• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Jaal -जाल compleet

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
जाल पार्ट--50

गतान्क से आगे......

“तुम्हे पता है तुम्हारा

“तो मैं चालू?”,देवेन ने कार का दरवाज़ा खोला.

“ओके.”,रंभा मुस्कुराइ तो उसने उसे 1 कार्ड थमाया.

“ये मेरा नंबर है.”

“थॅंक यू.मैं आज ही घर जाके मा की चीज़े देखती हू.हो सकता है उनमे कोई सुराग मिले.”

“हूँ..चलो,बाइ.”

“बाइ.”

“आज याद आई है मेरी?”,प्रणव के कमरे मे कदम रखते ही रीता ने तल्ख़ नज़रो से उसका स्वागत किया.प्रणव खामोशी से बिस्तर पे उसके बगल मे बैठ गया,”..अब मन भर गया ना मुझसे?”,प्रणव ने उसे ऐसे देखा जैसे उसे ये बात बहुत बुरी लगी हो.अचानक उसने रीता को बाहो मे भींच लिया & उसे पागलो की तरह चूमने लगा.

“आहह..नाआअ……छ्चोड़ो..छोड़ो..मुझे..उउम्म्म्मम..!”,रीता उसकी गिरफ़्त मे च्चटपटाने लगी.

“कैसे आता पहले?..हर रोज़ तो शिप्रा आपके साथ चिपकी रहती थी..उसके सामने आपको प्यार करने लगता क्या?”,प्रणव ने उसे बिस्तर पे लिटा दिया था & उसके उपर चढ़ उसे अपनी गर्म किस्सस से बहाल कर रहा था.

“ओह..माआअ..कभी अकेले मे पकड़ लेते मुझे..आन्न्‍णणन्..”,प्रणव ने उसकी नाइटी मे हाथ घुसा उसकी चूचियाँ मसल दी थी,”..कितना तदपि हूँ तुम्हारे लिए,प्रणव..ऊहह..!”,अपनी चूचियो को पीते अपने दामाद के सर को उसने अपने सीने पे & भींच दिया और सुकून से आँखे बंद कर ली.

“आपको भी बस अपने दर्द की फ़िक्र है मेरी परवाह नही.”,प्रणव ने उसकी चूचियो को जी भर के चूमने के बाद सर उपर उठा के अपनी सास को देखा.

“क्या हुआ प्रणव?क्या बात परेशान कर रही है तुम्हे?”,रीता ने थोड़ी चिंता के साथ उसके बालो मे हाथ फिराए.

“मोम,डॅड के लिए मैं कभी 1 चौकीदार से ज़्यादा नही रहा.”,उसका बाया हाथ अभी भी रीता की चूचियो को बारी-2 से दबा रहा था.

“क्या बोल रहे हो प्रणव!तुम दामाद हो इस घर के!..ऊहह..!”,रीता ने टाँगे फैलाई तो प्रणव ने अपना पाजामे मे क़ैद लंड उसकी चूत पे दबा दिया.

“हां,लेकिन हैसियत तो चौकीदार के जितनी ही है.जब समीर गायब हुआ तो डॅड ने सब मुझे सौंप दिया & जब वो वापस आ गया तो उनकी वसीयत मे तो मुझे कुछ नही मिला.ये मत समझिए कि मैं लालची हू & मुझे आपकी दौलत की हवस है..”,प्रणव अपनी कमर हिलाके सास की चूत को लंड से बुरी तरह दबा रहा था,”..मुझे चाहत है इज़्ज़त की.ट्रस्ट ग्रूप को मैने अपना सबकुच्छ दिया है तो बदले मे मुझे बस इतनी इज़्ज़त चाहिए की मेरा भी नाम उसके मालिको मे शुमार हो,मुझे भी समीर के बराबर की जगह मिले, भले उसके बदले मे मुझे हर महीने वही तनख़्वाह मिले जो अभी मिलती है.”,रीता गौर से दामाद को देख रही थी.1 मर्द के अहम को ठेस लगे तो वो तिलमिला जाता है & कोई भी ग़लत कदम उठा सकता है.प्रणव ने ऐसा किया तो परिवार के साथ-2 कारोबार पे भी असर पड़ता & उसे भी उसकी ज़ोरदार चुदाई से महरूम रहना पड़ सकता था.

रीता ने दामाद को बाहो मे भरते हुए पलटा & उसके सीने को चूमते हुए उसके पाजामे तक आई & उसे छोड़, उसके लंड को निकाला & मुँह मे भर लिया.उसने लंड चूस-2 के प्रणव के दिल को खुशी से भर दिया फिर उसके कपड़े उतार उसे नंगा किया & अपनी पॅंटी उतारी & फिर नाइटी को हाथो मे उठा उसके उपर आ उसके लंड पे बैठ गयी.

“अपने दिल से सारे बुरे ख़याल निकाल दो,प्रणव..ऊहह..”,लंड ने उसकी चूत को पूरा भर दिया था.वो झुकी & दामाद के होंठो को चूमा,”..मुझपे भरोसा रखो,मैं तुम्हारी चाहत पूरी करूँगी..ज़रूर करूँगी..माइ डार्लिंग..तुम बस मुझे यू ही अपने पास रखो..आन्न्न्नह..शरीरी कहिनके!”,प्रणव ने उसकी गंद को दबोच उसके छेद मे उंगली घुसा दी थी.रीता ने शरारत से मुस्कुराते हुए दामाद के गाल पे प्यार भरी चपत लगाई तो उसने उंगली को & अंदर घुसा दिया,”..ऊव्ववव..!”,रीता मस्ती मे कराही & जिस्मो का खेल शुरू हो गया.प्रणव ने उसे बाँहो मे भरा तो उसने अपना चेहरा उसके दाए कंधे मे च्छूपा लिया.प्रणव उसकी चूत को लंड से और गंद को उंगली से चोद्ता मुस्कुराने लगा..समीर को घेरने के लिए उसका जाल तैय्यार होता दिख रहा था उसे अब.

रंभा उस रात खूब सोई.उसने पूरी शाम अपनी मा के बारे मे सोचा & देवेन के बारे मे भी.देवेन के लिए वो 1 लगाव सा महसूस कर रही थी.उसकी मा को कितना चाहता था वो लेकिन उस बेचारे को क्या मिला?..बस दर्द & तकलीफ़..पूरी उम्र के लिए!उसने तय कर लिया कि वो उसके घाव पे मरहम ज़रूर लगाएगी & उस दयाल को खोज के रहेगी चाहे कुच्छ भी हो जाए.

अगली सुबह वो उठी तो उसे प्रणव का ख़याल आया.उसने उसे फोन करने की सोची लेकिन उस से भी पहले समीर को फोन किया.समीर ने उस से ढंग से बात नही की & मसरूफ़ होने का बहाना बनाया.उसके रवैयययए ने रंभा के ट्रस्ट फिल्म्स को जाय्न करने के इरादे को और पुख़्ता कर दिया.उसने प्रणव को फोन किया तो आज उसे भी बहुत काम था.उसने शॉपिंग जाने का इरादा किया और उसकी तैय्यारि करने लगी.

“हेलो..”,रंभा ने 1 ढीली सी लंबी,सफेद स्कर्ट पहनी थी & काले ब्रा के उपर पूरे बाजुओ की काली कमीज़ डाल उसके बटन्स लगा ही रही थी कि प्रणव का फोन आ गया,”..मैं तो शॉपिंग जा र्है थी..हां..पूरा दिन बिज़ी रहोगे क्या?..बहुत बुरे हो तुम..अभी तो समीर भी नही है & तुम्हारे पास मेरे लिए वक़्त ही नही है..हूँ..ओके,बाइ!”,रंभा ने मुस्कुराते हुए मोबाइल बंद किया..उसका नंदोई तो उसका दीवाना हो गया था!

“हां वो दिखाओ..”,दोपहर के 12 बजे डेवाले के नेहरू मार्केट मे भीड़ होने लगी थी,”..इस मार्केट मे हर समान की दुकाने थी & कॉलेज जाने वाले लड़के-लड़की यहा कपड़े खरीदने के लिया खूब आते थे.रंभा 1 दुकान मे टँगे 1 स्कर्ट को देख रही थी.

“हाई!”,वो चौंक के घूमी.

“प्रणव..तुम यहा?”,उसके चेहरे पे हया की सुर्खी आई & फिर उसने आवाज़ थोड़ी धीमी की,”..तुम तो पूरा दिन बिज़ी रहने वाले थे?”,वो स्कर्ट को हाथो मे ले देख रही थी,”..उन..नही..वो दिखाओ..उधर उपर जो तंगी है..”,उसने दाए हाथ को उपर उठाके इशारा किया & ऐसा करने से उसकी कंज़ी थोड़ा उचक गयी & उसकी गोरी कमर नुमाया हो गयी.

“वो तो तुम्हे छेड़ रहा था.”,प्रणव उसके पीछे खड़ा था & उसका दाया हाथ रंभा की कमर से आ लगा था लेकिन इस तरह की दुकानदार को ना दिखे,”..वरना मेरी ऐसी मज़ाल की तुम्हारी खदिमात से पहले कंपनी की खिदमत करू!”,उसने वाहा के माँस को दबाया तो रंभा की चूत कसक उठी & उसने बड़ी मुश्किल से अपनी आह को दबाया.

“वो भी दिखाना..”,रंभा ने दुकानदार को दूसरी तरफ तंगी स्कर्ट दिखाई & फिर उसके घूमते ही प्रणव का हाथ कमर से नीचे करते हुए घबरा के देखा,”..क्या कर रहे हो?..किसी ने देख लिया तो?”

“तो..क्या कह दूँगा कि मेरी महबूबा है!”,प्रणव फुसफुसाया & दुकानदार के घूमने से पहले कमर को ज़ोर से दबा के हाथ पीछे खींचा.

“ये दोनो दे दो.”,रंभा ने स्कर्ट्स चुन ली तो प्रणव ने उनके पैसे दे दिए & फिर दोनो बाहर निकल आए.बाज़ार मे भीड़ पल-2 बढ़ रही थी.प्रणव रंभा के बाई तरफ चल रहा था & भीड़ मे उसे रास्ता दिखाने का बहाने बार-2 उसकी पीठ या कमर च्छू रहा था.रंभा को उसके हाथो का एहसास मस्त कर रहा था.देखे जाने का डर,महबूब का साथ..ये बातें उसके जिस्म को जगा रही थी.मगर पकड़े जाने का डर बहुत था वाहा.1 तो इतने बड़े खानदान की बहू ऐसे आम लोगो के बेज़ार मे शॉपिंग कर रही थी,उपर से किसी ने उसके नंदोई को उसके जिस्म को छेड़ते देख लिया तो बहुत बड़ा स्कॅंडल हो सकता था.समीर वाले हादसे के बाद लोग रंभा को भी पहचानने लगे थे.रंभा 1 विदेशी लाइनाये ब्रांड के शोरुम मे घुस गयी,ये सोचते हुए कि प्रणव तो वाहा आ नही पाएगा & बड़ा मज़ा आएगा उसकी शक्ल उस वक़्त देखने मे!

मगर प्रणव की किस्मेत उसका पूरा साथ दे रही थी.उस ब्रांड ने हाल ही मे मर्दो की रंगे भी निकाली थी सो वो अपनी सलहज के पीछे-2 अंदर घुसा & मेन’स सेक्षन मे चला गया.दोनो स्टोर मे घूम-2 के समान देखने लगे.रंभा 1 शेल्फ के पास आई,पुतलो पे लगी ब्रा & पॅंटी अलग-2 साइज़स मे उनके बगल मे रखे शेल्व्स पे भी थी & हर पुतले के बगल मे 1 शीशा लगा था.रंभा ने 1 ब्रा उठाया & उसे देखने लगी.

वो जहा ब्रा देख रही थी,उसके ठीक उल्टी दिशा मे प्रणव 1 अंडरवेर देख रहा था & वाहा भी वैसा ही 1 शीशा लगा था.उसने शीशे मे देखा & उसे सामने के शीशे मे देखती उस से नज़रे मिलती रंभा दिखी.रंभा ने ब्रा उठाके अपने सीने के सामने की तो प्रणव ने हौले से सर हिला के मना का दिया.वो आगे बढ़ी तो वो भी आगे बढ़ा & इस बार की ब्रा पसंद आने पे उसने ना मे सर हिलाया.रंभा मुस्कुराइ,उसे इस खेल मे बड़ा मज़ा आ रहा था.दोनो प्रेमी 1 दूसरे से अलग-थलग ,1 दूसरे की ओर पीठ किए भी रोमॅन्स कर रहे थे.उसने उसी तरह प्रणव को भी अंडरवेर चुनवाया & फिर अपना बिल अदा कर वाहा से निकल के आगे बढ़ गयी.कुच्छ देर बाद प्रणव भी वाहा से निकला & फिर तेज़ी से चलता हुआ उसके साथ हो लिया.रंभा की चूत अब रिसने लगी थी.

1 जगह बहुत भीड़ थी & प्रणव ने उसका फ़ायदा उठाते हुए उसकी कमर से हाथ उसकी गंद पे सरका दिया & उसे दबा के हाथ फ़ौरन पीछे खींचा.रंभा चिहुनकि & थोडा आयेज हुई तो प्रणव उसके बिल्कुल पीछे आ गया & उसके कंधो पे हल्के से हाथ रख थोड़ा आगे हुआ & अपना लंड उसकी गंद से सटा दिया.स्कर्ट,पॅंटी & प्रणव की पॅंट & अंडरवेर के बावजूद रंभा को उसके मर्डाने अंग की जलन महसूस हुई & उसकी चूत कसमसा उठी.रंभा थोड़ा आगे बढ़ी & 1 एटीएम मे घुस गयी.उसके पीछे प्रणव भी वाहा आ गया.एटीम कार्ड से खुलता था & 1 बार कोई अंदर हो तो बाहर से वो खिल नही सकता था.प्रणव ने 1 बार शीश एके दरवाज़े से बाहर देखा,कोई नही था..उसने अपनी सलहज को खींच के शीशे के दरवाज़े के बगल की दीवार से सटा दिया.

“नही..प्रणव..कोई आ जाएगा..!”,रंभा की आँखे जिस्म के नशे से भारी हुई थी.प्रणव ने उसकी दोनो कलाइयाँ पकड़ के उसके सर के दोनो तरफ दीवार से लगाया & उसके बाए कान मे जीभ फिराने लगा.रंभा ने मस्ती मे आँखे बंद कर ली.प्रणव आगे हो उसकी चूत पे अपना लंड दबा रहा था.उसके होंठ अब उसकी गर्देन को चूमते हुए उसके चेहरे पे आए & रंभा ने फ़ौरन उसके होंठो को अपने होंठो मे भींच उसकी ज़ुबान को चूस लिया.उसके जिस्म की कसक बहुत बढ़ गयी थी.वो अपनी कमर हिलाके प्रणव के लंड पे जवाबी धक्के दे रही थी.प्रणव ने उसकी कलाइयाँ छ्चोड़ी & उसकी शर्ट मे हाथ घुसा उसकी कमर मसल्ने लगा.रंभा तेज़ी से कमर हिला रही थी..बस कुच्छ देर &..प्रणव ने लंड & ज़ोर से उसकी चूत पे दबाया..”..उउन्न्ञनननणणन्..!”,रंभा ने बड़ी मुश्किल से अपनी आह को प्रणव के होंठो मे दफ़्न किया & उसका जिस्म झटके खाने लगा.प्रणव ने झड़ती हुई रंभा को थाम लिया.कुच्छ पल बाद जब खुमारी उतरी तो दोनो अलग हुए & सावधानी से बाहर निकल गये.रंभा के दिल मे अब चुदाई की हसरत जाग गयी थी.उसका दिल कर रहा था कि प्रणव उसे कही ले चले जहा दोनो इतमीनान से 1 दूसरे मे खो सकें & वो अपनी आग बुझा पाए.

“अरे..रंभा जल्दी इधर कोने मे आओ!”,प्रणव ने धीमे मगर अर्जेंट लहजे मे कहा तो रंभा उसके पीछे 1 पतले से रास्ते पे चली गयी.

“क्या हुआ?”

“शिप्रा घूम रही है यहा &..”,उसने मूड के देखा,”..& इधर ही आ रही है.”,दोनो तेज़ी से निकले & खुले मे आ गये.प्रणव ने इधर-उधर देखा & उसे सामने पार्किंग के पार मल्टिपलेक्स नज़र आया,”..वाहा सिनिमा हॉल पे चलो.जल्दी!”,रंभा तेज़ कदमो से उधर गयी तो प्रणव उस से अलग हो कही गायब हो गया मगर जब रंभा सिनिमा हॉल तक पहुँची तो उसने देखा कि प्रणव टिकेट काउंटर से टिकेट खरीद के खड़ा है.

“ये टिकेट लो & अंदर जाओ.”,रंभा हॉल मे पहुँची तो देखा की प्रणव भी पीछे से आ रहा है.दोनो अलग-2 हॉल के अंदर अपनी सीट्स पे पहुँचे,”बच गये.”,लाइट्स बंद होते ही प्रणव फुशफुसाया.कोई बकवास फिल्म थी & हॉल लगभग खाली था.सिर्फ़ चंद जोड़े वाहा कुच्छ निजी पल चुराने वाहा बैठे थे.प्रणव ने सबसे पीछे की किनारे की सीट्स की टिकेट्स ली थी & उनकी रो मे 1 जोड़ा बैठा था मगर दूसरे कोने पे.

“सब तुम्हारी वजह से.क्या ज़रूरत थी ऐसे मेरे पीछे-2 बाज़ार मे आने की?”,रंभा ने उसे झिड़का तो प्रणव ने सीट्स के बीच के हत्था उठाया & अपनी बाई बाँह मे उसे लेके उसका गाल चूम लिया.”..ओफ्फो,अब यहा भी शुरू हो गये!..उउन्न्ञणणनह..!”,रंभा ने उसकी बाह से छूटने की कोशिश की लेकिन प्रणव की पकड़ बहुत मज़बूत थी.

“ग़लती मेरी नही,तुम्हारी है!”,प्रणव उसकी ज़ुबान से खेलने के बाद उसकी शर्ट मे दाया हाथ घुसा के उसकी कमर को सहला रहा था,”..इतनी हसीन क्यू हो कि बस तुमहरे करीब रहने का दिल करता है!”,उसका हाथ कमर से स्मने पेट पी आ गया & उसकी नाभि को छेड़ते लगा.

“हटो झूठे..ओह..!”,रंभा टॅरिफ सुन के मुस्कुराइ & उसके दाए कंधे को थाम लिया,”..बस मुझे बहलाने को बाते बना रहे हो..नाआ!”,प्रणव उसकी नाभि को छेड़ रहा था & उसकी चूत मे फिर से कसक होने लगी थी.

“झूठ बोलू तो अभी मर जाऊं!”,प्रणव का हाथ उसकी नाभि से सरक के उसकी पीठ पे आ गया था & उसने उसे सीने से चिपका के उसकी छातियो को अपने से भींचते हुए चूमना शुरू कर दिया.रंभा भी पूरी गर्मजोशी से उसका साथ देने लगी.पता नही कितनी देर तक दोनो 1 दूसरे की ज़ुबानो से खेलते रहे.प्रणव के हाथ उसकी कमीज़ के कसे होने की वजह से ज़्यादा उपर नही जा पा रहे थे & वो बस उसकी मांसल कमर को मसल के ही अपने को बहला रहा था.

“आह..नही..कोई देख लेगा,प्रणव!..ऊहह..!”,प्रणव ने हाथ वापस सामने लाके उसकी स्कर्ट मे आगे से घुसा दिया था & उसकी पॅंटी टटोल रहा था,”..नाआअ..!”,रंभा उसका हाथ पकड़ के खींच रही थी लेकिन प्रणव ने हाथ अंदर घुसा ही दिया था.रंभा ने शर्म & मस्ती से आहत हो अपना सर उसके बाए कंधे पे रख दिया & चेहरे गर्देन & कंधे के मिलने वाली जगह मे च्छूपा उसकी गर्देन को चूमने लगी.प्रणव की उंगलिया उसकी चूत को सहलाते हुए अंदर घुसी & उसे रगड़ने लगी.रंभा कसमसाते हुए सीट पे ही च्चटपटाने लगी.प्रणव उसके बाए कान को जीभ से छेड़ते,उसके गाल को चाटते हुए उसकी चूत मार रहा था.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.......

JAAL paart--50

gataank se aage......

“tumhe pata hai tumhara

“to main chalu?”,deven ne car ka darwaza khola.

“ok.”,rambha muskurayi to usne use 1 card thamaya.

“ye mera number hai.”

“thank you.main aaj hi ghar jake maa ki chize dekhti hu.ho sakta hai unme koi surag mile.”

“hun..chalo,bye.”

“bye.”

“aaj yaad aayi hai meri?”,Pranav ke kamre me kadam rakhte hi Rita ne talkh nazro se uska swagat kiya.pranav khamoshi se bistar pe uske bagal me baith gaya,”..ab man bhar gaya na mujhse?”,pranav ne use aise dekha jaise use ye baat bahut buri lagi ho.achanak usne rita ko baaho me bhinch liya & use paglo ki tarah chumne laga.

“aahhhhh..naaaaa……chhodo..chodo..mujhe..uummmmm..!”,rita uski giraft me chhatpatane lagi.

“kaise aata pehle?..har roz to Shipra aapke sath chipki rehti thi..uske samne aapko pyar karne lagta kya?”,pranva ne us ebistar pe lita diya tha & uske upar chadh use apni garm kisses se behaal kar raha tha.

“oh..maaaaa..kabhi akele me pakad lete mujhe..aannnnn..”,pranav ne uski nighty me hath ghusake uski chhatiya masla di thi,”..kitna tadpi hun tumahre liye,pranav..oohhhhh..!”,apni chhatiyo ko pite apne damad ke sar ko usne apne seene pe & bhinch diya & sukun se aankhe band kar li.

“aapko bhi bas apne dard ki fikr hai meri parwah nahi.”,pranav ne uski choochiyo ko ji bhar ke chumne ke baad sar upar utha ke apni saas ko dekha.

“kya hua pranav?kya baat parehsan kar rahi hai tumhe?”,rita ne thodi chinta ke sath uske balo me hath firaye.

“mom,dad ke liye main kabhi 1 chaukidar se zyada nahi raha.”,uska baya hath abhi bhi rita ki choochiyo ko bari-2 se daba raha tha.

“kya bol rahe ho pranav!tum damad ho is ghar ke!..oohhhh..!”,rita ne tange failayi to pranav ne apna pajame me qaid lund uski chut pe daba diya.

“haan,lekin haisiyat to chaukidar ke jitni hi hai.jab Sameer gayab hua to dad ne sab mujhe saunp diya & jab vo vapas aa gaya to unki vasiyat me to mujhe kuch nahi mila.ye mat samajhiye ki main lalchi hu & mujhe aapki daulat ki hawas hai..”,pranav apni kamar hilake saas ki chut ko lund se buri tarah daba raha tha,”..mujhe chahta hai izzat ki.trust group ko maine apna sabkuchh diya hai to badle me mujhe bas itni izzat chahiye ki mera bhi naa uske maliko me shumar ho,mujhe bhi sameer ke barabar ki jagah mile, bhale uske badle me mujhe har mahine vahi tankhwah mile jo abhi milti hai.”,rita gaur se damad ko dekh rahi thi.1 mard ke aham ko thes lage to vo tilmila jata hai & koi bhi galat kadam utha sakta hai.pranav ne aisa kiya to parivar ke sath-2 karobar pe bhi asar padta & use bhi uski zordar chudai se mehrum rehna pad sakta tha.

Rita ne damad ko baaho me bharte hue palta & uske seene ko chumte hue uske pajame tak aayi & us echo, uske lund ko nikala & munh me bhar liya.usne lkund chus-2 ke pranva ke dil ko khushi se bhar diya fir uske kapde utar use nanga kiya & apni panty uteri & fir nighty ko hatho me utha uske upar aa uske lund pe baith gayi.

“apne dil se sare bure khayal nikald do,pranav..oohhhhh..”,lund ne uski chut ko pura bhar diya tha.vo jhuki & damad ke hotho ko chuma,”..mujhpe bharosa rakho,main tumhari chahta puri karungi..zarur karungi..my darling..tum bas mujhe yu hi apne paas rakho..aannnnhhhhh..shariri kahinke!”,pranav ne uski gand ko daboch uske chhed me ungli ghusa di thi.rita ne shararat se muskurate hue damad ke gaal pe pyar bhari chapat lagayi to usne ungli ko & andar ghusa diya,”..oowwww..!”,rita masti me karahi & jismo ka khel shuru ho gaya.pranav ne use bahao me bhara to usne apna chhere uske daye kandhe me chhupa liya.pranav uski chut ko lund se & gand ko ungli se chodta muskurane laga..sameer ko gherne ke liye uska jaal taiyyar hota dikh raha tha use ab.

Rambha us raat khub soyi.usne puri sham apni maa ke bare me socha & deven ke bare me bhi.deven ke liye vo 1 lagav sa mehsus kar rahi thi.uski maa ko kitna chahata tha vo lekin us bechare ko kya mila?..bas dard & taklif..puri umra ke liye!usne tay kar liya ki vo uske ghavo pe marham zarur lagayegi & us dayal ko khoj ke rahegi chahe kuchh bhi ho jaye.

Agli subah vo uthi to use pranav ka khayal aaya.usne use fone karne ki sochi lekin us se bhi pehle sameer ko fone kiya.sameer ne us se dhang se baat nahi ki & masruf hone ka bahana banaya.uske ravaiyye ne rambha ke trust Films ko join karne ke irade ko & pukhta kar diya.usne pranav ko fone kiya to aaj use bhi bahut kaam tha.usne shopping jane ka irada kiya & uski taiyyari karne lagi.

“hello..”,rambha ne 1 dhili si lambi,safed skirt pehni thi & kale bra ke upar pure bazuo ki kali kamiz daal uske buttons laga hi rahi thi ki pranav ka fone aa gaya,”..main to shopping ja rhai thi..haan..pura din busy rahoge kya?..bahut bure ho tum..abhi to sameer bhi nahi hai & tumhare paas mere liye waqt hi nahi hai..hun..ok,bye!”,rambha ne muskurate hue mobile band kiya..uska nandoi to uska deewana ho gaya tha!

“haan vo dikhao..”,dopahar ke 12 baje devalay ke Nehru Market me bheed hone lagi thi,”..is market me har saman ki dukane thi & college jane vale ladke-ladki yaha kapde kharidne ke liya khub aate the.rambha 1 dukan me tange 1 skirt ko dekh rahi thi.

“hi!”,vo chaunk ke ghumi.

“pranav..tum yaha?”,uske chehre pe haya ki surkhi aayi & fir usne aavaz thodi dhimi ki,”..tum to pura din busy rehne vale the?”,vo skirt ko hatho me le dekh rahi thi,”..un..nahi..vo dikhao..udhar upar jo tangi hai..”,usne daye hath ko upar uthake ishara kiya & aisa karne se uski kamzi thoda uchak gayi & uski gori kamar numaya ho gayi.

“vo to tumhe chhed raha tha.”,pranav uske peechhe khada tha & uska daya hath rambha ki kamar se aa laga tha lekin is tarah ki dukandar ko na dikhe,”..varna meri aisi majal ki tumhari khdimat se pehle company ki khidmat karu!”,usne vaha ke mans ko dabaya to rambha ki chut kasak uthi & usne badi mushkil se apni aah ko dabaya.

“vo bhi dikhana..”,rambha ne dukandar ko dusri taraf tangi skirt dikhayi & fir uske ghumte hi pranav ka hath kamar se neeche karte hue ghabra ke dekha,”..kya kar rahe ho?..kisi ne dekh liya to?”

“to..kya keh dunga ki meri mehbooba hai!”,pranav phusphusaya & dukandar ke ghumne se pehle kamar ko zor se daba ke hath peechhe khincha.

“ye dono de do.”,rambha ne skirts chun li to pranav ne unke paise de diye & fir dono bahar nikal aaye.bazar mew bheed pal-2 badh rahi thi.pranav rambha ke bayi taraf chal raha tha & bheed me sue rasta dikhane ka bahane baar-2 uski pith ya kamar chhu raha tha.rambha ko uske hatho ka ehsas mast kar raha tha.dekhe jane ka darr,mehboob ka sath..ye baaten uske jism ko jaga rahi thi.magar pakde jane ka darr bahut tha vaha.1 to itne bade khandan ki bahu aise aam logo ke bazaar me shopping kar rahi thi,upar se kisi ne gara uske nandoi ko uske jism ko chhedte dekh liya to bahut bada scandal ho sakta tha.sameer vale hadse ke baad log rambha ko bhi pehchanane lage the.rambha 1 videshi lingerie brand ke showroom me ghus gayi,ye sochte hue ki pranav to vaha aa nahi payega & bada maza aayega uski shakl us waqt dekhne me!

Magar pranav ki kismet uska pura sath de rahi thi.us brand ne haal h me mardo ki range bhi nikali thi so vo apni salhaj ke peechhe-2 anadr ghusa & men’s section me chala gaya.dono store me ghum-2 ke saman dekhne lage.rambha 1 shelf ke paas aayi,putlo pe lagi bra & panty alag-2 sizes me unke bagal me rakhe shelves pe bhi thi & har putle ke bagal me 1 shisha laga tha.rambha ne 1 bra uthaya & use dekhne lagi.

Vo jaha bra dekh rahi thi,uske thik ulti disha me pranav 1 underwear dekh rtha & vaha bhi vaisa hi 1 shisha laga tha.usne shishe me dekha & use samne ke shishe me dekhti us se nazre milati rambha dikhi.rambha ne bra uthake apne seene ke samne ki to pranav ne haule se sar hila ke mana ka diya.vo aage badhi to vo bhi aage badha & is baar ki bra pasand aane pe usne aah me sar hilaya.rambha muskurayi,use is khel me bada maza aa raha tha.dono premi 1 dusre se alag-thalag ,1 dusre ki or pith kiye bhi romance kar rahe the.usne usi tarah pranav ko bhi underwear chunwaya & fir apna bill ada kar vaha se nikal ke aage badh gayi.kuchh der baad pranav bhi vaha se nikla & fir tezi se chalta hua uske sath ho liya.rambha ki chut ab risne lagi thi.

1 jagah bahut bheed thi & pranav ne uska fayda uthate hue uski kamar se hath uski gand pe sarka diya & use dabake hath fauran peechhe khincha.rambha chihunki & thoda aage hui to pranav uske bilkul peechhe aa gaya & uske kandho pe halke se hath rakh thoda aage hua & apna lund uski gand se sata diya.skirt,panty & pranav ki pant & underwear ke bavjud rambha ko uske mardane ang ki jalan mehsus hui & uski chut kasmasa uthi.rambha thoda aage badhi & 1 atm me ghus gayi.uske peechhe pranav bhi vaha aa gaya.atm card se khulta tha & 1 baar koi andar ho to bahar se vo khil nahi sakta tha.pranav ne 1 baar shish eke darwaze se bahardekha,koi nahi tha..usne apni salhaj ko khinch ke shishe ke darwaze ke bagal ki deewar se sata diya.

“nahi..pranav..koi aa jeyge..!”,rambha ki aankhe jism ke nashe se bhari hui thi.pranav ne uski dono kalaiyan pakad ke uske sar ke dono taraf deewar se lagaya & uske baye kaan me jibh firane laga.rambha ne masti me aankhe badn kar li.pranav aage ho uski chut pe apna lund daba raha tha.uske honth ab uski garden ko chumte hue uske chhere pea aye & rambha ne fauran uske hotho ko apne hotho me bhinch uski zuban ko chus liya.uske jism ki kasak bahut badh gayi thi.vo apni kamar hilake pranav ke lund pe jawabi dhakke de rahi thi.pranav ne uski kalaiyan chhodi & uski shirt me hath ghusa uski kamar masalne laga.rambha tezi se kamar hila rahi thi..bas kuchh der &..pranav ne lund & zor se uski chut pe dabaya..”..uunnnnnnnnn..!”,rambha ne badi mushkil se apni aah ko pranav ke hotho me dafn kiya & uska jism jhatke khane laga.pranav ne jhadti hui rambha ko tham liya.kuchh pal baad jab khumari utri to dono alag hue & savdhani se bahar nikal gaye.rambha ke dil me ab chudai ki hasrat jag gayi thi.uska dil kar raha tha ki pranav use kahi le chale jaha dono itminan se 1 dusre me kho saken & vo apni aag bujha paye.

“are..rambha jaldi idhar kone me aao!”,pranav ne dhime magar urgent lahje me kaha to rambha uske peechhe 1 patle se raste pe chali gayi.

“kya hua?”

“shipra ghum rahi hai yaha &..”,usne mud ke dekha,”..& idahr hi aa rahi hai.”,dono tezi se nikle & khule me aa gaye.pranav ne idhar-udhar dekha & use samne parking ke paar multiplex nazar aaya,”..vaha cinema hall pe chalo.jaldi!”,rambha tez kadmo se udhar gayi to pranav us se laga ho kahi gayab ho gaya magar jab rambha cinema hall tak phunchi to usne dekha ki pranav ticket counter se ticket kharid ke khada hai.

“ye ticket lo & andar jao.”,rambha hall me pahunchi to dekha ki pranav bhi peechhe se aa raha hai.dono alag-2 hall ke andar apni seats pe pahunche,”bach gaye.”,lights band hote hi pranav phushphusaya.koi bakwas film thi & hall lagbhag khali tha.sirf chand jode vaha kuchh niji pal churane vaha baithe the.pranav ne sabse peechhe ki kinare ki seats ki tickets lit hi & unki row me 1 joda baitha tha magar dusre kone pe.

“sab tumhari vajah se.kya zarurat thi aise mere peechhe-2 bazar me aane ki?”,rambha ne use jhidka to pranav ne seats ke beech ke hattha uthaya & apni bayi banh keg here me use leke uska gaal chum liya.”..offoh,ab yaha bhi shuru ho gaye!..uunnnnnnhhhh..!”,rambha ne uski baah se chhutne ki koshish ki lekin pranav ki pakad bahut mazbut thi.

“galti meri nahi,tumahri hai!”,pranav uski zuban se khelne ke baad uski shirt me daya hath ghusa ke uski kamar ko sehla raha tha,”..itni haseen kyu ho ki bas tumahre karib rehne ka dil karta hai!”,uska hath kamar se smane pet pea a gaya & uski nabhi ko chhedne laga.

“hato jhuthe..ohhhhh..!”,rambha tariff sun ke muskurayi & uske daye kandhe ko tham liya,”..bas mujhe behlane ko baate bana rahe ho..naaaa!”,pranav uski nabhi ko chhed raha tha & uski chut me fir se kasak hone lagi thi.

“jhuth bolu to abhi mar jaoon!”,pranav ka hath uski nabhi se sarak ke uski pith pea a gaya tha & usne use seene se chipka ke uski chhatiyo ko apne se bhinchte hue chumna shuru kar diya.rambha bhi puri garmjoshi se uska sath dene lagi.pata nahi kitni der tak dono 1 dusre ki zubano se khelte rahe.pranav ke hath uski kamiz ke kase hone ki vajah se zyada upar nahi ja pa rahe the & vo bas uski mansal kamar ko masla ke hi apne ko behla raha tha.

“aah..nahi..koi dekh lega,pranav!..oohhhhhhh..!”,pranav ne hath vapas samne lake uski skirt me aage se ghusa diya tha & uski panty tatol raha tha,”..naaaaa..!”,rambha uska hath pakad ke khinch rahi thi lekin pranav ne hath andar ghusa hi diya tha.rambha ne sharm & masti se aahat ho apna sar uske baye kandhe pe rakh diya & chhere garden & kandhe ke milne vali jagah me chhupa uski garden ko chumne lagi.pranav ki ungliya uski chut ko sehlate hue andar ghusi & use ragadne lagi.rambha kasmasate hue seat pe hi chhatpatane lagi.pranav uske baye kaan ko jibh se chhedte,uske gaal ko chaatate hue uski chut maar raha tha.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah.......

 
जाल पार्ट--51

गतान्क से आगे......

“उउन्नगज्गघह..!”,रंभा ने उसकी गर्देन के नीचे अपने दाँत गढ़ाए & अपने दाए हाथ को उसकी पीठ से ले जाते हुए प्रणव के दाए कंधे को भींचा & बाए को उसकी शर्ट के अंदर घुसा उसकी छाती मे नाख़ून धंसा दिए & झड़ने लगी.उसका जिस्म थरथरा रहा था.प्रणव उसके चेहरे को हौले-2 चूमते हुए बाए हाथ से उसकी पीठ सहलाता रहा.

रंभा संभली तो उसने चेहरा प्रणव के कंधे पे रखे-2 ही उपर घूमके उसे देखा तो प्रणव ने उसके रस से भीगी अपनी उंगलिया उसकी स्कर्ट से निकाली & उसे दिखाते हुए उन्हे मुँह मे भर उसका रस चाट लिया.रंभा ने बाए हाथ से उसके बालो को पकड़ते हुए सुके सर को घुसाया & चूमने लगी.

प्रणव ने चूमने के बाद उसका हाथ अपने लंड पे रख दिया.रंभा ने इधर-उधर देखा & उसकी ज़िप खोल दी & हाथ अंदर घुसा अंडरवीअर के उपर से ही उसके लंड को सहलाने लगी & अपने प्रेमी को चूमने लगी.प्रणव ने उसके हाथ को अपने अंडरवेर पे और दबाया & फिर अंडरवेर नीचे कर लंड को बाहर निकाल उसे अपनी महबूबा के हाथ मे दे दिया.

“पागल हो क्या!..कोई देख लेगा..!”,रंभा घबरा के बोली मगर उसे मज़ा भी आ रहा था.

“कोई नही देखेगा.”,प्रणव ने उसके हाथ को लंड पे & दबाया तो वो उसे बाए हाथ से हिलाने लगी.प्रणव उसकी शर्ट के बटन्स खोलने लगा.

“नही!बिल्कुल नही!”,रंभा ने लंड छ्चोड़ दूर होने की कोशिश की तो प्रणव ने फिर से लंड को उसे थमा दिया.

“बस 2 बटन्स खोल रहा हू,जान!घबराओ मत.”,उसने अपना दाया हाथ अंदर घुसा उसकी चूचियो को ब्रा के उपर से ही दबाना शुरू कर दिया.कुच्छ देर बाद रंभा ने देखा कि कोई उनकी ओर ध्यान नही दे रहा तो वो थोड़ा सायंत हुई & लंड ज़ोर-2 से हिलाने लगी.अब प्रणव के च्चटपटाने की बारी थी.उसने हाथ रंभा के सीने से हटाया & उसका सर पकड़ के नीचे किया तो रंभा उसका ऐशारा समझ गयी & फिर मना किया.

“प्लीज़..कोई नही देख रहा..बस तुरंत हो जाएगा..प्लीज़ मेरी जान!”,दिल तो रंभा का भी कर रहा था & प्रणव के इसरार ने उसे थोड़ा पिघला भी दिया.उसने फिर इधर-उधर देखा & जल्दी से नीचे झुक अपने महबूब का लंड मुँह मे भर लिया.उसने उसे हिलाना नही छ्चोड़ा था & साथ मे चूसना भी शुरू कर दिया था.थोड़ी ही देर मे प्रणव सीट पे अपने आप को रोकने की कोशिश कर रहा था & रंभा का मुँह उसके लंड पे & दाब रहा था.रंभा उसके आंडो को भिंचे हुए थी & उसकी ज़ुबान जिसने प्रणव के सुपादे को खूब छेड़ा था अब उसके वीर्य को चख रही थी.रंभा उसके आंडो को ऐसे दबा रही थी जैसे उन्हे दबा के वीर्य की सारी बूंदे निकाल लेना चाहती हो.उसकी ज़ुबान जल्दी-2 सारे वीर्य को अपने हलक मे उतार रही थी.कुच्छ पल बाद उसने प्रणव की गोद से सर उठाके उसकी निगाहो मे झाँका तो उसे वो उसका शुक्रिया अदा करती दिखी.प्रणव ने उसके शर्ट के बटन्स लगाए तो सुने भी उसके लंड को अंदर डाल उसकी पॅंट की ज़िप चढ़ा दी & फिर उसके कंधे पे सर रख उसकी बाहो मे क़ैद हो आँखे बंद किए सुकून के एहसास का लुफ्त उठाने लगी.

रंभा ने अपने पास रखे सुमित्रा के थोड़े से समान को छान मारा था लेकिन उसके हाथ कुच्छ नही लगा था.उसने देवेन को ये बात बताई थी.उसका कहना था कि शायद गोपालपुर जाके फिर से नये सिरे से खोज करने से दयाल के बारे मे कुच्छ जानकारी मिल सके मगर रंभा उसकी इस बात से सहमत नही थी.उसका मानना था कि दयाल जैसा लोमड़ी की तरह का चालक & शातिर शख्स ने अपने पीछे कोई निशान नही छ्चोड़ा होगा.

“तो क्या करें?”,देवेन थोड़ा झल्ला गया था.

“मुझसे मिलिए तो साथ बैठ के कुच्छ सोचते हैं.”

“ठीक है.मेरे होटेल आ जाओ.”,रंभा शाम को उसके होटेल के कमरे मे बैठी थी.उसने घुटनो तक की कसी,भूरी स्कर्ट & 1धारियो वाली पूरे बाज़ू की क्रीम शर्ट पहनी थी.पैरो मे हाइ हील वाले जूते थे & जब उसने देवेन के कमरे मे कदम रखा तो उसकी नज़रो मे दिखी उसके जिस्म की तारीफ रंभा से च्छूपी नही रही थी मगर अगले ही पल देवेन की नज़रे फिर से पहले जैसी हो गयी थी जिन्हे रंभा के हुस्न से कोई मतलब नही था.रंभा को उसका उसकी सुंदरता को निहरना बहुत अच्छा लगा था लेकिन जब उसकी निगाहे अपने पहले वाले अंदाज़ मे आ गयी तो वो अंदर से थोड़ी मायूस हो गयी थी.

