S
StoryPublisher
Guest
"देख बाबू उम फ़िल्मो मे बहुत कुछ दिखाया जाता है जैसे लंड और चूत चूसना जो कि हक़ीकत मे कही कही ही होता है मैं बाकी सब
को तैयार हू लेकिन तेरा लंड मुँह मे नही लूँगी ठीक" वो बोली
"ओके" मैं बोला
मेरे इतना बोलते ही वो नीचे बिछि चटाई पर लेट गई और मुझे इशारे से पास बुलाया मैं उसके पास पहुचा और उसके बूब्स को घूर्ने लगा वो शायद मेरा मतलब समझ गई थी उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने एक दूध पर रख दिया और बोली "इससे मुझे कोई ऐतराज नही है जितना चाहे इनसे खेल इन्हे दबा"
पहली बार मेरे हाथ किसी लड़की के बूब्स पर थे उसके बूब्स को अपने हाथो मे महसूस करके पता नही मुझे क्या हुआ मैं उन्हे ज़ोर ज़ोर
से मसल्ने लगा जिससे वो दर्द के मारे कराहने लगी
"अरे पागल है क्या, जनवरो की तरह क्यों कर रहा है जो भी करना है आराम से कर प्यार से कर मैं तो धन्दे वाली हूँ इसलिए सहन कर गई वरना कोई शरीफ लड़की होती ना तो दोबारा हाथ भी नही लगाने देती" वो बोली
उसकी बात सुनकर अब मैं धीरे धीरे उसके बूब्स दबा रहा था और इधर मेरा लंड अंडर वेर मे अकड़ कर दर्द करने लगा था
"तू भी कुछ करना मेरे लंड का" मैं बोला और मैने अपनी चड्डी उतार दी
मेरा लंड नंगा होते ही उसने उसे मुट्ठी मे भर लिया और ज़ोर ज़ोर से दबाते हुए आगे पिछे करने लगी
और मैं मैं कभी उसके बूब्स को दबाता कभी चूस्ता कभी उसके निपल्स को निचोड़ता तो कभी दाँतों से काट-ता लगभग कोई 5 मिनिट बाद वो बोली "देख बाबू इतना टाइम नही है अपने पास ये सब करना हो तो कभी पूरी नाइट के लिए बुक कर लेना अब चल जल्दी से चोद चाद कर मुझे रवाना कर और भी ग्राहक खड़े होंगे मेरे टोले पर"
मुझे गुस्सा तो आया कि पहली चुदाई वो भी जल्दी मे लेकिन क्या करता उसकी बात भी सही थी और फिर यहाँ कोई आ भी सकता था इसलिए जल्दी कर लेना ही बेहतर था
अब उसने अपनी दोनो टाँगे फैला ली थी पहली बार मेरी नज़र उसकी चूत पर पड़ी वो थी तो बगैर बाल की लेकिन बहुत काली और उसके लिप्स भी बहुत फैले हुए थे ब्लूफिल्म की चूत से उसकी चूत की तुलना करने पर मुझे लगा कि अगर ब्लूफिल्म मे भी ऐसी ही चूत दिखाते तो शायद ब्लूफिल्म बिकना ही बंद हो जाती खैर मैं भी अब उसकी टाँगो के बीच आ गया उसने अपने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुँह पर लगाया और मुझे धक्का मारने को कहा मैने भी ज़ोर लंड पेल दिया जो उसकी सुखी चूत की रगड़ से छिल सा गया फिर
मैने धीरे धीरे करके सारा लंड उसकी चूत मे उतार दिया और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड किसी गरम भट्टी मे आगे पिछे हो रहा हो कुछ धक्को के बाद उसकी चूत भी गीली हो गई और अब मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगाने लगा कोई 15 - 2
0 धक्को के बाद मैं उसकी चूत मे ही झड गया और कुछ देर तक उस पर पड़े पड़े ही हान्फता रहा मेरी ज़िंदगी की पहली चुदाई पूरी हो
गई थी जो सुखी सुखी ही थी लेकिन पहली बार मैं किसी चूत मे झडा था तो मुझे मज़ा भी आज तक का सबसे ज़्यादा आया था
"चलो अब उठो" वो बोली
मैं उस पर से उठा और पास ही पड़े एक कपड़े से अपना लंड पोछा और अपने कपड़े पहनने लगा
