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Incest मर्द का बच्चा

बैठक में इस समय ज़्यादा लोग नही थे.

बाहर के जितने भी लोग थे सब जा चुके थे.

एक 40-45 साल का बलिष्ट शरीर वाला आदमी खड़ा किसी से बात कर रहा था.

लल्लू अंदर आ कर अपने होंठो पर उंगली रख लिया. और वहाँ जितने भी लोग थे सब को चुप रहने का इशारा कर दिया.

लल्लू पीछे से जा कर उस आदमी को कमर से कस कर अपने बाहों से पकड़ कर उठा लिया.

और चार बार उठा उठा कर ज़मीन पर झटके से खड़ा कर देता.

वो बंदा बौखला गया.

अब वो भी अपने आप को छुड़ाने का कोशिश करने लगा. वो बंदा अपने दोनो हाथो से लल्लू के बंधे हाथो को खोलने का जी टॉर कोशिश करने लगा.

आस पास खड़े सभी हस रहे थे. इंजोय कर रहे थे.

अंत में थक कर वो बंदा अपना हाथ खड़े कर लिया फिर लल्लू उसे छोड़ दिया.

लल्लू- बूढ़े हो गये अब तो आप मामा.

आवाज़ सुन कर वो झट से पलट गया और लल्लू को मुस्कुराता खड़ा देख कर उसे गले से लगा लिया.

वो बंदा- कैसा है मेरा सेर. कब आए तुम.

लल्लू- बहुत बढ़िया हूँ कल्लू मामा. देख लीजिए आप के सामने ही खड़ा हूँ.

फिर लल्लू वहाँ के सभी लोगो से मिला
 
लल्लू वहाँ सोफे पर बैठ गया.

वहाँ के सभी लोग आ कर लल्लू के आस पास ही बैठ गये.

कल्लू मामा- ललित बेटा तुम तो अब और भी मजबूत हो गये हो. आज तक मैने अपनी पूरी लाइफ में ऐसा बच्चा कोई दूसरा नही देखा है.

लल्लू- मामा ये सब आप सब के मेहनत और आशीर्वाद का ही तो नतीजा है.

क्या आप भूल गये 4 साल पहले तक आप मेरे पीछे तो हाथ धो कर पड़े रहते थे

4बजे सुबह से जो मेरा परेड करना चालू करते थे वो 8 बजे तक चलती रहती थी और फिर शाम में 4 बजे से शुरू हो जाते थे मेरे पीछे लग जाते थे वो शाम 7 बजे तक लगे रहते थे. आप तो तेल निकाल देते थे मेरा.

कल्लू मामा- वो अब दिख भी तो रहा है बेटा. देखो अभी तुम मुझे जो पीछे से पकड़ लिए थे तो में तो समझो मुझे पसीना आ गया था. क्या मजबूत पकड़ थी. दिल खुश कर दिया तुम ने. बेटा तुम गाँव में प्रेक्टिस करते थे ना.

लल्लू- हा बिल्कुल मामा सुबह 4 बजे ही उठ कर में प्रेक्टिस करने चला जाता हूँ.

मामा- शाबाश बेटा.

यू ही बाते करते हुए अपने पुराने समय को याद कर रहे थे.

फिर लल्लू उठ कर वहाँ से घर आ गया.

घर में आ कर देखा तो नीचे कोई नही था.

लल्लू बड़ी मामी के कमरों की ओर बढ़ गया.

लल्लू कमरे के गेट पर जा कर गेट नॉक किया.

बड़ी मामी- आ जाओ खुला है.

लल्लू गेट खोल कर अंदर चला गया.

बड़ी मामी बेड पर लेटी हुई थी.

लल्लू को देख कर बड़ी मामी उठ कर बैठ गई.

बड़ी मामी- मिल आए सब से.’’

लल्लू- हा मामी. मिल लिया. अब अपनी मा के पास सोने आया हूँ.

बड़ी मामी- आ जा मेरा बच्चा.

बड़ी मामी बाहें फैला कर लल्लू को अपने पास बुलाई.

लल्लू जा कर अपने मामी के गोद में सर रख कर लेट गया.

बड़ी मामी लल्लू के सर के बालो को सहलाती उसे प्यार से निहार रही थी.

बड़ी मामी- बाबू, क्या यहाँ अपनी इस मा के पास आने का मन नही करता था तुम्हारा.

लल्लू- बहुत मन करता था मा लेकिन वहाँ गाँव में सब अभी मुझे बच्चा ही समझते थे. इस लिए कोई अकेले आने नही दिए. और किसी को इधर आने का मौका ही नही लग रहा था इसी लिए नही आ पाया.

बड़ी मामी- कोई बात नही लेकिन अब आते रहेगा ना. अब तो कोई नही रोकेंगे तुम्हे.

लल्लू- अब में किसी के रोके रुकुंगा भी नही मा.

हर महीने में अब एक बार आप के पास ज़रूर आया करूँगा.

बड़ी मामी- शाबाश बेटा.

