• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

अंजाने में बहन ने ही चुदवाया पूरा परिवार complete

बाजी के मुँह से- “आआह्ह... सन्नी मेरे भाई क्यों तड़पा रहे हो प्लीज़्ज़... भाई पूरा घुसा डालो अपना ये हथियार मेरे अंदर ऊह्ह...” की आवाज करने लगी।

मैंने अचानक अपनी पूरी ताकत से झटका लगाया, जिससे मेरा लण्ड बिना किसी दुश्वारी के बाजी की फुद्दी में समा गया।

बाजी के मुँह से लज्जत के मारे- “आअह्ह... सन्नी मेरे भाई... बस इसी तरह मुझे प्यार करते रहना मेरी जान...”

की आवाज करने लगी और मुझे अपनी तरफ खींचकर अपने ऊपर गिरा लिया और मेरे साथ लिपट गई।

बाजी उस वक़्त बहुत ज्यादा हाट हो रही थी और मेरे हर झटके पे नीचे से अपनी गाण्ड उछालती, जिससे हर झटके की रफ़्तार बढ़ जाती और रूम में से बाजी की- “ऊह्ह... भाई उंन्नम्ह सस्स्सी ...” के साथ-साथ थप्प-थप्प की आवाजें भी आने लगी।

मैं बाजी के ऊपर से हट गया, जिससे मेरा लण्ड भी बाजी की फुद्दी से निकल गया। तो बाजी जो कि उस वक़्त पूरा मस्ती में थी फौरन अपनी आँखें खोलकर हैरानी से मेरी तरफ देखने लगी।

मैंने मुश्कुराते हुये कहा- “बाजी अब आप मेरे ऊपर आ जाओ...”

बाजी ने कोई बात नहीं की और फौरन मेरे लण्ड के ऊपर अपनी फुद्दी को सेट किया और एक ही झटके में नीचे बैठकर मेरा लण्ड अपनी फुद्दी में घुसा लिया, और फिर अपनी कमर को हिलाने लगी, जिससे मेरा लण्ड अपनी बड़ी बहन की फुद्दी में मजे से अंदर-बाहर होने लगा। बाजी पूरी जान से मेरे लण्ड पे उछल रही थी और साथ ही मेरे ऊपर झुक के मुझे किस भी कर लिया करती, और अपनी आँखें बंद किए मजे से- “आअह्ह... भाई आज सही मजा आ रहा है मेरी जान। आज से तुम मेरे भाई कम और शौहर ज्यादा होगे। ऊह्ह... भाई मैं गई। आअह्ह... उम्म्मह भाई...” की एक तेज आवाज के साथ ही बाजी की फुद्दी ने झटका सा खाया।

और फिर मुझे अपने लण्ड पे अपनी बहन की फुद्दी से निकलने वाला गरम लोव-जूस महसूस होने लगा, जिसने मेरा कंट्रोल भी खतम कर दिया और मैं बाजी की गाण्ड को पकड़कर नीचे से तेज-तेज झटके लगाने लगा। इससे पहले कि मेरा पानी बाजी की फुद्दी में ही गिरता, बाजी एक झटके से मेरे ऊपर से हट गई और मेरे लण्ड को पकड़कर मूठ लगाने लगी, और मेरा पानी निकाल दिया।

 
मेरे फारिघ् होते ही बाजी ने मेरा लण्ड छोड़ दिया और मेरे साथ ही लेट गई और बोली- “क्यों भाई, कैसा लगा? मजा आया कि नहीं?"

मैंने बाजी को अपनी तरफ खींच लिया और बोला- “मेरी जान मजा तो बहुत आया लेकिन अब तैयार करके रखो मुरी की चुदाई के लिए.."

बाजी भी हँस दी और बोली- “जनाब आपकी ये रंडी हर वक़्त आपको तैयार मिलेगी आप कोई फिकर ना करो। लेकिन भाई ये तो बताओ कि वहाँ अम्मी और निदा भी होंगे तो ये सब होगा कैसे?”

मैंने कहा- “यार ये टेन्शन तुम्हारी नहीं है मेरी जानू, ये मेरा काम है, और तुम्हारा काम बस मजा लेना और मजा देना है..."

