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Incest सबका लाडला (फैमिली स्टोरी )

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* अपडेट -22

मै - आप मुझे यहाँ पर क्यूँ लाई है.

दादी - पहले एक कस्सी (खोदने का फावडा़ ) लेके आ..

ये जगह हमारे खेत से नजदीक ही है तो मै जाके वहां से एक कस्सी ले आया...

मैने कहा इसका क्या करोगी...

फिर दादी मुझे मंदिर के पास ले गई, मंदिर बडा नहीं था, जैस खेतों मे होता है वैसा छोटा था.

फिर मुझे मंदिर के एक साईड मे खोदने के लिए कहाँ.

मै - यहाँ पर क्यो खरवा रही हो..

दादी - खोद ते सही..

मै वहाँ पर खोदने लगा...

3-4फुट तक खोदने पर मेरी रस्सी किसी चीज से टकराई... ये एक बॉक्स था.

मैने उसे बाहर निकाल लिया,बक्सा बहुत बड़ा और भारी भी था.

उस पर ताला लगा हुआ था...

मुझे दादी से पूछा इसमे क्या है..

दादी - सब बताती हू, पहले तु दुसरी तरफ चल उस तरफ भी खोद...

मै दूसरी तरफ खोदने लगा...

उस तरफ भी एक बक्सा निकला, ये बक्सा पहले वाले से अलग था, ये उससे छोटा था...

मैने उसको भी बाहर निकाल लिया...

दादी उनके ताले खोलने लगी लेकिन वो खुल नहीं रहे थे... शायद लंबे समय से बंद थे इस कारण जाम हो गये थे...

दादी ने मुझे खोलने के लिए कहा... मैने अपना पूरा जोर लगाकर तालो को खोल दिया....

दादी ने दोनो बक्सो को खोल दिया...

बक्सो मे जो था उसे देखकर मै चौंक गया.. मुझे समझ नहीं आ रहा था कुछ....

बडे वाले बक्सा सोने का भरा हुआ था, बस थोड़ा सा ही खाली था... दुसरा बॉक्स मे रूपये थे.

दादी - मुझे पता है बेटा तुम सोच रहे होगे की ये इतना सारा सोने और पैसे कहाँ से आये...

मै- हा... कहा से आये ये इतना सोना और पैसे, ये सब यहाँ पर गढे हुए क्या कर रहे है...

दादी- मै तेरे सभी सवालों का जवाब दुंगी....

मै - जल्दी बताओ.

दादी - ये तेरे दादा के है.

मै- उनके पास कहाँ से आये...

दादी - बात बहुत पुरानी है, तेरे दादा के एक दोस्त थे उनका नाम रा़यसिंह था.. तेरे दादा और वो बहुत अच्छे, घनिष्ठ दोस्त थे.

रायसिंह बहुत बडे व्यापारी थे... बहुत पैसा था उनके पास.

एक बार वे अपने पूरे परिवार के साथ हमारे घर आये... उनके बीबी, बच्चे उनके साथ थे, और साथ मे ये बक्से भी थे...

वे उस दिन यहीं पर रूकने वाले थे...

रात मे उन्होंने तेरे दादा को बताया की -

रायसिंह - मेरा छोटा भाई दीप चंद मेरे पैसों और जायदाद के लिए मुझे और मेरे परिवार को मारना चाहता है. इसलिए मै छिपकर तेरे पास आया हूँ...

एक तु ही है जिस पर मै विश्वास कर सकता हू..

तुझे मेरी एक मदद करनी होगी....

दादा- मुझसे जो भी होगा मै तेरे लिए करूँगा, बता मै तेरी क्या मदद कर सकता हूँ

रायसिंह - मुझे पता है मेरा भाई मुझे यहाँ ढूंढ लेगा... मै आज रात को ही यहाँ से परिवार के साथ किसी ऐसी जगह चला जाऊँगा जहाँ वो मुझे ढूंढ नहीं सकता.

लेकिन मै इतने सामान के साथ नहीं जा सकता.

ये सामान तु तेरे पास रखले

फिर रायसिंह दादा को उन बक्सो के पास ले गये, और उनको खोल दिया...

रायसिंह - इस बक्से मे सोना है..और दुसरे मे परिवार के सभी गहने है.

अभी ये तेरे पास रखले मै कुछ समय बाद मे ले जाऊँगा... ये अब तेरे है.

दादा -ठीक है, इनकी पूरी हिफाजत करूंगा...

रायसिंह - अभी हमें चलना होगा,

रायसिंह ने दादा को कहाँ दोस्त अगर मै वापिस नहीं आया या कुछ हो गया तो ये तु रख लेना, मेरे बाद इस पर तेरा हक है.

फिर रायसिंह और और उनका परिवार बैलगाड़ीयो मै बैठकर चला गया...

तेरे दादा ने ये बक्से छिपा दिये...

बहुत दिनों तक रायसिंह नहीं आये, तेरे दादा ने पता लगाया पर उनका पता नहीं चला... एक दिन उन्हें खबर मिली की बहुत पहले ही रायसिंह और उनका परिवार पुल टूटने से नदी मे गिर गये,और सब की मौत हो गई...

तेरे दादा को ये बात सुनकर बहुत दुख हुआ.

हमे पैसों की जरूरत नहीं थी तो इनको काम मे नहीं लिया...

मौत से कुछ दिन पहले तेरे दादा ने थोड़ा सा सोना बेच दिया और वो पैसे इस गहने के बक्से मे रख दिये, गहनों को सोने के साथ रख दिया.

तेरे दादा ने मरने से पहले मुझे ये चांबिया देते हुए कहा कि - मुन्नी अब ये तेरी अमानत है, तु इसे जिसे देना चाहे दे सकती है...

दादी- मेरे लिए तु ही अब सब कुछ है, जो मेरा है वो सब तेरा है...

मै कुछ नहीं बोला..

दादी - क्या हुआ, क्या सोच रहा है.

मै- ये मेरा है..

दादी - ये अब तेरी अमानत है,

मै- तुने मुझे जो दिया है बता नहीं सकता मुझे कैसा लग रहा है मेरी प्यारी दादी मेरी रखेल मेरी जान बीबी...

मैने दादी को कसके पकड़ लिया और उसके होठों को चुसने लगाा और उसके बोबो को मसल दिया गया.

दादी- आआआह... हा बेटा....ये तेरी दादी तेरी रखेल,तेरी रंडी, तेरी बीवी सबकुछ है... मै सिर्फ तुम्हारी हू.

वो भी मुझे चुमने लगी...

दादी- चल जल्दी से से इनको वापिस रख दो.

मैने कुछ रूपये निकाल लिये...

दादी - इनका क्या करेगा..

मै- मेरे है जो चाहे वो करू.

दादी- हा तेरे ही है, जो मर्जी आये वो कर.

 
* अपडेट -23

दादी- हा तेरे ही है, जो मर्जी आये वो कर.

मैने उन बक्सो को वापिस रख दिया, सब पहले जैसा कर दिया.

मै चाबी दादी को देने लगा.. तो वो बोली मै क्या करूगी अब तु इनका मालिक है.

चांबिया मैने अपने पास रख ली.. और कस्सी को भी पास मे ही एक पेड़ पर टांग दिया.

जब वापिस आया तो दादी झुकी हुई थी, उसकी 38" की गांड देखते मेरा लंड सिर उठाने लगा.

मैने दादी को पिछे से पकड़ लिया

दादी आहहह... बेटा क्या कर रहा है.. कोई देख लेगा..

मै- तुने मुझे अपना सब कुछ दे दिया ना मै तु तुझे बहुत कुछ दुंगा..

मैने दादी के बुढे़ शरीर को गोद मे ऊठ लिया और उसे खेत की कोठरी मे ले आया...

मै दादी को गोद मे लिए रहा उसने कोठरी का दरवाजा बंद कर लिया..

मैने नीचे उतारकर किस करने लगा... और उसके चुचे मसलने लगा...

मैने उसके ब्लाउज और घाघरे को खोलकर उसे नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया...

मुन्नी- कैसा लगा तेरी दादी का जीस्म।

मै - साली तू तो रंडी है रखेल है मेरी...

दादी - हां मैं तेरी रंडी हू सिर्फ तेरी ! चोद चोद कर अपनी रखैल बना ले.

मेरा लंड तन कर खड़ा था।

दादी - हाय रे...ये तेरा लंड है या...घोड़े का।

मै - चल अब चुस इसे मुंह में लेके।

दादी - छी.. नही बेटा ये गंदा है, इसको मुँह मे कैसे लु..

मै- मेरी बात नहीं मानेगी...

दादी कुछ नही बोलती है...

वो मेरा लंड अपने हाथ में लेती है।

दादी -अरे ये तेरा लंड तो मेरी मुट्ठी में भी नही आ रहा है.

दादी मुँह मे ले लेती है.

मै - आह हां मेरी रंडी ऐसे ही चुस...

दादी अपना मुहं खोले मेरा लंड अपने हलक तक उतार लेती, जिससे उसे खासी आ जाती है. फिर भी वो चुसती रहती है.

दादी - आह ऐसा लंड मैने अपनी जिंदगी में पहली बार देखा है।

मै - अाह , साली मुझे भी एकदम रंडी मिली है, आह जो कमाल चुसती है।

दादी - तेरी रखेल हू ना तो चुसुगीं ही। कैसा चुस रही है तेरी रंडी दादी।

मै - बोल मत आह मादरचोद , क्या चुसती है... आहहह... तेरी बेटी को चोदु आह...

दादी - पहले मा को तो चोद ले जी भर के.