फिर बड़ी मामी भी वही पास में लेट गई.

लल्लू बाइक चला कर आया था तो थक गया था.

मामी के गोद में लेटने और फिर मामी के द्वारा बाल सहलाने से उसकी पलके नींद से बोझिल हो गई और वो मामी के साथ में नींद की वादियो में खो गया.

पता नही कितनी देर सोया रहा.

जब नींद खुली तो वो बेड पर अकेले लेटा हुआ था.

बाहर आ कर देखा तो शाम हो गया था.

बाहर आ कर ड्रॉयिंग रूम में सोफे पर बैठ गया.

लल्लू- मामी चाय..

वही महिला आ कर थोड़ी देर में चाय दे गई.

लल्लू- आप का नाम क्या है.

महिला- मंजू.

लल्लू- मंजू दी, दीदी तो कह सकता हूँ ना आप को.

मंजू- आप तो हमारे मालिक है. आप कुछ भी कह सकते है.

लल्लू- ये क्या बात हुआ. कुछ भी कह सकता हूँ. ऐसा थोड़ी ना होता है. खैर ये बताइए की मामी लोग कहाँ है.

मंजू- दोनो मालकिन गार्डन में में. बोले है आप को भी वही भेज दूं.

लल्लू उठ कर घर के पीछे के गार्डन में चला गया.
 
घर के पीछे अच्छे ख़ासे जगह में बागवानी हुआ था. जिस में छोटे बड़े कई तरह के फल फूल के पेड़ पौधे लगे थे. वहाँ बैठे के लिए कुछ सीमेंटके बने चबूतरे थे और वहाँ झूला भी लगा हुआ था.

वैसे अच्छी घास भी था वहाँ और उसकी देख भाल भी सही तरीके से होता था तो ज़्यादातर ये लोग नीचे घास पर ही बैठते थे.

वहाँ जा कर देखा तो दोनो मामी नीचे घास पर बैठे बाते कर रहे थे

लल्लू जा कर बड़ी मामी और छोटी मामी के बीच बैठ गया.

लल्लू- एक क़िस्सी उधार है मेरा आप पर. कब दोगे.

लल्लू धीरे से छोटी मामी के कान में बोला.

छोटी मामी- पहले अपनी बड़ी मा से ले हिम्मत है तो फिर में दूँगी.

लल्लू- लेकिन देने का वादा तो आप ने किया था. बड़ी मामी ने नही.

छोटी मामी- तो क्या हुआ. जैसे वो है तेरे लिए वैसे में भी हूँ. तो पहले इन से ले.

लल्लू बड़ी मामी की ओर देखने लगा.

बड़ी मामी- क्या किशुर फुशुर कर रहे हो तुम दोनो.

लल्लू- कुछ नही मामी. छोटी मामी पूछ रही थी की वो क़िस्सी इनका उधार रह गया है वो कब लूँगा में.

छोटी मामी- मैने ये कब कहा. वो तो तू ही पूछ रहा था.

मामी आँखे बड़ी कर के बोली.

लल्लू- मामी आप घबराईए मत ना. अब वादा कर दिया है आप ने तो कोई बात नही में ले लूँगा. वैसे भी मैं भी तो आप का बेटा ही हूँ. क्या हुआ मामा नही में ही सही.

बड़ी मामी और छोटी मामी दोनो आँखे बड़ी कर के लल्लू को देखने लगी.

बड़ी मामी- ललित बेटा में तो तुम्हे छोटा बच्चा समझ रही थी लेकिन तू तो अब बड़ा हो गया. अब तुम्हारी भी शादी करनी पड़ेगी.

लल्लू मामी को बात सुन कर शर्माते हुए कहा.

छोटी मामी- दीदी देखो अपना बेटा तो शरमाता भी है.

लल्लू- मामी आप लोग मेरा टाँग खिचना बंद करिए अब.

तभी वहाँ मंजू आ गई.

मालकिन छोटे मालिक को मिलने कल्लू भैया आए है.

फिर में वहाँ से उठ कर कल्लू मामा के पास आ गया.

कल्लू मामा- क्यू भांजे कहाँ थे.

लल्लू- बहुत दिन बाद आया हूँ ना मामा तो अपनी दोनो मा के पास उनका इतने दिन का बचा रखा प्यार लूट रहा था.

लल्लू बोल कर हँसने लगा तो कल्लू मामा भी हँसने लगे साथ में.

कल्लू मामा- भांजे जी हम चाहते है की तुम ज़रा मुझे ये दिखा दो की कही अपने गाँव जा कर यहाँ मेरा सिखाया हुआ भूल तो नही गये.

लल्लू- ऊहहूँ तो इस लिए मामा जी ढूँढ रहे थे अपने भांजे को.

कल्लू मामा- हा बेटा. नही तो में तुम्हे अपने मा से कैसे दूर कर सकता था.

लल्लू- ठीक है मामा जी. चलिए फिर चलते है अपने अड्डे पर.

दोनो बैठक से बाहर आ कर पोर्च में आ गये.
 
