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अंजाने में बहन ने ही चुदवाया पूरा परिवार complete

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मैंने कहा- “हाँ यार ये तो है। अब तुम बताओ क्या प्रोग्राम है तुम्हारा? क्योंकी अभी तुम बाहर तो जा नहीं सकती, क्योंकी तुम्हारा एक पैर खराब है...”

बाजी ने कहा- “भाई मेरा खयाल है अम्मी अंकल को सब बता चुकी होंगी अब तक और अभी जब अम्मी और निदा बाहर जायेंगी घूमने तो आप सफदर अंकल के पास चले जाना और उनसे बात करके यहाँ ले आना फिर मैं तुम और अंकल सफदर मिलकर मजा करेंगे। क्या ख्याल है?”

मैं नाश्ता खतम करते हुये बोला- “लगता है तुम ये चेक करना चाहती हो कि आखिरकार अंकल सफदर में ऐसी क्या बात है जो अम्मी उनपे फिदा हो गई हैं? लेकिन देखना कि कहीं मेरा ही पत्ता ना काट जाए?”

बाजी मेरी बात सुनकर हँस दी और बोली- “नहीं मेरी जान, दुनियां इधर की उधर हो सकती है लेकिन आपकी जगह मेरे दिल से खतम नहीं हो सकती। समझे आप? बाकी बस मजे के लिए हैं ओके..."

मैंने बाजी की बात पे हँसते हुये हाँ में सिर हिला दिया। लेकिन अभी कुछ बोला नहीं था। तभी बाहर से अम्मी। और निदा आ गईं और निदा ने आते ही बाहर के लिए प्रोग्राम बनाना शुरू कर दिया। लेकिन मैंने साथ चलने से ये बोलकर माना कर दिया कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है। तब अम्मी और निदा खुद ही तैयार होकर बाहर को चल दिये।

और मैं घर से निकलकर सीधा सफदर अंकल की तरफ चल दिया। लेकिन जैसे ही मैं सफदर अंकल के घर के पास पहुँचा तो तभी सफदर अंकल भी घर से निकल आए और मुझे अपने घर की तरफ आता देखकर खुश हो गये और बोले- “अच्छा हुआ सन्नी, तुम खुद ही मेरी तरफ आ गये, नहीं तो मैं अभी तुम्हारी तरफ ही आ रहा था. "

 
मैं सफदर अंकल के पास पहुँचकर बोला- “क्यों अंकल, कोई खास बात करनी थी जो आप मेरी तरफ ही आ रहे। थे?”

अंकल ने कहा- “हाँ मेरे शेर बात तो खास ही करनी थी तुम्हारे साथ। लेकिन तुम ऐसा करो पहले अंदर तो आओ बैठकर बात करते हैं..."

और मेरा हाथ पकड़कर मुझे अंदर ले गये। दरवाजा लाक करके अंकल मुझे उसी रूम में । ले गये जहाँ मैंने अम्मी को अंकल से चुदवाते हुये देखा था।

अंकल ने मुझे रूम में बिठा दिया और बोले- “सन्नी मेरा खयाल है कि ये रूम हम सबके लिए लकी है क्योंकी यहाँ हमारे बीच कई पर्दे गिर गये हैं..”

मैं अंकल की बात को अच्छी तरह समझ गया लेकिन भोला बनते हुये बोला- “क्या मतलब अंकल? मैं समझा नहीं कि आप किन पर्यों की बात कर रहे हैं? आप जरा खुल के बात करो जो भी बात है."

अंकल- देखो सन्नी बात ये है कि थोड़ी देर पहले तुम्हारी अम्मी यहाँ आई थी और उसने मुझे सब बता दिया है। कि तुमने कल क्या देखा? और रात को तुमने अपनी माँ के साथ क्या किया? अब बात ये है कि आगे का क्या इरादा है तुम्हारा?”

मैं- पूरी तरह खुल के बात करते हुये बोला- “अंकल बात ये है कि अम्मी की भी एक पेरसोनल लाइफ है जिसे जीने का उनको पूरा हक है और मेरे खयाल में उनके इस हक का हमें सम्मान करना चाहिए..”

अंकल मेरी बात से खुश होते हुये बोले- “हाँ सन्नी बेटा ये बात तो ठीक है तुम्हारी। और अब जबकी तुम भी अपनी माँ की सेवा में लग गये हो तो मेरा और तुम्हारी अम्मी का खयाल है कि अब हमारे बीच कोई पर्दा नहीं होना चाहिए। हम जो भी किया करें मिलकर करें..”