मै- मां को तो चोदुंगा ही।

दादी - ये तेरा लंड देख कर तो कोइ भी तेरी रंडी बन जाायेगी....।

मैने उसे खाट पर लिटा दीया... और उसके.उपर चढ़ गया, उसकी.चुुुचीयों को अपने द़ातो में दबा कर उपर की तरफ खीचने लगा......

दादी - आ..........आ.......ह, न....ही सो......नू , दर...द कर ...रहा हैईईईई........इआ....मां ...मेरी... चु....चीयांं.।

दादी- .हाय रे द इया, इतना जोर से मत दबा रे बेेरहम......आह,

मै- मेरी रानी.... तेरी चुचीयां तो बवाल हैं..

दादी - आह....इसलिए इतनी जोर जोर से दबाा रहा है ना.भले मेरी हालत कुछ भी हो...।

मै - तुझे मजा नही आपका है...

दादी -हां... आ रहा है पर दर्द भी हो रहा है.

मै- चल अब ज़रा घोड़ी बन.

मुन्नी फटाक से कुतीया बन जती है, मै दादी की मोटी और बडी गांड देखकर पागल हो जाता हू, उस पर जोर से एक थप्पड़ लगता हू.....

दादी- आह .....मा आराम से........

मै- चुप साली एक तो इतनी बडी बडी गांड ले के मेरे लंड मे आग लगाती है और कहती है आराम से .....आज तो तेरी गांड का वो हाल करूंगा की तू जीन्दगी भर अपनी गांड में मेरा लंड लिये घूमेगी ।

मै दादी को सीधा कर देता हू और लंड को उसकी बुढी़ चुत पर रगडता हू, जिससे वो सिसकारी लेने लगती है.

अपने मुसल को मै उसकी चुत पर सैट करता हू और धक्का देता हैू.....

दादी- आआह ...नही ......धीरररे..... आहह... मा...

मै एक जोर का धक्का मरता हू जिससे लंड जड़ तक दादी की चुत मे चला जाता है.

दादी की आवाजे कमरे में गूंजती है.......

दादी-बे......टा रहम ....आह .....मां ......क्या ......करू ......दर्द......

मै - साली तेरी तो चुत कमाल की है......

अब मै धीरे -2 धक्के मारने लगा.. जिससे दादी को मजा आने लगा.. वो मस्ती मे जोर -2 से सिसकियां लेने लगी....

लगातर धक्को ने दादी की चुत को अन्दर तक खोल दिया था ......और वो मेरा लंड आराम से ले रही थी .....उसका दर्द अब कही ना कही सिस्करियो में बदल रही थी। उसकी चुत भी पानी से भर गइ थी ....और मै उसे जोर जोर से चोद रहा था .......फच्च फच्च की आवाज़ पुरे कमरे में गंज रही थी ......।

दादी - आह ..... मज़ा आ रहा .....है.

मैने अपने धक्के अब तेज कर दिये. मै दनादन दादी को चोदने लगा......।

दादी -आ...आ ह.....मजा आ रहा है ..... बेटा....कितना अन्दर डालेगा .....

मै - तूझे कितना अन्दर चाहिये ...

दादी - आह.....तू बहुत ....आह ....अंदर डाल चुका है ......बहुत मज़ा आ रहा है ......।

मै - अब मजा आ रहा है मेरी रंडी ......तभी तो चिल्ला रही थी।

दादी -आह....राजजजा....जोर जोर से चोद फाड़ दे ......आपनी दादी की चुत......आह मुझे पता है .......आइ .........की तू चुत फाड़ सकता है.

इतना सुनते ही मै उसे पूरी जोर से चोदने लगता

 
* अपडेट -24

इतना सुनते ही मै उसे पूरी जोर से चोदने लगता हैू

दादी बस झडने ही वाली होती है, वो मुझे कस कर पकड़ लेती है...

दादी- आ ........बेटा........मै गयी ........

और दादी अपना पानी छोड़ने लगती है .....और मै भी उसे पकड़ कर 8-10 धक्के जोर जोर से का लगता हैू.....और अपना पुरा पानी उसकी चुत मे भरने लगता हू....

दादी - आह ...मेरे राजा मेरे बालम कर दे अपनी रखेल को गाभिन ...... बना ले मुझे अपनी बच्चे की माँ ।

अपनी पूरी टंकी उसकी चुत मे खाली करके साईड मे पंलग पर लेट गया.

वो मेरे सीने पर सर रख देती है....

दादी - आज तुने तो मेरी हालत खराब कर दी.

मै - साली .........जोर जोर से चिल्ला कर मज़े ले रही थी तू.

दादी - सच में ये तेरा लंड पुरा मज़ा देता है, स्वर्ग की सैर करा देता है....

मै - अभी तो तेरी गांड मारनी बाकी है मेरी रखेल.

दादी - चुत मे इतना दर्द होता है तो गांड मे क्या होगा... मेरी पूरी गांड फाड़ डालेगा.

मै- आराम से मांरूगा तेरी गांड...

दादी - नहीं मुझे डर लग रहा है.

मै - तुने तो कहा था कि तु मुझे अपना सब कुछ देना चाहती है. मेरा हक है तुम पर. तुझे नहीं मरानी तो ठीक है.

मेरी बात सुनकर...

दादी - मेरी हर चीज पर तुम्हारा हक है.. ये गांड का चीज है, मेरी जान भी तेरी है..

ले मारले अपनी रखेल की गांड, मै कुछ नहीं बोलुगी.

तेरी खुशी मे ही मेरी खुशी है..

मै दादी को किस करने लगा, उसके चुचो को पीने लगा, जिससे वो गरम होने लगी...

मै तेल की बोतल ऊठा लाया और बहुत सारा तेल उसकी गांड के छेद पर डाल दिया.. मैने उसमे अपनी उंगली डाल दी और हिलाने लगा...

फिर मैने दो ऊँगली डाल दी, और अंदर बाहर करने लगा. जिससे दादी को हल्का सा दर्द हुआ.

अब मैने लंड को दादी की गांड के सुराख पर रख दिया और धीरे से एक धक्का लगाया..

मेरे लंड का टोपा गांड मे फिट हो गया जिससे दादी की चीख निकल गई...

मैने एक धक्का और मारा जिससे लंड दादी के गांड का सुराख बडा करता हुआ आधा पहुंच गया.

जिससे दादी झटपटाने लगी.... मै रूक गया और उसके चुचो को मसलने लगा

दादी कुछ शांत हुई तो मैने एक करारा झटका लगाया, मेरा लंड दादी की गांड मे जड़ तक गड़ गया

दादी की आँखों मे आँसू आ गये ... दादी की गांड से खून निकल रहा था....

दादी - आआआह बेटटटा... मेरी गांड फट गायी है .....मैं अब नही ले सकती .....

मै - मेरी जान अब तो पूरा घुस गया तेरे बिल मे अब दर्द नहीं होगा...

मै उसकी चुत मसलने लगा, उसके चुचो को सहलाने लगा, वो शांत होने लगी...

मै धीरे -2 अपना लंड अंदर बाहर करने लगा, जिससे दादी की जान निकलने लगी..

मैने अब धक्को की स्पीड तेज कर दी..

दादी(चिल्लाते हुए)- .....ही........आ.......आ...मां ....छोड़ ....दे.....बेटा

अब मैने दादी की चीखो की परवाह नही की और जोर -2 से धक्के मारने लगा...

मै - कसम से मेरी जान तेरी गांड तो .....आह बहुत टाइट है.

दादी को तो जैसे होश ही नही था .....उसकी गांड में मेरा लंड गदर मचा रहा था ...

दादी की आंखे बंद होने लगी थी..

मै ऐसे दी गांड मारता रहा...

मै अब चरम पर था, मैने जोर -2 से 10-15 धक्के मारे और अपना लावा दादी की गांड मे उगल दिया.... और पंलग पर लेट गया...

दादी अभी भी दर्द मे थी उसकी गांड का छेद फट कर चौड़ा और लाल हो गया था, बुढ़ापे मे इतना सहना मुश्किल था

मै उसे अपने ऊपर लेटा लेता हू...

दादी - मेरी जान ही निकाल दी बहुत दर्द हो रहा है..

मै- तेरी जान नहीं निकांलुगा तो किसकी निकांलुगा..

मै दादी के होठ चुसने लगा...

मैने दादी को बांहों में भर लिया...धीरे धीरे नींद की आगोश में चला गया.

आधे घंटे बाद मै जगा और दादी को जगाया...

मै उठकर अपने कपडे पहनने लगा.. दादी भी ऊठने लगी,

जैसे ही वो पंलग पर से उठती है उसके बदन में दर्द महसूस होता है... उसे ऐसा लग रहा थाा जैसे उसकी गांड को किसी ने चाकू से ......चीर दिया हो, ऐसा...दर्द हो रहा था उसे.

दादी - आह दईया....मुझसे तो चला भी नही जा रहा है

वो खड़ी हुई तो लडखडाने लगी, वो पंलग पर बैठ गई.

दादी- ये क्या किया तुने...

मै- अपनी प्यारी दादी को प्यार किया...

वो मुस्कुराने लगी, मैने दादी को कपडे पहनाये.. और उसे गोद मे उठा लिया...

मैने वो रूपये अपनी जेब मे डाल लिये.

मै उसे गोद मे लेकर छोटे ताऊजी के घर आ गया, घर पर कोई नहीं था,

मै दादी को उनके कमरे मे ले गया और उसे पंलग पर लेटा दिया..

मैने दादी को एक पेनकीलर दी और उसकी गांड के छेद पर दर्द कम करने की क्रिम लगाई..