ये उसकी मा का प्रेमी था..ये उसकी मा को कैसे प्यार करता होगा?..& मा..क्या वो भी इसका साथ देती होगी?..अजीब लगा उसे मा के बारे मे ऐसी बातें सोच के लेकिन इंसान का दिमाग़ तो वो बेलगाम घोड़ा है जो अपनी मर्ज़ी से अपने रास्ते पे भागता है..वक़्त के थपेड़े इसकी शक्ल पे दिखते हैं लेकिन अभी भी देखने मे ये बुरा नही है..& उसकी तरफ क्यू नही देखता वो?..क्या मा के बाद इसने किसी औरत से रिश्ता नही रखा?..ऐसा नामुमकिन है तो फिर..-

“क्या सोच रही हो?”,वो उसके सामने चाइ बनाके प्याला बढ़ाए उसे देख रहा था.

“कुच्छ नही.”,धीमी आवाज़ मे जवाब दे रंभा ने कप लिया.उसके दिल मे इस शख्स के लिए 1 जगह बन गयी थी लेकिन कैसी ये उसकी समझ मे अभी नही आ रहा था,”दयाल को जानने वाले क्या बहुत लोग थे गोपालपुर मे?..आपकी मुलाकात कैसे हुई थी?..& आपने कहा था कि आपको ये पता था कि वो कुच्छ ग़लत करता था लेकिन पूरी तरह से मालूम नही था तो ये बताइए कि क्या पता था आपको उसके बारे मे?”

“बाप रे!तुमने तो सवालो की झड़ी लगा दी.”,देवेन हंसा & चाइ का घूँट भरा.रंभा को उसकी हँसी सूरत अच्छी लगी & अपने बचपाने पे थोड़ी शर्म भी आई.देवेन उसके सुर्ख गुलाबी चेहरे को देखने लगा..मा की झलक थी उसमे..& वही शर्मीली मुस्कान..जब वो चूमता था उसे तो कैसे शरमाते हुए उसके सीने मे मुँह च्छूपा लेती थी सुमित्रा..उफफफ्फ़..& फिर जवाब मे उसकी गर्दन को चूम लेती थी..सुमित्रा को कभी नंगी नही देखा था लेकिन ये तो बला की खूबसूरत थी & कितनी बेबाक!..अपने ससुर से रिश्ता जोड़ा था & बिस्तर मे उसका पूरी गर्मजोशी से साथ दे रही थी..वो गुस्से मे तिलमिला गया था जब उसे देखा था विजयंत मेहरा से चुद्ते हुए लेकिन 1 ख़याल ये भी तो आया था कि विजयंत कितना किस्मतवाला है जो उसके नशीले जिस्म को भोग रहा है!..क्या हो गया है उसे?..वो उसकी माशूक़ा की बेटी है..तो क्या हुआ?..नही..!

“मेरी मुलाकात दयाल से उसी लॉड्ज मे हुई थी जहा मैं रहता था.वैसे तो वो अपने काम से काम रखता था..”,उसकी निगाह उसकी गोरी,सुडोल टाँगो पे पड़ी & उसे याद आया कि कैसे 1 बार सुमित्रा ने कीचड़ से बचने के लिए अपनी सारी उपर कर ली थी & उसकी टाँगो की गोराई से मदहोश हो बाद मे उसने उसके घर पे उस से विदा लेने से पहले उसकी सारी उपर कर उसकी टाँगो का निचला हिस्सा चूम लिया था.सुमित्रा उस से छिटक गयी थी,कुच्छ शर्म..कुच्छ गुस्से से लेकिन उसकी निगाहो मे उस रोज़ पहली बार उसने मस्ती की चमक देखी थी.3 बार उसने अपना लंड हिलाया था उस रात सुमित्रा को याद करके..वो क्यू बार-2 बीती, मस्तानी यादों मे खो रहा था..सब इस लड़की के हुस्न का असर था!

“..मगर कुच्छ इत्तेफ़ाक़ यू हुआ कि हमारी 1-2 बार बातें हुई & फिर या तो उसे मेरा साथ ठीक लगा या फिर उसने मुझे फसाने के ख़याल से मुझसे मेल-जोल बढ़ाना शुरू किया.मुझे भी उस से बाते करना अच्छा लगता था & बस हम दोस्त बन गये.मुझे पता था कि अगले कस्बे मे बनी जैल के क़ैदियो को वो वो जैल के हवलदारो के साथ मिलके कुच्छ चीज़ें सुप्पलाई करता था मसलन गंजा,अफ़ीम या फिर छ्होटे चाकू या फिर कॉन..-“,उसने खुद को रोका.उसे उस लड़की से कॉंडम का ज़िक्र करना अजीब सा लगा.रंभा ने भी उसकी उलझन समझते हुए नज़रे नीची कर ली.ना जाने क्यू उसे भी उसके सामने थोड़ी शर्म आने लगी थी..ऐसा पहले तो कभी नही हुआ था..विजयंत के साथ भी उसे इतनी शर्म नही आई थी..फिर आज क्यू?

“यही था उसका काम?”,रंभा ने बात आगे बढ़ाई.

“हां या फिर वो कभी-कभार शहर से कुच्छ समान लाके गोपालपुर मे बेचता था जैसे कपड़े या जूते मगर 1 बात थी.वो कभी-कभार बिना बताए अचानक चला जाता था & जब लौटता था तो उन्ही सामानो के साथ जिन्हे वो बेचने को लाता था.लॉड्ज के मालिक ने 1 बार मुझे कहा था कि मैं उसके साथ ज़्यादा ना घुलु क्यूकी उसे वो ठीक आदमी नही लगता था.मैने हंस के बात टाल दी थी.अगर पता होता तो..”

“खैर..वो इतना समान लाता था कि 3-4 दिन मे बिक जाए & 1 बात और थी.मैने उसे वो समान बेचने के लिए बहुत परेशान होते या फिर उसका प्रचार करते उसे नही देखा.आमतौर पे कैसा भी कारोबारी हो,अपने धंधे को बढ़ाने के लिए वो ज़्यादा से ज़्यादा लोगो से मिल उन्हे उसके बारे मे बताना चाहता है लेकिन दयाल ऐसा नही करता था.”

“यानी कि वो ये सब बस दिखावे के लिए करता था.”,..लड़की खूबसूरत होने के साथ तेज़ भी थी..अगर सुमित्रा सच मे मेरी तरह दयाल की चाल की शिकार बनी तब तो ये मा पे बिल्कुल नही गयी है & नही तो फिर ये अपनी मा की ही बेटी है,”..मुझे तो यही लगता है कि शुरू मे तो उसने आपसे दोस्ती बस इसीलिए रखी थी ताकि कोई तो ऐसा हो जो उसे कस्बे के बारे मे & किसी भी नयी खबर के बारे मे बताता रहे.अपने छ्होटे-मोटे कामो के बारे मे बता या यू कहे की अपने कुच्छ मामूली से ‘राज़’ आपके साथ बाँट के उसने आपका भरोसा जीता & बाद मे जब मौका मिला तो उसने आपको फँसा दिया.देखिए,जिस तरह से आप पकड़े गये थे,उस से तो यही लगता है कि दयाल को भनक लग गयी थी कि पोलीस उसके लिए जाल बिच्छा रही है & उसने चालाकी से अपनी जगह उसमे आपको फँसा दिया.”

“हूँ..तो अब क्या कहन्ना है तुम्हारा..उसे कैसे ढूंडे?”

“जो तस्वीर आपके पास है वो बहुत पुरानी & खराब भी हो गयी है.बस अंदाज़ा भर लग पता है उसकी शक्लोसुरत का.”,रंभा सोचने लगी.उसे उस कामीने दयाल को ढूँढना ही था जिसकी वजह से उसकी मा की ज़िंदगी मे खुशियाँ आने से पहले ही वापस लौट गयी..उस हरम्खोर की वजह से उसकी मा की देवेन से शादी नही हुई..अगर वैसा हुआ होता तो शायद आज वो भी ऐसी ना होती..कही बहुत सुकून से 1 आम लड़की की ज़िंदगी जी रही होती,”..उस जैल मे काम करने वाले हवलदरो को नही खोज सकते क्या हम?..हो सकता है उन्हे कुच्छ पता हो उसके बारे मे?”

“रंभा..”,वो खड़ा हो गया,”..मैं तुम्हारे जज़्बात समझता हू लेकिन क्या तुम मेरा साथ दे पओगि इस काम मे?..तुम्हारी अपनी ज़िंदगी है..1 पति है..ऐसे मे..-“

“-..अपनी मा का नाम बेदाग रखने से ज़रूरी & कोई काम नही मेरे लिए & इसके लिए मैं कोई भी कीमत चुकाने को तैय्यार हू.”

“हूँ..”,लड़की की सच्चाई पे उसे अब बिल्कुल भी शुबहा नही था,”..ठीक है.मैं देखता हू कि आगे क्या हो सकता है.”

“ठीक है तो मैं चलती हू.आप मुझे फोन कीजिएगा.”

“ज़रूर.”

“ओके,बाइ!”,रंभा को समझ नही आया कि विदा कैसे ले & उसने अपना हाथ आगे कर दिया.देवेन ने उसका हाथ थामा & उस पल दोनो के जिस्मो मे जैसे कुच्छ दौड़ गया & दोनो की मिली नज़रो ने दोनो के दिलो तक 1 दूसरे के 1 जैसे एहसास के महसूस होने की बात पहुँचा दी.

समीर वापस आ गया था & उसका बदला रवैयय्या बरकरार था.ऐसा नही था कि वो रंभा से बिल्कुल ही बेरूख़् था लेकिन दोनो के रिश्तो मे वो पहले जैसी चाहत,वो गर्मजोशी नही रह गयी थी.रंभा को उसकी ये बात पसंद तो नही आ रही थी मगर उस से इस बात पे झगड़ वो बात बिगाड़ना नही चाहती थी.उसकी जिस्मानी ज़रूरतें तो प्रणव से पूरी हो रही थी & उसके दिमाग़ ने उसके पति को अपने काबू मे रखने की तरकीबो के बारे मे सोचना शुरू भी कर दिया था.

“समीर..”,उसने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया & उसके कुर्ते के उपर से ही उसके सीने पे नाख़ून चलाए & उसके दाए कंधे को चूम लिया,”..1 बात कहु?”

“हां.”,समीर ने अलमारी मे अपनी घड़ी रख के उसे बंद किया & घूमा तो रंभा ने उसके गले मे अपनी बाहे डाल दी.समीर ने भी अपने हाथ उसकी कमर पे रख दिए.रंभा आयेज बढ़ी & उसके जिस्म से बिल्कुल सॅट गयी.समीर अपनी पत्नी से कितना भी बेरूख़् क्यू ना हो गया हो था तो वो 1 मर्द ही.रंभा के कोमल जिस्म की हरारत ने उसके बदन की गर्मी भी बढ़ा दी & उसकी कमर पे रखे हाथ पीछे गये & उसकी पीठ को घेरते हुए उसे अपने जिस्म से और सतने लगे.

“डार्लिंग,मैं कुच्छ काम करना चाहती हू.”,रंभा उसके सीने को चूम रही थी & उसके हाथ पति के गले से उतार उसके कुर्ते मे घुस उसके पेट पे घूम रहे थे.

“कैसा काम?”,समीर के हाथ भी बीवी की निघट्य को उठा उसकी गंद को मसल रहे थे.रंभा ने जानबूझ के नाइटी के नीचे कुच्छ नही पहना था.समीर के हाथ जैसे ही उसकी मुलायम त्वचा से सटे उसका लंड पूरा तन गया & उसने जोश मे भर बीवी को खुद से और सटा लिया.

“ऊव्ववव..आराम से,मेरी जान..कही भागी थोड़े जा रही हू..आख़िर बीवी हू तुम्हारी!”,रंभा उसके पैरो पे खड़ी हो गयी & उचक के उसके होंठ चूम लिए.समीर ने फ़ौरन उसकी गंद को मसल्ते हुए उसके मुँह मे अपनी जीभ घुसा दी,”..उउम्म्म्म..घर मे बैठे-2 ऊब जाती हू..उउफफफ्फ़..इसीलिए सोचा कि कुच्छ काम ही कर लू..”,समीर के हाथ उसकी गंद से उपर उसकी नंगी पीठ पे चल रहे थे & रंभा भी मस्त हो गयी थी.रंभा ने हाथ नीचे ले जाके पति के पाजामे की डोर खींच दी & उसके लंड को पकड़ लिया.सच बात तो ये थी कि विजयंत मेहरा के बाद उसे कोई भी लंड उतना कमाल का नही लगा था & फिर समीर का लंड तो बाप के लंड के मुक़ाबले काफ़ी छ्होटा था मगर फिर भी था तो 1 लंड ही वो भी उस पति का जिसे वो फिर से जीतने की कोशिश कर रही थी,”..आपकी कंपनी मे कोई नौकरी मिलेगी,सर?”,रंभा नीचे बैठ गयी & बड़ी मासूम निगाहो से पति को देखा & फिर लंड के सूपदे को अपने गुलाबी होंठो से पकड़ लिया.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.......

JAAL paart--51

gataank se aage......

“uunngggghhhhhhh..!”,rambha ne uski garden ke neeche apne dant gadaye & apne daye hath ko uski pith se le jate hue pranav ke daye kandhe ko bhincha & baye ko uski shirt ke andar ghusa uski chhati me nakhun dhansa diye & jhadne lagi.uska jism tharthara raha tha.pranav uske chehre ko haule-2 chumte hue baye hath se uski pith sehlata raha.

Rambha sambhlki to usna chehra pranav ke kandhe pe rakhe-2 hi upar ghumake use dekha to pranav ne uske ras se bhigi apni ungliya uski skirt se nikali & use dikhate hue unhe munh me bhar uska ras chat liya.rambha ne baye hath se uske baalo ko pakadte hue suke sar ko ghusaya & chumne lagi.

Pranav ne chumne ke baad uska hath apne lund pe rakh diya.rambha ne idhar-udhar dekha & uski zip khol di & hath andar ghusa nunderwear ke uapr se hi uske lund ko sehlane lagi & apne premi ko chumne lagi.pranav ne uske hath ko apne underwear pe & dabaya & fir underwear neeche kar lund ko bahra nikal use apni mehbooba ke hath me de diya.

“pagal ho kya!..koi dekh lega..!”,rambha ghabra ke boli magar use maza bhi aa raha tha.

“koi nahi dekhega.”,pranav ne uske hath ko lund pe & dabaya to vo use baye hath se hilane lagi.pranav uskishirt ke buttons kholne laga.

“nahi!bilkul nahi!”,rambha ne lund chhod door hone ki koshish ki to pranav ne fir se lund ko use thama diya.

“bas 2 buttons khol raha hu,jaan!ghabrao mat.”,usne apna daya hath andar ghusa uski chhatiyo ko bra ke upar se hi dabana shuru kar diya.kuchh der baad rambha ne dekha ki koi unki or dhyan nahi de raha to vo thoda sayant hui & lund zor-2 se hilane lagi.ab pranav ke chhatpatane ki bari thi.usne hath rambha ke seene se hataya & uska sar pakad ke neeche kiya to rambha usk aishara samajh gayi & fir mana kiya.

“please..koi nahid ekh raha..bas turant ho ajyega..plesae meri jaan!”,dil to rambha ka bhi kar raha tha & pranav ke israr ne use thoda pighla bhi diya.usne fir idhar-udahr dekha & jaldi se neeche jhuk apne mehboob ka lund munh me bhar liya.usne use hilana nahi chhoda tha & sath me chusna bhi shuru kar diya tha.thodi hi der me pranav seat pe apne cuhakne ko rokne ki koshish kar raha tha & rambha ka munh uske lund pe & dab raha tha.rambha uske ando ko bhinche hue tho & uski zuban jisne pranav ke supade ko khoob chheda tha ab uske virya ko chakh rahi thi.rambha uske ando ko aise daba rahi thi jaiase unhe daba ke virya ki sari boonde nikal lena chahti ho.uski zuban jaldi-2 sare virya ko apne halak me utar rahi thi.kuchh pal baad usne paranv ki god se sar uthake uski nigaho me jhanka to use vo uska shukriya ada karti dikhi.pranav ne uske shirt ke buttons lagaye to sune bhi uske lund ko andar daal uski pant ki zip chadha di & fir uske akndhe pe sar rakh uski baaho me qaid ho aankhe band kiye sukun ke ehsas ka klutf uthane lagi.

Rambha ne apne paas rakhe Sumitra ke thode se saman ko chhan mara tha lekin uske hath kuchh nahi laga tha.usne Deven ko ye baat batayi thi.uska kehna tha ki shayad Gopalpur jake fir se naye sire se khoj karne se Dayal ke bare me kuchh jankari mil sake magar rambha uski is baat se sahmat nahi thi.uska maanana tha ki dayal jaisa lomdi ki tarah ka chalak & shatir shakhs ne apne peechhe koi nishan nahi chhoda hoga.

“to kya karen?”,deven thoda jhalla gaya tha.

“mujhse miliye to sath baith ke kuchh sochte hain.”

“thik hai.mere hotel aa jao.”,rambha sham ko uske hotel ke kamre me baithi thi.usne ghutno tak ki kasi,bhuri skirt & 1dhariyo vali pure bazu ki cream shirt pehni thi.pairo me high heel vale jute the & jab usne deven ke kamre me kadam rakha to uski nazro me dikhi uske jism ki tareef rambha se chhupi nahi rahi thi magar agle hi pal deven ki nazre fir se pehle jaisi ho gayi thi jinhe rambha ke husn se koi matlab nahi tha.rambha ko uska uski sundarta ko niharna bahut achha laga tha lekin jab uski nigahe apne pehle vale andaz me aa gayi to vo andar se thodi mayus ho gayi thi.

Ye uski maa ka premi tha..ye uski maa ko kaise pyar karta hoga?..& maa..kya vo bhi iska sath deti hogi?..ajib laga use maa ke bare me aisi baaten soch ke lekin insan ka dimagh to vo belagam ghoda hai jo apni marzi se apne raste pe bhagta hai..waqt ke thapede iski shakl pe dikhte hain lekin abhi bhi dekhne me ye bura nahi hai..& uski taraf kyu nahi dekhta vo?..kya maa ke baad isne kisi aurat se rishta nahi rakha?..aisa namumkin hai to fir..-

“kya soch rahi ho?”,vo uske samne chai banake pyala badhaye use dekh raha tha.

“kuchh nahi.”,dhimi aavaz me jawab de rambha ne cup liya.uske dil me is shakhs ke liye 1 jagah ban gayi thi lekin kaisi ye uski samajh me abhi nahi aa raha tha,”dayal ko jaanane vale kya bahut log the gopalpur me?..aapki mulakat kaise hui thi?..& aapne kaha tha ki aapko ye pata tah ki vo kuchh galat karta tha lekin puri tarah se malum nahi tha to ye bataiye ki kya pata tha aapko uske bare me?”

“baap re!tumne to sawalo ki jhadi laga di.”,deven hansa & chai ka ghunt bhara.rambha ko uski hansti surat achhi lagi & apne bachpane pe thodi sharm bhi aayi.deven uske surkh gulabi chehre ko dekhne laga..maa ki jhalak thi usme..& vahi sharmili muskan..jab vo chumta tha use to kaise sharmate hue uske seene me munh chhupa leti thi sumitra..uffff..& fir jawab me uski gardan ko chum leti thi..sumitra ko kabhi nangi nahi dekha tha lekin ye to bala ki khubsurat thi & kitni bebak!..apne sasur se rishta joda tha & bistar me uska puri garmjoshi se sath de rahi thi..vo gusse me tilmila gaya tha jab use dekha tha Vijayant Mehra se chudte hue lekin 1 khayal ye bhi to aaya tha ki vijayant kitna kismatvala hai jo uske nashile jism ko bhog raha hai!..kya ho gaya hai use?..vo uski mashooqa ki beti hai..to kya hua?..nahi..!

“meri mulakat dayal se usi lodge me hui thi jaha main rehta tha.vaise to vo apne kaam se kaam rakhta tha..”,uski nigah uski gori,sudol tango pe padi & use yaad aaya ki kaise 1 baar sumitra ne keechad se bachne ke liye apni sari upar kar li thi & uski tango ki gorai se madhosh ho baad me usne uske ghar pe us se vida lene se pehle uski sari upar kar uski tango ka nichla hissa chum liya tha.sumitra us se chhitak gayi thi,kuchh sharm..kuchh gusse se lekin uski nigaho me us roz pehli baar usne masti ki chamak dekhi thi.3 baar usne apna lund hilaya tha us raat sumitra ko yaad karke..vo kyu baar-2 beeti, mastani yaadon me kho raha tha..sab is ladki ke husn ka asar tha!

“..magar kuchh ittefaq yu hua ki humari 1-2 baar baaten hui & fir ya to use mera sath thik laga ya fir usne mujhe phasane ke khayal se mujhse mel-jol badhana shuru kiya.mujhe bhi us se baate karna achha lagta tha & bas hum dost ban gaye.mujhe pata tha ki agle kasbe me bani jail ke qaidiyo ko vo vo jail ke hawaldaro ke sath milke kuchh chizen supplya karta tha maslan ganja,afim ya fir chhote chaku ya fir con..-“,usne khud ko roka.use us ladki se condom ka zikr karna ajib sa laga.rambha ne bhi uski uljhan samajhte hue nazre neechi kar li.na jane kyu use bhi uske samne thodi sharm aane lagi thi..aisa pehle to kabhi nahi hua tha..vijayant ke sath bhi use itni sharm nahi aayi thi..fir aaj kyu?

“yehi tha uska kaam?”,rambha ne baat aage badhayi.

“haan ya fir vo kabhi-kabhar shehar se kuchh saman lake gopalpur me bechta tha jaise kapde ya joote magar 1 baat thi.vo kabhi-kabhar bina bataye achanak chala jata tha & jab lautata tha to unhi samano ke sath jinhe vo bechne ko lata tha.lodge ke malik ne 1 baar mujhe kaha tha ki main uske sath zyada na ghulu kyuki use vo thik aadmi nahi lagta tha.maine hans ke baat taal di thi.agar pata hota to..”

“khair..vo itna saman lata tha ki 3-4 din me bik jaye & 1 baat & thi.maine use vo saman bechne ke liye bahut pareshan hote ya fir uska prachar karte use nahi dekha.aamtaur pe kaisa bhi karobari ho,apne dhandhe ko badhane ke liye vo zyada se zyada logo se mil unhe uske bare me batana chahta hai lekin dayal aisa nahi karta tha.”

“yani ki vo ye sab bas dikhawe ke liye karta tha.”,..ladki khubsurat hone ke sath tez bhi thi..agar sumitra sach me meri tarah dayal ki chaal ki shikar bani tab to ye maa pe bilkul nahi gayi hai & nahi to fir ye apni maa ki hi beti hai,”..mujhe to yehi lagta hai ki shuru me to usne aapse dosti bas isiliye rakhi thi taki koi to aisa ho jo use kasbe ke bare me & kisi bhi nayi khabar ke bare me batata rahe.apne chhote-mote kamo ke bare me bata ya yu kahe ki apne kuchh mamuli se ‘raaz’ aapke sath bantke usne aapka bharosa jeeta & baad me jab mauka mila to usne aapko phansa diya.dekhiye,jis tarah se aap pakde gaye the,us se to yehi lagta hai ki dayal ko bhanak lag gayi thi ki police uske liye jaal bichha rahi hai & usne chalaki se apni jagah usme aapko phansa diya.”

“hun..to ab kya kehnna hai tumhara..use kaise dhoonde?”

“jo tasvir aapke paas hai vo bahut purani & kharab bhi ho gayi hai.bas andaza bhar lag pata hai uski shaklosurat ka.”,rambha sochne lagi.use us kamine dayal ko dhoondana hi tha jiski vajah se uski maa ki zindagi me khushiyan aane se pehle hi vapas laut gayi..us haramkhor ki vajah se uski maa ki deven se shadi nahi hui..agar vaisa hua hota to shayad aaj vo bhi aisi na hoti..kahi bahut sukun se 1 aam ladki ki zindagi ji rahi hoti,”..us jail me kaam karne vale hawaldaro ko nahi khoj sakte kya hum?..ho sakta hai unhe kuchh pata ho uske bare me?”

“rambha..”,vo khada ho gaya,”..main tumhare jazbat samajhta hu lekin kya tum mera sath de paogi is kaam me?..tumhari apni zindagi hai..1 pati hai..aise me..-“

“-..apni maa ka naam bedagh rakhne se zaruri & koi kaam nahi mere liye & iske liye main koi bhi keemat chukane ko taiyyar hu.”

“hun..”,ladki ki sachchai pe use ab bilkul bhi shubaha nahi tha,”..thik hai.main dekhta hu ki aage kya ho sakta hai.”

“thik hai to main chalti hu.aap mujhe fone kijiyega.”

“zarur.”

“ok,bye!”,rambha ko samajh nahi aaya ki vida kaise le & usne apna hath aage kar diya.deven ne uska hath thama & us pal dono ke jismo me jaise kuchh daud gaya & dono ki mili nazro ne dono ke dilo tak 1 dusre ke 1 jaise ehsas ke mehsus hone ki baat pahuncha di.

Sameer vapas aa gaya tha & uska badla ravaiyya barkarar tha.aisa nahi tha ki vo rambha se bilkul hi berukh tha lekin dono ke rishto me vo pehle jaisi chahat,vo garmjoshi nahi reh gayi thi.rambha ko uski ye baat pasand to nahi aa rahi thi magar us se is baat pe jhagad vo baat bigadana nahi chahti thi.uski jismani zaruraten to Pranav se puri ho rahi thi & uske dimagh ne uske pati ko apne kabu me rakhne ki tarkibo ke bare me sochna shuru bhi kar diya tha.

“sameer..”,usne use peechhe se baaho me bhar liya & uske kurte ke upar se hi uske seene pe nakhun chalaye & uske daye kandhe ko chum liya,”..1 baat kahu?”

“haan.”,sameer ne almari me apni ghadi rakh ke use badn kiya & ghuma to rambha ne uske gale me apni baahe daal di.sameer ne bhi apne hath uski kamar pe rakh diye.rambha aage badhi & uske jism se bilkul sat gayi.sameer apni patni se kitna bhi berukh kyu na ho gaya ho tha to vo 1 mard hi.rambha ke komal jism ki hararat ne uske badan ki garmi bhi badha di & uski kamar pe rakhe hath peechhe gaye & uski pith ko gherte hue use apne jism se & satane lage.

“darling,main kuchh kaam karna chahti hu.”,rambha uske seene ko chum rahi thi & uske hath pati ke gale se utar uske kurte me ghus uske pet pe ghum rahe the.

“kaisa kaam?”,sameer ke hath bhi biwi ki nighty ko utha uski gand ko masal rahe the.rambha ne jaanbujh ke nighty ke neeche kuchh nahi pehna tha.sameer ke hath jaise hi uski mulayam tvacha se sate uska lund pura tan gaya & usne josh me bhar biwi ko khud se & sata liya.

“oowwww..aaram se,meri jaan..kahi bhagi thode ja rahi hu..aakhir biwi hu tumhari!”,rambha uske pairo pe khadi ho gayi & uchak ke uske honth chum liye.sameer ne fauran uski gand ko masalte hue uske munh me apni jibh ghusa di,”..uummmm..ghar me baithe-2 oob jati hu..uuffff..isiliye socha ki kuchh kaam hi kar lu..”,sameer ke hath uski gand se upar uski nangi pith pe chal rahe the & rambha bhi mast ho gayi thi.rambha ne hath neeche le jake pati ke pajame ki dor khinch di & uske lund ko pakad liya.sach baat to ye thi ki Vijayant Mehra ke baad use koi bhi lund utna kamal ka nahi laga tha & fir sameer ka lund to baap ke lund ke muqable kafi chhota tha magar fir bhi tha to 1 lund hi vo bhi us pati ka jise vo fir se jeetne ki koshish kar rahi thi,”..aapki company me koi naukri milegi,sir?”,rambha neeche baith gayi & badi msoom nigaho se pati ko dekha & fir lund ke supade ko apne gulabi hotho se pakad liya.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah.......

 
जाल पार्ट--52

गतान्क से आगे......

“उउन्नगज्गघह..!”,रंभा ने यूस्क

समीर को उसकी इस अदा पे हँसी आ गयी,”कैसी नौकरी चाहिए तुम्हे?”,रंभा ने उसके अंडे दबाए & उसके लंड को हिलाते हुए चूसा.

“कैसी भी..”,उसने लंड को निकाला & बाए गाल पे रगड़ा,”..आपकी सेक्रेटरी की नौकरी भी चलेगी.”,उसने लंड को मुँह मे भर ज़ोर से चूसा.समीर हंसा & उसे उठाया & उसकी नाइटी निकल दी.रंभा ने भी उसका कुर्ता निकाल फेंका.समीर ने उसे बाहो मे भरा & चूमते हुए कमरे के कोने मे रखी अपनी स्टडी टेबल पे बिठा दिया.रंभा ने अपनी टाँगे फैला दी & अपने पति की कमर को बाहो मे कसते हुए उसके लब से अपने लब लगा दिए.

“वो जगह तो खाली नही है.कोई & नौकरी चलेगी?”,समीर उसकी गर्दन चूम रहा था & उसके हाथ उसकी छातियों को गूँध रहे थे.

“कहा ना सर,कोई भी नौकरी चलेगी..हाईईईईईईईईईईई..!”,समीर ने आगे बढ़ते हुए उसकी गीली चूत मे लंड घुसा दिया था.अचानक हुए इस हमले से रंभा ने दर्द से आह भरी & पति की गंद मे नाख़ून धंसा दिए,”..जानू,1 बात बोलू?”

“बोलो ना!”,समीर उसकी कसी चूत मे लंड घुसा के मस्ती मे उसके हसीन चेहरे पे अपनी जीभ फिरा रहा था.उसके हाथ तो रंभा की मखमली पीठ & मांसल कमर को छ्चोड़ना ही नही चाह रहे थे.

“मुझे फिल्म प्रोडक्षन मे काम दे दो ना!बड़ा मन करता है मेरा फिल्मी सितारो को करीब से देखने का..आननह..ज़ालिम कहीं!..काटो नही..ऊव्वववव..मैं भी काटुगी..ये लो..!”,समीर उसके निपल्स को दांतो से हल्के-2 काट रहा था तो रंभा ने भी जवाब मे उसके कान पे काट लिया.कितने दिनो बाद वो समीर के साथ अपने रिश्ते के शुरुआती दिनो की तरह चुदाई कर रही थी.समीर ने उसकी छातियो को हाथो मे पकड़ा & उसके खुद को काटते दांतो को रोकने के लिए उसके होंठो को अपने होंठो से बंद कर दिया.थोड़ी देर तक पति-पत्नी 1 दूसरे को बाहो मे भरे,चूमते हुए बस लंड के चूत मे अंदर-बाहर हो चूत की दीवारो को रगड़ने का लुत्फ़ उठाते रहे.

“हाईईईईईईईईईईईईईईईई....समीईईईईईररर्र्र्र्र्र्ररर............हााआअन्न्‍नननननणणन्..बस थोड़ी दे और......ऊहह....!”,रंभा उसकी पीठ & गंद पे बेसबरे हाथ फिराती मस्ती मे बोल रही थी & समीर भी उसके रेशमी जिस्म पे हाथ चलते हुए उसके चेहरे से लेके सीने तक को अपने होंठो से महसूस करते हुए गहरे धक्के लगा रहा था,”..ओईईईईईईईईई..माआआआआआआ..!”,रंभा के होंठ चीखने के बाद गोल हो खामोश हो गये,उसके चेहरे पे दर्द का भाव था लेकिन उस मस्ताने,मीठे दर्द का जिसकी चाहत हर लड़की को होती है.उसका सर पीछे झुका हुआ था & जिस्म पति की बाहो मे झूल रहा था.उसके जिस्म मे खुशी की वोही लहर दौड़ रही थी जो चुदाई के अंजाम पे पहुचने पे पैदा होती है & जिसे लोग झड़ना कहते हैं.उसकी बाई चूची के उपर होंठ चिपकाए,उसके उपर अपनी चाहत का निशान बनाते हुए आहे भरता समीर भी झाड़ रहा था.

“मेरी जान,कल ही से फिल्म कंपनी जाय्न कर लो.”,वो बीवी के चेहरे को चूम रहा था.

“..उउम्म्म्म..& काम क्या होगा मेरा?”,रंभा को बहुत सुकून मिला था & वो भी समीर के जिस्म को सहला रही थी.समीर ने उसे वैसे ही गोद मे उठा लिया & बिस्तर पे ले आया.रंभा उठी & चादर खींच दोनो के जिस्मो पे डाली & उसके सीने से लग गयी.

“जो दिल मे आए वो करना मेरी जान..”,उसने उबासी ली & उसे खुद से थोड़ा और चिपकाते हुए आँखे बंद कर ली,”..आख़िर कंपनी की मालकिन हो तुम.”

“थॅंक्स,डार्लिंग!आइ लव यू!”,रंभा ने उसे चूम लिया.

“हूँ.”,समीर की आँखे बंद थी & वो नींद के आगोश मे चला गया था.

ट्रस्ट फिल्म्स के सीओ को समीर ने हिदायत दे दी थी कि उसकी बीवी को कंपनी मे जो भी मर्ज़ी हो काम करने दिया जाए,साथ ही उसने उसे भरोसा भी दिलाया था कि रंभा की वजह से उसके काम मे कोई अड़चन नही आएगी.सीओ भी जानता था कि राईस्ज़ादे की बीवी घर मे बैठी ऊब गयी होगी तो उसे ये नया शौक चर्राया है जोकि कुच्छ दिनो मे पूरा हो जाएगा.उसने भी रंभा की चापलूसी मे कोई कसर नही छ्चोड़ी लेकिन हफ़्ता बीतते वो समझ गया कि ये लड़की यहा वक़्त काटने के लिए नही आई थी.

रंभा उसके काम मे दखल नही डालती थी & वो बस फिल्म बनाने के तरीके को गौर से देख उसे सीखने की कोशिश कर रही थी.ट्रस्ट फिल्म्स इस वक़्त 3 फिल्म्स पे काम कर रहा था.पहली फिल्म बन चुकी थी & पोस्ट-प्रोडक्षन मे थी.रंभा ने 1 दिन जाके ये देखा कि डाइरेक्टर,एडिटर,बॅकग्राउंड म्यूज़िक डाइरेक्टर वग़ैरह के हाथो मे पूरी शूट की हुई फिल्म किस तरह उस रूप मे आती है जिसे हम सिनिमा हॉल मे देखते हैं.दूसरी फिल्म की शूटिंग वही ट्रस्ट स्टूडियोस मे ही चल रही थी.वाहा जाने पे रंभा ने देखा की आख़िरकार फिल्म शूट कैसे होती है.

वही वो कामया से टकराई.कामया ने तो उस से गर्मजोशी से मुलाकात की लेकिन रंभा ने उस से कोई खास बातचीत नही की.इसी चिड़िया के पर काटने के इरादे से तो वो यहा आई थी.उसने डाइरेक्टर से फिल्म के बारे मे काफ़ी तफ़सील से बात की & उसके पैने दिमाग़ ने भाँप लिया कि अगर बस थोड़ी सी फेर बदल की जाए तो साइड हेरोयिन का रोल,जोकि कामया से ज़्यादा अच्छी अदाकारा थी,थोड़ा सा बढ़ाया जाए तो 1 तरफ कामया का रोल थोड़ा घटेगा भी & फिल्म मे थोड़ा निखार भी आ जाएगा.वो जानती थी कि कामया 1 स्टार है जिसके करोड़ो चाहनेवाले हैं & ट्रस्ट फिल्म्स अपने मुनाफ़े के लिए उसके स्टारडम को भुनाने की कोशिश तो करेगी ही लेकिन अब नही.बस कुच्छ ही दिनो की बात थी उसके बाद रंभा कामया को उसके पति को उस से बेरूख़् करने की सज़ा ज़रूर देगी.

तीसरी फिल्म की स्क्रिप्ट लगभग तैय्यार थी & डाइरेक्टर अब उसकी शूटिंग के लिए जगहो की तलाश शुरू करने वाला था रंभा ने खुद को इसी फिल्म से जोड़ने का फ़ैसला किया.वो 1 पूरी फिल्म को काग़ज़ के सफॉ पे 1 कहानी के होने से लेके उसके फिल्मी पर्दे पे रिलीस करवाने तक के सारे काम-काज का हिस्सा बन उसे अच्छे से समझ लेना चाहती थी.उसने कंपनी के उस आदमी से बात की जो फिल्म का एग्ज़िक्युटिव प्रोड्यूसर था & उसने उसे समझाया कि फिल्म की स्क्रिप्ट के हिसाब से लोकेशन कैसे ढूँढनी है.

डाइरेक्टर,राइटर,कॅमरमन,आक्टर्स सब की राइ के साथ कुच्छ जगहो को चुना जाता था शूटिंग के लिए.रंभा ने सब से पहले इसी काम का हिस्सा बनना तय किया.

“हेलो,मैं देवेन बोल रहा हू.”

“हाई!कैसे हैं आप?”

“क्या बात है?तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना?”

“हां-2.क्यू?”

“नही,तुम्हारी आवाज़ से लगा जैसे तुम नसाज़ हो.”,रंभा समीर के साथ पिच्छली रात 1 पार्टी मे गयी थी.वाहा प्रणव ने उसे 1 कोने मे खींच लिया & उसे चूमने लगा.तभी रंभा के कानो मे 1 जानी-पहचानी आवाज़ सुनाई दी-कामया की आवाज़.प्रणव उसके क्लेवगे को चूमने मे मशगूल था & उसने वो आवाज़ नही सुनी थी.रंभा ने उसे फुसला के वापस पार्टी मे भेजा & खुद उस आवाज़ की ओर चल पड़ी.

पार्टी 1 होटेल के बॅंक्वेट हॉल मे थी & रंभा उस से डोर 1 गलियारे मे प्रणव के साथ खड़ी थी.गलियारा आगे जाके बाई तरफ घूम रहा था & आवाज़ उसी तरफ से आ रही थी.प्रणव को वाहा से भेज उस गलियारे के मोड़ पे गयी & छुप के देखा & उसे कामया के साथ समीर बात करता दिखा.

“..समझने की कोशिश करो,डार्लिंग अभी हम शादी नही कर सकते.डॅड की मौत से पहले ही कंपनी के स्टॉक्स पे असर पड़ा.अब मानपुर वाला टेंडर अभी भरा है.ऐसे मे उसे तलाक़ दे तुमसे शादी करूँगा तो 1 स्कॅंडल तो होगा ही & ये बात ग्रूप के लिए & नुकसानदेह होगी.फिर इतनी जल्दी तलाक़ मिलेगा भी नही.”

“समीर,तुम मुझे धोखा देने की कोशिश कर रहे हो ना?..”,कामया रुआंसी थी,”..बस तुम्हारा मतलब निकल गया &..”,कामया सुबकने लगी.

“बिल्कुल नही,जान.आइ लव यू!”,समीर उसे बाहो मे भर रहा था,”..मैं मना नही कर रहा तुम्हे बस इंतेज़ार करने को कह रहा हू.”

“तो फिर तुमने उसे कंपनी की मालकिन क्यू बना दिया है?”,कामया ने उसके हाथ झटक दिए.

“मालकिन कहा है वो!घर मे बैठी ऊब रही थी तो उसे वाहा दिल बहलाने को भेज दिया,मेरी जान.कुच्छ दिन इंतेज़ार करो.उस वक़्त तक तुम्हे उसे झेलना पड़ेगा & उसके लिए मैं तुमसे माफी चाहता हू.मानपुर वाला टेंडर तो हमे ही मिलना है पर अभी वो मिला नही है.1 बार वो मिल जाए तो फिर ग्रूप की पोज़िशन & मज़बूत हो जाएगी,फिर रंभा को चलता करूँगा & तुम बनोगी म्र्स.मेहरा.”

“प्लीज़ समीर,अपने वादे निभाना वरना मर जाऊंगी मैं!”,दोनो प्रेमी 1 दूसरे के आगोश मे थे.रंभा का दिल बहुत ज़ोरो से धड़कने लगा था..आख़िर क्यू?..क्यू शादी की थी समीर ने उस से?..& ये कामया से प्यार उसे हुआ कब?..पंचमहल मे कितने खुश थे दोनो..ये कामया आख़िर आई कब उसके पति की ज़िंदगी मे?

“चलो,पार्टी मे चलें.कही कोई हम मे से किसी 1 को ढूंढता हुआ यहा ना आ पहुँचे.”,रंभा ने उनकी बात सुनी तो तेज़ी से वाहा से निकल गयी.इसी बात से वो उदास और परेशान थी & इन्ही भाव को देवेन ने उसकी आवाज़ मे भाँप लिया था.

“जी,बस कल रात सोने मे देर हो गयी थी.नींद पूरी ना होने की वजह से थोड़ी सुस्ती है.”

“ओह,अच्छा मैने ये बताने को फोन किया था कि दयाल के बारे मे 1 सुराग तो मिला है मगर उसके लिए क्लेवर्त के पास के किसी गाँव मे जाना पड़ेगा.

“ओह,तो आप जा रहे हैं वाहा?”

“हां.”

“हूँ.मैं कर दू वाहा जाने का इंतेज़ाम या 1 मिनिट..मुझे भी उस तरफ तो जाना है.”

“अच्छा,क्यू?”

“वो 1 फिल्म के सिलसिले मे.”

“फिल्म?!”

“हां,आप यहा आके मुझसे मिलिए तो सब बताती हू.”

“ठीक है.”

टोयोटा फोरटुनेर उबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते पे उच्छलती-कूड़ती बढ़ी जा रही थी.उस बड़ी,भारी गाड़ी को उस टूटे रास्ते पे संभाल के मगर तेज़ी से चलाने मे रंभा को काफ़ी मज़ा आ रहा था.साथ की सीट पे बैठे देवेन ने उसे मुस्कुराते हुए देखा..अपनी मा की झलक थी इसमे लेकिन उस से कितनी अलग थी..कहा वो चुप-चाप रहने वाली सीधी-सादी लड़की & कहा ये बेबाक,भरोसे से भरी हुई लड़की!

