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अंजाने में बहन ने ही चुदवाया पूरा परिवार complete

खैर, कोई 10 मिनट ही गुजरे होंगे कि जहाँ मैं खड़ा हुआ था, उसके दूसरी तरफ से एक लड़की को नकाब किए और इधर उधर देखते हुये उसी मकान की तरफ जाते देखा जहाँ कि काशी मौजूद था।

वो लड़की जैसे ही मकान के करीब पहुँची तो पहले से हाथ में पकड़े मोबाइल से काल की कि तभी काशी ने मकान का दरवाजा खोला और उसकी तरफ देखकर सर से इशारा किया। तो वो लड़की तेजी से मकान में चली गई। तभी काशी ने इधर-उधर देखा और जैसे ही उसकी नजर मुझे पे पड़ी तो हल्का सा मुश्कुराकर दरवाजा बंद करके अंदर चला गया।

(मैं क्योंकी काफी फासले पे खड़ा हुआ था ताकी उस लड़की की मुझ पे नजर ना पड़ सके, लेकिन क्योंकी काशी को पहले से ही पता था कि मैं कहाँ खड़ा होऊँगा इसीलिए उसने सीधा मेरी तरफ ही देखा था)

उन दोनों के अंदर जाते ही मैं भी वहाँ से निकला और घर आ गया, तो देखा कि अम्मी बाहर हाल में ही बैठी टीवी देख रही हैं। तो भी उनके पास ही जा बैठा और अम्मी से फरी बाजी का पूछा।

तो उन्होंने कहा- “वो जरा अपनी दोस्त से मिलने गई है 12:00 बजे तक आ जयेगी। लेकिन तुम क्यों पूछ रहे। हो कुछ काम था क्या?”

वो अम्मी भूख लग रही है कुछ खाने क लिए बोलना था बाजी से और तो कोई खास काम नहीं था।

तो अम्मी ने कहा- “तुम बैठो, मैं ला देती हूँ..” और उठकर किचेन में चली गईं।

नाश्ता करने के बाद मैं अपने रूम में चला गया और बेड पे लेट गया और काशी के बारे में सोचने लगा कि साला किस तरह मजे ले रहा होगा नई फुद्दी का, और इन सोचों ने मेरा लण्ड भी खड़ा कर दिया तो मैंने बाथरूम में जाकर मूठ लगाई और वापिस आकर बेड पे लेट गया और ऐसे ही ख्यालों में खोया रहा।

और टाइम कब गुजरा पता ही नहीं चला। पता तब चला जब काशी की काल आई। तो मैंने जल्दी से काल पिक की तो काशी ने कहा- “भाई, पार्क में आ जाओ मैं वहीं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ..” ।

तो मैं झटके से उठा और घर से निकलकर करीबी पार्क में चला गया जहाँ काशी बैठा मेरा इंतेजार कर रहा था। मैं जैसे ही काशी के पास गया तो देखा कि उसका चेहरा खुशी से लाल हो रहा था।

तो मैंने कहा- “क्यों बे साले, बड़ा खुश दिख रहा है..."

तो काशी ने हँसते हुये कहा- “यार, क्या बताऊँ क्या मस्त चीज है और ऊपर से सच्ची में कुँवारी भी थी। लेकिन मजा बहुत करवाया साली ने..."

मैंने काशी की खुशी को नजर अंदाज किया और बोला- “साले ला कैमरा मुझे दे और जाकर घर पहले नहा धोकर साफ तो हो, या ऐसे ही गान्डू बना फिरेगा...”

तो काशी ने हँसते हुये मुझे कैमरा दिया और बोला- “ये ले यार, सब रेकाई हो गया है इसमें, देख लेना। मैं चलता हूँ अब...” काशी मुझे कैमरा पकड़ाते ही पार्क से बाहर को चल दिया।

 
मैं भी उसके पीछे ही बाहर निकला पार्क से और घर आ गया और सीधा रूम में जाकर कैमरा को शुरू से प्ले किया तो थोड़ी देर तक तो उसमें सिर्फ काशी ही नजर आता रहा। लेकिन उसके बाद काशी ने दरवाजा खोला और वो लड़की अंदर आ गई।

