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पतझड़ के बाद
सुहाग के सेज पर बैठी दुल्हन, आँखो में हजारों ख्याल सजाए, उमंगो भरा दिल लिए, कितनी चाहत और अरमानों के साथ अपने हमसफ़र का इंतजार करती है, मगर वह शायद पहली ऐसी दुल्हन है जो बेहद गुस्से में बैठी आने वाले पलों के बारे में सोच रही थी।
उसके पास बैठी उसकी दीदी की बेटी उसकी चुप्पी से उकता कर बाहर चली गयी। उसके बाहर जाते ही दरवाजा अंदर से बंद करने की आवाज आती है।
उसने बड़ी-बड़ी, काली, जादुई आँखो से सामने खड़े आदमी को देखा तो दिल के सिंघासन पर विराजमान हीरों जैसी पर्सनाल्टी वाले जीवनसाथी की तस्वीर चकनाचूर होकर बिखर गयी। उसकी हमेशा से ख्वाहिश थी कि उसका जीवनसाथी उसी की तरह बेहद ही खूबसूरत हो, पर आज उसका सपना चूर-चूर हो गया था।
मयंक ने अपनी परियों जैसी बेहद ही खूबसूरत दुल्हन को देखा। वो घूंघट हटाये उसे ही देख रही थी। उसकी आँखों में नयी दुल्हन की कोई शर्माहट नहीं थी। खिड़की से चाँद आज कुछ
उदास दिख रहा था। वो उसके पास बैठकर उसका हाथ अपने हाथों में पकड़ता है और चूम लेता है।
" जानती हो आज तुम चाँद से भी ज्यादा रौशन और खुबसूरत दिख रही हो।" मंयक ने उसकी ठोड़ी को पकड़ कर अपनी ओर मोड़ा तो वह गुस्से से 'और तुम चाँद पर गहन' सोचते हुए उसका हाथ झटक कर उठ खड़ी हुयी।
मंयक ने आश्चर्य से उसका ये अंदाज देखा।
"मुझे चेंज करना है, वाशरूम कहाँ है??" वो हाथ से दूसरी ओर इशारा कर
देता है। वह यह भी नहीं कह सका कि कुछ देर अभी रूक जाओ। मुझे तुम्हारे इस रूप को जी भर कर देख तो लेने दो।
आईने के सामने जाकर उसने सारा गहना-जेवर नोंच-नोंच कर फेंक दिया और अलमारी से सादा कॉटन का सूट निकाल कर बाथरूम में घुस गयी।
पूरे आधे घंटे बाद जब वो बाहर आयी तो मंयक को अपना इंतजार करते पायी। वो दिल में हैरान रह गयी। वो तो सोच रहीं थीं, मंयक कब का सो चुका होगा। पर वो सोये या जागे उसे क्या फर्क पड़ता है। सोचते हुए बेडरूम की तरफ देखा। कमरा काफी बड़ा था। वो अपना
तकिया लेकर सोफे पर सोने का सोच रहीं थीं।
बेड से तकिया उठाकर सोफे की तरफ मुड़ने ही वाली थी कि मंयक ने उसका इरादा भांपते हुए उसका नाजुक हाथ थाम कर अपने करीब बैठा लिया "तुम मेरे साथ ऐसा क्यो कर रही हो ज्योति?
"जब मैंने कहा था कि मुझे आपसे शादी नहीं करनी तो आपने मना क्यों नहीं किया? क्यों की ये शादी??" उसकी मासूमियत पर वो दाँत पीसते हुए बोली।
"मगर तुम्हें मुझसे शादी से क्या प्रोब्लेम
है?"