दादी - पहले दर्द देता है फिर मरहम लगाता है.

मै - तु तो मेरी जान है मेरी दादी, तुने मुझे अपना सबकुछ दे दीया.

दादी - तु भी मेरी जान है.

मैने उसके होठों को चुम लिया...

फिर उसे सुला कर मै घर की तरफ आ गया..

आज बहुत टाइम लग गया, शाम हो गई थी.मै थोड़ा थक गया था तो अपने रूम मे जाकर लेट गया...

फिर रात को खाने के टाइम पर उठा,

फिर खाना खाया और रूम मे आ गया...मैने कपडे निकाल दिये और कुछ देर तक मोबाइल पर टाईमपास किया...

आज नींद नहीं आ रही थी तो मै छत पर चला गया...

मै सिर्फ अंडर वायर मे था और छत पर ठंडी हवा चल रही थी, अच्छा लग रहा था.

छत पर टहलने लगा, टहलते टहलते मै ताउजी की छत की तरफ चला गया...

वहां मुझे अनिल भाई की आवाज़ सुनाई दी, वो पंकज भाभी के साथ फिर से झगड़ा कर रहे थे, उन्होने भाभी को थप्पड़ मारा ,

मुझसे रहा नहीं गया तो मै उनके पास चला गया उनको भाभी से दुर किया.

मै - भाई जी ये क्या बात हुई, आप आज भी भाभी के साथ झगड़ रहे हो उनको पिट रहे हो.. बात क्या है.

पंकज भाभी - मैने तो इनसे बस कुछ रूपये मांगे थे कपड़ों के लिए..

अनिल - दे दिये, इसको और चाहिए..

भाभी -2500 रूपये दिये है इतने मे कपडे कैसे आयेंगे तीनो के...

अनिल - ओर क्या लाख रूपये दू.

पंकज - दौनो जेठानी जी तो ज्यादा रूपयो के कपड़े लाई है, उतने तो नहीं लेकिन थोड़े ओर तो लंगेगे...

अनिल - इतने मे जो लाना है वो ले आओ.

मैने कुछ सोचा और बोला...

मै - इतने रूपयो मे आ जायेंगे कपडे आप चिंता मत करो भाभी.

भाई आपको और पैसे देने को जरूरत नहीं है.

अब आप लोग सो जाओ, उन दौनो को उनके कमरे मे भेजकर मै भी रूम मे आकर सो गया...

 
* अपडेट - 25

अब आप लोग सो जाओ, उन दौनो को उनके कमरे मे भेजकर मै भी रूम मे आकर सो गया...

अगले दिन मै ऊठी और नहा धोकर बाहर आया... आज मीनाक्षी भाभी तो थी नहीं तो मैने बडे ताऊजी के घर पर ही नाश्ता कर लिया, वहाँ पर रेखा भाभी और संगीता भाभी मिली उनसे थोड़ी बातचीत हुई...

फिर मै बाहर आ गया तो वहाँ पर रामानंद भाई मिले.

(रामानंद और राकेश भाई ट्रैक्टर रखते है, तो वो कभी -2 बाहर रहते है)

मै - भाई जी कहाँ रहते हो दिखे नही दो - तीन दिन से...

रामानंद - हा यार दो दिन से बाहर गया था, रात को आया हू.. थोड़ा लंबा काम था...

उनके साथ थोड़ी देर बातचीत की फिर मा छोटे ताऊजी के घर चला गया...

वहां पर ताऊजी, ताई जी और राकेश भाई बैठे थे..

दादी नहीं दिख रही थी.

मैने पूछा दादी कहाँ पर है.

संतोष ताई - बेटा उनको बुखार है वो कमरे मे आराम कर रही है.

मै दादी के कमरे मे गया तो वो सो रही थीं, मै वापिस बाहर आ गया..

मैने देखा की भाभी और बच्चे तैयार हो रहे है कहीं जाने के लिए...

मैने पूछा की सब कहाँ जा रहे है..

संतोष - बहु अपने पीहर जा रही है बच्चो के साथ.. और राकेश उनको छोड़ने जा रहा है..

राकेश - मा मै कल ही लोंटुगा.

ताई - क्यो..

राकेश - इसको छोडकर मै आगे जाऊँगा ट्रैक्टर का काम कराने, अभी आगे बहुत काम आने वाले है तो उसको अभी ठीक करवा लेता हूँ..

रात को मै सुमन (राकेश की बहन) के पाल रूक जाऊंगा...

ताई - ठीक बेटा...

संतोष ताई ताऊ से - आज आप घर पर आ जाना...

ताऊ- आज कैसे आ सकता हू, आज तो पूरी रात पानी देना है खेतों मे.

संतोष - मै और माजी रात को अकेली रहेगी...

सुमेर ताऊ कुछ सोचकर - राहुल बेटा आज तु यही पर सो जाना तेरी ताई के पास.

मै - ठीक है ताऊजी सो जाऊँगा.

फिर मै वापिस आ गया और खेतो की तरफ चल पड़ा रोशनी काकी से मिलने...

खेत मे पहुंचा तो देखा की काकी अभी बस आई ही थी...

मै- क्या कर रही हो काकी

काकी कुछ नहीं बोली..

मै- क्या हुआ काकी नाराज हो...

रोशनी काकी - मै क्यो नाराज होंऊगी...

मैने काकी को पिछे से पकड़ लिया..

रोशनी -आआह.. छोड मुझे क्या कर रहा है...

मुझे गुस्सा आ गया मै उसे पकड़ कर कोठरी मे ले गया और उसे पंलग पर गिरा कर उसके ऊपर चढ़ गया...

मै उसके होठों को चुसने लगा, साथ ही उसके चुचो को कसके भींचने लगा...

वो हल्का -2 विरोध कर रही थी लेकिन उसके विरोध मे ताकत नहीं थी..

कुछ देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी, अपने हाथों से मेरे बालों को सहलाने लगी...

मै- साली रंडी पहले तो नाराज हो रही थी और अब कैसे मजे ले रही है.

रोशनी- नाराज नहीं होऊ तो क्या करू एक तु तेरे इस मुसल से मेरे अंदर आग लगा गया और अब मुझे पूछता ही नहीं.

तेरे से कोई भी ज्यादा देर तक नाराज नहीं रह सकता

मै- चिंता मत कर काकी तेरी सारी आग बुझा दूंगा...

मैने उसका ब्लाउज निकाल दिया, मैने काकी की चुचि को दबाते हुए कहा – अह्ह्ह्ह…काकी आपकी ये चुचियाँ कितनी मस्त हैं…जी करता है चूस्ता ही रहूं…

काकी -तो चूसो ना रजाआ….आअहह…हान्न्न….और ज़ोर से…. खाजाओ… बहुत परेशान करती हैं… काटो…आहह….ज़ोर से नहियीईईईईईई….

मेने चूस-चूस कर उनकी चुचियों को लाल कर दिया… उत्तेजना में कयि जगह दाँत से काट भी लिया…

अब मुझसे और इंतेज़ार करना मुश्किल हो रहा था…तो. मैने काकी का घाघरा निकाल दिया… और उनकी चूत को हाथ से सहला कर चूम लिया…

मेैने काकी की चूत में अपनी दो उंगलियाँ डाल दी और उन्हें अंदर बाहर करके चोदने लगा…

काकी की आँखे लाल होने लगी… वासना की खुमारी उनके सर चढ़ने लगी.. और उनकी चूत गीली हो गयी…

उनकी टाँगें मेरे लंड के स्वागत में खुल गयी…

मैने अपना मूसल उनकी रसीली मुनिया के मुँह से अड़ा कर अंदर डाल दिया…

जिससे काकी को हल्का दर्द हुआ, उसने अपने होठों को भीच लिया

मेै धीरे-2 धक्के लगाकर उनकी चुदाई करने लगा… आज उनकी चूत मेरे लंड को कुछ ज़्यादा ही जाकड़ रही थी… जिससे मुझे पहले से ज्यादा मज़ा आ रहा था …

मै अब जोर -2 से धक्के मारने लगा... काकी की सिसकियां बढ़ने लगी थी...

रोशनी - आआआह.. मेररे.. राजा ऐसे ही... और जोर से चोदददो... अपनी रख्ख्खेल... को आहहह....

काकी जोर से झड़ने लगी अब मेैने काकी को घोड़ी बना दिया… और उनकी गान्ड को चाटने लगा…

रोशनी - नहीं, ये क्या कर रहे हो, गंदी जगह है वो

मै- चुप कर मेरी रंडी

मेरे गांड चाहने से काकी के शरीर मे झुरझुरी होने लगी.

मै- काकी आपकी गान्ड कितनी मस्त है… मन कर रहा है इसमे अपना लंड डालकर रगड़ रोड कर चोदु

रोशनी - नही लल्ला.. दर्द होगा..

मेै- नही मुझे तुम्हारी गांड मारना है...

काकी - तुम भी ना बेटा… बहुत जिद्दी हो… ! अच्छा मार लेना पहले मेरी मुनिया की खुजली तो शांत करो...

मैंने लंड को काकी की चुत पर सैट किया औरघचक से पूरा लंड एक ही झटके में पेल दिया… उसके मुँह से एक दबी दबी सी कराह… निकल गयी..

काकी की चुचियों को मसल्ते हुए मे ढका-धक धक्के मारने लगा…

मेरे धक्कों की स्पीड इतनी ज़्यादा थी कि उसकी हाल ही झड़ी चूत सूखने लग गयी.. और घर्षण से उसमें जलन होने लगी…

काकी बोली -धीरे कर बेटा… मेरी चूत में जलन हो रही है..