वहाँ तीन गाड़ियाँ खड़ी थी और लल्लू का बुलेट भी.

लल्लू बुलेट की ओर बढ़ गये.

बाइक स्टार्ट कर मामा को बैठा कर लल्लू चल पड़ा वहाँ जहा आज से 4-5 साल पहले लल्लू का गहरा नाता था.

यहाँ चारो और 2 किमी में बाग था. जिस में आधा तो गज्जू मामा का था और आधे में यहाँ के गाँव वालो का था.

यही बाग में एक मकान बना हुआ था उस मकान में बाहर एक अखाड़ा बना हुआ था.

लल्लू गाड़ी ले कर बाग आ गया.

आखाड़े के सामने बाइक लेजा कर लल्लू ने रोक दिया.

मामा- चल बच्चे आजा देखे क्या सब याद है.

लल्लू मकान में आ कर अपना कपड़ा खोल कर आलमरी में रख दिया. अब लल्लू के बदन पर सिर्फ़ एक चड्डी रह गया था.

चड्डी पहने आ कर आखारे के मिट्टी को अपने माथे से लगा कर लल्लू उस में प्रवेश कर गया.

पीछे से कल्लू मामा भी अपना कपड़ा खोल कर लंगोट पहन कर मिट्टी मेट से लगा कर खड़े हो गये लल्लू के सामने.

कल्लू मामा- भांजे ये क्या बना रखा है पूरे पीठ और एक हाथ में काला काला.

लल्लू- मामा ये कुंभ गया था अभी तो वही ये टॅटू बनवाया था.

मामा- अच्छा लग रहा है ये तो.

लल्लू हँसने लगा.

फिर दोनो तैयार हो गये.

दोनो ने हाथ मिलाया.

फिर एक दूसरे के आँखो में देखते हुए दोनो के दोनो हाथ एक दूसरे से उलझ गये.

लल्लू मामा को पीछे धकलने को ज़ोर लगा रहा था ओर सेम ऐसे ही मामा लल्लू पर ज़ोर आजमा रहे थे.

तभी लल्लू मामा को दो कदम पीछे धकेला फिर मामा भी जैसे ही लल्लू को धकलने को ज़ोर लगाए की लल्लू झटके से घूम कर मामा को अपने पीठ पर उठा पटक दिया नीचे.

ये सब इतना जल्दी में हुआ की मामा लेटे लेटे आँख फाड़ कर देखने लगे लल्लू को.

लल्लू खड़ा मुस्कुरा रहा था.

कल्लू मामा- ये क्या था.

लल्लू- दांव था मामा. में दिन में बोला था ना की अब आप बूढ़े हो गये हो.

मामा कुछ सोच कर मुस्कुराते हुए खड़े हो गये.

फिर दोनो ऐसे ही उलझ गये.

अबकी मामा जी ने यही दांव लल्लू पर आजमाया.

लल्लू के एक हाथ को दबा कर अपने पीठ पर ले कर झुक गये..

तभी लल्लू मामा को कमर से पकड़ वही लुढ़क कर चित्त कर दिया.

मामा- नही नही.. ये तू क्या कर रहा है.

लल्लू- क्या मामा जी.

मामा- कहाँ सीखा ये सब.

लल्लू हँसता हुआ..

मामा जी आप जो भी करने को सोच रहे होते है ना वो मुझे पहले पता होता है. इस लिए में पहले से तैयार रहता हूँ.

मामा- नही नही. तू झूठ बोल रहा है.

ऐसे थोड़े ना होता है. वैसे भी ये सब तो मैने तुम्हे सिखाया ही नही है.

लल्लू- मामा जी आप मेरा टेस्ट लेने आए है. अब में क्या दांव आजमा रहा हूँ ये देखने थोड़े आए है आप.

मामा- चल ठीक है.

मामा भांजे एक बार फिर आमने सामने थे.

दोनो एक दूसरे को देखते हुए झुके थे और दोनो के हाथ एक दूसरे के हाथ को बचाने की कोशिश में लगी हुई थी.

अचानक दोनो अपने अपने सर एक दूसरे के सर से चिपका कर धकलने की कोशिश करने लगे.

कल्लू मामा लल्लू की गर्दन के पीछे से पकड़ कर अपने आगे झुका कर गिराना चाहते थे और लल्लू उन से बच रहा था अपने गर्दन को बचा कर के.

फिर लल्लू भी अपने दोनो हाथ मामा के सर के पीछे ले जा कर अपनी और दबाया और मामा आगे झुकने लगे की मामा थोड़े खड़े हो गये.

तभी झट से लल्लू मामा के पैर के बीच से निकल उन्हे पकड़ कर दे पटकनिया.

मामा तो आज गदगद हो गये.

उनका प्रिय शिष्य आज उन्हे साबित कर दिया कि उनकी मेहनत बेकार नही गया.

फिर मामा उठ कर लल्लू को गले से लगा कर उसे पीठ थपथपा कर शाबाशी दी.

