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जुली को मिल गई मूली compleet

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मैने अपने स्कर्ट के अंदर हाथ डाल कर अपनी चड्डी को उतारा तो पाया कि मेरी चड्डी मेरे चूत रस से गीली हो चुकी थी. मैने अपनी चड्डी को अपनी नाक के पास करके अपने चूत रस की सुगंध को सूँघा. बहुत सेक्सी सुघन्ध है मेरे चूत रस की. मैं सोच रही थी कि उस छोटी सी जगह मे अपने काम को किस तरह अंजाम दिया जाए. मैने दरवाजे के पीछे लगे हुक पर अपनी चड्डी टांगी और टाय्लेट सीट पर बैठी. अपनी स्कर्ट को गंदी होने से बचाने के लिए उसको अपनी कमर तक उठा कर दबा लिया. फिर मैने महसूस किया की टाय्लेट सीट पर बैठे बैठे मैं अपना काम ठीक से नही कर पाउन्गि. मैं जितना हो सकता था उतनी आगे हो कर बैठी. तभी, बगल के स्टॉल मे एक औरत आई. मैं स्थिर हो गई. नीचे से उसके पैर दिख रहे थे. मैने उसकी चड्डी नीचे करने की सरसराहट सुनी और साफ साफ उसके मूतने की आवाज़ सुनी. मुझे और गरम होने के लिए इतना काफ़ी था. मैं सोच रही थी कि बाहर इतनी आवाज़ें होने के बावजूद जब मैने बगल के स्टॉल मे उस औरत के मूतने की आवाज़ सुन ली तो मेरे द्वारा भी किसी भी प्रकार की आवाज़ भी सुनी जा सकती है.

लेकिन, कुछ भी हो, मुझे मेरा वो काम तो करना ही था जिसके लिए मैं वहाँ आई थी. आगे खिसक कर बैठने की वजह से मुझे कुछ परेशानी हो रही थी तो मैने अपना एक पैर सामने दरवाजे पर टिकाया. पैर मे सॅंडल होने की वजह से लकड़ी के दरवाजे पर पैर टीकाने से आवाज़ हुई. मैने महसूस किया कि बगल के स्टॉल मे मूतने आई औरत की हलचल बंद हो गई है. शायद वो मेरे स्टॉल मे क्या हो रहा है, ये सुन ने की कोशिश कर रही है. भाड़ मे जाए वो, सुनती है तो सुनती रहे, मैने अपने मन मे सोचा. मैने पूरा ध्यान अपनी चंचल, चिकनी चूत पर लगाया और अपनी रसीली चूत की दरार मे अपनी उंगली फिराई. मेरी चूत तो जैसे टपक रही थी. मैने बगल के स्टॉल से टाय्लेट पेपर खींचे जाने की आवाज़ सुनी और फिर उसके रगडे जाने की आवाज़ भी सुनी. शायद वो औरत टाय्लेट पेपर अपनी चूत पर रगड़ कर अपनी चूत को सॉफ कर रही थी.

अचानक ही, जब मेरी उंगली मेरी चूत के तने हुए गरम दाने से टकराई नो ना चाहते हुए भी मेरे मुँह से आह की आवाज़ निकल गई. बगल के स्टॉल से टाय्लेट पेपर को चूत पर रगड़ने की आवाज़ आनी अचानक रुक गई. मैने अपने मन मे सोचा कि जो होगा देखा जाएगा. किसी को पता चलता है तो चलता रहे. मुझे तो अपना काम पूरा करना था. अपना चॅलॅंज पूरा करना था. खुद ही अपनी चूत मसल कर, उंगली डाल कर हस्त मैथून करते हुए मुझे झड़ना था. आवाज़ होती है तो होती रहे.

मैं फिर अपने काम मे मगन हो गई. अपनी रसीली मस्तानी चूत मे मेरी उंगली घूमने लगी और ना चाहते हुए भी मेरे मुँह से आनंद की धीमी धीमी आवाज़ें निकलने लगी. मेरे चूत रस की सुगंध अब अपने आप ही मेरी नाक तक पहुँच रही थी. मेरी चूत काफ़ी गीली होने की वजह से जब मेरी उंगली उसके अंदर बाहर हो रही थी तो उस से भी कुछ आवाज़ होने लगी. मैं काफ़ी गरम हो चुकी थी, मेरी आँखें बंद हुई जा रही थी और मुझे लगा कि मैं अपने झड़ने के काफ़ी करीब हूँ. मेरी साँसे तेज तेज चलने लगी और मेरा बदन झड़ने से पहले अकड़ने लगा. मेरे हाथ की रफ़्तार मेरी चूत पर और भी बढ़ गई. दराज पर मेरे पैर के टकराने से दरवाजा हिलने लगा था और अब कुछ भी मेरे बस मे नही था. बाहर से आने वाली आवाज़ों मे अचानक कमी आई और हे भगवान! बाहर खड़ी औरतें, लड़कियाँ मुझे सुन रही थी और शायद उनको अंदाज़ा हो गया था कि अंदर मैं क्या कर रही हूँ. लेकिन इन सब की परवाह करने के लिए अब काफ़ी देर हो चुकी थी और मैं ऐसी हालत मे थी जहाँ से लौटना या वहीं रुकना मेरे बस मे नही था. मैं अपने झड़ने की चरम सीमा पर थी और अब कुछ नही हो सकता था. मुझे आगे ही जाना था, पीछे वापस आना या रुकना मुमकिन नहीं था.

और अचानक ही, जैसे कि मैं जानती थी, मैं एक झटके के साथ ज़ोर से झाड़ गई और उत्तेजना के मारे मेरा पैर ज़ोर से दरवाजे से टकराया तो दरवेाजा हिल गया.

मैं तो ऐसे झड़ी थी कि रुकने का नाम नही ले रही थी. मैं जब तक हो सका, अपनी गीली चूत मसल्ति रही, उंगली करती रही. पता नही मैने अपनी चूत मे उंगली करते वक़्त उत्तेजना मे क्या क्या किया, कितनी आवाज़ें निकाली, मुझे कुछ याद नही था. बाहर एकदम खामोशी छाई थी. क्या सब औरतें और लड़कियाँ चली गई है?

तभी, मैने महसूस किया कि बाहर का दरवाजा खुला और कुछ लड़कियाँ बातें करती हुई वॉश रूम मे आई और अचानक ही चुप हो गई. हे भगवान! इसका मतलब सब की सब औरतें और लड़कियाँ अंदर ही है और मेरे बाहर आने का इंतज़ार कर रही है.
 