"एक बात बोलू बाबू पहली बार मे ही तूने बहुत लंबा खिचा है अगर तुझे चैन से चोदने को मिले ना तो शायद तू तो चुदने वाली की चूत का भुर्ता बना देगा" वो कपड़े पहनते हुए बोली
"वैसे तूने तेरा नाम नही बताया" मैने पुछा
"तूने अभी तक पुछा ही कहाँ था वैसे मेरा नाम रेखा है" वो बोली
अब तक हम दोनो ही कपड़े पहन चुके थे और हम बाहर निकले बाहर अशोक और किशन हॉल मे बैठे हुए थे
"बड़ी देर लगा दी भाई" अशोक मुझे देखते हुए बोला
मैं बस मुस्कुरा कर रह गया
वो लड़की तब तक पिछे जाचूकी थी
"भाई मज़ा आया कि नही" किशन ने पुछा
"यार ज़िंदगी की पहली चुदाई की है मज़ा तो आना ही था लेकिन जैसा फ़िल्मो मे देख कर सोचा था उतना मज़ा नही आया" मैं बोला
"वैसा मज़ा तो सुकून से की हुई चुदाई मे ही आसक्ता है ऐसे चोरी की डरते डरते की हुई चुदाई मे तो सिर्फ़ खड़े लंड को ठंडा कर के आयिल ही चेंज कर सकते है बस" किशन बोला
"चलो फिर भी सब ठीक ही रहा" मैं बोला
फिर हम सब खाना खाने चले गये जहाँ आज फिर बियर का दौर चला और आज मैने 1.5 ग्लास बियर पी लेकिन तुरंत खाना खा लेने की वजह से नशा ज़्यादा नही हुआ
आज की चुदाई करने के बाद मैं समझ गया था कि ये सब बेकार है ऐसी चुदाई मे कुछ नही रखा हर किसी ऐरी गैरी लड़की को चोदने मे कोई मज़ा नही है और मैने तौबा कर ली कि आज के बाद ऐसा नही करूँगा लेकिन आज की चुदाई का मुझे बहुत फ़ायदा भी हुआ क्योंकि अब मैं चुदाई के खेल मे अनाड़ी नही था बहुत कुछ सीख भी गया था फिर कोई दोपहर के 3 बजे हम घर के लिए रवाना हो गये और
घर पहुचते ही मैं अपने रूम मे जाकर बेड पर लेट गया क्योंकि चुदाई की थकान और बियर की झुनझुनी मुझे नींद के आगोश मे
धकेले जा रही थी.......
को तैयार हू लेकिन तेरा लंड मुँह मे नही लूँगी ठीक" वो बोली
"ओके" मैं बोला
मेरे इतना बोलते ही वो नीचे बिछि चटाई पर लेट गई और मुझे इशारे से पास बुलाया मैं उसके पास पहुचा और उसके बूब्स को घूर्ने लगा वो शायद मेरा मतलब समझ गई थी उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने एक दूध पर रख दिया और बोली "इससे मुझे कोई ऐतराज नही है जितना चाहे इनसे खेल इन्हे दबा"
पहली बार मेरे हाथ किसी लड़की के बूब्स पर थे उसके बूब्स को अपने हाथो मे महसूस करके पता नही मुझे क्या हुआ मैं उन्हे ज़ोर ज़ोर
से मसल्ने लगा जिससे वो दर्द के मारे कराहने लगी
"अरे पागल है क्या, जनवरो की तरह क्यों कर रहा है जो भी करना है आराम से कर प्यार से कर मैं तो धन्दे वाली हूँ इसलिए सहन कर गई वरना कोई शरीफ लड़की होती ना तो दोबारा हाथ भी नही लगाने देती" वो बोली
उसकी बात सुनकर अब मैं धीरे धीरे उसके बूब्स दबा रहा था और इधर मेरा लंड अंडर वेर मे अकड़ कर दर्द करने लगा था
"तू भी कुछ करना मेरे लंड का" मैं बोला और मैने अपनी चड्डी उतार दी
मेरा लंड नंगा होते ही उसने उसे मुट्ठी मे भर लिया और ज़ोर ज़ोर से दबाते हुए आगे पिछे करने लगी
और मैं मैं कभी उसके बूब्स को दबाता कभी चूस्ता कभी उसके निपल्स को निचोड़ता तो कभी दाँतों से काट-ता लगभग कोई 5 मिनिट बाद वो बोली "देख बाबू इतना टाइम नही है अपने पास ये सब करना हो तो कभी पूरी नाइट के लिए बुक कर लेना अब चल जल्दी से चोद चाद कर मुझे रवाना कर और भी ग्राहक खड़े होंगे मेरे टोले पर"