फिर दोनो वहाँ से निकल कर मकान में जा कर स्नान कर धूल मिट्टी से छूटकारा पाए और अपने अपने कपड़े पहन कर घर को चल दिए.
 
अब बाहर हल्का अंधेरा हो गया था घर पहुच कर लल्लू बाइक खड़ी कर अंदर आ गया.

अंदर सब ड्रॉयिंग रूम में ही बैठे हुए थे.

छोटे मामा भी आ गये थे बाहर से.

लल्लू जा कर मामा के पैर च्छू प्रणाम किया.

छोटे मामा- कहाँ गए थे बेटा. में तो कब से तुम्हे ढूँढ रहा हूँ.

लल्लू- क्या बताऊं मामा जी. कल्लू मामा को तो मुझ माशूम बच्चे से जैसे कोई बैर है. देखा नही की पकड़ कर ले गये परेड करने.

अभी वही से आ रहा हूँ. मैने भी आज सारा बदला ले लिया. उठा उठा कर पटका है.

सब लल्लू की बाते सुन कर हँसने लगे.

लल्लू भी वही बैठ गया सोफे पर.

छोटी मामी उठ कर की किचन में गई और वहाँ से जूस बना कर लल्लू को पकड़ा दी.

लल्लू मूह बिचकाता हुआ जूस पी लिया.

बड़े मामा - तेरा जूस से नफ़रत अभी तक ख़त्म नही हुआ.

सब हस दिए.

लल्लू- अच्छा अब मामा भी आ गये है. यहाँ अभी सभी है तो अब आप लोग बताइए की वहाँ शादी में जाने का क्या प्रोग्राम है.

सब एक दूसरे का मूह देखने लगे.

लल्लू- ऊओ हेलो.. किसी के चेहरे पर लिखा है क्या. सब एक दूसरे का चेहरा देख रहे है.

छोटे.मामा- तुम्हारे आने से पहले हम इसी बारे में बात कर रहे थे.

लल्लू- तो क्या नतीजा निकला.

सब चुप्प..

लल्लू- में आता हूँ फ्रेश हो कर तब तक आप लोग फ़ैसला कर लीजिए अगर नही किए है तो.

लल्लू उठ कर अपने कमरे में चला गया.

बड़े मामा - अब क्या करना है. अभी मना करेंगे तो ललित को भी बुरा लग सकता है.

बड़ी मामी- फिर….. आप शादी वाले दिन आएँगे और छोटे बाबू आएँगे ही नही. फिर अब क्या करे.

छोटे मामा- मेरे ख़याल से आप कल बाबू के साथ चले जाइए. भैया सनडे को पहुच जाएँगे. मुझे टाइम मिला तो में करुणा के साथ आ जाउन्गा. नही तो करुणा कल्लू भैया के साथ आ जाएँगी सनडे.

तब तक लल्लू भी कमरे से फ्रेश हो कर नीचे आ गया.

लल्लू-. तो बताइए क्या प्लान बना आप सब का.

फिर बड़े मामा अभी जो कुछ फ़ैसला हुआ था लल्लू को बता दिए.

लल्लू- आप दोनो सनडे को आएँगे वो भी पक्का नही. छोटी मामी को क्यू फसा रहे है आप छोटे मामा.

में कल सुबह दोनो मामी को ले जाउन्गा आप लोग सनडे को आएगा या फिर मंडे को.

छोटी मामी- सुबह तो जा ही नही पाएँगे.

लल्लू- क्यू मामी.

छोटी मामी- शॉपिंग भी तो करनी है.

लल्लू- शॉपिंग रास्ते में कर लीजिएगा या वहाँ के बाज़ार मैं कर लीजिएगा.

बड़े मामा - यहाँ से कल 10 बजे खाना खा कर निकल जाना और रास्ते में शॉपिंग कर लेना. अगर मौका ना मिले तो फिर वही कर लेना एक दिन जा के.

बड़ी मामी- ठीक है. फिर छोटी चल पॅकिंग कर ले अभी ही.

छोटी मामी- ठीक है दीदी.

फिर दोनो मामी वहाँ से अपने कमरे में पॅकिंग करने चली गई.

लल्लू और दोनो मामा वही बैठे बाते करते रहे.

बड़े मामा - बाबू तुम तो बुलेट से आए थे तो अब उसे यही छोड़ जाना. उसे में किसी के हाथ से भेजवा दूँगा. तुम कल अपना कार ही ले कर चले जाओ.

लल्लू- हा मामा बुलेट पर तो वैसे भी तीन लोग और फिर समान नही हो पाएगा.

बड़े मामा - फिर ठीक है में कल बोल दूँगा कोई उस कार को सुबह ही सॉफ कर देगा गर्रगो से निकल कर.

लल्लू- मामा आप लोग प्लीज़ ज़रूर आईएगा नही तो सब समझेंगे की में ही सही से नही बोला होऊँगा.

छोटे.मामा- ऐसा बिल्कुल नही सोचना बेटा तुम. हम हर हाल में सनडे को वहाँ होंगे.

