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Incest फूफी और उसकी बेटी से शादी

मैं शेविंग करके घर के लिए राशन लेने मार्केट चला गया। मार्केट से आने में एक घंटा लग गया। मैं कुछ ज्यादा ही सामान ले आया था। मार्केट जाते वक़्त ही मैंने फूफी को बता दिया था की आने में टाइम लग जायेगा तो आप सो जाना, मेरे पास घर की दूसरी चाभी है। मैं घर पहुँचा और सारा राशन किचेन में रखने चला गया। थोड़ी देर बाद जब मैं कमरे में आया तो फूफी को बिस्तर पर सोते हुआ देखा। वो सोते समय कोई हाट सी अप्सरा लग रही थी। उनके ब्लाउज़ के दो बटन खुल गये थे, और उनकी चिकनी कमर भी साफ नजर आ रही थी।

मैंने सोचा फूफी आज से पहले तो कभी इस तरह से नहीं सोई। वो हमेशा से अच्छे तरह से सोती थी, शायद ये सब बी ग्रेड मूवीस का असर था।

मैं धीरे से उनके पास गया और उनकी चूचियों पे हाथ रख दिया और उसे धीरे-धीरे दबाने लगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, फूफी भी सिड्यूसिंग पोजीशन में सो रही थी। टाइम ना वेस्ट करते हुए मैंने उनकी कमर पर हाथ रख दिया और उसे सहलाने लगा, और फिर अपना हाथ उनके पेट पर रखकर उनकी नाभि से खेलने लगा,

और उनकी नाभि पे किस करने लगा।

किस करते वक़्त फूफी थोड़ी से हिली और उनका शरीर अकड़ने लगा। मुझे लगा शायद फूफी उठ चुकी थी। लेकिन वो कुछ कह नहीं रही थी। इसका मतलब फूफी को अच्छा लग रहा था ये सब मैंने सोचा इन्हें सिड्यूस करना काम आ गया। लेकिन मैंने ये नहीं सोचा था की फूफी इतनी जल्दी सिड्यूस हो जाएंगी। शायद इतने सालों से फूफी जो विधवा धर्म निभा रही थी, लखनऊं आकर उन्होंने वो धर्म तोड़ने का फैसला ले लिया होगा। जो भी हो मैं तो एंजाय कर रहा था।

अब मैं धीरे से फूफी के ऊपर चला गया और उनके पेट पर किस करने लगा। फूफी की सांसें मुझे सुनाई दे रही थीं। क्योंकी वो तेज हो गई थीं। मैं धीरे से उनके चूचियां पे आया और ब्लाउज़ के ऊपर से ही उन्हें किस करने लगा। किस करते-करते उनके चेहरे को पकड़ा और उनके होठों पे कस के किस करने लगा। करीब 6-7 मिनट के बाद मैंने उनके होठों की छोड़ा। अब मैंने अपनी हिम्मत बढ़ाई और फूफी का ब्लाउज़ खोलने लगा।

फूफी पूरी अकड़ चुकी थी और अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़कर रोकने की नाकाम कोशिश कर रही थी। उनकी आँखें बंद थी। मैंने उनका ब्लाउज़ खोल दिया। उनकी चूचियां देखकर मेरी आँखों में चमक आ गई। उनकी चूचियां काफी बड़ी-बड़ी थीं। अब मैं उन्हें चूसने लगा।

फूफी के मुँह से आवाजें आना शुरू हो गई। मैं बहुत बुरी तरह से उनकी चूचियां चूस रहा था, जैसे कोई छोटा बच्चा लालिपोप चूस रहा हो। करीब 15 मिनट बाद मैं रुका, मैंने उनके होठों को फिर से किस किया और अब अपने हाथ से उनकी साड़ी उठाने लगा। जैसे ही मेरी नजर उनकी पैंटी पे गई वैसे ही किसी ने दरवाजा खटखटाया।

कौन होगा यार मूड खराब कर रहा है? मैं अपने कपड़े ठीक करके दरवाजा खोलने जा ही रहा था की अचानक मेरी नजर घड़ी पर पड़ी, तो 3:30 बज रहे थे। तब मुझे याद आया की शाजिया आई होगी। फूफी अभी भी आँख बंद करके लेटी हुई थीं, पर वो जाग रहीं थी।

मैंने कहा- "फूफी, शायद शाजिया होगी। अपनी साड़ी ठीक कर लो...”

मैं दरवाजा खोलने गया वो शाजिया ही थी। शाजिया घर के अंदर आई और कुर्सी पे बैठकर आराम करने लगी।

मैंने पूछा- "शाजिया कैसा रहा दिन?"

शाजिया बोली - "बहुत अच्छा... उन तीन लड़कों की पिटाई की खबर सारे स्कूल में फैला दी। सब लोग खुश हो रहे थे..." फिर उसने पूछा- “अम्मी कहा हैं?"

मैं- “वो सो रही हैं। तुम जाकर फ्रेश हो जाओ। मैं तुम्हारा खाना निकालता हूँ"

शाजिया फ्रेश होने चली गई। खाना निकाल के टेबल पे रखा हुआ था। मैंने टीवी ओन कर दी और अपना खाना खाने लगा।

शाजिया आई और बोली- "अपने अपना खाना अभी तक नहीं खाया क्यों?"

मैं मन में- “अब तुम्हें क्या बताऊँ मैं क्या खा रहा था?"

मैंने कहा- "मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा था। तुम भूखी हो और में खाना खा लूँ, ऐसा नहीं हो सकता। आखिर मैं तुमसे प्यार जो करता हूँ...

"

शाजिया के चेहरे पे स्माइल थी। हम दोनों खाना खा चुके थे। फूफी अब सो चुकी थी।

शाजिया ने कहा- “भैया मुझे सुबह के लिए आपको थैंक्यू कहना है..."

मैंने कहा- "थैंक्यू किसलिए? तुम तो अपनी हो और मैं अपनों के लिए कुछ भी कर सकता हूँ.

शाजिया थकी हुई थी तो फूफी के बगल में जाकर सो गई। फूफी और शाजिया बेड पे सो चुकी थी तो मैं नीचे बिस्तर बिछाकर सो गया।
 
शाम को करीब 7:00 बजे मुझे एक काल आई। वो सुरभि मेम की थी। उन्होंने फारन होटेल आने को कहा।

मुझे लगा शायद गवर्नमेंट ने अपना डिसिशन चेंज कर दिया हो, इसलिए मेडम बुला रही हैं, तो मैं तुरंत होटेल गया। अल्कोहल बैन का स्टेटस जानने के लिये की अब अपना होटेल कब खुलेगा? मैं वहां पहुँचा तो होटेल में केवल वहां के सीनियर्स स्टाफ वाले थे, कोई जूनियर पोस्ट वाला नहीं था। मैंने सोचा की मैं ही एकलौता जूनियर पोस्ट वाला क्यों हूँ बाकी सब कहां हैं?

आफिस रूम से मैडम निकली और मुझे बुलाया।

रूम में जाकर मैंने पूछा- "मेडम यहां क्या हो रहा है? और बैन का क्या हुआ?"

उन्होंने कहा- "अभी बैन खत्म नहीं हुआ है और यहां सालाना प्रमोशन की मीटिंग चल रही थी मालिक के साथ..."

मैंने कहा- "मुझे यहां क्यों बुलाया गया है?"