मेरी इस बात पे बाजी हँस दी और बोली- “भाई, अगर मुझे पहले पता होता कि तुम इतने बड़े बहनचोद हो तो मैं किसी और से ना चुदवाती, बल्की तुम्हारी ही अय्याशी करवा देती...” और बाजी की बात पे हम दोनों हँस दिए।

थोड़ी देर तक हम दोनों बहन भाई ऐसे ही एक दूसरे के साथ लिपट के लेटे रहे और बातें करते रहे। फिर बाजी ने मुझे खुद से अलग किया और बोली- “चलो अब निकलो यहाँ से, और जाकर सो जाओ। क्योंकी सुबह तुम्हें कोलेज़ भी जाना है। ये डेली डेली ना जाना नहीं चलेगा, अब समझे तुम?”

मैं बाजी की बात सुनकर हँस दिया और बाजी का चूची दबा दिया और बोला- “लेकिन बाजी, अभी तो मेरा दिल नहीं भरा। अभी एक बार करेंगे। प्लीज़्ज़... बाजी, उसके बाद मैं आपको तंग नहीं करूंगा...”

बाजी ने मेरा हाथ जो उनकी चूचियों को मसल रहा था हटा दिया और बोली- “नहीं भाई, बहुत रात हो गई है।

और अगर सुबह टाइम पे ना उठे तो अम्मी को शक भी हो सकता है। इसलिए अब और नहीं, तुम निकलो यहाँ से..." और साथ ही मुझे बेड से नीचे की तरफ धक्का भी देने लगी।

तो मैं ना चाहते हो भी उठ बैठा और बाजी की तरफ देखते हुये अपने कपड़े पहन लिए और बाजी के रूम से निकलकर अपने रूम में आ गया और बेड पे सोने के लिए लेट गया।

अगली सुबह मैं बाजी के उठाने से जल्दी ही उठ गया और नहाकर नाश्ता किया और कोलेज़ के लिए निकल गया। जहाँ पहुँचते ही मुझे काशी ने पकड़ लिया और एक तरफ को ले गया और बोला- “क्यों जिगर, क्या बना? कुछ बात बनी या अभी तक हाथ से ही काम चला रहे हो?”

 
मैंने काशी से कहा- “नहीं यार, अभी तक तो कुछ नहीं हुआ लेकिन कुछ दिनों के बाद जब हम मुरी जायेंगे तो शायद बात बन ही जाए..."

काशी- मुरी कब जा रहे हो? और कौन-कौन जा रहा है?

मैं- जा तो सब घर वाले ही रहे हैं, और कोलेज़ बंद होते ही निकल जायेंगे।

काशी- चल ठीक है। मैं भी बात करूंगा तेरी बहन से, देखता हूँ क्या है उसके दिमाग में?

मैं- हाँ यार, पता तो चले कि वो क्या सोच रही है?

काशी- चल ठीक है यार। और सुना क्या चल रहा है? और कल क्यों नहीं आया था?

मैं- बस यार सारी रात फेसबुक पे आनलाइन रहा। लेकिन बाजी आनलाइन ही नहीं हुई, जिससे काफी देर में । सोया और सुबह आँख भी देर से खुली तो फिर मैं घर पे ही रुका और कोलेज़ नहीं आया।

काशी- चल ठीक है मैं भी कोशिश करता हूँ और तू भी थोड़ा हिम्म कर, वरना हाथ में पकड़कर हिलाता ही रहेगा।

मैं- क्यों साले, तेरी बहन है ना तब तक उसकी बजायेंगे मिलकर।

काशी- अबे मैंने कब मना किया? लेकिन उसका भी रात से महीना शुरू हो गया है, सो वहाँ से भी छुट्टी 5 दिन के लिए।

मैं- अबे यार, फिर कोई और जुगाड़ कर ना। मेरा क्या होगा?

काशी- “सबर कर बच्चा सबर अच्छा होता है..." और हाहाहाहा करके हँसने लगा।

उसके बाद हम यहाँ वहाँ घूमते रहे और फिर मैं घर गया तो बाजी अकेली ही थी घर में। मैंने अम्मी का पूछा तो बाजी ने कहा अम्मी शापिंग के लिए गई हैं। तो मैंने निदा का पूछा तो बाजी ने हँसते हुये कहा, वो भी। अम्मी के साथ ही गई है। मैंने दरवाजा बंद कर दिया और बाजी को अपनी तरफ खींच लिया।

बाजी ने मुझे रोक दिया और बोली- नहीं भाई, कुछ करना नहीं है।

 
मैंने बाजी को छोड़ दिया और पीछे हट गया और बोला- क्यों बाजी, क्या बात है? आप ने ऐसा क्यों बोला?

