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परिवार का प्यार ( रिश्तो पर कालिख) complete

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मम्मी--रूही बेटा...ऐसे जंगल मे अकेले नही जाना चाहिए तुझे....पता नही कब कौनसी मुसीबत आजाए....

नीरा तब तक जाकर कॅंप मे से वो मॅप ले आई थी जंगल का....

उस मॅप को वही टॅबेल पर फैला दिया था उन सभी ने....

मम्मी--ये जंगल तो काफ़ी बड़ा लगता है....इस मॅप के अंदर अभी हम इस पॉइंट पर हैं....कल हम नदी की तरफ गये थे जो की इस तरफ है....इस मॅप मे एक वॉटरफॉल भी है जो यहाँ से लगभग नदी जितना ही दूर है....

शमा--मम्मी ये वॉटरफॉल के कुछ दूर उपर की तरफ सफेद सफेद बिल्डिंग जेसी चीज़ क्या बनी हुई है....

भाभी--ये शायद कोई. शिकार गाह है पुराने समय की जब राजा महराजा शिकार खेलने यहाँ आते थे तब शायद वो सब यही रुका करते होंगे....

दीक्षा--बड़ी मम्मी लेकिन आज हम सभी वॉटरफॉल पर ही चलेंगे....मैने कभी नही देखा अपनी आँखो के सामने इतना पानी गिरते हुए....

तभी मैं भी एक अंगड़ाई लेकर अपने कॅंप से बाहर आजाता हूँ....नीरा मेरे लिए एक मग मे कॉफी भर के मुझे दे देती है....

में--क्या बाते हो रही है मम्मी...

मम्मी--हम सब मॅप देख रहे थे किसी अच्छी जगह जाने के लिए....हमारी तो कुछ समझ मे आया नही तू ही बता कहाँ चलना है आज....

में--मैने आज राक क्लाइंबिंग करने का सोचा है....बोलो कौन कौन चलेगा....

भाभी के अलावा बस नीरा ने ही अपना हाथ उपर कर दिया लेकिन बाकी सब के चेहरे लटक गये....

में--क्या हुआ....मुँह क्यो लटक गये आप सभी के....

मम्मी--हमे नही करनी कोई राक क्लाइंबिंग वलिंबींग....हम सब झरने पर जाएँगे....तुम तीनो को अगर वहाँ जाना हो तो चले जाओ....

में--ये नीरा तो ढंग से चल भी नही पा रही अभी ये हमारे साथ क्या करेगी....

नीरा--मैं भी पहाड़ चढ़ूंगी इस में करना क्या है.....

में--पहाड़ ना तो तू चढ़ेगी और ना ही हमे चढ़ने देगी....इस लिए तू भी आज झरने के पानी से ही मस्ती मार....हम वापस आएँगे तब तुम सब को जाय्न कर लेंगे....

मम्मी--फिर ठीक है....हम सब वॉटरफॉल पर जा रहे है....और तुम दोनो वहाँ पत्थरो से अपना सिर फोड़ो....

 


उसके बाद हम सभी खाने पीने मे जुट जाते है....और खाने पीने के बाद मैं भाभी को कुछ ज़रूरी सामान साथ ले चलने के लिए कह देता हूँ...जैसे पानी फर्स्ट एड कुछ बिस्किट्स स्नकस एट्सेटरा.....

हम सभी एक ही दिशा मे आगे बढ़ने लग जाते है मस्ती करते हुए.....काफ़ी आगे चलने के बाद एक दौराहा आजाता है जिसका एक रास्ता झरने की तरफ जा रहा था और दूसरा रास्ता पहाड़ की तरफ....

हम सभी एक दूसरे से विदा लेते है लेकिन नीरा का मन मेरे साथ ही जाने का था लेकिन उसे मैं इशारा करके मना कर देता हूँ और हम बढ़ जाते है पहाड़ चढ़ने के लिए.....

