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Kamukta हाए मम्मी मेरी लुल्ली

सलोनी बेटे के चेहरे को अपने हाथों में थाम लेती है और उसके होंठो पर प्यार के कई मीठे और कोमल चुंबन अंकित करती है |

"जानते हो तुम्हारा लौड़ा कितना लंबा मोटा है... खास कर तुम्हारे पिता की तुलना में...... और मेरी इस चूत में तुम्हारे पिता के अलावा और किसी का लौड़ा नही घुसा, इसलिए अब जब तुम इतना लंबा मोटा मेरी नाज़ुक सी चूत में घुसाओगे तो मुझे तकलीफ़ होगी ना और उपर से तुम ताबड़तोड़ धक्के मारने चालू कर देते हो" सलोनी बेटे को समझाने के अंदाज़ में बोल रही थी और राहुल समझ भी रहा था, मगर बेचारा करता भी तो क्या| सलोनी की जालिम ज्वानी तो बड़े बड़ों के होश उड़ा सकती थी तो उसका बेटा कैसे बच सकता था | बहरहाल बेटे के चेहरे पर पछतावे और शर्मिंदगी के भाव देख सलोनी को उस पर बेहद प्यार आता है | वो फिर से उसके कोमल होंठो पर कई चुंबन अंकित करती है |

"मेरे लाल मैं तेरे पास हूँ....... बस एक बार मेरी टाइट चूत को थोडा सा खुल जाने दे फिर चाहे पूरी रात अपनी मम्मी पर चढ़े रहना और जैसा तेरा दिल में आए मेरी चूत मारना .......... " सलोनी की बात पर राहुल हल्का सा सर हिलाकर सहमति प्रकट करता है | वो तो इतने से ही खुश था कि उसे अपनी मम्मी चोदने को मिल रही थी |

"तो चलो अब शुरू हो जायो..... लेकिन आराम आराम से ...... बिल्कुल प्यार प्यार से ....... मैं चाहती हूँ तू खूब लंबे समय तक मेरी चुदाई करे ....... आआअहह ......... और ..... और ऐसा तभी होगा ..... जब तू धीरे धीरे छोड़ेगा ..... ऊऊहह .......... हाए तू नही जानता कितने दिनों से तरस रही हूँ चुदवाने के लिए ........... आआहह ............ आज जाकर तूने जो मेरी चुदाई की तो कुछ राहत मिली है नही तो मेरी चूत तो भट्टी की तरह जल रही थी .......... उउफफफ़फ़गग बस ऐसे ही ........." सलोनी फिर से अपनी टाँगे राहुल की कमर पर लपेट कस देती है और उसका हाथ फिर से राहुल की गांड पर पहुँच जाता है | उसकी उंगली जल्द ही फिर से राहुल की गांड के अंदर घुस जाती है | वो जानती थी कि इससे राहुल की सनसनी और भी बढ़ेगी और उसे और भी अधिक मज़ा आएगा | सलोनी का सोचना बिल्कुल सही था, उंगली गांड में घुसते ही राहुल के मुँह से 'आअहह' करके एक तीखी सिसकी निकलती है और वो अपनी मम्मी के मुम्मो को कस कस कर मसलने लगता है |

"बस ऐसे ही .......... ऐसे ही बेटा ...... आआहह ..... आराम आराम से ......... आराम आराम से चोद मेरे लाल अपनी मम्मी को ......... हाए तेरी मम्मी की चूत .............. आहह ........... उउउफफफफ़फ्ग ........ बहुत नाज़ुक है ........ और ....... और तेरा लंड बहुत मोटा है ........ उफफफफफफफफ्फ़ ...... सच में बहुत मोटा है तेरा ...... देख कैसे फँस रहा है ......... देख कैसे तेरी मम्मी की चूत रगड़ रहा है ....... "
 
"हाए तो मज़े ले ले अपनी मम्मी की टाइट चूत के ........ लूट ले मज़े ......... उउफफफफफफ्फ़ .......... अराम से कम्बखत ........ मुझे अभी देर तक चुदवाना है ....... आआआहह धीरे धीरे चोद मेरे लाल अपनी मम्मी को ......... जितना देर तक चोद सकता है चोद ... ऐसे ही मेरे मुम्मे मसल मसल कर चोद मुझे ...... ऐसे ही पेलता रह अपना लौड़ा मेरी चूत में ....... तेरा लौड़ा सच में बहुत मज़ा दे रहा है ....... उउफफफफफफ्फ़ ........ हाए तूने मुझे पहले क्यों नही चोदा मेरे लाल" सलोनी बेटे की गांड में उंगली पेलती अपनी गांड हल्के हल्के उछाल कर बेटे के लंड को चूत में ले रही थी |

