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मैंने धीरे से कहा, “कैसे बताऊँ रुखसार, बड़ा अजीब लगा रहा है। पिछले कुछ दिनों से राज अजीब सा वर्ताव कर रहें हैं।” रुखसार ने बिना कुछ बोले मेरी और प्रश्नार्थ दृष्टि से देखा। वह मेरे आगे बोलने का इन्तेजार कर रही थी।
मैं, “मुए शक है की वह कोई दूसरी औरत के चक्कर में हैं। ”
रुखसार, “तुम्हें कैसे पता? राज के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया है?”
मैं, “वह मुझसे अब अचानक ज्यादा प्यार करने लगे हैं।” मेरा वाक्य मुझे ही बड़ा अजीब सा लग रहा था। रुखसार का स्तंभित होना स्वाभाविक था।
रुखसार बड़े ही आश्चर्य से बोली, “क्या? राज तुम्हें ज्यादा प्यार करने लगे हैं, और तुम्हें लगता है की वह किसी और स्त्री के चक्कर में है? यह कैसी गुत्थी है? वह औरत कौन है?”
मैं कुर्सी पर सकपका रही थी। मैं रुखसार की कैसे समझाऊँ की परेशानी की जड़ तो वह खुद ही थी? बड़े असमंजस मैं कहा, “रुखसार, मैं कैसे बताऊं? मुझे अजीब सा लग रहा है। ”
तब रुखसार ने मुझे बड़ी ही असमंजस में डाल दिया। वह बोली, “और वह औरत मैं हूँ। सही है या गलत?” मैंने कुछ भी न बोलते हुए अपनी मुंडी हिला कर “हाँ” का इशारा किया।
मेरी बात का बुरा मानने, आश्चर्य प्रकट करने या मेरे साथ तक वितर्क करने के बजाय रुखसार मेरे और करीब आयी और मुझसे लिपट गयी और बोली, “हाँ, तुम सही हो। तुम्हारा पति मेरे पीछे पड़ा है। पर क्या तुम्हें पता है की मेरा पति तुम्हारे लिए कितना पागल है?”
मैं क्या बोलती? अब कठघरे में खड़े रहने की बारी मेरी थी। मैं बिना बोले असमंजस में रुखसार की और एकटक देख रही थी की वह क्या बोलेगी। तब रुखसार ने मेरी नाक अपने हाथ में पकड़ कर बड़े प्यार से धीरे से उसे दबाते और मेरा सर इधर उधर हिलाते हुए बोली, “अरे इस में मेरे पति समीर का क्या दोष निकालूं? तुम हो ही इतनी खूबसूरत।” फिर एकदम खुल कर हँस पड़ी और बोली, “अगर में मर्द होती और समीर की जगह होती तो मैं तो शायद तुम्हे अबतक मेरे बच्चोँ की माँ ही बना चुकी होती।”
मैं क्या बोलती? स्वयं इतनी अति सुन्दर स्त्री जब मेरी इतनी प्रशंशा करे तो भला मैं क्या बोल सकती थी? मैंने दबे हुए स्वर में कहा, “रुखसार बस भी करो। मेरी टांग मत खींचो। तुम तो मुझसे कहीं ज्यादा खूबसूरत हो। तुम्हारे सामने तो मैं कुछ भी नहीं। ”
रुखसार फिर थोड़ा रुक कर बोली, “मेरी प्यारी डॉली भाभी जान। अब मैं आपको बताती हूँ की बात क्या है।”
धीरे से एक गहरी साँस लेकर रुखसार ने कहा, “सीधी स्पष्ट बात और आजकी समस्या यह है की हम दोनों के पति एक दूसरे की बीबी से बहोत आकर्षित हैं, और वह हम दोनों से शारीरिक सम्भोग करना चाहते हैं। अब सवाल यह ही की हम पत्नियां क्या करें?”
रुखसार की इतनी सीधी और स्पष्ट बात सुनकर मेरे चेहरे से तो जैसे हवाइयां उड़ने लगी। मैं क्या बोलती? रुखसार की बात तो एकदम सही और सटीक थी। मैं चुप रही तो रुखसार ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा, “देखो, मैं जानती हूँ की तुम और राज ने मिलकर एक ब्लू फिल्म देखि थी, जिसमें दो पति अपनी पत्नोयों की अदलाबदली करतें हैं। जब राज ने तुमसे ऐसे ही करने के बारेमें आग्रह किया तो तुमने राज को शायद फटकार दिया था। यह बात मैंने दरवाजे के पीछे छिपकर मेरे पति समीर और राज के आपसी संवाद में सुनी थी। राज तुम्हारी फटकार से बड़ा दुखी था और समीर को कह रहा था की उसका मन करता हैकि वह कोई वेश्या के पास जाए।” रुखसार इतना बोलकर चुप हो गयी।
मैं, “मुए शक है की वह कोई दूसरी औरत के चक्कर में हैं। ”
रुखसार, “तुम्हें कैसे पता? राज के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया है?”
