• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

अंजाने में बहन ने ही चुदवाया पूरा परिवार complete

मैंने ओके कहा और घर से निकलकर सफदर अंकल के घर की तरफ चल दिया। अंकल ने वादे के मुताबिक बाहर का दरवाजा लाक नहीं किया था, लेकिन बंद किया हुआ था, जो कि मेरे जरा सा दबाने से आराम से खुल गया। तो मैं बिना आवाज किए अंदर चला गया। दरवाजे को अपने पीछे लाक करके आगे बढ़ा और अंकल के बेडरूम में जा पहुँचा, जिसका दरवाजा पूरा खुला था।

दरवाजे पे पहुँचते ही मुझे काफी जोर का झटका लगा, क्योंकी रूम में सफदर अंकल पूरे नंगे होकर अपनी सगी बेटी की टाँगों के बीच खड़े हुये थे और इरम को बेड पे लिटाकर अपना लण्ड उसकी फुद्दी में घुसाए चोद रहे थे। मुझे रूम के दरवाजा पे खड़ा देखकर इरम पहले तो चकित रह गई, लेकिन जब अंकल ने मुझे देखकर मुश्कुराते हुये कहा- “अरे सन्नी तुम कैसे आ गये यार?”

मैंने कहा- “बस अंकल अम्मी ने भेजा था कि आज का पूछ आऊँ क्या प्रोग्राम है? लेकिन यहाँ तो कुछ स्पेशल शो ही चल रहा है...”

मेरी बात सुनकर अंकल हँस दिए और बोले- “यार तेरी माँ को रात में देख लेंगे। अभी आ ही गये हो तो वहाँ क्यों खड़े हो? आ जाओ मिलकर मजा लेते हैं...”

अंकल की बात सुनकर इरम जो कि अभी तक अपने बाप का लण्ड फुद्दी में लिए आराम से लेटी हुई थी मेरी तरफ देखकर मुश्कुराने लगी। अंकल की बात सुनकर मैं हँस दिया और बोला- “जरूर आऊँगा। लेकिन पहले इम बाजी से तो पूछ लें कि उन्हें तो मेरे आने पे कोई ऐतराज तो नहीं है ना?”

तभी इरम बाजी ने कहा- “सन्नी मुझे ऐतराज तो नहीं है लेकिन खुशी जरूर है कि तुम भी हमारी तरह सिर्फ मजा करने पर विस्वास करने वाले निकले। अब ज्यादा नखरे ना करो और ये कपड़े निकालकर एक तरफ फेंक के आ जाओ यहाँ..."

मैंने झट से अपने कपड़े उतारकर फेंके और बेड पे जा चढ़ा। तब इम जरा सा पीछे को हो गई, जिससे अंकल का लण्ड उसकी फुद्दी में से निकल गया, तो वो उठकर बैठ गई और मेरे पूरा तने हुये लण्ड को देखते हुये। घुटनों के बल बैठ गई और फिर मेरे लण्ड को अपने हाथ में लेकर सहलाते हुये मेरी तरफ देखकर मुश्कुराते हुये बोली- “वैसे सन्नी कमाल का हथियार है तुम्हारा?” और इतना बोलते हुये एक चुम्मा मेरे लण्ड की टोपी पे देकर हँसी और फिर अपने दोनों हाथ मेरी गाण्ड की तरफ घुमाकर मेरी गाण्ड पे रखे और अपना मुँह पूरा खोलकर मेरे लण्ड के सुपाड़े कप को मुँह में भरकर चूसने लगी।

इम के लण्ड चूसने के अंदाज से मुझे शक हो रहा था कि कहीं इरम काल-गर्ल तो नहीं बन गई है? इसीलिए मैंने उसके सिर पे हाथ रखकर अपने लण्ड की तरफ दबाते हुये कहा- “अंकल देखो तो जरा किस तरह गश्ती के जैसे लण्ड चूस रही है? कहीं आपकी बेटी कोई काल-गर्ल तो नहीं बन गई?”

