य फिल्माया.

“और अब कुछ ही समय के विराम के बाद भैया मम्मा की गांड की चुदाई करेंगे. बने रहिये हमारे साथ.” संजना अपने पूरे जोश में थी.

*******
 
कुछ समय के विराम के बाद निर्देशिका संजना ने चुदाई आरम्भ करने का निर्देश दिया. वैसे भी अब सुरेखा की गांड सजल के लंड का स्वागत कर चुकी थी. सजल ने हल्के धीमे धक्कों के साथ गांड में लंड चलाना जब आरम्भ किया तब उसे आभास हुआ कि चूत और गांड में कितना अंतर होता है. चूत इस प्रकार के सम्भोग के लिए स्वाभाविक रूप से अपने आप को ढाल लेती है, पर गांड की कसावट बनी रहती है. यही एक कारण है कि कई बार गुदा मैथुन अधिक सुखद होता है. हल्के धक्कों से मध्यम गति को प्राप्त करते हुए सजल सुरेखा की प्रतिक्रिया को देख रहा था. पर जब उसे कोई अवरोध नहीं दिखा तो उसने गति कुछ और बढ़ाई। सुरेखा सुख के सागर में डोल रही थी. उसे कुछ कष्ट था, पर वो मिलने वाले सुख के आगे नगण्य था.

उसने सजल से गति बढाकर तेजी से गांड मारने का आग्रह किया. रंगरूट अपने सामर्थ्य के अनुसार लंड पेलने लगा. दोनों इस प्रकार के सम्भोग के लिए नए से थे और ये उनकी चुदाई की गति और असमान्यता से विदित हो रहा था. पर दोनों ने अपना लक्ष्य पाया था और ये भी उनके लिए एक उल्लास का कारण था. सुरेखा की गांड में एक नया आभास हुआ जिसने उसकी चूत को भी इंगित करते हुए अपने रस का वितरण करने पर विवश कर दिया.

कुछ ही समय में सुरेखा झड़ गयी. और फिर सजल ने भी अपना रस उसकी गांड में छोड़ दिया.

इस परिवार के जीवन के अध्याय में एक और रोमांचक घटना जुड़ चुकी थी. तीनों जानते थे कि अब सुरेखा की गांड की बलि हर रात चढ़ेगी.

******

बॉलीवुड परिवार का शो

बॉलीवुड अभिनेत्री अपने पति, सौतेले पुत्र और मेकअप मैन के साथ शो के एक दिन पहले क्लब पहुंच गयी थी. रिसेप्शन पर जब सोनम ने उन्हें देखा तो उसके होश ही उड़ गए. परन्तु उसे पता था की गोपनीयता इस क्लब में कितनी अनिवार्य है और इसीलिए उसने पूर्ण व्यावसायिकता के साथ उनका स्वागत लिया.

उन्हें अत्यंत गुप्त प्रकार से क्लब के चार कमरे दिए गए थे. तीन कमरे सामान्य थे और एक बड़ा कमरा था जिसे हॉल कहना ही उचित होगा. इस बड़े कमरे का आज तक कभी भी प्रयोग नहीं हुआ था. अभिनेत्री के कमरे में उन्हें क्लब के अंदरूनी चैनल के बारे में बता दिया गया, जिसमे वे क्लब में घटित किसी भी पार्टी इत्यादि को देख सकते थे. इसमें समर्थ की पारिवारिक पार्टी नहीं थी, न ही साक्षात्कार के वीडियो. परन्तु ये चैनल अन्य दो कमरों में नहीं दिया गया था. क्योंकि इन्हें कल तक इनके ही कमरे में रहना था इसीलिए कोई समस्या नहीं थी. कुछ समय पश्चात् सोनम आयी और उसने उन्हें टीवी पर क्लब के वीडियो देखने की विधि दर्शायी.

उसने उन्हें उनके कमरे के बार में उपस्थित शराब का संग्रह दिखाया और भोजन के लिए कुछ मेनू दिए जो शहर के प्रसिद्द रेस्त्रां से मंगाए गए थे. इसके बाद उसने उनका परिचय मंजुला से कराया और बताया कि भोजन का आर्डर देने से आने में लगभग १ घंटे का समय लगेगा. इसके साथ उन्हें क्लब के रेस्त्रां का भी मेनू दिया गया और बताया गया कि इसमें २० मिनट तक लगेंगे. मंजुला ने उन्हें बताया कि उनका क्लब का भ्रमण ५ बजे के लिए तय किया गया है. उस समय सभी लोग जा चुके होंगे और इतना प्रकाश होगा की वे सब कुछ देख पाएंगे. इसमें लगभग १ घंटे का समय लगेगा.

उसने बताया कि क्लब के तीनों साझीदार उनसे मिलने के लिए ७ बजे आएंगे और उनके ही साथ रात्रि भोज करेंगे. उसने ये निवेदन किया कि अगर उनका कोई प्रिय व्यंजन या शराब है, तो अगर वो पहले बता देंगे तो सरलता होगी. अभिनेता ने उन्हें भ्रमण के समय इसे देने का विश्वास दिलाया. इसके बाद सोनम और मंजुला उन्हें आराम करने के लिए छोड़कर अभिनेता के पुत्र और फिर मेकअप मैन को भी यही सब बताकर अपने नियत स्थान पर चली गयीं.

अभिनेत्री: “बहुत अच्छा प्रबंध है. मुझे तो ये उन सब ५ सितारा होटलों से भी अच्छा लग रहा है. और हमारी निजता पर कोई भी आघात नहीं हो रहा.”

अभिनेता: “सच है, हालाँकि इन दोनों ने हमें पहचान लिया था पर एक बार भी ये विदित नहीं होने दिया. और न ही ऑटोग्राफ इत्यादि की मांग की.”

अभिनेत्री: “क्या लोगे अभी? मैं तो व्हिस्की ही लूंगी, बहुत लम्बी यात्रा रही है.”

अभिनेता: “मैं भी. और खाने के लिए इनके ही रेस्त्रां से मंगा लेते हैं. पता चल जायेगा कि आगे क्या करना है.”

अभिनेत्री ने दोनों की ड्रिंक्स बनायीं और अभिनेता ने सोनम को फोन पर खाने का आर्डर दे दिया. दोनों बैठे हुए बातें करते रहे फिर एक ड्रिंक समाप्त होने पर दोनों नहाये और फिर कपड़े बदल लिए. इतने में ही सोनम खाना ले आयी और परोसने लगी.

अभिनेत्री: “अगर आप भी हमारे साथ बैठेंगी तो हमें अच्छा लगेगा.”

सोनम ने तीन प्लेटों में खाना लगाया. तभी अभिनेत्री ने उठकर तीन ड्रिंक्स बनाये. तीनों बैठकर अपनी ड्रिंक के साथ खाना कहते हुए बात करने लगे. अधिकतर बातें क्लब के बारे में ही थी और सोनम ने उनके बारे में एक भी शब्द नहीं कहा. भोजन के बाद सोनम ने सब कुछ समेटा और अपने साथ लायी ट्रॉली में रखा और चली गयी.

********

शीला का घर:

नए वीडियो उपकरण लगाने का दिन तय होने पर समर्थ ने शीला और निखिल को उसके दिंची क्लब के साक्षात्कार के लिए समय निश्चित करने को कह दिया था. और आज वो दिन आ गया था. कम्पनी से १० लोगों की एक पल्टन पूरे घर में नए कैमरे लगाने के लिए सुबह ९ बजे ही आ धमके. क्योंकि उन्हें पहले पुराने उपकरण निकालने थे और उसके स्थान पर नए लगाने थे इसीलिए समय अधिक लगना था उनके अनुसार इसमें रात होना तय था परन्तु वे इसे आज ही समाप्त करने के उद्देश्य से आये थे. समर्थ ने अपनी पूरी वीडियो की लाइब्रेरी एक दिन पहले ही सुप्रिया के घर भिजवा दी थी. इसी के साथ समर्थ और शीला के कमरे को छोड़ टोली के सदस्य अन्य कमरों में फ़ैल गए. मुख्य दो सदस्य रिकॉर्डिंग कक्ष में जाकर उसमें से पुराने उपकरण निकलकर नए लगाने में व्यस्त हो गए.

शीला ने ये समझकर कि यहाँ तैयार होना उचित नहीं है, सुप्रिया को बोला और कुछ ही देर में निखिल और नितिन उसे लेने आ गए. शीला अपनी आवश्यकता के वस्त्र और वस्तुएं लेकर निखिल के साथ सुप्रिया के घर के लिए निकल गयी. नितिन नाना का हाथ बँटाने के लिए वहीँ रुक गया. इसके बाद समर्थ के शयन कक्ष में भी एक टोली लग गयी. सभी बहुत अनुभवी और दक्ष कर्मी थे और दोपहर तक पुराने उपकरण निकाले जा चुके थे. समर्थ ने सबके लिए भोजन का प्रावधान किया था और उसके बाद वो सब दोबारा उतनी ही कुशलता से नए उपकरण लगाने में जुट गए. रात आठ बजे तक सभी कैमरे कार्यरत हो गए और ९ बजे तक उनका परिक्षण सम्पन्न हो गया. नितिन ने हर कैमरे में जाकर कैमरे से अपनी वीडियो भेजी और समर्थ ने बैठक में लगे टीवी पर उन्हें देखकर अंततः कार्य का अनुमोदन किया.

इसके बाद नितिन ने सुप्रिया और सुरेखा के घर फोन करके सबको वहीँ आमंत्रित कर लिया. आधे घंटे में शीला सहित सभी वहां पहुँच गए. शीला क्लब से सुरेखा के घर चली गयी थी. जिसका मन था उसने ड्रिंक ली और फिर नए वीडियो प्रणाली को देखकर सभी अत्यंत प्रसन्न हुए. संजना तो ऐसे फुदक रही थी कि मानो उसे कोई खजाना मिल गया हो. उसके तीनों भाई उसकी इस ख़ुशी में शामिल थे. अलग अलग कमरों में जाकर चारों ने पोज़ बनाये जिसे समर्थ ने वीडियो के माध्यम से फोटो में बचा लिया. इसके बाद सबने भोजन किया.

शीला को सबने बड़े प्यार से बैठाया और उससे आज उसके साक्षात्कार के विषय में पूछा. शीला ने बताना प्रारम्भ किया, जिसे सभी परिवारजन बहुत ध्यान से सुन रहे थे.

"निखिल मुझे सुप्रिया के घर से क्लब ले गया.” शीला ने कहना प्रारम्भ किया.

******

...... अगले भाग में आगे की कथा
 
तीसरा घर: शीला और समर्थ सिंह

अध्याय ३.३

भाग २

*********

शीला को सबने बड़े प्यार से बैठाया और उससे आज उसके साक्षात्कार के विषय में पूछा. शीला ने बताना प्रारम्भ किया, जिसे सभी परिवारजन बहुत ध्यान से सुन रहे थे.

"निखिल मुझे सुप्रिया के घर से क्लब ले गया.” शीला ने कहना प्रारम्भ किया.

अब आगे....

********

दिंची क्लब में शीला औपचारिक इंटरव्यू:

११ बजे क्लब में निखिल ने शीला को मंजुला से मिलवाया और फिर कहा कि वो तीन चार घंटे बाद उसे लेने आएगा.

शीला: “और अगर मेरा काम तब तक समाप्त नहीं हुआ तो?”

निखिल ने मंजुला की ओर देखा और कहा, “मुझे विश्वास है कि मैं समय निकालने के लिए कोई प्रबंध कर ही लूंगा.”

“मैं दो बजे के बाद उपलब्ध हूँ.” मंजुला के मुंह से अनायास ही निकल पड़ा.

निखिल: “तब तो मुझे उस समय आना ही होगा.”

निखिल की अर्थपूर्ण बातों से मंजुला की चूत बहने लगी.

इतने में पार्थ आ गया और उसने शीला के हाथ को पकड़ कर मंजुला से कमरे का क्रमांक पूछा. शीला को लेकर वो उस कमरे में चला गया. कमरा बंद करते हुए उसने शीला को अपनी बाँहों में लिया और उसे चूमते हुए उसके मम्मे दबाने लगा. फिर वो अलग हुआ.

पार्थ: “नानी, मैं आज आपका साथी नहीं हूँ. पर आपके लिए मैंने विशेष प्रबंध किया है. एक रोमियो हमारा पुराना कर्मचारी है, और दूसरे ने अभी तीन दिन पहले ही प्रवेश लिया है. और उससे मिलने पर आपको आश्चर्य और प्रसन्नता दोनों होंगी. आप कुछ पीना चाहेंगी?”

शीला ने मना किया तो पार्थ ने कहा कि वे जाकर स्नान कर लें और वहां लटके तौलिये में ही बाहर आएं . तब तक उनके साक्षात्कार करने वाले दोनों रोमियो भी आ जायेंगे. ये कहकर पार्थ ने उन्हें एक बार और चूमा और ये कहते हुए कि वो आनंद ले, कमरे से निकल गया.

शीला स्नान करने के बाद बताये अनुसार केवल एक तौलिये को लपेटे उसे अपने हाथ में थामे हुए बाहर आयी. उसने देखा कि दो लड़के खड़े थे पर उनकी पीठ उसकी ओर होने के कारण वो उन्हें देख नहीं पायी थी. बाथरूम के दरवाजे के बंद होने की आहट से वे दोनों उसकी और पलटे। जब शीला ने दोनों को देखा तो उसके हाथ आश्चर्य से उसके मुंह पर चले गए और तौलिया उसके शरीर से सरकते हुए निचे गिर गया. अब वो दोनों के सामने नंगी खड़ी थी.

“तुम! तुम यहाँ कैसे?” उसने एक लड़के से पूछा.

“जैसे आप, आंटीजी.” ये लड़का कोई और नहीं मेहुल था जिसने अभी तीन दिन पहले ही शोनाली के साथ साक्षात्कार किया था और उत्तीर्ण हो गया था. आज उसका क्लब में दूसरा दिन था. और आश्चर्य उसे भी उतना ही था, पर जीवन में उसने इतनी सीधी और सरल स्त्रियों को चोदा था कि वो अब किसी भी घटना से विस्मित नहीं होता था.

“मैडम, मैं स्टीफन हूँ, पर सब मुझे प्यार से कालिया बुलाते हैं.” कालिया ने आगे बढ़कर शीला को थमा और अपने होंठों से उसके होंठ मिलकर चूमने लगा. शीला पहले ही नंगी तो थी ही, ऐसे शक्तिशाली अफ्रीकन की बाँहों में वो अपने आपको असहाय समझ रही थी. मेहुल ने भी आगे बढ़कर उसके पीछे जाते हुए उसके कान और गर्दन पर चुंबनों की झड़ी लगा दी.

“अगर आप अनुमति दें तो मैं और मेहुल भी स्नान कर लेते हैं.” कालिया ने उन्हें चूमते हुए कहा.

“बिलकुल!” शीला बोली.

कालिया: “आप को पार्थ ने बताया होगा, कि आज आप वो करेंगी जो हम चाहेंगे. और आज के बाद वही होगा जो आपकी इच्छा होगी.”

शीला सिहर उठी, न जाने क्या करेंगे ये उसके साथ. पर उसे पार्थ और निखिल पर विश्वास था.

शीला: “बताया तो नहीं, पर मुझे स्वीकार है.”

“हम अभी आये.” ये कहकर दोनों एक ही साथ बाथरूम में घुस गए और कुछ दस मिनट के अंतराल के बाद तौलिये में बाहर आये. कालिया के काले शरीर पर श्वेत रंग का तौलिया विरोधाभास कर रहा था. दोनों आगे बढ़े और शीला के सामने आकर खड़े हो गए.

“आंटीजी, अगर मुझसे कोई अतिश्योक्ति हो जाये तो क्षमा कीजियेगा, पर आज हम आपको अपने ढंग से छोड़ेंगे. आपको असीम आनंद आएगा, ये विश्वास रखिये.”

शीला ने अपना सिर हिलाकर उसे कहा कि वो समझती है, और उसकी किसी भी बात का उसे बुरा नहीं

लगेगा.

मेहुल ने कहा.

इसके बाद मेहुल शीला के पीछे गया और उसके मम्मे दबाते हुए उसे नीचे घुटनों के बल बैठा दिया. अब शीला के सामने कालिया का तौलिया था और उसमे से उसका लंड उभरा हुआ दिख रहा था. शीला ने तलिये को खोल दिया और कालिया का तमतमाया लंड उसके चेहरे के सामने खड़ा हो गया.

“ओह!” शीला उस लंड को देखकर चौंक गयी. “ये लंड है या तोप?”

कालिया को अपने लौड़े पर गर्व था, पर उसने किसी को उसे तोप कहते हुए नहीं सुना था.

“अब इसे चूसो तो पता चलेगा कि ये तोप है या मिसाइल!” कालिया ने लंड को हिलाकर शीला को आमंत्रण दिया.

शीला ऐसे अवसर को कहाँ चुकने वाली थी. उसे ये तो सुनिश्चित हो गया कि आज उसकी चुदाई संतोषजनक होगी. कालिया के लंड पर आंख गढ़ाए हुए उसने उसे मुंह में लेकर चूसना आरम्भ कर दिया. कुछ कठिनाई के बाद शीला उसके लंड को सरलता से चूस रही थी. उसके पीछे से मेहुल उसके मम्मे मसल मसल कर निचोड़ रहा था. शीला की चूत आने वाले सुख की आकांक्षा से बह रही थी और गांड अपने अंदर ये लंड जाने की आशंका से लुप लुप कर रही थी. हालाँकि शीला लंड को भली चूस पा रही थी, पर अभी भी कालिया का कवल तीन चौथाई लंड को ही वो निगल पा रही थी.

कालिया ने मेहुल को संकेत किया. मेहुल ने मम्मे पर से हाथ हटाकर शीला के मुंह पर रखा और कुछ दबाव बनाते हुए उसके मुंह को और खोल दिया. कालिया ने शीला के सिर पर हाथ रखा और अपने लंड को शीला के गले तक उतार दिया. शीला का जैसे दम ही घुटने लगा. कोई दस सेकंड के बाद कालिया ने लंड निकाला और शीला को साँस लेने का समय दिया. और कुछ रुककर वही प्रक्रिया फिर से दोहराई. इस प्रकार से शीला के गले में सात आठ बार लंड धकेलने के बाद कालिया ने शीला के मुंह से लंड निकाल लिया और लंड को चेहरे पर मारने लगा.