में भाभी के साथ उस चट्टान तक पहुँच गया था....वो ज़्यादा बड़ी नही थी और ना ही ज़्यादा ख्टरनाक थी लेकिन राक क्लाइंबिंग के बारे मे सोचना ही अपने आप मे एक अड्वेंचर से कम नही है....

भाभी ने एक शॉर्ट्स फ्रोक पहना था जो काफ़ी ढीला था और मैने अपनी टी शर्ट उतार कर अपने बॅग मे डाल दी....

भाभी--इस पर चढ़ना तो काफ़ी आसान है जय....इसके लिए तो किसी रोप की भी ज़रूरत नही है....अग्र नीचे भी गीरेंगे तो ज़्यादा चोट नही लगेगी....

में--सही कहा आपने भाभी.... लेकिन बिना ट्रनिंग के ऐसी चट्टान पर चढ़ना भी मुश्किल होता है....चलो ट्राइ करते है....

उसके बाद हम दोनो उपेर चढ़ने लगे....भाभी मेरे उपर की तरफ थी और अचानक एक छोटा सा पत्थर मेरे कंधे पर आकर लगा तो मेरा ध्यान उपर की तरफ हुआ.....

भाभी की पैंटी दिखाई दे रही थी....उनकी मोटी मोटी जांघे जैसे दूध से धूलि हो....बिल्कुल चिकनी....

तभी भाभी ने नीचे देखते हुए कहा.....

भाभी--जय सुधर जा.....अपना ध्यान चढ़ने मे लगा इधर उधर नज़रें मत घुमा....

में उनकी बात सुनकर सकपका गया और अपना ध्यान फिर से चट्टान चढ़ने मे लगाने लगा....हम लोग काफ़ी उपर तक पहुँच गये थे....लेकिन आगे. बढ़ने का कोई रास्ता दिखाई नही दे रहा था....

भाभी--जय अब यहाँ से उपर कैसे जाए....मेरा तो हाथ नही पहुँचेगा वहाँ तक....तेरा पहुँच सकता है लेकिन क्या पता वो जगह हम दोनो का बोझ एक साथ उठा भी सकेगी या नही....

में--भाभी आप एक काम करो मेरे कंधे पर बैठ जाओ में आपको उसके बाद धीरे धीरे उपेर की तरफ पुल कर दूँगा....इस से आपके हाथ म वो चट्टान भी आज़एगी जो आप से दूर है....

भाभी--बात तो तेरी ठीक है....चल ऐसा करके देखते है....वरना मुझे यहाँ से नीचे ही उतरना पड़ेगा....

में--लेकिन मेरी एक शर्त है....जब तक आप उपर ना चढ़ जाओ मुझ से कुछ नही कहोगी....क्योकि आप छोटी छोटी बातो का भी ग़लत मतलब निकाल कर डाटने लग जाती हो....

भाभी--ओके बाबा नही डान्टुन्गी....अब जल्दी उपर आ ताकि मैं चढ़ सकूँ....

 


उसके बाद भाभी मेरे कंधे पर सवार हो गयी....

भाभी--अब मुझे थोड़ा सा उपर की तरफ पुश कर ताकि वो जगह मैं पकड़ सकूँ....

में--भाभी पुश करने के लिए मुझे आपकी बॅक पे हाथ लगाना होगा....

भाभी--ऊओहूओ जय बी प्रोफेशनल ऐसी जगह फँसने के बाद ये नही देखते कि हाथ लगाए या नही....अब जो करना है जल्दी कर.....

उसके बाद में अपना एक हाथ भाभी के हिप्स पर रख के उन्हे उपर करने लगता हूँ....मेरा हाथ सीधा उनकी पैंटी पर पहुँच गया था....मेरे हाथ का अंगूठा भाभी की चूत की दरार मे फस गया और मेरी चारो उंगलिया उनकी गान्ड की दरार मे...

मेरा हाथ लगते ही भाभी के मुँह से एक सिसकी निकल गयी....

मैने उन्हे उस जगह तक पुल कर दिया लेकिन उनकी चूत से हाथ हटते समय अंजाने मे ही उनकी चूत को रगड़ भी दिया था मैने.....