उस रात माँ-बेटे ने चुदाई में वो आनंद हासिल किया जो ज़िंदगी भर उन्हे नही मिला था | सलोनी राहुल को पूरी तरह अपने काबू में रखते हुए उससे चुद्वाती रही | पुरे दो घंटे ........ पुरे दो घंटे राहुल अपनी माँ के उपर चढ़ा उसकी चूत में अपना लंड पेलता रहा | इस बीच सलोनी तीन बार और झढ़ चुकी थी ......... मगर उसने राहुल को ना झड़ने दिया ......... जब भी वो स्खलन के करीब पहुँचता, सलोनी चुदाई को रोक देती और दोनो एक दूसरे को चूमने चूसने लगते | अंत उसे अपने बेटे पर रहम आया जो झड़ने के लिए बहुत बैचेन हो रहा था, कामौन्माद से उसका अंग अंग कांप रहा था | सलोनी ने आख़िर दो घंटे की चुदाई के बाद जब राहुल झड़ने के करीब आया | उसने उसे रोका नही ..... उसने उसे तब भी नही रोका जब राहुल की स्पीड बढ़ने लगी ......... तब भी नही जब वो पूरा पूरा लंड बाहर निकाल कर वापस उसकी चूत में ठोक रहा था .... तब भी नही जब वो झड़ते हुए उसके मुम्मो को मुँह में भर चूस्ते हुए उसके निप्पलों को काट रहा था ...... हालांकि राहुल के झड़ने के पुरे समय वो खुद उन्माद में शोर मचा रही थी, चीख रही थी मगर राहुल ने खुद को इस हद तक और इतने समय तक रोके रखा था कि उसे उस समय बिल्कुल भी होश नही था कि वो कितनी बेरहमी से अपनी मम्मी की ठोकते हुए उसकी बुरी गत बना रहा था |

माँ-बेटे उस आनंद में डूबे इतने थक चुके थे, दोनो इतने पस्त हो चुके थे कि झड़ने के फ़ौरन बाद ही दोनो को नींद आ गयी थी | दोनो पूरी दुनिया से बेख़बर एक दूसरे की बाहों में समाए किसी और ही दुनिया में विचर रहे थे |
 
राहुल जितना खुद पर कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा था, स्लोनी की भड़कायु बातें उसकी कामौत्तेजना को उतना ही बढ़ा देती थी | वो काई बार अपनी कमर को पीछे खींचता ताकि कस कर अपनी माँ की सिल्क सी मुलायम चूत में अपना लंड पेल सके मगर फिर वो किसी तरह खुद को काबू में करता | सलोनी भी यही चाहती थी | वो सॉफ तौर पर बेटे के चेहरे पर देख सकती थी कि खुद को काबू में रखना उसके लिए कितना मुश्किल था मगर वो जानती थी अगर वो इस परीक्षा में सफल हो गया और खुद को काबू में रखना सिख गया तो किसी भी औरत को चुदाई में संपूर्णतया शान्त करना उसके लिए बेहद आसान हो जाएगा | उसे इतनी पीड़ा नही हो रही थी जितना वो नाटक कर रही थी | शायद इसलिए कि उसकी चूत बेहद्द गीली थी और राहुल का लंड आराम से फिसल रहा था | मगर फिर भी जब राहुल स्पीड से धक्के लगाने लगता था तो उसे बेहद्द पीड़ा होती थी |

"मज़ा आ रहा है बेटा ......... अपनी मम्मी को चोदने में मज़ा आ रहा है ना मेरे लाल"

"आ रहा है मम्मी ........ हाए बहुत मज़ा आ रहा है मम्मी ......... उफफफफफ़फ्ग कितनी नरम है आपकी ......... कितनी मुलायम ......... हाए बिल्कुल मक्खन की तरह ..... और कितनी टाइट है आपकी मम्मी ......... सच में बहुत मज़ा आ रहा है मम्मी" राहुल उत्तेजना में सिसक सिसक कर बोलता है | सलोनी बेटे के मुँह से अपनी चूत की तारीफ सुन कर खुश हो जाती है |

"आआहह...... आराम से ..... तेज़ नही ........ आराम से ......... उउफफफफफफ्फ़ ............ हाए मुझे नही मालूम मेरी चूत इतनी टाइट है ........ उउउन्न्नज्ग्घह .......... मुझे तो लगता है तेरा लौड़ा ही इतना मोटा है कि मेरी चूत को पूरा भर दिया है .... "

"नही मम्मी आपकी चूत ...... आपकी चूत सच में बहुत टाइट है ......"
 