लल्लू- ठीक है मामा.

फिर मंजू आ कर डिन्नर रेडी होने की बात बताई.

छोटे मामा भी बाहर से आए थे तो खाना नही खाए थे.

सब फ्रेश होने चले गये.
 
थोड़ी देर में सब डाइनिंग टेबल पर बैठ गये.

खाना खाने के बाद सब उठ कर थोड़ी देर वॉक के लिए बाहर आ गये.

वहाँ वॉक कर फिर सब सोने चले गये.

लल्लू अपने कमरे में आ गया.

कपड़ा खोल कर टवल लपेट लल्लू बेड पर लेट गया.

थोड़ी देर सोनम को और उसके प्यार को याद करता खुद से ही बाते करता कब नींद की गोद में पहुच गया पता ही नही चला.

सुबह तो लल्लू की नींद जल्दी ही खुल जाती है.

आज भी वो जल्दी ही उठ गया. बेड से उठ कर फ्रेश हो कर लल्लू बाहर आ गया.

बाहर आ कर वो बाग में जा कर ध्यान लगाने को बैठ गया.

आज थोड़ी देर बाद लल्लू को ध्यान लगाने में सफलता मिल गया.

तभी बाग में कही कुछ आवाज़ आया और लल्लू का ध्यान टूट गया.

आँख खोल कर देखा तो मंजू फूल तोड़ने के लिए बगीचे में आई थी.

सूर्या उदय हो गया था. लल्लू वहाँ से उठ कर घर आ गया और स्नान कर ड्रॉयिंग रूम में आ गया.

बड़े मामा वहाँ पेपर पढ़ रहे थे.

लल्लू भी जा कर वही बैठ गया.

छोटी मामी लल्लू के लिए एक ग्लास जूस बना कर ला दी.

लल्लू जूस पिता हुआ छोटी मामी से बाते कर रहा था.
 
खाना तैयार हो गया था. खाना खाने के बाद दोनो मामी और लल्लू तैयार होने चले गये.

थोड़ी देर में तैयार हो कर लल्लू बाहर आ गया.

दोनो मामा भी अंदर कमरे में चले गये.

थोड़ी देर में सब अपने बॅग ले कर नीचे आ गये.

लल्लू दोनो मामी का बॅग ले कर पोर्च में चला गया कार में रखने.

पोर्च में आ कर लल्लू अपने कार को देख कर खुश हो गया.

जब लल्लू यहाँ कार चलाना सीखा था कल्लू मामा से तो मामा ने बाद में लल्लू को ये कार खरीद दी थी.

लल्लू डिक्की खोल कर उस में सारा समान रख दिया.

दोनो मामी मामा के साथ वहाँ आ गये.

बड़े मामा आज सुबह ही कार को सॉफ करवा दिए थे.

अभी ये रेड कलर का ऑडी A3 चमक रहा था.

जब लल्लू यहाँ से गाँव गया था तो मामा ने इसे अंदर कवर से ढक कर रखवा दिया था.

तभी वहाँ के कल्लू मामा और गज्जू मामा के साथ काम करने वाले सारे स्टाफ आ गये.

लल्लू एक एक कर सभी से गले मिला.

कल्लू मामा को भी शादी में आने का निमंत्रण दे कर हाथ जोड़ कर प्रणाम किया लल्लू ने फिर दोनो मामा को एक बार फिर प्रणाम कर गाड़ी में बैठने लगा.

बड़े मामा आ कर लल्लू को गले से लगा लिए. उनकी आँखे नम हो गई थी.

लल्लू भी मायूष था.

बड़े मामा फिर अलग हो कर लल्लू को एक पॅकेट दिए.

लल्लू- ये क्या है.

बड़े मामा - ये घर जा कर देखना.

फिर छोटे मामा आ कर सीने से लगा कर उसे प्यार किए.

लल्लू झूठी मुस्कान बिखेरता हुआ कार में बैठ गया.

फिर हाथ हिला कर सब को बाय बाय करता हुआ कार को वहाँ से निकल कर रोड पर ले आया.

बड़ी मामी आगे बैठी थी.

लल्लू वहाँ से गाँव को चल दिया.

……………….

अपने गाँव के पास का बाज़ार आ गया था.

लल्लू दोनो मामी को रास्ते में सब दिखाता आ रहा था.

बड़ी मामी- बाबू हमें कुछ शॉपिंग करना है.

लल्लू कार ले कर उसी शोरुम में आ गया जहा पहली बार सोनम के साथ आया था.

कार पार्किंग में लगा कर लल्लू दोनो मामी के साथ अंदर शॉप में आ गया.

आज शॉप में वो अंकल नही थे. एक लड़की बैठी हुई थी.

लल्लू - नमस्ते मेम यहाँ अंकल होते थे. कही गये है क्या.

लड़की- वो मेरे पापा है. अभी वो गोदाम में नये माल को देख रहे है. जो रात में आया है.

