"सॉरी यार, लेकिन मैने तो बहुत आराम से किया था और पहली बार तो दर्द होना ही था, वैसे अब तुम आगे बढ़ो देखे और दर्द होता है या नही" मैं बोला
और मेरी बात सुनकर दीदी ने एक कदम और बढ़ाया मैं उसे संभाले हुए था उसे एक बार फिर हल्का सा दर्द हुआ लेकिन मैने उससे और चलने को कहा और कोई 3-4 कदम चलने के बाद उसका दर्द बहुत कम हो गया था
"देखो मैने कहा था ना सब ठीक हो जाएगा, चलो अब तुम फ्रेश हो जाओ मैं भी अपने रूम मे जाता हूँ और अगर फिर कोई परेशानी हो तो मुझे बुला लेना" मैं बोला
मेरी बात सुनकर दीदी के चेहरे पर मुस्कान आ गई और उसने आगे बढ़ कर मेरे गाल चूम लिए और बोली "कितना अच्छा है तू"
उसकी बात सुनकर मैने भी उसके सिर पर हाथ फेरा और अपने रूम मे आकर फ्रेश होने लगा आज का दिन सच मे बहुत अच्छा बिता था आज मुझे दो चूत के साथ एक कुवारि गान्ड जो मिली थी मारने के लिए खैर रात को कोई 8.30 तक सभी वापस आ गये थे और उसके बाद खाना वग़ैरह खाने मे 10.30 बज गये थे फिर पापा के हुक्म से सभी अपने अपने रूम मे जाने लगे सोने के लिए लेकिन इस दौरान किसी ने भी दीदी की चाल मे आई हल्की सी लंगड़ाहट को महसूस नही किया था
"दी... मैं तेरे रूम मे आऊँ क्या" सीढ़िया चढ़ते हुए मैने पूछा
"क्यों...." दीदी बोली
जवाब मे मैने उसकी गान्ड पर हाथ फेर दिया
"पागल हो गया है क्या, अभी और कुछ नही वैसे ही अभी मुझे दर्द हो रहा है बाद मे देखेंगे" दीदी ने सॉफ मना कर दिया और अपने रूम मे घुस कर गेट बंद कर लिया
मैं भी समझ गया था की अब वो कुछ नही करने वाली इसलिए मैने भी अब चुपचाप सोने मे ही भलाई समझी और अपने बेड पर लेट कर सोने की कोशिश करने लगा और फिर पता नही कब नींद ने मुझे आ घेरा.......
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अगली सुबह नाश्ते के बाद मुझे पापा को अपनी बाइक पे पास के ही एक गाओं ले जाना पड़ा क्योंकि उनकी गाड़ी खराब थी वापस आने मे दोपहर के 1 बज गये थे
हम घर पहुचे तो डॉली ने हमे खाना दिया पता चला की मम्मी और दीदी गाओं मे किसी के घर गयी हुई थी फिर खाना खा कर पापा भी बाहर चले गये और मैं अपने रूम मे आ गया कोई 15 मिनिट बाद डॉली मेरे रूम मे आई
"रात को बहुत जल्दी सो गया था तू" डॉली मेरे बेड पर बैठते हुए बोली
"जल्दी कहाँ मैं तो कोई 11 बजे सोया था, तू वहाँ कब आई थी" मैने पूछा
"मैं कोई 11.30 बजे आई थी लेकिन तू सोया पड़ा था जबकि मैं तो सोच रही थी की सुबह जो हुआ उसके बाद तू मेरा इंतज़ार कर रहा होगा और मज़े लेने के लिए" वो बोली
"अब मुझे क्या पता था की तू आने वाली थी कोई इशारा ही कर दिया होता तो मैं तेरा वेट करता या फिर थोड़ा जल्दी आजाती" मैं बोला वैसे उसे कौन समझता की मेरे पास चूत और गान्ड की कमी तो है नही जो उसका इंतज़ार करते बैठता
"चोरी के काम सभी के सो जाने के बाद करते है इसीलिए मैं सबके सोने का इंतज़ार कर रही थी और उसके पहले तुझे कोई इशारा करने का मुझे मौका ही नही मिला" वो बोली
"तो अब कर ले ना जो करना है अभी तो घर मे कोई नही है" मैं मुस्कुराते हुए बोला
जवाब मे उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ गई "तो निकाल अपना हथियार" वो मुस्कुराते हुए बोली
"मैं अकेला ही निकालु, तू कुछ नही निकालेगी" मैं बोला