लड़की रूम में आकर बेड के करीब खड़ी हो गई और फिर काशी भी दरवाजे को लाक करके उसके पास आकर खड़ा हो गया और उससे कुछ बात करने लगा, तो वो लड़की काशी की बात सुनकर बेड पे बैठ गई। वो बैठ गई तो काशी भी उसके पास बैठ गया और उससे बातें करने लगा और... और साथ ही उसे अपना नकाब हटाने के लिए अपने हाथ से भी फोर्स करने लगा।

तो उस लड़की ने थोड़ा शरमाते हुये अपना नकाब हटा दिया और नकाब हटते ही जो चेहरा मुझे नजर आया, उसको देखकर तो जैसे मेरी अपनी ही गाण्ड फटी की फटी रह गई.. क्योंकी वो कोई और नहीं मेरी बड़ी बहन फरी ही थी।

फरी को काशी के साथ देखना मेरे लिए नाकाबिल-ए-यकीन मंजर था लेकिन ये एक हकीकत थी जो कि अब मेरे सामने थी। मैंने वीडियो बंद की और फौरन काशी को काल मिलाई।

तो उसने काल पिक करते ही कहा- “क्यों यार, अब क्या हुआ? अभी तो मैं घर पहुँचा ही हूँ कि तूने फिर से काल कर दी है कुछ काम था क्या?”

मैं- “हाँ यार, थोड़ा काम ही है। तू ऐसा कर कि मेरा वाला लैपटाप लेकर आ जा जल्दी से। मैं तुम्हें पार्क में ही मिलूंगा.”

काशी- “यार, सब ठीक तो है ना? तू इतना गम्भीर क्यों हो रहा है?”

मैं अब इस गान्डू को क्या बताता कि मेरी बहन को मेरी ही मदद से चोदकर साला पूछ रहा है कि मैं इतना गम्भीर क्यों हो रहा हूँ। मैंने कहा- “नहीं यार, बस थोड़ी गप-शप करनी थी इसलिए बुलाया है...”

काशी- “चल ठीक है, मैं अभी थोड़ी देर में नहाकर निकलता हूँ घर से...” और काल कट कर दी।

काशी से बात करने क बाद मैंने फिर से वीडियो चलाई और देखने लगा, जहाँ से पाज की थी। तो अब काशी । बाजी की चूचियों को कमीज ऊपर से ही पकड़कर दबा रहा था और सहला रहा था, जिसमें बाजी कोई भी ऐतराज नहीं कर रही थीं, बल्की पूरा मजा ले रही थीं। मैंने मूवी को थोड़ा आगे किया जहाँ काशी बाजी के कपड़े उतारने के बाद बाजी को बेड पे बिठा चुका था और बाजी सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में बेड पे बैठी हुई थी।

लेकिन बाजी का चेहरा उस वक़्त कैमरे की तरफ नहीं था, बाजी की बैक क्योंकी कैमरे की तरफ थी और उनकी नंगी कमर और पैंटी में कैद गाण्ड देखकर मेरा लण्ड भी खड़ा होने लगा था। और जहाँ मुझे थोड़ी देर पहले तक गुस्सा आ रहा था काशी में अपने आप में और अपनी बड़ी बहन फरिहा पे, अब बाजी को इस हालत में देखकर कहीं हल्का सा मजा भी आ रहा था।

 
अब मैंने देखा कि काशी ने भी अपने कपड़े उतार दिए थे जो कि बाजी कि पीछे खड़ा हुआ था और बेड पे बाजी के पीछे जाकर बैठ गया और अपने दोनों हाथों से पीछे से ही फरिहा बाजी को कस लिया और उसकी गर्दन पे। किस करने लगा।

बाजी काशी की किसी भी हरकत से उसे मना नहीं कर रही थी। थोड़ी देर तक ऐसे ही चलता रहा। फिर काशी ने बाजी को अपनी तरफ घुमाया और साथ ही बाजी के होंठों से अपने होंठ लगा दिए और किस करने लगा। तो बाजी भी अपना एक हाथ उसके सर के पीछे रखते हुये किस करने लगी। बाजी को किस करने के साथ ही काशी ने अपना हाथ मेरी बहन की चूचियों पे रख दिया और उन्हें धीरे-धीरे अपने हाथ से दबाने और मसलने लगा, जिससे बाजी और भी गरम होती दिखने लगी।

