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अंजाने में बहन ने ही चुदवाया पूरा परिवार complete

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बाजी- देखो, अगर तुम्हारी बहन पहले ही चुदवा चुकी है तो वो कभी किसी को नहीं बताएगी, क्योंकी इस तरह उसका अपना राज खुलने का डर होगा कि वो कुँवारी नहीं है और पहले ही चुदवा चुकी है।

मैं- “हाँ... ये भी ठीक है। तो फिर मैं कल ही अपनी बहन को जूस पिला दूंगा। बैंक्स फरी जी, आपने अच्छा तरीका बताया है मुझे मजे लेने का...”

बाजी- “बैंक्स और बाइ अब मैं सोने लगी हूँ। कल दिन में चैट करेंगे...”

मैं- ओके बाइ, लेकिन क्या मुझे आपकी पिक मिल सकती है इनबाक्स में?

बाजी- सोचूंगी कि तुम पे ऐतबार करूं या नहीं? बाइ बेबी।

मैंने भी बाजी को बाइ बोला और चैट बंद करके अपना लण्ड मसलने लगा, बाजी की फुद्दी का सोचकर और फिर एक बार मूठ लगाकर सो गया।

अगले दिन मैं सुबह तैयार होकर कालेज के लिए निकल गया, जहाँ काशी मुझे एक साइड पे ले गया और बोला

हाँ बे सुना क्या बना फरी का?”

मैंने कहा- “नहीं यार, अभी तक बस चैट ही चल रहा है देखो क्या बनता है?”

उसके बाद हमने बाकी का टाइम कालेज से निकलकर आवारा फिरने में गुजारा। दोपहर का खाना भी हमने एक होटेल ही में खाया और उसके बाद मैं काशी से अलग होकर घर आ गया, कोई 3:30 पे। तब तक अम्मी और निदा सो चुकी थीं, लेकिन बाजी अभी जाग रही थी। जैसे ही मैं घर में घुसा, बाजी जो कि टीवी देख रही थी। बोली- “भाई खाना लायें?”

मैंने कहा- “नहीं बाजी, मैंने खाना खा लिया है...” और इतना बोलकर अपने रूम की तरफ चल दिया। और दरवाजा को अंदर से बंद करके नेट ओन करके बैठ गया, बाजी के इंतजार में। क्योंकी मुझे यकीन था कि बाजी जरूर आनलाइन होंगी और ऐसा ही हुआ। बाजी ठीक 10 मिनट के बाद आनलाइन हो गई।

और आते ही मुझे- हाय स्वीतू क्या चल रहा है?

मैं- कुछ नहीं फरी जी बस आपका ही इंतेजार कर रहा था।

बाजी- अच्छा जी वो क्यों?

मैं- बस आपने बोला था ना कि आज अपनी बहन को नींद की गोलियां जूस में डालकर दें, तो थोड़ी घबराहट भी हो रही थी।

बाजी- क्यों घबराहट कैसी?

मैं- फरी जी अगर बाजी कुँवारी हुई अभी तक, और मेरा अंदाजा गलत हुआ तो बड़ी गड़बड़ भी हो सकती है ना?

 
Thanks to all

 
मैं- बस आपने बोला था ना कि आज अपनी बहन को नींद की गोलियां जूस में डालकर दें, तो थोड़ी घबराहट भी हो रही थी।

बाजी- क्यों घबराहट कैसी?

मैं- फरी जी अगर बाजी कुँवारी हुई अभी तक, और मेरा अंदाजा गलत हुआ तो बड़ी गड़बड़ भी हो सकती है ना?

