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जाल पार्ट--50
गतान्क से आगे......
“तुम्हे पता है तुम्हारा
“तो मैं चालू?”,देवेन ने कार का दरवाज़ा खोला.
“ओके.”,रंभा मुस्कुराइ तो उसने उसे 1 कार्ड थमाया.
“ये मेरा नंबर है.”
“थॅंक यू.मैं आज ही घर जाके मा की चीज़े देखती हू.हो सकता है उनमे कोई सुराग मिले.”
“हूँ..चलो,बाइ.”
“बाइ.”
“आज याद आई है मेरी?”,प्रणव के कमरे मे कदम रखते ही रीता ने तल्ख़ नज़रो से उसका स्वागत किया.प्रणव खामोशी से बिस्तर पे उसके बगल मे बैठ गया,”..अब मन भर गया ना मुझसे?”,प्रणव ने उसे ऐसे देखा जैसे उसे ये बात बहुत बुरी लगी हो.अचानक उसने रीता को बाहो मे भींच लिया & उसे पागलो की तरह चूमने लगा.
“आहह..नाआअ……छ्चोड़ो..छोड़ो..मुझे..उउम्म्म्मम..!”,रीता उसकी गिरफ़्त मे च्चटपटाने लगी.
“कैसे आता पहले?..हर रोज़ तो शिप्रा आपके साथ चिपकी रहती थी..उसके सामने आपको प्यार करने लगता क्या?”,प्रणव ने उसे बिस्तर पे लिटा दिया था & उसके उपर चढ़ उसे अपनी गर्म किस्सस से बहाल कर रहा था.
“ओह..माआअ..कभी अकेले मे पकड़ लेते मुझे..आन्न्णणन्..”,प्रणव ने उसकी नाइटी मे हाथ घुसा उसकी चूचियाँ मसल दी थी,”..कितना तदपि हूँ तुम्हारे लिए,प्रणव..ऊहह..!”,अपनी चूचियो को पीते अपने दामाद के सर को उसने अपने सीने पे & भींच दिया और सुकून से आँखे बंद कर ली.
“आपको भी बस अपने दर्द की फ़िक्र है मेरी परवाह नही.”,प्रणव ने उसकी चूचियो को जी भर के चूमने के बाद सर उपर उठा के अपनी सास को देखा.
“क्या हुआ प्रणव?क्या बात परेशान कर रही है तुम्हे?”,रीता ने थोड़ी चिंता के साथ उसके बालो मे हाथ फिराए.
“मोम,डॅड के लिए मैं कभी 1 चौकीदार से ज़्यादा नही रहा.”,उसका बाया हाथ अभी भी रीता की चूचियो को बारी-2 से दबा रहा था.
“क्या बोल रहे हो प्रणव!तुम दामाद हो इस घर के!..ऊहह..!”,रीता ने टाँगे फैलाई तो प्रणव ने अपना पाजामे मे क़ैद लंड उसकी चूत पे दबा दिया.
“हां,लेकिन हैसियत तो चौकीदार के जितनी ही है.जब समीर गायब हुआ तो डॅड ने सब मुझे सौंप दिया & जब वो वापस आ गया तो उनकी वसीयत मे तो मुझे कुछ नही मिला.ये मत समझिए कि मैं लालची हू & मुझे आपकी दौलत की हवस है..”,प्रणव अपनी कमर हिलाके सास की चूत को लंड से बुरी तरह दबा रहा था,”..मुझे चाहत है इज़्ज़त की.ट्रस्ट ग्रूप को मैने अपना सबकुच्छ दिया है तो बदले मे मुझे बस इतनी इज़्ज़त चाहिए की मेरा भी नाम उसके मालिको मे शुमार हो,मुझे भी समीर के बराबर की जगह मिले, भले उसके बदले मे मुझे हर महीने वही तनख़्वाह मिले जो अभी मिलती है.”,रीता गौर से दामाद को देख रही थी.1 मर्द के अहम को ठेस लगे तो वो तिलमिला जाता है & कोई भी ग़लत कदम उठा सकता है.प्रणव ने ऐसा किया तो परिवार के साथ-2 कारोबार पे भी असर पड़ता & उसे भी उसकी ज़ोरदार चुदाई से महरूम रहना पड़ सकता था.
रीता ने दामाद को बाहो मे भरते हुए पलटा & उसके सीने को चूमते हुए उसके पाजामे तक आई & उसे छोड़, उसके लंड को निकाला & मुँह मे भर लिया.उसने लंड चूस-2 के प्रणव के दिल को खुशी से भर दिया फिर उसके कपड़े उतार उसे नंगा किया & अपनी पॅंटी उतारी & फिर नाइटी को हाथो मे उठा उसके उपर आ उसके लंड पे बैठ गयी.
“अपने दिल से सारे बुरे ख़याल निकाल दो,प्रणव..ऊहह..”,लंड ने उसकी चूत को पूरा भर दिया था.वो झुकी & दामाद के होंठो को चूमा,”..मुझपे भरोसा रखो,मैं तुम्हारी चाहत पूरी करूँगी..ज़रूर करूँगी..माइ डार्लिंग..तुम बस मुझे यू ही अपने पास रखो..आन्न्न्नह..शरीरी कहिनके!”,प्रणव ने उसकी गंद को दबोच उसके छेद मे उंगली घुसा दी थी.रीता ने शरारत से मुस्कुराते हुए दामाद के गाल पे प्यार भरी चपत लगाई तो उसने उंगली को & अंदर घुसा दिया,”..ऊव्ववव..!”,रीता मस्ती मे कराही & जिस्मो का खेल शुरू हो गया.प्रणव ने उसे बाँहो मे भरा तो उसने अपना चेहरा उसके दाए कंधे मे च्छूपा लिया.प्रणव उसकी चूत को लंड से और गंद को उंगली से चोद्ता मुस्कुराने लगा..समीर को घेरने के लिए उसका जाल तैय्यार होता दिख रहा था उसे अब.
रंभा उस रात खूब सोई.उसने पूरी शाम अपनी मा के बारे मे सोचा & देवेन के बारे मे भी.देवेन के लिए वो 1 लगाव सा महसूस कर रही थी.उसकी मा को कितना चाहता था वो लेकिन उस बेचारे को क्या मिला?..बस दर्द & तकलीफ़..पूरी उम्र के लिए!उसने तय कर लिया कि वो उसके घाव पे मरहम ज़रूर लगाएगी & उस दयाल को खोज के रहेगी चाहे कुच्छ भी हो जाए.
अगली सुबह वो उठी तो उसे प्रणव का ख़याल आया.उसने उसे फोन करने की सोची लेकिन उस से भी पहले समीर को फोन किया.समीर ने उस से ढंग से बात नही की & मसरूफ़ होने का बहाना बनाया.उसके रवैयययए ने रंभा के ट्रस्ट फिल्म्स को जाय्न करने के इरादे को और पुख़्ता कर दिया.उसने प्रणव को फोन किया तो आज उसे भी बहुत काम था.उसने शॉपिंग जाने का इरादा किया और उसकी तैय्यारि करने लगी.
“हेलो..”,रंभा ने 1 ढीली सी लंबी,सफेद स्कर्ट पहनी थी & काले ब्रा के उपर पूरे बाजुओ की काली कमीज़ डाल उसके बटन्स लगा ही रही थी कि प्रणव का फोन आ गया,”..मैं तो शॉपिंग जा र्है थी..हां..पूरा दिन बिज़ी रहोगे क्या?..बहुत बुरे हो तुम..अभी तो समीर भी नही है & तुम्हारे पास मेरे लिए वक़्त ही नही है..हूँ..ओके,बाइ!”,रंभा ने मुस्कुराते हुए मोबाइल बंद किया..उसका नंदोई तो उसका दीवाना हो गया था!
“हां वो दिखाओ..”,दोपहर के 12 बजे डेवाले के नेहरू मार्केट मे भीड़ होने लगी थी,”..इस मार्केट मे हर समान की दुकाने थी & कॉलेज जाने वाले लड़के-लड़की यहा कपड़े खरीदने के लिया खूब आते थे.रंभा 1 दुकान मे टँगे 1 स्कर्ट को देख रही थी.
“हाई!”,वो चौंक के घूमी.
“प्रणव..तुम यहा?”,उसके चेहरे पे हया की सुर्खी आई & फिर उसने आवाज़ थोड़ी धीमी की,”..तुम तो पूरा दिन बिज़ी रहने वाले थे?”,वो स्कर्ट को हाथो मे ले देख रही थी,”..उन..नही..वो दिखाओ..उधर उपर जो तंगी है..”,उसने दाए हाथ को उपर उठाके इशारा किया & ऐसा करने से उसकी कंज़ी थोड़ा उचक गयी & उसकी गोरी कमर नुमाया हो गयी.
“वो तो तुम्हे छेड़ रहा था.”,प्रणव उसके पीछे खड़ा था & उसका दाया हाथ रंभा की कमर से आ लगा था लेकिन इस तरह की दुकानदार को ना दिखे,”..वरना मेरी ऐसी मज़ाल की तुम्हारी खदिमात से पहले कंपनी की खिदमत करू!”,उसने वाहा के माँस को दबाया तो रंभा की चूत कसक उठी & उसने बड़ी मुश्किल से अपनी आह को दबाया.
