• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest परिवार मे प्यार बेशुमार

नया आशियाना बसा कर दोनो भाई बहन एक दूजे के प्यार में ऐसे खोए की कब इतना वक़्त गुजर गया पता ही नही चला ...

मगर जेसे ही डॉली को पता चला. उसके प्यार की निशानी उसके पेट में पलने लगी है. वो मा बनने वाली है..

डॉली का दिल अपने मम्मी पापा की याद में तड़पने लगता है..

अपनी ये खुशी मम्मी पापा और ज्योति के गले लगकर उनके साथ बाँटने को मन करने लगता है ......

डॉली... भाई मुझे मम्मी पापा के पास लेकर चलो...

राज... क्या कह रही हो दीदी हम उनके पास नही जा सकते वहाँ पर सब लोगो की नज़र में हम मर चुके है ...

डॉली... में जानती हूँ भाई. मगर अपने दिल को कैसे समझाऊं.. आज मम्मी पापा की बहुत याद आ रही है उन्हे देखने का बहुत मन कर रहा है ....

-------------

राज अपनी दीदी को लेकर हॉस्पिटल से घर वापस आ जाता है...

विजय की फैमली को भी डॉली के प्रेग्नेंट होने की खबर मिल जाती है ...

विजय की वाइफ रश्मि और प्रिया दोनो डॉली के पास बधाई देने आ जाते है ...

रश्मि... डॉली बेटा बहुत बहुत मुबारक हो.

डॉली... थॅंक यू आंटी

रश्मि .. अपना अच्छे से ख़याल रखना ..आज के बाद कोई भारी काम बिल्कुल नही करोगी ...

प्रिया भी डॉली को बधाई देती है ..

प्रिया ... कंग्रॅजुलेशन्स दीदी

डॉली... थॅंक्स प्रिया ....

------

विजय की फॅमिली राज और डॉली से इतना

घुल मिल चुके थे ..की लगता था जेसे

राज और डॉली उनके ही बच्चे हो ...

इसलिए राज और डॉली को कभी अपनो की कमी महसूस नही हुई ...

मगर आज डॉली को अपनो की बहुत याद आ रही थी ...

जबसे कानपुर आए थे आज पहली बार राज को अपनी दीदी के चेहरे पर इतनी उदासी दिख रही थी ...

रश्मि और प्रिया के जाने के बाद राज डॉली की उदासी देखकर कहता है ...

राज ... दीदी एक रास्ता है मम्मी पापा से मिलने का ....

राज की बात सुन डॉली का चेहरा खुशी से खिल जाता है ..

डॉली... क्या रास्ता है भाई जल्दी बताओ ..

राज .. दीदी तुम पापा के पास फोन करके उनको यही अपने पास बुला लो ...

राज की बात सुनकर डॉली फिर से मायूस हो जाती है ...

डॉली... यहाँ आने के लिए पापा नही मानेगे भाई ...

राज .. दीदी एक बार पापा से बोल के तो देखो क्या पता हमारा प्यार उन्हे यहाँ खीच ले ...

राज की बातो से डॉली अपने पापा से बात करने के लिए तैयार तो हो जाती है

मगर उससे यक़ीन नही था पापा यहाँ आने को मान जाएंगे ...
 
रात के 10 बज चुके थे ...

डॉली अपना मोबाइल लेकर पापा का नंबर मिलाती है..राज भी बिल्कुल अपनी दीदी से चिपक कर बैठ जाता है...

डॉली आज पूरे 6 महीने बाद अपने पापा से बात कर रही थी ...

डॉली.. हेलो

पंकज ... हेलो कौन

डॉली.. पाआ...पााा..

पंकज... डॉली बेटा तुम

डॉली... हा पापा आज आपकी बहुत याद आ रही है..मम्मी केसी है..

पंकज..बेटा तुम्हारी मम्मी और ज्योति तुम दोनो को बहुत याद करते है..तुम्हारे जाने के बाद दुनिया वालो से तो बोल दिया.. तुम मर चुके हो

मगर सुषमा और ज्योति से ये बात बोलने की हिम्मत नही कर पाया ..और उनको सारी बाते बता दी..

ज्योति तुम्हे बहुत मिस करती है..

वैसे बेटा तुम राज के साथ खुश तो हो ना

डॉली... जी पापा में बहुत खुश हूँ राज मेरा बहुत ख़याल रखता है..और पापा आपके लिए

खुश खबरी है .. आप नाना बनने वाले हो ...