" वह मैं आपको बताना जरूरी नहीं समझती।" कहकर वहीं बेड पर सोते हुए चादर तान ली। अंदर से उसका दिल जल रहा था।
"ऊन्ह !! प्रोब्लेम इन्होंने शायद कभी आईने को नहीं देखा है।" पिछले दिनों को सोचते हुए उसकी आँखे भर आयी। दिल के आईने पर लगी खूबसूरत हमसफ़र का ख्वाब जो टूटा था।
वो एक खूबसूरत सी शाम थी जब वो अपने घर के लॉन में खरगोशों से खेल रहीं थीं। सब घर में कामों में व्यस्त थे,
पर उसे घर के कामों से कोई मतलब ना था। मेन गेट का दरवाजा खुला हुआ था जिससे मौका पाकर दोनों खरगोश भागने लगे, एक को तो उसने पकड़ लिया था। दूसरा छलांग लगाते हुये बाहर की ओर भाग गया था। वह उसे पकड़ने लपकी फिर ठिठक कर रूक गयी।
सामने एक ब्लैक हुन्डई गाड़ी वहां रूकी और उसमें से एक आदमी निकल कर खरगोश को पकड़ कर उसे थमाता है "आपका खरगोश।"
वो पलके झपकाना भूल जाती है उसे देखकर। उसने आजतक किसी मर्द को इतना खूबसूरत नहीं देखा था। वह
खरगोश थामते हुए उसे देखती रही। उसके होंठ आपस में चिपके ही रह गये, शुक्रिया तक ना कह सकी। वह आदमी वापस पलट कर मुस्कुराते हुए उसे गौर से देखकर चला जाता है।
वह खड़ी उसे देखती रही। यहां तक की जब बारिश की तेज बूंदो ने उसे एहसास दिलाया कि वह जा चुका है तो वह भींगती हुयी दौड़कर घर में घुस गयी। उन्हीं दिनों उसकी बड़ी दीदी अपने डाक्टर देवर का रिश्ता लेकर चली आयी।
अब भला इतना अच्छा लड़का कौन हाथ से जाने देता, सो चट मंगनी और
पट ब्याह की तैयारी शुरू हो गयी।
मंयक अच्छा तो था पर उसे वो ब्लैक हुन्डई वाला खूबसूरत आदमी चाहिए था। उसने घर में खूब हो-हंगामा मचाया पर किसी ने उसकी एक ना सुनी। वो दो भाई और तीन बहनें थी। सबकी शादियाँ हो चुकी थी, इसीलिए अब इसकी बारी थी। सबसे छोटी होने के कारण वह सबके आँखो का तारा थी पर इस शादी से इंकार करने में किसी ने उसका साथ नहीं दिया।
तंग आकर ज्योति ने मंयक को ही फोन लगा लिया और उसे शादी से इंकार करने कहा।
मंयक उसकी फरमाइश सुनकर अजीब उलझन में पड़ गया। कैसा अटपटा और फिल्मी सा लग रहा था। कितनी मुश्किल से सबको राजी किया था शादी कराने के लिए, अब जो इंकार करेगा तो भाई के ससुराल वालों से रिश्ता टूट जायेगा। फिर तो उसकी मोहिनी सी सूरत का वह दीवाना हो चुका था, पीछे हटना तो बहुत मुश्किल था।
वो इस उम्मीद, पर कि ज्योति खुद ही इंकार कर देगी, चुप रह गया, मगर ऐसा नहीं हुआ। दोनों एक-दूसरे के इंकार का इंतजार करते रह गये और शादी हो भी गयी जिसे मंयक ने दिल की गहराइयों से स्वीकार किया था और वह ये रिश्ता
निभाने के बिलकुल भी मूड मे नहीं थी।
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सुहाग के सेज पर बैठी दुल्हन, आँखो में हजारों ख्याल सजाए, उमंगो भरा दिल लिए, कितनी चाहत और अरमानों के साथ अपने हमसफ़र का इंतजार करती है, मगर वह शायद पहली ऐसी दुल्हन है जो बेहद गुस्से में बैठी आने वाले पलों के बारे में सोच रही थी।
उसके पास बैठी उसकी दीदी की बेटी उसकी चुप्पी से उकता कर बाहर चली गयी। उसके बाहर जाते ही दरवाजा अंदर से बंद करने की आवाज आती है।
उसने बड़ी-बड़ी, काली, जादुई आँखो से सामने खड़े आदमी को देखा तो दिल के सिंघासन पर विराजमान हीरों जैसी पर्सनाल्टी वाले जीवनसाथी की तस्वीर चकनाचूर होकर बिखर गयी। उसकी हमेशा से ख्वाहिश थी कि उसका जीवनसाथी उसी की तरह बेहद ही खूबसूरत हो, पर आज उसका सपना चूर-चूर हो गया था।
मयंक ने अपनी परियों जैसी बेहद ही खूबसूरत दुल्हन को देखा। वो घूंघट हटाये उसे ही देख रही थी। उसकी आँखों में नयी दुल्हन की कोई शर्माहट नहीं थी। खिड़की से चाँद आज कुछ
उदास दिख रहा था। वो उसके पास बैठकर उसका हाथ अपने हाथों में पकड़ता है और चूम लेता है।
" जानती हो आज तुम चाँद से भी ज्यादा रौशन और खुबसूरत दिख रही हो।" मंयक ने उसकी ठोड़ी को पकड़ कर अपनी ओर मोड़ा तो वह गुस्से से 'और तुम चाँद पर गहन' सोचते हुए उसका हाथ झटक कर उठ खड़ी हुयी।
मंयक ने आश्चर्य से उसका ये अंदाज देखा।
"मुझे चेंज करना है, वाशरूम कहाँ है??" वो हाथ से दूसरी ओर इशारा कर
देता है। वह यह भी नहीं कह सका कि कुछ देर अभी रूक जाओ। मुझे तुम्हारे इस रूप को जी भर कर देख तो लेने दो।
आईने के सामने जाकर उसने सारा गहना-जेवर नोंच-नोंच कर फेंक दिया और अलमारी से सादा कॉटन का सूट निकाल कर बाथरूम में घुस गयी।
पूरे आधे घंटे बाद जब वो बाहर आयी तो मंयक को अपना इंतजार करते पायी। वो दिल में हैरान रह गयी। वो तो सोच रहीं थीं, मंयक कब का सो चुका होगा। पर वो सोये या जागे उसे क्या फर्क पड़ता है। सोचते हुए बेडरूम की तरफ देखा। कमरा काफी बड़ा था। वो अपना
तकिया लेकर सोफे पर सोने का सोच रहीं थीं।
बेड से तकिया उठाकर सोफे की तरफ मुड़ने ही वाली थी कि मंयक ने उसका इरादा भांपते हुए उसका नाजुक हाथ थाम कर अपने करीब बैठा लिया "तुम मेरे साथ ऐसा क्यो कर रही हो ज्योति?