मैं- “हाँ अंकल मैं भी आप लोगों की इस बात से सहमत हूँ। लेकिन क्या अम्मी हम दोनों को एक साथ झेल लिया करेंगी?”

अंकल- “अरे यार बस एक हफ्ता तक तो सलमा को ही बर्दाश्त करना पड़ेगा उसके बाद तो इरम भी आ जाएगी हमारे साथ। फिर दोनों मिलकर हमें बर्दाश्त कर लेंगी क्या समझे?”

मैं हैरानी से अंकल की तरफ देखते हुये बोला- “अंकल इरम कौन? कहीं आपकी बेटी तो नहीं?”

अंकल- हाँ यार, मैं अपनी बेटी इरम की ही बात कर रहा हूँ। वो मेरे और तुम्हारी माँ सलमा के बारे में सब जानती है और हमारे साथ मिलकर कई बार मजा भी ले चुकी है।

मैं हैरत भरी नजरों से अंकल को देखते हुये बोला- “मतलब आप मेरी अम्मी के साथ-साथ अपनी सगी बेटी को भी चोद चुके हैं?”

अंकल- “अरे हाँ यार, आजकल तो ये नार्मेल होता जा रहा है बाप बेटी और बहन भाई, माँ बेटा का सेक्स और इस में सुरक्षा भी है, कोई बदनामी का डर भी नहीं होता कहीं से भी...”

मैं- “हाँ अंकल, बात तो आपकी ठीक है लेकिन मेरा खयाल है कि इरम के आने तक अकेली अम्मी को क्यों मुसीबत में डाला जाए? अम्मी का साथ देने के लिए किसी और को क्यों ना मिला लिया जाए अपने साथ, जो इस सबके बारे में जानती भी है और हमारे साथ मिलकर मजा भी करना चाहती है...”

अंकल- “क्या मतलब? कौन है वो? तुम किसकी बात कर रहे हो? देखो कोई पंगा नहीं कर देना समझे?”

मैंने अपना मोबाइल निकाल करके फरी बाजी को काल करके कहा- “आप सफदर साहब के मकान पे आ जाओ...”

और काल कट कर दी।

अंकल ने कहा- “यार किसे बुला रहे हो कुछ बताओ तो सही?”

मैंने कहा- “अंकल बस आप देखते जाओ और एक जवान फुददी के मजे के लिए तैयार हो जाओ जल्दी से, और वो हमारा ये राज कभी किसी को नहीं बताएगी टेन्शन नहीं लो आप...”

 
मैंने कहा- “अंकल बस आप देखते जाओ और एक जवान फुददी के मजे के लिए तैयार हो जाओ जल्दी से, और वो हमारा ये राज कभी किसी को नहीं बताएगी टेन्शन नहीं लो आप...”

अंकल कुछ देर सोचते रहे और फिर उठकर अलमारी में से दो गोलियां निकालकर ले आए और एक मुझे देकर एक खुद खाते हुये बोले- “तो फिर आज तुम्हारी उस जवान फुद्दी का बाजा बजाते हैं मिलकर...”

मैं अंकल की बात सुनकर हँस दिया और गोली निगल गया और फिर हम दोनों ही फरी बाजी का इंतेजार करने लगे। रूम में अब हम दोनों ही बड़ी बेसब्री से फरी बाजी का इंतेजार कर रहे थे और हमसे ज्यादा हमारे लण्ड फरी की फुद्दी में जाने के लिए बेताब हो रहे थे। तभी मेरे मोबाइल में फरी की तरफ से एस.एम.एस. आया जिसमें बाजी ने बस इतना लिखा हुआ था मैं निकल आई हूँ दरवाजा खोलकर रखो।

मैं अपनी बहन का एस.एम.एस. पढ़कर जल्दी से उठा और भागता हुआ गया और दरवाजा खोल दिया, तो बाजी जो कि तब तक दरवाजे पे आ चुकी थी झट से अंदर आ गई। मैंने दरवाजा लाक किया और बाजी को अपने साथ लेकर अंदर रूम की तरफ चल दिया, जहाँ सफदर अंकल इंतजार कर रहे थे।

जैसे ही मैं बाजी को अपने साथ लेकर रूम में इन हुआ तो अंकल फरी बाजी को देखते ही बौखला गये और हकलाते हुये बोले- “फऽफरी बेटा तुम यहाँ इस वक़्त? क्या कोई काम था?”