पंकज जेसे ही डॉली के मूह से ये खबर सुनता है खुशी के मारे सुषमा को आवाज़ दे देता है ...

पंकज... अजी सुनती हो में नाना बनने वाला हूँ ...

सुषमा पंकज की आवाज़ सुनकर दौड़ी दौड़ी बाहर आती है ...

सुषमा... क्या डॉली का फोन है ...मेरी बात कराओ उससे

सुषमा पंकज के हाथ से फोन ले लेती है ...

सुषमा ... डॉली बेटा तुम कहाँ चले गये क्या तुम्हे अपने मम्मी की ज़रा भी

याद नही आई..

पता है ज्योति ने तुम्हारे बिना रो रो कर क्या हाल बना लिया है तुमको याद करके बहुत रोती है ...

मम्मी की बात सुनकर डॉली भी रोने लगती है ..
 
सुषमा ... डॉली बेटा तुम कहाँ चले गये क्या तुम्हे अपने मम्मी की ज़रा भी

याद नही आई..

पता है ज्योति ने तुम्हारे बिना रो रो कर क्या हाल बना लिया है तुमको याद करके बहुत रोती है ...

मम्मी की बात सुनकर डॉली भी रोने लगती है ..

डॉली... सॉरी मम्मी मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई मुझे माफ़ कर दो ..

सुषमा.. बेटा हमे तुमसे कोई शिकायत नही है..जहा रहो खुश रहो..बस हमे भूलना नही ...

डॉली... मम्मी आपको देखना का बहुत मन कर रहा है.. पापा के साथ हमारे पास आ जाओ ...

सुषमा... तू बोल अपने पापा को

सुषमा पंकज को फोन पकड़ाती है ...

डॉली.. पापा मम्मी और ज्योति को लेकर आ जाओ

पंकज... ठीक है बेटा जेसे ही कंपनी से छुट्टी मिल जाएगी हम ज़रूर तुम्हारे पास आ जाएंगे ...

डॉली... ऊऊ थॅंक यू पापा मिस यू

पंकज... मिस यू बेटा .....

-----

ज्योति अपने कमरे में सो रही थी उसे राज और डॉली के बारे में कुछ पता नही था ...

सुबह पंकज और सुषमा ज्योति को राज और डॉली

के बारे में बताते है..

जेसे ही ज्योति को पता चलता डॉली मा बनने वाली है ...ज्योति दीदी से मिलने के लिए तड़पने लगती है

ज्योति का ऐसा दिल करता है अभी उड़ कर अपनी दीदी के पास पहुच जाय...

ज्योति ... पापा मुझे अभी दीदी के पास जाना है ..

पंकज.. बेटा दो चार दिन रुक जाओ सब साथ

चलेंगे ...

ज्योति ..नही पापा अब मुझे दीदी और भैया को देखे बिना चेन नही आयगा ...

ज्योति का अपने भाई बहन के लिए इतना

प्यार और तड़प देखकर पंकज ज्योति से कहता है ...

पंकज... ज्योति बेटा क्या तुम अकेले कानपुर चली जाओगी ...

ज्योति ... हा पापा में दीदी से मिलने अकेले भी जा सकती हूँ ..आप दीदी को फोन करके बोल दो ..भैया मुझे स्टेशन पर लेने आ जाएंगे ...

पंकज डॉली को फोन करके ज्योति के आने के बारे में बताता है..

ज्योति के आने की खबर सुनकर राज और डॉली

खुशी में फूले नही समा रहे थे ...

---------
 
शाम 5 बजे स्टेशन पर ट्रेन आने वाली थी

राज 4 बजे ही विजय अंकल की बाइक लेकर स्टेशन

पहुच जाता है ...

राज का दिल भी ज्योति को देखने और बात करने

के लिए तड़प रहा था ...एक एक मिनिट बड़ी मुश्किल से कट रही थी ..ऐसा लग रहा था ..

जेसे वक़्त थम सा गया हो...\

ये एक घंटा राज के लिए बरसो समान लग रहा था...

तभी राज को ट्रेन आने की आवाज़ आती है ..

राज का दिल एक दम ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगता है...

ट्रेन स्टेशन पर आ चुकी थी....

राज की आँखे ज्योति को तलाशती हुई हर डब्बे को देख रही थी...

ज्योति ट्रेन के लास्ट गेट पर खड़ी राज को तलाश रही थी...

