शाम के वक़्त जब शाज़िया जब नींद से जागती है तब वो देखती है कि दोनो बेटे उसकी चुचियो पर सर रखे और हाथ उसकी चूत पर रखे सो रहे है....उसे उनदोनो पर बहुत ही प्यार आता है....कुछ देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद वो उनदोनो को उठाती है और कहती है उठो बच्चो शाम हो गयी है.....और फिर वो दोनों नींद से जागते ही अपनी माँ की चूत को मुट्ठी में भर का भींच देते है जिससे शाज़िया कराह उठती है और कहती है जगते ही शैतानी शुरू....और फिर वो उन दोनो के बीच से उठ कर बेहद ही कामुकता के साथ ये कहते हुए बाहर चली जाती है कि उठ कर मुह हाथ धो लो और जीशान तुम अनीस की मदद कर देना....मैं चाय बना कर लाती हु....और अपनी गांड मटकाती हुई बाथरूम चली जाती है वो आज पहली बार पूरी नंगी हालत में अपने घर मे घूम रही थी वो भी उसके दोनों बेटों के मोजूदगी में....उसे खुद में आश्चर्य होता है
तभी उसका ध्यान अपनी चिकनी चूत पर जाता है उस पर हाथ लगाते ही वो सिहर उठती है उसकी चूत काफी चिकनी हो गयी थी और इसका एहसास उसके लिए बिल्कुल नया था वो सोची की पता नही आगे ये क्या क्या करवाएंगे.....खैर वो मूतने के बाद वापिस नंगी हॉल में आती है जहाँ वो दोनों पहले से ही बैठे रहते है वो शाज़िया को कहते है....
जीशान - मा बहुत ही अच्छी लग रही हो और तो और अब गर्मी भी नही लग रही होगी ।
इनके ऐसे बात सुन कर वो शर्मा जाती है और कहती है चुप करो सब तुमदोनो का किया धरा है....और फिर किचन में चली जाती है.... चाय बना कर लाती है और दोनो बेटो को झुक कर देती है तो उसकी चुचिया लटक जाती है उनके सामने जिससे उनके लन्ड में फिर से तनाव आने लगता है....वो बोलती है अभी सोचना भी मत अभी खाने की तैयारी करनी है कपडे रखे है धोने है....चुय चाप चाय पी कर टिवी देखो मैं चली काम निपटाने.... ये सब रात को....ये बात बोल कर वो फिर से शर्मा जाती है....की वो ये क्या बोले जा रही है और कितनी बेबाक तरीके से नंगी हो कर उनके सामने चाय दे रही है....
तभी जीशान उसकी एक चुचि को चाय के गर्म कप में डूबा कर हटा लेता है जिससे शाज़िया की चुचियो में गरम चाय का एहसास होते ही वो चिल्ला उठती है.....और कहती है ये क्या हरकत है जीशान इनको जला देगा तो चूसेगा किसे...और वो वही सोफे पे उनके बीच मे बैठ जाती है और अनीस अपना हाथ शाज़िया की चुतड़ों पे रख देता है और शाज़िया के बैठते ही वो दब जाते है शाज़िया कुछ नही बोलती और अपनी एक चुची को हाथो में लिए उसे फुकने लगती है तभी जीशान उसकी चुची को अपने हाथो में ले कर मुह में ले लेता है और चुसने लगता है क्योंकि सुबह उन दोनो ने उसकी चुचियो को छील दिया था और अभी उसपे गर्म चाय उफ्फ क्या जुल्म किया था उसने...
.शाज़िया की दूसरी चुची को अनीस चुसने लगता है...5 मिनट की चुसाई के बाद जीशान सोचता है कि आगे बढ़ा जाए मगर तभी शाज़िया खुद ब खुद अपने दोनों हाथ दोनो के लन्ड पर रख देती है और सहलाने लगती है और उसकी साँसे बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी....उन दोनो के खुसी का ठिकाना नही रहता दरअसल शाज़िया जो है वो कब से अपने अंदर की कामाग्नि को दबाये हुए थी मगर आज वो सब बाहर आने को आतुर था अब वो भी अपने बदन की ज्वाला को बुझाना चाहती थी...लग ही नही रहा था कि वो दो जवान बेटो की माँ है....एक वासना की भूखी औरत की तरह व्यवहार कर रही थी
.शाज़िया की दूसरी चुची को अनीस चुसने लगता है...5 मिनट की चुसाई के बाद जीशान सोचता है कि आगे बढ़ा जाए मगर तभी शाज़िया खुद ब खुद अपने दोनों हाथ दोनो के लन्ड पर रख देती है और सहलाने लगती है और उसकी साँसे बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी....उन दोनो के खुसी का ठिकाना नही रहता दरअसल शाज़िया जो है वो कब से अपने अंदर की कामाग्नि को दबाये हुए थी मगर आज वो सब बाहर आने को आतुर था अब वो भी अपने बदन की ज्वाला को बुझाना चाहती थी...लग ही नही रहा था कि वो दो जवान बेटो की माँ है....एक वासना की भूखी औरत की तरह व्यवहार कर रही थी
तभी जीशान बिना वक़्त गवाए झटके से उठ कर सोफे के नीचे फर्श पर आ जाता है औऱ शाज़िया की टांगो को फैला देता है.....और अपना मुह उसकी सालो से अनछुई चूत पर लगा देता है और चाटने लगता है
शाज़िया तो जैसे अब मरी तब मरी वालो हालत हो गयी थीं उसने अनीस के लन्ड को इतनी जोर से रगड़ना चालू किया कि वो भी बेचारा आह आह माँ करने लगा पर शाज़िया तो चूट चटवाई में इतनी खो गयी थी कि उसे कुछ नही सूझ रहा था....वो आह शुरू मेरे बच्चे आह मार डाला रे आह क्या कर रहा है कहा मुह लगा दिया।।।।। ओह्ह माँ मैं मरी रे।।आह ओह्ह
जीशान शाज़िया की टांगे पूरी तरह से खोल कर चुत की गहराइयों तक चुसने लगा बीच बीच मे उसके दाने को काट भी ले रहा था ऊपर अनीस उसकी दोनो चुचियो पे कब्जा जमाए हुए था जिससे शाज़िया मजे ओर दर्द से दोहरी हो जा रही थी और 10 मिनट की लगातार चुत चटवाई और चुची चुसाई के बाद उसका बदन ऐंठने लगा और वो झरने लगी और उसका सारा रस जीशान पीने लगता है....1 मिनट तक झरने के बाद शाज़िया हांफती हुई सोफे पे निढाल सी पड़ जाती है.....