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तब मैं जल्दी से आगे बढ़ा और फरी बाजी का हाथ पकड़कर अंकल के पास ले गया और बोला- “अंकल ये ही मेरी गर्लफ्रेंड है और बहन भी। आप परेशान ना हों, इसे सब पता है जो आपके और अम्मी के बीच है..”

अंकल मेरी बात सुनकर थोड़ी देर तक हैरत से हमारी तरफ देखते रहे और फिर सिर झटक के मुश्कुरा दिए और बोले- “चलो अच्छा हुआ कि अब ये भी हमारा साथ देगी..."

और इतना बोलते हुये मेरी बहन के हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया। जिससे मेरी बहन सफदर अंकल के सीने से जा लगी, तो अंकल ने मेरी बहन को मुश्कुरा के देखा और साथ ही अपने होंठ बाजी के होंठों से लगा दिए और किस करने लगे। बाजी भी अंकल की रेस्पोन्स देने लगी।

मैंने अपनी बहन को अंकल से किस में मसरूफ देखा तो मैं पीछे होकर अपने कपड़े उतारने लगा और पूरा नंगा होकर आगे बढ़ा और अपनी बड़ी बहन के पीछे जाकर उसकी कमीज ऊपर करने लगा, तो बाजी ने भी अंकल से अलहदा होकर अपने हाथ ऊपर उठा दिए जिससे बाजी की कमीज निकल गई। अंकल ने नीचे बैठकर मेरी बहन की सलवार उतार दी जिसके बाद मेरी बहन सिर्फ ब्रा में हमारे सामने नंगी खड़ी रह गई थी।

बाजी को इस हालत में देखकर अंकल ने कहा- “वावव... फरी बेटा तुम्हारा जिम सच में लाजवाब है.." और इतना बोलते ही बाजी को बेड पे बिठा दिया और अपने कपड़े उतारने लगे।

 
मैंने बाजी को जो कि बेड पे बैठी हुई थी लिटा दिया और बाजी की टाँगों को फैलाकर अपनी जुबान अपनी बहन की गीली फुद्दी पे रखकर घुमाने लगा, तो बाजी के मुँह से- “आअह्ह... सस्स्सीईई ऊऊहह भाई अंदर घुसाकर चाटो प्लीज़... उम्म्मह...” की आवाज करने लगी।

मैं भी अपनी बहन की फुदी में अपनी जुबान घुसाकर चाटना शुरू कर दिया जिससे बाजी के मुँह से आऐईयईई ऊऊओह... मेरे भाई खा जाओ अपनी कुतिया बहन की फुद्दी को आह्ह..” की आवाज करने लगी।

तभी अंकल भी नंगे होकर बेड पे आ गये और मेरी बहन के चेहरे के पास जा बैठे और फरी बाजी के होंठों पे अपना लण्ड घुमाने लगे, तो मेरी बहन ने भी झट से अपना मुँह खोला और सफदर अंकल का लण्ड अपने मुँह में भरकर चूसने लगी।

अब एक तरफ मैं अपनी बहन की फुद्दी चाट रहा था और दूसरी तरफ सफदर अंकल मेरी बहन के मुँह में अपना लण्ड घुसाए चुसवा रहे थे। कुछ देर तक ऐसे ही चलता रहा कि अंकल ने अचानक अपना लण्ड मेरी बहन के मुँह में से निकाला और मेरी तरफ आकर बोले- “चलो भाई सन्नी, अब हमारे लण्ड की बारी है तुम्हारी इस गश्ती बहन की फुद्दी में जाने की..."

सफदर अंकल की बात सुनकर में साइड पे हो गया तो सफदर अंकल फरी बाजी की टाँगों में आ गये। मैंने झट से अंकल का लण्ड पकड़ा और अपनी बहन की फुद्दी पे रखकर हल्का सा रगड़ा और फिर बाजी की फुद्दी पे सेट करके हाथ हटा लिया।

सफदर अंकल ने हँसते हुये कहा- “यार तू सच में मुझसे भी बड़ा हरामी है...” और साथ ही पूरी जान से अपने लण्ड को मेरी बड़ी बहन की फुद्दी में घुसा दिया।

लण्ड घुसते ही बाजी की आँखें बंद हो गईं और उनके मुँह से- “आअहह... अंकल मुझे अपनी रंडी बनाकर चोदो ऊओह... मेरी जान्न् पूरा घुसा डालो मेरे अंदर प्लीज़... अंकल जरा भी रहम नहीं करना मुझ पे आअह्ह... फाड़ डालो आज मेरी फुद्दी को उम्म्मह...” की आवाज करने लगी।