मेहुल ने कालिया को संकेत किया तो कालिया रुक गया. वो शीला को इतना प्रताड़ित नहीं करना चाहता था आखिर वो एक वृद्धा थी और उसकी पड़ोसन भी थीं.

“अब मेहुल के लंड पर भी कुछ कृपा करिये, मैडम.” कालिया ने कहा. ये कहकर कालिया पीछे हटा और मेहुल ने अपने लंड को शीला के मुंह में डाल दिया. शीला फिर से उसे चूसने में व्यस्त हो गयी.

“मेरे विचार से हमें बिस्तर पर चलना चाहिए.” मेहुल ने सुझाव दिया.

शीला को हाथ पकड़कर उठाते हुए मेहुल उसे बिस्तर पर ले गया और लिटा दिया. फिर उसके सिर के पास बैठकर अपने लंड को शीला के मुंह में डाल दिया. कालिया ने ये समय कुछ चूत की चटाई के लिए उपयुक्त समझा और शीला के पैर फैलाकर अपने मुंह को उसकी चूत में डाल दिया. शीला अब एक ओर लंड चूस रही थी तो दूसरी और उसकी चूत चूसी जा रही थी. कालिया इस कला का महारथी था और उसने शीला की चूत की होंठ अलग किये और अपनी जीभ से उसके भग्नाशे को छेड़ते हुए चूत में जीभ डाल दी. अंदर संभावित हर रोम से वो अपनी जीभ कुरेद रहा था. शीला की चूत भी इस प्रयास के लिए उसे रसमग्न किये दे रही थी.

मेहुल का लंड पूरे आक्रोश में था. उसने अपने लंड से शीला के मुंह की चुदाई करते हुए कालिया से चुदाई करने का आग्रह किया. हालाँकि कालिया क्लब में उससे श्रेष्ठ था, परन्तु ये समझकर कि ये मेहुल, पार्थ और निखिल के घर और पड़ोस की स्त्री है, उसने मेहुल के सुझावों पर ही चलने का विचार कर लिया था. वो अपनी इस नौकरी से हाथ नहीं धोना चाहता था. भग्नाशे को तेजी से मसलते हुए कालिया खड़ा हुआ और अपने लंड को शीला की चूत के मुहाने पर रखा. मेहुल ने अपने लंड को शीला के मुंह से निकाला जिससे कि अगर वो कुछ कहना चाहे तो उसे कठिनाई न हो.

मेहुल, “आंटीजी, कालिया अब आपकी चुदाई करने वाला है, आपको अगर कुछ भी असहजता लगे तो बताइयेगा।”

शीला: “मुझे ऐसी कोई आवश्यकता नहीं लगती, मैंने इसके जैसे बहुत लौड़े खाये हैं और मैं तो कहूँगी कि ये अपने पूरे सामर्थ्य से मुझे चोदे, मुझे उसमे ही आनंद आएगा.”

कालिया को अपने लौड़े पर बहुत गर्व था और उसने कई स्त्रियों से दया की विनती सुनी थी जब वो उन्हें पहली बार चोदता था. इसीलिए उसके स्वाभिमान को कुछ ठेस पहुंची और उसने शीला को पाठ पढ़ने के लिए एक तेज झटके से लंड को अंदर डाला और लगभग आधा पहली ही बार में अंदर चला गया.

“शाबाश!” शीला चीखी. और कालिया ने अगले झटके में पूरे लंड को अंदर पेल दिया. “वाह , क्या लंड है, मजा आ गया. अब चोद मुझे.”

*******

यहाँ पर शीला ने अपना वर्णन रोका और परिवार के ध्यान लगाकर सुन रहे सदस्यों से कहा, “उसका लंड सच में बड़ा था पर उसका व्यवहार बहुत घमंडी था, इसीलिए मैंने उसके इस घमंड को तोड़ने के लिए इस प्रकार से बोला था. और ये भी था कि मैं चाहती थी कि वो मुझे पूरा दम लगाकर चोदे.”

ये कहते हुए उसने आगे की कथा सुनाई.

*******

अब ये कालिया की स्वाभिमान पर बन आयी थी. एक से एक चुड़क्कड़ औरतें भी उसके लौड़े के प्रताप से उससे दया की याचना करती थीं और एक ये थी जो उसे और उकसा रही थी. उसने अपने सामान्य ज्ञान को परे रखते हुए तेजी से शीला की चुदाई आरम्भ कर दी. अब अगर शीला को कोई परेशानी थी भी तो उसने उसे दर्शाया नहीं और बड़े ही स्वाभाविक रूप से मेहुल के लंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. कालिया का खून जल रहा था और उसके धक्के दानवीय होते जा रहे थे और शीला ऐसे मेहुल का लंड चूस रही थी मानो कोई चीटीं उसकी झांटों पर चल रही हो जो स्वयं ही हट जाएगी.

न जाने क्यों और कैसे, पर मेहुल को ये समझ आ गया कि शीला ऐसा क्यों कर रही है. उसने कालिया से कहा कि क्यों न वो कुछ देर रुक कर चुदाई करे क्योंकि उनका उद्देश्य किसी भी प्रकार से शीला को चोटिल करने का नहीं है. और यहाँ कालिया ने गलती कर दी.

कालिया: “तुम अपने काम से काम रखो, इस रंडी की चूत का मैं वो हल करूँगा की दस दिन ये लंड लेने लायक नहीं रहेगी.”

इससे पहले कि मेहुल कुछ भी कह पता, शीला ने अपने मुंह से उसका लंड निकाला और कालिया की ओर देखकर बोली, “तेरे जैसे लौडों से मैं तब से खेल रही हूँ जब तू पैदा भी नहीं हुआ था. अगर तुझे लगता है कि तेरी चुदाई से मेरी चूत का बाल भी बांका होगा तो आज तू अपने मन की कर ले, और देख लेना कि मैं यहाँ से अकड़ के निकलूंगी, या तू. अब बातें कम कर और अपने काम पर लग. देखूँ कितना दम हैं तुझमें.”

कालिया को समझा में आया कि वो भावनावश कुछ अधिक कह गया. उसने तुरंत ही अपनी गति को सामान्य किया और बोला, “मेरे कहने का तात्पर्य ये नहीं था. मैं कुछ अधिक बोल गया. क्षमा कीजियेगा.” ये कहते हुए उसने अब उपयुक्त रूप से शीला की चुदाई आरम्भ की. शीला को अब इसमें आनंद आ रहा था. और उसने कालिया को उत्साहित करते हुए और तेजी से चोदने के लिए प्रेरित किया. ये सुनकर कलिये ने अपनी पुरानी गति पकड़ ली. शीला की चूत भी आनंद से पानी छोड़ रही थी. मेहुल को लंड को वो प्रेम से चूसते हुए झड़ रही थी, पर वो शिखर जहाँ से कुछ और नहीं दीखता, वो अभी भी दूर ही था.

मेहुल ने उसके मोटे मम्मों को अपने हाथों में लेकर मसलना आरम्भ किया. शीला के आनंद में इससे वृद्धि तो हुई, पर अभी तक वो शिखर से दूर थी. कालिया अब उसके भग्नाशे को अपने अंगूठे और ऊँगली से मसलने लगा. और शीला एकाएक ही उछल पड़ी और उसकी चूत से रस की एक लम्बी धार टूटी. उसका शरीर अकड़ते हुए छटपटाने लगा और वो झड़ते हुए थम गयी. कालिया भी अब अधिक दूर नहीं था और उसने अपने धक्के रोके नहीं, और निढाल पड़ी शीला की चूत का मंथन करता रहा. और फिर उसके काले नाग ने भी अपना रस शीला की चूत में बिखेर ही दिया. शीला के मुंह से मेहुल का लंड निकल चुका था. कालिया उसके शरीर पर ही लुढ़क गया और गहरी सांसे लेता हुआ एक ओर पलट गया.

शीला कुछ देर में सामान्य स्थिति में लौटी और उसने कालिया के लंड को हाथों में लेकर उसे सहलाया.

शीला: “औरत को खिलौना मत समझ, उसकी चूत से १२ इंच चौड़ा बच्चा बाहर आता है, लंड चाहे जैसा भी हो, औरत उसे झेल सकती है. और ये बात सही है कि लंड बड़े होने से अधिक सुख देता है, क्योंकि वो गहराइयाँ खंगाल देता है, पर स्त्री ४ इंच के लंड से भी वही सुख प्राप्त करने में सक्षम है जितना तेरे जैसे दैत्य रूपी लंड से. इसीलिए अपने लंड की शान में मत रह. औरत को सुख देने का प्रयास कर, तुझे पता लगेगा कि तेरे आधे लंड से भी वही सुख मिलता है.”

कालिया के ये बात समझ में आयी और उसने शीला को वचन दिया कि वो उसकी बात को गाँठ बाँधेगा और हमेशा अपने साथी के सुख के लिए चुदाई करेगा.

“सम्भव है कि कई महिलाएं ऐसी ही चुदाई की इच्छुक हों, तो उन्हें उसी प्रकार से चोदना। अब अगर उपदेश समझ आया हो तो उठ, मुझे बाथरूम जाना है, फिर देखूँ इस मेहुल में कितने कसबल हैं.”

ये कहकर शीला उठी और बाथरूम में चली गयी. वो सोच रही थी कि आजकल के लौंडे लंड बड़ा हो तो अपने आप को राजा समझने लगते हैं. मेरे नातियों को देखो. जैसा हमें अच्छा लगता है वैसे ही चोदते है, और बिना कहे समझ जाते हैं कि हमें क्या चाहिए.

जब शीला बाथरूम से लौटी तो देखा कि मेहुल अपने लंड पर कुछ लगा रहा था, देखने पर उसके पास में एक ट्यूब रखी दिखी. शीला समझ गयी कि अब उसकी गांड मारने का नंबर आ गया है. उसने कालिया कि और देखा तो उसे कुछ मायूस सा देखा. उसने कालिया के पास जाकर उसके चेहरे को हाथ में लिया.

शीला: “तुम मेरी गांड भी मारना चाहते थे न?”

कालिया नई हामी भरी.

शीला: “अब ईर्ष्या मत करो. देखो, तुम्हें मेरी चूत पहले मिली, तो मेहुल को गांड पहले मिल रही है. पर अगर तुम लोग चाहो, जैसा कि आज तुम्हारी इच्छा चलने वाली है, तो मैं भी चाहूंगी कि मेहुल मेरी चूत मारे और तुम गांड. अब अगर तुम लोग चाहोगे और एक साथ मारना चाहोगे तो मैं कुछ कह तो नहीं पायूँगी पर मुझे अच्छा ही लगेगा.”

ये सुनकर कालिया का चेहरा खिल उठा.

कालिया: “सच?”

शीला: “अगर तुम लोगों की इच्छा हो तो.”

मेहुल: “आंटीजी, मेरी तो बड़ी इच्छा है, और ऐसा हो कर रहेगा. क्यों कालिया?”

कालिया: “बिलकुल, बिलकुल.”

शीला: “तो मेहुल, अब तुम क्या चाहते हो?”

मेहुल: “आंटीजी, अब आपकी गांड को भी क्लब को सौंपने का कार्य सम्पन्न करना होगा.”

शीला: “उह्ह्ह, तुम मेरी मुलायम गांड को फाड़ दोगे क्या?”

मेहुल: “फड़वाने के ही लिए तो आप आयी हैं आंटीजी. आईये, घोड़ी का आसन लीजिये, पहले आपकी गांड में मैं ये जैल लगा दूँ. अन्यथा सच में न फट जाये.”

शीला: “तो क्या मैं कालिया के लंड को चूस सकती हूँ, अगर आप चाहो तो.”

कालिया की बांछे खिल गयीं.

कालिया: “बिलकुल, बिलकुल”

शीला ने घोड़ी का आसन लिया और कालिया ने उसके सामने आकर अपने लंड को उसके मुंह में पेल दिया. मेहुल गांड में जैल लगाने में व्यस्त हो गया.

शीला की गांड वैसी ही खुली हुई थी, इतने वर्षों से लौड़े खाते हुए, परन्तु मेहुल ने इस काम में बहुत समय व्यतीत किया और इसके कारण शीला की गांड की खुजली बढ़ती चली गई. जैसे जैसे खुजली बढ़ती, वैसे शीला कालिया के लंड पर और अधिक परिश्रम से चुसाई करती. जब मेहुल ने देखा कि अब गांड सही रूप में लौड़े के लिए तैयार है तो उसने अपनी उँगलियों को निकालकर अपने लंड को गांड पर रखा और बिना किसी रोक टोक के दो धक्कों में अंदर डाल दिया. शीला कुछ अकबका गई. उसने सोचा था कि मेहुल कुछ प्यार से गांड मारेगा पर उसने तो अचानक ही उसकी गांड को पैक कर दिया. शीला को परन्तु कोई परेशानी नहीं हुई.

मेहुल ने गांड को इतनी देर तैयार ही इसीलिए किया था कि चोदने में कोई रुकावट न हो. और अब वो दे दनादन धक्के मारने लगा, हालाँकि उसकी गति मद्धम ही थी. शीला को मेहुल का ये ढंग रास आया. मेहुल ने उसकी गांड को अच्छे से पढ़ा था और उसे इस स्तर तक तैयार किया था कि वो अपने ढंग से अपनी गति से उसकी चुदाई कर सके. शीला को मेहुल की बुद्धिमानी पर ईर्ष्या हुई. उसके नाती कभी इस बात का ध्यान नहीं देते थे. उन्हें ये सीखने का अब समय था. और सजल को तो वो इसके लिए अभी से ही शिक्षण दे देगी.

********

शीला ने रुककर अपने नातियों की ओर देखा.

शीला: “ये मत समझना कि मुझे तुमसे गांड मरवाना अच्छा नहीं लगता, पर जिस प्रकार से मेहुल ने उसे परखकर देखा, उसके इस विलक्षणता से मैं अवश्य प्रभावित हुई. और मैं चाहूँगी कि तुम तीनों भी इसमें निपुण हो जाओ, जिससे कि जब भी किसी की गांड मारने का अवसर मिले, वो स्त्री तुम्हारे इस ज्ञान और ध्यान से उतनी ही प्रभावित हो जितनी मैं हुई हूँ.”

तीनों नातियों ने अपने सिर हिलाकर हामी भरी और शीला को विश्वास हो गया कि वो अब इस पर चिंतन करेंगे. एक गहरी साँस लेकर उसने आगे बताना आरम्भ किया.

*******

तो मेहुल अपने लंड के लम्बे धक्कों से शीला की गांड मार रहा था वहीं कालिया भी अब शीला के मौखिक कला की परख कर रहा था. मेहुल ने अपनी गति बढ़ाते हुए शीला की गांड में लम्बे दमदार धक्के लगाने जब आरम्भ किये तो शीला से कालिया के लंड को मुंह में रखना असम्भव हो गया. कालिया उसके दोनों मम्मे अपने हाथों में लेकर निचोड़ने लगा और शीला के आनंद में वृद्धि होती चली गयी. मेहुल का लंड अब इतनी सरलता से अंदर बाहर हो रहा था कि उसे लगा कि आसन बदलने में कुछ आनंद अधिक आये. ये सोचकर उसने लंड निकाला और शीला को अपनी पीठ के बल लेटने के लिए कहा. इस आसन में लंड गांड में कुछ अधिक घर्षण के साथ जाता है.

एक हाथ से शीला की दोनों टाँगे ऊपर करते हुए मेहुल अपने लंड को शीला की गांड पर टिकाने लगा तो कालिया ने उसकी सहायता की और दोनों टाँगों को थाम लिया. अब मेहुल के लिए गांड का छेद उभर कर सामने आ गया था और इस समय वो चल रही चुदाई के कारण कुछ लालिमा लिए हुए था. पर मेहुल ने इस सबकी अनदेखी की और अपने लंड को लगते हुए एक ही झटके में अंदर पेल दिया. इस आसन में शीला की गांड अधिक कस गयी थी और शीला को भी अपने अंदर घुसते हुए आगंतुक का पूरा आभास हुआ.

मेहुल अब बिना रुके अपने सामर्थ्य के अनुसार शीला की गांड बजा रहा था. शीला भी इस आसन में कुछ अधिक ही आनंद ले रही थी. कालिया के स्थिति ऐसे थी कि शीला उसका लंड तो नहीं चूस सकती थी पर अपने चेहरे के सामने टट्टों को अवश्य चाट सकती थी और उसने यही किया भी. शीला की इस क्रिया से कालिया का लंड फिर से तमतमा गया. पर उसे अब अपने आप को रोकना था, शीला की गांड के लिए.

शीला की अब सिसकारियों और चीखों से कमरे में बहुत गर्मी हो चली थी. कालिया ने तब अपने खाली हाथ को आगे बढ़ाया और शीला के भग्नाशे और चूत को सहलाने और मसलने लगा. कुछ देर तक इस आक्रमण से आनंदित होने के बाद शीला एक लम्बी चीत्कार के साथ झड़ी तो उसकी चूत से निकली धार ने मेहुल को भिगा दिया. पर न तो कालिया रुका, न मेहुल. मेहुल तब तक शीला की गांड मारता रहा जब तक कि उसका पानी नहीं निकला. और उसने शीला की गांड को अपने रस से भरने के बाद ही चैन लिया. लंड को बाहर निकालकर वो एक और बैठकर सुस्ताने लगा. शीला की गांड बिलकुल खुली पड़ी थी और लुपलुप हो रही थी. कालिया ने उसके पैरों को धीरे से नीचे किया और फिर स्वयं भी एक ओर जा बैठा.

*******

शीला उठकर बाथरूम गई और बाहर निकलकर बोली, “हाँ, अब अगर कुछ पीने के लिए मिल जाये तो अच्छा रहेगा.”

मेहुल के पूछने पर उसने बियर की इच्छा की और मेहुल ने कालिया से भी पूछा तो उसने भी बियर के ही लिए कहा. तीनों सोफे पर बैठे बियर पीने लगे. बियर समाप्त होने पर शीला ने कालिया से कहा कि वो कुछ समय के लिए मेहुल से एक पडोसी के रूप में कुछ बात करना चाहती है, तो अगर वो उन्हें कुछ दस मिनट के लिए अकेला छोड़ दे तो अच्छा रहेगा. कालिया ने कपड़े पहने और फिर बाहर चला गया.

