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Guest
# अपडेट - 79
कुछ देर मे मैं घर पहुँच गया... घर जाते ही पहले फ्रेश हुआ और तैयार होकर बाहर आने के लिए हॉल मे पहुँचा तो हॉल का मेन डोर खुला और पंकज अंदर आई...
वो आज सलवार सूट नहीं लहंगे, चुनरी और ब्लाउज मे थी. बहुत खूबसूरत लग रही थी... उसका तन बदन पहले से ज्यादा खिल गया था...
वो मेरे पास आकर - कहाँ थे कल से...
मैं - दोस्त के पास गया था...
पंकज - तो आप बता सकते थे.
मैं - मुझे याद नहीं रहा, पर बाद मैं बता दिया था ना...
पंकज - पता हैं सबको कितनी परेशानी हो रही थी...
मैं - हाँ तो मुझे याद नहीं रहा, अब तुम यार दिमाग खराब मत करो...
पंकज - मुझे बहुत चिंता हो गई थी...
मैं थोड़े मजे लेना चाहता था तो मैं बोला - तो किसने कहाँ था मेरी टेंशन लेने के लिए...
पंकज - किसी ने नहीं कहा था..
मैं - हाँ तो मेरी टेंशन लेने की जरूरत नहीं है..
मेरी बात सुनकर पंकज की आँखों मे आँसू आ गये..
पंकज - सही है, मैं कौन होती हूँ टेंशन लेने वाली...
इतना बोलकर वो जाने लगी, तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया...
मैं - कहाँ जा रही हो...
पंकज - बाहर, काम है मुझे...
मैंने उसे अपनी तरफ खींच लिया. उसके सुडोल तने हुए चुचे मेरे सीने से आ लगे.
वो हटने लगी तो मैंने उसकी कमर पर हाथ रखकर कस लिया... हम दोनों चिपके हुए थे...
मैंने उसके चेहरे को ऊपर किया तो उसकी आँखे पानी से भरी हुई थी, जो उसके गालो को भिगो रहीं थी...
मैं - मेरी भोली रानी मैं तो मजाक कर रहा था... मैं कभी तुम पर गुस्सा कर सकता हूँ...
पंकज - मजाक... मुझे लगा कि...
मैं - ऐसा कैसे सोचा..तुम्हारा तो मुझ पर पूरा हक है तुम मेरे होने वाले बच्चे की माँ जो हो (अभी वो गर्भवती नहीं हुई थी ).
मेरी बात सुनकर पंकज के चेहरे पर शरम और मुस्कान के मिले जुले भाव आ गये...
मैं - अब शंत हो जाओ, तुम्हारे चेहरे पर ये उदासी अच्छी नहीं लगती...
पंकज - पहले रूलाते हो फिर चुप होने को बोलते हो..
मैं(एक हाथ से कान पकड़ कर ) - सॉरी... माफ कर दो.
पंकज (मेरा हाथ नीचे करते हुए )- मैं नाराज नहीं हूँ...
मैंने पंकज के चेहरे को एक हाथ से करीब लाया, मेरे होंठ उसके चेहरे के बिल्कुल करीब थे.. पंकज ने शरम और उतेजना के मारे अपनी आँखें बंद कर ली...
मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसके गोरे गालो को भिगोते आंसुओ को चाटने लगा... पंकज की आँखे खुल गई वो मेरी तरफ देखने लगी,
मैं उससे नजरे मिलाते हुए दोनों तरफ के आंसुओ को चाटते हुए - ये बहुत कीमती हैं मेरी जान...
मेरी बात सुनकर पंकज ने मुझे कसकर गले लगा लिया... कुछ देर हम दोनों एक दूसरे की बांहो मे ऐसे ही खड़े रहे...
फिर मैंने उसकी कमर को हाथों मे भरकर ऊपर उठा लिया और उसके गुलाबी लबो का रस पिने लगा.. या फिर यूँ कहुं की हम दोनों एक दुसरे का रसपान करने लगे.. पंकज ने मेरे कंधे के दोनों तरफ हाथ डाल लिये...
मैं किस करते हुए ही हॉल के सोफे के पास आ गया और उल्टा ही उस पर लेट गया...
अब पंकज मेरे नीचे थी और मैं उसके ऊपर था...
उसके होंठों को चुमते हुए मेरे होंठो धीरे धीरे उसकी गर्दन पर आ गये और उसे चुमने लगे, मेरी जीभ उसकी गर्दन को चाटते हुए उसका स्वाद चखने लगी..
पंकज के हाथ मेरे बालों को सहला रहे थे, जब मेरे होंठ उसके गर्दन की चमड़ी गो होंठों मे दबाकर चुसते तो उसकी अंगुलियाँ उतेजना के मारे मेरे बालों को खींचने लगती...