थोड़ी देर बाद उसकी चूत फिर से पनियाने लग गयी और वो भी मज़े ले लेकर मेरे धक्कों पर अपनी गान्ड पीछे धकेल - धकेल कर चुदाई का मज़ा लेने लगी…

आधे घंटे में काकी दो बार पानी छोड़ गयी, तब जाकर मेने उसकी पोखर को अपने गाढ़े पानी से भरा…

मेने अपना लंड काकी की चूत से निकाला, पच की आवाज़ के साथ वो बाहर आ गया, उसके घाघरे से अपने लंड को पोंच्छ कर मै उसके पास सो गया……

 
* अपडेट -26

मै उसके पास सो गया……

कुछ देर आराम करने के बाद मै उसके होठों को चुसने लगा, मैने दो उंगली उसकी चुत मे डाल दी, वो गरम होने लगी....

फिर मै खडा होकर तेल की शीशी ले आया.. मैने को को उल्टा कर दिया... और थोडा तेल काकी की गान्ड के छेद पर डाला और उंगली से उसे अंदर तक चिकना कर दिया…

फिर अपने लंड पर चुपडा… और उनकी गान्ड के भारी-2 पाटों को अलग कर के उनके छेद पर टिका दिया…..

गान्ड के छेद पर लंड का अहसास होते ही काकी की गान्ड का छेद खुलने-बंद होने लगा…

मेने बॉटल से दो बूँद तेल की और टपका दी… और इस बार अपनी दो उंगलियाँ एक साथ अंदर डाल दी, काकी ने चिहुन्क कर अपनी गान्ड के छेद को सिकोड कर मेरी उंगलियों पर कस लिया…..

हइई… बेटटा… क्या करते हो… मेरी गान्ड चटक रही है…

मेने उनकी गान्ड पर दूसरे हाथ से चपत मार कर कहा – ऐसे गान्ड भींचोगी तो चट्केगी ही ना, इसको थोड़ा ढीला छोड़ो…

मेरी बात मानकर काकी ने अपनी गान्ड को थोड़ा ढीला कर लिया, अब मेरी दोनो उंगलियाँ आराम से अंदर तक पहुँच पा रही थी…

उनकी गान्ड का छेद अब थोड़ा सा खुल गया था, मेने उंगलियाँ बाहर निकाल कर दो बूँद तेल और डाला और उसे उंगली से अंदर कर के अपने लंड को उसके छेद पर फिर से रख दिया…

एक हल्के से धक्के के साथ मेरा पूरा सुपाडा गान्ड के अंदर जाकर फिट हो गया..….

आआह... बेटा…. थोड़ा धीरे करो… मेरी गान्ड फट रही है…हाईए… बस करो…

मेने काकी की चौड़ी पीठ को चूमते हुए उनकी चुचियों को थाम लिया और ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा..

काकी की गान्ड में लंड की चुभन कुछ कम होने लगी तो मेने और थोड़ा धक्का दिया… और आधा लंड अंदर कर दिया..

हइई…बेटटटा … लगता है आज नही छोड़ोगे… मुझे…अरे मारी...उफफफफफ्फ़..

अब मेने अपने एक हाथ को उनकी कमर की साइड से नीचे ले जाकर उनकी चूत को सहला दिया और अपनी दो उंगलियाँ चूत के अंदर कर के उसे चोदने लगा…

चूत की सुरसूराहट में काकी अपनी गान्ड का दर्द भूल गयी… और सिसकियाँ…भरने लगी…

मौका देख कर मेने एक और धक्का मार दिया और मेरा पूरा लंड गान्ड की सुरंग में खो गया…

वो दर्द से कराह उठी.. तकिये में मुँह देकर बेडशीट को मुत्ठियों में कस लिया…

लेकिन मेने अपनी उंगलियों से उनकी चूत चोदना जारी रखा.. और धीरे-2 कर के गान्ड में लंड अंदर – बाहर करने लगा…

काकी के दोनो छेदो में सुरसुरी बढ़ने लगी और वो अब मस्ती से आकर गान्ड मरवाने लगी…

चूत से उंगलियाँ बाहर निकाल कर उनकी गान्ड पर थपकी देते हुए धक्के लगाने में मुझे असीम आनंद आ रहा था….

काकी भी भरपूर मज़ा लेते हुए अब अपनी गान्ड को मेरे लंड पर पटक रही थी,

जब उनकी मोटी गद्दी जैसी गान्ड मेरी जांघों से टकराती, तो एक मस्त ठप्प जैसी आवाज़ निकलती… मानो कोई टेबल पर थाप दे रहा हो…

15 मिनिट तक उनकी गान्ड मारने के बाद मेरा पानी उनकी गान्ड में भर गया.. हम दोनो ही पस्त होकर पलंग पर लेट गये…

5 मिनिट के बाद मेने काकी की चुचि को सहलाते हुए पूछा- काकी गान्ड मारने में मज़ा आया कि नही…

काकी - शुरू में तो लगा कि मेरी गान्ड फट गयी.. बहुत दर्द हुआ .. लेकिन बाद में मज़ा भी खूब आया मेरे राजा… लेकिन आहह…. अब फिर से दर्द हो रहा है…माआ…

पर तुम चिंता मत करो , कुछ देर में ठीक हो जाएगा…ये गांड देख कर मै खुद को रोक नहीं पाया

रोशनी - कोई बात नही… मेरे राजा… तुम्हारे लिए तो मेरी जान भी हाज़िर है.. ये निगोडी गान्ड क्या चीज़ है…

काकी अब खुल कर गान्ड, लंड, चूत बोलने लगी थी…

मै काकी के होठों को चुसने लगा...

कुछ देर आराम करने के बाद मै कपडे पहनने लगा, काकी भी जाने लगी तो मैने उसे रोका...

मैने उसे 7 हजार रूपये दिये, और बोला काकी ये रखलो.

वो बोली - नही बेटा इतने रूपये मै नहीं ले सकती... तुने तो मुझे पैसे के लिए चुदने वाली रंडी समझ लिया.. मै पैसे के लिए तुझसे नहीं चुदती समझे...

मुझे गुस्सा आ गया, मैने उसको पकडकर दिवार से लगा दिया और उसकी गांड पर जोर से थप्पड़ मारने लगा..

काकी को दर्द होने लगा था ... वो रूकने के लिए बोलने लगी.

मैने काकी को अपनी तरफ पलट लिया...

मै- साली रंडी कब से नखरे कर रही है, तु मुझसे चुदती है इसलिए ये पैसे नहीं दे रहा, मुझे तेरी फिक्र है इसलिए दे रहा हू...

पैसो मे चुदने वाली रंडी बहुत मिलती है, उसके लिए तेरी जरूरत नही है, समझी.. तु मेरी रखेल है.

देख तेरे कपडे पुराने हो गये है, इनसे नये कपड़े ले लेना और घर का सामान ले लेना.

ये बोलकर मै बाहर जाने लगा...

काकी को अपनी गलती का अहसास हो गया था.

काकी - मुझे माफ करदे मैने तुझे गलत समझा, मुझे नहीं पता था तुझे मेरी फिक्र है... उसकी आँखों मे आँसू थे.

उसने मुझे गले लगा लिया, वो बोली माफ करदे मुझे.

मैने भी काकी को गले लगा लिया...

मै - माफ करना काकी मैने तुम्हें मारा..

काकी - माफी मत माँग, मेरे राजा, तेरी रखेल जो हू.

मैने काकी को किस किया... काकी ने वो रूपये ले लिये.

काकी की चाल मे थोड़ा लंगडापन था, मैने उससे बोला - काकी घर पर क्या बोलेगी ऐसे क्यूँ चल रही है..

काकी -बोल दूंगी फिसल गई थी.

मै -ठीक है

(*** काकी को जो इंमोशनल बाते बोली ये बोलनी जरूरी थी, इससे काकी का मेरे लिए अपनापन बढ़ गया. अब काकी हमेशा मेरी रखेल बनी रहेगी.

काकी भविष्य मे मेरे काम आयेगी ***)

 
Itne Support ke liye sbhi Dosto ko Thanku

Kosis hogi ke aap sb ko aage bhi itna he anand aiye

Thanku
 
* अपडेट - 27

काकी भविष्य मे मेरे काम आयेगी ***)

मै घर की तरफ चल पड़ा, आकर खाना खाया, फिर थोड़ी देर आराम किया...

आज मौसम थोड़ा खराब था, बारिश हो रही थी....

शाम को अपनी बुलेट लेकर मै गाँव मे घुमने चला गया. गाँव मे मेरे कुछ खास दोस्त है.

उनमे एक है कुलदीप

मै और कुलदीप बचपन के दोस्त है.

मै उससे मिलने उसके घर चला गया... कुलदीप के घर मे उसके मम्मी, पापा, छोटी बहन हैं.

पापा - सम्पत शर्मा (43)

ये एक सरकारी टीचर है, इनकी ड्यूटी गाँव से 70 किलोमीटर दूर दूसरे गांव मे है. कभी कभी घर पर आते है.

मम्मी - सुमन शर्मा (41), साइज (34-30-34) रंग गोरा,स्लीम बॉडी, ये एक सुंदर सुशील औरत है.

बहन - महिमा (15)

ये स्कुल मे पढ़ती है.

कुलदीप मुझे घर के बाहर ही मिल गया, उसे लेकर मै घुमने चला गया.

अब हल्की हल्की बारिश होने लगी थी,

काफी देर घुमने के बाद उसे घर छोड़कर मै भी घर पर आ गया.

घर पर आने के बाद मै फ्रेश हुआ और कपडे चेंज किये, फिर मै छोटे ताऊजी के घर चला गया. ताईजी रसोई मे काम कर रही थीं, मैने सोचा दादी से मिल लु.