कालिया के जाने के बाद शीला ने मेहुल से उसके इस क्लब में आने का कारण पूछा. और बातों में उसे ये ज्ञान भी हो गया कि मेहुल के घर में भी उनके ही समान चुदाई चलती है. हालाँकि मेहुल ने ये कहा नहीं, पर शीला की अभ्यस्त आँखों और कानों ने खाली रेखाओं के बीच लिखी हुई कहानी पढ़ ली.

शीला: “तुम्हें कैसा लगा जब ये पता लगा कि निखिल मुझे यहाँ लेकर आया है.”

मेहुल: “हालाँकि मेरा इससे कोई प्रयोजन नहीं है, पर ये विदित है कि आपके परिवार में इस विषय में खुलापन है. फिर पार्थ जो कि शीघ्र ही आपका सम्बन्धी बनने वाला है, उसकी मामी ही इस क्लब की दूसरी भागीदार हैं. तो मैं कुछ न कुछ समझ सकता हूँ.”

शीला: “ये तुम्हें गलत नहीं लगा?”

मेहुल चुप रहा. और यही वो मौन था जिसने शीला को ये जता दिया कि मेहुल के घर में भी ये चलता है.

शीला: “स्मिता कैसी है, मुझे तो उसे देखते ही मुंह में पानी आ जाता है. तुम्हे नहीं लगता कि उसे भी तुम्हारे जैसे सख्त लौंडों से चुदवाने में आनंद आता होगा?”

मेहुल के मुंह से अनायास ही निकल पड़ा : “आता है.”

शीला: “और उनमे से एक तुम भी हो, है न? मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है, तुम जान ही चुके हो मेरे परिवार में इस प्रकार के संबंधों पर कोई रोक नहीं है. मैं चाहूंगी कि अगर मैं सही हूँ तो क्यों न हम सब एक बार मिलें.”

मेहुल: “मुझे अपने परिवार में ये पूछना होगा. सम्भव है समुदाय इसकी अनुमति नहीं दे.” ये मेहुल की दूसरी गलती थी और उसने बोलते ही इसे समझ लिया. पर अब तीर निकल चुका था.

शीला उसके पास सरकते हुए उसके लंड को सहलाते हुए उससे पूछ ही बैठी, “कैसा समुदाय?”

मेहुल: “मैं यहां नहीं बता सकता।” कैमरे की और संकेत करते हुए मेहुल ने कहा.

शीला: “ठीक है. हम बाद में बात करेंगे.”

इतने में समय पूरा होने पर कालिया कमरे में लौट आया और अपने कपड़े उतारकर बैठ गया.

कालिया बड़ी आशा के साथ शीला की ओर देख रहा था. शीला भी उसके लौड़े को अपनी गांड में लेने के लिए उत्सुक थी, पर चाहती थी कि वे दोनों ही पहल करें।

कालिया ने कहा, “मेरे विचार से अब हमें अपने इंटरव्यू का अंतिम चरण भी प्रारम्भ कर देना चाहिए.”

शीला छेड़ते हुए, “और अब तक के चरण में मैं उत्तीर्ण हुई या नहीं.”

कालिया: “ये हम आपको नहीं बता सकते. हमें तीनों चरणों की रिपोर्ट देनी होगी. आगे बॉस की इच्छा पर है.”

शीला: “बहुत कड़क बॉस है तुम्हारा. तो क्या है इस चरण का खेल.”

कालिया: “जैसा कि निश्चित हुआ था, मेहुल और मैं आपको एक साथ चोदेगे, मेहुल आपकी चूत मरेगा और मैं आपकी गांड.”

शीला ताली बजाते हुए: “वॉव, तब तो मजा ही आ जायेगा,है न मेहुल?”

मेहुल: “बिल्कुल। तो चलिए बिस्तर पर ही चलते हैं.”

शीला: “पहले मैं ये दोनों लंड चूस लूँ थोड़ी देर, प्लीज़।”

मेहुल और कालिया ने सिर हिलाया और शीला के सामने खड़े हो गए. शीला एक एक करके दोनों लौडों को चूसने लगी और कुछ ही देर में दोनों लंड उसके थूक से पूरे भीग चुके थे. फिर मेहुल ने उसे उठाया और स्वयं जाकर बिस्तर पर लेट गया. उसका मोटा लम्बा लंड छत को देख रहा था. शीला ने उसके दोनों ओर पैरों के अपनी चूत को उसके लंड पर उतार दिया. चुदी होने के कारण उसे पूरा लंड अंदर लेने में अधिक समय नहीं लगा. वो लंड को लेकर आगे की ओर झुक गयी.

कालिया अब उस गांड को प्यार और वासना से देख रहा था जिसे भेदने के लिए वो न जाने कबसे उत्सुक था. उसे कम ही इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता था, पर जब भी बुलाया जाता, वो नयी सदस्या की गांड मारने में सबसे अधिक इच्छुक रहता था. हालाँकि उसे आज की गांड में पहला प्रवेश नहीं मिला था, पर फिर भी उसे न जाने क्यों इसे मारने में सबसे अधिक आनंद आने वाला था. एक कारण और भी था. बहुत कम ही ऐसा होता था कि किसी साक्षात्कार में दो रोमियो को एक साथ भेजा जाये. पर आज उसे ऐसा सुअवसर प्राप्त हुआ था.

कालिया ने अपने काले मोटे लौड़े को शीला की गांड की छेद पर रखा और उसकी पीठ पर हाथ रखते हुए उसे कुछ और झुकाया. हल्के दबाव से ही खुली गांड में उसका लंड अंदर प्रविष्ट हो गया. शीला के शरीर में झुरझुरी सी पैदा हुई. वर्षों से चुदवाती होने के बाद भी, उसे दो लौडों की चुदाई आज भी रोमांचित करती थी. और ये दोनों तो नए लंड थे. उसकी चूत आने वाले सूख की आशा से ही पनिया उठी.

कालिया का लंड बे रोक टोक शीला की गांड में जा रहा था. मेहुल का लंड चूत में होने के कारण उसे पर्याप्त तंगी का आभास हो रहा था और शीला को भी उसके अंदर जाते हुए लंड की हर इकाई का अनुभव हो रहा था. जब कालिया ने अपना लंड पूरा अंदर डाल दिया तो सब ठहर कर साँसे लेते हुए रुक गए.

मेहुल ने पहले अपना दाँव खेला और अपने लंड को अंदर बाहर करना आरम्भ किया. फिर वो रुका और इस बार कालिया ने अपने लंड को गांड में चलाया. फिर इसी क्रम में दोनों रोमियो एक एक करते हुए एक बार चूत और एक बार गांड में लंड चलने लगे. कुछ देर यूँ ही करने के बाद दोनों ने अपने लंड साथ चलाने आरम्भ किये पर विपरीत दिशा में. मेहुल अंदर जाता तो कालिया बाहर और जब कालिया अंदर जाता तो मेहुल बाहर. ये विस्मय का विषय था कि जब ये दोनों पहली बार इस प्रकार से मिलकर चोद रहे थे, फिर भी उनका तालमेल कितना सटीक था. और शीला तो जैसे आनंद से दूभर हुई जा रही थी. दो लौडों की चुदाई उसकी सर्वप्रिय थी, और आज भी उसे इसमें व्ही आनंद प्राप्त हो रहा था.

दोनों रोमियो अपनी गति बढ़ाते हुए अब शीला के दोनों छेदों को अच्छे से मथ रहे थे. शीला की चीखें कमरे के ध्वनिरोधक होने के कारण कमरे में ही घुट के मर जा रही थीं. अन्यथा क्लब में भी एक भूचाल आ गया होता. इस तीव्र चुदाई में अचानक मेहुल और कालिया ने अपनी दिशाएं एक कर लीं. अब दोनों एक साथ अंदर और बाहर आ जा रहे थे. शीला की चरम सीमा कई बार पर हो चुकी थी. उसे डबल चुदाई इसीलिए प्रिय थी क्यूँकि वो इसमें अनगिनत बार झड़ती थी. और उसके शरीर में आज भी वही वासना थी जो वर्षों पहले थी. दोनों एक ही गति और एक ही दिशा में चोदते हुए जब कुछ नया ढूंढने लगे, क्योंकि उनके लौड़े अभी भी उनका साथ दे रहे थे तो उन्होंने शीला को पलट दिया. अब शीला की पीठ मेहुल की ओर हो गयी और मेहुल ने अपने लंड को शीला की गांड में जड़ दिया. वहीं कालिया ने अपने लंड को शीला की चूत में ठूंस कर चुदाई का महासंग्राम फिर आरम्भ कर दिया.

शीला अब उनके बीच में एक खिलौना ही थी जिसे वे अपनी इच्छा से तोड़ मरोड़ रहे थे. मेहुल के हाथ शीला के पके थनों को मसल रहे थे जैसे कि उनसे दूध ही निकाल देंगे. जहां मेहुल उसके मम्मे मसल रहा था, कालिया उसकी चूची की घुंडियों को अपनी उँगलियों के बीच लेकर मसलते हुए दबा रहा था. पर चार बड़े हाथों के लिए स्थान पर्याप्त नहीं था. हारकर कालिया ने अपने हाथ हटाए और शीला के भग्नशे को मसलने में लगा दिए. शीला की चीखें किसी दुर्बल हृदय के व्यक्ति को आघात पहुंचा देतीं, पर तीनों में से कोई भी अब लौटने की स्थिति में नहीं था.

कालिया ने अब अपने एक स्वप्न को पूरा करने का निश्चय किया. वो और उसके मित्र जब अपने देश में इस प्रकार से किसी स्त्री की चुदाई करते थे तो अंतिम चरण इतना भयावह होता था कि वो स्त्री जीवन पर्यन्त उनकी चुदाई नहीं भूल पाती थी. और उनके पास अवसर मिलने पर लौटकर आती थी. पर भारत में उसे ये करने का अवसर नहीं मिला था. पर उसने शीला को उस प्रकार की ही स्त्री समझा जो इस देश में भी उसके इस सपने को साकार कर सके.

कालिया ने अपने लंड को शीला की चूत से बाहर निकाला और मेहुल को रुकने का संकेत दिया. शीला ने आंख खोलकर इस ठहराव पर प्रश्न भरी आँखों से कालिया की ओर देखा तो कालिया ने उसके होंठों को गहरा चुंबन दिया.

कालिया: “मैडम, अब आपकी अंतिम परीक्षा है. और मुझे विश्वास है कि आप ही हैं जो इसमें उत्तीर्ण हो पाएंगी.”

शीला अभी तक उसे प्रश्न भरी आँखों से ताक रही थी. पर कालिया ने अपने लंड को पकड़ा और शीला की गांड पर रखा, जहाँ मेहुल का लंड पहले ही अपना वर्चस्व जमाये हुए था. उसकी इस कार्यवाई से शीला और मेहुल दोनों की ऑंखें फ़ैल गयीं. पर कालिया ने अपने लंड को बहुत ध्यान और धीरे से मेहुल के लंड के साथ शीला की गांड में उतारा। समय मानो ठहर गया. कालिया के सिवाय शीला और मेहुल दोनों जड़वत थे. समय अवश्य लगा पर शीला की गांड में कालिया का लंड अब मेहुल के साथ जुड़ गया था. शीला की ऑंखें बाहर निकल चुकी थीं.

कालिया: “मैडम, हमारे देश में इसे गांड की डबलिंग कहते हैं. और जो औरत इसमें सक्षम होती है, वो दुनिया में किसी भी प्रकार की चुदाई करवा सकती है.”

फिर उसे मेहुल से कहा: “अब हम दोनों को एक ही साथ लौड़े अंदर बाहर करने हैं, और एक भी ताल गलत नहीं होनी चाहिए. समझे.”

मेहुल जो स्वयं सकते में था केवल हाँ में सिर ही हिला पाया.

कालिया मेहुल से: “अब जैसे मैं कहूंगा वैसे ही करना, पहले बिलकुल धीरे धीरे. चिंता मत कर मैडम को इतना आनंद आएगा कि वो हमें धन्यवाद करेंगी. ओके.”

“बाहर”

“अंदर”

“बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर”

“बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर”

कुछ देर बाद.

“अब थोड़ा जल्दी.”

“बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर”

फिर कुछ और देर के बाद.

“अब और तेज.”

“बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर”

फिर.

“जल्दी जल्दी”

“बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर”

“अब धीमे धीमे.”

“बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर”

और इस प्रकार की एक शृंखला बनाते हुए कालिया मेहुल को अपने साथ रखते हुए शीला की गांड में दो दो लौडों से चुदाई करता रहा.

थोड़ा तेज.

“बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर”

जल्दी जल्दी.

“बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर”

तेज तेज.

“बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर” “बाहर” “अंदर”

शीला को कुछ समझ नहीं पद रहा था की उसके साथ क्या हो रहा है. उसकी चूत से छुटटी रस की धार से कालिया का शरीर भीग चुका था. पर दोनों उसकी गांड की ऐसी दुर्दशा कर रहे थे कि शीला को लग रहा था कि उसे अब सामान्य लंड चोद भी पाएंगे कि नहीं.

मेहुल और कालिया ने एक साथ ही झड़ने के निकट होने का संकेत किया. तो कालिया ने गति को धीमे धीमे कम करते हुए रुकने के लिया कहा. फिर उसने अपने लंड को बहुत सावधानी से बाहर निकाला और खड़ा हो गया. मेहुल ने भी अपने लंड को बाहर निकाल लिया और कालिया की और प्रश्न भरी दृष्टि से देखा.

कालिया: “मैडम ने अभी तक हमारे लौडों के रस का स्वाद तो लिया ही नहीं. तो आओ अब इन्हें ये मजा भी दे देते हैं.”

शीला मरणासन्न अवश्य थी पर उसमें लंड का पानी पीने के नाम से न जाने फिर एक बार होश और जोश दोनों आ गए. उसने हटते हुए मेहुल को भी खड़ा होने का अवसर दिया और फिर वो लेट गयी. एक ओर से कालिया और एक ओर से मेहुल उसे अपने लंड मुंह में डालकर चूसने के लिए दे रहे थे. और जैसा इस कार्यक्रम का आरम्भ हुआ था वैसे ही वो एक एक करके दोनों को चूस रही थी. कालिया ने पहले अपना रस छोड़ा और शीला के मुंह में भर दिया. शीला निसंकोच उसे एक बून्द भी व्यर्थ किये बिना पी गयी. कालिया अलग हो गया और अब पूरा ध्यान मेहुल के लंड को मिला जिसने अधिक देर नहीं लगाई और शीला के मुंह में अपना लावा उढेल दिया. शीला ने उसे भी उतने ही प्रेम से ग्रहण किया. और फिर ऑंखें बंद करके लेट गयी.

मेहुल और कालिया वहां से हटे और बाथरूम में जाकर स्नान किया और फिर बाहर निकलकर दोनों ने एक एक बियर ली और शीला के उठने की प्रतीक्षा करने लगे. शीला आधे घंटे तक यूँ ही लेती रही, और शायद कुछ देर के लिए सो भी गयी. पर उसके बाद उठी और दोनों की ओर देखते हुए बाथरूम में नहाने के लिए चली गयी. मेहुल ने उसके लिए बजी एक बियर निकाली और जब वो बाहर आयी तो उसके हाथ में थमा दी.

शीला: “ये मेरे जीवन का सबसे अविस्मरणीय अनुभव था. कालिया, मुझे तुम्हारे इस कृत्य के लिए तुम सदैव याद रहोगे. और ये तय है, की अब ये मेरे जीवन का एक अभिन्न अंग बन जायेगा. और इसके लिए मैं तुम्हारा आभार व्यक्त करती हूँ. ”

कालिया: “नहीं मैडम, मुझे लगा कि आपमें वो शक्ति है जो आप इसे झेल पाएं और मुझे प्रसन्नता है कि आपको इसमें आनंद आया. और चिंता न करें. जैसा अपने मुझे स्त्री की चूत के बारे में कहा था, गांड भी सिकुड़कर पहले समान हो जाएगी, हाँ एक दो दिन अवश्य लगेंगे.”

शीला ने बियर समाप्त करके दोनों का फिर से धन्यवाद किया. मेहुल और कालिया ने उठकर उसके होंठों का प्रगाढ़ चुंबन लिया और उससे विदा ली. फिर अपने कपड़े पहने और कमरे से चले गए. जाते हुए मेहुल ने उसे मुड़कर देखा तो शीला ने उसे फोन का संकेत किया कि वो उससे बात करेगी. मेहुल सिर हिलाकर कमरे से निकल गया.

शीला ने अपने कपड़े पहने और देखा कि अब ढाई बज चुके थे. उसने निखिल को मंजुला के साथ कुछ और समय देने का निश्चय किया और एक और बियर निकालकर आज हुए वृत्तांत पर विचार करने लगी.

*******

तीन बजे शीला बाहर आयी और उसने निखिल को रिसेप्शन के निकट के कमरे से निकलते देखा. उसके पीछे पीछे मंजुला भी थी. दोनों के चेहरे इस समय सम्भोग की संतुष्टि से चमक रहे थे.

शीला: “तो तुम दोनों ने मेरे देर से आने का पूरा लाभ उठाया.”

मंजुला शर्मा गयी तो शीला ने उसे आंख मारी और कहा, “बहुत निखर गयी हो इतनी ही देर में.”

फिर वो निखिल के साथ सुप्रिया के घर लौट गयी.

*******

ये पूरा विवरण सुनकर घर के सब लोग अब कामवासना से भर चुके थे.

सुप्रिया: “मॉम, मैं अब घर जा रही हूँ, निखिल और नितिन की आज जमकर परीक्षा रहेगी.”

नितिन: “माँ, ये तो बाद में ही पता चलेगा कि परीक्षा किसकी हुई.”

सुरेखा भी घर जाने को आतुर थी. वो सजल को गांड की पढ़ाई कैसे की जाती है, इसका ज्ञान देने के लिए उत्सुक थी. संजना सकते में थी. नानी ने जिस सरलता से ये सब बताया था, उसे अपने जीवन का अर्थ ही अब समझ नहीं आ रहा था. आज मॉम से ही पता लगेगा।

समर्थ और शीला ने अपने सभी बच्चों को विदा किया और फिर एक एक ड्रिंक लेकर अपने कमरे में चल दिए.