मेडम चेयर से उठी और मेरे पास आकर मेरे कंधे पे हाथ रखकर बोली- "वसीम तुम्हारा भी प्रमोशन हुआ है...

"

मैं- “लेकिन मेडम ये कैसे हो सकता है? मैं तो एक वेटर हूँ और वेटर को कैसा प्रमोशन?"

मैडम कहने लगी- मैंने तुम्हें अपना असिस्टेंट बनाने का फैसला लिया है। हर मैनेजर के पास ये राइट्स होते हैं की वो अपना पर्सनल असिस्टेंट खुद चुन सके तो मैंने तुम्हें छूना है..."

मुझे बहुत खुशी हो रही थी, कहा- "थैंक यू... थैंक यू वेरी मच मेडम आपने मुझे इस लायक समझा...

-

सुरभि मेडम बोली- “इसमें थैंक्यू की क्या बात है? तुम्हारी और मेरी अंडरस्टैंडिंग अच्छी है इसलिए तुमको असिस्टेंट बनाया है। तुम्हारी क्वालीफिकेशन भी ठीक ठाक है। क्योंकी तुम्हारा बी. काम भी कंप्लीट होने वाला है। अब जब भी हड़ताल खत्म होगी, तभी से तुम मेरे असिस्टेंट का काम शुरू कर देना..."

मैं- “जी मॅडम बिल्कुल। आप जब भी कहेंगी काम शुरू कर दूंगा। थैंक यू वन्स अगेन मेडम प्रमोशन के लिए "

मेडम हँसते हुए बोली- “तुमसे कहा ना थैंक्यू मत बोलो..." फिर उन्होंने अपना हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ाया।

मैंने उनसे हाथ मिलाया और फिर वहां से चल दिया।
 
रात के 9:00 बज रहे थे। मैं घर जाकर ये खुशखबरी फूफी और शाजिया को सुनाना चाहता था। इसलिए उन लोगों के लिए मिठाई ले गया। जब में घर पहुँचा तो शाजिया मिठाई का बाक्स देखकर खुश हो गई, क्योंकी उसे लगा की ये बाक्स उसके लिए लाया हूँ

शाजिया कहने लगी- “भैया आपको याद था ? मुझे लगा आप भूल गये होगे। माँ को भी याद नहीं था। मैंने सोच लिया था की मैं आप लोगों को नहीं बताऊँगी। क्योंकी इन दिनों कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था। पर आपने मुझे सर्प्राइज कर दिया..."

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की ये शाजिया किस चीज की बात कर रही है। लेकिन उसकी बातों से लग रहा था की कोई स्पेशल दिन है। शाजिया ने मुझे गले लगा लिया। तब मुझे याद आया की कल तो शाजिया का बर्थ डे है। मिठाई लाया था मैं अपने प्रमोशन की खुशी में। पर ये सब देखकर मैंने बात पलट दी और कहने लगा- "तुमने ये कैसे सोच लिया की मैं तुम्हारा जनम दिन भूल जाऊँगा" और उसे कसकर गले लगा लिया।

फूफी को भी नहीं याद था फिर ये सब सुनकर उन्होंने भी गले लगाया।

मैंने कहा- "तुम्हारा जनम दिन बहुत अच्छे से सेलेब्रेट करेगे। लेकिन ये तुम बताओगी की तुम्हें अपना बर्थ-डे कैसे सेलेब्रेट करना है?"

शाजिया- "मुझे तो आपके साथ ही अपना बर्थ-डे मनाना है...'

मैं- “ठीक है। सबसे पहले कल सुबह हम लोग मंदिर जाएंगे। उसके बाद कही घूमने और फिर लंच करेंगे। शाम को केक काटेंगे और उसके बाद तुम्हारा गिफ्ट..."

गिफ्ट की बात सुनकर वो और खुश हो गई, कहने लगी- "गिफ्ट में क्या होगा?"

मैं- "अभी नहीं बताऊँगा। कल जब मिलेगा तब देख लेना...."

अब शाजिया ने मुझे गाल पे किस किया किया और थैंक्यू बोलकर गले लगा लिया।

मैंने सोचा प्रमोशन की बात कल बता दूँगा अभी रहने देता हूँ। फूफी खाना बनाने चली गई और शाजिया टीवी देखने लगी।

थोड़ी देर बाद मैं किचेन में गया, पीछे से फूफी की कमर में हाथ डालकर उन्हें कस के पकड़ लिया और उनसे कहा- "अगर दोपहर में शाजिया नहीं आई होती तो आज आपका और मेरा मिलन हो चुका होता, और आप मेरी हो चुकी होती...” कहकर मैं उनी गर्दन पे पीछे से किस करने लगा।

फूफी अपने आपको धीमे से छुड़ाकर पलटी और कहने लगी- “बेटा आज जो कुछ भी हुआ वो अच्छा नहीं हुआ। मैं रिश्ते में तुम्हारी फूफी हूँ और ये सब गलत है..” और उनकी आँखों में आँसू थे।

मैंने कहा- “फूफी गलत तो है, पर मैं आप से प्यार करता हूँ और यहां है कौन जो हमें देख रहा है?"

फूफी- "नहीं बेटा। ये सब फिर भी गलत है..."

मैं- “फूफी क्या आप मुझसे प्यार नहीं करती?"

फूफी- "बेटा मुझे भी तुमसे बहुत प्यार है। लेकिन हमारा रिश्ता ऐसा है की ये सब हम नहीं कर सकते..

मैं बहुत उदास हो गया, और कहा- “ठीक है फूफी। अब जब आप कहेंगी तभी मैंनें आपके पास आऊँगा ऐसे नहीं आऊँगा..."

फूफी- "बेटा बुरा ना मानो। अगर तुम ही नाराज हो जाओंगे तो हम लोगों का क्या होगा?"

मैंने कहा- "फूफी मुझे बुरा नहीं लगा। मैं आपकी तरफ से प्यार के इजहार का इंतजार करूँगा...'

मैं मन में सोच रहा था- "फूफी चली गई तो क्या हुआ शाजिया तो हैं ही मस्ती के लिए " अब फूफी ने अपने आँसू पोछे और मैं वहां से चल दिया।
 
रात के 9:00 बज रहे थे। मैं घर जाकर ये खुशखबरी फूफी और शाजिया को सुनाना चाहता था। इसलिए उन लोगों के लिए मिठाई ले गया। जब में घर पहुँचा तो शाजिया मिठाई का बाक्स देखकर खुश हो गई, क्योंकी उसे लगा की ये बाक्स उसके लिए लाया हूँ

शाजिया कहने लगी- “भैया आपको याद था ? मुझे लगा आप भूल गये होगे। माँ को भी याद नहीं था। मैंने सोच लिया था की मैं आप लोगों को नहीं बताऊँगी। क्योंकी इन दिनों कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था। पर आपने मुझे सर्प्राइज कर दिया..."