मै दादी के पास चला गया...

मै -अब तबियत कैसी है आपकी...

दादी - बुखार अब कुछ कम है, शरीर मे हल्का दर्द हो रहा है.

मै- दादी मुझे माफ करना मैने कल कुछ ज्यादा कर दिया..

दादी - ऐसे मत बोल, तु मेरे साथ कुछ भी कर सकता है.

बुढी़ हो गई हू ना अब हिम्मत कम है इसलिए थोड़ी तबियत खराब हो गई है..

मैने दादी के होठों को चुम लिया...

ताईजी दादी के लिए खिचड़ी ले आयी, दादी वो खाने लगी

मै बाहर आ गया... कुछ समय बाद मैने और ताईजी ने खाना खाया...

ताई जी रसोई मे थी और मै ताईजी के कमरे मे आ गया.

10-15 मिनट बाद मै रसोई मे पानी पिने के लिए गया,मेरी नजर ताई जी के जिस्म पर पड़ी...

ताईजी ठीक लंबी है, वो ना तो ज्यादा मोटी है और ना ही पतली... इस उम्र मे भी उनका शरीर मस्त था. उनका साईज (34-30-34)

वो ब्लाउज और घाघरे मे थी. वो खडी होकर कुछ काम कर रही थीं.. मै उनके पीछे जाके खड़ा हो गया.. और उनको पीछे से गले लगा लिया...

संतोष ताई- बेटा... क्या कर रहा है, काम करने दे मुझे.

मै- मै आपको कब रोक रहा हूँ,

मैने अपने हाथ उनके मुलायम पेट पर रख दिये और सहलाने लगा... जिससे उन्हें हल्की गुदगुदी और हल्का सा करंट सा लगा...

बहुत समय से ताऊ ताई को टाइम नहीं दे रहे थे...

ताई - आआह.. क्या कर रहा है बेटा.

मै- कुछ भी तो नहीं अपनी ताईजी को प्यार कर रहा हू, ताईजी आप बहोत सुन्दर हो...

ताई- चल झूठा... कुछ भी बोलता है, अब तो उम्र ढल गई है..

मै(मसका लगाते हुए )- सच्ची ताईजी आप इस उम्र मे भी मस्त हो..

संतोष ताई- धत्त्त.. बदमाश कुछ भी बोलता है, मै तेरी ताई हू.

मै- तो क्या हुआ, सही ही बोल रहा हू..

मेरा लंड एकदम टाईट हो गया..मैने ताई को कस के गले लगा, जिससे मेरा लंड ताई के पिछे चुभने लगा...

ताई के मुंह से सिसकारी निकल गई.

संतोष ताई- आआह... बेटा क्या कर रहहहा.. है तु... काम करने दे मुझे.

मै कब रोक रह हू आपको काम करने से मत मेरी ताई से प्यार कर रहा हूँ...

ताई कुछ नहीं बोली उसकी भी कई समय से ठीक से चुदाई नहीं हुई थी तो उसे भी हल्की हल्की खुमारी छाने लगी...

मैने दौनो हाथ अब गांड पर रख दिये और धीरे -2 सहलाने लगा...

ताई के मुंह से हल्की हल्की आवाज आ रही थी. मैने मौके का फायदा ऊठाते हुए अपने होठ ताई की गर्दन पर रख दिये.

ताई - आह.. बेटा ये क्यया... कर रह्ह्ह्हा... है

मै- मेरी प्यारी ताई को चुम रहा हू, आप अपना करो मै कब रोक रहा हूँ.

तभी दादी की आवाज आयी- बहु पानी पकड़ाना...

ताईजी जल्दी से लोटे मे पानी लेकर गई और मै ताईजी के कमरे मे आ गया.

 
* अपडेट - 28

मै ताईजी के कमरे मे आ गया.

मैनें अपने कपड़े निकाल दिये और बैड पर लेट गया...

कुछ देर बाद ताई भी आ गई....

ताईजी ने मेरी तरफ देखा

मै- ताईजी मुझे ऐसे सोने की आदत है, आपको कोई दिक्कत तो नहीं है

संतोष - नहीं बेटा, मुझे क्या दिक्कत होगी. तुझे जैसे सोना है सो जा.

ताई भी मेरे पास लेट गई, ताई ब्लाउज और घाघरे मे थी.

ये घाघरा घुटनों तक था ( रात मे औरते अक्सर ये पहन कर सोती है).

मैने ताई की तरफ देखा, उसके ब्लाउज ऊपर के दो बटन खुले थे.

मुझे इतनी और देखकर ताई बोली - ऐसे क्या देख रहा है..

मै- कुछ नहीं बस ऐसे ही.

मै चुप हो गया..

संतोष -सो गया बेटा

मै -नही, हल्की हल्की ठंड सी लग रही है... और मैने ताईजी के ऊपर बांहे ढाल दी और उनसे चिपक गया.

ताई भी मेरी कमर पर हाथ रखकर मुझसे चिपक जाती है,

संतोष - अरे मेरे बेटे को ठंड लग रही है, अब नही लगेगी,

शायद ताई के मन मे भी कही न कही सेक्स की आग जल रही थी.

मेरे और ताई के होठो के बिच कुछ इंचो का फर्क था, ताई की चुचींया मेरी छाती से दबी हुइ थी,इसका असर मेरे मुसल पर हुआ और मेरा लंड खड़ा होने लगा.

मेरा लंड खड़ा होकर संतोष ताई की चुत पर दस्तक देने लगता है, अगर ताई का घाघरा नहीं होता तो वो अब तक ताई की मुनिया मे झंडे गाड़ देता.

ताई को भी अहसास होता है कि मेरा लंड उसकी चुत को टच कर रहा हैसुनहरी को तब अहसास होता है जब सोनू का लंड इकदम टाइट होकर उसके बुर पर गड़ने लगता है,

संतोष (मन में)-- हे भगवान जो मैं सोच रही हूं क्या ये राहुल का वही हैं, संतोष ताई के सोचने मात्र से ही उसकी सांसे तेज होने लगती है,

उसकी गरम सांसे मुझे महसुस होती है,और मै अपनी ताई से और चिपक जाता हैू, जिससे मेरा लंड ताई को अपनी चुत पर सीधा महसुस होने लगता है, ताई की हालत खराब होने लगती है, वो चाह कर भी मुझसे से अलग नही हो पा रही थी,

ताई की चुत की गर्मी से मेरे लंड की हालत खराब होने लगती है, और सोचते सोचते मै अपना एक हाथ संतोष ताई की चुचीं पर रख देता हू ,

मेरा हाथ जैसे ही ताई को अपनी चुचींयो पर महसुस होता है, उसका शरीर और गरम होने लगता है.

ताई (मन मे) - शायद राहुल अभी जवान हो रहा है, तो इस उमर में लंड का खड़ा होना लाज़मी है, ये तो अभी इस मामले में बच्चा है , और गलती से इसका हाथ मेरी चुचींयो पर आ गया होगा,

हाय... कितना गरम है इसका लंड और बड़ा भी लग रहा है.

मै धीरे धीरे हाथेली को उसकी चुचीयों पर कस देता हू.

संतोष मन में हे भगवान ये राहुल क्या कर रहा है,

मै अपनी हथेली उसकी चुचीयों को और जोर से कस लेता हूँ

मै चुचियो को अब भीचने लगता हू

मैने अब ताई की चुची को एकदम जोर से अपनी हथेली में पकड़ लिया था, जिसकी वजह से ताई को दर्द होने लगा था, और वो धिरे धिरे सिसक रही थी,

संतोष - आइ...मा...रे

और मुझे बोलती है आआह... बेटा दर्द हो रहा है,

मै - होने दो

संतोष - आइ....बेटा इतनी बेरहमी से क्यू दबा रहा है... मेरी चुचीं..आ....आ मैं तेरी ताई हूं.

मै- ताई जी आपकी चुचीं को मसलने में मज़ा आ रहा है,

ताई जी को दर्द तो हो रहा था लेकीन उसे मज़ा भी बहुत आ रहा था,

वो भी अब मजा लेना चाहती थी जो उसे उसके पति ने नहीं दिया था.

संतोष - हाय राम, कोई इस तरह...आह मसलता है क्या रे,

मै - आह ताईजी तेरी जैसी चुचीं हो तो ऐसे ही मसलते है...

संतोष - मसल ले बेटा...आह...जितना चाहे, मसलना है, मै सब को बता दूंगगी... आह म्मा धीरे कर थोड़ा,

मै- मेरी प्यारी ताई कभी ऐसा नहीं करेगी मेरे साथ. तुम अब मेरा ही लंड लोगी जिदंगी भर इस लिये.

ये बात सुनकर ताई की चुत फुदकने लगती है, और उसके अंदर एक अलग ही ख़ुमार छा जाता है,

संतोष - आह तुझे शरम नही आ रही है ना ऐसी बाते..करते हुए..

मै- जब से तेरा जिस्म देखा है, शरम वरम भुल गया हु मैं,

संतोष - हाय रे.. तू मुझे ऐसी नजरो से देखता है

मै -कुछ भी हो, तोरा जिस्म लाजवाब है,

ताई भी आज पुरा मज़ा लूट रही थी, जिस तरह मेरे मजबुत हाथ उसकी चुचीयों को मसल रहे थे, सुमेर ताऊ ने कभी ऐसा नही मसला था. ये सोचकर वो और भी गरम हो जाती...,

संतोष - हाय रे बेरहम....धिरे दबा...आ....इ................बेटा

मै अब ताई के होठों पर होठ रख देता हू और उन्हे चुसने, काटने लगता हू...