बाजी हँसते हुये बोली- “बुद्धू मुरी जाने से पहले मेरी शहजादी छुटियों पे है, और आराम करेगी और नो गड़बड़। अब जो होगा मुरी में ही, तब तक मैं नहा लूंगी."

मैं बाजी की बात सुनकर ठंडा हो गया और बोला- “क्या यार, उधर नीलू के साथ भी ये ही पंगा है और यहाँ तुम्हारे साथ भी..." और इतना बोलकर अपने रूम की तरफ चल दिया और फिर बाजी की तरफ मुड़ा और बोला

लेकिन आप मुरी जाने तक फिट हो जाओगी ना?”

तो बाजी ने हँसते हुये हाँ में सिर हिला दिया।

उसके बाद के 5 दिन तक हम सिर्फ मुरी की तैयारी में लगे रहे, क्योंकी मेरा इरादा वहाँ कोई एक महीने से ज्यादा रुकने का था, तो मैंने इसीलिए वहाँ एक घर रेंट पे ले लिया। और सारी तैयारी करने के बाद हमने एक टोयोटा शटल रेंट पे ले ली ड्राइवर समेत, जो कि सिर्फ मुरी तक के लिए ही थी। जिसमें हमने अपना-अपना । समान रखा और हम मुरी के लिए निकल लिए। रात दो बजे हम घर से निकले, क्योंकी हम चाहते थे के जब हम मुरी पहुँचे तो सुबह हो चुकी हो।

गाड़ी लाहोर से निकली और मोटेरवे पे ट्रैवेल करने लगी तो अम्मी और निदा जो अगली सीटोम पर थीं आँखें बंद कर सोने लगीं। तब मैं और फरी बाजी जो कि पीछे बैठे मेरे मोबाइल पे एक मूवी देख रहे थे, थोड़ी देर बाद जब मैंने देखा कि अम्मी और निदा सो गये हैं और क्योंकी गाड़ी में लाइट बंद थी, जिससे ड्राइवर को पीछे कुछ खास नजर नहीं आ रहा था, तो मैंने बाजी की अपनी तरफ खींच लिया और अम्मी और निदा की तरफ देखते हुये किस करने लगे।

बाजी ने भी किस में मेरा साथ दिया और फिर मुझसे अलग होते हुये धीरे से मेरे कान में बोली- “भाई क्या पागल हो गये हो, अगर अम्मी या निदा ने देख लिया तो क्या होगा? कुछ तो शर्म करो?”

 
मैं- अरे यार, वो सो रही हैं और हम कौन सा सारे कपड़े उतारकर कुछ करेंगे।

बाजी- भाई, इंसान बनो ड्राइवर ने देख लिया तो वो क्या सोचेगा?

मैं- यार हम उसे कुछ सोचने ही नहीं देंगे उसे भी मजा करवा देंगे और तुम भी दो का मजा ले लोगी एक साथ।

बाजी- नहीं भाई, ये ठीक नहीं है। क्योंकी अम्मी और निदा किसी भी वक्त उठ सकती हैं।

मैं- “यार गाड़ी में अंधेरा है और ड्राइवर को कुछ नजर नहीं आएगा। बाकी अम्मी और निदा भी सो चुकी हैं...”

लेकिन बाजी किसी भी तरह नहीं मान रही थी तो मैंने बाजी को अपने करीब से परे धकेल दिया और बाहर अंधेरे में देखने लगा।

कुछ देर तक मैं ऐसे ही बाहर देखता रहा तो बाजी ने अपना हाथ मेरे लण्ड पे रखकर हल्का सा दबा दिया। मैंने बाजी की तरफ देखा जो कि मेरी तरफ ही देख रही थी, और हल्का सा मुश्कुरा भी रही थी। अब मैंने ड्राइवर की तरफ देखा और उसे ड्राइविंग में मसरूफ देखकर मैंने बाजी की टांगें पकड़कर सीट पे रख दीं जिससे बाजी गाड़ी में पीछे टेक लगाकर लेट सी गई। क्योंकी गाड़ी काफी खुली थी और बाजी की गाण्ड के नीचे हाथ डालकर बाजी की सलवार को उनके घुटनों तक खींच दिया और उनकी टांगें भी थोड़ी खोल दीं और जल्दी से अपनी सलवार भी नीचे खिसका दी।