देवेन गोपालपुर के पास की उस जैल मे गया था जहा दयाल क़ैदियो को चोरी से समान बेचा करता था.उस जैल से उसने उस वक़्त के जैल के अफसरो के नाम निकलवाए थे.उसकी किस्मत अच्छी थी कि उनमे से रिटाइर्ड अफ़सर वही रहता था.जब देवेन उस से मिला और दयाल के बारे मे पुछा तो उस भले आदमी ने देवेन को उन 4 लोगो के बारे मे बताया जिनके साथ मिल के वो ये काम किया करता था.देवेन ने उन चारो की तलाश शुरू कर दी लेकिन पहली 2 कोशिशो मे वो नाकाम रहा.

उसकी फेहरिस्त मे पहला नाम जिस शख्स का था वो मर चुका था & दूसरा अपने बेटे के साथ विदेश चला गया था.अब वो रंभा के साथ फेहरिस्त के तीसरे शख्स की तलाश मे क्लेवर्त के पास के 1 गाँव सनार जा रहा था.उसे पता चला था कि बालम सिंग नाम का वो शख्स वाहा मशरूम की खेती करता था.

रंभा ट्रस्ट फिल्म्स की अगली फिल्म की लोकेशन स्काउटिंग के लिए क्लेवर्त के आस-पास के इलाक़े का मुआयना करने आई थी.समीर डेवाले मे ही था & रंभा ने पता कर लिया था कि कामया शूटिंग के लिए स्विट्ज़र्लॅंड गयी है & 15 दिनो से पहले वापस नही आनेवाली.उसे अपने पति का उस से मिलने का कोई डर नही था & इसी का फ़ायदा उठाके वो अपनी मा & उसके प्रेमी को धोखा देने वाले शख्स का पता लगाने के लिए देवेन के साथ निकल पड़ी थी.

लोकेशन स्काउटिंग के लिए फिल्म के राइटर के साथ 1 असिस्टेंट डाइरेक्टर,असिस्टेंट कॅमरमन & वो आए थे.डाइरेक्टर कॅमरमन & 2 & लोगो के साथ कोई & जगह देखने गया था.ये रंभा का ही सुझाव था कि डाइरेक्टर अपनी पसंदीदा जगह देख आए & वो शॉर्टलिस्ट की बाकी जगहो को देख उसे रिपोर्ट दे देगी & फिर डाइरेक्टर फ़ैसला ले लेगा कि उसे कहा शूटिंग करनी थी.इस तरह से वक़्त की बचत हो रही थी.रंभा ने कल ही काम ख़त्म किया था & अपनी रिपोर्ट लिख के डाइरेक्टर के असिस्टेंट को दे दी थी इस हिदायत के साथ को उसे अपने बॉस को दे दे.उसके बाद वो देवेन के साथ निकल पड़ी थी.

"शाम गहरा रही है..",देवेन ने खिड़की से बाहर आसमान को देखा,"..बेहतर होगा कि आज की रात यही किसी गाँव मे गुज़ार लें."

"हूँ..लेकिन यहा रहने की जगह कैसे मिलेगी?",रंभा ने देखा दूर कुच्छ बत्तियाँ टिमटिमा रही थी & उसने कार उधर ही बढ़ा दी.

"कुच्छ ना कुच्छ तो मिल ही जाएगा.",थोड़ी देर बाद कार 1 छ्होटे से गाँव मे थी.रंभा ने कार गाँव के बाज़ार मे लगाई जहा सिर्फ़ 4 दुकाने थी.1 किराने की,1 हलवाई की,1 लोहार की & 1 कोयले की.इस वक़्त केवल किराने की & हलवाई की दुकाने खुली थी लेकिन लग रहा था कि वो भी बस बंद करने ही वाले हैं.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.......

JAAL paart--52

gataank se aage......

“uunngggghhhhhhh..!”,rambha ne usk

Sameer ko uski is ada pe hansi aa gayi,”kaisi naukri chahiye tumhe?”,rambha ne uske ande dabaye & uske lund ko hilate hue chusa.

“kaisi bhi..”,usne lund ko nikala & baye gaal pe ragda,”..aapki secretary ki naukri bhi chalegi.”,usne lund ko munh me bhar zor se chusa.sameer hansa & use uthaya & uski nighty nikal di.rambha ne bhi uska kurta nikal fenka.sameer ne use baaho me bhara & chumte hue kamre ke kone me rakhi apni study table pe bitha diya.rambha ne apni tange faila di & apne pati ki kamar ko baaho me kaste hue uske lab se apne lab laga diye.

“vo jagah to khali nahi hai.koi & naukri chalegi?”,sameer uski gardan chum raha tha & uske hath uski chhatiyo ko gundh rahe the.

“kaha na sir,koi bhi naukri chalegi..haiiiiiiiiiiii..!”,sameer ne aage badhte hue uski gili chut me lund ghusa diya tha.achanak hue is humle se rambha ne dard se aah bhari & pati ki gand me nakhun dhansa diye,”..janu,1 baat bolu?”

“bolo na!”,sameer uski kasi chut me lund ghusa ke masti me uske haseee chehre pe apni jibh fira raha tha.uske hath to rambha ki makhmali pith & mansal kamar ko chhodna hi nahi chah rahe the.

“mujhe film production me kaam de do na!bada man karta hai mera filmi sitaro ko kareeb se dekhne ka..aannhhhhh..zalim kahinke!..kato nahi..oowwwww..main bhi katungi..ye lo..!”,sameer uske nipples ko danto se halke-2 kaat raha tha to rambha ne bhi jawab me uske kaan pe kaat liya.kitne dino baad vo sameer ke sath apne rishte ke shuruati dino ki tarah chudai kar rahi thi.sameer ne uski chhatiyo ko hatho me pakda & uske khud ko kaatate danto ko rokne ke liye uske hotho ko apne hotho se band kar diya.thodi der tak pati-patni 1 dusre ko baaho me bhare,chumte hue bas lund ke chut me andar-bahar ho chut ki deewaro ko ragadne ka lutf uthate rahe.

“haiiiiiiiiiiiiiiiii....sameeeeeeeeeeeerrrrrrrrrrr............haaaaaaannnnnnnnnn..bas thodi de aur......oohhhhhhhh....!”,rambha uski pith & gand pe besabre hath firati masti me bol rahi thi & sameer bhi uske reshmi jism pe hath chalate hue uske chehre se leke seene tak ko apne hotho se mehsus karte hue gehre dhakke laga raha tha,”..ouiiiiiiiiiiii..maaaaaaaaaaaaaa..!”,rambha ke honth chikhne ke baad gol ho khamosh ho gaye,uske chehre pe dard ka bhav tha lekin us matane,mithe dard ka jiski chahat har ladki ko hoti hai.uska sar peechhe jhuka hua tha & jism pati ki baaho me jhul raha tha.uske jism me khushi ki vohi lehar daud rahi thi jo chudai ke anjam pe pahuchane pe paida hoti hai & jise log jhadna kehte hain.uski bayi choochi ke upar honth chipkaye,uske upar apni chahat ka nishan banate hue aahe bharta sameer bhi jhad raha tha.

“meri jaan,kal hi se film company join kar lo.”,vo biwi ke chehre ko chum raha tha.

“..uummmm..& kaam kya hoga mera?”,rambha ko bahut sukun mila tha & vo bhi sameer ke jism ko sehla rahi thi.sameer ne use vaise hi god me utha liya & bistar pe le aaya.rambha uthi & chadar khinch dono ke jismo pe dali & uske seene se lag gayi.

“jo dil me aaye vo karna meri jaan..”,usne ubasi li & use khud se thoda & chipkate hue aankhe band kar li,”..aakhir company ki malkin ho tum.”

“thanx,darling!i love you!”,rambha ne use chum liya.

“hun.”,sameer ki aankhe band thi & vo nind ke agosh me chala gaya tha.

Trust Films ke CEO ko Sameer ne hidayat de di thi ki uski biwi ko company jo bhi marzi ho kaam karne diya jaye,sath hi usne use bharosa bhi dilaya tha ki Rambha ki vajah se uske kaam me koi adchan nahi aayegi.CEO bhi janta tha ki raeeszade ki biwi ghar me baithi oob gayi hogi to use ye naya shauk charraya hai joki kuchh dino me pura ho jayega.usne bhi rambha ki chaplusi me koi kasar nahi chhodi lekin hafta beetate vo samajh gaya ki ye ladki yaha waqt kaatne ke liye nahi aayi thi.

Rambha uske kaam me dakhal nahi dalti thi & vo bas film banane ke tarike ko gaur se dekh use seekhne ki koshish kar rahi thi.trust films is waqt 3 films pe kaam kar raha tha.pehli film ban chuki thi & post-production me thi.rambha ne 1 din jake ye dekha ki director,editor,background music director vagairah ke hatho me puri shoot ki hui film kis tarah us roop me aati hai jise hum cinema hall me dekhte hain.dusri film ki shooting vahi trust studios me hi chal rahi thi.vaha jane pe rambha ne dekha ki aakhirkaar film shoot kaise hoti hai.

Vahi vo kamya se takrayi.kamya ne to us se garmjoshi se mulakat ki lekin rambha ne us se koi khas baatchit nahi ki.isi chidiya ke par kaatne ke irade se to vo yaha aayi thi.usne director se film ke bare me kafi tafsil se baat ki & uske paine dimagh ne bhanp liya ki agar bas thodi si fer badal ki jaye ro side heroine ka role,joki kamya se zyada achhi adakara thi,thoda sa badhaya jaye to 1 taraf kamya ka role thoda ghatega bhi & film me thoda nikhar bhi aa jayega.vo janti thi ki kamya 1 star hai jiske karodo chahnevale hain & trust films apne munafe ke liye uske stardom ko bhunane ki koshish to karegi hi lekin ab nahi.bas kuchh hi dino ki baat thi uske baad rambha kamya ko uske pati ko us se berukh karne ki saza zarur degi.

Teesri film ki script lagbhag taiyyar thi & director ab uski shooting ke liye jagaho ki talash shuru karne vala tharambha ne khud ko isi film se jodne ka faisla kiya.vo 1 puri film ko kagaz ke safo pe 1 kahani ke hone se leke uske filmi parde pe release karwane tak ke sare kaam-kaaj ka hissa ban use achhe se samajh lena chahti thi.usne company ke us aadmi se baat ki jo film ka executive producer tha & usne use samjhaya ki film ki script ke hisab se location kaise dhoondani hai.

Director,writer,cameraman,actors sab ki rai ke sath kuchh jagaho ko chuna jata tah shooting ke liye.rambha ne sab se pehle isi kaam ka hissa banana tay kiya.

“hello,main Deven bol raha hu.”

“hi!kaise hain aap?”

“kya baat hai?tumhari tabiyat to thik hai na?”

“haan-2.kyu?”

“nahi,tumhari aavaz se laga jaise tum nasaaz ho.”,rambha sameer ke sath pichhli raat 1 party me gayi thi.vaha Pranav ne use 1 kone me khinch liya & use chumne laga.tabhi rambha ke kano me 1 jani-pehchani aavaz sunai di-kamya ki aavaz.pranav uske clevage ko chumne me mashgul tha & usne vo aavaz nahi suni thi.rambha ne use phusla ke vapas party me bheja & khud us aavaz ki or chal padi.

Party 1 hotel ke banquet hall me thi & rambha us se door 1 galiyare me pranav ke sath khadi thi.galiyara aage jake bayi taraf ghum raha tha & aavaz usi taraf se aa rahi thi.pranav ko vahase bhej us galiyare ke mod pe gayi & chhup ke dekha & use kamya ke sath sameer baat karta dikha.

“..samajhne ki koshish karo,darling abhi hum shadi nahi kar sakte.dad ki maut se pehle hi company ke stocks pe asar pada.ab Manpur vala tender abhi bhara hai.aise me use talaq de tumse shadi karunga to 1 scandal to hoga hi & ye baat group ke liye & nuksandeh hogi.fir itni jaldi talaq milega bhi nahi.”

“sameer,tum mujhe dhokha dene ki koshish kar rahe ho na?..”,kamya ruansi thi,”..bas tumhara matlab nikal gaya &..”,kamya subakne lagi.

“bilkul nahi,jaan.i love you!”,sameer use baaho me bhar raha tha,”..main mana nahi kar raha tumhe bas intezar karne ko keh raha hu.”

“to fir tumne use company ki malkin kyu bana diya hai?”,kamya ne uske hath jhatak diye.

“malkin kaha hai vo!ghar me baithi oob rahi thi to use vaha dil behlane ko bhej diya,meri jaan.kuchh din intezar karo.us waqt tak tumhe use jhelna padega & uske liye main tumse mafi chahta hu.manpur vala tender to hume hi milna hai par abhi vo mila nahi hai.1 baar vo mil jaye to fir group ki position & mazbut ho jayegi,fir rambha ko chalta karunga & tum banogi Mrs.Mehra.”

“please sameer,apne vade nibhana varna mar jaoongi main!”,dono premi 1 dusre ke agosh me the.rambha ka dil bahut zoro se dhadakne laga tha..aakhir kyu?..kyu shadi ki thi sameer ne us se?..& ye kamya se pyar use hua kab?..Panchmahal me kitne khush the dono..ye kamya aakhir aayi kab uske pati ki zindagi me?

“chalo,party me chalen.kahi koi hum me se kisi 1 ko dhoondata hua yaha na aa pahunche.”,rambha ne unki baat suni to tezi se vaha se nikal gayi.Isi baat se vo udas & pareshan thi & inhi bhavo ko deven ne uski aavaz me bhanp liya tha.

“ji,bas kal raat sone me der ho gayi thi.nind puri na hone ki vajah se thodi susti hai.”

“oh,achha maine ye batane ko phone kiya tha ki Dayal ke bare me 1 surag to mila hai magar uske liye Clayworth ke paas ke kisi ganv me jana padega.

“oh,to aap ja rahe hain vaha?”

“haan.”

“hun.main kar du vaha jane ka intezam ya 1 minute..mujhe bhi us taraf to jana hai.”

“achha,kyu?”

“vo 1 film ke silsile me.”

“film?!”

“haan,aap yaha aake mujhse miliye to sab batati hu.”

“thik hai.”

Toyota Fortuner ubad-khabad pahadi raste pe uchhalti-kudti badhi ja rahi thi.us badi,bhari gadi ko us toote raste pe sambhal ke magar tezi se chalane me rambha ko kafi maza aa raha tha.sath ki seat pe baithe deven ne use muskurate hue dekha..apni maa ki jhalak thi isme lekin us se kitni alag thi..kaha vo chup-chap rehne vali seedhi-sadi ladki & kaha ye bebak,bharose se bhari hui ladki!

Deven Gopalpur ke paas ki us jail me gaya tha jaha Dayal qaidiyo ko chori se saman becha karta tha.us jail se usne us waqt ke jail ke afsaro ke naam nikalwaye the.uski kismat achhi thi ki unme se retired afsar vahi rehta tha.jab deven us se mila & dayal ke bare me puchha to us bhale aadmi ne deven ko un 4 logo ke bare me bataya jinke sath mil ke vo ye kaam kiya karta tha.deven ne un charo ki talash shuru kar di lekin pehli 2 koshisho me vo nakaam raha.

uski fehrist me pehla naam jis shakhs ka tha vo mar chuka tha & dusra apne bete ke sath videsh chala gaya tha.ab vo Rambha ke sath fehrist ke teesre shakhs ki talash me Clayworth ke paas ke 1 ganv Sanaar ja raha tha.use pata chala tha ki Baalam Singh naam ka vo shakhs vaha mushroom ki kheti karta tha.

rambha Trust Films ki agli film ki location scouting ke liye Clayworth ke aas-paas ke ilake ka muayana karne aayi thi.Sameer Devalay me hi tha & rambha ne pata kar liya tha ki Kamya shooting ke liye Switzerland gayi hai & 15 dino se pehle vapas nahi aanevali.use apne pati ka us se milne ka koi darr nahi tha & isi ka fayda uthake vo apni maa & uske premi ko dhokha dene vale shakhs ka pata lagane ke liye deven ke sath nikal padi thi.

location scouting ke liye film ke writer ke sath 1 assistant director,assistant cameraman & vo aaye the.director cameraman & 2 & logo ke sath koi & jagah dekhne gaya tha.ye rambha ka hi sujhav tha ki director apni pasandeeda jagah dekh aaye & vo shortlist ki baki jagaho ko dekh use report de degi & fir director faisla le lega ki use kaha shooting karni thi.is tarah se waqt ki bachat ho rahi thi.rambha ne kal hi kaam khatm kiya tha & apni report likh ke director ke assistant ko de di thi is hidayat ke sath ko use apne boss ko de de.uske baad vo deven ke sath nikal padi thi.

"sham gehra rahi hai..",deven ne khidki se bahar aasmaan ko dekha,"..behtar hoga ki aaj ki raat yahi kisi ganv me guzar len."

"hun..lekin yaha rehne ki jagah kaise milegi?",rambha ne dekha door kuchh battiyan timtima rahi thi & usne car udhar hi badha di.

"kuchh na kuchh to mil hi jayega.",thodi der baad car 1 chhote se ganv me thi.rambha ne car ganv ke bazar me lagayi jaha sirf 4 dukane thi.1 kirane ki,1 halwai ki,1 lohar ki & 1 koyle ki.is waqt keval kirane ki & halwai ki dukane khuli thi lekin lag raha tha ki vo bhi bas band karne hi vale hain.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah.......

 
जाल पार्ट--53

गतान्क से आगे......

"क्यू भाई यहा कही रहने को जगह मिलेगी?",देवेन ने किराने वाले से 1 माचिस खरीदी.वो अपना लाइटर अपने होटेल के कमरे मे भूल आया था & रास्ते मे रंभा के साथ की वजह से उसने 1 भी सिगरेट नही पी थी & अब उसका हाल बुरा था.उसने सिगरेट सुलगा के 1 लंबा कश भरा & फिर सुकून से धुएँ को बाहर छ्चोड़ा.

"यहा कहा साहब..हां,सनार मे मिल जाएगा होटेल."

"फिर भी यार कुच्छ तो इंतेज़ाम होगा..कोई धर्मशाला,कोई सराई?"

"नही साहब यहा तो कुच्छ भी नही मिलेगा.वैसे आप यहा क्या करने आए हैं?",दुकानदार ने दुकान से थोड़ा हटके कार से टेक लगाके खड़ी रंभा को देखा.कसी जीन्स & बिना बाज़ू के टॉप मे रंभा के जिस्म के सारे कटाव उभर रहे थे.

"यहा नही हम तो सनार ही जा रहे थे लेकिन अंधेरा होने लगा तो सोचा रात यही गुज़ार लें.",देवेन को उसका रंभा को यू घूर्ना अच्छा नही लगा & उसे बहुत गुस्सा आया.उसका दिल किया कि उसी वक़्त उसे 4-5 झापड़ रसीद कर दे!मगर अपने गुस्से पे काबू रखते हुए वो थोड़ा दाई तरफ हो गया ताकि रंभा उस किरनेवाले की ललचाई निगाहो से च्छूप जाए.

"तो साहब..यहा तो..",वो सोचने लगा,"..अच्छा चलिए,मैं मुखिया जी के पास ले चलता हू.वो कुच्छ ना कुच्छ कर ही देंगे.",रंभा ने हलवाई से उसके बचे-खुचे समोसे खरीद लिए थे & खाने लगी थी.दुकान बंद कर वो दुकानदार देवेन के साथ उसके करीब आए तो उसने पत्ते का डोना उनकी ओर बढ़ा दिया.देवेन ने मना किया तो रंभा ने मुस्कुराते हुए दुकानदार को समोसे पेश किए.दुकानदार की तो जैसे किस्मत खुल गयी & वो बेवकूफो की तरह हंसते,शरमाते हुए समोसा उठा खाने लगा.

गाँव मे मुश्किल से 30 घर होंगे & दुकानदार उन्हे वाहा के सबसे बड़े घर मे ले गया.मुखिया वही रहता था मुखिया 70 बरस का बिल्कुल बुड्ढ़ा शख्स घर के अंदर आँगन मे बैठा हुक्का गुदगुदाता खांस रहा था.

"आप दोनो हो कौन?",देवेन ने रंभा को देखा & रंभा ने देवेन को.अभी तो दोनो ने अपना नाम बताया था,"..देखो,जगह तो मिल जाएगी लेकिन ये बताओ कि दोनो क्या लगते हो 1 दूसरे के?",देवेन नही समझा मगर रंभा उसके सवाल का मतलब समझ गयी.

"ये मेरे पति हैं.हम दोनो सनार जा रहे हैं क्यूकी सुना है वाहा कोई विदेशी सब्ज़ी की खेती होती है & उसके आगे जाके 1 छ्होटी पहाड़ी नदी भी है ना जोकि बहुत खूबसूरत है उसी को देखने जा रहे हैं.हमारे होटेल है ना शहर मे तो सोचा कि देखे शायद वाहा से कुच्छ सस्ती सब्ज़ियाँ हमे सप्लाइ हो सकें.",देवेन उसके जवाब से चौंक गया & फ़ौरन पलट के उसे देखा.

"हा-हां..",बुड्ढे की नज़र अब उसी पे थी.उसने झट से झूठ बोला और 1 सिगरेट सुलगा ली.पिच्छली उसने घर मे घुसने से पहले फेंक दी थी.

"हूँ..आओ.",तीनो उठे तो बुड्ढे ने किसी नौकर को आवाज़ दी.रंभा ने अपनी बाई बाँह देवेन की दाई बाँह मे फँसा दी.उसने तो ऐसा बुड्ढे को ये यकीन दिलाने के लिए किया था कि दोनो पति-पत्नी हैं लेकिन उसे बिल्कुल अंदाज़ा नही था कि उसके जिस्म मे बिजली का करेंट दौड़ जाएगा.उसके दिल मे गुस्ताख अरमानो ने अंगड़ाई ली & उसने अपने चेहरे को देखते देवेन की निगाहो से शर्मा के अपना मुँह फेर लिया.देवेन भी उस खूबसूरत लड़की के मुलायम,महकते एहसास से मदहोश हो गया था.उसके जिस्म के रोएँ खड़े हो गये थे & धड़कन तेज़ हो गयी थी.रंभा को कुच्छ औरतो की दबी हँसी की आवाज़ सुनाई दी.उसने गर्दन घुमाई तो 1 पर्दे की ओट से 2-3 औरतें खड़ी दिखी.वो मुस्कुराइ & 'अपने पति' के साथ मुखिया & उसके नौकर के पीछे हो ली.

"मुखिया जी,आपके गाँव का नाम क्या है?"

"हराड.",मुखिया इतनी उम्र के बावजूद बिना सहारे के बिल्कुल सीधा चल रहा था.

"बहुत सॉफ-सुथरा है & बिजली भी है यहा तो."

"हां.मुझे कूड़ा-कचरा नही पसंद तो सभी को हिदायत देता रहता हू & बिजली के लिए तो पुछो मत कितना भागना-दौड़ना पड़ा.",चारो गाँव मे & अंदर आ गये थे.नौकर 1 घर के तले को खोल रहा था,"..आओ यहा बैठो.जब तक ये अंदर सॉफ-सफाई कर ले.ये मेरे छ्होटे भाई का घर है.वो यहा नही रहता.",दोनो घर के बाहर की सीढ़ियो पे बैठ गये.

"खाना हमारे साथ ही खाना.यहा कोई परेशानी नही होगी,आराम से सोना.",बुड्ढे ने मुस्कुराते हुए देवेन को देखा & 'सोने' पे ज़ोर दिया.देवेन ने कोई जवाब नही दिया & बस सिगरेट फूंकता रहा.रंभा के गाल उस बात से थोड़े सुर्ख हो गये लेकिन दिल मे 1 उमंग भी उठी.थोड़ी ही देर मे नौकर ने सब सॉफ कर दिया था.

सभी अंदर गये तो देखा की आँगन के बाद 1 बड़ा सा कमरा था जिसमे बड़ी आरामदेह कुर्सियाँ & 1 मेज़ थी & दूसरे मे 1 बिस्तर था जोकि थोड़ा छ्होटा था.उसपे 2 आदमी तो सो सकते थे लकिन फिर दोनो के जिस्मो का टकराने से बचना नामुमकिन था.उस बिस्तर को देख रंभा का दिल धड़क उठा.1 तरफ 1 गुसलखाना बना था जिसमे बल्टियो नौकर ने कुएँ से लाके पानी रख दिया था.देवेन किराने की दुकान के सामने खड़ी कार को उस घर के बाहर ले आया तो नौकर ने उस से उनका समान उतार के अंदर रख दिया.फिर वो वापस मुखिया के घर गया & 1 लालटेन जला के वाहा रख दी.

"अभी 2-3 घंटे के लिए जाएगी बिजली.रोज़ ही जाती है.",मुखिया ने उसकी सवालिया निगाहो को देख जवाब दिया.

"अच्छा,चलता हू..",देवेन मुखिया को बाहर तक छ्चोड़ने आया.नौकर उनसे दूर खड़ा था,"..नहा-धो के खाना खाने आ जाना.हम ज़रा जल्दी सो जाते हैं.वैसे तुम्हे भी जल्दी ही होगी सोने की?",मुखिया फिर दोहरे मतलब वाली बात बोल के हंसा.देवेन भी बस हंस दिया,"..मेरी तरह तुम भी असल मर्द हो.उम्र का हम जैसो पे कोई असर नही पड़ता.मैं तुम्हे कुच्छ उपाय बताउन्गा ताकि जब मेरी उम्र मे पहुँचो तो भी ये दम-खम बरकरार रहे."

"नही,मुझे ज़रूरत नही.",देवेन को अब उस बुड्ढे की बातें हद्द से बाहर जाती दिख रही थी लेकिन वो उसे नाराज़ नही करना चाहता था.

"पक्के मर्द हो!",बुड्ढ़ा फिर हंसा,"..अपनी मर्दानगी के आगे जाके कमज़ोर होने की बात से तिलमिला गये?..कोई बात नही पर मैं बताउन्गा तुम्हे उपाय.भरोसा करो,आगे जाके बहुत काम आएँगे तुम्हे.अच्छा चलो जाके नहा लो.मैं खाने पे इंतेज़ार करूँगा.जल्दी आना.असल मे मैं ज़रा जल्दी सोता हू.",बुड्ढे ने सोता लफ्ज़ पे फिर ज़ोर दिया & हंसता हुआ नौकर के साथ चला गया.देवेन कुच्छ देर उसे जाते देखता रहा & फिर अंदर आ गया.

“तुमने उस मुखिया से ये क्यू कहा कि हम..हम पति-पत्नी हैं?”,देवेन & रंभा उस मुखिया के घर खाना खाने जा रहे थे.रंभा अभी भी जीन्स पहने थी बस उपर का टॉप बदल लिया था.अब उसने 1 काली वेस्ट पहन ली थी जिसमे उसकी बड़ी छातियो का आकार सॉफ उभर रहा था.देवेन को ये अच्छा तो नही लगा था क्यूकी वो जानता था कि अब वाहा के मर्द उसे और घुरेंगे.

“ऐसा ना कहती तो हमे रहने की जगह नही मिलती.अगर मैं सही बात बताती तो उसे लगता हम झूठ बोल रहे हैं & वो हमे चलता कर देता ताकि यहा रुक के हम यहा के माहौल को ना ‘बिगाड़े’.”,रंभा हँसी.दोनो मुखिया के घर की दहलीज़ पे थे.चाँद की रोशनी मे रंभा का खूबसूरत चेहरा चमक रहा था.देवेन का दिल किया की उसके गाल को चूम ले..अभी उसका हाथ पकड़ उसे वापस उस घर मे ले जाए & उसके हुस्न को करीब से देखे..बहुत करीब से..उतने करीब से जितना 1 मर्द & औरत के लिए संभव होता है..रंभा सीढ़िया चढ़ रही थी.देवेन का हाथ आगे बढ़ा लेकिन तब तक अंदर से कोई बाहर आ गया था.

“ये मेरी पत्नी है.”,बमुश्किल 20 बरस की 1 लड़की आगे तक घूँघट गिराए खाना परोस रही थी.रंभा तो खाते-2 चौंकी & देवेन भी.बुड्ढ़ा देवेन की ओर देख मुस्कुराया,”..यहा पास के जंगल मे बड़ी ज़ोरदार बूटियाँ होती हैं.मैं कल तुम्हे दूँगा..”,वो उसके कान मे फुसफुसाया,”..जैसे बताउन्गा वैसे लेना तो ये..”,उसका इशारा रंभा की ओर था,”..पूरी ज़िंदगी तुम्हारी बाँदी बन के रहेगी जैसे मेरी घरवाली है.”,दोनो का खाना ख़त्म हो गया था & दोनो उठ के हाथ धोने जा रहे थे,”..गाँव के कयि नौजवान इसे खराब करने के चक्कर मे लगे रहते हैं..”,1 नौकर लोटे से उनके हाथ धुल्वाने लगा,”..लेकिन मेरी मर्दानगी के नशे मे डूबी इसकी आँखो को वो लंगूर दिखते ही नही!”,वो हंसा तो देवेन भी 1 फीकी हँसी हंस दिया.उसकी बातें उसे असहज कर रही थी & उसका दिल रंभा के नंगे जिस्म के उस से लिपटे होने का तस्साउर करने लगा था.

“वो तो उसकी पोती के बराबर है!”,दोनो खाना खा के लौट रहे थे,”..कैसे शादी हुई होगी इनकी?!”,रंभा बोले जा रही थी.दोनो घर तक पहुँचे ही थे कि रंभा के पैर मे कुच्छ ठोकर लगी & वो गिर गयी,”आउच!”

“क्या हुआ?!..ठीक तो हो?”,देवेन ने उसे सहारा दे के उठाया & फिर जेब से निकाल के मोबाइल ऑन किया.उसकी रोशनी के सहारे दोनो घर के अंदर पहुँचे तो देवेन उसे सीधा उस कमरे मे ले गया जहा बिस्तर लगा था,”देखु,कहा चोट आई है.”रंभा के बदन के दाए हिस्से पे धूल लगी थी जिसे वो झाड़ रही थी,”..पाँव मे लगी है लगता है.”,वो झुक के बैठ गया & रंभा का दाया पाँव उठा लिया.रंभा के जिस्म मे झुरजुरी दौड़ गयी & उसके मुँह से हैरत भरी आह निकल गयी.

देवेन ने उसके पाँव को बाए हाथ मे थामा हुआ था & दाए से वो धीरे-2 उसपे लगी धूल हटा रहा था.पाँव मे हल्की खरॉच आई थी & सबसे छ्होटी उंगली मे कुच्छ चुभा भी दिख रहा था.रंभा के जिस्म को छुते ही उसके भी अरमान जाग उठे थे..कितनी कोमल त्वचा है इसकी..कितने खूबसूरत & नाज़ुक पाँव..जी करता है चूम लू इन्हे..रंभा की भी साँसे तेज़ हो गयी थी. देवेन ने उसके पाँव को थोड़ा & करीब से देखा.छ्होटी उंगली मे 1 काँटा चुबा था.उसने पाँव को दाए हाथ मे पकड़ा & बाए से काँटे को खींचा.देवेन ने उसके पाँव को ज़मीन पे रखा & उसकी दाई टाँग पे जीन्स की सीम के उपर नीचे से उपर तक बहुत ही धीमे से अपने दाए हाथ की 1 उंगली चलाई.रंभा ने माथा दीवार से लगा लिया.उसके दिल मे उमँगो की लहरें अब बहुत तेज़ी से उमड़ रही थी.देवेन उसकी मा से बेइंतहा प्यार करता था,ये जानते ही उसके दिल मे उसके लिए इज़्ज़त पैदा हो गयी थी & लगाव भी.वो पहले दिन से ही उसके साथ केवल सुमित्रा के नाम से जुड़ी ग़लतफहमी को दूर करने के लिए नही हुई थी.उसके दिन ने उस से कहा था कि उस भले इंसान की मदद करके ही उसका शुक्रिया अदा करे.मगर अभी जो हो रहा था उसे वो बिल्कुल भी ग़लत या बुरा नही लग रहा था.

“हान्न्न्ंह..!”,रंभा मामूली से दर्द & बड़ी सी कसक से आहत हो गयी थी.रात के वक़्त,चारो तरफ फैली खामोशी मे 1 घर मे,1कमरे मे उन दोनो का तन्हा होना-रोमानी माहौल ने उसके उपर असर करना शुरू कर दिया था.खून की 1 बहुत छ्होटी सी बूँद उसकी गोल सी उंगली पे दिख रही थी.देवेन ने उस काँटे को किनारे किया & रंभा के पाँव को थोड़ा उपर उठाया.वो सहारे के लिए पीछे की दीवार से टिक गयी.उसकी निगाहे अपनी मा के प्रेमी पे ही जमी हुई थी.देवेन का चेहरा अब उसके पाँव के इतने करीब था कि वो उसकी गर्म साँसे महसूस कर रही थी.

“आहह..!”,वो थोडा & झुका था & उसकी उंगली को मुँह मे भर खून की उस बूँद को चूस लिया था.रंभा के जिस्म मे बिजली दौड़ गयी थी.उसकी चूत मे कसक उठने लगी थी & उसके होंठ देवेन के होंठो की तमन्ना मे काँपने लगे थे.कुच्छ पल बाद देवेन ने उसकी उंगली को मुँह से निकाला तो खून बंद हो गया था.उसने उपर देखा & मस्ती से भरी 2 काली-2 आँखो से उसकी नज़रें टकराई.उसने उसे देखते हुए उसके पाँव को चूमा & उसके अन्द्रुनि हिस्से पे 1 उंगली फिराई.रंभा को ना जाने क्यू शर्म आ गयी.उसे बिल्कुल वैसा महसूस हो रहा था जैसा विजयंत के साथ पहली रात महसूस हुआ था.वो घूमी & दीवार की ओर मुँह कर खड़ी हो गयी.देवेन की नज़रो के सामने काली जीन्स मे कसी उसकी चौड़ी,पुष्ट गंद आ गयी.

उसने उसके पाँव को ज़मीन पे रखा & बहुत हौले से उसकी दाई टांग के बाहरी हिस्से पे,नीचे से लेके उपर तक जीन्स की सीम पे अपने दाए हाथ की 1 उंगली चलाई.रंभा के दिल मे उमड़ रही हसरतें अब तूफ़ानी लहरो की शक्ल इकतियार कर रही थी.उसने अपना माथा दीवार से लगा लिया था & देवेन की अगली हरकत का इंतेज़ार कर रही थी.देवेन के लिए उसके दिल मे जगह तो तब ही बन गयी थी जब उसे पता चला था कि वो उसकी मा से बेइंतहा मोहब्बत करता था.वो उसके साथ केवल इसीलिए नही आई थी क्यूकी वो सुमित्रा के नाम के साथ जुड़ी ग़लतफहमी को दूर करना चाहती थी बल्कि वो सच मे उसकी मदद करना चाहती थी.उस इंसान ने बहुत दर्द सहे थे केवल इसीलिए क्यूकी वो उसकी मा के साथ सारी ज़िंदगी गुज़ारना चाहता था.उसने भी तय कर लिया था कि वो उसके दर्द जितना हो सके कम करेगी & उसके घाव पे ज़रूर मरहम लगाएगी.मगर कुच्छ और भी था..वो खिचाँव जो 1 मर्द & 1 औरत 1 दूसरे के लिए महसूस करते हैं..वो खिचाँव जो उनके दिल मे जिस्मो को 1 साथ जोड़ प्यार का इकरार करने पे मजबूर कर देता है.

अब देवेन की 1-1 उंगली दोनो टाँगो की सीम्ज़ पे नीचे से उपर & उपर से नीचे आ रही थी.रंभा उसकी साँसे अपनी गंद पे महसूस कर रही.जीन्स के मोटे कपड़े के बावजूद उनकी तपिश वो अपने नाज़ुक अंग पे महसूस कर रही थी.उसकी चूत से अब पानी रिसने लगा था,”..उउन्न्ह..!”,उसने फिर आह भरी.उसकी काली वेस्ट थोड़ी उपर हो गयी थी & देवेन की गर्म साँसे अब उसकी कमर के उस नुमाया हिस्से को गर्म कर रही थी.इस बार जब उसकी दाई उंगली उपर आई तो फिर नीचे नही गयी बल्कि जीन्स के दाई तरफ के बेल्ट के लूप मे फँस गयी.उसने उसी उंगली से रंभा को खींचा & रंभा मुड़ने लगी.अब रंभा की पीठ दीवार से लगी थी & उसकी वेस्ट & जीन्स के बीच के 2 इंच के नुमाया हिस्से पे देवेन की गर्म साँसे गिर रही थी.रंभा की साँसे अब बहुत तेज़ हो गयी थी.उसकी नाभि का बस ज़रा सा निचला हिस्सा नुमाया था & उसके कोने को चूमती देवेन की सांसो को वो महसूस कर रही थी.उसने देखा वो उसके पेट को निहार रहा था.उसके दाए हाथ की उंगली उसकी कमर पे दाई तरफ से जीन्स के वेयैस्टबंड पे चलते हुए उसके बटन तक आ गयी थी.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.......

JAAL paart--53

gataank se aage......

"kyu bhai yaha kahi rehne ko jagha milegi?",deven ne kirane vale se 1 machis kharidi.vo apna lighter apne hotel ke kamre me bhul aaya tha & raste me rambha ke sath ki vajah se usne 1 bhi cigarette nahi pi thi & ab uska haal bura tha.usne cigarette sulga ke 1 lamba kash bhara & fir sukun se dhuen ko bahar chhoda.

"yaha kaha sahab..haan,sanaar me mil jayega hotel."

"fir bhi yaar kuchh to intezam hoga..koi dharmshala,koi sarai?"

"nahi sahab yaha to kuchh bhi nahi milega.vaise aap yaha kya karne aaye hain?",dukandar ne dukan se thoda hatke car se tek lagake khadi rambha ko dekha.kasi jeans & bina bazu ke top me rambha ke jism ke sare katav ubhar rahe the.

"yaha nahi hum to sanaar hi ja rahe the lekin andhera hone laga to socha raat yehi guzaar len.",deven ko uska rambha ko yu ghurna achha nahi laga & use bahut gussa aaya.uska dil kiya ki usi waqt use 4-5 jhapad raseed kar de!magar apne gusse pe kabu rakhte hue vo thoda dayi taraf ho gaya taki rambha us kiranevale ki lalchai nigaho se chhup jaye.

"to sahab..yaha to..",vo sochne laga,"..achha chaliye,main mukhiya ji ke paas le chalta hu.vo kuchh na kuchh kar hi denge.",rambha ne halwai se uske bache-khuche samose kharid liye the & khane lagi thi.dukan band kar vo dukandar deven ke sath uske karib aaye to usne patte ka dona unki or badha diya.deven ne mana kiya to rambha ne muskurate hue dukandar ko samose pesh kiye.dukandar ki to jaise kismat khul gayi & vo bevkufo ki tarah hanste,sharmate hue samosa utha khane laga.

ganv me mushkil se 30 ghar honge & dukandar unhe vaha ke sabse bade ghar me le gaya.mukhiya vahi rehta tha.1 70 baras ka bilkul buddha shakhs ghar ke andar aangan me baitha hukka gudgudata khans raha tha.

"aap dono ho kaun?",deven ne rambha ko dekha & rambha ne deven ko.abhi to dono ne apna naam bataya tha,"..dekho,jagah to mil jayegi lekin ye batao ki dono kya lagte ho 1 dusre ke?",deven nahi samjha magar rambha uske sawal ka matlab samajh gayi.

"ye mere pati hain.hum dono sanaar ja rahe hain kyuki suna hai vaha koi videshi sabzi ki kheti hoti hai & uske aage jake 1 chhoti pahadi nadi bhi hai na joki bahut khubsurat hai usi ko dekhne ja rahe hain.humare hotel hai na shehar me to socha ki dekhe shayad vaha se kuchh sasti sabziyan hume supply ho saken.",deven uske jawab se chaunk gaya & fauran palat ke use dekha.

"ha-haan..",buddhe ki nazar ab usi pe thi.usne jhat se jhuth bola & 1 cigarette sulga li.pichhli usne ghar me ghusne se pehle fenk di thi.

"hun..aao.",teeno uthe to buddhe ne kisi naukar ko aavaz di.rambha ne apni bayi banh deven ki dayi ban me fansa di.usne to aisa buddhe ko ye yakeen dilane ke liye kiya tha ki dono pati-patni hain lekin use bilkul andaza nahi tha ki uske jism me bijli ka current daud jayega.uske dil me gustakh armano ne angdayi li & usne apne chehre ko dekhte deven ki nigaho se sharma ke apna munh fer liya.deven bhi us khubsurat ladki ke mulayam,mahakte ehsas se madhosh ho gaya tha.uske jism ke royen khade ho gaye the & dhadkan tez ho gayi thi.rambha ko kuchh aurato ki dabi hansi ki aavaz sunai di.usne gardan ghumai to 1 parde ki ot se 2-3 auraten khadi dikhi.vo muskurayi & 'apne pati' ke sath mukhiya & uske naukar ke peechhe ho li.

"mukhiya ji,aapke ganv ka naam kya hai?"

"Haraad.",mukhiya itni umra ke bavjood bina sahare ke bilkul seedha chal raha tha.

"bahut saaf-suthra hai & bijli bhi hai yaha to."

"haan.mujhe kuda-kachra nahi pasand to sabhi ko hidayat deta rehta hu & bijli ke liye to puchho mat kitna bhagna-daudna pada.",charo ganv me & andar aa gaye the.naukar 1 ghar ke tale ko khol raha tha,"..aao yaha baitho.jab tak ye andar saaf-safai kar le.ye mere chhote bhai ka ghar hai.vo yaha nahi rehta.",dono ghar ke bahar ki seedhiyo pe baith gaye.