थोड़ी देर तक सब ऐसे ही चलता रहा और फिर काशी का हाथ जो कि बाजी के पीछे कमर पे था, उस हाथ से ही काशी ने बाजी की ब्रा का हुक कब खोल दिया। पता ही नहीं चला और अचानक काशी का वो हाथ जो बाजी की ब्रा के ऊपर से ही बाजी की चूचियों को दबा रहा था, थोड़ा नीचे हुआ और साथ ही उसने बाजी की ब्रा को हटा दिया, जिससे मेरी नजरों के सामने मेरी ही बहन की चूचियां नंगी हो गईं, जो कि मेरी ही वजह से मेरे दोस्त के हाथों ही मेरी बहन अपनी इज़्ज़त लुट रही थी।

चूचियों को नंगा देखकर जहाँ मेरा लण्ड मेरा ट्राउजर फाड़कर बाहर आने को बेचैन हो रहा था। वहीं मैं उस वक़्त ये भी भूल चुका था कि अभी कुछ देर पहले मैं अपने आप में और अपने दोस्त पे कितना गुस्सा कर रहा था। अब मेरा पूरा ध्यान अपनी बड़ी बहन की नंगे चूचियों पे था, जिनसे मेरा दोस्त अपने हाथों से खेल रहा था। फिर उसने बाजी को नीचे लिटा दिया बेड पे और खुद बैठा-बैठा ही फरी बाजी की चूचियों पे झुक गया और बाजी की चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और हाथ से भी बाजी की चूचियों को दबाने और सहलाने लगा। और फिर धीरे-धीरे बाजी के पेट की तरफ बढ़ा और बाजी के पेट पे अपनी जुबान घुमाता और नीचे की तरफ जाने लगा।

और फिर अपना सर उठा लिया और बाजी की तरफ देखा जो कि काशी के इस तरह उठ बैठने से अपनी आँखें खोलकर उसकी तरफ ही देख रही थी। तो काशी ने बाजी की तरफ से नजर हटाकर अब अपना हाथ बाजी की पैंटी की तरफ बढ़ाया और धीरे से बाजी की पैंटी नीचे खिसकाने लगा और आखिरकार बाजी की पैंटी उतारकर वो उठा और बाजी की दोनों रानों को खोलते हुये रानों के बीच में आकर बैठ गया।

उस वक़्त मेरी नजर बाजी की बिना बालों की चूत में पड़ी तो मेरे मुँह से हल्की सी सिसकी निकल गई और हाथ से मैंने अपना लण्ड भींच लिया। (हालांकि मुझे कैमरे में ये सब पूरी तरह साफ-साफ नजर नहीं आ रहा था, लेकिन जितना भी नजर आ रहा था वो भी मेरे होश उड़ाने के लिए काफी था)

खैर अब काशी थोड़ा आगे हुआ और अपने लण्ड पे अच्छी तरह थूक लगाकर बाजी की चूत पे रगड़ने लगा जो कि 54 साइज का ही था और इतना मोटा भी नहीं था तो काशी के इस तरह करने से बाजी जो कि काशी की तरफ ही देख रही थी अपनी आँखों को बंद करके लेट गई और अपने हाथों से बेड की चादर को पकड़कर सिसकने लगी (जिसकी आवाज तो मुझे सुनाई नहीं दे रही थी) अब काशी ने थोड़ा थूक और भी अपने लण्ड और फरी बाजी की चूत पे लगा दिया और बाजी पे झुक गया। फिर मेरी बहन के कंधों पे अपने हाथ जमाकर हल्का सा झटका लगाया, जिससे बाजी का मुँह पूरी तरह एक बार खुला और फिर बंद हो गया।

 


लेकिन क्योंकी अब मुझे सिर्फ़ वो दोनों ही नजर आ रहे थे और बाजी की फुद्दी और काशी का लण्ड जो कि बाजी की फुद्दी में घुस रहा था उस वक़्त नजर नहीं आ रहा था, जिससे मैं सिर्फ अंदाजा ही लगा सकता था।