अब जीशान अपनी माँ को खड़े हो कर उसके होठो को चूम लेता है और ये देख कर अनीस भी उसके होठ चुम लेता है....औऱ तभी शाज़िया कहती है....शैतानों तुम्हारी वजह से आज मेंरे शरीर का एक बहुत ही बड़ा बोझ हल्का हो गया ऐसा लगा जैसे कितनी दिनो कि कसर आज निकली हो.....मेरे प्यारे शैतानो....आज तुमने मुझे जो मजा दिया वो मैं कभी नही भुल पाऊंगी....
तभी जीशान कहता है....
मा अभी तो ये शुरुवात है....आगे आगे देखो तुम्हे तुम्हारे ये शैतान कैसे कैसे मजा देते है....बस्स तुम अपना प्यार हमे देना और कभी भी गलग मत समझना....हम दोनों भाई तुम्हे हमेशा खुश रखेंगे....दुनिया की हर खुशि तुम्हारे कदमो में ला कर रखेंगे माँ.... और वो हस्ते हुए दोनो को अपने सिने से वापस लगा लेती है....
फिर वो कहती है तुम दोनो ने शाम की चाय भी नही पीने दी...बहुत ज्यादा बदमाश हो भाई....और हस देती है....
तभी अनीस कहता है अब से हम घर मे नंगे ही रहेंगे.... सब काम तुम नंगी ही रह कर करोगी माँ अब से ये कपड़े की कोई जरूरत नही....और हा मा आज का खाना बाहर से आएगा वो भी तुम्हारी पसन्द का...
शाज़िया - मेरी पसंद वही है जो तुमदोनो कि है तुमदोनो जो लाओगे मैं खाऊँगी.... और एक बात अगर घर में कोई आएगा तब भी ऐसे ही नंगे रहेंगे हम....
जीशान कहता है कौन आता ही है यह मा हमारे पास.... ओर अगर गलती से आ भी गया तो तब की तब देखेंगे... फिलहाल तो हम नंगे ही रहेंगे... और अनीस जीशान को कहता है खाना बाहर से लाने...तब वो कहता है भाई तुम भी साथ मे चलो....
तब शाज़िया कहती है इसको चोट लगी है ये कहा से जाएगा.... अनीस जीशान को आंखों ही आंखों में इशारे से कहता है कि वो चला जाए अभी चोट का भेद खोलना सही नही रहेगा....तीनो एक साथ खड़े होते है और अनीस और जीशान एक साथ उसकी चुतड़ों के दोनों पल्लो को अपने अपने एक हाथ मे दबा कर दूसरे हाथ से उसकी एक एक चुची को पकर कर कहते है
अनीस - जीशान - आज रात को हम तुम्हे एक बार फिर से औरत बनानेवाले है माँ और उसके गालो के साथ साथ उसके गर्दन पर भी चुम लेते है.....शाज़िया फिर से एक बार अंदर तक सिहर जाती है...
वो कहती है अब मैं तुमदोनो की ही हु.....जैसे रखो बस मुझे कभी छोड़ कर मत जाना और ये बोल कर वो जीशान के कान पकड़ लेती है और कहती है.... खास कर तू समझा...
जीशान - हा मा हा समझ गया...आह अब कान तो छोड़ो.....
वो उसके कान छोड़ देती है और किचन में जाने लगती है चाय के कप्स को उठा कर और दोनों भाई...अपने कमरे मे आ कर एक दूसरे से गले मिल कर खुसी जाहिर करते है....की आखिर इस जंग में उनकी जीत हुई....अब आने वाले रात का इंतजार था...
वो उसके कान छोड़ देती है और किचन में जाने लगती है चाय के कप्स को उठा कर और दोनों भाई...अपने कमरे मे आ कर एक दूसरे से गले मिल कर खुसी जाहिर करते है....की आखिर इस जंग में उनकी जीत हुई....अब आने वाले रात का इंतजार था...
रात का खाना जीशान बाहर से लाने चला जाता हैं और इधर शाज़िया किचन का काम निपटाने में लग जाती है.... अनीस हॉल में बैठा आने वाले चुदाई को ले कर सोच रहा था आखिर उसने और उसके भाई ने जीत हासिल कर ही ली थी.... अब कोई नही था उनके बीच न शर्म न हया न पर्दा कुछ नही....तभी जीशान खाना ले आता है शाज़िया भी उसकी आवाज सुन कर बर्तन ले कर टेबल पर आती है वो नंगी घर मे घूमती हुई बहुत ही मादक दिख रही थी और खाना खाने के बाद वो तीनो कमरे में आये जहा शाज़िया सोती थी....आज से सब मा बेटे वही सोने वाले थे....
जीशान - मा आज हम तुम्हे खूब प्यार देंगे और लेंगे भी.....आज से एक नई जिंदगी की शुरुवात हो रही है हमारी....
अनीस - हॉ भाई सही बोले जीवन के इस पड़ाव पर आ कर पता चला कि प्यार मिलना भी क्या होता है खास कर जब वो तुम्हारे जैसे औरत का हो माँ....
वो तीनो नंगे ही थे कमरे में खड़े थे....
शाज़िया - मेरे बच्चो आज से जैसा तुमलोग कहोगे वैसा मैं करूंगी आख़िर मेरे पास तुमदोनो के अलावा है ही कौन जिसको मैं अपना कह सकू......अनीस शाज़िया को एक चुची को पकड़ कर कहता है माँ अब इन्हें हमसे दूर मत करना कभी...हम सब अब एक है तीन शरीर एक जान. ....माँ हम तुम्हे बहुत प्यार करते है और करेंगे भी....
शाज़िया - अच्छा जब तुम दोनों की पत्नियां आ जाएंगी तब इस बुड्ढी औरत को भूल जाओगे....
अनीस - नही माँ ये ऐसा कभी हो ही नही सकता..... जीशान भो उसकी हा में हा मिलाता है.....और दोनो उसके गले लग जाते है.....और शाज़िया उन्न दोनो को कस कर दबा लेती है और तब जीशान कहता है चलो भाई अब सोने चलते है....और एक शरारत भरी मुस्कान हस देता है....जिसका मतलब शाज़िया बखूबी समझती है....
जीशान बेड पर चढ़ जाता है और शाज़िया भी फट से बेड पर चढ़ जाती है...अनीस अपनी माँ की हरकतो को देख कर मन्द मन्द मुस्कुरा रहा था...वो भी बेड पर चढ़ जाता है और फिर दोनों भाई शाज़िया को एकदम चिपका लेते है खुद से....शाज़िया भी उनका साथ देती है....