जी कहिए में आप की क्या मदद कर सकती हूँ.

लल्लू- जी ये मेरी दोनो मामी है..हमें कुछ शॉपिंग करना है.

फिर वो लड़की एक महिला को बुला कर उन्हे दोनो मामी को अटेंड करने को कहा.

दोनो मामी उस के साथ चली गई.

थोड़ी देर में छोटी मामी आई.

बेटा किसी और शॉप में चलते है. यहाँ कुछ समझ नही आ रहा.

लल्लू काउंटर पर चला गया.

लल्लू- मेम क्या आप ज़रा मेरी बात करवा देंगे अंकल से.

लड़की- जी क्या हुआ. अभी तो वो बिज़ी है.

लल्लू- अगर पासिबल हो तो मुझे सिर्फ़ उन से बात करवा दे.

लड़की- क्या बात है आप मुझे बताए.

लल्लू- मेरे मामी को कुछ पसंद नही आया यहाँ.

लड़की छोटी मामी को ले कर खुद आगे आ गई और कपड़े दिखाने लगी.

दरसल दोनो मामी सिंपल रहना पसंद करती है.

इस लिए वो सिंपल कपड़े ही पहने हुए थी.

वो महिला उनके सिंपल कपड़ो में देख कर लो रंगेके कपड़े देखा रही थी.

अब ये शॉप ओनर की लड़की आ कर दोनो मामी को एक से एक कलर और क्वालिटीके कपड़े निकाल कर दिखाने लगी.

दोनो मामी खुश हो गई देख कर.

फिर दोनो मामी काफ़ी सारे कपड़े खरीदी.

पहले तो लल्लू की फॅमिलीके सभी मेंबर के लिए कपड़े ली फिर अपने लिए.

वहाँ से निकलते वक्त उनके पास पाँच बड़े बड़े पॅकेट्स हो गये.

बिल बनवा कर लल्लू पैसे देने गया लेकिन बड़ी मामी ने लल्लू को पैसे नही देने दी.

बड़ी मामी- ये क्या कर रहा है बाबू.

लल्लू- बिल पे कर रहा हूँ मामी.

बड़ी मामी- हमारे रहते तू क्यू पे कर रहा है.

लल्लू- (हस कर) मामी मेरे पास जो पैसे है वो भी तो आप के ही है.

छोटी मामी- तो उसे तुम अपने काम में लगाना. जहा हम लोग ना हो.

अभी हम है साथ में तो तुम रहने दो बाबू. दीदी दे रही है.

फिर छोटी मामी लल्लू को पकड़ कर सोफे पर बैठा दी.

तभी गोदाम से शॉप वाले अंकल भी आ गये.

उन्हे देख कर लल्लू खड़ा हो कर अंकल को हाथ जोड़ कर प्रणाम किया.

अंकल लल्लू को देख कर वहाँ आ गये.

अंकल- बेटा आप यहाँ आए हो. मुझे बुलवा लेते.

लल्लू- कोई बात नही अंकल. पता चला आप गोदाम में बिज़ी में तो आप को डिस्टर्ब करना सही नही समझा. वैसे भी मेम ने खुद ही सारे कपड़े निकाल कर दिए है.

अंकल- अच्छी बात है बेटा. और ये कोई मेम ने नही है लंडन से आई हुई. ये तुम्हारी बहन है सीतल.

फिर अंकल ने काउंटर पर आ कर उनका बिल देखा.

अंकल अपने बेटी सीतल से- बेटा में जब यहाँ ना रहूँ और ये लोग आए तो इन्हे स्पेशल ट्रीट देना. ये तुम्हारे राम चाचा का लाड़ला है.

फिर अंकल बिल में और स्पेशल डिसकाउंट कर के लल्लू को पैसे वापस कर दिए.

सीतल- सॉरी भाई मुझे पता नही था की आप मेरे भाई हो. और आप ने बताया भी नही की आप राम चाचाके लड़के हो.

लल्लू- कोई बात नही दी. वैसे भी में यहाँ शॉप में एक ग्राहक बन कर आया था. हा घर आया होता आप के तब में परिचय कराता.

सीतल- भाई शादी के बाद फ्री हो कर घर ज़रूर आना.

लल्लू- ठीक है दी. में ज़रूर आऊंगा. आप लोग शादी में तो आओगे ना.

सीतल- भाई मुझे तो शॉप पर रहना पड़ेगा. हा पापा ज़रूर जाएँगे.

वो लोग बात करते हुए बाहर तक आ गये.

लल्लू की रेड ऑडी देख कर- वाउ भाई रेड ऑडी.आसम..

लल्लू- थॅंक्स दी. ये मेरी दोनो मा ने दिया है.

लल्लू अपने मामी की ओर इशारा करता बोला.

फिर लल्लू उन लोगो से विदा ले कर अपने घर की ओर चल दिया दोनो मामी के साथ.

वहाँ से चलनेके पहले अंकल और सीतल ने बहुत ज़ोर दिया जूस के लिए लेकिन लल्लू प्यार से उनके आग्रह को ठुकरा दिया.