“वो भी दिखाना..”,रंभा ने दुकानदार को दूसरी तरफ तंगी स्कर्ट दिखाई & फिर उसके घूमते ही प्रणव का हाथ कमर से नीचे करते हुए घबरा के देखा,”..क्या कर रहे हो?..किसी ने देख लिया तो?”
“तो..क्या कह दूँगा कि मेरी महबूबा है!”,प्रणव फुसफुसाया & दुकानदार के घूमने से पहले कमर को ज़ोर से दबा के हाथ पीछे खींचा.
“ये दोनो दे दो.”,रंभा ने स्कर्ट्स चुन ली तो प्रणव ने उनके पैसे दे दिए & फिर दोनो बाहर निकल आए.बाज़ार मे भीड़ पल-2 बढ़ रही थी.प्रणव रंभा के बाई तरफ चल रहा था & भीड़ मे उसे रास्ता दिखाने का बहाने बार-2 उसकी पीठ या कमर च्छू रहा था.रंभा को उसके हाथो का एहसास मस्त कर रहा था.देखे जाने का डर,महबूब का साथ..ये बातें उसके जिस्म को जगा रही थी.मगर पकड़े जाने का डर बहुत था वाहा.1 तो इतने बड़े खानदान की बहू ऐसे आम लोगो के बेज़ार मे शॉपिंग कर रही थी,उपर से किसी ने उसके नंदोई को उसके जिस्म को छेड़ते देख लिया तो बहुत बड़ा स्कॅंडल हो सकता था.समीर वाले हादसे के बाद लोग रंभा को भी पहचानने लगे थे.रंभा 1 विदेशी लाइनाये ब्रांड के शोरुम मे घुस गयी,ये सोचते हुए कि प्रणव तो वाहा आ नही पाएगा & बड़ा मज़ा आएगा उसकी शक्ल उस वक़्त देखने मे!
मगर प्रणव की किस्मेत उसका पूरा साथ दे रही थी.उस ब्रांड ने हाल ही मे मर्दो की रंगे भी निकाली थी सो वो अपनी सलहज के पीछे-2 अंदर घुसा & मेन’स सेक्षन मे चला गया.दोनो स्टोर मे घूम-2 के समान देखने लगे.रंभा 1 शेल्फ के पास आई,पुतलो पे लगी ब्रा & पॅंटी अलग-2 साइज़स मे उनके बगल मे रखे शेल्व्स पे भी थी & हर पुतले के बगल मे 1 शीशा लगा था.रंभा ने 1 ब्रा उठाया & उसे देखने लगी.
वो जहा ब्रा देख रही थी,उसके ठीक उल्टी दिशा मे प्रणव 1 अंडरवेर देख रहा था & वाहा भी वैसा ही 1 शीशा लगा था.उसने शीशे मे देखा & उसे सामने के शीशे मे देखती उस से नज़रे मिलती रंभा दिखी.रंभा ने ब्रा उठाके अपने सीने के सामने की तो प्रणव ने हौले से सर हिला के मना का दिया.वो आगे बढ़ी तो वो भी आगे बढ़ा & इस बार की ब्रा पसंद आने पे उसने ना मे सर हिलाया.रंभा मुस्कुराइ,उसे इस खेल मे बड़ा मज़ा आ रहा था.दोनो प्रेमी 1 दूसरे से अलग-थलग ,1 दूसरे की ओर पीठ किए भी रोमॅन्स कर रहे थे.उसने उसी तरह प्रणव को भी अंडरवेर चुनवाया & फिर अपना बिल अदा कर वाहा से निकल के आगे बढ़ गयी.कुच्छ देर बाद प्रणव भी वाहा से निकला & फिर तेज़ी से चलता हुआ उसके साथ हो लिया.रंभा की चूत अब रिसने लगी थी.
1 जगह बहुत भीड़ थी & प्रणव ने उसका फ़ायदा उठाते हुए उसकी कमर से हाथ उसकी गंद पे सरका दिया & उसे दबा के हाथ फ़ौरन पीछे खींचा.रंभा चिहुनकि & थोडा आयेज हुई तो प्रणव उसके बिल्कुल पीछे आ गया & उसके कंधो पे हल्के से हाथ रख थोड़ा आगे हुआ & अपना लंड उसकी गंद से सटा दिया.स्कर्ट,पॅंटी & प्रणव की पॅंट & अंडरवेर के बावजूद रंभा को उसके मर्डाने अंग की जलन महसूस हुई & उसकी चूत कसमसा उठी.रंभा थोड़ा आगे बढ़ी & 1 एटीएम मे घुस गयी.उसके पीछे प्रणव भी वाहा आ गया.एटीम कार्ड से खुलता था & 1 बार कोई अंदर हो तो बाहर से वो खिल नही सकता था.प्रणव ने 1 बार शीश एके दरवाज़े से बाहर देखा,कोई नही था..उसने अपनी सलहज को खींच के शीशे के दरवाज़े के बगल की दीवार से सटा दिया.
“नही..प्रणव..कोई आ जाएगा..!”,रंभा की आँखे जिस्म के नशे से भारी हुई थी.प्रणव ने उसकी दोनो कलाइयाँ पकड़ के उसके सर के दोनो तरफ दीवार से लगाया & उसके बाए कान मे जीभ फिराने लगा.रंभा ने मस्ती मे आँखे बंद कर ली.प्रणव आगे हो उसकी चूत पे अपना लंड दबा रहा था.उसके होंठ अब उसकी गर्देन को चूमते हुए उसके चेहरे पे आए & रंभा ने फ़ौरन उसके होंठो को अपने होंठो मे भींच उसकी ज़ुबान को चूस लिया.उसके जिस्म की कसक बहुत बढ़ गयी थी.वो अपनी कमर हिलाके प्रणव के लंड पे जवाबी धक्के दे रही थी.प्रणव ने उसकी कलाइयाँ छ्चोड़ी & उसकी शर्ट मे हाथ घुसा उसकी कमर मसल्ने लगा.रंभा तेज़ी से कमर हिला रही थी..बस कुच्छ देर &..प्रणव ने लंड & ज़ोर से उसकी चूत पे दबाया..”..उउन्न्ञनननणणन्..!”,रंभा ने बड़ी मुश्किल से अपनी आह को प्रणव के होंठो मे दफ़्न किया & उसका जिस्म झटके खाने लगा.प्रणव ने झड़ती हुई रंभा को थाम लिया.कुच्छ पल बाद जब खुमारी उतरी तो दोनो अलग हुए & सावधानी से बाहर निकल गये.रंभा के दिल मे अब चुदाई की हसरत जाग गयी थी.उसका दिल कर रहा था कि प्रणव उसे कही ले चले जहा दोनो इतमीनान से 1 दूसरे मे खो सकें & वो अपनी आग बुझा पाए.
“अरे..रंभा जल्दी इधर कोने मे आओ!”,प्रणव ने धीमे मगर अर्जेंट लहजे मे कहा तो रंभा उसके पीछे 1 पतले से रास्ते पे चली गयी.
“क्या हुआ?”
“शिप्रा घूम रही है यहा &..”,उसने मूड के देखा,”..& इधर ही आ रही है.”,दोनो तेज़ी से निकले & खुले मे आ गये.प्रणव ने इधर-उधर देखा & उसे सामने पार्किंग के पार मल्टिपलेक्स नज़र आया,”..वाहा सिनिमा हॉल पे चलो.जल्दी!”,रंभा तेज़ कदमो से उधर गयी तो प्रणव उस से अलग हो कही गायब हो गया मगर जब रंभा सिनिमा हॉल तक पहुँची तो उसने देखा कि प्रणव टिकेट काउंटर से टिकेट खरीद के खड़ा है.
“ये टिकेट लो & अंदर जाओ.”,रंभा हॉल मे पहुँची तो देखा की प्रणव भी पीछे से आ रहा है.दोनो अलग-2 हॉल के अंदर अपनी सीट्स पे पहुँचे,”बच गये.”,लाइट्स बंद होते ही प्रणव फुशफुसाया.कोई बकवास फिल्म थी & हॉल लगभग खाली था.सिर्फ़ चंद जोड़े वाहा कुच्छ निजी पल चुराने वाहा बैठे थे.प्रणव ने सबसे पीछे की किनारे की सीट्स की टिकेट्स ली थी & उनकी रो मे 1 जोड़ा बैठा था मगर दूसरे कोने पे.
“सब तुम्हारी वजह से.क्या ज़रूरत थी ऐसे मेरे पीछे-2 बाज़ार मे आने की?”,रंभा ने उसे झिड़का तो प्रणव ने सीट्स के बीच के हत्था उठाया & अपनी बाई बाँह मे उसे लेके उसका गाल चूम लिया.”..ओफ्फो,अब यहा भी शुरू हो गये!..उउन्न्ञणणनह..!”,रंभा ने उसकी बाह से छूटने की कोशिश की लेकिन प्रणव की पकड़ बहुत मज़बूत थी.