बाहर कुछ फुसफुसाहट शुरू हुई और मैं जानती थी कि मुझे कुछ करना था. मैं खड़ी हुई और टाय्लेट पेपर से अपनी चूत सॉफ करने के बाद अपनी स्कर्ट को नीचे किया. अपनी चड्डी मैने अपने पर्स मे रखी और मैं बाहर आने को तय्यार हो गई. मेरे मन ने मुझसे कहा कि घबराने की कोई बात नही है जूली! सब जो बाहर खड़ी हैं, उन सब के पास चूत है, उनमे बहुत सारी या सब वो ज़रूर करती होगी जो मैने अभी अभी किया है.

मैने दरवाजा खोला, एक लंबी साँस ली और बाहर कदम रखा. बाहर सब की सब जैसे सकते मे खड़ी थी. सब की सब मेरी तरफ देख रही थी, मुझे निहार रही थी. किसी ने भी अपने मूह से कोई आवाज़ नही निकाली, कुछ नही बोली. मैने और एक लंबी साँस ली और आगे बढ़ी.

मैं वॉश बेसिन तक आई और अपने काँपते हुए हाथ धोने लगी. मेरा चेहरा शर्म से लाल हो रहा था और साँसे तेज होने की वजह से मेरी चुचियाँ उपर नीचे हो रही थी. सब की सब मुझे देखे जा रही थी और अपने मन मे कहीं ना कहीं मैं अपने आप को उन सब से बड़ी, सब से लंबी सब से महान समझ रही थी.

एक औरत जो करीब 50 साल की थी और मेरी बगल मे खड़ी थी. मैं जब अपने हाथ धोने के बाद उनको सुखाने की लिए टिश्यू पेपर लेने को अपना हाथ बढ़ाया तो वो औरत मुझे जैसे सूंघने लगी. वो मेरे बदन की खुश्बू लेने लगी. लगा कि कोई कुछ कहना चाहती है मगर बोल नही पा रही है.

मैं अब तक अपने आप पर काबू पा चुकी थी.

अचानक वो औरत बोली ” मुझे लगता है जो तुम ने किया है, उसकी तुम को बहुत ज़रूरत थी. तुम ने कुछ ग़लत नही किया.” वो मुस्कराते हुए कहती जा रही थी ” इस मे घबराने या शरमाने की क्या बात है डियर! हम सब ने ये किया है जो तुम ने किया है. ये हमारी ज़रूरत है और इसमे मज़ा भी तो बहुत आता है. मुझे पूरा यकीन है कि तुम को भी बहुत मज़ा आया होगा. मुझे तो सोच कर ही मज़ा आ रहा है.”

और उसने सब की तरफ देखा. सब की सब मुस्करा रही थी. फिर सब की सब एक साथ हंस पड़ी. सारा तनाव ख़तम हो गया.

एक सेक्सी सी लड़की ने ताली बजाई तो उसके पीछे पीछे सब ने तालियाँ बजा कर मेरा स्वागत किया जैसे मैने वो काम किया है, और खास करके वहाँ किया है जहाँ वो सोच भी नही सकती.

मैं तो शर्म से और लाल हो गई. मैने उस औरत के गाल पर एक प्यारी सी पप्पी धन्यवाद के रूप मे दी. उस ने भी जवाब मे मेरे गाल पर धन्यवाद दिया.

फिर वो बोली ” जवानी मे मैं भी तुम्हारी तरह थी.” उसने मेरे पर्स से झाँकति हुई चड्डी की तरफ इशारा किया और बोली “क्या तुम अपनी ये प्यार की निशानी मुझे दे सकती हो? मैं अपने किटी क्लब की सहेलियों को ये दिखा कर बताना चाहती हूँ कि ऐसा सही मे हुआ है.”

वो मेरे पर्स से बाहर झाँकति हुई, गीला दाग लगी हुई, मेरी चूत का रस लगी हुई चड्डी को लगातार देखे जा रही थी. मैने अपना पर्स खोला और अपनी चड्डी उस औरत को दे कर दरवाजे की तरफ बढ़ी.

मुझे बराबर याद नही है, पर मैं शायद वॉश रूम से निकल कर भागती हुई पार्किंग मे अपनी कार तक आई थी.

बाहर आने के बाद मैं एक दम शांत थी. अपनी कार मे बैठ कर मैने फिर एक लंबी साँस ली और अपने घर की तरफ रवाना हुई.

मैं अपने आप को बहुत संतुष्ट महसूस कर रही थी.

धन्यवाद आंजेलीना! मेरी प्यारी चुदाई की साथी. मुझे लगता है मैने तुम्हारा दिया चॅलॅंज अच्छी तरह से पूरा किया है.

मेरी चंचल चूत को मैं खुद ही बाज़ार मे चोद कर आ रही थी.

क्रमशः................................

 
जुली को मिल गई मूली-21

गतान्क से आगे.....................

हम ने, मैने और मेरे पति ने अपनी छुट्टियाँ शिमला मे मनाने का निस्चय किया. मेरे पति ने वहाँ शिमला मे हमारे रहने के लिए एक बंगला किराए पर ले लिया था. हम दोनो बाहुत ही खुश थे और शिमला के ठंडे और खूबसूरत मौसम मे, साथ साथ समय बिताने और मज़ेदार चुदाई करने के लिए बेताब थे. हम पहले भी वहाँ जा चुके थे , पर उस वक़्त हम एक होटेल मे रुके थे. इस बार ज़्यादा मज़े के लिए, ज़्यादा एकांत के लिए और ज़्यादा चुदाई के लिए हमने बांग्ला बुक किया था.

हम वहाँ शाम के वक़्त पहुँचे. हमारा विचार वहाँ दो दिन तक रहने का था. मेरे पति ने बंगले के सामने कार रोकी और निस्चित किया कि हम सही जगह पहुँचे हैं. हम कार से निकले तो ठंडी हवा का झोंका हमारे बदन से टकराया. मेरे पति तब तक बंगले के दरवाजे तक पहुँच चुके थे और जेब से चाबी निकाल कर उसका दरवाजा खोल चुके थे. मैं थोड़ा रुकी और फिर अपना बेग उठाए बंगले की तरफ बढ़ी. मेरे पति वहाँ, बंगले के दरवाजे पर खड़े मुझे ही देख रहे थे. मैं भी उनकी तरफ देखते हुए आगे बढ़ रही थी.