 
बाजी के मुँह से निकलने वाली आवाजें सुनकर अंकल भी जोश में आ गये और अपना लण्ड पूरा बाहर निकाल कर अपने पूरे जिश्म की ताकत से बाजी की फुद्दी में अपना लण्ड अंदर-बाहर करने लगे और साथ ही- “हाँन् । साली कुतिया, आज मैं तेरी फुद्दी को फाड़ डालूंगा... साली तेरी माँ भी इतनी ही बड़ी गश्ती है ऊऊह्ह... सन्नी मैं तेरी बहन को कुतिया बना डालूंगा साली को आआहह... ऊऊहह...” की आवाज के साथ चुदाई करने लगे।

अंकल के इन झटकों ने मेरी बहन को भी पागल बना दिया था और वो भी नीचे से अपनी गाण्ड अंकल के हर झटके के साथ उछालकर उनका साथ देती और साथ ही उसके मुँह से गालियों का तूफान उमड़ रहा था और वो आआहह... हरामी फाड़ डाल मेरी फुद्दी को हरामजादे, कंजरम मुझे भी कंजरी बनाकर चोद ऊऊहह बेटीचोद भड़वे मुझे भी मेरी माँ की तरह ठंडा कर हाँन्... और तेज और तेज करो..” की तेज आवाज के साथ अंकल से चिपकी जा रही थी।

कुछ देर की चुदाई के बाद फरी के जिश्म ने एक जोर का झटका लिया और वो बड़ी निढाल सी हो गई तो अंकल ने भी अपना लण्ड मेरी बहन की फुद्दी से निकाल लिया और खुद बेड पे लेट गये और फरी को अपने । लण्ड पे बिठा लिया। फिर मेरी तरफ देखकर बोले- “चल मेरे शेर, आ जा तू भी अपनी बहन की गाण्ड में घुसा दे अपना ये लण्ड..."

अंकल की बात सुनकर फरी तड़प उठी और बोली- “नहीं प्लीज़... ये नहीं करना...”

अंकल ने कहा- “मेरी जान रंडी बनने चली हो और गाण्ड मरवाने से डरती हो?”

बाजी ने कहा- “नहीं अंकल, ये मैंने कभी किया नहीं है...”

अंकल ने कहा- “चलो कोई बात नहीं, आज कर लो। बस हल्का सा दर्द होगा और फिर मजा ही मजा है...”

और मेरी तरफ देखकर बोले- “चलो सन्नी वो सामने से तेल ले आओ, और बड़े आराम से करना...”

 
मैं झट से उठा और साइड टेबल से तेल ले आया और अपनी बहन के पीछे आकर बाजी को अंकल के ऊपर लिटा दिया और बाजी की गाण्ड पे अच्छी तरह तेल लगाकर और अपना लण्ड भी तेल से भरकर बाजी की गाण्ड पे अपना लण्ड सेट किया, तब अंकल बाजी को अच्छी तरह हग कर लिया और मुझे इशारा किया कि एक ही झटके से घुसा दो, और खुद बाजी को किस करने लगे।

अब मैंने ज्यादा देर ना करते हुये अपने हाथों से बाजी की गाण्ड को पकड़कर अपना लण्ड सेट किया और तेज झटका मारा, जिससे मेरा आधा लण्ड अपनी बड़ी बहन की गाण्ड में जा घुसा। झटका लगते ही बाजी का जिस्म जोर से हिला। लेकिन अंकल ने पकड़े रखा और बाजी को हिलने नहीं दिया। बाजी के होंठ जो कि अंकल के हाथों से बंद थे जिससे कुछ ज्यादा आवाज भी नहीं निकली। बस ‘गॅन्-गॅन्-हँन्’ की आवाज ही निकल रही थी।

मैंने अपना लण्ड हल्का सा निकालकर फिर से पूरी जान का झटका लगाया तो मेरा पूरा लण्ड अपनी बड़ी बहन की गाण्ड में जड़ तक जा घुसा, जिससे बाजी का जिम बड़े जोर से तड़पा। लेकिन अंकल पहले ही से तैयार थे उन्होंने बाजी को जरा भी ना हिलने दिया। मैं भी अपने लण्ड को ऐसे ही बाजी की गरम गाण्ड में घुसाए उनके ऊपर लेट गया और पीछे से उनकी गर्दन पे अपनी जुबान घुमाने लगा, और बाजी की चूचियों के निपलों को भी साइड से निकालकर मसलने लगा।

अंकल ने थोड़ी ही देर में बाजी के होंठों को आजाद छोड़ दिया तो उनकी रोती हुई आवाज निकली- “प्लीज़... सन्नी मेरे भाई बाहर निकालोओ ऊऊहह... मेरी माँ.. मैं मर गई सन्नी प्लीज़... बाहर निकालो मेरी गाण्ड फट गई है, बहुत दर्द हो रहा है...”