........अगले भाग में आगे
 
तीसरा घर: शीला और समर्थ सिंह

अध्याय ३.३

भाग ३

*********

नितिन गाड़ी चला रहा था और सुप्रिया उसके साथ बैठी थी. कोई कुछ भी नहीं बोल रहा था. सब अपने विचारों में खोये हुए थे. निखिल ने अपने मोबाइल से एक एस एम एस भेजा. कुछ मिनट बाद उसे उसका उत्तर मिल गया. उसने फोन अपनी जेब में रखा और सोचने लगा.

नितिन ने गाड़ी घर में खड़ी की और सुप्रिया के साथ बाहर निकला. निखिल ने उससे चाबी ली और कहा कि वो कुछ समय में लौटेगा. सुप्रिया ने उसकी ओर देखा और फिर नितिन के साथ घर में चली गयी. निखिल आगे बैठा और गाड़ी लेकर निकल गया. उसे किसी से मिलना था.

*******

सुरेखा सजल और संजना के साथ अपने घर पहुंची. तीनों घर में गए और कपड़े बदलकर सुरेखा के कमरे में आ गए. सुरेखा ने एक झीनी नाइटी पहनी हुई थी जिसमें से उसका अंग प्रत्यंग दिख रहा था. सजल के मन में आया कि पूछे कि इसकी भी क्या आवश्यकता थी, पर वो चुप ही रहा. सुरेखा ने सजल से पूछा कि आज नानी की कहानी से उसने क्या सीखा?

सजल: “बहुत कुछ. पर सबसे अधिक ये कि स्त्री को कमजोर नहीं समझना चाहिए. नानी ने जिस प्रकार से कालिया को पाठ पढ़ाया, वो विलक्षण था.”

*******

निखिल कुछ समय में एक घर पहुंचा और घंटी बजे. एक स्त्री ने दरवाजा खोला और आश्चर्य से उसकी ओर देखा. निखिल ने उसे कुछ कहा और लौटने लगा.

स्त्री, “बस ये बोलने के लिए आये थे?”

निखिल ने हामी भरी और अपनी गाड़ी में बैठा और घर चला गया.

घर पर देखा तो शांति थी. अपनी आदत के अनुसार उसके कदम अपनी माँ के कमरे की ओर बढ़ गए. कमरे में देखा तो नितिन सुप्रिया के ऊपर चढ़ा हुआ था. निखिल ने दरवाजा बंद किया और अपने कमरे में चला गया था. उसे कुछ गहन विचार करना था. उसने जो आज सुना था उसके बाद उसके मन में कई प्रश्न थे. पर वो ये भी जनता था कि उनका उत्तर उसे आज तो नहीं ही मिलने वाला. उसके अपने कपड़े उतारे और बाथरूम में जाकर मुंह हाथ धोये और फिर अपने बिस्तर पर लेट कर सोचते हुए सो गया.

उधर जब नितिन सुप्रिया की चुदाई समाप्त कर चूका तो उसने समय देखा.

“मॉम, निखिल लौटा कि नहीं.”

“पता नहीं. उसके मन में कुछ चल रहा है. जब मन होगा तब बता देगा. अब सोते हैं.”

********

सुरेखा के घर में भी चुदाई का ही वातावरण था. अपनी माँ के भड़काऊ गाउन को देखकर सजल का लंड अकड़ चुका था. उसने आगे बढ़कर सुरेखा को अपनी बाँहों में भर लिया और उसे चूमने लगा. सुरेखा भी उसका पूरा साथ दे रही थी. सुरेखा ने सजल से अपने कपड़े उतारने के लिए कहा और फिर संजना को भी वही कहा. भाई बहन जो अब इस रंग में रंग चुके थे कुछ ही क्षणों में सुरेखा के सामने नंगे खड़े थे. सुरेखा दोनों को देखकर गर्व कर रही थी. संजना का जवान शरीर उसे अपने दिन याद दिला रहा था और सजल के शरीर में वो आकर्षण था कि कोई भी स्त्री उससे आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकती थी.

सुरेखा ने अपने गाउन की डोर खींची और वो पारदर्शी झीना गाउन भी उसके शरीर से गिर गया. इस बार सजल और संजना उसके शरीर को देखकर दंग थे. इस आयु के दो बच्चे होने के बाद भी सुरेखा का शरीर बहुत सुन्दर था. हाँ कुछ भरा हुआ अवश्य था, पर मोटापा कदापि नहीं था. सुरेखा ने अब पहल की और अपने दोनों बच्चों को लेकर बिस्तर पर आ गयी.

सुरेखा: “संजना, मैं चाहती हूँ, कि हम दोनों एक दूसरे की चूत चूसें और सजल को मेरी गांड का निरिक्षण करने का अवसर दें, जैसा उसने आज नानी से सुना है.”

संजना: “मॉम, ये मेहुल वही है क्या जो नानी के घर के पास आठ नंबर के घर में रहता है.”

सुरेखा: “हाँ, नानी की बातों से तो यही लगा.”

संजना: “वो मेरे ही साथ पढता है, पढ़ने में बहुत तेज है, पर कुछ दब्बू लगता है, पर नानी ने जो बताया उसके अनुसार तो वो वैसा नहीं है, जैसा दिखाता है.”

सुरेखा: “हो सकता है कि ये उसका कोई स्वांग हो. पर तुम उसके बारे में क्यों पूछ रही हो?”

संजना: “मॉम, मुझे वो बहुत अच्छा लगता है. सबकी सहायता करता है. और नानी के अनुसार भी उसने उन्हें कालिया से एक प्रकार से बचाया ही.”

सुरेखा: “ओह हो हो, तो क्या तुम उससे प्यार करती हो?”

संजना: पता नहीं माँ, पर मुझे वो अच्छा लगता है.”

सुरेखा: “तो क्यों नहीं तुम किसी दिन शाम को उसे बुला लेती हो. हम भी मिल लेंगे. देखें वो तुम्हारे विषय में क्या सोचता है.”

ये कहते हुए सुरेखा ने संजना को लिटाया और उसके मुंह पर अपनी चूत रखते हुए संजना की चूत पर अपने होंठ रख दिए. सजल ने सुरेखा की गांड की निरीक्षण हेतु उपयुक्त स्थान लिया और उसे ध्यान से समझने लगा.

*******

अगले दिन सुबह:

समर्थ समाचार पत्र पढ़ते हुए टीवी पर चल रहे स्थानीयसमाचार भी सुन रहा था. शीला चाय बनाने के लिए किचन में थी. पढ़ते हुए उसके कानों में एक समाचार सुनाई दिया तो उसने टीवी की ओर देखते हुए समाचार पत्र बंद कर दिया. कल रात को एक सड़क दुर्घटना में तीन लोगों की मृत्यु हो गयी थी. दुर्घटना उनके शहर में बाहर से लौटते हुए हुई थी. दुर्घटना कैसे हुई, इसमें अभी भी पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली थी. मृत व्यक्तियों के चित्र दिखाकर बताया जा रहा था कि वे सब कौन थे और कहाँ काम करते थे.

समर्थ का फोन बजा. उसने उठाया तो दूसरी ओर से कुछ बोला गया. समर्थ ने “ठीक है” कहते हुए फोन रख दिया.

मृत व्यक्ति नागेश की पिछली कम्पनी के थे, जिसमें से एक उसका वो बॉस था जिसके कारण नागेश को अपने परिवार से दूर होना पड़ा था. अन्य दो उसी कम्पनी के ऊँचे पद पर कार्यरत अफसर थे जो इस षड्यंत्र में साथी थे. ये तीनों कैसे साथ थे, ये एक दुविधा का विषय था. अभी के लिए पुलिस इसे दुर्घटना मानते हुए केस की जाँच कर रही थी.

समर्थ ने टीवी बंद किया ही था कि शीला भी आ गयी.

शीला: “मुझे सुप्रिया के घर जाना है आज.”

समर्थ: “तो जाओ, इसमें पूछने की क्या बात है.”

शीला: “पूछ नहीं रही, बता रही हूँ. ११ बजे पहुंचना है. ड्राइवर को बोल दीजिये, देर न करे.”

समर्थ: “ठीक है. और कल एक दुर्घटना में नागेश की कम्पनी के तीन लोग चल बसे.”

शीला ने समर्थ को पैनी दृष्टि से देखा, “हम्म, ठीक है. जो जैसा करता है, वैसा ही भरता है.”

चाय पीने के बाद शीला नाश्ता बनाने में जुट गयी. और साढ़े दस बजे सुप्रिया के घर के लिए निकल गयी.

*********

सजल और संजना सुबह नौ बजे तक सोते रहे थे. कल रात दोनों सुरेखा के साथ बहुत देर तक जागे थे. जब सुरेखा ने संजना के मुंह पर अपनी चूत रखने के बाद उसकी चूत में मुंह डाला तो वो एक बार फिर उसकी गंध और स्वाद के वशीभूत हो गयी. अपनी जीभ से उसके रस के कतरे कतरे को चाटने की इच्छा ने उसे इतना उतावला कर दिया कि उसे ये भी आभास नहीं हुआ कि सजल उसकी गांड के छेद को खोलकर अंदर झांक रहा था. उस काली खाई में भला उसे क्या ही दिख पाता, पर उसने प्रयास अवश्य किया. जब जान लिया कि इसे किसी ओर रूप से पढ़ना होगा तो उसने अपनी जीभ से उसे कुरेद कर देखा. गांड के आसपास के खुरदुरी सलवटें उसे एक अलग ही अनुभव दे रही थीं.

पर जब उसने अपनी जीभ सुरेखा की गांड के छेद पर लगाई और उसे कुछ फैलाते हुए अंदर डाली तो सुरेखा की भी तंद्रा टूट गयी. अब वो दो सुख प्राप्त कर रही थी. एक अपनी अब तक कुंवारी बेटी की चूत का स्वाद और दूसरा अपने बेटे की जीभ का उसकी गांड को चाटना। संजना को लगा कि उसके मुंह में कुछ रस सा गिरा, जो उसने पी लिया क्योंकि उसके पास कोई और परोजन भी नहीं था. पर उसे उसका स्वाद अच्छा ही लगा और गंध से उसकी अपनी चूत भी पानी छोड़ने लगी. सुरेखा बिना अपने मुंह को संजना की चूत से हटाए उसे जैसे खा ही जाना चाहती थी. वो जानती थी कि अब वो दिन दूर नहीं जब इसकी सील टूटेगी और चूत के इस स्वाद में परिवर्तन आ जायेगा. अगर उसका बस चलता तो वो संजना के इस रस को जीवन पर्यन्त के लिए किसी शीशी में बंद कर के रख लेती. पर वो जानती थी कि इसका कोई औचित्य नहीं.

सजल अपने पूरे मन से सुरेखा की गांड का भोग लगा रहा था. उसकी जीभ जितना सम्भव था उतना अंदर जाकर सुरेखा की गांड के रोम रोम को चाट रही थी. और न जाने कैसे, उसे समझ आ गया कि उसे अपनी माँ की गांड कैसे मारना है. कहते हैं कि ध्यान से ज्ञान की उपलब्धि होती है, और सजल के साथ भी यही हुआ. ये ज्ञान आते ही उसका लंड झटके लेने लगा. अब उसे किसी न किसी छेद में जाने की तीव्र इच्छा होने लगी.

सजल: “मॉम, मुझे चुदाई करनी है, प्लीज.”

सुरेखा: “आ गया न अपने मतलब पर. मेरा भी मन है, पहले मेरी चूत की ही आग शांत कर तब तक मैं संजना के रस से अपना मन भर लूँ.”

सजल ने उठकर अपनी माँ के पीछे जाकर उसकी चूत पर लंड लगाया. संजना ने अपना मुंह वहाँ से हटाकर सजल को स्थान दिया. सजल ने बड़े प्रेम के साथ अपने लंड को सुरेखा की चूत में उतार दिया. सुरेखा ने आह भरी और वो फिर से संजना की चूत में खो गयी.

पर संजना की आँखों के सामने उसके भाई का लंड उसकी माँ की चूत में आवाजाही कर रहा था. हर धक्के के साथ सुरेखा का भग्नाशा भी हिलता और उसकी चूत फैलकर लंड को अंदर लेती और निकलते लंड से सिकुड़ जाती। संजना को ये दृश्य बड़ा मनोरम लग रहा था. सुरेखा के भग्नाशे ने भी उसे बहुत आकर्षित किया हुआ था. उसने अपनी जीभ निकली और सुरेखा के भग्नाशे पर चला दी. और अचानक ही सुरेखा की चूत ने उसके मुंह पर ढेर सारा पानी छोड़ दिया.

सुरेखा ने अपना मुंह संजना की चूत में से निकाला और सिसकते हुए “ओह, संजना!” पुकारा. संजना समझ गयी की माँ को अच्छा लगा है. बस फिर क्या था वो पूरे मन से उसे चाटने में व्यस्त हो गयी. सुरेखा ने आनंद की कुछ चीत्कारें निकलीं और अपने मुंह को इस बार संजना के भग्नाशे पर लगा कर उसे चूसने लगी. इस बार झड़ने और चीखने की बारी संजना की थी. सुरेखा ने संजना की अक्षत चूत का अमृत पीने में कोई संकोच नहीं किया. सजल इस सब से अनिभिज्ञ अपनी माँ की प्यार से चुदाई कर रहा था. सुरेखा अपने दोनों बच्चों के उसकी चूत पर चल रहे प्रहार से हर पल एक नई ऊंचाई को छूती और झड़कर लौट आती।

“मॉम, मेरा होने वाला है.” सजल ने चेतावनी दी.

सुरेखा: “संजना को पिला दे आज. उसे भी तो इस रस पीने की आदत पड़नी चाहिए.”

संजना का मुंह सजल के चलायमान लंड के ठीक नीचे ही था और जैसे ही सजल का पानी छूटने को हुआ उसने अपने लंड को संजना के मुंह के सामने कर दिया. संजना ने उसके लंड को मुंह में लिया और चूसने लगी और कुछ ही क्षणों में सजल ने उसके मुंह में अपना रस भर दिया. संजना ने ऑंखें बंद करते हुए उसे पी लिया. इस बार उसे इसमें कुछ अधिक स्वाद आया. सम्भव था की सुरेखा की चूत के रस से मिलकर स्वाद में वृद्धि हो गयी थी. संजना मुस्कुराकर सोचने लगी कि कितनी जल्दी उसे इसका स्वाद भा गया.

सजल के लंड को चूसते हुए उसे अपने नाना का ध्यान आया, जो इस प्रतीक्षा में थे कि कब उसकी माँ और मौसी उसे पहली चुदाई के लिए मुक्त करेंगी. और नानी. नानी भी तो अभी तक मेरी चूत को नहीं चाटी है. और निखिल, और नितिन. ये सोचते हुए उसने अपनी माँ के मुंह में सामान्य से दो गुना रस छोड़ दिया और सजल के लंड को मुंह से निकालकर निढाल सी पड़ गयी.

रात में सोने के पहले सजल ने सुरेखा की गांड भी उतने ही प्यार से मारी और सुरेखा ने इस बार सजल के लंड के रस को स्वयं के लिए सुरक्षित रखा. तीनों फिर एक दूसरे को चूमते चाटते हुए सुरेखा के ही साथ नंगे सो गए थे.

*******

शीला साढ़े दस बजे सुप्रिया के घर के लिए निकल गयी. घर पहुँचने के बाद निखिल ने दरवाजा खोला और शीला को बैठा कर अपने काम से बाहर चला गया. ११ बजे घंटी बजी और शीला ने दरवाजा खोला तो मेहुल को खड़ा पाया. उसने मेहुल को अंदर आमंत्रित किया और उसे बैठा कर पूछा कि वो क्या लेगा. मेहुल ने कुछ भी लेने से मना किया तो शीला दो ग्लास पानी लेकर आयी और बैठ गयी.

शीला: “मैं समझ रही हूँ कि तुम्हें कुछ असहजता हो रही है. पर मैं तुम्हें कुछ बताना चाहती हूँ. और तुम भी समझ पाओगे कि ऐसा क्यों है.”

शीला: “हम, मेरा अर्थ है, मेरा परिवार, पारिवारिक सम्भोग सुख में विश्वास करता है. मैं और मेरे पति पहले दूसरे जोड़ों के साथ अदला बदली करते थे, जो काफी वर्षों तक चला. पर मेरी बड़ी बेटी सुप्रिया के तलाक के बाद एक दिन अचानक वो हमारे खेल में सम्मिलित हो गयी. इसके बाद हमारा बाहर के जोड़ों से धीरे धीरे सम्बन्ध टूट गया. जब सुप्रिया का बड़ा बेटा निखिल १८ वर्ष का हुआ तो सुप्रिया के आवेदन पर मैंने उसे स्त्री का पहला सुख दिया. या यूँ कहूँ कि पहला पारिवारिक सुख दिया, क्योंकि वो पहले से ये सुख अन्य स्त्रियों से पा चुका था. तुम तो जानते ही हो, कि निखिल चुदाई में कितना पारंगत है. फिर दो वर्ष बाद नितिन भी हमारे खेल में जुड़ गया. मुझे और सुप्रिया के लिए अब तीन तीन पुरुष घर में ही उपलब्ध थे.”

शीला आगे बताती रही, “समय के साथ हम पाँच एक दूसरे के साथ संतुष्ट थे. पर कुछ कमी थी. मेरी छोटी बेटी सुरेखा का दाम्पत्य जीवन उतना सुखी नहीं था. फिर कुछ दिनों पहले उसने हम सबको एक साथ चुदाई करते हुए पकड़ लिया. पर उसकी प्यासी आत्मा ने हमें कुछ देर तो बुरा भला कहा, पर मेरे पति ने उसे भी हमारे खेल में मिलाने में सफलता प्राप्त की.”

“सुरेखा के दो बच्चे हैं, सजल और संजना. सजल के कुंवारेपन का निदान सुरेखा ने कुछ ही दिन पहले किया है, पर अभी वो अपने आप में ही चुदाई कर रहे हैं. पर जल्दी ही मुझे और सुप्रिया को भी सजल से चुदने का अवसर मिलने वाला है. संजना अभी कुंवारी ही है. और शीघ्र ही उसका कौमार्य मेरे पति भंग करेंगे. इसमें एक ही अड़चन है. उसकी मौसी और माँ उसकी अनछुई चूत के रस को जितने और दिन सम्भव हो चखना चाहती हैं. और जब तक उन दोनों से हमें स्वीकृति नहीं मिलती, हम रुके हुए हैं.”