"khane humare sath hi khana.yaha koi pareshani nahi hogi,aaram se sona.",buddhe ne muskurate hue deven ko dekha & 'sone' pe zor diya.deven ne koi jawab nahi diya & bas cigarette phunkta raha.rambha ke gaal us baat se thode surkh ho gaye lekin dil me 1 umang bhi uthi.thodi hi der me naukar ne sab saaf kar diya tha.

sabhi andar gaye to dekha ki aangan ke baad 1 bada sa kamra tha jisme badi aaramdeh kursiyan & 1 mez thi & dusre me 1 bistar tha joki thoda chhota tha.uspe 2 aaadmi to so sakte the lkin fir dono ke jismo ka takrane se bachna namumkin tha.us bistar ko dekh rambha ka dil dhadak utha.1 taraf 1 gusalkhana bana tha jisme baltiyo naukar ne kuen se lake pani rakh diya tha.deven kirane ki dukan ke samne khadi car ko us ghar ke bahar le aaya to naukar ne us se unka saman utar ke andar rakh diya.fir vo vapas mukhiya ke ghar gaya & 1 laten jalake vaha rakh di.

"abhi 2-3 ghante ke liye jayegi bijli.roz hi jati hai.",mukhiya ne uski sawaliya nigaho ko dekh jawab diya.

"achha,chalta hu..",deven mukhiya ko bahar tak chhodne aaya.naukar unse door khada tha,"..naha-dho ke khana khane aa jana.hum zara jaldi so jate hain.vaise tumhe bhi jaldi hi hogi sone ki?",mukhiya fir dohre matlab vali baat bol ke hansa.deven bhi bas hans diya,"..meri tarah tum bhi asal mard ho.umra ka hum jaiso pe koi asar nahi padta.main tumhe kuchh upay bataunga taki jab meri umra me pahuncho to bhi ye dum-khum barkarar rahe."

"nahi,mujhe zarurat nahi.",deven ko ab us buddhe ki baaten hadd se bahar jati dikh rahi thi lekin vo use naraz nahi karna chahta tha.

"pakke mard ho!",buddha fir hansa,"..apni mardangi ke aage jake kamzor hone ki baat se tilmila gaye?..koi baat nahi par main bataunga tumhe upay.bharosa karo,aage jake bahut kaam aayenge tumhe.achha chalo jake naha lo.main khane pe intezar karunga.jaldi aana.asal me main zara jaldi sota hu.",buddhe ne sota lafz pe fir zor diya & hansta hua naukar ke sath chala gaya.deven kuchh der use jate dekhta raha & fir andar aa gaya.

“Tumne us mukhiya se ye kyu kaha ki hum..hum pati-patni hain?”,Deven & Rambha us mukhiya ke ghar khana khane ja rahe the.rambha abhi bhi jeans pehne thi bas upar ka top badal liya tha.ab usne 1 kali vest pahan li thi jisme uski badi chhatiyo ka aakar saaf ubhar raha tha.deven ko ye achha to nahi laga tha kyuki vo janta tha ki ab vaha ke mard use & ghurenge.

“aisa na kehti to hume rehne ki jagah nahi milti.agar main sahi baat batati to use lagta hum jhuth bol rahe hain & vo hume chalta kar deta taki yaha ruk ke hum yaha ke mahaul ko na ‘bigaden’.”,rambha hansi.dono mukhiya ke ghar ki dehleez pe the.chand ki roshni me rambha ka khubsurat chehra chamak raha tha.deven ka dil kiya ki uske gaal ko chum le..abhi uska hath pakad use vapas us ghar me le jaye & uske husn ko kareeb se dekhe..bahut kareeb se..utne kareeb se jitna 1 mard & aurat ke liye sambhav hota hai..rambha seedhiya chadh rahi thi.deven ka hath aage badha lekin tab tak andar se koi bahar aa gaya tha.

“ye meri patni hai.”,bamushkil 20 baras ki 1 ladki aage tak ghunghat giraye khana paros rahi thi.rambha to khate-2 chaunki & deven bhi.buddha deven ki or dekh muskuraya,”..yaha paas ke jungle me badi zordar bootiyan hoti hain.main kal tumhe dunga..”,vo uske kaan me phusphusaya,”..jaise bataunga vaise lena to ye..”,uska ishara rambha ki or tha,”..puri zindagi tumhari baandi ban ke rahegi jaise meri gharwali hai.”,dono ka khana khatm ho gaya tha & dono uth ke hath dhone ja rahe the,”..ganv ke kayi naujawan ise kharab karne ke chakkar me lage rehte hain..”,1 naukar lote se unke hath dhulwale laga,”..lekin meri mardangi ke nashe me doobi iski aankho ko vo langoor dikhte hi nahi!”,vo hansa to deven bhi 1 fiki hansi hans diya.uski baaten use asahaj kar rahi thi & uska dil rambha ke nange jism ke us se lipte hone ka tassavur karne laga tha.

“vo to uski poti ke barabar hai!”,dono khana kha ke laut rahe the,”..kaise shadi hui hogi inki?!”,rambha bole ja rahi thi.dono ghar tak pahunche hi the ki rambha ke pair me kuchh thokar lagi & vo gir gayi,”ouch!”

“kya hua?!..thik to ho?”,deven ne use sahara de ke uthaya & fir jeb se nikal ke mobile on kiya.uski roshni ke sahare dono ghar ke andar pahunche to deven use seedha us kamre me le gaya jaha bistar laga tha,”dekhu,kaha chot aayi hai.”rambha ke badan ke daye hisse pe dhool lagi thi jise vo jhad rahi thi,”..panv me lagi hai lagta hai.”,vo jhuk ke baith gaya & rambha ka daya panv utha liya.rambha ke jism me jhurjhuri daud gayi & uske munh se hairat bhari aah nikal gayi.

Deven ne uske panv ko baye hath me thama hua tha & daye se vo dhire-2 uspe lagi dhool hata raha tha.panv me halki kharoch aayi thi & sabse chhoti ungli me kuchh chubha bhi dikh raha tha.rambha ke jism ko chhute hi uske bhi armaan jaag uthe the..kitni komal tvacha hai iski..kitne khubsurat & nazuk panv..ji karta hai chum lu inhe..rambha ki bhi saanse tez ho gayi thi. Deven ne uske panv ko thoda & karib se dekha.chhoti ungli me 1 kanta chubha tha.usne panv ko daye hath me pakda & baye se kante ko khincha.deven ne uske panv ko zamin pe rakha & uski dayi tang pe jeans ki seam ke upar neeche se upar tak bahut hi dheeme se apne daye hath ki 1 ungli chalayi.rambha ne matha deewar se laga liya.uske dil me umango ki lehren ab bahut tezi se umad rahi thi.deven uski maa se beintaha pyar karta tha,ye jaante hi uske dil me uske liye izzat paida ho gayi thi & lagav bhi.vo pehle din se hi uske sath keval sumitra ke naam se judi galatfehmi ko door karne ke liye nahi hui thi.uske din ne us se kaha tha ki us bhale insan ki madad karke hi uska shukriya ada kare.magar abhi jo ho raha tha use vo bilkul bhi galat ya bura nahi lag raha tha.

“haannnnhh..!”,rambha mamuli se dard & badi si kasak se aahat ho gayi thi.raat ke waqt,charo taraf faili khamoshi me 1 ghar me,1kamre me un dono ka tanha hona-romani mahaul ne uske upar asar karna shuru kar diya tha.khoon ki 1 bahut chhoti si boond uski gol si ungli pe dikh rahi thi.deven ne us kante ko kinare kiya & rambha ke panv ko thoda upar uthaya.vo sahare ke liye peechhe ki deewar se tik gayi.uski nigahe apni maa ke premi pe hi jami hui thi.deven ka chehra ab uske panv ke itne karib tha ki vo uski garm saanse mehsus kar rahi thi.

“aahhhh..!”,vo thoda & jhuka tha & uski ungli ko munh me bhar khoon ki us boond ko chus liya tha.rambha ke jism me bijli daud gayi thi.uski chut me kasak uthne lagi thi & uske honth deven ke hotho ki tamanna me kanpne lage the.kuchh pal baad deven ne uski ungli ko munh se nikala to khoon band ho gaya tha.usne upar dekha & masti se bhari 2 kali-2 aankho se uski nazren takrayi.usne use dekhte hue uske panv ko chuma & uske andruni hisse pe 1 ungli firayi.rambha ko na jane kyu sharm aa gayi.use bilkul vaisa mehsus ho raha tha jaisa Vijayant ke sath pehli raat mehsus hua tha.vo ghumi & deewar ki or munh kar khadi ho gayi.deven ki nazro ke samne kali jeans me kasi uski chaudi,pusht gand aa gayi.

Usne uske panv ko zamin pe rakha & bahut haule se uski dayi tang ke bahri hisse pe,neeche se leke upar tak jeans ki seam pe apne daye hath ki 1 ungli chalayi.rambha ke dil me umad rahi hasraten ab toofani lehro ki shakl ikhtiyar kar rahi thi.usne apna matha deewar se laga liya tha & deven ki agli harkat ka intezar kar rahi thi.deven ke liye uske dil me jagah to tab hi ban gayi thi jab use pata chala tha ki vo uski maa se beintaha mohabbat karta tha.vo uske sath keval isiliye nahi aayi thi kyuki vo sumitra ke naam ke sath judi galatfehmi ko door karna chahti thi balki vo sach me uski madad karna chahti thi.us insan ne bahut dard sahe the keval isiliye kyuki vo uski maa ke sath sari zindagi guzarna chahta tha.usne bhi tay kar liya tha ki vo uske dard jitna ho sake kam karegi & uske ghavo pe zarur marham lagayegi.magar kuchh & bhi tha..vo khichanv jo 1 mard & 1 aurat 1 dusre ke liye mehsus karte hain..vo khichanv jo unke dil me jismo ko 1 sath jod pyar ka ikrar karne pe majboor kar deta hai.

Ab deven ki 1-1 ungli dono tango ki seams pe neeche se upar & upar se neeche aa rahi thi.rambha uski sanse apni gand pe mehsus kar rahi.jeans ke mote kapde ke bavjood unki tapish vo apne nazuk ang pe mehsus kar rahi thi.uski chut se ab pani risne laga tha,”..uunnhhh..!”,usne fir aah bhari.uski kali vest thodi upar ho gayi thi & deven ki garm saanse ab uski kamar ke us numaya hisse ko garm kar rahi thi.is baar jab uski dayi ungli upar aayi to fir neeche nahi gayi balki jeans ke dayi taraf ke belt ke loop me phans gayi.usne usi ungli se rambha ko khincha & rambha mudne lagi.ab rambha ki pith deewar se lagi thi & uski vest & jeans ke beech ke 2 inch ke numaya hisse pe deven ki garm sanse gir rahi thi.rambha ki saanse ab bahut tez ho gayi thi.uski nabhi ka bas zara sanichla hissa numaya tha & uske kone ko chumti deven ki sanso ko vo mehsus kar rahi thi.usne dekha vo uske pet ko nihar raha tha.uske daye hath ki ungli uski kamar pe dayi taraf se jeans ke waistband pe chalte hue uske button tak aa gayi thi.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah.......

 
जाल पार्ट--54

गतान्क से आगे......

उंगली बटन से उपर गयी फिर अंगूठे के साथ मिल कर बॉटन को खोल दिया.रंभा ने दोनो होंठ दन्तो मे दबा लिए.देवेन आगे झुका & उस खुले बटन के पीछे के हिस्से को बहुत हल्के से चूम लिया.रंभा ने आह भरते हुए सर पीछे कर लिया.देवेने ने उसके बाए हाथ मे बँधी घड़ी की चैन मे अपनी उंगली फँसाई & खड़ा होते हुए उसी चैन से रंभा के हाथ को उठाने लगा.अब वो रंभा के सामने खड़ा था & उसका हाथ उसने उपर ले जाके उसके सर के उपर दीवार से लगा दिया था.वो रंभा के चेहरे को निहार रहा था..सुमित्रा उसके करीब थी..उसके सामने थी..वही लरजते होंठ..वही दिलकश सूरत..वही शर्मोहाया & वही मस्ती!

उसकी निगाहो की तपिश को झेलना रंभा के नैनो के बस मे नही था.उसने आँखे बंद कर ली.पल-2 देवेन की गर्म साँसे उसके चेहरे के & करीब आ रही थी.उसके होंठ खुद बा खुद खुल गये थे.अगेल ही पल उसके जिस्म मे सिहरन दौड़ गयी.देवने के तपते होंठ उसके नर्म लबो से आ लगे थे.वो बस अपने लबो से उसके होंठो को सहला रहा था.रंभा की साँसे धौकनी की तरह चल रही थी.उसके काँपते होंठ देवेन के होंठो से मिलने को बेकरार हो रहे थे & जैसे ही देवेन ने होटो का दबाव बढ़ाया,रंभा ने भी उसे चूम लिया & उसकी आँखो से आँसुओ की 2 बूंदे टपक पड़ी.ये खुशी के आँसू थे.देवने के चूमने गर्मजोशी थी,शिद्दत थी लेकिन उस से भी ज़्यादा 1 एहसास था हिफ़ाज़त का,सुकून का.रंभा ने खुद को पूरी तरह से उसके हवाले कर दिया था.वो उसके होटो को बस अपने होंठो से चूम रहा था.अभी तक ज़ुबान फिराई तक नही थी उसने & रंभा की चूत का बुरा हाल हो गया था.

रंभा ने बेसबरा हो अपने दाए हाथ को थोड़ा आयेज कर देवेन के बाए हाथ को थाम दोनो की उंगलियो को आपस मे फँसा लिया था.देवेन उसके बाए हाथ को उपर दीवार पे सटा अपने दाए हाथ को उसकी कलाई से नीचे सरका रहा था.रंभा की बाँह का अन्द्रुनि हिस्सा बहुत मुलायम था & उसकी छुअन ने देवेन के लंड को बिल्कुल सख़्त कर दिया था.

“हाआअन्न्‍न्णनह..!”,रंभा गुदगूदे एहसास से चिहुनक & किस तोड़ दी.देवेन का हाथ उसकी गुदाज़ बाँह पे फिसलता हुआ बिकुल नीचे बाँह की बगल से आ लगा था & उस कोमल जगह पे उसकी उंगली के फिरने से उसे गुदगुदी महसूस हुई थी & उसने बाँह नीचे कर ली थी.देवेन ने फिर से बाँह को उपर दीवार से सटा दिया & उसकी आँखो मे देखने लगा.उन नज़रो मे उसकी चाहत थी & रंभा को उनमे दिखती उसके इश्क़ की ख्वाहिश ने खुशी से भर दिया.उन नज़रो मे उसके जिस्म की हसरत भी थी & उस एहसास को समझते ही रंभा के चेहरे की लाली & बढ़ गयी & उसकी पलके बंद हो गयी.

देवेन के होंठ उसके गालो को चूम रहे थे.रंभा गर्दन घुमा के अपने गुलाबी गाल उसे पेश कर रही थी & जैसे ही वो नीचे हुआ उसने सर उठा अपनी गोरी गर्दन अपने महबूब की खिदमत मे पेश कर दी.वो हौले-2 मुस्कुराती हुई बस उस रोमानी लम्हे का मज़ा ले रही थी.देवेन के होंठ उसके गले से उसके दाए कंधे पे पहुँचे & वो चूमते हुए अपनी नाक से उसकी वेस्ट & ब्रा के स्ट्रॅप्स को नीचे करने की कोशिश करने लगा.रंभा को फिर से गुदगुदी हुई & उसने कंधा सिकोडा लेकिन देवेन को दूर करने की कोई कोशिश नही की.वो उसके स्ट्रॅप्स को कंधे के किनारे पे कर के वाहा पे चूम रहा था.कुच्छ देर बाद उसके होंठ उसकी गर्दन के नीचे के गड्ढे को चूमते हुए दूसरे कंधे पे पहुँचे.

“आन्न्न्नह..!”,रंभा चिहुनक के बाँह नीचे करने लगी क्यूकी देवेन के होंठ उसकी चिकनी बगल से जा लगे थे.देवने उस जगह के उतने मुलायम होने से हैरान था.वाहा के बाल कितने भी साफ कर लो,वो जगह औरत के बाकी जिस्म की तरह उतनी कोमल नही होती लेकिन रंभा को तो उपरवाले ने कुच्छ ज़्यादा ही फ़ुर्सत मे बनाया था.देवेन ने उसकी बाँह को मज़बूती से दीवार से लगे & अपनी ज़ुबान से उसकी बगल को चखने लगा.रंभा की सांस अटक गयी,ऐसे वाहा पे उसे किसी ने प्यार नही किया था.देवने की आतुर ज़ुबान से उसे गुदगुदी के साथ सिहरन भरा एहसास हो रहा था.उस अनूठे एहसास को उसका जिस्म ज़्यादा नही झेल पाया & देवेन के बाए हाथ की उंगलियो को बहुत ज़ोर से कसते,काँपते हुए आहे भरती रंभा झाड़ गयी.

वो गिर ही जाती अगर देवेन उसकी कमर को जाकड़ उसे बाहो मे थाम ना लेता.उसने भी अपने हाथ उसके कंधो पे रख दिए थे.वो उसके लंड की सख्ती महसूस कर रही थी & वो भी उसके मुलायम जिस्म के आकार को अपने जिस्म से मिलते महसूस कर रहा था.दोनो की नज़रे आपस मे उलझी हुई थी & उनके रास्ते 1 दूसरे का हाल दोनो को मिल रहा था.देवेन ने उसे वैसे ही उठा लिया & लिए-दिए बिस्तर पे लेट गया.उसके जिस्म के भार के नीचे दबी रंभा ने अपनी बाहे उसकी गर्दन पे कस प्यार से उसके बालो मे हाथ फेरा & दोनो के होंठ 1 शिद्दत भरी किस मे जुड़ गये.दोनो 1 दूसरे की ज़ुबानो से खेल रहे थे,उन्हे चूस रहे थे.उनके हाथ 1 दूसरे के चेहरे पे घूम रहे थे अपनी हसरत,अपनी बेकरारी बयान कर रहे थे.दोनो को अब कोई होश नही था सिवाय इसके के की उनकी पसंद के शख्स का जिस्म उनकी बाहो मे है & वो उसे जी भर के प्यार कर सकते हैं.

काफ़ी देर के बाद जब सांस लेने की ज़रूरत महसूस हुई तो दोनो के लब जुदा हुए.दोनो तेज़ी से साँसे लेते हुए 1 दूसरे को देख रहे थे.रंभा ने नशीली आँखो से देखते हुए अपने अरमानो को ज़ाहिर करते हुए देवने के सीने पे हाथ फिराए तो उसने उसके हाथ शर्ट की बटन पे रख दिए.रंभा को उसकी गर्म निगाहो से शर्म आ रही थी.उसने मुँह फेर लिया & बटन खोलने लगी.आख़िरी बटन खोल उसने अपनी मा के प्रेमी-जोकि अब उसका प्रेमी बन चुका था,को देखा तो वो उठा & अपनी कमीज़ निकाल दी.उसका चौड़ा सीना ज़्यादातर सफेद & कुच्छ काले घने बालो से पूरा ढँका हुआ था.

रंभा का दिल खुश हो गया & उसके हाथ देवेन के सीने पे चले गये.उसकी आँखो मे उसके जिस्म की तारीफ उतर आई थी & वासना के डोरे भी.सीने के बालो को हसरत से छुते हुए उसने उपर देखा तो देवेन को खुद को देख मुस्कुराते पाया & शर्मा के उसने हाथ खीच लिए.देवेन हंस दिया & उसके चेहरे पे उंगली फिराने लगा.रंभा ने आँखे बंद कर चेहरा दाई तरफ घुमा लिया....आज उसका इंतेज़ार ख़त्म हुआ!..सुमित्रा उसके साथ थी..& वो उसे अपना बनाने वाला था!देवेन की उंगली उसके चेहरे से उतर के उसकी गर्दन से होते हुए उसके क्लीवेज के पास आ के रुकी.रंभा धड़कते दिल से सीने के उभारो को उपर-नीचे करते उसे देखने लगी.

देवेन की उंगली 1 पल को वाहा रुक उसके बाए कंधे पे गयी & उसकी वेस्ट के स्ट्रॅप को नीचे सरका दिया.रंभा ने भी कंधे सिकोड उसे उतरने की इजाज़त दे दी.देवेन ने उसके दूसरे कंधे से भी स्ट्रॅप उतार वेस्ट को उसके सीने के नीचे सरका दिया.काले ब्रा मे क़ैद रंभा की चूचियाँ उसकी सांसो की बेकरारी की कहानी कहती उपर-नीचे हो रही थी.देवेन का हाथ उतरी वेस्ट के नीचे उसके पेट पे रखा था & वाहा धीरे-2 सहला रहा था.दोनो 1 तक 1 दूसरे को देखे जा रहे थे.

वो फिर झुका & उसे चूमने लगा.उसने रंभा के चेहरे को अपनी किस्सस से ढँक दिया.वो उसके बालो को सहलाती उसके होंठो का लुत्फ़ उठा रही थी.देवेन उसके सीने पे आया मगर चूमा नही.रंभा अब तड़प रही थी उसके होंठो और हाथो को वाहा महसूस करने के लिए.उसकी चूत बहुत ज़्यादा कसमसा रही थी.देवेन उसके सीने के उभारो को देखता हुआ नीचे आया & उसकी वेस्ट उठाके उसके पेट को चूमने लगा.गोल पेट पे उसके तपते लब महसूस करते रंभा की आहे निकलनी शुरू हो गयी.

देवेन के होंठो मे गर्मजोशी थी,जोश था लेकिन वो ज़रा भी बेसब्र नही था.उसके पास मानो वक़्त ही वक़्त था रंभा को प्यार करने के लिए & खुद के झड़ने की उसे जैसे कोई चिंता ही नही थी!.रंभा की नाभि मे दाए हाथ की सबसे बड़ी,बीच की उंगली घुसा के उसे कुरेदते हुए जब उसने उसमे हौले से जीभ फिराई तो रंभा ने बदन को कमान की तरह मोड़ लिया.उसकी नाभि की गहराई नाप के देवेन उसके पेट को & चूमने के बाद देवेन ने & नीचे का रुख़ किया.

उसने जीन्स के उपर से ही रंभा की जाँघो को चूमा.कसी जीन्स & पॅंटी के अंदर उसकी चूत अब बिल्कुल बावली हो गयी थी.देवेन उसके पैरो तक पहुँच गया था & अब उसकी उंगलिया चूस रहा था.उसने उसके तलवे चूमे & फिर से उसकी टांगो के रास्ते उसकी जाँघो तक आ गया & उसकी चूत के उपर आया..क्या कर रहा है वो?..ये सुमित्रा की बेटी है..उसके साथ ये सब..उसका दिल उसे अचानक रोकने लगा था..तो क्या हुआ?..वो भी चाहती है तुम्हे..आगे बढ़ो..बुझाओ अपनी & उसकी प्यास..

रंभा शायद उसकी उलझन समझ गयी थी.देवेन का दाया हाथ उसके पेट पे था & वो उसके उपर झुका कशमकश मे पड़ा था.उसने अपना बया हाथ उसके पेट पे रखे हाथ पे रखा & उसे उठाके अपनी जींस के ज़िप पे रख दिया.देवेन ने गर्दन घुमा उसे देखा तो रंभा ने हां मे सर हिलाया.देवेन उसे देखे जा रहा था.उसकी आँखो मे इजाज़त दिख रही थी उसे..हसरत भी..जोश भी..खुमारी भी..वो सारे एहसास जो उसके दिल मे भी घूमड़ रहे थे.रंभा ने उसके ज़िप पे रखे हाथ को दबाया तो उसके हाथ ने खुद बा खुद ज़िप नीचे खींच दी.

देवेन ने चौंक के ज़िप की तरफ देखा & फिर रंभा की तरफ.वो मुस्कुरा रही थी.उस मुस्कान मे बस खुशी थी,केवल खुशी.देवेन के होंठो पे भी वैसी ही मुस्कान खेलने लगी & उसके हाथ रंभा की जीन्स के वेयैस्टबंड मे फँस गये.उसने बहुत प्यार से जीन्स को नीचे खींचा.रंभा ने कमर उपर उचका दी & वो उसकी कसी जीन्स को धीरे-2 नीचे करने लगा.वो उसके पैरो के पास गया & जीन्स को पकड़ के नीचे किया.उसके कपड़े उतरने मे कोई जल्दबाज़ी नही थी.रंभा को पता था की वो बहुत जोश मे है लेकिन उस वक़्त भी उसे उसका ख़याल था & वो हर काम उसके आराम & मज़े को मद्देनज़र रख के कर रहा था.

देवेन ने जीन्स पूरी खींच दी & काली ब्रा & पॅंटी मे बिस्तर पे लेटी लंबी-2 साँसे लेती रंभा को निहारने लगा.रंभा को शर्म आ रही थी..वो पहली बार उसके सामने इस हालत मे थी..नही..ग़लत थी..वो क्लेवर्त मे विजयंत के साथ उसने उसे उसके पूरे नंगे शबाब मे देखा था..हया ने अब तो उसे पूरा आ घेरा & उसने आँखे बंद कर ली.कुच्छ देर तक जब उसने देवेन के हाथो को अपने जिस्म पे महसूस नही किया तो उसने अपनी हया को समझा-बुझा के पॅल्को की चिलमन को ज़रा सा हटाया & उसे वो अपनी पॅंट उतारता दिखा.काले अंडरवेर मे क़ैद उसका लंड बहुत बड़ा था,ये उसे देखते ही वो समझ गयी थी.उसने थूक गटका..उसका हलक सुख गया था आने वाले मज़े के ख़याल से!

देवेन बिस्तर पे आ गया & उसके कंधे पकड़ उसे उठाया.रंभा शर्म से दोहरी हुए जा रही थी..क्या वो उसकी मा को भी ऐसे ही प्यार करता?..इसी तरह बाहो मे भरता?..उसका दिल फिर से गुस्ताख बातें सोचने लगा था.देवेन बिस्तर पे बैठ गया & उसे अपनी टाँगो के बीच अपने पहलू मे ले लिया.रंभा अब अपना दाया कंधा उसके सीने से लगाए उसके बाए कंधे पे सर रखे उसकी बाहो मे थी.

देवेन ने उसे बाई बाँह के सहारे मे घेरा हुआ था & दाए हाथ से उसके हसीन चेहरे को ठुड्डी से उठा रहा था.रंभा को अपनी गंद के बगल मे उसका सख़्त लंड चुभता महसूस हो रहा था.उसकी चूत अब & कसमसने लगी थी.देवेन झुका & रंभा ने खुले होंठो के साथ उसके होंठो का इस्तेक्बाल किया.दोनो पूरी शिद्दत एक साथ 1 दूसरे को चूमने लगे.रंभा के हाथ उसके सर के बालो से लेके कंधो,पीठ & सीने पे घूम रहे थे.देवेन भी उसकी पीठ पे अपने सख़्त हाथ फेरता उसकी कमर को हौले-2 मसलता उसे चूम रहा था.

देवेन मज़बूत शरीर का मालिक था.जैल मे की मशक्कत ने उसके जिस्म को तोड़ा नही था बल्कि फौलाद सा सख़्त बना दिया था.उसका सीना चौड़ा & बाज़ू बड़े मज़बूत थे.जंघे भी पेड़ो के तनो जैसी लग रही थी.रंभा उसकी गिरफ़्त मे महफूज़ महसूस कर रही थी.वो अपनी सारी परेशानियाँ,सारी उलझने भूल गयी थी.विजयंत की बाहो मे भी उसे ये एहसास मिलता था लेकिन देवेन की बाहो मे इस एहसास की तासीर अलग किस्म की थी.

देवेन के बाज़ू जैसे उसे अपनी पनाह मे ले उस से ये वादा कर रहे थे कि वो हमेशा उसकी हिफ़ाज़त करेंगे & यू ही उम्र भर थामे रहेंगे..क्या वजह थी इस बात की?..क्या ये कि वो उसकी मा से सच्चा प्रेम करता था या ये कि उसे पता था की विजयंत कभी उसका पूरी तरह से नही हो सकता था & अब तो खैर वो 1 ख्वाब ही बन गया था!..जो भी हो उसे बहुत सुकून मिल रहा था उसकी बाहो मे & उसका दिल कर रहा था की काश वक़्त यही थम जाए & दोनो क़यामत के दिन तक बस यू ही 1 दूसरे से लिपटे जिस्मो के नशे मे खोए रहें.

दोनो अंजाने मे 1 दूसरे की नकल कर रहे थे.देवेन उसकी मखमली पीठ को सहलाता तो वो भी उसकी सख़्त पीठ को अपने हाथो मे भींचने लगती.रंभा के हाथ उसके सीने के बालो मे घुस जाते तो वो भी उसके क्लीवेज पे बड़े हल्के-2 अपनी दाई हथेली चलाने लगता.उसके हाथ रंभा की मखमली जाँघो पे फिसले तो रंभा ने भी उसकी बालो भरी अन्द्रुनि जाँघो को सहलाया & जब रंभा ने उसके गले मे बाहें डाल उसे ज़ोर से चूमा तो उसने भी जवाब मे बाए हाथ से उसके जिस्म को खुद से पूरा सताते हुए दाए से उसकी ठुड्डी को पकड़ अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे घुसा दी.

"उउन्न्ञनननगगगगगगगघह......!",रंभा ने किस तोड़ी & उसके कंधो पे सर रख वाहा पे चूमते हुए च्चटपटाने लगी.वो फिर से झाड़ गयी थी.देवेन के हाथ उसकी पीठ सहलाते हुए उसे संभालने लगा.थोड़ी देर बाद रंभा ने सर कंधे से थोड़ा उपर करते हुए देवेन के बाए गाल को चूमा तो देवेन ने उसकी पीठ पे दोनो हाथ ले जाके उसकी ब्रा के हुक्स को खोल दिया.लाज की 1 नयी लहर ने रंभा को आ घेरा..वो उसकी नंगी चूचियाँ देखने वाला था..क्या उसे वो खूबसूरत लगेंगी?..क्या पसंद करेगा इन्हे वो?..वो हैरत मे पड़ गयी..आज तक उसके दिल मे कभी भी ऐसा ख़याल नही आया था बल्कि वो तो ये मान के ही चलती थी की उसके जिस्म को नापसंद करने की हिमाकत तो कोई मर्द कर ही नही सकता!

देवेन ने उसके ब्रा को उसकी बाहो से बाहर खींचा & गुलाबी निपल्स से सजी रंभा की बड़ी-2,कसी चूचियाँ उसकी आँखो के सामने छल्छला उठी.देवेन का मुँह खुला खुला रह गया.उसने क्लेवर्त मे उस रात उन्हे इतनी गौर से नही देखा था..बला की खूबसूरत थी वो!..बिल्कुल गोल,कसी & निपल्स का रंग कितना दिलकश था!..कैसे सख़्त हो रहे थे उसके निपल्स..दिल की धड़कनो के साथ उपर-नीचे होता हुआ उसका सीना इस वक़्त & जानलेवा लग रहा था.

देवेन का दाया हाथ काँपते हुए आगे बढ़ा.उसे लग रहा था कि उसके हाथ उस शफ्फाक़ गोरी हुस्न परी के बदन को मैला कर देंगे & वो झिझक रहा था.उसने रंभा की निगाहो मे देखा & उसने सर उसके कंधे से थोड़ा सा उठाके उसके लब चूम लिए.देवेन ने अपना कांपता हाथ आगे बढ़ाया & बहुत हल्के से रंभा की बाई छाती पे रखा.

उस पल दोनो ही के जिस्मो मे बिजली दौड़ गयी.रंभा ने सर पीछे झटकते हुए आह भरी.उसका दिल कर रहा था कि उसका आशिक़ अब उसके उन उभारो को अपने सख़्त हाथो तले रौंद डाले..कुचल दे उन फूलो को & उसके बेचैन दिल को करार पहुचाए!..देवेन उसके सीने को देखते हुए बहुत हल्के हाथो से उसकी बाई चूची को सहला रहा था मानो यकीन करना चाह रहा हो की उसके हाथ उस परी के जिस्म को मैला नही कर रहे.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.......

JAAL paart--54

gataank se aage......

Ungli button se upar gayi fir anguthe ke sath mil kar botton ko khol diya.rambha ne dono honth danto me daba liye.deven aage jhuka & us khule button ke peechhe ke hisse ko bahut halke se chum liya.rambha ne aah bharte hue sar peechhe kar liya.devene ne uske baye hath me bandi ghadi ki chain me apni ungli phansayi & khada hote hue usi chain se rambha ke hath ko uthane laga.ab vo rambha ke samne khada tha & uska hath usne upar le jake uske sar ke upar deewar se laga diya tha.vo rambha ke chehre ko nihar raha tha..sumitra uske kareeb thi..uske samne thi..vahi larajte honth..vahi dilkash surat..vahi sharmohaya & vahi masti!

Uski nigaho ki tapish ko jhelna rambha ke naino ke bas me nahi tha.usne aankhe band kar li.pal-2 deven ki garm sanse uske chehre ke & karib aa rahi thi.uske honth khud ba khud khul gaye the.agel hi pal uske jism me sihran daud gayi.devne ke tapte honth uske narm labo se aa lage the.vo bas apne labo se uske hotho ko sehla raha tha.rambha ki sanse dhaukni ki tarah chal rahi thi.uske kanpte honth deven ke hotho se silne ko bekarar ho rahe the & jaise hi deven ne hotho ka dabav badhaya,rambha ne bhi use chum liya & uski aankho se aansuo ki 2 boonde tapak padi.ye khushi ke aansu the.devne ke chumne garmjoshi thi,shiddat thi lekin us se bhi zyada 1 ehsas tha hifazat ka,sukun ka.rambha ne khud ko puri tarah se uske hawale kar diya tha.vo uske hotho ko bas apne hotho se chum raha tha.abhi tak zuban firayi tak nahi thi usne & rambha ki chut ka bura haal ho gaya tha.

Rambha ne besabra ho apne daye hath ko thoda aage kar deven ke baye hath ko tham dono ki ungliyo ko aapas me phansa liya tha.deven uske baye hath ko upar deewar pe sata apne daye hath ko uski kalai se neeche sarka raha tha.rambha ki banh ka andruni hissa bahut mulayam tha & uski chhuan ne deven ke lund ko bilkul sakht kar diya tha.

“haaaaannnnnhhhhh..!”,rambha gudgude ehsas se chihunk & kiss tod dii.devne ka hath uski gudaz banh pe fisalta hua bikul neeche banh ki bagal se aa laga tha & us komal jagah pe uski ungli ke firne se use gudgudi mehsus hui thi & usne banh neeche kar li thi.deven ne fir se banh ko upar deewar se sata diya & uski aankho me dekhne laga.un nazro me uski chahat thi & rambha ko unme dikhti uske ishq ki khwahish ne khushi se bhar diya.un nazro me uske jism ki hasrat bhi thi & us ehsas ko samajhte hi rambha ke chehre ki lali & badh gayi & uski palke band ho gayi.

Deven ke honth uske galo ko chum rahe the.rambha gardan ghuma ke apne gulabi gaal use pesh kar rahi thi & jaise hi vo neeche hua usne sar utha apni gori gardan apne mehboob ki khidmat me pesh kar di.vo haule-2 muskurati hui bas us romani lamhe ka maza le rahi thi.deven ke honth uske gale se uske daye kandhe pe pahunche & vo chumte hue apni naak se uski vest & bra ke straps ko neeche karne ki koshish karne laga.rambha ko fir se gudgudi huii & usne kandha sikoda lekin deven ko door karne ki koi koshish nahi ki.vo uske straps ko kandhe ke kinare pe kar ke vaha pe chum raha tha.kuchh der baad uske honth uski gardan ke neeche ke gaddhe ko chumte hue dusre kandhe pe pahunche.

“aannnnhhhhhh..!”,rambha chihunk ke banh neeche karne lagi kyuki deven ke honth uski chikni bagal se ja lage the.devne us jagah ke utne mulayam hone se hairan tha.vaha ke baal kitne bhi saaf kaar lo,vo jagah aurat ke baki jism ki tarah utni komal nahi hoti lekin rambha ko to uparwale ne kuchh zyada hi fursat me banaya tha.deven ne uski banh ko mazbuti se deewar se lagay & apni zuban se uski bagal ko chakhne laga.rambha ki sans atak gayi,aise vaha pe use kisi ne pyar nahi kiya tha.devne ki aatur zuban se use gudgudi ke sath sihran bhara ehsas ho raha tha.us anuthe ehsas ko uska jism zyada nahi jhel paya & deven ke baye hath ki ungliyo ko bahut zor se kaste,kanpte hue aahe bharti rambha jhad gayi.

Vo gir hi jati agar deven uski kamar ko jakad use baaho me tham na leta.usne bhi apne hath uske kandho pe rakh diye the.vo uske lund ki sakhti mehsus kar rahi thi & vo bhi uske mulayam jism ke aakar ko apne jism se milte mehsus kar raha tha.dono ki nazre aapas me uljhi hui thi & unke raste 1 dusre ka haal dono ko mil raha tha.deven ne use vaise hi utha liya & liye-diye bistar pe let gaya.uske jism ke bhaar ke neeche dabi rambha ne apni baahe uski gardan pe kas pyar se uske baalo me hath fera & dono ke honth 1 shiddat bhari kiss me jud gaye.dono 1 dusre ki zubano se khel rahe the,unhe chus rahe the.unke hath 1 dusre ke chehre pe ghum rahe the apni hasrat,apni bekarari bayan kar rahe the.dono ko ab koi hosh nahi tha siway iske ke ki unki pasand ke shakhs ka jism unki baaho me hai & vo use ji bhar ke pyar kar sakte hain.

Kafi der ke baad jab sans lene ki zarurat mehsus hui to dono ke lab juda hue.dono tezi se sanse lete hue 1 dusre ko dekh rahe the.Rambha ne nashili aankho se dekhte hue apne armano ko zahir karte hue Devne ke seene pe hath firaye to usne uske hath shirt ki button pe rakh diye.rambha ko uski garm nigaho se sharm aa rahi thi.usne munh fer liya & button kholne lagi.aakhiri button khol usne apni maa ke premi-joki ab uska premi ban chuka tha,ko dekha to vo utha & apni kamiz nikal di.uska chauda seena zyadatar safed & kuchh kale ghane baalo se pura dhanka hua tha.

rambha ka dil khush ho gaya & uske hath devben ke seene pe chale gaye.uski aankho me uske jism ki tarif utar aayi thi & vasna ke dore bhi.seene ke baalo ko hasrat se chhute hue usne upar dekha to deven ko khud ko dekh muskurate paya & sharma ke usne hath khicnh liye.deven hans diya & uske chehre pe ungli firane laga.rambha ne aankhe band kar chehra dayi taraf ghuma liya....aaj uska intezar khatm hua!..sumitra uske sath thi..& vo use apna banane wala tha!deven ki ungli uske chehre se utar ke uski gardan se hote hue uske cleavage ke paas aa ke ruki.rambha dhadakte dil se seene ke ubharo ko upar-neeche karte use dekhne lagi.

deven ki ungli 1 pal ko vaha ruk uske baye kandhe pe gayi & uski vest ke strap ko neeche sarka diya.rambha ne bhi kandhe sikod use utarne ki ijazat de di.deven ne uske dusre kandhe se bhi strap utar vest ko uske seene ke neeche sarka diya.kale bra me qaid rambha ki chhatiyan uski sanso ki bekarari ki kahani kehti upar-neeche ho rahi thi.deven ka hath utri vest ke neeche uske pet pe rakha tha & vaha dhire-2 sehla raha tha.dono 1 tak 1 dusre ko dekhe ja rahe the.

vo fir jhuka & use chumne laga.usne rambha ke chehre ko apni kisses se dhank diya.vo uske baalo ko sehlati uske hotho ka lutf utha rahi thi.deven uske seene pe aaya magar chuma nahi.rambha ab tadap rahi thi uske hotho & hatho ko vaha mehsus karne ke liye.uski chut bahut zyada kasmasa rahi thi.deven uske seene ke ubharo ko dekhta hua neeche aaya & uski vest uthake uske pet ko chumne laga.gol pet pe uske tapte lab mehsus karte rambha ki aahe nikalni shuru ho gayi.

deven ke hotho me garmjoshi thi,josh tha lekin vo zara bhi besabr nahi tha.uske paas mano waqt hi waqt tha rambha ko pyar karne ke liye & khud ke jhadne ki use jaise koi chinta hi nahi thi!.rambha ki nabhi me daye hath ki sabse badi,beech ki ungli ghusa ke use kuredte hue jab usne usme haule se jibh firayi to rambha ne badan ko kaman ki tarah mod liya.uski nabhi ki gehrai naap ke deven uske pet ko & chumne ke baad deven ne & neeche ka rukh kiya.

usne jeans ke upar se hi rambha ki jangho ko chuma.kasi jeans & panty ke andar uski chut ab bilkul bawli ho gayi thi.deven uske pairo tak pahunch gaya tha & ab uski ungliya chus raha tha.usne uske talwe chume & fir se uski tango ke raste uski jangho tak aa gaya & uski chut ke upar aaya..kya kar raha hai vo?..ye Sumitra ki beti hai..uske sath ye sab..uska dil use achanak rokne laga tha..to kya hua?..vo bhi chahti hai tumhe..aage badho..bujhao apni & uski pyas..

rambha shayad uski uljhan samajh gayi thi.deven ka daya hath uske pet pe tha & vo uske upar jhuka kashmakash me pada tha.usne apna baya hath uske pet pe rakhe hath pe rakha & use uthake apni jenas ke zip pe rakh diya.deven ne gardan ghuma use dekha to rambha ne haan me sar hilaya.deven use dekhe ja raha tha.uski aankho me ijazat dikh rahi thi use..hasrat bhi..josh bhi..khumari bhi..vo sare ehsas jo uske dil me bhi ghumad rahe the.rambha ne uske zip pe rakhe hath ko dabaya to uske hath ne khud ba khud zip neeche khinch di.

deven ne chaunk ke zip ki taraf dekha & fir rambha ki taraf.vo muskura rahi thi.us muskan me bas khushi thi,keval khushi.deven ke hotho pe bhi vaisi hi muskan khelne lagi & uske hath rambha ki jeans ke waistband me phans gaye.usne bahut pyar se jeans ko neeche khincha.rambha ne kamar upar uchka di & vo uski kasi jeans ko dhire-2 neeche karne laga.vo uske pairo ke paas gaya & jeans ko pakad ke neeche kiya.uske akpde utarne me koi jaldbazi nahi thi.rambha ko pata tha ki vo bahut josh me hai lekin us waqt bhi use uska khayal tha & vo har kaam uske aaram & maze ko maddenazar rakh ke kar raha tha.

deven ne jeans puri khinch di & kali bra & panty me bistar pe leti lambi-2 sanse leti rambha ko niharne laga.rambha ko sharm aa rahi thi..vo pehli baar uske samne is halat me thi..nahi..galat thi..vo Clayworth me Vijayant ke sath usne use uske pure nange shabab me dekha tha..haya ne ab to use pura aa ghera & usne aankhe band kar li.kuchh der tak jab usne deven ke hatho ko apne jism pe mehsus nahi kiya to usne apni haya ko samjha-bujha ke palko ki chilman ko zara sa hataya & use vo apni pant utarta dikha.kale underwear me qaid uska lund bahut bada tha,ye use dekhte hi vo samajh gayi thi.usne thuk gatka..uska halak sukh gaya tha aane vale maze ke khayal se!

deven bistar pe aa gaya & uske kandhe pakad use uthaya.rambha sharm se dohri hue ja rahi thi..kya vo uski maa ko bhi aise hi pyar karta?..isi tarah baaho me bharta?..uska dil fir se gustakh baaten sochne laga tha.deven bistar pe baith gaya & use apni tango ke beech apne pehlu me le liya.rambha ab apna daya kandha uske seene se lagaye uske baye kandhe pe sar rakhe uski baaho me thi.