भाभी अब उपर पहुँच गई थी और मैं भी थोड़ी सी कोशिश करने के बाद उपर पहुँच गया.....उपर भी हरा भरा जंगल फैला हुआ था हर जगह.....लेकिन मुझे भाभी कही दिखाई नही दे रही थी.....अचानक एक पेड़ के पीछे छुपि हुई भाभी निकल कर बाहर आ गई और मेरे होंठो पर टूट पड़ी जैसे जनम जन्म की प्यासी हो.....

और अचानक ही मुझ से अलग होकर दूर खड़ी होगयि....उन्होने अपनी फ्रोक उतार कर वही पास मे पटक दी...

भाभी की आँखे जैसे एक मदहोशी मे डूबी हुई थी....वो मुझे अपने पास आने का इशारा करने लगी.....

में उनके हुस्न से सम्मोहित सा उनकी तरफ बढ़ने लगता हूँ.....लेकिन वो मेरी तरफ ना बढ़ कर और पीछे की तरफ सरकने लग जाती है....एक कदम मे आगे बढ़ाता तो वो भी एक कदम पीछे बढ़ा देती.....

उन्होने अपनी ब्रा और पैंटी भी मेरी आँखो के सामने ही उतार दी....में जैसे ही उनकी तरफ़ तेज़ी से बढ़ा वो हड़बड़ा कर पीछे पानी से भरे एक गड्ढे मे गिर गयी

भाभी पानी और जंगली घास से सन चुकी थी मैने आगे बढ़ कर उनके बदन से वो घास हटाई और उन्हे अपनी बाहों मे भर लिया....

भाभी--तुम्हे पता है जय....जिस दिन से तुम्हारे भैया मुझे छोड़ के गये है किस तरह खुद को कंट्रोल किया है मैने ये बता भी नही सकती तुम्हे....जीना दूभर हो गया था मेरा....लेकिन जब आज तुमने मुझे पुल किया तो वो सोए हुए तार फिर से बजने लगे....मैं खुद को बेशर्म होने से नही रोक पाई....

में--भाभी मैं समझ सकता हूँ आपका दर्द....में अपने परिवार की खुशी के लिए कुछ भी करूँगा....

भाभी--पहले मुझ से एक वादा करो....कि आज के बाद मुझे तुम सिर्फ़ नेहा कह के बुलाओगे....और मुझ से शादी भी करोगे....

में--नेहा शादी का फ़ैसला घर वालो पर छोड़ दो वैसे भी सभी चाहते है कि हमारी शादी हो जाए....

नेहा--तुम अपनी उमर से 6 साल बड़ी औरत से शादी कर के खुश रह पाओगे....

मेनी--नेहा मेरी खुशी हमारे परिवार की खुशी से जुड़ी है....अगर मेरा परिवार खुश रहेगा तो मैं भी खुश रहूँगा.....

 
में--नेहा शादी का फ़ैसला घर वालो पर छोड़ दो वैसे भी सभी चाहते है कि हमारी शादी हो जाए....

नेहा--तुम अपनी उमर से 6 साल बड़ी औरत से शादी कर के खुश रह पाओगे....

मेनी--नेहा मेरी खुशी हमारे परिवार की खुशी से जुड़ी है....अगर मेरा परिवार खुश रहेगा तो मैं भी खुश रहूँगा.....

इतना सुनकर नेहा ने मेरे होंठो को फिर से अपने काबू मे कर लिया हम दोनो के जिस्म एक दूसरे से पूरी तरह से गुथे हुए थे.....हम ऐसे ही एक दूसरे को प्यार करते करते उस पहाड़ी की तरफ पहुँच गये थे....

मैने नेहा को पलट कर पूरी ताक़त के साथ. उसकी चूत मे झटके लगाने लगा..

नेहा--ओह्ह्ह्ह जयईईइ और ज़ोर से.....और्र्रर जोर्र्र सीई....आआहह मर् गाइिईईई....

नेहा की चीखे पूरे जंगल मे फैलने लगी और मेरी घटती बढ़ड़ी साँसे इशारा कर रही थी मेरे लंड से लावा बाहर आने का....