“ग़लती मेरी नही,तुम्हारी है!”,प्रणव उसकी ज़ुबान से खेलने के बाद उसकी शर्ट मे दाया हाथ घुसा के उसकी कमर को सहला रहा था,”..इतनी हसीन क्यू हो कि बस तुमहरे करीब रहने का दिल करता है!”,उसका हाथ कमर से स्मने पेट पी आ गया & उसकी नाभि को छेड़ते लगा.
“हटो झूठे..ओह..!”,रंभा टॅरिफ सुन के मुस्कुराइ & उसके दाए कंधे को थाम लिया,”..बस मुझे बहलाने को बाते बना रहे हो..नाआ!”,प्रणव उसकी नाभि को छेड़ रहा था & उसकी चूत मे फिर से कसक होने लगी थी.
“झूठ बोलू तो अभी मर जाऊं!”,प्रणव का हाथ उसकी नाभि से सरक के उसकी पीठ पे आ गया था & उसने उसे सीने से चिपका के उसकी छातियो को अपने से भींचते हुए चूमना शुरू कर दिया.रंभा भी पूरी गर्मजोशी से उसका साथ देने लगी.पता नही कितनी देर तक दोनो 1 दूसरे की ज़ुबानो से खेलते रहे.प्रणव के हाथ उसकी कमीज़ के कसे होने की वजह से ज़्यादा उपर नही जा पा रहे थे & वो बस उसकी मांसल कमर को मसल के ही अपने को बहला रहा था.
“आह..नही..कोई देख लेगा,प्रणव!..ऊहह..!”,प्रणव ने हाथ वापस सामने लाके उसकी स्कर्ट मे आगे से घुसा दिया था & उसकी पॅंटी टटोल रहा था,”..नाआअ..!”,रंभा उसका हाथ पकड़ के खींच रही थी लेकिन प्रणव ने हाथ अंदर घुसा ही दिया था.रंभा ने शर्म & मस्ती से आहत हो अपना सर उसके बाए कंधे पे रख दिया & चेहरे गर्देन & कंधे के मिलने वाली जगह मे च्छूपा उसकी गर्देन को चूमने लगी.प्रणव की उंगलिया उसकी चूत को सहलाते हुए अंदर घुसी & उसे रगड़ने लगी.रंभा कसमसाते हुए सीट पे ही च्चटपटाने लगी.प्रणव उसके बाए कान को जीभ से छेड़ते,उसके गाल को चाटते हुए उसकी चूत मार रहा था.
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क्रमशः.......
JAAL paart--50
gataank se aage......
“tumhe pata hai tumhara
“to main chalu?”,deven ne car ka darwaza khola.
“ok.”,rambha muskurayi to usne use 1 card thamaya.
“ye mera number hai.”
“thank you.main aaj hi ghar jake maa ki chize dekhti hu.ho sakta hai unme koi surag mile.”
“hun..chalo,bye.”
“bye.”
“aaj yaad aayi hai meri?”,Pranav ke kamre me kadam rakhte hi Rita ne talkh nazro se uska swagat kiya.pranav khamoshi se bistar pe uske bagal me baith gaya,”..ab man bhar gaya na mujhse?”,pranav ne use aise dekha jaise use ye baat bahut buri lagi ho.achanak usne rita ko baaho me bhinch liya & use paglo ki tarah chumne laga.
“aahhhhh..naaaaa……chhodo..chodo..mujhe..uummmmm..!”,rita uski giraft me chhatpatane lagi.
“kaise aata pehle?..har roz to Shipra aapke sath chipki rehti thi..uske samne aapko pyar karne lagta kya?”,pranva ne us ebistar pe lita diya tha & uske upar chadh use apni garm kisses se behaal kar raha tha.
“oh..maaaaa..kabhi akele me pakad lete mujhe..aannnnn..”,pranav ne uski nighty me hath ghusake uski chhatiya masla di thi,”..kitna tadpi hun tumahre liye,pranav..oohhhhh..!”,apni chhatiyo ko pite apne damad ke sar ko usne apne seene pe & bhinch diya & sukun se aankhe band kar li.
“aapko bhi bas apne dard ki fikr hai meri parwah nahi.”,pranav ne uski choochiyo ko ji bhar ke chumne ke baad sar upar utha ke apni saas ko dekha.
“kya hua pranav?kya baat parehsan kar rahi hai tumhe?”,rita ne thodi chinta ke sath uske balo me hath firaye.
“mom,dad ke liye main kabhi 1 chaukidar se zyada nahi raha.”,uska baya hath abhi bhi rita ki choochiyo ko bari-2 se daba raha tha.
“kya bol rahe ho pranav!tum damad ho is ghar ke!..oohhhh..!”,rita ne tange failayi to pranav ne apna pajame me qaid lund uski chut pe daba diya.
“haan,lekin haisiyat to chaukidar ke jitni hi hai.jab Sameer gayab hua to dad ne sab mujhe saunp diya & jab vo vapas aa gaya to unki vasiyat me to mujhe kuch nahi mila.ye mat samajhiye ki main lalchi hu & mujhe aapki daulat ki hawas hai..”,pranav apni kamar hilake saas ki chut ko lund se buri tarah daba raha tha,”..mujhe chahta hai izzat ki.trust group ko maine apna sabkuchh diya hai to badle me mujhe bas itni izzat chahiye ki mera bhi naa uske maliko me shumar ho,mujhe bhi sameer ke barabar ki jagah mile, bhale uske badle me mujhe har mahine vahi tankhwah mile jo abhi milti hai.”,rita gaur se damad ko dekh rahi thi.1 mard ke aham ko thes lage to vo tilmila jata hai & koi bhi galat kadam utha sakta hai.pranav ne aisa kiya to parivar ke sath-2 karobar pe bhi asar padta & use bhi uski zordar chudai se mehrum rehna pad sakta tha.
Rita ne damad ko baaho me bharte hue palta & uske seene ko chumte hue uske pajame tak aayi & us echo, uske lund ko nikala & munh me bhar liya.usne lkund chus-2 ke pranva ke dil ko khushi se bhar diya fir uske kapde utar use nanga kiya & apni panty uteri & fir nighty ko hatho me utha uske upar aa uske lund pe baith gayi.
“apne dil se sare bure khayal nikald do,pranav..oohhhhh..”,lund ne uski chut ko pura bhar diya tha.vo jhuki & damad ke hotho ko chuma,”..mujhpe bharosa rakho,main tumhari chahta puri karungi..zarur karungi..my darling..tum bas mujhe yu hi apne paas rakho..aannnnhhhhh..shariri kahinke!”,pranav ne uski gand ko daboch uske chhed me ungli ghusa di thi.rita ne shararat se muskurate hue damad ke gaal pe pyar bhari chapat lagayi to usne ungli ko & andar ghusa diya,”..oowwww..!”,rita masti me karahi & jismo ka khel shuru ho gaya.pranav ne use bahao me bhara to usne apna chhere uske daye kandhe me chhupa liya.pranav uski chut ko lund se & gand ko ungli se chodta muskurane laga..sameer ko gherne ke liye uska jaal taiyyar hota dikh raha tha use ab.
Rambha us raat khub soyi.usne puri sham apni maa ke bare me socha & deven ke bare me bhi.deven ke liye vo 1 lagav sa mehsus kar rahi thi.uski maa ko kitna chahata tha vo lekin us bechare ko kya mila?..bas dard & taklif..puri umra ke liye!usne tay kar liya ki vo uske ghavo pe marham zarur lagayegi & us dayal ko khoj ke rahegi chahe kuchh bhi ho jaye.
Agli subah vo uthi to use pranav ka khayal aaya.usne use fone karne ki sochi lekin us se bhi pehle sameer ko fone kiya.sameer ne us se dhang se baat nahi ki & masruf hone ka bahana banaya.uske ravaiyye ne rambha ke trust Films ko join karne ke irade ko & pukhta kar diya.usne pranav ko fone kiya to aaj use bhi bahut kaam tha.usne shopping jane ka irada kiya & uski taiyyari karne lagi.
“hello..”,rambha ne 1 dhili si lambi,safed skirt pehni thi & kale bra ke upar pure bazuo ki kali kamiz daal uske buttons laga hi rahi thi ki pranav ka fone aa gaya,”..main to shopping ja rhai thi..haan..pura din busy rahoge kya?..bahut bure ho tum..abhi to sameer bhi nahi hai & tumhare paas mere liye waqt hi nahi hai..hun..ok,bye!”,rambha ne muskurate hue mobile band kiya..uska nandoi to uska deewana ho gaya tha!
“haan vo dikhao..”,dopahar ke 12 baje devalay ke Nehru Market me bheed hone lagi thi,”..is market me har saman ki dukane thi & college jane vale ladke-ladki yaha kapde kharidne ke liya khub aate the.rambha 1 dukan me tange 1 skirt ko dekh rahi thi.
“hi!”,vo chaunk ke ghumi.
“pranav..tum yaha?”,uske chehre pe haya ki surkhi aayi & fir usne aavaz thodi dhimi ki,”..tum to pura din busy rehne vale the?”,vo skirt ko hatho me le dekh rahi thi,”..un..nahi..vo dikhao..udhar upar jo tangi hai..”,usne daye hath ko upar uthake ishara kiya & aisa karne se uski kamzi thoda uchak gayi & uski gori kamar numaya ho gayi.