शाज़िया के नंगे बदन ने तो उनके लन्ड में आग लगा रखी थी ही अब उसके बदन का स्पर्श ने उसमे आग में घी का काम कर दिया था....दोनो के लन्ड अकड़ कर उसकी चुत और गांड से टकरा रहे थे....कमरे की बत्ती अभी भी जल रही थी तो एक दूसरे को अच्छे से देख सकते थे जो माहौल को और रोमानी बना रह था....
जीशान सबसे पहले शाज़िया की पीठ पर चुम्मबन की बरसात कर देता है और अनीस उसके गर्दन पर बस्स इतना ही काफी था शाज़िया की आग को भड़काने के लिए....औऱ शाज़िया उनदोनो के लन्ड पकड़ कर सहलाने लगती है और तभी जीशान उठ कर शाज़िया की एक चुची को मुह में भर लेता है और अनीस भी ऐसा ही करता है....और उनके हाथ शाज़िया कक चिकनी चुत पर आ जाते है और शाज़िया उनका स्वागत खुले टांगो से करती है....जीशान फटाक से अपनी दो उंगली उसकी चुत में घुसा देता है जिससे शाज़िया तड़प उठती है....
शाज़िया - आह.....बेटा आह....और वो अपनी कमर उठाने लगती है तभी अनीस जीशान को हटा कर शाज़िया की टांगो के बीच आ कर उसकी चुत में मुह लगा देता है....औऱ जीशान भला कैसे पीछे रह सकता था उसने तुरंत शाज़िया को ऐसे पलट जिससे शाज़िया की गांड उपर आ गयी और अनीस नीचे चला गया उसकी चुत को चाटते हुए और जीशान शाज़िया की गांड को फैला कर उसके छेद को चाटने लगता है जिससे शाज़िया तो लगभग पागल ही हो जाती है...
शाज़िया - आह बेटे...... ओह्हहहह....मा मरी मैं....उफ्फ बेटा अनीस अब शाज़िया की चूत को दांतों से ले कर चुभला रहा था जिससे शाज़िया झरने के कगार पे आ रही थी तभी अनीस उसकी चुत से मुह हटा लेता है और जीशान उसकी गांड से शाज़िया तड़प कर रह जाती है और उठ कर कहती है क्या हुआ अनीस हट क्यों गए...दरअसल ये दोनों शाज़िया को तड़पाना चाहता था जिससे उनकी पहली चुदाई में ओर मजा आने वाला था...
तभी दोनो भाई अपने लन्ड शाज़िया को दिखाते हुए कहते है माँ अगर तुम झर जाओगी तो इन् बेचारो का क्या होगा.....और इतना कहना था कि शाज़िया फुर्ती के साथ झुक के उनके लन्ड को मुह में भर लेती है एक साथ दो दो लन्ड उसकी मुह में अट नही रहे थे फिर भी वो पूरी कोसिस कर रहीं थी कि दोनों को खुश कर सके क्योकि वो उनदोनो को अब दुखी नही करना चाहती थी....
10 मिनट की चुसाई के बाद शाज़िया की मुह थक गया था जिसे उनदोनो ने देख लिया था मगर फिर भी शाज़िया उनके लन्ड चूसे जा रही थी और तभी जीशान अपनी माँ की गांड को सहलाते हुए उसे दबा देता है ओर अनीस उसे उठा देता है और शाज़िया लाल लाल चेहरा लिए उन दोनो की तरफ सवालिया नजरो से देखती है ....जीशान शाज़िया की टांगो को पकड़ कर बेड के किनारे कर देता है और शाज़िया की जगह खुद लेट जाता है.....
तभी अनीस - माँ तुम जीशान के ऊपर आ जाओ....
शाज़िया बिना देर किये उसके ऊपर आ जाती है शाज़िया की लटकती हुई चुचियो को देख कर जीशान का लन्ड एक झटका खाता है...और अनीस कहता है कि माँ अपनी कमर को उठाओ वो उठती है तभी अनीस उसकी चुत को फिर आए चाटने लगता है....
जिससे शाज़िया फिर से पागल होने लगती है और उत्तेजना भरे स्वर में कहती है......तुमदोनो के ये काम मुझे समझ नही आते...आह...उह ओह.....आई.... कुछ ही मिनट के बाद जब शाज़िया की चूत पूरी गीली हो जाती है तब अनीस जीशान के लन्ड को सीधा पकड़ कर शाज़िया की चूत के मुहाने पे लगाता है...
तभी जीशान एक करारे झटके में आधा से ज्यादा लन्ड माँ की चूत में पल देता है जिससे शाज़िया सहन नही कर पाती है और जोर से चीख पड़ती है....जिसको अनीस जल्दी से आगे आ कर उसके होठ चुसने लगता है...और शाज़िया अपने आप को संभाले हुए उकड़ू जीशान के दोनों तरफ पैर किये बैठी थी तभी जीशान जब देखता है कि माँ का दर्द कम है तो एक और झटका देता है और पूरा का पूरा लन्ड पेल देता है....
इस बार शाज़िया को चीखने का मौका नही मिलता क्योकि अनीस उसके होठो को चूस रहा था.....जीशान अपना लन्ड ऐस ही घुसाए रखता है और जब शाज़िया शांत होने लगती है तब्ब अनीस उसके होठ छोड़ देता है और तुरंत नीचे झुक कर शाज़िया की चूत जिसमे जीशान का लन्ड घुसा पड़ा था उसे साइड साइड स चुसने लगता है.....जिससे शाज़िया का दर्द कम होने लगता है और मजा आने लगता है.....जिसे जीशान देख कर अपनी कमर हिलाने लगता है औऱ अनीस शाज़िया को जीशान के ऊपर झुका देता है शाज़िया की चुचियो उसके लन्ड को और भड़का रही थी नतीजतन ये की अब जीशान पूरी ताकत से अपना लन्ड अंदर बाहर कर रहा था.....औऱ शाज़िया उसके सीने पर लेटी गांड हवा मे उचकाए आह आह ओह्ह ओह्ह करती हुई अपने बेटे के लन्ड का स्वाद अपनी चुत से चख रही थी....
तभी अनीस जीशान के टांगो के बीच आता है जहाँ शाज़िया की गांड उसे न्योता दे रही थी....वो उधर आ कर जीशान को रुकने बोलता है जीशान अनीस का इरादा समझ कर शाज़िया के होंठ चुसने लगता है ...और इधर अनीस अपने माँ की गांड को फैलाता है औऱ उसमे एक साथ दो उंगली डाल देता है...जिससे शाज़िया को बहूत दर्द होता है मगर होठ चुसवाने के कारण वो चीख नही पाती पर अपने हाथों से उसे छिपाती है कि नही वहा नही मगर अनीस को तो करना था और तभी अनीस पास ही रखी वेसिलीन की डिबिया उठता है और पूरी की पूरी डिबिया उसके गांड के छेद पे रगड़ देता है
शाज़िया बहुत बार हाथो से उसे रोकने की कोसिस की मगर सब बेकार और अच्छी तरह से छेद को मलने के बाद अनीस अपना लन्ड को उसके छेद पे रगड़ता है शाज़िया आने वाले लम्हे को सोच कर थर्रा उठती है....उसकी सारी उत्तेजना गायब हो गयी थी...तभी जीशान उसके होठ छोड़ देता है....शाज़िया अपनी साँसों को नियंत्रित करते हुए उससे कहती है....