 
मेरी बात सुनकर इरम ने झट से मेरा लण्ड मुँह से निकाला और मुझे घूरते हुये बोली- “ज्यादा बातें नहीं मिस्टर। अगर मैं काल-गर्ल हूँ भी तो तुम्हें क्या मसला है? तुम कौन सा पैसे दे रहे हो मुझे? वैसे भी मैं ये काम पैसों के लिए कभी नहीं करती, बल्की अपनी मजे के लिए और अपनी पसंद के आदमी से करती हूँ और पापा को पता है इस बारे में...”

अबकी बार मैंने कोई जवाब नहीं दिया और उसका सिर अपने लण्ड की तरफ दबाया तो अंकल समझ गये कि मैं फिर से लण्ड चुसवाना चाह रहा हूँ, तो अंकल ने कहा- “यार इसे लिटा दो ताकी दोनों मिलकर मजा कर सकें..."

इम अबकी बार अपने बाप की तरफ देखकर मुश्कुराई और बेड पे सीधी लेट गई और अपनी टांगें मोड़ लीं, जिससे उसकी फुद्दी उसके सगे बाप के सामने खुल गई।

अब मैं उसके चेहरे के पास हो गया और अपना लण्ड उसके होंठों पे लगाया तो इरम मुश्कुरा दी और मेरे लण्ड को चूमते हुये बोली- “वैसे सन्नी तुम्हारे लिए ओफर दे रही हूँ की तुम जब चाहो मेरे साथ एंजाय कर सकते हो। वैसे भी सलमा आंटी काफी बूढ़ी हो चुकी हैं, अब उनमें क्या मजा आता होगा तुम्हें?”

मैंने उसके मुँह में अपना लण्ड घुसाते हुये कहा- “अभी तुम्हें चोदा ही कहाँ है जा-ए-मन जो तुम ओफर दे रही हो? अभी तो देखना है कि तुम मुझे झेल भी सकती हो कि नहीं?" लेकिन सच ये था कि उस वक़्त मुझे एक अजीब सी नफरत महसूस होने लगी थी इरम से, पता नहीं क्यों वो अपने आपको मेरे सामने कुछ ज्यादा ही पोज कर रही थी जो कि मुझे अच्छा नहीं लगा।

इम मेरी बात सुनकर मेरे लण्ड को हाथ में पकड़कर उसपे जुबान घुमाने लगी और मेरी तरफ देखकर हल्काहल्का मुश्कुराने लगी लेकिन मैं कुछ नहीं बोला बस देखता रहा कि वो करना क्या चाहती है?

लेकिन तभी अंकल ने जो कि अभी तक इरम को पैरों से चाट रहे थे उठे और बोले- “इम बेटी चलो अब तुम मेरे ऊपर आ जाओ...”

इरम बेड से उठी तो सफदर अंकल उसकी जगह लेट गये और इरम उनके ऊपर मेरी तरफ मुँह करके अपनी फुद्दी में अपने बाप का लण्ड सेट करते हुये बैठ गई, जिससे सफदर अंकल का पूरा लण्ड बड़े आराम से इम की फुद्दी को खोलता हुआ जड़ तक घुस गया।

मैं क्योंकी सफदर अंकल के पैरों की तरफ था और इरम भी मेरी तरफ ही मुँह करके बैठी थी तो अब इरम मेरे लण्ड की तरफ झुकी और उसे हाथ में पकड़कर मुँह में डालकर चूसने लगी और सफदर अंकल नीचे से अपनी बेटी की गाण्ड को पकड़कर ऊपर नीचे को दबाने में लग गये।

मैं देख रहा था के सफदर अंकल का इतना तगड़ा लण्ड लेने से भी उसे जरा भी मुश्किल नहीं हुई थी, बल्की वो बड़े मजे से मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने में लगी हुई थी, जो कि मुझे हैरान किए जा रहा था।

अब मैंने ज्यादा हैरान ना होते हुये एंजाय करने का फैसला किया और इरम के बाल पकड़कर उसका सिर अपने लण्ड की तरफ जोर से दबा दिया, जिससे मेरा लण्ड काफी ज्यादा इरम के मुँह में गले तक जा घुसा, तो इरम जैसे तड़पकर अपने आपको मुझसे छुड़ाने लगी। लेकिन अब ये आसान नहीं था, क्योंकी मैंने अपनी पकड़ उसपे काफी टाइट कर दी थी और खुद उसके बाल और सिर को जकड़कर अपना लण्ड उसके मुँह में अंदर-बाहर करने लगा जिससे इरम के मुँह में से- “गॅन्-गॅन् ओउन्...” की आवाज निकलने लगी, लेकिन मैंने नहीं छोड़ा।