काशी बाजी के ऊपर लेटा धीरे-धीरे हिलता रहा और कुछ देर तक बाजी काशी के सीने पे अपने हाथ रखे उसे धकेलने की कोशिश करती रही। लेकिन फिर आराम से लेट गई और अपनी आँखें भी बंद कर लीं लेकिन काशी। वैसे ही मेरी बहन क ऊपर लेटा हिलता रहा तो कुछ देर के बाद मेरी बहन भी नीचे से हिलने और काशी का पूरा साथ देने लगी जिससे मैं समझ गया कि बाजी को जो दर्द होना था वो हो चुका और अब वो अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।

कोई 15 मिनट की लगातार चुदाई के बाद काशी ने झटके से अपने आप को पीछे हटाया और अपने लण्ड को अपने हाथ में पकड़कर हिलाने लगा और 4-5 बार हिलने से ही उसके लण्ड ने पानी छोड़ दिया, जो कि मेरी बहन के ऊपर ही गिरा था।

जिसके बाद काशी उठा और साइड से एक कपड़ा उठाकर मेरी बहन की तरफ बढ़ा दिया जिसे मेरी बहन ने पकड़ लिया और अपने आपको और अपनी फुद्दी को साफ करने लगी। दोनों ने अपने आप को जितना हो सकता था। साफ किया और उसके बाद कपड़े पहन लिए और फिर बैठकर थोड़ी देर बातें करते रहे और उसके बाद बाजी उठी

और काशी को किस करने के बाद नकाब किया और उस रूम से निकल गई।

तो मेरी बहन के जाते ही काशी ने अपना चेहरा कैमरे की तरफ किया और हँसने लगा। जिसकी हँसी ने मेरा। सारा मजा जो अभी मूवी देखकर आ रहा था, खराब हो गया और मुझे फिर से गुस्सा आने लगा अपने आप पे।

मैं और काशी अक्सर मिला करते थे, अगर कोई काम होता तो घर से बाहर बुला लिया करते थे। अभी मैं मूवी देखने के बाद अपने आप पे और काशी में गुस्सा ही कर रहा था कि मेरे मोबाइल की बेल होने लगी। देखा तो काशी ही की काल थी।

मैंने काल पिक की तो काशी ने कहा- “यार कहाँ है तू? मैं यहाँ पार्क में आ गया हूँ...”

मैं- “तू बैठ, मैं आ रहा हूँ, 10 मिनट में..." और इतना बोलते ही काल कट कर दी और उठकर पार्क की तरफ चल दिया। लेकिन जाते हुये कैमरा छुपा गया था कि किसी की नजर ना पड़ जाए इस पे।

मैं जैसे ही पार्क में दाखिल हुआ सामने बेंच पे बैठे काशी पे मेरी नजर पड़ गई, जो कि उस वक्त बड़ा ही खुश लग रहा था। मैं उसकी तरफ चल दिया तो काशी ने भी मुझे देख लिया और उठकर खड़ा हो गया और जैसे ही मैं उसके पास पहुँचा।

 
SID4YOU wrote: ↑ 01 Jan 2019 16:11
बहोत मस्त कहानी है बेहद हॉट और सेक्सी
 
Thanks to all

 
मैं जैसे ही पार्क में दाखिल हुआ सामने बेंच पे बैठे काशी पे मेरी नजर पड़ गई, जो कि उस वक्त बड़ा ही खुश लग रहा था। मैं उसकी तरफ चल दिया तो काशी ने भी मुझे देख लिया और उठकर खड़ा हो गया और जैसे ही मैं उसके पास पहुँचा।

काशी ने कहा- “क्या बात है यार, ऐसा क्या काम पड़ गया तुम्हें जो मुझे इस तरह बुलाया है तुमने?”

मैंने काशी का बाजू पकड़ा और इधर-उधर देखकर एक साइड पे चल दिया जहाँ कोई भी नहीं था।

काशी ने कहा- “यार, कुछ बोलेगा भी क्या बात है या मुझे ही घसीटेगा यहाँ पे?”

मैंने कहा- “थोड़ा सबर कर, अभी बताता हूँ तुझे सब कुछ..” और पार्क के एक कोने में पड़े बेंच पे काशी को अपने साथ लेकर बैठ गया और काशी की तरफ देखते हुये बोला- “अब देख काशी, जो में पूछूगा तुम्हें सच-सच बताना है मुझे, वरना बात बिगड़ जाएगी...”