शाज़िया - नही बेटा नही वहां नही वो जगह पे मैं इसे नही ले पाऊंगी..... तू आगे से कर ले बेटा मैं तुझे नही रोकूंगी.... पर बेटा वहा नही....मैं मर जाऊंगी....वो लगभग गिरगिराते हुए कहती हैं मगर अनीस नही मानता हैं
शाज़िया बहुत बार हाथो से उसे रोकने की कोसिस की मगर सब बेकार और अच्छी तरह से छेद को मलने के बाद अनीस अपना लन्ड को उसके छेद पे रगड़ता है शाज़िया आने वाले लम्हे को सोच कर थर्रा उठती है....उसकी सारी उत्तेजना गायब हो गयी थी...तभी जीशान उसके होठ छोड़ देता है....शाज़िया अपनी साँसों को नियंत्रित करते हुए उससे कहती है....
शाज़िया - नही बेटा नही वहां नही वो जगह पे मैं इसे नही ले पाऊंगी..... तू आगे से कर ले बेटा मैं तुझे नही रोकूंगी.... पर बेटा वहा नही....मैं मर जाऊंगी....वो लगभग गिरगिराते हुए कहती हैं मगर अनीस नही मानता हैं
अनीस - कुछ नही होगा माँ बस तुम हौसला रखना....तुम्हे पहले थोड़ा दर्द होगा मगर फिर बहुत मजा आएगा....
अब भला जिसकी गांड फटने वाली हो उसे क्या मजा सूझेगा
शाज़िया - नही बेटा वहां नही तू अनीस के साथ आगे ही कर ले....मगर वहां नही बेटा ....
अनीस - तुमने जो कहा मा एक साथ जीशान के लन्ड के साथ मैं भी डाल दु तुम्हारी चुत में वो भी करूँगा मगर इसके बाद ओर शाज़िया की गांड़ पर एक करारा थप्पड़ लगा देता है....शाज़िया कराह उठती है.....और अनीस अपना लन्ड उसके गांड़ की छेद पे रखता है और तभी जीशान अपनी माँ को होंठ दुबारा चुसने लगता है....और इधर अनीस शाज़िया की गांड में जैसे जैसे लन्ड का दबाव डाल रहा था वैसे वैसे उसकी गांड़ का छेद फैलता जा रहा था और साथ साथ शाज़िया की आंखे भी....वो हाथों से अनीस को रोकती है धकेलती है मगर नतीजा सिफर ही रहता हैं......
तभी अपने लन्ड के सुपारे को उसके छेद पर बैठाने के बॉद एक करारा जानदार झटका मारता है और पूरा का पूरा लन्ड एक ही बार मे अंदर जड़ तक पेल देता है.....
शाज़िया की आंखे फैल के बाहर आने को होती है......उसकी कुँवारी गांड से खून बहने लगता है.....वो छटपटाने लगती है.....जीशान से अपने होठो को जबरदस्ती खिंच कर छुड़ा कर दर्द से कराहने लगती हैं लगभग लगभग उसकी गांड़ फट गयीं थी....जिसका असहनीय दर्द उसे हो रहा था
अनीस के लन्ड को शाज़िया की गांड़ के छल्ले ने एकदम कस कर पकड़ा हुआ था तुरंत जीशान और अनीस उसकी एक एक चुची को मुह में भर लेते हैं और उसके दर्द को कम करने की कोशिस करते है
तब शाज़िया कहती है मार डाला तुमलोगों ने आह मेरी कुँवारी गांड़ ओह उफ्फ....ऎसे कोई करता है भला....अपनी माँ के साथ....
जीशान उसकी चुची छोड़ कर कहता है... कोई मा तुम जैसे प्यार भी तो नही कर सकती ना अपने बेटो के साथ.....
शाज़िया का दर्द के मारे बुरा हाल था वो सुबकते हुए कहती है चुप कर तू...
आह तब जीशान वापिस से उसकी चुची को मुँह में भर लेता हैं....
आलम ये था कि जीशान सबसे नीचे बीच मे शाज़िया और उसके ऊपर अनीस.....हर शाज़िया की चूत और गांड़ दोनो में ही लन्ड.....जिसके दर्द को दोनो भाई मिल कर कम करने की कोशिश में लगे थे......
आलम ये था कि जीशान सबसे नीचे बीच मे शाज़िया और उसके ऊपर अनीस.....हर शाज़िया की चूत और गांड़ दोनो में ही लन्ड.....जिसके दर्द को दोनो भाई मिल कर कम करने की कोशिश में लगे थे......
थोड़े ही समय मे शाज़िया का दर्द कम हो जाता है और तभी शाज़िया खुद कहती है अनीस बेटा अब हो गया न अब उसे बाहर निकाल ले जलन हो रही हैं वहाँ.....
वो नही सुनता और फिर दोनों भाई लग जाते है धक्के लगाने में और साथ ही साथ उसकी चुचिया का कचुम्बर बनाने में.........
और शाज़िया जिसका दर्द अब मजे में बदल चुका था वो थर्राते हुए लफ्जो से कहती है आह बेटो आह तुमदोनो ने तो मेरे बदन में तुमदोनो ने क्या कर दिया है आह बेटे मैं मर रही हु.....आह बेटे कुछ तो रहम कर अपनी माँ पे....
और अनीस कहता है तो मर जाओ ना मा हम तुम्हे फिर से जिंदा कर देंगे अपने इस इलाज से.....
जीशान - हा मा भैया बिल्कुल ठीक कह रहा है....और तो और हम दोनो इस इलाज के माहिर डॉक्टर है....2 इंजेक्शन्स में तुम एकदम घोड़ी की तरह काम करोगी मा औ तभी अनीस शाज़िया के बालों को पकड़ कर खिंचता है और जोर जोर से शाज़िया की गांड मे धक्के लगाने लगता है....
शाज़िया दर्द और मजे से दोहरी हो जाती है
उधर जीशान भी कोइ कसर नाहज छोड़ रहा था वो भी अपनी पूरी ताकत झोंक कर शाज़िया की चूत में धक्के लगा रहा था....इस बीच शाज़िया 4 बार झड़ चुकी थी और इस उम्र में 4 बार झड़ना बहुत बड़ी बात थी मगर उसके दोनों बेटे तो जैसे चोदने की मशीन बने हुए थे.....