बाजी- देखो सन्नी जी, या तो बहन के साथ मजे करने का ख्याल दिल से निकाल दो, या फिर डर निकल दो अपने दिल से, जो होगा देखा जाएगा।

मैं- हाँ फरी जी, आप कहती तो ठीक ही हो। लेकिन मैं चाहता हूँ कि बाजी के साथ पूरे होश में सेक्स का मजा करूँ।

बाजी- अरे बुद्धू जब तुम अपनी बहन को नींद की गोलियां देकर मजे करोगे, तो उसको साफ मत करना, बस कपड़े ठीक कर देना। जब वो सुबह जागेगी तो उसे पता चल जाएगा कि रात को किसी ने उसके साथ सेक्स किया है, और क्योंकी तुम ही होगे घर में, जिसने उसे खास तौर पे जूस पिलाया होगा रात को, तो समझ

जाएगी के ये सब तुमने ही किया है।

मैं- लेकिन इस तरह बाजी काम खराब भी कर सकती हैं? अगर वो बुरा मान गई या नाराज हो गई तो क्या होगा?

बाजी- कुछ नहीं होगा। उसको जब भी आग लगेगी तो करीबी और सेफ रास्ता उसे तुम्हारी शकल में ही नजर आएगा, तो वो खुद ही खामोश रहेगी। कुछ नहीं होगा तुम्हें, डरो नहीं।

मैं- ओके फरी जी। क्योंकी एक तो आप मेरी बहन की हम नाम हो और ऊपर से मेरे भले के लिए ही बोल रही हो तो मैं आज की रात जरूर कोशिश करूंगा। अगर बाजी ने जूस पी लिया तो काम बन जाएगा।

बाजी- लेकिन एक बात का ध्यान रखना कि जूस अपनी बहन को देकर उसके रूम से निकल जाना ज्यादा फोर्स नहीं करना।

मैं- लेकिन आप ऐसा क्यों बोल रही हो? इस तरह मुझे कैसे पता चलेगा कि बाजी ने जूस पिया है कि नहीं?

बाजी- अरे पागल, अगर फोर्स करोगे जूस पीने के लिए तो वो शक भी कर सकती है, और जब तुम एक घंटे तक उसके रूम में दोबारा जाओगे तो जूस का ग्लास देखकर तुम्हें पता तो चल ही जाएगा ना कि तुम्हारी बहन ने जूस पिया है कि नहीं? कुछ अपना दिमाग भी लगा लो।

मैं- ओके। मैं समझ गया और आप सुनाओ। क्या सोचा अपनी पिक के बारे में, दिखा रही हो या नहीं?

बाजी- दिखा देती हैं, लेकिन चेहरा नहीं दिखाऊँगी। ओके?

मैं- ठीक है। अगर चेहरा नहीं दिखना तो नंगा तो होना चाहिए ही ना?

 
बाजी- मुझे पता था कि तुम कुछ ऐसा ही बोलोगे। इसलिए मैंने बिना चेहरा के अपनी नंगी पिक बना ली थी।

मैं- हाहाहाहा... फरी जी वैसे आप हो बड़ी तेज चीज।

बाजी- वो कैसे?

मैं- आप बोले बिना खुद ही समझ लेती हो।

बाजी- वैसे सन्नी जी हो तो आप भी बहनचोद हेहेहेहे।

मैं- “अब फरी जी, दाँत बाद में निकाल लेना पहले अपने नंगा जिश्म तो दिखा दो प्लीज़..”

बाजी- पिक।

बाजी ने जो पिक भेजी, उसमें बाजी बेड पे लेटी हुई थी पूरी नंगी जिसमें बाजी की कोमल चूचियां और पिंकिश फुद्दी भी टांगें खुली होने की वजह से साफ नजर आ रही थी, जिसे देखकर मेरा लण्ड झटके खाना लगा। जो कि बाजी से चैट के दौरान पहले ही खड़ा हो गया था।

मैं- “वाव... फरी जी सूपर...”

बाजी- अब और नहीं बोलना दिखाने को।

मैं अपनी बहन का बेड और रूम जो पिक में नजर आ रहा था पहचान चुका था। लेकिन फिर भी अंजान बनते हुये कहा- “फरी जी, क्या ये आपकी रियल पिक है या नेट से ली हुई है आपने?”