“vo to tumhe chhed raha tha.”,pranav uske peechhe khada tha & uska daya hath rambha ki kamar se aa laga tha lekin is tarah ki dukandar ko na dikhe,”..varna meri aisi majal ki tumhari khdimat se pehle company ki khidmat karu!”,usne vaha ke mans ko dabaya to rambha ki chut kasak uthi & usne badi mushkil se apni aah ko dabaya.
“vo bhi dikhana..”,rambha ne dukandar ko dusri taraf tangi skirt dikhayi & fir uske ghumte hi pranav ka hath kamar se neeche karte hue ghabra ke dekha,”..kya kar rahe ho?..kisi ne dekh liya to?”
“to..kya keh dunga ki meri mehbooba hai!”,pranav phusphusaya & dukandar ke ghumne se pehle kamar ko zor se daba ke hath peechhe khincha.
“ye dono de do.”,rambha ne skirts chun li to pranav ne unke paise de diye & fir dono bahar nikal aaye.bazar mew bheed pal-2 badh rahi thi.pranav rambha ke bayi taraf chal raha tha & bheed me sue rasta dikhane ka bahane baar-2 uski pith ya kamar chhu raha tha.rambha ko uske hatho ka ehsas mast kar raha tha.dekhe jane ka darr,mehboob ka sath..ye baaten uske jism ko jaga rahi thi.magar pakde jane ka darr bahut tha vaha.1 to itne bade khandan ki bahu aise aam logo ke bazaar me shopping kar rahi thi,upar se kisi ne gara uske nandoi ko uske jism ko chhedte dekh liya to bahut bada scandal ho sakta tha.sameer vale hadse ke baad log rambha ko bhi pehchanane lage the.rambha 1 videshi lingerie brand ke showroom me ghus gayi,ye sochte hue ki pranav to vaha aa nahi payega & bada maza aayega uski shakl us waqt dekhne me!
Magar pranav ki kismet uska pura sath de rahi thi.us brand ne haal h me mardo ki range bhi nikali thi so vo apni salhaj ke peechhe-2 anadr ghusa & men’s section me chala gaya.dono store me ghum-2 ke saman dekhne lage.rambha 1 shelf ke paas aayi,putlo pe lagi bra & panty alag-2 sizes me unke bagal me rakhe shelves pe bhi thi & har putle ke bagal me 1 shisha laga tha.rambha ne 1 bra uthaya & use dekhne lagi.
Vo jaha bra dekh rahi thi,uske thik ulti disha me pranav 1 underwear dekh rtha & vaha bhi vaisa hi 1 shisha laga tha.usne shishe me dekha & use samne ke shishe me dekhti us se nazre milati rambha dikhi.rambha ne bra uthake apne seene ke samne ki to pranav ne haule se sar hila ke mana ka diya.vo aage badhi to vo bhi aage badha & is baar ki bra pasand aane pe usne aah me sar hilaya.rambha muskurayi,use is khel me bada maza aa raha tha.dono premi 1 dusre se alag-thalag ,1 dusre ki or pith kiye bhi romance kar rahe the.usne usi tarah pranav ko bhi underwear chunwaya & fir apna bill ada kar vaha se nikal ke aage badh gayi.kuchh der baad pranav bhi vaha se nikla & fir tezi se chalta hua uske sath ho liya.rambha ki chut ab risne lagi thi.
1 jagah bahut bheed thi & pranav ne uska fayda uthate hue uski kamar se hath uski gand pe sarka diya & use dabake hath fauran peechhe khincha.rambha chihunki & thoda aage hui to pranav uske bilkul peechhe aa gaya & uske kandho pe halke se hath rakh thoda aage hua & apna lund uski gand se sata diya.skirt,panty & pranav ki pant & underwear ke bavjud rambha ko uske mardane ang ki jalan mehsus hui & uski chut kasmasa uthi.rambha thoda aage badhi & 1 atm me ghus gayi.uske peechhe pranav bhi vaha aa gaya.atm card se khulta tha & 1 baar koi andar ho to bahar se vo khil nahi sakta tha.pranav ne 1 baar shish eke darwaze se bahardekha,koi nahi tha..usne apni salhaj ko khinch ke shishe ke darwaze ke bagal ki deewar se sata diya.
“nahi..pranav..koi aa jeyge..!”,rambha ki aankhe jism ke nashe se bhari hui thi.pranav ne uski dono kalaiyan pakad ke uske sar ke dono taraf deewar se lagaya & uske baye kaan me jibh firane laga.rambha ne masti me aankhe badn kar li.pranav aage ho uski chut pe apna lund daba raha tha.uske honth ab uski garden ko chumte hue uske chhere pea aye & rambha ne fauran uske hotho ko apne hotho me bhinch uski zuban ko chus liya.uske jism ki kasak bahut badh gayi thi.vo apni kamar hilake pranav ke lund pe jawabi dhakke de rahi thi.pranav ne uski kalaiyan chhodi & uski shirt me hath ghusa uski kamar masalne laga.rambha tezi se kamar hila rahi thi..bas kuchh der &..pranav ne lund & zor se uski chut pe dabaya..”..uunnnnnnnnn..!”,rambha ne badi mushkil se apni aah ko pranav ke hotho me dafn kiya & uska jism jhatke khane laga.pranav ne jhadti hui rambha ko tham liya.kuchh pal baad jab khumari utri to dono alag hue & savdhani se bahar nikal gaye.rambha ke dil me ab chudai ki hasrat jag gayi thi.uska dil kar raha tha ki pranav use kahi le chale jaha dono itminan se 1 dusre me kho saken & vo apni aag bujha paye.
“are..rambha jaldi idhar kone me aao!”,pranav ne dhime magar urgent lahje me kaha to rambha uske peechhe 1 patle se raste pe chali gayi.
“kya hua?”
“shipra ghum rahi hai yaha &..”,usne mud ke dekha,”..& idahr hi aa rahi hai.”,dono tezi se nikle & khule me aa gaye.pranav ne idhar-udhar dekha & use samne parking ke paar multiplex nazar aaya,”..vaha cinema hall pe chalo.jaldi!”,rambha tez kadmo se udhar gayi to pranav us se laga ho kahi gayab ho gaya magar jab rambha cinema hall tak phunchi to usne dekha ki pranav ticket counter se ticket kharid ke khada hai.
“ye ticket lo & andar jao.”,rambha hall me pahunchi to dekha ki pranav bhi peechhe se aa raha hai.dono alag-2 hall ke andar apni seats pe pahunche,”bach gaye.”,lights band hote hi pranav phushphusaya.koi bakwas film thi & hall lagbhag khali tha.sirf chand jode vaha kuchh niji pal churane vaha baithe the.pranav ne sabse peechhe ki kinare ki seats ki tickets lit hi & unki row me 1 joda baitha tha magar dusre kone pe.
“sab tumhari vajah se.kya zarurat thi aise mere peechhe-2 bazar me aane ki?”,rambha ne use jhidka to pranav ne seats ke beech ke hattha uthaya & apni bayi banh keg here me use leke uska gaal chum liya.”..offoh,ab yaha bhi shuru ho gaye!..uunnnnnnhhhh..!”,rambha ne uski baah se chhutne ki koshish ki lekin pranav ki pakad bahut mazbut thi.
“galti meri nahi,tumahri hai!”,pranav uski zuban se khelne ke baad uski shirt me daya hath ghusa ke uski kamar ko sehla raha tha,”..itni haseen kyu ho ki bas tumahre karib rehne ka dil karta hai!”,uska hath kamar se smane pet pea a gaya & uski nabhi ko chhedne laga.
“hato jhuthe..ohhhhh..!”,rambha tariff sun ke muskurayi & uske daye kandhe ko tham liya,”..bas mujhe behlane ko baate bana rahe ho..naaaa!”,pranav uski nabhi ko chhed raha tha & uski chut me fir se kasak hone lagi thi.
“jhuth bolu to abhi mar jaoon!”,pranav ka hath uski nabhi se sarak ke uski pith pea a gaya tha & usne use seene se chipka ke uski chhatiyo ko apne se bhinchte hue chumna shuru kar diya.rambha bhi puri garmjoshi se uska sath dene lagi.pata nahi kitni der tak dono 1 dusre ki zubano se khelte rahe.pranav ke hath uski kamiz ke kase hone ki vajah se zyada upar nahi ja pa rahe the & vo bas uski mansal kamar ko masla ke hi apne ko behla raha tha.
“aah..nahi..koi dekh lega,pranav!..oohhhhhhh..!”,pranav ne hath vapas samne lake uski skirt me aage se ghusa diya tha & uski panty tatol raha tha,”..naaaaa..!”,rambha uska hath pakad ke khinch rahi thi lekin pranav ne hath andar ghusa hi diya tha.rambha ne sharm & masti se aahat ho apna sar uske baye kandhe pe rakh diya & chhere garden & kandhe ke milne vali jagah me chhupa uski garden ko chumne lagi.pranav ki ungliya uski chut ko sehlate hue andar ghusi & use ragadne lagi.rambha kasmasate hue seat pe hi chhatpatane lagi.pranav uske baye kaan ko jibh se chhedte,uske gaal ko chaatate hue uski chut maar raha tha.