काशी- “यार, तू पूछ जो भी पूछना है। मैं भला तेरे साथ आखिर झूठ क्यों बोलने लगा और आखिर बात क्या है?”

मैं- “काशी, मुझे पता चला है कि तू उस लड़की को पहले से ही जानता था, यहाँ तक कि तुम्हें उसका नाम भी पता था और मुझे बताने से पहले तुम लोग मिलते भी रहे हो...”

काशी हैरानी से मेरी तरफ देखकर बोला- “ये तू क्या बोल रहा है और तुझे आखिर ऐसा किसने बता दिया कि मैं फरी को पहले से ही जानता था और मिला भी हूँ? ये झूठ है मेरे यार...” काशी की आवाज से पता चल रहा था। कि वो सच बोल रहा है।

मैं- बस बता दिया किसी ने।

काशी- “नहीं सन्नी, ऐसा नहीं चलेगा। तुझे बताना ही होगा कि किस गान्डू ने हमारे बीच गलतफहमी पैदा करने की कोशिश की है...”

मैं- “बता दूंगा तुम्हें भी। लेकिन काशी तुझे उस लड़की के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था..”

काशी हैरानी से मेरी तरफ देखते हुये बोला- “क्यों यार, आखिर ऐसी क्या बात हो गई? कौन थी वो लड़की? क्या तेरी कोई रिश्तेदार तो नहीं थी?”

मैं- “नहीं यार, जिस तरह तू मेरा दोस्त है वो फरी भी मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त की बहन है। इसलिए बोल रहा हूँ कि ये अच्छा नहीं हुआ...” (अब मैं उसे कैसे बता देता कि वो किसी और की नहीं मेरी अपनी ही बड़ी बहन । थी, जिसकी चुदाई काशी ने की थी मेरी ही मदद से)

काशी एक आहह की आवाज निकलता हुआ बोला- “छोड़ यार, उसने भी तो किसी ना किसी से चुदवाना ही था। ये तो अच्छा हुआ कि हमने चोद लिया..." और हाहाहाहा करके हँसने लगा।

मुझे उस वक़्त काशी पे बड़ा गुस्सा आया और मैंने जलकर कहा- “काशी अगर मैं भी इसी तरह तेरी ही बहन को चोदूं जिस तरह तू ने फरी को चोदा है तो क्या तेरा दोस्ती से एतबार नहीं खतम हो जाएगा?”

काशी हैरानी से कुछ देर मेरी तरफ देखता रहा और फिर बोला- “यार सन्नी, मुझे नहीं समझ आ रही कि आखिर तू इतना गुस्सा क्यों हो रहा है? बाकी अगर तू या मेरा कोई और दोस्त अगर मेरी बहन के साथ उसकी मर्जी और रजामंदी से चोदेगा तो मैं भला क्यों ऐतराज करूंगा? ये तो अच्छा है ना कि इस तरह वो मेरा दोस्त होने के नाते मेरी बहन को बदनाम नहीं करेगा। और वैसे यार सन्नी, मैं तुम्हें इतना छोटे जेहन का नहीं समझता था..."

 
मैं हैरानी से काशी की बातें सुनता रहा और उसके खामोश होते ही बोला- "काशी, मैं हैरान हूँ कि तुम्हें इस बात की जरा भी परवाह नहीं होगी कि कोई तुम्हारी बहन की फुद्दी मारता रहे...”

काशी- “मुझे कोई ऐतराज तब होगा, जब कोई मेरी बहन की मर्जी के बिना उसके साथ बदतमीजी करेगा। बाकी अगर कहीं मेरी बहन को मेरी मदद की जरूरत हुई तो मैं उसकी मदद भी करूंगा...”

मैं- नहीं यार, मैं नहीं मान सकता तेरी ये बात कि तू इतना आगे भी जा सकता है। यार यहाँ हमारे मुल्क में तो भाई बहनों को किसी गैर मर्द के साथ बात करता भी देख ले तो कत्ल कर डालते हैं और तू है कि मुझे बोल रहा है कि तुम्हें कोई मसला नहीं है इससे..."