ताई का विरोध हल्का हो गया

मैने ताई ब्लाउज निकाल दिया, ताई की चुचियों के हलके भूरे निप्पल उत्तेजना के मारे और ज़्यादा मोटे और कड़े होकर सीधे खडे थे.

मै - वाह ताई क्या चुचियां हैं तुम्हारी दिल करता है इन्हें अपने हाथों में पकड कर चूमता रहू.

ताई की चूत से उत्तेजना के मारे पानी निकलने लगा और उसकी साँसें बुहत ज़ोर से चलने लगी, ताई की बड़ी बड़ी चुचियां उसकी साँसों के साथ ऊपर नीचे होने लगी ।

मैने ताई की चुचीयो पर मुँह लगा दिया, मै जोर से ताई की चुची को चुसने लगा मसलने लगा.

संतोष - आआआह.. हा बेटा... आ.. आ.. हा ऐसे ही चुसता रह, हा.. ऐसे ही दबा तेरी ताई की चुचीयो को...आज निचोड़ डाल इनको आआह...

ताई की चुचिया एकदम लाल हो गई... कुछ देर तक चुचियों को पीने के बाद मै नीचे आया.

मै अपने हाथों से ताई के घाघरे को उतारने लगा. ताई जी अब मेरे सामने बिलकुल नंगी थी।

मै गौर से ताई की चूत को देखने लगा.

ताई - तुने मुझे तो नंगा कर दिया पर तु अभी तक नंगा नही हुआ.

मै- ताई तुम मुझे नंगा देखना चाहती हो.

ताई ने बस हा कहाँ...

मैने भी मेरे अंडरवीयर को ऊतार दिया. मेरा लंड तना हुआ ऊपर नीचे होते हुए ताई को सलामी देने लगा, अब मै और ताई दोनों नंगे थे।

मै ताई की चुचीया दबाने लगा..

संतोष ताई - "हाय बेटा तेरा तो बुहत बड़ा और मोटा है",

ताई मेरे लंड को गौर से देखने लगी.

मैने कहा क्यों ताऊ जी का बड़ा नहीं है,

ताई- नहीं, वो तो इससे बहुत छोटा है, तेरा तो बुहत मोटा और लंबा है.

मै- देख लो ताई जी भर के देख लो.

मै नीचे की तरफ आया और ताई की झाँटों से भरी चूत को देखते हुए कहा - ताई तेरी चुत तो करारी है. मन कर रहा है कि इसे चुम लू.

(सभी औरतो की तरह संतोष ताई जी ने भी वही कहा )

ताई- नही बेटा ये गंदी जगह है यहाँ मुह मत लगा.

मै- ताई ये तो बहुत अच्छी जगह है, इससे अच्छी जगह और है ही नहीं...

मैने ताई की टांगों को पूरी तरह फैलाते हुए कहा।

अब ताई की चूत खुल कर मेरे सामने आ गयी, ताई की चूत के छेद से उत्तेजना के मारे पानी की बूँदे निकल रही थी.

मै होठो से ताई की जांघे चुमने चाटने लगा,

मैने अपना मुँह ताई की चूत के पास कर दिया, "वाह ताई तुम्हारी चूत की खुशबु तो बुहत बढिया है"।

मैने अपने होंठ ताई की चूत के होंठो पर रख दिए।

मेरे होंठ अपनी चूत पर लगते ही ताई के सारे बदन में चीटियाँ रेंगने लगी. मै चूत से निकलते हुए पानी अपने होंठो से चूसने लगा।

संतोष - उह बेटा बुहत मजा आ रहा है..

मै अपने होंठ उसकी चूत से हटाते हुए अपनी जीभ को निकाल कर उसकी चूत के छेद पर फेरने लगा, और अपनी जीभ से चूत से निकलते हुए पानी को चाटने लगा.

और अपने हाथ से उसकी चूत के झाँटों को सहलाते हुए चूत के दाने पर रख दिया और उसे अपने हाथों से मसलने लगा.

ताई का पूरा जिस्म अकड़ कर झटके खाने लगा।

आह्ह श ओह्ह्ह बेटटा...उत्तेजना को सहन न करते हुए ताई अपनी ऑंखों बंद करके झरने लगी.

ताई की चूत से पानी की नदिया बहने लगी और मै चूत के पानी को चाटने लगा.

मेरा चेहरा चूत को चाटते हुए पूरा भीग गया.

मैने लंड को ताई के हाथ मे पकडाते हुए कहा तुम भी इसे प्यार करो...

ताई ना नुकुर करने लगी लेकिन मेरे जोर देने पर वो मान गई.

उसने लंड को पकड लिया और उसे सहलाती हुयी अपनी जीभ निकाल कर चाटने लगी

मैने उसे मुँह मे लेने के लिए कहा......

ताई ने अपना मूह खोलकर मेरे लंड को जितना हो सकता था अपने मूह में भर लिया, और लंड को ज़ोर से चूसने लगी.

ताई का मूह लंड के तनने से पूरा भरकर दुखने लगा इसीलिए उसने लंड को अपने मूह से निकाल दिया.

मुझसे अब रहा नही गया मैने लंड के टोपे को उसकी चूत के निकलते हुए पानी से गीला करते हुए चूत के छेद में फँसा दिया.. और ताई की टांगों को पकडते हुए एक धक्का मार दिया.

ताई दर्द से करीब ऊठी...

संतोष - हाहहह बेटटटा... आररराम.. से मुझझे.. दर्द हो रहा है....

मै ताई के चुचो को मसलने लगा...

और मैने अपने लंड को पीछे खीचते हुए एक और जोर का धक्का मार दिया.

ताई जी को दर्द होने लगा, मैने देखा की ताई जी की चुत पर हल्का सा खून लगा है.. शायद ताई की चुत आज सही ढंग से खुली है....

संतोष - आआआह.. बेटटटा... माररर... डाला ररररे....

आह... तेरा लंड नहीं मुस्स्ल्लल..... है आह मा...

मैने धक्के धीरे धीरे चालु रखे साथ ही ताई के चुचे दबाने लगा..

संतोष - ओहहह आह बेचा तेरा लंड तो मेरी बच्चेदानी में ही घुस गया है आआआह..

मै- बस ताई जी अब पूरा घुस गया है.

मैने अपना लंड ताईजी की चूत से निकला और फिर से जड़ तक घुसा दिया.

संतोष - आहह... बेटा तेरा ये मुसल बुहत मोटा और लम्बा है, उसने मेरी पूरी मुनिया को पूरा भर रखा है ताई जी ने मज़े से सिसकते हुए, आह भरते हुए कहा.

क्यों ताई दर्द हो रहा हो तो निकाल लू, मैने भी ताईजी की चूत मे लंड से हल्के धक्कों के साथ अंदर बाहर करते हुए कहा

संतोष - आआह... नही बेटा अब तो बहुत मजा आ रहा है.

ताईजी अपने चूतड़ उछालते हुए मेरा लंड अपनी चूत में लेने लगी.

अब मै ताई जी की टांगों को पकडते हुए अपने लंड को ज़ोर से उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा.

संतोष - आह्ह इस्सस बेटटा...ऐसे ही मुझे चोदो, बुहत मजा आ रहा है... आआह आज तक आआआह.. मा.. इतना मजा कभी नहीं आया.

अब ताई जी भी मेरे लंड पर अपने चूतड़ उछालते हुए ताल से ताल मिलाने लगी....

मै अब अपना लंड ताईजी की चूत में बुहत तेज़ी के साथ अंदर बाहर करने लगा. ताईजी का मज़े के मारे बुरा हाल था, वह आनंद और मजे से हवा में उड़ रही थी.

ताईजी को मेरा लंड अपनी चूत की गहराइयों तक रगड खाता हुआ महसूस होने लगा.

मै चोदते -2 उसके ऊपर झुकते हुए उसकी चुचियों को पकड़ कर मसलने लगा, और चुचियों को दबाते हुए बुहत ज़ोर के धक्के लगा रहा था.

ताईजी चरम सीमा तक पुहंच चुकी थी उसका बदन बुहत ज़ोर से काम्प रहा था.

संतोष - आहह.. बेटा मै झडननने... वालल..ली हू. मेरी चुत मे लंड ज़ोर से पेलो फाड़ दो अपनी ताई की चूत.

ताई अचानक से चिल्लाने लगी...

मैने अपनी स्पीड एकदम तेज कर दी...

ताईजी का बदन अकडने लगा और उसकी चूत झटके खाते हुए मेरे लंड पर झड़ने लगी...

संतोष - आजहहह ईश ओह्ह्ह बेटा मै झड़....

और ताईजी झडते हुए ज़ोर से चिल्लाते हुए सिसकने लगी.

मै- आजहहह ताईजी तुम्हारी चूत 2 बच्चे पैदा करने के बाद भी बुहत कसी हुई है, में भी झड रहा हू.

और मै भी उसकी चूत में अपने लंड से निकलता वीर्य भरने लगा.

मै ताई के ऊपर ही गिर गया... मेरा सिकुडा़ हुआ लंड अभी भी उसकी चुत मे था.

कुछ देर बाद मै साईड मे लेट गया, मेरा लंड के निकलते ही ताईजी की चुत से मेरा वीर्य और उसकी अपनी चूत का पानी मिलकर बेड की चादर पर गिरने लगा.

ताई अपनी आँखें बंद किये हुए लेटी रही, कुछ देर बाद मै उसके चुचो को मसलते हुए बोला- मजा आया मेरी जान...