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kramashah.......
गतान्क से आगे......
“तुम्हे पता है तुम्हारा
“तो मैं चालू?”,देवेन ने कार का दरवाज़ा खोला.
“ओके.”,रंभा मुस्कुराइ तो उसने उसे 1 कार्ड थमाया.
“ये मेरा नंबर है.”
“थॅंक यू.मैं आज ही घर जाके मा की चीज़े देखती हू.हो सकता है उनमे कोई सुराग मिले.”
“हूँ..चलो,बाइ.”
“बाइ.”
“आज याद आई है मेरी?”,प्रणव के कमरे मे कदम रखते ही रीता ने तल्ख़ नज़रो से उसका स्वागत किया.प्रणव खामोशी से बिस्तर पे उसके बगल मे बैठ गया,”..अब मन भर गया ना मुझसे?”,प्रणव ने उसे ऐसे देखा जैसे उसे ये बात बहुत बुरी लगी हो.अचानक उसने रीता को बाहो मे भींच लिया & उसे पागलो की तरह चूमने लगा.
“आहह..नाआअ……छ्चोड़ो..छोड़ो..मुझे..उउम्म्म्मम..!”,रीता उसकी गिरफ़्त मे च्चटपटाने लगी.
“कैसे आता पहले?..हर रोज़ तो शिप्रा आपके साथ चिपकी रहती थी..उसके सामने आपको प्यार करने लगता क्या?”,प्रणव ने उसे बिस्तर पे लिटा दिया था & उसके उपर चढ़ उसे अपनी गर्म किस्सस से बहाल कर रहा था.
“ओह..माआअ..कभी अकेले मे पकड़ लेते मुझे..आन्न्णणन्..”,प्रणव ने उसकी नाइटी मे हाथ घुसा उसकी चूचियाँ मसल दी थी,”..कितना तदपि हूँ तुम्हारे लिए,प्रणव..ऊहह..!”,अपनी चूचियो को पीते अपने दामाद के सर को उसने अपने सीने पे & भींच दिया और सुकून से आँखे बंद कर ली.
“आपको भी बस अपने दर्द की फ़िक्र है मेरी परवाह नही.”,प्रणव ने उसकी चूचियो को जी भर के चूमने के बाद सर उपर उठा के अपनी सास को देखा.
“क्या हुआ प्रणव?क्या बात परेशान कर रही है तुम्हे?”,रीता ने थोड़ी चिंता के साथ उसके बालो मे हाथ फिराए.
“मोम,डॅड के लिए मैं कभी 1 चौकीदार से ज़्यादा नही रहा.”,उसका बाया हाथ अभी भी रीता की चूचियो को बारी-2 से दबा रहा था.
“क्या बोल रहे हो प्रणव!तुम दामाद हो इस घर के!..ऊहह..!”,रीता ने टाँगे फैलाई तो प्रणव ने अपना पाजामे मे क़ैद लंड उसकी चूत पे दबा दिया.
“हां,लेकिन हैसियत तो चौकीदार के जितनी ही है.जब समीर गायब हुआ तो डॅड ने सब मुझे सौंप दिया & जब वो वापस आ गया तो उनकी वसीयत मे तो मुझे कुछ नही मिला.ये मत समझिए कि मैं लालची हू & मुझे आपकी दौलत की हवस है..”,प्रणव अपनी कमर हिलाके सास की चूत को लंड से बुरी तरह दबा रहा था,”..मुझे चाहत है इज़्ज़त की.ट्रस्ट ग्रूप को मैने अपना सबकुच्छ दिया है तो बदले मे मुझे बस इतनी इज़्ज़त चाहिए की मेरा भी नाम उसके मालिको मे शुमार हो,मुझे भी समीर के बराबर की जगह मिले, भले उसके बदले मे मुझे हर महीने वही तनख़्वाह मिले जो अभी मिलती है.”,रीता गौर से दामाद को देख रही थी.1 मर्द के अहम को ठेस लगे तो वो तिलमिला जाता है & कोई भी ग़लत कदम उठा सकता है.प्रणव ने ऐसा किया तो परिवार के साथ-2 कारोबार पे भी असर पड़ता & उसे भी उसकी ज़ोरदार चुदाई से महरूम रहना पड़ सकता था.
रीता ने दामाद को बाहो मे भरते हुए पलटा & उसके सीने को चूमते हुए उसके पाजामे तक आई & उसे छोड़, उसके लंड को निकाला & मुँह मे भर लिया.उसने लंड चूस-2 के प्रणव के दिल को खुशी से भर दिया फिर उसके कपड़े उतार उसे नंगा किया & अपनी पॅंटी उतारी & फिर नाइटी को हाथो मे उठा उसके उपर आ उसके लंड पे बैठ गयी.
“अपने दिल से सारे बुरे ख़याल निकाल दो,प्रणव..ऊहह..”,लंड ने उसकी चूत को पूरा भर दिया था.वो झुकी & दामाद के होंठो को चूमा,”..मुझपे भरोसा रखो,मैं तुम्हारी चाहत पूरी करूँगी..ज़रूर करूँगी..माइ डार्लिंग..तुम बस मुझे यू ही अपने पास रखो..आन्न्न्नह..शरीरी कहिनके!”,प्रणव ने उसकी गंद को दबोच उसके छेद मे उंगली घुसा दी थी.रीता ने शरारत से मुस्कुराते हुए दामाद के गाल पे प्यार भरी चपत लगाई तो उसने उंगली को & अंदर घुसा दिया,”..ऊव्ववव..!”,रीता मस्ती मे कराही & जिस्मो का खेल शुरू हो गया.प्रणव ने उसे बाँहो मे भरा तो उसने अपना चेहरा उसके दाए कंधे मे च्छूपा लिया.प्रणव उसकी चूत को लंड से और गंद को उंगली से चोद्ता मुस्कुराने लगा..समीर को घेरने के लिए उसका जाल तैय्यार होता दिख रहा था उसे अब.
रंभा उस रात खूब सोई.उसने पूरी शाम अपनी मा के बारे मे सोचा & देवेन के बारे मे भी.देवेन के लिए वो 1 लगाव सा महसूस कर रही थी.उसकी मा को कितना चाहता था वो लेकिन उस बेचारे को क्या मिला?..बस दर्द & तकलीफ़..पूरी उम्र के लिए!उसने तय कर लिया कि वो उसके घाव पे मरहम ज़रूर लगाएगी & उस दयाल को खोज के रहेगी चाहे कुच्छ भी हो जाए.
अगली सुबह वो उठी तो उसे प्रणव का ख़याल आया.उसने उसे फोन करने की सोची लेकिन उस से भी पहले समीर को फोन किया.समीर ने उस से ढंग से बात नही की & मसरूफ़ होने का बहाना बनाया.उसके रवैयययए ने रंभा के ट्रस्ट फिल्म्स को जाय्न करने के इरादे को और पुख़्ता कर दिया.उसने प्रणव को फोन किया तो आज उसे भी बहुत काम था.उसने शॉपिंग जाने का इरादा किया और उसकी तैय्यारि करने लगी.
“हेलो..”,रंभा ने 1 ढीली सी लंबी,सफेद स्कर्ट पहनी थी & काले ब्रा के उपर पूरे बाजुओ की काली कमीज़ डाल उसके बटन्स लगा ही रही थी कि प्रणव का फोन आ गया,”..मैं तो शॉपिंग जा र्है थी..हां..पूरा दिन बिज़ी रहोगे क्या?..बहुत बुरे हो तुम..अभी तो समीर भी नही है & तुम्हारे पास मेरे लिए वक़्त ही नही है..हूँ..ओके,बाइ!”,रंभा ने मुस्कुराते हुए मोबाइल बंद किया..उसका नंदोई तो उसका दीवाना हो गया था!
“हां वो दिखाओ..”,दोपहर के 12 बजे डेवाले के नेहरू मार्केट मे भीड़ होने लगी थी,”..इस मार्केट मे हर समान की दुकाने थी & कॉलेज जाने वाले लड़के-लड़की यहा कपड़े खरीदने के लिया खूब आते थे.रंभा 1 दुकान मे टँगे 1 स्कर्ट को देख रही थी.
“हाई!”,वो चौंक के घूमी.
“प्रणव..तुम यहा?”,उसके चेहरे पे हया की सुर्खी आई & फिर उसने आवाज़ थोड़ी धीमी की,”..तुम तो पूरा दिन बिज़ी रहने वाले थे?”,वो स्कर्ट को हाथो मे ले देख रही थी,”..उन..नही..वो दिखाओ..उधर उपर जो तंगी है..”,उसने दाए हाथ को उपर उठाके इशारा किया & ऐसा करने से उसकी कंज़ी थोड़ा उचक गयी & उसकी गोरी कमर नुमाया हो गयी.
“वो तो तुम्हे छेड़ रहा था.”,प्रणव उसके पीछे खड़ा था & उसका दाया हाथ रंभा की कमर से आ लगा था लेकिन इस तरह की दुकानदार को ना दिखे,”..वरना मेरी ऐसी मज़ाल की तुम्हारी खदिमात से पहले कंपनी की खिदमत करू!”,उसने वाहा के माँस को दबाया तो रंभा की चूत कसक उठी & उसने बड़ी मुश्किल से अपनी आह को दबाया.
