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Guest
मैने अपने स्कर्ट के अंदर हाथ डाल कर अपनी चड्डी को उतारा तो पाया कि मेरी चड्डी मेरे चूत रस से गीली हो चुकी थी. मैने अपनी चड्डी को अपनी नाक के पास करके अपने चूत रस की सुगंध को सूँघा. बहुत सेक्सी सुघन्ध है मेरे चूत रस की. मैं सोच रही थी कि उस छोटी सी जगह मे अपने काम को किस तरह अंजाम दिया जाए. मैने दरवाजे के पीछे लगे हुक पर अपनी चड्डी टांगी और टाय्लेट सीट पर बैठी. अपनी स्कर्ट को गंदी होने से बचाने के लिए उसको अपनी कमर तक उठा कर दबा लिया. फिर मैने महसूस किया की टाय्लेट सीट पर बैठे बैठे मैं अपना काम ठीक से नही कर पाउन्गि. मैं जितना हो सकता था उतनी आगे हो कर बैठी. तभी, बगल के स्टॉल मे एक औरत आई. मैं स्थिर हो गई. नीचे से उसके पैर दिख रहे थे. मैने उसकी चड्डी नीचे करने की सरसराहट सुनी और साफ साफ उसके मूतने की आवाज़ सुनी. मुझे और गरम होने के लिए इतना काफ़ी था. मैं सोच रही थी कि बाहर इतनी आवाज़ें होने के बावजूद जब मैने बगल के स्टॉल मे उस औरत के मूतने की आवाज़ सुन ली तो मेरे द्वारा भी किसी भी प्रकार की आवाज़ भी सुनी जा सकती है.
लेकिन, कुछ भी हो, मुझे मेरा वो काम तो करना ही था जिसके लिए मैं वहाँ आई थी. आगे खिसक कर बैठने की वजह से मुझे कुछ परेशानी हो रही थी तो मैने अपना एक पैर सामने दरवाजे पर टिकाया. पैर मे सॅंडल होने की वजह से लकड़ी के दरवाजे पर पैर टीकाने से आवाज़ हुई. मैने महसूस किया कि बगल के स्टॉल मे मूतने आई औरत की हलचल बंद हो गई है. शायद वो मेरे स्टॉल मे क्या हो रहा है, ये सुन ने की कोशिश कर रही है. भाड़ मे जाए वो, सुनती है तो सुनती रहे, मैने अपने मन मे सोचा. मैने पूरा ध्यान अपनी चंचल, चिकनी चूत पर लगाया और अपनी रसीली चूत की दरार मे अपनी उंगली फिराई. मेरी चूत तो जैसे टपक रही थी. मैने बगल के स्टॉल से टाय्लेट पेपर खींचे जाने की आवाज़ सुनी और फिर उसके रगडे जाने की आवाज़ भी सुनी. शायद वो औरत टाय्लेट पेपर अपनी चूत पर रगड़ कर अपनी चूत को सॉफ कर रही थी.
अचानक ही, जब मेरी उंगली मेरी चूत के तने हुए गरम दाने से टकराई नो ना चाहते हुए भी मेरे मुँह से आह की आवाज़ निकल गई. बगल के स्टॉल से टाय्लेट पेपर को चूत पर रगड़ने की आवाज़ आनी अचानक रुक गई. मैने अपने मन मे सोचा कि जो होगा देखा जाएगा. किसी को पता चलता है तो चलता रहे. मुझे तो अपना काम पूरा करना था. अपना चॅलॅंज पूरा करना था. खुद ही अपनी चूत मसल कर, उंगली डाल कर हस्त मैथून करते हुए मुझे झड़ना था. आवाज़ होती है तो होती रहे.
मैं फिर अपने काम मे मगन हो गई. अपनी रसीली मस्तानी चूत मे मेरी उंगली घूमने लगी और ना चाहते हुए भी मेरे मुँह से आनंद की धीमी धीमी आवाज़ें निकलने लगी. मेरे चूत रस की सुगंध अब अपने आप ही मेरी नाक तक पहुँच रही थी. मेरी चूत काफ़ी गीली होने की वजह से जब मेरी उंगली उसके अंदर बाहर हो रही थी तो उस से भी कुछ आवाज़ होने लगी. मैं काफ़ी गरम हो चुकी थी, मेरी आँखें बंद हुई जा रही थी और मुझे लगा कि मैं अपने झड़ने के काफ़ी करीब हूँ. मेरी साँसे तेज तेज चलने लगी और मेरा बदन झड़ने से पहले अकड़ने लगा. मेरे हाथ की रफ़्तार मेरी चूत पर और भी बढ़ गई. दराज पर मेरे पैर के टकराने से दरवाजा हिलने लगा था और अब कुछ भी मेरे बस मे नही था. बाहर से आने वाली आवाज़ों मे अचानक कमी आई और हे भगवान! बाहर खड़ी औरतें, लड़कियाँ मुझे सुन रही थी और शायद उनको अंदाज़ा हो गया था कि अंदर मैं क्या कर रही हूँ. लेकिन इन सब की परवाह करने के लिए अब काफ़ी देर हो चुकी थी और मैं ऐसी हालत मे थी जहाँ से लौटना या वहीं रुकना मेरे बस मे नही था. मैं अपने झड़ने की चरम सीमा पर थी और अब कुछ नही हो सकता था. मुझे आगे ही जाना था, पीछे वापस आना या रुकना मुमकिन नहीं था.
और अचानक ही, जैसे कि मैं जानती थी, मैं एक झटके के साथ ज़ोर से झाड़ गई और उत्तेजना के मारे मेरा पैर ज़ोर से दरवाजे से टकराया तो दरवेाजा हिल गया.