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की ये शाजिया किस चीज की बात कर रही है। लेकिन उसकी बातों से लग रहा था की कोई स्पेशल दिन है। शाजिया ने मुझे गले लगा लिया। तब मुझे याद आया की कल तो शाजिया का बर्थ डे है। मिठाई लाया था मैं अपने प्रमोशन की खुशी में। पर ये सब देखकर मैंने बात पलट दी और कहने लगा- "तुमने ये कैसे सोच लिया की मैं तुम्हारा जनम दिन भूल जाऊँगा" और उसे कसकर गले लगा लिया।

फूफी को भी नहीं याद था फिर ये सब सुनकर उन्होंने भी गले लगाया।

मैंने कहा- "तुम्हारा जनम दिन बहुत अच्छे से सेलेब्रेट करेगे। लेकिन ये तुम बताओगी की तुम्हें अपना बर्थ-डे कैसे सेलेब्रेट करना है?"

शाजिया- "मुझे तो आपके साथ ही अपना बर्थ-डे मनाना है...'

मैं- “ठीक है। सबसे पहले कल सुबह हम लोग मंदिर जाएंगे। उसके बाद कही घूमने और फिर लंच करेंगे। शाम को केक काटेंगे और उसके बाद तुम्हारा गिफ्ट..."

गिफ्ट की बात सुनकर वो और खुश हो गई, कहने लगी- "गिफ्ट में क्या होगा?"

मैं- "अभी नहीं बताऊँगा। कल जब मिलेगा तब देख लेना...."

अब शाजिया ने मुझे गाल पे किस किया किया और थैंक्यू बोलकर गले लगा लिया।

मैंने सोचा प्रमोशन की बात कल बता दूँगा अभी रहने देता हूँ। फूफी खाना बनाने चली गई और शाजिया टीवी देखने लगी।

थोड़ी देर बाद मैं किचेन में गया, पीछे से फूफी की कमर में हाथ डालकर उन्हें कस के पकड़ लिया और उनसे कहा- "अगर दोपहर में शाजिया नहीं आई होती तो आज आपका और मेरा मिलन हो चुका होता, और आप मेरी हो चुकी होती...” कहकर मैं उनी गर्दन पे पीछे से किस करने लगा।

फूफी अपने आपको धीमे से छुड़ाकर पलटी और कहने लगी- “बेटा आज जो कुछ भी हुआ वो अच्छा नहीं हुआ। मैं रिश्ते में तुम्हारी फूफी हूँ और ये सब गलत है..” और उनकी आँखों में आँसू थे।

मैंने कहा- “फूफी गलत तो है, पर मैं आप से प्यार करता हूँ और यहां है कौन जो हमें देख रहा है?"

फूफी- "नहीं बेटा। ये सब फिर भी गलत है..."

मैं- “फूफी क्या आप मुझसे प्यार नहीं करती?"

फूफी- "बेटा मुझे भी तुमसे बहुत प्यार है। लेकिन हमारा रिश्ता ऐसा है की ये सब हम नहीं कर सकते..

मैं बहुत उदास हो गया, और कहा- “ठीक है फूफी। अब जब आप कहेंगी तभी मैंनें आपके पास आऊँगा ऐसे नहीं आऊँगा..."

फूफी- "बेटा बुरा ना मानो। अगर तुम ही नाराज हो जाओंगे तो हम लोगों का क्या होगा?"

मैंने कहा- "फूफी मुझे बुरा नहीं लगा। मैं आपकी तरफ से प्यार के इजहार का इंतजार करूँगा...'

मैं मन में सोच रहा था- "फूफी चली गई तो क्या हुआ शाजिया तो हैं ही मस्ती के लिए " अब फूफी ने अपने आँसू पोछे और मैं वहां से चल दिया।
 
बर्थ-डे का दिन।

जब से फूफी ने मेरे प्यार को मना कर दिया था तब से मैं उनसे ठीक से बातें नहीं कर रहा था। मैं उनसे थोड़ा उखड़ा - उखड़ा रह रहा था। वो बीच-बीच में मुझसे प्यार से बात कर रही थी। पर मैं उन्हें रेस्पान्स नहीं दे रहा था। मैंने सोच लिया था की आज शाजिया के साथ खूब मस्ती करूँगा। शाजिया मेरी दी हुई पहले वाली ड्रेस पहन के तैयार थी और मैं तैयार हो रहा था।

मैंने फूफी से उखड़े हुए अंदाज में कहा- “अगर आपको भी चलना है तो तैयार हो जाइए..."

मेरी ऐसे बातों से फूफी को लगा की मैं उन्हें नहीं ले जाना चाहता हूँ, तो उनका मुँह लटक गया, और वो ना जाने के बहाने बनाने लगी की मुझे बुखार है मैं नहीं जा पाऊँगी।

लेकिन शाजिया उन्हें मनाने लगी।

मैंने कहा- "ठीक है। हम लोग जा रहे हैं, आप अपना ख्याल रखना..."

मेरे मुँह से ऐसी बातें सुनकर फूफी को बहुत बुरा लग रहा था। वो जानती थी की मुझे गुस्सा बहुत आता है और जल्दी जाता भी नहीं है।

शाजिया भी ये सब सुनकर हैरान थी की आखिर अम्मी और भैया के बीच में क्या चल रहा है?

मैं शाजिया को लेकर मंदिर चला गया। वहां हमने भगवान के दर्शन किए और वहां से घूमने चल दिए। काफी जगह घूमने के बाद मैं उसे लंच में ले गया।

शाजिया मेरे साथ बहुत ज्यादा फ्रेंडली हो चुकी थी। वो मुझसे चिपक चिपक के चलने लगी थी घूमते वक़्त । मैंने सोचा शाम को नहीं उसे अभी गिफ्ट दे दिया जाए, तो उसे माल में एक अच्छी सी शाप पे ले गया और उसे वहां एक हाट ड्रेस दिलवाई।

शाजिया उस ड्रेस से शर्मा रही थी की वो इसे कैसे पहनेगी? पर मैंने उसे मना लिया। वो ट्रायल रूम में गई ड्रेस को ट्राई करने के लिए। मैं ट्रायल रूम के बाहर ही खड़ा था।

शाजिया 5 मिनट बाद अंदर से बोलती है- "मैं ये पहन नहीं पा रही हूँ। मुझे समझ में नहीं आ रहा है की ये पहनूं कैसे?"

मैंने कहा- "ट्राई करती रहो, हो जाएगा....

लेकिन वो समझ नहीं पा रही थी क्योंकी वो ड्रेस बहुत छोटी थी।

अब मैंने कहा- "ठीक है दरवाजा खोलो मैं देखता हूँ--

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शाजिया मेरे साथ काफी फ्रेंड्ली हो चुकी थी, इसलिए उसने दरवाजा खोल दिया। उस शाप में उस वक़्त ज्यादा कस्टमर नहीं थे इसलिए मैं अंदर घुस गया। मैंने सोचा आज तो जन्नत के नजारे देखने को मिलेंगे। जैसे ही मैंने उसे देखा मुझे हल्की सी हँसी आ गई। वो अपने कपड़ों के ऊपर से ही उस ड्रेस को पहन रही थी।

तब मैंने उसे समझाया- तुम्हें पहले ये कपड़े खोलने पड़ेंगे। में अपना मुँह घुमा लेता हूँ तुम ये कपड़े खोल दो...