वो मुस्कराए और उन्होने मुझे अंदर आने का इशारा किया. जब मैं उनके बगल से गुज़री तो मेरे खुले बाल उनके चेहरे से टकराए. उन्होने मेरे बालों को लंबी साँस ले कर सूँघा. दरवाजा बंद कर के वो भी अंदर आ आगाए. हम बाहरी कमरे मे थे जहाँ उन्होने मुझे बैठने को कहा. मैं वहाँ रखे सोफे पर बैठ गई और चारों तरफ देखने लगी. वो एक बहुत ही खूबसूरत, सॉफ सुथरे और अच्छे रख रखाव वाला रहने के लिए तय्यार बांग्ला था. वो भी मेरे पास बैठे और मुझे बाहों मे भर लिया. हमेशा की तरह उनकी मज़बूत बाहों मे आ कर मैं सब कुछ भूल गई.

आख़िर मैने चुप्पी तोड़ी और मैं बोली की मुझे यहाँ पहुँच कर, इस खूबसूरत मौसम मे बहुत अच्छा लग रहा है. उन्होने अपनी आँखें मटकाई और बोले कि उनको कुछ करना है. और उन्होने मुझे फिर से खींच कर अपनी बाहों मे जाकड़ लिया. एक दूसरे को बाहों मे जकड़े हम अपनी थकान मिटाने लगे.

ऐसा लग रहा था जैसे हम दोनो के जिस्म एक दूसरे की गर्मी से पिघल जाएँगे. मेरी चुचियाँ उनके चौड़े सीने मे दब रही थी. चुदाई की गर्मी हमारे सिर पर सवार हो चुकी थी. हमारे हाथ एक दूसरे का बदन टटोलने लगे और मेरा हाथ जब उनकी पॅंट के सबसे खास हिस्से पर पहुँचा तो मैने उनका चुदाई का औज़ार, उनके लंबे लौडे को पॅंट के अंदर खड़े हो कर हलचल मचाते पाया. मैने अपनी नरम उंगलियों से जैसे उनके लंड को मालिश की.

उनके दोनो हाथों मे मेरी दोनो चुचियाँ आ चुकी थी जिसे वो मेरे टी-शर्ट के उपर से ही मसल्ने और दबाने लगे जिस से मैं और भी गरम हो गई. उन्होने अपने गरम होंठ मेरे गरम होंठों पर रखे और हम एक दूसरे के होंठों को चूस्ते हुए चुंबन करने लगे. मैने उनके पंत की ज़िप खोलते हुए उनके लंबे लौडे को बाहर निकाला तो वो जैसे मेरे हाथ मे नाचने लगा.

मैं उनका लंड पकड़ कर हिलाने लगी. उन्होने अपने काँपते हाथों से मेरी टी-शर्ट उतार दी. मेरी गोल गोल चुचियाँ मेरी काली ब्रा से झाँकने लगी. जब उन्होने मेरी ब्रा का हुक खोला तो मेरी ब्रा मे क़ैद दोनो चुचियाँ आज़ाद हो कर बाहर निकल आई. उनके हाथों ने तुरंत ही मेरी नंगी चुचियों को पकड़ लिया और दबाने लगे.

मैं उनका लंड पकड़ कर हिला रही थी और वो मेरी चुचियाँ दबा रहे थे तो हम दोनो के मूह से आनंद भरी आवाज़ें निकलने लगी. मेरे हाथ की पकड़ उनके तने हुए लौडे पर और मज़बूत हुई और मैं उसको आगे पीछे करने लगी. उनके लंड के छेद से गर्मी का रस निकलने लगा. उन्होने आगे हो कर मेरी चुचि को मूह मे लिया और मेरी निप्पल पर अपनी जीभ फिराई. मेरी दोनो निप्पलें तन कर खड़ी हो गई. वो मेरी चुचि और निप्पल चूस रहे थे और मैं उनका लंड पकड़ कर मुठिया मार रही थी. यहाँ मैं आप को बता दूं कि रास्ते मे, वहाँ आते समय, मैं काफ़ी देर तक, बार बार, कार मे उनके लंड से खेलती रही थी जिसकी वजह से वो पहले से ही काफ़ी गरम थे. मैने उनके लंड पर ज़ोर ज़ोर से मूठ मारनी शुरू की ताकि उनके लंड का पानी निकल जाए. मैने उनके बदन मे हलचल महसूस की और मुझे पता चल गया कि उनके लंड से लंड रस की बौछार होने वाली है. मैं और ज़ोर ज़ोर से, और कस कर, और जल्दी जल्दी अपना हाथ चलाती गई और अचानक ही उनके लंड ने अपने प्रेम रस की बौछार करनी शुरू कर दी. मैं तब तक उनके लंड को हिलाती हुई आगे पीछे, उपर नीचे करती रही जब तक कि उनके लंड के पानी की आख़िरी बूँद नही निकल गई.मेरा हाथ और नंगा पेट उनके लंड से बरसाए रस से गीले हो गये थे. वो सोफा पर पीठ टिका कर बैठ गये और लंबी लंबी साँसे लेने लगे.
 
मैं उनकी गोदी मे सो गई और उनके नरम होते, मुलायम होते लंड पर अपनी जीभ फिराने लगी जो मुझे बहुत अच्छा लगता है. मैने उनके लंड रस का स्वाद चखा जो कि बहुत ही स्वदिस्त है. मेरी जीभ उनके लंड के मूह से ले कर नीचे तक उनकी लटकती गोलियों की थैली पर घूम रही थी.

मैं सीधी हो कर बैठ गई और उनकी तरफ देख कर मुस्कराई. वो मेरी तरफ देख रहे थे जब मैं अपनी जीन्स खोल रही थी. जब मेरी जीन्स मेरी गोल गोल मस्तानी गंद से नीचे हुई तो वो ये देख कर बहुत खुश हुए कि मैने नीचे मैने चड्डी नही पहनी है. मैने जीन्स को अपनी टाँगों से बाहर निकाला और पूरी तरह नंगी हो कर उनकी गोद मे बैठ गई. मैने उनका टी-शर्ट भी उतारा और उनकी पॅंट और चड्डी भी उतार कर उनको भी अपनी तरह पूरा नंगा कर दिया. मैं नंगी हो कर अपने नंगे पति की गोद मे बैठी थी. दोनो के नंगे बदन फिर से अपनी गर्मी एक दूसरे के बदन को देने लगे. उनका लंड फिर से खड़ा होने लगा और कुछ ही देर मे पहले की तरह तन कर खड़ा हो गया.