Deven ne use baayi banh ke sahare me ghera hua tha & daye hath se uske haseen chehre ko thuddi se utha raha tha.Rambha ko apni gand ke bagal me uska sakht lund chubhta mehsus ho raha tha.uski chut ab & kasmasane lagi thi.deven jhuka & rambha ne khule hotho ke sath uske hotho ka istekbal kiya.dono puri shiddat ek sath 1 dusre ko chumne lage.rambha ke hath uske sar ke baalo se leke kandho,pith & seene pe ghum rahe the.deven bhi uski pith pe apne sakht hath ferta uski kamar ko haule-2 masalta use chum raha tha.

deven mazbut sharir ka malik tha.jail me ki mashakkat ne uske jism ko toda nahi tha balki faulad sa sakht bana diya tha.uska seena chauda & bazu bade mazbut the.janghe bhi pedo ke tano jaisi lag rahi thi.rambha uski giraft mne mehfuz mehsus kar rahi thi.vo apni sari pareshaniyan,sari uljhane bhul gayi thi.Vijayant ki baaho me bhi use ye ehsas milta tha lekin deven ki baaho me is ehsas ki taseer alag kism ki thi.

deven ke bazu jaise use apni panah me le us se ye vada kar rahe the ki vo humesha uski hifazat karenge & yhu hi umra bhar thame rahenge..kya vajah thi is baat ki?..kya ye ki vo uski maa se sachcha prem karta tha ya ye ki use pata tha ki vijayant kabhi uska puri tarah se nahi ho sakta tha & ab to khair vo 1 khwab hi ban gaya tha!..jo bhi ho use bahut sukun mil raha tha uski baaho me & uska dil kar raha tha ki kash waqt yehi tham jaye & dono qayamat ke din tak bas yu hi 1 dusre se lipte jismo ke nashe me khoye rahen.

dono anjane me 1 dusre ki nakal kar rahe the.deven uski makhmali pith ko sehlata to vo bhi uski sakht pith ko apne hatho me bhinchne lagti.rambha ke hath uske seene ke balo me ghus jate to vo bhi uske cleavage pe bade halke-2 apni dayi hatheli chalane lagta.uske hath rambha ki makhmali jangho pe fisle to rambha ne bhi uski baalo bhari andruni jangho ko sehlaya & jab rambha ne uske gale me baahen daal use zor se chuma to usne bhi jawab me baye hath se uske jism ko khud se pura satate hue daye se uski thuddi ko pakad apni zuban uske munh me ghusa di.

"uunnnnnngggggggghhhhhhhh......!",rambha ne kiss todi & uske akndhe pe sar rakh vaha pe chumte hue chhatpatane lagi.vo fir se jhad gayi thi.deven ke hath uski pith sehlate hue use sambhalne laga.thodi der baad rambha ne sar kandhe se thoda upar karte hue deven ke baye gaal ko chuma to deven ne uski pith pe dono hath le jake uski bra ke hooks ko khol diya.laaj ki 1 nayi lehar ne rambha ko aa ghera..vo uski nangi chhatiyan dekhne vala tha..kya use vo khubsurat lagengi?..kya pasand karega inhe vo?..vo hairat me pad gayi..aaj tak uske dil me kabhi bhi aisa khayal nahi aaya tha balki vo to ye maan ke hi chalti thi ki uske jism ko napasand karne ki himakat to koi mard kar hi nahi sakta!

deven ne uske bra ko uski baaho se bahar khincha & gulabi nipples se saji ram,bha ki badi-2,kasi chhatiyan uski aankho ke samne chhalchhala uthi.deven ka munh khula khula reh gaya.usne Clayworth me us raat unhe itni gaur se nahide kha tha..bala ki khubsurat thi vo!..bilkul gol,kasi & nipples ka rang kitna dilkash tha!..kaise sakht ho rahe the uske nipples..dil ki dhadkano ke sath upar-neeche hota hua uska seena is waqt & jaanlewa lag raha tha.

deven ka daya hath kanpte hue aage badha.use lag raha tha ki uske hath us shaffaq gori husn pari ke badan ko maila kar denge & vo jhijhak raha tha.usne rambha ki nigaho me dekha & usne sar uske kandhe se thoda sa uthake uske lab chum liye.deven ne apna kanpta hath aage badhaya & bahut halke se rambha ki bayi chhati pe rakha.

us pal dono hi ke jismo me bijli daud gayi.rambha ne sar peechhe jhatakte hue aah bhari.uska dil kar raha tha ki uska aashiq ab uske un ubharo ko apnme sakht hatho tale raund dale..kuchal de un phoolo ko & uske bechain dil ko karar pahuchaye!..deven uske seene ko dekhte hue bahut halke hatho se uski bayi chhati ko sehla raha tha mano yakin karna chah raha ho ki uske hath us apri ke jism ko maila nahi kar rahe.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah.......

 
जाल पार्ट--55

गतान्क से आगे......

कुच्छ पलो बाद जब उसे ये भरोसा हो गया तो वो अपनी उंगली को उसकी चूची पे दायरे की शक्ल मे घुमाने लगा.उंगली चूची की पूरी गोलाई पे घूमते हुए उसके निपल की ओर बढ़ रही थी & निपल पे पहुँचते ही उसने उसे ऐसे दबाया जैसे कोई बटन दबा रही हो.रंभा चिहुनकि और अपना सीना और आगे कर दिया.देवेन अब उसकी चूचियो को सख़्त हाथ से दबाने लगा.रंभा उसकी गोद मे कसमसाते हुए आहे भरने लगी.

देवेन ने उसके सीने के उभारो को जम के मसला.रंभा के चेहरे पे शिकन पड़ गयी थी.उसे बहुत मज़ा आ रहा था.उसके जिस्म मे दर्द उठने लगा था,मीठा दर्द & उसकी चूत तो रस की धार बहा ही रही थी.वो अपने होंठो को अपने ही दन्तो से काट रही थी.देवेन तो जैसे उसे भूल ही गया था और उसे बस उसकी चूचियाँ ही दिख रही थी.वो उन्हे देखते हुए उन्हे दबा रहा था.रंभा ने उसका चेहरा पकड़ के उपर किया तो उसने उसे चूम लिया.बहुत देर तक वो उसकी चूचियाँ दबाते हुए,उसके निपल्स को रगड़ते हुए उसे चूमता रहा.

उसके बाद वो नीचे हुआ & उन मस्ती भरे उभारो को अपने मुँह मे भर लिया.उसकी बाई बाँह पे टिकी रंभा पीछे झुक ज़ोर-2 से आहें भरने लगी.देवेन की आतुर ज़ुबान उसकी चूचियो को मुँह मे भर चाट रही थी & वो अपनी भारी जंघे आपस मे रगड़ते हुए अपनी चूत को समझा रही थी.रंभा के दिल मे भी अपने प्रेमी के जिस्म को चूमने की ख्वाहिश हुई & वो आगे हुई & अपने सीने से देवेन का सर उपर उठाया & झुक के वैसे ही उसके सीने को चूमने लगी जैसे वो उसके सीने को चूम रहा था.

वो मस्त आवाज़ें निकालते हुए उसके सीने के घने बालो मे अपनी नाक घुसा के रगड़ रही थी & उसके निपल्स को चूस रही थी.देवेन जैल से निकलने के बाद कयि औरतो के साथ हुम्बिस्तर हुआ था.कुच्छ पेशेवर थी & कुच्छ वो थी जिन्हे उस से रिश्ता जोड़ने की उम्मीद थी.उन सभी औरतो मे से किसी ने आज तक उसके निपल्स के साथ ऐसे खिलवाड़ नही किया था.वो आहे भरते हुए उसकी पीठ पे हाथ फिराने लगा .रंभा उसके सीने को चूमते हुए थोड़ा नीचे गयी & फिर उपर आ उसे बाहो मे भर उसके सीने मे मुँह च्छूपा लिया.

उसने उसकी ठुड्डी पकड़ चेहरा उपर किया & उसे चूमने लगा और चूमते हुए उसकी मखमली जाँघो के अन्द्रुनि हिस्सो को सहलाने लगा.रंभा ने जंघे भींच उसके हाथ को क़ैद कर लिया लेकिन फिर भी वो उसकी जाँघो को सहलाता रहा.रंभा अब जोश मे पागल हो गयी थी.उसने बेचैनी से अपनी कमर हिलाई तो देवेन ने उसकी हालत समझते हुए उसे बिस्तर पे लिटा दिया & उसकी पॅंटी खिचने लगा.पॅंटी उसकी चूत से चिपकी हुई थी & जब वो उसके जिस्म से अलग ही तो देवेन उसे सूंघने से खुद को रोक नही पाया.

अब वो उसके सामने बिल्कुल नंगी पड़ी थी & उसका हुस्न अपने पूरे शबाब मे उसके सामने था.रंभा को बहुत शर्म आ रही थी.वो चाह रही थी कि अपने जिस्म को ढँक ले मगर उसकी ये भी ख्वाहिश थी कि देवेन उसके जिस्म को भरपूर प्यार करे.अब ये उलझन तो 1 ही सूरत मे सुलझ सकती थी,अगर वो देवेन के जिस्म को खुद पे ओढ़ ले तो.

"आन्न्‍नणणनह..!",वो ख्यालो मे खोई थी कि देवेन उसकी जाँघो को चूमने लगा था.उसने तड़प के करवट ले ली & देवेन उसकी चौड़ी गंद को चूमने लगा.उसके सख़्त हाथ उसकी गंद को दबाने लगे & वो उसकी कमर के मांसल हिस्से को चूमने लगा.रंभा अब मस्ती मे बिल्कुल पागल हो चुकी थी.बिस्तर की चादर को ज़ोर से भींचते हुए वो आहे भरे जा रही थी.देवेन ने उसे सीधा किया & उसकी जंघे फैला दी.उसने उन्हे फिर से बंद कर लिया लेकिन उसने उसकी अनसुनी करते हुए उन्हे फैलाया & उसकी चूत पे झुक गया.

"हे भगवांनननननणणन्..हाईईईईईईईईई.......!",रंभा चीखी & बिस्तर पे छटपटाने लगी. उसका प्रेमी उसकी चूत चाट रहा था और उसकी ज़ुबान अपने दाने पे महसूस करते ही वो झाड़ गयी थी.उसने देवेन के सर को अपनी मोटी जाँघो मे दबा दिया तो देवेन ने जीभ उसकी चूत मे काफ़ी अंदर तक उतार दी.उसके हाथ उपर आए और अपनी महबूबा की चूचियो पे कस गये.रंभा कभी बेचैनी मे उसके सर के बाल नोचती तो कभी चूचियाँ मसल्ते उसके हाथो पे अपने हाथ दबाती.ना जाने कितनी देर तक वो उसकी चूत से बहते रस को चाटता रहा और वो झड़ती रही.देवेन ने उस जैसी हसीन लड़की नही देखी थी.वो उसे खास लगने लगी थी-शायद सुमित्रा की वजह से.

वो उसके जिस्म को प्यार कर उसे दुनिया की सारी खुशियो से वाकिफ़ कराना चाहता था.उसकी नाज़ुक,गुलाबी,कसी चूत देख उसका दिल खुशी और जोश से भर गया था & उसने उसे जी भर के चटा,चूमा & चूसा था.अपनी उंगली उसमे घुसा उसने उसकी कसावट महसूस की थी और उसका लंड उस एहसास से और सख़्त हो गया था.

रंभा ने नशे मे बोझल पॅल्को को थोड़ा सा खोला तो देखा कि देवेन अपना अंडरवेर उतरने ही वाला है.ठीक उसी वक़्त उसके दिल ने कहा कि उसका लंड विजयंत के लंड जैसा ही होगा & जब अंडरवेर नीचे सरका तो सच मे सामने 9.5 इंच का लंड तना खड़ा था.रंभा ने उसे देखा & अपने नीचे के होंठ को धीरे से काटा.देवेन का दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था..ये क्या हो रहा था उसे?..ये तो वोही एहसास था जो उसे सुमित्रा के करीब आने पे होता था..मगर सुमित्रा को कभी उसने चोदा नही था..फिर आज क्यू वही एहसास उसके दिल मे उमड़ रहा था?

"आन्न्‍न्णनह..!",उसने रंभा की जंघे फैलाई & अपने लंड को हाथ मे थाम उसकी चूत के दाने पे हल्के से मारा.रंभा जैसे दर्द से च्चटपताई.लंड की मार उसे जोश से पागल कर रही थी.अभी तक आहो के सिवा दोनो कुच्छ नही बोले थे & इस वक़्त भी रंभा ने बस कतर निगाहो से अपने आशिक़ को देखा मानो मिन्नत कर रही हो कि और ना तडपाए और दोनो जिस्मो की दूरी को अब हमेशा-2 के लिए मिटा दे.देवेन ने उसकी आँखो को पढ़ लिया & इस बार लंड को उसकी गीली चूत की दरार पे रख आगे झुका.

"आआहह..!"

"ओईईईईईईईईईईईईईईईईई....माआआआआआआआअ..!",दोनो प्रेमी कराह,देवेन उसकी चूत के बेहद कसे होने की वजह से & रंभा उसके लंड की लूंबाई & मोटाई से.देवेन का लंड विजयंत से मोटा था & इस वक़्त अंदर जाते हुए वो रंभा की चूत को बुरी तरह फैला रहा था.रंभा को वही मस्ताना एहसास हुआ जो विजयंत के साथ होता था बल्कि उस से भी कुच्छ ज़्यादा!

देवेन ने झांतो तक लंड को उसकी चूत मे धंसा के ही दम लिया.जैसे ही लंड का सूपड़ा उसकी कोख से सटा रंभा के जिस्म ने झटका खाया & वो झाड़ गयी.रंभा हैरत & खुमारी मे आहें भरने लगी..उसकी मर्दानगी की कायल हो गयी वो उसी पल!..अभी बस लकंड अंदर घुसा था और वो झाड़ गयी थी.

देवेन भी उसकी चूत के सिकुड़ने-फैलने की जानलेवा हरकत से चौक गया था और बड़ी मुश्किल से उसने खुद को झड़ने से रोका था.उसने अब बहुत धीमे और लंबे धक्को से उसकी चुदाई शुरू की.वो लंड पूरा बाहर खींचता और फिर जड तक अंदर घुसा देता.लंड कोख से टकराता तो रंभा के जिस्म मे मानो सितार बजने लगते.वो खुशी मे पागल हो गयी & उसने अपने आशिक़ को अपनी नाज़ुक,गुदाज़ बाहो मे कस लिया & उसके चेहरे पे अपने आभारी होंठो से चूमने लगी.देवेन का लंड उसकी चूत की दीवारो को भी रगड़ रहा था.उसके हाथ उसकी छातियो को मसला रहे थे और होंठ उसके चेहरे से लेके सीने तक घूम रहे थे.रंभा 1 बार फिर मस्ती के आसमान मे ऊँचा उड़ने लगी थी.उसकी चूत से बहते रस की हर तेज़ हो गयी थी.

उसी वक़्त देवेन ने अपनी बाई बाँह उसकी गर्दन के नीचे लगाई और उसे चूमते हुए उसकी बाई जाँघ पे अपना दाया हाथ बेसब्री से फिराने लगा.रंभा ने अपनी टाँगे उसकी कमर पे कैंची की तरह कस दी & कमर उचकाने लगी.देवेन की चुदाई उसे जोश से भर रही थी & उसने टाँगो को नीचे कर उसकी जाँघो पे फँसाया & उनके सहारे & ज़ोर-2 से कमर उचकाने लगी.

देवेन का दाया हाथ मस्ती मे पागल हो उसकी कमर को सहलाते हुए नीचे गया & उसकी गंद की बाई फाँक को दबोच लिया.रंभा ने सर झटकते हुए आह भरी तो देवेन ने उसकी गंद को दबोचे हुए बाई तरफ करवट ले ली.अब दोनो करवट से लेटे हुए थे & रंभा की बाई टाँग देवेन के उपर चढ़ि हुई थी & वो उसे बाँहो मे भरे मदहोश हो चूमे जा रही थी.देवेन उसकी गंद को सहलाता,उसकी दरार मे उंगली फिराता धक्के तेज़ कर रहा था.रंभा उस से बिल्कुल चिपकी हुई थी & उसके नाख़ून देवेन के कंधो & पीठ पे घूम रहे थे.

"उउफफफफफफफफफ्फ़..ओईईईईईईईईईई..माआआआआअ..हाआआआआअन्न्‍नननननननणणन्..!",रंभा ने देवेन के दाए गाल से बाया गाल सटाया हुआ था & उसकी बाई टांग उसकी कमर पे चढ़ि बेचैनी से उपर-नीचे हो रही थी.उसकी कमर आगे-पीछे हो रही थी & जिस्म झटके खा रहा था-वो झाड़ रही थी.देवेन को लंड पे फिर से उसकी चूत की क़ातिल कसावट महसूस हुई & उसके होंठ महबूबा की गर्दन से चिपक गये.

देवेन ने फ़ौरन करवट ली & इस बार पीठ के बल लेट गया.अब रंभा उसके उपर लेटी उसकी गर्दन मे मुँह च्छुपाए साँसे संभाल रही थी.देवेन उसकी पीठ सहला रहा था.कुच्छ पलो बाद देवेन ने उसके रेशमी बालो को उसके चेहरे से हटाया & उसके चेहरे को उपर कर चूमा & फिर उसके कंधे थाम उसे उपर किया.रंभा उसके दोनो तरफ घुटने जमाए उपर हुई.

देवेन की निगाहे अपने होंठो के ताज़ा निशानो से ढँकी उसकी चूचियो से टकराई तो वो खुशी से चमकने लगी.उस चमक को देख रंभा शर्मा गयी & उसने अपने हाथो से अपने दिलकश उभारो को च्छूपा लिया.देवेन ने उसके हाथ पकड़ के उसके सीने से हटाए और अपनी उंगलिया उसकी उंगलियो मे फँसा उन्हे अपनी गिरफ़्त मे ले लिया.उसकी आँखे रंभा के हया और मदहोशी से भरी सूरत से लेके उसकी गीली उसके लंड को अपने अंदर ली चूत तक घूमने लगी.

रंभा ने उसकी निगाहो की तपिश से आहत हो हाथ छुड़ाने की कोशिश की तो देवेन ने हाथो को और मज़बूती से थाम नीचे से कमर उचकाई.

"ऊव्ववव..!",रंभा चिहुनकि मगर उसकी कमर खुद ब खुद हिलने लगी और 1 बार फिर दोनो की चुदाई शुरू हो गयी.कुच्छ ही पल मे रंभा अपने बाल झटकती,जिस्म को कमान की तरह मोडती तेज़ी से कमर हिला रही थी.मस्ती मे पागल हो वो नीचे झुकी & देवेन के हाथ उसके सर के दोनो तरफ जमाते हुए उसे चूमने लगी.देवेन उसकी मदहोशी का पूरा लुत्फ़ उठा रहा था.रंभा उसके सीने को चाट रही थी,उसके निपल्स को काट रही थी.उसकी चूत मे फिर से कसक बहुत क़ातिल हो गयी थी & उसकी कमर बहुत तेज़ी से हिल रही थी.

"उउन्न्ञणणनह...आआहहाआआन्न्‍नननणणन्......!",उसने सर उठा लिया था और उसकी पकड़ देवेन के हाथो पे ढीली हो गयी थी.देवेन ने फ़ौरन उसे बाहो मे भर लिया & करवट ली.दोनो की जद्ड़ोजेहाद से बिस्तर की चादर मूड के 1 कोने मे पहुँच गयी थी & पलंग से नीचे लटक रही थी.देवेन अब अपनी प्रेमिका की चूत मे झाड़ अपने अरमानो को पूरा करना चाहता था.उसकी बाई बाँह अभी भी उसकी गर्दन के नीचे थे.उसने उसे अपने से चिपका के अपने नीचे दबा धक्का मारा तो रंभा कस कर बिस्तर से नीचे लटक गया.

देवेन उसके उपर झुका उसकी गर्दन चूमता उसे चोदने लगा.रंभा अब चीख रही थी.शायद दोनो की आवाज़ें बाहर गाँव की सड़क पे भी सुनाई दे रही थी.जो भी हो,उन दोनो को अब किसी बात की परवाह नही थी.देवेन का दाया हाथ उसके जिस्म के नीचे से उसके बाए कंधे को थामे था & अब उसके धक्के बहुत तेज़ हो गये थे.रंभा समझ गयी थी कि वो भी अपनी मंज़िल तक पहुचना चाहता है.उसके हाथ भी उसके बालो को खींच रहे थे.उसकी चूत की कसक अब चरम पे पहुँच रही थी.

देवेन का लंड उसकी चूत को ऐसे भरे हुए था की उसे पूरा जिस्म भरा-2 लग रहा था.उसके दिल मे कुच्छ बहुत मीठा,कुच्छ बहुत नशीला भरने लगा था.उसे ऐसा शिद्दत भरा एहसास पहले कभी नही हुआ था और वो मस्ती मे आहत हो च्चटपटते हुए देवेन की पीठ नोचने लगी थी.उसकी टाँगे उसकी जाँघो पे चढ़ि उपर -नीचे हो उसकी टाँगो के बालो मे खुद को रगड़ रही थी.देवेन के दिल मे भी खुशी भरी हुई थी-वो खुशी जिसे वो भूल गया था.रंभा को खुद से चिपकाए वो उसे चूमते हुए अब क़ातिल धक्के लगा रहा था.

"ऊऊऊऊहह..!",रंभा आह भरते हुए उचकी और देवेन की गर्दन के ठीक नीचे पागलो की तरह चूमने लगी.उसकी चूत ने अपनी मस्तानी हरकत शुरू कर दी थी & देवेन भी अब आख़िरी धक्के लगा रहा था.रंभा के होंठो ने अपनी छाप छ्चोड़ने के बाद देवेन के सीने को छ्चोड़ा & वो मदहोशी मे 'ओ' के आकर मे गोल हो गये.रंभा का सर बिस्तर से नीचे लटक गया था & उसके हाथ भी.उसके होंठ थारथरा रहे थे & जिस्म कांप रहा था.झड़ने की ऐसी शिद्दत उसने कभी महसूस नही की थी कि तभी वो बहुत ज़ोर से करही,",ऊऊवन्न्‍नणणनह..!"

"तड़क्कककक..!",उसने अपने चेहरे को पागलो की तरह चूमते देवेन को चांटा मार दिया था.रंभा की आँखो से आँसू छलक गये.देवेन के लंड ने उसकी कोख से टकराते हुए अपने वीर्य की गर्म बारिश सीधा उसके अंदर की थी & उस बौच्हर ने उसके जिस्म को फिर से झाड़वा दिया था.वो उस गहरे एहसास को बर्दाश्त नही कर पाई थी & उस वक़्त देवेन के होंठो की च्छुअन भी वो झेल नही पाई & उसका हाथ उठ गया.वो ज़ोर-2 से सूबक रही थी.देखने वाले को ये लगता कि लड़की तकलीफ़ मे है जबकि सच्चाई ये थी कि उस लड़की ने वो बेइंतहा खुशी पाई थी जिसके आबरे मे उसके सपने मे भी नही सोचा था.

देवेन ऐसे कभी नही झाड़ा था.इतनी कसी चूत मे उसने कभी अपना लंड नही घुसाया था & झाड़ते वक़्त जो खुशी उसे मिली वो बिल्कुल अनूठी थी लेकिन रंभा के थप्पड़ ने उसे हैरत मे डाल दिया & उसे लगा कि उसने कुच्छ ग़लत किया है.आजतक जब भी उसने चुदाई की थी उसके साथ की लड़की झड़ी ज़रूर थी मगर इस तरह से उसने किसी को झाड़ते नही देखा था.उसकी समझ मे नही आ रहा था कि वो क्या करे & वो वैसे ही उसे बाहो मे थामे पड़ा रहा.

काफ़ी देर बाद रंभा होश मे आई & उसकी रुलाई रुकी तो उसने खुद को चिंता से देखते देवेन को देखा.कहते हैं दिल से दिल को राह होती है & उस पल जैसे इसी बात को सच साबित करते हुए रंभा का दिल देवेन की उलझन समझ गया.वो फ़ौरन उपर उचकी & उसे बाहो मे भर उसके गाल को चूमने लगी.देवेन ने वैसे ही सिकुदे लंड को चूत मे डाले हुए उसे बाहो मे भर उसके सर को उपर बिस्तर पे किया.

"सॉरी,आपको मारा मैने.",रंभा की आँखो मे अभी भी नशे के डोरे दिख रहे थे,"..मगर आपने मुझे ऐसे प्यार किया,जैसे कभी किसी ने नही किया है..& मैं वो खुशी झेल नही पाई थी.",बात समझते ही देवेन के होंठो पे मुस्कान आ गयी & उसने उसे गले से लगा लिया,"आइ लव यू."

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.......

JAAL paart--55

gataank se aage......

kuchh palo baad jab use ye bharosa ho gaya to vo apni ungli ko uski choochi pe dayre ki shakl me ghumane laga.ungli choochi ki puri golayi pe ghumte hue uske nipple ki or badh rahi thi & nipple pe pahunchte hi usne use aise dabaya jaise koi button daba rahi ho.rambha chihunki & apna seena & aage kar diya.deven ab uski chhatiyo ko sakht hath se dabane laga.rambha uski god me kasmasate hue aahe bharne lagi.

deven ne uske seene ke ubharo ko jum ke masla.rambha ke chehre pe shikan pad gayi thi.use bahut maza aa raha tha.uske jism me dard uthne laga tha,meetha dard & uski chut to ras ki dhar baha hi rahi thi.vo apne hotho ko apne hi danto se kaat rahi thi.deven to jaise use bhool hi gaya tha & use bas uski chhatiyan hi dikh rahi thi.vo unhe dekhte hue unhe daba raha tha.rambha ne uska chehra pakad ke upar kiya to usne use chum liya.bahuit der tak vo uski choochiyan dabate hue,uske nipples ko ragadte hue use chumta raha.

uske baad vo neeche hua & un masti bhare ubharo ko apne munh me bhar liya.uski bayi banh pe tiki rambha peechhe jhuk zor-2 se aahen bharne lagi.deven ki aatur zuban uski choochiyo ko munh me bhar chaat rahi thi & vo apni bhari janghe aapas me ragadte hue apni chut ko samjha rahi thi.rambha ke dil me bhi apne repmi ke jism ko chumne ki khwahish hui & vo aage hui & apne seene se deven ka sar upar uthaya & jhuk ke vaise hi uske seene ko chumne lagi jaise vo uske seene ko chum raha tha.

vo mast aavazen nikalte hue uske seene ke ghane baalo me apni naak ghusa ke ragad rahi thi & uske nipples ko chus rahi thi.deven jail se nikalne ke baad kayi aurato ke sath humbistar hua tha.kuchh peshevar thi & kuchh vo thi jinhe us se rishta jodne ki umeed thi.un sabhi aurato me se kisi ne aaj tak uske nipples ke sath aise khilwad nahi kiya tha.vo aahe bharte hue uski pith pe hath firane laga .rambha uske seene ko chumte hue thoda neeche gayi & fir upar aa use baaho me bhar uske seene me munh chhupa liya.

usne uski thuddi pakad chehra upar kiya & use chumne laga & chumte hue uski makhmali jangho ke andruni hisso ko sehlane laga.rambha ne janghe bhinch uske hath ko qaid kar liya lekin fir bhi vo uski jangho ko sehlata raha.rambha ab josh me pagal ho gayi thi.usne bechaini se apni kamar hilayi to deven ne uski halat samajhte hue use bistar pe lita diya & uski panty khichne laga.panty uski chut se chipki hui thi & jab vo uske jism se alag hi to deven use sunghane se khud ko rok nahi paya.

ab vo uske samne bilkul nangi padi thi & uska husn apne pure shabab me uske samne tha.rambha ko bahut sharm aa rahi thi.vo chah rahi thi ki apne jism ko dhank le magar uski ye bhi khwahish thi ki deven uske jism ko bharpur pyar kare.ab ye uljhan to 1 hi surat me sulajh sakti thi,agar vo deven ke jism ko khud pe odh le to.

"aannnnnnhhhhhh..!",vo kahyalo me khoyi thi ki deven uski jangho ko chumne laga tha.usne tadap ke karwat le li & deven uski chaudi gand ko chumne laga.uske sakht hath uski gand ko dabane lage & vo uski kamar ke mansal hisse ko chumne laga.rambha ab masti me bilkul pagal ho chuki thi.bistar ki chadar ko zor se bhinchte hue vo aahe bhare ja rahi thi.deven ne sue seedha kiya & uski janghe phaila di.usne unhe fir se band kar liya lekin usne uski ansuni karte hue unhe phailaya & uski chut pe jhuk gaya.

"hey bhagwannnnnnnnn..haiiiiiiiiii.......!",rambha chikhi & bistar pe chhatpatane lagi.sduka premni uski chut chaat raha tha & uski zuban apne dane pe mehsus karte hi vo jhad gayi thi.usne deven ke sar ko apni moti jangho me daba diya to deven ne jibh uski chut me kafi andar tak utar di.uske hath upar aaye & apni mehbooba ki choochiyo pe kas gaye.rambha kabhi bechaini me uske sar ke baal nochti to kabhi choochiyan masalte uske hatho pe apne hath dabati.na jane kitni der tak vo uski chut se behte ras ko chaatata raha & vo jhadti rahi.deven ne us jaisi haseen ladki nahi dekhi thi.vo use khas lagne lagi thi-shayad sumitra ki vajah se.

vo uske jism ko pyar kar use duniya ki sari khushiyo se vakif karana chahta tha.uski nazuk,gulabi,kasi chut dekh uska dil khushi & josh se bhar gaya tha & usne use ji bhar ke chata,chuma & chusa tha.apni ungli usme ghusa usne uski kaswat mehsus ki thi & uska lund us ehsas se & sakht ho gaya tha.

Rambha ne nashe me bojhal palko ko thoda sa khola to dekha ki deven apna underwear utarne hi wala hai.thik usi waqt uske dil ne kaha ki uska lund Vijayant ke lund jaisa hi hoga & jab underwear neeche sarka to sach me samne 9.5 inch ka lund tana khada tha.rambha ne sue dekha & apne neeche ke honth ko dhire se kata.deven ka dil bahut zoro se dhadak raha tha..ye kya ho raha tha use?..ye to vohi ehsas tha jo use Sumitra ke karib aane pe hota tha..magar sumitra ko kabhi usne choda nahi tha..fir aaj kyu vahi ehsas uske dil me umad raha tha?

"aannnnnhhhhh..!",usne rambha ki janghe failayi & apne lund ko hath me tham uski chut ke dane pe halke se mara.rambha jaise dard se chhatpatayi.lund ki maar use josh se pagal kar rahi thi.abhi tak aaho ke siwa dono kuchh nahi bole the & is waqt bhi rambha ne bas katar nigaho se apne aashiq ko dekha mano minnat kar arhi ho ki & na tadpaye & dono jimso ki doori ko ab humesha-2 ke liye mita de.deven ne uski aankho ko padh liya & is baar lund ko uski gili chut ki darar pe rakh aage jhuka.

"aaaahhhhhhhhhh..!"

"ouiiiiiiiiiiiiiiiiiiii....maaaaaaaaaaaaaaaaa..!",dono premi karahe,deven uski chut ke behad kase hone ki vajah se & rambha uske lund ki lumbai & motai se.deven ka lund vijayant se mota tha & is waqt andar jate hue vo rambha ki chut ko buri tarah phaila raha tha.rambha ko vahi mastana ehsas hua jo vijayant ke sath hota tha balki us se bhi kuchh zyada!

deven ne jhanto tak lund ko uski chut me dhansa ke hi dum liya.jaise hi lund ka supada uski kokh se sata rambha ke jism ne jhatka khaya & vo jhad gayi.rambha hairat & khumari me aahen bharne lagi..uski mardangi ki kayal ho gayi vo usi pal!..abhi bas lkund andar ghusa tha & vo jhad gayi thi.

deven bhi uski chut ke sikudne-failne ki jaanlewa harkat se chauk gaya tha & badi mushkil se usne khud ko jhadne se roka tha.usne ab bahut dheeme & lumbe dhakko se uski chudai shuru ki.vo lund pura bahar khinchta & fir jud tak andar ghusa deta.lund kokh se takrata to rambha ke jism me mano sitar bajne lagte.vo khushi me pagal ho gayi & usne apne aashiq ko apni nazuk,gudaz baaho me aks liya & uske chehre pe apne aabhari hotho se chumne lagi.deven ka lund uski chut ki deewaro ko bhi ragad raha tha.uske hath uski chhatiyo ko masla rahe the & honmth uske chehre se leke seene tak ghum rahe the.rambha 1 baar fir masti ke aasman me ooncha udne lagi thi.uski chut se behte ras ki har tez ho gayi thi.

usi waqt deven ne apni bayi banh uski gardan ke neeche lagayi & sue chumte hue uski bayi jangh pe apna daya hath besabri se firane laga.rambha ne apni tange uski kamar pe kainchi ki tarah kas di & kamar uchkane lagi.deven ki chudai use josh se bhar rahi thiu & usne tango ko neeche kar uski jangho pe phansaya & unke sahare & zor-2 se kamar uchkane lagi.

deven ka daya hath masti me pagal ho uski kamar ko sehlate hue neeche gaya & uski gand ki bayi fank ko daboch liya.rambha ne sar jhatakte hue aah bhari to deven ne uski gand ko daboche hue bayi taraf karwat le li.ab dono karwat se lete hue the & rambha ki bayi tang devcen ke upar chadhi hui thi & vo us ebahao me bhare madhosh ho chume ja rahi thi.deven uski gand ko sehlata,uski darar me ungli firata dhakke tez kar raha tha.rambha su se bilkul chipki hui thi & suke nakhun deven ke kandho & pith pe ghum rahe the.

"uuffffffffff..ouiiiiiiiiiiiii..maaaaaaaaaaa..haaaaaaaaaaannnnnnnnnnnn..!",rambha ne deven ke daye gaal se baya gaal sataya hua tha & uski bayi tang uski kamar pe chadhi bechaini se upar-neeche ho rahi thi.uski kamar aage-peechhe ho rahi thi & jism jhatke kha raha tha-vo jhad rahi thi.deven ko lund pe fir se uski chut ki qatil kasawat mehsus hui & uske honth mehbooba ki gardan se chipak gaye.

deven ne fauran karwat li & is baar pith ke bal let gaya.ab rambha uske uapr leti uski gardan me munh chhupaye saanse sambhal rahi thi.deven uski pith sehla raha tha.kuchh palo baad deven ne uske rehmi baalo ko uske chehre se hataya & uske chehre ko upar kar chuma & fir uske kandhe tham use upar kiya.rambha uske dono taraf ghutne jamaye upar hui.

deven ki niaghen apne hotho ke taza nishano se dhanki uski chhatiyo se takrayi to vo khushi se chamkane lagi.us chamak ko dekh rambha sharma gayi & usne apne hatho se apne dilkash ubharo ko chhupa liya.deven ne uske hath pakad ke uske seene se hataye & apni ungliya uski ungliyo me phansa unhe apni giraft me le liya.uski aankhe rambha ke haya & madhoshi se bhari surat se leke uski gili uske lund ko apne andar li chut tak ghumne lagi.

rambha ne uski nigaho ki tapish se aahat ho hath chhudane ki koshish ki to deven ne hatho ko & mazbuti se tham neeche se kamar uchkayi.

"oowwww..!",rambha chihunki magar uski kamar khud ba khud hilne lagi & 1 baar fir dono ki chudai shuru ho gayi.kuchh hi pal me rambha apne baal jhatakti,jism ko kaman ki tarah modti tezi se kamar hila rahi thi.masti me pagal ho vo neeche jhuki & deven ke hath uske sar ke dono taraf jamate hue use chumne lagi.deven uski madhoshi ka pura lutf utha raha tha.rambha uske seene ko chaat rahi thi,uske nipples ko kaat rahi thi.uski chut me fir se kasak bahut qatil ho gayi thi & uski kamar bahut tezi se hil rahi thi.

"uunnnnnnhhhhhh...aaaahhhhhhhhaaaaaannnnnnnn......!",usne sar utha liya tha & uski pakad deven ke hatho pe dhili ho gayi thi.deven ne fauran use baaho me bhar liya & karwat li.dono ki jaddojehad se bistar ki chadar mud ke 1 kone me pahunch gayi thi & palang se neeche latak rahi thi.deven ab apni premika ki chut me jhad apne armano ko pura karna chahta tha.uski bayi banh abhi bhi uski gardan ke neeche the.usne use apne se chipka ke apne neeche daba dhakka mara to rambha kas ar bistar se neeche latak gaya.

deven uske upar jhuka uski gardan chumta use chodne laga.rambha ab chikh rahi thi.shayad dono ki aavazen bahar ganv ki sadak pe bhi sunai de rahi thi.jo bhi ho,un dono ko ab kisi baat ki parwah nahi thi.deven ka daya hath uske jism ke neeche se uske baye kandhe ko thame tha & ab uske dhakke bahut tez ho gaye the.rambha samjha gayi thi ki vo bhi apni manzil tak pahuchana chahta hai.uske hath bhi uske baalo ko khinch rahe the.uski chut ki kaska ab charam pe pahunch rahi thi.

deven ka lund uski chut ko aise bhare hue tha ki use pura jism bhara-2 lag raha tha.uske dil me kuchh bahut mitha,kuchh bahut nashila bharne laga tha.use aisa shiddat bhara ehsas pehle kabhi nahi hua tha & vo masti me aahat hao chhatapatate hue deven ki pith nochne lagi thi.uski tange uski jangho pe chadi upar -neeche ho uski tango ke baalo me khud ko ragad rahi thi.deven ke dil me bhi khushi bhari hui thi-vo khushi jise vo bhul gaya tha.rambha ko khud se chipkaye vo use chumte hue ab qatil dhakke laga raha tha.

"oooooooohhhhhhhhhhh..!",rambha aah bharte hue uchki & deven ki gardan ke thik neeche paglo ki tarah chumne lagi.uski chut ne apni mastani harkat shuru kar di thi & deven bhi ab aakhiri dhakke laga raha tha.rambha ke hontho ne apni chhap chhodne ke baad deven ke seene ko chhoda & vo madhoshi me 'O' ke aakar me gol ho gaye.rambha kas ar bistar se neeche latak gaya tha & uske hath bhi.uske honth thathara rahe the & jism kanp raha tha.jhadne ki aisi shiddat usne kabhi mehsus nahi kit hi ki tabhi vo bahut zor se karahi,",OOOOONNNNNNHHHHHHHH..!"

"tadakkkkk..!",usne apne chehre ko paglo ki tarah chumte deven ko chanta maar diya tha.rambha ki aankho se aansu chhalak gaye.deven ke lund ne uski kokh se takrate hue apne virya ki garm basrish seedha uske andar ki thi & us bauchhar ne uske jism ko fir se jhadwa diya tha.vo us gehre ehsas ko bardasht nahi kar payi thi & us waqt deven ke hotho ki chhuan bhi vo jhel nahi payi & uska hath uth gaya.vo zor-2 se subak rahi thi.dekhne vale ko ye lagta ki ladki taklif me hai jabki sachchai ye thi ki us ladki ne vo beintaha khushi payi thi jiske abre me uske sapne me bhi nahi socha tha.

deven aise kabhi nahi jhada tha.itni kasi chut me usne kabhi apna lund nahi ghusaya tha & jhadte waqt jo khushi use mili vo bilkul anuthi thi lekin rambha ke thappad ne use hairat me daal diya & use laga ki usne kuchh galat kiya hai.aajtak jab bhi usne chudai ki thi uske sath ki ladki jhadi zarur thi magar is tarah se usne kisi ko jhadte nahi dekha tha.uski samajh me nahi aa raha tha ki vo kya kare & vo vaise hi use baaho me thame pada raha.

kafi der baad rambha hosh me aayi & uski rualyi ruki to usne khud ko chinta se dekhte deven ko dekha.kehte hain dil se dil ko raah hoti hai & us pal jaise isi baat ko sach sabit karte hue rambha ka dil deven ki uljhan samajh gaya.vo fauran upar uchki & use baaho me bhar uske gaal ko chumne lagi.deven ne vaise hi sikude lund ko chut me dale hue use baaho me bhar uske sar ko upar bistar pe kiya.

"sorry,aapko mara maine.",rambha ki aankho me abhi bhi nashe ke dore dikh rahe the,"..magar aapne mujhe aise pyar kiya,jaise kabhi kisi ne nahi kiya hai..& main vo khushi jhel nahi payi thi.",baat samajhte hi deven ke hotho pe muskan aa gayi & usne use gale se laga liya,"i love you."

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah.......

 
जाल पार्ट--56

गतान्क से आगे......