सुबह आँखे मलते जब राहुल जागा तो उसे बेहद्द आनंदायक अनुभूति हो रही थी | वो धीरे से करवट लेता है और गद्दे पर अपनी बाँह फैलाता है मगर उसका हाथ जैसे वो उम्मीद कर रहा था अपनी मम्मी को नही ढूँढ पाता | वो आँखे खोल देता है | बेड पर वो अकेला लेटा हुआ था | मतलब सलोनी कब की जाग चुकी थी | वो या तो बाथरूम में होगी या फिर नीचे रसोई में, राहुल सोचता है | उसे थोड़ी निराशा होती है क्योंकि वो इतनी खूबसूरत सुबह में अपनी मम्मी के नंगे जिस्म से लिपटना चाहता था, उससे प्यार करना चाहता था, उसके अंग अंग को चूमना चाहता था, चूसना चाहता था | ठंढी आह भरता राहुल बेड से उठ जाता है और अपने बदन से चादर हटा देता है | 'उफफफफफ्फ़' उसका लौड़ा पूरा तना हुआ था, एकदम पत्थर के समान, जैसे वो चुदाई करने के लिए नही बल्कि तबाही के लिए ईजाद किया कोई भयानक हथियार था | राहुल अपने लंड को छूता है और रात की पूरी दास्तान उसकी आँखो के सामने से गुज़र जाती है | उसका यही लौड़ा उसकी मम्मी की चूत में था | उसने कल रात अपनी मम्मी की चूत मारी थी, एक बार नही बल्कि दो-दो बार | उसके मोटे मोटे मुम्मे चूसे थे, उन्हे मसला था....उूउउफफफफफफ्फ़ कहीं वो एक सपना तो नही था.......नही वो सपना नही था | बेड पर अस्त व्यसत चादर, और उसके उपर पढ़े दाग धब्बे, बंद कमरे में समाई एक खास खुशबु उस मस्तानी रात में माँ-बेटे की जबरदस्त चुदाई की चीख चीख कर हामी भर रहे थे | राहुल को रात की घटनाएँ याद आने लगती हैं तो ना चाहते हुए भी उसका हाथ अपने लौड़े पर चला जाता है | उसका लौड़ा उसके हाथ का स्पर्श पाते ही एक ज़ोरदार झटका मारता है | तभी रसोई से बर्तनो का शोर सुनाई देता है, जैसे कोई सींक में बर्तन डाल रहा था | 'तो इसका मतलब वो रसोई में है' राहुल सोचता है | यह जानकार कि उसकी मम्मी रसोई में है राहुल को लंड कुछ और सख्त होता महसूस हो रहा था | अब उसके लिए इंतज़ार करना मुश्किल होता जा रहा था | राहुल झटके से बेड से उतर जाता है | वो एकदम से अपनी मम्मी के लिए बेचैन हो उठा था जैसे कोई छोटा बच्चा माँ को ना देखने पर बेचैन हो जाता है | मगर उसे मम्मी के पास जाने से पहले बाथरूम जाना था, ब्रश करना था और अपनी हालत को सुधारना था |

पँद्रह मिनट बाद जब राहुल ने रसोई में कदम रखा तो सलोनी गैस पर सैंडविच बना रही थी | उसके एक हाथ में चाय का कप था | वो रात वाली नाइटी पहने हुए थी | राहुल अपनी माँ के नितम्बो पर कोई भी पेंटी नही देख पा रहा था | उसकी नाइटी उसके गोल मटोल नितम्बों को चूमते हुए सहला रही थी | 'अगर उसने पेंटी नही पहनी है तो हो सकता है उसने ब्रा भी ना पहनी हो' शायद वो नाइटी के अंदर पूरी नंगी थी |
 
"अभी वहीं खड़े घूरते रहोगे जा अंदर भी आओगे?" सलोनी की मधुर मादक आवाज़ राहुल की तन्द्रा भंग करती है | वो बिना राहुल की और देखे बोली थी | बिना दरवाजे को देखे उसे मालूम चल गया था कि राहुल वहाँ खड़ा उसकी गांड को अपनी आँखो से चूम रहा था | राहुल आगे बढ़ता है और काउंटर के पास चला जाता है |