मैं थोड़ी सी उपर होती हुई, उनके लंड को पकड़ कर अपनी गीली चूत के दरवाजे पर लगा कर जब फिर से उनकी गोद मे बैठने के लिए नीचे होने लगी तो उनका लंबा लंड मेरी गीली चूत मे घुसने लगा. मैं अपनी गंद हिला हिला कर तब तक उपर नीचे होती रही जब तक कि उनका मोटा ताज़ा लंबा लॉडा पूरे का पूरा मेरी फुद्दि मे नही घुस गया. जब मैने पाया कि उनका पूरा लंड मेरी चूत मे घुस गया है तो मैं उनका लंड अपनी चूत मे लिए उनकी गोद मे आराम से बैठ गई.

फिर धीरे धीरे मैं उनके डंडे पर अपनी गोल गोल मस्तानी गंद उपर नीचे करने लगी जिस से उनका खड़ा हुआ, सख़्त और लंबा लॉडा मेरी रसीली चूत मे अंदर बाहर होने लगा और मैं चुद्वाने लगी. मैं और मेरे पति, दोनो ऐसे ही अपनी कमर और गंद हिला रहे थे जैसे नाचारहे हो. उनका मस्त लंड मेरी चूत मे अंदर बाहर होता हुआ मुझे चोद्ने लगा. उनका लंड जैसे मेरी चूत की अंदर की मालिश कर रहा था. एक बार फिर मैं अपने पति से चुद्वाने लगी. मुझे पता था कि अब उनके लंड से पानी निकालने मे काफ़ी देर लगेगी और मैं उनको तो चोद्ने का पूरा मज़ा देना ही चाहती थी साथ ही साथ मैं खुद भी उनसे चुद्वाने का पूरा मज़ा लेना चाहती थी. जल्दी ही मैं तो चुद्वाते हुए झाड़ गई. उनको पता चल गया कि मैं झाड़ चुकी हूँ. वो कुछ देर के लिए रुक गये ताकि मैं अपने झड़ने का आनंद ले सकूँ और फिर उन्होने धीरे धीरे फिर से मुझे चोद्ना शुरू किया. मैने उनके लंड का पानी एक बार निकाल दिया था और मैं खुद भी चुद्वाते हुए एक बार झाड़ चुकी थी और अब दोनो दूसरी बार झड़ने की तरफ बढ़ रहे थे. मैं उनके लंड पर बैठी अपनी नंगी गांद हिलाते हुए उपर नीचे होने लगी और वो सोफा पर बैठे उपर नीचे होने लगे. परिणाम तो इसका एक ही था, वो मुझे चोद रहे थे और मैं उनसे चुद्वा रही थी.

कुछ ही देर मे मैं दूसरी बार झड़ने की तरफ बढ़ने लगी. मेरा बदन अकड़ने लगा, साँसे ज़ोर ज़ोर से चलने लगी और उनके चोद्ने और मेरे चुद्वाने की रफ़्तार भी बढ़ने लगी. उनका लंड मेरी चूत मे तेज़ी से अंदर बाहर होने लगा और शिमला का बंगला हमारी चुदाई के मधुर आवाज़ों का गवाह बन गया. उनका लंबा, मोटा और ताना हुआ सख़्त चुदाई का डंडा, उनका लंड, मेरी चूत मे अंदर बाहर होता हुआ फ़चा फॅक……….. फ़चा फॅक……. फ़चा फॅक…… फ़चा फॅक.. की आवाज़ें निकालता हुआ मुझे मेरी चुदाई की मंज़िल की तरफ ले जाने लगा. मेरी जम कर, तेज़ी से मस्त चुदाई हो रही थी. मैं भी अपनी तरफ से ज़ोर ज़ोर से अपनी चूत के धक्के उंले लंड पर लगा रही थी.

 
तेज……….. और तेज……… ज़ोर से………. और ज़ोर से………. प्यार की आख़िरी मंज़िल, चुदाई….. अपनी चरम सीमा पर थी और हम दोनो कभी भी अपनी मंज़िल पर पहुँच सकते थे. मैं चाहती थी कि मेरे झड़ने के साथ ही उनके लंड का रस मेरी चूत को भर दे. मैने जब महसूस किया कि उनके लंड का सूपड़ा फूल गया है तो मैं समझ गई कि मेरी चूत के अंदर जल्दी ही उनके लंड रस की बौछार होने वाली है.

“आआअहह ……. ऊऊहह… मेरा होने वाला है डार्लिंगगगगग…………….. मैं तो गई जानुउऊुुउउ………. ” मैं तो जैसे चिल्ला ही पड़ी.

मुझे पता है कि हमेशा ही, चोद्ते हुए उनके लंड से इतना पानी निकलता है कि मेरी चूत लबालब भर जाती है. अचानक, उनका बदन आकड़ा, उनकी गंद उपर हुई, उनका लंड मेरी चूत मे अंदर तक घुसा. मैं तो मज़े के मारे चिल्ला ही पड़ी जब उनके लंड ने मेरी चूत की सबसे गहरी जगह को च्छुआ और मैं बहुत ज़ोर से एक बार फिर से झाड़ गई. उनका लंड अपने गरमा गरम लंड रस की धार पे धार मेरी चूत की गहराइयों मे छोड़ने लगा. मैं एक बार फिर उनसे चुद्वाने का वही मज़ा ले रही थी जो मैने हमेशा लिया है. उन्होने मुझे कस कर पकड़ा और मुझे बेशुमार चुंबन देने लगे.

सच मे, मेरे पति बहुत अच्छे प्रेमी, मर्दाना चुदाई के चोदु और मेरा बहुत ध्यान रखने वाले इंसान है. मैं सचमुच बहुत भाग्यशाली हूँ. मैं जानती थी कि हमारी छुट्टियों के दौरान, आने वाले दो दिनो मे इस तरह की मज़ेदार, शानदार और जोरदार चुदाई कई बार होने वाली है.

हम दोनो, नंगे ही, साथ साथ बाथरूम गये और हमने गरम पानी से नहा कर हमारे लंबे सफ़र और यहाँ पर पहुँचते ही जोरदार चुदाई की थकान मिटाई.