"जब मैंने कहा था कि मुझे आपसे शादी नहीं करनी तो आपने मना क्यों नहीं किया? क्यों की ये शादी??" उसकी मासूमियत पर वो दाँत पीसते हुए बोली।
"मगर तुम्हें मुझसे शादी से क्या प्रोब्लेम
है?"
" वह मैं आपको बताना जरूरी नहीं समझती।" कहकर वहीं बेड पर सोते हुए चादर तान ली। अंदर से उसका दिल जल रहा था।
"ऊन्ह !! प्रोब्लेम इन्होंने शायद कभी आईने को नहीं देखा है।" पिछले दिनों को सोचते हुए उसकी आँखे भर आयी। दिल के आईने पर लगी खूबसूरत हमसफ़र का ख्वाब जो टूटा था।
वो एक खूबसूरत सी शाम थी जब वो अपने घर के लॉन में खरगोशों से खेल रहीं थीं। सब घर में कामों में व्यस्त थे,
पर उसे घर के कामों से कोई मतलब ना था। मेन गेट का दरवाजा खुला हुआ था जिससे मौका पाकर दोनों खरगोश भागने लगे, एक को तो उसने पकड़ लिया था। दूसरा छलांग लगाते हुये बाहर की ओर भाग गया था। वह उसे पकड़ने लपकी फिर ठिठक कर रूक गयी।
सामने एक ब्लैक हुन्डई गाड़ी वहां रूकी और उसमें से एक आदमी निकल कर खरगोश को पकड़ कर उसे थमाता है "आपका खरगोश।"
वो पलके झपकाना भूल जाती है उसे देखकर। उसने आजतक किसी मर्द को इतना खूबसूरत नहीं देखा था। वह
खरगोश थामते हुए उसे देखती रही। उसके होंठ आपस में चिपके ही रह गये, शुक्रिया तक ना कह सकी। वह आदमी वापस पलट कर मुस्कुराते हुए उसे गौर से देखकर चला जाता है।
वह खड़ी उसे देखती रही। यहां तक की जब बारिश की तेज बूंदो ने उसे एहसास दिलाया कि वह जा चुका है तो वह भींगती हुयी दौड़कर घर में घुस गयी। उन्हीं दिनों उसकी बड़ी दीदी अपने डाक्टर देवर का रिश्ता लेकर चली आयी।
अब भला इतना अच्छा लड़का कौन हाथ से जाने देता, सो चट मंगनी और
पट ब्याह की तैयारी शुरू हो गयी।
मंयक अच्छा तो था पर उसे वो ब्लैक हुन्डई वाला खूबसूरत आदमी चाहिए था। उसने घर में खूब हो-हंगामा मचाया पर किसी ने उसकी एक ना सुनी। वो दो भाई और तीन बहनें थी। सबकी शादियाँ हो चुकी थी, इसीलिए अब इसकी बारी थी। सबसे छोटी होने के कारण वह सबके आँखो का तारा थी पर इस शादी से इंकार करने में किसी ने उसका साथ नहीं दिया।
तंग आकर ज्योति ने मंयक को ही फोन लगा लिया और उसे शादी से इंकार करने कहा।
मंयक उसकी फरमाइश सुनकर अजीब उलझन में पड़ गया। कैसा अटपटा और फिल्मी सा लग रहा था। कितनी मुश्किल से सबको राजी किया था शादी कराने के लिए, अब जो इंकार करेगा तो भाई के ससुराल वालों से रिश्ता टूट जायेगा। फिर तो उसकी मोहिनी सी सूरत का वह दीवाना हो चुका था, पीछे हटना तो बहुत मुश्किल था।
वो इस उम्मीद, पर कि ज्योति खुद ही इंकार कर देगी, चुप रह गया, मगर ऐसा नहीं हुआ। दोनों एक-दूसरे के इंकार का इंतजार करते रह गये और शादी हो भी गयी जिसे मंयक ने दिल की गहराइयों से स्वीकार किया था और वह ये रिश्ता
निभाने के बिलकुल भी मूड मे नहीं थी।
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