मेहुल एकाग्र होकर ये अद्भुत कथा सुन रहा था. उसे इसमें अपने परिवार के साथ कुछ समानता दिख रही था, हालाँकि उसे अपने परिवार के भूतपूर्व क्रिया कलापों के बारे में कम ही ज्ञान था. वो शीला के चेहरे की ओर देखता हुए उसकी बात सुन रहा था.

शीला: “कुछ दिन पहले निखिल का विवाह पार्थ की ममेरी बहन सागरिका से तय हुआ है. ये तुम जानते हो. पर जो तुम्हीं जानते, वो ये कि पार्थ के परिवार में भी यही जीवन शैली है. और हम सब एक दिन दिंची क्लब में एक दूसरे के साथ चुदाई कर चुके हैं, ये निश्चित करने के लिए, कि हमारे परिवार एक दूसरे से पूर्ण रूप से मिल पाएंगे या नहीं.”

फिर शीला ने मेहुल को पैनी दृष्टि से आँखों में देखकर कहा, “उस दिन तुम्हारी बात से मुझे ये ज्ञात हो गया कि तुम्हारे परिवार में भी ऐसा ही उन्मुक्त वातावरण है. और मेरी बूढी ऑंखें धोखा नहीं खातीं. क्या मैं सही हूँ?”

मेहुल समझ गया था कि शीला के पूरे कथानक का तात्पर्य उसे विश्वास देने का था कि वो अपनी बात खुल कर कह सकता है.

मेहुल: “अपने सही पढ़ा. पर मैं अभी ही इस खेल में सम्मिलित हुआ हूँ. अभी तक मैंने केवल मॉम और भाभी की मॉम की ही चुदाई की है. हाँ आज या कल श्रेया भाभी के साथ मेरे चुदाई की योजना है. और फिर अन्य महिलाओं के साथ भी.”

शीला: “हम्म्म, और ये समुदाय क्या है. विश्वास रखो, मैं तुम्हे अकेले में इसीलिए पूछ रही हूँ, की अगर आवश्यकता नहीं है, तो मैं इस बात को केवल अपने तक ही रखूँगी। और ये कभी भी विदित नहीं होगा कि तुमने मुझे कुछ भी बताया है.”

मेहुल ने गहरी साँस ली और शीला को समुदाय के बारे में बताया. शीला की आँखों में एक चमक थी जब मेहुल ने अपना कथन पूरा किया.

शीला: “ये बताओ, कि हम इस समुदाय में कैसे जुड़ सकते हैं?”

मेहुल ने अपने ज्ञान के अनुसार शीला को बताया. शीला सोच में पड़ गयी. किसी स्थापित सदस्य से परिचय के पश्चात चार से छह महीने के बाद ही वो इसमें सम्मिलित हो सकेंगे. मेहुल ने कहा कि वो श्रेया भाभी से पूछेगा क्योंकि एक वही हैं जो उसे इसमें सहायता कर सकेंगी और सही राह बताएंगी. उसने आश्वस्त किया कि वो भाभी से शीघ्र ही बात करेगा. पर उनकी चुदाई करने के उपरांत.

इसके बाद मेहुल ने एक धमाका किया. उसने बताया कि राणा परिवार भी इस महीने ही सम्मिलित हुआ है. ये सुनते ही शीला का मन समुदाय में जुड़ने के प्रति और दृढ हो गया.

कुछ देर और बातें करने के बाद शीला ने मेहुल को अर्थपूर्ण दृष्टि से देखा.

शीला: “अब जब और सभी बातें हो ही गयी हैं, तो क्यों न कुछ चुदाई भी हो जाये.”

ये कहकर शीला खड़ी हुई और अपने कपडे उतारने लगी.

“यहाँ? कोई आ गया तो?”

“कोई नहीं आएगा. और आया तो वो भी साथ हो जायेगा.”

मेहुल को नंगा होने में कोई अधिक समय नहीं लगा. और जब तक वो नंगा हुआ तो शेउला भी नंगी सोफे पर बैठी थी. उसने मेहुल को पास बुलाया और उसके लंड को पकड़कर अपने मुंह में डाल लिया. अब तक मेहुल एक से बढ़कर एक अनुभवी मध्यम आयु की स्त्रियों से लंड चुसवा चुका था. सबका अपना ढंग और अपना ही रंग था. शीला का अनुभव अपितु उन सब से कहीं अधिक था और वो उसके लंड को चूसने से ही विदित हो रहा था.

शीला ने अपने मुंह से लंड निकाला और मेहुल की ओर देखकर कहा: “मुझे तुम्हारा रस मुंह, चूत और गांड तीनों में चाहिए. इसीलिए, जल्दी जाने का प्रयास मत करना.”

मेहुल: “नहीं, आंटीजी, पर तीन बजे तक तो जाना ही होगा. पर आपके तीनों छेदों की प्यास बुझाकर ही जाऊंगा.”

शीला लंड पर टूट पड़ी और उसे गले तक ले जाकर रोकती फिर बाहर फेंक देती. कोई दस मिनट की धुआंधार चुसाई से मेहुल झड़ने के निकट पंहुचा तो उसने शीला को चेताया. शीला ने सिर हिलाया पर चूसना बंद नहीं किया. मेहुल के लंड ने वीर्य की धरा शीला के मुंह में दीं। शीला ने उसके लंड को पुचकारा और फिर अपने मुंह से बाहर गिरते हुए वीर्य को अपनी उँगलियों से मुंह में डालकर पी लिया.

“कितनी देर लगेगी तुम्हें?” शीला ने मेहुल से पूछा.

“कुछ अधिक नहीं. आप कहो तो मैं भी आपकी चूत का रसपान कर लूँ.”

“ओह, नेकी और पूछ पूछ!” शीला वहीँ सोफे पर पसर गयी और अपनी टाँगे फैला दीं।

मेहुल की जीभ ने शीला की चूत में अपना जादू करना आरम्भ किया तो शीला की सीत्कार से कमरा गूंज उठा. और मेहुल अपने लंड को भी एक हाथ से हिला रहा था. जैसा कि जवान लड़कों में होता है, कुछ ही देर में उसके लंड ने अपना पूर्व रूप ले लिया था. उसने सिर उठाकर शीला को देखा तो उसकी ऑंखें बंद थीं. मेहुल उठा और अपने लंड को शीला की चूत पर लगाते हुए एक ही बार में पूरा अंदर पेल दिया. शीला की ऑंखें खुली और उसने वासना भरी आँखों से मेहुल को देखा और अपनी ऑंखें फिर बंद कर लीं। मेहुल समझ गया कि सारा परिश्रम उसे ही करना होगा. पर वो इससे द्रवित नहीं हुआ और अपने धक्कों से शीला की चूत की आवश्यक धुनाई करता रहा.

शीला की अब आहें भी निकल रही थीं और उसकी चूत से अब छप छप की ध्वनि भी आ रही थी. शीला की चूत अब इतनी पनिया गयी थी कि मेहुल को उसे छोड़ने में कोई विशेष परिश्रम नहीं करना पड़ रहा था. पर उसे अपने झड़ने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था. उसने कुछ सोचकर अपने लंड को बाहर निकाला और पद पड़े एक कपड़े से जो शीला का ही था उसने चूत को पोंछ कर कुछ सीमा तक सुखा दिया और दोबारा चुदाई करने लगा. इस बार उसे पर्याप्त घर्षण मिल रहा था और आनंद भी आ रहा था. वो ये भी सोच रहा था कि उसकी प्रिंसिपल की माँ के साथ ये समस्या क्यों नहीं आती. पर उसने इस बात पर बाद में मनन करने का निर्णय लिया.

शीला के शरीर से कंपकंपी का आभास होते ही वो समझ गया कि वो इस बार संभवतः पूर्ण रूप से स्खलित हो रही है. उसने अपने धक्कों में और तीव्रता लायी और शीला का बांध टूट गया. मेहुल भी अब अपने आप को रोकने का कोई प्रयास नहीं कर रहा था. उसे शीला को गांड मारने की अधिक इच्छा थी. शीला की गांड उसकी चूत से अधिक तंग थी और उसमे किसी प्रकार के जल स्त्राव का भी कोई कारण नहीं था और इस कारण उसे उसकी गांड मारने में ही अधिक आनंद की आशा थी. अपने लंड को अंदर तक डालकर मेहुल ने अपना रस शीला की चूत में छोड़ा तो शीला आनंदित हो गयी. झड़ने के बाद मेहुल नेलंद बाहर निकाला तो शीला ने उसे चूसने की इच्छा व्यक्त की और मेहुल ने उसकी ये इच्छा भी पूरी की.

शीला: “अब तुमने मेरे दो छेदों को तो तृप्त कर दिया है. अब तीसरे के लिए कितना रुकना होगा.”

मेहुल: “जितना इस बार रुका था.”

ये कहते हुए मेहुल ने पानी के पूरे ग्लास को एक ही बार में खाली कर दिया. और दूसरे ग्लास को शीला को थमा दिया.

समय उपलब्ध होने के कारण शीला बातें करने लगी. और मेहुल उसके बगल में बैठकर उसके मम्मों से खेलता रहा.

फिर शीला ने झुककर मेहुल के लंड को चूसा और उसे तैनात कर दिया. मेहुल ने उसके मुस्कुराते चेहरे की ओर देखा और उसे चूम लिया.

“आप तैयार हो?” मेहुल ने पूछा.

शीला: “मैं तो सदैव ही तैयार रहती हूँ, बस चोदने वाला होना चाहिए.”

ये सुनकर मेहुल ठहाका मारकर हंस पड़ा. उसने एक बार फिर उसे चूमा और फिर बोला कि वो किस आसन में गांड मरवाने की इच्छुक है. शीला ने कहा कि सदियों से चला आ रहा घोड़ी का आसन ही गांड मारने का सर्वश्रेष्ठ आसन है. इससे चोदने वाला अपनी शक्ति के अनुसार गांड की गहराई को नाप सकता है और अपनी गति निर्धारित कर सकता है. ये सुनकर मेहुल खड़ा हुआ और शीला ने सोफे पर ही बड़ी सरलता से सही आसन बना लिया.

शीला: “पहले कुछ देर चूत मारो फिर उसके ही रस से गांड मारना। मुझे अन्य तेल या जैल बिलकुल रास नहीं आते. बाद में लंड का स्वाद खराब करते हैं.”

ये जानकर कि शीला गांड मरवाने के बाद उसका लंड मुंह से ही साफ करेगी, मेहुल के लंड में और तनाव आ गया. उसने घोड़ी बनी शीला की चूत में लंड पेला और बड़ी ही शांत गति से उसे चोदने लगा. जब शीला की चूत ने पानी का पहला फौहारा छोड़ा, तो मेहुल ने उस रस से भीगे लंड की निकाला और गांड के छेद पर लगा दिया.

मेहुल अपने लंड से अभी शीला की गांड को छेद ही रहा था कि शीला बोल पड़ी, “पेल अब अंदर, वहाँ क्या कोई टिकट बाँटने बैठा है.”

मेहुल की हंसी छूट गयी और शीला ने भी उसका साथ दिया. और मेहुल ने अपने लंड को अंदर डालने के लिए उचित दबाव डाला और पक्क़ की ध्वनि से शीला की गांड में उसका लंड घुस गया. मेहुल उस दबाव को बनाते हुए अपने लंड को अंदर घुसाता जा रहा था. जब लंड अंदर पूरे रूप से अंदर चला गए तो मेहुल ने गांड मारने के कार्यक्रम को आरम्भ कर दिया.

मेहुल तीव्र गति और असीम शक्ति के साथ शीला की गांड मार रहा था उसे पता था कि शीला को यही पसंद आएगा. अगर वो अपने घर से बाहर चुदवाने की इच्छा रखती है, तो प्रेम से तो बिलकुल भी नहीं. और इसी विचार के साथ मेहुल ने उसकी गांड में जम कर लौड़ा पेल रखा था. शीला का चेहरा जो कि सोफे में गढ़ा हुआ था इस तीव्रता के कारण लाल हो चुका था. पर उसके मुंह से इन सबके बीच भी आनंद की सीत्कारें निकल रही थीं. ये भी समझ आ गया था कि ये चुदाई का सत्र केवल एक दूसरे के शरीर को तृप्त करना ही था और वही चल भी रहा था.

अपने पाँवों को अच्छे से जमाते हुए मेहुल ने खेल के अंतिम भाग में ऐसी गति से गांड मारी कि कब लंड अंदर जाता और कब बाहर आता ये देखना ही असम्भव सा था. इस विलक्षण शक्तिशाली चुदाई से शीला विव्हल हो उठी और उसके मुंह से अनर्गल शब्द निकल रहे थे जिनका कोई नहीं था. मेहुल के चेहरे की एकाग्रता भी देखने योग्य थी. इस समय उसे केवल एक ही चीज़ दिख रही थी और वो थी शीला की गांड में चलता उसका अपना लंड.

शीला ने अपनी गांड में कुछ ठंडा, और कुछ गर्म गिरने का अनुभव हुआ. इसका अर्थ यही था कि मेहुल ने उसकी गांड में पानी तो छोड़ दिया था, पर अभी भी अपने गर्म लौड़े से उसकी सिकाई कर रहा था. चप चप की ध्वनि से उसकी गांड में चलते हुए लंड की यात्रा अब समाप्ति पर थी. कुछ वीर्य अब शीला की गांड से बाहर निकल रहा था, कुछ झाग जैसे बह रहा था. मेहुल ने गति को धीमा करते हुए एक बार पूरे लंड को अंदर पूरी शक्ति से ठूंसा और वहाँ कुछ रुकने के बाद अपने लंड को धीरे से बाहर निकल लिया.

मेहुल: “न तेल है, न जैल है. चखना चाहेंगी मेरे लौड़े पर जो मैल है?”

शीला के कुछ कहने के पहले ही मेहुल ने अपने लंड को शीला के मुंह के सामने किया और शीला न निसंकोच उसे मुंह में ले लिया. उन्हें अपनी चुदाई में ये सुनाई नहीं दिया कि घर में कोई अंदर आ गया था. जब शीला ने लंड साफ कर दिया और अपने मुंह से निकाला तब उन्हें उस तीसरे व्यक्ति के होने का आभास हुआ.

कोई ताली बजा रहा था, “वेरी नाइस शो. माँ आप लंड से दूर नहीं रह सकतीं, है न?”

शीला और मेहुल ने ताली बजाती हुई सुप्रिया की ओर देखा. अगर शीला अपनी कहानी न सुनाई होती तो मेहुल की फट गयी होती, पर अब उसे डर नहीं था.

शीला: “मेहुल को तो तुम जानती ही हो, स्मिता का बेटा है. और चोदने में नंबर वन.”

सुप्रिया: “वो मैं किसी और दिन देखूंगी. मैं कुछ फाइल गलती से घर पर भूल गयी थी, वही लेने आयी थी. मैं बस लेकर निकलूंगी. यू इंजॉय.”

सुप्रिया अपने कमरे में गयी और तत्क्षण फाइल लेकर बाहर आयी. मेहुल अपने कपड़े पहन रहा था. शीला भी भी नंगी ही लेटी हुई थी.

सुप्रिया: “मेहुल, अगर चाहो तो मैं तुम्हें छोड़ सकती हूँ, मैं उसी ओर जा रही हूँ.”

मेहुल ने शीला की ओर देखा तो उसने सहमति दे दी. मेहुल ने पूरे कपड़े डाले और सुप्रिया के साथ निकल गया.

*******

मेहुल और सुप्रिया की कोई विशेष बात नहीं हुई. इससे मेहुल को असमंजस तो अवश्य हुआ, पर उसने भी अधिक कुछ बोलने की चेष्टा नहीं की. मेहुल को कॉलोनी के गेट पर छोड़कर सुप्रिया ऑफिस चली गयी. अपने काम को समाप्त करने के बाद वो निकलने को थी तो देखा सुरेखा भी निकल रही है.

“कैसे आयी हो?” सुप्रिया ने पूछा.

“सजल छोड़ गया था, अभी फोन किया है, आ जायेगा दस मिनट में.” सुरेखा ने कहा.

“उसे मना कर दो मैं छोड़ देती हूँ. कुछ देर बात भी हो जाएगी. आजकल समय ही नहीं मिलता अकेली बातें करने का.”

सुरेखा ने सजल को फोन करके आने से मना किया और सुप्रिया के साथ उसकी गाड़ी में जा बैठी. सुप्रिया ने कार निकाली और सुरेखा के घर की और चल दी.

“मॉम ने आज फिर मेहुल को बुलाया था, मेरे घर. मैं जब फाइल के लिए गयी तो दोनों निपटे ही थे.” सुप्रिया ने बताया.

सुरेखा: “पर क्यों, अभी कल ही तो वो…”

सुप्रिया: “मुझे लगता है कि वो उस समुदाय के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं. पक्का तो नहीं, पर मेरा मन तो यही कहता है.”

सुरेखा: “सुप्रिया, तुम्हें नहीं लगता कि हम कुछ अधिक ही इस सब में डूब रहे हैं.”

सुप्रिया: “अरे नहीं, तुम अभी नयी हो इस खेल में, इसीलिए. कुछ दिन में तुम्हें ये सब सामान्य लगने लगेगा.”

सुरेखा चुपचाप आगे की ओर देखती रही.

सुप्रिया: “सुरेखा, मॉम ने कल कहा था, तुमसे बात करने के लिए. संजना के बारे में.”

सुरेखा का ध्यान एकदम से इस बात पर सुप्रिया की ओर हुआ.

“क्या?”

“डरो मत. बात ये है कि सभी घरवाले भी उसकी अक्षत चूत के रस को चखना चाहते हैं. केवल यही. इसके आगे कुछ नहीं.”

“कैसे होगा?”

“अगर तुम्हें स्वीकृत है तो मैं सब संभाल लूंगी।”

सुरेखा सोच में पड़ गयी. पर बकरे की माँ कितने दिन खैर मनाएगी. और संजना भी अब चुदवाने के लिए बैचेन होने लगी है. कहीं कुछ गड़बड़ न कर बैठे.

“ठीक है, तुम आगे जैसा ठीक हो वैसा करो. संजना से बात करने के बाद मुझे बताना. मैं भी उससे बात करूंगी.”