नहाने के बाद, मेरे पति हमारे खाने के लिए कुछ लाने बाज़ार गये और मैं मैं अपने सेक्सी बदन पर, बिना ब्रा और चड्डी पहने, केवल एक सेक्सी और पारदर्शी गाउन पहने, उनके आने का इंतज़ार करने लगी.

बाहर कार की आवाज़ सुन कर मैने खिड़की से देखा तो मेरे पति कार से उतर रहे थे. मैं जल्दी से दरवाजा खोलने दौड़ी. बाहर ठंडी हवाएँ चल रही थी लेकिन बंगले के अंदर ठंड नही लग रही थी. मेरे पति अपने हाथों मे बहुत सारे खाने के पॅकेट्स ले कर कार से बाहर आए.
 
हमने अपना रात का खाना खूबसूरती से सजे बेड रूम मे खाया. खाना खा कर हम दोनो हमेशा की तरह, अपन बदन को कपड़ों की क़ैद से आज़ाद किया और नंगे हो कर गरम कंबल मे घुस गये. आप की जानकारी के लिए बता दूं कि मुझे याद नही है कि पिच्छली बार कब हम रात को बिस्तर मे कोई कपड़ा पहने सोए थे. लंबे सफ़र की वजह से और यहाँ पहुँचते ही जोरदार चुदाई की वजह से हम दोनो ही थके हुए थे और एक दूसरे के नंगे बदन को बाहों मे समाए ना जाने कब बातें करते करते हमारी आँख लग गई.

सुबह जब मेरी आँख खुली तो मैने देखा कि मेरे पति अभी भी गहरी नींद मे है और उनके होठों पर मुस्कराहट है. शायद वो कोई सुहाना सपना देख रहे थे. सपने से मुझे याद आया कि मैने भी रात को कितना सुहाना सपना देखा था. मेरे सपने को याद करते हुए मैं भी मुस्करा पड़ी. मैं बिस्तर से बाहर आई, ठंड से बचने के लिए अपना गाउन पहना, वरना मुझे नंगा रहने मे कोई शर्म नही है. मैने रसोई मे देखा कि चाइ बनाने का पूरा समान मौजूद है तो मैने चाइ बनानी शुरू की और रात को देखे सपने मे फिर से एक बार खो गई. क्या शानदार सपना देखा था मैने. मैं उसको फिर एक बार महसूस करना चाहती थी इसलिए मैं पूरी तरह अपने सपने मे गुम हो गई.

मेरी आँख गर्मी लगने की वजह से खुल गई थी. मैने देखा की मेरा बदन पसीने से भीगा हुआ है. मेरी साँसें तेज चल रही है. मेरी चूत पूरी तरह से गीली थी और मेरी चूत का रस तो जैसे टपक टपक कर मेरी टाँगों के जोड़ को गीला कर चुका था. मेरी चुचियों के दोनो निप्पल्स तन कर खड़ी थी जैसे चुसवाने के लिए बेचैन थी. मैने जब अपने बदन से चादर हटाई तो ठंडी हवा का झोंका मेरे बदन से टकराया और मैं सिहर उठी.

ऐसा लग रहा था जैसे मैं बुखार मे तप रही थी. अपने अंदर की गर्मी को शांत करने का मेरे पास केवल एक ही रास्ता था. मैं अपने बिस्तर से बाहर आई और नंगी ही चलती हुई घर के पिच्छले दरवाजे की तरफ बढ़ी. मैने पिच्छला दरवाजा खोल कर बाहर कदम रखा. बाहर की ताज़ी और ठंडी हवा मेरे नंगे बदन से टकराई तो मुझे बहुत सुकून मिला. मेरी दोनो निप्पल और भी तन कर कड़क हो गई. ठंडी हवा का झोंका मेरे चारों होठों से टकराया. दो मेरे उपर के, मूह के होंठ और दो मेरे नीचे के चूत के होंठ. मैने अपनी दो उंगलियों की मदद से अपनी चूत के दोनो होंठ खोले ताकि बाहर की ठंडी हवा की ठंडक मेरी गीली चूत तक पहुँचे.

मेरे मूह से आह सी निकल गई जब बाहर की ठंडी हवा मेरी खुली हुई चूत के अन्द्रुनि भाग तक पहुँची. ऐसा लगा कि किसी की प्यारी सी जीभ मेरी चूत और मेरी चूत के दाने को चूस रही है. मैने अपनी उंगली से अपनी चूत के तने हुए दाने को सहलाया तो मेरा मज़ा और भी बढ़ गया. बाहर की ठंडी हवा मे मेरे सेक्सी बदन की गर्मी कम होने की बजाय और बढ़ गई. मैने अपनी आँखें बंद की तो ख़यालों मे देखा की मेरे पति वहाँ मौजूद है, मुझे देख रहे है, मुझे च्छू रहे है, तो मेरी चुदाई की चाहत और भी ज़ोर मारने लगी. मुझे लग रहा था जैसे मेरे पति के कोमल होंठ मेरी फुददी के कोमल के कोमल और गीले होंठों पर है. उनकी जीभ मेरे तने हुए चूत के दाने से खिलवाड़ कर रही है. उन्होने जब अपनी उंगली मेरी गरमा गरम चूत मे डाली तो मैं सिहर उठी. उनकी उंगली मेरी चूत मे बहुत ही सेक्सी अंदाज़ मे फिरने लगी. मेरे घुटने अपने आप ही मुड़ने लगे तो उन्होने जैसे मुझे थाम लिया.
 
मेरा अपना एक हाथ मेरी अपनी तनी हुई निप्पल पर पहुँच कर उसके साथ खेलने लगा तो मेरा दूसरा हाथ मेरी टपकती चूत तक पहुँच गया. मुझे लग रहा था जैसे मेरे पति ने मेरी बहती चूत से अपनी उंगली निकाल कर अपनी जीभ मेरी फुद्दि मे घुसा दी है. वो मेरी चूत को अपनी जीभ से चोद रहे थे जैसे उनकी जीभ लंड मे बदल गई हो.