बाजी- अगर तुमने ये पिक कभी नेट पे देखी है तो नेट से ही ली होगी। वैसे अगर यकीन मानो तो ये मेरी रियल ही है।

मैं- मस्त है।

बाजी- ओके। अब बाइ क्योंकी घर वाले किसी भी वक़्त जाग सकते हैं। अब कल ही बात होगी।

मैं- क्यों फरी जी आज रात बात नहीं करोगी क्या?

बाजी- रात मेरे साथ चैट करोगे, या अपनी बहन की चाटोगे? हेहेहेहे।

मैं- ऊह्ह... सारी फरी जी, रात को तो मैं बिजी रहूँगा बाजी के साथ। ओके बाइ फरी जी।

बाजी- बाइ।

बाजी से बात करने के बाद मैंने कुछ देर आराम किया और फिर 6:00 बजे शाम घर से निकल गया। अपने दोस्तों के साथ थोड़ी गप-शप की और घूमता फिरता रहा, और 10 बजे अपनी बहन का फेवरिट जूस बनवाकर पैक करवाया और घर की तरफ चल दिया। नींद की गोलियों की मुझे जरूरत भी नहीं थी, क्योंकी मैं तो पहले से ही जानता था कि बाजी ने जूस तो पीना नहीं है, बस ड्रामा करना है बेहोशी का। घर आया तो 10:30 हो रहे थे। मैंने बेल बजाई तो बाजी ने ही दरवाजा खोला। मैंने बाइक अंदर स्टैंड की और बाजी की तरफ जूस पैक बढ़ाया

और बोला- “ये लो बाजी आपके लिए लाया हूँ मैं...”

बाजी शोखी भरे अंदाज में- क्या बात है भाई, आज मेरे लिए जूस लाए हो? खैर तो है ना?

मैं उसी अंदाज में- क्यों जी मैं अपनी प्यारी बहन के लिए कोई चीज नहीं ला सकता हूँ क्या?

बाजी- “अच्छा जी बैंक्स...” और इतना बोलकर अपनी गाण्ड मटकाती हुई किचेन की तरफ चल दी।

 
मैंने बाजी को किचेन की तरफ जाता देखा तो जल्दी से बोला- “बाजी मैं खाना खाकर आया हूँ। अभी नहीं खाऊँगा...”

बाजी बड़ी अदा से सिर घुमाकर मेरी तरफ देखकर बोली- “अच्छा जी। और अब क्या इजाजत है कि मैं ये आपका लाया हुआ जूस पी हूँ कि ये भी सुबह ही पियूं?”

मैं बाजी की बात सुनकर झट से बोला- “नहीं बाजी, आप अभी पी लो सुबह तक तो खराब हो जाएगा..." और इतना बोलते ही मैं अपने रूम की तरफ चल दिया। टाइम गुजरने लगा। क्योंकी मैं नहीं चाहता था कि घर में कोई जागता हुआ हो, जब मैं अपनी बहन के रूम में जाऊँ।

मैं टाइम पास करने के लिए नेट पे आनलाइन हो गया और फेसबुक पे दोस्तों से चैट करने लगा। लेकिन आज बाजी आनलाइन नहीं थी। क्योंकी बाजी को ये ही पता था कि मैं किसी भी वक़्त उनके रूम में आ सकता हूँ, जिससे उनका सारा भेद खुल सकता है। मैं कोई रात 11:40 पे अपने रूम से निकला और बाजी के रूम की तरफ चल दिया। जब मैं बाजी के रूम के पास गया तो बाजी के रूम का दरवाजा मुझे बंद नजर आया, तो मैंने धीरे से एक बार बाजी के रूम में जाने से पहले हल्का सा नाक किया कि बाजी अपनी तैयारी कर लें और उन्हें पता चल जाए कि कोई रूम में आने वाला है।