जेसे ही राज की नज़र ज्योति पर पड़ती है राज दौड़ कर ज्योति के पास पहुचता है..

राज ज्योति के सामने खड़ा था...

अपने भैया को सामने देखकर ज्योति की आँखो में आँसू छलक जाते है ....

ज्योति.... भैय्ाआआ

और ज्योति अपने भाई के गले लिपट कर रोने लगती है ...

ज्योति.. भैया हमे अकेला छोड़कर क्यूँ चले आये...

राज ... सॉरी ज्योति मुझे माफ़ कर दे मेंने

तेरा दिल दुखाया है ...

ज्योति... आई लव यू भैया में तुमसे बहुत

प्यार करती हूँ ...

दोनो भाई बहन स्टेशन पर ही काफ़ी देर एक दूसरे के गले लगे रहते है ...

राज ... चलो ज्योति घर चलते है..

तुम्हारी दीदी इंतज़ार करती होंगी ..

ज्योति अपना बॅग उठाकर राज के साथ चल

पड़ती है ...

राज.. ज्योति एक बात कहूँ

ज्योति .. जी भैया बोलिए

राज .. यहाँ पर किसी को नही मालूम डॉली और में भाई बहन है..तुम यहाँ पर सिर्फ़ डॉली की बहन हो इसलिए यहाँ पर तुम मुझे सिर्फ़ जीजू कहोगी ....

ज्योति .... ऊओ वूओव भैया इसका मतलब में तुम्हारी साली बन चुकी हूँ. फिर तो भैया तुमपर मेरा आधा हक़ बनता है.. क्यूँकी साली तो आधी घरवाली होती है ....

राज ज्योति की बाते सुनकर मुस्कुरा देता है...
 
दोनो भाई बहन बाते करते करते कब घर तक आ जाते है पता ही नही चलता ....

घर में डॉली ज्योति के आने की खुशी में सुबह से किचन में लगी हुई थी. और अपने साथ प्रिया को भी लगा रखा था ....

दोनो ने मिलकर बहुत सारी डिशस तैयार कर लिए थे ...ज्योति की फॅवुरेट डिश मटर पनीर पूरी रायता खीर और गुलाब ज़मुन .....

दरवाज़े पर डॉली को ज्योति के आने की आहट होती है..

डॉली किचिन से दौड़ी दौड़ी बाहर आती है. और ज्योति को देखकर उसके गले से लिपट जाती है ....

डॉली.... ऊओह ज्योतिआअ मेरी बहन तुझे देखने को तो आँखे तरस गई थी मेरी केसी है तू ....

काफ़ी देर तक दोनो बहने आपस में गले

लगी हुई थी..जेसे कितने बरसो बाद मिली हो ..

प्रिया भी किचिन से बाहर उन दोनो बहनो का प्यार देखकर मन ही मन मुस्कुराने लगती है ....

ज्योति की नज़र जेसे ही प्रिया पर पड़ती है

अपनी दीदी से आँखो के इशारे में पूछती है ये लड़की कौन है...

डॉली.. ज्योति ये प्रिया है अपने सामने वाले मकान में रहती है...

प्रिया आगे बढ़कर ज्योति से हाथ मिलाते हुए इंट्रोडक्षन करती है ....

ज्योति के आने से डॉली के घर में खुशियाँ लौट आई थी.और इसी खुशी में आज डिन्नर पर

डॉली ने विजय की फॅमिली को भी इन्वाइट किया था...

रात को विजय रश्मि और रिया भी

डॉली के घर आ जाते है ..

सब ज्योति से मिलते है.और उसको हेलो हाई करते है ..

डॉली और प्रिया सबके लिए डिन्नर लगाती है..

सब एक साथ मिलकर डिन्नर करते है..

विजय खाने की तारीफ करते है...

विजय.. डॉली बेटा खाना बहुत स्वादिष्ट है..मटर पनीर का तो जवाब नही ...

डॉली.. थॅंक्स अंकल ये डिश ज्योति को भी बहुत पसंद है ..

विजय ... ज्योति आज तुम्हारी वजह से इतना स्वादिष्ट खाना मिला है ...

ज्योति ... अर्रे अंकल क्यूँ फिकर करते हो

अब में आ गई हूँ ना तुम्हे रोज़ ऐसा

खाना खिलवाउन्गी ...

विजय ज्योति की बात पर मुस्कुरा देता है ....