मेरा बदन अकड़ने लगा और मैं जल्दी ही अपने झड़ने के करीब पहुँच गई. मेरा मज़ा बढ़ता ही जा रहा था और मैं घर के पिच्छवाड़े मे, नंगे फर्श पर, अपना नंगा पिच्छवाड़ा टिका कर बैठ गई. मेरी साँसे बहुत तेज़ी से चलने लगी. तभी मैने महसूस किया कि मेरे पति वहाँ नही है. ये तो सिर्फ़ मेरा ख़याल था. मेरी अपनी उंगली मेरी चूत मे घुसी हुई है और मैं खुद ही अपनी उंगली से अपनी चूत को चोद रही हूँ. अचानक, एक झटके के साथ मैं झाड़ गई. मेरी सारी गर्मी निकल चुकी थी और अब मुझे बाहर के ठंडे मौसम मे ठंड लगने लगी थी. मैं घर के अंदर आने को मूडी………..

और उबलते पानी की आवाज़ से मेरा ध्यान भंग हुआ. मैं अपने सपने की दुनिया से बाहर आई. हे भगवान…… कितना प्यारा और कितना सेक्सी चुड़क्कड़ सपना था. इतना सेक्सी सपना था कि उस वक़्त चाई बनाते हुए, सुबह तक मैं गरम थी और मेरी चूत तो जैसे टपक रही थी.

मैं अपने दोनो हाथों मे चाइ के दो कप लेकर बेड रूम मे पहुँची. मैने देखा कि मेरे पति जागे हुए है. शायद मेरी सुबह की चाइ बनाने से हुई हलचल से उनकी आँख खुल गई थी. हम एक दूसरे को प्यार से देखते हुए चाइ पीने लगे. मैं जानती थी कि चाइ ख़तम होते ही हमारे बीच क्या होने वाला है, क्यों कि रात को थकान की वजह से हमारे बीच चुदाई नही हुई थी. और मैने जो सोचा था वो शुरू हो चुका था. मैं तो अपना पारदर्शी गाउन पहने थी मगर वो पूरी तरह नंगे थे जैसे रात को सोए थे. मैं खड़ी थी, मेरे पिछे दीवार थी और आगे मेरे नंगे चुड़क्कड़ पति. अपनी जांघों पर उनके खड़े लंड की चुभन महसूस करते ही मैं समझ गई थी कि वो चुदाई के लिए पूरी तरह तय्यार है. उन्होने मेरी गर्दन के दोनो तरफ चुंबन किया और मेरे सेक्सी बदन की सुगंध ली. मेरे बदन की खुश्बू उन्हे बहुत पसंद है. उन्होने मेरे बदन से गाउन उतार कर मुझे भी अपनी तरह नंगा कर दिया. उनके नरम होठों को अपने बदन पर पा कर मैं सिहर उठी. कई बार उन्होने अपने मूह से मेरी चुचियाँ और और मेरी तनी हुई निप्पल्स को चूसा. थोड़ी ही देर मे वो नीचे झुके और अपने घुटनो के बल बैठ गये तो मेरी रसीली चूत उनके मूह के सामने थी.

मैने अपनी टांगे चौड़ी की ताकि उनको अपनी टपकती चूत के रस का स्वाद दे सकूँ. मैं तो रात के अपने सेक्सी सपने और सुबह उस को याद करके पहले से ही काफ़ी गरम थी. मेरी चूत को रस से लबालब भरा पा कर उन्होने तुरंत ही चूत का रस पान किया. वो मेरी चूत इस तरह चूस रहे थे कि पहले सी गरम मैं जल्दी ही झड़ने के लिए तय्यार थी. मेरे मूह से आनंद की वजह से ज़ोर ज़ोर से सेक्सी आवाज़ें निकलने लगी. उनकी जीभ मेरी रसीली फुद्दि मे घूम रही थी. फिर वो खड़े हो गये और मेरे होठों पर अपने होंठ रखे तो मैने खुद की चूत से निकले रस का स्वाद उनके होठों पर से लिया. मैने चुदाई की चाह मे अपना सेक्सी नंगा बदन उनके सेक्सी नंगे बदन से ज़ोर ज़ोर से रगड़ा. एक दूसरे से लिपटे हुए हम बिस्तर की तरफ बढ़े. मैं अपनी पीठ के बल, सीधी लेटी हुई उनके तन्तनाते हुए, मोटे और लंबे, चुदाई के औज़ार, उनके लौडे की तरफ देखने लगी. दिन की रोशनी मे मैने उनके लौडे के मूह, सूपदे को गीला देखा तो मेरा मूह उनका लंड चूसने को मचल उठा.

 
जब तक वो बिस्तर पर चढ़े, मैं उनकी तरफ ही देख रही थी. वो मेरी बगल मे लेट गये तो मैं करवट ले कर उनके उपर सवार हो गई. उनका खड़ा हुआ लंड मेरी टाँगों के बीच मे था और मैने उनकी गर्दन से अपने चुंबन की शुरुआत की और उनके सेक्सी नंगे बदन को उपर से चूमते हुए नीचे आने लगी. जल्दी ही मेरा मूह उनके तने हुए लौडे पर पहुँचा तो वो मेरे मूह की पकड़ मे था. मेरी नंगी और सेक्सी चुचियाँ उनके नंगे बदन से रगड़ खा रही थी. मैने उनके लंड को अपने मूह की पकड़ से आज़ाद किया और उनके लंड के मूह पर एक चुंबन दिया. उनके लौडे को हाथ मे पकड़ कर मैं बैठी और उनके डंडे को गीली और गरम चूत के दरवाजे पर लगाया. जब मैने अपनी गंद नीचे की तो उनका लंबा लंड फिसलता हुआ मेरी चूत मे घुसने लगा. मैं उनके लंड को अपनी चूत मे लिए, अपनी गंद को गोल गोल, उपर नीचे करने लगी और इस तरह उनका लंड मेरी चूत मे उतरने लगा.

उन्होने अपने दोनो हाथ बढ़ा कर मेरी दोनो चुचियों को पकड़ कर ज़ोर से दबाया. अब तक मेरी चूत मे उनका लंड पूरी तरह घुस चुका था और मैं उनके लंड पर बैठी अपनी गंद धीरे धीरे हिलाने लगी. मैं चाहती थी कि वक़्त वहीं रुक जाए.