मैं बाजी की बात समझ रहा था कि बाजी को सच में कितनी दर्द हो रही होगी, क्योंकी एक तो बाजी का फर्स्ट टाइम था गाण्ड में और ऊपर से बाजी की फुद्दी में भी अंकल का लण्ड घुसा हुआ था। मैं बाजी के ऊपर ऐसे ही खामोशी से लेटा रहा और गर्दन पे जुबान घुमाता रहा और चूचियों को मसलता रहा, तो 3 मिनट बाद बाजी का रोना और मिन्नतें करना बंद हो गया। तब मैंने भी अपने लण्ड को धीरे से पीछे खींचा और फिर से पुश किया।

 
तब बाजी के मुँह से- “आअह्ह... मादरचोद हरामी क्या करता है? दर्द हो रहा है आग लगी हुई है मेरी गाण्ड में...”

बाजी की गाण्ड बहुत ज्यादा टाइट और गरम थी, जिसकी वजह से मुझे इतना मजा आ रहा था कि बस बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैं कुछ देर तक बाजी को आराम-आराम से गाण्ड में चोदता रहा, तो बाजी की गलियां भी धीरेधीरे थम गईं।

तब नीचे से अंकल ने भी अपना लण्ड हिलाना शुरू कर दिया, जिससे मुझे इतना ज्यादा मजा आना शुरू हो गया कि बयान से बाहर था। क्योंकी एक तो बाजी की गाण्ड टाइट थी, ऊपर से बाजी की फुद्दी में भी जब अंकल का लण्ड मूव करता तो दुहरा मजा आता, क्योंकी हमारे लण्ड ऐसा लगता था कि आपस में रगड़ खा रहे हों।

हमारी इस हरकत से बाजी रोने लगी और साथ ही बोली- “भाईई प्लीज़... बाहर निकल लो बहुत दर्द हो रहा है। साथ में जलन भी हो रही है... अंकल प्लीज़... भाई को मना करोऽs आआह्ह... अम्मी जीई बचा लोओ ऊऊह्ह... भाई मैं मर जाऊँगी हाईई भाईई मत करो प्लीज़.. आआईईई हरामियों मैं मर जाऊँगी...” की आवाज करने लगी और रोने लगी।

लेकिन बाजी के इस तरह रोने और गिड़गिड़ाने से मुझे और भी मजा आ रहा था। लगभग इस तरह मैंने और अंकल ने मेरी बहन को कोई 15 मिनट तक चोदा होगा कि अंकल के लण्ड ने पानी निकाल दिया जिससे अंकल

का लण्ड नरम होकर बाहर निकल गया।

तब मेरा लण्ड जरा आसानी और आराम से फरी बाजी की गाण्ड में अंदर-बाहर होने लगा, तो बाजी के मुँह से भी- “आआईयईई सन्नी प्लीज़्ज़.. अब फुद्दी में डाल लो, बहुत जलन हो रही है ऊऊहह... मेरा भाई प्लीज़... अब बस करो...”

और इसके साथ ही जैसे ही मेरा लण्ड फरी की गाण्ड में घुसता, फरी अपनी गाण्ड को थोड़ा टाइट कर लेती और ज्यों ही बाहर को खींचता तो ढीली कर देती। जिससे मैं पागल हो गया और तेज झटके मारने लगा। फरी फिर से रोने लगी, लेकिन अब मैं कुछ नहीं सुन रहा था बस लगातार दो-तीन मिनट तक झटका मारने के बाद बाजी की ही गाण्ड में फारिघ हो गया, और फिर अपना लण्ड निकालकर देखा तो बाजी की गाण्ड पे बाजी की पोटी और खून भी लगा हुआ था, जिसे मैंने कपड़े से साफ किया और साइड में लेट गया।

थोड़ी देर तक हम तीनों ऐसे ही पड़े रहे। फिर अंकल उठे और नंगे ही बाथरूम में जा घुसे। उनके जाते ही बाजी फरी ने मेरी तरफ गुस्सा भरी नजरों से देखा और बोली- “भाई ये क्या हो गया था तुम्हें? आज पागल तो नहीं हो गये थे तुम? अगर मुझे कुछ हो जाता तो?”

 
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