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Incest सबका लाडला (फैमिली स्टोरी )

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# अपडेट - 79

कुछ देर मे मैं घर पहुँच गया... घर जाते ही पहले फ्रेश हुआ और तैयार होकर बाहर आने के लिए हॉल मे पहुँचा तो हॉल का मेन डोर खुला और पंकज अंदर आई...

वो आज सलवार सूट नहीं लहंगे, चुनरी और ब्लाउज मे थी. बहुत खूबसूरत लग रही थी... उसका तन बदन पहले से ज्यादा खिल गया था...

वो मेरे पास आकर - कहाँ थे कल से...

मैं - दोस्त के पास गया था...

पंकज - तो आप बता सकते थे.

मैं - मुझे याद नहीं रहा, पर बाद मैं बता दिया था ना...

पंकज - पता हैं सबको कितनी परेशानी हो रही थी...

मैं - हाँ तो मुझे याद नहीं रहा, अब तुम यार दिमाग खराब मत करो...

पंकज - मुझे बहुत चिंता हो गई थी...

मैं थोड़े मजे लेना चाहता था तो मैं बोला - तो किसने कहाँ था मेरी टेंशन लेने के लिए...

पंकज - किसी ने नहीं कहा था..

मैं - हाँ तो मेरी टेंशन लेने की जरूरत नहीं है..

मेरी बात सुनकर पंकज की आँखों मे आँसू आ गये..

पंकज - सही है, मैं कौन होती हूँ टेंशन लेने वाली...

इतना बोलकर वो जाने लगी, तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया...

मैं - कहाँ जा रही हो...

पंकज - बाहर, काम है मुझे...

मैंने उसे अपनी तरफ खींच लिया. उसके सुडोल तने हुए चुचे मेरे सीने से आ लगे.

वो हटने लगी तो मैंने उसकी कमर पर हाथ रखकर कस लिया... हम दोनों चिपके हुए थे...

मैंने उसके चेहरे को ऊपर किया तो उसकी आँखे पानी से भरी हुई थी, जो उसके गालो को भिगो रहीं थी...

मैं - मेरी भोली रानी मैं तो मजाक कर रहा था... मैं कभी तुम पर गुस्सा कर सकता हूँ...

पंकज - मजाक... मुझे लगा कि...

मैं - ऐसा कैसे सोचा..तुम्हारा तो मुझ पर पूरा हक है तुम मेरे होने वाले बच्चे की माँ जो हो (अभी वो गर्भवती नहीं हुई थी ).

मेरी बात सुनकर पंकज के चेहरे पर शरम और मुस्कान के मिले जुले भाव आ गये...

मैं - अब शंत हो जाओ, तुम्हारे चेहरे पर ये उदासी अच्छी नहीं लगती...

पंकज - पहले रूलाते हो फिर चुप होने को बोलते हो..

मैं(एक हाथ से कान पकड़ कर ) - सॉरी... माफ कर दो.

पंकज (मेरा हाथ नीचे करते हुए )- मैं नाराज नहीं हूँ...

मैंने पंकज के चेहरे को एक हाथ से करीब लाया, मेरे होंठ उसके चेहरे के बिल्कुल करीब थे.. पंकज ने शरम और उतेजना के मारे अपनी आँखें बंद कर ली...

मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसके गोरे गालो को भिगोते आंसुओ को चाटने लगा... पंकज की आँखे खुल गई वो मेरी तरफ देखने लगी,

मैं उससे नजरे मिलाते हुए दोनों तरफ के आंसुओ को चाटते हुए - ये बहुत कीमती हैं मेरी जान...

मेरी बात सुनकर पंकज ने मुझे कसकर गले लगा लिया... कुछ देर हम दोनों एक दूसरे की बांहो मे ऐसे ही खड़े रहे...

फिर मैंने उसकी कमर को हाथों मे भरकर ऊपर उठा लिया और उसके गुलाबी लबो का रस पिने लगा.. या फिर यूँ कहुं की हम दोनों एक दुसरे का रसपान करने लगे.. पंकज ने मेरे कंधे के दोनों तरफ हाथ डाल लिये...

मैं किस करते हुए ही हॉल के सोफे के पास आ गया और उल्टा ही उस पर लेट गया...

अब पंकज मेरे नीचे थी और मैं उसके ऊपर था...

उसके होंठों को चुमते हुए मेरे होंठो धीरे धीरे उसकी गर्दन पर आ गये और उसे चुमने लगे, मेरी जीभ उसकी गर्दन को चाटते हुए उसका स्वाद चखने लगी..

पंकज के हाथ मेरे बालों को सहला रहे थे, जब मेरे होंठ उसके गर्दन की चमड़ी गो होंठों मे दबाकर चुसते तो उसकी अंगुलियाँ उतेजना के मारे मेरे बालों को खींचने लगती...

इसी बीच मैंने उसके लहंगे को ऊपर उठा दिया और उसकी पेंटी को निकाल दिया...

मेरे होंठ उसके बोबो तक पहुँच गये, मैंने जल्दी से उसके बोबो को ब्लाउज और ब्रा से आजाद कर दिये और उन रसीले आमों को मुंह मे भरकर चुसने लगा...

पंकज - आआहह.. उम्ह्हह.. उह... करते हुए सिसकने लगी...

मैंने चुचो को छोड़ा और अपनी पेंट और फ्रेंची उतार दी, मेरा लंड एकदम कड़क हो गया, वो झटके मार कर रहा था कि जैसे बता रहा हो कि वो पंकज की चूत मे जाने के लिए कितना तड़प रहा है...

मैंने लंड को पंकज की चूत पर टिकाया जो अपने सैंया के इंतजार मे रस बहा रही थी.. मैं लंड को चुत के दाने पर घिसने लगा..

मैंने पंकज की तरफ देखा, उसकी आँखें वासना से भरी थी, उसके उतेजना से होंठ फड़फडा़ रहे थे, वो मेरी तरफ देख रही थी, जैसे विनती कर रही हो कि अब देर ना करो, डाल दो मूसल ओखली मे...

मैंने भी देर नहीं कि और एक झटका लगा दिया जोर से, और आधे से ज़्यादा लंड डाल दिया...

पंकज ने उतेजना और दर्द के मारे मुझे कस कर पकड़ लिया...

मैं उसके होंठों को चुसने लगा, उसके हाथ मेरी पीठ को सहला रहे थे...

मैंने लंड को थोड़ा बाहर निकाला और लगा दिया एक और धक्का, लंड़ जड़ तक चला गया.

मैं पूरा लंड घुसाकर रूक गया. और उसकी चुचियों को चाटने लगा.. मैं कुछ देर ऐसे ही करता रहा..

वो मेरी तरफ देख रही थी, उसके चेहरे पर नाराजगी थी, पर मैं चुचों को चाटता रहा.. उसने मेरा चेहरा अपने हाथों मे पकड़ा और मेरी तरफ देखने लगा..

मैं - क्या हुआ...

वो नाराजगी और गुस्से के भाव दिखा रही थी...

मैं - बोलो तो..

पंकज - करो ना.. उसने अपने चूतड़ो को लंड पर दबाते हुए कहा...

मैं - क्या करूं...