हमारी साँसें तेज होने लगी और उस ठंडे मौसम मे भी हमे गर्मी लगने लगी. हम दोनो की गंद उपर नीचे ……. उपर नीचे हिल रही थी और साथ ही साथ उनका चुदाई का डंडा मेरी चूत मे आ जा रहा था. मैं तो जल्दी ही झाड़ भी चुकी थी परंतु उनके लंड का पानी उनके बदन मे बाहर आने का इंतज़ार कर रहा था. मेरे झड़ने की वजह से कुछ देर मेरी चुदाई बंद हुई पर जल्दी ही फिर से शुरू हो गई. इस बार तेज़ी से, ज़ोर ज़ोर से. मैं अपनी गंद हवा मे उठाकर, हाथ उनकी छाती पर रख कर, उनके लंड पर बैठ कर चुद्वा रही थी. और वो नीचे से, अपनी गंद उपर नीचे करके तेज़ी से मेरी चुत चोद रहे थे. उनका लॉडा इतनी तेज़ी से मेरी चूत मे आ जा रहा था जैसे कोई मशीन हो. चुदाई की सेक्सी आवाज़ें लंड और चूत के मिलन से निकल रही थी… फ़चा फॅक…… फ़चा फॅक…… और हमारे मूह से निकलती सेक्सी आवाज़ें, दोनो मिल कर माहौल को और भी सेक्सी बना रही थी.

मैं अपने झड़ने की मंज़िल पर फिर एक बार पहुँच रही थी और वो भी अपने लंड से प्यार के पानी की बरसात करने से ज़्यादा दूर नही थे. चुदाई अपनी चरम सीमा पर थी और अचानक ही मेरी चूत ने झाड़ कर जवाब दे दिया. उनके मूह से भी एक सेक्सी चीख निकली और हम लिपट गये. उनके लंड ने अपना प्रेम रस मेरी चूत मे बरसाना शुरू कर दिया था. उनका लंड रस मेरी चूत के सब से अन्द्रुनि हिस्से से टकरा कर, मेरी चूत के रस मे घुल मिल कर मेरी चूत से बाहर टपकने लगा.

उनके लंड के नीचे की गोलियों की थैली गीली हो चुकी थी पर मेरी चूत जो थी कि बहती ही जा रही थी. उन्होने मुझे पकड़ कर अपने उपर खींच लिया और हम दोनो के होंठ आपस मे मिल गये, जुड़ गये. उनकी जीभ मेरे मूह मे नाच रही थी और उनका लंड मेरी चूत मे नाच रहा था.

चुंबन ख़तम होने के बाद मैं उनके बदन से नीचे उतरी तो उनका नरम पड़ता लॉडा मेरी चूत से बाहर निकल गया. मेरी तरफ घूम कर मेरे पति ने मुझे अपनी बाहों मे जाकड़ लिया. उनकी बाहों मे मैं अपने आप को सब से सुरक्षित, सब से अधिक भाग्यशाली समझ रही थी.

 
हम ने साथ साथ स्नान किया और सुबह का नाश्ता करने के बाद घूमने निकल गये. मौसम बहुत ही खूबसूरत, सुहाना और ठंडा था. अपने प्यारे पाठकों के सामने मैं स्वीकार करती हूँ कि हम दोनो ने बहुत कोशिश की के कम से कम एक बार, शिमला के खुले आसमान के नीचे चुदाई करने की, मगर कोई मौका नही मिला. हर जगह घूमने वालों की काफ़ी भीड़ थी. कहीं भी, थोड़ा सा भी अकेलापन, एकांत नही मिला. खैर, हमने सोचा, अगली बार ही सही.

रात को बाहर ही खाना खाने के बाद हम बंगले मे वापस आए. काफ़ी रात हो चुकी थी इसलिए हमने अपने अपने कपड़े उतारे और नंगे हो कर बिस्तर मे घुस गये. चुदाई से तो हम ज़्यादा देर दूर रह नही सकते थे. तो उस रात, बिना समय बर्बाद किए, उन्होने मेरी चूत मे अपना लंड घुसाया और सीधे मुझे चोद्ना शुरू कर दिया. कहने को तो ये फटा फट चुदाई थी और उन्होने जो एक बार मुझे चोद्ना शुरू किया तो फिर अपने लौडे से पानी निकलने तक मुझे लगातार चोद्ते रहे. और उस बीच मैं चुद्वाती हुई तीन बार झाड़ चुकी थी. चुदाई ख़तम होने के बाद कब हमको नींद आ गई, ये पता ही नही चला.

अपने नंगे जिस्म पर उनके होठों का चुंबन महसूस करते ही मेरी आँख खुल गई. उनके चुंबन से मेरे रोएँ खड़े हो गये. मेरी नंगी चुचियों की मालिश उनके हाथों से हुई तो मुझे बहुत मज़ा आया. मेरा बदन गरम हो चुका था और बदन की गर्मी मेरी चूत से निकलने लगी जिसने मेरे पैरों के जोड़ को गीला कर दिया था. उनका हाथ मेरी गीली चूत पर पहुँचा तो जैसे मेरी चूत बरसने लगी. चुदाई का समय हो चुका था.

वो नीचे हुए और मेरी चूत को चूमने लगे.

” बोलो जूली ! तुम कितनी देर चाहती हो की मैं तुम्हारी चूत चूमता रहूं? ” वो धीरे से फुसफुसाए.

” डार्लिंग ! चूमते रहो……. चाट ते रहो….. चूस्ते रहो. ” मैं बोली.

उन्होने अब शरारत करनी शुरू कर दी. मुझे सताने मे उन्हे बहुत मज़ा आता है. मैं उनका मूह अपनी चूत पर चाहती थी और वो अपना मूह वहाँ से हटा कर मेरे पेट को, मेरी नाभि को चूमने लगे. मुझे चूमते हुए वो नीचे की बजाय उपर की ओर बढ़ रहे थे. अब तक वो मेरी चुचियों तक पहुँच चुके थे. मेरी दोनो निप्पल खड़ी हो कर उनको चूसने का निमंत्रण देने लगी. उन्होने अपनी जीभ मेरी तनी हुई एक निप्पल के चारों तरफ घुमाई और उसे मूह मे ले कर किसी बच्चे की तरह चूसने लगे. काफ़ी देर तक एक के बाद मेरी दूसरी निप्पल चूसने के बाद उन्होने अपना सिर उठाया और बोले -

“जूली ! तुम ने अभी तक नही बताया कि तुम अपनी चूत चुसवाने के लिए कितनी बेचैन हो.”

मैं बोली – ” चूसो मेरी चूत को डार्लिंग! मैं तो मरी जा रही हूँ अपनी चूत चुसवाने के लिए. मैं तो चाहती हूँ कि तुम्हारी जादूगर जीभ मेरी चूत से कभी बाहर ही ना निकले.”