मैने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और भाभी की आवाज़ भी लगातार बढ़ती ही जा रही थी....और फिर वो हुआ जो हर जोड़ा चाहता है....मेरा लंड लगातार नेहा की चूत भरता जा रहा था और नेहा भी दूसरी बार झड गयी अपना शरीर आकड़ाते हुए....

हम दोनो ज़मीन पर नंगे पड़े एक दूसरे की बाहो मे अपनी सांसो पर काबू पाने मे लगे हुए थे....

उधर वॉटरफॉल पर....

वहाँ का नज़ारा तो जैसे जन्नत का नज़ारा हो गया था....

वहाँ सभी बस ब्रा और पैंटी मे ही मस्तिया मार रहे थे बस एक नीरा ही उनके साथ नही थी वो बस एक जगह बैठी बैठी मेरे ख्यालो मे ही खोई हुई थी....तभी अचानक किसी ने एक पत्थर से नीरा के सिर पर वार कर दिया.....नीरा बस हल्की से घुटि घुटि चीख के साथ बेहोश हो गयी.....बेहोश होने से पहले बस वो दो नक़ाब पोशो को अपने परिवार की तरफ बढ़ते हुए देख पाई....

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एक साल और 4 दिन बाद...

हमने उदयपुर छोड़ दिया था...और दूर किसी जगह एक छोटा सा आइलॅंड खरीद लिया था..

सवेरे सवेरे....

में अपनी आराम कुर्सी पर बैठा बैठा अपने लॅपटॉप मे कुछ देख रहा था...तभी नीरा मेरे पास आजाती है....

वो धीरे से मेरे कंधे पर अपना एक हाथ रख कर अपने साथ लाया एक खाली ग्लास मेरे सामने टॅबेल पर रख देती है....

नीरा--जान दूध पीने का समय हो गया है....

में उसे अपनी बाहों मे भर के उसके होंठ चूसने लगा और फिर उस से कहा....

में--खाली ग्लास को भरो गी तो दूध पियुंगा ना....

उसके बाद नीरा अपना टॉप निकाल कर केवल ब्रा मे आ जाती है और अपना लेफ्ट साइड का बोबा बाहर निकाल कर उस ग्लास मे अपना बोबा दबा के दूध भरने लग जाती है.....

ग्लास मे दूध अभी अभी ग्लास के तल तक ही था....

में--बस आज इतना ही दूध मिलेगा क्या....

नीरा--अभी और दूध आ रहा है....आपको भला भूका कैसे रहने देंगे हम....

तभी नेहा भी दीक्षा के साथ वहाँ पहुँच जाती है....

नेहा--क्या हुआ....मुँह क्यो लटका रखा है....

दीक्षा--बच्चे को दूध नही मिला है आज....इसीलिए मुँह लटका कर बैठे है....

नेहा--ये तो बड़ी बुरी बात है.....नीरा ला वो ग्लास मुझे दे....

उसके बाद नेहा भी अपना एक बोबा निकाल कर ग्लास मे दूध भरने लग जाती है....लेकिन ग्लास अभी तक आधा भी नही भरा था.....नेहा के हाथ से ग्लास लेकर अब दीक्षा भी उसमे अपना दूध भर देती है....

में--आज क्या मुझे आधे ग्लास से ही काम चलाना होगा....

नीरा--नही जान और दूध आ रहा है थोड़ा तो सबर करो....

उसके बाद वहाँ शमा कोमल और रूही भी आ जाते है....उन तीनो ने बस एक छोटा सा शॉर्ट्स ही पहन रखा था उनके दूध से भरे बूब्स चलते समय जबरदस्त तरीके से उछल रहे थे....

रूही--मेरे राजा को अभी तक भूका रख रखा है.....तुम सब किसी काम के नही हो....

उसके बाद रूही शमा और कोमल तीनो अपने बूब्स निचोड़ कर ग्लास मे दूध भरने लग जाती है....ग्लास पूरा भर चुका था....

 
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