नाक के बाद मैंने धीरे से दरवाजे को दबाया तो वो बिना आवाज किए धीरे-धीरे खुलने लगा, तो मैं इतना दरवाजा खुलते ही कि मैं अंदर दाखिल हो सकें, रूम में घुस गया और दरवाजे को अपने पीछे बंद कर दिया। उस वक़्त रूम में हल्की पावर की लाइट ओन थी, जिससे बेड पे लेटी हुई मेरी प्यारी बहन बड़ी ही मासूम लग रही थी। उस वक़्त बाजी ने एक हल्की सी शर्ट और पाजामा पहना हुआ था। जिसमें बाजी और भी गजब की दिख रही थी। बाजी को इस हालत में देखकर मेरा लण्ड पाजामे में झटके खाने लगा।

मैं धीरे से बाजी के पास चला गया, और बाजी को दो-तीन आवाज लगाई।

लेकिन बाजी ना तो उठी, और ना ही बाजी ने कोई हरकत की, तो मैंने हल्का सा बाजी को कंधे से पकड़कर हिला दिया और साथ ही आवाज भी लगाई। लेकिन बाजी की तरफ से कोई रेस्पोन्स नहीं मिला। बाजी की तरफ से कोई जवाब ना मिलने से मैं समझ गया कि बाजी बेहोशी का ड्रामा कर रही हैं, और वो पूरी तरह मेरे साथ सेक्स का मजा लेने के लिए तैयार हैं।

फिर मैं धीरे से फरी बाजी के पास बेड पे बैठ गया और अपना एक हाथ अपनी बड़ी बहन की चूचियों पे रखकर हल्का सा दबा दिया। जैसे ही बाजी की चूचियों पे मैंने अपना हाथ रखा तो मुझे एहसास हुआ कि बाजी ने ब्रा नहीं पहन रखी है।

 
इस एहसास के साथ ही मुझे अपनी बहन पे इतना प्यार आया कि मैं बता नहीं सकता और फिर बाजी के साथ ही लेट गया, और अपने हाथ से बाजी की शर्ट जो कि काफी ढीली थी, उसे धीरे से ऊपर करने लगा। धीरे-धीरे बाजी की शर्ट चूचियों से ऊपर तक कर दी और बाजी के नंगी चूचियों को अपने हाथों से धीरे-धीरे सहलाने लगा और फिर अपना सिर हल्का सा उठाकर बाजी की चूचियों पे अपनी जुबान घुमाने और उन्हें मुँह में भरकर चूसने लगा।

मेरी इस हरकत से बाजी का जिम एक बार जरा सा हिला, और थोड़ा अकड़ा भी। लेकिन बाजी ने ना तो अपनी आँखें खोली और ना ही कुछ बोली। मैं उठकर बैठ गया और बाजी का पाजामा अपने दोनों हाथों से पकड़कर धीरे-धीरे नीचे खिसकाने लगा। लेकिन क्योंकी बाजी सीधी लेटी हुई थी, तो पाजामा आसानी से नहीं उतर रहा था तो मैंने अपना एक हाथ बाजी की कमर के नीचे घुसाकर बाजी की कमर को थोड़ा ऊपर किया और दूसरे हाथ से बाजी का पाजामा घुटनों तक उतार दिया और अपना हाथ बाजी की कमर के नीचे से निकालकर पाजामा पूरी तरह बाजी के जिश्म से अलग कर दिया। जिससे बाजी का पूरा जिस्म कंधे से नीचे पूरा नंगा हो गया।

बाजी को इस तरह नंगा देखकर मैं खड़ा हो गया और झट से अपना पाजामा भी उतार दिया। फिर बाजी की टाँगों को दोनों तरफ फैलाकर बीच में बैठ गया, और अपना लण्ड थूक से गीला करके बाजी की फुद्दी पे रख दिया, तो बाजी का पूरा जिम जैसे लज्जत के मारे हल्का सा कॉप गया हो। लेकिन बाजी अब भी सोती हुई बनी रही। मैंने अपने लण्ड को ऐसे ही बाजी की फुद्दी पे रखे हुये थोड़ा आगे को झुक के बाजी की चूचियों पे अपने हाथ रख दिए, और उन्हें बड़े ही प्यार और आराम से सहलाने लगा, और साथ ही अपने हाथों को बाजी की चूचियों से नीचे उनके पेट पे घुमाता और थोड़ा झुक के चूमता भी जाता। जिससे बाजी बहुत ज्यादा गरम होने लगी, जिसका एहसास मुझे अपने लण्ड पे उनकी फुद्दी के बढ़ते हुये दबाओ से हो रहा था।

