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Guest
बाजी- देखो, अगर तुम्हारी बहन पहले ही चुदवा चुकी है तो वो कभी किसी को नहीं बताएगी, क्योंकी इस तरह उसका अपना राज खुलने का डर होगा कि वो कुँवारी नहीं है और पहले ही चुदवा चुकी है।
मैं- “हाँ... ये भी ठीक है। तो फिर मैं कल ही अपनी बहन को जूस पिला दूंगा। बैंक्स फरी जी, आपने अच्छा तरीका बताया है मुझे मजे लेने का...”
बाजी- “बैंक्स और बाइ अब मैं सोने लगी हूँ। कल दिन में चैट करेंगे...”
मैं- ओके बाइ, लेकिन क्या मुझे आपकी पिक मिल सकती है इनबाक्स में?
बाजी- सोचूंगी कि तुम पे ऐतबार करूं या नहीं? बाइ बेबी।
मैंने भी बाजी को बाइ बोला और चैट बंद करके अपना लण्ड मसलने लगा, बाजी की फुद्दी का सोचकर और फिर एक बार मूठ लगाकर सो गया।
अगले दिन मैं सुबह तैयार होकर कालेज के लिए निकल गया, जहाँ काशी मुझे एक साइड पे ले गया और बोला
हाँ बे सुना क्या बना फरी का?”
मैंने कहा- “नहीं यार, अभी तक बस चैट ही चल रहा है देखो क्या बनता है?”
उसके बाद हमने बाकी का टाइम कालेज से निकलकर आवारा फिरने में गुजारा। दोपहर का खाना भी हमने एक होटेल ही में खाया और उसके बाद मैं काशी से अलग होकर घर आ गया, कोई 3:30 पे। तब तक अम्मी और निदा सो चुकी थीं, लेकिन बाजी अभी जाग रही थी। जैसे ही मैं घर में घुसा, बाजी जो कि टीवी देख रही थी। बोली- “भाई खाना लायें?”
मैंने कहा- “नहीं बाजी, मैंने खाना खा लिया है...” और इतना बोलकर अपने रूम की तरफ चल दिया। और दरवाजा को अंदर से बंद करके नेट ओन करके बैठ गया, बाजी के इंतजार में। क्योंकी मुझे यकीन था कि बाजी जरूर आनलाइन होंगी और ऐसा ही हुआ। बाजी ठीक 10 मिनट के बाद आनलाइन हो गई।
और आते ही मुझे- हाय स्वीतू क्या चल रहा है?
मैं- कुछ नहीं फरी जी बस आपका ही इंतेजार कर रहा था।
बाजी- अच्छा जी वो क्यों?
मैं- बस आपने बोला था ना कि आज अपनी बहन को नींद की गोलियां जूस में डालकर दें, तो थोड़ी घबराहट भी हो रही थी।
बाजी- क्यों घबराहट कैसी?
मैं- फरी जी अगर बाजी कुँवारी हुई अभी तक, और मेरा अंदाजा गलत हुआ तो बड़ी गड़बड़ भी हो सकती है ना?
मैं- “हाँ... ये भी ठीक है। तो फिर मैं कल ही अपनी बहन को जूस पिला दूंगा। बैंक्स फरी जी, आपने अच्छा तरीका बताया है मुझे मजे लेने का...”
बाजी- “बैंक्स और बाइ अब मैं सोने लगी हूँ। कल दिन में चैट करेंगे...”
मैं- ओके बाइ, लेकिन क्या मुझे आपकी पिक मिल सकती है इनबाक्स में?
बाजी- सोचूंगी कि तुम पे ऐतबार करूं या नहीं? बाइ बेबी।
मैंने भी बाजी को बाइ बोला और चैट बंद करके अपना लण्ड मसलने लगा, बाजी की फुद्दी का सोचकर और फिर एक बार मूठ लगाकर सो गया।
अगले दिन मैं सुबह तैयार होकर कालेज के लिए निकल गया, जहाँ काशी मुझे एक साइड पे ले गया और बोला
हाँ बे सुना क्या बना फरी का?”
मैंने कहा- “नहीं यार, अभी तक बस चैट ही चल रहा है देखो क्या बनता है?”
उसके बाद हमने बाकी का टाइम कालेज से निकलकर आवारा फिरने में गुजारा। दोपहर का खाना भी हमने एक होटेल ही में खाया और उसके बाद मैं काशी से अलग होकर घर आ गया, कोई 3:30 पे। तब तक अम्मी और निदा सो चुकी थीं, लेकिन बाजी अभी जाग रही थी। जैसे ही मैं घर में घुसा, बाजी जो कि टीवी देख रही थी। बोली- “भाई खाना लायें?”
मैंने कहा- “नहीं बाजी, मैंने खाना खा लिया है...” और इतना बोलकर अपने रूम की तरफ चल दिया। और दरवाजा को अंदर से बंद करके नेट ओन करके बैठ गया, बाजी के इंतजार में। क्योंकी मुझे यकीन था कि बाजी जरूर आनलाइन होंगी और ऐसा ही हुआ। बाजी ठीक 10 मिनट के बाद आनलाइन हो गई।
और आते ही मुझे- हाय स्वीतू क्या चल रहा है?
मैं- कुछ नहीं फरी जी बस आपका ही इंतेजार कर रहा था।
बाजी- अच्छा जी वो क्यों?
मैं- बस आपने बोला था ना कि आज अपनी बहन को नींद की गोलियां जूस में डालकर दें, तो थोड़ी घबराहट भी हो रही थी।
बाजी- क्यों घबराहट कैसी?
मैं- फरी जी अगर बाजी कुँवारी हुई अभी तक, और मेरा अंदाजा गलत हुआ तो बड़ी गड़बड़ भी हो सकती है ना?