लल्लू घर आ कर दालान के सामने अपनी ऑडी ला कर खड़ी कर दी.

वहाँ अभी तीन गाड़ियाँ और भी खड़ी थी.
 
लल्लू अंदर आ कर आँगन में चला गया.

लल्लू- काकी…. काकी… ज़रा जल्दी आओ. दोनो मामी आई है. बाहर कार में है.

लल्लू की आवाज़ सुन कर जो जहा था वहाँ से निकल कर जल्दी से दालानके बाहर आ गये.

बाहर कार से दोनो मामी बाहर आ गई थी.

सब दोनो से मिलने लगी.

सभी बहने जा कर दोनो मामी को प्रणाम किए.

सभी घर की महिला दोनो से गले मिली फिर ले कर उन्हे आँगन आ गये.

लल्लू कार से सारा समान निकालने लगा.

साथ में राघव भी था.

दोनो मिल कर सारा बॅग्स पॅकेट्स ले कर आँगन आ गए.

लल्लू- काकी इनको किस रूम में रखू.

लल्लू रागिनी काकी के पास जा कर पूछा जो दोनो मामी से बात कर रही थी.

रागिनी काकी फर्स्ट फ्लोर का रूम में रखने को बोली तो लल्लू सारा समान ले जा कर उस रूम में रख दिया.

फिर लल्लू अपनी दोनो बुआ को ढूँढने लगा.

लल्लू- भैया बुआ कहा है. क्या वो नही आई.

राघव- आ गई है भाई. वो फर्स्ट फ्लोर पर ही हैं. अभी आराम कर रही है. वो लोग भी आज ही आई है.

लल्लू फिर अपने कमरे में जा कर फ्रेश हुआ.

फ्रेश हो कर बाहर आया.

लल्लू- अरे पहले इन्हे फ्रेश होने दो. कुछ खाने को दो. फिर बाते करते रहना.

लल्लू सब से बोला जो दोनो मामियों को घेरे बाते कर रहे थे.

फिर शालिनी काकी जा कर दोनो मामी को उनका कमरा दिखा दी.

दोनो मामी फ्रेश होने लगी.
 
ऋतु काकी लल्लू के पास आ कर.

ऋतु- बेटा चल तू भी कुछ खा ले. थक गया होगा.

लल्लू कुछ नही बोला. आँगन में खाट पर जा कर बैठ गया.

तभी वहाँ सोनम के साथ एक प्यारी मासूम लड़की आ कर खड़ी हो गई.

सोनम- इसे पहचानता है कौन है.

लल्लू उस लड़की को देख रहा था और वो जापानी गुड़िया लल्लू को.

फिर लल्लू अपने होंठो पर एक उंगली रख कर गाँव की महिलाओ की तरह सोचतने का नाटक करने लगा.

लल्लू- हा याद आया ये तो….. फिर चुप हो गया.

सोनम- क्या, ये तो…

लल्लू- ये तो मेरी प्यारी प्यारी सब से छोटी लड़की है और इनका नाम...नाममम, फिर से एक बार लल्लू सिर खुजाता हुआ सोचने का नाटक करने लगा.

वो लड़की जो अभी बच्ची ही थी, अपना मूह फुला ली.

लल्लू आगे बढ़ कर उसके सामने बैठ गया कान पकड़ कर बोला

लल्लू- ये मेरी प्यारी गुड़िया है "रूही".

लल्लू अपनी बाहें फैला दिया.

रूही जो मूह फुलाए हुई थी अपना नाम सुन कर खुश हो गई लेकिन उसने लल्लू की ओर देख कर जीभ निकाल उसे ठेंगा दिखा दी अंगूठा निकाल कर हिलाते हुए.

सोनम का तो हँस हँस कर बुरा हॉल था.

वो ठहाके लगा कर हँस रही थी.

लल्लू बुरा सा मूह बना कर खड़ा हो गया.

पीछे दोनो बुआ खड़ी थी साथ में काजल लल्लू का नाश्ता ले कर.

सब हँस रहे थे.

फिर रूही आ कर लल्लू के गले लग गई.

लल्लू गले लगाए उसके बालो को सहला रहा था.

लल्लू- तो मेरी गुड़िया मुझ से फिरकी ले रही है. मुझे मामू बना रही है.

लल्लू रूही को पकड़ कर गुदगुदी करने लगा.

रूही हँसते हुए लल्लू की बाहों में मचलने लगी.

फिर लल्लू रूही के माथे को चूम लिया.

लल्लू- कैसी है मेरी गुड़िया. और अपना राजू कहाँ है.

रूही- भाई वो तो अभी मा के साथ सो रहा था.

क्यू रे मेरी बेटी को तंग कर रहा है.

पीछे से किसी ने लल्लू के कानो को पकड़ कर उस से बोली.

लल्लू गर्दन घुमा कर देखा तो दोनो बुआ खड़ी मुस्कुरा रही थी.