“गुड़ गर्ल.” सुप्रिया ने सुरेखा की जांघ थपथपाते हुए कहा.

कुछ ही देर में सुरेखा का घर आ गया और वो कार से उतरकर घर में चली गयी.

सुप्रिया ने अपने फोन से एक कॉल लगाई.

“हैलो, मॉम. हाँ मैं. सुरेखा ने हाँ कर दी है, संजना के लिए. मैं बात करूंगी उससे.”

“ ***********”

“मॉम, सच में इतना मीठा स्वाद है कि आप खो जाओगी.”

सुप्रिया ने फोन बंद किया और अपने घर की ओर चल पड़ी.

..... शेष अगले भाग में.
 
तीसरा घर: शीला और समर्थ सिंह

अध्याय ३.३

भाग 4

*********

सुरेखा का घर:

सुरेखा अपने कमरे में जाकर बैठ गयी और गहन विचारों में डूब गयी. क्या जो हो रहा है वो ठीक है? उसने माना की संजना और सजल का साथ उसे बहुत अच्छा लगता है. और परिवार के न्य लोगों का भी. पर वो इसके आगे नहीं बढ़ना चाहेगी। सजल और संजना अभी अपने ही कमरे में थे. उसने एक ड्रिंक बनाई और कुछ देर पीते हुए आगे के जीवन पर विचार किया. फिर उठकर खाना बनाने में जुट गयी. कुछ ही समय में संजना भी आ गयी और दोनों ने मिलकर खाना बना लिया. सजल ने तब तक टेबल सजा दी. खाने के बाद सभी सुरेखा के कमरे में चले गए.

*******

शीला का घर:

शीला और समर्थ अपने शयनकक्ष में लेटे हुए थे. दोनों सदा के समान नंगे ही थे और एक दूसरे से हल्की हल्की छेड़खानी कर रहे थे. समर्थ शीला के व्यवहार से ये तो समझ ही गया था कि उसके मन में कुछ उथल पुथल चल रही है. जब शीला ने अपनी ओर से कुछ नहीं बोला तो उसनेही पहल की.

समर्थ: “तुम्हारे मन में कुछ चल रहा है. बताओगी?”

शीला: “नहीं तो, कुछ भी तो नहीं.”

समर्थ: “शीला, हम लोग इतने साथ से साथ हैं. ये मत कहो कि मैं नहीं जानता कि तुम कुछ कहना तो चाहती हो, पर कह नहीं पा रही हो.”

शीला: “मैंने किसी को न बताने के लिए कहा है.”

समर्थ खीज कर: “जैसा तुम चाहो.”

शीला समझ गयी कि समर्थ वर्षों बाद उससे गुस्सा हुआ है. उसने कुछ देर सोचा.

शीला: “पर आप ये वादा करिये कि आप किसी से कुछ नहीं कहेंगे.”

समर्थ: “ये सरल है. मैं तुम्हारा विश्वास कभी नहीं तोडूंगा.”

शीला ने फिर मेहुल से हुई पूरी बात को विस्तार से बताया. समर्थ को भी आश्चर्य हुआ कि शेट्टी और राणा परिवार भी पारिवारिक सम्भोग में लिप्त हैं. और उसके परिवार के ही तरह वैवाहिक संबंध में बंधने वाले हैं. जब शीला की बात समाप्त हुई तो समर्थ कुछ देर तक चुप रहा.

समर्थ: “तुम क्या चाहती हो?”

शीला: “क्या हमें इस समुदाय में सम्मिलित नहीं होना चाहिए?”

समर्थ: “शीला, हमारा परिवार वैसे भी बहुत बड़ा है. दूसरा, सुरेखा हम सबसे अभी ही जुडी है इस रूप में, सजल और संजना अभी तक नहीं. सुप्रिया के बारे में अधिक चिंतन की बात नहीं है क्योंकि वो इससे अनिभिज्ञ नहीं है.”

समर्थ: “ऐसे किसी भी समाज में जुड़ने से मुझे लगता है कि सुरेखा से हम हाथ न धो बैठें. पर मैं ये अवश्य कह सकता हूँ. अगर वे चार से छह महीने हमारे बारे में जाँच पड़ताल में निकालेंगे तो समय रहेगा हमें भी इस विषय में आगे सोचने का. ये मेहुल को चेता देना कि हम सम्मिलित होंगे या नहीं ये हम बाद में निर्णय करेंगे. अगर सुरेखा और बच्चे माने तो. अन्यथा, हमें इसे भूलना ही होगा.”

शीला ने बात को समझा और समर्थ को वचन दिया कि वो ऐसा ही करेगी.

“अब थोड़ा अपनी चूत का स्वाद भी दे दो भागवान।” समर्थ शीला की चूत की ओर अपने मुंह को ले जाते हुए बोला। शीला ने उसके स्वागत में अपने पाँव फैला लिया.

*******

सुप्रिया का घर:

सुप्रिया अपने कमरे में ही थी. उसके मन में भी कई विचार उथल पुथल कर रहे थे. हालाँकि शीला ने कुछ कहा नहीं था, पर वो ये जान चुकी थी कि शीला को अब सम्भवतः उस समुदाय के विषय में ज्ञान हो चुका था जिसका मेहुल ने नाम लिया था. जहाँ तक उसका विश्वास था, ये किसी प्रकार का सेक्स समुदाय था. शीला क्यों इसके बारे में उत्सुक थी, ये अवश्य एक चिंतन का विषय था. उनके परिवार में पहले ही अब इतने उन्मुक्त जीवन था और अब निखिल के विवाह के ही साथ जॉय और शोनाली का भी परिवार मिल चूका था. इससे अधिक सेक्स की इच्छा सुप्रिया को तो नहीं थी. उसका ध्यान सुरेखा की ओर गया. उसे नहीं लगता था की सुरेखा भी इससे अधिक कुछ चाहेगी. अभी तक तो वो चटर्जी परिवार से भी नहीं मिली थी.

नितिन और निखिल भी कमरे में आ गए और देखा की सुप्रिया विचार मग्न है.

निखिल: “क्या हुआ मॉम, कुछ सोच रही हो क्या?”

सुप्रिया ने दोनों को अपने मन के उद्गार बताये. निखिल और नितिन भी ऐसे किसी समुदाय में जुड़ने के लिए उत्सुक नहीं थे. निखिल तो पहले ही क्लब की सदस्य महिलाओं की चुदाई कर लेता था. घर में नानी, माँ और मौसी भी थे. संजना देर सवेर चुदने वाली ही थी. फिर उसका नया परिवार भी था, सागरिका, शोनाली, सुमति और फिर पारुल. इसके बाद अपना काम और व्यवसाय भी संभालना था. उसने भी अपना मन खोल कर कहा कि उसे भी किसी और समुदायी में सम्मिलित होने की कोई इच्छा नहीं है.

निखिल और सुप्रिया ने नितिन की ओर देखा.

नितिन: “मॉम, मुझे निखिल की बात ठीक लग रही है. हालाँकि मैं क्लब में नहीं हूँ पर पार्थ और निखिल मुझे किन्ही विशेष सदस्याओं से मिलवा चुके हैं. फिर, समय के साथ उसका भी विवाह हो जायेगा और चटर्जी जैसे ही परिवार में होगा, ये निश्चित था. उसके बाद सजल और संजना भी तो थे. इतने विशाल परिवार के बाद बाहर किसी के भी साथ संसर्ग का कोई अर्थ नहीं बनता.”

अनजाने में ही शीला के सिवाय सभी इस बात पर एकमत थे कि किसी और समुदाय की आवश्यकता नहीं है. फिर नितिन और निखिल ने एक दूसरे की ओर देखा और फिर सुप्रिया को देखा.

नितिन: “वैसे देखा जाये तो मॉम, हमें आपके सिवाय किसी और की आवश्यकता ही नहीं है. नानी की भी नहीं. मौसी की भी नहीं.”

ये कहते हुए दोनों ने सुप्रिया को अपनी बाँहों में दबोच लिया. सुप्रिया उनके इस प्रेम से विव्हळ हो गयी और उसने भी उन कस के अपने आप में समाने का प्रयास किया. पर कहाँ सुप्रिया और कहाँ दो तगड़े हट्टे कट्टे लड़के, दोनों ने उसे उठाया और बिस्तर पर जाकर पटक दिया. सुप्रिया आश्चर्य और रोमांच से चीख पड़ी.

सुप्रिया: “बहुत दुष्ट हो गए हो तुम दोनों. देखना मैं तुम्हे क्या सजा दूंगी.”

निखिल हँसते हुए अपने कपड़े निकाल रहा था, वहीं नितिन सुप्रिया को नंगा करने में लगा हुआ था.

निखिल: “मॉम, हम जानते हैं आप क्या और कैसी सजा देती हो. हमें भी आपकी सजा में बड़ा मजा आता है. अब चलो जरा अपने मुंह का जादू तो दिखाओ, देखो कैसे तड़प रहा है ये आपके प्यार के लिए.” निखिल अपने लंड को सुप्रिया के चेहरे के सामने हिलाते हुए बोला।

सुप्रिया की एक दृष्टि निखिल के लंड पर पड़ी नहीं कि उसका गुस्सा हवा हो गया. उसने भूखी शेरनी के समान उसके लंड को अपने मुंह में लिया और चूसने में व्यस्त हो गयी. नितिन भी अब उसे नंगा करने के बाद स्वयं भी नंगा हो चुका था और उसने सुप्रिया की जाँघों को फैलाकर अपना मुंह उसकी बहती हुई चूत पर लगा दिया और उसके रस से अपनी प्यास मिटाने लगा. सुप्रिया ने अपनी जांघों को और फैलाया और शरीर को ढीला छोड़ दिया. उसका एक बेटा उसकी चूत में घुसा पड़ा था तो एक उसके मुंह में. एक माँ को इससे अधिक और क्या चाहिए?

ऐसा नहीं था कि इन तीनों के बीच ये कुछ नया था. ये तो लगभग उनके जीवन का अभिन्न अंग था. पर आज कुछ बदला हुआ सा था. एक तो इस बात का आभास था कि वे अपने आप में ही संतुष्ट थे. और दूसरा ये कि जब नितिन ने अपने विवाह की बात की तो सुप्रिया को जल्दी ही इन दोनों के प्रेम को बाँटने का भी आभास हो चला. और इसी कारण आज उसे एक अलग सी चुदाई की इच्छा थी. प्रेम से आनंद पूर्वक. जैसे कोई गीत लिखा जा रहा हो. नितिन और निखिल अपनी माँ के इस अंतर की इच्छा को पढ़ने में सक्षम थे. उन दोनों को भी लगा कि कुछ ही दिनों में सागरिका भी इस क्रीड़ा में जुड़ेगी और उन्हें अपने ही घर में अपनी माँ को अकेले चिढ़ाने के अवसर कम ही मिलेंगे.

नितिन अपनी माँ की चूत को फैलाकर उसके अंदर अपनी जीभ से उसे मलाई के समान चाट रहा था. आज सुप्रिया भी अधिक रस छोड़ रही थी. और निखिल का लंड अनावश्यक रूप से तना हुआ था जिसे सुप्रिया बड़ी आत्मीयता से चाट और चूस रही थी. कमरे में वासना से अधिक प्रेम का वातावरण था.

निखिल: “मॉम, अगर ऐसे ही चला तो मैं झड़ जाऊँगा।”

सुप्रिया ने उसकी आँखों में देखा और पलक झपक कर बता दिया कि उसे इसमें ख़ुशी ही होगी। सुप्रिया की चूत अब पूरी खुल चुकी थी. नितिन ने अपनी जीभ को अब उसकी गांड के द्वार की ओर मोड़ा और उसकी गांड को चाटने लगा. सुप्रिया के आनंद में वृद्धि हो गयी. उसकी गांड लपलपाने लगी और नितिन की जीभ का स्वागत करने को मचल उठी. नितिन ने उसकी भावनाओं को समझते हुए उसके दोनों पैर मोड़ दिए जिसके कारण उसकी गांड ऊपर की ओर उभर गई और छेद खुल गया.

नितिन की जीभ ने अंदर का रास्ता देखा और उसे चाटने में तल्लीन हो गया. निखिल अब निकट था और उसने सुप्रिया को एक बार फिर बताया कि वो झड़ जायेगा. उसे पता था की उसकी माँ उसके रस को पीने में कभी पीछे नहीं हटी, पर उसने उसे बताने में ही भलाई समझी. नितिन की जीभ ने जब सुप्रिया की गांड की गहराइयों को छुआ तो सुप्रिया का शरीर थरथराने लगा और वो झड़ने लगी. और उसका साथ देते हुए निखिल ने अपना भी रस उसके मुंह में उढेल दिया. एक रस सुप्रिया के मुंह में जा रहा था तो एक उसकी चूत से बाहर निकल रहा था. नितिन ने उसके भग्नाशे को रगड़ कर उसके आनंद में और भी बढ़ोत्तरी कर दी.

निखिल ने अपने लंड को बाहर निकाला और सुप्रिया के मम्मे चूसने लगा. नितिन भी अब सुप्रिया की गांड को उपयुक्त मात्रा में चाट चुका था. वो उठा और उसने अपने लंड को सुप्रिया की चूत पर लगाया और एक ही बार में पूरे लंड को अंदर डाल दिया. पर इसमें तीव्रता नहीं थी, और उसका लंड बड़ी ही सरलता से सुप्रिया की चूत में प्रवेश कर गया.

नितिन बड़ी ही सहज गति से अपनी माँ की चुदाई कर रहा था. निखिल उन दोनों के इस प्रेम भरे मिलन को देखकर आनंदित था. सुप्रिया ने उसे पास बुलाया और उसके लंड को हाथ से सहलाने लगी. निखिल का लंड फिर से अकड़ने लगा. और शीघ्र ही अपने पूरे तनाव पर आ गया. सुप्रिया ने नितिन को संकेत किया और नितिन ने अपने लंड को निकाला और लेट गया. सुप्रिया ने करवट ली और अपनी चूत को नितिन के लंड पर बैठाते हुए उसे अंदर ले लिया. इस बार सुप्रिया उछाल ले रही थी और फिर वो रुकी और आगे की ओर झुककर ठहर गयी. ये निखिल के लिए पर्याप्त था.

उसने अपने तने लंड को सुप्रिया की गांड पर लगाया और सरलता से अंदर पेल दिया. सुप्रिया ने आनंद और संतोष की एक गहरी साँस ली. आज फिर उसके दोनों बेटे, उसकी चूत और गांड में थे. अनगिनत बार ये दृश्य इस घर में चल चुका था. पर आज इसमें एक ऐसी आत्मीयता थी जिसे तीनों शब्दों में नहीं पिरो सकते थे. नितिन और निखिल बड़ी शांति और प्रेम के साथ सुप्रिया के दोनों छेदों की सिकाई करने लगे. सुप्रिया आज बिना कुछ कहे उन दोनों की निकटता का आनंद ले रही थी. अन्य दिनों वो उन्हें जोरदार चुदाई के लिए उत्साहित करती थी. पर आज इस अंतरंग मिलन का सुख जैसे वो सदैव के लिए अपने मन में संजोना चाहती थी.

इस प्रकार की चुदाई की विशषता यही थी कि सभी आनंद ले रहे थे और झड़ने के निकट कोई नहीं था. ऐसी अंतर गति की चुदाई में सम्भोग का आनंद निहित है. कुछ समय पश्चात आसन परिवर्तित किया. इस बार नितिन गांड में था. यही चलता रहा. किसी को न समय का ज्ञान था न अपने निस्तार की जल्दी. बस एक प्रेम भरा मिलन था जो न जाने कितने ही समय चलता रहा. अंत में एक एक करके निखिल और नितिन ने अपना रस सुप्रिया के भिन्न छेदों में छोड़ दिया. सुप्रिया तो वैसे भी कई बार झड़ चुकी थी.

तीनों एक दूसरे के आलिंगन में लेटे रहे. लंड सिकुड़कर बाहर आ गए. माँ अपने बेटों के चेहरे और होंठ चूमती रही. आज जैसी संतुष्टि उसे पहले कभी नहीं प्राप्त हुई थी. इसी प्रकार से एक दूसरे से लिपटे हुए वो तीनों नींद में चले गए. तीनों के चेहरे पर एक मुस्कान थी.

*********
 
सुरेखा का घर:

सुरेखा के कमरे में आने के बाद सजल और संजना ने सुरेखा को बियर पीते हुए देखा. वो अभी उस प्रकार से इतने निकट नहीं आये थे कि उसके मन को समझ पाते। सजल अपने लिए बियर लेने जाने लगा तो उसने संजना की ओर प्रश्न भरी आँखों से देखा. उसे संजना के भाव से समझ आया कि वो भी बियर ले लेगी. उसने जाकर तीन बियर लायीं क्योंकि सुरेखा की बियर समाप्ति की ओर थी.

बियर पीते हुए संजना सुरेखा के निकट गयी और उसके हाथ अपने हाथ में लेकर बैठ गयी. कुछ देर सब यूँ ही शांत बैठे रहे.

सजल: “आप क्या सोच रही हो मॉम ?”

सुरेखा जैसे अपनी सोच से बाहर आयी.

सुरेखा: “कुछ विशेष नहीं. बस कोई बात जो सुप्रिया ने मुझे बताई है.”

संजना: “मॉम, आप अधिक चिंता मत करो. हम पर कोई भी अपनी इच्छा नहीं थोप पायेगा. और तो और, मुझे नहीं लगता कि मौसी ऐसा कुछ भी करेंगी जिससे आपको दुःख हो. कम से कम अब तो नहीं.”

सुरेखा ये सुनकर चौंकी.

“अब तो नहीं? मतलब?”

सजल: “मॉम, पहले हमें उनकी जीवन शैली के बारे में पता नहीं था. इसीलिए, वो ऐसा कुछ कर सकती थीं जिससे आपको दुःख होता. पर जब आप उनकी शैली में जुड़ चुकी हो, तो अब वो ऐसा नहीं करेंगी.”

सुरेखा: “क्या तुम दोनों भी इस शैली से सहमत हो?”

सजल: “मॉम, आप स्वयं ही देखो. इन दिनों आप कितनी प्रसन्न रहती हो. और हम दोनों भी अब कितने निकट आ चुके हैं. तो मुझे लगता है कि इसे स्वीकार करना ही सही लगता है. हमारा परिवार अब और अधिक निकट होगा और इसमें कोई भी बुराई नहीं है.”