------------
 
खाना खाते हुए रात के 10 बज चुके थे.. विजय रश्मि प्रिया और रिया अपने घर जा चुके थे ....

उनके जाने के बाद डॉली ज्योति को लेकर अपने बेडरूम में पहुचती है ..

और ज्योति से मम्मी पापा का हॉल हाल पूछने लगती है...

ज्योति अपनी दीदी को बताती है ..

उनके जाने के बाद मम्मी पापा को

कितनी मुस्किलो से गुज़रना पड़ा ...

दोनो को बाते करते हुए 11 बज चुके थे.. राज भी ज्योति और दीदी के पास आकर बैठ जाता है ...

ज्योति राज को छेड़ते हुए ...

ज्योति .. आओ जीजू बैठो हमारे पास

हम तुमसे बहुत खफा है. हमारी दीदी को हम से ही चुरा लिया और बिना बताए इतनी दूर ले आये...

राज ... हा साली जी ये भूल तो हम से हो गई हम से इस भूल की क्या सज़ा देनी है में सज़ा के लिए तैयार हूँ ...

ज्योति ... जीजू सज़ा तो बनती है आप पर फिर भी में आपको सज़ा से बचने का एक चान्स देती हूँ ..

राज ज्योति की बात समझ नही पाया ..

राज .. में कुछ समझा नही ज्योति ...

ज्योति ..भैया आपको याद है हम आपस में शर्त लगा कर लूडो गेम खेला करते थे..

ज्योति की बात समझकर राज के चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है ...

राज ... अच्छा तो तुझे इस वक़्त लूडो गेम खेलना है ..

ज्योति ... हुउऊउंम्म......

राज बॅड से उठकर लूडो गेम ले आता है ..

ज्योति ..भैया गेम खेलने से पहले

मेरी शर्त तो सुन लो ...

राज ...चल बता दे क्या शर्त है तेरी..

ज्योति बड़े नॉटी अंदाज़ में अपने भाई से कहती है ...

ज्योति ... भैया अगर आपको दीदी के साथ सोना है तो मुझे लूडो गेम में

हराना पड़ेगा ...

ज्योति की शर्त सुनकर राज झेप सा जाता है..

राज ... देख लो दीदी अपनी बहन को मार खाएगी मुझसे ..

डॉली... तुम जीजा साली के बीच में मुझे

मत डालो...

अपनी दीदी की बात सुन ज्योति राज को

देखकर और भी चिडाने लगती है ...

और फिर राज और ज्योति का गेम स्टार्ट

हो जाता है ...

बेचारा राज अब गेम में हार और जीत में फस जाता है ...

दोनो भाई बहन गेम खेलते खेलते लास्ट स्टेज

पर पहुच जाते है..और आख़िर में ज्योति

ये गेम जीत जाती है ...

राज को छेड़ने का एक और मोका ज्योति को

मिल जाता है ..

ज्योति ... ऊओ भैया ये क्या हो गया...

आपको आज रात अपनी बीवी के बिना ही सोना पड़ेगा.. मुझे आपको अलग करते हुए अच्छा नही लग रहा ...

राज... कोई बात नही ज्योति आज रात तुम अपनी दीदी के साथ सो जाओ ..

रात के 12 बजने वाले थे राज दोनो को छोड़कर अपने बाथरूम से निकालने लगता है ...

ज्योति ... जीजू गुड नाइट

राज फिर से पलट कर ज्योति की तरफ देखता है ज्योति खिलखिला कर हँस रही थी ....

ज्योति ने आते ही राज और डॉली को अलग अलग

सोने पर मजबूर कर दिया था .....

------
 
रात काफ़ी हो चुकी थी और ज्योति भी थकि हुई थी.. डॉली और ज्योति एक दूसरे से चिपक कर सो जाते है .....

जबसे डॉली और राज की शादी हुई थी. ऐसा कोई दिन नही गुजरा था जिस दिन डॉली और राज एक दूजे की बाँहो में लिपट कर ना सोये हो

मगर आज ज्योति ने आकर दोनो को अलग अलग सोने पर मजबूर कर दिया था ....

सुबह के 9 बज चुके थे राज नाश्ता करके अपने काम पर चला जाता है..

डॉली डेली 2 घंटे बच्चो को ट्यूशन पढ़ाने जाती है ...

ज्योति अपनी दीदी से कहती है ...

ज्योति ... दीदी आप मेरी टेंशन ना लो में यहाँ टीवी देख लूँगी आप ट्यूशन पढ़ाने चली जाओ..