पंकज - आप बुहत बदमाश हो..आप मुझसे गन्दी बाते सुनना चाहते हो.

मैं - तो बताओ क्या करूं...

पंकज - आप अपने लंड को अपनी रानी की चूत में अंदर बाहर करो..

बोलकर उसने मेरे होंठों को चुम लिया..

उसकी बात सुनकर मैं चूत में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा..

पंकज - आह्ह्ह्ह... उऊह.. शहहह.. हाँ ऐसे ही मेरे राजा... पंकज ने सिसकते हुए अपनी दोनों टांगों को मेरी कमर पर लपेट लिया.

मैं अपना लंड पूरा बाहर तक खींचकर उसकी चूत में पेल रहा था, मेरे हर धक्के के साथ उसका पूरा जिस्म कांप रहा था.

यही सिलसिला कई देर तक चलता रहा. पंकज अब झड़ने के बिलकुल क़रीब थी इसीलिए उसका पूरा जिस्म अकड़ने लगा था...

पंकज - आह्ह्ह्हह्ह राज्ज्जजा.. आह्हा...

मैं भी आने ही वाला था, तो लंड को जितना हो सकता था उतनी ज़ोर और तेज़ी के साथ अपनी रानी की चूत में अंदर बाहर करने लगा.

सिसकते हुए पंकज की आँखें बंद हो गई और उसकी चूत मेरे लंड को ज़ोर से कसते हुए उस पर झटके मारते हुए पानी छोडने लगी.

मैं भी खुद को रोक नहीं पा रहा था और चूत में झटके मारने लगा और अपना लावा छोड़ने लगा, और अपनी रानी के ऊपर ही ढेर हो गया.

दो मिनट बाद मैं खड़ा हो गया, वो भी अपनी आँखें खोलते हुए खड़ी हो गई और मुझसे लिपट गई...

मैं - तुम तो पूरी ताकत निकाल लेती हो... बहुत मेहनत करवाती हो...

फिर वो अपने कपड़े पहनने लगी... मैं बाथरूम मे फ्रेश होने चला गया...

बाथरूम से बाहर आया तब वो चली गई थी...

मैं बाहर आने लगा तो गेट पर रौनक मिल गई...

 


# अपडेट - 80

मैं - तुम तो पूरी ताकत निकाल लेती हो... बहुत मेहनत करवाती हो...

फिर वो अपने कपड़े पहनने लगी... मैं बाथरूम मे फ्रेश होने चला गया...

बाथरूम से बाहर आया तब वो चली गई थी...

मैं बाहर आने लगा तो गेट पर रौनक मिल गई...

आगे...

रौनक - चाचा मम्मी ने ये दूध दिया है...

मैंने दूध का गिलास ले लिया... और रूम मे जाकर डेयरीमिल्क ले आया..

मैं - रौनक ये लो , तुम्हारे और वंशिका के लिए...

रौनक - थैंक्यू चाचा..

मैं - थैंक्यू से काम नहीं चलेगा, एक पप्पी देनी पड़ेगी..

वो गाल पर पप्पी देके चली गई. मैं दूध पीने लगा, दूध मे काजू बादाम डाले हुए थे...

पंकज की केयर देख कर उस पर बहुत प्यार आ रहा था.

कुछ दिनों मे हमारा रिश्ता बिल्कुल बदल गया था, पहले तक हम देवर भाभी थे, पर आज वो मुझे अपने पति जैसा मानती थी, वो मेरी लंड दुलारी बन गई...

दूध पीकर मैं खेतों की तरफ चला गया चक्कर लगाने, कि फसल कैसी है कुछ दिनों से पापा तो थे नहीं...

एक घंटे बाद मैं वापिस आया तो देखा कि घर के बाहर हमारी गाड़ी खड़ी है, और मम्मी पापा गाड़ी से उतर रहे हैं. मैं जल्दी से मम्मी के पास चला गया और उनके गले लग गया...

मम्मी - मेरा प्यारा बेटा.. कैसा है तु..

मैं - ठीक हूँ आप कैसे हैं...

मम्मी - हम भी ठीक हैं...

फिर हम अंदर आ गये, मम्मी पापा को पानी पिलाया...

मैं - अब नानाजी कैसे है.

मम्मी - अभी पहले से तो अच्छे है, लेकिन पूरी तरह ठीक नहीं हुए हैं..

मैं - कब तक होंगे.

पापा - डॉक्टर ने कहाँ है कि कुछ दिन लंगेगे...

मम्मी - राहुल... तुझे एक काम करना होगा...

मैं - हां बोलिए मम्मी..

मम्मी - बेटा तुझे कुछ दिनों के लिए तेरे नाना नानी के पास जाना होगा.

मैं - क्यों मम्मी..

मम्मी - वहाँ पर तेरी जरूरत है, तेरे नाना को चैकअप के लिए हॉस्पिटल ले जाना होता हैं और डॉक्टर से मिलना, उनकी दवाईयां बहुत से काम हैं. ये सब तेरी नानी और मामी से नहीं हो पायेगा. तु रहेगा तो उनको परेशानी नहीं होगी, तुझे उनके पास जाना होगा..

मैं - ठीक है.. मैं चला जाऊंगा.

मम्मी - कब जायेगा तु..

मैं - आज ही चला जाता हूँ...

मम्मी - आज ही..

पापा - हाँ ये ठीक रहेगा..

मैं - हां कुछ देर मे निकल जाऊंगा...

कुछ देर तक हम बातें करते रहें, फिर मैंने अपने कपड़े पैक किये और बुलेट पर निकल पड़ा. डेढ़ घंटे के लगभग मैं पहुंच गया..मैं पहुँचा तब शाम हो गई थी.

मैंने बुलेट बाहर खड़ी करी और अंदर चला गया. मुझे देखकर नानी, मामी खुश हो गई... मैंने उनका आशीर्वाद लिया...

नानी - कैसा है मेरा बेटा...

मैं - ठीक हूँ, आप कैसे हो..

नानी - मैं भी ठीक ही हूँ...

मामी - तुम तो जल्दी ही आ गये राहुल, दीदी भी तो सुबह ही गये हैं..

मैं - हां मामीजी, उनके पहुँचने के कुछ देर बाद ही मैं चल पड़ा था. मम्मी ने कहा की मेरी यहाँ जरूरत है.

नानी - हां बेटा, तु रहेगा तो बहुत मदद हो जायेगी. मुझसे तो कुछ होता ही नहीं, इतने दिन सुमन और जंवाई जी थे तो सब उन्होंने ही किया..

मैं - मैं आ गया हूँ ना नानी आप टेंशन मत लो... नानाजी कहाँ पर है..

नानी - वो कमरे मे हैं...

मैं और नानी नानाजी के पास चले गये, मैंने उनका आशीर्वाद लिया... कुछ देर तक हमने बातचीत की

परिचय :-

नाना - बलवान सिंह (63 वर्ष )

हट्टे कट्टे, हाईट लंबी है.

नानी - कांता देवी (61 वर्ष )

ये हल्की सी मोटी हैं, हाईट ठीक हैं ज्यादा नहीं हैं.

इनके दो बच्चे हैं. एक मेरी मम्मी और दूसरे मेरे मामा..