फिर अपना लण्ड बाहर निकालकर एक बार फिर से इधर-उधर देखा। लेकिन अम्मी और निदा को मजे से सोता देखकर और ड्राइवर को गाड़ी में मगन देखकर, मैंने अपना लण्ड धीरे से अपनी बहन की फुद्दी पे रख दिया और बाजी की आँखों में देखते हुये अपना लण्ड बाजी की फुद्दी में घुसाने लगा।

लण्ड घुसते ही बाजी ने अपना सिर उठा लिया और अम्मी और निदा की तरफ देखते हुये मुझे जल्दी करने का इशारा करने लगी, तो मैंने भी बाजी की बात मान ली और अपना लण्ड अपनी बहन की फुद्दी में तेजी से । हिलाना शुरू कर दिया और साथ-साथ ड्राइवर की तरफ भी देख लेता। क्योंकी अगर उसे जरा भी हरकत महसूस हो जाती तो मिरर में पीछे देख लेता।

इसी डर और टेन्शन की वजह से मैं दो मिनट में ही फारिघ् होने पे आ गया और जैसे ही मेरा पानी निकलने लगा, मैंने अपना लण्ड फरी बाजी की फुददी से निकाल लिया और फुददी के ऊपर ही अपना सारा पानी गिरा दिया और पीछे हटकर अपनी सलवार बाँधकर बैठ गया। बाजी ने अपने बैग में से टीस्सू निकालकर अपनी फुद्दी पे लगे पानी को साफ किया और कपड़े ठीक करके बैठ गई और गुस्से भरी निगाहों से मेरी तरफ देखने लगी। मैं मुश्कुरा दिया और बाजी का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया जिससे बाजी मेरे साथ लग के बैठ गई।

 
मेरे नजदीक होते ही बाजी ने धीरे से कहा- “क्या मिला तुम्हें इस तरह करके इर के मारे जान निकल रही थी अगर अम्मी या निदा देख लेतीं। तो पता है क्या होता? यहीं हमारी मरम्मत हो जानी थी...”

मैं- “अरे छोड़ो ना बाजी जो हुआ नहीं उससे क्यों डर रही हो? बस मुरी पहुँच जाने दो उसके बाद तो बस मजे ही मजे हैं हमारे..." और इतना बोलते हुये मैंने अपना बाजू बाजी के कंधों पे रख दिया जिससे मेरा हाथ बाजी की। चूचियों तक पहुँच गया, मैं अपना हाथ बाजी की चूचियों पे घुमाने लगा।

बाजी ने मेरा हाथ अपनी चूचियों में महसूस किया तो मेरे हाथ को अपने कंधे से हटा दिया और मेरा कान पकड़कर अपने करीब खींचा और बोली- “भाई अब इंसान बन जाओ और मस्ती नहीं चलेगी समझे...”

अब मैंने भी बाजी का कान पकड़ लिया और बोला- “यार तुम्हें नजर नहीं आता, मैं इंसान ही हैं। लेकिन तुम फिर भी बोल रही हो कि इंसान बनो, तो आखिर मैं तुम्हें नजर क्या आ रहा हूँ?”

बाजी मेरी बात सुनकर हल्का सा हँस दी और बोली- “इस वक़्त तुम मुझे पूरे बहनचोद दिखाई दे रहे हो...”

और इससे पहले कि मैं कुछ बोलता आगे से ड्राइवर की आवाज सुनाई दी जो कि पूछ रहा था कि यहाँ कुछ देर रुक के थोड़ा आराम कर लें तो बेहतर है, क्योंकी एक घंटे तक हम रावलपिंडी पहुँच जायेंगे तो फिर मुरी तक । रुकने के लिए कोई अच्छी जगह नहीं मिलेगी हमें।

मैंने बाजी से पूछा- क्या ख्याल है रुक जायें या चलते रहे?

बाजी ने कहा- “भाई हमने कौन सा गाड़ी चलाना है? लेकिन इस बेचारे को आराम कर लेने दो तो बेहतर है। ये ना हो कि रात का सफर है कहीं ठोंक ही दे तो?