डॉली.. ज्योति क्यूँ ना 2 घंटे के लिए तू विजय अंकल के घर चली जा ..

डॉली ज्योति से बात ही कर रही थी की तभी प्रिया उनके यहाँ आ जाती है ..

डॉली.. अर्रे आओ प्रिया अच्छा हुआ जो तुम आ गई.. में ट्यूशन पढ़ाने जा रही हूँ..

तुम 2 घंटे ज्योति के पास रुक जाओ ...

प्रिया ... ठीक है दीदी ...

डॉली प्रिया को ज्योति के पास छोड़कर ट्यूशन पढ़ाने चली जाती है ...

ज्योति प्रिया को देखकर सोचती है..इस लड़की का यहाँ इतना आना जाना क्यूँ है .. कही प्रिया का भैया के साथ तो कोई चक्कर नही चल रहा ...

जेसे ही ज्योति के मन में ये ख़याल आता है. ज्योति इस बात का पता लगाने के लिए अपना माइंड चलाने लगती है ..

तभी ज्योति को एक आइडिया आता है ......

ज्योति ... प्रिया क्या तुम लूडो गेम खेलती हो ...

प्रिया.. हा कभी कभी खेल लेती हूँ ..

ज्योति .. क्या मेरे साथ खेलोगी ..

प्रिया.. हा क्यूँ नही ...

ज्योति लूडो लेकर प्रिया के साथ ड्रॉयिंग रूम में पहुचती है ... और दोनो बैठकर लूडो खेलने लगते है ...

ज्योति ... प्रिया गेम खेलने से पहले एक बात बताना चाहूँगी लूडो गेम में असली मज़ा तब आता है जब कोई शर्त रखी जाय..

प्रिया...केसी शर्त में समझी नही ...

ज्योति .. कुछ भी.. जेसे अगर में गेम जीत गई तो तुमसे कुछ भी करने को कह सकती हूँ..

प्रिया.. और अगर में जीत गई तो

ज्योति .. तो तुम भी मुझसे कुछ भी

करने को कह सकती हो ...

प्रिया... ठीक है मुझे मंजूर है ..

और लूडो गेम स्टार्ट हो जाता है..

गेम स्टार्ट होते ही ज्योति की गोटी खुलनी शुरू हो जाती है..

प्रिया गेम में ज्योति से बहुत पीछे चल रही थी..

जिस वजह से ये गेम ज्योति जीत जाती है ....

ज्योति... हुर्री में गेम जीत गई..

शर्त के मुताबिक प्रिया ज्योति से पूछती है...

प्रिया .. क्या करना होगा मुझे ...

ज्योति.. प्रिया ये बताओ क्या तुमने कभी सेक्स किया है..

ज्योति ने बड़े बिंदास स्टाइल में प्रिया से ये बात बोल दी..

मगर प्रिया को तो इस सवाल पर झटका लगना ही था ...

प्रिया.. केसा बेहूँदा सवाल पूछ रही हो ज्योति तुमने क्या मुझे कॉल गर्ल समझ रखा है ...

ज्योति.. क्यूँ इतना गुस्सा हो रही हो प्रिया. इस उमर में तो आज कल तो सभी लड़कियाँ सेक्स कर लेती है इसलिए मेंने तुमसे पूछ लिया ..

प्रिया.. में उन लड़कियों जैसी नही हूँ ज्योति.

ज्योति .. सॉरी यार अगर मेरी बात का बुरा लगा हो तो..

प्रिया की बातो से ज्योति को लगता है

ये तो पुराने ख़यालो की लड़की है ..

और ज्योति को यक़ीन हो जाता है प्रिया का भैया के साथ कोई चक्कर नही

होगा ....

----------
 
दो घंटे बाद डॉली घर आ जाती है. ज्योति अपनी दीदी के साथ घर के काम में हाथ बटाती है ...

शाम को जब राज घर आता है ..

डॉली.. राज क्यूँ ना आज खाना बाहर खाने चले..

राज .. हा क्यूँ नही दीदी चलो इस बहाने ज्योति अपना शहर भी घूम लेगी ...

राज टॅक्सी करके ज्योति और डॉली को बाहर

डिन्नर करने के लिए ले जाता है...

ज्योति का यहाँ आकर बहुत मन लग रहा था. दीदी और भैया उससे कितना प्यार करते थे..और भैया के साथ

छेड़खानी करने में ज्योति को बहुत अच्छा लगता है ...