तभी अनीस पचाक की आवाज के साथ शाज़िया की गांड़ से लन्ड खिंच लेता है और जीशान भी इधर उसकी चुत में से लन्ड निकाल कर शाज़िया को बेड पर गिरा देता है और फिर जीशान की जगह अनीस ले लेता है और अनीस की जगह जीशान और फिर वक बार शाज़िया का सैंडविच बन जाता है......
उसकी दर्द और मजे से भरी सिसकियों से कमरा अगले 1 घण्टे तक गूंजता रहता है.....और अंत मे दोनो अपना अपना वीर्य उसकी गांड़ और चुत में छोड़ देते है इनके साथ साथ शाज़िया भी 6 थ्वी बार झड़ जाती है और फिर तीनो उसी हालत में हान्फते हुए एक दसरे के ऊपर लेटे हुए रहते है.....
शाज़िया की हालत देखने वाली थी दोनो बेटो के मुरझाए हुए लन्ड अभी भी उसकी चुत और गांड़ में फसे हुए थे....और दोनो चुचिया अनीस ले सीने के दोनों तरफ लटक रही थी और शाज़िया की टांगे एकदम चौड़ी फैली हुई.....बाल बिखड़े हुए....अपनी साँसों को नियंत्रित करने में जुटी हुई थी उसके बदन में इतनी भी जान नही बची थी कि वो उनपे से उतर कर बेड पर लेट जाएं....आज कई सालों बाद उसकी चुदाई हुई थी औऱ वो भी उसके दोनों छेदों में एक साथ..... उसके अपने ही बेटो से.....
बिस्तर पर शाज़िया की गांड़ से निकला हुआ खून इस बात की गवाही दे रहा था कि उसकी गांड़ बहुत बुरे तरीके से फाड़ी गयी थी.....उस दो घण्टे की कामलीला के बाद वो तीनो मा बेटे वैसे ही सोये रह गए जो सुबह ही उठे सीधे.....
सुबह जब शाज़िया जागी तो देखी की वो अपने दोनों बेटों के बीच लेटी हुई है और उसके दोनों बेटे उसके अगल बगल.... अनीस का लन्ड सिकुड़ कर शाज़िया की गांड़ से लग रहा था और जीशान अपनी माँ की एक चुची को मुह में भरे अपना लन्ड उसकी चुत के मुहाने पे फसाये हुए सो रहा था....तभी शाज़िया उठने की कोशिस करती है और एक चीख़ के साथ बिस्तर पर वापिस गिर जाती है क्योकि उसकी गांड़ का छेद दर्द कर रहा था और उसकी इस चीख से दोनो शैतान भी जाग गए और बोले.....गुड़ मॉर्निंग मा....और एक एक चुम्बन उसके होठो पर रसीद कर दिए.....
अनीस - मा यहां दुख रहा है क्या....वो उसकी गांड़ पे हाथ रख कर पूछता है.....
शाज़िया कहती है चुप करो कितनो बेदर्दी से मेरी कुँवारी गान्ड में अपना ये मूसल जैसा हथियार डाल दिया जरा भी दया नही दिखाई तुमलोगो ने मेरे पे.....अब बताओ मैं काम कैसे करूंगी उठ भी नही पा रही चलना तो दूर की बात है....
अनीस - माफ करना माँ मुझे मगर क्या करता तुम्हारी ये कयामती गांड़ देख देख कर मैं पागल सा हो गया था..... और जब मुझे बर्दास्त नहीं हुआ तो मैंने ये कर डाला...सॉरी माँ.... और वो उसके गले लग जाता है....
शाज़िया उसे अपने खुले हुए सीने से चिपका लेती है....और तभी
जीशान - माँ मानता हूं तुम्हे दर्द हुआ है मगर बाद में तुम अपनी ये कमर उछाल उछाल कर भाई का लन्ड ले रही थी और मेरा भी....दोनो के हथियारों से खूब मजा मिला तुम्हे मा
शाज़िया इस बात से शर्मा गयी थी क्योंकि बात तो सच थी मजा तो उसे बहुत आया था ये और बात थी कि गांड़ की पहली चुदाई में दर्द हुआ मगर अब नही होगा....
जीशान - मजे के टाइम पर मजे कर लिए और अभी दर्द दर्द चिल्ला रही हो....लाओ अभी ठीक किये देते है....और दोनो भाई शाज़िया को खुद से चिपका लेते है.....और उसकी गर्दन पर अपने होठ रगड़ने लगते है....
तभी शाज़िया उनदोनो को दूर करते हुए कहती है अभी नही अभी मुझे माफ़ करो भाई....मेरे दोनो जगह आगे पिछे दर्द हो रहा है....
तब वो दोनो भाई कहते है माँ लाओ ना अभी तुम्हारा दर्द दूर कर देते है....औऱ उसे लिटा देते है
मगर शाज़िया तुरत उठ जाती है और कहती है अभी नही अब मुझे काम करना है और तुम दोनों अपने अपने काम मे लगो.....जाओ और नहा धो लो.....तब तक मैं बाकी के काम निपटा लेती हूं.....और वो उठने लगती है पर गांड़ के दर्द से वो चीख पड़ती है.....और धम से बिस्तर पर गिर जाती है.....
तब जीशान शाज़िया को पकड़ कर उसे उल्टी लिटा देता है औऱ कहता है माँ एकदम चुपचाप लेटी रहो.... काम बाद में करना....और अनीस पास में अलमिरह से.....एक क्रीम ला कर जीशान को देता है और अनीस शाज़िया की गांड़ को फैलाता है जीशान उसमे क्रीम मलता है जिससे शाज़िया आह कर उठती है और जीशान कहता है बस माँ थोड़ी देर ऐसे ही लेटी रहो आराम मिलेगा और हा भइया तुम गांड़ को ऐसे ही फैलाए रखना थोड़ा जल्दी आराम मिलेगा....
जीशान अच्छे से शाज़िया कि गांड़ को मलता है कुछ ही देर में शाज़िया की चूत बहने लगती है जिसे जीशान उसकी गाड़ को मलते हुए उसकी चुत में भी तीन तीन उंगली घुसाने लगता है जिसे शाज़िया अपनी कमर को हवा में उठा कर उसे और अच्छे से अंदर तक महसूस करती है.....और जीशान अपनी तीनो उंगलियो को फैला फैला कर अंदर बाहर कर रहा था जिससे शाज़िया को दर्द और मजा दोनो आ रहा था....15 मिनट की उंगली चुदाई और गांड़ घिसाई के बाद शाज़िया का बदन अकड़ने लगता है और तभी वो हांफती हुई सीधी हो कर दोनो को अपने सीने से सटा कर कहती है तुमदोनो ने आखिर सुबह सुबह भी अपनी मनमानी कर ही ली.....बहुत शरारती हो दोनो और आह करते हुए उठती है कहती है चलो अब तो हो गया न....अब कुछ काम भी कर ले....