मामा - गोपाल (38 वर्ष )

मामा आर्मी मे हैं. एकदम आर्मी मैन जैसे लंबे चौड़े हैं.

मामी - (36 वर्ष ) ( साईज - 36D -30 -38)

मामी 5'5" जितनी लंबी हैं, गोरा रंग,सुंदर चेहरा, मस्त कसा हुआ बदन...

मामा का बेटा - पवन (13 वर्ष )

पवन शहर मे पढ़ता है. मामा ने उसे हॉस्टल मे ड़लवा रखा है ताकि वो अच्छे से पढ़ सके...

कुछ देर तक मैं उनके पास बैठा रहा... फिर सब ने खाना खाया...

नानाजी का घर बड़ा था. नीचे कई कमरे, बैठक, किचन आदि सब थे. ऊपर छत पर भी 2-3 कमरे बने हुए थे.

रात मे नाना नानी एक रूम मे सो गये. मामी भी उनके पास के रूम मे सो गये, अगर रात मे कुछ जरूरत पड़े तो. और मैं छत पर सो गया...

सुबह मैं तैयार होकर नानजी के पास आ गया, आज उनको लेकर डॉक्टर के पास जाना था, तो हम नाश्ता करके निकल पड़े..

नानाजी के पास गाड़ी थी, ये गाड़ी मामाजी ने खरीदी थी कुछ समय पहले... नानाजी, नानीजी और मैं हम तीनों हॉस्पिटल आये थे. मामी घर पर थी. घर पर भी तो बहुत काम होता हैं...

हम नानाजी के चैकअप के लिए डॉक्टर के पास आ गये...

 


# अपडेट - 81

डॉक्टर ने नानाजी का चैकअप वगैरह किया...

मैं - डॉक्टर अब नानाजी की हेल्थ कैसी हैं.

डॉक्टर - इनकी हेल्थ पहले से बेहतर हैं, सुधार हो रहा है धीरे धीरे...

मैं - कितना समय लगेगा ठीक होने मे..

डॉक्टर - देखिए समय कैसे बता सकते हैं, पर कुछ दिनों मे हो जायेंगे...

नानाजी - डॉक्टर साब दवाई लेने के बाद नींद आने लगती हैं..

डॉक्टर - ये सब नॉर्मल हैं आप चिंता मत करिये... इस बार मैं दूसरी मेडिसिन लिख रहा हूं, इनका पावर कुछ है.

मैं - ठीक है डॉक्टर..

डॉक्टर - आप एक काम करिये.. आप इनकी मालिश करिये. इससे ये होगा कि इनकी बॉडी रिलेक्ल होगी और रिकवरी मैं भी मदद मिलेगी...

नानीजी - कैसी मालिश.. कुछ नहीं पता...

मैं - नानीजी आप चिंता मत करो.. मुझे पता है. डॉक्टर ऑयल मसाज से कोई प्रॉब्लम नहीं होगी...

डॉक्टर - मालिश से क्या प्रॉब्लम होगी. इससे इनकी बॉडी को ही आराम मिलेगा...

मैं - थैंक्यू डॉक्टर...

फिर हम मेडिसिन वगैरह लेकर वहाँ से आ गये...दोपहर तक घर पहुंचे...

घर पहुँचकर नानाजी को खिचड़ी खिलाई...

फिर मैंने मामी को बोला - मामीजी आप कटोरी मे थोड़ा तेल ले आईए हल्का सा गर्म करके...

मामी - किस लिए...

नानी - इनकी मालिश करने के लिए...

मामी तेल ले आयी, नानाजी को तखत पर लेटा दिया, मैने पेंट शर्ट निकाल दिये और नीचे टॉवल लपेट लिया...

मैंने नानाजी के हाथों, पैरो, कमर पूरी बॉडी की मालिश कर दी...

मैं - नानाजी कैसा लग रहा है..

नानाजी - बेटा बहुत अच्छा लग रहा है, ऐसे लग रहा है जैसे शरीर से वजन कम हो गया है. पूरा शरीर हल्का हो गया है.

मैं - वो तो होना ही था... अब आप आराम करिये.

नानाजी आराम करने लगे, मैं नहाने के लिए चला गया... नहाकर मैने भी लंच किया...

कुछ देर नानाजी के पास बैठा फिर बाहर घूमने चला गया, मैं बहुत बार आता हूं तो आस पास के एरिये को जानता हूँ.

कुछ देर घुमने के बाद मैं घर आ गया... रोज का यही रूटीन था..

नानाजी की मालिश करना, उनको दवाई देना, कभी डॉक्टर के पास चैकअप के लिए ले जाना, सारे काम करता. मुझे आये हुए 8-10 दिन हो गये थे अब नानाजी की हेल्थ मे बहुत सुधार हो गया था..

इन दिनों मे मेरी मामी से बात हुई थी , पर ज्यादा कुछ नहीं हुई थी...

एक दोपहर मैं नानाजी की मालिश करके नहा रहा था. मैं बाथरूम मे सिर्फ टॉवल लेकर जाता हूँ...

मैं नहाकर नीचे टॉवल लपेट कर बाहर आया. और ड्रेसिंग को सामने खड़ा हो गया...

मैं बॉडी लॉशन लगा रहा था, तभी मामी अंदर आई..और बोली - राहुल नीचे आ जाओ और खाना खा लो...

 


# अपडेट - 81

बोली - राहुल नीचे आ जाओ और खाना खा लो...

मैं - जी मामी, अभी आता हूं, बोलते हुए मैं मामी की तरफ पलटा...

तभी मेरा तोलिया साला धोखा दे गया और वो खुल गया मैं हो गया नंगा...मेरा लंड़ जो एकदम टाइट था वो बाहर आ गया.

मामी की नजरे मेरे ऊपर थी, उनकी नजरे मेरे नंगे शरीर को देख रही थी. मेरे आसमान मे सलामी देते हुए लंड को देखा तो उनका मुह खुला का खुला रह गया.

ऐसी परिस्थिति में मुझे समझ नहीं आ रहा था क्या करूं. मामी की नजरे मेरे लंड पर थी करूँ तो क्या करूं अब...

मैंने जल्दी से खुद को संभाला और जल्दी से तौलिये को फिर से लपेटा. मामी भी होश मे आ गई वो कमरे से जाने लगी पर उन्होंने मेरी तरफ देखा और चली गई.

सबकुछ इतना जल्दी हो गया था की कुछ समझ ही ना आया, मैं आया तैयार होकर नीचे आ गया...

नानी और मामी वहीं पर बैठी थी, मैं नानी के पास बैठ गया. मामी मेरे लिए खाना ले आयी. मैं खाना खाने लगा...

फिर नानी नानाजी के पास चली गई.. मैंने खाना खा लिया और वहीं पर बैठ गया. अब हम दोनों ही थे. मुझे थोड़ा अजीब सा महसूस हो रहा था. शरम सी आ रही थी.. समझ नहीं आ रहा था कि कैसे और क्या बात करूं... अनिता भाभी के साथ भी हुआ था पर उनमें और मामी मे बहुत अंतर था..

मैंने हिम्मत करी और बोला - मामी...

मामी - हां...