मैं देख रहा था कि मुँह में मेरा लण्ड उसके गले तक जाकर टकराता था और नीचे से उसका बाप अपनी पूरी। जान लगाकर उसकी गाण्ड को अपने लण्ड पे ऊपर नीचे कर रहा था। इन दो तरफा हमलों ने इरम को बौखला दिया था। मेरे लण्ड की वजह से उसे सांस लाने में भी मुश्किल हो रही थी, और आँखों में से आँसू भी निकल रहे। थे। लेकिन हम दोनों पे इस बात का कोई असर नहीं हो रहा था।

 
Thanks to all

 
मैं देख रहा था कि मुँह में मेरा लण्ड उसके गले तक जाकर टकराता था और नीचे से उसका बाप अपनी पूरी। जान लगाकर उसकी गाण्ड को अपने लण्ड पे ऊपर नीचे कर रहा था। इन दो तरफा हमलों ने इरम को बौखला दिया था। मेरे लण्ड की वजह से उसे सांस लाने में भी मुश्किल हो रही थी, और आँखों में से आँसू भी निकल रहे। थे। लेकिन हम दोनों पे इस बात का कोई असर नहीं हो रहा था।

जब मैंने देखा कि इरम का चेहरा सांस रुकने और दर्द से लाल पड़ता जा रहा है तो मैंने उसके मुँह में से अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और बोला- “साली क्या हुआ अभी से ये हाल है तेरा? अभी तो मैंने तेरे मुँह में ही डाला है बस... जब तेरी फुद्दी में घुसाऊँगा तब तेरा क्या होगा?”

इरम बस अपने पापा के लण्ड पे बैठी उनके घुटनों पे हाथ रखे चुदवाती रही और सांस ठीक करती रही, लेकिन बोली कुछ नहीं। तो मैंने फिर से उसका सिर पकड़ लिया और अपना लण्ड इरम के मुँह में घुसाने लगा।

तब इरम ने जोर लगाकर अपना मुँह घुमा लिया और बोली- “क्यों माँ चुदवा रहे हो सन्नी? मेरे साथ कौन सी दुश्मनी निकाल रहे हो तुम? कोई ऐसे भी करता है सेक्स? जो भी करना है आराम से करो, मैंने कोई मना किया है तुम्हें जो तुम इस तरह जबरदस्ती कर रहे हो?”

इरम की बात सुनकर मैं हँस दिया और बोला- “इम जान क्या करूं? मुझे ऐसे ही मजा आता है, आराम-आराम से कोई सेक्स का मजा थोड़ा ही आता है। जो मजा जबरदस्ती में मिलता है, वो तैयार फुदद्दी में लण्ड घुसाने से नहीं आता, इसलिए तुम्हें आज तो जबरदस्ती का मजा भी लेना ही पड़ेगा...”

कुछ देर तक इरम मुझे घूरती रही। फिर सफदर अंकल के लण्ड से उतर गई और बोली- “ठीक है तो फिर आ जाओ देखती हूँ कि तुम्हारे लण्ड में कितना दम है?” और बेड पे अपनी टांगें फैलाकर लेट गई।

अब मैंने सफदर अंकल की तरफ देखा जो कि मेरी तरफ देखकर हल्का सा मुश्कुरा रहे थे। मुझे अपनी तरफ देखता हुआ पाकर बोले- “मेरी ख्वाहिश है कि तुम ही जीतो, क्योंकी मैं तो आज तक इस कुतिया की बच्ची के मुँह से आवाज भी नहीं निकलवा सका, सिवाए फर्स्ट टाइम के जब इसकी सील तोड़ी थी...”