"नींद कैसी आई. जब मैं जागी थी तब तो बहुत गहरी नींद में थे!" सलोनी अब भी उसकी और ना देखते हुए बोली |

"अच्छी आई मम्मी.... बहुत अच्छी आई" राहुल की आँख अभी भी अपनी मम्मी के नितम्बो पर जमी हुई थी जो उसकी नाइटी के अंदर उसके खाना बनाने के कारण दाएँ-बाएँ, आगे-पीछे हिल डुल कर एक बहुत दिलचस्प मंज़र पैदा कर रहे थे | राहुल अपना हाथ धीरे से अपनी मम्मी के दाएँ कूल्हे पर रख उसे दबाता है |

"उउउन्न्नह.......तू सुबह सुबह ही शुरू हो गया" सलोनी चिहुंक पड़ती है मगर राहुल अपना हाथ नही हटाता | बल्कि वो सलोनी के पीछे खड़ा होकर उसके दोनो नितम्बो को अपने दोनो हाथों से सहलाने दबाने लगता है | नाइटी के मुलायम कपड़े में सलोनी के नितंब और भी मुलायम प्रतीत हो रहे थे | सलोनी राहुल के हाथ झटकने के लिए अपनी गांड हिलाती है मगर राहुल उसके नितम्बो को हाथों में दबोचे उन पर अपनी पकड़ मजबूत कर देता है | 'एक रात में इसकी हिम्मत कितनी बढ़ गयी है' सलोनी सोचती है |

"आआहह...........क्या कर रहा है.......इतने ज़ोरों से क्यों दबा रहा है" सलोनी नखरा दिखाती बोलती है जबकि बेटे की मर्दाना शक्ति देख अंदर ही अंदर उसे खुशी महसूस होती है | राहुल आगे बढ़कर अपनी मम्मी की पीठ से चिपक जाता है और अपना लंड अपनी मम्मी की गांड की घाटी में धकेलेते हुए अपने हाथ आगे लेजाकर उसके सख्त मुम्मे पकड़ लेता है | मुम्मो को नाइटी के ऊपर से हाथ लगाते ही वो समझ जाता है कि उसकी मम्मी ने ब्रा नही पहनी है | वो अंदर से पूरी नंगी है!

"हाययययईएए........हाययइईई.........उउफफफफ़फ़गगग.....मा...र डाला जालिम.........उउफफफफफ्फ़........" सलोनी के हाथों चाय का मग गिरते गिरते बचा था | उसमे से कुछ चाय छलक कर काउंटर पर जा गिरी थी | राहुल ने पहली बार अपनी मम्मी के मुम्मे इतनी ज़ोर से मसले थे कि उसके मुँह से चीख निकल गयी थी और नीचे उसकी चूत सिसक पड़ी थी | बेटे का लंबा चौड़ा बम्बू अपने नितम्बों में घुसते पाकर उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया था | बेटे के हाथों का स्पर्श पाते ही उसके मुम्मे तन गये थे, उसके निप्पल अकड़ गये थे | राहुल भी नरम मुलायम मुम्मो को दबाने पर उनकी अंदरूनी सख्ती देखकर स्तब्ध हो गया था | वो और भी ज़ोर से उसके मुम्मो को दबाता है और अपना लंड उसकी गरम गांड में दबाता है |
 
"आआईयईईईईए.......आाआईईईईईई.....उखाड़ डालेगा क्या.........रुक ज़रा बताती हूँ तुझे" कहकर सलोनी गैस बंद कर देती है | सैंडविच तैयार हो चुके थे | वो राहुल के हाथों पर अपने हाथ रखकर उन्हे ज़ोर से हटाती है | राहुल हाथ नही हटाना चाहता था मगर जब सलोनी बलपूर्वक उसके हाथ मुम्मो से हटा देती है तो वो थोड़ा सा मायूस होकर पीछे हट जाता है |

"उधर बैठ कुर्सी पर अभी खबर लेती हूँ तेरी" सलोनी राहुल को कुर्सी पर बैठने का इशारा करते हुए थोडा गुस्से से बोलती है | राहुल डाइनिंग टेबल की कुर्सी पर बैठ जाता है | सलोनी टेबल पर कुर्सी के पास सैंडविचस की प्लेट रखती है और एक ग्लास में चाय डालती है | फिर वो राहुल के बिल्कुल सामने खड़ी हो जाती है अपनी कमर पर हाथ रखे | राहुल कुछ पलों तक अपनी मम्मी की आँखो में झांकता है मगर फिर शर्म और घबराहट से अपनी नज़र नीची कर लेता है | उसे समझ नही आ रहा था रात को दो बार चुदवाने के बाद अब उसकी मम्मी क्यों उसे भाव नही दे रही थी |