राज अपनी बहनो को एक रेस्टोरेंट में

लेकर पहुचता है ..

राज.. ज्योति बोलो खाने में क्या ऑर्डर करूँ

ज्योति .. भैया आप अपनी पसंद से कोई भी डिशस ऑर्डर कर दो ..

राज मुस्कुराते हुए

राज..मेरी पसंद तो नॉन वेज बिरयानी है बोले तो मॅंगा लू..

ज्योति भी कहा पीछे रहने वाली थी ..

ज्योति .. अगर हमारे भैया नॉन वेज बिरयानी खा सकते है तो फिर हम क्यूँ नही.. मॅंगा लो भैया आज नॉन वेज बिरयानी भी खा कर देखते है ...

राज वेटर को आवाज़ देता है ...

राज .. तीन पलेट चिकिन बिरयानी ले आओ

वेटर... सॉरी सर हमारे यहाँ सिर्फ़

वेजिटेरियन खाना मिलता है ..

ये सुनकर ज्योति की हसी निकल जाती है..

राज भी ज्योति की तरफ देखकर मुस्कुरा देता है ....

राज वेटर को बोलता है

राज ... अच्छा फिर जो भी सबसे अच्छी डिश बनी हो वही ले आओ ..

वेटर... ओके सर अभी लाया ...

तीनो मिलकर डिन्नर करते है ....

---------

डिन्नर से लौटने में तीनो को रात के 10 बज जाते है ...

डॉली सोच रही थी क्या आज रात भी ज्योति की वजह से राज को ड्रॉयिंग रूम में सोना पड़ेगा ...

डॉली ऐसा सोच ही रही थी की ज्योति

राज से कहती है ...

ज्योति... जीजू आज तुम्हारी साली को तुम पर तरस आ रहा है. इसलिए आपको

बिना गेम खेले बाथरूम में सोने की इजाज़त है ...

राज ... क्या बात साली जी आज हम पर

इतनी मेहरबानी किसलिए ...

ज्योति.. अगर अपनी साली को ऐसे ही

बाहर डिन्नर करने ले जाओगे तो आगे भी बाथरूम में सोने को मिल सकता है ...

ज्योति की बात सुनकर डॉली भी खिलखिला कर हँस पड़ती है ....

-------

राज और डॉली दोनो बाथरूम में सो जाते है ..और ज्योति अपना बिस्तर ड्रॉयिंग रूम में लगा लेती है...

ज्योति को ड्रॉयिंग रूम लेटे हुए

आधा घंटा हो चुका था.

मगर ज्योति की आँखो में नींद

दूर दूर तक नही थी...

ज्योति लेटे लेटे सोच रही थी

दीदी और भैया कमरे में ज़रूर

सेक्स कर रहे होंगे..ये सोचकर ज्योति

मन भी मचलने लगता है..

ज्योति को भी सेक्स किए 6 महीने से ज़्यादा वक़्त हो गया था ...

ज्योति का चंचल मन उसे

शरारत करने को उकसा रहा था

और ज्योति से भी रहा नही जा रहा था..
 
ज्योति अपने बिस्तर से उठती है और आहिस्ता आहिस्ता चलते हुए अपने भैया के रूम तक पहुच जाती है ...

जेसा ज्योति सोच रही थी बिल्कुल वेसी आवाज़े ज्योति को सुनाई देने लगी थी ..

ज्योति दरवाज़े की झिरी से अंदर झाँकने लगती है... ज़ीरो वॉट की रोशनी में ज्योति को अपनी दीदी का चेहरा दिखाई दे जाता है ...

और भैया बॅड पर सिर्फ़ लोवर पहने हुए लेटे थे ...

अपने भैया का नंगा बदन देखकर ज्योति के जिस्म में भी प्यार की चिंगारी सुलगने लगती है ..

ज्योति अपनी आँखे लगाए दीदी को देखने लगती है ...

दीदी भैया की तरफ नीचे झुकने लगती है..

और अपने हाथ ठीक भैया के लोवर पर रखते हुए आहिस्ता से लोवर नीचे खिसका देती है....

भैया का लंड साँप की तरह फूँकार मारता हुआ ज्योति की आँखो के सामने आ जाता है ...

जिसे दीदी ने अपने हाथो में पकड़ ले लिया था ..

ज्योति कितने दीनो बाद अपने भैया का लंड देख रही थी..