मैं - वो..वो... सॉरी.... ऊपर रूम मे जो भी हुआ.वो सब गलती से हो गया...

मामी - मुझे पता है उसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है. तुम खुद को दोष मत दो...

मैं - आप नाराज तो नहीं हैं ना..

मामी - नहीं तो...

मैंने मामी की तरफ देखा वो बिल्कुल भी गुस्सा नहीं थी..

मैं - थैंक्यू मामी.. मुझे लगा आप नाराज होगी.. थैंक्यू सो मच...

मेरी बात सुनकर मामी मुस्कुरा दी और बोली - बाथरूम से कुछ पहनकर नहीं आते हो...

मैं - वो मैं सिर्फ अंडरवीयर ही पहन कर आता हूँ, आज वो भूल गया... आप किसी को बताना मत

मामी - हूँ.. तुम तो पूरे के पूरे जवान हो गये...

मैं मामी की तरफ देखने लगा...मैं - क्या मामी..

फिर मामी खड़ी हो गई.. और बोली - ऐसे मत घुमा करो, तुम बड़े हो गये हो और वो...मामी हंसते हुए चली गई... वो बात को अधूरी ही छोड़ गई...

कुछ देर तक मैं सोचने लगा कि मामी का मतलब क्या था. क्या मुझे जो लग रहा है वही है या कुछ और.....

कुछ समझ नहीं आ रहा था...

मैंने दिमाग झटक दिया, और नानाजी के पास चला गया..

नानाजी मुझे देखकर बोले - राहुल तु जरा खेतों की तरफ चक्कर लगा आ. देख की पप्पू काम ठीक कर रहा है..

मैं - ठीक है नानाजी जाता हूँ...

 


# अपडेट - 83

नानाजी मुझे देखकर बोले - राहुल तु जरा खेतों की तरफ चक्कर लगा आ. देख की पप्पू काम ठीक कर रहा है..

मैं - ठीक है नानाजी जाता हूँ...

आगे......

फिर मैं खेतों की तरफ चल पड़ा...

# नानाजी के पास कई बीघा खेत हैं, मामा तो यहाँ हैं नहीं और नानजी की उम्र हो गई है इसलिए नानाजी खेती पप्पू से करवाते है. सारा काम वो करता है. फसल मे से कितना हिस्सा करते हैं ये मुझे नहीं पता. खेत मे मकान है वो वही पर रहता है.

मैं खेत मे पहुँचा तो वहाँ एक औरत झाडु लगा रही थी. मेरे सामने उसकी गांड थी.

मेरी आहट सुनकर वो मेरी तरफ मुड़ी. वो पप्पू की पत्नी शीला थी.

मैं उसे जानता था, पिछली बार जब मैं नाना के घर आया था तब मिला था, वो भी मुझे जानती है.. मैं उसके पास गया..

शीला - नमस्ते जी...

मैं - नमस्ते... पप्पू कहाँ पर हैं..?

शीला - वो तो अभी कुछ देर पहले ही गाँव की तरफ गये हैं किसी काम से...

मैं - कब तक आयेगा...?

शीला - पता नहीं, पर कह रहे थे कि तीन चार घंटे लंगेगे...

मैं - ठीक है... इतना बोलकर मैं चलने लगा...

तभी शीला बोली - आप तो जाने लगे, कुछ देर बैठिए..

मैं वहाँ रखी चारपाई पर बैठ गया... शीला मेरे लिए पानी ले आयी. पानी लेते समय उसकी सांवली कोमल अंगुलियाँ टच हो गई... शीला मेरी तरफ देखने लगी...

# शीला की बारे मे बता दूं उम्र कोई 30 के आस पास होगी उसका एक लड़का हैं जो अपनी बुआ के पास रहता है. शीला का रंग सांवला हैं पतली सी हैं चूची भी ठीक ही हैं पर नैन - नक्श बहुत ही तीखे हैं हाइट भी थोड़ी छोटी ही हैं...

मैंने गिलास ले लिया, शीला वहां पर बची हुई झाडु लगाने लगी.. वो मटक मटकाते कर काम कर रही थी. कभी उसकी गांड मेरे सामने आ जाती तो कभी उसके ब्लाउज से झांकते हुए बोबे.. मुझे ऐसा लग रहा था कि वो जानबूझकर कर रही हैं. वो मुझे अपना जिस्म दिखा रही है...

शीला के व्यवहार मे थोड़ा चेंज लग रहा था. उसने अपनी चुन्नी हटा दी थी.

वो बोली - आप बैठो मैं आती हूँ.. और वो एक कमरे मे चली गई..

मैंने देखा की वो खिड़की के साईड़ मे खड़ी तान्का झाँकी कर रही हैं. मुझे समझ आ गया कि इसके मन मे कुछ है. शीला के बारे मे सोचते ही मेरा लंड अकड़ने लगा. बेचारा बहुत दिनों से प्यासा जो था.

मैं खड़ा होकर शीला के रूम मे आ गया... मुझे देखकर वो घबरा सी गई... मैं उसके पास चला गया, उसका मुँह दूसरी तरफ था. उसकी पीठ मेरी तरफ थी. मैं उस से सट गया.

वो घबराई सी आवाज मे बोली - जी..आप क्या कर रहे हैं...

मैं - कुछ भी तो नहीं.. और मैं उससे चिपक गया...

शीला - ऐसे मत कर्रइ्यए...

मैं - क्या कर रहा हूँ.. क्या इस देवर का आप पे इतना हक़ भी नही है..

शीला - पर कुछ...

उसकी बात पूरी होने से पहले ही मैने अपने हाथ उसके पेट पर रख दिया और सहलाने लगा उसका पेट बुरी तरह काँपने लगा.

वो थर थराती आवाज़ मे बोली - जइईी...क्या कर रहइ्ईए..है...

अब मेरा लंड उसकी गान्ड पर साफ महसूस हो रहा था मै उस से ऐसे चिपका पड़ा था जैसे किसी ने फेविकोल से चिपका दिया हो. मैं उसके पेट को सहलाए जा रहा था तभी मैने अपनी उंगली शीला की नाभि मे डाल दी और अंदर बाहर करने लगा.

वो फिर बोली - जी ये आप क्या कर रहे हो ये ठीक नही है..

मैं - कुछ नही होगा...

और मैंने अपने हाथ उसके छोटे पर सुडौल आमों पर रख दिये... वो मुझसे दूर हो गई...

मैं - क्या हुआ..

शीला - ये गलत हैं...

मैं - कुछ गलत नहीं है, हम तो बस प्यार ही कर रहे हैं...

शीला - मैंने किसी गैर मर्द के साथ नही किया हैं..

मैने अपना हाथ उसकी छोटी छोटी चूची पर रखते हुए कहा - कुछ नहीं होगा...

मैं चूची को दबाने लगा, उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया और बोली - जी ये ठीक नही है. मैं अपने पति को मूह कैसे दिखाउन्गि.

मैं - उसे कुछ पता नहीं चलेगा... और उसका हाथ अपने लंड पे रख दिया मेरे गरम लंड को महसूस करते ही शीला मे करंट दौड़ गया उसने अपना हाथ हटा लिया.. और बोली - जी आप रुक जाओ मुझे खराब मत करो.