संतोष - शरमाते हुए.. अपनी ताई को ऐसे कोई बोलता है, मुझे शर्म आ रही है..

मै- मेरी रानी अब कैसी शर्म, थोड़ी देर पहले तो मेरे मुसल को अपनी चुत मे कैसे ले रही थी..

बता ना मजा आया... और मैने उसकी चुची को जोर से भींच दिया...

संतोष - आआआह.. बेटा धीरे.... . बहत मजा आया...

मै ताईजी के होठ चुसने लगा, जिससे मेरा लंड खडा होने लगा..

मै मारना तो ताजी की गांड चाहता था, पर मैने टाल दिया और एक बार और ताईजी की करारी चुत को चोदने लगा...

मै ताई जी को उकसाने लगा, वो भी शर्म छोड़कर अब खुलके मजे लेने लग गई, पता नहीं क्या -2 बोलने लगी थी....

20-25 मिनट चोदने के बाद मै झड़ गया, ताईजी एकदम थक चुकी थी, आजतक उसकी ऐसी चुदाई नहीं हुई थी...

ताई अपना सिर मेरे सीने पर रखकर नंगी ही सो गई मै भी उसे बांहों मे भर कर सो गया.

 
* अपडेट - 29

ताई अपना सिर मेरे सीने पर रखकर नंगी ही सो गई मै भी उसे बांहों मे भर कर सो गया.

सुबह ताईजी जल्दी ऊठ गई, जिससे मेरी भी आँख खुल गई.. वो मेरे बगल से उठी और अपने कपड़े समेटने लगी…

मेने उनका हाथ पकड़ कर कहा- क्या कर रही हो...

संतोष - अरे ! फ्रेश तो होने जा रही हू … फिर तेरे लिए दुध गर्म करके और मेरे लिए चाय बनाके लाती हूँ...

मै- ऐसे ही जाओ जहाँ जाना है..

ताईजी अपने मूह पर हाथ रखकर बोली हाई… बेटा तुम तो बड़े बेशर्म हो, और मुझे भी बेशर्म बना रहे हो…

अब मै ऐसे बाहर कैसे जा सकती हूँ... माजी ने देख लिया तो..

मेै- वो नही देखेगाी इतनी सुबह, बीमार है वो सो रही होगी, और ज्यादा डर लग रहा है तो एक चादर ओढ़ लो...

ताईजी ने हार मानते हुए अपने शरीर पर एक चादर डाल ली और बाहर निकल गयी…

बाथरूम मे फ्रेश होकर वो किचन में घुस गयी…

उन्होने चाय बनाने के लिए गॅस पर रख दी, और साथ मे मेरे लिए दुआ गर्म करने लगी (क्योंकि मै चाय नहीं पीता हूँ )

मै एकदम नंगा ही बाहर आगया और किचन मै चला गया अभी वो चाय मे चायपती -चीनी डाल ही रही थी, मेैने पीछे से जाकर उन्हें पकड लिया..

मेने उनकी चादर हटाकर एक तरफ रख दी, और अपना कड़क लंड उनकी मस्त उभरी हुई गान्ड की दरार में फँसा दिया और अपनी कमर चलाने लगा..

मेरा लंड उनकी गान्ड के छेद से लेकर चूत के मूह तक सरकने लगा…

संतोष - आहह………सीईईईईईईईईईईईईईईईई…………. बेटटाआाआ…. रुकूऊ…चाय तो बनाने दो… बहुत बेसबरे हो तुम…

मैने ताईजी को पलटा लिया और किचेन के स्लॅब से सटा कर उनके होठ चूसने लगा…

संतोष - दुध उफन जाएगा मेरे राज्जजआ….आआईयईई…..नहियिइ…..रकूओ……

उनकी चुचि को दाँतों से काटते हुए मेने हाथ लंबा करके गॅस बंद कर दी..

मैने अपने हाथ की दो उंगलियाँ उनकी चूत में घुसा दी और अंदर बाहर करते हुए चुचियों को चूसने मसल्ने लगा….

ओह्ह्ह्ह…उफ़फ्फ़…. बहुत बेसबरे हो मेरे सोनाआ….सीईईई…आअहह….आययीईई…

तुम्हारी चुचियों को देखकर सबर नहीं हो रहा होगा... क्या मस्त माल हो तुम…

उनके होठ चबाते हुए मेैने कहा- ताऊजी भी एकदम चूतिया है.. जो इतने मस्त माल को भी नही चोदता... बस खेत मे लगा रहता है.

संतोष - उनका नाम लेकर मज़ा खराब मत करो बेटटाआ……सीईईईई……..

फिर मैने ताईजी की एक जाँघ के नीचे से हाथ फँसा कर उठा लिया और अपना लंड उनकी गीली चूत में खड़े-2 पेल दिया….

अहह……………मैय्ाआआआआ……मारगाई………..बेटटा... धीरीईई…..नहियीईईईईई….डाल सकताआआआअ…..आआआआआअ…..धीरे….

ताईजी का एक पैर ज़मीन पर था, एक हाथ स्लॅब पर टिका लिया था और दूसरा हाथ मेरे गले में लपेट लिया…

मै धक्के लगाने लगा जिससे ताईजी का बॅलेन्स बिगड़ने लगा..

मेैने दूसरी टाँग को भी उठा लिया, अब ताई हवा में मेरी कमर पर अपने पैरों को लपेटे हुए थी..

इससे लंड इतना अंदर तक चला जाता, जिससे ताईजी की हर धक्के पर कराह निकल जाती...

मै लगातार धक्के मारने लगा जिससे उनकी चूत पानी फेंकने लगी…

मेैने उनको नीचे उतारा और स्लेब पर दोनो हाथ टिका कर घोड़ी बना लिया…

और दम लगाकर लंड को उनकी चूत मे पेल दिया… एक ही झटके में मेरे टट्टे… गान्ड से टकरा गये..

मेैरे धक्कों से ताईजी हाई..हाई… कर उठी… मै जोर - से धक्के मारने लगा... मेरे धक्कों ने उनकी कमर चटका दी..

20 मिनट की मेहनत के बाद मै उनकी चुत मे झड़ने लगा... इस बीच ताईजी दो बार झड़ गई....

वो लडखडाने लगी उनके पैरों मे ताकत नहीं बची... वो 5 मिनट तक बैठी रही...

मै फ्रेश होने चला गया…

कोई 15 मिनिट बाद ताईजी दुध और चाय लेकर कमरे में पहुँची.. तो मेने उन्हें गोद में बैठा लिया और मै दुध पिने लगा...

ताईजी चाय पीते बोली - बहुत कुटाई करते हो बेटा. तुमने सच में मुझे तो तोड़ ही डाला...

मै- आपको मज़ा नही आया...

संतोष - बेटा मज़ा..क्या. मैने तो आज पहली बार जाना है कि चुदाई ऐसी भी होती है… इससे ज़्यादा जिंदगी में और कोई सुख नही हो सकता… सच में…तु मुझे कभी मत छोड़ना, मै अब तेरी हू.

मै- हा मेरी जान तु मेरी है, तुम बस खुश रहो.

वो मेरे सीने से लिपट गई...

फिर मै दुध पीकर घर की तरफ आ गया...

 
* अपडेट - 30

फिर मै दुध पीकर घर की तरफ आ गया...

मै अपने रूम मे चला गया, फिर मै नहा धोकर बड़े ताऊजी की तरफ चला गया...

वहाँ पर भाभीया और ताईजी बैठी हुई बाते कर रही थीं..

मै उनके पास बैठ गया, मै उनकी बातें सुनने लगा..

हमारे गाँव मे शादी थी, वैसे वो बडे ताऊजी के मित्र थे और हमारे घर पर आना जाना था...

सभी उसमे जाने के बारे मे बाते कर रही थीं.

वो बाते कर रही थी की वो क्या पहन के जायेगी (औरतो को ये सब चीजें बहुत पंसद होती है )

पंकज भाभी कुछ उदास थी, मुझे पता था वो उदास क्यों है.. मैने पूछा प्रोग्राम कब का है

तो संगीता भाभी बोली - कल शाम का है...

मै- पंकज भाभी आप क्या कर रही है. वो बोली कुछ नहीं

मै- आप तैयार रहना आधे घंटे मे हम शहर चंलेगे कपड़े लाने के लिए...

संगीता- किसके कपड़े...

मै- भाभी और दोनो बच्चियों के

रेखा भाभी - आप जा रहे हो...

मै- हा अनिल भाईजी ने कहा है...

संगीता - कितने पैसे दिये है देवर जी ने.

पंकज- 2500

संगीता - इतने मे कैसे आंयेगे, मेरे पास भी नहीं है वरना मै दे देती....

मै - भाभी आ जायेंगे

फिर मै भाभी को आधे घंटे मे चलने का बोलकर रूम मे आ गया.

उस दीन जो पैसे संदूक से निकाले थे, उनको भी गिनने लगा

वो 2 लाख 90 हजार थे, 7 हजार रोशनी काकी को दे दिये और दो हजार कुलदीप को, एक मैने ख़र्च कर दिये...

मैने उनमें से एक लाख रूपये निकाल लिये, और बाहर आ गया...

मैने अपनी बुलेट घर से बाहर निकाल ली, उसकी आवाज सुनकर भाभी भी आ गई...

मै उनको बैठा कर शहर की तरफ चल पड़ा...

पंकज - आपने सबको बोल दिया की इतने रूपयो मे कपड़े आ जायेंगे, पर कैसे आंयेगे...

मै - भाभी मै हू ना, आप चिंता मत करो.

आपके इससे ज्यादा पैसे नहीं लंगेगे, इनमे भी बचेगे.