ज्योति की चूत भी अपने भैया का लंड देखकर गीली होने लगी थी ...

दीदी नीचे होते हुए अपना चेहरा बिल्कुल लंड के करीब ले आती है..

और अपने दोनो गुलाबी होंटो को खोलते हुए भैया के खड़े लंड को पूरा अपने मूह में ले लेती है ..

अपनी दीदी का ये रूप देखकर ज्योति की आँखे फटी रह जाती है .......

दीदी ने जेसे ही भैया का पूरा लंड अपने मूह में लिया भैया की आ निकल जाती है ...

राज .... आआहह दीदी ई ई ई ई ई ई ई ऊऊओफफफफफफ्फ़ क्याअ कर रही हो...

ज्योति को आज भैया का लंड पहले के मुक़ाबले और भी बड़ा लग रहा था...

दीदी पूरी मस्ती में भैया के लंड को अपने मूह में लेकर लॉलीपोप की तरह चूस्ते हुए अंदर बाहर कर रही थी .. ..

भैया... आआहह दीदी आआअहह सस्स्सीईई ऊपोह उूउउंम्म सस्स्स्सीईईईई

भैया को देखकर ज्योति की

चूत भी गीली होकर अपना रस टपकाने लगी थी..

और ज्योति खड़े खड़े अपनी सलवार उतार देती है और अपनी चूत में उंगली चलाने लगती है ...

दीदी भैया को स्वर्ग की सेर करा रही थी....

तभी भैया दीदी से बोलते है..

भैया... दीदी कही ज्योति ने हमे इस हॉल में देख लिया तो ..

दीदी अपना मूह लंड से निकालते हुए भैया से कहती है ..

क्या करूँ भाई आदत ही ऐसी ही पड़ गई एक दिन भी बिना चुदे रहा नही जाता ...

भैया ... हा दीदी मेरा हाल भी तुम्हारे जेसा है ...

और दीदी फिर से भैया का लंड अपने मूह में लेकर चूसने लगती है...

भैया... आअहह सस्सीईए ऊओह दीदी आआअहह

कुछ ही देर में दीदी ने भैया को चरम पर पहुचा दिया था..

भैया ... आआहह ससीईए उफ़फ्फ़ द्ददडिईयययड्ड्डिईईई ऊओह मेनीई तो सस्सीईई आहह आअझहह आाऐययइ आस्स्स में तो गाआआआआआआया

और ये कहते ही अगले पल भैया के लंड से वीर्य की पिचकारी दीदी के हलक में उतरती चली जाती है..

दीदी भी भैया का वीर्य अमृत समझकर गटकती चली जाती है..

बाहर ज्योति भी ये सीन देखकर अपना पानी छोड़ चुकी थी ...

--------
 
दीदी भी भैया का वीर्य अमृत समझकर गटकती चली जाती है..

बाहर ज्योति भी ये सीन देखकर अपना पानी छोड़ चुकी थी ...

--------

ये सब देखकर ज्योति के जिस्म में फिर से अपने भाई से चुदने की चिंगारी भड़ककर शोला बन चुकी थी .......

.........................

सुबह के 7 बजे रहे थे..

डॉली ड्रॉयिंग रूम में आकर ज्योति को उठाती है..

डॉली.. ज्योति उठ जा सुबह के 7 बज रहे है ..

ज्योति आँखे मलते हुए अपने बिस्तर से उठती है..

डॉली किचिन में नाश्ता बनाने चली जाती है..

ज्योति को बिस्तर से उठते ही पेशाब का प्रेसर आने लगता है..

और ज्योति ड्रॉयिंग रूम से निकल कर जेसे ही

पेशाब करने बाथरूम जाती है..

उसे बाथरूम के अंदर भैया के नहाने की आवाज़ आती है..

ये देखकर ज्योति का मन शरारत करने

को मचलने लगता है ...

और ज्योति बाथरूम के दरवाज़े को नोक करने लगती है ..

ठक ठक ठक

राज सोचता है बाहर दीदी है

राज ... क्या हुआ दीदी में नहा रहा हूँ...

मगर ज्योति बिना कुछ बोले फिर से

दरवाज़े को ठक ठक करती है ...

राज अपने नंगे जिस्म को टवल से लपेट कर बाथरूम का गेट खोलता है ...

सामने ज्योति खड़ी थी ...

राज ... ज्योति तू ,,,,,,क्या हुआ

ज्योति बिना कुछ कहे अपने

भैया को हटाती हुई बाथरूम में

घुस जाती है ...