मुझे गुस्सा आ गया मैं बोला - ठीक है तुम नहीं चाहती तो... और मैं पीछे हट गया..

वो मेरी तरफ देखने लगी और बोली - मेरी तो इज़्ज़त चली जाएगी ना..

मुझे पता था मन इसका भी है पर घबरा रही है...

मैं - इसमे कोई बदनामी नही होगी तेरी, कुछ नहीं होगा पक्का.

तो वो कुछ नही बोली, मैंने दुबारा उसका हाथ अपने लंड पे रख दिया... मेरे लंड को अपनी मुट्ठी मे कस लिया और बोली - ये तो बहुत बड़ा हैं उनका तो इस से पतला हैं.

मैं उनसे फिर चिपक गया वो बोली - जी आप पे भरोसा करके अपनी इज़्ज़त आपको दे रही हू मेरी बदनामी ना करवाना

मैं - कुछ नही होगा...

मैने उनका चेहरा अपनी ओर किया...

 


# अपडेट - 84

मैने उनका चेहरा अपनी ओर किया और उनके काले काले होंठो को अपने होंठो मे भर लिया शीला सांवली बेशक थी पर थी गन्डास औरत. उनके होंठ डार्क चॉकलेट की तरह थे. मैं पूरे मज़े से उन्हे चूसे जा रहा था वो अपने हाथ से मेरे लंड को सहला रही थी.

काफ़ी देर तक उसके होंठो का रसपान करने के बाद मैं हटा. मैने उसकी चूची को चोली के उपर से ही दबाना शुरू किया वो आहे भरने लगी...

वो बोली - जी थोड़ा आराम से कीजिए ना दर्द हो रहा हैं.

मैं बोला - दर्द मे ही तो मज़ा होता हैं मेरी डार्लिंग और उसकी चोली को खोल दिया ब्रा तो डाली नही थी उसके हल्के सांवले रंग के बोबे बिल्कुल पहाड़ो की तरह तने हुए मुझे निमंत्रण दे रही थे.

मैने अब उसके घाघरे को भी उतार दिया वो मना करती रही पर मैं कहाँ रुकने वाला था.

मैंने उसे चारपाई पर लिटा और मैं भी नंगा होकर उसके ऊपर आ गया. मैने उसकी छोटी सी चूची को अपने मूह मे भर लिया और पीने लगा शीला पर कामुकता चढ़ने लगी मेरा हाथ उसकी पतली पतली जाँघो पर रेंग रहा था. मैं उसकी चूची को निचोड़े जा रहा था. वो पूरी कोशिश कर रही थी कि उसकी उत्तेजित आहे ना निकले.

मेरा हाथ उसकी जाँघो के जोड़ पर पहुंचा, तो उसने टाँगो को थोड़ा सा फैलाया तो मैने कस के उसकी चूत को दबा दिया चूत क्या थी बस कोई थोड़ी सी खुली हुई थी. मैने अपनी उंगली चूत की लाइन पर फेरने लगा.

एक तरफ तो बोबा चूसा और दूसरी तरफ चूत से छेड़खानी शीला बहुत ही उत्तेजित हो गई थी वो पूरे जोश से मेरे लंड को हिलाने लगी. मैं शीला को पूरी तरह गरम कर देना चाहता था ताकि वो खुद मेरे लंड को अपनी चूत मे डालने के लिए बोले.

मैं बारी बारी से दोनो चूचियों को चूसे जा रहा था शीला के निप्पल तनाव से भर उठे थे पूरे एक इंच के हो गये थे जिन्हे मैं अपनी जीभ से रगडे जा रहा था शीला मस्ताती जा रही थी उसके मूह से कामुक सिसकारी निकलने लगी थी. दोनों चुचे मेरे थूक से भीग गये थे.

मैं - भाभी तू तो बहुत गरम है..पप्पू तेरी लेता नहीं क्या..

शीला - वो तो बहुत दिनों मे एक बार करते हैं. उन्हें तो बस खेती दिखती हैं. उनको मेरी कदर ही नही हैं पिछले 2 महीने से एक बार भी नही ली हैं.

मैं - चिंता मत कर भाभी अब मैं तेरी सारी कसर पूरी कर दूँगा और अपनी उंगली उसकी चूत मे सरका दी.

चूत क्या थी पूरी गरम भट्टी थी वो. मैने पूरी उंगली अंदर घुमानी शुरू कर दी.

वो उतेजना मे बोली - ये क्य्अआ कर्ररर रह्ईए.. ह...

मै रस से भरी मुंह मे डालकर चूसने लगा. वो बोली - छी..छी ये आप क्या करते है गंदी जगह मे डाली हुवी उंगली को ऐसे कोई चूस्ता हैं क्या..

मै बोला - मेरी रानी ये गंदी जगह थोड़ी ना है...

मैने उसकी दोनो टाँगो को उपर उठा दिया जिससे उसकी चूत उभर आई.

मै बोला - मेरी रानी तुझे कैसे अब मैं जन्नत की सैर करवाता हू और अपनी जीभ उसकी चूत पे रख दी, शीला का पूरा बदन झंझना गया. मैं जीभ को उपर नीचे करते हुए उसकी छोटी सी चूत को चाटने लगा.

चूत से हल्का हल्का कामरस बहना शुरू हो गया था, जिसकी भीनी - भीनी खुशबू मुझे पागल बनाए जा रही थी. शीला की टाँगे बुरी तरह कांप रही थी.

मैने शीला के पैरों को फैला दिया, काले रंग की चूत छोटे छोटे बालो से भरी और सबसे कामुक तो उसकी वो पंखुड़िया थी जो कम चुदी सी लग रही थी...

मैने बिना देर किए उसकी पंखुड़ियो को अपने मूह मे भर लिया और चूसने लगा. थोड़ा थोड़ा गाढ़ा रस निकल रहा था जो मेरे मुँह मे आ रहा था.

शीला के हाथ उसके बोबो पर पहुच गये, वो उन्हे बुरी तरह मसल रही थी. मेरी जीभ उस गरम चूत का कोना कोना नाप रही थी, फिर मैं उसके दाने को अपनी जीभ से कुरेदने लगा. बहुत ही छोटा प्यारा दाना था. शीला के बदन मे ज्वाला भड़क उठी थी. उसकी मुट्ठीयों ने बेड शीट को कस लिया था. उसकी कमर झटके खा रही थी.

 


# अपडेट - 85

उसकी कमर झटके खा रही थी.

मैं उसके मस्त दाने को चूसे ही जा रहा था. अब मेरी जीभ दाने से लेके चूत के नीचले हिस्से तक रेंग रही थी. तभी शीला ने अपने चुतडो़ को उपर उठा दिया और उसकी चूत से रस की नहर बह गयी ढेर सारा गाढ़ा चूत का रस मेरे मुंह मे भर गया. उसकी कमर नीचे गिर गई. और वो लंबी लंबी साँसे लेने लगी.

कुछ देर बाद वो नॉर्मल हुई...उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे...

मैने उसके होंठो को चुमा और पूछा - मज़ा आया...

वो शरमाती हुई बोली - बहुत ही अच्छा लग रहा हैं... आजतक ऐसा मजा कभी नहीं आया...