काशी मेरी हालत पे मुश्कुराता हुआ बोला- “देख यार, मैं तो ऐसे भी भाई बहनों को जानता हूँ, जो कि खुद ही। आपस में चुदाई करते हैं और पूरा मजा उठाते हैं। मैं तो कुछ भी नहीं हूँ और अगर मैं अपनी बहन को उसकी मर्जी की लाइफ गुजारने का मोका देना चाहता हूँ या दे दें तो इसमें इतना हैरान होने वाली कौन सी बात है मेरी जान?"

काशी की बातें सुनकर मेरी फटी की फटी रह गई और मुझसे कुछ भी बोला नहीं गया।

तो मुझे खामोश देखकर काशी ने कहा- “देख यार, परेशान ना हो ज्यादा कि वो तेरे दोस्त की बहन है, बस मजे कर। वो अपने भाई को नहीं बताएगी, ये मुझे यकीन है। और अगर तू उसे कुत्तों से भी चुदवाना चाहेगा तो वो खुशी से मान जाएगी, क्योंकी साली की फुद्दी में कितनी आग है ये मैं देख चुका हूँ। अब छोड़ इन बातों को और ये बता कि क्या इरादा है तेरा? कुछ करना है या फिर मैं अकेला ही मजे मारा करूं उसके साथ?”

मैं उठकर खड़ा हो गया और बोला- “मैं तुम्हें शाम तक बताऊँगा कि क्या करना है और क्या नहीं?” और काशी की बात सुने बिना ही घर की तरफ चल दिया।

मैं काशी के पास वापिस घर आया तो घर में दाखिल होते ही मेरी नजर सामने खड़ी बाजी फरिहा पे पड़ी तो मेरी आँखों के सामने वो सारा मूवी वाला मंजर घूम गया और इन ख्यालों से फौरन मेरा लण्ड खड़ा होने लगा, तो मैं अपने रूम की तरफ चल दिया।

और अभी मैं रूम के दरवाजा पे ही पहुँचा था कि बाजी ने पीछे से आवाज दी और बोली- “भाई, कहां आवारागर्दी करते रहते हो आजकल? और तुमने अभी तक दोपहर का खाना भी नहीं खाया है...”

मैंने बाजी की तरफ देखा गर्दन घुमाकर और बोला- “नहीं, मुझे भूख नहीं थी इसलिए नहीं खाया...” और फिर से। रूम में जा घुसा और दरवाजे को लाक करके बेड पे आ लेटा और सोच में पड़ गया कि आखिर ये हुआ क्या और कैसे? क्योंकी ये एक ऐसा काम था कि जिसकी मुझे जरा भी उम्मीद नहीं थी और बाजी फरिहा जो कि दिखने में ही बड़ी मासूम लगती हैं, उनका ये जो रूप मेरे सामने आया था वो मेरे लिए शाकिंग तो था ही। लेकिन वहीं एक अजीब सा मजा और खुशी भी दे रहा था।

मैं इन सोचों के बीच कब अपने फुल हाई लण्ड को सहलाने लगा, पता ही नहीं चला और जब मेरा ध्यान अपनी इस हरकत की तरफ गया तो मुझे काफी हैरानी भी हुई कि आखिर मेरे साथ ये सब क्या हो रहा है? मैं अपनी ही बड़ी बहन के नंगे जिश्म को ख्यालों में देखकर ही अपने लण्ड को सहला रहा था।

मतलब मेरा लण्ड अपनी ही बहन पे गरम हो चुका था और मैं खुद अपना लण्ड बाजी के नंगे जिम की कल्पना से ही सहला रहा था।

तभी मुझे काशी की बात याद आई कि अगर उसे अपनी बहन के बारे में इस तरह की बात पता चलती कि वो उसके किसी दोस्त से चुदवाती है तो वो उन्हें पूरा सपोर्ट करता और जैसे ही ये बात याद आई तो मुझे पता नहीं क्या हुआ कि मैंने अपना ट्राउजर खोलकर लण्ड को बाहर निकाला और मूठ मारने लगा। मैं उस वक्त पूरी तरह कामुक हो रहा था, जिसकी वजह से जल्दी ही मेरे 72" लंबे और 2” मोटे लण्ड ने पानी निकाल दिया। और जब मुझे थोड़ा होश आया तो मैं अपने लण्ड से निकलने वाली मानी देखकर हैरान रह गया। क्योंकी मेरे सामने बेड का अच्छा खासा भाग मेरी गाढ़ी मानी से गीला हो गया था।