"उठ कर खड़े हो जाओ" राहुल किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह कुर्सी से उठ कर खड़ा हो जाता है. "इसे घुमाकर इधर मेरी तरफ करो" सलोनी राहुल को कुर्सी टेबल की वजाए बाहर की और करने के लिए बोलती है | राहुल कुर्सी को घुमा देता है | "अब अपनी शर्ट और पयज़ामा उतार दो" सलोनी अपने बेटे को नंगा होने के लिए ऐसे बोलती है जैसे उसे कोई आम सी बात बोल रही थी | राहुल अपनी माँ के चेहरे की तरफ देखता है | एक पल के लिए उसे लगा जैसे उसके दिल की मुराद पूरी होने वाली है मगर सलोनी का प्लेन चेहरा देख उसका मन आशंका से भर उठता है | वो नाज़ाने क्या करना चाह रही थी | राहुल कपड़े उतारने में हिचकिचाता है |

"तुमने सुना नही मैने क्या कहा?" सलोनी बिल्कुल आराम से मगर अपनी बात पर ज़ोर डालते हुए बोलती है | राहुल के पास अब कोई चारा नही था | वो नंगा हो जाता है | उसकी नज़र झुकी हुई थी और उसे शर्मिंदगी महसूस हो रही थी | उसकी शर्मिंदगी उसके तने हुए लंड ने और बढ़ा दी थी जो ऐसे झटके मार रहा था जैसे सलोनी को प्रणाम कर रहा हो | सलोनी भरसक कोशिश कर रही थी कि उसकी हँसी ना निकल जाए मगर फिर भी होंठो पर मुस्कान आने से वो रोक ना पाई | गनीमत थी राहुल उसे नही देख रहा था | राहुल के चेहरे पर वो मासूमियत, शर्मिंदगी के वो भाव कि वो अपनी मम्मी के सामने नंगा खड़ा था सलोनी का दिल मोह लेते हैं |
"चलो कुर्सी पर बैठ जाओ" राहुल नज़र झुकाए आराम से कुर्सी पर बैठ जाता है | उसका लौड़ा अब 70 डिग्री के एंगल पर उपर को खड़ा था | "ज़रा अपनी टाँगे तो चौड़ी कर" सलोनी का नया हुकम आता है | राहुल अपनी टाँगे थोड़ी सी खोल देता है |

सलोनी राहुल से कुछ कदमों की दूरी पर खड़ी थी | राहुल की नज़र झुकी होने के कारण वो अपनी मम्मी को घुटनो तक देख रहा था | अचानक सलोनी घूम जाती है | एक दो पल बीतने के बाद उसे सलोनी की नाईटी का सिरा जो उसके घुटनो तक पहुँच रहा था हिलते दिखाई देता है | एक दो पल और बितते हैं और फिर राहुल की आँखो के सामने सलोनी की नाइटी गिर कर उसके पाँव के पास फर्श पर पड़ी होती दिखाई देती है | राहुल का दिल ज़ोरों से धड़क उठता है | नाइटी अगर फर्श पर थी तो इसका मतलब....वो नंगी थी.....उसकी मम्मी नंगी थी... |
 
राहुल धीरे से धड़कते दिल के साथ हिम्मत करके नज़र उठाता है | उसकी नज़र सलोनी के घुटनो से होते हुए ऊपर उसकी जाँघो, उसके नितम्बों, उसकी पीठ जिस पर उसके रेशमी बाल बिखरे हुए थे और अंत में उसके सर के पिछले हिस्से पर जाकर ठहर जाती है | वो नंगी थी! वो सर से पाँव तक पूरी नंगी थी | राहुल का लंड और भी सख्त हो जाता है जब उसकी नज़र अपनी मम्मी के गोल मटोल नितम्बों पर जाती है | एकदम गोल, उभरे हुए नितंब थे | बिल्कुल किसी जवान लड़की की तरह कसी करारी गांड थी उसकी मम्मी की | राहुल अब गहरी साँसे ले रहा था |