तो मैने कहा - चलो अब तुम्हारी बारी हैं तुम भी ऐसे ही इसे चूसो और मैंने अपने लंड को उनकी ओर इशारा किया...

तो उसने भी वही बोला जो अक्सर मुझे औरतें बोलती हैं...

शीला - हाय.. राम...मैं इसे कैसे अपने मुँह में ले सकती हूँ, मुझे तो उल्टी आ जाएगी..

तो मैं बोला - अरे.. कुछ नही होता, अभी जब मैने तुम्हारी चूत को चूसा तो तुम्हे कितना मज़ा आया अब तुम्हारी बारी हैं...

मेरी बात सुन शीला बोली - ठीक हैं पर मैं बस दो मिनिट ही मूह मे लूँगी.

मैं - ठीक है...

उसने अपना सिर को झुकाया और मेरे लंड को अपने मुंह मे ले लिया. जैसे ही उनकी जीभ मेरे लंड के सुपाडे पे टकराई मेरे बदन मे सिरहन पैदा हो गयी. वो अब मेरे सुपाडे पर अपनी जीभ फेरने लगी. उसके थूक से लंड गीला होने लगा. अब उसे भी लंड चूसना पसंद आ रहा था. अब वो चूसे ही जा रही थी.

मैने उसके सर को अपने लंड पे दबाव डालते हुए थोड़ा और झुकाया अब पूरा लंड शीला के मुंह मे था, जो उसके गले तक पहुंच गया था और गले मे उतरने को बेताब हो रहा था. पर शीला भी उसे अपने मुंह से निकाल नही रही थी मुझे बहुत ही ज़्यादा मज़ा रहा था..

मुझे लगा कही मैं उसके मुंह मे ना झाड़ जाउ तो मैने उसे हटाया. पूरा लंड थूक से सना एक दम चिकना हो गया था.

शीला को मैने नीचे लिटा दिया और उसकी पतली जाँघो के बीच आ गया और अपने लंड को चूत पे रगड़ने लगा.

मैं उसे थोड़ा तड़पाना चाहता था ताकि वो खुद मुझे चोदने के लिए कहे. मेरा सुपाडा उसकी चूत के छेद मे फंसा था, जिसे मैं वहाँ पर रगडे जा रहा था.

भाभी की साँसे गरम होने लगी थी. आँखे मस्ती से मूंद रही थी. मैं बिना किसी जल्दी के अपने लंड को चूत के छेद पर घिसे जा रहा था.

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# अपडेट - 86

मैं उसे थोड़ा तड़पाना चाहता था ताकि वो खुद मुझे चोदने के लिए कहे. मेरा सुपाडा उसकी चूत के छेद मे फंसा था, जिसे मैं वहाँ पर रगडे जा रहा था. भाभी की साँसे गरम होने लगी थी. आँखे मस्ती से मूंद रही थी. मैं बिना किसी जल्दी के अपने लंड को चूत के छेद पर घिसे जा रहा था.

आगे.......

तभी उसके मुंह से निकला - अब क्या देर हैं डाल भी दो ना मेरी चूत मे...

ये सुनते ही मैने एक धक्का मारा और चूत की दीवारो को चीरता हुआ आधा लंड अंदर घुस गया. शीला की दर्द से आहह निकल गई उसके होंठ गोल हो गये.

वो बोली - आआहह.. मा... दर्द हो रहा है... आईईई...

मैं - दर्द कैसे हो रहा है...

शीला - कई दिन बाद ले रही हू ना इसलिए.. और तुम्हारा लंड़ थोड़े ही है ये तो मुसल हैं... आआहहह... और कराहने लगी..

मैं - बस अभी ठीक हो जाएगा... मैं उसके चुचे मसलने लगा...और एक धक्का और मारते हुए लंड को पूरी जड़ तक अंदर घुसा दिया चूत की फांके लंड से बिल्कुल चिपक गयी थी..

उसके मुँह से चीख निकल गई... अच्छा था कि पास मे कोई नहीं था...

वो दर्द भरी आवाज मे - हाइय्अ..राआअम्म... मअर्ररर.. गइइई.. आअज्जजज तो मेरी फट गईई.

आअहह उऊह...

तो मैं बोला - कि तुम क्या कुँवारी लड़की की तरह कर रही हों..

शीला - आआआहह... क्या करू दर्द तो होता हैं ना, तुम्हारा लंड़ घोड़े जैसा है, मैं क्या कोई भी ऐसे करे...

मुझे पता था कि शीला को दर्द होना ही था, मैं उसका दर्द कम करने लगा. मैं उसकी गर्दन को चूमने लगा. उसकी सांस मेरे चेहरे पे टकरा रही थी.

मैं लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर कर रहा था. शीला गरम होने लगी थी उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी..

अब शीला की शरम खो गयी थी, मैंने उसके होंठो को चूसना शुरू कर दिया था, वो भी मज़े से अपने होंठो को चुसवाने लगी थी. हमारा थूक आपस मे घुलने लगा बस कुछ ही देर मे लंड शीला की चूत में अड्जस्ट हो गया था...

और अब वो मज़े से चुद रही थी, उसकी सिसकारियाँ मुँह में ही क़ैद हो गई थी. शीला ने अपनी बाँहे मेरी पीठ पर कस दी और मज़े से अपनी चूत को मरवाने लगी.

मैं पूरा दम लगा के उसकी चूत मार रहा था. उसकी चुत से हल्का बहता हुआ पानी चूत को चिकनाई प्रदान कर रहा था.

मैंने शीला के होंठ आजाद कर दिये.. तो वो बोली - जी बस ऐसे ही करिये बहुत दिन बाद आज मन की मुराद पूरी हो रही हैं, वो तो मेरी तरफ देखते भी नही हैं. मेरी बिल्कुल कदर नही करते है आपका बहुत धन्यवाद जो अपने मुझे ये खुशी दी.

मैं ताबड़तोड़ उसे चोदे ही जा रहा था..

शीला ने अपनी टाँगो को मेरी कमर पर लपेट दिया और अपने चूतड़ मटकाते हुए मेरे हर धक्के का जवाब देने लगी. कमरे मे गर्मी एक दम से बढ़ गई थी. शीला की मस्त चुदाई पूरे ज़ोर से चालू थी...



तभी उसने मुझे अपनी बाहों मे बुरी तरह कस लिया और मुझसे चिपक गयी उसके चुतडो की थाप ढीली पड़ गयी थी. चूत की फांके फड़फडा़ई और वो निढाल हो गयी.

मैं समझ गया कि वो झड़ गयी हैं, पसीना उसके माथे से बह रहा था पर मैं नहीं रुका मैं उसे लगातार चोदे ही जा रहा था. वैसे भी इतने टाइम मे मेरा निकलता नहीं है..

मैं बस शीला को चोदे जा रहा था. शीला अब हाई - हाई करने लगी थी...

चूत का पानी भी सूखने लगा था जिस से घर्षण में परेशानी सी हो रही थी, तो मैने लंड को बाहर निकाल कर उसपे थूक लगाया और फिर से चूत मे धकेल दिया.

तभी वो बोली मुझे छोड़ो...