पंकज - कैसे.

मै- मै हू ना, मुझ पर भरोसा रखो.

पंकज - आप पर पूरा भरोसा है, तभी आई हू...

हम पास वाले शहर मे आ गये, पर मेरा इरादा कुछ और था.

मै बाईक को बडे शहर जो हमसे 45-50 किलोमीटर दूर है ( जो पहले बताया ) की तरफ चल पड़ा.

पंकज - शहर तो पिछे रह गया... हम कहाँ जा रहे है?

मै- हम ******* शहर जा रहे है.

पंकज - वहाँ क्यो

मै- वहाँ पर अच्छा सामान मिलता है, सभी चीजों के बड़े -2 शोरूम है.

पंकज- वहाँ पर तो कपड़े महंगे मिलते है..

मै- तो क्या हुआ.... आप तो बस सफर का मजा लो...

भाभी कुछ नही बोली...

कुछ देर बाद भाभी ने मेरे कंधे के पीछे अपना सर रख लिया...

थोड़े समय मे हम बड़े शहर पहुँच गये...

मैने बाईक एक बडे शोरूम के बाहर रोक दी....

मै भाभी को लेकर अंदर चला गया... पहले मै भाभी को बच्चों के सेक्शन मे ले गया....

भाभी सभी चीजों को ध्यान से देख रही थी..

मैने पूछा क्या हुआ...

पंकज - ये तो बहुत और महंगा लग रहा है...

मै- कपड़े खरीदो...

भाभी कपड़े लेने लगी... वो कपड़ो के रूपये पुछने लगी तो मैने सेल्स गर्ल को बताने से मना कर दिया.

वो दौनो की एक -2 ड्रेस ले रही थी

मै- मैने जोर दे के कहाँ भाभी एक -2 से क्या होगा और ले लो...

बच्चियों के लिए 3-3 जोड़ी कपड़े लेकर हम भाभी के लिए कपड़े लेने लेडीज़ सेक्सन मे आ गये...

वहाँ पर साडी़या, सुटे, मॉर्डन कपडे सबके अलग -2 सेक्शन थे....

मै भाभी को साड़ी वाले मे ले गया...

मैने और भाभी ने एक साड़ी पंसद की... साड़ी बहुत अच्छी थी,

मैने उनको एक और लेने के लिए कहाँ पर उन्होंने मना कर दिया...

सेल्स गर्ल ने उनको ट्राई करने के लिए कहा, वो ट्राई रूम मे चली गई...

उनके जाने के बाद मै उनके लिए एक साड़ी अपनी पंसद की देखने लगा... मैने एक अच्छी सी साड़ी उनके लिए पंसद तर ली.... मैने वो साड़ी सेल्स गर्ल को दे दी और उसे लग रखने के लिए बोल दिया...

कुछ देर बाद वो बाहर आयी.. मै उनको देखता रह गया, क्या लग रही थी वो साड़ी मे...

मै- आप बहुत सुंदर लग रही हो.... एकदम हीरोइन की तरह...

भाभी मेरी बात सुनकर शरमा गई...

मैने अपने फोन मे उनकी 2-3 फोटो ले ली, वो शरमाने लगी..

फिर वो चेंज करके आ गई....

फिर हमने उनके लिए दो अच्छे से सूट लिये...

मैने उनसे पूछा और कुछ कपड़े लेने है..

पंकज - नहीं, और कपड़े नहीं लेने है, लेकिन.....

उन्होंने अपनी नजरे झुका ली...

मै- क्या भाभी

पंकज - वो.. वो कुछ नहीं

वो बोल नहीं पा रही थीं, पर मै उनकी बात समझ गया की उनको क्या चाहिए....

मैने सेल्स गर्ल को कहा - आप इनको अंडरगारमेट्स दिया दो. बढिया और अच्छी क्वालिटी ते दिखाना...

(भाभी 9th class तक पढ़ी थी, वो अंडगार्मेंटस का मतलब तो नहीं समझी पर उनको पता चल गया था कि मैने क्या बोला है)

भाभी का चेहरा शरम से लाल हो गया, मै काउंटर की तरफ आके खड़ा हो गया..

सेल्स गर्ल उनको अच्छे और बढ़िया क्वालिटी के ब्रा और पेन्टी दिखाने लगी... भाभी उनमे से पंसद करने लगी.

सेल्स गर्ल - मैडम ये जो आपके साथ आये है ये कौन है, आपके पति तो नहीं लगते.

पंकज भाभी - ये मेरे देवर है.

सेल्स गर्ल - बहुत समझदार और अच्छे लगते है, कैसे बिना बताये आपकी बात समझ गये और आप सही से देख सको इसलिए साईड मे चले गये...

पंकज भाभी - हाँ, बहुत अच्छे है.

और भाभी ने मेरी तरफ देखा

भाभी ब्रा और पेंटी पंसद करके आ गई, सेल्स गर्ल यारा सामान काउंटर पर ले आयी.

मैनेजर ने बिल बना दिया, भाभी रूपये देने के लिए बिल देखने लगी...

पंकज भाभी(चौंक कर )- ये क्या है, कितने का बिल है.

मैने बिल ले लिया.... बिल 16000 हजार का था...

मैने पैसे निकाल कर मैनेजर को दे दिये, भाभी को समझ नहीं आ रहा था...

मैने सारा सामान ले लिया और भाभी को बाहर चलने के लिए बोला, भाभी बाहर जाने लगी...

मैने चुपके से मेरी पंसद की हुई साड़ी ले ली और उसका पैमेंट कर दिया, मै भी बाहर आ गया...

बाहर आते ही भाभी मुझसे सवाल करने लगी

पंकज - आपने इतने रूपये क्यो दिये...

मै- भाभी कपड़े इतने के ही थे..

पंकज- इतने महंगे कपड़े, नही मुझे नहीं लेना... चलिए वापिस कर देते है.

मै- भाभी मैंने रूपये दे दिये ना, आप चिंता मत करो...

पंकज - आप इतने रूपये......., नहीं.. नहीं मै आपसे नहीं ले सकती....

मै- मैने कब कहाँ मै ये रूपये दे रहा हूँ, ये कपड़े मै अपनी तरफ से दिला रहा हूँ.

पंकज भाभी - नहीं, मै नहीं ले सकती बहुत महंगे है...

मै- क्यो नहीं ले सकती.

पंकज भाभी - बस नहीं ले सकती

मै- मै आपका कुछ नहीं लगता, मेरा आप लोगों पर कोई हक नहीं है.

ठीक है अगर आपको नहीं लेने तो इन्हें फेंक दो.

और मै बाईक के पास आ गया...भाई ने देखा की मै नाराज हो गया हूँ...

पंकज भाभी- मेरा ये मतलब नहीं है...

मै कुछ नहीं बोला

पंकज भाभी - आप नाराज मत होईए, मै रख लेती हू.

अब तो मान जाईए

मै मुस्कुराने लगा, मैने भाभी को गले लगा लिया...

भाभी मुझे अपने 2500 रू. देने लगी, मैने मना कर दिया...

मै - ये आप अपने पास रख लिए, आपके काम आएंगे...

हम दौनो वहाँ से चल पड़े, हमारे पास सामान थोड़ा ज्यादा था लेकिन हमने ऐडजस्ट कर लिया...

मै भाभी को एक रेस्टोरेंट पर ले गया... भाभी ने पूछा हम यहाँ क्यों आये है

तो मै बोला थोड़ी भूख सी लग गई है कुछ खा लेते है...

भाभी ऐसी जगह पर पहली बार आयी थी

मैने खाने के लिए कुछ मंगा लिया, हम दोनो ने खाया और वहाँ से आ गये...

मुझे चॉकलेट खाने की आदत है, तो मैने बाईक एक शॉप पर रोक दी., और बहुत चॉकलेट से आया, अपने लिए और बच्चा के लिए....

फिर हम घर की तरफ चल पड़े, घर पहुँचते शाम हो गई ...

मैने भाभी को ऊतारा कर बुलेट अंदर खडी कर दी... मै अपनी पसंद की हुई साड़ी और चॉकलेट घर पर ले गया...

साड़ी को मेरे रूम मे रख दिया, ऐर चॉकलेटस् को फ्रिज मे रख दिया... कुछ चॉकलेट मैने बच्चों के लिए ले ली और ताऊजी के घर पर आ गया...

वहां पर सब भाभी से सवाल कर रहे थे इतनी देर कैसे हुई..

मै- वो मेरे कारण देर हो गई, मुझे कुछ काम था कॉलेज को इसलिए उसमे टाईम लग गया...

भाभी मेरी तरफ देखने लगी, मैने उनको चुप रहने का इशारा कर दिया..

दौनो भाभी और ताईजी पंकज भाभी के कपड़े देखने लगी...

कपड़े देखकर सभी तारीफ करने लगे...

संगीता- पंकज कपडे तो बहुत अच्छे है...

रेखा - पर तुम तो 2500 रू. ही ले गई थी, इतने कम रूपये मे इतने ज्यादा और इतने अच्छे कपड़े कैसे आ सकते है.

पंकज भाभी मेरी तरफ देखने लगी...

मै- भाभी वो क्या है कि मेरे दोस्त के पापा की कपड़ों की दुकान है शहर मे,हम वहाँ पर गये थे... वहां पर सैल लगी हुई थीं जिसमे कपड़े बहुत सस्ते ना मिल रहे थे और आज आखिरी दिन था तो हमे डिस्काउंट भी ज्यादा मिल गया.

संगीता- तो आपने हमे क्यो नहीं बताया..

मै- मुझे भी वहाँ जाकर पता चला...

 
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