मैंने कहा- ठीक है। रोक लो गाड़ी यहाँ थोड़ी देर।

ड्राइवर ने गाड़ी डेवू रेस्टोरेंट पे ले जाकर खड़ी की तो मुझे और बाजी को उतरने के लिए निदा को उठाना पड़ा। क्योंकी हम सबसे पीछे बैठे हुये थे, जिससे अम्मी भी उठ गई और बोली- “क्या हुआ सन्नी, गाड़ी क्यों रुक गई है?”

मैंने अम्मी को बताया कि ड्राइवर थक गया है, थोड़ा आराम करके चलेंगे। वहाँ जब हम सब गाड़ी से बाहर निकल आए तो निदा ने कहा- “भाई हम कहाँ पहुँच गये हैं?”

मैंने उसे कलर-कहर का बता दिया जहाँ से इस्लामाबाद एक घंटे की ड्राइव से ही था। वहाँ हमने एक घंटे तक रेस्ट किया और फिर से गाड़ी में जा बैठे।

जिसके बाद सब जागते ही रहे, क्योंकी सुबह हो रही थी। जिसके बाद हम मुरी अपने रेंट के मकान में जा पहँचे जो कि दो कमरों का था और एक ही बाथरूम, जो कि अटैच था दोनों रूम के लिए और एक किचेन के साथ एक छोटा सा टीवी लाउंज। जहाँ हमने गाड़ी वाले को फारिघू किया और अपना-अपना समान सेट करने लगे, तो फरी मेरे साथ और निदा अम्मी के साथ रूम में सेट हो गई।

 
Thanks to all

 
उसके बाद हम सब नहाकर फ्रेश हुये और साथ लाया हुआ नाश्ता किया मिलकर और उसके बाद सब लोग घूमने के लिए तैयार होने लगे, तो मैंने मना कर दिया कि आप जाओ मैं यहीं हूँ।

अम्मी ने कहा- क्यों तुम क्यों नहीं चल रहे?

मैंने सिर दर्द का बहाना बना दिया, तो सब लोग मुझे वहीं छोड़कर घूमने निकल गये। सबके जाने के बाद मैं भी घर से निकल गया और घूमने लगा और साथ ही सोचने लगा कि आखिर ऐसा क्या किया जाए कि जिससे यहाँ हम पूरी तरह मस्ती कर सकें? लेकिन कुछ भी समझ में नहीं आया तो, वापिस मकान की तरफ चल दिया।

जब मैं मकान के पास पहुँचा तो अचानक मेरे दिमाग में आइडिया आया कि क्यों ना मकान के साथ बने जंगल का जायजा लिया जाए, और ये सोच आते ही मैं जंगल में घुस गया जो कि काफी घना था, झाड़ियों की वजह से। मैं जंगल में थोड़ा आगे गया तो वहाँ एक पहाड़ी नाला था, जिसमें एक छोटा सा तालाब सा बना हुआ था और इधर-उधर काफी दरख़्त और झाड़ियां भी थीं, जिससे कहीं ऊपर से वो जगह भी किसी को नजर नहीं आ सकती

थी।

ये जगह मुझे काफी पसंद आई तो मैंने अपने कपड़े उतार दिए और पानी में घुस गया नहाने के लिए, और नहाते हुये अचानक मेरे दिमाग में आया कि बाजी के साथ मस्ती के लिए ये एक आइडियल जगह हो सकती है। उस जगह क्योंकी थोड़ी जगह तालाब के साथ साफ थी, जहाँ हम बैठ या लेट भी सकते थे। लेकिन क्योंकी दायें बायें काफी घने दरख़्त और झाड़ियां थीं, तो वहाँ दिन में सूरज की रोशनी भी ज्यादा देर नहीं रहती थी, और। कुछ पानी जिसकी वजह से वो जगह काफी ठंडी भी थी।

मैंने नहाकर अपने कपड़े पहन लिए और मकान की तरफ चल दिया जब (घर ही लिखूगा मैं यहाँ मुरी वाले मकान को) मैं घर पहुँचा तो अम्मी बाजी और निदा भी वापिस आ चुके थे।

अम्मी- तुमने तो कहा था सिर में दर्द है आराम करना है, लेकिन अब तुम बाहर से आ रहे हो?

मैं- अम्मी अब मैं आप लोगों के साथ घूमता हुआ अच्छा लगूंगा क्या? आप लोग अपनी एंजोयमेंट करो मैं अपनी।

निदा- अच्छा जी तो अब आपको हमारे साथ घूमते हुये भी शर्म आने लगी है?