लल्लू झुक कर उन्हे पैर च्छू कर प्रणाम किया.

बड़ी बुआ लल्लू को उठा कर अपने गले से लगा ली. फिर उसके ललाट को चूम कर अपने बहन से बोली.

बड़ी बुआ- छोटी, देख कितना बड़ा हो गया है. अब तो हम से भी लंबा हो गया है. जब देखी थी तब कितना छोटा था.

छोटी बुआ लल्लू को गले लगाती हुई.

छोटी बुआ- सही कहा दीदी. पहले जब देखा था तब हमारा बेटा नंगा घुमा करता था आँगन में. आज देखो इसे. लगता है अब राघव के साथ ही इसकी भी शादी करनी पड़ेगी.

लल्लू छोटी बुआ की बात सुन कर शरमा गया.
 
छोटी बुआ- दीदी ये तो लड़कियो की तरह शरमा रहा है. देखो कैसे गाल लाल हो गये है.

लल्लू- बुआ आप लोग मेरा मज़ाक बनाना बंद करो और ये बताओ की आज क्यू आई. आप लोग परसो आने वाले थे फिर कल का प्रोग्राम बना और अब आज आई.

बड़ी बुआ- ये तु अपनी छोटी बुआ से पूछ.

लल्लू छोटी बुआ को देखने लगा.

छोटी बुआ- वो बेटा में तेरे फूफा के साथ उनके रिश्तेदारी में चली गई थी. वहाँ भी शादी था.

इसी लिए आज आ पाई हूँ.

फिर सब वही आँगन में बैठ गई खाट पर.

लल्लू एक और खटिया उठा कर ले आया.

अब सब वही बैठे बात कर रहे थे.

काजल- खाना नही तो खाना मँगवाया क्यू तूने. कितने देर से ले कर खड़ी हूँ.

लल्लू- में तो समझा था किसी गाय भैस के लिए खाना ले कर आए हो आप. ऐसे तो वही खाते है. एक ही बर्तन में उन्हे सब मिला कर दे दिया जाता है.

काजल- सारे बर्तन अभी गंदे थे. इसी लिए एक में ही लगा दी है. लेकिन अलग अलग है. अभी खा ले. आगे से ऐसे नही दूँगी.

लल्लू- क्या बात है. सारे बर्तन गंदे थे. नलका में पानी नही आ रहा. या आ रहा है तो सब ने हाथो में मेहंदी लगा रखा है. तुम लोग तो नाक कटवा दोगे. क्या इसी घर में शादी है.

लल्लू उठ कर दालान पर चला गया.

दालान पर अभी सिर्फ़ दादू ही थे.

लल्लू वापस आँगन आ गया.

लल्लू- दी मझले काका का मोबाइल नंबर दो

सोनम- भाई गुस्सा नही करते. हो गया ना. में लाती हूँ ना तुम्हारे लिए खाना.

लल्लू- दी मुझे काका से दूसरी बात करनी है. और में नाराज़ नही हूँ. अपने मा बाप से क्या नाराज़ होना. आप काका का नंबर दो ना प्लीज़.

सोनम- क्या बात करनी है मुझे बताओ.

लल्लू- दी आप को मुझ पर भरोसा नही है. में सच में गुस्सा नही हूँ. ये मुझे खाना नही देती में तब भी गुस्सा नही होता.

चाय बुआ- बाबू तुम यहाँ आ कर बैठ. मेरा बेटा आज में तुम्हे अपने हाथ से खिलाउन्गी.

लल्लू सोनम को देखता हुआ खटिया पर बैठ गया.

छोटी बुआ मा के हाथ से थाली ले कर खाना खिलाने लगी लल्लू को.

लल्लू दो चार बार खाना खाया बुआ के हाथ से फिर अपने हाथ से खाना खा लिया.

तभी सुनील काका आँगन में आए.

सुनील- ऊहूँ तो आ गया मेरा बेटा.

लल्लू- हा काका. आप कहाँ से आ रहे है.

सुनील- में तो बेटा बाजार गया था. कुछ समान लाने रह गये थे.

लल्लू- हलवाई कब से रहेगा काका.

सुनील- हलवाई बेटा परसो सुबह आ जाएँगे.

लल्लू- क्यू परसो क्यू. अभी से क्यू नही.

काका- तुम्हारी काकी लोगो ने मना किया था. बोल रही थी की हम लोग इतने आदमी है सब मिल कर खाना बना लिया करेंगे.

लल्लू- नही काका. शादी का घर है. जितने लोग होते है किसी काम को करने में इतनी ही ज़्यादा परेशानी होती है काम पूरा होने में. आप हलवाई आज ही बुलाते. वैसे भी यहाँ शादी का भी विधि शुरू होने वाला होगा आज से ही. कुछ पत्तल वाली थाली प्लेट्स भी मंगवा दीजिए. इतने बर्तन कौन बार बार धोएगा.

और सब से लास्ट अपना सेल नंबर दे दीजिए.

फिर दोनो अपना नंबर एक्सचेंज किए.
 
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