S
StoryPublisher
Guest
अगले दिन मैने निशा को कहा कि मुझे कोई 10-12 दिन तो लग ही जाएँगे आने मे तो वो बोली कोई बात नही मैं इंतज़ार कर लूँगी फिर हम तैयार हुए ब्रेकफास्ट किया फिर हम दोनो अपने अपने रास्ते निकल गये वो बॅंक चली गयी और मैने मेट्रो पकड़ ली धोला कुआँ के लिए ना जाने क्यो मुझे निशा की बड़ी फिकर थी तो मैने सोर्सस का उपयोग करते हुए दो गार्ड्स की ड्यूटी लगा दी उसकी प्रोटेक्षन को
पर इस तरह कि उसे कुछ पता भी ना चले मैं नही चाहता था कि मेरी वजह से उसको कोई भी परेशानी या तकलीफ़ हो आख़िर वो मेरी ज़िम्मेदारी थी फिर मैने अपनी बस पकड़ ली सफ़र लंबा था तो कानो मे हेडफोन लगाए और आँखो को बंद कर लिया मामा के शहर पहुचते पहुचते शाम हो चली थी मैं बस से उतरा मूह धोया फिर भाई को फोन कर दिया तो आधे घंटे मे वो मुझे लेने आ गया
उस से गले मिला दो चार बाते की और फिर चल पड़े मैने कहा तू पीछे बैठ बाइक मैं चलाता हूँ काफ़ी दिनो से मैने बाइक को हाथ भी नही लगाया था , कैसे चलाता थी ही नही मेरे पास बाइक तो , और फिर इतने सालो बाद मामा के घर जाने की खुशी भी थी मन को बड़ा ही अच्छा लग रहा था आख़िर अपने तो अपने ही होते है परिवार मे जो खुशी मिलती है वो हम लाखों करोड़ो रुपयो से भी नही खरीद सकते है
शादी मे अभी हफ़्ता भर था तो अभी इतने मेहमानो का आना शुरू नही हुआ था मैं नीम के नीचे बाइक को पार्क कर ही रहा था कि इतने मे लिली के दर्शन हो गये वो लपक कर मेरे पास आई और बोली अरे मनीष तुम इतने दिनो बाद मिलना हो रहा है कहाँ रहते हो तुम इधर का तो जैसे रास्ता ही भूल गये हो मैने कहा अब क्या करू फोजी आदमी हूँ छुट्टिया गिनती की ही मिलती है क्या कर सकते है
तुम बताओ कैसी हो तो वो बोली मैं तो मस्त हूँ , एकदम, शादी हो गयी है अशोक की शादी मे आई हूँ मैने कहा अरे वाह ब्याह कर लिया और बताया भी नही तो वो बात बदलते हुवे बोली तुमने शादी की क्या मैने कहा अरे कहाँ कोई अच्छी लड़की मिल ही नही रही जो भी अच्छी वाली थी वो तो सब ब्याह करके फुर्रर हो गयी तो लिली हँसते हुए बोली सुधरे नही हो तुम अभी तक
मैने कहा अब सुधर के करना भी क्या है तो वो बोली चलो मैं चलती हूँ बाद मे मिलूंगी ज़रा दुकान तक जाना है मैने कहा ठीक है फिर मैं भी अंदर चला गया सब लोग मुझे देखते ही खुश हो गये नानी के पाँव छुए मामी से गले मिला तो फिर कुछ आधा घंटा मिलने मिलाने की ओपचारिकताओ मे चला गया चाइ-नाश्ते के बाद मैने अपने कपड़े चेंज किए और मामा से बात करने लगा
वो पूछने लगे कि आजकल कहाँ पोस्टिंग है तो मैने झूट बोलते हुए कहा कि आजकल तो मैं ग्लसियार मे पड़ा हूँ कुछ देर उनसे बाते होती रही फिर छोटे भाई बहनो ने पकड़ लिया बोले भाई हमारे लिए क्या गिफ्ट लेकर आए हो अरे तेरी उनका तो ख़याल ही मेरे माइंड से निकल गया था मैने कहा अभी माफी दो भाई लोगो कल सुबह ही सहर तुम सबको सहर ले जाकर शॉपिंग करवाता हूँ तब जाकर वो माने
काफ़ी दिनो बाद परिवार का साथ मिला था तो मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था रात के खाने के बाद मैं और अशोक भाई छत पर बैठे थे मैने कहा यार लिली तो पहले से भी मस्त पटाखा हो गयी है वो बोले हाँ यार पर अब मुझसे बात नही करती वो मैने कहा क्यो महाराज तो पता चला कि भाई और उसका किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया था और फिर उपर से उसकी शादी भी हो गयी थी
भाई बोला तू ट्राइ कर ले तेरी तरफ देख भी रही थी मैने कहा अरे ना भाई अपने बस का कहाँ खुद देगी तो ही मैं ले सकु सूं वरना जाए तो जाए भाई बोले मैने तो बता दिया है आगे तू देख लिए थोड़ी देर बाद हम नीचे आ गये सर्दियो के दिन , जनवरी का महीना और फिर गाँव की सर्दी का तो आप सबको पता ही है मैं नीम के नीचे लकड़िया जलाकर बैठा हुआ था टाइम कुछ ज़्यादा तो नही था करीब साढ़े आठ हो रहे थे पर
ब्याह का घर था तो चहल पहल सी थी , और फिर मोहल्ले की औरते गीत गाने आती थी तो वो ही सब चल रहा था तभी लिली आकर मेरे पास बैठ गयी और बोली अकेले अकेले आग ताप रहे हो मैने कहा अब क्या करे आप तो खफा खफा सी लग रही है मैं बोला अब तो आदत सी हो गयी है अकेले रहने की वो बोली ऐसा क्यो भला मैने कहा अब आप तो घास डालती नही हो आपके घर आए है
मेहमान है आपके अब खातिरदारी ना करोगी तो शिकायत तो करूँगा ही तो वो बोली तो बताओ किसी तरह की खातिर दारी कारवाओगे मैने उसका हाथ पकड़ा और कहा ये तो आप ही जाने तभी कुछ आहट सी हुई और फिर वो भागकर अंदर चली गयी कुछ देर बाद जब ठंड ज़्यादा लगने लगी तो मैं भी रज़ाई की शरण मे चला गया