सलोनी जो अपने बेटे की तरफ पीठ किए खड़ी थी अचानक किसी कारणवश नीचे झुकने लगती है | धीरे धीरे वो झुकती जाती है, झुकती जाती है | वो इतना झुक चुकी थी कि उसे अब सहारे के लिए अपने हाथ अपने घुटनो पर रखने पड़े थे | उसकी गांड उसकी पीठ से उँची हवा में उभरी हुई थी और बिल्कुल राहुल की नज़र के सामने थी | राहुल का हाथ खुद बा खुद अपने लंड पर चला जाता है | उसकी गहरी भारी साँसे शोर मचा रही थीं |

मगर सलोनी ने यहीं बस नही की | वो धीरे धीरे अपनी टाँगे खोलती है | अब राहुल के सामने नज़ारा बेहद ख़तरनाक था | उसने अपनी ज़िंदगी में इतनी सेक्सी, इतनी कामोत्तेजित तस्वीर को कभी नही देखा था | इंटरनेट पर लाखों तस्वीरों और हज़ारों सेक्स फिल्म्स में भी उस दृशय को उसने नही देखा था जो उसके सामने था | सलोनी के गोल चूतडों के बीच से झँकता उसकी गांड का छेद और उसकी गुलाबी चूत बिल्कुल स्पशट नज़र आ रहे थे | टाँगे चौड़ी होने के कारण चूत के होंठ हल्के से खुल गये थे और उनके अंदर से गहरा गुलाबीपन झाँक रहा था | इतना ही नही टांगों के बीच में से वो अपनी माँ के भारी मुम्मो को लटकते हुए भी देख पा रहा था जबकि उसके लंबे सयाह बाल फर्श पर विखरे हुए थे |

राहुल की नज़र कभी अपनी मम्मी की गांड के छेद तो कभी उसकी गुलाबी चूत तो कभी उसके मुम्मो पर घूम रही थी | वो अपना लौड़ा मसल रहा था जो पत्थर के समान सख्त हो चूका था | तभी सलोनी वापस सीधी होने लगती है | राहुल का दिल जैसे चीख पड़ता है कि वो उसे एहसास करने से रोके मगर राहुल की दशा ऐसी हो चुकी थी कि ना वो ठीक से कुछ सोच पा रहा था और ना ही कुछ कर पा रहा था | सलोनी सीधी खड़ी होकर धीरे धीरे वापस उसकी और घूम जाती है |
 
राहुल के हाथ अभी भी अपने लौड़े को मसल रहे थे | उसका जिस्म उत्तेजना से कांप रहा था | चेहरा उत्तेजना से लाल हो गया था | सलोनी सर हिलाकर अपने बालों को झटकती है और उन्हे अपनी पीठ पर अपनी उंगलियों से संवारती है | उसकी बाहें ऊपर उठाने से उसके भारी तने हुए मुम्मे और भी उपर उठकर तन जाते हैं | राहुल कभी अपनी मम्मी के मुम्मो को तो कभी उसकी टांगों के बीच गुलाबी चूत को देख रहा था | उसका लंड बुरी तरह से झटके मार रहा था | सलोनी बाल संवारकर अपनी कमर पर हाथ रखकर कुछ पल राहुल की आँखो में देखती है | उसके चेहरे से उसे अंदाज़ा हो जाता है कि उसकी हरकतों ने उसे किस हद तक उत्तेजित कर दिया था | उसे यह देखकर खुद पर गौरव होता है कि वो अपना जलवा दिखाकर किसी ज्वान लड़के की ऐसी गत बना सकती थी |

"तो तुमसे सब्र नही होता...हुं...क्या...कहते हो?" राहुल कोई ज्वाब नही देता | उसका हाथ अब भी उसके लौड़े को धीरे धीरे मसल रहा था और इसकी खबर शायद खुद उसे भी नही थी |

"कल रात तूने दो बार मारी ना मेरी.....दो बार चोदा तुमने मुझे.....रात कितने बजे तक मेरे उपर चड़े रहे थे...और अब इसे फिर से खड़ा करके ले आए.....कि चलो मम्मी की चूत में घुसा दूँगा......कोई नाश्ता नही कुछ नही बस सुबह सुबह लौड़ा खड़ा किया और चढ़ गए अपनी मम्मी के उपर...हुं.." राहुल अब भी कुछ नही बोलता |

"अरे मैं तुमसे बात कर रही हूँ, किसी और से नही......उउउफफफ्फ़....हे भगवान कैसा लड़का है...बस अपने लंड को खड़ा करना जानता है ......चलो पहले खाना खाना है...बाकी सब उसके बाद...." राहुल अभी भी चुप था |