दोनो बेटे मा को सहारा दे कर उठाते है और शाज़िया कहती है अब रहने दो तुम दोनों जाओ और फ्रेश हो जाओ....शाज़िया बाहर हॉल में आती है और वहां पड़े अपनी पेटिकोट उठती है और उसे पहन लेती है और ब्लाउज पहनने के बाद कामो में लग जाती है.....
…………………………..
सुबह का काम निपटने के बाद वो हॉल में खाने के टेबल पर आ कर खाना रखते हुए उन दोनों से कहती है की अभी तक तुमदोनो ने कपडे क्यू नहीं पहने है
वो दोनो एक साथ कहते है की हमे अभी कपड़ो की जरुरत नहीं रही माँ तभी उनकी नजर शाज़िया पे जाती है जिसने ब्लाउज और पेटीकोट पहन रखा था तो वो बोले ली माँ ये क्या है तुमने कपडे क्यू पहन लिए
शाज़िया - तो क्या मैं दिनभर घर में नंगी घुमु और वैसे भी मैंने पुरे कपरे पहने कहा है केवल ब्लाउज और पेटीकोट ही तो पहने है
जीशान - उठ कर शाज़िया के पास आता है और उसके ब्लाउज के पांच में से तीन बटन खोल देता है और उसकी छातिया बाहर निकलने को आतुर हो रही थी
जीशान - माँ इन्हें हमेसा ऐसे ही रखा करो ताकि जब हमारा मन करो ताकि जब हमारा मन हो हम इन्हे चूस सके....और फिर वो नीचे घुटनों के बल बैठ जाता है और शाज़िया के पेटीकोट के नाड़े को खोल कर उसे घुमाता है और पेटीकोट के कटे हुए भाग को चूत के सामने ला कर उसे इतना नीचे कर के बांधता है जिससे शाज़िया की चूत की दरार और पीछे घुमने पर गांड की दरार दिख रही थी
शाज़िया - ऐसे पहनने का क्या मतलब हुआ फिर मैं नंगी ना हो कर भी नंगी ही हु और तुमदोनो का तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा मुझे की आखिर करना क्या चाहते हो....
अनीस - माँ मुझे मिली है एक महीने की छुट्टी और इस एक महीने को मैं पूरी तरह खुल कर जिऊँगा और वो भी तुम्हारे और जीशान के साथ
शाज़िया - हां वो तो दिख ही रहा है की कितना खुल कर जी रहे हो कल से ......और हस देती है
जीशान - माँ प्लीज तुमने कहा नंगी नहीं रहूंगी ठीक है मगर माँ ऐसे तो रह ही सकती हो और प्लीज इसके लिए मना मत ही करना वरना मैं तुम्हे फिर नंगी ही रखूँगा और वो भी जबरदस्ती ......
तभी शाज़िया उसके कान पकड़ कर खींचते हुए कहती है अच्छा बेटा माँ को आँखे दिखा रहा है जरा सी ढील का इतना असर हुआ है तुझपे
जीशान - आह माँ आह सॉरी गलती हो गयी माँ मेरे कहने का मतलब वो नहीं था माँ आह माँ प्लीज माँ मै तो कह रहा था की मै तुम्हे बस इतना कह रहा था की बात मुझे मनवानी आती है अगर ऐसे नहीं मानी तो तुम्हारी मालिश कर के मनवा लेता....और हस देता है
शाज़िया उके कान छोड़ देती है और शर्मा जाती है की कैसे सुबह उसकी मालिश के बहाने उसका पानी निकाला था इन दोनो ने....
उधर अनीस कहता है - बात तो जीशान ने ठीक ही कही है माँ....हेहेहीहेहेह
शाज़िया - जाओ मैं तुम दोनों से बात नहीं करती और घूम कर जाने लगती है और तभी जीशान शाज़िया को पीछे से पकड़ कर उसकी गर्दन पे वार कर देता है और अनीस उसकी पेटीकोट में हाथ डाल कर उसकी चूत को रगड़ने लगता ही जिससे शाज़िया फिर से पिघलने लगती है और कुछ ही पलो के बाद शाज़िया नंगी हो कर अपने दोनों बेटो के बीच खड़ी थी और दोनों के दोनों लौड़े उसकी खिदमत में लगे हुए थे शाज़िया के मन में ये आभास होते ही की फिर से उसके दोनों छेदों की दुर्दसा होने वाली है वो एक पल को सिहर जाती है मगर अगले ही पल जीशान नीचे बैठ कर उसकी जन्घो को थोड़ा सा फैला कर उसकी चिकनी चूत पे अपना मुह लगा देता है और शाज़िया न चाहते हुए भी अपनी दोनों टांगो को जितना हो सके फैला देती है और तभी अनीस पीछे से आ कर उसकी गांड को फैला कर वह अपना मुह लगा देता है शाज़िया इस दोतरफा हमले से पागल हो उठती है और अपने दोनों हाथो से दोनों के सर को पकड़ कर अपने दोनों छेदों पे दबाती है दस मिनट की चुसाई के बाद वो दोनों शाज़िया को वही फर्श पे लिटा देते है......
अनीस शाज़िया की चूत में अपना लंड एक ही बार में पेल देता है और शाज़िया चीख उठती है मगर उन्दोनो को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है चूत में लंड डालने के बाद अनीस शाज़िया को ले कर पलट जाता है......
जिससे शाज़िया की गांड जीशान के सामने आ जाती है और जीशान अपनी शाज़िया की गांड को अछे से फैला कर उसके गिले छेद में अपना लंड उसके मुहाने से छुआता है
शाज़िया उसे हाथ पीछे कर के रोकने का प्रयास करती है मगर जीशान उसके हाथो को पकड़ कर उसकी पीठ से लगा देता है और अपना तैयार लंड शाज़िया की गांड में एक झटके के साथ आधा पेल देता है जिसे शाज़िया की रात की घायल गांड इस से लाल हो जाती है और खून की एक पतली धारा उसकी गांड से बह उठती है और शाज़िया की आँखों से आसुओ की धारा...उस झटके के बाद जीशान बिना रुके एक और करारा झटका मारता है और पूरा का पूरा लंड पेल देता है
शाज़िया अपना सर इधर उधर घुमाने लगती है क्योकि कल रात के जख्म अभी भी ताजे थे और ये प्रहार शाज़िया की घायल गांड के लिए कहर बन के आया था मगर दोनों बेटो पे वासना पूर्णतः सवार हो चुकी थी और फिर हॉल में ही शुरू हुआ शाज़िया के दोनों छेदों का एक बार फिर से मर्दन औए साथ ही साथ दोनों उसकी एक एक चूची को अपने अपने मुह में लिए हुए थे अनीस तो सीधे चूस सकता था मगर जीशान एक बेदर्दी की तरह चूची को पीछे की और खीच कर मुह में भरे हुए थे जिससे शाज़िया का दर्द दोहरा हुआ जा रहा था मगर दोनों के झटको ने शाज़िया के बदन में एक आनद की लहर दौडानी शुरू कर दी थी और कुछ ही समय के बाद शाज़िया अपनी कमर उचका उचका कर दोनों के लंडो का सवागत अपनी चूत और गांड में करने लगी.........