मेरी चाहत मेरे मूह से सुन कर उनका ध्यान फिर से मेरी चूत पर गया और उन्होने नीचे हो कर अपनी जीभ मेरी रसीली फुददी के अंदर डाल दी. उनकी जादूगर जीभ मेरी चूत के अंदर सेक्सी तरीके से गोल गोल घूमने लगी. मेरे मूह से आनंद भरी आवाज़ें निकलने लगी और वो मेरी चूत चूस्ते जा रहे थे, चाट ते जा रहे थे. मैं बार बार अपनी गंद आगे कर के अपनी चूत उनके मूह पर दबाने लगी. अब तो उनकी जीभ मेरी चूत के अंदर बाहर हो कर किसी लंड की तरह मेरी चूत को चोद्ने लगी. जितनी तेज़ी से उनकी जीभ मेरी चूत मे घूम रही थी, उतनी ही तेज़ी से मेरी चूत से और रस निकलने लगा.

और जब मैं झड़ने ही वाली थी, तो अचानक ही उन्होने अपनी जीभ मेरी चूत से बाहर निकाल ली. मैने अपनी चूत को उनके मूह पर दबाने की पूरी कोशिश की पर वो मेरी चूत की पहुँच से बाहर हो गये. लगता था कि आज वो मुझे सताने के मूड मे थे. पर मैं भी कहाँ उनका पीछा चुद्वाने के पहले छ्चोड़ने वाली थी.

 
मैं उनके उपर सो गई और उनके होठों पर अपने प्यासे होंठ रख कर अपनी जीभ उनके मूह मे घुसा दी. वो समझते थे कि मैं चुद्वाने के लिए कितनी बेचैन हूँ, और मुझे चोद्ने के लिए वो भी तो बेचैन थे. मैने चुंबन पूरा किया और उनके उपर ही, उनके तन तनाते हुए लौडे के उपर बैठ गई. फिर मैने अपनी चूत उपर कर के, उनके लंड को पकड़ कर, अपनी चूत पर सही जगह लगाया और नीचे ज़ोर लगाया. उनके लंड का मूह जब मेरी चूत मे घुसा तो मैने भी उनको चिडाने के लिए उपर हो कर उनका लंड वापस अपनी चूत से निकाल दिया. अब उनके लंड का मूह मेरी चूत के मूह पर था. वो जब नीचे से, अपनी गंद उपर कर के, अपना लंड मेरी चूत मे घुसाने की कोशिश करते तो मैं अपनी गंद और उपर कर लेती जिस से उनका लॉडा मेरी टपकती चूत मे नही घुस पाता. वो भी समझ गये कि मैं उन से खेल रही हूँ. जब वो शांत हो कर, अपनी गंद बिस्तर पर टिका कर मेरी तरफ देख रहे थे तो मैने अचानक ही नीचे की तरफ एक जोरदार झटका दिया तो उनका लंबा लंड आधे से ज़्यादा मेरी चूत मे उतर गया.

मेरी गीली चूत मे उनका गरम लॉडा बड़े आराम से एक दो धक्कों मे ही घुस गया. उनको भी मेरे खेल मे बहुत मज़ा आया. मैं उनके लंड पर बैठी उपर नीचे नाचने लगी. मैं लगातार अपनी गंद उपर नीचे करते उनके लंड को अपनी फुददी मे अंदर बाहर करने लगी. उन्होने तब तक मेरी दोनो चुचियों को पकड़ लिया था और उनके लंड पर मेरी चूत के हर धक्के के साथ वो मेरी चुचियों को दबाने और मसल्ने लगे. मेरी दोनो निप्पल तन कर खड़ी थी. उनके प्यारे लंड का मेरी रसीली चूत मे आना जाना हम दोनो को मदहोश कर रहा था. मैने चोद्ने की रफ़्तार बढ़ाई और वो भी नीचे से मेरा चुदाई मे पूरा सहयोग कर रहे थे.

कुछ देर बाद वो मुझे पकड़ कर बैठे हुए थे. मैने अपने हाथ उनकी गर्दन पर रख कर बॅलेन्स बनाया और वो मेरी गंद पकड़ कर मुझे और भी ज़ोर से चोद्ने लगे. उनका लॉडा मेरी फुददी मे काफ़ी अंदर तक घुसता हुआ मुझे चोद रहा था. मैं कुछ ही देर मे झाड़ गई मगर इस से उनकी चुदाई पर कोई असर नही हुआ. वो तो बस मुझे चोद्ते जा रहे थे…….. चोद्ते जा रहे थे……… ज़ोर ज़ोर से………. जल्दी जल्दी……. फाका फक…… फाका फक……. फाका फक.

वो मुझे तूफ़ानी रफ़्तार से चोद रहे थे और मैं उनसे चुद्वाती हुई एक बार फिर से झड़ने के करीब थी और लग रहा था जैसे इस बार वो भी मेरे साथ झाड़ जाएँगे क्यों कि मैने अपनी चूत मे उनके लंड का सूपड़ा फूलता हुआ महसूस किया था और उनके लौडे को और भी ज़्यादा सख़्त महसूस किया था. उनका चोद्ना और मेरा चुद्वाना लगातार जारी था.

मैं झड़ी और बहुत ज़ोर से झड़ी. उनके लंड ने भी अपना लंड रस मेरी चूत मे छोड़ना शुरू किया. उस ठंडे मौसम मे भी हमारे बदन पर पसीना था. उनका लंड रह रह कर, नाचता हुआ, अपने दूध के रंग का पानी मेरी चूत मे बरसाने लगा जो धीरे धीरे मेरी चूत के रस से मिल कर मेरी चूत से बाहर आने लगा.

मैं उनका लंड अपनी चूत मे लिए उनकी गोदी मे तब तक बैठी रही जब तक कि उनका लंड नरम पड़ना शुरू नही हुआ. उनका लंड मुलायम होने लगा तो अपने आप ही मेरी चूत से बाहर खिसकने लगा. मैं उनके लंड की सवारी छ्चोड़ कर बिस्तर पर लेट गई. मेरी चूत से उनके लंड के निकलने के साथ ही उनके लंड से निकल कर मेरी चूत मे गया उनके लंड का ढेर सारा पानी मेरी चूत से बाहर निकल आया.
 
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