मेरी इन हरकतों से बाजी काफी ज्यादा गरम हो गई थी, और अपनी गाण्ड को मेरे लण्ड की तरफ हल्का-हल्का दबाने भी लगी थी, जिससे बाजी की फुद्दी की गर्मी का मुझे अपने लण्ड पे पूरी तरह एहसास हो रहा था। बाजी की फुद्दी क गीलेपन की वजह से मेरे लण्ड का सुपाड़ा भी हल्का सा बाजी की फुद्दी में समा चुका था। मैंने भी अब बाजी को और ज्यादा तरसाना मुनासिब नहीं समझा, और बाजी की गाण्ड के दोनों तरफ अपने हाथ रखते। हुये अपने लण्ड को अपनी बहन की फुद्दी में धीरे-धीरे घुसाने लगा।

मेरा लण्ड बड़े आराम और सकून से बिना किसी रुकावट के फरी बाजी की फुद्दी में घुसता चला गया। जैसे-जैसे मेरा लण्ड बाजी की फुद्दी में घुसता जा रहा था, बाजी की सांस भी थोड़ी तेज होती जा रही थी, और साथ ही बाजी की दोनों टांगें जो कि मेरे दायें बाये थीं, धीरे-धीरे मेरी कमर के गिर्द जकड़ बनाती जा रही थीं बाजी की टाँगों की जकड़ बन जाने की वजह से मेरा लण्ड पूरा बाजी की फुद्दी में नहीं जा पा रहा था। क्योंकी बाजी की रमैंने काफी मोटी थीं, तो मैंने बाजी की टाँगों से अपनी कमर को आजाद करवाया और उनकी टाँगों को हल्का सा उनके पेट की तरफ मोड़ दिया और एक हल्का सा झटका दिया, जिससे मेरा पूरा लण्ड बाजी की फुद्दी में जड़ तक घुस गया

 
मेरे लण्ड के पूरा घुसते ही बाजी के मुँह से ‘सस्सीईई आआह्ह' की हल्की सी आवाज भी निकल गई लेकिन बाजी अपनी आँखें बंद किए मुझसे चुदाई का पूरा मजा लेती रही और मैं अपने लण्ड को बड़े आराम से हल्का

सा बाहर खींचता और फिर से अपनी बहन की फुद्दी में घुसा देता।

जिससे बाजी के मुँह से हल्की-हल्की सिसकियां भी निकल जाती, जिससे की पता चल रहा था कि बाजी पूरे मजे में है। मैं 10 मिनट तक बाजी को बड़े ही प्यार से चोदता रहा। जिसमें मैंने जरा भी ताकत नहीं लगाई और साथ ही बाजी की चूचियों को भी सहलाता और दबाता रहा। बाजी का जिम हल्का सा अकड़ गया और फिर ‘आअहह सस्सीए' की हल्की आवाज के साथ ही बाजी खामोश हो गई, और अपना जिम भी ढीला छोड़ दिया, क्योंकी बाजी की फुद्दी अपने ही लव जूस से लथफथ हो चुकी थी।

बाजी का पानी निकलते ही मैंने भी अपनी स्पीड को हल्का सा बढ़ा दिया और बाजी के फारिघू होने के एक मिनट बाद ही मैंने भी अपना लण्ड बाजी की फुद्दी से निकाल लिया और अपना सारा पानी बाजी की रानों और फुद्दी के ऊपर ही गिरा दिया, और उठकर अपना पाजामा पहना और बाजी के होंठों पे एक हल्की सी किस्सी