देवेन ने उसके प्यार के इज़हार को सुन सर उपर उठाया & उसकी आँखो मे झाँकने लगा..वो इस लड़की की जान लेना चाहता था लेकिन आज उसे उस से जुदा होने के ख़याल से ही डर लग रहा है..वो उसकी जान बन गयी है..कैसा अजीब खेल खेला था उपरवाले ने..मा की जिस अधूरी चाहत की प्यास ने उसे आजतक बेताब & बहाल कर रखा था,वो आज बेटी की बाहो मे बुझी थी,"आइ लव यू टू.",वो झुका & दोनो के होंठ 1 दूसरे की लज़्ज़त चखने लगे.

"उन्न्ञन्..मत जाइए ना!",बिजली चली गयी थी & देवेन उसकी चूत से लंड खींच उठने लगा था जब रंभा ने उसे रोक दिया था.

"अंधेरे मे तुम दिख नही रही मुझे.लालटेन तो लाने दो.",उसने उसके होंठो पे दाए हाथ की उंगली को फिराया तो रंभा ने मस्ती मे आह भरी और उंगली के पोरो को चूमा & फिर उसे मुँह मे भर चूसने लगी.

"चाँदनी तो आ रही है खिड़की से,लालटेन की क्या ज़रूरत है.",रंभा ने उसे बाहो मे भरे रखा.देवेन हंसा & उंगली को उसके होंठो से हटा अंगूठे को उनपे दबा दिया.रंभा ने उसे शरारत से काट लिया तो दोनो हँसने लगे मगर अगले ही पल देवेन खामोश हो गया और उसके चेहरे पे उदासी की परच्छाई आ गयी.

"क्या हुआ?",रंभा ने उसके चेहरे को हाथो मे थाम लिया.

"कुच्छ नही.बस ये सोच रहा था कि कुच्छ दिन बाद तुम अपनी ज़िंदगी मे लौट जाओगी फिर मैं कैसे जियूंगा?..वही उलझन,वही बेकरारी फिर मेरे सीने को जलाने लगेगी."

"ये उलझन,ये बेकरारी बस चंद दीनो के लिए होगी.",रंभा ने उसके कंधे थामे & पलटने का इशारा किया तो वो उसके नीचे आ गया.रंभा ने चूत से लंड को जुदा किया & उसके सीने को चूमते हुए नीचे जाने लगी.

"मुझे बहलाने की कोशिश कर रही हो?..चंद दिनो की कैसे होगी?..तुम्हारी अपनी ज़िंदगी है,अपनी दुनिया है..आहह..!",देवेन आँखे बंद कर कराहा.रंभा उसके लंड तक पहुँच गयी थी & उसे थाम के चूम लिया था.

"बहलाने की कोशिश नही कर रही.",रंभा ने सूपदे पे लगे उसके वीर्य & अपने रस को चॅटा.उसकी चूत से बह के देवेन का वीर्य उसकी जाँघो से चिपक गया था,"..सच कह रही हू.अब मैं भी आपके बगैर नही रह सकती!",रंभा झुकी & लंड को मुँह मे भर लिया & आँखे बंद कर चूसने लगी.

"ओह..रंभा,पागल मत बनो!",वो उठ बैठा था & लंड चुस्ती रंभा के बाल सहला रहा था,"..मैं बस अपने दिल का हाल कह रहा था.मेरी वजह से अपना बसा-बसाया घर क्यू उजाड़ रही हो?",रंभा ने दाए हाथ के अंगूठे & पहली उंगली के दायरे मे लंड को हिलाना शुरू कर दिया था & साथ-2 उसे चूस भी रही थी.उसका दूसरा हाथ झांतो से घिरे देवेन के आंडो को दबा रहा था.उसने लंड को हिलाना छ्चोड़ा & उसे मुँह मे भरने लगी.उसकी सांस अटकने लगी थी लेकिन उसने लंड को अंदर लेना नही छ्चोड़ा.लंड का कुच्छ हिस्सा उसके हलक मे भी चला गया था.देवेन की कमर अपनेआप हिल गयी.उसे ऐसा लग रहा था मानो वो फिर से अपनी महबूबा के चूत मे लंड घुसा रहा हो.

रंभा उसे जड तक मुँह मे भर चूस रही थी.देवेन उसके बालो को पकड़े बेचैनी मे आहें भर रहा था & उसने अचानक लंड बाहर खींच लिया.हाँफती रंभा ने उसे देखा & मुस्कुराइ.झड़ने के डर से उसने लंड खींच लिया था.उसने देवेन की टाँगे पकड़ उन्हे पलंग से नीचे लटका दिया & फिर ज़मीन पे घुटनो के बल उनके बीच आ गयी.

"इतना सुकून मैने कभी महसूस नही किया..",उसने अपनी भारी-भरकम चूचियो को अपने हाथो मे थामा & देवेन के खड़े लंड को उनके बीचे कस लिया.देवेन ने आह भरते हुए उसके सर को पकड़ लिया.वो अपनी चूचियो को आपस मे भींच उन्हे उपर-नीचे कर लंड को रगड़ने लगी,"..& बसा-बसाया घर?..हुंग!....वो पति जो मुझे खिलोना समझता है & मुझसे बेवफ़ाई कर रहा है..मैने भी उसे धोखा दिया है.उसकी ब्यहता होते हुए उसके पिता के साथ सोई लेकिन कभी बताउन्गि आपको किन हालात मे मेरे ससुर और मैं करीब आए थे..",उसने लंड को और ज़ोर से रगड़ा & झुक के उसके सूपदे को चूमा.

"..मगर वो मुझे किस वजह से धोखा दे रहा है & मुझे छ्चोड़ना चाह रहा है सिवाय इसके कि उसका मन भर गया लगता है!",देवेन ने उसके बाल पकड़ उसे उपर खींचा & बिस्तर पे लेट गया & उसे उपर आने का इशारा किया.रंभा ने सोचा कि वो उसे उपर से लंड अपनी चूत मे लेने को कह रहा है & वो उसके जिस्म के दोनो ओर घुटने जमाके उसपे झुकने लगी कि उसने उसकी कमर पकड़ के उसे आगे किया & अपने मुँह पे बिठा लिया.

"ऊव्वववव....हााअ....मुझे गुदगुदी होती है..नही..!",वो हस्ते हुए मस्त होने लगी.देवेन उसकी अन्द्रुनि जाँघो मे अपनी नाक घुसा के ज़ोर से रगड़ उसे गुदगुदा रहा था.अगले पल उसकी ज़ुबान उसकी चूत की दरार पे दस्तक दे रही थी.

"रंभा,मैं नही जानता कि तुम्हारी शादी मे क्या परेशानी है मगर मेरे साथ तुम्हारा भविश्य कुच्छ भी नही..-",रंभा ने अपनी चूत उसके होंठो पे दबा उसे खामोश कर दिया था.वो भी उसकी अन्द्रुनि जाँघो को सहलाते हुए उसकी चूत चाटने लगा था.

"-..उउन्न्ञणनह..आहह..आप मेरी ज़िंदगी का 1 अहम हिस्सा हैं अब और आगे से मुझसे दूर जाने की बात करने का आपको कोई हक़ नही..ऊव्वववववव..",रंभा मस्ती मे कमर हिलाते हुए आगे झुक गयी.देवेन ने उसके दाने को बहुत धीमे से होंठो से काट लिया था,"..मैं यहा से जाऊंगी अपने पति के पास,उसे & उस लड़की को सज़ा देने के लिया,जिसके लिए वो मुझे छ्चोड़ना चाहता है.मुझे चोट पहुचने की कीमत तो मुझे अदा करनी ही पड़ेगी..आआन्न्न्नह..हााआआन्न्‍ननणणन्..!",रंभा उसके बालो को जकड़े,ज़ोर-2 से कमर हिलाती झाड़ रही थी.देवेन ने उसकी गंद पकड़ उसकी चूत को मुँह से उठाया तो वो आगे हो पेट के बल बिस्तर पे गिर गयी.देवेन उसकी टाँगो के बीचे सर रखे हुए करवट बदल पेट के बल हुआ & उसकी चूत से टपकते रस को चाट लिया.उसकी नज़रो के सामने रंभा की गंद का गुलाबी छेद था.उसकी गंद बहुत मस्त थी.

इतनी भारी-भरकम होने के बावजूद माँस कही से भी लटका नही था.उसने जोश मे भर उसकी गंद की दोनो फांको को काट लिया & उन्हे मसलते हुए उसकी गंद के छेद को अपनी ज़ुबान से छेड़ने लगा.

"तुम कोई ग़लत कदम नही उथाओगि.",वो उसकी गंद को फैलते हुए छेद मे उंगली कर रहा था.

"ऊन्न्‍नणणनह..उसके लिए आप बेफ़िक्र रहिए..इतनी भी गरम मिजाज़ नही हू..ऊव्ववववववव..!",उंगली बहुत अंदर तक घुस गयी थी.

देवेन विजयंत की ही तरह रंभा के गंद के च्छेद को उंगली कर के थोड़ा फैलाना चाहता था ताकि लंड आसानी से उसके अंदर जा सके.रंभा उसकी उंगली की रगड़ से मदहोश हुए जा रही थी.देवेन ने उसके पेट के नीचे हाथ लगा के उसकी कमर उपर की तो रंभा ने भी गंद हवा मे उठा ली & चेहरा बिस्तर मे च्छूपा लिया.उसकी उंगलिया अब बिस्तर के गद्दे को नोच अपनी बेचैनी को शांत करने की कोशिश अकर रही थी क्यूकी चादर तो अब कमरे के फर्श पे थी.

देवेन काफ़ी देर तक उसकी गंद मे उंगली करता रहा & जब उसे लगा कि अब उसका च्छेद थोड़ा खुल गया है तो उसने अपनी महबूबा के पीछे घुटनो पे पोज़िशन ली.रंभा ने गद्दे को ज़ोर से भींच लिया,लंड अब बस उसकी गंद मे घुसने ही वाला था.उसकी धड़कने तेज़ हो गयी & उसने झुके हुए ही सर को नीचे कर अपनी टाँगो के बीच देखा.देवेन उसकी कमर थामे लंड को उसकी गंद पे टीका के धक्का दे रहा था.

"आाआईयईईईईईईईईईईईईईईयययययययययययईईई..!",उसकी चीख तो पूरे गाँव मे गूँजी होगी!देवेन का लंड कुच्छ ज़्यादा ही मोटा था & उसने उस ज़रा से छेद को बहुत फैला दिया था.रंभा सर उठाके छॅट्पाटा रही थी.देवेन धीरे-2 लंड को छेद मे & अंदर उतार रहा था.

"आआन्न्न्नह.....उउन्न्ञणनह..ओफफफफफ्फ़....ओह..!",देवेन ने लंड को आधे से ज़्यादा अंदर घुसा दिया था.इतनी अंदर उसकी गंद मे आजतक कोई लंड नही गया था.देवेन आगे झुका & रंभा की चूचियो को हाथो मे भर उसकी गर्दन के पीछे चूमने लगा.रंभा का दर्द अब कम हो रहा था & उसने बाई तरफ चेहरा घुमाया & अपने महबूब के होंठो को चूम लिया.थोड़ी देर तक देवेन उसे वैसे ही उसकी चूचियो मसलते हुए चूमते रहा.जब रंभा ने अपनी ज़ुबान उसके मुँह से खींच उसकी ज़ुबान को अपने मुँह मे ले चूसा तो वो समझ गया कि अब वो तैय्यार है & उसने आधे घुसे लंड के धक्के लगाने शुरू कर दिए.

"उउगगगघह..बहुत बड़ा है आपका..उउफफफफ्फ़..!",रंभा ने आह भरी,"..पता है..ऊव्ववव..जब मेरी चूत मे था तो मुझे कितना भरा-2 लग रहा था?..मैने वैसा कभी महसूस नही किया किसी के साथ..उउम्म्म्ममममम..!",देवेन ने अपनी प्रेमिका के निपल्स को मसल उसे चूम लिया था.रंभा की गंद उसके लंड के धक्को से आहत हो उसपे सिकुड जाती थी & वो मस्ती मे पागल हो जाता था.

"तुम्हारी बाहो मे आके आज मेरी सारी बेताबी,सारा गुस्सा जैसे ख़त्म हो गया..",उसने रंभा के दाने को दाए हाथ से रगड़ना शुरू कर दिया था,"..अब मैं सुकून से मार सकता हू!",उसके धक्के तेज़ हो गये थे.

"ऊहह..ऐसी बातें मत कीजिए प्लीज़..........ऊव्ववववववव..!",रंभा तेज़ी से गंद पीछे धकेल रही थी.देवेन उसकी कसी गंद के एहसास से लंड को अब रोक नही पा रहा था.उसकी उंगली ने रंभा को भी झड़ने पे मजबूर कर दिया था,"..ओओओओऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईईईईईईई माआआअन्न्‍नननणणन्..!",झड़ने के करीब पहुँचते ही देवेन के लंड का सूपड़ा थोड़ा फूला & रंभा की संकरी गंद & फैल गयी & वो चीखते हुए झाड़ गयी.देवेन ने अपनी उंगली को उसकी चूत मे क़ैद होते महसूस किया & उसकी गंद को लंड पे कसते & वो भी आह भरते हुए उसकी पीठ पे गिर गया & उसका जिस्म झटके खाने लगा.रंभा की गंद उसके गाढ़े वीर्य से भर रही थी.

रंभा बिस्तर पे लेट गयी थी & उसके उपर देवेन लेटा उसके बालो को चूम रहा था.लंड जब पूरा सिकुदा तो देवेन ने उसे बाहर खींचा & करवट ली.रंभा घूमी और उसकी बाई बाँह के घेरे मे आ उसके सीने के बालो मे मुँह च्छूपा सोने लगी.देवेन ने उसे आगोश मे कस लिया.आज अरसे बाद उसे अच्छी नींद आनेवाली थी.

जिस्म पे कुच्छ रेंगने के एहसास से रंभा की नींद खुली.उसने आँखे खोली तो पाया की देवेन के हाथ उसके जिस्म पे घूम रहे थे.अलसाई सी मुस्कान उसके होंठो पे खेलने लगी.देवने उसकी चूत मे उंगली घुसा रहा था.उसने हल्की सी आह भर अपने जागे होने का एहसास देवेन को दिलाया.देवेन उसे देख मुस्कुराया & उसकी चूत मे वैसे ही उंगली घुसाता रहा.रंभा समझ गयी थी कि वो क्या कर रहा है.उसकी उंगली उसे मस्त कर रही थी & वो लेटे हुए उसमे खोती ये देखने लगी की देवेन उसका जी-स्पॉट ढूँढने मे कामयाब होता है या नही.

“आन्न्‍ननणणनह..!”,कुच्छ ही पॅलो बाद चूत की दीवार पे उसके जिस्म के सबसे नाज़ुक,कोमल हिस्से पे उंगली का दबाव पड़ते ही वो चिहुनक उठी & आहें भरने लगी.जिस्म के मज़े की इंतेहा से उसके दिल मे जज़्बातो का सैलाब उमड़ आया था & वो सिसक रही थी.देवेन ने उसकी टाँगे फैलाई और अपने लंड को उसकी चूत मे घुसा के उसके जी-स्पॉट पे दबाने की कोशिश करने लगा.रंभा का जिस्म झटके खाने लगा.मज़ा हद्द से ज़्यादा था,थोड़ी देर पहले हुई उनकी पहली चुदाई से भी ज़्यादा!उसकी आँखो से आँसू बहने लगे थे & वो लगभग बेहोश सी हो गयी थी.

देवेन ने लंड पूरा अंदर घुसाया & उसके उपर लेट उसे बाहो मे भर लिया.जोश मे मदहोश रंभा ने प्रेमी के जिस्म पे अपनी संगमरमरी बाहें बँधी & उसकी चुदाई का भरपूर लुत्फ़ उठाने लगी.उसकी कोख से टकराता लंड उसे हर पल जन्नत का 1 नया नज़ारा दिखा रहा था.रंभा मस्ती मे चूर अपने आशिक़ के जिस्म को खुद से चिपकाए बस चुदी जा रही थी कि देवेन उसकी बाहो से निकल घुटनो पे बैठ गया.रंभा ने उसे सवालिया निगाहो से देखा तो उसने उसके उपरी बाज़ू पकड़ उसे उठा के अपनी गोद मे ले लिया & वैसे ही लंड चूत मे घुसाए उसे लिए-दिए बिस्तर से उतर गया.

रंभा ने अपनी बाहें उसकी गर्दन मे डाल दी & उसके बाए कंधे पे चेहरा टिका दिया.देवेन ने उसे कमरे के दरवाज़े के पास की दीवार से लगाया & चंद धक्के लगाए.रंभा के शिकन भरे चेहरे पे मुस्कान भी खेल रही थी.उसने सोचा कि देवेन खड़े होके उसकी चुदाई करना चाहता है लेकिन उसका इरादा तो कुच्छ & था.रंभा को थामे वो कमरे से बाहर निकल गया.रंभा उसकी मर्दानगी की पूरी तरह से कायल हो गयी थी.पहले तो बिस्तर मे उसकी हर्कतो ने उसे उसका दीवाना बना दिया था & अब जिस तरह से उसने उसे उठा रखा था,वो उसकी जिस्मानी ताक़त की भी मुरीद हो गयी थी.

देवेन उसे लेके गुसलखाने मे आ गया था.गुसलखाना पुराने ढंग का था.1 कमरा था जिसमे पीतल की बल्टियाँ रखी थी & 2-3 लोटे.1 लकड़ी का छ्होटा सा तख्त भी रखा था & उसी पे देवेन अपनी महबूबा को लिए हुए बैठ गया.रंभा मुस्कुराइ & उसके बालो को सहलाते हुए चूमने लगा.देवेन ने भी उसकी ज़ुबान चूसी & फिर 1 लोटे मे पानी ले उसके सर पे हौले से डाला.रंभा हँसी & दूसरे लोटे को उठा के उसका पानी देवेन के सर पे उलट दिया.दोनो ने 1 दूसरे के जिस्मो को नहलाना शुरू कर दिया.देवेन ने उसकी पीठ को सहलाते हुए उसकी गर्दन चूमि & फिर 1 साबुन उठा उसकी पीठ पे लगाने लगा.रंभा मुस्कुराते हुए उसे चूमने लगी.

देवेन के हाथ सामने आए तो रंभा ने उस से साबुन लिया & फिर उसकी पीठ पे मलने लगी.दोनो 1 दूसरे की आँखो मे झाँक रहे थे.देवेन का सख़्त लंड अभी भी रंभा की चूत मे था & जिस्मो की हर्कतो से वो उसकी चूत मे हुलचूल मचाता तो मज़े की लहर उसके बदन मे दौड़ जाती.रंभा हाथ सामने लाई तो देवेन ने फिर से उस से साबुन ले लिया & उसकी दाई जाँघ पे मलने लगा.रंभा की अन्द्रुनि जाँघो पे जब उसने अपना दाया हाथ चलाया तो रंभा की आँखो मे नशा भर गया.वो अपने महबूब को देखे जा रही थी & देवेन भी उसकी निगाहो मे झाँक रहा था.उसने बाए हाथ से रंभा की टांग को थामा & उसके सीने पे दाया हाथ रख के दबाया तो रंभा उसका इशारा समझते हुए पीछे लेट गयी & फर्श से अपना सर टीका दिया.देवेन ने उसकी बाई टांग को उठाके अपने दाए कंधे पे रखा & उसपे साबुन घिसने लगा.रंभा की आँखे मस्ती मे बंद हो गयी थी.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.......

JAAL paart--56

gataank se aage......

deven ne uske pyar ke izhar ko sun sar upar uthaya & uski aankho me jhankne laga..vo is ladki ki jaan lena chahta tha lekin aaj use us se juda hone ke khayal se hi darr lag raha hai..vo uski jaan ban gayi hai..kaisa ajib khel khela tha uparwale ne..maa ki jis adhuri chahat ki pyas ne use aajtak betaab & behaal kar rakha tha,vo aaj beti ki baaho me bujhi thi,"i love you too.",vo jhuka & dono ke honth 1 dusre ki lazzat chakhne lage.

"Unnnn..mat jaiye na!",Bijli chali gayi thi & deven uski chuty se lund khinch uthne laga tha jab rambha ne use rok diya tha.

"andhere me tum dikh nahi rahi mujhe.lalten to lane do.",usne uske hotho pe daye hath ki ungli ko firaya to rambha ne masti me aah bhari & ungli ke poro ko chuma & fir use munh me bhar chusne lagi.

"chandni to aa rahi hai khidki se,lalten ki kya zarurat hai.",rambha ne use baaho me bhare rakha.deven hansa & ungli ko uske hotho se hata anguthe ko unpe daba diya.rambha ne use shararat se kaat liya to dono hansne lage magar agle hi pal deven khamosh ho gaya & uske chehre pe udasi ki parchhayi aa gayi.

"kya hua?",rambha ne uske chehre ko hatho me tham liya.

"kuchh nahi.bas ye soch raha tha ki kuchh din baad tum apni zindagi me laut jaogi fir main kaise jiyunga?..vahi uljhan,vahi bekarari fir mere seene ko jalane lagegi."

"ye uljhan,ye bekarari bas chand dino ke liye hogi.",rambha ne uske kandhe thame & palatne ka ishara kiya to vo uske neeche aa gaya.rambha ne chut se lund ko juda kiya & uske seene ko chumte hue neeche jane lagi.

"mujhe behlane ki koshish kar rahi ho?..chand dino ki kaise hogi?..tumhari apni zindagi hai,apni duniya hai..aahhhhhhh..!",deven aankhe band kar karaha.rambha uske lund tak pahunch gayi thi & use tham ke chum liya tha.

"behlane ki koshish nahi kar rahi.",rambha ne supade pe lage uske virya & apne ras ko chata.uski chut se beh ke deven ka virya uski jangho se chipak gaya tha,"..sach keh rahi hu.ab main bhi aapke bagair nahi reh sakti!",rambha jhuki & lund ko munh me bhar liya & aankhe band kar chusne lagi.

"ohhhhhhhhh..rambha,pagal mat bano!",vo uth baitha tha & lund chusti rambha ke baal sehla raha tha,"..main bas apne dil ka haal keh raha tha.meri vajah se apna basa-basaya ghar kyu ujad rahi ho?",rambha ne daye hath ke anguthe & pehli ungli ke dayre me lund ko hilana shuru kar diya tha & sath-2 use chus bhi rahi thi.uska dusra hath jhanto se ghire deven ke ando ko daba raha tha.usne lund ko hilana chhoda & use munh me bharne lagi.uski sans atakne lagi thi lekin usne lund ko andar lena nahi chhoda.lund ka kuchh hissa uske halak me bhi chala gaya tha.deven ki kamar apneaap hil gayi.use aisa lg raha tha mano vo fir se apni mehbooba ke chut me lund ghusa raha ho.

rambha use jud tak munh me bhar chus rahi thi.deven uske baalo ko pakde bechaini me aahen bhar raha tha & usne achanak lund bahar khinch liya.hanfti rambha ne use dekha & muskurayi.jhadne ke darr se usne lund khinch liya tha.usne deven ki tange pakad unhe palang se neeche latka diya & fir zamin pe ghutno ke bal unke beech aa gayi.

"itna sukun maine kabhi mehsus nahi kiya..",usne apni bhari-bharkam chhatiyo ko apne hatho me thama & deven ke khade lund ko unke beeche kas liya.deven ne aah bharte hue uske sar ko pakad liya.vo apni chhatiyo ko aapas me bhinch unhe uapr-neeche kar lund ko ragadne lagi,"..& basa-basaya ghar?..hunh!....vo pati jo mujhe khilona samajhta hai & muhse bewafai kar raha hai..maine bhi use dhokha diya hai.uski byahta hote hue uske pita ke sath soyi lekin kabhi bataungi aapko kin halaat me mere sasur & main karib aaye the..",usne lund ko & zor se ragda & jhuk ke uske supade ko chuma.

"..magar vo mujhe kis vajah se dhokha de raha hai & mujhe chhodna chah raha hai siway iske ki uska man bhar gaya lagta hai!",deven ne uske abal pakd use upar khincha & bistar pe let gaya & use upar aane ka ishara kiya.rambah ne socha ki vo use upar se lund apni chut me lene ko keh raha hai & vo uske jism ke dono or ghutne jamake uspe jhukne lagi ki usne uski kamar pakad ke use aage kiya & apne munh pe bitha liya.

"oowwwww....haaaaa....mujhe gudgudi hoti hai..nahi..!",vo hasnte hue mast hone lagi.deven uski andruni jangho me apni naak ghusa ke zor se ragad use gudguda raha tha.agle pal uski zuban uski chut ki darar pe dastak de rahi thi.

"rambha,main nahi janta ki tumhari shadi me kya pareshani hai magar mere sath tumhara bhavishya kuchh bhi nahi..-",rambha ne apni chut uske hotho pe daba use khamosh kar diya tha.vo bhi uski andruni jangho ko sehlate hue uski chut chaatne laga tha.

"-..uunnnnnhhhhh..aahhhhhhhh..aap meri zindagi ka 1 aham hissa hain ab & aage se mujhse door jane ki baat karne ka aapko koi haq nahi..oowwwwwww..",rambnha masti me kamar hilate hue aage jhuk gayi.deven ne uske dane ko bahut dhime se hotho se kaat liya tha,"..main yaha se jaoongi apne pati ke paas,use & us ladki ko saza dene ke liya,jiske liye vo mujhe chhodna chahta hai.mujhe chot pahuchane ki keemat to munhe ada karni hi padegi..aaaannnnhhhhhhhhhhh..haaaaaaaannnnnnn..!",rambha uske abalo ko jakde,zor-2 se kamar hilati jhad rahi thi.deven ne uski gand pakad uski chut ko munh se uthaya to vo aage ho pet ke bal bistar pe gir gayi.deven uski tango ke beeche sar rakhe hue karwat badal pet ke bal hua & uski chut se tapakte ras ko chat liya.uski nazro ke samne rambha ki gand ka gulabi chhed tha.uski gand bahut mast thi.

itni bhari-bharkam hone ke bavjud mans kahi se bhi latka nahi tha.usne josh me bhar uski gand ki mdono fanko ko kaat liya & unhe maslate hue uski gand ke chhed ko apni zuban se chhedne laga.

"tum koi galat kadam nahi uthaogi.",vo uski gand ko failate hue chhed me ungli kar raha tha.

"oonnnnnnhhhhhhhhhh..uske liye aap befikr rahiye..itni bhi garam mijaz nahi hu..oowwwwwwww..!",ungli bahut andar tak ghus gayi thi.

Deven Vijayant ki hi tarah Rambha ke gand ke chhed ko ungli kar ke thoda phailana chahta tha taki lund aasni se uske andar ja sake.rambha uski ungli ki ragad se madhosh hue ja rahi thi.deven ne uske pet ke neeche hath laga ke uski kamar upar ki to rambha ne bhi gand hawa me utha li & chehra bistar me chhupa liya.uski unglia ab bistar ke gadde ko noch apni becfhaini ko shant karne ki koshish akr rahi thi kyuki chadar to ab kamre ke farsh pe thi.

deven kafi der tak uski gand me ungli karta raha & jab use laga ki ab uska chhed thoda khul gaya hai to usne apni mehbooba ke peechhe ghutno pe position li.rambha ne gadde ko zor se bhinch liya,lund ab bas uski gand me ghusne hi vala tha.uski dhadkane tez ho gayi & usne jhuke hue hi sar ko neeche kar apni tangol ke beech dekha.deven uski kamar thame lund ko uski gand pe tika ke dhakka de raha tha.

"AAAAAAIIIIIIIIIIIIIIIIYYYYYYYYYYYEEEEEEEEE..!",uski chikh to pure ganv me gunji hogi!deven ka lund kuchh zyada hi mota tha & usne us zara se chhed ko bahut phaila diya tha.rambha sar uthake chhatpata rahi thi.deven dhire-2 lund ko chhed me & andar utar raha tha.

"AAAANNNNHHHHH.....UUNNNNNHHHHHH..OFFFFFF....OHHHHHHHH..!",deven ne lund ko aadhe se zyada andar ghsua diya tha.itni andar uski gand me aajtak koi lund nahi gaya tha.deven aage jhuka & rambha ki chhatiyo ko hatho me bhar uski gardan ke peechhe chumne laga.rambha ka dard ab kam ho raha tha & usne bayi taraf chehra ghumaya & apne mehboob ke hotho ko chum liya.thodi der tak deven use vaise hi uski chhatiyan maslate hue chumte raha.jab rambha ne apni zuban uske munh se khinch uski zuban ko apne munh me le chusa ro vo samajh gaya ki ab vo taiyyar hai & usne aadhe ghuse lund ke dhakke lagane shuru kar diye.

"uugggghhhhhh..bahut bada hai aapka..uufffff..!",rambha ne aah bhari,"..pata hai..oowwww..jab meri chut me tha to mujhe kitna bhara-2 lag raha tha?..maine vaisa kabhi mehsu nahi kiya kisi ke sath..uummmmmmmm..!",deven ne apni premika ke nipples ko masal use chum liya tha.rambha ki gand uske lund ke dhakko se aahat ho uspe sikud jati thi & vo masti me pagal ho jata tha.

"tumhari baaho me aake aaj meri sari betabi,sara gussa jaise khatm ho gaya..",usne rambha ke dane ko daye hath se ragadna shuru kar diya tha,"..ab main sukun se mar sakta hu!",uske dhakke tez ho gaye the.

"oohhhhhhhhhh..aisi baaten mat kijiye please..........oowwwwwwww..!",rambha tezi se gand peechhe dhakel rahi thi.deven uski kasi gand ke ehsas se lund ko ab rok nahi pa raha tha.uski ungli ne rambha ko bhi jhadne pe majbur kar diya tha,"..OOOOUUUUUUUIIIIIIIIIIII MAAAAAAANNNNNNNN..!",jhadne ke karib pahunchte hi deven ke lund ka supada thoda phoola & rambha ki sankri gand & phail gayi & vo chikhte hue jahd gayi.deven ne apni ungli ko uski chut me qaid hote mehsus kiya & uski gand ko lund pe kaste & vo bhi aah bharte hue uski pith pe gir gaya & uska jism jhatke khane laga.rambha ki gand uske gadhe virya se bhar rahi thi.

rambha bistar pe let gayi thi & uske upar deven leta uske baalo ko chum raha tha.lund jab pura sikuda to deven ne use bahar khincha & karwat li.rambha ghumi & uski bayi banh ke ghere me aa uske seene ke baalo me munh chhupa sone lagi.deven ne use agosh me kas liya.aaj arse baad use achhi nind aanevali thi.

Jism pe kuchh rengne ke ehsas se Rambha ki nind khuli.usne aankhe kholi to paya ki Deven ke hath uske jism pe ghum rahe the.alsayi si muskan uske hotho pe khelne lagi.devne uski chut me ungli ghusa raha tha.usne halki si aah bhar apne jage hone ka ehsas deven ko dilaya.deven use dekh muskuraya & uski chut me vaise hi ungli ghusata raha.rambha samajh gayi thi ki vo kya kar raha hai.uski ungli use mast kar rahi thi & vo lete hue usme khoti ye dekhne lagi ki deven uska g-spot dhoondane me kamyab hota hai ya nahi.

“aannnnnnnhhhhhhhh..!”,kuchh hi palo baad chut ki deewar pe uske jism ke sabse nazuk,komal hisse pe ungli ka dabav padte hi vo chihunk uthi & aahen bharne lagi.jism ke maze ki inteha se uske dil me jazbato ka sailab umad aaya tha & vo sisak rahi thi.deven ne uski tange phailayi & apne lund ko uski chut me ghusa ke uske g-spot pe dabane ki koshish karne laga.rambha ka jism jhatke khane laga.maza hadd se zyada tha,thodi der pehle hui unki pehli chudai se bhi zyada!uski aankho se aansu behne lage the & vo lagbhag behosh si ho gayi thi.

Deven ne lund pura andar ghusaya & uske upar let use baaho me bhar liya.josh me madhosh rambha ne premi ke jism pe apni sangmarmari baahen bandhi & uski chudai ka bharpur lutf uthane lagi.uski kokh se takrata lund use har pal jannat ka 1 naya nazara dikha raha tha.rambha masti me chur apne aashiq ke jism ko khud se chipkaye bas chudi ja rahi thi ki deven uski baaho se nikal ghutno pe baith gaya.rambha ne use sawaliya nigaho se dekha to usne uske upri bazu pakad use utha ke apni god me le liya & vaise hi lund chut me ghusaye use liye-diye bistar se utar gaya.

Rambha ne apni baahen uski gardan me daal di & uske baye kandhe pe chehra tika diya.deven ne use kamre ke darwaze ke paas ki deewar se lagaya & chand dhakke lagaye.rambha ke shikan bhare chehre pe muskan bhi khel rahi thi.usne socha ki deven khade hoke uski chudai karna chhata hai lekin uska irada to kuchh & tha.rambha ko thame vo kamre se bahar nikal gaya.rambha uski mardangi ki puri tarah se kayal ho gayi thi.pehle to bistar me uski harkato ne use uska deewana bana diya tha & ab jis tarah se usne use utha rakha tha,vo uski jismani taqat ki bhi mureed ho gayi thi.

Deven use leke gusalkhane me aa gaya tha.gusalkhana purane dhang ka tha.1 kamra tha jisme pital ki baltiyan rakhi thi & 2-3 lote.1 lakdi ka chhota sa takht bhi rakha tha & usi pe deven apni mehbooba ko liye hue baith gaya.rambha muskurayi & uske baalo ko sehlate hue chumne laga.deven ne bhi uski zuban chusi & fir 1 lote me pani le uske sar pe haule se dala.rambha hansi & dusre lote ko utha ke uska pani deven ke sar pe ulat diya.dono ne 1 dusre ke jismo ko nahlana shuru kar diya.deven ne uski pith ko sehlate hue uski gardan chumi & fir 1 sabun utha uski pith pe lagane laga.rambha muskurate hue use chumne lagi.

Deven ke hath samne aaye to rambha ne us se sabun liya & fir uski pith pe malne lagi.dono 1 dusre ki aankho me jhank rahe the.deven ka sakht lund abhi bhi rambha ki chut me tha & jismo ki harkato se vo uski chut me hulchul machata to maze ki lehar uske badan me daud jati.rambha hath samne layi to deven ne fir se us se sabun le liya & uski dayi jangh pe malne laga.rambha ki andruni jangho pe jab usne apna daya hath chalaya to rambha ki aankho me nasha bhar gaya.vo apne mehboob ko dekhe ja rahi thi & deven bhi uski nigaho me jhank raha tha.usne baye hath se rambha ki tang ko thama & uske seene pe daya hath rakh ke dabaya to rambha uska ishara samjhte hue peechhe let gayi & farsh se apna sar tika diya.deven ne uski bayi tang ko uthake apne daye kandhe pe rakha & uspe sabun ghisne laga.rambha ki aankhe masti me band ho gayi thi.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah.......

 
जाल पार्ट--57

गतान्क से आगे......

अपने नये प्रेमी के प्यार करने के बिल्कुल ही निराले अंदाज़ ने उसे बहुत मदहोश कर दिया था.उसके मुँह से हल्की सी आह निकली,देवेन उसके पाँव की उंगलियो मे अपने हाथ की उंगलिया घुसा के साबुन लगा रहा था.देवेन ने उसकी टांग नीचे कर दाई टांग को बाए कंधे पे चढ़ाया & वाहा भी वही हरकत दोहराई,फिर उसके हाथ थाम उसे वापस उपर खींचा.इस सब के दौरान लंड चूत मे वैसे का वैसा धंसा हुआ था.रंभा ने उसकी गर्दन मे बाहे डाल उसे शिद्दत से चूमा & अपने हाथ मे साबुन ले उसके सीने पे घिसने लगी.थोड़ी देर बाद साबुन उसके हाथो से फिसल फर्श पे था लेकिन उसके हाथ वैसे ही देवेन के सीने पे घूम रहे थे.उसने उसके सीने से लेके उसके पेट तक साबुन लगाया & फिर दोनो हाथ पीछे ले जाके फिर से उसकी पीठ रगडी तो देवेन ने भी उसे बाहो मे भर लिया & अपने सीने से उसकी छातियो को पीसते हुए उसे चूमने लगा.

देवेन ने कुच्छ देर बाद किस तोड़ी & रंभा के सीने के उभारो को साबुन के खुश्बुदार झाग से ढँकने लगा.रंभा ने मस्ती मे आँखे बंद कर ली & अपने हाथ पीछे फर्श पे टीका दिए & आहें भरने लगी.देवेन उसकी छातियो को मसल रहा था & वो अपनी कमर हिलाने लगी थी.देवेन ने साबुन को उसके पेट पे मला & रंभा की कमर के हिलने की रफ़्तार & तेज़ हो गयी.देवेन उसकी नाभि मे उंगली घुसा-2 के साबुन मल रहा था.रंभा अब मस्ती मे आहें भरती हुई बहुत तेज़ी से कमर हिला रही थी.देवेन का हाथ नीचे गया & रंभा के दाने पे साबुन लगाने लगा.रंभा ने सर पीछे झटका & ज़ोर से चीख मारी.उसका जिस्म काँपने लगा-वो झाड़ गयी थी.

वो निढाल हो पीछे फर्श पे गिरने ही वाली थी की देवेन ने उसकी बाहे थाम उसे उपर अपनी तरफ खींचा & अपनी बाहो मे भर लिया & उसके गंद की फांको पे साबुन लगाने लगा.रंभा अभी मस्ती के तूफान से उबरी भी नही थी कि देवेन ने उसकी गंद मे उंगली घुसा उसे फिर से उस दूसरे तूफान की ओर धकेलना शुरू कर दिया था.

रंभा ने उसकी गर्देन के गिर्द दाए बाज़ू को बँधे हुए बाए हाथ मे लोटा ले उपर उठा पानी गिराया & दोनो जुड़े जिस्मो से साबुन धुलने लगा.देवेन ने उसके हाथो से लोटा लिया & उसकी टाँगो पे पानी डालने लगा.रंभा ने दूसरा लोटा उठा लिया & अपने आशिक़ को नहलाने लगी.कुच्छ ही पलो मे दोनो जिस्मो से साबुन धूल चुका था.दोनो ने लोटो को किनारे किया & 1 दूसरे को बाहो मे भर चूमने लगे.देवेन ने उसे फिर से गोद मे उठा लिया & गुसलखाने से निकल गया.

“नही,कमरे मे नही.”,रंभा उसे चूम रही थी.

“तो कहा?”,देवेन उसकी गंद की पुष्ट फांको को थामे था.

“बाहर.”,रंभा शरारत से मुस्कुराइ & उसके बाए कान पे काट लिया.

“पागल हो गयी हो क्या?कोई देख लेगा तो?”

“उसी मे तो मज़ा है..अभी तो पौ भी नही फटी है फिर भी पकड़े जाने का डर तो है ही,वही रोमांच को बढ़ाता है.चलिए ना प्लीज़!”,किसी बच्ची की तरह ज़िद की उसने तो देवेन मुस्कुरा दिया.दोनो दरवाज़े तक आए तो रंभा ने हाथ पीछे ले जा सांकॅल खोली.देवेन ने उसे गोद मे उठाए हुए बाहर की ठंडी हवा मे कदम रखा.गाँव मे सन्नाटा पसरा था.दरवाज़े के बाहर के छप्पर से ढँके हिस्से के फर्श पे वो घुटनो के बल बैठ गया & आगे झुक रंभा की छातियो से मुँह लगा दिया.

रंभा थोड़ा पीछे झुकी & उसके होंठो से आहत होती,उसके सर को जकड़े आह भरने लगी.देवेन ने धक्के लगाना शुरू कर दिया था.रंभा को बहुत मज़ा आ रहा था.ठंडी हवा दोनो को सिहरा रही थी.देवेन उसकी गांद को भींच बहुत गहरे धक्के लगा रहा था.रंभा ज़ोर-2 से आहे भर रही थी.देवेन ने उसकी चूचियो को चूसने के बाद सर उठा के आस-पास देखा,कही कोई नज़र नही आ रहा था लेकिन ज़्यादा देर यहा ऐसे बैठ के चुदाई करना ख़तरे से खाली नही था.पता नही था की गाँव वाले उस बात को कैसे लेते & वो मुसीबत मे भी पद सकते थे लेकिन रंभा ने सही कहा था,बहुत रोमांच था यू चुदाई करने मे.

रंभा उसके सर को थामे उसे पागलो की तरह चूमती बहुत तेज़ी से अपनी कमर हिला रही थी.देवेन की साँसे भी तेज़ हो गयी थी & उसके हाथो की पकड़ भी रंभा की गंद पे बहुत कस गयी थी.दोनो 1 दूसरे की आँखो मे देखते ज़ोर-2 से आहे भरते हुए अपनी-2 कमर हिला रहे थे.अचानक रंभा ने ज़ोर से आह भरी & सिसकते हुए देवेन का सर पकड़ अपनी चूचियो मे धंसा दिया & बहुत ज़ोर से कमर हिलाने लगी.उसकी चूत ने देवेन के लंड को कसा & देवेन ने भी उसकी छातियो पे होंठ दबाते हुए उसकी गंद को बहुत ज़ोर से भींचा.उसका जिस्म झटके खाने लगा & उसने भी अपना गढ़ा,गर्म वीर्य रंभा की चूत मे छ्चोड़ दिया.

थोड़ी देर तक दोनो 1 दूसरे से चिपके हुए लंबी-2 साँसे लेते हुए बैठे रहे,फिर देवेन ने उसकी गंद को थाम उसे वैसे ही अपनी गोद मे उठाया & घर के अंदर आया.रंभा ने सांकॅल वापस लगाई & दोनो वैसे ही कमरे मे चले गये.

“हाई!समीर,कैसे हो?”,रंभा & देवेन सनार पहुँच चुके थे.सनार था तो 1 गाँव मगर वाहा विदेशी सब्ज़ियो & फलो की खेती होती थी & इस वजह से बाहरी लोगो का आना-जाना लगा रहता था.इस वजह से वाहा 2-3 छ्होटे होटेल भी खुल गये थे.देवेन उन्ही मे से 1 मे कमरे के बारे मे पता कर रहा था & रंभा बाहर कार मे ही बैठी थी.

“ठीक हू.तुम कहा घूम रही हो,यार?वापस क्यू नही आ रही?”