मैं सफदर अंकल की बात सुनकर हँस दिया और बोला- “बस तो फिर अंकल आज आप अपनी बेटी के चिल्लाने की आवाज भी सुन ही लो..." और एक तरफ से इरम की पड़ी शर्ट उठा ली और अच्छी तरह से उसकी फुद्दी को रगड़-रगड़ के अंदर तक साफ किया, जिससे इरम की फुद्दी खुश्क हो गई। लेकिन मेरा लण्ड हल्का-हल्का गीला था इरम के थूक की वजह से। उसके बाद मैंने खुद को इरम की फुद्दी के सामने रानों के बीच सेट किया और अपना लण्ड इरम की फुद्दी के छेद पे रखा और इरम की तरफ देखकर मुश्कुराते हुया अचानक पूरी जान लगाकर झटका मारा।

 
इस तरह झटका मारने से मेरा पूरा लण्ड तो नहीं गया, क्योंकी इरम की फुद्दी को मैं अच्छी तरह खुश्क कर चुका था। लेकिन मेरा 4" से ज्यादा लण्ड इरम की फुद्दी में घुस गया। लण्ड के घुसते ही इरम के मुँह से ‘ससीईई की बैसाख्ता आवाज निकल गई, तो मैंने अबकी बार हल्का सा लण्ड निकालकर फिर से जानदार झटका मार दिया तो मेरा पूरा 7.4” लण्ड इरम की फुद्दी में उतर गया। लेकिन अबकी बार इरम के मुँह से कोई भी आवाज नहीं निकली, बस इम अपनी आँखों को बंद किए अपने होंठ चबाती रही।

मैंने इसी तरह दो-तीन बार पूरी ताकत के झटके मारे, तो मेरा लण्ड इरम की फुद्दी के पानी से पूरी तरह गीला होकर आसानी से अंदर-बाहर होने लगा, तो मैंने अपना लण्ड फिर से बाहर निकाल लिया और कपड़े से अच्छी

तरह अंदर तक इरम की फुद्दी को खुश्क करके लण्ड को तेज झटके से पूरा घुसा दिया।

लेकिन इस बार इरम के साथ-साथ मेरे मुँह से भी ‘सस्सीईई' की आवाज निकल गई और इरम बोली- “ससीईई सन्नीऽs क्यों कर रहे हो ऐसे? प्लिज़्ज़... मत करो बहुत जलन हो रही है ऊऊहह... सन्नी हरमी मेरे साथ-साथ तेरा लण्ड भी छिल जाएगा..."

लेकिन मैं अब बिना परवाह किए उसकी टाँगों को पूरा उसके कंधों की तरफ दबाकर लण्ड को बाहर निकालता और फिर अपने पूरे वजन के साथ इरम के ऊपर गिरा देता, जिससे थप्प-थप्प की आवाज के साथ-साथ इरम के मुँह में से- “आऐईयईई पापा प्लीज़्ज़... इसे रोको उउफफ्फ़... मेरी फुद्दी अंदर से छिल गई है हरामी की औलाद मत कर ऐसे ऊऊह्ह...” की आवाज करने लगी।

इरम के मुंह से निकलने वाली आवाजें सुनकर सफदर अंकल मेरी गाण्ड को सहलाने लगे और बोले- “हाँ सन्नी, आज मजा आ रहा है इस कुतिया के इस तरह चिल्लाने से, वरना जब भी मुझसे चुदवाती है साली किसी मुर्दा लाश की तरह पड़ी रहती है, जिससे सारा मजा ही खराब हो जाता है...”

सफदर अंकल की बात सुनकर मैं और भी ज्यादा जोर लगाते हुये बोला- “अंकल आज के बाद जब भी इस कुतिया को चोदो, इसकी फुद्दी का सारा पानी निकालकर खुश्क कर दो, उसके बाद देखना कैसे चिल्लाती है...”