शाजिया ऐसा ही करने लगी। चेंजिंग रूम में चारों तरफ शीशे लगे थे। मैं शाजिया को कपड़े खोलते हुए देख रहा था। पहले शाजिया ने अपना टाप निकाला। उसने ब्लैक कलर की ब्रा पहन रखी थी उसे इस तरह देखकर मेरे तन बदन में आग लग रही थी। अब वो अपनी जीन्स निकालने लगी तब उसकी नजर सामने वाली मिरर पे पड़ी और उसने देख लिया की मैं उसे देख रहा था।

मुझे भी पता चल गया था की शाजिया ने मुझे देख लिया है। पर मैं अभी भी उसे देख रहा था। वो हँसने लगी और शर्मा-शर्माकर जीन्स खोलने लगी। उसने अपनी जीन्स खोल दी

और मेरी तरफ देखने लगी।

मैंने इशारा किया की वो ड्रेस पहनने की कोशिश करे।

उसने ब्लैक कलर की पैंटी पहनी हुई थी। मेरा मन तो कर रहा था की अभी घूम के उसकी चूत में अपनी जबान लगा दूं और उसे चाटने लगूं। अब वो ड्रेस ट्राई करने लगी, पर ड्रेस टाइट थी और छोटी थी तो वो अटक गई थी। तब मैं पीछे घूमा और उसकी कमर पकड़कर उसे अपनी तरफ घुमाया और उसे ड्रेस पहनने में मदद करने लगा।

ड्रेस पहनाने के बहाने मैंने उसकी चूचियों को, गाण्ड को और उसकी जांघों को छुआ वो बहुत शर्मा रही थी। उसका चेहरा शर्म के मारे लाल हो गया था।

उसे उस ड्रेस में देखकर मेरे मन पागल हो रहा था। मैं उसे घूर घूर के देख रहा था।

वो अपना चेहरा और अपनी टांगों को छुपाने की कोशिश करने लगी। पर मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा- "तुम्हें ये ड्रेस कैसी लगी?"

वो शर्माकर कहने लगी- "अच्छी ड्रेस है." उसका हाथ मेरे हाथ में था।

मैं- “तुम्हें ये ड्रेस मैंने दिलवाई है तो मुझे इसके बदले कुछ नहीं मिलेगा ?"

शाजिया- "क्या चाहिए आपको?”

मैंने कहा- "वो मैं बाद में माँग लूँगा। अब चलते हैं यहां से.." मैंने ड्रेस के पैसे दिए और हम लोग घर चल दिए

रास्ते में लवर्स पाइंट पड़ता था, तो मैंने सोचा यही अच्छा टाइम है शाजिया को सिड्यूस करने का। मैंने लवर्स पाइंट की तरफ इशारा किया और कहा- “वहां चलोगी?"

शाजिया- "वो कौन सी जगह है?"

मैं- “लवर्स पाइंट। हम जैसे लोगों के लिए, मतलब हम जैसे प्यार करने वालों की जगह है वो..."

शाजिया हँसने लगी ।

मैंने पूछा- "तुम मुझसे प्यार तो करती हो ना?"

शाजिया ने कहा- “दुनियां में सबसे ज्यादा मैं आपसे ही प्यार करती हूँ। आप जहां कहोगे मैं वहां चलूंगी."
 
हम लोग लवर्स पाइंट के अंदर चले गये। वहां शाजिया ने बहुत सारे लोगों को देखा जो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बैठकर किसिंग और बहुत कुछ कर रहे थे। वो मुझसे चिपक के चलने लगी। उसे शर्म आ रही थी। इस जगह पे हम लोग एक बेंच में चिपक के बैठ गये। मेरा हाथ उसकी कमर में था और वो कपल्स को किस करते हुए अभी भी देख रही थी।

मैं- "क्या देख रही हो शाजिया ?"

शाजिया ये सुनकर शर्मा गई और अपना मुँह मेरे कंधे पे रखकर छुपाने लगी।

मैंने उसका चेहरा उठाया और उसकी आँखों में देखकर कहा- "मुझे भी यही चीज चाहिए..."

वो शर्माते हुए उठ गई, और कहा- "मुझे ये सब करने में शर्म आती है और मैंमें यहां कुछ नहीं करूँगी..."

मैंने कहा- "यहां नहीं करोगी... इसका मतलब घर पर करोगी...."

वो अपना मुँह घुमा के हँसने लगी मैं समझ गया की इसको पटाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। ये आज के जमाने की लड़की है।

मैं- "तो चलो घर... वहां पर मुझे चाहिए और तुमने कहा था उन तीन लड़कों को सबक सिखाने के बाद की तुम मुझे 10 किस दोगी। याद है की नहीं?"

शाजिया हँसते हुए- “सब याद है.."

मैं खुशी के मारे पागल हुआ जा रहा था। मैंने बाइक उठाई उसे पीछे चिपका के बैठाया और चल दिया घर । घर पहुँच के शाजिया ने फूफी को आवाज लगाई तो फूफी ने दरवाजा खोला। उनका चेहरा ऐसा लग रहा था जैसे वो रो रही हो।

शाजिया ने पूछा- “क्या हुआ माँ?"

फूफी- "कुछ नहीं बेटा। आँखों में कुछ चला गया था..." और फूफी ने देखा की शाजिया की कमर में मेरा हाथ है, और शाजिया का हाथ मेरी कमर में हैं, हम लोग चिपक के खड़े हैं।

शाजिया की ड्रेस देखकर फूफी दंग रह गई और गुस्से से कहा- "ये तुमने क्या पहन रखा है?"

मैंने कहा- "ये ड्रेस मैंने खरीद के दी है...."

फूफी ये सुनकर चुप हो गई।

घर आते समय में केक लेता हुआ आया था शाजिया ने केक काट के पहले मुझे खिलाया फिर फूफी को । शाजिया ने वो ड्रेस खोल के रख दी और नाइटी पहन ली। फूफी किचेन में खाना बनाने में बिजी थी। मैं शाजिया के पास गया और उसे वो वादा याद दिलाया।

शाजिया बोली "घर में कैसे दूं? अम्मी हैं..."

मैंने कहा- "चलो छत पे वहां तो कोई नहीं है...” कहकर उसका हाथ पकड़ा और उसे ले गया छत पे, और मैंने अपना चेहरा आगे करते हुए कहा- "अब तो दे दो..."

शाजिया- “अच्छा ठीक है बाबा देती हूँ.

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उसने मुझे 9 किस गालों पे दिए और दसवां किस मैंने अपने होंठों पे लिया। मेरा ये पहला किस था और उसका भी। हमारा किस ज्यादा नहीं बस 40 सेकेंड तक चला। पर ऐसा लगा की जैसे 40 मिनट तक चला हो।

शरमाते हुए शाजिया नीचे चली गई। पर मैं छत पे ही ठंडी हवा का मजा लेने लगा और शाजिया के होठों के टेस्ट को याद करने लगा।

अगले दिन सुबह मैं सो के उठा। शाजिया नीचे सो रही थी, उसका चेहरा सबसे पहले देखते ही मुझे रात की किस याद आ गई। फूफी बाथरूम में थी। मैंने शाजिया के सिर पे हाथ फेरा, और कहा- “आज इसका चेहरा देखकर उठा हूँ तो आज का दिन अच्छा जाएगा." कहकर उसके माथे पे एक किस किया और उसे उठाने लगा।