एक घंटे की ताबरतोड़ चुदाई के बाद दोनों ने शाज़िया के छेदों में अपना अपना वीर्य उसके अन्दर छोड़ दिया उसके बाद तीनो हाफ्ते हुए वही पड़े रहे
कुछ देर के बाद शाज़िया उठ कर बैठी उसकी हालत देखने लायक हो हो गई थी नंगी औरत अपने हॉल में दो दो लंडो से चुदने के बाद अपनी दुखती गांड और चूची के दर्द को कम करते हुए और फिर दोनों को बोली की तुमदोनो ने ना मुझे क्या से क्या बना दिया है और वो जीशान को अपनी नंगी जांघ पे लिटाते हुए कहती है की कितना बेदर्द है रे तू कैसे मेरी इसको.....(अपनी चूची की और इशारा करते हुए) खिचे ही जा रहा था जरा भी प्यार नहीं आया तुझे जरा भी दया नहीं दिखलाई और तो और मेरी घायल गान्ड को कितनी बेदर्दी से अपने इस मुसल से कूट दिया उफ़ मेरी जान निकाल दी तुमदोनो ने......चलो अब उठो खाना खाते है और शाज़िया उन्दोनो के साथ साथ खाने के टेबल पर आती है और फिर पीछे घूम कर वही फर्श पे गिरे हुए अपने कपडे उठाती है और पहनते हुए उन् दोनों की तरफ देखती है और वो जीशान को कहती है इधर आ
जीशान उसका मतलब समझ कर उसके पास आता है और उसके ब्लाउज के तीन बटन खुले छोड़ कर केवल दो बटन्स लगा देता है और उसके पेटीकोट को भी उसी तरह पहनाता है और इधर अनीस अपने भाई और माँ के इस हरकत को अपने मोबाइल में कैद करने लगता है शाज़िया उसे देख कर मुस्कुरा कर पूछती है....ये क्या कर रहा है...
अनीस - कुछ प्यारे और अनमोल लम्हों को कैद कर रहा हु माँ .....और एक फ्लाइंग किस शाज़िया की तरफ उछाल देता है.....
दोनों खाना खाते है और उसके बाद खाने के टेबल पर ही अनीस कहता है चलो आज कही घूम कर आते है
जीशान - हां भईया चलो आज घूम कर आते है
अनीस - पर कहा
जीशान - मूवी चलते है अभी काफी मूवीज लगी हुयी है....
अनीस - कौन कौन सी
जीशान -लखनऊ सेंट्रल ....सिमरन.... बी.अ. पास 2.....
अनीस - कोई हॉलीवुड की मूवी है तो बता...
जीशान - एनाबेले 2 लगी है मगर....
शाज़िया - मगर क्या
अनीस - हा बोल मगर क्या
जीशान - भूतीया मूवी है...
अनीस - तुरत 3 टिकट्स बुक कर आज रात की आज नाईट शो चल रहे है और खाना भी होटल में खाएंगे
जीशान चहकते हुए जी भाई अभी लो
शाज़िया - बिलकुल नहीं मै नहीं कही जा रही कोई पिक्चर वागैरह् तुमदोनो के साथ तुमदोनो की शरारत मै खूब समझती हु और मुस्कुरा देती है
जीशान - तीन टिकट्स बुक हो चुके है और तुम हमारे साथ चल रही हो माँ प्लीज....और जीशान के साथ साथ अनीस भी उसे जोर दे कर कहता है तब शाज़िया बुरा सा मुह बना कर रह जाती है.....
खाने की टेबल पर उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ दोनों भाई आने वाली शाम के बारे में सोच सोच कर रोमांचित हो रहे थे........
शाज़िया किचन का सारा काम निपटाने के बाद जोर से आवाज दे कर दोनों लडको को बुलाती है...चलो नहला दू तुमदोनो को....
उनकी आँखे चमक उठती है.....वो तो पहले से नंगे ही थे....झट से बाथरूम में घुस गए.......
शाज़िया उनके पीछे पीछे आती है वो अभी भी जीशान के हाथो पहनाये हुए कपड़ो में थी अधखुले ब्लाउज और पेटीकोट से झांकती हुयी उसकी चूत और गांड की दरार की झलक काफी मादक लग रही थी.....आते के साथ वो अपनी ब्लाउज उतार देती है और बाल्टी में पानी भरने के लिए नल खोल देती है
अनीस और जीशान को फर्श पर बैठने के लिए कहती है वो दोनों एक छोटे से बच्चे की तरह अपनी माँ की आग्या का पालन करते है बाल्टी से पानी निकाल कर उन दोनों के सर पर डालती है गिले करने के बाद.....और फिर उन्हें साबुन लगाने लगती है और ऊपर साबुन मलने के बाद उनको खड़ा कराती है और फिर घुटनों के बल बैठ कर उनके अन्डकोशो को हाथो में ले कर बारी बारी से साबुन मलती है......और इधर उन दोनों की हालत पतली हो चली थी .....
आखिर एक तो शाज़िया के लटकती चुचियो के दर्शन उनके लंड को अकड़ने पे मजबूर किये हुए थे और खड़े लंड पर साबुन जलन पैदा कर रहा था कुछ देर के बाद शाज़िया ने उनपे पानी डाला और साबुन धुलने के बाद उनके लंड मुह में ले कर चूसने लगी.....
शाज़िया का ये अकस्मात उत्तेजित कर देने वाले कदम से दोनों बेटे अपनी जीत पर एक बार फिर गौरव्नान्वित हो रहे थे...
.उधर शाज़िया उनके लंड चूसते चूसते अपनी पेटीकोट के नाड़े को खोल देती है और शाज़िया बैठे बैठे ही अपना पेटीकोट अपने बदन से अलग कर देती है और पूरी नंगी हो जाती है और उसके चूसने की रफ़्तार भी बाधा देती है....