ज्योति ... भैया मुझे बहुत जोरो की सुसू

आ रही है ...

राज ज्योति को देखता रह जाता है

और ज्योति अपने भैया के सामने ही

अपनी सलवार उतारकर टाय्लेट शीट पर बैठ

कर पेशाब करने लगती है ..

राज की नज़रे ना चाहते हुए भी

ज्योति को पेशाब करते हुए देखने

लगती है..

ज्योति की चूत से पेशाब की धार निकलते हुए देखकर राज का लंड टवल के अंदर खड़ा हो जाता है ...

पेशाब करके ज्योति टाय्लेट शीट से उठती है

और अपनी सलवार ऊपर करने लगती है

तभी ज्योति की नज़र अपने भैया से टकरा

जाती है.. जो एक टक उसकी चूत की तरफ ही देखे जा रहे थे ...

ज्योति मुस्कुराते हुए अपने भैया से पूछती है ..

..

ज्योति ... ऐसे क्या देख रहे हो भैया..

ज्योति की आवाज़ सुनकर राज को झटका लगता है.. और हकलाते हुए ज्योति से कहता है..

राज .... कककक कुउुुउउच भी तो नही देख रहा ज्योति...

ज्योति अपनी सलवार ऊपर करते हुए

अपने भैया के करीब आती है..

और एक दम भैया का टवल पकड़कर खीच लेती है .. जिससे राज पूरी तरह नंगा हो जाता है..

राज का खड़ा लंड ज्योति की आँखो के सामने किसी स्प्रिंग की तरह

जंपिंग करता हुआ झूलने लगता है ...

ज्योति .. भैया अगर आप कुछ नही देख रहे थे तो फिर ये ऐसे खड़ा होकर क्यूँ झूल रहा है ...

...

राज की बोलती बंद हो जाती है और ज्योति अपने

भैया का खड़ा लंड अपने हाथो में पकड़ कर आगे पीछे करने लगती है ...

राज ... आआअहह पुउुजाआ क्या कर

रही है डीड्डिईई आआ जाइयगीइइई...

ज्योति ने जेसे कुछ सुना ही ना हो और नीचे बैठ कर अपने

भैया का लंड मूह में ले लेती है ...

ज्योति ने जेसे ही अपने भैया का लंड मूह में लिया राज की सिसकी निकल जाती है..

आआहह पुउुुउुज्ज्ज्ज्ज्जाआा

इतना मज़ा आया राज को की अपने आप आँखे बंद हो गई. और ऐसा लगने लगा जेसे बिना फंख़् के ही हवा में उड़ने लगा हो....

आआआहह ऊऊऊऊऊफफफफफ्फ़

अहह सस्स्सीईईईई

ज्योति बड़े कामुक स्टाइल में अपने भैया का लंड मूह में लेकर आगे पीछे करते हुए ब्लोवजोब कर रही थी ...

राज को बहुत मज़ा आ रहा था मगर

डर भी लग रहा था..कही दीदी ने उन दोनो इस हॉल में देख लिया तो गजब हो

जायेगा ...

राज .. आआहह ज्योति ऐसाआ मत कारूव प्लीज़ दीदी नी देख लिया तो गजब हो जायेगा आअहह ईईई उूुउउफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़

ज्योति अपने मूह से भैया का

लंड बाहर निकालते हुए

ज्योति .. भैया मुझे यहाँ आये दो दिन हो चुके है. और अभी तक मुझे मेरा आधा हक़ नही मिला ...

राज.. ऊहह ज्योति मोका मिल जाने दे

तुझे तेरा हक़ ज़रूर दूँगा ...

ज्योति ..भैया मुझसे अब सबर नही होता मुझे आज ही आपसे अपना हक़ चाहिए...

ज्योति की ज़िद के आगे राज झुक जाता है..

राज ... ऊओह गॉड अच्छा बाबा

अभी बाहर चली जा दीदी जब ट्यूशन पढ़ने चली जाएगी तब अपना आधा क्या पूरा हक़ ले लेना ....

भैया के मूह से ये सुनना था की ज्योति का चेहरा खिल जाता है....

ज्योति .... ऊओह थॅंक यू भैया

और ज्योति अपने भाई के होंटो को किस

करते हुए बाथरूम से बाहर चली जाती है ...

राज फिर से बाथरूम का दरवाज़ा लॉक

करके नहाने लगता है ...
 
Back
Top