कोई 3-4 मिनट के बाद अचानक इरम का जिम अकड़ने लगा और वो मेरे साथ लिपटने की कोशिश करने लगी। लेकिन मैंने उसकी चूचियों पे हाथ रखकर उसे फिर से नीचे दबा दिया।

तब इरम “आअहह... सन्नी प्लीज़... मेरी जान मेरे सीने से लग जाओ उफफ्फ़... जानू मैं झड़ने वाली हँन् ऊऊहह सन्नी कुत्ते क्यों जलील कर रहा है मुझे बहनचोद गान्डू...” की तेज आवाज के साथ ही इरम का पूरा जिम एक बार अकड़ा और फिर हल्का-हल्का काँपने लगा जिसके बाद उसकी फुद्दी में पानी का तेज सैलाब सा आ गया।

 
तब इरम “आअहह... सन्नी प्लीज़... मेरी जान मेरे सीने से लग जाओ उफफ्फ़... जानू मैं झड़ने वाली हँन् ऊऊहह सन्नी कुत्ते क्यों जलील कर रहा है मुझे बहनचोद गान्डू...” की तेज आवाज के साथ ही इरम का पूरा जिम एक बार अकड़ा और फिर हल्का-हल्का काँपने लगा जिसके बाद उसकी फुद्दी में पानी का तेज सैलाब सा आ गया।

इरम के फारिघ् होते ही मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया, क्योंकी मैं अभी फारिघु नहीं होना चाहता था। इम थोड़ी देर तक लंबी सांसें लेती रही। उसके बाद इरम ने अपनी आँखें खोलकर मेरी तरफ और फिर मेरे फनफनाते हुये लण्ड की तरफ देखा और हल्का सा मुश्कुराकर बोली- “सन्नी तुम सच्ची में बहुत बड़े हरामी हो। पता है आज तक मुझे कोई मेरी मर्जी के बिना फारिघ् नहीं करवा सका है, लेकिन तुमने कर डाला। मेरा सारा मान तोड़ दिया है आज तुमने। बहुत जालिम हो...”

इरम की बात सुनकर मैं हँस दिया और बोला- “अभी तुमने जुल्म देखा ही कहाँ है? अभी तो तुम देखोगी कि आज होना क्या कुछ है तुम्हारे साथ?” और साइड से कपड़े उठाकर एक बार फिर से इरम की फुद्दी को साफ करने लगा।

तब इरम ने खुद ही कपड़ा पकड़ लिया और अपनी फुद्दी साफ करते हुये बोली- “कुछ तो गीली रहने दो, वरना आज के बाद एक हफ्ते तक हम दोनों ही किसी काम के नहीं रहेंगे...”

अबकी बार मैंने इरम की बात मान ली, क्योंकी मुझे भी अब लण्ड पे जलन का एहसास हो रहा था, जो कि इरम की खुश्क फुद्दी में घुसने की वजह से ही हो रही थी। खैर, फुद्दी को अच्छे से साफ करके इरम ने मुझे अपनी जगह पे लिटा दिया और खुद अपने पापा की तरफ मुँह करके जो कि मेरे पैरों की तरफ थे, मेरे लण्ड को अपनी फुद्दी पे सेट करते हुये धीरे से मेरे लण्ड को अपनी फुद्दी में लेती हुई नीचे बैठ गई। मैंने भी पीछे से। इरम की गाण्ड पकड़ ली और उसे सहलाते हुये ऊपर नीचे होने में मदद देने लगा।

पूरा लण्ड अपनी फुद्दी में घुसाकर इरम ने मुड़कर मेरी तरफ देखा और बोली- “क्या खयाल है जरा प्यार से मजा ना करें?”

मैंने हाँ में सिर हिला दिया, तो इरम ने खुद को धीरे से मेरे ऊपर गिरा लिया और अपने हाथ मेरे सिर के पिछली तरफ बेड से लगाकर अपनी गाण्ड को मेरे लण्ड पे रगड़ते हुये चुदाई का मजा लेने लगी। लेकिन इस तरह इरम की चुदाई मेरे लिए भी बड़ी मुसीबत बन रही थी, क्योंकी शायद ये इरम के गरम जिस्म का कमाल था, जो मुझसे अब बर्दाश्त खतम होती जा रही थी।

इस स्टाइल में मुझसे दो मिनट भी कंट्रोल नहीं हो पाया, और मैंने इरम को अपने ऊपर से धकेल दिया और खुद उठकर इरम को अपने नीचे लिटा लिया और फिर से उसकी टांगें उठाकर अपने कंधों पे रख लीं और अपना लण्ड घुसाकर इरम की फुद्दी मारने लगा। लेकिन क्योंकी इस बार इरम की फुद्दी ज्यादा खुश्क नहीं थी और लण्ड भी आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।