सुरेखा ने अपनी बाहें फैलायीं और सजल उसमे जाकर समा गया. वो सुरेखा की एक ओर बैठा संजना पहले ही दूसरी और बैठी थी. सुरेखा ने अपने दोनों बच्चों को अपनी बाँहों में ले लिया. संजना ने अपनी माँ के चेहरे को अपने हाथों में लेकर चूमा. ये माँ बेटी वाला चुंबन नहीं था. ये दो प्रेमियों के बीच का चुंबन था.

सजल ने भी अपना ध्यान सुरेखा के मम्मों की ओर किया और धीरे से अपने हाथ उसकी झीनी नाइटी के भीतर डालकर उन्हें मसलना आरम्भ कर दिया. सुरेखा ने एक हल्की सी आह भरी और उसके पांव स्वतः ही खुल गए. सजल ने इसे निमंत्रण माना और एक हाथ मम्मों पर रहने दिया और दूसरे से सुरेखा की चूत को सहलाने लगा.

संजना: “मॉम, चलो हम सब कपड़े निकालकर खेलते हैं. किसी ने प्रतिकार नहीं किया और कुछ ही क्षणों में तीनों नंगे थे. संजना और सुरेखा अपने चुंबन में व्यस्त हो गए और सजल मम्मों और चूत को छेड़ने में. फिर सजल नीचे बैठ गया और सुरेखा की जांघें अलग करते हुए उसकी चूत को चाटने लगा. सुरेखा ने अपने पाँव और खोल दिए. सजल उस मादक गंध में खो गया. सुरेखा की चूत फिर से रस की वर्षा करने लगी. सजल को व्यस्त देखकर संजना ने अपने मुंह को सुरेखा के मम्मों पर रखा और उनको पीने लगी. सुरेखा ऑंखें बंद करते हुए अपने शरीर में उठ रही तरंगों का सुख लेने लगी.

संजना जहां मम्मों पर ध्यान दे रही थी, सजल की जीभ अब सुरेखा की योनि में हलचल मचा रही थी. मध्यम आयु की दो बच्चों की माँ इस समय वासना के सागर में डुबकी ले रही थी. सजल अब रुकने की स्थिति में नहीं था. उसने अपनी माँ की ओर देखा और एक क्षण के लिए उसे उसमे अपनी मौसी का प्रतिबिम्ब दिखाई पड़ा. समय के साथ वो भी होगा, ये सोचते हुए सजल ने बिना विरोध अपने लंड को सुरेखा की चूत में जड़ दिया.

संजना ने भी अपनी स्थिति बदली और सुरेखा के मम्मों को दबाते हुए चाटने लगी. सुरेखा अपने ऊपर चल रहे इस दोहरे आघात के कारण कामोत्तेजना के शिखर पर शीघ्र ही पहुंच गयी. सजल के धक्के अब तीव्र हो चले थे. वहीं संजना भी उसके स्तन इस बेदर्दी से मसल रही थी कि सुरेखा अब ये न समझ पा रही थी कि उसे पीड़ा अधिक है, या आनंद. मन की इन्हीं विपरीत भावनाओं ने उसके शरीर ने अपने आप को आनंद की ओर धकेला. सुरेखा के शरीर की कँपकँपी ने ये चेता दिया किया की वो अपने उत्कृष के निकट है.

सजल ने भी अपनी ओर से कोई कमी नहीं की और अपनी पूरी शक्ति सुरेखा की चुदाई में झोंक दी. सुरेखा के कंपकंपाते हुए शरीर ने एक तगड़ा झटका लिया और एक चीख के साथ उसकी चूत ने रस छोड़ते हुए शरीर को शिथिल कर दिया. संजना ने सजल की ओर देखा जो स्वयं भी झड़ रहा था. संजना ने उसे अपना मुंह खोल कर संकेत किया तो सजल ने अपने लंड को सुरेखा की चूत से निकाला और संजना ने तपाक से उसे अपने मुंह में ले लिया. अभी संजना ने चूसना आरम्भ ही किया था कि सजल ने उसके मुंह को अपने कामरस से भर दिया.

संजना पूरा रस गटक कर पी गयी. जो बचा वो उसने अपनी माँ के मुंह में उढेल दिया और माँ बेटी फिर से चुंबन में लिप्त हो गयीं.

संतुष्ट होकर तीनों एक दूसरे से लिप्त कर सो गए.

********

अगला दिन:

सुरेखा अपने ऑफिस में थी जब सुप्रिया अंदर आयी. कुछ देर बातें करने के बाद सुप्रिया ने बताया कि वो किसी भी समुदाय में सम्मिलित होने के पक्ष में नहीं है. ये सुनकर सुरेखा ने चैन की साँस ली. फिर सुप्रिया ने उसे कुछ और कहा और अपने ऑफिस में चली गयी.

सुरेखा ने फोन उठाकर सजल को कॉल किया: “मौसी आज शाम तुमसे मिलना चाहती हैं.”

दूसरी ओर की बात सुनकर उसने फोन काट दिया और फिर संजना को मिलाया.

सुरेखा: “नानी ने तुम्हे आज शाम याद किया है.” इसके बाद उसने फोन काट दिया.

सुप्रिया ने ये भी उसे बता दिया था कि आज रात निखिल और नितिन दोनों उसके साथ रहने वाले हैं. उसकी चूत आने वाली रात की प्रतीक्षा में रस बहाने लगी. पर उसने उसे अनदेखा किया और अपने काम में व्यस्त हो गई.

..... चौथे परिवार की ओर
 
चौथा घर मिशेल और रिचर्ड डिसूज़ा

अध्याय ४.३

भाग १

*********

अगले दिन सुबह:

सब अपने अपने समय से उठे. एक दूसरे से लिपटे होने के कारण कुछ असुविधा हुई, पर उठकर अपने नित्यकर्म से निपट कर अपने कमरे की ओर चले गए. कल रात जो हुआ वो इतने वर्षों का एक लुका छुपा खेल और छेड़खानी का परिणाम था. दोनों परिवारों में कामुक छेड़खानी आम थी, पर कल उसका सुखद अंत हुआ. और अब ये रुकने वाला था नहीं.

मिशेल उठकर अपने कमरे में गयी और नहाकर किचन में सबके लिए नाश्ते का प्रबंध करने लगी. उसने कॉफी भी बनाने के लिए चढ़ा दी थी कॉफी मेकर में. ईव कुछ ही समय में उसके पास आयी. उसके चेहरे पर एक नई चमक थी और चेहरे पर अभी भी वीर्य की हल्की सी पपड़ी दिख रही थी.

ईव: “लास्ट नाईट वास वंडरफुल.”

मिशेल: “यस, आई इन्जॉयेड इट टू.”

ईव: “क्रिसमस का क्या प्लान है?”

मिशेल: “रिचर्ड बताएँगे. पर मुझे तो इस बार घर में ही रहने की इच्छा है.”

ईव: “मैं आती हूँ, बस दस मिनट में.”

मिशेल: “नो प्रॉब्लम, टेक योर टाइम.” कहकर मिशेल अपने काम में व्यस्त हो गयी.

रिचर्ड उबासी लेता हुआ आया और मिशेल को चूमकर बोला, “मॉर्निंग ब्यूटीफुल.”

मिशेल ने उसके चुंबन का उत्तर दिया और उसके चेहरे को पकड़कर एक गहरा चुंबन लिया, “मॉर्निंग, हैंडसम.”

रिचर्ड ने फिर कहा कि वो बस यूँ गया और आया. वो जब किचन से निकल रहा था तो शैली आ गयी. अपने पापा को चूमकर उसने मिशेल को चूमा और मिशेल का हाथ बँटाने लगी.

मिशेल: “हे, तुमसे गंध आ रही है, जाओ पहले ब्रश और नहाकर आओ.”

शैली: “ओके, मॉम। यू और ग्रेट.”

मिशेल अपने काम में लगी रही, कुछ ही समय में कॉफी बन गयी और उसने अपने लिए एक कप में ली और काम में लगी रही. इतने में ही ईव आ गयी और उसने भी मिशेल का साथ दिया. अपने लिए कॉफी लेकर वो मिशेल के साथ मिलकर सैंडविच बनाने में जुट गयी.

जैसन अपने कमरे में गया और सीधा नहाने के लिए घुस गया. बाहर आकर वो बैठक में आया पर वहां किसी को न पाकर किचन में गया. वहाँ ईव और मिशेल थीं.

उसने ईव को किस किया और उसके नितम्ब दबा दिए. फिर कॉफी ली और जाने लगा.

मिशेल: “हे ब्रो, नो किस फॉर मी ?”

जैसन: “ओह सिस, श्योर.”

जैसन ने जब मिशेल को किस किया तो मिशेल ने उसके लंड को दबा दिया. जैसन ने भी अवसर देखकर मिशेल की गांड दबा दी. फिर कॉफी लेकर बैठक में चला गया.

कुछ ही देर में ऐलिस, मार्क और डेविड भी ऊपर आ गए और जाकर सोफे पर बैठे.

जैसन: “ब्रश तो कर लो. फिर कॉफी ले लेना.”

डेविड और मार्क सीधे किचन में गए और ऐलिस अपने कमरे में चली गयी. डेविड ने मिशेल को पीछे से पकड़ा और उसकी गर्दन चुम ली. “मॉर्निंग माई ब्यूटीफुल मॉम!”

“मॉर्निंग, बेटा, क्या चाहिए.”

“जो चाहिए, वो आप अभी तो देने से रहीं. पर अभी के लिए कॉफी चलेगी.”

“शैतान, ब्रश किया कि नहीं?”

“मॉम, वो भी हो जायेगा.” कहते हुए वो कॉफी मशीन की ओर बढ़ा. मार्क ईव से लिपटा हुआ उसके होंठ चूस रहा था.

“कम ब्रो, कॉफी पीते हैं. अपनी मॉम को बाद में पीना.”

मार्क ने ईव को छोड़ा तो ईव गहरी साँसे ले रही थी. मार्क और डेविड ने कॉफी ली और वहीं खड़े होकर पीने लगे. फिर उन्होंने कप धोने के लिए डाले। फिर डेविड ने अपनी मामी को पकड़ा और उसे चूमकर अपने कमरे में चला गया. मार्क ने ये देखा तो उसने भी अपनी बुआ को चूमा और डेविड के पीछे चल दिया.

मिशेल: “मार्क कुछ समझदार और शांत है, डेविड का बस चले तो मुझे रात दिन चोदता रहे.”

ईव ये सुनकर हंसने लगी.

ईव: “यहाँ पर सीधा बन रहा है, घर पर तो मुझे एक पल भी नहीं छोड़ता.”

मिशेल: “तुम्हारी जैसी रसीली माँ हो तो कौन छोड़ेगा?”

ईव: “जैसे तुम कुछ कम हो. रिचर्ड कहाँ है, क्रिसमस के बारे में पूछना था.”

मिशेल: “आने ही वाला होगा. नहाने में बहुत समय लगता है. पर कल तुम्हें इतनी देर क्यों हो गयी घर आने में?”

ईव ने कल घटित हुआ वृत्तांत सुनाया तो मिशेल की चूत बहने लगी.

मिशेल: “मुझे भी उन सबसे मिले बहुत समय निकल गया. मेरे विचार से इसका मुझे जल्दी ही कुछ प्रबंध करना होगा.”

नाश्ता बन चुका था. दोनों ने उसे खाने की टेबल पर लगाया और सबको पुकारा. पर जैसन के सिवाय कोई नहीं था. मिशेल और ईव जाकर बैठक में जैसन के साथ बैठ गयीं. मिशेल अपने जन्म देश के बारे में जानने के लिए उत्सुक थी और अपने अन्य परिवार के विषय में भी जानना चाहती थी. जैसन और ईव ने उसे नए समाचारों से अवगत कराया तब तक रिचर्ड भी आ गया और कॉफी लेकर साथ बैठ गया.

“जैसन आज पटेल बंधु अपने ऑफिस आने वाले हैं, आकार का इम्पोर्ट एक्सपोर्ट का काम है, पर आकाश भी इसमें कुछ जिज्ञासा दिखा रहा है. मेरे विचार से हम सब अच्छा व्यवसाय कर सकते हैं.

“ठीक है, मेरे पार्टनर्स को भी बुला लूँ क्या?”

“नहीं, उन्हें अपने अन्य ग्राहकों के पास भेज दो. वो भी आवश्यक है.”

“ओके, कब मिलना है. ११ बजे आएंगे.”

“ठीक है, आप जब कहोगे मैं चलूँगा.”

मिशेल और ईव ने दोनों से नाश्ता करने का आग्रह किया.

“बच्चे बाद में खा लेंगे. उनका कोई समय नहीं है.”

चारों उठकर नाश्ते के लिए बैठे और नाश्ता करने के बाद मिशेल और ईव अपने अन्य कामों में व्यस्त हो गयीं और जैसन और रिचर्ड ऑफिस के लिए तैयार होने लगे.

दस बजे के आसपास ईव और मिशेल को छोड़कर सभी लोग अपने अपने काम पर निकलने लगे. शैली मार्क के साथ कॉलेज चली गयी, जैसन और रिचर्ड ऑफिस गए और डेविड ये कहकर निकला कि उसे कुछ काम से बाहर जाना है, पर वो शैली की दोस्त शिरीन की माँ एंजिल के घर उसके आमंत्रण पर उसके घर जा रहा था. शैली ने शिरीन को अपने ही साथ बुला लिया था. शिरीन के पिता कुछ महीनों से उनसे अलग रह रहे थे. और एंजिल को घर के कामों में कोई न कोई सहायता चाहिए होती थी.

सबके जाने के मिशेल और ईव कॉफी लेकर बैठक में जाकर गप्पें मरने लगे. पर मिशेल ईव के उन चार काले लौडों से चुदाई के विषय में जानने के लिए अधिक उत्सुक थी. ईव ने उसे इस बार विस्तृत रूप में बताया तो मिशेल की चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया. उसके हाथ अनायास ही अपनी चूत पर चले गए. ईव से ये छुपा न रह सका.

ईव: “मिशेल, मैं इसमें तुम्हारी कुछ सहायता कर सकती हूँ, अगर तुम चाहो तो.”

मिशेल: “हम्म्म, चलो मेरे कमरे में चलते हैं.

मिशेल और ईव ने अपनी कॉफी के कप धोकर किचन में रखे और मिशेल के कमरे में चल दिए.

*******

एंजिल का घर :

डेविड ने एंजिल के घर की घंटी बजे. दरवाजा खुलने पर उसने देखा कि एंजिल एक बहुत झीना गाउन पहने हुए थी. डेविड को समझ आ गया की आंटी चुदने के लिए तत्पर है.

डेविड: “गुड मॉर्निंग, आंटी।”

एंजिल: “गुड मॉर्निंग, आओ मैं तुम्हारी ही प्रतीक्षा कर रही थी.”

डेविड अंदर गया और एंजिल ने दरवाजा लॉक कर लिया.

डेविड: “आंटीजी, क्या काम था, जिसके लिए आपने मुझे याद किया है.”

एंजिल: “कुछ लीक कर रहा है, मैं सोच रही थी कि तुम्हारे पास कोई औजार है जिससे कि वो बंद हो सकता है.”

डेविड मुस्कुरा उठा. उसे सब समझ आ गया. आंटी की चूत लीक कर रही थी जिसे वो उसके लंड से बंद करना चाहती थी.

डेविड: “आंटीजी, मेरे औजार से हो सकता है, कि लीक और भी बढ़ जाये. कहीं बह न निकले. पर उसके बाद अवश्य बंद हो सकती है.”

एंजिल: “मुझे भी ऐसा ही कुछ लगता है.” एंजिल डेविड के निकट आकर बोली.

उसके इत्र की सुगंध ने डेविड को मुग्ध कर दिया.

डेविड: “आंटीजी, अपने बहुत अच्छा सेंट लगाया है. बहुत अच्छी सुगंध है.”

एंजिल: “दो स्थानों पर लगा है. हम्म्म, दो नहीं तीन.”

डेविड भी अब उसके निकट आ गया और उसकी आँखों में झांककर देखा.

डेविड: “क्या मैं अनुमान लगा सकता हूँ कि वो तीन स्थान क्या हैं?”

एंजिल: “ठीक है. बताओ.”

डेविड: “छू कर बताऊंगा.”

एंजिल: ये तो और भी अच्छा है.”

डेविड ने एंजिल के चेहरे पर आंखे रखते हुए अपने दोनों हाथ उसके दोनों मम्मों पर रख दिए.

“दो तो ये हैं.”

“और तीसरा ये.” इसके पहले कि एंजिल कुछ प्रतिक्रिया दे पाती डेविड ने उसकी चूत पर हाथ रख दिया. “ठीक है या गलत.”

“हम्म्म, तुम बहुत बुद्धिमान हो. तुमने एक बार में ही ताड़ लिया.”

“आंटीजी, जब सब कुछ साफ है, तो क्यों न आपके कमरे में चलकर आपकी लीकेज को ठीक किया जाये?”

एंजिल ने अपने कमरे की ओर कदम बढ़ाये और डेविड उसकी मस्त गांड की लचक देखते हुए उसके पीछे चल पड़ा. कमरे में जाते ही डेविड ने अपने कपड़े निकालने आरम्भ कर दिए. जब एंजिल मुड़ी तो देखा और कुछ शर्मा सी गयी.

“बहुत जल्दी में हो.”

“देर करने से लीकेज बढ़ सकती है, इसीलिए मैं अपना औजार निकाल रहा हूँ.”

“स्मार्ट हो.” ये कहते हुए एंजिल ने अपने होंठ डेविड से मिला दिए. दोनों प्रगाढ़ चुंबन में लीन हो गए. न जाने एंजिल के शरीर से वो झीना वस्त्र भी धराशाई हो कर गिर गया. डेविड अपनी पैंट अभी तक नहीं निकाल पाया था.

एंजिल: “लैट मी हेल्प.” ये कहकर उसने डेविड की पैंट पर हाथ रखा और कुछ ही क्षणों में डेविड भी उसके समान नंगा था.

एंजिल: “वाओ, तुम्हारा औजार तो सच में बहुत बड़ा है, मेरी लीकेज अवश्य बंद कर पायेगा.”

डेविड ने उसे बाँहों में भरकर चुम्बनों की झड़ी लगा दी. एंजिल भी उसका पूरा साथ दे रही थी. फिर एंजिल बिस्तर पर बैठ गयी और डेविड के लंड को मुंह से चाटने लगी.