मैं, “वह मुझसे अब अचानक ज्यादा प्यार करने लगे हैं।” मेरा वाक्य मुझे ही बड़ा अजीब सा लग रहा था। रुखसार का स्तंभित होना स्वाभाविक था।
रुखसार बड़े ही आश्चर्य से बोली, “क्या? राज तुम्हें ज्यादा प्यार करने लगे हैं, और तुम्हें लगता है की वह किसी और स्त्री के चक्कर में है? यह कैसी गुत्थी है? वह औरत कौन है?”
मैं कुर्सी पर सकपका रही थी। मैं रुखसार की कैसे समझाऊँ की परेशानी की जड़ तो वह खुद ही थी? बड़े असमंजस मैं कहा, “रुखसार, मैं कैसे बताऊं? मुझे अजीब सा लग रहा है। ”
तब रुखसार ने मुझे बड़ी ही असमंजस में डाल दिया। वह बोली, “और वह औरत मैं हूँ। सही है या गलत?” मैंने कुछ भी न बोलते हुए अपनी मुंडी हिला कर “हाँ” का इशारा किया।
मेरी बात का बुरा मानने, आश्चर्य प्रकट करने या मेरे साथ तक वितर्क करने के बजाय रुखसार मेरे और करीब आयी और मुझसे लिपट गयी और बोली, “हाँ, तुम सही हो। तुम्हारा पति मेरे पीछे पड़ा है। पर क्या तुम्हें पता है की मेरा पति तुम्हारे लिए कितना पागल है?”
मैं क्या बोलती? अब कठघरे में खड़े रहने की बारी मेरी थी। मैं बिना बोले असमंजस में रुखसार की और एकटक देख रही थी की वह क्या बोलेगी। तब रुखसार ने मेरी नाक अपने हाथ में पकड़ कर बड़े प्यार से धीरे से उसे दबाते और मेरा सर इधर उधर हिलाते हुए बोली, “अरे इस में मेरे पति समीर का क्या दोष निकालूं? तुम हो ही इतनी खूबसूरत।” फिर एकदम खुल कर हँस पड़ी और बोली, “अगर में मर्द होती और समीर की जगह होती तो मैं तो शायद तुम्हे अबतक मेरे बच्चोँ की माँ ही बना चुकी होती।”
मैं क्या बोलती? स्वयं इतनी अति सुन्दर स्त्री जब मेरी इतनी प्रशंशा करे तो भला मैं क्या बोल सकती थी? मैंने दबे हुए स्वर में कहा, “रुखसार बस भी करो। मेरी टांग मत खींचो। तुम तो मुझसे कहीं ज्यादा खूबसूरत हो। तुम्हारे सामने तो मैं कुछ भी नहीं। ”
रुखसार फिर थोड़ा रुक कर बोली, “मेरी प्यारी डॉली भाभी जान। अब मैं आपको बताती हूँ की बात क्या है।”
धीरे से एक गहरी साँस लेकर रुखसार ने कहा, “सीधी स्पष्ट बात और आजकी समस्या यह है की हम दोनों के पति एक दूसरे की बीबी से बहोत आकर्षित हैं, और वह हम दोनों से शारीरिक सम्भोग करना चाहते हैं। अब सवाल यह ही की हम पत्नियां क्या करें?”
रुखसार की इतनी सीधी और स्पष्ट बात सुनकर मेरे चेहरे से तो जैसे हवाइयां उड़ने लगी। मैं क्या बोलती? रुखसार की बात तो एकदम सही और सटीक थी। मैं चुप रही तो रुखसार ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा, “देखो, मैं जानती हूँ की तुम और राज ने मिलकर एक ब्लू फिल्म देखि थी, जिसमें दो पति अपनी पत्नोयों की अदलाबदली करतें हैं। जब राज ने तुमसे ऐसे ही करने के बारेमें आग्रह किया तो तुमने राज को शायद फटकार दिया था। यह बात मैंने दरवाजे के पीछे छिपकर मेरे पति समीर और राज के आपसी संवाद में सुनी थी। राज तुम्हारी फटकार से बड़ा दुखी था और समीर को कह रहा था की उसका मन करता हैकि वह कोई वेश्या के पास जाए।” रुखसार इतना बोलकर चुप हो गयी।