इसी बीच मैंने उसके लहंगे को ऊपर उठा दिया और उसकी पेंटी को निकाल दिया...
मेरे होंठ उसके बोबो तक पहुँच गये, मैंने जल्दी से उसके बोबो को ब्लाउज और ब्रा से आजाद कर दिये और उन रसीले आमों को मुंह मे भरकर चुसने लगा...
पंकज - आआहह.. उम्ह्हह.. उह... करते हुए सिसकने लगी...
मैंने चुचो को छोड़ा और अपनी पेंट और फ्रेंची उतार दी, मेरा लंड एकदम कड़क हो गया, वो झटके मार कर रहा था कि जैसे बता रहा हो कि वो पंकज की चूत मे जाने के लिए कितना तड़प रहा है...
मैंने लंड को पंकज की चूत पर टिकाया जो अपने सैंया के इंतजार मे रस बहा रही थी.. मैं लंड को चुत के दाने पर घिसने लगा..
मैंने पंकज की तरफ देखा, उसकी आँखें वासना से भरी थी, उसके उतेजना से होंठ फड़फडा़ रहे थे, वो मेरी तरफ देख रही थी, जैसे विनती कर रही हो कि अब देर ना करो, डाल दो मूसल ओखली मे...
मैंने भी देर नहीं कि और एक झटका लगा दिया जोर से, और आधे से ज़्यादा लंड डाल दिया...
पंकज ने उतेजना और दर्द के मारे मुझे कस कर पकड़ लिया...
मैं उसके होंठों को चुसने लगा, उसके हाथ मेरी पीठ को सहला रहे थे...
मैंने लंड को थोड़ा बाहर निकाला और लगा दिया एक और धक्का, लंड़ जड़ तक चला गया.
मैं पूरा लंड घुसाकर रूक गया. और उसकी चुचियों को चाटने लगा.. मैं कुछ देर ऐसे ही करता रहा..
वो मेरी तरफ देख रही थी, उसके चेहरे पर नाराजगी थी, पर मैं चुचों को चाटता रहा.. उसने मेरा चेहरा अपने हाथों मे पकड़ा और मेरी तरफ देखने लगा..
मैं - क्या हुआ...
वो नाराजगी और गुस्से के भाव दिखा रही थी...
मैं - बोलो तो..
पंकज - करो ना.. उसने अपने चूतड़ो को लंड पर दबाते हुए कहा...
मैं - क्या करूं...
पंकज - आप बुहत बदमाश हो..आप मुझसे गन्दी बाते सुनना चाहते हो.
मैं - तो बताओ क्या करूं...
पंकज - आप अपने लंड को अपनी रानी की चूत में अंदर बाहर करो..
बोलकर उसने मेरे होंठों को चुम लिया..
उसकी बात सुनकर मैं चूत में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा..
पंकज - आह्ह्ह्ह... उऊह.. शहहह.. हाँ ऐसे ही मेरे राजा... पंकज ने सिसकते हुए अपनी दोनों टांगों को मेरी कमर पर लपेट लिया.
मैं अपना लंड पूरा बाहर तक खींचकर उसकी चूत में पेल रहा था, मेरे हर धक्के के साथ उसका पूरा जिस्म कांप रहा था.
यही सिलसिला कई देर तक चलता रहा. पंकज अब झड़ने के बिलकुल क़रीब थी इसीलिए उसका पूरा जिस्म अकड़ने लगा था...
पंकज - आह्ह्ह्हह्ह राज्ज्जजा.. आह्हा...
मैं भी आने ही वाला था, तो लंड को जितना हो सकता था उतनी ज़ोर और तेज़ी के साथ अपनी रानी की चूत में अंदर बाहर करने लगा.
सिसकते हुए पंकज की आँखें बंद हो गई और उसकी चूत मेरे लंड को ज़ोर से कसते हुए उस पर झटके मारते हुए पानी छोडने लगी.
मैं भी खुद को रोक नहीं पा रहा था और चूत में झटके मारने लगा और अपना लावा छोड़ने लगा, और अपनी रानी के ऊपर ही ढेर हो गया.
दो मिनट बाद मैं खड़ा हो गया, वो भी अपनी आँखें खोलते हुए खड़ी हो गई और मुझसे लिपट गई...
मैं - तुम तो पूरी ताकत निकाल लेती हो... बहुत मेहनत करवाती हो...
फिर वो अपने कपड़े पहनने लगी... मैं बाथरूम मे फ्रेश होने चला गया...
बाथरूम से बाहर आया तब वो चली गई थी...
मैं बाहर आने लगा तो गेट पर रौनक मिल गई...