“वो भी दिखाना..”,रंभा ने दुकानदार को दूसरी तरफ तंगी स्कर्ट दिखाई & फिर उसके घूमते ही प्रणव का हाथ कमर से नीचे करते हुए घबरा के देखा,”..क्या कर रहे हो?..किसी ने देख लिया तो?”
“तो..क्या कह दूँगा कि मेरी महबूबा है!”,प्रणव फुसफुसाया & दुकानदार के घूमने से पहले कमर को ज़ोर से दबा के हाथ पीछे खींचा.
“ये दोनो दे दो.”,रंभा ने स्कर्ट्स चुन ली तो प्रणव ने उनके पैसे दे दिए & फिर दोनो बाहर निकल आए.बाज़ार मे भीड़ पल-2 बढ़ रही थी.प्रणव रंभा के बाई तरफ चल रहा था & भीड़ मे उसे रास्ता दिखाने का बहाने बार-2 उसकी पीठ या कमर च्छू रहा था.रंभा को उसके हाथो का एहसास मस्त कर रहा था.देखे जाने का डर,महबूब का साथ..ये बातें उसके जिस्म को जगा रही थी.मगर पकड़े जाने का डर बहुत था वाहा.1 तो इतने बड़े खानदान की बहू ऐसे आम लोगो के बेज़ार मे शॉपिंग कर रही थी,उपर से किसी ने उसके नंदोई को उसके जिस्म को छेड़ते देख लिया तो बहुत बड़ा स्कॅंडल हो सकता था.समीर वाले हादसे के बाद लोग रंभा को भी पहचानने लगे थे.रंभा 1 विदेशी लाइनाये ब्रांड के शोरुम मे घुस गयी,ये सोचते हुए कि प्रणव तो वाहा आ नही पाएगा & बड़ा मज़ा आएगा उसकी शक्ल उस वक़्त देखने मे!
मगर प्रणव की किस्मेत उसका पूरा साथ दे रही थी.उस ब्रांड ने हाल ही मे मर्दो की रंगे भी निकाली थी सो वो अपनी सलहज के पीछे-2 अंदर घुसा & मेन’स सेक्षन मे चला गया.दोनो स्टोर मे घूम-2 के समान देखने लगे.रंभा 1 शेल्फ के पास आई,पुतलो पे लगी ब्रा & पॅंटी अलग-2 साइज़स मे उनके बगल मे रखे शेल्व्स पे भी थी & हर पुतले के बगल मे 1 शीशा लगा था.रंभा ने 1 ब्रा उठाया & उसे देखने लगी.
वो जहा ब्रा देख रही थी,उसके ठीक उल्टी दिशा मे प्रणव 1 अंडरवेर देख रहा था & वाहा भी वैसा ही 1 शीशा लगा था.उसने शीशे मे देखा & उसे सामने के शीशे मे देखती उस से नज़रे मिलती रंभा दिखी.रंभा ने ब्रा उठाके अपने सीने के सामने की तो प्रणव ने हौले से सर हिला के मना का दिया.वो आगे बढ़ी तो वो भी आगे बढ़ा & इस बार की ब्रा पसंद आने पे उसने ना मे सर हिलाया.रंभा मुस्कुराइ,उसे इस खेल मे बड़ा मज़ा आ रहा था.दोनो प्रेमी 1 दूसरे से अलग-थलग ,1 दूसरे की ओर पीठ किए भी रोमॅन्स कर रहे थे.उसने उसी तरह प्रणव को भी अंडरवेर चुनवाया & फिर अपना बिल अदा कर वाहा से निकल के आगे बढ़ गयी.कुच्छ देर बाद प्रणव भी वाहा से निकला & फिर तेज़ी से चलता हुआ उसके साथ हो लिया.रंभा की चूत अब रिसने लगी थी.
1 जगह बहुत भीड़ थी & प्रणव ने उसका फ़ायदा उठाते हुए उसकी कमर से हाथ उसकी गंद पे सरका दिया & उसे दबा के हाथ फ़ौरन पीछे खींचा.रंभा चिहुनकि & थोडा आयेज हुई तो प्रणव उसके बिल्कुल पीछे आ गया & उसके कंधो पे हल्के से हाथ रख थोड़ा आगे हुआ & अपना लंड उसकी गंद से सटा दिया.स्कर्ट,पॅंटी & प्रणव की पॅंट & अंडरवेर के बावजूद रंभा को उसके मर्डाने अंग की जलन महसूस हुई & उसकी चूत कसमसा उठी.रंभा थोड़ा आगे बढ़ी & 1 एटीएम मे घुस गयी.उसके पीछे प्रणव भी वाहा आ गया.एटीम कार्ड से खुलता था & 1 बार कोई अंदर हो तो बाहर से वो खिल नही सकता था.प्रणव ने 1 बार शीश एके दरवाज़े से बाहर देखा,कोई नही था..उसने अपनी सलहज को खींच के शीशे के दरवाज़े के बगल की दीवार से सटा दिया.
“नही..प्रणव..कोई आ जाएगा..!”,रंभा की आँखे जिस्म के नशे से भारी हुई थी.प्रणव ने उसकी दोनो कलाइयाँ पकड़ के उसके सर के दोनो तरफ दीवार से लगाया & उसके बाए कान मे जीभ फिराने लगा.रंभा ने मस्ती मे आँखे बंद कर ली.प्रणव आगे हो उसकी चूत पे अपना लंड दबा रहा था.उसके होंठ अब उसकी गर्देन को चूमते हुए उसके चेहरे पे आए & रंभा ने फ़ौरन उसके होंठो को अपने होंठो मे भींच उसकी ज़ुबान को चूस लिया.उसके जिस्म की कसक बहुत बढ़ गयी थी.वो अपनी कमर हिलाके प्रणव के लंड पे जवाबी धक्के दे रही थी.प्रणव ने उसकी कलाइयाँ छ्चोड़ी & उसकी शर्ट मे हाथ घुसा उसकी कमर मसल्ने लगा.रंभा तेज़ी से कमर हिला रही थी..बस कुच्छ देर &..प्रणव ने लंड & ज़ोर से उसकी चूत पे दबाया..”..उउन्न्ञनननणणन्..!”,रंभा ने बड़ी मुश्किल से अपनी आह को प्रणव के होंठो मे दफ़्न किया & उसका जिस्म झटके खाने लगा.प्रणव ने झड़ती हुई रंभा को थाम लिया.कुच्छ पल बाद जब खुमारी उतरी तो दोनो अलग हुए & सावधानी से बाहर निकल गये.रंभा के दिल मे अब चुदाई की हसरत जाग गयी थी.उसका दिल कर रहा था कि प्रणव उसे कही ले चले जहा दोनो इतमीनान से 1 दूसरे मे खो सकें & वो अपनी आग बुझा पाए.
“अरे..रंभा जल्दी इधर कोने मे आओ!”,प्रणव ने धीमे मगर अर्जेंट लहजे मे कहा तो रंभा उसके पीछे 1 पतले से रास्ते पे चली गयी.
“क्या हुआ?”
“शिप्रा घूम रही है यहा &..”,उसने मूड के देखा,”..& इधर ही आ रही है.”,दोनो तेज़ी से निकले & खुले मे आ गये.प्रणव ने इधर-उधर देखा & उसे सामने पार्किंग के पार मल्टिपलेक्स नज़र आया,”..वाहा सिनिमा हॉल पे चलो.जल्दी!”,रंभा तेज़ कदमो से उधर गयी तो प्रणव उस से अलग हो कही गायब हो गया मगर जब रंभा सिनिमा हॉल तक पहुँची तो उसने देखा कि प्रणव टिकेट काउंटर से टिकेट खरीद के खड़ा है.
“ये टिकेट लो & अंदर जाओ.”,रंभा हॉल मे पहुँची तो देखा की प्रणव भी पीछे से आ रहा है.दोनो अलग-2 हॉल के अंदर अपनी सीट्स पे पहुँचे,”बच गये.”,लाइट्स बंद होते ही प्रणव फुशफुसाया.कोई बकवास फिल्म थी & हॉल लगभग खाली था.सिर्फ़ चंद जोड़े वाहा कुच्छ निजी पल चुराने वाहा बैठे थे.प्रणव ने सबसे पीछे की किनारे की सीट्स की टिकेट्स ली थी & उनकी रो मे 1 जोड़ा बैठा था मगर दूसरे कोने पे.
“सब तुम्हारी वजह से.क्या ज़रूरत थी ऐसे मेरे पीछे-2 बाज़ार मे आने की?”,रंभा ने उसे झिड़का तो प्रणव ने सीट्स के बीच के हत्था उठाया & अपनी बाई बाँह मे उसे लेके उसका गाल चूम लिया.”..ओफ्फो,अब यहा भी शुरू हो गये!..उउन्न्ञणणनह..!”,रंभा ने उसकी बाह से छूटने की कोशिश की लेकिन प्रणव की पकड़ बहुत मज़बूत थी.