करके बाजी को ऐसे ही नंगा छोड़कर बाजी के रूम में से निकल गया, और अपने रूम में आ गया।

अब मुझे देखना था कि बाजी आगे क्या करती हैं? खुलती हैं, या अभी भी वो ड्रामा करती हैं मेरे साथ? मैं अपने रूम में आकर नहाया और बेड पे आकर लेट गयाम सोने के लिए। लेकिन नींद थी की उसका दूर तक कोई नामओ-निशान तक ना था, बस अगर कुछ था तो मेरे खयालों में अभी कुछ देर की हुई अपनी बड़ी बहन की चुदाई का ही मंजर था, जिसकी वजह से मेरा लण्ड फिर से पूरा टाइट हो चुका था। जब कुछ देर नींद नहीं आई तो मैं उठा और पीसी ओन कर लिया और फेसबुक पे आनलाइन हो गया, तो देखा की बाजी भी आनलाइन थीं, और जैसे ही मैं आनलाइन हुआ बाजी की तरफ से फारन ही- “हाय...” का मेसेज आ गया।

मैं- हाय फरी जी।

बाजी- क्या रहा सन्नी जी, काम बना कि बस हाथ से हिला लिया?

मैं- अरे नहीं फरी जी, अब ऐसा भी नहीं है। जब बाजी को जूस पिला के बेहोश कर ही दिया था तो फिर मोके का फायदा उठाने से भी भला क्या डरना?

बाजी- अच्छा जी। तो आप भी आज अपनी बहन के साथ सेक्स करके बहनचोद बन ही गये हो हेहेहेहे।

मैं- हाहाहाहा... हाँ फरी जी, आपने सच कहा।

बाजी- कैसा लग रहा बहनचोद बनकर?

मैं- फरी जी, सच में बहुत मजा आया।

बाजी- हुउन्न् तो फिर अब क्या इरादा है आपका?

मैं- अब देखना है कि बाजी क्या करती हैं? क्योंकी मैं बाजी को नंगा ही छोड़ आया हूँ, अपने लण्ड का पानी भी बाजी के ऊपर अच्छे से गिराकर।

बाजी- ये अच्छा किया तुमने, क्योंकी इससे तुम्हारी बहन समझ जाएगी कि तुमने क्या कुछ किया है?

 
मैं- अच्छा फरी जी, आज अपनी कुछ पिक ही दिखा दें ना प्लीज़... भले चेहरा नहीं दिखाओ।

बाजी- क्या देखोगे?

मैं- “अपनी फुद्दी दिखा दें ना प्लीज़ज़..”

बाजी- अभी तो अपनी बहन की देखकर और उसमें पूरी तरह अपना घुसाकर मजा लेकर आए हो।

मैं- लेकिन आपकी तो नहीं देखी ना?

बाजी- मेरी भी तुम्हारी बहन जैसी ही है।

मैं- “हाँ वो तो है। आप भी मेरी बहन ही हो, लेकिन एक बार दिखा दो ना प्लीज़...”

बाजी- ओके। इंतेजार करो।

मैं- ओके।

थोड़ी देर के बाद बाजी की पिक आ गई, जिसमें बाजी ने अब भी वोही पाजामा थोड़ा नीचे किया हुआ था जिसमें पहले से ही थी, जब मैं उनके रूम में गया था।

मैं- वाव... फरी जी। लेकिन प्लीज़... पूरी तरह अपना ये पाजामा निकालकर दिखाओ ना?

बाजी- क्यों, इतना ही ठीक है ज्यादा नहीं बढ़ो।

मैं- प्लीज़्ज़... फरी जी, आप इतना इर क्यों रही हो? मैं अगर किसी को आपकी पिक दिखा भी दूंगा तो आप कौन सा अपना चेहरा मुझे अपनी पिक में दिखा रही हैं प्लीज़्ज़... मान जाओ।

फरी- ओके। क्या दिखाऊँ?