"ओह तो जनाब को नाश्ते में भी मम्मी की चूत चाहिए.....बिना मेरी लिए मनोगे नही....." सलोनी अपनी कमर पर हाथ रखे उसे बोल रही थी | "उउउफफफ्फ़ कैसा कम्बख़त लड़का है...जाने मुझसे क्या क्या करवाएगा.." कहते हुए सलोनी बेटे के पास जाती है | उसकी कुर्सी के पास पहुँचकर वो अपना एक हाथ राहुल के कंधे पर रख देती है | राहुल की नज़र के बिल्कुल सामने अपनी माँ की चूत थी और वो उसकी महक कुछ दूर से भी आराम से भी सूंघ सकता था | सलोनी एक टांग राहुल की कमर के पास रखती है और फिर उसके कंधे का सहारा लेकर अपनी दूसरी टांग कुर्सी के उपर से घूमाकर कुर्सी की दूसरी तरफ टेबल और कुर्सी के बीच रख देती है | अब वो कुर्सी पर बैठे राहुल के दोनो तरफ टाँगे करके खड़ी थी, राहुल की नज़र अब भी अपनी मम्मी की चूत पर ज़मी हुई थी जो उसके लौड़े के एन बिल्कुल उपर थी | चूत को अपने इतने नज़दीक पाकर लौड़ा कुछ और फुल गया लगता था |
 
"चल तू भी क्या याद करेगा......आज तुझे ऐसा ब्रेकफास्ट मिलेगा जो मैने आज तक तेरे पिता को भी नही दिया" सलोनी राहुल के दोनो कंधे थाम नीचे को होने लगती है | धीरे धीरे नीचे आती उसकी चूत लगभग राहुल के लंड के पास पहुँच चुकी थी | राहुल अपने लौड़े से अपना हाथ हटा लेता है | उसका दिल दुगनी रफ़्तार से दौड़ रहा था | सलोनी और थोड़ा सा नीचे होती है |

"आआहह.....मम्ममी...." राहुल सिसक पड़ता है |

"उउउन्नगगह..बेटा....उउउफफफफफफ्फ़..." सलोनी अपना होंठ काटते सिसकती है | चूत पर लंड का स्पर्श होते ही माँ-बेटा कांप उठे थे | सलोनी थोडा नीचे को होती है | अब उससे खुद सब्र नही हो रहा था | राहुल को गरम करने के चक्कर में वो खुद बहुत ज़यादा गरम हो चुकी थी | सलोनी नीचे को लंड पर अपनी भीगी चूत का दवाब डालती है | लंड थोड़ा सा पीछे को था और चूत थोड़ी आगे को थी इसलिए लंड चूत पर रगड़ खा रहा था मगर अंदर नही जा रहा था | सलोनी अपना एक हाथ नीचे लाती है और लंड को हाथ से पकड़ लेती है | राहुल की नज़र अपने लौड़े पर थी जिस पर वो अपनी माँ का हाथ कसा हुआ देख रहा था | सलोनी अपने निचले होंठ को दांतों से दबाए फिर से नीचे होती है | राहुल लंड का सुपाड़ा अपनी मम्मी की चूत के होंठो के बीच घुसता हुआ देख रहा था | इस बार जब लंड फिसलने लगा तो सलोनी ने अपने हाथ की पकड़ से उसे वहीं रोके रखा और नीचे को होते हुए उस पर दवाब डालती गई |

"आआहह...आआअहह....." लंड का सुपाड़ा चूत में घुसते ही सलोनी एक लंबी सिसकी भरती है |

"मम्मी...म्म्मम्म्मी......." राहुल भी भीगी गरम चूत में अपने लंड को महसूस कर कराह उठता है |

सलोनी लगातार होंठ भिंचे धीरे धीरे नीचे होती जा रही थी और लंड उसकी चूत में घुसता चला जा रहा था | राहुल अधमुंदी आँखो से अपने लौड़े को अपनी मम्मी की चूत में घुसते देख रहा था | आख़िरकार पूरा लंड सलोनी की चूत में घुस जाता है | सलोनी अब अपने बेटे की गोद में बैठ चुकी थी और उसका वजन उसकी जाँघो पर था | वो बेटे के कंधे थामे कुछ देर आँखे बंद किए लौड़े को अपनी चूत में उस जबरदस्त आनंद को महसूस करती है और फिर अपनी आँखे खोल देती है | राहुल दुनिया भर की उत्तेजना अपने चेहरे पर लिए उसे ही देख रहा था | सलोनी अपना चेहरा बेटे के चेहरे पर झुकाती है और दोनो के होंठ आपस में मिल जाते हैं | सलोनी बेटे के मुँह में जीभ घुसा उसे खूब ज़ोर से चूमती चाटती है | एक लंबे चुंबन के बाद जब दोनो के होंठ जुदा होते हैं तो दोनो की साँसे फूली हुई होती हैं |
 