तो इरम भी अपनी गाण्ड नीचे से मेरे लण्ड की तरफ उछलते हुये बोली- “क्या हुआ मेरे हरामी राजा, गाण्ड फट रही है क्या? और तेजी से चोद ना बहनचोद। ये तेरी माँ की बूढ़ी फुदी नहीं है जो एक दो बार में थक जाएगी। साले ये मेरा जवान जिश्म है, 10 बार भी माँ चुदवाएगा ना तो ताजा दम मिलेगी उफफ्फ़ सन्नी और तेज चोद बहन के लौड़े उउन्नम्म्मह आअहह.. पापा इसकी गाण्ड में उंगली करो, इसे बोलो तेज चोदे उउफफ्फ़..." की आवाज में चिल्ला-चिल्ला के मेरा जोश बढ़ा रही थी। जिसने इतना काम किया कि मैं दो मिनट में ही इरम की फुद्दी में झड़ गया और उसके ऊपर ही लेटकर हाँफने लगा।

 
इरम ने इसी तरह मुझे अपने साथ जकड़ लिया बाहों में और थोड़ा जोर लगाकर मुझे अपने ऊपर से घुमाकर साइड में कर लिया और मेरा लण्ड ऐसे ही अपनी फुद्दी में लिए मुझे किस करने लगी। इम की तरफ से ये पहली किस थी जो उसने मुझे की थी और वो भी काफी जोश के साथ।

कुछ देर मैं इरम के साथ ऐसे लिपटा लेटा रहा और किस करता रहा। फिर मैं पीछे हटा जिससे मेरा मुरझाया हुआ लण्ड इरम की फुद्दी में से निकल आया तो मैं अंकल की तरफ देखकर मुश्कुराया और बोला- “क्यों अंकल मजा आया या नहीं?”

अंकल ने कहा- “तुम्हें तो आ ही गया है लेकिन मेरा अभी बाकी है..” और इतना बोलते हुये इरम को अपनी तरफ खींचकर उसे अपने ऊपर आने को कहा।

तब मैं वहाँ से उठा और नंगा ही बाथरूम में जा घुसा और अपने आपको साफ सफाई करके जब 5 मिनट बाद बाहर निकला तो देखा कि सफदर अंकल भी इरम की फुद्दी में झड़ चुके थे, और अब दोनों बाप बेटी साथ-साथ लेटे हाँफ रहे थे।

थोड़ी देर तक आराम करने के बाद इरम उठी और मेरी तरफ देखकर हल्का सा मुश्कुराते हुये बोली- “लगता है। तुम्हें काफी तजुर्बा है सेक्स का, जो कि अभी तक मेरे पापा को भी नहीं है। कसम से अभी तक जलन हो रही है। मुझे। वैसे सच्ची बात बताऊँ तुम्हें सन्नी... मजा बहुत आया है मुझे...”

मैं हँसते हुये उठा और बोला- “लेकिन यार इरम, मुझे कुछ खास मजा नहीं आया। पता नहीं क्यों तुमने दिल से मेरे साथ एंजाय नहीं किया है.”

इरम हँस दी और बोली- “शुरू-शुरू में सचमुच ऐसा ही था। लेकिन बाद में जब तुमने अपना कमाल दिखाया तब तो मैंने दिल से ही करवाया था ना?”

अब मैं उठा और अपने कपड़े लेकर लण्ड को अच्छे से साफ करता हुआ कपड़े पहनने लगा।

सफदर अंकल ने कहा- “क्या बात है सन्नी, कहाँ जा रहे हो?”

मैंने कहा- “बस अंकल, आप लोग अपनी मस्ती जारी रखो। मुझे कुछ काम है, बाद में आऊँगा आप लोगों की तरफ..." और वहाँ से निकलकर अपने घर आ गया, जहाँ निदा बाहर हाल में ही बैठी टीवी देख रही थी।

मुझे देखते ही निदा एक स्माइल देते हुये धीरे से बोली- “लगता है आज हमारे भाई को कोई खजाना मिल गया है, जो इतना खुश दिखाई दे रहा है..."