मुझे गुस्सा तो आया कि पहली चुदाई वो भी जल्दी मे लेकिन क्या करता उसकी बात भी सही थी और फिर यहाँ कोई आ भी सकता था इसलिए जल्दी कर लेना ही बेहतर था
अब उसने अपनी दोनो टाँगे फैला ली थी पहली बार मेरी नज़र उसकी चूत पर पड़ी वो थी तो बगैर बाल की लेकिन बहुत काली और उसके लिप्स भी बहुत फैले हुए थे ब्लूफिल्म की चूत से उसकी चूत की तुलना करने पर मुझे लगा कि अगर ब्लूफिल्म मे भी ऐसी ही चूत दिखाते तो शायद ब्लूफिल्म बिकना ही बंद हो जाती खैर मैं भी अब उसकी टाँगो के बीच आ गया उसने अपने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुँह पर लगाया और मुझे धक्का मारने को कहा मैने भी ज़ोर लंड पेल दिया जो उसकी सुखी चूत की रगड़ से छिल सा गया फिर
मैने धीरे धीरे करके सारा लंड उसकी चूत मे उतार दिया और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड किसी गरम भट्टी मे आगे पिछे हो रहा हो कुछ धक्को के बाद उसकी चूत भी गीली हो गई और अब मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगाने लगा कोई 15 - 2
0 धक्को के बाद मैं उसकी चूत मे ही झड गया और कुछ देर तक उस पर पड़े पड़े ही हान्फता रहा मेरी ज़िंदगी की पहली चुदाई पूरी हो
गई थी जो सुखी सुखी ही थी लेकिन पहली बार मैं किसी चूत मे झडा था तो मुझे मज़ा भी आज तक का सबसे ज़्यादा आया था
"चलो अब उठो" वो बोली
मैं उस पर से उठा और पास ही पड़े एक कपड़े से अपना लंड पोछा और अपने कपड़े पहनने लगा
"एक बात बोलू बाबू पहली बार मे ही तूने बहुत लंबा खिचा है अगर तुझे चैन से चोदने को मिले ना तो शायद तू तो चुदने वाली की चूत का भुर्ता बना देगा" वो कपड़े पहनते हुए बोली
"वैसे तूने तेरा नाम नही बताया" मैने पुछा
"तूने अभी तक पुछा ही कहाँ था वैसे मेरा नाम रेखा है" वो बोली
अब तक हम दोनो ही कपड़े पहन चुके थे और हम बाहर निकले बाहर अशोक और किशन हॉल मे बैठे हुए थे
"बड़ी देर लगा दी भाई" अशोक मुझे देखते हुए बोला
मैं बस मुस्कुरा कर रह गया
वो लड़की तब तक पिछे जाचूकी थी
"भाई मज़ा आया कि नही" किशन ने पुछा
"यार ज़िंदगी की पहली चुदाई की है मज़ा तो आना ही था लेकिन जैसा फ़िल्मो मे देख कर सोचा था उतना मज़ा नही आया" मैं बोला
"वैसा मज़ा तो सुकून से की हुई चुदाई मे ही आसक्ता है ऐसे चोरी की डरते डरते की हुई चुदाई मे तो सिर्फ़ खड़े लंड को ठंडा कर के आयिल ही चेंज कर सकते है बस" किशन बोला
"चलो फिर भी सब ठीक ही रहा" मैं बोला
फिर हम सब खाना खाने चले गये जहाँ आज फिर बियर का दौर चला और आज मैने 1.5 ग्लास बियर पी लेकिन तुरंत खाना खा लेने की वजह से नशा ज़्यादा नही हुआ
आज की चुदाई करने के बाद मैं समझ गया था कि ये सब बेकार है ऐसी चुदाई मे कुछ नही रखा हर किसी ऐरी गैरी लड़की को चोदने मे कोई मज़ा नही है और मैने तौबा कर ली कि आज के बाद ऐसा नही करूँगा लेकिन आज की चुदाई का मुझे बहुत फ़ायदा भी हुआ क्योंकि अब मैं चुदाई के खेल मे अनाड़ी नही था बहुत कुछ सीख भी गया था फिर कोई दोपहर के 3 बजे हम घर के लिए रवाना हो गये और
घर पहुचते ही मैं अपने रूम मे जाकर बेड पर लेट गया क्योंकि चुदाई की थकान और बियर की झुनझुनी मुझे नींद के आगोश मे
धकेले जा रही थी.......