"बस अब खुश है ना....यही चाहता था ना तू... जल्द से जल्द तेरा लौड़ा तेरी मम्मी की चूत में घुस जाए.......उउउफफफफफफ्फ़..एक तो इतना लंबा मोटा है ..... हाअयययययई मेरी चूत तो तू किसी काम की नही छोड़ेगा....." सलोनी उखड़ी सांसो के बीच बोलती है | राहुल कुछ ज्वाब नही देता | ज्वाब देने की बजाए वो अपना चेहरा नीचे झुकाता है और सलोनी के एक निप्पल को मुँह में भर लेता है |

"उउउन्न्नन..आआहह....धीरे धीरे चूस........आराम से...उफफफफफ्फ़" सलोनी सिसक पड़ती है | कुछ देर राहुल एक निप्पल को चूस्ता रहता है और फिर जब होंठ हटाकर दूसरे मुम्मे की और मुँह ले जाता है तो सलोनी उसका चेहरा अपने हाथों में थाम उसे रोक लेती है | वो टेबल पर पड़ी प्लेट पास खींचती है और उसमें से एक सॅंडविच निकालकर राहुल के होंठो के करीब करती है मगर राहुल का उस समय सॅंडविच खाने का कोई मूड नही था वो इनकार में सर हिलाता है |

"मुझे माँलूम है तुझे अब मम्मी चोदनी है लेकिन जब तक खाएगा नही मैं तुझे नही दूँगी ... अगर मेरी लेनी है तो खाना खाना पड़ेगा." राहुल की खीझ उसके चेहरे से सॉफ जाहिर हो रही थी कि उसे अपनी मम्मी की यह शर्त बिल्कुल भी पसंद नही थी | मगर वो जानता था उसे उसकी बात माननी ही पड़ेगी, इसके सिवा उसके पास कोई चारा नही था | वो अपना मुँह आगे करता है तो सलोनी उसके खुले मुँह में सॅंडविच डालती है |

"यह हुई ना बात... अगर मेरा कहना मानेगा तो सब कुछ मिलेगा, आगे से भी दूँगी और पीछे से भी... कहना नही मानेगा तो फिर कुछ नही मिलेगा..समझ गया ना" सलोनी अपनी कमर को गोलाई में हल्के हल्के हिलाते बोलती है | पीछे से देने वाली बात सुनकर राहुल का लंड और भी भड़क उठा था | वो अपनी मम्मी की गांड का तभी दीवाना हो गया था जब उसने बाथरूम में कपड़े देने के समय उसकी गांड के पहली बार दर्शन किए थे | राहुल जल्दी जल्दी खाने लगता है | वो फटाफट खाना खत्म कर अपनी मम्मी की चूत का आनंद लेना चाहता था | उसकी जल्दबाज़ी देख सलोनी के होंठो पर मुस्कराहट फैल गयी थी |

"अरे धीरे धीरे..क्या कर रहा है..उउउफफफ्फ़....यह लड़का भी ना..तेरा लंड मेरी चूत में तो घुसा हुआ है....अभी दो मिनिट का सब्र भी नही कर सकता" सलोनी उसे छेड़ती है | मगर राहुल जितना फास्ट हो सकता था ख़ाता रहा और सलोनी उसके लंड को चूत में लिए अपनी कमर घूमाती रही. जैसे ही आख़िरी बाईट ख़तम होती है राहुल अपनी मम्मी के एक मुम्मे को मुँह में भर लेता है और दूसरे को मसलने लगता है | अब तक सलोनी के लिए भी बर्दाशत करना मुश्किल हो चूका था | वो बेटे के कंधे थामे उपर को उठती है, लंड चूत से बाहर निकलने लगता है, अंत में केवल सुपाड़ा अंदर रह जाता है | सलोनी होंठ भींचती है और धम्म से लंड पर अपना वजन डाल देती है |
 
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