 
मैं जल्दी से उठा और अपने बेड की चादर निकाली और बाथरूम में चला गया, जहाँ मैंने चादर को शावर के नीचे रखकर पानी खोल दिया और अच्छी तरह भिगोकर वहीं छोड़ा और रूम में वापिस आ गया और बिना बेडशीट के ही बेड पे लेट गया और आज हुई घटना के बारे में सोचने लगा कि मुझे अब क्या करना चाहिए? और सोचतेसोचते आखिरकार मैंने एक फैसला कर ही लिया और लैपटाप उठाकर घर से निकला और काशी को काल मिलाई कि मैं उसकी तरफ आ रहा हूँ और रात उसके पास ही रुकुंगा।

तो काशी ने कहा- क्या बात है भाई, सब ठीक तो है ना?

मैंने कहा- “यार, सब ठीक है। तेरे पास रहूंगा, रात में कुछ प्लान करना है मुझे तेरे साथ...” और इतना बोलकर काल कट कर दी और बाइक पे बैठकर काशी के घर की तरफ चल दिया।

मैं काशी के घर पे पहुँचकर नाक किया। तो काशी ने दूसरी तरफ बैठक का दरवाजा खोलकर बाहर झाँका और मुझे देखकर बोला- “यार इधर ही आ जा तू...”

मैं अंदर दाखिल हो गया तो काशी ने मेरे हाथ से बाइक की चाबी माँगी और बोला- “मैं बाइक को अंदर घर में खड़ा कर देता हूँ, क्योंकी तू रात भर यहाँ रहेगा तो बाइक को अंदर खड़ा कर दें..”

मैंने उसे बाइक की चाबी दे दी तो वो बाहर निकल गया और कुछ देर बाद घर के अंदर वाले दरवाजे से बैठक में आ गया और बोला- “यार मैंने नीलू को चाय के लिए बोल दिया है। अभी जब वो चाय देकर जाएगी तब बात। करेंगे...”

तो मैंने भी हाँ में सर हिला दिया और सोच में गुम हो गया। मैं काशी के सामने बैठा सोच में गुम था कि आखिर मैं बात करूं भी तो किस तरह करूं क्योंकी मैं नहीं चाहता था कि जब काशी को पता चले कि फरी कोई और नहीं मेरी बड़ी बहन है तो वो मेरा मजाक उड़ाए। क्योंकी किसी ना किसी दिन तो ये बात काशी को पता चलनी ही थी। आखिर मैं कब तक छुपा सकता था उससे?

तभी काशी ने कहा- “अबे उल्लू की पूंच्छ कहाँ गुम है?”

मैं अपनी सोचों में काफी गुम था और काशी के इस तरह बुलाने से चौंक गया और जब काशी की तरफ देखा जो मुझे ही घूरे जा रहा था तो मैंने कहा- “क्या हुआ मुझे घूर क्यों रहा है?"

काशी ने कहा- “यार, मुझे भी तो बता आखिर मसला क्या है? तू इतना ज्यादा परेशान क्यों हो रहा है?”

तो मैंने कहा- “बताऊँगा यार, लेकिन वादा कर कि तू किसी से ये बात बोलेगा नहीं, और मेरा राज अपने सीने में छुपाकर रखेगा, चाहे जो भी हो जाए। वादा कर मेरे साथ..”

काशी ने कहा- “देख यार सन्नी, हम चाय के बाद इस पे बात करते हैं। अभी तो ये बता कि तुझे कुछ और चाहिए तो मैं अभी ले आता हूँ। क्योंकी अगर तूने रात को सिगरेट माँगा तो मैं कहाँ से लाऊँगा?”

“हाँ यार, याद आया। तू ऐसा कर कि एक पैकेट ले ही आ अभी..” मैंने इतना ही कहा था कि नीलू काशी की बड़ी बहन चाय लेकर रूम में आ गई और झुक के हमारे बीच रखकर वहीं खड़ी हो गई।

 
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