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Guest
नया आशियाना बसा कर दोनो भाई बहन एक दूजे के प्यार में ऐसे खोए की कब इतना वक़्त गुजर गया पता ही नही चला ...
मगर जेसे ही डॉली को पता चला. उसके प्यार की निशानी उसके पेट में पलने लगी है. वो मा बनने वाली है..
डॉली का दिल अपने मम्मी पापा की याद में तड़पने लगता है..
अपनी ये खुशी मम्मी पापा और ज्योति के गले लगकर उनके साथ बाँटने को मन करने लगता है ......
डॉली... भाई मुझे मम्मी पापा के पास लेकर चलो...
राज... क्या कह रही हो दीदी हम उनके पास नही जा सकते वहाँ पर सब लोगो की नज़र में हम मर चुके है ...
डॉली... में जानती हूँ भाई. मगर अपने दिल को कैसे समझाऊं.. आज मम्मी पापा की बहुत याद आ रही है उन्हे देखने का बहुत मन कर रहा है ....
-------------
राज अपनी दीदी को लेकर हॉस्पिटल से घर वापस आ जाता है...
विजय की फैमली को भी डॉली के प्रेग्नेंट होने की खबर मिल जाती है ...
विजय की वाइफ रश्मि और प्रिया दोनो डॉली के पास बधाई देने आ जाते है ...
रश्मि... डॉली बेटा बहुत बहुत मुबारक हो.
डॉली... थॅंक यू आंटी
रश्मि .. अपना अच्छे से ख़याल रखना ..आज के बाद कोई भारी काम बिल्कुल नही करोगी ...
प्रिया भी डॉली को बधाई देती है ..
प्रिया ... कंग्रॅजुलेशन्स दीदी
डॉली... थॅंक्स प्रिया ....
------
विजय की फॅमिली राज और डॉली से इतना
घुल मिल चुके थे ..की लगता था जेसे
राज और डॉली उनके ही बच्चे हो ...
इसलिए राज और डॉली को कभी अपनो की कमी महसूस नही हुई ...
मगर आज डॉली को अपनो की बहुत याद आ रही थी ...
जबसे कानपुर आए थे आज पहली बार राज को अपनी दीदी के चेहरे पर इतनी उदासी दिख रही थी ...
रश्मि और प्रिया के जाने के बाद राज डॉली की उदासी देखकर कहता है ...
राज ... दीदी एक रास्ता है मम्मी पापा से मिलने का ....
राज की बात सुन डॉली का चेहरा खुशी से खिल जाता है ..
डॉली... क्या रास्ता है भाई जल्दी बताओ ..
राज .. दीदी तुम पापा के पास फोन करके उनको यही अपने पास बुला लो ...
राज की बात सुनकर डॉली फिर से मायूस हो जाती है ...
डॉली... यहाँ आने के लिए पापा नही मानेगे भाई ...
राज .. दीदी एक बार पापा से बोल के तो देखो क्या पता हमारा प्यार उन्हे यहाँ खीच ले ...
राज की बातो से डॉली अपने पापा से बात करने के लिए तैयार तो हो जाती है
मगर उससे यक़ीन नही था पापा यहाँ आने को मान जाएंगे ...
मगर जेसे ही डॉली को पता चला. उसके प्यार की निशानी उसके पेट में पलने लगी है. वो मा बनने वाली है..
डॉली का दिल अपने मम्मी पापा की याद में तड़पने लगता है..
अपनी ये खुशी मम्मी पापा और ज्योति के गले लगकर उनके साथ बाँटने को मन करने लगता है ......
डॉली... भाई मुझे मम्मी पापा के पास लेकर चलो...
राज... क्या कह रही हो दीदी हम उनके पास नही जा सकते वहाँ पर सब लोगो की नज़र में हम मर चुके है ...
डॉली... में जानती हूँ भाई. मगर अपने दिल को कैसे समझाऊं.. आज मम्मी पापा की बहुत याद आ रही है उन्हे देखने का बहुत मन कर रहा है ....
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राज अपनी दीदी को लेकर हॉस्पिटल से घर वापस आ जाता है...
विजय की फैमली को भी डॉली के प्रेग्नेंट होने की खबर मिल जाती है ...
विजय की वाइफ रश्मि और प्रिया दोनो डॉली के पास बधाई देने आ जाते है ...
रश्मि... डॉली बेटा बहुत बहुत मुबारक हो.
डॉली... थॅंक यू आंटी
रश्मि .. अपना अच्छे से ख़याल रखना ..आज के बाद कोई भारी काम बिल्कुल नही करोगी ...
प्रिया भी डॉली को बधाई देती है ..
प्रिया ... कंग्रॅजुलेशन्स दीदी
डॉली... थॅंक्स प्रिया ....
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विजय की फॅमिली राज और डॉली से इतना
घुल मिल चुके थे ..की लगता था जेसे
राज और डॉली उनके ही बच्चे हो ...
इसलिए राज और डॉली को कभी अपनो की कमी महसूस नही हुई ...
मगर आज डॉली को अपनो की बहुत याद आ रही थी ...
जबसे कानपुर आए थे आज पहली बार राज को अपनी दीदी के चेहरे पर इतनी उदासी दिख रही थी ...
रश्मि और प्रिया के जाने के बाद राज डॉली की उदासी देखकर कहता है ...
राज ... दीदी एक रास्ता है मम्मी पापा से मिलने का ....
राज की बात सुन डॉली का चेहरा खुशी से खिल जाता है ..
डॉली... क्या रास्ता है भाई जल्दी बताओ ..
राज .. दीदी तुम पापा के पास फोन करके उनको यही अपने पास बुला लो ...
राज की बात सुनकर डॉली फिर से मायूस हो जाती है ...
डॉली... यहाँ आने के लिए पापा नही मानेगे भाई ...
राज .. दीदी एक बार पापा से बोल के तो देखो क्या पता हमारा प्यार उन्हे यहाँ खीच ले ...
राज की बातो से डॉली अपने पापा से बात करने के लिए तैयार तो हो जाती है
मगर उससे यक़ीन नही था पापा यहाँ आने को मान जाएंगे ...