मैं बोला - क्या हुआ.. मेरा हुआ नहीं है...बस कुछ ही देर की तो बात हैं..

तो वो बोली - मुझे दो मिनिट जाने दो..

मै - अभी नही...

तो वो बोली - जी कहीं मेरा मूत ना निकल जाए...

मुझे लगा ऐसे ही बोल रही हैं, मैं धक्के शॉट मारता रहा. वो अब बुरी तरह से मचलने लगी थी.

वो लरजते हुए बोली - मैं अब ना रोक सकूँगी और उसका बदन ऐंठने लगा...

मैने लंड को झट से बाहर निकाला और उसके चुतडो़ को पकड़ कर चारपाई के किनारे ले आया.. कुछ पलो बाद उसकी चुत से एक गरम धार निकलने लगी... कुछ छींटे मेरे पैरों पर लग रहे थे. उसके मूत से कमरे का फर्श गीला हो गया...

शीला मेरी तरफ देखने लगी और बोली - आप बहुत ही गंदे हो, मैंने बोला था ना जाने दो...ऐसा भी भला कोई करता हैं...

मैंने उसकी टाँगो को चौड़ी करते हुए दुबारा से लंड को अंदर डाल दिया, मैं लंबे लंबे शॉट मारते हुए उसे बहुत ही बेदर्दी से चोदे जा रहा था.

कुछ ही देर मे मैं अपनी मंज़िल पर पहुँचने वाला था...

मैं - मेरी रानी कहाँ डालु...

शीला - आआहह.. अंदर ही.. उऊह.. एेसे ही, मैं भी फिर से....

और मेरे लंड से वीर्य की पिचकारिया निकलने लगी. एक के बाद एक कई पिचकारी निकले ही जा रही थी जो उसकी चूत मे समाती जा रही थी...

मेरे लंड से बहुत माल निकला, जो कई दिनों से भरा पड़ा था.. ऐसा लगा जैसे मेरी ताकत ही निकल गयी हो.. उसकी चूत ने वीर्य की एक एक बूँद को अपने अंदर समेट लिया.

मैं उनके उपर ही पड़ा रहा, शीला मुझसे किसी छोटी बच्ची की तरह चिपकी पड़ी थी. आज उसने एक अलग तरह से चुदाई के सुख को प्राप्त कर लिया था. मुझे भी उसे चोदकर बहुत मजा आया.

 


# अपडेट - 87

मैंने उसे पलटकर अपने ऊपर लेटा लिया...

मैने शीला के चुतडो पे हाथ फेरते हुए पूछा कि - मज़ा आया...

तो वो बोली - मेरे ब्याह को इतने साल हो गये पर आज तक ऐसे कभी नही चुदि हूँ...

मैने उसके चुतडो को मसल्ते हुए कहाँ - जब तक हूँ ऐसी चुदाई बार बार होगी तुम्हारी...

मेरी बात सुनकर उसने मेरे सीने में अपना मुंह छुपा लिया.

मेरी अपनी उंगली उसकी गान्ड की दरार पर रगड़ता हुआ गांड के छेद तक ले गया... मैने गान्ड के छेद मे उंगली फसाई तो वो बहुत ही ज़्यादा टाइट था.

मैने बोला- कि कभी यहा पर लंड डलवाया है..

तो शीला बोली - अरे ये तो टट्टी की जगह है यहाँ कोई थोड़ी डालता हैं...

मुझे पता था कि ये कुछ ऐसा ही बोलेगी.

मैं बोला - मेरी प्यारी तू कितनी भोली हैं, ये भी चोदने के लिए ही हैं. इसमें भी चुत जितना मजा आता हैं... अपनी जवानी का पूरा मजा लो...

शीला - मैं गान्ड नही मारने दूँगी...

(मुझे गांड़ तो मारनी थी, अभी तो मार नहीं सकता था. इतना टाइम नहीं था. गांड़ तो मैं मारूंगा ही )तो मैं उसे बोला ठीक है... तुम अपनी जवानी को यूँ ही बर्बाद कर रही थी, जितने दिन मैं हूँ देख तुझे कितना मज़ा देता हू..

शीला बोली - चाहे कुछ भी करो बस मेरी बदनामी ना होनी चाहिए...

मैं बोला - तू बस मज़े ले और बाकी मुझ पर छोड़ दो...

फिर मैं खड़ा हो गया, और कपड़े पहनने लगा वो भी कपड़े पहनने लगी...

शीला बोली - अभी भी जलन हो रही हैं, आज तो मेरी चुत फट गई हैं...

मैं - आज तुमने असली लंड लिया है... फिर मैंने उसके होंठों को चुमा और बाहर आ गया...

मैं घर की तरफ चल पड़ा. थोड़ी ही दूर बाद मुझे पप्पू मिल गया... वो हाथ मे कुछ सामान लिए था..

मैं - कहाँ थे तुम.. मैं खेत पर गया था तुम मिले नहीं..

पप्पू - मैं गाँव मे गया था. खेती का कुछ सामान लाने... अब चलो खेत मे...

मैं - अब तो देर हो गई है. और मैंने खेत देख लिये हैं, तो 1-2 दिन मे आता हूँ...

फिर मैं घर आ गया...मैं नानाजी को देखने रूम मे चला गया...वो सो रहे थे, तो मैं वहां से आ गया...

शाम हो गई थी.. मैं ऊपर रूम मे चला गया. चुदाई के कारण पसीने से भर गया था तो नहाने चला गया...

नहाते टाईम सुबह मामी वाली बात याद आ रही थी.. जिससे मेरा मेरा लंड अकड़ने लगा. मैं जल्दी से नहाकर बाहर आया.

फिर कुछ खास नहीं हुआ.. ऐसे ही दो तीन दिन निकल गये.. इस बीच मैने एक बार शीला को चोदा, इस बार उसने मजे से चुदाई करवाई...

फिर एक दिन दोपहर को हम सब बैठे थे तब पप्पू घर पर आया.

नानाजी - क्या हुआ पप्पू...

पप्पू - साहब आज मैं शहर जा रहा हूँ...

नानाजी - बीज लाने जा रहे हो..

पप्पू - बीज भी लाने हैं और कुछ औजार हैं जो बुवाई मे काम आंयेगे, वो ठीक करवाने दिये हैं. वो लाने जा रहा हूँ...

नानाजी - ठीक है तो जाओ...

पप्पू - रात मे शीला अकेली है खेत मे और खेतों को देखने के लिए भी तो..... अगर राहुल भाई आज रात खेत मे सो जाये...

नानीजी - नहीं.. राहुल कैसे जायेगा खेत मे...

नानाजी - राहुल सो जायेगा, इसमें दिक्कत क्या है.. राहुल के रहने से खेतों की निगरानी भी हो जायेगी..राहुल तुम चले जाओगे...

मैं - नानाजी मै सो जांऊगा.. मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.. ( मैं तो खुश था शीला के साथ पूरी रात... //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f47f.svg )

नानाजी - पप्पू आज राहुल चला जायेगा...

पप्पू - जी ठीक हैं.. मैं चलता हूँ...

मैं पप्पू के साथ बाहर आ गया...

पप्पू - तुम्हारा बहुत शुक्रिया...