शाजिया उठने लगी। मुझे अपने सामने देखकर खुशी से स्माइल करने लगी।

मैंने उसे कस के हग किया। वो अभी भी लेटी हुई थी तो मैंने उसे उठाया।

शाजिया उठ गई और बाहर गार्डेन में चली गई। मैं न्यूसपेपर पढ़ने लगा। थोड़ी ही देर में फूफी निकली उनका चेहरा देखकर लग रहा था की वो उदास हैं। उन्हें देखकर मुझे बुरा लग रहा था। पर मेरा गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ था।

मैंने मन में कहा- “इन्होंने मेरा प्यार रिजेक्ट किया है, अब जब तक सारी नहीं कहेंगी तब तक इनसे ढंग से बात नहीं करूँगा. "

फूफी ने मुझे देखा और बिना कुछ कहे किचेन में चली गई। मैंने भी उनसे कुछ नहीं बोला। मैं बाथरूम चला गया फ्रेश होने के लिए। थोड़ी देर में निकला और कपड़े पहनने लगा। मैंने सोचा की आज तो मुझे कहीं नहीं जाना है तो मैंने बरमूडा पहन ली। मुझे प्यास लग रही थी तो मैं फ़िज़ से पानी पीने गया। वहां फूफी नाश्ता बना रही थी। उनकी गाण्ड और कमर देखकर मेरे मन में फिर से गंदे विचार आने लगे। पानी पीते हुए मैं उनके बदन को देखने लगा।

फूफी पलटी और मुझे देखने लगी। पर मैंने तुरंत अपना मुँह फेर लिया। उन्हें कुछ पता नहीं चला। फूफी मेरे पास आकर बोली- "तुम्हारा मन पसंद नाश्ता बनाया है..."

मैं कुछ नहीं बोला।

फूफी की आँखों में पानी आ चुका था और वो बोलने लगी- "वसीम कुछ तो बोलो?"

मैं- "मुझे आपसे बात नहीं करनी है..."

फूफी- "तुमने मुझसे लगभग दो दिन से बात नहीं की है आखिर क्यों कर रहे हो तुम मेरे साथ ऐसा?"

मैं- आप जानती तो हो की मैं आपसे क्यों बात नहीं कर रहा हूँ?

फूफी- "प्लीज.... वो सब बातें भूल जाओ। मैं तुमसे माफी मांगती हूँ। मुझे तुम्हारे साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था। मुझे भी तुम्हारे प्यार का अंदाजा तब हुआ जब तुम मुझसे नाराज थे। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा अब कोई नहीं बचा है। मैं बिल्कुल अकेली हो गई हूँ। मुझे माफ कर दो वसीम प्लीज... देखो मैं अब तुम्हें बेटा भी नहीं बुला रही हूँ। अब से मैं तुम्हें वसीम या सुनिए जी कहकर बुलाऊँगी। अब तो खुश हो ना?"
 
मुझे यकीन नहीं हो रहा था की फूफी इतनी जल्दी माफी माँग लेंगी। मैंने कहा- "ठीक है। मैंने आपको माफ किया, और आज से मैं आपको अकेले में रुखसाना ही कहकर बुलाऊँगा। क्योंकी आज से आप मेरी फूफी नहीं गर्लफ्रेंड हैं..." कहकर मैंने उनके आँसू पोंछे और उन्हें गले लगा लिया।

मैंने पूछा- "तुमको इतनी जल्दी एहसास कैसे हो गया की तुम मुझसे प्यार करती हो?"

तब रुखसाना बोली- "जब तुम और शाजिया एक साथ बाहों में बाहें डालकर आए थे तब मुझे तुम्हें किसी और के साथ देखकर बुरा लग रहा था। मैं रात भर तुम्हारे बारे में ही सोच रही थी। तब मुझे एहसास हुआ की मेरे मन में भी तुम्हारे लिए कुछ कुछ है...."

मैं सोचने लगा- "ये तो साला लफड़ा हो गया। इधर फूफी को और उधर शाजिया को भी मैंने लगभग पटा लिया है। अब दोनों को एक साथ कैसे मैनेज करूं? मुझे फूफी को सब कुछ बता देना चाहिए."

मैंने कहा- “फूफी मुझे लगा की तुम्हें मुझसे प्यार नहीं है, इसलिए मैं बहुत दुखी था। कल जब मैं शाजिया को घुमाने ले गया तब मुझे एहसास हुआ की शाजिया मुझसे बहुत प्यार करती है और मैं भी उसकी जवानी की तरफ आकर्षित हो गया, और वो भी मुझे अच्छी लगने लगी है..."

तभी फूफी बोली- "इसका मतलब तुम्हारा प्यार मेरे लिए खत्म हो गया?"

मैं- "नहीं फूफी, ऐसा नहीं है। मेरा प्यार तो आपके लिए और बढ़ गया है। पर अब मेरे दिल में शाजिया के लिए भी फीलिंग आ गई है, और मैं तुम दोनों को खोना नहीं चाहता हूँ। मुझे आप दोनों से प्यार हो गया है। मैं अब क्या करूं?"

फूफी बोली- “पर सबसे ज्यादा प्यार तुम किससे करते हो?"

मैं- “आपसे करता हूँ...

फूफी- "तो फैसला हो गया। तुम शाजिया से प्यार करते रहो, पर सबसे ज्यादा प्यार तो मुझसे ही करते हो । लेकिन याद रखना तुम शाजिया के साथ वो सब मत करना जो पति-पत्नी करते हैं। आगे चल के ये सब पे सिर्फ मेरा हक होगा...."

मैंने हँसते हुए कहा- "जी फूफी मुझ पर सबसे ज्यादा हक आपका ही होगा...."

फूफी ने मुझे अपनी बाहों में पकड़ लिया, और कहा- “भूल गये? फूफी नहीं रुखसाना कहना है..."

मैं उन्हें कसकर पकड़कर उनके होठों पे किस करने लगा। मैंने अपना एक हाथ उनकी गाण्ड पे रखा था और दूसरा हाथ उनकी कमर पे हमारी किस दो मिनट तक चली थी, क्योंकी वो शर्माकर रुक गई थी। उन्हें किस करना नहीं आता था।

मैं- “चिंता मत कीजिए, अब आपको किस करने की आदत पड़ जाएंगी..."

फूफी शर्माकर हँसने लगी और मुझसे लिपट के अपना मुँह छुपाने लगी। मैं बहुत खुश था की शाजिया के साथ अब फूफी भी मिल गई। मैंने खुशी के मारे अपने दोनों हाथों को रुखसाना की कमर में डालकर उसे उठा लिया और किस करने लगा।

शाजिया बाथरूम में थी।

हम दोनों एक दूसरे को बाहों में लेकर एक दूसरे की आँखों में खोए थे।

फूफी बोली- "तुम मुझे कभी छोड़कर तो नहीं जाओगे ना?"

मैं- "नहीं, कभी नहीं जाऊँगा रुखसाना...

फूफी- “मुझे तुमसे एक और बात करनी है?"

मैं- कौन सी बात?

फूफी- "मुझे तुमसे प्यार करने में शर्म आती है। क्योंकी तुम मेरे बेटे जैसे हो। मैं ये चाहती हूँ की हम दोनों अपने आप पे थोड़ा कंट्रोल रखें और पति पत्नी वाला रिलेशन धीरे-धीरे बनाएं। मैं एकदम से वो रिलेशन नहीं बना पाऊँगी। मेरे लिए ये सब बहुत मुश्किल होगा."