“ग़लती मेरी नही,तुम्हारी है!”,प्रणव उसकी ज़ुबान से खेलने के बाद उसकी शर्ट मे दाया हाथ घुसा के उसकी कमर को सहला रहा था,”..इतनी हसीन क्यू हो कि बस तुमहरे करीब रहने का दिल करता है!”,उसका हाथ कमर से स्मने पेट पी आ गया & उसकी नाभि को छेड़ते लगा.
“हटो झूठे..ओह..!”,रंभा टॅरिफ सुन के मुस्कुराइ & उसके दाए कंधे को थाम लिया,”..बस मुझे बहलाने को बाते बना रहे हो..नाआ!”,प्रणव उसकी नाभि को छेड़ रहा था & उसकी चूत मे फिर से कसक होने लगी थी.
“झूठ बोलू तो अभी मर जाऊं!”,प्रणव का हाथ उसकी नाभि से सरक के उसकी पीठ पे आ गया था & उसने उसे सीने से चिपका के उसकी छातियो को अपने से भींचते हुए चूमना शुरू कर दिया.रंभा भी पूरी गर्मजोशी से उसका साथ देने लगी.पता नही कितनी देर तक दोनो 1 दूसरे की ज़ुबानो से खेलते रहे.प्रणव के हाथ उसकी कमीज़ के कसे होने की वजह से ज़्यादा उपर नही जा पा रहे थे & वो बस उसकी मांसल कमर को मसल के ही अपने को बहला रहा था.
“आह..नही..कोई देख लेगा,प्रणव!..ऊहह..!”,प्रणव ने हाथ वापस सामने लाके उसकी स्कर्ट मे आगे से घुसा दिया था & उसकी पॅंटी टटोल रहा था,”..नाआअ..!”,रंभा उसका हाथ पकड़ के खींच रही थी लेकिन प्रणव ने हाथ अंदर घुसा ही दिया था.रंभा ने शर्म & मस्ती से आहत हो अपना सर उसके बाए कंधे पे रख दिया & चेहरे गर्देन & कंधे के मिलने वाली जगह मे च्छूपा उसकी गर्देन को चूमने लगी.प्रणव की उंगलिया उसकी चूत को सहलाते हुए अंदर घुसी & उसे रगड़ने लगी.रंभा कसमसाते हुए सीट पे ही च्चटपटाने लगी.प्रणव उसके बाए कान को जीभ से छेड़ते,उसके गाल को चाटते हुए उसकी चूत मार रहा था.
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क्रमशः.......
JAAL paart--50
gataank se aage......
“tumhe pata hai tumhara
“to main chalu?”,deven ne car ka darwaza khola.
“ok.”,rambha muskurayi to usne use 1 card thamaya.
“ye mera number hai.”
“thank you.main aaj hi ghar jake maa ki chize dekhti hu.ho sakta hai unme koi surag mile.”
“hun..chalo,bye.”
“bye.”
“aaj yaad aayi hai meri?”,Pranav ke kamre me kadam rakhte hi Rita ne talkh nazro se uska swagat kiya.pranav khamoshi se bistar pe uske bagal me baith gaya,”..ab man bhar gaya na mujhse?”,pranav ne use aise dekha jaise use ye baat bahut buri lagi ho.achanak usne rita ko baaho me bhinch liya & use paglo ki tarah chumne laga.
“aahhhhh..naaaaa……chhodo..chodo..mujhe..uummmmm..!”,rita uski giraft me chhatpatane lagi.
“kaise aata pehle?..har roz to Shipra aapke sath chipki rehti thi..uske samne aapko pyar karne lagta kya?”,pranva ne us ebistar pe lita diya tha & uske upar chadh use apni garm kisses se behaal kar raha tha.
“oh..maaaaa..kabhi akele me pakad lete mujhe..aannnnn..”,pranav ne uski nighty me hath ghusake uski chhatiya masla di thi,”..kitna tadpi hun tumahre liye,pranav..oohhhhh..!”,apni chhatiyo ko pite apne damad ke sar ko usne apne seene pe & bhinch diya & sukun se aankhe band kar li.
“aapko bhi bas apne dard ki fikr hai meri parwah nahi.”,pranav ne uski choochiyo ko ji bhar ke chumne ke baad sar upar utha ke apni saas ko dekha.
“kya hua pranav?kya baat parehsan kar rahi hai tumhe?”,rita ne thodi chinta ke sath uske balo me hath firaye.
“mom,dad ke liye main kabhi 1 chaukidar se zyada nahi raha.”,uska baya hath abhi bhi rita ki choochiyo ko bari-2 se daba raha tha.
“kya bol rahe ho pranav!tum damad ho is ghar ke!..oohhhh..!”,rita ne tange failayi to pranav ne apna pajame me qaid lund uski chut pe daba diya.
“haan,lekin haisiyat to chaukidar ke jitni hi hai.jab Sameer gayab hua to dad ne sab mujhe saunp diya & jab vo vapas aa gaya to unki vasiyat me to mujhe kuch nahi mila.ye mat samajhiye ki main lalchi hu & mujhe aapki daulat ki hawas hai..”,pranav apni kamar hilake saas ki chut ko lund se buri tarah daba raha tha,”..mujhe chahta hai izzat ki.trust group ko maine apna sabkuchh diya hai to badle me mujhe bas itni izzat chahiye ki mera bhi naa uske maliko me shumar ho,mujhe bhi sameer ke barabar ki jagah mile, bhale uske badle me mujhe har mahine vahi tankhwah mile jo abhi milti hai.”,rita gaur se damad ko dekh rahi thi.1 mard ke aham ko thes lage to vo tilmila jata hai & koi bhi galat kadam utha sakta hai.pranav ne aisa kiya to parivar ke sath-2 karobar pe bhi asar padta & use bhi uski zordar chudai se mehrum rehna pad sakta tha.
Rita ne damad ko baaho me bharte hue palta & uske seene ko chumte hue uske pajame tak aayi & us echo, uske lund ko nikala & munh me bhar liya.usne lkund chus-2 ke pranva ke dil ko khushi se bhar diya fir uske kapde utar use nanga kiya & apni panty uteri & fir nighty ko hatho me utha uske upar aa uske lund pe baith gayi.
“apne dil se sare bure khayal nikald do,pranav..oohhhhh..”,lund ne uski chut ko pura bhar diya tha.vo jhuki & damad ke hotho ko chuma,”..mujhpe bharosa rakho,main tumhari chahta puri karungi..zarur karungi..my darling..tum bas mujhe yu hi apne paas rakho..aannnnhhhhh..shariri kahinke!”,pranav ne uski gand ko daboch uske chhed me ungli ghusa di thi.rita ne shararat se muskurate hue damad ke gaal pe pyar bhari chapat lagayi to usne ungli ko & andar ghusa diya,”..oowwww..!”,rita masti me karahi & jismo ka khel shuru ho gaya.pranav ne use bahao me bhara to usne apna chhere uske daye kandhe me chhupa liya.pranav uski chut ko lund se & gand ko ungli se chodta muskurane laga..sameer ko gherne ke liye uska jaal taiyyar hota dikh raha tha use ab.
Rambha us raat khub soyi.usne puri sham apni maa ke bare me socha & deven ke bare me bhi.deven ke liye vo 1 lagav sa mehsus kar rahi thi.uski maa ko kitna chahata tha vo lekin us bechare ko kya mila?..bas dard & taklif..puri umra ke liye!usne tay kar liya ki vo uske ghavo pe marham zarur lagayegi & us dayal ko khoj ke rahegi chahe kuchh bhi ho jaye.
Agli subah vo uthi to use pranav ka khayal aaya.usne use fone karne ki sochi lekin us se bhi pehle sameer ko fone kiya.sameer ne us se dhang se baat nahi ki & masruf hone ka bahana banaya.uske ravaiyye ne rambha ke trust Films ko join karne ke irade ko & pukhta kar diya.usne pranav ko fone kiya to aaj use bhi bahut kaam tha.usne shopping jane ka irada kiya & uski taiyyari karne lagi.
“hello..”,rambha ne 1 dhili si lambi,safed skirt pehni thi & kale bra ke upar pure bazuo ki kali kamiz daal uske buttons laga hi rahi thi ki pranav ka fone aa gaya,”..main to shopping ja rhai thi..haan..pura din busy rahoge kya?..bahut bure ho tum..abhi to sameer bhi nahi hai & tumhare paas mere liye waqt hi nahi hai..hun..ok,bye!”,rambha ne muskurate hue mobile band kiya..uska nandoi to uska deewana ho gaya tha!
“haan vo dikhao..”,dopahar ke 12 baje devalay ke Nehru Market me bheed hone lagi thi,”..is market me har saman ki dukane thi & college jane vale ladke-ladki yaha kapde kharidne ke liya khub aate the.rambha 1 dukan me tange 1 skirt ko dekh rahi thi.
“hi!”,vo chaunk ke ghumi.
“pranav..tum yaha?”,uske chehre pe haya ki surkhi aayi & fir usne aavaz thodi dhimi ki,”..tum to pura din busy rehne vale the?”,vo skirt ko hatho me le dekh rahi thi,”..un..nahi..vo dikhao..udhar upar jo tangi hai..”,usne daye hath ko upar uthake ishara kiya & aisa karne se uski kamzi thoda uchak gayi & uski gori kamar numaya ho gayi.