मैं तो ऐसे झड़ी थी कि रुकने का नाम नही ले रही थी. मैं जब तक हो सका, अपनी गीली चूत मसल्ति रही, उंगली करती रही. पता नही मैने अपनी चूत मे उंगली करते वक़्त उत्तेजना मे क्या क्या किया, कितनी आवाज़ें निकाली, मुझे कुछ याद नही था. बाहर एकदम खामोशी छाई थी. क्या सब औरतें और लड़कियाँ चली गई है?
तभी, मैने महसूस किया कि बाहर का दरवाजा खुला और कुछ लड़कियाँ बातें करती हुई वॉश रूम मे आई और अचानक ही चुप हो गई. हे भगवान! इसका मतलब सब की सब औरतें और लड़कियाँ अंदर ही है और मेरे बाहर आने का इंतज़ार कर रही है.
लेकिन, कुछ भी हो, मुझे मेरा वो काम तो करना ही था जिसके लिए मैं वहाँ आई थी. आगे खिसक कर बैठने की वजह से मुझे कुछ परेशानी हो रही थी तो मैने अपना एक पैर सामने दरवाजे पर टिकाया. पैर मे सॅंडल होने की वजह से लकड़ी के दरवाजे पर पैर टीकाने से आवाज़ हुई. मैने महसूस किया कि बगल के स्टॉल मे मूतने आई औरत की हलचल बंद हो गई है. शायद वो मेरे स्टॉल मे क्या हो रहा है, ये सुन ने की कोशिश कर रही है. भाड़ मे जाए वो, सुनती है तो सुनती रहे, मैने अपने मन मे सोचा. मैने पूरा ध्यान अपनी चंचल, चिकनी चूत पर लगाया और अपनी रसीली चूत की दरार मे अपनी उंगली फिराई. मेरी चूत तो जैसे टपक रही थी. मैने बगल के स्टॉल से टाय्लेट पेपर खींचे जाने की आवाज़ सुनी और फिर उसके रगडे जाने की आवाज़ भी सुनी. शायद वो औरत टाय्लेट पेपर अपनी चूत पर रगड़ कर अपनी चूत को सॉफ कर रही थी.
अचानक ही, जब मेरी उंगली मेरी चूत के तने हुए गरम दाने से टकराई नो ना चाहते हुए भी मेरे मुँह से आह की आवाज़ निकल गई. बगल के स्टॉल से टाय्लेट पेपर को चूत पर रगड़ने की आवाज़ आनी अचानक रुक गई. मैने अपने मन मे सोचा कि जो होगा देखा जाएगा. किसी को पता चलता है तो चलता रहे. मुझे तो अपना काम पूरा करना था. अपना चॅलॅंज पूरा करना था. खुद ही अपनी चूत मसल कर, उंगली डाल कर हस्त मैथून करते हुए मुझे झड़ना था. आवाज़ होती है तो होती रहे.
मैं फिर अपने काम मे मगन हो गई. अपनी रसीली मस्तानी चूत मे मेरी उंगली घूमने लगी और ना चाहते हुए भी मेरे मुँह से आनंद की धीमी धीमी आवाज़ें निकलने लगी. मेरे चूत रस की सुगंध अब अपने आप ही मेरी नाक तक पहुँच रही थी. मेरी चूत काफ़ी गीली होने की वजह से जब मेरी उंगली उसके अंदर बाहर हो रही थी तो उस से भी कुछ आवाज़ होने लगी. मैं काफ़ी गरम हो चुकी थी, मेरी आँखें बंद हुई जा रही थी और मुझे लगा कि मैं अपने झड़ने के काफ़ी करीब हूँ. मेरी साँसे तेज तेज चलने लगी और मेरा बदन झड़ने से पहले अकड़ने लगा. मेरे हाथ की रफ़्तार मेरी चूत पर और भी बढ़ गई. दराज पर मेरे पैर के टकराने से दरवाजा हिलने लगा था और अब कुछ भी मेरे बस मे नही था. बाहर से आने वाली आवाज़ों मे अचानक कमी आई और हे भगवान! बाहर खड़ी औरतें, लड़कियाँ मुझे सुन रही थी और शायद उनको अंदाज़ा हो गया था कि अंदर मैं क्या कर रही हूँ. लेकिन इन सब की परवाह करने के लिए अब काफ़ी देर हो चुकी थी और मैं ऐसी हालत मे थी जहाँ से लौटना या वहीं रुकना मेरे बस मे नही था. मैं अपने झड़ने की चरम सीमा पर थी और अब कुछ नही हो सकता था. मुझे आगे ही जाना था, पीछे वापस आना या रुकना मुमकिन नहीं था.
और अचानक ही, जैसे कि मैं जानती थी, मैं एक झटके के साथ ज़ोर से झाड़ गई और उत्तेजना के मारे मेरा पैर ज़ोर से दरवाजे से टकराया तो दरवेाजा हिल गया.
मैं तो ऐसे झड़ी थी कि रुकने का नाम नही ले रही थी. मैं जब तक हो सका, अपनी गीली चूत मसल्ति रही, उंगली करती रही. पता नही मैने अपनी चूत मे उंगली करते वक़्त उत्तेजना मे क्या क्या किया, कितनी आवाज़ें निकाली, मुझे कुछ याद नही था. बाहर एकदम खामोशी छाई थी. क्या सब औरतें और लड़कियाँ चली गई है?
तभी, मैने महसूस किया कि बाहर का दरवाजा खुला और कुछ लड़कियाँ बातें करती हुई वॉश रूम मे आई और अचानक ही चुप हो गई. हे भगवान! इसका मतलब सब की सब औरतें और लड़कियाँ अंदर ही है और मेरे बाहर आने का इंतज़ार कर रही है.