मैंने कहा- "ठीक है रुखसाना, तुम जैसा चाहती हो वैसा ही होगा। तुम मुझे मिल गई हो मेरे लिए बस इतना ही काफी है...

मैं मन में सोचने लगा- “शायद मैंने कुछ ज्यादा ही जल्दी रुखसाना को अपना प्यार दिखा दिया। मुझे उसको और सिड्यूस करना चाहिए था। तब वो खुद मुझे अपने आपको चोदने के लिए कहती। मुझसे गलती हो गई लेकिन अब मैं उस गलती को सुधारूंगा..."
 
शाजिया बाथरूम से निकलने लगी। ये देखकर मैं किचेन से निकल गया। मैं नहीं चाहता था की शाजिया ये सब देखे । नहीं तो उसे लगेगा की मैं उसके साथ फूफी पर भी लाइन मार रहा हूँ। वो स्कूल जाने के लिए तैयार होने लगी।

एक ही रूम होने की वजह से शाजिया बाथरूम में जाने लगी कपड़े पहनने के लिए।

मैंने कहा- "बाथरूम में क्यों जा रही हो यही चेंज कर लो ना ? मुझसे कैसी शर्म ? मैं तुम्हें पहले भी चेंज करते हुए देख चुका हूँ..."

शाजिया हँसने लगी और कहा- “अब मुझे शर्म आ रही है...."

मैं- "अरी शर्म कैसी? मैं तो तुम्हारा अपना ही हूँ.."

शाजिया ये सुनकर चेंज करने लगी। उसका चेहरा शर्म के मारे लाल हो चुका था। उसने सबसे पहले अपना तौलिया नीचे गिरा दिया। शाजिया ने ब्लैक कलर की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी।

उसकी गाण्ड देखकर मेरा लण्ड खड़ा होने लगा। मैंने अपने हाथ से बरमूडा पे बने तंबू को छुपा लिया। वो मुँह घुमा के अपने स्कूल के कपड़े पहन रही थी। क्योंकी शाजिया को बहुत शर्म आ रही थी। गाँव की लड़की चाहे जितनी मोर्डर्न बनने की कोशिश करे वो होती बहुत शर्मीली है, छोटे कपड़े के मामले में।

शाजिया कपड़े पहनने के बाद मेरी तरफ घूमी और बोली- "ठीक लग रही हूँ ना ?"

मैंने कहा- "हाँ बहुत सुंदर लग रही हो। जब मैं शादी करूँगा तब तुम्हारे जैसी ही किसी हाट लड़की से करूँगा.. "

शाजिया हँसने लगी ।

अचानक मेरी नजर किचेन के दरवाजे पे खड़ी रुखसाना पे पड़ी। वो शाजिया और मुझे गुस्से से देख रही थी। मुझे लगा अब यहां से खिसकने में ही भलाई है। मैं गार्डेन में चला गया।

रुखसाना पौधों को पानी देने आई और शाजिया को चिल्लाकर बोली- "तुम इतनी देर से यहां कपड़े पहन रही हो तुम्हें स्कूल नहीं जाना क्या?" फूफी को मेरी बातें सुनकर जलन हुई थी इसलिए वो गुस्से में थी।

शाजिया को लगा जैसे अम्मी ने सब देख लिया है उसे भैया के सामने कपड़े पहनते हुए । इसलिए वो बिना कुछ बोले टिफिन लेकर चली गई। अब उसे क्या पता की फूफी को पता है की मैं उसे लाइन मारता हूँ।

रुखसाना घर की साफ सफाई करने लगी। मुझे लगा उसका गुस्सा शांत हो गया होगा। इसलिए मैं जाकर टीवी देखने लगा। वो रूम में आकर साफ सफाई करने लगी। शाजिया की वजह से पहले ही मेरा लण्ड एक बार खड़ा हो चुका था ऊपर से रुखसाना को सफाई करते हुए देखकर मेरे लण्ड में कुछ हलचल होने लगी। मेरा मूड फिर से बनने लगा।

मैंने रुखसाना की कमर को पीछे से पकड़ लिया तो वो थोड़ा सा चौक गई। अब उसकी कमर और पीठ को मैं सहलाने लगा। वो नीचे बैठकर सफाई कर रही थी। उसका गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ था तो रुखसाना मेरे छूते ही उठ गई और मुझसे दूर जाने लगी।

मैंने उसे प्यार से पकड़ लिया और कहा- “सारी जानू, मैंने शाजिया से ऐसे ही कह दिया था उसे खुश करने के लिए..."

रुखसाना- "सच में आपने ऐसे ही कहा था उससे की आपके मन में कुछ है उसके लिए? अगर है तो बता दीजिए मैं अभी आपके रास्ते से हट जाती हूँ..

मैं- “नहीं जानू ऐसा कुछ नहीं है। मैं तुमसे ही सबसे ज्यादा प्यार करता हूँ। अब तो माफ कर दो ना..."

रुखसाना- “ठीक है जाइए माफ किया..."

मैं- "मुझे कैसे पता चलेगा की तुमने मुझे दिल से माफ किया है?"

रुखसाना- "तो क्या चाहिए आपको?"

मैं- एक किस चाहिए और कुछ नहीं ।

वो ये सुनकर हँसने लगी। मैं उसकी तरफ बढ़ने लगा और उसे किस करने लगा। मैंने किस करते-करते उसकी साड़ी खोल दी और अब उसकी गर्दन पे किस करने लगा। रुखसाना ने मुझे कस के पकड़ रखा था। हम लोग दीवार के सहारे खड़े थे। मेरा हाथ उनकी पीठ से होते हुए उनकी गाण्ड पे आ गया। अब मैं अपने एक हाथ से उसकी गाण्ड को धीमे-धीमे दबाने लगा। उसकी सांसें तेज हो रही थी और दूसरे हाथ से उनकी चूचियों को भी मैं धीरे-धीरे दबा रहा था।

अचानक फूफी को पता नहीं क्या हुआ की वो अपने आपको मुझसे छुड़वाने लगी।

मैंने पूछा- "क्या हुआ जानू ?"

फूफी- "मुझे बहुत शर्म आ रही है। हमें इससे आगे अभी नहीं बढ़ना चाहिए। अपने एमोशन को कंट्रोल कीजिए मैं अभी मानसिक तौर पे तैयार नहीं हैं...

"

मैंने अपने गुस्से को दबा लिया। क्योंकी मैंने ही कहा था की मैं उसके साथ जल्दबाजी में कुछ नहीं करूँगा। मैंने कहा- “अच्छा चलो ठीक है...."

रुखसाना साड़ी ठीक करने बाद सफाई करने लगी और मैं टीवी देखने लगा। उस दिन केवल थोड़ी-थोड़ी मस्ती की रुखसाना और शाजिया के साथ |
 
अगले दिन सुबह में मेरी नींद पहले खुल गई। दोनों अभी तक सो ही रही थी तो मैं सबसे पहले रुखसाना को उठाने लगा। वो उठ भी गई। मैं उसे घूरे जा रहा था।

रुखसाना ने ये देखकर कहा- "ऐसे क्या देख रहे हैं आप?

मैं- "तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो आज । मन तो कर रहा है किस कर लूँ तुम्हें. "

रुखसाना- तो रोका किसने है आपको?