ये दृश्य देख कर दोनों की उत्तेजना बढ़ जाती है और दोनों शाज़िया के सर को पकड़ कर उसके मुह में ही अपना माल छोड़ देते है ......शाज़िया का मुह पूरा भर जाता है और उनका माल उसके मुह से बाहर बहने लगता है शाज़िया उठ कर खड़ी हुयी नंगी उनके सामने और कहती है
शाज़िया - चलो दोनों की नहलाने की कवायद यहाँ पूरी हुयी अब जा कर अपने अपने कमरे में कपड़े पहनो और चुप चाप बैठो मै नहा कर आती हु ......और घूम जाती है वो मन ही मन ये सोच रही थी की उसकी मतवाली घायल हुयी पड़ी गांड को देख कर दोनों उसके पीछे लटकेंगे जरुर और होता भी वैसा ही है वो उसे पीछे से पकड़ लेते है और कहते है ऐसे कैसे माँ हमको तो तुमने नेहला दिया अब हम भी तो तुम्हे नहला दे आओ इधर और उसे पकड़ कर बाथरूम की फर्श पर सीधा लिटा देते है और उसके गोरे बदन पर पानी गिराने लगते है
फिर वो भी उसके बदन पे पुरे जोरशोर से साबुल मलते है उसकी दोनों जन्घो को खोल कर चूत में अन्दर तक साबुन लगाते है और फिर उसे पलट कर उसकी पीठ और गांड की भी उसी तरह मालिश करते है....बेचारी इनके हाथो के जादू के कारन एक बार फिर उसका बदन अकड़ने लगता है और वो बाथरूम की फर्श पर भी एक बार झड जाती है मगर इस क्रिया में दोनों शैतानो की हवस फिर से हावी हो गयी और बाथरूम में ही फर्श पे शाज़िया एक बार फिर से चुद जाती है और उसकी चूत काफी सूज जाती है और गांड की छेद भी काफी दर्द से भर जाती है अब हाल ये था की शाज़िया को गांड और चूत सिकाई की जरुरत थी जो उसे उसके दोनों बेटे कमरे में ले जा कर देते है...
शाज़िया की चूत और गांड की सिकाई के बाद वो तीनो सो जाते है इस वक़्त शाज़िया केवल एक ब्लाउज में थी ब्लाउज के भी सारे बटन्स खुले हुए थे और नीचे से वो पूरी नंगी थी क्योकि उसकी गांड और चूत की सिकाई के वक़्त दोनों ने उसका पेटीकोट उतार दिया था और फिर हलके गुनगुने पानी से उसकी सिकाई की थी जिससे उसे काफी आराम मिला था.........और उसके बाद उसकी चुचियो का रसपान करते हुए नींद की आगोश में चले गये थे..........
शाम ५ बजे के आसपास शाज़िया की नींद खुली और वो अपने बेटो को भी उठाती है और कहती है उठो बच्चो शाम हो गयी है घुमने जाना है न.....उठो मै चाय बना कर ले आती हु और वो नंगी ही अपने खुले ब्लाउज में वह से उठ कर चली जाती है...कुछ देर बाद जब दोनों उठ कर बाहर हॉल में आते है तो शाज़िया पेटीकोट और ब्लाउज में बैठी टीवी देख रही होती है और चाय पि रही होती है और तो और जैसे जीशान ने उसे उसके ब्लाउज और पेटीकोट पहनाया था उसने भी उसी तरह कपडे पहने हुए थे....जिसे देख कर जीशान कहता है वाह माँ क्या बात है
शाज़िया उसे देख कर मुस्कुरा देती है जीशान और अनीस उसके पास आते है और और उसके गालो को चुमते हुए उसकी एक एक चूची को मसल देते है जिससे शाज़िया आह कर उठती है...और कहती बदमाश कही के...चुचियो के मसलने के कारन वो दोनों बाहर की और लटक जाती है जिसे देख कर दोनों के मुह में पानी आ जाता है |
शाज़िया उन दोनों को अपनी बाहे फैला कर बुलाती है और अग्ले ही पल उसकी दोनों चुचियो की घुन्दिया उन दोनों की मुह में होती है और शाज़िया का हाथ उन्दोनो के सर पर और जीशान का हाथ शाज़िया की पेटीकोट से झाकती हुयी चूत की दरार पे फिरने लगते है जिसका स्वागत शाज़िया अपनी टाँगे फैला कर करती है.......कुछ ही देर में शाज़िया झटके के साथ दोनों को अलग करती है और कहती है की अब बस अभी के लिए इतना काफी है.....चलो अब चाय पीओ और तैयार हो जाओ जाना भी तो है.....
शाज़िया - अच्छा बताओ क्या पहनू....उसके इस सवाल से दोनों उसकी तरफ देखने लगते है जिससे शाज़िया शर्मा जाती है की उसने ये क्या पुछ दिया और वो शर्मा कर उठने लगती है.....
तभी अनीस उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी गोद में बैठा लेता है और कहता है माँ ऐसे ही चलो न
शाज़िया अपनी आखे गोल कर के कहती है धत्त बदमाश ऐसे बाहर जाउंगी नंगी पुंगी पता चला वापिस नहीं आ पाऊँगी
जीशान - क्या बात करती हो माँ हमारे रहते तुम्हे कोई नजर उठा कर भी नहीं देख सकता तुम्हारी इज्जत हिफाजत खुसी जरुरत दुःख सुख सब हमारे जिम्मे है समझी न...तो चिंता मत करो और ऐसे ही चलो....और जोर से हस देता है.....
शाज़िया कहती है की कमरे में आ कर खुद मुझे तैयार करो....और उठ कर हस्ते हुए बाथरूम भाग जाती है....वो दोनों अपनी अपनी चाय ख़तम करने के बाद कमरे में आते है और शाज़िया को आवाज लगाते है कहा हो माँ...
शाज़िया - आई बाथरूम में हु...कुछ देर में शाज़िया नंगी बाथरूम से बाहर आती है और दोनों के लंड उसके गिले बदन को देख सलामी देने लगते है .....
शाज़िया - सोचना भी मत चुप चाप मुझे तैयार करो और घुमने चलो.....
जीशान - वाह भाई वाह सुबह तो मुह बना रही थी की कही भी नहीं जाना तुमदोनो के साथ और अभी नंगी हो कर हमे कह रही की जल्दी से तैयार करो और घुमाने ले चलो ....हाहाहाहाहाहाहा
अनीस - हा छोटे कह तो तू बिलकुल सही रहा है मगर अब माँ का भी मन है हमारी शरारतो में हमारा साथ देने के लिए.....क्यों सही कहा न माँ
शाज़िया सर झुका कर हस देती है क्योकि बात तो बिलकुल सही थी....