मैं - इसमें शुक्रिया की कोई बात नही है, खेत हमारे ही तो हैं.

पप्पू शहर चला गया.. मैं अंदर आ गया. मैं रात के बारे मे सोचने लगा. आज पूरी रात शीला को रगडूंगा...

रात मे मैंने खाना खाया और खेत की तरफ चल पड़ा...

***

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# अपडेट - 88

रात मे मैंने खाना खाया और खेत में चला गया...मैं जल्दी ही खेत मे पहुँच गया.

जब मैं उसके कमरे मे गया तो वो बिस्तर को ठीक कर रही थी. मुझे देख के उसकी आँखो मे चमक आ गयी और वो थोड़ा झुक के पलंग की चादर को ठीक करने लगी उसकी गान्ड मेरी तरफ थी जो हिलती हुई मुझे बुला रही थी.

मैने गेट बंद किया और शीला को पीछे से पकड़ लिया और सीधा उसके बोबो को मसलने लगा...

तो वो बोली - आह इन्हे ऐसे ना दबाओ दर्द होता हैं...

मैने कहा - पर मज़ा भी तो आता है..

मेरी बात सुनकर वो हंस पड़ी...

मैने बिना देर किये उसे नंगी करना शुरू किया. कुछ ही पलो मे उसके बदन पर कपड़ो का नामो निशान भी नही था. मैने अपने कपड़े भी उतार दिए.

शीला मुझे देखते हुए बोली - आज तो बड़े उतावले हो रहे हो...

मैने बोला - तेरी चूत मे आग नहीं लगी हैं क्या..?

वो मेरे लंड को अपनी मुट्ठी मे भरते हुए बोली कि - मैं तो इसके लिए कब से तड़प रही हूँ.. और मेरी आंडो़ को भींच दिया..

मैने भी उसकी चूत के बालो को खींच दिया. उसके बदन में दर्द की लहर उठ गयी.

वो बोली - ऐसे कोई करता है क्या..

मैं - तुमने क्या किया था...

मैं पलंग पर बैठा और उसे खींच के अपनी गोद मे बिठा लिया और उसके गालो को अपने दांतो मे दबा लिया. मेरा लंड उसकी गान्ड पर सेट हो गया था...

मैने उसके गालो को चूसने लगा. जी कर रहा था कि उन्हे कच्चा ही चबा जाउ...

आज मैं पूरी तस्सली से उसे चोदना चाहता था. मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था, वो बस छेद की तलाश कर रहा था.

उसने अपने होठ मेरी तरफ बढ़ाए तो मैने भी रेस्पॉंड करते हुए उसके होंठों को अपने होंठो मे दबा लिया. वो मेरे बालों को सहलाने लगी.

हमारे होंठ ऐसे चिपके पड़े थे जैसे कभी अलग होंगे ही नही. चुंबन 5 मिनच तक चलता रहा, आखिरकार सांसे भरने पर हम अलग हुए...

शीला बोली - मेरे पिछवाड़े मे ये चुभ रहा हैं...

और मेरी गोदी से उतर गयी. हम खड़े हो गये. मैने उसको झुका दिया. उसके हाथ पलंग की लकड़ी पर रख दिये. जिससे वो आगे झुक गई..

उसके सांवले पर चिकने चूतड़ बाहर की तरफ़ निकल आए थे. मैने अपनी जीभ उसकी गान्ड पर फेरनी चालू कर दी. उसकी खाल थोड़ी टाइट सी थी. मेरे मुंह से टपकता थूक उसके चुतडो़ को चिकना कर रहा था. शीला अपनी गान्ड मटका रही थी.

अब मैने उसके चुतडो़ को थोड़ा फैलाया और चूत मे एक उंगली उतार दी.. शीला -आइइईई....सीईईईई..सीईईईईसी.. करने लगी.

मैने दो चार थपड़ उसके चुतडो़ पर लगाये, जिससे वो हल्के लाल हो गये. शीला आआहह.. करने लगी..

मैंने उसके पैरों को चोडा़ कर दिया और थोड़ा नीचे झुका दिया.

रस टपकाती चूत अब मेरे सामने आ गई , मैंने नीचे बैठते हुए उसकी चूत को थोड़ा फैलाया और अपना मुंह उससे सटा दिया.

शीला की टाँगे लड़खड़ा गई. मैं पूरी तरह से उसकी टाँगो के बीच आ गया, मैने अपने होठ उसकी चूत पर रख दिए और उसे चूसने लगा..

तो वो - उफफ...हाईईई..आआआआह.. करने लगी..

उसकी दोनों पंखुड़ियो को मैने अपने मुंह मे भर लिया और उन्हे दांतों से काटते हुए चूसने लगा. मेरे होंठ उसके खारे रस से पूरी तरह भीग चुके थे. जैसे जैसे मैं उसकी चूत को चाट रहा था, उसके चूतड़ हिलने लगे थे. शीला मस्ता गयी थी. अब उसकी हिलती गान्ड बड़ी ही प्यारी फीलिंग दे रही थी.

मेरा लंड भी आउट ऑफ कंट्रोल हो रहा था. मैने उसपर थूक लगाया और शीला की कमर को पकड़ते हुए एक ही झटके मे आधा लंड चूत मे पहुचा दिया.

शीला दोहरी हो गयी और - आईई.. म्मअआहा...आहहह.... ऐसे कोई करता है क्या..

मैने लंड को थोड़ा पीछे खींचा और एक तगड़ा धक्का मार के उसे जड़ तक ठोक दिया...

शीला - आआआहह.. उऊह म्आआ.. फ्फअ्अटटट... गई

मैने उसकी गर्दन को चूमते हुए कहा - क्यो नखरे दिखाती हैं, अब तो कई बार ले चुकी हो

और अपनी कमर को हिलाते हुए चूत पे धक्के लगाने लगा. लंड चूत मे अच्छी तरह सेट हो चुका था तो शीला भी अब मज़ा लेने लगी थी. हर धक्के का जवाब वो अपनी गान्ड मचका मचका कर दे रही थी.

कुछ देर चोदने के बाद मैने लंड को चूत से निकाला तो वो मेरी तरफ ऐसे देखनी लगी जैसे किसी बच्चे से उसका खिलौना ले लिया.

मैं चारपाई पर लेटा और बोला - अब तुम लंड पर बैठो...

उसने लंड को अपने हाथ मे लिया और चूत पे रगड़ने लगी और धीरे धीरे लंड पे बैठ गयी. और धीरे धीरे उपर नीचे होने लगी. मैं उसकी चूचियों से खेलने लगा.

कुछ ही देर में वो मस्ती से सराबोर हो गई और लंड पर कूदने लगी. चूत के रस से लंड पूरा चिकना हो गया था और बड़ी ही तेज़ी से चूत मे फिसल रहा था. मेरे हाथ उसके चुतडो़ पर कसे हुए थे.

मैंने अपनी एक उंगली को गीला किया और उसकी गान्ड में डालने की कोशिश करने लगा पर गान्ड बहुत ही ज़्यादा टाइट थी तो वो जा नही पा रही थी... मैने थोड़ा जोर लगाया तो थोड़ी सी उंगली गान्ड मे घुस गयी.

 
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