उसके ये कहते ही मैंने उसके होठों पे अपने होंठ रख दिए और धीमे-धीमे किस करने लगा। उसके होठों को मैं मजे ले-लेकर किस रहा था। 3 मिनट के बाद हम दोनों अलग हुए।

मैं- “रुखसाना तुम तो आज मूड में लग रही हो, क्या बात है?"

रुखसानावो हँसने लगी और उठकर बाथरूम में चली गई।

मैं अब शाजिया को उठाने लगा। वो उठने में आनाकानी करने लगी। पर मैंने भी उसे उठाकर ही दम लिया।

शाजिया बैठी-बैठी ही मेरी बाहों में आकर कहने लगी- “भैया, मुझे आज स्कूल जाने का मन नहीं कर रहा है..."

मैंने पूछा- "क्यों नहीं जाना आज?"

शाजिया- "मेरा सिर और बदन दर्द कर रहे है..." शाजिया के घबराकर बोलने से मुझे लगा की वो झूठ बोल रही है।

मैं- "सच सच बताओं शाजिया क्या बात है? मैं फूफी से कुछ नहीं कहूँगा..."

शाजिया ने सिर झुकाके कहा- “भैया आज मेरे स्कूल में टेस्ट है और मैंने कुछ नहीं पढ़ा है। कल आपके साथ टाइम बिताने और मस्ती करने में ही मस्त थी। क्योंकी मुझे आपके साथ टाइम बिताना अच्छा लगता है। इसीलिए टेस्ट के बारे में भूल गई थी..."

मुझे ये सुनकर अच्छा लगा, और कहा- ठीक है मत जाओ। लेकिन फूफी से क्या कहोगी? वो तो तुम्हें स्कूल भेज के ही रहेंगी..."

शाजिया उदास हो गई।

मेरे दिमाग में एक आइडिया आया। मैंने कहा- “अच्छा उदास मत हो। तुम स्कूल के लिए तैयार हो जाओ। मेरे पास एक आइडिया है....

थोड़ी देर बाद हम दोनों तैयार हो गये। मैंने फूफी से कहा- “मुझे होटेल से अभी फोन आया है तो मैं होटेल जा रहा हूँ। वहां से आने में शाम हो सकती है..." और मैंने शाजिया को बता दिया था की जब मैं होटेल के लिए निकलू, तब तुम भी स्कूल के लिए निकलना ।

मैं- "अरी शाजिया स्कूल जा रही हो? चलो मैं छोड़ देता हूँ" फूफी सामने ही खड़ी थी इसलिए मैं ये नौटंकी कर रहा था।

शाजिया- "ठीक है भैया चलिए..."

मैं उसे बाइक पे बैठा के निकल गया। आधे रास्ते में मैंने बाइक रोकी और उससे कहा- “अब कहां चलोगी?"

शाजिया- "चलिए किसी माल में चलते हैं..."

थोड़ी देर वहां घूमने के बाद मुझे आइडिया आया की इसे भी कोई बी ग्रेड मूवी दिखाकर सिड्यूस किया जाए। मैंने शाजिया से कहा- "पिक्चर देखने चलोगी?"

शाजिया खुश हो गई- "हाँ हाँ चलूंगी..."

मैं उसे पिक्चर दिखाने ले गया। वहां पर कोई बी ग्रेड मवी नहीं बल्कि सी ग्रेड मवी लगी थी। मैं पोस्टर देखकर खुश हो गया और मन में कहा- “सी ग्रेड में तो बी ग्रेड से ज्यादा मस्ती होती है...."

शाजिया को हाल में अंदर ले गया और मूवी दिखाने लगा। वो पिक्चर की शुरुवात से ही शर्माने लगी। मैंने अपना हाथ उसके कंधे पे रख दिया और उसे थोड़ा अपनी तरफ खींचा। वो हाट दृश्यों को बड़ा ध्यान से देख रही थी और बीच-बीच में मेरा हाथ पकड़ लेती थी। मैंने सोचा इसे थोड़ा और सिड्यूस होने दूं फिर कुछ करूँगा । ।

थोड़ी देर बाद मैंने पूछा- "पिक्चर कैसी लग रही है?"

शाजिया मेरी तरफ देखकर शर्माने लगी।

मैं- “बताओ कैसी लग रही है? शर्माओं मत.." हम दोनों बहुत चिपक के बैठे थे।

वो मेरे तरफ घूमी और कहने लगी- "अच्छी पिक्चर है." उसका चेहरा और मेरा चेहरा बहुत पास-पास था ।

मैं उसकी आँखों में देखने लगा और वो मेरी आँखों में शर्म के मारे उसका चेहरा लाल था। मैंने सोचा ये अच्छा वक़्त है। धीरे-धीरे में अपना चेहरा उसके चेहरे के पास ले गया और उसके होठों पे अपने होंठ रख दिए, उसे किस करने लगा।

मेरा एक हाथ उसकी पीठ पे था, क्योंकी मैं नहीं चाहता था की वो शर्माकर पीछे हट जाए और हमारी किस अधूरी रह जाए। और हुआ भी ऐसा ही वो पीछे हटने लगी, पर मैंने उसे पकड़ रखा था।

मैंने उससे कहा- “अगर तुम मुझसे प्यार करती हो तो किस करती रहो, जब तक अ ना कहूँ.” ये कहकर मैं उसे फिर से किस करने लगा।

हमारी किस लगभग 15 मिनट चली। जब मैंने उसे छोड़ा तो उसकी सांसे फूल रही थीं। मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल था। उसको बहुत शर्म आ रही थी। उसने अपना चेहरा अपने दोनों हाथों से छुपा लिया और अपना सिर मेरे कंधे पे रख दिया। कुछ देर बाद पिक्चर भी खत्म हो गई। हम दोनों हाल से निकले तो वो मुझसे चिपक चिपक के चल रही थी।

दोपहर हो चुकी थी अब हम दोनों एक ढाबे पे गये और वहां खाना खाया। अभी भी कुछ समय बाकी था घर जाने में तो मैंने कहा- “चलो तुम्हारे लिए कुछ कपड़े खरीद लेते हैं..."

उसके लिए एक सलवार सूट खरीदा तो फूफी के लिए भी कुछ खरीदना पड़ेगा, नहीं तो वो नाराज हो जाएंगी की इसके लिए लाए पर मेरे लिए कुछ नहीं लाए। मैं फूफी के लिए कुछ देखने लगा। तभी मेरी नजर एक नाइटी पे गई जो बहुत हाट लग रही थी।

मैं मन में- "बहुत हाट नाइटी है यार, इसे खरीद लेता हूँ रुखसाना के लिए। पर शाजिया साथ में है कैसे खरीदूं रुखसाना के लिए

शाजिया वो सलवार सूट ट्रायल रूम में जाकर ट्राई कर रही थी। मैंने एक प्लान बनाया तुरंत जाकर 3 नाइटी खरीद ली। एक शाजिया के लिए और दो रुखसाना के लिए। रुखसाना वाली एक नाइटी मैं तुरंत पार्किंग में खड़ी अपनी बाइक की डिक्की में छुपा आया और बाकी दो नाइटी लेकर उसी दुकान में वापस आ गया।

शाजिया ट्रायल रूम से निकल चुकी थी और मुझे ही ढूँढ़ रही थी।

मैं तुरंत उसके सामने गया और कहा- "तुम्हारे लिए ये नाइटी खरीद रहा था '

शाजिया नाइटी देखकर हैरान हो गई और कहने लगी- "ये मैं कैसे पहन सकती हूँ? घर में अम्मी मुझे नहीं पहनने देंगी..."