*******
 
कॉलेज में:

मार्क शैली के साथ कॉलेज पहुंचा और कुछ ही देर में शिरीन भी आ गयी. शैली ने दोनों का परिचय कराया और फिर मार्क को कॉलेज दिखाने के लिए चल पड़ी. कोई बीस मिनट बाद शैली की क्लास का समय हो गया तो उसने शिरीन से कहा कि वो मार्क को कॉलेज घुमा दे. वो अपनी दो क्लास समाप्त करने के बाद १ बजे केंटीन में मिलेगी. उसकी आँखों को ये नहीं दिख पाया की पूरे समय शिरीन और मार्क एक दूसरे को देखकर आंख-मटक्का कर रहे थे. शैली के जाते ही मार्क ने अपना दांव खेला.

मार्क: “मेरे विचार से कॉलेज बाद में भी देखा जा सकता है, अब जब यहाँ पढ़ना ही है, तो मुझे ये सब समय के साथ पता चल ही जायेगा. मुझे ये समय अगर तुम्हारे साथ बिताने के लिए मिले तो अधिक ख़ुशी होगी.”

शिरीन की बाछें खिल गयीं. वो मार्क से आकर्षित थी और किसी प्रकार अपनी भावनाओं को संभाले हुए थी. पर मार्क के इस प्रस्ताव से उसका संयम टूट गया.

शिरीन: “क्यों नहीं. चलो केंटीन में चलते हैं, इस समय वहाँ कम ही लोग होंगे.”

मार्क: “तुम्हें क्लास में नहीं जाना.”

शिरीन: “आज नहीं.”

मार्क और शिरीन केंटीन चले गए, पर वहाँ पर उनके अनुमान के विपरीत अधिक लोग थे. कुछ समय बैठने के बाद मार्क ने तो समझ ही लिया कि यहाँ कुछ अधिक बात नहीं हो पायेगी. शिरीन ने भी ये भांप लिया. वो सोच रही थी कि क्या किया जाये. शैली एक घंटे में लौट ही आएगी. फिर उसने अपने मन में एक निश्चय किया. वो ये अवसर छोड़ना नहीं चाहती थी. शैली को वो बाद में मना लेगी. पर मार्क के साथ अगर उसे कुछ समय मिल जाये तो…

शिरीन: “चलो मैं तुम्हें दूसरी जगह ले चलती हूँ.”

मार्क: “कब तक लौटेंगे?”

शिरीन: “ये तुम्हारे ऊपर है, तुम इस समय का कैसे उपयोग करना चाहोगे.”

शिरीन की बात से ये तय हो गया कि वो चुदने के लिए तत्पर है. और मार्क भी शिरीन की चूत का मजा लेना चाहता था.

“चलो.”

“शैली को मैं बाद में समझा दूंगी. मेरी सबसे निकट सहेली है. अपने भाई के साथ समय बिताने के लिए मुझे नहीं लगता वो बुरा मानेगी.”

“आई होप यू आर राइट.” मार्क बुदबुदाया. और शिरीन के साथ चल पड़ा.

वहीँ शिरीन के मन में ये विचार चल रहे थे कि मैं इसे जहाँ ले जा रही हूँ अगर उसे वो अच्छा लगा तो ये सदा के लिए मेरा हो सकेगा. उसने मन में ये इच्छा भी की कि उसका अनुमान गलत न हो.

*******

मिशेल के घर:

ईव ने मिशेल के कमरे में आने के बाद उसे अपनी बाँहों में जकड़ लिया और दोनों एक दूसरे के होंठ चूसने लगी. कपड़े जैसे किसी स्वचालित प्रक्रिया से निकल कर अलग हो गए. एक दूसरे को चूमते हुए बिस्तर पर जाकर ढेर हो गयीं. कुछ देर की चूमा चाटी के बाद ईव ने आसन बदला और अपनी चूत को मिशेल के मुंह पर लगाते हुए मिशेल की चूत को चाटने लगी. भाभी नन्द एक दूसरे के प्यार में दुब कर एक दूसरे को मौखिक सम्भोग जा सुख दे रही थीं.

कुछ ही देर में दोनों ने झड़ कर अपना रस एक दूसरे के मुंह में छोड़ दिया. फिर एक दूसरे के साथ लेट कर चूमते हुए अपने हाथों से एक दूसरे को सहलाती रहीं.

ईव: “डेविड बहुत अच्छी चुदाई करता है, क्या सब आपसे सीखा है?”

मिशेल: “नहीं, कुछ मुझसे, कुछ औरों से, पर जो भी सीखा उसका उपयोग भरपूर करता है. आनंद आ जाता है उससे चुदवाने में.”

ईव : “सच है, मेरा मार्क भी ऐसा ही है, तुम्हे कल कैसा लगा उसके साथ?”

मिशेल: “बहुत अच्छा, दिल से चोदता है, लंड तो केवल एक निमित्त है.”

दोनों हंस पड़ीं.

मिशेल: “तुम्हारा उन चारों के लिए क्या प्लान है?”

ईव: “कहीं और जाना ठीक नहीं होगा, विशेषकर जो बदमाशी उन्होंने की थी. उस दिन इतनी थकी न होती और कुछ और समय मिला होता तो मैं दो दो लौड़े भी ले सकती थी. और ऐलिस भी डर गयी थी. सोचना होगा, क्या करूँ?”

मिशेल कुछ देर सोचती रही.

“यहां बुला लो.”

ईव चौंकी, “यहाँ?”

मिशेल: “हाँ, मैं पहले भी रिकी और डॉन से चुदवा चुकी हूँ. तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है.”

ईव: “कल बुला लूँ?”

मिशेल: “हाँ, फिर हम सब क्रिसमस में व्यस्त हो जायेंगे.”

ईव: “ठीक है, मैं जैसन से पूछ लूँ, फिर उन्हें बुला लूँगी. आप भी रिचर्ड से पूछ लेना।”

दोनों इस बात पर सहमत हो गए और फिर एक बार फिर से एक दूसरे के शरीर का रसपान करने लगे.

*******

एंजिल का घर :

एंजिल ने डेविड के लंड को पूरा मन लगाकर चूमा, चाटा और चूसा. वो डेविड के लंड के आकार से बहुत प्रभावित हुई थी. उसने और भी डेविड की आयु के लड़कों से अपनी वासना मिटाई थी, पर जो लंड डेविड के पास था उनके सामने वे क्षीण थे. उसकी बहती हुई चूत की मादक गंध कमरे में छा चुकी थी और डेविड को भी इसका आभास था. उसे लगा कि अधिक देर करने पर ऐसा न हो कि मुख्य व्यंजन से उसे हाथ धोना पड़े. उसे घर भी लौटना था. उसने एंजिल के सिर पर एक थप्पी दी तो एंजिल ने सिर उठाकर उसे देखा.

डेविड: “आपकी लीकेज की महक से लग रहा है कि उसका कोई प्रबंध करना होगा. आइये, पहले मैं उसका निकट से परिक्षण कर लूँ.”

एंजिल को समझ तो आ गया कि डेविड क्या चाहता है, पर उसकी आयु के अन्य लड़कों के साथ किये हुए सहवास के कारण उसे कुछ शक था. वो खड़ी हुई तो डेविड ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसके दोनों पाँवों को चौड़ा करते हुए अपने मुंह को उसकी अविरल बहती चूत पर रख दिया. एंजिल का शरीर कांप उठा. इसका यही अर्थ था कि डेविड अन्य लड़कों के समान नहीं था. अपितु वो स्त्री की प्यास हर पराक्रम से मिटने में सक्षम था. एंजिल ने निर्णय किया कि वो डेविड को वो सुख भी देगी जिसे वो अन्य लड़कों को नकारती रही थी. इस विचार से ही उसके शरीर में झुरझुरी उठी और उसकी चूत ने धरे सारा रस डेविड के मुंह में उढेल दिया.

डेविड चूत चूसने का रसिया था और उसे इसकी शिक्षा इतनी अनुभवी महिलाओं से मिली थी कि आज वो इसमें पारंगत हो चुका था. उसे सीखने में उसकी अपनी माँ का भी योगदान था, और कुछ कुछ शैली का भी. डेविड ने अपने सारे अनुभव का रस निचोड़कर एंजिल की चूत को कुछ इस प्रकार से चूसा कि एंजिल की चूत का बहाव अनवरत रूप से चलायमान रहा. डेविड ने उस रस को अमृत की भांति पिया और फिर उसने उसने अपनी उँगलियों से चूत को खोलकर रस से भीगते हुए अपने लंड पर भी लगाया. अगले चरण के लिए इसका बहुत महत्व था.

जब डेविड को लगा कि अब एंजिल बहुत झड़ चुकी है और अगर और देर की तो चुदाई में वो ढिलाई करेगी तो वो खड़ा हुआ और अपने लंड को चूत के ऊपर घुमाने लगा. इस प्रक्रिया से बहता हुए रस से उसका लंड सुचारु रूप से गिला हो गया. एंजिल की ऑंखें अभी बंद ही थीं और वो अपने उल्लास में खोई हुई थी. उसे ये आभास नहीं था कि उसकी चूत को सहलाने के लिए उँगलियों का नहीं बल्कि लंड का प्रयोग किया जा रहा है. पर एक झटके में उसकी ये तंद्रा टूटी और उसकी ऑंखें बाहर निकल पड़ीं.

उसे अपनी चूत में किसी तेज धार वाली वस्तु के अंदर जाने का अनुभव हुआ. उसकी ऑंखें जब नीचे की ओर गयीं तो उसने जाना कि डेविड ने अपने लंड से उसकी चूत को चीर दिया था. अभी वो इस ज्ञान से अपने आप को अवगत ही करा रही थी कि डेविड ने एक और शक्तिशाली धक्का मारा और उसके लंड ने चूत पर अपनी जीत का झंडा गाढ़ दिया. एंजिल हतप्रभ थी. उसकी फैली हुई आँखें और होठों का निशब्द संचालन उसे लगे किसी सदमे का आभास दे रहे थे.

डेविड जानता था कि समय बहुमूल्य है, और अगर उसने देर की तो एंजिल झटपटाकर उसे हटाने का प्रयास न करने लगे. उसने हल्की गति से एंजिल की चुदाई आरम्भ कर दी. लंड के इस प्रकार गतिशील होने से एंजिल को भी कुछ आनंद आने लगा. वो छुईमुई कली तो थी नहीं, उसे केवल इस आकस्मक हमले से ही कुछ आश्चर्य हुआ था. लंड के चलने से उसकी चूत ने अपनी प्रसन्नता जताई और एंजिल ने अपनी ऑंखें दोबारा बंद कर लीं.

*******

मिशेल के घर:

एक दूसरे के साथ आत्मीय समय बिताने के बाद मिशेल और ईव अधिक निकटता अनुभव कर रही थीं. दोनों उठकर किचन में गयीं और खाना बनाने में जुट गयीं. अब आठ लोगों का खाना जो बनाना था. मिशेल को लगा कि कुछ और सामान की आवश्यकता पड़ेगी. तो उसने ईव से बाहर चलने के लिए पूछा तो ईव मान गयी. कुछ ही देर में दोनों अपनी कार से एक बड़े स्टोर में गयीं और आवश्यक वस्तुओं को लेकर लौट आयीं। कुछ देर आराम करने के पश्चात् वे किचन में जुट गयीं.

मिशेल: “डेविड की आदत है कि अगर मैं किचन में रहूं और वो घर लौटे तो मुझे एक बार तो वो किचन में ही चोद देता है.”

ईव खिलखिला पड़ी. “मार्क भी ऐसा ही कुछ करता है. मुझे बहुत सम्भल कर रहना पड़ता है उससे. पर अब जब वो यहाँ रहने वाला है, मुझे उसकी याद बहुत सताएगी.” ये कहते हुए ईव की आँखों में आंसू आ गए और गला भर उठा.

मिशेल: “हे ईव, ऐसा क्यों सोच रही हो. वो घर में ही रहने वाला है. और अब तुम जब मन हो यहाँ आ सकती हो. इस बहाने तुम्हारा भी चक्कर लगता रहेगा. मेरे विचार से जैसन किसी नए व्यापार में जाने वाला है. क्यों नहीं तुम उसका प्रबंधन अपने हाथ में ले लेतीं। इस प्रकार से तुम्हारा आना जाना लगा रहेगा और मार्क को भी दूरी का अनुभव कम होगा. और यहां तुम्हें चुदाई के लिए भी तीन तीन लौड़े मिल जायेंगे.”

ईव ये सुनकर खिल उठी. “ये सही है. मैं आज ही जैसन से बात करुँगी.”

मिशेल: “अगर चाहो तो ये प्रस्ताव मैं दे सकती हूँ, तुम उसे आगे ले जाना.”

ईव मिशेल के गले लग गयी. “यु आर ब्रिलियंट!”

अब ईव इस तेजी से काम करने लगी कि मिशेल को आश्चर्य हुआ. कुछ ही देर मैं सारा कहना बन चुका था और अभी अधिक समय भी नहीं हुआ था. दोनों ने कुछ देर सोने का विचार किया और मिशेल के कमरे में चली गयीं.

*******

एंजिल का घर :

डेविड के लंड के धक्कों और उसकी जांघों की एंजिल की जांघों के थापों के संगीत से एंजिल के मन के तार हिल रहे थे. अभी तक के अन्य लड़कों की तुलना में न केवल डेविड आकर में बड़ा था बल्कि वो अपने लंड का भरपूर उपयोग करना भी जानता था. उसे अपनी बेटी की विनती याद आ रही थी जो उसे किसी तगड़े लड़के से चुदवाने के लिए न जाने कब से मना रही थी. पर आज उसका मनोरथ स्वयं ही पूरा हो गया था. डेविड की चुदाई के ढंग ने उसके मन मस्तिष्क के तार झनझना दिए थे.

आनंद से उसकी सीत्कारें निकल रही थीं, परन्तु अपार्टमेंट होने के कारण वो अधिक हल्ला नहीं मचा सकती थी, हालाँकि उसका मन इस समय चीख चीख कर अपने आनंद को बताने के लिए उत्सुक था. डेविड भी अपनी पूरी शक्ति और अनुभव के साथ एंजिल की चूत में अपने लंड के प्रहार कर रहा था. एंजिल के शरीर में अचानक अकड़न हुई और उसके कूल्हे बिना लय के थिरकने लगे. काँपते शरीर ने अपनी हार मानते हुए चूत से एक लम्बी धार निकाली और एंजिल शिथिल पड़ गई. डेविड भी अब अधिक रुकने के लिए बाध्य नहीं था. उसे ऐसा लग रहा था कि एक राउंड और होगा और तभी उसे घर लौटने का अवसर मिलेगा. इस बार उसकी आँखों के सामने एंजिल की कसी हुई गांड नाच रही थी, पर उसे विश्वास नहीं था कि वो गांड मरवाने के लिए मानेगी. अपने लंड के रस से एंजिल की चूत को सरोबार करने के बाद डेविड उठा और बाथरूम चला गया. एंजिल उसी स्थिति में अपने पैर फैलाये हुए होंठों पर मुस्कान लिए हुए ऑंखें बंद करके लेटी रही.

*******

शिरीन मार्क को लेकर एक अपार्टमेंट में गई और उसने एक घर को अपने पर्स में रखी चाबी से खोला. मार्क को कुछ आश्चर्य हुआ पर वो चुप ही रहा. अंदर जाकर श्रीं उसके गले लग गई.

शिरीन: “मैं तुम्हें कुछ बताना चाहती हूँ. ये मेरा ही घर है. मैं और मेरी मॉम यहां रहते हैं. मेरे पापा हमे छोड़कर किसी और के साथ घर बसा चुके हैं. मॉम बहुत अकेलापन अनुभव करती हैं. ”

मार्क उसकी बात ध्यान से सुन रहा था.

शिरीन: “मैंने मॉम से कई बार कहा है कि किसी दमदार लड़के से चुदवा लो, पर वो हमेशा ऐसे लड़कों को चुनती हैं कि उन्हें संतुष्टि नहीं मिलती. मैं तुमसे आज ये प्रार्थना करती हूँ कि आज तुम प्लीज मेरी मॉम को चोदो उसके बाद तुम जब चाहोगे मैं तुम्हारे लिए उपलब्ध रहूँगी.”

मार्क ने दीवाल पर लगी फोटो से ये अनुमान तो लगा लिया था कि शिरीन की माँ कैसी है. और उसे इस बात में कोई विशेष आपत्ति भी नहीं थी.

मार्क: “पर तुम्हें कैसे पता कि मैं उन लड़कों जैसा नहीं हूँ?”

शिरीन: “क्योंकि तुम डेविड के कसिन हो और वो…” उसे लगा कि वो पहले ही अधिक बोल चुकी है.

मार्क मुस्कुराकर बोला, “ठीक है, पर याद रहे, मैं तुम्हें जब चोदना चाहूँगा तुम्हें आना होगा.”

शिरीन उसके गले से लिपट गई. “प्रॉमिस. तुम ऐसा करो कपड़े यहीं निकाल लो, मैं मॉम को सरप्राइज दूंगी.”

मार्क मान गया और उसके कपड़े उतारकर एक ओर समेत कर रख दिए. शिरीन उसके बलिष्ठ शरीर और तगड़े लंड को देखकर खुश हो गई. उसने ऊँगली के संकेत से मार्क को एक कमरे की ओर बुलाया.

शिरीन ने दरवाजा खोला तो देखा कि उसकी माँ बिस्तर पर नंगी पड़ी है. उसने कमरे में अन्य कुछ और नहीं देखा और ये मान लिया कि एंजिल संभवतः आत्मसंतुष्टि करके सो गई है. शिरीन ने मार्क को अंदर बुलाया और कमरा बंद कर लिया. पर जो शिरीन ने अपने उत्साह में नहीं देखा था वो मार्क ने देख लिया। वहाँ पहले ही किसी आदमी के वस्त्र पड़े थे. वो सोच ही रहा था कि किस चक्कर में पड़ गया कि बाथरूम का दरवाजा खुला और वो लड़का नंगा ही बाहर आया.

शिरीन और मार्क के मुंह से एक साथ और अनायास ही निकल पड़ा, “डेविड! तुम यहाँ !”

.......अगले भाग में आगे
 
Back
Top