“बहुत याद आ रही है मेरी?”,रंभा ने सवाल तो ऐसे किया कि समीर को लगे कि वो उसे छेड़ रही है मगर उसके चेहरे पे गुस्सा था.

“अब ये भी कोई पुच्छने की बात है!कर क्या रही हो यार तुम वाहा?बाकी लोग तो आ गये वापस.”

“काम ही कर रही हू बाबा!यहा तक आई तो सोचा आस-पास की और जगहें भी देख लू.उनकी तस्वीरें खींच लूँगी & उनके डीटेल्स अपनी कंपनी के डेटबेस मे डाल दूँगी तो आगे ज़रूरत पड़े तो डाइरेक्टर फोटोस देख के अंदाज़ा लगा सकता है कि जगह उसके काम की है या नही.”

“तो अकेले जाने की क्या ज़रूरत थी?किसी को साथ तो रखना था.वैसे बड़े दूर की सोचने लगी हो!”

“क्या करें!नुकसान से बचने के लिए दूर की तो सोचनी ही पड़ती है & किसी को साथ लाती तो कंपनी के काम पे असर पड़ता ना.”,रंभा ने देखा देवेन होटेल से बाहर आ रहा था.उसने समीर से थोड़ी देर & बात की & फोन काट दिया.

“देखो,होटेल मे कमरा तो मिल गया है मगर तुम ज़रा सबके सामने आने से थोड़ा बचना.”

“क्यू?”,रंभा शोखी से मुस्कुराइ.उसे लगा कि देवेन को बाकी मर्दों का उसे घूर्ना पसंद नही.

“क्यूकी तुम मेहरा खानदान की बहू हो & समीर वाले मामले के बाद लोग तुम्हारी शक्ल पहचानने भी लगे हैं..”,रंभा कार से उतर गयी थी & धूप का चश्मा आँखो पे रहने दिया था,”..कोई पहचान लेगा तो बेकार मे तुम्हारे बारे मे बातें उछ्लेन्गि.”,रंभा ने 1 स्कार्फ अपने सर पे लपेटा & देवेन ने होटेल के वेटर को आते देख डिकी खोल दी,”..& फिर मुझे अच्छा नही लगता जब लोग तुम्हे ललचाई निगाहो से देखते हैं.”,वो तेज़ी से वेटर के पीछे-2 आगे बढ़ गया.रंभा मुस्कुराती उसके पीछे चलने लगी.

“बस देख ही सकते है ना!”,कमरे मे घुसते ही रंभा ने अपने आशिक़ के गले मे बाहे डाल दी & उसके गाल चूमने लगी,”..कर तो नही सकते उसने उसके चेहरे पे प्यार से हाथ फिराए,”..वो हक़ तो किसी-2 को ही है.”,देवेन मुस्कुराया & उसकी कमर को बाहो मे कस चूम लिया.

“अच्छा चलो.कुच्छ खा के देखने चलते हैं बालम सिंग का देवी फार्म.”,देवेन ने उसके गाल थपथपाए & बाथरूम मे चला गया.रंभा का फोन बजा तो उसने देखा की प्रणव का फोन था.

“हेलो.”,मुस्कुराते हुए उसने फोन उठाया.

“कहा गायब हो गयी हो जानेमन?..अपने दीवाने का ज़रा भी ख़याल नही तुम्हे?”

“इश्क़ मे थोड़ा तड़पना भी ज़रूरी होता है हुज़ूर!अभी तदपिये थोड़ा.”

“अरे,ठीक से बोलो ना!हो कहा तुम?”

“बस 1-2 दिन मे वापस आ जाऊंगी.अकेले घूम के देख रही थी कि कैसा लगता है.”,देवेन बाथरूम से बाहर आ उसे देख रहा था.रंभा उसके करीब गयी & उसे चूमा & आँखो से शांत रहने का इशारा किया.

“तो कैसा लगा?”

“बहुत अच्छा.कोई दीवाना नही परेशान करने वाला.बहुत सुकून से हूँ!”

“तड़पाव मत यार!जल्दी वापस आओ.कुच्छ बहुत ज़रूरी काम है तुमसे.”,प्रणव की आवाज़ संजीदा हो गयी थी.”

“कैसा काम?”

“आओ तो बताउन्गा.”

“ठीक है.चलो,मैं फिर फोन करूँगी.ओके?”

“ओके,बेबी.बाइ!”

“बाइ!”,रंभा ने देखा देवेन उसे सवालिया निगाहो से देखा रहा था.

“मेहरा खानदान मे अपनी जगह बनाए रखने के लिए मुझे खेल खेलने पड़ते हैं.उसी खेल का 1 मोहरा था ये.”,रंभा ने अपने मोबाइल की ओर इशारा किया.उसके चेहरे पे उदासी की छाया देखा देवेन उसके करीब आया & उसे बाहो मे भर उसके चेहरे को प्यार से सहलाया.

“मुझे नही पता की कौन-2 है तुम्हारी ज़िंदगी मे लेकिन जो भी हैं उनसे रिश्ता रखने का फ़ैसला केवल तुम्हारा होगा.मैं तुमसे कभी भी ये नही कहूँगा की मेरी वजह से तुम किसी से अपना कोई नाता तोडो.मैं तुम्हे चाहता हम अगर ये ज़रूरी नही कि तुम भी मुझे चाहो.”

“ऐसे क्यू बोल रहे हैं?”,रंभा के आँखो मे चिंता झलकने लगी थी.

“अरे तुम समझी नही मेरी बात.”,वो मुस्कुराया,”..मेरा ये कहना है कि मैं तुम्हे चाहता हू & चाहता रहूँगा लेकिन इसका मतलब ये नही कि मैं तुम्हे बाँधना चाहता हू.तुम आज़ाद ख़याल लड़की हो & मुझे ऐसे ही पसंद हो.”

“ओह..देवेन.”,रंभा उसके सीने से लिपट गयी,”..बस कुच्छ दिन और.1 बार मैं अपने पति को बेवफ़ाई करने का सबक सीखा दू फिर मैं आपसे दूर नही जाऊंगी.”,रंभा की आँखे छल्छला आई थी.

“मुझे पूरा भरोसा है तुमपे रंभा.”,दोनो 1 दूसरे को चूमने लगे कि दरवाज़े पे दस्तक हुई,वेटर उनका नाश्ता लेके आ गया था.

सनार के बाहरी इलाक़े मे कोई 10-12 छ्होटे-2 फार्म्स थे जिनमे देवी फार्म सबसे बड़ा था.बाकी फार्म्स तो बस कांटो की तरोसे घिरे थे लेकिन देवी फार्म के चारो तरफ कोई 10 फ्ट ऊँची दीवार थी & उसके उपर भी कांटो की तार लगी थी.

“सब्ज़ियो के लिए ऐसी सेक्यूरिटी!”,देवेन कार मे बैठा सोच मे पड़ गया था.रास्ते के दूसरी तरफ फार्म का मैं गेट था जो बंद था & उसके पार भी कुच्छ नही दिख रहा था,”..1 काम करो उस फार्म पे चलो.”,उसने रंभा को रोड पे पीछे छ्चोड़ आए 1 फार्म की ओर इशारा किया.रंभा ने कार घुमा दी.

“अरे,साहिब.ऐसे मशरूम आपको कही नही मिलेंगे.मेहरा फार्म्स के मशरूम का भी कोई मुक़ाबला नही हमारे मशरूम से.”,रंभा मुस्कुराइ उस किसान ने उसे पहचाना नही था.

“अच्छा.पर हमने तो सुना था कि सनार मे देवी फार्म के मशरूम माशूर हैं.”,किसान के चेहरे का रंग बदल गया.

“अच्छा!कौन बोला आपको ये बात?”

“क्यू?”

“जो भी बोला साहिब आपको झूठ बोला क्यूकी देवी फार्म मे तो मशरूम उगाया ही नही जाता.”,वो हंसा.

“क्या?!”

“जी,वाहा तो विदेशी सलाद के पत्ते उगाए जाते हैं.”,देवेन ने रंभा की ओर देखा.

“लेटास.”,उसने उसे समझाया.

“खैर,आप हमे सॅंपल दीजिए फिर हम आपके पास आएँगे?”

“ज़रूर साहिब ये लीजिए.”,उसने उसे कुच्छ पॅकेट्स पकड़ाए.

“1 बात पुच्छनी थी.”

‘हां पुछिये.”

“आप सभी के फार्म तो बॅसकॅंटो की तार से घिरे हैं ये देवी फार्म की सब्ज़ियाँ क्या आवारा जानवरो को कुच्छ ज़्यादा पसनद है जो इतनी लंबी-चौड़ी दीवार खड़ी कर रखी है!”

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.......

JAAL paart--57

gataank se aage......

Apne naye premi ke pyar karne ke bilkul hi nirale andaz ne use bahut madhosh kar diya tha.uske munh se halki si aah nili,deven uske panv ki ungliyo me apne hath ki ungliya ghusa ke sabun laga raha tha.deven ne uski tang neeche kar dayi tang ko baye kandhe pe chadhaya & vaha bhi vahi harkat dohrayi,fir uske hath tham use vapas upar khincha.is sab ke dauran lund chut me vaise ka vaisa dhansa hua tha.rambha ne uski gardan me baahe daal use shiddat se chuma & apne hath me sabun le uske seene pe ghisne lagi.thodi der baad sabun uske hatho se phisal farsh pe tha lekin uske hath vaise hi deven ke seene pe ghum rahe the.usne uske seene se leke uske pet tak sabun lagaya & fir dono hath peechhe le jake fir se uski pith ragdi to deven ne bhi use baaho me bhar liya & apne seene se uski chhatiyo ko peeste hue use chumne laga.

Deven ne kuchh der baad kiss todi & rambha ke seene ke ubharo ko sabun ke khushbudar jhag se dhankne laga.rambha ne masti me aankhe band kar li & apne hath peechhe farsh pe tika diye & aahen bharne lagi.deven uski chhatiyo ko masal raha tha & vo apni kamar hilane lagi thi.deven ne sabun ko uske pet pe mala & rambha ki kamar ke hilne ki raftar & tez ho gayi.deven uski nabhi me ungli ghusa-2 ke sabun mal raha tha.rambha ab masti me aahen bharti hui bahujt tezi se kamar hila rahi thi.deven ka hath neeche gaya & rambha ke dane pe sabun lagane laga.rambha ne sar peechhe jhatka & zor se chikh mari.uska jism kanpne laga-vo jhad gayi thi.

Vo nidhal ho peechhe farsh pe girne hi vali thi ki deven ne uski baahe tham use uapr apni atarfa khincha & apni baaho me bhar liya & uske gand ki fanko pe sabun lagane laga.rambha abhi masti ke toofan se ubri bhi nahi thi ki deven ne uski gand me ungli ghusa use fir se us dusre toofan ki or dhakelna shuru kar diya tha.

Rambha ne uski garden ke gird daye bazu ko bandhe hue baye hath me lota le upar utha pani giraya & dono jude jismo se sabun dhulne laga.deven ne uske hatho se lota liya & uski tango pe pani dalne laga.rambha ne dusra lota utha liya & apne aashiq ko nahlane lagi.kuchh hi palo me dono jismo se sabun dhul chuka tha.dono ne loto ko kinare kiya & 1 dusre ko baaho me bhar chumne lage.deven ne use fir se god me utha liya & gusalkhane se nikal gaya.

“nahi,kamre me nahi.”,rambha use chum rahi thi.

“to kaha?”,deven uski gand ki pusht fanko ko thame tha.

“bahar.”,rambha shararat se muskurayi & uske baye kaan pe kaat liya.

“pagal ho gayi ho kya?koi dekh lega to?”

“usi me to maza hai..abhi to pau bhi nahi phati hai fir bhi pakde jane ka darr to hai hi,vahi romanch ko badhata hai.chaliye na please!”,kisi bachchi ki tarah zid ki usne to deven muskura diya.dono darwaze taka aye to rambha ne hath peechhe le ja sankal kholi.deven ne use god me uthaye hue bahar ki thandi hawa me kadam rakha.ganv me sannata pasra tha.darwaze ke bahar ke chhappar se dhanke hisse ke farsh pe vo ghutno ke bal baith gaya & aage jhuk rambha ki chhatiyo se munh laga diya.

Rambha thoda peechhe jhuki & uske hotho se aahat hoti,uske sar ko jakde aah bharne lagi.deven ne dhakke lagana shuru kar diya tha.rambha ko bahut maza aa raha tha.thandi hawa dono ko sihra rahi thi.deven uski gtand ko bhinch bahut gehre dhakke laga raha tha.rambha zor-2 se aahe bhar rahi thi.deven ne uski choochiyo ko chusne ke baad sar utha ke aas-pass dekha,kahi koi nazar nahi aa raha tha lekin zyada der yaha aise baith ke chudai karna khatre se khali nahi tha.pata nahi tha ki ganv vale us baat ko kaise lete & vo musibat me bhi pad sakte the lekin rambha ne sahi kaha tha,bahut romanch tha yu chudai karne me.

Rambha uske sar ko thame use paglo ki tarah chumti bahut tezi se apni kamar hila rahi thi.deven ki sanse bhi tez ho gayi thi & uske hatho ki pakad bhio rambha ki gand pe bahut kas gayi thi.dono 1 dusre ki aankho me dekhte zor-2 se aahe bharte hue apni-2 kamar hila rahe the.achanak rambha ne zor se aah bhari & sisakte hue deven ka sar pakad apni choochiyo me dhansa diya & bahut zor se kamar hilane lagi.uski chut ne deven ke lund ko kasa & deven ne bhi uski chhatiyo pe honth dabate hue uski gand ko bahut zor se bhincha.uska jism jhatke khane laga & usne bhi apna gadha,garm virya rambha ki chut me chhod diya.

Thodi der tak dono 1 dusre se chipke hue lambi-2 sanse lete hue baithe rahe,fir deven ne uski gand ko tham use vaise hi pani god me uthaya & ghar ke andar aaya.rambha ne sankal vaps lagayi & dono vaise hi kamre me chale gaye.

“Hi!Sameer,kaise ho?”,Rambha & Deven Sanaar pahunch chuke the.sanar tha to 1 ganv magar vaha videshi sabziyo & phalo ki kheti hoti thi & is vajah se bahri logo ka aana-jana laga rehta tha.is wajah se vaha 2-3 chhote hotel bhio khul gaye the.deven unhi me se 1 me kamre ke bare me pata kar raha tha & rambha bahar car me hi baithi thi.

“thik hu.tum kaha ghum rahi ho,yaar?vapas kyu nahi aa rahi?”

“bahut yaad aa rahi hai meri?”,rambha ne sawal to aise kiya ki sameer ko lage ki vo use chhed rahi hai magar uska chehre pe gussa tha.

“ab ye bhi koi puchhne ki baat hai!kar kya rahi ho yaar tum vaha?baki log to aa gaye vapas.”

“kaam hi kar rahi hu baba!yaha tak aayi to socha aas-paas ki & jagahen bhi dekh lu.unki tasveeren khinch lungi & unke details apni company ke database me daal dungi to aage zarurat pade to director photos dekh ke andaza laga sakta hai ki jagah uske kaam ki hai ya nahi.”

“to akele jane ki kya zarurat thi?kisi ko sath to rakhna tha.vaise bade door ki sochne lagi ho!”

“kya karen!nuksan se bachne ke liye door ki to sochni hi padti hai & kisi ko sath lati to company ke kaam pe asar padta na.”,rambha ne dekha deven hotel se bahar aa raha tha.usne sameer se thodi der & baat ki & phone kaat diya.

“dekho,hotel me kamra to mil gaya hai magar tum zara sabke samne aane se thoda bachan.”

“kyu?”,rambha shokhi se muskurayi.use laga ki deven ko baki mardon ka use ghurna pasand nahi.

“kyuki tum Mehra khandan ki bahu ho & sameer vale mamle ke baad log tumhari shakl pehchanane bhi lage hain..”,rambha car se utar gayi thi & dhoop ka chashma aankho pe rehne diya tha,”..koi pehchan lega to bekar me tumhare bare me baaten uchhlengi.”,rambha ne 1 scarf apne sar pe lapeta & deven ne hotel ke waiter ko aate dekh dicky khol di,”..& fir mujhe achha nahi lagta jab log tumhe lalchayi nigaho se dekhte hain.”,vo tezi se waiter ke peechhe-2 aage badh gaya.rambha muskurati uske peechhe chalne lagi.

“bas dekh hi sakte hai na!”,kamre me ghuste hi rambha ne apne aashiq ke gale me baahe daal di & uske gaal chumne lagi,”..kar to nahi sakte kkaha gayab ho gayi hi janemanuchh.”,usne uske chehre pe pyar se hath firaye,”..vo haq to kisi-2 ko hi hai.”,deven muskuraya & uski kamar ko baaho me kas chum liya.

“achha chalo.kuchh kha ke dekhne chalte hain Baalam Singh ka Devi Farm.”,deven ne uske gaal thapthapaye & bathroom me chala gaya.rambha ka fone baja to usne dekha ki Pranav ka fone tha.

“hello.”,muskurate hue usne fone uthaya.

“kaha gayab ho gayi ho janeman?..apne deewane ka zara bhi khayal nahi tumhe?”

“ishq me thoda tadapna bhi zaruri hota hai huzur!abhi tadapiye thoda.”

“are,thik se bolo na!ho kaha tum?”

“bas 1-2 din me vapas aa jaoongi.akele ghum ke dekh rahi thi ki kaisa lagta hai.”,deven bathroom se bahar aa use dekh raha tha.rambha uske kareeb gayi & use chuma & aankho se shant rehne ka ishara kiya.

“to kaisa laga?”

“bahut achha.koi deewana nahi pareshan karne wala.bahut sukun se hun!”

“tadpao mat yaar!jaldi vapas aao.kuchh bahut zaruri kaam hai tumse.”,pranav ki aavaz sanjida ho gayi thi.”

“kaisa kaam?”

“aao to bataunga.”

“thik hai.chalo,main fir fone karungi.ok?”

“ok,baby.bye!”

“bye!”,rambha ne dekha deven use sawaliya nigaho se dekha raha tha.

“mehra khandan me apni jagah banaye rakhne ke liye mujhe khel khelne padte hain.usi khel ka 1 mohra tha ye.”,rambha ne apne mobile ki or ishara kiya.uske chehre pe udasi ki chhaya dekha deven uske karib aaya & use baaho me bhar uske chehre ko payr se sehlaya.

“mujhe nahi pata ki kaun-2 hai tumhari zindagi me lekin job hi hain unse rishta rakhne ka faisla kewal tumhara hoga.main tumse kabhi bhi ye nahi kahunga ki meri vajah se tum kisi se apna koi nata todo.main tumhe chahta hum agar ye zaruri nahi ki tum bhi mujhe chaho.”

“aise kyu bol rahe hain?”,rambha ke aankho me chinta jhalaken lagi thi.

“are tum samjhi nahi meri baat.”,vo muskuraya,”..mera ye kehna hai ki main tumhe chahta hu & chhata rahunga lekin iska matlab ye nahi ki main tumhe baandhana chahta hu.tum azad khayal ladki ho & mujhe aise hi pasand ho.”

“oh..deven.”,rambha uske seene se lipat gayi,”..bas kuchh din &..1 baar main apne pati ko bewafai karne ka sabak sikha du fir main aapse door nahi jaoongi.”,rambha ki aankhe chhalchhala aayi thi.

“mujhe pura bharosa hai tumpe rambha.”,dono 1 dusre ko chumne lage ki darwaze pe dastak hui,waiter unka nashta leke aa gaya tha.

Sanaar ke bahri ilake me koi 10-12 chhote-2 farms the jinme Devi Farm sabse bada tha.baki farms to bas kanto ki tarose ghire the lekin devi farm ke charo taraf koi 10 ft oonchi deewar thi & uske upar bhi kanto ki taar lagi thi.

“sabziyo ke liye aisi security!”,deven car me baitha soch me pad gaya tha.raste ke dusri taraf farm ka main gate tha jo band tha & uske paar bhi kuchh nahi dikh raha tha,”..1 kaam karo us farm pe chalo.”,usne rambha ko road pe peechhe chhod aaye 1 farm ki or ishara kiya.rambha ne car ghuma di.

“are,sahib.aise mushroom aapko kahi nahi milenge.Mehra Farms ke mushroom ka bhi koi muqabla nahi humare mushroom se.”,rambha muskurayi us kisan ne use pehchana nahi tha.

“achha.par humne to suna tha ki sanaar me devi farm ke mushroom mashoor hain.”,kisan ke chehre ka rang badal gaya.

“achha!kaun bola aapko ye baat?”

“kyu?”

“jo bhi bola sahib aapko jhuth bola kyuki devi farm me to mushroom ugaya hi nahi jata.”,vo hansa.

“kya?!”

“ji,vaha to videshi salad ke patte ugaye jate hain.”,deven ne rambha ki or dekha.

“lettuce.”,usne use samjhaya.

“khair,aap hume sample dijiye fir hum aapke paas aayenge?”

“zaroor sahib ye lijiye.”,usne use kuchh packets pakdaye.

“1 baat puchhni thi.”

‘haan puchhiye.”

“aap sabhi ke farm to baskanto ki taar se ghire hain ye devi farm ki sabziyan kya awara janwaro ko kuchh zyada pasnad hai jo itni lambi-chaudi deewar khadi kar rakhi hai!”

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah.......

 
जाल पार्ट--58

गतान्क से आगे......

“मज़ाक करते हैं साहिब आप तो!”,किसान ने ठहाका लगाया,”..अरे बड़े आदमी की ज़मीन है साहब,उसका अपना तरीका.”

“अच्छा किसका फार्म है?”

“कोई बालम सिंग है साहिब.”

“मिले हैं आप उस से?”

“नही साहब.1-2 बार देखा है.ज़्यादा मिलता-जुलता नही हम सब से जबकि रहता यही है फार्म पे ही.”

“अच्छा.”,दोनो वाहा से निकल गये & वापस होटेल पहुचे.

“रंभा,तुम वापस चली जाओ.”,बिस्तर पे नंगी लेटी रंभा के दाए तरफ लेटा देवेन उसकी दाई चूची को चूस्ते हुए दाए हाथ की उंगलो उसकी चूत मे घुसा रहा था.

“क्यू?!”,रंभा ने हैरत से उसे देखा,”..आआअन्न्‍ननणणनह..!”,देवेन ने उसके जी-स्पॉट को दोबारा ढूंड लिया था.रंभा फिर से बेहोश जैसी हो गयी & बिस्तर पे निढाल पड़ गयी.उसका जिस्म थरथरा रहा था.देवेन ने उसकी चूत से उंगली निकाली & उसे निहारने लगा.कुच्छ पॅलो बाद रंभा जब खुमारी से बाहर आई तो उसने देवेन को बाहो मे जाकड़ लिया & उसके चेहरे & होंठो पे किसिज की झड़ी लगा दी,”..क्यू अलग कर रहे हैं मुझे खुद से?..”,उसने उसे पलट दिया & उसके उपर सवार हो गयी & उसके सीने को चूमने लगी,”.वैसे भी 2 दिनो मे तो जुदा होना ही है.”,रंभा की आँखो मे पानी था.देवेन ने उसे बाहो मे कस के चूम लिया & उसकी गंद दबाई.

“दिल तो करता है की तुम्हे अभी भगा के गोआ ले चलु.”,रंभा उसकी प्यार भरी बात सुन मुस्कुरा दी & उसके निपल्स को नखुनो से खरोंचा,”..लेकिन दयाल को ऐसे कैसे छ्चोड़ दू बिना सज़ा दिए?”,रंभा उसकी बात से संजीदा हो गयी.

“हां तो फिर मैं भी तो इसीलिए आई हू ना आपके साथ यहा तक..तो अब जाने को क्यू कह रहे हैं?”,उसने अपनी चूत को उसके लंड पे दबाया तो देवेन ने उसकी कमर पकड़ी & उसके जिस्म को उपर उठाया.रंभा उसका इशारा समझते हुए हाथ नीचे ले गयी & लंड को अपनी चूत का रास्ता दिखाया,”..ऊऊहह….!”

“क्यूकी यहा बहुत ख़तरा है.”,देवेन उसकी गंद को दबाते हुए नीचे से कमर उचका रहा था & रंभा उसके सीने पे अपनी भारी-भरकम चूचियाँ दबाए उसे चूमते हुए चुद रही थी,”..देखा नही कितनी ऊँची दीवार थी.उसका मतलब था कि वो कुच्छ च्छुपाना चाहता है दुनिया की नज़रो से.कोई ग़लत काम होता है वाहा & ये यहा की पोलीस या बाकी सरकारी लोगो की मिली-भगत के बिना मुमकिन नही..उउम्म्म्ममम..!”,उसने अपना सर उठाके रंभा की चूचियो को बारी-2 से मुँह मे भरना शुरू कर दिया.

“तो आप क्यू जा रहे हैं वाहा अकेले?..ओईईईईईईईई..!”,देवेन उसकी गंद मे उंगली घुसा रहा था & उसकी कमर अब तेज़ी से हिलने लगी थी.

“क्यूकी & कोई रास्ता नही,मेरी जान.”,रंभा ने मस्ती मे सर उपर कर लिया था & देवेन अब उसकी गर्देन चूम रहा था,”..मैं किसी तरह उस से मुलाकात कर ही लूँगा लेकिन अगर कुच्छ गड़बड़ हुई तो वो तुम्हारे पीछे आ सकते हैं.ये उसका इलाक़ा है & कोई ना कोई उसे बता ही देगा की तुम मेरे साथ देखी गयी थी..”,रंभा के होंठ खुले हुए थे मगर वो आह नही भर रही थी.उसने आँखे बिल्कुल कस के मीची हुई थी & उसकी कमर को जकड़े देवेन बहुत ज़ोर के धक्के लगा रहा था,”..इसीलिए हम यहा से अभी चेक आउट करेंगे & कह देंगे की वापस जा रहे हैं.तुम मुझे रास्ते मे उतार देना & खुद वापस क्लेवर्त चली जाना.”

“आन्न्‍ननणणनह..मुझे पास ही रखिए ना…..ऊऊहह..!”,वो उसकी जाकड़ मे कसमसाने लगी थी.देवेन ने उसके चेहरे के भाव देखे & उसकी चूत की हरकत महसूस की & समझ गया कि वो झाड़ गयी है.उसने फ़ौरन उसे पलट के अपने नीचे किया & चूमने लगा.

“प्लीज़ रंभा.मेरी बात मानो मेरी जान.”,वो उसे चूमते हुए चोद रहा था.रंभा मस्ती की इस लहर से नीचे उतरी नही थी की उसके प्रेमी ने उसे दूसरी लहर पे सवार करा दिया था,”..तुम वापस जाओ,मैं कल शाम 5 बजे तक अगर फोन ना करू तो समझलेना कि..-“,रंभा ने उसे 1 थप्पड़ लगाया & उचक के उसके होंठ अपने होंठो से सील दिए.उसकी आँखो के कोनो से 2 मोती की बूंदे उसके मस्ती मे & सुर्ख हो गये गालो पे ढालाक पड़ी.उसके जिस्म मे फुलझड़ियाँ छूट रही थी लेकिन दिल दिलबर की बात से उदास हो गया था.उसकी चूत सिकुड़ने लगी थी & उसकी तमन्ना की वो अपने महबूब के जिस्म के साथ 1 हो उस से हुमेशा-2 के लिए जुड़ी रहे,ना केवल उसके दिल बल्कि उसकी रूह मे भी पैबस्त हो गयी थी.देवेन का भी कुच्छ ऐसा ही हाल था & उसे यकीन नही हो रहा था की चंद घंटो मे ही वो लड़की उसकी ज़िंदगी बन गयी थी.रंभा झाड़ रही थी & जज़्बातो के तूफान से आहत हो ज़ोर-2 से सिसक रही थी.देवेन ने बाई बाँह उसकी गर्देन के नीचे लगा दाए हाथ मे उसके चेहरे को थाम उसे चूमते हुए अपनी मोहब्बत से उसे समझाने की कोशिश करने लगा & उसका लंड उसकी कोख को अपने वीर्य से भरने लगा.

शाम का ढुंदालका गहरा रहा था & देवेन झाड़ियो मे छुपा ये सोच रहा था कि देवी फार्म के अंदर घुसा कैसे जाए.उसने छुप-2 के फार्म की चारदीवारी के जायज़ा ले लिया था & उसे कही भी ऐसी कोई जगह नही दिखी जहा से अंदर जया जा सके.अब 1 ही रास्ता था की मेन गेट से घुसा जाए लेकिन गेट पे 2 हत्यारबंद गरॅड्स थे.उनके हथियार सामने तो नही थे मगर उनके कपड़ो के उभारो को देख समझ गया था कि उनकी बंदूके वही छिपि हैं.

तभी 1 काली टाटा सफ़ारी आती दिखी.वो कार गेट के सामने रुकी & उसका पीछे का 1 शीशा नीचे हुआ & अंडरबैठे आदमी ने बाहर पान की पीक फेंकी.देवेन की आँखे चमक उठी..यही था बालम सिंग.उसे बताया था उस आदमी ने की वो पान बहुत ख़ाता था फिर यहा का मालिक भी वही था.उसे गेट खोल सलाम ठोनकटे गुरदस से कार मे बैठा शख्स भी मालिक ही लग रहा था.

देवेन अब बेचैन हो उठा था.बालम सिंग को देख उसका दिल किया था कि उसी वक़्त दौड़ के कार से उसे उतार उस से दयाल के बारे मे पुच्छ ले लेकिन ऐसा करना बहुत बड़ी बेवकूफी होती.मगर उसकी तक़दीर शायद उसपे मेहेरबान थी.अंधेरा होते ही उसे 1 ट्रक आता दिखा.ट्रक गेट पे रुका & हॉर्न बजाया फिर ड्राइवर उतरा & गेट से बाहर आए 1 गार्ड से कुच्छ बात की.तब तक देवेन दबे पाँव च्छूपने की जगह से निकल ट्रक के पीछे आ गया था.देवेन ने देखा ड्राइवर & गार्ड ट्रक के बॉनेट के आगे बात कर रहे थे.उसने ट्रक के पीछे लगा कॅन्वस थोड़ा सा उठाके अंदर झाँका तो वो उसे खाली नज़र आया.वो फ़ौरन बिना आहट किए अंदर घुस गया.

"जल्दी चेक कर यार!",ड्राइवर गार्ड से बोल रहा था..देवेन घबरा गया..वो इधर आ रहे थे..उसने ट्रक मे इधर-उधर देखा & उसे 1 बड़ी सी प्लास्टिक शीट दिखी.वो फ़ौरन उसके नीचे घुस के लेट गया & अपनी साँसे रोक ली.

गार्ड आया & कॅन्वस उठाके टॉर्च की तेज़ रोशनी अंदर डाली,"ये क्या है भाई?"

"अरे प्लास्टिक शीट है,यार.",ड्राइवर ने जवाब दिया,"..माल को ढँकने के लिए.",उसने दबी आवाज़ मे कहा.

"हूँ.",गार्ड ने टॉर्च चारो तरफ घुमाई & फिर उतर गया.कुच्छ देर बाद ट्रक स्टार्ट हुआ & गेट खुलने की आवाज़ आई.ट्रक कोई 2 मिनिट तक चलने के बाद रुका.

"चढ़ाओ भाई समान.",ड्राइवर ट्रक से उतरा.

"अभी काफ़ी टाइम है भाई.जा खाना-वाना खा ले.",1 दूसरी आवाज़ आई,"..अभी 2 घंटे हैं."

"अच्छा.चलो तब तो खा के 1 नींद भी मार लेता हू!",ड्राइवर की आवाज़ दूर जा रही थी.देवेन शीट के नीचे से निकला & कॅन्वस हटा के बाहर देखने लगा.

“फ़र्ज़ करो की समीर नही है..”,महादेव शाह प्रणव के साथ अपने बुंगले के लॉन मे बैठा था.दोनो की सारी मुलाक़ातें यही होती थी केवल इसीलिए नही की बाहर उनके 1 साथ देखे जाने का उन्हे डर था पर इसीलिए भी की शाह बहुत ज़्यादा बाहर नही निकलता था.वो अपना सारा काम अपने बंगल से ही देखता था,”..तो उसके शेर्स रंभा को मिल जाएँगे.”

“हां.”

“तो ग्रूप की मालिको मे से सबसे मज़बूत पोज़िशन उसी की होगी है ना?”

“हां.”

“लेकिन ग्रूप को चलाने के लिए,रोज़ के फ़ैसले लेने के लिए 1 Cएओ की दरकार होगी.”

हां,वो ज़रूरत मैं पूरी करूँगा.”

“ऐसा तुम सोचते हो.”,शाह मुस्कुराया.

“मैं आपकी बात नही समझा.”

“तुम्हारा मानना है कि वो लड़की तुम्हारे कहे मे है & तुम्हे Cएओ की कुर्सी पे बिठाने मे वो ज़रा भी देर नही लगाएगी.”

“बिल्कुल.”

“प्रणव साहिब,दौलत के नशे से बड़ा नशा ताक़त का होता है.उस लड़की ने इनकार कर दिया तो?”

“मेरी सास रीता मेहरा & बीवी शिप्रा के पास भी शेर्स हैं.मैं बाकी शेर्होल्डर्स के साथ मिलके बोर्ड मीटिंग मे वोटिंग की बात कर सकता हू.”

“बिल्कुल कर सकते हो लेकिन वो लड़की भी ऐसा कर सकती है.”

“मगर कोई उसकी क्यू सुनेगा?!”,प्रणव झल्ला उठा था.

“क्यू नही सुनेगा!..प्रणव उसे कम मत आंको.समीर लापता हुआ था तब विजयंत मेहरा उसे दूध मे पड़ी मक्खी की तरह बाहर फेंक सकता था पर नही वो तो उसे अपने साथ ले गया अपने लड़के की तलाश मे.अगर विजयंत जैसा दिमाग़ दार शख्स ऐसा कर सकता है,इसका मतलब है वो लड़की मूर्ख तो नही है!”

“हां,ये तो है.”

“इसीलिए बहुत ज़रूरी है की उसे अपने काबू मे रखा जाए.”

“ब्लॅकमेल?”

“नाह..!”.शाह जैसे उसकी बात से झल्ला सा गया,”..ये बचकाने खेल हैं.मैं किसी तरह उस से मेलजोल बढ़ाता हू.मैं उस से तुम्हारी पैरवी नही करूँगा बल्कि उल्टे उसे ये एहसास कारवंगा की तुम मुझे पसंद नही करते & हम दोनो 1 दूसरे को देखना पसंद नही करते मगर जब वक़्त आएगा तो मैं भी उस से यही कहूँगा कि कंपनी की बागडोर संभालने के लिए तुमसे बेहतर शख्स कोई नही हो सकता.”

“& वो आपकी बात क्यू मानेगी?”

“दुश्मन की तारीफ से बड़ी तारीफ क्या हो सकती है!”,शाह मुस्कुरा रहा था,”..प्रणव,ट्रस्ट बहुत बड़ा जहाज़ है,बड़े से बड़ा तूफान झेलने का माद्दा है उसमे लेकिन अक्सर बड़े जहाज़ो को डूबने के लिए 1 छ्होटा सा सुराख ही काफ़ी होता है.हमे इस जहाज़ को समंदर का बादशाह बनके उसपे राज करना है,इसीलिए बहुत ज़रूरी है कि हम हर कदम फूँक-2 के उठाएँ.मुझे पता है कि मेरा प्लान ग़लत भी साबित हो सकता है लेकिन रंभा पे हर वक़्त नज़र रखने का & उसकी सोच को अपने हिसाब से मोड़ने का इस से बेहतर रास्ता मुझे नही दिख रहा.”

“हूँ.. ठीक है.जब वो डेवाले वापस लौटती है तो मैं आपको बताता हू फिर जो करना हो कीजिएगा.”,प्रणव खड़ा हो गया,”अब चलता हू.”,उसने शाह से हाथ मिलाया & वाहा से निकल गया.

--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

देवेन ट्रक से उतरा & चारो तरफ देखा.उसने देखा सामने 1 गोदाम जैसी इमारत थी.वो दबे पाँव उसके करीब गया & उसकी 1 खिड़की से अंदर झाँका.5 आदमी थे अंदर उस ड्राइवर समेट.1 किनारे 1 टेबल पे कुच्छ बर्तन रखे थे जिनमे से लेके वो पाँचो खाना खा रहे थे,”आराम से खाना.आज काफ़ी वक़्त है ,आराम से समान चढ़ाएँगे.”,बोलते हुए उस शख्स ने 1 कोने मे देखा तो देवेन की नज़र भी उधर गयी.वाहा फलों के गत्ते वाले कारटन रखे थे..यहा तो लेटास..सलाद के पत्ते उगाए जाते थे फिर ये सेब की तस्वीर वाले कारटन..वो सोच मे पड़ गया लेकिन उसे इस सब से क्या लेना-देना था.उसका मक़सद तो बालम सिंग से दयाल के बारे मे पुच्छना था.

वो वाहा से दबे पाँव दूसरी दिशा मे गया.सामने 1 बुंगला दिख रहा था मगर उसके आस-पास उसे बंदूक थामे लोग घूमते दिख रहे थे..उन कारटन्स मे कुच्छ तो ग़ैरक़ानूनी था.वो सोच मे पड़ गया की बालम सिंग तक पहुचे कैसे & उस से भी ज़रूरी बात की उस से मिलने के बाद यहा से निकले कैसे.कुच्छ ऐसा करना था कि फार्म के गेट उसके लिए खुद बा खुद खुलें & वो बाहर निकल जाए.क्या किया जा सकता था ऐसा..वो सोच रहा था कि उसकी निगाह 1 कोने मे पड़ी.

वो 1 गॅरेज था जहा अभी कोई नही था.वो उसके अंदर गया & उसे वाहा 1 फोन भी रखा दिखा..बस उसका काम हो गया.उसने फोन उठाया 101 नंबर घुमाया,”हेलो,फिरे ब्रिगेड..मैं देवी फार्म से बोल रहा हू..यहा आग लग गयी है..जल्दी आएँ वरना पूरा फार्म खाक हो जाएगा!”,घबराई आवाज़ मे बोल उसने फोन काट दिया.सनार था तो 1 गाँव मगर अपने फार्म्स की वजह से यहा की आमदनी से सरकार को भी काफ़ी मुनाफ़ा हो रहा था & अब ज़रूरत की बुनियादी चीज़ें यहा दिखने लगी थी.देवेन ने दिन मे ही बस ताज़ा खुले फिरे स्टेशन को देखा था.बस 1 दमकल की गाड़ी थी मगर थी तो!

उसके बाद उसने डीजल के कॅन खोल कर गॅरेज मे बहाना शुरू किया.सारे डीजल से गॅरेज को अच्छे से भिगोने के बाद उसने सिगरेट सुलगाई & 1 काश ले उसे ज़मीन पे फेंका & भागा वाहा से.चंद पॅलो मे ही गॅरेज धू-2 करके जल रहा था.आग की लपटें उसके साथ लगी उस गोदाम जैसी इमारत को भी च्छुने लगी थी.देवेन जिस ट्रक से आया था उस से थोड़ा हटके 1 दूसरा ट्रक भी लगा था.देवेन उसी मे च्छूपा था.उसने देखा कि फार्म मे कोहराम मच गया.सभी पानी लेके आग बुझाने की कोशिश मे लग गये.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.......

JAAL paart--58

gataank se aage......

“mazak karte hain sahib aap to!”,kisan ne thahaka lagaya,”..are bade aadmi ki zameen hai sahab,uska apna tarika.”

“achha kiska farm hai?”

“koi Baalam Singh hai sahib.”

“mile hain aap us se?”

“nahi sahab.1-2 baar dekha hai.zyada milta-julta nahi hum sab se jabki rehta yehi hai farm pe hi.”

“achha.”,dono vaha se nikal gaye & vapas hotel pahuche.

“rambha,tum vapas chali jao.”,bistar pe nangi leti rambha ke daye taraf leta deven uski dayi chhati ko chuste hue daye hath ki unglo uski chut me ghusa raha tha.

“kyu?!”,rambha ne hairat se use dekha,”..AAAAANNNNNNNHHHHHHH..!”,deven ne uske g-spot ko dobara dhoond liya tha.rambha fir se behosh jaisi ho gayi & bistar pe nidhal pad gayi.uska jism tharthara raha tha.deven ne uski chut se ungli nikali & use niharne laga.kuchh palo baad rambha jab khumari se bahar aayi to usne deven ko baaho me jakad liya & uske chehre & hotho pe kisse ki jhadi laga di,”..kyu alag kar rahe hain mujhe khud se?..”,usne use palat diya & uske uapr savar ho gayi & uske seene ko chumne lagi,”.vaise bhi 2 dino me to juda hona hi hai.”,rambha ki aankho me pani tha.deven ne use baaho me kas ke chum liya & uski gand dabayi.

“dil to karta hai ki tumhe abhi bhaga ke Goa le chalu.”,rambha uski pyar bhari baat sun muskura di & uske nipples ko nakhuno se kharoncha,”..lekin Dayal ko aise kaise chhod du bina saza diye?”,rambha uski baat se sanjida ho gayi.

“haan to fir main bhi to isiliye aayi hu na aapke sath yaha tak..to ab jane ko kyu keh rahe hain?”,usne apni chut ko uske lund pe dabaya to deven ne uski kamar pakdi & uske jism ko upar uthaya.rambha uska ishar samajhte hue hath neeche le gayi & lund ko apni chut ka rasta dikhaya,”..oooohhhhhhh….!”

“kyuki yaha bahut khatra hai.”,deven uski gand ko dabate hue neeche se kamar uchak raha tha & rambha uske seene pe apni bhari-bharkam chhatiya dabaye use chumte hue chud rahi thi,”..dekha nahi kitni oonchi deewar thi.uska matlab tha ki vo kuchh chhupana chahata hai duniya ki nazro se.koi galat kaam hota hai vaha & ye yaha ki police ya baki sarkari logo ki mili-bhagat ke bina mumkin nahi..uummmmmm..!”,usne apna sar uthake rambha ki chhatiyo ko bari-2 se munh me bharna shuru kar diya.