मैंने कहा- "तुम उसकी चिंता मत करो। मैं उन्हें मना लूँगा."

शाजिया पर कैसे मनाओगे आप?"

मैं- "क्योंकी मैंने उनके लिए भी एक खरीदी है..."

शाजिया हैरानी से मुझे देखने लगी और कहने लगी- "आप उनको ये कैसे दे सकते हो?"

मैंने कहा- "मैंने सब सोच लिया है। तुम चिंता मत करो..."

उन सब कपड़ों की शापिंग के बाद हम दोनों घर के लिए निकले, 3:30 बज चुके थे और ये टाइम शाजिया के घर पहुँचने का है। घर से थोड़ा पहले ही मैंने बाइक रोकी और कहा- "तुम घर जाओ। मैं 10 मिनट के बाद आऊँगा। अगर हम दोनों एक साथ घर जाएंगे तो फूफी को शक हो जाएगा। फूफी को पता नहीं चलना चाहिए की तुमने आज स्कूल से बंक मारा है। ये कपड़े मैं लेकर आऊँगा...”

शाजिया- "ठीक है भैया, मैं जा रही हूँ...

दस मिनट के बाद मैं घर गया और खुश होकर फूफी से कहा- “मैं आप लोगों के लिए कपड़े लाया हूँ ...

फूफी ने पूछा- "कपड़े क्यों? कोई खुशखबरी है क्या?"

मैं- "हाँ फूफी। मुझे प्रमोशन मिला है। मैं आज से मैनेजर का पी.ए. बन गया हूँ...

फूफी बहुत खुश हुई और मुझे गले लगा लिया। उनके बाद शाजिया आई और उसने भी मुझे गले लगा लिया।

शाजिया धीमे से- "ये प्रमोशन की बात अपने ऐसे ही बोली है ना? क्योंकी आज तो पूरा दिन आप मेरे साथ थे.."

मैंने भी धीमे से उसके कान में बोला- "नहीं ये सच बात है। मुझे प्रमोशन मिली है...'

शाजिया ने ये सुनकर मुझे और कस के बाहों में जकड़ लिया और बधाईयां बोला। अब मैंने उन लोगों को उनके कपड़े दिखाए। शाजिया तो पहले ही ये सब देख चुकी थी।

पर रुखसाना ने उन कपड़ों को देखकर मुझे स्माइल दी और कहा- "ये क्या लाए हो?"

मैंने कहा- "फूफी गर्मी का सीजन शुरू हो चुका है और यहां की औरतें गर्मी में ऐसे ही कपड़े पहनती है यहां पर...

फूफी- "हाँ, ये बात तो ठीक है की इन कपड़ों में गर्मी नहीं लगेगी....

"

मैंने कहा- “अच्छा तो अब इस नाइटी को ट्राई करके देखो...”

फूफी उसे ट्राई करने चली गई। शाजिया वहीं खड़ी थी उसे यकीन नहीं हो रहा था की उसकी अम्मी उन कपड़ों को ट्राई करने गई हैं। उसे लग रहा था की वो इन कपड़ों को पहनने से मना कर देंगी।
 
शाजिया- "वाह भैया, आपने तो कमाल कर दिया। अम्मी को उन कपड़ों को ट्राई करने के लिए तैयार कर लिया...'

मैंने मन में कहा- “अरी बेटा, तुम्हें क्या पता की मैंने तुम्हारी अम्मी को क्या-क्या करने के लिए तैयार कर लिया है?"

रुखसाना उस नाइटी को पहनकर आई, वो धीरे-धीरे चल के आ रही थी शायद शर्मा रही थी। उसको देखकर लग रहा था की कोई अप्सरा चल रही है। मेरे पास आकर खड़ी हो गई और बोली- "कैसी लग रही हूँ?"

शाजिया बोली - "बहुत अच्छी लग रही हो अम्मी...”

रुखसाना मेरी ही तरफ देख रही थी। शायद उसे मेरे मुँह से अपनी तारीफ सुननी थी।

मैं- “बहुत खूबसूरत लग रही हैं आप फूफी." और अगर शाजिया नहीं होती वहां पर तो मैं रुखसाना को किस कर देता।

रुखसाना बहुत खुश थी पर शर्मा भी बहुत रही थी।

अब शाजिया बोली - "मैं अपने ड्रेस को ट्राई करके आती हूँ...” और वो बाथरूम में चली गई।

बहुत अच्छा मौका मिला था रुखसाना के साथ। मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़ा और उसे खींच के अपनी गोद में बैठा लिया और किस करने लगा। एक हाथ उसकी नाइटी के नीचे से उसकी चूचियों के पास से ले गया और उन्हें दबाने लगा। दो मिनट किस करने बाद मैंने उसे बताया- "तुम्हारे लिए एक और नाइटी लाया हूँ, जो मेरी बाइक की डिक्की में रखी है। पर मैं तुम्हें वो अभी नहीं दूँगा। वो तुम्हें रात में मिलेगी शाजिया के सोने के बाद...

तभी शाजिया अपना सलवार सूट पहन के आने लगी, तो रुखसाना मेरी गोद से उठ गई ।

मैं- “शाजिया, सलवार सूट बहुत अच्छा लग रहा है तुमपे "

अब शाजिया अपनी नाइटी ट्राई करने चली गई।

कुछ देर बाद शाजिया अपनी नाइटी पहन के आई। क्या बताऊँ दोस्तों एकदम हाट माडेल लग रही थी। वो घूम- घूम के नाइटी दिखाने लगी। उसे देखकर मन तो कर रहा था की उसकी चूत को अभी के अभी फाड़ डालूं पर रुखसाना के होते हुए ऐसा नहीं हो सकता था।

मैंने कहा- “आज यही नाइटी पहन के रहो .

पूरी शाम उन दोनों के साथ बातें करता रहा .

रात हो चुकी थी शाजिया खाना खाकर सो गई थी। मैं रुखसाना के पास गया

वो अभी भी उठी हुई थी क्योंकी उसे भी अपने गिफ्ट का इंतजार था।

मैं बोला- “तुमने आज से पहले ऐसी नाइटी नहीं देखी होगी। तुम जब उसे पहनोगी तो सैक्स बाम्ब लगोगी..."

मुझे ड्रेस पहननी है जिसमें तुम मुझे ही सबसे ज्यादा प्यार करो, और किसी से नहीं..."

मैंने धीरे से दरवाजा खोला और गार्डेन में खड़ी अपनी बाइक से वो नाइटी निकाल के लाया।

रुखसाना उस नाइटी को देखकर शर्म के मारे पानी-पानी होने लगी, कहा- "ये कैसी नाइटी है जानू...'

मैं- "इसे ट्रॅन्स्परेंट नाइटी कहते हैं। ये मैं तुम्हारे लिए लाया हूँ...

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रुखसाना- "नहीं नहीं, इसे मैं कैसे पहन सकती हूँ? इसमें तो पूरा शरीर दिखेगा। इसे पहनना और ना पहनना बराबर है...."

मैं- “ये मैं खास तुम्हारे लिए ही लाया हूँ..."

रुखसाना- "पर इसे मैं नहीं पहन सकती...'
 
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