मैं हँसता हुआ निदा के पास ही जा बैठा और बोला- “क्यों किसी खजाने के मिलने से ही मेरे चेहरा पे चमक आ सकती है क्या? कुछ और भी तो मिल सकता है ना?”

निदा- अच्छा जी, तो बताओ फिर ये कुछ और कहाँ से मिला और किसने दिया तुम जैसे चांदिस को?

मैं- क्यों जेलस हो रही हो? तुम क्या जानो कि क्या चीज थी? आअह्ह... कसम से मजा आ गया जब से देखा है। और मिला हूँ बस उसी का खयाल ही हर वक़्त मेरी आँखों के सामने नाचता रहता है।

निदा जो कि अभी तक शोखी दिखा रही थी एकदम से मुँह बनाते हुये उठी और अपने रूम में चली गई, और जाते हुये बोली- “भाई वैसे आपने बाजी के साथ ज्यादती नहीं की है?"

मैं- “यार ये बात फरी से ही क्यों नहीं पूछ लेती तुम? वो तुम्हें अच्छे से समझा देगी सब कुछ...”

 
निदा जो कि अभी तक शोखी दिखा रही थी एकदम से मुँह बनाते हुये उठी और अपने रूम में चली गई, और जाते हुये बोली- “भाई वैसे आपने बाजी के साथ ज्यादती नहीं की है?"

मैं- “यार ये बात फरी से ही क्यों नहीं पूछ लेती तुम? वो तुम्हें अच्छे से समझा देगी सब कुछ...”

निदा के जाने के बाद मैं भी उठा और अपने रूम में आ गया, जहाँ अब निदा फरी बाजी का सिर खा रही थी कि मैं पता नहीं कहाँ से मुंह काला करवा के आ रहा हूँ? और फरी बाजी को मुझसे सख्ती से पूछना चाहिए। लेकिन फरी बाजी थी कि बेड पे बैठी हल्का सा मुश्कुरा रही थी। जिससे निदा को गुस्सा आ गया और उसने कुछ बोलने के लिए अपना मुँह खोला ही था कि मुझ पे नजर पड़ते ही बोली- “लो आ गये आपके नाबाब साहब, पूछो अब । इससे कहाँ गया था ये?”

फरी बाजी ने अब सीरियस होते हुये निदा से कहा- “यार क्यों बच्चों की तरह रिएक्ट कर रही हो तुम? जैसे सन्नी मेरी हर ख्वाहिश का ख्याल करता है और मुझे हर तरह की आजादी दी हुई है इसने, तो क्या इसे इस बात का हक नहीं है कि अपनी लाइफ के कुछ पल अगर किसी और के साथ भी गुजरना चाहे तो गुजर सके?”

फरी की बात सुनकर निदा का गुस्सा थम सा गया। लेकिन मुझे उसके चेहरा पे अब भी एक नागवारी सी दिखाई दे रही थी, जिसका मतलब था कि निदा को मेरा किसी और के साथ करना अच्छा नहीं लगा था। जिसका एक ही मतलब निकलता था कि निदा भी जेहनी तौर पे मेरी तरफ झुक रही थी, जो कि मेरे लिए सप्टइज ही था। क्योंकी निदा बहूत हाट लड़की थी और मैं खुद भी उसके लिए पागल हुआ फिर रहा था। जिस बात का एहसास निदा को भी अच्छी तरह था कि मैं उसके लिए क्या सोचता हूँ?

अभी निदा कुछ बोलने ही लगी थी कि अम्मी की आवाज सुनाई दी जो निदा को बुला रही थी कि वो उनके रूम की अच्छी तरह झाड़-पोंछ कर दे। तो निदा मुँह ही मुँह में बुदबुदाती हुई रूम में से निकल गई।

बाजी ने कहा- “हाँ तो मजा आया मेरे भाई को इरम के साथ?”

मैंने बुरा सा मुँह बनाते हुये कहा- “अरे बाजी, एकदम गश्ती है साली। लेकिन आज मैंने भी उसकी वो ठुकाई की है कि पीछे-पीछे भागेगी मेरे...”

 
Back
Top