“to aap kyu ja rahe hain vaha akele?..ouiiiiiiiiiii..!”,deven uski gand me ungli ghusa raha tha & uski kamar ab tezi se hilne lagi thi.

“kyuki & koi rasta nahi,meri jaan.”,rambha ne masti me sar upar kar liya tha & deven ab uski garden chum raha tha,”..main kisi tarah us se mulakat kar hi lunga lekin agar kuchh gadbad hui to vo tumhare peechhe aa sakte hain.ye uska ilaka hai & koi na koi use bata hi dega kit um mere sath dekhi gayi thi..”,rambha ke honth khule hue the magar vo aah nahi bhar rahi thi.usne aankhe bilkul kas ke meechi hui thi & uski kamar ko jakde deven bahut zor ke dhakke laga raha tha,”..isiliye hum yahase abhi check out karenge & kah denge ki vapas ja rahe hain.tum mujhe raste me utar dena & khud vapas clayworth chali jana.”

“aannnnnnnhhhhhhh..mujhe paas hi rakhiye na…..oooohhhhhhhhhhh..!”,vo uski jakad me kasmasane lagi thi.deven ne uske chehre ke bhav dekhe & uski chut ki harkat mehsus ki & samajh gaya ki vo jhad gayi hai.usne fauran use palat ke apne neeche kiya & chumne laga.

“please rambha.meri baat mano meri jaan.”,vo use chumte hue chod raha tha.rambha masti ki is lehar se neeche utri nahi thi ki uske premi ne use dusri lehar pe sawar kara diya tha,”..tum vapas jao,main kal sham 5 baje tak agar fone na karu to samajhlen aki..-“,rambha ne use 1 thappad lagaya & uchak ke uske honth apne hotho se sil diye.uski aankho ke kono se 2 moti ki boonde uske masti me & surkh ho gaye galo pe dhalak padi.uske jism me phuljhadiyan chhut rahi thi lekin dil dilbar ki baat se udas ho gaya tha.uski chut sikudne lagi thi & uski tamanna ki vo apne mehboob ke jism ke sath 1 ho us se humesha-2 ke liye judi rahe,na keval uske dil balki uski rooh me bhi paibast ho gayi thi.deven ka bhi kuchh aisa hi haal tha & use yakin nahi ho raha tha ki chand ghanto me hi vo ladki uski zindagi ban gayi thi.rambha jahd rahi thi & jazbato ke toofan se aahat ho zor-2 se sisak rahi thi.deven ne bayi banh uski garden ke neeche laga daye hath me uske chehre ko tham use chumte hue apni mohabbat se use samjhane ki koshish karne laga & uska lund uski kokh ko apne virya se bharne laga.

Sham ka dhundalka gehra raha tha & Deven jhadiyo me chhupa ye soch raha tha ki Devi Farm ke andar ghusa kaise jaye.usne chhup-2 ke farm ki chardeewari ke jayza le liya tha & use kahi bhi aisi koi jagah nahi dikhi jaha se andar jaya ja sake.ab 1 hi rasta tha ki main gate se ghusa jaye lekin gate pe 2 hathyarband gurads the.unke hathyar samne to nahi the magar unke kapdo ke ubharo ko dekh samajh gaya tha ki unki bandooke vahi chhipi hain.

tabhi 1 kali Tata Safari aati dikhi.vo car gate ke samne ruki & uska peechhe ka 1 shisha neeche hua & andarbaithe admi ne bahar paan ki peek fenki.deven ki aankhe chamak uthi..yehi tha Baalam Singh.use batay tha us admi ne ki vo paan bahut khata tha fir yaha ka malik bhi vahi tha.use gate khol salam thonkte gurads se car me baitha shakhs bhi malik hi lag raha tha.

deven ab bechain ho utha tha.baalam singh ko dekh uska dil kiya tha ki usi waqt daud ke car se use utar us se Dayal ke bare me puchh le lekin aisa karna bahut badi bevkufi hoti.magar uski taqdeer shayad uspe meherban thi.andhera hote hi use 1 truck aata dikha.truck gate pe ruka & horn bajaya fir driver utra & gate se bahar aaye 1 guard se kuchh baat ki.tab tak deven dabe panv chhupne ki jagah se nikal truck ke peechhe aa gaya tha.deven ne dekha driver & guard truck ke bonnet ke aage baat kar rahe the.usne truck ke peechhe laga canvas thoda sa uthake andar jhanka to vo use khali nazar aaya.vo fauran bina aahat kiye andar ghus gaya.

"jaldi check kar yaar!",driver guard se bol raha tha..deven ghabra gaya..vo idhar aa rahe the..usne truck me idhar-udhar dekha & use 1 badi si plastic sheet dikhi.vo fauran uske neeche ghus ke let gaya & apni sanse rok li.

gurad aaya & canvas uthake torch ki tez roshni andar dali,"ye kya hai bhai?"

"are plastic sheet hai,yaar.",driver ne jawab diya,"..maal ko dhankne ke liye.",usne dabi aavaz me kaha.

"hun.",guard ne torch charo taraf ghumayi & fir utar gaya.kuchh der baad truck start hua & gate khulne ki aavaz aayi.truck koi 2 minute tak chalne ke baad ruka.

"chadhao bhai saman.",driver truck se utra.

"abhi kafi time hai bhai.ja khana-vana kha le.",1 dusri aavaz aayi,"..abhi 2 ghante hain."

"achha.chalo tab to kha ke 1 nind bhi maar leta hu!",driver ki aavaz door ja rahi thi.deven sheet ke neeche se nikla & canvas hata ke bahar dekhne laga.

“Farz karo ki Sameer nahi hai..”,Mahadev Shah Pranav ke sath apne bungle ke lawn me baitha tha.dono ki sari mulakaten yahi hoti thi keval isiliye nahi ki bahar unke 1 sath dekhe jane ka unhe darr tha par isiliye bhi ki shah bahut zyada bahar nahi nikalta tha.vo apna sara kaam apne bungle se hi dekhta tha,”..to uske shares Rambha ko mil jayenge.”

“haan.”

“to group ki maliko me se sabse mazbut position usi ki hogi hai na?”

“haan.”

“lekin group ko chalane ke liye,roz ke faisle lene ke liye 1 CEO ki darker hogi.”

Haan,vo zarurat main puri karunga.”

“aisa tum sochte ho.”,shah muskuraya.

“main aapki baat nahi samjha.”

“tumhara maanana hai ki vo ladki tumhare kahe me hai & tumhe CEO ki kursi pe bithane me vo zara bhi der nahi lagayegi.”

“bilkul.”

“pranav sahib,daulat ke nashe se bada nasha taqat ka hota hai.us ladki ne inkar kar diya to?”

“meri saas Rita Mehra & biwi Shipra ke paas bhi shares hain.main baki shareholders ke sath milke board meeting me voting ki baat kar sakta hu.”

“bilkul kar sakte ho lekin vo ladki bhi aisa kar sakti hai.”

“magar koi uski kyu sunega?!”,pranav jhalla utha tha.

“kyu nahi sunega!..pranav use kam mat aanko.sameer lapata hua tha tab Vijayant Mehra use doodh me padi makkhi ki tarah bahar fenk sakta tha par nahi vo to use apne sath le gaya apne ladke ki talash me.agar vijayant jaisa dimaghdar shakhs aisa kar sakta hai,iska matlab hai vo ladki moorkh to nahi hai!”

“haan,ye to hai.”

“isiliye bahut zaruri hai ki use apne kabu me rakha jaye.”

“blackmail?”

“naah..!”.shah jaise uski baat se jhalla sa gaya,”..ye bachkane khel hain.main kisi tarah us se meljol badhata hu.main us se tumhari pairwi nahi karunga balki ulte use ye ehsas karaunga ki tum mujhe pasand nahi karte & hum dono 1 dusre ko dekhna pasand nahi karte magar jab waqt aayega to main bhi us se yehi kahunga ki company ki bagdor sambhalne ke liye tumse behtar shakhs koi nahi ho sakta.”

“& vo aapki baat kyu manegi?”

“dushman ki tarif se badi tarif kya ho sakti hai!”,shah muskura raha tha,”..pranav,Trust bahut bada jahaz hai,bade se bada toofan jhelne ka madda hai usme lekin aksar bade jahazo ko dubane ke liye 1 chhota sa surakh hi kafi hota hai.hume is jahaz ko samandar ka badhshah banake uspe raaj karna hai,isiliye bahut zaruri hai ki hum har kadam phoonk-2 ke uthayen.mujhe pata hai ki mera plan galat bhi sabit ho sakta hai lekin rambha pe har waqt nazar rakhne ka & uski soch ko apne hisab se modne ka is se behtar rasta mujhe nahi dikh raha.”

“hun.. thik hai.jab vo Devalay vapas lautati hai to main aapko batata hu fir jo karna ho kijiyega.”,pranav khada ho gaya,”ab chalta hu.”,usne shah se hath milaya & vaha se nikal gaya.

--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

Deven truck se utra & charo taraf dekha.usne dekha samne 1 godam jaisi imarat thi.vo dabe panv uske karib gaya & uski 1 khidki se andar jhanka.5 aadmi the andar us driver smet.1 kinare 1 table pe kuchh bartan rakhe the jinme se leke vo pancho khana kha rahe the,”aaram se khana.aaj kafi waqt hai ,aaram se saman chadhayenge.”,bolte hue us shakhs ne 1 kone me dekha to deven ki nazar bhi udhar gayi.vaha phalon ke gatte vale carton rakhe the..yaha to lettuce..salad ke patte ugaye jate the fir ye seb ki tasvir vale carton..vo soch me pad gaya lekin use is sab se kya lena-dena tha.uska maqsad to Baalam Singh se Dayal ke bare me puchhna tha.

Vo vaha se dabe panv dusri disha me gaya.samne 1 bungla dikh raha tha magar uske aas-paas use bandook thame log ghumte dikh rahe the..un cartons me kuchh to gairkanooni tha.vo soch me pad gaya ki baalam singh tak phunche kaise & us se bhi zaruri baat ki us se milne ke baad yaha se nikle kaise.kuchh aisa karna tha ki farm ke gate uske liye khud ba khud khulen & vo bahar nikal jaye.kya kiya ja sakta tha aisa..vo soch raha tha ki uski nigah 1 kone me padi.

Vo 1 garage tha jaha abhi koi nahi tha.vo uske andar gaya & use vaha 1 fone bhi rakha dikha..bas uska kaam ho gaya.usne fone uthaya 101 number ghumaya,”hello,fire brigade..main Devi Farm se bol raha hu..yaha aag lag gayi hai..jaldi aayen varna pura farm khak ho jayega!”,ghabrayi aavaz me bol usne fone kaat diya.sanaar tha to 1 ganv magar apne farms ki vajah se yaha ki aamdani se sarkar ko bhi kafi munafa ho raha tha & ab zarurat ki buniyadi chizen yaha dikhne lagi thi.deven ne din me hi bas taza khule fire station ko dekha tha.bas 1 damkal ki gadi thi magar thi to!

Uske baad usne diesel ke can khol kar garage me bahana shuru kiya.sare diesel se garage ko achhe se bhigone ke baad usne cigarette sulgayi & 1 kash le use zamin pe fenka & bhaga vaha se.chand palo me hi garage dhoo-2 karke jal raha tha.aag ki lapten uske sath lagi us godam jaisi imarat ko bhi chhune lagi thi.deven jis truck se aaya tha us se thoda hatke 1 dusra truck bhi laga tha.deven usi me chhupa tha.usne dekha ki farm me kohram mach gaya.sabhi pani leke aag bujhane ki koshish me lag gaye.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah.......
 
जाल पार्ट--59

गतान्क से आगे......

अफ़रा-तफ़री का फ़ायदा उठाते हुए देवेन अपनी च्छूपने की जगह से निकला ,गॅरेज से उसने 1 रस्सी उठा ली थी जो कि अब उसके कंधे पे तंगी थी.वो बंगल की तरफ भागा,”आग लग गयी आग!”,वो बेतहाशा चीख रहा था.उसे पता था कि वो बहुत बड़ा ख़तरा उठा रहा है.अगर किसी को ज़रा भी अंदेशा हुआ कि वो घुसपैठिया है तो उसे गोली मारने मे वो ज़रा भी नही हिचकिचाएंगे लेकिन ये ख़तरा तो उसे उठाना ही था,”अरे खड़े-2 देख क्या रहे हो.आग बुझाने मे मदद करो!मैं बॉस को बुलाता हू!”,वो बंगल के दरवाज़े की ओर भाग रहा था.बंगल की रखवाली करते गार्ड्स थोड़े हिचकिचाते दिखे मगर देवेन ने जिस भरोसे के साथ उनसे बात की थी उन्हे उसपे शक़ नही हुआ था & वो आग बुझाने भागे,”कमाल हो यार तुम सब भी!हथियार लेके आग बुझा रहे हो.रखो यहा सब!”,उसे खुद पे हैरत हो रही थी.वो उन सबको ऐसे डाँट रहा था जैसे वो ही उनका बॉस हो!

उसने 1 गुंडे की छ्चोड़ी मशीन गन उठाई & अंदर भागा & उसकी किस्मेत की वो भागते आते बालम सिंग से टकराया,”क्या हुआ?..तुम कौन हो?”

“चुप!”,देवेन ने उसपे बंदूक तानि.बंगल के अहाते मे वो वही काली गाड़ी खड़ी थी जिसमे बालम सिंग वाहा आया था,”चुप चाप गाड़ी मे बैठ.चल!चिल्लाना मत वरना बस 1 बार ट्रिग्गर दबाउन्गा,उसके बाद मैं मर भी जाऊं तो मुझे परवाह नही.तू तो उपर पहुँच चुक्का होगा साले!”,

“द-देखो,तुम बच के नही जा सकते..”

“तो क्या हुआ कामीने..तू भी तो नही बचेगा..अगर जान प्यारी है तो बैठ गाड़ी मे ड्राइविंग सीट पे.”बालम सिंग आगे बैठा & पीछे देवेन,”..अब गाड़ी बुंगले से बाहर ले चल.”,उसने वैसा ही किया,”..गार्ड को कोई इशारा तक किया तो ट्रिग्गर दब जाएगा.”,पिच्छली सीट पे बैठे उसकी कमर के ठीक उपर बाई तरफ बंदूक की नाल सटी हुई थी.बालम सिंग जानता था कि पीछे बैठा आदमी जुनूनी है & वो कुच्छ भी कर सकता है.वो गाड़ी गेट तक ले गया & गार्ड से गेट खोलने को कहा.गाड़ी गेट से बाहर निकली & देवेन ने उसे हराड की ओर चलने को कहा.रास्ते मे बालम सिंग ने दमकल की गाड़ी को उसके फार्म की ओर जाते देखा.कुच्छ देर पहले वो कितना निश्चिंत बैठा टीवी देख रहा था & अब उसे ये भी पता नही था कि वो ज़िंदा बचेगा या नही & अगर बच भी गया तो उसका धंधा सलामत रहेगा या नही,”..उधर मोड़ झाड़ियो में..हां ..रोक!”

“आईईयईीई..क्या कर रहे हो?..मैं मर जाऊँगा..आहह..!”,देवेन ने पीछे से रस्सी उसके गले मे बाँध दी थी & फिर उसे लपेटते हुए बालम सिंग को गाड़ी की सीट से ही बाँध दिया था,”..तुम्हे चाहिए क्या?..पैसा..मैं मालामाल कर दूँगा तुम्हे..जो बोलो सो दूँगा..!”,घबराया बालम सिंग बके जा रहा था.

“दयाल.”

“हैं?”

“दयाल कहा है?”

“अरे कौन दयाल..मैं किसी दयाल को नही जानता..तुम्हे ग़लतफहमी..-“

‘-..चुप!याद कर जब तू गोपालपुर के साथ वाले कस्बे की जैल मे था.तू किसके साथ मिलके क़ैदियो को ग़ैरक़ानूनी चीज़ें मुहैय्या करता था..याद कर..!”

“वो..दयाल..”

“हां..याद आया.”

“कहा है वो कमीना?”

“मुझे क्या पता भाई!..वो तो भाग गया था वाहा से.”

“क्या?क्यू भागा था & कहाँ?”

“हां..अब मुझे क्या पता कहा गया वो..आहह..”

“झूठ मत बोल!”,गले मे बँधी रस्सी को देवेन ने ज़ोर से खींचा था & बालम सिंग की सांस रुकने लगी थी,”..तू उसके बारे मे जो भी जानता है मुझे बता वरना ये रस्सी अभी & कसेगी.”,देवेन ने रस्सी को & खींचा.

“आरर्ग्घह..आहह..बताता हू..ढीला करो इसे.”,देवेन ने रस्सी ढीली की,”..दयाल ..”,वो खांसने लगा,”..वाहा ड्रग्स का धंधा करता था.मैं उस से चर्स,गार्ड लेके अंदर क़ैदियो को बेचा करता था.वो बाकी चीज़ें भी सप्लाइ करता था मगर उसका असली धंधा ड्रग्स का ही था.”

“उसका धंधा तो चोरी के जवाहरात बेचना था?”

“नही.वो तो उसकी 1 चाल भर थी खुद को बचाने के लिए.नारकॉटैक्स ब्यूरो को इस बात की खबर लग गयी थी कि वो ड्रग्स का कारोबार करता है लेकिन उन्हे पता नही था कि वो कैसा दिखता है फिर दयाल उसका असली नाम था भी नही.”

“तो क्या था उसका असली नाम?”

“ये तो शायद केवल उसकी मा को पता होगा.साला,कपड़ो की तरह नाम बदलता था.उस वक़्त वो दयाल नाम इस्तेमाल कर रहा था.उसने 1 चाल चली जिसमे मैं भी शामिल था.उसने 1 दूसरे शख्स को अपनी जगह नारकॉटैक्स ब्यूरो के जाल मे फसाने की सोची.ब्यूरो का 1 एजेंट दयाल के पीछे-2 गोपालपुर तक आ पहुँचा था.

“मैने उसे उस शख्स के बारे मे बता दिया जिसे दयाल अपनी जगह गिरफ्तार करवाना चाहता था.”

“अच्छा,कौन था वो?”,देवेन की आवाज़ का गुस्सा अब बहुत ख़तरनाक लग रहा था लेकिन बेचारे बालम सिंग को इसका एहसास नही था.

“पता नही.मैं उसका नाम नही जानता था..हां,उसकी कोई प्रेमिका थी..मैने दयाल केकेहने पे उसे ये बताया कि उसका प्रेमी ग़लत काम कर रहा है & अगर वो 1 बार पोलीस की मदद कर दे तो वो उसे पकड़ के उस से चोरी का माल बरामद कर उसे छ्चोड़ देंगे फिर वो उसे समझा-बुझा के अपने साथ ले जा सकती है.”..तो ये बात थी!इन कामीनो ने उसकी सुमित्रा का इस्तेमाल किया था उसके खिलाफ.

“फिर क्या हुआ?”

“वो बड़ी भोली थी.मान गयी हमारी बात & सीधा उस नारकॉटैक्स एजेंट को बता दिया अपने आशिक़ के बारे मे & फिर वो पकड़ा गया.दयाल का काम हो गया.”

“लेकिन 1 बार वो कोलकाता गया था उस लड़की के साथ?”

“हां,साला जितना शातिर था उतना हिम्मती भी.उस लड़की को ले गया कोलकाता ये भरोसा दिलाके की अब वो उसके प्रेमी को छुड़ा के ले आएगा.उसे इस बात का डर भी नही था कि वो पकड़ा जाएगा.उसका कहना था कि जब ‘दयाल’पोलीस की गिरफ़्त मे है तो कोई उसपे हाथ क्यू डालेगा!..हुंग!..जब वो लड़की वाहा पहुँची & ये सुना कि उसका प्रेमी 1 ड्रग स्मग्लर था तो उसका दिल टूट गया & वो वापस आ गयी & दयाल उसे दिलासा देने के बाद मुल्क से रफूचक्कर हो गया.”..दोस्ती का नाम लेके कितना बड़ा खेल खेला था उस कामीने ने & अपने जाल मे फँसा 2 प्यार भरे दिलो को हमेशा-2 के लिए जुदा कर दिया था उसने..& वो अपनी सुमित्रा को धोखेबाज़ समझता रहा & सुमित्रा उसे 1 गलिज़ मुजरिम!

“दयाल गया कहा आख़िर?”

“मुझे नही मालूम.”

“बोल?”,रस्सी कस गयी.”

“उउन्नगगगगगघह..सच..के..हता..हू..!”,वो सच कह रहा था.देवेन ने रस्सी ढीली की & अपनी जेब से रुमाल निकाला & उस बंदूक को पोंच्छा.उसके बाद कार की पिच्छली सीट से उतरा & आगे का दरवाज़ा खोल उस गन के पिच्छले हिस्से को बालम सिंग के माथे पे दे मारा.चीख मार वो बेहोश हो गया.20 मिनिट बाद उस जगह से 1किमी दूर पहाड़ी रास्ते के किनारे क्की खाई मे कुच्छ गिरने की बहुत ज़ोर की आवाज़ आई.1 शख्स ने बहुत दूर से देखा था & उसने पोलीस को यही बताया था की कोई जलती सी चीज़ खाई मे गिरी थी.अगले रोज़ बालम सिंग की राख हो चुकी लाश बंदूक के साथ खाई मे गाड़ी की अगली सीट पे पड़ी मिली थी.

देवेन आँसू बहाता रास्ते पे पैदल चला जा रहा था.उसे बालम सिंग के बेहोश जिस्म को उसी की कार के पेट्रोल से नहला के आग लगाके कार समेत खाई मे धकेलने का गम नही था,उसे गम था कि वो अपनी सुमित्रा को सच्चाई नही बता सका की वो मुजरिम नही था.उसके साथ 1 बेहतर ज़िंदगी गुज़ारने के लालच का फयडा उठाया था उस कामीने ने..& वो कमीना भी गायब था अब..पता नही कहा..कैसे सज़ा देगा उसे वो..आख़िर कैसे?

वो 1 ढाबे पे पहुँचा & हाथ-मुँह धोया.वो जानता था कि पोलीस अब 1 काली कमीज़ & काली जेनस वाले शख्स की तलाश मे होगी.गाल का निशान किसी ने देखा या नही ये उसे पता नही था मगर ये बहुत मुमकिन था कि उन्हे ये पता चल जाए कि 2 लोग वाहा मशरूम की पैदावार के बारे मे पता करने आए थे.उसने पहले ही अपना & रंभा का झूठा नाम लिखवाया था.भला हो गोआ के उसके दोस्तो का जो उन्होने बिल्कुल असली दिखने वाली फ़र्ज़ी ईद उसे मुहैय्या कराई हुई थी.अब उसे रंभा को खबर करनी थी लेकिन हो सकता है कि बाद मे पोलीस सारे इलाक़े मे इस वक़्त की गयी फोन कॉल्स को खंगले.उसे कोई बहुत महफूज़ लाइन खोजनी थी फोन करने के लिए..हां!

उसने 1 ट्रक मे लिफ्ट ली & हराड की ओर बढ़ा.हराड से थोड़ा पहले 1 गाँव था जहा उसने 1 डाक खाना देखा था.वो उस गाँव से थोड़ा आगे उतरा..वो कोई चान्स नही ले रहा था..अगर ट्रक ड्राइवर को वो याद भी रहा तो वो यही कहेगा की वो गाँव से आगे उतरा था.डाक खाने के अंदर घुसना उतना आसान नही था जितना उसने सोचा था.पुराने अंदाज़ की लोहे की च्छड़ो वाली खिड़कियाँ थी & दरवाज़े पे बड़ा सा ताला.वो मायूस हो वाहा से जा ही रहा था कि उसकी निगाह फूस के छप्पर पे पड़ी & अगले ही पल इक्का-दुक्का घूमते लोगो की नज़र बचा वो छप्पर पे चढ़ गया था & फिर पेट के बल लेट के फूस हटा थोड़ी देर बाद अंदर उतर चुका था.

“हेलो,रंभा.कहा हो तुम?”

“आप कहा हैं?ठीक है ना आप?..जल्दी आइए ना!मुझे कुच्छ बहुत ज़रूरी बताना है आपको..प्लीज़ आप फ़ौरन यहा आइए.”

“क्या बताना है & आऊँ कहा?..सब ठीक तो है ना?”

“हां,सब ठीक है.पर..पर..ओफ्फो..आप आइए ना यहा?!”

“अरे मगर बताओ तो कहा?”,उस तनाव भरे माहौल मे भी देवेन को हँसी आ गयी.

हराड & उस डाक खाने वाले गाँव के बीच 1 रास्ता मैं रोड से उतर के अंदर जाता था.उसी पे 1 गाँव था भूमल.1 बरसाती नदी बहती थी उस तरफ से जिसमे अभी उतना पानी नही था.बरसात के आसपास वो जगह बड़ी खूबसूरत हो जाती थी & नदी मच्चलियो से भर जाती थी.मच्चली मारने वालो का मजमा लगा रहता था उसके किनारे.अब रंभा के हाथ वाहा कौन सी मच्चली लग गयी थी यही देखने देवेन वाहा जा रहा था.1 लेट नाइट बस सर्विस की बस को हाथ देके उसने रोका & उसमे सवार हो गया.जब वो बस मे चढ़ा तो उसमे बैठी सवारीयो को कोई काली कमीज़ & पतलून पहना शख्स नही बल्कि पीली चेक की कमीज़ & काली पतलून पहना चेहरे पे गम्छा ओढ़े देहाती सा शख्स दिखा.ये कमीज़ उसने गाँव के 1 घर के बाहर सुख़्ते कपड़ो मे से उठा ली थी & गंच्छा उसे पोस्ट ऑफीस मे ही पड़ा मिल गया था.उसकी कमीज़ अभी उसके कंधे पे लटके 1 झोले मे थी जोकि किसी डाकिये ने पोस्टॉफ़्फिसे मे रख छ्चोड़ा था.

1 घंटे बाद वो बस से उतरा & भूमल की ओर जा रहे रास्ते पे पैदल चलने लगा कि तभी सामने से उसे किसी गाड़ी की हेडलाइट्स दिखी.वो मुस्कुराता खड़ा हो गया.गाड़ी उसके करीब आई & उसकी खिड़की का शीशा नीचे हुआ,”हा..हा..ये क्या हुलिया बना रखा है!”,रंभा हँसने लगी.1 पल को सुमित्रा की शक्ल नाच उठी देवेन की आँखो के सामने..हंसते वक़्त वो बिल्कुल सुमित्रा जैसी लग रही थी,”..क्या हुआ?”,रंभा ने हँसना बंद किया & खुद को 1 तक देखते देवेन से पुचछा.

“बाद मे बताउन्गा.”,देवेन खिड़की के पास आया & उसका माथा चूमा,”..अब बताओ क्या दिखाना चाहती थी मुझे?”,रंभा अचानक संजीदा हो गयी.सच तो ये था की जबसे वो भूमल आई थी उसके होश-हवस उड़ गये थे.वो खुश तो बहुत हुई थी लेकिन साथ ही 1 अंजाना डर भी उसके दिल मे पैदा हो गया था.वो तो देवेन का हुलिया देख उसे हँसी आ गयी &1 पल को वो सब भूल गयी थी.

“चलिए.”,देवेन बैठा तो रंभा ने कार घुमाई.

“तुम यहा कैसे आ गयी?”

“मेरा मन नही माना की आपको अकेला छ्चोड़ू लेकिन आपकी बात मना करना भी ठीक नही लग रहा था.इसी उधेड़बुन मे मुझे बोर्ड दिखा & मुझे यहा की बरसाती नदी की याद आ गयी.उसके बारे मे बहुत सुना था.तो सोचा कि उसे भी देख लू लेकिन दरअसल मैं आगे बढ़ना टाल रही थी.”,देवेन उसकी बात सुन मुस्कुराया.

“पर तुम्हे मिला क्या है?”

“वही चल के देख लीजिएगा.”,कोई 40 मिनिट & ड्राइव करने के बाद वो दोनो भूमल पहुँच गये थे.यहा बिजली नही थी & घरो मे लालटेने जल रही थी.नदी की कल-2 की आवाज़ भी आ रही थी.रंभा गाड़ी से उतरी & टॉर्च से रास्ता दिखाते उसे ले जाने लगी.1 घर की आगे पहुँच वो रुक गयी.उस घर की चौखट के 1 किनारे उसके बरामदे मे कोई बैठा था.अंधेरे मे देवेन को उसकी शक्ल नही दिख रही थी बस इतना पता चल रहा था कि वो शख्स ज़मीन पे चादर या दुशाला ओढ़े बैठा है.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.......

JAAL paart--59

gataank se aage......

Afra-tafri ka fayda uthate hue Deven apni chhupne ki jagah se nikla ,garage se usne 1 rassi utha lit hi jo ki ab uske kandhe pe tangi thi.vo bungle ki taraf bhaga,”aag lag gayi aag!”,vo betahasha chikh raha tha.use pata tha ki vo bahut bada khatra utha raha hai.agar kisi ko zara bhi andesha hua ki vo ghuspaithiya hai to use goli marne me vo zara bhi nahi hichkichayenge lekin ye khatra to use uthaan hi tha,”are khade-2 dekh kya rahe ho.aag bujhane me madad karo!main boss ko bulata hu!”,vo bungle ke darwaze ki or bhag raha tha.bungle ki rakhwali karte guards thode hichkichate dikhe magar deven ne jis bharose ke sath unse baat kit hi unhe uspe shaq nahi hua tha & vo aag bujhane bhage,”kamal ho yaar tum sab bhi!hathyar leke aag bujha rahe ho.rakho yaha sab!”,use khud pe hairat ho rahi thi.vo un sabko aise dant raha tha jaise vo hi unka boss ho!

Usne 1 gunde ki chhodi machine gun uthayi & andar bhaga & uski kismet ki vo bhagte aate Baalam Singh se takraya,”kya hua?..tum kaun ho?”

“chup!”,deven ne uspe bandook tani.bungle ke ahate me vo vahi kali gadi khadi thi jisme baalam singh vaha aaya tha,”chup chap gadi me baith.chal!chillana mat varna bas 1 baar trigger dabaunga,uske baad main mar bhi jaoon to mujhe parwah nahi.tu to upar pahunch chukka hoga sale!”,

“d-dekho,tum bach ke nahi ja sakte..”

“to kya hua kamine..tu bhi to nahi bachega..agar jaan pyari hai to baith gadi me driving seat pe.”baalam singh aage baitha & peechhe deven,”..ab gadi bungle se bahar le chal.”,usne vaisa hi kiya,”..guard ko koi ishara tak kiya to trigger dab jayega.”,pichhli seat pe baithe uski kamar ke thik upar bayi taraf bandook ki naal sati hui thi.baalam singh janta tha ki peechhe baitha aadmi junooni hai & vo kuchh bhi kar sakta hai.vo gadi gate tak le gaya & guard se gate kholne ko kaha.gadi gate se bahar nikli & deven ne use haraad ki or chalne ko kaha.raste me baalam singh ne damkal ki gadi ko uske farm ki or jate dekha.kuchh der pehle vo kitna nishchint baitha tv dekh raha tha & ab use ye bhi pata nahi tha ki vo zinda bachega ya nahi & agar bach bhi gaya to uska dhandha salamat rahega ya nahi,”..udhar mod jhadiyo men..haan ..rok!”

“aaiiyyeeee..kya kar rahe ho?..main mar jaoonga..aahhhhhhh..!”,deven ne peechhe se rassi uske gale me bandh di thi & fir use lapetate hue baalam singh ko gadi ki seat se hi bandh diya tha,”..tumhe chahiye kya?..paisa..main malamal kar dunga tumhe..jo bolo so dunga..!”,ghabaraya baalam singh bake ja raha tha.

“Dayal.”

“hain?”

“dayal kaha hai?”

“are kaun dayal..main kisi dayal ko nahi janta..tumhe galatfehmi..-“

‘-..chup!yaad kar jab tu Gopalpur ke sath vale kasbe ki jail me tha.tu kiske sath milke qaidiyo ko gairkanooni chizen muhaiyya karata tha..yaad kar..!”

“vo..dayal..”

“haan..yaad aaya.”

“kaha hai vo kamina?”

“mujhe kya pata bhai!..vo to bhag gaya tha vaha se.”

“kya?kyu bhaga tha & kahan?”

“haan..ab mujhe kya pata kaha gaya vo..aahhhhh..”

“jhuth mat bol!”,gale me bandhi rassi ko deven ne zor se khincha tha & baalam singh ki sans rukne lagi thi,”..tu uske bare me jo bhi janta hai mujhe bata varna ye rassi abhi & kasegi.”,deven ne rassi ko & khincha.

“aarrgghhhhh..aahhhhhh..batata hu..dhila karo ise.”,deven ne rassi dhili ki,”..dayal ..”,vo khansne laga,”..vaha drugs ka dhandha karta tha.main us se chars,gard leke andar qaidiyo ko becha karta tha.vo baki chizen bhi supply karta tha magar uska asli dhandha drugs ka hi tha.”

“uska dhandha to chori ke jawaharat bechna tha?”

“nahi.vo to uski 1 chaal bhar thi khud ko bachane ke liye.narcotics bureau ko is baat ki khabar lag gayithi ki vo drugs ka karobar karta hai lekin unhe pata nahi tha ki vo kaisa dikhta hai fir dayal uska asli naam tha bhi nahi.”

“to kya tha uska asli naam?”

“ye to shayad keval uski maa ko pata hoga.sala,kapdo ki tarah naam badalta tha.us waqt vo dayal naam istemal kar raha tha.usne 1 chal chali jisme main bhi shamil tha.usne 1 dusre shakhs ko apni jagah narcotics bureau ke jaal me phasane ki sochi.bureau ka 1 agent dayal ke peechhe-2 gopalpur tak aa pahuncha tha.

“maine use us shakhs ke bare me bata diya jise dayal apni jagah giraftar karwana chahta tha.”

“achha,kaun tha vo?”,deven ki aavaz ka gussa ab bahut khatarnak lag raha tha lekin bechare baalam singh ko iska ehsas nahi tha.

“pata nahi.main uska naam nahi janta tha..haan,uski koi premika thi..maine dayal kekehne pe use ye bataya ki uska premi galat kaam kar raha hai & agar vo 1 baar police ki madad kar de to vo use pakad ke us se chori ka maal baramad kar use chhod denge fir vo use samjha-bujha ke apne sath le ja sakti hai.”..to ye baat thi!in kamino ne uski Sumitra ka istemal kiya tha uske khilaf.

“fir kya hua?”

“vo badi bholi thi.maan gayi humari baat & seedha us narcotics agent ko bata diya apne aashiq ke bare me & fir vo pakda gaya.dayal ka kaam ho gaya.”

“lekin 1 baar vo Kolkata gaya tha us ladki ke sath?”

“haan,sala jitna shatir tha utna himmati bhi.us ladki ko le gaya Kolkata ye bharosa dilake ki ab vo uske premi ko chhuda ke le ayega.use is baat ka darr bhi nahi tha ki vo pakda jayega.uska kehna tha ki jab ‘dayal’police ki giraft me hai to koi uspe hath kyu dalega!..hunh!..jab vo ladki vaha pahunchi & ye suna ki uska premi 1 drug smuggler tha to uska dil toot gaya & vo vapas aa gayi & dayal use dilasa dene ke baad mulk se rafuchakkar ho gaya.”..dosti ka naam leke kitna bada khel khela tha us kamine ne & apne jaal me phansa 2 pyar bhare dilo ko humesha-2 ke liye juda kar diya tha usne..& vo apni sumitra ko dhokhebaz samajhta raha & sumitra use 1 galiz mujrim!

“dayal gaya kaha aakhir?”

“mujhe nahi maloom.”

“bol?”,rassi kas gayi.”

“uunngggggghhhhhhh..sach..ke..hta..hu..!”,vo sach keh raha tha.deven ne rassi dhili ki & apni jeb se rumal nikala & us bandook ko ponchha.uske baad car ki pichhli seat se utra & aage ka darwaza khol us gun ke pichhle hisse ko baalam singh ke mathe pe de mara.chikh maar vo behosh ho gaya.20 minute baad us jagah se 1km door pahadi raste ke kinare kki khayi me kuchh girne ki bahut zor ki aavaz aayi.1 shakhs ne bahut door se dekha tha & usne police ko yehi bataya tha ki koi jalti si chiz khayi me giri thi.agle roz baalam singh ki rakh ho chuki lash bandook ke sath khayi me gadi ki agli seat pe padi mili thi.

Deven aansu bahata raste pe paidal chala ja raha tha.use baalam singh ke behosh jism ko usi ki car ke petrol se nehla ke aag lagake car samet khayi me dhakelne ka ghum nahi tha,use ghum tha ki vo apni sumitra ko sachchai nahi bata saka ki vo mujrim nahi tha.uske sath 1 behtar zindagi guzarne ke lalach ka fayda uthaya tha us kamine ne..& vo kamina bhi gayab tha ab..pata nahi kaha..kaise saza dega use vo..aakhir kaise?

Vo 1 dhabe pe pahuncha & hath-munh dhoya.vo janta tha ki police ab 1 kali kamiz & kali jenas vale shakhs ki talash me hogi.gaal ka nishan kisi ne dekha ya nahi ye use pata nahi tha magar ye bahut mumkin tha ki unhe ye pata chal jaye ki 2 log vaha mushroom ki paidavar ke bare me paat karne aaye the.usne pehle hi apna & Rambha ka jhutha naam likhwaya tha.bhala ho Goa ke uske dosto ka jo unhone bilkul asli dikhne vali farzi ID use muhaiyya karayi hui thi.ab use rambha ko khabar karni thi lekin ho sakta hai ki baad me police sare ilake me is waqt ki gayi phone calls ko khangale.use koi bahut mehfuz line khojni thi fone karne ke liye..haan!

Usne 1 truck me lift li & haraad ki or badha.haraad se thoda pehle 1 ganv tha jaha usne 1 daak khana dekha tha.vo us ganv se thoda aage utra..vo koi chance nahi le raha tha..agar truck driver ko vo yaad bhi raha to vo yehi kahega ki vo ganv se aage utra tha.daak khane ke andar ghusna utna aasan nahi tha jitna usne socha tha.purane andaz ki lohe ki chhado vali khidkiyan thi & darwaze pe bada sa tala.vo mayus ho vaha se ja hi raha tha ki uski nigah phus ke chhappar pe padi & agle hi pal ikka-dukka ghumte logo ki nazar bacha vo chhappar pe chadh gaya tha & fir pet ke bal let ke phus hata thodi der baad andar utar chuka tha.

“hello,rambha.kaha ho tum?”

“aap kaha hain?thik hai na aap?..jaldi aaiye na!mujhe kuchh bahut zaruri batana hai aapko..please aap fauran yaha aaiye.”

“kya batana hai & aaoon kaha?..sab thik to hai na?”

“haan,sab thik hai.par..par..offoh..aap aaiye na yaha?!”

“are magar batao to kaha?”,us tanav bhare mahaul me bhi deven ko hansi aa gayi.

Haraad & us daak khane vale ganv ke beech 1 rasta main road se utar ke andar jata tha.usi pe 1 ganv tha Bhumal.1 barsati nadi behti thi us taraf se jisme abhi utna pani nahi tha.barsaat ke aaspaas vo jagah badi khubsurat ho jati thi & nadi machhliyo se bhar jati thi.machhli marne valo ka majma laga rehta tha uske kinare.ab rambha ke hath vaha kaun si machhli lag gayi thi yehi dekhne deven vaha ja raha tha.1 late night bus service ki bus ko hath deke usne roka & usme savar ho gaya.jab vo bus me chadha to usme baithi savariyo ko koi kali kamiz & patloon pehna shakhs nahi balki pili check ki kamiz & kali patlun pehna chehre pe gamchha odhe dehati sa shakhs dikha.ye kamiz usne ganv ke 1 ghar ke bahar sukhte kapdo me se utha lit hi & gamchha use post office me hi pada mil gaya tha.uski kamiz abhi uske kandhe pe latke 1 jhole me thi joki kisi dakiye ne postoffice me rakh chhoda tha.

1 ghante baad vo bus se utra & bhumal ki or ja rahe raste pe paidal chalne laga ki tabhi samne se use kisi gadi ki headlights dikhi.vo muskurata khada ho gaya.gadi uske karib aayi & uski khidki ka shisha neeche hua,”haa..haa..ye kya huliya bana rakha hai!”,rambha hansne lagi.1 pal ko sumitra kio shakl nach uthi deven ki aankho ke samne..hanste waqt vo bilkul sumitra jaisi lag rahi thi,”..kya hua?”,rambha ne hansna band kiya & khud ko 1 tak dekhte deven se puchha.

“baad me bataunga.”,deven khidki ke paas aaya & uska matha chuma,”..ab batao kya dikhana chhati thi mujhe?”,rambha achanak sanjida ho gayi.sach to ye tha ki jabse vo bhumal aayi thi uske hosh-hawas ud gaye the.vo khush to baht hui thi lekin sath hi 1 anjana darr bhi uske dil me paida ho gaya tha.vo to deven ka huliya dekh use hansi aa gayi &1 pal ko vo sab bhul gayi thi.

“chaliye.”,deven baitha to rambha ne car ghumayi.

“tum yaha kaise aa gayi?”

“mera man nahi mana ki aapko akela chhodu lekin aapki baat mana karna bhi thik nahi lag raha tha.isi udhedbun me mujhe board dikha & mujhe yaha ki barsati nadi ki yaad aa gayi.uske bare me bahut suna tha.to socha ki use bhi dekh lu lekin darasal main aage badhna taal rahi thi.”,deven uski baat sun muskuraya.

“par tumhe mila kya hai?”

“vahi chal ke dekh lijiyega.”,koi 40 minute & drive karne ke baad vo dono bhumal pahunch gaye the.yaha bijli nahi thi & gharo me laltene jal rahi thi.nadi ki kal-2 ki aavaz bhi aa rahi thi.rambha gadi se utri & torch se rasta dikhate use le jane lagi.1 ghar kea age pahunch vo ruk gayi.us ghar ki chaukhat ke 1 kinare uske baramde me koi baitha tha.andhere me deven ko uski shakl nahi dikh rahi thi bas itna pata chal raha tha ki vo shakhs zamin pe chadar ya dushala odhe baitha hai.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah.......

 
Back
Top