मैं- “पाजामा उतार दें और अपनी गाण्ड भी दिखाओ ना प्लीज़..."

बाजी- ओके।

मैं- उम्म्म ह... फरी जी आपकी बाड़ी भी कमाल की है, बिल्कुल मेरी बहन फरिहा जैसी। आई लव यू।

बाजी- क्यों मुझ पे लाइन मार रहे हो?

मैं- नहीं फरी जी, मैं आप पे लाइन नहीं मार रहा हूँ। जो सच है वो ही बोल रहा हूँ।

बाजी- अच्छा अब बाइ।

मैं- फरी जी प्लीज़... एक बार अपनी ब्रा भी उतार दें ना... पूरी बाडी नंगी दिखा दें।

बाजी- सन्नी जी, आपकी मांगें बढ़ती जा रही हैं।

 
मैं- आखिरकार, आप मेरी बहन जैसी ही तो हैं। आपसे नहीं बोलूंगा तो किसको बोलूंगा? प्लीज़... मना नहीं करना।

बाजी- ओके। लेकिन इसके बाद और कोई डिमांड नहीं करोगे तुम?

मैं- ओके नहीं करूंगा।

बाजी- ओके।

मैं- वाउ... फरी जी, सच्ची में आपकी बाडी मेरी बहन जैसी ही है।

बाजी- कहीं मैं ही तो तुम्हारी बहन नहीं?

मैं- अरे नहीं फरी जी, मेरी बहन तो इस वक्त बेहोश पड़ी होगी। सुबह ही उठेगी आप कैसे हो सकती हो?

बाजी- चलो ठीक है। लेकिन सुबह घर पे ही रुकना और अपनी बहन पे ध्यान रखना कि वो क्या करती है? कुछ बोलती है या नहीं?

मैं- ओके। लेकिन अगर बाजी ने अम्मी को कुछ बोल दिया तो क्या होगा?

बाजी- अरे सन्नी जी, यकीन रखो। वो कभी किसी को नहीं बताएगी और अब मैं आफलाइन होने लगी हैं। थोड़ी देर सो हूँ सुबह कालेज भी जाना है।

मैं- “ओके फरी जी बाइ..." हालांकी बाजी ने ये कालेज वाला झूठ ही बोला था।

बाजी से बात करने के बाद मैं भी आफलाइन हो गया, और बेड पे लेट गया और बाजी के बारे में सोचते-सोचते सो गया। सुबह अम्मी के उठाने से ही मेरी आँख खुली। मैंने उठकर देखा तो 10:00 बज रहे थे और अम्मी कहीं बाहर जाने के लिए तैयार नजर आ रही थीं।

अम्मी ने मुझे उठता देखा तो बोली- “सन्नी क्या तुम नशा करके सोए थे, टाइम देखो क्या हो गया है?”

मैं जल्दी से उठ बैठा और बोला- सारी अम्मी जान, रात नींद काफी देर तक नहीं आई। इसलिए उठने में देर हो गई है।

अम्मी ने कहा- “अच्छा तुम्हारा नाश्ता तैयार है। फरी तुम्हें नाश्ता दे देगी क्योंकी मैं साथ वाली छाबड़ा आंटी के साथ मार्केट जा रही हैं, देर से आऊँगी। अपनी बहन को घर में अकेला छोड़कर कहीं आवारागर्दी करने नहीं । निकल जाना...” और रूम से बाहर को चल पड़ी।

अम्मी के जाते ही मैं जल्दी से उठा और वाशरूम में जा घुसा और नहाकर कपड़े चेंज किए और नीचे आ गया, तो देखा कि अम्मी मार्केट जाने के लिए तैयार बैठी हुई थीं। मुझे नीचे आते देखा तो बोली- “मैंने तुम्हारा नाश्ता बनाकर रख दिया है कर लेना। फरी नहा रही है और गेट बंद कर लो। आजकल चोरी चकारी काफी बढ़ गई है।

और खाला छाबड़ा के साथ बाहर निकल गई।

 
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