“vo to tumhe chhed raha tha.”,pranav uske peechhe khada tha & uska daya hath rambha ki kamar se aa laga tha lekin is tarah ki dukandar ko na dikhe,”..varna meri aisi majal ki tumhari khdimat se pehle company ki khidmat karu!”,usne vaha ke mans ko dabaya to rambha ki chut kasak uthi & usne badi mushkil se apni aah ko dabaya.
“vo bhi dikhana..”,rambha ne dukandar ko dusri taraf tangi skirt dikhayi & fir uske ghumte hi pranav ka hath kamar se neeche karte hue ghabra ke dekha,”..kya kar rahe ho?..kisi ne dekh liya to?”
“to..kya keh dunga ki meri mehbooba hai!”,pranav phusphusaya & dukandar ke ghumne se pehle kamar ko zor se daba ke hath peechhe khincha.
“ye dono de do.”,rambha ne skirts chun li to pranav ne unke paise de diye & fir dono bahar nikal aaye.bazar mew bheed pal-2 badh rahi thi.pranav rambha ke bayi taraf chal raha tha & bheed me sue rasta dikhane ka bahane baar-2 uski pith ya kamar chhu raha tha.rambha ko uske hatho ka ehsas mast kar raha tha.dekhe jane ka darr,mehboob ka sath..ye baaten uske jism ko jaga rahi thi.magar pakde jane ka darr bahut tha vaha.1 to itne bade khandan ki bahu aise aam logo ke bazaar me shopping kar rahi thi,upar se kisi ne gara uske nandoi ko uske jism ko chhedte dekh liya to bahut bada scandal ho sakta tha.sameer vale hadse ke baad log rambha ko bhi pehchanane lage the.rambha 1 videshi lingerie brand ke showroom me ghus gayi,ye sochte hue ki pranav to vaha aa nahi payega & bada maza aayega uski shakl us waqt dekhne me!
Magar pranav ki kismet uska pura sath de rahi thi.us brand ne haal h me mardo ki range bhi nikali thi so vo apni salhaj ke peechhe-2 anadr ghusa & men’s section me chala gaya.dono store me ghum-2 ke saman dekhne lage.rambha 1 shelf ke paas aayi,putlo pe lagi bra & panty alag-2 sizes me unke bagal me rakhe shelves pe bhi thi & har putle ke bagal me 1 shisha laga tha.rambha ne 1 bra uthaya & use dekhne lagi.
Vo jaha bra dekh rahi thi,uske thik ulti disha me pranav 1 underwear dekh rtha & vaha bhi vaisa hi 1 shisha laga tha.usne shishe me dekha & use samne ke shishe me dekhti us se nazre milati rambha dikhi.rambha ne bra uthake apne seene ke samne ki to pranav ne haule se sar hila ke mana ka diya.vo aage badhi to vo bhi aage badha & is baar ki bra pasand aane pe usne aah me sar hilaya.rambha muskurayi,use is khel me bada maza aa raha tha.dono premi 1 dusre se alag-thalag ,1 dusre ki or pith kiye bhi romance kar rahe the.usne usi tarah pranav ko bhi underwear chunwaya & fir apna bill ada kar vaha se nikal ke aage badh gayi.kuchh der baad pranav bhi vaha se nikla & fir tezi se chalta hua uske sath ho liya.rambha ki chut ab risne lagi thi.
1 jagah bahut bheed thi & pranav ne uska fayda uthate hue uski kamar se hath uski gand pe sarka diya & use dabake hath fauran peechhe khincha.rambha chihunki & thoda aage hui to pranav uske bilkul peechhe aa gaya & uske kandho pe halke se hath rakh thoda aage hua & apna lund uski gand se sata diya.skirt,panty & pranav ki pant & underwear ke bavjud rambha ko uske mardane ang ki jalan mehsus hui & uski chut kasmasa uthi.rambha thoda aage badhi & 1 atm me ghus gayi.uske peechhe pranav bhi vaha aa gaya.atm card se khulta tha & 1 baar koi andar ho to bahar se vo khil nahi sakta tha.pranav ne 1 baar shish eke darwaze se bahardekha,koi nahi tha..usne apni salhaj ko khinch ke shishe ke darwaze ke bagal ki deewar se sata diya.
“nahi..pranav..koi aa jeyge..!”,rambha ki aankhe jism ke nashe se bhari hui thi.pranav ne uski dono kalaiyan pakad ke uske sar ke dono taraf deewar se lagaya & uske baye kaan me jibh firane laga.rambha ne masti me aankhe badn kar li.pranav aage ho uski chut pe apna lund daba raha tha.uske honth ab uski garden ko chumte hue uske chhere pea aye & rambha ne fauran uske hotho ko apne hotho me bhinch uski zuban ko chus liya.uske jism ki kasak bahut badh gayi thi.vo apni kamar hilake pranav ke lund pe jawabi dhakke de rahi thi.pranav ne uski kalaiyan chhodi & uski shirt me hath ghusa uski kamar masalne laga.rambha tezi se kamar hila rahi thi..bas kuchh der &..pranav ne lund & zor se uski chut pe dabaya..”..uunnnnnnnnn..!”,rambha ne badi mushkil se apni aah ko pranav ke hotho me dafn kiya & uska jism jhatke khane laga.pranav ne jhadti hui rambha ko tham liya.kuchh pal baad jab khumari utri to dono alag hue & savdhani se bahar nikal gaye.rambha ke dil me ab chudai ki hasrat jag gayi thi.uska dil kar raha tha ki pranav use kahi le chale jaha dono itminan se 1 dusre me kho saken & vo apni aag bujha paye.
“are..rambha jaldi idhar kone me aao!”,pranav ne dhime magar urgent lahje me kaha to rambha uske peechhe 1 patle se raste pe chali gayi.
“kya hua?”
“shipra ghum rahi hai yaha &..”,usne mud ke dekha,”..& idahr hi aa rahi hai.”,dono tezi se nikle & khule me aa gaye.pranav ne idhar-udhar dekha & use samne parking ke paar multiplex nazar aaya,”..vaha cinema hall pe chalo.jaldi!”,rambha tez kadmo se udhar gayi to pranav us se laga ho kahi gayab ho gaya magar jab rambha cinema hall tak phunchi to usne dekha ki pranav ticket counter se ticket kharid ke khada hai.
“ye ticket lo & andar jao.”,rambha hall me pahunchi to dekha ki pranav bhi peechhe se aa raha hai.dono alag-2 hall ke andar apni seats pe pahunche,”bach gaye.”,lights band hote hi pranav phushphusaya.koi bakwas film thi & hall lagbhag khali tha.sirf chand jode vaha kuchh niji pal churane vaha baithe the.pranav ne sabse peechhe ki kinare ki seats ki tickets lit hi & unki row me 1 joda baitha tha magar dusre kone pe.
“sab tumhari vajah se.kya zarurat thi aise mere peechhe-2 bazar me aane ki?”,rambha ne use jhidka to pranav ne seats ke beech ke hattha uthaya & apni bayi banh keg here me use leke uska gaal chum liya.”..offoh,ab yaha bhi shuru ho gaye!..uunnnnnnhhhh..!”,rambha ne uski baah se chhutne ki koshish ki lekin pranav ki pakad bahut mazbut thi.
“galti meri nahi,tumahri hai!”,pranav uski zuban se khelne ke baad uski shirt me daya hath ghusa ke uski kamar ko sehla raha tha,”..itni haseen kyu ho ki bas tumahre karib rehne ka dil karta hai!”,uska hath kamar se smane pet pea a gaya & uski nabhi ko chhedne laga.
“hato jhuthe..ohhhhh..!”,rambha tariff sun ke muskurayi & uske daye kandhe ko tham liya,”..bas mujhe behlane ko baate bana rahe ho..naaaa!”,pranav uski nabhi ko chhed raha tha & uski chut me fir se kasak hone lagi thi.
“jhuth bolu to abhi mar jaoon!”,pranav ka hath uski nabhi se sarak ke uski pith pea a gaya tha & usne use seene se chipka ke uski chhatiyo ko apne se bhinchte hue chumna shuru kar diya.rambha bhi puri garmjoshi se uska sath dene lagi.pata nahi kitni der tak dono 1 dusre ki zubano se khelte rahe.pranav ke hath uski kamiz ke kase hone ki vajah se zyada upar nahi ja pa rahe the & vo bas uski mansal kamar ko masla ke hi apne ko behla raha tha.
“aah..nahi..koi dekh lega,pranav!..oohhhhhhh..!”,pranav ne hath vapas samne lake uski skirt me aage se ghusa diya tha & uski panty tatol raha tha,”..naaaaa..!”,rambha uska hath pakad ke khinch rahi thi lekin pranav ne hath andar ghusa hi diya tha.rambha ne sharm & masti se aahat ho apna sar uske baye kandhe pe rakh diya & chhere garden & kandhe ke milne vali jagah me chhupa uski garden ko chumne lagi.pranav ki ungliya uski chut ko sehlate hue andar ghusi & use ragadne lagi.rambha kasmasate hue seat pe hi chhatpatane lagi.pranav uske baye kaan ko jibh se chhedte,uske gaal ko chaatate hue uski chut maar raha tha.
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kramashah.......