मैं- नहीं पागल ये बात नहीं है। अब तुम लोग अपनी बातें करोगे घूमते फिरते तो वहाँ भला मेरा क्या काम?

बाजी- अच्छा बाबा अगर नहीं घूमना चाहते हमारे साथ तो मत घूमो, हम कौन सा तुम्हारी मिन्नतें कर रहे हैं।

अम्मी- वैसे तुम गये कहाँ थे अभी?

मैं- अम्मी, बस यहाँ जंगल में ही गया था। साथ ही एक बहुत प्यारी सी जगह है, वहाँ नहाकर वापिस आ गया।

बाजी- भाई जंगल में जानवर भी तो होंगे ना? दोबारा वहाँ जाने की जरूरत नहीं है समझे।

मैं- अरे बाबा यहाँ जानवर नहीं हैं। अगर ऐसा होता तो यहाँ आता ही कौन?

अम्मी- कैसा जंगल है यहाँ का?

मैं- अम्मी कैसा का क्या मतलब? जैसा जंगल होता है वैसा ही है।

अम्मी- मैं पूछ रही हूँ कि जहाँ तुम गये थे वो कैसी जगह है?

 
मैं- अम्मी वहाँ एक पहाड़ी नाला है लेकिन जिस जगह मैं गया था वहाँ थोड़ी जगह प्लेन है तो वहाँ एक छोटा सा तालाब बन गया है थोड़ी देर नहाने से ही सर्दी लगने लगी थी वहाँ।

बाजी- अम्मी हम भी चलें वहाँ?

अम्मी- रहने दो, कोई जरूरत नहीं है वहाँ जाने की।

इसके बाद हम सबने बाहर से लाया हुआ खाना ही खाया और आराम करने अपने रूम में चले गये। रूम में आते ही बाजी ने कहा- “भाई, मुझे भी जाना है वहाँ नहाने के लिए...”

मैंने बाजी का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और किस करते हुये बोला- “अरे जाना वहाँ सिर्फ तुम नहाओगी ही नहीं चुदवाओगी भी... क्या समझी?”

बाजी मुझे पीछे धकेलते हुये बोली- “क्यों, मैं भला क्यों करूं वहाँ कुछ भी नहाने के इलावा?”

मैंने बाजी को अपने साथ फिर से जकड़ लिया और बोला- तो मेरी जान यहाँ आई ही क्यों हो?

बाजी ने कहा- मैं तो यहाँ एंजाय करने आई हूँ बस, और कुछ नहीं समझे?

बाजी की बात खतम होते ही मैंने कहा- “तो जान-ए-मान मैं भी तो मजे करने के लिए ही बोल रहा हूँ तुम्हें...”

बाजी हँस दी और बोली- लेकिन पहले मैं वो जगह देखूँगी बाकी सब बाद में...”

मैंने हाँ में सिर हिलाया।

बाजी ने कहा- तो फिर चलो चलते हैं।

मैंने बाजी को खुद से अलग करके बोला- “बाजी क्या आपका दिमाग खराब हो गया है अभी कैसे जा सकते हैं?

बाजी ने कहा- “क्यों अभी क्यों नहीं जा सकते? अभी दोपहर का टाइम है रात नहीं है, जो वहाँ नहीं जा सकते...”

मैंने हाँ में सिर हिला दिया और बाजी के साथ जैसे ही रूम से बाहर निकला तो निदा हमें सामने ही बैठी नजर आ गई।

हम दोनों जैसे ही बाहर निकले तो निदा ने कहा- “भाई तालाब पे ले चलो ना प्लीज़... मुझे भी देखना है."

बाजी ने कहा- ठीक है आ जाओ।

बाजी की बात सुनकर मेरी झांटें भी सुलग गईं, क्योंकी मैं वहाँ बाजी के साथ मस्ती की सोच रहा था। लेकिन अब तो निदा भी साथ चल रही थी तो वहाँ मस्ती क्या खाक होती? और ये सोचकरर बे-दिली के साथ चल दिया।

जैसे ही हम लोग तालाब में पहुँचे तो वहाँ का साफ और ठंडा पानी देखकर बाजी ने कहा- “वाव... भाई कितनी अच्छी जगह है और ये पानी देखो कितना ठंडा और साफ है, दिल करता है कि अभी नहा लू यहाँ..."

 
Back
Top